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  • पैसा कहां लगाएं और कितना जोखिम लें? शेयर बाजार में निवेश का सही रास्ता जानें

    पैसा कहां लगाएं और कितना जोखिम लें? शेयर बाजार में निवेश का सही रास्ता जानें


    नई दिल्ली । शेयर बाजार में निवेश आज के समय में लोगों के लिए धन बढ़ाने का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। हालांकि बाजार में तेजी देखकर बिना तैयारी के पैसा लगाना कई बार नुकसान का कारण बन सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शेयर बाजार में कहां निवेश करें ताकि जोखिम को समझते हुए लंबे समय में बेहतर रिटर्न पाने की संभावना बढ़ाई जा सके। इसका जवाब किसी एक शेयर या एक सेक्टर में नहीं छिपा है बल्कि सही योजना लक्ष्य और जोखिम क्षमता के आधार पर निवेश करने में है।

    निवेश की शुरुआत करने से पहले सबसे पहले अपना लक्ष्य तय करना जरूरी है। यदि आपका उद्देश्य पांच दस या उससे अधिक वर्षों में बड़ा फंड तैयार करना है तो निवेश का तरीका अलग हो सकता है। वहीं अगर आपको कुछ ही समय में पैसे की जरूरत पड़ सकती है तो पूरा पैसा शेयर बाजार में लगाना जोखिम भरा हो सकता है। शेयर बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है और यहां कम समय में तेजी के साथ गिरावट भी देखने को मिल सकती है। इसलिए निवेश की अवधि जितनी लंबी होगी उतना ही बेहतर तरीके से बाजार के उतार चढ़ाव को संभालने का अवसर मिल सकता है।

    नए निवेशकों के लिए सीधे किसी एक शेयर में बड़ी रकम लगाने के बजाय विविधता वाले विकल्पों पर ध्यान देना बेहतर माना जाता है। इंडेक्स फंड के जरिए निवेशक एक साथ कई बड़ी कंपनियों में हिस्सा ले सकता है। Nifty 50 जैसे व्यापक इंडेक्स को ट्रैक करने वाले फंड बाजार की बड़ी कंपनियों में एक्सपोजर देते हैं और इनमें नियमित निवेश यानी SIP का विकल्प भी उपलब्ध होता है। SIP के जरिए हर महीने एक निश्चित रकम निवेश करने से निवेश में अनुशासन बना रहता है और बाजार के अलग अलग स्तरों पर निवेश का मौका मिलता है। लंबे समय के लिए नियमित निवेश और धैर्य को महत्वपूर्ण माना जाता है।

    जो निवेशक थोड़ा अधिक जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं वे अपने पोर्टफोलियो में Flexi Cap या अन्य विविध इक्विटी विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं। वहीं Mid Cap और Small Cap कंपनियों में विकास की संभावनाएं अधिक हो सकती हैं लेकिन इनमें उतार चढ़ाव और जोखिम भी ज्यादा होता है। इसलिए केवल पिछले कुछ वर्षों का शानदार रिटर्न देखकर किसी फंड या शेयर में पैसा लगाना सही रणनीति नहीं है। निवेश से पहले अपने लक्ष्य निवेश की अवधि और जोखिम सहने की क्षमता को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    अगर कोई व्यक्ति सीधे शेयर खरीदना चाहता है तो उसे कंपनी के कारोबार मुनाफे कर्ज प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं को समझना चाहिए। सिर्फ सोशल मीडिया टिप्स या तेजी से बढ़ते शेयरों के पीछे भागना नुकसानदायक हो सकता है। एक ही कंपनी या एक ही सेक्टर में पूरी पूंजी लगाने के बजाय अलग अलग क्षेत्रों में निवेश करने से जोखिम को कुछ हद तक संतुलित किया जा सकता है।

    निवेश की एक बड़ी गलती यह भी होती है कि लोग बाजार गिरते ही घबरा जाते हैं और बिना योजना के निवेश बेच देते हैं। दूसरी ओर तेजी के दौरान जरूरत से ज्यादा पैसा लगा देते हैं। बेहतर रणनीति यह है कि निवेश को लक्ष्य के अनुसार नियमित रूप से मॉनिटर किया जाए और समय समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा की जाए। SIP शुरू करना अच्छी आदत हो सकती है लेकिन केवल SIP करने से पूरी वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती। आपातकालीन फंड बीमा और कर्ज प्रबंधन भी मजबूत वित्तीय योजना के जरूरी हिस्से हैं।

    कुल मिलाकर शेयर बाजार में निवेश के लिए कोई एक जादुई विकल्प नहीं है। नए निवेशकों के लिए सरल और विविध पोर्टफोलियो से शुरुआत करना समझदारी हो सकती है जबकि अनुभवी निवेशक अपनी रिसर्च और जोखिम क्षमता के अनुसार अलग रणनीति अपना सकते हैं। याद रखें शेयर बाजार में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती और पिछले रिटर्न भविष्य के नतीजों को तय नहीं करते। निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति समझें और जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की मदद लें।

  • ईरान से जंग खत्म हुई तो 40 डॉलर तक गिर सकता है कच्चा तेल, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का दावा

    ईरान से जंग खत्म हुई तो 40 डॉलर तक गिर सकता है कच्चा तेल, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का दावा


    नई दिल्ली। ईरान के साथ सैन्य संघर्ष खत्म होने के बाद वैश्विक तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का अनुमान है कि युद्ध समाप्त होने पर कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतें 40 डॉलर प्रति बैरल तक नीचे जा सकती हैं। उनके मुताबिक तेल सस्ता होने से अमेरिका में महंगाई का दबाव घटेगा और हाल में बढ़ी सरकारी बॉन्ड यील्ड में भी बड़ी गिरावट आ सकती है।

    बेसेंट ने शुक्रवार को ब्लूमबर्ग टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान संघर्ष के समाधान के बाद बाजार में तेल की आपूर्ति काफी बढ़ सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संघर्ष के दूसरे चरण में पहुंचने के बाद तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमत 50 डॉलर और यहां तक कि 40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। हालांकि, बेसेंट ने यह नहीं बताया कि ईरान के साथ जारी जंग कब समाप्त होगी। उनका यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिका-ईरान सैन्य टकराव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है।

    ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर के पार

    शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था। यह जुलाई के बाद के उच्चतम स्तर के करीब है। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI करीब 91 डॉलर प्रति बैरल पर था। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य हमलों के बाद पिछले कुछ सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।

    तेल महंगा होने से अमेरिका में महंगाई को लेकर चिंता भी बढ़ी है। ऊर्जा की लागत बढ़ने का सीधा असर उपभोक्ता कीमतों पर पड़ सकता है। महंगाई की आशंकाओं के चलते अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी ऊपर गई है। इस सप्ताह 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 2023 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।

    जंग खत्म होते ही महंगाई घटने की उम्मीद

    बेसेंट के मुताबिक तेल की कीमतों, महंगाई और ब्याज दरों के बीच संबंध अब साफ नजर आ रहा है। उनका मानना है कि ईरान के साथ संघर्ष खत्म होने पर तेल के दाम तेजी से नीचे आएंगे, जिससे महंगाई का दबाव भी कम हो सकता है।

    हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि तेल की कीमतों में यह संभावित गिरावट कब शुरू होगी। संघर्ष के तत्काल समाप्त होने के भी कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। ऐसे में बाजार की नजर अब अमेरिका-ईरान तनाव और उससे जुड़े ऊर्जा आपूर्ति के हालात पर बनी हुई है।

  • इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से पहले खाद्य सुरक्षा, पानी और किसानों की आय पर असर का आकलन जरूरी, विशेषज्ञ ने नीति बदलाव सुझाए

    इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से पहले खाद्य सुरक्षा, पानी और किसानों की आय पर असर का आकलन जरूरी, विशेषज्ञ ने नीति बदलाव सुझाए

    नई दिल्ली । कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने भारत की कृषि नीति में व्यापक बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा है कि इथेनॉल उत्पादन, उर्वरक सब्सिडी और कृषि व्यापार जैसे मुद्दों पर केवल तत्काल आर्थिक लाभ को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार नीति निर्माण में खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरणीय स्थिरता को समान प्राथमिकता देना जरूरी है।

    शर्मा ने इथेनॉल उत्पादन के तेजी से विस्तार को लेकर विशेष चिंता जताई है। उनका कहना है कि गन्ने के साथ मक्का और चावल जैसी फसलों का इस्तेमाल भी इथेनॉल उत्पादन में बढ़ रहा है। ऐसे में यह आकलन जरूरी है कि कृषि उपज का कितना हिस्सा भोजन से ईंधन की ओर सुरक्षित रूप से मोड़ा जा सकता है। उनके मुताबिक इस बदलाव का असर खाद्य उपलब्धता, पानी की मांग और देश के अलग-अलग क्षेत्रों में फसल पैटर्न पर पड़ सकता है।

    उनका तर्क है कि चीनी क्षेत्र में मौजूदा परिस्थितियों को केवल मौसम, सूखे या फसल संबंधी बीमारियों से नहीं जोड़ा जा सकता। चीनी को इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने की नीति को भी व्यापक तस्वीर में देखना होगा। भारत में इथेनॉल मिश्रण को ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के उपाय के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन किसानों को इससे मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ पर भी स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।

    शर्मा ने मक्का की कीमतों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी कृषि उत्पाद की मांग इथेनॉल के कारण बढ़ती है, तो उसका लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए। उनका कहना है कि कई मौकों पर किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इसलिए इथेनॉल नीति में किसानों की आय और न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुरक्षा को भी शामिल किया जाना चाहिए।

    उन्होंने ब्राजील के मॉडल को भारत में बिना परिस्थितियों का आकलन किए लागू करने से सावधान किया है। उनके अनुसार भारत में जमीन, पानी और खाद्य जरूरतों की स्थिति अलग है। इसलिए ऐसी इथेनॉल रणनीति बननी चाहिए जो ऊर्जा सुरक्षा के साथ खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलन को बनाए रखे।

    फर्टिलाइजर सब्सिडी को लेकर भी शर्मा ने पुनर्विचार की जरूरत बताई। उनका कहना है कि रासायनिक उर्वरकों पर लंबे समय तक निर्भरता ने पोषक तत्वों के असंतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है। उनका सुझाव है कि सब्सिडी व्यवस्था को अचानक समाप्त करने के बजाय धीरे-धीरे टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती की दिशा में बढ़ाया जाए।

    उन्होंने प्रत्यक्ष आय सहायता को कृषि नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की वकालत की। हालांकि, इसके लिए किराए पर जमीन लेकर खेती करने वाले किसानों की पहचान और उन्हें योजनाओं का लाभ पहुंचाना बड़ी चुनौती है। उनका मानना है कि सरकारी सहायता वास्तविक खेती करने वाले व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए।

    न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर शर्मा ने किसानों के लिए भरोसेमंद मूल्य सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत बताई। उनके अनुसार केवल बाजार की शक्तियों पर निर्भर रहने से किसानों की आय में स्थिरता नहीं आ सकती। उत्पादन बढ़ने के बावजूद यदि किसान को बाजार में उचित कीमत नहीं मिलती, तो रिकॉर्ड उत्पादन का लाभ उसकी आमदनी में दिखाई नहीं देता।

    उन्होंने कहा कि भारत की कृषि नीति का लक्ष्य केवल अधिक उत्पादन हासिल करना नहीं होना चाहिए। किसानों की वास्तविक कमाई, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और खाद्य सुरक्षा को केंद्र में रखकर नीतियां तैयार करना जरूरी है। उनके मुताबिक दीर्घकालिक कृषि विकास के लिए इथेनॉल, सब्सिडी और व्यापार नीतियों के बीच बेहतर संतुलन बनाना समय की जरूरत है।

  • कर्मचारी संगठनों की 40 प्रतिशत HRA मांग से बढ़ी उम्मीद, नए फिटमेंट फैक्टर के बाद भत्ते में बदलाव की संभावना

    कर्मचारी संगठनों की 40 प्रतिशत HRA मांग से बढ़ी उम्मीद, नए फिटमेंट फैक्टर के बाद भत्ते में बदलाव की संभावना


    नई दिल्ली । केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर वेतन और भत्तों में संभावित बदलाव की चर्चा तेज है। इसी क्रम में House Rent Allowance यानी HRA में भी बढ़ोतरी की मांग सामने आई है। कर्मचारी संगठनों ने नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने के साथ X श्रेणी के शहरों में HRA की मौजूदा दर 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की मांग रखी है।

    अगर प्रस्तावित बदलावों को मंजूरी मिलती है तो कुछ वेतन स्तरों पर कर्मचारियों को मौजूदा व्यवस्था की तुलना में अधिक आवास भत्ता मिल सकता है। हालांकि अभी 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें सामने नहीं आई हैं और HRA की नई दर को लेकर कोई अंतिम सरकारी फैसला नहीं हुआ है। इसलिए सामने आ रहे आंकड़ों को संभावित गणना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

    मौजूदा 7वें वेतन आयोग की व्यवस्था में Level 5 कर्मचारी का शुरुआती बेसिक पे 29,200 रुपये है। X श्रेणी के शहरों में 30 प्रतिशत HRA के हिसाब से इस स्तर के कर्मचारी को हर महीने 8,760 रुपये का आवास भत्ता मिलता है।

    कर्मचारी संगठनों की मांग के अनुसार यदि नए वेतन ढांचे में Level 5 का बेसिक पे बढ़कर करीब 61,320 रुपये होता है और X श्रेणी के शहरों के लिए HRA की दर 40 प्रतिशत निर्धारित की जाती है, तो मासिक HRA की गणना 24,528 रुपये तक पहुंच सकती है।

    इस हिसाब से मौजूदा 8,760 रुपये के मुकाबले संभावित HRA में करीब 15,768 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी हो सकती है। सालाना आधार पर देखें तो यह अंतर 1.89 लाख रुपये से अधिक बैठ सकता है। हालांकि यह केवल प्रस्तावित बेसिक पे और HRA दर के आधार पर की गई गणना है। वास्तविक राशि सरकार के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।

    HRA सरकारी कर्मचारियों को किराए के मकान से जुड़े खर्च में सहायता देने के लिए दिया जाने वाला भत्ता है। इसकी दर कर्मचारी के वेतन और शहर की श्रेणी के आधार पर तय होती है। मौजूदा व्यवस्था में X श्रेणी के शहरों के लिए 30 प्रतिशत, Y श्रेणी के शहरों के लिए 20 प्रतिशत और Z श्रेणी के शहरों के लिए 10 प्रतिशत HRA की दर बताई गई है।

    8वें वेतन आयोग में यदि बेसिक पे में बदलाव होता है तो उससे HRA समेत दूसरे वेतन घटकों की गणना पर भी असर पड़ सकता है। इसी वजह से कर्मचारी संगठनों की नजर फिटमेंट फैक्टर और नई वेतन संरचना पर है। फिटमेंट फैक्टर बढ़ने की स्थिति में मूल वेतन में वृद्धि का आधार तैयार हो सकता है, जिसका असर संबंधित भत्तों पर भी पड़ सकता है।

    HRA से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण पहलू आयकर नियम हैं। पात्र कर्मचारी पुरानी कर व्यवस्था में आयकर अधिनियम की धारा 10(13A) के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार HRA पर कर छूट का लाभ ले सकते हैं। हालांकि कर लाभ और वास्तविक HRA की गणना अलग-अलग नियमों पर निर्भर करती है।

    8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारियों के बेसिक पे, फिटमेंट फैक्टर और HRA की दरों में कितना बदलाव किया जाएगा। फिलहाल 24,528 रुपये का आंकड़ा किसी सरकारी घोषणा के बजाय प्रस्तावित वेतन और HRA दर के आधार पर निकाली गई संभावित राशि है।

  • इस हफ्ते सोने के भाव में 4,694 रुपये और चांदी में 8,436 रुपये की बड़ी गिरावट, निवेशकों को राहत

    इस हफ्ते सोने के भाव में 4,694 रुपये और चांदी में 8,436 रुपये की बड़ी गिरावट, निवेशकों को राहत

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। घरेलू सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव 4,694 रुपये घटकर 1,54,884 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। सप्ताह की शुरुआत में इसकी कीमत 1,59,578 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इस तरह कुछ ही कारोबारी सत्रों में सोने के भाव में करीब 4,700 रुपये की कमी दर्ज की गई है।

    इसी तरह 22 कैरेट सोने की कीमत भी कम हुई है। सप्ताह की शुरुआत में 1,46,173 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले इसका भाव घटकर 1,41,874 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत 1,19,684 रुपये से घटकर 1,16,163 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। यानी अलग-अलग शुद्धता वाले सोने के भाव में भी उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है।

    सप्ताह के दौरान 24 कैरेट सोने का सबसे ऊंचा भाव 31 अगस्त को शाम के सत्र में दर्ज किया गया। उस समय कीमत 1,55,835 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसके बाद बाजार में गिरावट का दौर देखने को मिला। 2 सितंबर को शाम के सत्र में सोने का भाव इस सप्ताह के निचले स्तर 1,51,184 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया।

    चांदी की कीमत में भी इस सप्ताह सोने की तरह बड़ी गिरावट रही। चांदी का भाव 8,436 रुपये घटकर 2,35,456 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। सप्ताह की शुरुआत में इसकी कीमत 2,43,892 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस तरह एक सप्ताह के भीतर चांदी के भाव में 8,000 रुपये से अधिक की कमी आई है।

    चांदी का सप्ताह का उच्चतम भाव 31 अगस्त को शाम के सत्र में 2,37,199 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। इसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा और 3 सितंबर को सुबह के सत्र में चांदी का भाव 2,28,360 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला।

    घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को कई अंतरराष्ट्रीय कारक प्रभावित करते हैं। सप्ताह के दौरान वैश्विक बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव करीब 4,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी करीब 66 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर रही।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ा है। तनाव बढ़ने के बीच डॉलर, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती आई, जिसका असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर पड़ा। आम तौर पर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में मजबूती आने पर सोने की मांग और कीमतों पर दबाव बन सकता है।

    सर्राफा बाजार में कीमतों की निगरानी करने वाले इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की ओर से सोने और चांदी के भाव दिन में दो बार जारी किए जाते हैं। सुबह और शाम के सत्र में जारी होने वाली कीमतों से बाजार में चल रहे उतार-चढ़ाव का पता चलता है। हालांकि आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए वास्तविक कीमत शुद्धता, मेकिंग चार्ज, टैक्स और अन्य शुल्क के कारण अलग हो सकती है।

  • आईआईटी बीएचयू से पढ़े अनिल चक्रवर्ती बने एडोबी के नए सीईओ, शांतनु नारायण संभालेंगे एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी

    आईआईटी बीएचयू से पढ़े अनिल चक्रवर्ती बने एडोबी के नए सीईओ, शांतनु नारायण संभालेंगे एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी


    नई दिल्ली ।
    सिलिकॉन वैली की दिग्गज टेक कंपनी एडोबी ने नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए अनिल चक्रवर्ती को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। वह करीब 18 वर्षों तक कंपनी का नेतृत्व करने वाले शांतनु नारायण की जगह लेंगे। नेतृत्व परिवर्तन ऐसे समय हुआ है जब एडोबी को जनरेटिव एआई के तेजी से बढ़ते प्रभाव और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अपने कारोबार को आगे बढ़ाने की चुनौती है।

    शांतनु नारायण अब एडोबी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका निभाएंगे। उनके कार्यकाल में कंपनी ने अपने पारंपरिक सॉफ्टवेयर कारोबार को बड़े स्तर पर बदला और फोटोशॉप जैसे प्रमुख उत्पादों को सब्सक्रिप्शन आधारित क्रिएटिव क्लाउड मॉडल की दिशा में आगे बढ़ाया। यह बदलाव शुरुआती दौर में विवाद और विरोध के बावजूद कंपनी के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।

    अनिल चक्रवर्ती के लिए एडोबी की कमान संभालना उनके लंबे तकनीकी और प्रबंधन अनुभव का अगला बड़ा पड़ाव है। उन्होंने आईआईटी बीएचयू वाराणसी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एमएस और पीएचडी की डिग्री हासिल की।

    एडोबी में आने से पहले चक्रवर्ती इनफॉर्मेटिका के सीईओ रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने मैकिन्से, सिमेंटेक और वेरीसाइन जैसी कंपनियों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। जनवरी 2020 में एडोबी से जुड़ने के बाद उन्होंने कंपनी के डिजिटल एक्सपीरियंस कारोबार की जिम्मेदारी संभाली और एआई आधारित पहलों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।

    नई जिम्मेदारी संभालने के बाद चक्रवर्ती के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनरेटिव एआई से बदलता क्रिएटिव सॉफ्टवेयर बाजार होगा। मिडजर्नी और ओपनएआई जैसे एआई आधारित टूल्स ने डिजाइन, तस्वीर और वीडियो निर्माण को पहले की तुलना में आसान बनाया है। ऐसे में एडोबी को अपने प्रमुख उत्पादों को एआई के साथ और प्रभावी ढंग से जोड़ना होगा।

    कंपनी को कैनवा और फिग्मा जैसे ब्राउजर आधारित डिजाइन प्लेटफॉर्म से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। इन प्लेटफॉर्म्स ने खासकर नए डिजाइनरों और छोटे कारोबारों के बीच आसान और सहयोगात्मक डिजाइनिंग को लोकप्रिय बनाया है। ऐसे में एडोबी के लिए अपने मौजूदा पेशेवर ग्राहकों को बनाए रखने के साथ नए उपयोगकर्ताओं तक पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।

    निवेशकों का भरोसा भी नई नेतृत्व टीम के लिए चुनौती रहेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनी के शेयर 2025 में करीब 21 प्रतिशत गिरे थे और 2026 में भी अब तक लगभग 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वित्तीय नेतृत्व में बदलाव के बीच कंपनी को बाजार की चिंताओं का जवाब भी देना होगा।

    चक्रवर्ती ने नई जिम्मेदारी को सम्मान बताते हुए कहा है कि कंपनी अब क्रिएटिविटी और प्रोडक्टिविटी के लिए एजेंटिक सॉफ्टवेयर के अगले दौर में प्रवेश कर रही है। उनके नेतृत्व में एडोबी की रणनीति इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगी कि कंपनी एआई को अपने मौजूदा उत्पादों की ताकत के साथ कितनी प्रभावी तरीके से जोड़ पाती है।

    इस बदलाव के साथ एडोबी में एक युग का अंत और नए दौर की शुरुआत हुई है। भारतीय मूल के चक्रवर्ती के सामने कंपनी की मजबूत विरासत को बनाए रखते हुए तेजी से बदलती एआई अर्थव्यवस्था में विकास की नई दिशा तय करने की जिम्मेदारी होगी।

  • मुनाफावसूली के बाद भी सोने में तेजी के संकेत, एक्सपर्ट बोले- इस रेंज में खरीदारी का मौका न गंवाएं

    मुनाफावसूली के बाद भी सोने में तेजी के संकेत, एक्सपर्ट बोले- इस रेंज में खरीदारी का मौका न गंवाएं


    नई दिल्ली । सोने की चमक फिलहाल फीकी पड़ने के संकेत नहीं दे रही है। पिछले चार वर्षों में जिस रफ्तार से सोने की कीमतों ने ऊंचाई हासिल की है उसने निवेशकों और खरीदारों दोनों को हैरान कर दिया है। सितंबर 2022 में करीब 50 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहने वाला 24 कैरेट सोना अब सितंबर 2026 में करीब 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। यानी चार साल में सोने ने करीब 210 फीसदी का जबरदस्त रिटर्न दिया है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में मुनाफावसूली जरूर देखने को मिली है लेकिन बाजार विशेषज्ञ इसे तेजी के दौर का अंत नहीं बल्कि लंबे बुल रन के बीच सामान्य करेक्शन मान रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 29 जनवरी को 5608 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई और फिलहाल सोना लगभग 4500 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। हालांकि बाजार जानकारों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4400 डॉलर प्रति औंस का महत्वपूर्ण स्तर बना रहता है तब तक सोने की तेजी को मजबूत समर्थन मिलता रहेगा। घरेलू बाजार में भी करीब 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर वैश्विक बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आती है तो दीपावली तक सोने का भाव 1.60 लाख से 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

    सोने की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की लगातार बढ़ती खरीदारी है। वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। इसे डी डॉलराइजेशन की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कई देशों को अब यह चिंता है कि विदेशी मुद्रा या दूसरे देशों के वित्तीय साधनों पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है जबकि अपने पास रखा सोना अधिक सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। यही वजह है कि चीन जैसे देश लगातार अपने स्वर्ण भंडार में इजाफा कर रहे हैं और अन्य केंद्रीय बैंक भी बड़ी मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।

    सोने की मजबूती की दूसरी बड़ी वजह इसकी मौद्रिक परिसंपत्ति के रूप में बढ़ती अहमियत है। पहले सोने को मुख्य रूप से महंगाई और आर्थिक संकट से बचाव के साधन के तौर पर देखा जाता था लेकिन अब वैश्विक स्तर पर इसे करेंसी के अवमूल्यन और वित्तीय जोखिमों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा कवच माना जा रहा है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में निवेशकों और देशों दोनों के लिए सोना भरोसेमंद संपत्ति बनकर उभरा है।

    इसके अलावा भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में त्योहारों और शादी के सीजन के दौरान बढ़ने वाली भौतिक मांग भी कीमतों को मजबूत आधार दे रही है। आपूर्ति की सीमित स्थिति और संस्थागत खरीदारी के कारण सोने पर दबाव कम दिखाई दे रहा है। हालांकि कीमतों में बीच बीच में गिरावट संभव है लेकिन लंबी अवधि का रुझान अभी भी मजबूत माना जा रहा है।

    खरीदारी को लेकर विशेषज्ञों की सलाह है कि शादी या अन्य जरूरी जरूरतों के लिए सोना खरीदने वालों को बहुत बड़ी गिरावट का इंतजार नहीं करना चाहिए। यदि कीमत 1.45 लाख से 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में नीचे आती है तो चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की जा सकती है। एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय जरूरत और बजट के हिसाब से 40 से 50 फीसदी खरीदारी पहले की जा सकती है। हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सोने की कीमतें वैश्विक बाजार और रुपये की चाल से प्रभावित होती हैं इसलिए तेजी की उम्मीद के बावजूद निवेश से पहले अपनी वित्तीय जरूरत और जोखिम क्षमता का आकलन जरूर करना चाहिए।

  • अदाणी पोर्ट्स मुंद्रा में शुरू करेगी समर्पित खाली कंटेनर यार्ड, लॉजिस्टिक्स क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला दक्षता बढ़ाने पर जोर

    अदाणी पोर्ट्स मुंद्रा में शुरू करेगी समर्पित खाली कंटेनर यार्ड, लॉजिस्टिक्स क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला दक्षता बढ़ाने पर जोर

    नई दिल्ली । अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने मुंद्रा में समर्पित एम्प्टी कंटेनर यार्ड यानी खाली कंटेनर यार्ड शुरू करने की घोषणा की है। इस सुविधा के साथ एकीकृत वेयरहाउसिंग व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। कंपनी का उद्देश्य कंटेनर प्रबंधन की क्षमता बढ़ाने के साथ आयात और निर्यात से जुड़ी लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।

    प्रस्तावित यार्ड में खाली कंटेनरों के पूरे जीवनचक्र से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें कंटेनरों का भंडारण, रखरखाव, निरीक्षण और निर्यातकों तथा कंटेनर फ्रेट स्टेशनों तक उनकी आवाजाही शामिल होगी। कंपनी के अनुसार, एक ही व्यवस्था के तहत इन सेवाओं के उपलब्ध होने से कंटेनरों के संचालन में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

    यह पहल कंपनी की एंबिशन 2031 रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत अदाणी पोर्ट्स अपने कंटेनर संचालन और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी अगले पांच वर्षों में अपने नेटवर्क में 60 लाख टीईयू से अधिक अतिरिक्त कंटेनर हैंडलिंग क्षमता जोड़ने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इसमें मुंद्रा पोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है।

    कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्विनी गुप्ता के अनुसार, मुंद्रा में स्थापित किया जा रहा समर्पित एम्प्टी कंटेनर यार्ड कंटेनर इकोसिस्टम की दक्षता बढ़ाने में मदद करेगा। इसके संचालन में कंपनी के साथ साझेदार, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और शिपिंग लाइनें भी भूमिका निभा सकती हैं।

    इस सुविधा से कंटेनरों के टर्नअराउंड टाइम को कम करने और उनकी अनावश्यक आवाजाही घटाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, कंटेनरों के बेहतर प्रबंधन से लॉजिस्टिक्स लागत को अनुकूलित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। कंपनी का मानना है कि ऐसी सुविधाएं व्यापार से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    मुंद्रा पोर्ट पहले से ही देश के कंटेनर कारोबार में प्रमुख स्थान रखता है। वित्त वर्ष 2025-26 तक भारत के कंटेनर बाजार में अदाणी पोर्ट्स की हिस्सेदारी 45.5 प्रतिशत बताई गई है। अकेले मुंद्रा पोर्ट देश के करीब 35 प्रतिशत कंटेनर व्यापार को संभालता है। इस वजह से इसे भारत का सबसे बड़ा कंटेनर हैंडलिंग बंदरगाह माना जाता है।

    कंपनी के मुताबिक, मुंद्रा में हर साल लगभग 16 लाख टीईयू खाली कंटेनरों का प्रबंधन किया जाता है। इस बड़े परिचालन आधार को देखते हुए समर्पित यार्ड की स्थापना से खाली कंटेनरों के भंडारण और आवाजाही के प्रबंधन को अधिक सुव्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

    अदाणी पोर्ट्स ने कहा कि यह पहल प्रौद्योगिकी आधारित और अधिक कुशल लॉजिस्टिक्स व्यवस्था विकसित करने की सरकारी दिशा के अनुरूप है। कंपनी इसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने और व्यापारिक गतिविधियों के लिए बुनियादी ढांचा बेहतर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मान रही है।

    वर्तमान में एपीएसईजेड 16 रणनीतिक रूप से स्थित बंदरगाहों और टर्मिनलों का संचालन करता है। कंपनी के पास 136 जहाजों का विविध समुद्री बेड़ा और एकीकृत लॉजिस्टिक्स क्षमता है। इसकी कार्गो हैंडलिंग क्षमता 653 मिलियन टन प्रतिवर्ष है और भारत के कुल बंदरगाह कार्गो वॉल्यूम में इसकी हिस्सेदारी करीब 27 प्रतिशत है। कंपनी ने वर्ष 2030 तक एक अरब टन थ्रूपुट हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

  • एयर इंडिया फुकेत-दिल्ली उड़ान में पायलट का ड्रग टेस्ट नॉन-नेगेटिव, एएआईबी ने ऊंचाई घटने की घटना को बताया गंभीर चिंता

    एयर इंडिया फुकेत-दिल्ली उड़ान में पायलट का ड्रग टेस्ट नॉन-नेगेटिव, एएआईबी ने ऊंचाई घटने की घटना को बताया गंभीर चिंता

    नई दिल्ली । एयर इंडिया की फुकेत से दिल्ली आ रही उड़ान से जुड़ी एक घटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आई है। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने अपनी रिपोर्ट में पायलट-इन-कमांड के साइकोएक्टिव या नशीले पदार्थों की जांच में नॉन-नेगेटिव परिणाम आने और उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई कम होने को गंभीर चिंता का विषय बताया है। जांच एजेंसी ने इस मामले में नागर विमानन महानिदेशालय से प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने की मांग की है।

    रिपोर्ट के अनुसार, घटना के बाद दिल्ली पहुंचने पर विमान के दोनों क्रू सदस्यों की मेडिकल स्क्रीनिंग की गई थी। दोनों के ब्रेथलाइजर टेस्ट के परिणाम संतोषजनक पाए गए। हालांकि, साइकोएक्टिव या नशीले पदार्थों की पहचान के लिए किए गए परीक्षण में पायलट-इन-कमांड का शुरुआती सैंपल नॉन-नेगेटिव मिला, जबकि को-पायलट का परिणाम नेगेटिव रहा।

    इसके बाद पुष्टि के लिए दोनों फ्लाइट क्रू सदस्यों के रक्त नमूने पैथोलॉजिकल लैब भेजे गए। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि पायलट-इन-कमांड का कन्फर्मेशन टेस्ट भी नॉन-नेगेटिव आया, जबकि को-पायलट के दोनों परीक्षणों में परिणाम नेगेटिव रहे। एएआईबी ने इस तथ्य को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में विशेष रूप से दर्ज किया है।

    जांच एजेंसी ने कहा है कि मामले के तकनीकी और अन्य पहलुओं की विस्तृत जांच अभी जारी है। इसी वजह से रिपोर्ट में सामने आए शुरुआती तथ्यों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना गया है। एएआईबी ने डीजीसीए से मामले में आवश्यक प्राथमिक कार्रवाई करने को कहा है।

    एयर इंडिया ने भी घटना की जांच में सहयोग करने की बात कही है। एयरलाइन ने कहा कि सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सुरक्षा, फिटनेस अथवा नियमों के अनुपालन में किसी भी तरह की चूक को स्वीकार नहीं किया जाएगा। एयर इंडिया ने घटना के बाद अपने सभी पायलटों की स्वैच्छिक जांच शुरू करने की जानकारी भी दी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक फुकेत में उड़ान से पहले विमान की जांच की गई थी। इस निरीक्षण के दौरान कोई नई तकनीकी गड़बड़ी सामने नहीं आई थी। विमान में केवल एक ऐसा आइटम दर्ज था, जिसे पहले से ही मिनिमम इक्विपमेंट लिस्ट के तहत नोट किया गया था। उड़ान दल ने विमान के चारों ओर किए गए वॉक-अराउंड निरीक्षण के दौरान भी किसी अतिरिक्त खराबी की सूचना नहीं दी।

    यह उड़ान एआई-2379 के रूप में संचालित हो रही एयरबस ए320 थी। 4 अगस्त को ओडिशा के ऊपर लगभग 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान के दौरान विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम काम करना बंद कर गए। इसके बाद विमान की ऊंचाई में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किया गया।

    रिपोर्ट के अनुसार विमान ने शुरुआत में 372 फीट की अतिरिक्त ऊंचाई हासिल की, लेकिन इसके बाद अपनी निर्धारित ऊंचाई से 292 फीट नीचे चला गया। इस घटना के दौरान विमान में कुल 145 लोग मौजूद थे। इनमें 137 यात्री, छह केबिन क्रू सदस्य और दो पायलट शामिल थे।

    घटना के बाद कम से कम 20 यात्रियों और चार क्रू सदस्यों के घायल होने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। विमान को मुख्य रूप से ओवरहेड स्टोरेज डिब्बों और सीलिंग पैनलों के हिस्से में नुकसान पहुंचा। एएआईबी की विस्तृत जांच में अब तकनीकी खराबी, संचालन संबंधी परिस्थितियों और क्रू से जुड़े पहलुओं की आगे जांच की जा रही है।

  • बैंकिंग क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अवसर, वेल्थ एग्जीक्यूटिव और क्रेडिट एनालिस्ट पदों पर नियुक्तियां

    बैंकिंग क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अवसर, वेल्थ एग्जीक्यूटिव और क्रेडिट एनालिस्ट पदों पर नियुक्तियां

    नई दिल्ली । बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा ने बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। बैंक ने विभिन्न विभागों में कुल 1100 पदों पर नियमित आधार पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए रिक्तियां जारी की हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 4 सितंबर 2026 से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 24 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।

    जारी रिक्तियों में सबसे अधिक पद वेल्थ एग्जीक्यूटिव के हैं। वेल्थ मैनेजमेंट सर्विसेज के तहत जूनियर मैनेजमेंट ग्रेड स्केल-I में वेल्थ एग्जीक्यूटिव के 1000 पदों पर भर्ती की जाएगी। इसके अलावा कॉर्पोरेट और इंस्टीट्यूशनल क्रेडिट विभाग में मिडिल मैनेजमेंट ग्रेड स्केल-II के क्रेडिट एनालिस्ट के 100 पद निर्धारित किए गए हैं।

    इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की शर्तें पूरी करनी होंगी। वेल्थ एग्जीक्यूटिव पद के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से किसी भी विषय में स्नातक होना जरूरी है। इसके साथ भारतीय बीमा संस्थान से आईसी-38 प्रमाणपत्र या निर्धारित समकक्ष योग्यता भी आवश्यक है।

    क्रेडिट एनालिस्ट पद के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री के साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट की योग्यता होना जरूरी है। दोनों पदों के लिए उम्मीदवारों से संबंधित क्षेत्र में निर्धारित कार्य अनुभव भी मांगा गया है। पद के अनुसार न्यूनतम एक से दो वर्ष का अनुभव आवश्यक है।

    आयु सीमा की बात करें तो आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु पद के अनुसार 21 से 22 वर्ष और अधिकतम आयु 32 से 33 वर्ष निर्धारित है। आयु की गणना 1 सितंबर 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में नियमानुसार छूट का लाभ मिलेगा।

    चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। उम्मीदवारों के आवेदन की प्रारंभिक जांच के बाद ऑनलाइन टेस्ट आयोजित किया जा सकता है। इसके बाद साइकोमेट्रिक टेस्ट, ग्रुप डिस्कशन और या इंटरव्यू जैसे चरणों से उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया में दस्तावेज सत्यापन समेत अन्य निर्धारित चरण भी शामिल रहेंगे।

    चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार निर्धारित वेतनमान दिया जाएगा। वेल्थ एग्जीक्यूटिव पद के लिए वेतनमान 48,480 रुपये से 85,920 रुपये के बीच है, जबकि क्रेडिट एनालिस्ट पद के लिए 64,820 रुपये से 93,960 रुपये के बीच वेतनमान निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त पात्र कर्मचारियों को नियमों के अनुसार विभिन्न लाभ और भत्ते भी मिलेंगे।

    आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी श्रेणी के अनुसार निर्धारित शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। सामान्य, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 750 रुपये रखा गया है। वहीं एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी, ईएसएम और महिला उम्मीदवारों के लिए शुल्क 175 रुपये निर्धारित किया गया है।

    इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन की अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना पात्रता, आयु सीमा, अनुभव, दस्तावेज और अन्य शर्तों की जांच कर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। आवेदन में किसी तरह की त्रुटि से बचने के लिए जमा करने से पहले सभी जानकारियों और दस्तावेजों को ध्यानपूर्वक जांचना जरूरी होगा।