Category: Economy

  • HSBC ने वोडाफोन आइडिया पर रिड्यूस रेटिंग बरकरार रखी, 8.25 रुपये के लक्ष्य से शेयर में 47 प्रतिशत गिरावट का अनुमान

    HSBC ने वोडाफोन आइडिया पर रिड्यूस रेटिंग बरकरार रखी, 8.25 रुपये के लक्ष्य से शेयर में 47 प्रतिशत गिरावट का अनुमान

    नई दिल्ली । वोडाफोन आइडिया के शेयरों को लेकर ब्रोकरेज फर्म HSBC ने चिंता जताई है। HSBC ने कंपनी के शेयर पर रिड्यूस रेटिंग बरकरार रखते हुए 8.25 रुपये प्रति शेयर का लक्ष्य मूल्य दिया है। यह पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव की तुलना में करीब 47 प्रतिशत की संभावित गिरावट को दर्शाता है। मंगलवार को वोडाफोन आइडिया के शेयरों में गिरावट देखने को मिली।

    वोडाफोन आइडिया के शेयर 15.40 रुपये के आसपास कारोबार कर रहे थे। इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में शेयर में करीब 8 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। वहीं, 2026 में अब तक कंपनी के शेयर में 32 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखी गई है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 1.68 लाख करोड़ रुपये बताया गया है।

    HSBC की मुख्य चिंता वोडाफोन आइडिया की स्पेक्ट्रम से जुड़ी देनदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नकदी जुटाने की क्षमता को लेकर है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि मोबाइल टैरिफ में संभावित बढ़ोतरी से कंपनी की कमाई में सुधार हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद ऑपरेटिंग कैश फ्लो स्पेक्ट्रम भुगतान की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

    HSBC के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मोबाइल टैरिफ बढ़ने की संभावना है। इसके बावजूद वित्त वर्ष 2029 में कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो स्पेक्ट्रम भुगतान की आवश्यकताओं से कम रहने का अनुमान है। ब्रोकरेज का कहना है कि इन जरूरतों को पूरा करने के लिए वोडाफोन आइडिया को अगले तीन वर्षों में अपने ऑपरेटिंग कैश फ्लो को करीब तीन गुना करना होगा।

    कंपनी के नेटवर्क में होने वाला निवेश उसके बाजार हिस्सेदारी को स्थिर रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, HSBC को उम्मीद नहीं है कि नेटवर्क पर निवेश से कंपनी की बाजार हिस्सेदारी में कोई बड़ी बढ़ोतरी होगी। ब्रोकरेज के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2029 के बीच कंपनी के EBITDA में सालाना आधार पर करीब 15 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वृद्धि हो सकती है।

    इस अनुमान के पीछे मुख्य वजह मोबाइल टैरिफ में बढ़ोतरी की संभावना बताई गई है। यानी टैरिफ बढ़ने से कंपनी की कमाई और EBITDA में सुधार की उम्मीद है, लेकिन इससे पैदा होने वाला अतिरिक्त कैश स्पेक्ट्रम भुगतान की जरूरतों को पूरी तरह संभालने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।

    वोडाफोन आइडिया के लिए चुनौती केवल वित्त वर्ष 2029 के स्पेक्ट्रम भुगतान तक सीमित नहीं रहने की आशंका है। HSBC ने कहा है कि वर्ष 2030 से शुरू होने वाले स्पेक्ट्रम रिन्यूअल के लिए भी कंपनी को अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी। इससे आने वाले वर्षों में कंपनी के सामने फंडिंग की जरूरत बनी रह सकती है।

    स्पेक्ट्रम भुगतान और भविष्य के रिन्यूअल के लिए पूंजी जुटाने की क्षमता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी को एक साथ नेटवर्क निवेश और अन्य परिचालन जरूरतों को भी पूरा करना है। HSBC की रिपोर्ट में इन्हीं वित्तीय जरूरतों को शेयर के लिए प्रमुख चुनौती के तौर पर देखा गया है।

    वोडाफोन आइडिया के शेयर ने 2026 में अब तक मजबूत प्रदर्शन किया है, लेकिन HSBC का आकलन कंपनी के भविष्य के कैश फ्लो और स्पेक्ट्रम देनदारियों पर केंद्रित है। ब्रोकरेज के मुताबिक, टैरिफ बढ़ोतरी से परिचालन प्रदर्शन में सुधार संभव है, लेकिन स्पेक्ट्रम से जुड़ी मौजूदा और भविष्य की भुगतान जरूरतों के लिए कंपनी को अपनी नकदी क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करनी होगी।

  • भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल मई-जून 2027 में शुरू होने की उम्मीद, दो से चार महीने बाद यात्रियों के लिए सेवा शुरू

    भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल मई-जून 2027 में शुरू होने की उम्मीद, दो से चार महीने बाद यात्रियों के लिए सेवा शुरू


    नई दिल्ली ।
    भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन का ट्रायल अगले साल मई और जून के बीच शुरू होने की उम्मीद है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परीक्षण शुरू होने के बाद करीब दो से चार महीने तक ट्रेन की टेस्टिंग की जाएगी और इसके बाद इसे आम यात्रियों के लिए खोलने की तैयारी होगी।

    वडोदरा में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि हाई स्पीड ट्रेन का पहला बॉडी फ्रेम हाल ही में तैयार हुआ है। इसे आगे की परीक्षण प्रक्रिया के लिए भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले साल मई या जून तक भारत की अपनी बुलेट ट्रेन परीक्षण के लिए पटरियों पर उतर जाएगी।

    रेल मंत्री के अनुसार, करीब दो से चार महीने की टेस्टिंग के बाद बुलेट ट्रेन के उद्घाटन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत के विजन के तहत तैयार की जा रही है। इसके शुरू होने से मुंबई और वडोदरा के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है।

    वैष्णव ने बताया कि बुलेट ट्रेन से वडोदरा से मुंबई का सफर करीब डेढ़ घंटे में पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के निर्माण कार्य की प्रगति का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इस कॉरिडोर पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और सूरत-वापी सेक्शन के इसी साल दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।

    रेल मंत्री ने रेलवे क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधारों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार रेलवे के ऑपरेटिंग सिस्टम, रिजर्वेशन प्लेटफॉर्म और निर्माण से जुड़े पुराने नियमों को आधुनिक बनाने पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य रेलवे की कार्यप्रणाली और सेवाओं को समय के साथ बेहतर बनाना है।

    उन्होंने कहा कि ऑपरेटिंग सिस्टम और रिजर्वेशन सिस्टम से लेकर पुराने कंस्ट्रक्शन प्रोटोकॉल तक विभिन्न क्षेत्रों में सुधार और आधुनिकीकरण किया जा रहा है। वैष्णव ने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में रेलवे के कई लंबे समय से अटके हुए प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं।

    रेल मंत्री ने चेनाब ब्रिज और मिजोरम को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ने वाले रेल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देश में 280 रेलवे स्टेशनों को फिर से विकसित किया गया है और 36,000 किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं।

    वैष्णव के अनुसार, रेलवे में वंदे भारत तकनीक वाली कार्गो ट्रेनें भी विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान आई चुनौतियों के बावजूद रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की रफ्तार तेज रही है।

    उन्होंने बताया कि 2020 में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का पहला सेक्शन पूरा होने के बाद अगले सेक्शन के निर्माण कार्य में तेजी लाई गई। सरकार की ओर से रेलवे के आधुनिकीकरण और नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय रेलवे का आधुनिक स्वरूप तैयार होने से आने वाली कई पीढ़ियों को इसका लाभ मिलेगा। बुलेट ट्रेन परियोजना के परीक्षण और आगे यात्रियों के लिए सेवा शुरू होने से भारत के हाई स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ने की उम्मीद है।

  • भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 75,577 और निफ्टी 23,635.10 अंक पर बंद हुआ

    भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 75,577 और निफ्टी 23,635.10 अंक पर बंद हुआ

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के बीच भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में कमजोरी रही। कारोबार के अंत में निफ्टी 50 में 0.61 प्रतिशत और सेंसेक्स में 0.73 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    एनएसई निफ्टी 50 मंगलवार को 144.05 अंक यानी 0.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,635.10 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं बीएसई सेंसेक्स 555.23 अंक यानी 0.73 प्रतिशत टूटकर 75,577 के स्तर पर पहुंच गया। प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के बावजूद व्यापक बाजार में कुछ मजबूती देखने को मिली।

    निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.18 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसी तरह निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स भी 0.12 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। यानी प्रमुख बेंचमार्क में दबाव रहने के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में सीमित तेजी बनी रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में सबसे अधिक कमजोरी रही। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.98 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 0.93 प्रतिशत गिरा। इसके अलावा निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सीमेंट और निफ्टी आईटी इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई।

    दूसरी तरफ कुछ सेक्टरों ने बाजार में मजबूती बनाए रखने का काम किया। निफ्टी मीडिया इंडेक्स में 1.31 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि निफ्टी फार्मा 0.77 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.63 प्रतिशत बढ़ा। निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी केमिकल्स में भी बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मेटल इंडेक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ।

    एक मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, अप्रैल में मिडकैप और मार्च में स्मॉलकैप शेयरों के 52 सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद इन दोनों सेगमेंट ने करीब 20 से 30 प्रतिशत का मजबूत रिटर्न दिया है। इस तेजी के पीछे घरेलू निवेश में सुधार और कम कीमत पर बेहतर शेयरों की खरीदारी को प्रमुख कारण बताया गया।

    एक्सपर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक आर्थिक मंदी, ऊंची महंगाई और व्यापार शुल्क जैसी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण कंपनियों की कमाई को लेकर बनी चिंताओं में कमी आई थी। वहीं पहली तिमाही के नतीजों से कॉरपोरेट कमाई में सुधार के संकेत भी मिले हैं।

    हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से कमाई में सुधार की उम्मीदों को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। एक्सपर्ट ने कहा कि चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी रह सकती है, लेकिन बाजार में अभी भी काफी उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है। ऐसे माहौल में अल्पकालिक निवेशकों के लिए कुछ मुनाफा बुक करना समझदारी भरा कदम हो सकता है।

    पिछले पांच-छह महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों के शानदार प्रदर्शन को आगे भी बनाए रखना मुश्किल माना जा रहा है। रणनीतिक नजरिए से लार्जकैप शेयरों और नॉन-इक्विटी ईटीएफ पर अधिक ध्यान देना अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प बताया गया है। सेक्टर के स्तर पर हेल्थकेयर, टेलीकॉम और एफएमसीजी पर ध्यान देने की बात कही गई है।

  • ईरान से युद्ध जीते तो सस्ता होगा तेल-गैस, ट्रंप का दावा; एर्दोगन ने इस्राइल पर लगाया शांति प्रयास बिगाड़ने का आरोप

    ईरान से युद्ध जीते तो सस्ता होगा तेल-गैस, ट्रंप का दावा; एर्दोगन ने इस्राइल पर लगाया शांति प्रयास बिगाड़ने का आरोप

    वाशिंगट। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि युद्ध में अमेरिका की जीत के बाद तेल और गैस की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी। ट्रंप ने कहा कि गैस की कीमत पहले तीन डॉलर प्रति गैलन तक आ सकती है और बाद में यह दो डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे जा सकती है। दूसरी ओर ईरान ने अपनी ऊर्जा सुविधाओं और तेल टैंकरों पर किसी भी हमले की स्थिति में अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।

    तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने इस्राइल पर अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। वहीं, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरानी शासन के अंत को अपना प्रमुख लक्ष्य बताते हुए कहा है कि तेहरान की सरकार कमजोर पड़ चुकी है।

    ट्रंप का दावा- युद्ध के बाद घटेंगी तेल और गैस की कीमतें

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध में जीत हासिल करने के बाद तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी। उन्होंने कहा कि गैस की कीमत करीब तीन डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच सकती है और अंततः दो डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे जाने की संभावना है।

    ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा।

    ईरान ने ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले की दी चेतावनी

    ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका को ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर हमला करने के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान का तेल और गैस उत्पादन तंत्र व्यापक क्षेत्र में फैला हुआ है और उसकी सुरक्षा आसान नहीं है।

    गालिबाफ ने कहा कि यदि ईरान की संपत्तियों को निशाना बनाया गया तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करेगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान पहले ही इस तरह के जवाब की क्षमता प्रदर्शित कर चुका है।

    यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी अधिकारियों की ओर से ईरान के तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है।

    अमेरिकी अधिकारियों ने तेल टैंकरों को लेकर दी चेतावनी

    अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि यदि ईरान अमेरिकी जहाजों पर हमला करता है तो अमेरिका उसके तेल टैंकरों को निशाना बनाएगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान हो चुका है।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने तीन ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों पर कार्रवाई का वीडियो भी साझा किया है। अमेरिकी कमांड के अनुसार, ये टैंकर ऐसे नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसके माध्यम से ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को आर्थिक मदद मिलती थी।

    सेंटकॉम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि अमेरिकी जहाजों पर हमला होने की स्थिति में ईरान की तेल आपूर्ति पर और बड़ी आर्थिक कीमत थोपी जा सकती है।

    एर्दोगन ने इस्राइल पर लगाया शांति प्रयासों को नुकसान पहुंचाने का आरोप

    तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के लिए इस्राइल को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर शांति प्रयासों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस्राइल की कार्रवाई के कारण जून में ईरान और अमेरिका के बीच हुआ 14 सूत्री इस्लामाबाद समझौता प्रभावित हुआ।

    एर्दोगन के अनुसार, युद्ध का असर केवल ईरान और खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी कीमत पूरी दुनिया को चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जब तक शांति को खतरे के रूप में देखने वाली सोच में बदलाव नहीं आता, तब तक क्षेत्रीय संकट समाप्त करना मुश्किल होगा।

    बताया गया है कि प्रस्तावित समझौते में सैन्य कार्रवाई रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, प्रतिबंधों में राहत और ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के अमेरिकी समर्थित आर्थिक विकास कार्यक्रम जैसे प्रावधान शामिल थे।

    नेतन्याहू बोले- ईरानी शासन का अंत करीब

    इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि ईरान की सरकार कमजोर हो चुकी है और उसके अस्तित्व पर संकट है। उन्होंने कहा कि ईरानी शासन अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।

    नेतन्याहू ने कहा कि इस्राइल अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और अपने दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। उन्होंने विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें इस्राइल को आजमाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि ईरानी शासन को समाप्त करना अभी प्रमुख लक्ष्य है और इसके पूरा होने से मध्य पूर्व की स्थिति तथा क्षेत्र के लोगों का इतिहास स्थायी रूप से बदल सकता है।

  • कॉपर की कीमत ने तोड़े सारे रिकॉर्ड….ऑल टाइम हाई पर पहुंचे भाव

    कॉपर की कीमत ने तोड़े सारे रिकॉर्ड….ऑल टाइम हाई पर पहुंचे भाव


    नई दिल्ली।
    कॉपर (Copper) की कीमतों ने सोमवार को नया रिकॉर्ड (New record) बना दिया। दुनिया के प्रमुख कमोडिटी बाजार लंदन मेटल एक्सचेंज (London Metal Exchange- LME) पर कॉपर की कीमत (Copper Price) बढ़कर 14,533 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई। इसने जनवरी में बने 14,527.50 डॉलर प्रति टन के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। हालांकि, बाद में कीमत थोड़ी नरम हुई और 0.7% की बढ़त के साथ करीब 14,518 डॉलर प्रति टन पर कारोबार करती रही। कॉपर की कीमत में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका के बाहर सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता है।

    इसके अलावा कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी मेटल्स की कीमतों को सपोर्ट दिया है। डॉलर कमजोर होने पर दूसरी करेंसी रखने वाले खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत वाले मेटल अपेक्षाकृत सस्ते हो जाते हैं, जिससे डिमांड को सपोर्ट मिलता है।


    अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर कॉपर का स्टॉक

    कॉपर की ग्लोबल सप्लाई को लेकर सबसे दिलचस्प स्थिति अमेरिका और बाकी दुनिया के बीच देखने को मिल रही है। अमेरिका में कॉपर का स्टॉक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। COMEX के गोदामों में कॉपर का स्टॉक करीब 7,66,795 शॉर्ट टन, यानी लगभग 6.96 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि संभावित अमेरिकी आयात शुल्क की आशंका के चलते ट्रेडर्स और प्रोड्यूसर्स ने बड़ी मात्रा में कॉपर अमेरिका भेजना शुरू कर दिया था। जानकारों के मुताबिक, जब तक टैरिफ को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तब तक कॉपर की कीमतें ऊंची रह सकती हैं और अमेरिका की ओर मेटल का फ्लो जारी रह सकता है।


    गोदामों में कॉपर का स्टॉक घटा

    दूसरी तरफ अमेरिका के बाहर कॉपर की उपलब्धता कम होती दिखाई दे रही है। लंदन मेटल एक्सचेंज में कैंसल्ड वारंट्स का स्तर 51% तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि 1.21 लाख टन से ज्यादा कॉपर आने वाले हफ्तों में एक्सचेंज के सिस्टम से बाहर जा सकता है। वहीं, शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज के गोदामों में कॉपर का स्टॉक मार्च के मध्य से करीब 85% घटकर 63,000 टन रह गया है। यह जनवरी 2024 के बाद सबसे निचला स्तर है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा कॉपर उपभोक्ता है, इसलिए वहां घटते स्टॉक ने सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।


    दूसरे बेस मेटल्स पर भी असर

    कॉपर की कीमतों में तेजी का असर दूसरे बेस मेटल्स पर भी दिखाई दिया। जिंक 1.1% चढ़कर 3,988 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया, जबकि एल्युमिनियम 0.7% बढ़कर 3,315 डॉलर और टिन 0.4% बढ़कर 55,100 डॉलर प्रति टन हो गया। दूसरी ओर, निकेल 0.7% गिरकर 16,725 डॉलर और लेड 0.3% कमजोर होकर 1,903 डॉलर प्रति टन पर आ गया। कुल मिलाकर, अमेरिका में बढ़ते स्टॉक और अमेरिका के बाहर घटती उपलब्धता ने कॉपर मार्केट में एक बड़ा अंतर पैदा कर दिया है। अगर वैश्विक सप्लाई पर दबाव आगे भी बना रहता है, तो कॉपर की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी रहने की संभावना पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

  • शेयर मार्केट में पहली बार लगाने जा रहे हैं पैसा तो न करें ये गलती डीमैट अकाउंट से लेकर शेयर खरीदने तक समझें पूरा तरीका

    शेयर मार्केट में पहली बार लगाने जा रहे हैं पैसा तो न करें ये गलती डीमैट अकाउंट से लेकर शेयर खरीदने तक समझें पूरा तरीका


    नई दिल्ली । शेयर मार्केट आज के दौर में निवेश का एक लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। बहुत से लोग अपनी बचत को बढ़ाने के लिए शेयर बाजार का रुख कर रहे हैं लेकिन बाजार में कदम रखने से पहले इसकी बुनियादी जानकारी होना बेहद जरूरी है। शेयर मार्केट में कमाई के अवसर मौजूद हैं लेकिन यहां जोखिम भी जुड़ा होता है। इसलिए बिना जानकारी और बिना रणनीति के पैसा लगाना नुकसान का कारण बन सकता है। खासतौर पर नए निवेशकों को किसी शेयर के तेजी से बढ़ने की खबर देखकर तुरंत निवेश करने से बचना चाहिए।

    शेयर मार्केट में शुरुआत करने के लिए सबसे पहले डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। डीमैट अकाउंट में आपके खरीदे गए शेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे जाते हैं जबकि ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए शेयरों की खरीद और बिक्री की जाती है। इसके बाद बैंक अकाउंट को इनसे जोड़ा जाता है ताकि निवेश के लिए पैसा भेजा जा सके और जरूरत पड़ने पर रकम वापस ली जा सके। अकाउंट खोलने से पहले ब्रोकरेज चार्ज और दूसरे शुल्क की जानकारी जरूर समझ लेनी चाहिए।

    नए निवेशक के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि शुरुआत छोटी रकम से की जाए। शेयर बाजार में एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे धीरे निवेश करने की आदत बनाना ज्यादा बेहतर हो सकता है। किसी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके कारोबार कंपनी की कमाई कर्ज भविष्य की योजनाओं और उद्योग की स्थिति को समझना चाहिए। केवल सोशल मीडिया या किसी दोस्त की सलाह पर शेयर खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।

    शेयर मार्केट में निवेश करते समय यह भी समझना जरूरी है कि हर दिन शेयर की कीमत ऊपर नहीं जाएगी। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य बात है। कई बार अच्छी कंपनियों के शेयर भी बाजार की परिस्थितियों के कारण नीचे आ सकते हैं। ऐसे समय में घबराकर तुरंत बेचने के बजाय निवेश के उद्देश्य और कंपनी की वास्तविक स्थिति को देखना चाहिए। हालांकि किसी भी निवेश में नुकसान की संभावना बनी रहती है इसलिए अपनी जोखिम क्षमता को समझना बेहद जरूरी है।

    शुरुआती निवेशकों के लिए लंबी अवधि का नजरिया रखना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। मजबूत कारोबार वाली कंपनियों में शोध के बाद निवेश करके समय के साथ अपने निवेश को बढ़ाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। इसके अलावा अलग अलग कंपनियों और क्षेत्रों में पैसा बांटकर निवेश करने से किसी एक शेयर पर निर्भरता कम की जा सकती है। इसे डायवर्सिफिकेशन कहा जाता है।

    अगर कोई व्यक्ति रोज शेयर खरीदने और बेचने यानी ट्रेडिंग की शुरुआत करना चाहता है तो उसे ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। ट्रेडिंग में कीमतों में छोटे बदलाव से भी तेजी से लाभ या नुकसान हो सकता है। बिना पर्याप्त ज्ञान के इंट्राडे ट्रेडिंग या जोखिम वाले कारोबार में उतरना नुकसानदेह हो सकता है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शेयर मार्केट को जल्दी अमीर बनने का रास्ता नहीं समझना चाहिए। सही जानकारी अनुशासन धैर्य और जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश की शुरुआत करना ज्यादा जरूरी है। निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य तय करें आप कितना जोखिम उठा सकते हैं यह समझें और जिस पैसे की जल्द जरूरत पड़ सकती है उसे बाजार में लगाने से बचें। शेयर बाजार में सफलता किसी एक टिप या एक शेयर पर निर्भर नहीं होती बल्कि समझदारी और लगातार सीखने की आदत पर निर्भर करती है।

  • Gas Cylinder Booking: एलपीजी आपूर्ति सुधरने पर ग्रामीण ग्राहकों को राहत, शहरी उपभोक्ताओं के बराबर हुआ बुकिंग अंतराल

    Gas Cylinder Booking: एलपीजी आपूर्ति सुधरने पर ग्रामीण ग्राहकों को राहत, शहरी उपभोक्ताओं के बराबर हुआ बुकिंग अंतराल


    नई दिल्ली ।केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए गैस सिलेंडर की दोबारा बुकिंग के लिए निर्धारित न्यूनतम अंतराल को घटाकर 25 दिन कर दिया है। नए नियम के बाद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के घरेलू एलपीजी उपभोक्ता समान समय अंतराल पर अगला रिफिल बुक करा सकेंगे। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

    केंद्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने एलपीजी आपूर्ति की स्थिति में सुधार और लंबित रिफिल बुकिंग में कमी आने के बाद प्रतिबंधों में ढील दिए जाने की जानकारी दी। सरकार के अनुसार, मौजूदा आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होने के कारण ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए पहले निर्धारित 45 दिन की अवधि को कम किया गया है।

    इससे पहले ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव के दौरान ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग रिफिल बुकिंग व्यवस्था लागू थी। शहरी क्षेत्रों में घरेलू एलपीजी ग्राहक 25 दिन के अंतराल पर रिफिल बुक कर सकते थे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अगली बुकिंग के लिए 45 दिन का अंतराल निर्धारित किया गया था। अब यह अंतर समाप्त कर दिया गया है।

    सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब एलपीजी आपूर्ति से जुड़ी स्थिति में पहले की तुलना में सुधार हुआ है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के बीच घरेलू मांग पूरी करने और उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने कई स्तरों पर निगरानी और नियंत्रणात्मक उपाय किए थे।

    अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग तथा आपूर्ति संबंधी व्यवधान के दौरान अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा था। इसका असर एलपीजी की उपलब्धता पर भी पड़ा था। संभावित कमी को देखते हुए घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरत को प्राथमिकता देने के लिए सरकार ने रिफिल बुकिंग और आपूर्ति से जुड़े कुछ प्रतिबंध लागू किए थे।

    अब आपूर्ति व्यवस्था में सुधार आने के बाद ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी शहरी ग्राहकों के समान 25 दिन के अंतराल पर सिलेंडर बुक करने की अनुमति मिल गई है। इससे विशेष रूप से उन ग्रामीण परिवारों को सुविधा मिलने की उम्मीद है जिनकी घरेलू एलपीजी खपत अपेक्षाकृत अधिक है और जिन्हें पहले अगली बुकिंग के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था।

    पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियों को संशोधित व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग प्रक्रिया को सामान्य करना और एलपीजी की बेहतर उपलब्धता का लाभ सीधे घरेलू ग्राहकों तक पहुंचाना है।

    सरकार ने इससे पहले वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति पर लगाए गए प्रतिबंधों में भी चरणबद्ध तरीके से राहत दी थी। जून में गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी की आपूर्ति को संघर्ष-पूर्व स्तरों के अनुरूप सामान्य करने के निर्देश दिए गए थे। इससे उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपनी जरूरत के अनुसार गैस उपलब्ध कराने की दिशा में राहत मिली।

    ऊर्जा संकट के दौरान व्यावसायिक गतिविधियों पर असर कम करने के लिए वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति को संकट से पहले की खपत के 50 प्रतिशत तक बहाल करने की अनुमति भी दी गई थी। बाद में आपूर्ति की स्थिति में सुधार के साथ प्रतिबंधों में और ढील दी गई।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए घरेलू एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के उपाय किए थे। अब ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन की रिफिल बुकिंग व्यवस्था लागू होने से देशभर में घरेलू एलपीजी ग्राहकों के लिए नियम अधिक समान हो गया है।

  • NSE और BSE के प्री-ओपन नियमों में हुआ बदला…. जानें निवेशकों पर इसका क्या होगा असर?

    NSE और BSE के प्री-ओपन नियमों में हुआ बदला…. जानें निवेशकों पर इसका क्या होगा असर?


    नई दिल्ली।
    अगर आप भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market) में निवेश करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारत के दोनों प्रमुख शेयर बाजारों, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange- NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (Bombay Stock Exchange-BSE) के प्री-ओपन नियम (Pre-open Rules changed) बदल रहे हैं। दोनों ने आज, 7 सितंबर 2026 से प्री-ओपन सेशन (सुबह 9 बजे से 9:15 बजे तक) के नियमों में बदलाव किया है।


    नए नियमों में क्या-क्या बदलाव हुआ है?

    9:00 से 9:05 बजे तक: इस दौरान मार्केट ऑर्डर जो बिना कीमत तय किए तुरंत खरीद-बिक्री के ऑर्डर होते हैं और लिमिट ऑर्डर यानी तय कीमत पर खरीद-बिक्री के ऑर्डर, दोनों डाले जा सकते हैं।
    9:05 से 9:10 बजे तक: इस दौरान सिर्फ लिमिट ऑर्डर ही डाले, बदले या रद्द किए जा सकते हैं। मार्केट ऑर्डर नहीं डाले जा सकते। पहले यह समय 9:07 बजे तक था, जिसे बढ़ाकर 9:10 बजे कर दिया गया है। कीमत तय करते समय अब मार्केट ऑर्डर को लिमिट ऑर्डर से पहले प्राथमिकता दी जाएगी।


    इसका निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा?

    जो निवेशक रात भर की खबरों या वैश्विक बाजारों के उतार-चढ़ाव के आधार पर ATM (एट-द-मार्केट) ऑर्डर देते हैं, उन्हें अपने मार्केट ऑर्डर सुबह 9:05 बजे से पहले ही डालने होंगे। बाजार में हेराफेरी रुकेगी: इस बदलाव से बाजार में हेराफेरी रुकेगी। पहले कुछ बड़े निवेशक ऑर्डर विंडो के आखिरी समय में नकली बड़े मार्केट ऑर्डर डालकर कीमतें ऊपर-नीचे करते थे और फिर मैचिंग से पहले उन्हें रद्द कर देते थे। अब 9:05 बजे के बाद मार्केट ऑर्डर नहीं डाले जा सकते, इसलिए ऐसी गड़बड़ी नहीं हो पाएगी।

    मार्केट ऑर्डर को पूरा करने में मदद मिलेगी: अगर आपको अपना ऑर्डर पक्का करवाना है यानी खरीद-बिक्री तय होनी चाहिए, तो आपको मार्केट ऑर्डर पहले 5 मिनट (9:00-9:05) के अंदर डालना होगा। 9:05 से 9:10 बजे के बीच डाले गए लिमिट ऑर्डर बाजार में लिक्विडिटी प्रदान करेंगे, जिससे मार्केट ऑर्डर को पूरा करने में मदद मिलेगी।

    अचानक कीमत में उछाल नहीं आएगा: निवेशक 9:05-9:10 की विंडो में शुरुआती ऑर्डर फ्लो को देखकर अपनी रणनीति बना सकते हैं, क्योंकि इस दौरान मार्केट ऑर्डर न होने से अचानक कीमत में उछाल नहीं आएगा। यह नया स्ट्रक्चर पिछले महीने शुरू की गई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की प्रक्रिया के समान है, जिससे कीमतों का सही पता लगाने में स्थिरता आएगी।

  • यूरोप के डीजल बाजार में भारत की पकड़ मजबूत, बाब-अल-मंदेब मार्ग से अगस्त में 60 प्रतिशत कार्गो भारतीय रिफाइनरियों से

    यूरोप के डीजल बाजार में भारत की पकड़ मजबूत, बाब-अल-मंदेब मार्ग से अगस्त में 60 प्रतिशत कार्गो भारतीय रिफाइनरियों से


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक ऊर्जा व्यापार में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। रूस से डीजल आपूर्ति में आई बड़ी गिरावट और अमेरिका से निर्यात कमजोर पड़ने के बीच भारतीय रिफाइनरियां यूरोप की ईंधन जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बनकर उभरी हैं। ऊर्जा बाजार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में बाब-अल-मंदेब समुद्री मार्ग से यूरोप पहुंचने वाले डीजल कार्गो का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा भारत की रिफाइनरियों से आया।

    अगस्त के दौरान यूरोप की ओर जाने वाले करीब दो लाख बैरल प्रतिदिन डीजल और गैसऑयल कार्गो ने बाब-अल-मंदेब मार्ग का इस्तेमाल किया। यह मात्रा पिछले वर्ष के आसपास ही रही। हालांकि इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग पर मार्च और अप्रैल 2026 में आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। ऐसे समय में भारतीय रिफाइनरियों ने यूरोप की पूर्वी ईंधन आपूर्ति शृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वैकल्पिक स्रोत की जरूरत को पूरा करने में योगदान दिया।

    भारत की बढ़ती भूमिका का प्रमुख आधार उसका विशाल रिफाइनिंग नेटवर्क है। देश में वर्तमान में करीब 258.1 मिलियन टन सालाना की स्थापित तेल शोधन क्षमता है। इस क्षमता के मामले में भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में शामिल है। देश की रिफाइनिंग क्षमता घरेलू ईंधन मांग से अधिक होने के कारण भारतीय कंपनियों के पास पेट्रोलियम उत्पादों के बड़े पैमाने पर निर्यात की पर्याप्त गुंजाइश रहती है।

    वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने करीब 6.15 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया। इससे वैश्विक परिष्कृत ईंधन बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत हुई है। यूरोप में डीजल की मांग के बीच प्रतिबंधों, रिफाइनरी व्यवधानों और व्यापार मार्गों में बदलाव ने वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की जरूरत बढ़ाई है। भारतीय रिफाइनरियों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।

    हालांकि यूरोपीय बाजार में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चिंता देश को मिलने वाले कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर है। अगस्त में भारत को मिलने वाले कच्चे तेल और कंडेनसेट की आपूर्ति लगातार दूसरे महीने घटकर करीब 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। एक साल पहले यह मात्रा लगभग 48 लाख बैरल प्रतिदिन थी। कच्चे तेल की उपलब्धता घटने पर निर्यात के लिए तैयार किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर भी असर पड़ सकता है।

    दूसरी ओर रूस से यूरोप जाने वाले डीजल और गैसऑयल निर्यात में भारी गिरावट आई है। अगस्त के शुरुआती 25 दिनों में रूस का समुद्री ईंधन निर्यात औसतन करीब 1.5 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। यह पिछले वर्ष के स्तर से लगभग 6.1 लाख बैरल प्रतिदिन कम है। रूस की रिफाइनिंग और निर्यात क्षमता पर ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाकर किए गए हमलों का भी असर पड़ा है।

    रूस की ओर से सितंबर की शुरुआत से डीजल निर्यात संबंधी कुछ प्रतिबंधों में राहत दिए जाने के बावजूद यूरोप को तत्काल बड़ी मात्रा में अतिरिक्त रूसी आपूर्ति मिलने की संभावना सीमित मानी जा रही है। ऐसे में यदि रूसी आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित रहती है और यूरोप में डीजल की मांग मजबूत बनी रहती है तो भारतीय रिफाइनरियों के लिए निर्यात के अवसर और बढ़ सकते हैं।

    हालांकि भारत के सामने कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और प्रतिस्पर्धी रिफाइनिंग मार्जिन कायम रखने की चुनौती होगी। यदि दोनों परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो यूरोप के ईंधन बाजार में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। यह बदलाव भारत की उस बदलती भूमिका को भी दर्शाता है जिसमें देश केवल बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।

  • सेंसेक्स और निफ्टी के लिए अगले सप्ताह अहम रहेंगे ये स्तर, जानिए सपोर्ट रेजिस्टेंस और बाजार की संभावित दिशा

    सेंसेक्स और निफ्टी के लिए अगले सप्ताह अहम रहेंगे ये स्तर, जानिए सपोर्ट रेजिस्टेंस और बाजार की संभावित दिशा

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह उतार चढ़ाव वाला और सतर्क कारोबार का रह सकता है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू राजनीतिक तनाव, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर सेंसेक्स और निफ्टी के महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों पर रहेगी।

    पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहा, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन दोनों प्रमुख सूचकांकों ने गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए बढ़त दर्ज की। शुक्रवार को सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 23,897.70 के स्तर पर पहुंचा। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 24,000 का स्तर पार किया, लेकिन अंतिम चरण में इसकी ज्यादातर बढ़त कम हो गई।

    तकनीकी संकेतों के लिहाज से सेंसेक्स के लिए 77,000 से 77,500 का क्षेत्र शुरुआती रेजिस्टेंस माना जा रहा है। इसके ऊपर 77,700 से 78,000 का दायरा महत्वपूर्ण बाधा बन सकता है। यदि सूचकांक 78,000 के ऊपर मजबूती से टिकने में कामयाब रहता है तो बाजार में तेजी का नया दौर देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में सेंसेक्स 78,500 से 78,800 की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर सकता है।

    हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में सेंसेक्स अभी सुधार और समेकन के दौर में दिखाई दे रहा है। यदि ऊपरी स्तरों पर खरीदारी का समर्थन कमजोर रहता है तो मुनाफावसूली बढ़ सकती है। इससे सूचकांक सीमित दायरे में रह सकता है और निवेशकों को हर तेजी के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। इस स्तर के ऊपर टिके रहना बाजार की मजबूती के लिए अहम होगा। यदि निफ्टी लगातार 23,800 के नीचे बंद होता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और सूचकांक 23,600 के आसपास पहुंच सकता है। इसके विपरीत ऊपर की ओर 24,000 से 24,200 का क्षेत्र प्रमुख रेजिस्टेंस रहेगा।

    विशेषज्ञों के मुताबिक जब तक निफ्टी 24,000 से 24,200 के दायरे को निर्णायक रूप से पार नहीं करता, तब तक बाजार में पूरी तरह मजबूत तेजी की पुष्टि नहीं मानी जा सकती। इस दौरान निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली कर सकते हैं और कारोबार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

    बाजार की धारणा पर कच्चे तेल की कीमतों का असर भी महत्वपूर्ण रहेगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच जारी टकराव से ऊर्जा बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर किसी भी तरह की बाधा की आशंका कच्चे तेल की कीमतों को और प्रभावित कर सकती है। ऊंची तेल कीमतें भारत के लिए महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी घरेलू बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही है और बड़ी गिरावट को सीमित करने में मदद कर रही है। आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर विदेशी निवेश प्रवाह, रुपये की चाल, अमेरिकी ब्याज दरों के संकेत और वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर भी रहेगी।

    यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार आता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी होती है तो भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है। इसके विपरीत नकारात्मक वैश्विक संकेतों से निफ्टी के 23,800 और सेंसेक्स के 76,000 के आसपास के स्तरों की मजबूती की परीक्षा हो सकती है। ऐसे में अगले सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में तकनीकी स्तरों के साथ वैश्विक घटनाक्रम की भूमिका अहम रहने की संभावना है।