Category: Economy

  • यूरोप के तीन देशों के दौरे पर जाएंगे पीयूष गोयल, व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी सहयोग को नई दिशा देने पर रहेगा फोकस

    यूरोप के तीन देशों के दौरे पर जाएंगे पीयूष गोयल, व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी सहयोग को नई दिशा देने पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली ।
    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 13 से 17 जुलाई तक स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर जाएंगे। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और यूरोप के बीच व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी, नवाचार और टिकाऊ विकास के क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देना है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री विभिन्न सरकारी प्रतिनिधियों, उद्योग संगठनों और वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में भाग लेंगे।

    इस दौरे में पीयूष गोयल भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। प्रतिनिधिमंडल में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रत्न एवं आभूषण, फूड प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर और डिजाइन जैसे क्षेत्रों की प्रमुख भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सरकार का उद्देश्य भारतीय उद्योगों और यूरोपीय कंपनियों के बीच प्रत्यक्ष कारोबारी साझेदारी को बढ़ावा देना तथा नए निवेश अवसरों की पहचान करना है।

    यात्रा का पहला चरण स्पेन में होगा, जहां केंद्रीय मंत्री उद्योग संगठनों की ओर से आयोजित एक विशेष बिजनेस राउंडटेबल में भाग लेंगे। इस बैठक में ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, रेलवे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि इस मंच पर भविष्य की साझेदारी और निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे।

    भारत और स्पेन के बीच यह संवाद ऐसे समय हो रहा है जब दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कई स्पेनिश कंपनियों ने भारत में अपने निवेश और कारोबार का विस्तार किया है। वहीं भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी कंपनियां भी स्पेन में अपनी उपस्थिति लगातार मजबूत कर रही हैं, जिससे दोनों देशों के आर्थिक संबंध और गहरे हुए हैं।

    दौरे के दूसरे चरण में भारतीय प्रतिनिधिमंडल 14 और 15 जुलाई को बेल्जियम पहुंचेगा। यहां पीयूष गोयल यूरोप के प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्र एंटवर्प पोर्ट का दौरा करेंगे। इस दौरान मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, ग्रीन लॉजिस्टिक्स और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बनाने से जुड़े विभिन्न मॉडलों का अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही वे कई प्रमुख वैश्विक औद्योगिक समूहों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीईओ स्तर की बैठकें भी करेंगे।

    बेल्जियम में केंद्रीय मंत्री भारत-यूरोपीय संघ बिजनेस राउंडटेबल और ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की बैठकों में भी भाग लेंगे। इन बैठकों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश, व्यापार को सरल बनाने, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, टिकाऊ औद्योगिक विकास और मजबूत सप्लाई चेन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। इन वार्ताओं का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाना है।

    दौरे के अंतिम चरण में 16 और 17 जुलाई को प्रतिनिधिमंडल फिनलैंड जाएगा। यहां आयोजित इंडिया-फिनलैंड बिजनेस राउंडटेबल में डिजिटलाइजेशन, क्लीन एनर्जी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर विचार किया जाएगा। इस यात्रा को भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति के महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक साझेदारी मजबूत होने, निवेश बढ़ने और भारतीय उद्योगों के लिए नए कारोबारी अवसर खुलने की उम्मीद है।

  • Dividend Alert: सोमवार को एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे 5 बड़े शेयर, जानिए किस कंपनी ने कितना डिविडेंड घोषित किया और किन निवेशकों को मिलेगा सीधा लाभ

    Dividend Alert: सोमवार को एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे 5 बड़े शेयर, जानिए किस कंपनी ने कितना डिविडेंड घोषित किया और किन निवेशकों को मिलेगा सीधा लाभ


    नई दिल्ली ।
    अगले कारोबारी सप्ताह की शुरुआत डिविडेंड निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाली है। सोमवार 13 जुलाई को शेयर बाजार में पांच कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड पर कारोबार करेंगे। इनमें महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज, भंसाली इंजीनियरिंग पॉलिमर्स, सुपर सेल्स इंडिया, एक्सप्रो इंडिया और इंगरसोल-रैंड (इंडिया) शामिल हैं। इन कंपनियों ने अपने-अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड घोषित किया है। ऐसे में केवल वे निवेशक इसका लाभ प्राप्त कर सकेंगे जिनके नाम रिकॉर्ड डेट तक कंपनी के शेयरधारकों की सूची में दर्ज होंगे।

    एक्स-डिविडेंड डेट शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण अवधारणा मानी जाती है। इस तारीख के बाद यदि कोई निवेशक संबंधित कंपनी का शेयर खरीदता है तो वह घोषित डिविडेंड का पात्र नहीं होता। इसलिए डिविडेंड का लाभ लेने के इच्छुक निवेशकों को एक्स-डिविडेंड डेट से पहले शेयर खरीदना आवश्यक होता है। इसी वजह से रिकॉर्ड डेट और एक्स-डिविडेंड डेट का विशेष महत्व माना जाता है।

    महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपने शेयरधारकों के लिए 7.50 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है। कंपनी की एक्स-डिविडेंड डेट 13 जुलाई निर्धारित की गई है। मौजूदा समय में कंपनी का शेयर करीब 341 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। समय पर शेयर रखने वाले पात्र निवेशकों को कंपनी की ओर से घोषित लाभांश का फायदा मिलेगा।

    सुपर सेल्स इंडिया ने भी अपने निवेशकों के लिए 2.50 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है। कंपनी के शेयर सोमवार को एक्स-डिविडेंड हो जाएंगे। इसका अर्थ यह है कि एक्स-डिविडेंड डेट के बाद शेयर खरीदने वाले निवेशक इस डिविडेंड के पात्र नहीं होंगे। कंपनी का शेयर फिलहाल लगभग 866.85 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

    एक्सप्रो इंडिया ने अपने शेयरधारकों को 2 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देने का निर्णय लिया है। कंपनी की एक्स-डिविडेंड डेट भी 13 जुलाई तय की गई है। कंपनी का शेयर करीब 1455 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। डिविडेंड के साथ-साथ निवेशक कंपनी के दीर्घकालिक प्रदर्शन पर भी नजर बनाए हुए हैं।

    इंगरसोल-रैंड (इंडिया) ने इस सूची में सबसे अधिक 20 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है। कंपनी की एक्स-डिविडेंड डेट भी 13 जुलाई ही है। वर्तमान में इसका शेयर लगभग 4466.80 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। अधिक डिविडेंड की घोषणा के कारण यह शेयर निवेशकों के बीच विशेष चर्चा में बना हुआ है।

    भंसाली इंजीनियरिंग पॉलिमर्स ने 1 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है। कंपनी ने 13 जुलाई को ही रिकॉर्ड डेट और एक्स-डिविडेंड डेट निर्धारित की है। कंपनी का शेयर फिलहाल करीब 103.10 रुपये पर कारोबार कर रहा है। रिकॉर्ड डेट से पहले शेयर रखने वाले निवेशक घोषित लाभांश प्राप्त करने के पात्र होंगे।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि डिविडेंड निवेशकों के लिए नियमित आय का एक महत्वपूर्ण माध्यम होता है, लेकिन केवल डिविडेंड को आधार बनाकर निवेश का निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, भविष्य की विकास संभावनाओं, लाभप्रदता और दीर्घकालिक प्रदर्शन का भी मूल्यांकन करना चाहिए। एक्स-डिविडेंड डेट के आसपास शेयरों में कीमतों में सामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, इसलिए निवेश से पहले सभी पहलुओं पर सावधानीपूर्वक विचार करना आवश्यक है।

  • AI रणनीति ने बदली IT कंपनी की तस्वीर, पहली तिमाही में 17% बढ़ा मुनाफा, 1.68 अरब डॉलर के नए ऑर्डर से मजबूत हुई भविष्य की कारोबारी संभावनाएं

    AI रणनीति ने बदली IT कंपनी की तस्वीर, पहली तिमाही में 17% बढ़ा मुनाफा, 1.68 अरब डॉलर के नए ऑर्डर से मजबूत हुई भविष्य की कारोबारी संभावनाएं

    नई दिल्ली । आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एलटीआईमाइंडट्री ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का एकीकृत शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 1,466 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 1,254 करोड़ रुपये था। बेहतर आय और लगातार बढ़ती कारोबारी मांग ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी है।

    पहली तिमाही के दौरान कंपनी की परिचालन आय भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी। ऑपरेशन से प्राप्त राजस्व 17.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 11,608 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि एक वर्ष पहले यह 9,840.6 करोड़ रुपये था। पिछली तिमाही की तुलना में भी राजस्व में सुधार दर्ज किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनी लगातार नए व्यवसाय हासिल करने और मौजूदा ग्राहकों से कारोबार बढ़ाने में सफल रही है।

    तिमाही के दौरान कंपनी को लगभग 1.68 अरब डॉलर के नए ऑर्डर प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.1 प्रतिशत अधिक हैं। वहीं पिछले बारह महीनों में कुल ऑर्डर बुक का मूल्य बढ़कर 6.65 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह वृद्धि बताती है कि कंपनी की सेवाओं की मांग वैश्विक ग्राहकों के बीच लगातार बनी हुई है और भविष्य के लिए उसकी कारोबारी स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है।

    कंपनी का कहना है कि इस प्रदर्शन के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधानों पर केंद्रित रणनीति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभिन्न उद्योगों के ग्राहक अब AI तकनीक को तेजी से अपनाने की दिशा में निवेश कर रहे हैं, जिससे कंपनी को बड़े और दीर्घकालिक प्रोजेक्ट हासिल करने में मदद मिल रही है। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और ऑटोमेशन से जुड़े समाधान भी कंपनी की आय बढ़ाने में सहायक बने हैं।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक वेणु लाम्बू ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे इस बात का संकेत हैं कि AI-केंद्रित रणनीति व्यावसायिक रूप से सकारात्मक परिणाम दे रही है। उनके अनुसार ग्राहक अब AI आधारित समाधानों से वास्तविक कारोबारी लाभ प्राप्त कर रहे हैं, जिसके कारण कंपनी को अधिक मूल्य वाले प्रोजेक्ट और नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाली तिमाहियों में भी यह रणनीति कंपनी की विकास यात्रा को गति देगी।

    मानव संसाधन के मोर्चे पर कंपनी में 30 जून तक कुल 87,886 कर्मचारी कार्यरत थे। पिछली तिमाही की तुलना में कर्मचारियों की संख्या में 64 की मामूली कमी दर्ज की गई। वहीं पिछले बारह महीनों की कर्मचारी त्याग दर 13.3 प्रतिशत पर स्थिर रही, जिससे संकेत मिलता है कि कार्यबल की स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है।

    हालांकि वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा है, लेकिन शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन अब भी दबाव में है। इस वर्ष अब तक शेयर में 33 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले एक वर्ष में भी निवेशकों को लगभग 24 प्रतिशत का नुकसान हुआ है, जबकि तीन वर्षों के दौरान शेयर करीब 19 प्रतिशत कमजोर हुआ है। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि मजबूत तिमाही नतीजे, बढ़ती ऑर्डर बुक और AI आधारित रणनीति आने वाले समय में कंपनी के शेयर प्रदर्शन को कितनी मजबूती दे पाते हैं।

  • बाजार में गिरावट के बीच ब्रोकरेज हाउस का बड़ा भरोसा, JM Financial और Motilal Oswal ने Vedanta Aluminium, TCS और Dr Reddy's पर जताया विश्वास, 12 महीनों में 25% तक रिटर्न की संभावना

    बाजार में गिरावट के बीच ब्रोकरेज हाउस का बड़ा भरोसा, JM Financial और Motilal Oswal ने Vedanta Aluminium, TCS और Dr Reddy's पर जताया विश्वास, 12 महीनों में 25% तक रिटर्न की संभावना

    नई दिल्ली । शेयर बाजार ने सप्ताह का समापन दबाव के साथ किया, जहां वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और निवेशकों की सतर्कता का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला। निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि बाजार की इस कमजोरी के बीच प्रमुख ब्रोकरेज फर्म JM Financial और Motilal Oswal ने कुछ चुनिंदा कंपनियों के शेयरों को लेकर सकारात्मक रुख बनाए रखा है। दोनों संस्थानों का मानना है कि मौजूदा स्तरों पर कुछ गुणवत्ता वाले शेयर निवेशकों को अगले 12 महीनों में आकर्षक रिटर्न दे सकते हैं।

    JM Financial ने फार्मास्युटिकल क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Dr Reddy’s Laboratories पर अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने कंपनी के लिए 1,561 रुपये का लक्ष्य मूल्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य मौजूदा बाजार भाव की तुलना में करीब 25 प्रतिशत से अधिक संभावित बढ़त का संकेत देता है। हाल ही में कंपनी ने Semaglutide की व्यावसायिक आपूर्ति में देरी की जानकारी दी थी, जिसका कारण API के कुछ वैलिडेशन बैच का निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरना बताया गया।

    ब्रोकरेज का मानना है कि इस अस्थायी चुनौती के बावजूद कंपनी की दीर्घकालिक विकास संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। आने वाले वर्षों में नए उत्पादों की लॉन्चिंग और विस्तारित पोर्टफोलियो से कंपनी की आय में सकारात्मक योगदान मिलने की उम्मीद जताई गई है। इसी आधार पर JM Financial ने स्टॉक को मौजूदा मूल्यांकन पर निवेश के लिए आकर्षक माना है।

    वहीं Motilal Oswal ने Vedanta Aluminium पर पहली बार अपनी कवरेज शुरू करते हुए ‘बाय’ रेटिंग जारी की है। ब्रोकरेज ने कंपनी के शेयर के लिए 540 रुपये का लक्ष्य मूल्य तय किया है, जो हालिया बंद भाव की तुलना में लगभग 22 प्रतिशत संभावित बढ़त दर्शाता है। ब्रोकरेज के अनुसार डिमर्जर के बाद कंपनी अब भारत की सबसे बड़ी शुद्ध प्राइमरी एल्युमिनियम उत्पादक बन चुकी है और वैश्विक स्तर पर भी इसकी स्थिति काफी मजबूत हुई है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्पादन क्षमता, परिचालन दक्षता और बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए कंपनी के दीर्घकालिक प्रदर्शन की संभावनाएं बेहतर दिखाई देती हैं। यही कारण है कि ब्रोकरेज ने इसे धातु क्षेत्र के प्रमुख निवेश विकल्पों में शामिल किया है।

    आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Tata Consultancy Services पर भी Motilal Oswal ने अपनी सकारात्मक राय कायम रखी है। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 2,350 रुपये का लक्ष्य मूल्य दिया है, जो मौजूदा स्तर से करीब 14 प्रतिशत की संभावित बढ़त का संकेत देता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ से जुड़े जोखिम और कॉरपोरेट ग्राहकों की सतर्क रणनीति के कारण आईटी सेक्टर पर फिलहाल दबाव बना हुआ है।

    इसके बावजूद ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में तकनीकी सेवाओं की मांग में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है। कंपनी की प्रबंधन टिप्पणी भी पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक रही है, जिससे दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह शेयर आकर्षक माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर, बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव और वैश्विक चुनौतियों के बीच ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर साबित हो सकती है। Vedanta Aluminium, Dr Reddy’s Laboratories और Tata Consultancy Services ऐसे ही शेयरों में शामिल हैं, जिनमें अगले एक वर्ष के दौरान बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई गई है।

  • होर्मुज संकट की वापसी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी हलचल, अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने की सलाह

    होर्मुज संकट की वापसी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी हलचल, अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच भारत के लिए रणनीतिक तेल भंडार बढ़ाने की सलाह

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तेज हुए सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर आवाजाही प्रभावित किए जाने के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक पर संकट गहरा गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और तेल तथा गैस की वैश्विक आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इस स्थिति का असर ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों, विशेषकर भारत, पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की कुल समुद्री तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा वहन करता है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिससे पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस जैसी आवश्यक ईंधन वस्तुओं की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।

    अर्थशास्त्री और योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने इस स्थिति को भारत के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी बताया है। उनका कहना है कि देश को अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का तेजी से विस्तार करना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक आपूर्ति संकट का प्रभाव सीमित किया जा सके। उनके अनुसार सीमित आपूर्ति मार्गों और कम आपातकालीन भंडार पर अत्यधिक निर्भरता ऊर्जा सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करती है।

    उन्होंने कहा कि पिछले होर्मुज संकट ने यह स्पष्ट कर दिया था कि केवल एक या दो आपूर्ति मार्गों पर निर्भर रहना दीर्घकालिक समाधान नहीं है। भारत को विभिन्न देशों से ऊर्जा आयात बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू भंडारण क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि करनी होगी। वर्तमान में देश के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार की क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है, जिसे विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर स्थित भंडारण केंद्रों में सुरक्षित रखा जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पिछली बार उत्पन्न संकट के दौरान भारत ने वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों और सरकार द्वारा अपनाई गई रणनीतियों के कारण स्थिति को अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से संभाला था। ऊर्जा आयात के विविधीकरण, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने और आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाने जैसे कदमों ने संभावित संकट के प्रभाव को काफी हद तक कम किया। यही अनुभव भविष्य की रणनीति तैयार करने में भी उपयोगी माना जा रहा है।

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार केवल तेल ही नहीं, बल्कि हर महत्वपूर्ण संसाधन के लिए आपूर्ति के अनेक स्रोत विकसित करना समय की आवश्यकता है। किसी एक क्षेत्र या मार्ग पर अत्यधिक निर्भरता भू-राजनीतिक तनाव के समय आर्थिक जोखिम को बढ़ा सकती है। इसलिए भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा का सबसे प्रभावी रास्ता रणनीतिक भंडार का विस्तार और आयात स्रोतों का व्यापक विविधीकरण माना जा रहा है।

    इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक बना रहता है या आपूर्ति बाधित होती है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। ऐसे परिदृश्य में भारत के लिए समय रहते ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े दीर्घकालिक निवेश और रणनीतिक तैयारी को प्राथमिकता देना आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • सरकारी गारंटी, आकर्षक ब्याज और नियमित आय, जानिए कैसे एक बार का निवेश बन सकता है हर महीने कमाई का जरिया

    सरकारी गारंटी, आकर्षक ब्याज और नियमित आय, जानिए कैसे एक बार का निवेश बन सकता है हर महीने कमाई का जरिया

    नई दिल्ली । सुरक्षित निवेश और नियमित आय की तलाश करने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए पोस्ट ऑफिस की सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (SCSS) एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में सामने आ रही है। सरकार की गारंटी वाली इस योजना में एकमुश्त निवेश करने के बाद तय अवधि तक नियमित ब्याज आय प्राप्त की जा सकती है। यही कारण है कि बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह योजना सेवानिवृत्त लोगों और सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले परिवारों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रही है।

    इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें निवेश की सुरक्षा पूरी तरह सरकार के संरक्षण में रहती है। निवेशक एक बार राशि जमा करने के बाद तय ब्याज दर के अनुसार नियमित आय प्राप्त करते हैं। वर्तमान में इस योजना पर 8.2 प्रतिशत वार्षिक ब्याज उपलब्ध है, जिसका भुगतान प्रत्येक तिमाही किया जाता है। इस व्यवस्था से निवेशकों को नियमित नकदी प्रवाह मिलता है और दैनिक खर्चों की योजना बनाना आसान हो जाता है।

    सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम में निवेश की शुरुआत एक हजार रुपये से की जा सकती है। योजना के तहत व्यक्तिगत और संयुक्त दोनों प्रकार के खाते खोले जा सकते हैं। निर्धारित सीमा के भीतर निवेश करने की सुविधा होने से अलग-अलग जरूरतों वाले निवेशकों के लिए यह योजना उपयोगी साबित होती है। हालांकि निवेश से पहले पात्रता और अधिकतम निवेश सीमा से जुड़े सभी नियमों की जानकारी लेना आवश्यक माना जाता है।

    योजना की परिपक्वता अवधि पांच वर्ष निर्धारित है। यदि निवेशक चाहें तो नियमानुसार अवधि पूरी होने तक निवेश जारी रख सकते हैं। वहीं समय से पहले खाता बंद कराने पर निर्धारित नियमों के अनुसार कटौती या पेनल्टी का प्रावधान भी लागू होता है। इसलिए विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे योजना में निवेश करते समय अपनी भविष्य की वित्तीय आवश्यकताओं का सही आकलन अवश्य करें।

    इस योजना का एक अन्य महत्वपूर्ण लाभ आयकर से जुड़ा है। पुराने आयकर ढांचे के तहत पात्र निवेशकों को आयकर अधिनियम की धारा 80C के अंतर्गत निर्धारित सीमा तक कर छूट का लाभ भी मिल सकता है। इस कारण यह योजना केवल नियमित आय का माध्यम ही नहीं बल्कि कर बचत का विकल्प भी बन जाती है। यही वजह है कि कई सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी बचत का एक हिस्सा इस योजना में निवेश करना पसंद करते हैं।

    मासिक आय के संदर्भ में यदि कोई निवेशक लगभग 22 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश करता है और उस पर 8.2 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू रहता है, तो तिमाही ब्याज की राशि लगभग 45 हजार रुपये के आसपास बनती है। औसत मासिक आधार पर यह राशि करीब 15 हजार रुपये बैठती है। हालांकि वास्तविक भुगतान तिमाही आधार पर ही किया जाता है और ब्याज दरों में भविष्य में सरकार द्वारा समय-समय पर बदलाव भी किया जा सकता है।

    वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना उन लोगों के लिए अधिक उपयुक्त है जो बाजार के जोखिम से दूर रहकर स्थिर आय चाहते हैं। निवेश करने से पहले पात्रता, ब्याज दर, अधिकतम निवेश सीमा, कर नियम और समयपूर्व निकासी से जुड़े प्रावधानों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। सही वित्तीय योजना के साथ यह सरकारी योजना वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित निवेश, नियमित आय और वित्तीय स्थिरता का मजबूत आधार प्रदान कर सकती है।

  • Gold Price Prediction: रिकॉर्ड गिरावट के बाद क्या खत्म हो गया सोने का डाउनफॉल, दिवाली तक कैसी रहेगी चाल और निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?

    Gold Price Prediction: रिकॉर्ड गिरावट के बाद क्या खत्म हो गया सोने का डाउनफॉल, दिवाली तक कैसी रहेगी चाल और निवेशकों के लिए क्या है सही रणनीति?

    नई दिल्ली । वर्ष 2026 में सोने और चांदी के दामों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों और आम खरीदारों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है। जहां सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 33 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है, वहीं चांदी में लगभग 1.66 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। लगातार कमजोर होती कीमतों के बीच बाजार में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह खरीदारी का सही समय है या फिर कीमतों में अभी और गिरावट देखने को मिल सकती है।

    इस वर्ष की शुरुआत में सोने और चांदी दोनों ने नए उच्च स्तर बनाए थे, लेकिन उसके बाद बाजार का रुख पूरी तरह बदल गया। सोना अपने सर्वोच्च स्तर से फिसलकर करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जबकि चांदी भी रिकॉर्ड ऊंचाई से काफी नीचे आ चुकी है। घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, महंगाई से जुड़े आंकड़े, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में बदलाव ने सोने की मांग को प्रभावित किया है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं और बॉन्ड पर बेहतर रिटर्न मिलता है, तब निवेशकों का रुझान सोने जैसे ब्याज रहित निवेश से हटकर अन्य विकल्पों की ओर बढ़ जाता है। इसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई देता है।

    अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। मजबूत डॉलर के कारण अन्य देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मांग कमजोर पड़ती है। इसके अलावा रिकॉर्ड तेजी के बाद निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली ने भी कीमतों में तेज गिरावट को बढ़ावा दिया है। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि हाल के महीनों में यही सबसे बड़ा कारण रहा है, जिसने दोनों धातुओं को नीचे खींचा।

    हालांकि लंबी अवधि के दृष्टिकोण से तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं मानी जा रही है। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि सोना अब अपने निचले स्तर के करीब पहुंच चुका है और इसमें बहुत बड़ी अतिरिक्त गिरावट की संभावना सीमित है। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि और कमजोरी आती भी है तो वह लगभग पांच प्रतिशत तक सीमित रह सकती है। इसके बाद वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के चलते सोने में दोबारा मजबूती देखने को मिल सकती है।

    बाजार की दिशा पर भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग फिर बढ़ सकती है। वहीं वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और आर्थिक स्थिरता आने पर कीमतों में सीमित दबाव बना रह सकता है। इसलिए आने वाले महीनों में निवेशकों की नजरें वैश्विक घटनाओं और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर बनी रहेंगी।

    दिवाली और धनतेरस जैसे पारंपरिक खरीदारी के मौसम को देखते हुए भी बाजार में उत्सुकता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां सामान्य रहती हैं तो सोने की कीमतें सीमित दायरे में रह सकती हैं, जबकि तनाव बढ़ने की स्थिति में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय अपनी वित्तीय जरूरतों और दीर्घकालिक निवेश रणनीति के आधार पर निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है। लगातार बदलते आर्थिक संकेतकों के बीच आने वाले महीनों में सोने और चांदी की चाल वैश्विक बाजारों की दिशा पर काफी हद तक निर्भर करेगी।

  • भारतीय बाजार में लौटा विदेशी निवेश का विश्वास, मजबूत अर्थव्यवस्था और स्थिर रुपया बने एफपीआई आकर्षण की बड़ी वजह

    भारतीय बाजार में लौटा विदेशी निवेश का विश्वास, मजबूत अर्थव्यवस्था और स्थिर रुपया बने एफपीआई आकर्षण की बड़ी वजह


    नई दिल्ली । भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद, रुपए की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति और निवेश से जुड़े नीतिगत सुधारों का असर अब विदेशी पोर्टफोलियो निवेश पर भी दिखाई देने लगा है। जुलाई के शुरुआती दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार में शुद्ध निवेश किया है, जिससे घरेलू वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की स्थिर आर्थिक स्थिति और सुधारवादी नीतियां वैश्विक निवेशकों का विश्वास लगातार मजबूत कर रही हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा डेट निवेश से जुड़े कर नियमों में किए गए बदलावों ने विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को अधिक आकर्षक बनाया है। इसके साथ ही रुपए में अपेक्षाकृत स्थिरता रहने से मुद्रा जोखिम कम हुआ है, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इन दोनों कारणों ने जुलाई के पहले दस दिनों में विदेशी निवेश प्रवाह को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने जुलाई की शुरुआत में शेयर और अन्य निवेश श्रेणियों में उल्लेखनीय निवेश किया है। इसके अलावा डेट मार्केट में भी निवेश लगातार बढ़ रहा है। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशक केवल इक्विटी बाजार ही नहीं, बल्कि भारतीय ऋण बाजार में भी दीर्घकालिक संभावनाएं देख रहे हैं। इससे भारतीय वित्तीय बाजारों की मजबूती और निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत मिलता है।

    आर्थिक जानकारों का कहना है कि भारत के मजबूत व्यापक आर्थिक संकेतक भी इस बदलाव की प्रमुख वजह हैं। नियंत्रित महंगाई, बेहतर आर्थिक विकास दर, मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार ने वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की छवि को और मजबूत किया है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद विदेशी निवेशक भारत को अपेक्षाकृत सुरक्षित और बेहतर निवेश गंतव्य के रूप में देख रहे हैं।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वैश्विक स्तर पर कुछ अन्य बाजारों में निवेश घटने का लाभ भी भारत को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय निवेशक अपने निवेश पोर्टफोलियो में बदलाव करते हुए ऐसे देशों की ओर रुख कर रहे हैं जहां आर्थिक आधार मजबूत हो और भविष्य में बेहतर प्रतिफल की संभावना दिखाई देती हो। भारत इस समय ऐसे प्रमुख बाजारों में शामिल है, जहां विकास की संभावनाएं लगातार बनी हुई हैं।

    हालांकि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव अभी भी निवेशकों की चिंता का विषय बने हुए हैं। पश्चिम एशिया की परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर समय-समय पर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता है। इसके बावजूद यदि अंतरराष्ट्रीय हालात अधिक नहीं बिगड़ते हैं तो भारत में विदेशी निवेश का सकारात्मक रुख आगे भी जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे, प्रमुख आर्थिक आंकड़े और वैश्विक घटनाक्रम निवेशकों की रणनीति तय करेंगे। यदि घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने रहते हैं और नीतिगत स्थिरता कायम रहती है, तो विदेशी निवेश में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे भारतीय पूंजी बाजार को मजबूती मिलेगी, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और देश की आर्थिक विकास यात्रा को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • 'हाई-फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक बैरोमीटर' से आर्थिक निगरानी होगी और मजबूत, छोटे कारोबारियों को मिलेगा बड़ा सहारा, नीति निर्माण में आएगी नई तेजी

    'हाई-फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक बैरोमीटर' से आर्थिक निगरानी होगी और मजबूत, छोटे कारोबारियों को मिलेगा बड़ा सहारा, नीति निर्माण में आएगी नई तेजी

    नई दिल्ली । देश की अर्थव्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और डेटा आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार 14 जुलाई को ‘हाई-फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक बैरोमीटर’ लॉन्च करने जा रही है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य अर्थव्यवस्था की स्थिति का लगभग वास्तविक समय में आकलन करना है, जिससे सरकार तेजी और अधिक सटीकता के साथ आर्थिक नीतियां तैयार कर सके। व्यापारिक संगठनों ने इस पहल को छोटे कारोबारियों, खुदरा व्यापारियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है।

    इस नई प्रणाली के तहत अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न प्रमुख संकेतकों को एक मंच पर जोड़ा जाएगा। इनमें जीएसटी संग्रह, यूपीआई लेनदेन, ई-वे बिल, माल ढुलाई, बिजली की खपत, बैंकिंग गतिविधियां, डिजिटल कॉमर्स और अन्य महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े शामिल होंगे। इन सभी सूचनाओं के आधार पर सरकार को देश की आर्थिक गतिविधियों का अधिक सटीक और त्वरित आकलन प्राप्त होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक आर्थिक आंकड़ों के प्रकाशित होने में अक्सर समय लगता है, जिससे बदलती परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेना कठिन हो जाता है। ऐसे में हाई-फ्रीक्वेंसी इकोनॉमिक बैरोमीटर सरकार को वास्तविक समय के करीब आर्थिक संकेत उपलब्ध कराएगा, जिससे बदलते बाजार और उपभोक्ता व्यवहार के अनुरूप नीतियां तैयार करना आसान होगा।

    व्यापारिक संगठनों का कहना है कि इस पहल का सबसे बड़ा लाभ छोटे व्यापारियों, खुदरा कारोबारियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई क्षेत्र को मिलेगा। बाजार की मांग, उपभोक्ता व्यवहार और आर्थिक रुझानों की समय पर जानकारी मिलने से कारोबारी अपने निवेश, उत्पादन और व्यापारिक रणनीति को अधिक प्रभावी ढंग से तय कर सकेंगे। इससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और कारोबार का विस्तार करने में भी मदद मिलेगी।

    आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाएं, महंगाई का दबाव और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां लगातार अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। ऐसे समय में यह बैरोमीटर एक प्रभावी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की तरह कार्य कर सकता है, जिससे संभावित आर्थिक चुनौतियों की पहले ही पहचान कर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।

    इस पहल से नीति निर्माण की प्रक्रिया भी अधिक वैज्ञानिक और डेटा आधारित बनने की उम्मीद है। सरकार विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे बदलावों की निगरानी कर आर्थिक सुधारों को तेजी से लागू कर सकेगी। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा और उद्योग जगत को स्थिर एवं स्पष्ट आर्थिक संकेत प्राप्त होंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक और डेटा विश्लेषण पर आधारित ऐसी पहलें भविष्य की अर्थव्यवस्था की आवश्यकता हैं। यदि इस प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो भारत की आर्थिक निगरानी व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होगी। साथ ही व्यापार, निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की संभावना बढ़ेगी। आने वाले वर्षों में यह व्यवस्था देश की आर्थिक नीति निर्माण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • रेलवे, डिफेंस और ड्रोन सेक्टर पर दांव, 14 जुलाई से खुलेगा मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज का IPO; ग्रे मार्केट में 120% से अधिक प्रीमियम की चर्चा

    रेलवे, डिफेंस और ड्रोन सेक्टर पर दांव, 14 जुलाई से खुलेगा मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज का IPO; ग्रे मार्केट में 120% से अधिक प्रीमियम की चर्चा

    नई दिल्ली । हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में कार्यरत मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड अपना 160.34 करोड़ रुपये का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लेकर आ रही है। रेलवे, एयरोस्पेस, डिफेंस, मेट्रो, ड्रोन और सेमीकंडक्टर जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों के लिए अत्याधुनिक कंपोनेंट तैयार करने वाली कंपनी का यह इश्यू 14 जुलाई से निवेशकों के लिए खुलेगा। ग्रे मार्केट में मजबूत प्रीमियम की चर्चा के कारण इस आईपीओ ने बाजार सहभागियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। हालांकि ग्रे मार्केट प्रीमियम किसी भी शेयर के सूचीबद्ध होने के बाद उसके प्रदर्शन की गारंटी नहीं माना जाता।

    कंपनी का सार्वजनिक निर्गम 14 जुलाई से 16 जुलाई 2026 तक निवेश के लिए खुला रहेगा। शेयरों के आवंटन की प्रक्रिया 17 जुलाई को पूरी होने की संभावना है, जबकि कंपनी के शेयर 21 जुलाई को बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध हो सकते हैं। यह पूरा इश्यू फ्रेश शेयरों का है, इसलिए इससे जुटाई जाने वाली राशि सीधे कंपनी के विस्तार और परिचालन क्षमता बढ़ाने में उपयोग की जाएगी।

    मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज ने आईपीओ का प्राइस बैंड 315 रुपये से 331 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया है। आवेदन के लिए एक लॉट में 400 शेयर रखे गए हैं। खुदरा निवेशकों को न्यूनतम दो लॉट, यानी 800 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा। ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर इसके लिए लगभग 2.65 लाख रुपये का न्यूनतम निवेश आवश्यक होगा। वहीं, उच्च नेटवर्थ निवेशकों के लिए न्यूनतम आवेदन तीन लॉट का निर्धारित किया गया है, जिसके लिए लगभग 3.97 लाख रुपये का निवेश करना होगा।

    कंपनी ने बताया है कि आईपीओ से प्राप्त पूंजी का बड़ा हिस्सा उत्पादन क्षमता बढ़ाने में लगाया जाएगा। लगभग 61.03 करोड़ रुपये नई प्लांट एवं मशीनरी की खरीद पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा करीब 81.50 करोड़ रुपये कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करने में लगाए जाएंगे, जबकि शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। कंपनी का मानना है कि इससे उसकी विनिर्माण क्षमता और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी।

    वर्ष 2021 में स्थापित मिलवर्क्स टेक्नोलॉजीज हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग समाधान उपलब्ध कराती है। कंपनी रेलवे कोच के पुर्जे, ब्रेकिंग सिस्टम, डोर मैकेनिज्म, मेट्रो ट्रेन कपलर, एयरोस्पेस कंपोनेंट, ड्रोन पार्ट्स और सेमीकंडक्टर उद्योग में उपयोग होने वाले जटिल इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्माण करती है। इन क्षेत्रों में बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी अपने कारोबार के विस्तार की दिशा में लगातार निवेश कर रही है।

    कर्नाटक के बेंगलुरु में कंपनी की चार आधुनिक विनिर्माण इकाइयां संचालित हैं, जहां उन्नत सीएनसी मशीनिंग सेंटर, वायर ईडीएम मशीन, फाइबर लेजर कटिंग सिस्टम और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जाते हैं। आधुनिक तकनीक और विशेष इंजीनियरिंग क्षमता के कारण कंपनी ने हाई-प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।

    बाजार में इस आईपीओ को लेकर उत्साह का एक कारण इसका मजबूत ग्रे मार्केट प्रीमियम भी बताया जा रहा है। हालांकि निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आईपीओ में निवेश का निर्णय केवल ग्रे मार्केट प्रीमियम के आधार पर नहीं लिया जाना चाहिए। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं, जोखिम कारकों और मूल्यांकन का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने के बाद ही निवेश संबंधी फैसला करना चाहिए।