Category: Economy

  • Q1 नतीजों से पहले इन 9 शेयरों पर बढ़ा भरोसा, Ratnamani Metals और L&T समेत कई दिग्गज कंपनियों की रेटिंग में सुधार से निवेशकों की बढ़ीं उम्मीदें

    Q1 नतीजों से पहले इन 9 शेयरों पर बढ़ा भरोसा, Ratnamani Metals और L&T समेत कई दिग्गज कंपनियों की रेटिंग में सुधार से निवेशकों की बढ़ीं उम्मीदें

    नई दिल्ली । पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों का दौर शुरू होने के साथ ही शेयर बाजार की नजर अब कंपनियों के प्रदर्शन पर केंद्रित हो गई है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों के बावजूद घरेलू निवेशकों का ध्यान उन कंपनियों पर है जिनसे बेहतर आय और मजबूत भविष्य की उम्मीद की जा रही है। ऐसे माहौल में कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों को लेकर विश्लेषकों का भरोसा पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुआ है, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ती दिखाई दे रही है।

    हालिया मूल्यांकन के अनुसार नौ बड़ी और मिडकैप कंपनियों की औसत रेटिंग पिछले एक महीने में बेहतर हुई है। इनमें Ratnamani Metals, Larsen & Toubro, Atul Ltd, Jio Financial Services, Maruti Suzuki, Bharti Airtel और अन्य प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। रेटिंग में सुधार इस बात का संकेत माना जाता है कि बाजार विशेषज्ञ इन कंपनियों की कारोबारी स्थिति, आय क्षमता और आने वाले समय में विकास की संभावनाओं को पहले से अधिक मजबूत मान रहे हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि पहली तिमाही के नतीजे इस बार बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जिन कंपनियों की आय अनुमान से बेहतर रहेगी या जो आने वाली तिमाहियों के लिए सकारात्मक मार्गदर्शन देंगी, उनके शेयरों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि निवेशक केवल बाजार की दैनिक चाल पर ध्यान देने के बजाय मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों की पहचान करने पर अधिक जोर दे रहे हैं।

    इंफ्रास्ट्रक्चर, मेटल, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में सकारात्मक रुझान दिखाई देना इस बात का संकेत है कि विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। बड़े प्रोजेक्ट, बढ़ती मांग, पूंजीगत निवेश और बेहतर परिचालन क्षमता जैसी बातें इन कंपनियों के पक्ष में काम कर रही हैं। इसी वजह से कई ब्रोकरेज और रिसर्च संस्थानों ने इनके प्रति अपना दृष्टिकोण पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक किया है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रेटिंग में सुधार के आधार पर निवेश का निर्णय लेना उचित नहीं होगा। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, आय में वृद्धि, नकदी प्रवाह, कर्ज का स्तर, प्रबंधन की रणनीति और उद्योग की संभावनाओं का भी सावधानी से आकलन करना चाहिए। हालांकि किसी शेयर की रेटिंग में लगातार सुधार यह संकेत जरूर देता है कि उसके मूलभूत कारकों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

    आने वाले दिनों में विभिन्न क्षेत्रों की बड़ी कंपनियां अपने तिमाही नतीजे घोषित करेंगी। इन परिणामों से यह स्पष्ट होगा कि कंपनियां बदलते वैश्विक और घरेलू आर्थिक माहौल में किस तरह प्रदर्शन कर रही हैं। यदि उम्मीद के अनुरूप या उससे बेहतर नतीजे सामने आते हैं तो बाजार में निवेशकों का विश्वास और मजबूत हो सकता है। ऐसे समय में मजबूत फंडामेंटल, स्थिर कारोबार और बेहतर विकास क्षमता वाली कंपनियां निवेशकों की पहली पसंद बन सकती हैं, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर दबाव भी बढ़ सकता है। कुल मिलाकर पहली तिमाही के नतीजे आने वाले सप्ताहों में शेयर बाजार की दिशा और निवेशकों की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले हैं।

  • रिलायंस की हिस्सेदारी वाली HFCL को विदेश से ₹496 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, डेटा सेंटर कनेक्टिविटी कारोबार में मिली नई रफ्तार, निवेशकों का भरोसा और मजबूत

    रिलायंस की हिस्सेदारी वाली HFCL को विदेश से ₹496 करोड़ का बड़ा ऑर्डर, डेटा सेंटर कनेक्टिविटी कारोबार में मिली नई रफ्तार, निवेशकों का भरोसा और मजबूत

    नई दिल्ली । रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी वाली टेक्नोलॉजी कंपनी एचएफसीएल को अंतरराष्ट्रीय बाजार से करीब 496 करोड़ रुपये का बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर मिलने के बाद कंपनी एक बार फिर निवेशकों और उद्योग जगत के केंद्र में आ गई है। इस नए अनुबंध के साथ कंपनी के डेटा सेंटर कनेक्टिविटी कारोबार को महत्वपूर्ण मजबूती मिलने की उम्मीद है। बाजार में इस घोषणा का सकारात्मक असर देखने को मिला और कारोबार के दौरान कंपनी के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। निवेशकों ने इस ऑर्डर को कंपनी की वैश्विक क्षमता और भविष्य की विकास संभावनाओं का मजबूत संकेत माना।

    कंपनी की विदेशी सहायक इकाई को मिले इस अनुबंध के तहत डेटा सेंटर के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल आधारित कनेक्टिविटी सॉल्यूशन की आपूर्ति की जाएगी। आधुनिक डेटा सेंटरों में तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद डेटा ट्रांसमिशन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा बन चुका है। इस ऑर्डर से एचएफसीएल की तकनीकी विशेषज्ञता और उच्च गुणवत्ता वाले नेटवर्क समाधान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता भी सामने आई है।

    कंपनी का कहना है कि यह अनुबंध उसके वैश्विक ग्राहकों के विश्वास को दर्शाता है। एचएफसीएल ने वर्षों के दौरान अपनी विनिर्माण क्षमता, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के आधार पर दूरसंचार और नेटवर्किंग क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है। कंपनी का लक्ष्य निर्धारित समय सीमा के भीतर इस परियोजना को पूरा करना है और इसके दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई है। समय पर डिलीवरी और गुणवत्ता बनाए रखना कंपनी की प्राथमिकता रहेगी।

    एचएफसीएल दूरसंचार, ऑप्टिकल फाइबर, नेटवर्किंग और रक्षा क्षेत्र में सक्रिय प्रमुख भारतीय कंपनियों में शामिल है। कंपनी ऑप्टिकल फाइबर केबल, टेलीकॉम उपकरण, वायरलेस संचार समाधान और रक्षा संबंधी तकनीकी उत्पादों का डिजाइन, विकास और निर्माण करती है। भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार, 5जी नेटवर्क और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग ने कंपनी के कारोबार को नई गति प्रदान की है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज अपनी निवेश इकाइयों के माध्यम से एचएफसीएल में हिस्सेदारी रखती है। दोनों कंपनियों के बीच लंबे समय से कारोबारी संबंध रहे हैं और दूरसंचार नेटवर्क तथा ऑप्टिकल फाइबर परियोजनाओं में एचएफसीएल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। डिजिटल सेवाओं और हाई-स्पीड नेटवर्क की बढ़ती जरूरतों के बीच इस तरह के अनुबंध भविष्य में भी कंपनी के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

    शेयर बाजार में भी इस घोषणा का सकारात्मक असर देखने को मिला। कारोबार के दौरान कंपनी के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई और निवेशकों का रुझान मजबूत बना रहा। हाल के महीनों में एचएफसीएल के शेयरों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। पिछले एक महीने से लेकर एक वर्ष और तीन वर्षों की अवधि तक कंपनी ने निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया है। बेहतर ऑर्डर बुक, मजबूत तकनीकी क्षमता और वैश्विक विस्तार की रणनीति को बाजार सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-स्पीड डिजिटल नेटवर्क की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे माहौल में ऑप्टिकल फाइबर आधारित कनेक्टिविटी समाधान उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के लिए नए अवसर तैयार हो रहे हैं। एचएफसीएल को मिला यह बड़ा अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर न केवल कंपनी के कारोबार को नई मजबूती देगा, बल्कि भारत की तकनीकी विनिर्माण क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उसकी बढ़ती हिस्सेदारी का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • आईटी शेयरों की दमदार खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा उछला, निफ्टी ने फिर पार किया 24,200 का अहम स्तर

    आईटी शेयरों की दमदार खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा उछला, निफ्टी ने फिर पार किया 24,200 का अहम स्तर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती का माहौल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की मजबूत खरीदारी के चलते सेंसेक्स 700 अंक से अधिक उछल गया, जबकि निफ्टी ने 24,200 के स्तर को फिर से पार कर लिया। बाजार में यह तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आईटी, मेटल, ऑयल एंड गैस, ऑटो और वित्तीय क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। इससे निवेशकों का भरोसा एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दिया।

    बाजार की इस तेजी में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। प्रमुख आईटी कंपनियों के बेहतर कारोबारी संकेतों और सकारात्मक तिमाही प्रदर्शन की उम्मीदों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया। इसका असर यह रहा कि आईटी क्षेत्र के बड़े शेयरों में शुरुआती कारोबार से ही मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इस तेजी का प्रभाव निफ्टी आईटी इंडेक्स पर भी स्पष्ट दिखाई दिया, जिसमें उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। इससे पूरे बाजार का निवेशक मनोबल मजबूत हुआ और अन्य क्षेत्रों में भी खरीदारी का रुख बना रहा।

    आईटी क्षेत्र की मजबूती के साथ-साथ मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों ने भी बाजार को सहारा दिया। धातु कंपनियों में बढ़ती खरीदारी और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में निवेशकों की सक्रियता ने बाजार की व्यापक मजबूती को और बल दिया। बड़े औद्योगिक समूहों के शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिससे प्रमुख सूचकांकों को अतिरिक्त समर्थन मिला। ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक कारोबार देखने को मिला और कई दिग्गज कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते रहे।

    वित्तीय क्षेत्र की कुछ प्रमुख गैर-बैंकिंग कंपनियों में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कॉरपोरेट नतीजे उम्मीद के अनुरूप आते हैं और वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते रहते हैं तो घरेलू शेयर बाजार में यह मजबूती आगे भी जारी रह सकती है। लगातार दूसरे दिन आई तेजी ने यह संकेत दिया है कि हाल की गिरावट के बाद निवेशक फिर से गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश करने के लिए सक्रिय हो रहे हैं।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर फिलहाल महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में उभरकर सामने आया है। जब तक सूचकांक इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार में सकारात्मक रुझान जारी रहने की संभावना बनी रह सकती है। यदि खरीदारी का यह सिलसिला आगे भी कायम रहता है तो निफ्टी आने वाले कारोबारी सत्रों में नए ऊंचे स्तरों की ओर बढ़ सकता है। हालांकि बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, तिमाही नतीजों और अन्य प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर भी लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।

    कारोबार के शुरुआती घंटों में दिखी व्यापक खरीदारी ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित तेजी और बड़े शेयरों में निवेशकों की सक्रिय भागीदारी से बाजार का समग्र वातावरण सकारात्मक बना रहा। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही परिणाम और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत यह तय करेंगे कि घरेलू शेयर बाजार अपनी इस तेजी को कितनी मजबूती के साथ आगे बढ़ा पाता है।

  • 120 साल पुरानी Eveready के सामने नई चुनौती, बैटरी कारोबार पर बढ़ा लागत और नियमों का दबाव; ₹200 करोड़ के Alkaline प्लांट से भविष्य की रणनीति मजबूत

    120 साल पुरानी Eveready के सामने नई चुनौती, बैटरी कारोबार पर बढ़ा लागत और नियमों का दबाव; ₹200 करोड़ के Alkaline प्लांट से भविष्य की रणनीति मजबूत


    नई दिल्ली । देश की सबसे पुरानी और प्रमुख ड्राई-सेल बैटरी कंपनियों में शामिल Eveready अपने पारंपरिक कारोबार के लिए एक नए दौर की चुनौतियों का सामना कर रही है। करीब 120 वर्षों के इतिहास वाली यह कंपनी आज भी भारतीय ड्राई-सेल बैटरी बाजार में लगभग 52 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है और हर वर्ष 1.3 अरब से अधिक बैटरियों की बिक्री करती है। इसके बावजूद बदलते बाजार, बढ़ती लागत और नए नियामकीय प्रावधानों ने कंपनी के पारंपरिक बैटरी कारोबार पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे माहौल में कंपनी ने भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए अल्कलाइन बैटरी उत्पादन पर विशेष जोर देना शुरू किया है।

    हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर जिंक की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ड्राई-सेल बैटरियों के निर्माण में जिंक एक प्रमुख कच्चा माल है, इसलिए इसकी लागत बढ़ने का सीधा असर उत्पादन खर्च पर पड़ रहा है। इसके साथ ही रुपये में कमजोरी के कारण आयातित कच्चे माल की कीमत भी बढ़ गई है। इससे कंपनियों के लिए लागत को नियंत्रित करना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे समय में मुनाफे को बनाए रखना बैटरी उद्योग के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है।

    उद्योग के सामने दूसरी महत्वपूर्ण चुनौती सरकार के नए बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट नियम हैं। इन नियमों के तहत कंपनियों को केवल बैटरी बेचने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि इस्तेमाल हो चुकी बैटरियों को वापस एकत्रित कर उनके सुरक्षित रीसाइक्लिंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। इससे कंपनियों पर अतिरिक्त परिचालन और अनुपालन लागत बढ़ने की संभावना है। पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन उद्योग के लिए यह एक नई जिम्मेदारी भी लेकर आया है।

    इसी बदलते परिदृश्य को देखते हुए Eveready ने लगभग 200 करोड़ रुपये के निवेश से देश का पहला आधुनिक अल्कलाइन बैटरी उत्पादन संयंत्र स्थापित किया है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में अल्कलाइन बैटरियों की मांग तेजी से बढ़ेगी, क्योंकि ये सामान्य जिंक-कार्बन बैटरियों की तुलना में अधिक समय तक चलती हैं और बेहतर प्रदर्शन देती हैं। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, स्मार्ट गैजेट्स और उच्च ऊर्जा खपत वाले उत्पादों में अल्कलाइन बैटरियों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद भी धीरे-धीरे बदल रही है। अब ग्राहक अधिक टिकाऊ और बेहतर प्रदर्शन देने वाले उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में केवल पारंपरिक ड्राई-सेल बैटरियों पर निर्भर रहना किसी भी कंपनी के लिए दीर्घकालिक रणनीति नहीं माना जा सकता। इसी कारण कंपनियां नए उत्पादों, उन्नत तकनीक और बेहतर गुणवत्ता वाली बैटरियों के विकास पर निवेश बढ़ा रही हैं।

    Eveready का उद्देश्य केवल मौजूदा बाजार हिस्सेदारी बनाए रखना नहीं, बल्कि तेजी से बदलते बैटरी उद्योग में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और मजबूत करना भी है। कंपनी का मानना है कि नवाचार, आधुनिक उत्पादन क्षमता और पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप कारोबार का विस्तार भविष्य में उसकी विकास रणनीति का आधार बनेगा। यदि अल्कलाइन बैटरियों की मांग अनुमान के अनुरूप बढ़ती है, तो यह निवेश कंपनी को नए अवसरों का लाभ उठाने के साथ-साथ बदलते बाजार में दीर्घकालिक मजबूती भी प्रदान कर सकता है।

  • वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा, सेंसेक्स 77 हजार के पार पहुंचा, शुरुआती कारोबार में दिखी चौतरफा तेजी

    वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा, सेंसेक्स 77 हजार के पार पहुंचा, शुरुआती कारोबार में दिखी चौतरफा तेजी

    नई दिल्ली । मजबूत वैश्विक संकेतों और घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी के चलते भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को सकारात्मक शुरुआत की। कारोबार के शुरुआती चरण में ही सेंसेक्स 77 हजार अंक के स्तर को पार कर गया, जबकि निफ्टी भी उल्लेखनीय बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में आई इस मजबूती ने निवेशकों के बीच भरोसे को और मजबूत किया तथा अधिकांश प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी का माहौल देखने को मिला।

    शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 683 अंकों की बढ़त के साथ 77,425 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 205 अंक मजबूत होकर 24,168 के करीब कारोबार करता दिखा। प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों की रुचि केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक माहौल बना रहा।

    बाजार की इस तेजी में सूचना प्रौद्योगिकी और मेटल सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आईटी कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे संबंधित सूचकांक प्रमुख बढ़त वाले सेक्टरों में शामिल रहे। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, प्राइवेट बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कमोडिटी क्षेत्र से जुड़े शेयरों ने भी बाजार को मजबूती प्रदान की। दूसरी ओर फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में सीमित दबाव देखने को मिला, हालांकि इसका व्यापक बाजार की दिशा पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।

    प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक रुझान दर्ज किया गया। बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, सीमेंट और मेटल क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों का विश्वास विभिन्न सेक्टरों में व्यापक रूप से बना हुआ है और बाजार की तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के कारोबारी सत्रों में बाजार में आई गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी को प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आने और घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने भी बाजार की धारणा को मजबूत किया है। यही कारण है कि बाजार में निवेशकों का विश्वास लगातार बेहतर होता दिखाई दे रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों का सकारात्मक रुख भी भारतीय बाजार के लिए सहायक साबित हुआ। एशिया के अधिकांश प्रमुख शेयर बाजार बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए, जबकि अमेरिकी बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे। वैश्विक स्तर पर निवेशकों के बेहतर रुझान का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला, जिससे शुरुआती कारोबार में खरीदारी का दबदबा बना रहा।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों ने पिछले कारोबारी सत्र में सीमित निकासी दर्ज की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में उल्लेखनीय निवेश जारी रखा। घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने विदेशी बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया और बाजार को स्थिरता प्रदान की। यही संतुलन शुक्रवार की शुरुआत में भी सकारात्मक माहौल बनाए रखने में महत्वपूर्ण रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेश प्रवाह और कॉरपोरेट परिणामों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि यही कारक निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • निवेशकों और ग्राहकों के लिए जरूरी खबर सोने चांदी के ताजा भाव ने बढ़ाई हलचल जानें आज का पूरा बाजार हाल

    निवेशकों और ग्राहकों के लिए जरूरी खबर सोने चांदी के ताजा भाव ने बढ़ाई हलचल जानें आज का पूरा बाजार हाल


    नई दिल्ली । सोना और चांदी भारतीय परिवारों की परंपरा के साथ साथ निवेश का भी सबसे भरोसेमंद माध्यम माने जाते हैं। शादी विवाह का मौसम हो या त्योहारों की खरीदारी बाजार में इन दोनों की मांग हमेशा बनी रहती है। ऐसे में हर दिन बदलने वाले सोने और चांदी के भाव आम लोगों से लेकर निवेशकों तक सभी के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार चढ़ाव डॉलर की मजबूती कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का सीधा असर घरेलू सर्राफा बाजार पर भी दिखाई देता है। यही वजह है कि खरीदारी से पहले ताजा रेट की जानकारी लेना बेहद जरूरी माना जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बीते कुछ समय से वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और भू राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग लगातार बनी हुई है। जब भी शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ती है या वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव आता है तब निवेशक बड़ी संख्या में सोने की ओर रुख करते हैं। इससे इसकी कीमतों में तेजी देखने को मिलती है। वहीं चांदी की कीमतों पर निवेश के साथ साथ औद्योगिक मांग का भी बड़ा असर पड़ता है क्योंकि इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स सोलर एनर्जी और कई उद्योगों में किया जाता है।

    यदि आप आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं तो केवल कीमत देखकर फैसला करना सही नहीं होगा। हमेशा प्रमाणित हॉलमार्क वाले सोने की खरीदारी करें ताकि उसकी शुद्धता सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और जीएसटी की जानकारी पहले ही प्राप्त कर लें क्योंकि कई बार यही अतिरिक्त खर्च कुल कीमत को काफी बढ़ा देता है। अलग अलग शहरों और ज्वेलर्स के अनुसार मेकिंग चार्ज में अंतर हो सकता है।

    निवेश के नजरिए से भी सोना लंबे समय में बेहतर विकल्प माना जाता है। हालांकि बाजार में लगातार उतार चढ़ाव बना रहता है इसलिए एकमुश्त बड़ी खरीदारी करने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अधिक सुरक्षित मानी जाती है। डिजिटल गोल्ड सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्प भी निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। वहीं जिन लोगों को भौतिक धातु पसंद है उनके लिए सोने और चांदी के सिक्के तथा बार भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं।

    चांदी की बात करें तो इसकी मांग भी लगातार बढ़ रही है। आभूषणों के अलावा धार्मिक कार्यों औद्योगिक उपयोग और निवेश के कारण इसकी कीमतों में भी समय समय पर तेजी और गिरावट देखने को मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोलर सेक्टर और इलेक्ट्रिक उपकरणों की बढ़ती मांग चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

    बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खरीदारी या निवेश का निर्णय केवल भाव देखकर नहीं बल्कि अपनी जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर लेना चाहिए। यदि उद्देश्य लंबे समय का निवेश है तो छोटी छोटी मात्रा में नियमित खरीदारी बेहतर रणनीति साबित हो सकती है। वहीं शादी या अन्य पारिवारिक जरूरतों के लिए खरीदारी करने वाले ग्राहकों को बाजार के रुझान पर नजर रखते हुए सही समय का इंतजार करना चाहिए।

    सोने और चांदी के दाम प्रतिदिन बदलते रहते हैं इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर के सर्राफा बाजार या अधिकृत ज्वेलर्स से ताजा कीमत की पुष्टि जरूर कर लें। सही जानकारी और सोच समझकर लिया गया फैसला न केवल बेहतर निवेश साबित हो सकता है बल्कि आपकी बचत को भी सुरक्षित रखने में मदद करेगा।

  • चुनौतीपूर्ण माहौल में TCS के तिमाही नतीजे जारी, मुनाफे में हल्की गिरावट के बावजूद 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का ऐलान

    चुनौतीपूर्ण माहौल में TCS के तिमाही नतीजे जारी, मुनाफे में हल्की गिरावट के बावजूद 12 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड का ऐलान

    नई दिल्ली । देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी कर दिए हैं। कंपनी ने तिमाही आधार पर शुद्ध लाभ में हल्की गिरावट दर्ज की है, जबकि सालाना आधार पर लाभ और राजस्व दोनों में वृद्धि देखने को मिली है। साथ ही कंपनी ने अपने शेयरधारकों को 12 रुपये प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम डिविडेंड देने की घोषणा भी की है, जिससे निवेशकों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

    अप्रैल से जून 2026 की अवधि में टीसीएस का समेकित शुद्ध लाभ 13,349 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही की तुलना में लगभग तीन प्रतिशत कम है। हालांकि, पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कंपनी के लाभ में करीब पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक आईटी उद्योग पर आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक चुनौतियों का प्रभाव बना हुआ है।

    कंपनी की परिचालन आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। पहली तिमाही में टीसीएस का राजस्व बढ़कर 72,275 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत अधिक है। वहीं, तिमाही आधार पर भी कंपनी की आय में करीब दो प्रतिशत का इजाफा हुआ। इससे संकेत मिलता है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद कंपनी की सेवाओं की मांग बनी हुई है और उसका कारोबार स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है।

    निदेशक मंडल ने निवेशकों के लिए 12 रुपये प्रति इक्विटी शेयर के अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है। इसके लिए 15 जुलाई 2026 को रिकॉर्ड डेट निर्धारित की गई है, जबकि पात्र निवेशकों को 31 जुलाई 2026 को डिविडेंड का भुगतान किया जाएगा। कंपनी के इस फैसले को निवेशकों के प्रति सकारात्मक संकेत माना जा रहा है और इससे शेयरधारकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक के. कृतिवासन ने कहा कि वैश्विक बाजार में अनिश्चितताओं के बावजूद टीसीएस ने मजबूत कारोबारी प्रदर्शन बनाए रखा है। उन्होंने बताया कि पहली तिमाही में कंपनी को 9.5 अरब डॉलर के नए ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित बड़े ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट भी शामिल हैं, जो भविष्य में कंपनी की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी के एआई कारोबार का वार्षिक राजस्व रन रेट बढ़कर 2.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ते अवसरों को दर्शाता है।

    परिचालन प्रदर्शन की बात करें तो पहली तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 24 प्रतिशत और नेट मार्जिन 19.2 प्रतिशत रहा। परिचालन गतिविधियों से कंपनी ने 12,412 करोड़ रुपये का नकद प्रवाह अर्जित किया, जो उसके शुद्ध लाभ का लगभग 93 प्रतिशत है। तिमाही के अंत तक टीसीएस में कुल 5,93,798 कर्मचारी कार्यरत थे, जबकि आईटी सेवाओं के कारोबार में पिछले 12 महीनों की एट्रिशन दर 13.6 प्रतिशत दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत ऑर्डर बुक, एआई क्षेत्र में बढ़ती हिस्सेदारी और स्थिर वित्तीय प्रदर्शन आने वाली तिमाहियों में कंपनी की विकास यात्रा को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • मार्केट ओपन से पहले बड़ी तस्वीर 10 जुलाई को सेंसेक्स निफ्टी में उतार चढ़ाव के बीच कैसी रहेगी बाजार की चाल

    मार्केट ओपन से पहले बड़ी तस्वीर 10 जुलाई को सेंसेक्स निफ्टी में उतार चढ़ाव के बीच कैसी रहेगी बाजार की चाल


    नई दिल्ली ।10 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत मिलीजुली रहने की संभावना है। घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की नजर बाजार की शुरुआती चाल पर रहेगी। पिछले कारोबारी सत्रों में बाजार में देखने को मिले उतार चढ़ाव के बाद निवेशक अब नए आर्थिक संकेतों कंपनियों के तिमाही नतीजों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का इंतजार कर रहे हैं। यही कारण है कि आज का कारोबार काफी हद तक खबरों और वैश्विक बाजारों के रुख पर निर्भर रह सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी और एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो सेंसेक्स और निफ्टी में अच्छी बढ़त देखने को मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक स्तर पर दबाव बना रहता है तो मुनाफावसूली के कारण बाजार में गिरावट भी आ सकती है।

    बाजार में बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर निवेशकों के फोकस में रह सकते हैं। इन सेक्टरों की बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें बनी हुई हैं। यदि कंपनियों के वित्तीय परिणाम अनुमान से बेहतर आते हैं तो संबंधित शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर कमजोर नतीजे आने पर दबाव भी बन सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिकवाली भी आज बाजार की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कारक रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार निवेश जारी रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं बिकवाली बढ़ने पर प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिल सकता है।

    कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र की कंपनियों पर पड़ सकता है। वहीं रुपये में मजबूती या कमजोरी का प्रभाव आयात और निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दे सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। जिन निवेशकों का नजरिया लंबी अवधि का है उनके लिए मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश बेहतर रणनीति साबित हो सकती है। अल्पकालिक कारोबार करने वाले निवेशकों को बाजार की चाल और तकनीकी स्तरों पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

    आज बाजार में उतार चढ़ाव की संभावना को देखते हुए जोखिम प्रबंधन भी बेहद जरूरी रहेगा। निवेशकों को अफवाहों के बजाय भरोसेमंद जानकारी के आधार पर निवेश करना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए। बाजार में अवसर हमेशा मौजूद रहते हैं लेकिन सही समय पर सही निर्णय ही बेहतर रिटर्न दिला सकता है।

    कुल मिलाकर 10 जुलाई का कारोबारी सत्र खबरों वैश्विक संकेतों और निवेशकों की रणनीति के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ सकता है। ऐसे में पूरे दिन बाजार की गतिविधियों पर नजर बनाए रखना निवेशकों के लिए फायदेमंद रहेगा।

  • अंकारा NATO शिखर सम्मेलन में कई बड़े फैसले, रक्षा बजट बढ़ाने, यूक्रेन सहायता और ईरान पर सख्त रुख के बीच ट्रंप ने फिर उठाया ग्रीनलैंड का मुद्दा

    अंकारा NATO शिखर सम्मेलन में कई बड़े फैसले, रक्षा बजट बढ़ाने, यूक्रेन सहायता और ईरान पर सख्त रुख के बीच ट्रंप ने फिर उठाया ग्रीनलैंड का मुद्दा

    नई दिल्ली । तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित दो दिवसीय उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) शिखर सम्मेलन कई महत्वपूर्ण निर्णयों और राजनीतिक संदेशों के साथ संपन्न हुआ। बैठक के दौरान सदस्य देशों ने रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, यूक्रेन को निरंतर सहायता जारी रखने और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक रणनीति पर सहमति जताई। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान, ग्रीनलैंड और सहयोगी देशों को लेकर दिए गए बयानों ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया।

    सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ समझौते को समाप्त मानते हुए तेहरान के नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईरान को किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जा सकते। हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यापक और लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की संभावना कम दिखाई देती है। NATO के संयुक्त घोषणापत्र में भी ईरान से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने का आग्रह किया गया और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

    शिखर सम्मेलन में रक्षा खर्च बढ़ाने का मुद्दा भी प्रमुख एजेंडा रहा। सदस्य देशों ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने, आधुनिक हथियार प्रणालियों, हवाई एवं मिसाइल रक्षा, मानव रहित तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और खुफिया क्षमताओं के विकास पर निवेश बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। गठबंधन का उद्देश्य बदलते सुरक्षा वातावरण के अनुरूप अपनी सामूहिक रक्षा क्षमता को और प्रभावी बनाना है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सभी सदस्य देश अभी निर्धारित रक्षा व्यय लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में इस दिशा में प्रयास तेज करने का भरोसा जताया गया।

    यूक्रेन को लेकर भी NATO ने अपना समर्थन दोहराया। सम्मेलन में सदस्य देशों ने सैन्य उपकरण, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए आने वाले वर्षों तक सहयोग बनाए रखने का आश्वासन दिया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सम्मेलन के दौरान कई नेताओं से मुलाकात कर अतिरिक्त सहयोग की मांग रखी। अमेरिका ने भी यूक्रेन की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने के संकेत दिए, जिससे संघर्ष के बीच कीव को महत्वपूर्ण समर्थन मिलने की उम्मीद है।

    सम्मेलन के दौरान ग्रीनलैंड का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस क्षेत्र के सामरिक महत्व पर जोर देते हुए अपने पुराने रुख को दोहराया। दूसरी ओर डेनमार्क ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड उसके अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है और उसके भविष्य का निर्णय स्थानीय जनता तथा डेनमार्क के संवैधानिक ढांचे के अनुसार ही होगा। यूरोपीय पक्ष ने भी इस विषय पर डेनमार्क के रुख का समर्थन किया।

    बैठक के दौरान सहयोगी देशों के बीच रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर भी व्यापक विचार-विमर्श हुआ। कुछ मुद्दों पर मतभेद सामने आने के बावजूद सदस्य देशों ने सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। विश्लेषकों का मानना है कि इस शिखर सम्मेलन के फैसले आने वाले समय में यूरोप, मध्य पूर्व और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा रणनीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

    अंकारा शिखर सम्मेलन ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में NATO अपने रक्षा ढांचे को अधिक आधुनिक और सक्षम बनाने के साथ-साथ यूक्रेन जैसे साझेदार देशों के समर्थन तथा क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • क्‍या LPG गैस की होने वाली है किल्लत ? जाने 10 जुलाई के रेट, सप्लाई और बुकिंग स्थिति

    क्‍या LPG गैस की होने वाली है किल्लत ? जाने 10 जुलाई के रेट, सप्लाई और बुकिंग स्थिति


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फिर से बढ़ी हलचल के बीच देशभर में एलपीजी उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। क्या रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित होगी? क्या सिलेंडर के दाम बढ़ सकते हैं? और क्या बुकिंग के नियमों में कोई बदलाव होगा? फिलहाल इन सभी सवालों का जवाब राहत देने वाला है।

    होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से संघर्ष विराम को लेकर दिए गए बयानों के बाद होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में एक बार फिर गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं। इससे दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में शामिल इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

    भारत की एलपीजी सप्लाई पर कितना असर?
    भारत की करीब 60 प्रतिशत एलपीजी सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर आती है। संघर्ष के दौरान इस मार्ग पर संकट की स्थिति बनी थी, लेकिन भारत ने सप्लाई प्रबंधन और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए घरेलू उपभोक्ताओं तक रसोई गैस की आपूर्ति जारी रखी।

    फिलहाल किल्लत के आसार नहीं
    केप्लर के एनालिस्ट सुमित रितोलिया के मुताबिक, मौजूदा हालात का भारत के कच्चे तेल आयात पर फिलहाल बड़ा असर नहीं पड़ा है। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रिफाइनरियों ने अपने आयात स्रोतों में विविधता लाई है, जिससे किसी एक मार्ग पर निर्भरता कम हुई है।

    कच्चे तेल की सप्लाई बनी हुई है सामान्य
    रितोलिया के अनुसार, पिछले 100 दिनों में भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति लगभग सामान्य रही है। रूस से बड़ी मात्रा में आयात के अलावा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से वैकल्पिक मार्गों के जरिए भी सप्लाई जारी है। वहीं पश्चिमी अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से आयात ने भी आपूर्ति को संतुलित बनाए रखा है।

    रूस बना सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता
    जून महीने में भारत का कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 4.93 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गया। इसमें रूस से करीब 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन आयात हुआ, जो कुल आयात का आधे से अधिक हिस्सा रहा। इसके साथ ही रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

    शिपिंग और बीमा लागत बढ़ने की आशंका
    विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। हालांकि, यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो मालभाड़ा और बीमा लागत बढ़ सकती है। वहीं अमेरिकी प्रतिबंधों और कारोबारी जोखिमों के कारण भारतीय रिफाइनरियों के ईरान से तेल आयात बढ़ाने की संभावना फिलहाल नहीं है।

    10 जुलाई को LPG रेट में कोई बदलाव नहीं
    10 जुलाई के ताजा रेट के अनुसार घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इंडियन ऑयल की कीमतों के मुताबिक, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर 942 रुपये और 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर 2930 रुपये में मिल रहा है। कोलकाता में घरेलू सिलेंडर 968 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3081.50 रुपये का है।

    जयपुर में घरेलू सिलेंडर 945.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2957.50 रुपये में उपलब्ध है। वहीं चेन्नई में घरेलू सिलेंडर की कीमत 957.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3106 रुपये है।

    बुकिंग और सप्लाई पहले की तरह सामान्य
    फिलहाल एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का कहना है कि घरेलू एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। ऐसे में उपभोक्ताओं को किसी तरह की किल्लत या घबराहट में खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है।