Category: Economy

  • निर्मला सीतारमण ने न्यूयॉर्क में वैश्विक कंपनियों के सीईओ से मुलाकात कर भारत में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया

    निर्मला सीतारमण ने न्यूयॉर्क में वैश्विक कंपनियों के सीईओ से मुलाकात कर भारत में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया

    नई दिल्ली ।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने न्यूयॉर्क में वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं। इन बातचीत में उन्होंने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत डिजिटल आधारभूत ढांचे और वित्तीय क्षेत्र में मौजूद निवेश अवसरों को रेखांकित करते हुए विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया।

    टिलमैन होल्डिंग्स के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव आहूजा के साथ हुई बैठक में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर विशेष चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि हालिया बजट घोषणाओं सहित सरकार की नीतिगत दिशा डिजिटल क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है।

    उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल सेवाओं और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख किया। इन क्षेत्रों के विस्तार के साथ भारत में डेटा सेंटर, हाई कैपेसिटी नेटवर्क और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर की मांग भी बढ़ रही है।

    सीतारमण ने कहा कि इस बदलते डिजिटल परिदृश्य में टिलमैन होल्डिंग्स जैसी कंपनियों के लिए भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर के अगले चरण के विकास में भागीदारी के महत्वपूर्ण अवसर मौजूद हैं। सरकार की कोशिश ऐसे निवेशों के लिए नीतिगत और कारोबारी वातावरण को लगातार बेहतर बनाने की है।

    मार्श री के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डीन क्लिसुरा और कंपनी की रणनीति एवं कॉरपोरेट डेवलपमेंट प्रमुख देवांशु ध्यानी के साथ बैठक में भी भारत की आर्थिक और कारोबारी क्षमता पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक प्रोफेशनल सर्विसेज और रिस्क मैनेजमेंट कंपनियों को बड़ा घरेलू बाजार, कुशल प्रतिभा और तेजी से विकसित हो रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है।

    उन्होंने भारत की डिजिटल क्षमताओं और कारोबारी सुधारों की दिशा का भी उल्लेख किया। मार्श री की टीम ने भारत में सुधारों के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की और देश में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने तथा कारोबार का विस्तार करने की योजना बताई।

    मार्श री ने भारत को समान अवसर वाला बाजार बताते हुए नियामकीय व्यवस्था को भी सकारात्मक बताया। कंपनी ने गिफ्ट सिटी पर अपना ध्यान बढ़ाने की जानकारी दी और वहां विकसित हो रहे वित्तीय इकोसिस्टम के साथ उत्पादों तथा सेवाओं के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भागीदारी बढ़ाने की बात कही।

    वित्त मंत्री ने बीएनवाई मेलन के ग्रुप मुख्य परिचालन अधिकारी एलेजांद्रो पेरेज के साथ भी बातचीत की। इस बैठक में भारत की मजबूत विकास यात्रा और वैश्विक वित्तीय संस्थानों के लिए देश में निवेश बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।

    पेरेज ने भारत के प्रति बीएनवाई मेलन की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कंपनी की वैश्विक गतिविधियों और विकास रणनीति में भारत एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने आईआईटी सहित प्रमुख भारतीय संस्थानों के साथ कंपनी की साझेदारी का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिभाओं को विकसित करना है।

    बीएनवाई मेलन के भारत संचालन की बदलती भूमिका पर भी चर्चा हुई। भारत अब केवल डिलीवरी सेंटर के रूप में नहीं, बल्कि इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और एआई जैसी उन्नत क्षमताओं के लिए रणनीतिक वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

    बैठकों में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और गिफ्ट सिटी आईएफएससी से जुड़े अवसरों पर भी चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने बीएनवाई मेलन की टीम को गिफ्ट सिटी आईएफएससी का दौरा करने और वहां उपलब्ध विभिन्न वित्तीय उत्पादों तथा सेवाओं से जुड़े अवसरों का आकलन करने के लिए आमंत्रित किया।

  • चार सत्रों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 362 अंक चढ़कर 76,500 के पार बंद

    चार सत्रों की गिरावट के बाद शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 362 अंक चढ़कर 76,500 के पार बंद

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद शुक्रवार को राहत की सांस ली और बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। घरेलू बाजार में मेटल और कमोडिटी शेयरों में खरीदारी का असर प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया। हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार की तेजी सीमित रही।

    कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 23,897.70 पर पहुंच गया। लगातार गिरावट के बाद प्रमुख सूचकांकों में आई यह तेजी निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आई।

    शुक्रवार के कारोबार में मेटल और कमोडिटी क्षेत्र बाजार की तेजी के प्रमुख आधार रहे। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 1.07 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह दिन के प्रमुख प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। निफ्टी कमोडिटीज में भी 0.55 प्रतिशत की मजबूती देखने को मिली।

    इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.49 प्रतिशत और निफ्टी इंडिया डिफेंस में 0.39 प्रतिशत की बढ़त रही। निफ्टी मीडिया 0.30 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.28 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.21 प्रतिशत मजबूत होकर बंद हुए। निफ्टी पीएसई में भी मामूली 0.04 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    दूसरी ओर कई प्रमुख सेक्टरों में दबाव बना रहा। निफ्टी रियल्टी में 0.90 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी हेल्थकेयर 0.87 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा 0.68 प्रतिशत कमजोर रहे। निफ्टी आईटी में 0.47 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो में 0.45 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स भी 0.43 प्रतिशत नीचे रहा।

    व्यापक बाजार में कारोबार मिश्रित रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 156.15 अंक यानी 0.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 63,079.05 पर बंद हुआ। इसके विपरीत निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 44.70 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 20,095.45 पर पहुंच गया। इससे संकेत मिला कि छोटे शेयरों में चुनिंदा खरीदारी बनी रही, जबकि मिडकैप शेयरों में दबाव देखने को मिला।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका कम होने से भारतीय बाजार को समर्थन मिला। ब्याज दरों के रुख को लेकर बदलती उम्मीदों का असर वैश्विक बाजारों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर भी पड़ रहा है।

    हालांकि बाजार में तेजी पूरी तरह मजबूत नहीं रही। ऊंचे स्तरों पर निवेशकों की मुनाफावसूली ने बढ़त को सीमित किया। इसके साथ ही मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे माहौल में विदेशी बाजारों के संकेतों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर घरेलू निवेशकों की नजर बनी हुई है।

    अमेरिका से आने वाले रोजगार संबंधी आंकड़े भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इसके बाद अगले सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगी। महंगाई के आंकड़े अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी ब्याज दर नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।

    जानकारों का मानना है कि अगस्त में कोर महंगाई में मामूली नरमी की उम्मीद फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की संभावना को कमजोर कर सकती है। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में स्थिरता आने और वैश्विक शेयर बाजारों पर दबाव कम होने की संभावना बन सकती है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम के साथ घरेलू निवेश धारणा बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • आरबीआई के कदमों से भारत का भुगतान संतुलन मजबूत, वित्त वर्ष 2027 में 75 अरब डॉलर तक अधिशेष का अनुमान

    आरबीआई के कदमों से भारत का भुगतान संतुलन मजबूत, वित्त वर्ष 2027 में 75 अरब डॉलर तक अधिशेष का अनुमान

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और घरेलू मुद्रा पर दबाव कम करने के लिए उठाए गए कदमों का असर भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति पर दिखाई दे सकता है। एक रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में देश का भुगतान संतुलन यानी बैलेंस ऑफ पेमेंट 65 से 75 अरब डॉलर के अधिशेष में रह सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार सेवा निर्यात और विदेशों से आने वाली रेमिटेंस में मजबूती भारत के चालू खाते को सहारा देगी। इसके चलते वित्त वर्ष 2027 में चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के करीब 1 से 1.25 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान है। इससे बाहरी क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    विदेशी मुद्रा को देश में आकर्षित करने के लिए आरबीआई ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इन उपायों के तहत कुल 136.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह आने का अनुमान है। इस बढ़े हुए प्रवाह ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के साथ रुपये के अवमूल्यन पर दबाव कम करने में भी मदद की है।

    भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की बढ़ोतरी महत्वपूर्ण रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में 47.9 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 729.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।

    आरबीआई की ओर से जून में शुरू की गई विदेशी मुद्रा आकर्षित करने वाली योजनाओं में एफसीएनआर यानी विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक जमा की अहम भूमिका रही। इन जमा के जरिए करीब 127.2 अरब डॉलर जुटाए गए, जो कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह का 90 प्रतिशत से अधिक है।

    इसके अलावा विदेशी मुद्रा में विदेशी कर्ज यानी ओएफसीबी के माध्यम से करीब 5.3 अरब डॉलर और बाह्य वाणिज्यिक उधारी यानी ईसीबी के जरिए 3.9 अरब डॉलर जुटाए गए। इस तरह विदेशी मुद्रा जुटाने के अलग-अलग माध्यमों ने देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में योगदान दिया।

    एफसीएनआर जमा को आकर्षक बनाने के लिए कई बैंकों ने तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली जमा पर ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी की। इन दरों को करीब 2 से 4 प्रतिशत के स्तर से बढ़ाकर 6 से 7 प्रतिशत तक किया गया। इससे एनआरआई के लिए भारत में विदेशी मुद्रा जमा रखने की आकर्षकता बढ़ी और बैंकों को अतिरिक्त विदेशी मुद्रा जुटाने में मदद मिली।

    आरबीआई ने बाजार में अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए भी कदम उठाए हैं। इसके तहत 6 अगस्त से 2 सितंबर के बीच कुल 53.5 लाख करोड़ रुपये की वीआरआरआर यानी वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो नीलामियों की घोषणा की गई। इसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त नकदी का प्रबंधन करना है।

    इन उपायों की पृष्ठभूमि में बाहरी क्षेत्र पर बढ़े दबाव को भी देखा जा सकता है। मध्य पूर्व में संघर्ष और उससे जुड़े घटनाक्रम के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी तथा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां बढ़ाई थीं। महंगे तेल से आयात बिल बढ़ने और डॉलर की मांग बढ़ने के कारण रुपये पर दबाव बना था।

    हालांकि रिपोर्ट का आकलन है कि मजबूत सेवा निर्यात, रेमिटेंस और विदेशी मुद्रा प्रवाह ने भारत को इन बाहरी झटकों से निपटने के लिए पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में पहुंचाया है। रिपोर्ट के मुताबिक मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी वित्तीय स्थिति में सुधार से भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन क्षमता मजबूत हुई है।

  • Jio IPO कब आएगा? अक्टूबर के अंत या नवंबर में 37,800 करोड़ रुपये के इश्यू की तैयारी, बन सकता है सबसे बड़ा आईपीओ

    Jio IPO कब आएगा? अक्टूबर के अंत या नवंबर में 37,800 करोड़ रुपये के इश्यू की तैयारी, बन सकता है सबसे बड़ा आईपीओ

    नई दिल्ली ।रिलायंस इंडस्ट्रीज के टेलीकॉम और डिजिटल कारोबार से जुड़ी कंपनी Jio Platforms के प्रस्तावित आईपीओ को लेकर निवेशकों की नजर अब इसकी संभावित लॉन्च तारीख पर है। कंपनी करीब 4 अरब डॉलर यानी लगभग 37,800 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निर्गम ला सकती है। यदि यह इश्यू तय योजना के मुताबिक बाजार में आता है, तो यह भारतीय शेयर बाजार का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है।

    कंपनी के आईपीओ के अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में आने की संभावना जताई जा रही है। संभावित समय को लेकर नवरात्रि और दिवाली के आसपास का दौर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नवरात्रि 11 से 20 अक्टूबर तक है, जबकि दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। हालांकि अंतिम तारीख की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।

    कंपनी की ओर से आईपीओ की तारीख तय होने के बाद निवेशकों तक पहुंच बनाने के लिए रोड शो और प्रचार अभियान शुरू किए जाने की योजना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार विदेशों में करीब तीन सप्ताह और भारत में लगभग दो सप्ताह तक रोड शो आयोजित किए जा सकते हैं। तारीख जल्दी तय होने पर विदेश और घरेलू निवेशकों के साथ बातचीत का अभियान भी जल्द शुरू हो सकता है।

    Jio Platforms ने आईपीओ की दिशा में महत्वपूर्ण नियामकीय प्रक्रिया पूरी कर ली है। कंपनी ने जून में ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल किया था। इसके बाद 28 अगस्त को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी से आईपीओ को मंजूरी मिल गई। इससे कंपनी के लिए सार्वजनिक निर्गम की राह आगे बढ़ी है।

    प्रस्तावित आईपीओ का आकार करीब 37,800 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह रकम जुटने पर Jio का इश्यू अब तक के सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकता है। फिलहाल पूरा हो चुका सबसे बड़ा आईपीओ हुंडई मोटर इंडिया का करीब 27,000 करोड़ रुपये का है। वहीं राष्ट्रीय शेयर बाजार यानी NSE का लगभग 31,000 करोड़ रुपये का आईपीओ अभी बाजार में आना बाकी है।

    Jio Platforms के प्रस्तावित इश्यू में करीब 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। यह कंपनी की कुल हिस्सेदारी का लगभग 2.9 प्रतिशत हिस्सा होगा। खास बात यह है कि इस आईपीओ में मौजूदा शेयरधारकों की ओर से Offer for Sale यानी OFS के जरिए शेयर बेचने का प्रस्ताव नहीं है।

    यह रिलायंस समूह से करीब दो दशक बाद आने वाला बड़ा आईपीओ भी होगा। इससे पहले 2006 में रिलायंस पेट्रोलियम का आईपीओ आया था। ऐसे में Jio का सार्वजनिक निर्गम समूह और भारतीय पूंजी बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आईपीओ से जुटाई जाने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार करीब 27,500 करोड़ रुपये Jio की ऑपरेटिंग कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम यानी RJIL के कर्ज को समय से पहले चुकाने के लिए लगाए जा सकते हैं। शेष राशि का इस्तेमाल कंपनी की अन्य जरूरतों के लिए किया जाएगा।

    Jio Platforms अपनी सहायक कंपनी RJIL को जरूरत के अनुसार शेयर, प्रेफरेंस शेयर, डिबेंचर या कर्ज के माध्यम से भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सकती है। इससे आईपीओ से मिलने वाली पूंजी का उपयोग समूह के टेलीकॉम कारोबार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में भी किया जा सकता है।

    Jio Platforms में कई बड़े वैश्विक निवेशकों की हिस्सेदारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रमुख निवेशकों के पास कंपनी की करीब 30.9 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इनमें मेटा से जुड़ी जाधू होल्डिंग्स की लगभग 9.98 प्रतिशत और गूगल इंटरनेशनल की करीब 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है।

    इसके अलावा सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड, सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी, जनरल अटलांटिक, केकेआर और अबू धाबी की निवेश एजेंसी ADIA भी Jio Platforms में निवेश कर चुके हैं। प्रस्तावित आईपीओ के आकार और वैश्विक निवेशकों की मौजूदगी के कारण बाजार में इसकी लॉन्चिंग को लेकर खास दिलचस्पी बनी हुई है।

  • टाटा केमिकल्स को केन्या से झटका! राष्ट्रपति रुटो ने कहा- सामान समेटकर निकल जाएं

    टाटा केमिकल्स को केन्या से झटका! राष्ट्रपति रुटो ने कहा- सामान समेटकर निकल जाएं


    नैरोबी।
    टाटा समूह की कंपनी टाटा केमिकल्स मगाडी को केन्या में बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रपति विलियम रुटो ने कंपनी पर लेक मगाडी क्षेत्र में एक सदी से ज्यादा समय तक कारोबार करने के बावजूद पर्याप्त निवेश नहीं करने का आरोप लगाया है। रुटो ने कहा कि उन्होंने कंपनी से अपना सामान समेटकर देश से जाने के लिए कहा है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब केन्या सरकार ने 28 जुलाई को टाटा केमिकल्स मगाडी के खनन संचालन को कथित तौर पर खनन कानूनों का पालन नहीं करने के आरोप में निलंबित कर दिया था। सरकार अब इस क्षेत्र में नए निवेशकों को लाने और स्थानीय स्तर पर खनिजों का प्रसंस्करण बढ़ाने की योजना बना रही है।

    राष्ट्रपति रुटो ने क्या कहा?

    काजियाडो काउंटी में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति रुटो ने टाटा केमिकल्स मगाडी के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी लेक मगाडी में 100 साल से अधिक समय से काम कर रही है, लेकिन क्षेत्र के विकास के लिए अपेक्षित निवेश नहीं किया गया।

    रुटो ने स्वाहिली में कहा कि टाटा केमिकल्स मगाडी के पास 100 साल का कॉन्ट्रैक्ट था, लेकिन कंपनी ने कुछ नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने कंपनी से अपना सामान समेटकर चले जाने को कहा था।

    सरकार ने नए निवेशकों की पहचान की

    केन्याई राष्ट्रपति के मुताबिक, सरकार ने टाटा केमिकल्स के संचालन की जगह काम संभालने के लिए नए निवेशकों की पहचान कर ली है। उनका कहना है कि केन्या को अपने प्राकृतिक और खनिज संसाधनों से वर्तमान की तुलना में कहीं अधिक आर्थिक लाभ मिलना चाहिए।

    सरकार की योजना इस क्षेत्र में दो नई कंपनियां लाने की है। इसके जरिए निवेश बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर खनिजों के प्रसंस्करण को प्रोत्साहित करने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जाएगा।

    लेक मगाडी में क्या करती है टाटा की कंपनी?

    टाटा केमिकल्स मगाडी टाटा समूह का हिस्सा है और केन्या की राजधानी नैरोबी से करीब 120 किलोमीटर यानी 75 मील दक्षिण-पश्चिम में स्थित लेक मगाडी में कारोबार करती है।

    कंपनी यहां हर साल 3.5 लाख टन से अधिक सोडा ऐश का उत्पादन करती है। इस उत्पाद को भारत के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका के दूसरे हिस्सों में निर्यात किया जाता है।

    28 जुलाई को क्यों निलंबित हुआ था संचालन?

    राष्ट्रपति का यह बयान 28 जुलाई को कंपनी के खनन संचालन के निलंबन के बाद आया है। केन्या सरकार ने आरोप लगाया था कि कंपनी ने देश के खनन कानूनों का पालन नहीं किया है।

    उस समय खनन मामलों के कैबिनेट सचिव हसन जोहो ने कहा था कि कंपनी का कामकाज तब तक निलंबित रहेगा, जब तक वह अपनी कानूनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर लेती।

    टाटा केमिकल्स का क्या कहना है?

    कंपनी ने पिछले महीने अपने बचाव में कहा था कि उसने केन्याई अधिकारियों की ओर से मांगे गए सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए हैं और वह लागू नियमों का पालन कर रही है।

    टाटा केमिकल्स ने यह भी कहा था कि संचालन पर रोक का असर करीब 500 कर्मचारियों के अलावा ठेकेदारों, सप्लायर्स और आसपास रहने वाले समुदायों पर भी पड़ रहा है।

    1911 में शुरू हुआ था टाटा का रिश्ता

    लेक मगाडी के साथ टाटा समूह का संबंध करीब 115 साल पुराना है। कंपनी का इतिहास यहां 1911 से शुरू होता है। इसके बाद 1928 में केन्या सरकार के साथ एक बड़ा खनन लीज समझौता किया गया था।

    बाद में टाटा केमिकल्स ने 2005 में ब्रिटेन के ब्रूनर मोंड ग्रुप का अधिग्रहण किया और लेक मगाडी से जुड़े इस कारोबार की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली।

    अब केन्या सरकार के रुख और नए निवेशकों को लाने की योजना से इस लंबे कारोबारी रिश्ते का भविष्य सवालों के घेरे में है। दूसरी ओर, टाटा केमिकल्स का कहना है कि उसने अधिकारियों की मांग के मुताबिक दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं और नियमों का पालन किया है।

  • शेयर बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक! 4 सितंबर को इन फैक्टर्स से बदल सकती है Nifty-Sensex की चाल

    शेयर बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक! 4 सितंबर को इन फैक्टर्स से बदल सकती है Nifty-Sensex की चाल


    नई दिल्ली। शुक्रवार 4 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बीते कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार पर वैश्विक अनिश्चितता का दबाव रहा है और निवेशकों की नजर अब घरेलू संकेतों के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी बनी हुई है। 3 सितंबर को बाजार में शुरुआती बढ़त के बाद बिकवाली लौट आई और सेंसेक्स करीब 417 अंक गिरकर बंद हुआ जबकि निफ्टी 23900 के स्तर से नीचे चला गया। इससे संकेत मिल रहा है कि बाजार में फिलहाल तेजी को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं बन पाया है।

    4 सितंबर के कारोबार में सबसे अहम भूमिका कच्चे तेल की कीमतों की रह सकती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है। ऐसे में अगर शुक्रवार को तेल की कीमतों में दोबारा तेज उछाल आता है तो इसका असर बाजार की धारणा पर दिखाई दे सकता है।

    दूसरी ओर ग्लोबल बाजार से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। अमेरिकी और एशियाई बाजारों में हालिया कारोबार के दौरान मजबूती देखने को मिली है और गुरुवार को भारतीय बाजार में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया था। विदेशी मुद्रा प्रवाह से भारतीय बैंकों की तरलता स्थिति को भी समर्थन मिला है। ऐसे संकेत बाजार में गिरावट को सीमित करने में मदद कर सकते हैं।

    निवेशकों की नजर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर भी रहेगी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में सतर्कता बढ़ी है। यदि अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की संभावना बढ़ाते हैं तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ कमजोर आर्थिक आंकड़े दरों में नरमी की उम्मीद को बढ़ा सकते हैं जिससे उभरते बाजारों को कुछ राहत मिल सकती है।

    घरेलू स्तर पर बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयर बाजार को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हाल के कारोबार में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखने को मिली है। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। हालांकि बाजार में उतार चढ़ाव को देखते हुए किसी एक सेक्टर या शेयर में जल्दबाजी से दांव लगाने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और बाजार की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर 4 सितंबर का कारोबार बेहद अहम रह सकता है। बाजार में तेजी की कोशिश दिखाई दे सकती है लेकिन महंगा कच्चा तेल वैश्विक तनाव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव डाल सकती हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा। बाजार की दिशा को लेकर किसी निश्चित तेजी या गिरावट का अनुमान लगाने के बजाय सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। यह खबर निवेश सलाह नहीं है और निवेश का फैसला अपनी रिसर्च तथा विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही लेना चाहिए।

  • वाइब्रेंट गुजरात 2027 के लिए CM पटेल का बड़ा प्लान दिग्गज कंपनियों को गुजरात में निवेश का दिया न्योता

    वाइब्रेंट गुजरात 2027 के लिए CM पटेल का बड़ा प्लान दिग्गज कंपनियों को गुजरात में निवेश का दिया न्योता


    नई दिल्ली। वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 की तैयारियों के तहत मुंबई में आयोजित रोड शो के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने देश के कई दिग्गज उद्योगपतियों से मुलाकात की। इन बैठकों में गुजरात में नए निवेश की संभावनाओं से लेकर मौजूदा परियोजनाओं के विस्तार तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत को गुजरात में निवेश के लिए उपलब्ध सुविधाओं और संभावनाओं से अवगत कराया।

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा से मुलाकात की। बैठक में गुजरात में महिंद्रा ग्रुप की मौजूदगी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। खास तौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम और भविष्य की मोबिलिटी से जुड़े समाधानों में निवेश की संभावनाओं पर बातचीत हुई। इसके साथ ही गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी यानी गिफ्ट सिटी में महिंद्रा ग्रुप की मौजूदगी बढ़ाने के विकल्पों पर भी विचार किया गया।

    सीएम पटेल ने बताया कि गुजरात का मजबूत पोर्ट नेटवर्क बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधाएं विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के अनुकूल औद्योगिक नीतियां राज्य को नई पीढ़ी के मैन्युफैक्चरिंग और वित्तीय सेवाओं के लिए बेहतर जगह बनाती हैं। बैठक में इन्हीं सुविधाओं के आधार पर गुजरात में कारोबार के विस्तार की संभावनाओं पर विचार किया गया।

    इसके बाद मुख्यमंत्री ने एएम/एनएस इंडिया के सीईओ अमित हरलालका से मुलाकात की। इस दौरान कंपनी की गुजरात में बड़ी स्टील परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के अनुसार कंपनी ने गुजरात में दुनिया के सबसे बड़े स्टील मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में से एक विकसित करने का विजन साझा किया है। इसकी कुल उत्पादन क्षमता 25 मिलियन टन बताई गई है।

    बैठक में 80 हजार करोड़ रुपए के बड़े कैपिटल इन्वेस्टमेंट से जुड़ी प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा हजीरा में रिन्यूएबल एनर्जी और बैटरी स्टोरेज सिस्टम के लिए करीब 10 हजार करोड़ रुपए के अतिरिक्त निवेश की प्रतिबद्धता पर भी चर्चा हुई। इससे गुजरात के औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के एमडी सतीश पाई से भी मुलाकात की। बैठक में गुजरात के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कंपनी की मौजूदगी को और मजबूत करने के मुद्दे पर बातचीत हुई। इसमें कॉपर रीसाइक्लिंग ई-वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकॉनमी से जुड़ी योजनाओं पर विशेष जोर रहा।

    बैठक के दौरान दिसंबर में शुरू होने वाले कॉपर रीसाइक्लिंग प्लांट के उद्घाटन की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। साथ ही गुजरात को कॉपर उद्योग के लिए प्रमुख वैश्विक केंद्र के तौर पर विकसित करने के लिए नए निवेश अवसरों और टिकाऊ औद्योगिक प्रक्रियाओं पर विचार किया गया।

    वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 से पहले मुंबई रोड शो में हुई ये बैठकें गुजरात के निवेश आकर्षित करने के प्रयासों को दिखाती हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी स्टील रिन्यूएबल एनर्जी बैटरी स्टोरेज कॉपर रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकॉनमी जैसे क्षेत्रों पर बढ़ता फोकस राज्य की औद्योगिक रणनीति में नए सेक्टरों की अहमियत को भी दर्शाता है।

  • Nifty-Sensex के लिए आसान नहीं होगा 3 सितंबर का कारोबार! क्रूड ऑयल से लेकर विदेशी बाजारों तक कई संकेत देंगे दिशा

    Nifty-Sensex के लिए आसान नहीं होगा 3 सितंबर का कारोबार! क्रूड ऑयल से लेकर विदेशी बाजारों तक कई संकेत देंगे दिशा


    नई दिल्ली। 3 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी माहौल चुनौतीपूर्ण रह सकता है। बुधवार 2 सितंबर को बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र दबाव देखने को मिला और निफ्टी 50 करीब 0.59 फीसदी गिरकर 23914.45 के स्तर पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स 0.49 फीसदी टूटकर 76570.35 पर पहुंच गया। बाजार में कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ा तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। ऐसे में गुरुवार 3 सितंबर को निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार शुरुआती दबाव के बाद संभलता है या बिकवाली का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।

    मौजूदा हालात में कच्चे तेल की कीमत बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक बन गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज उछाल आया है। तेल महंगा होने से भारत जैसे बड़े आयातक देश पर आयात बिल बढ़ने का दबाव बन सकता है और इससे महंगाई को लेकर चिंता भी बढ़ सकती है। बुधवार को वैश्विक बाजारों में भी इसी वजह से जोखिम लेने की क्षमता कमजोर दिखाई दी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ाया है।

    3 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर निफ्टी के अहम स्तरों पर भी रहेगी। बाजार में हालिया कमजोरी को देखते हुए 24000 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि निफ्टी इस क्षेत्र के आसपास मजबूती बनाए रखता है तो बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिल सकती है। वहीं इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर बिकवाली का दबाव और तेज हो सकता है। बाजार में अभी स्पष्ट तेजी के बजाय उतार चढ़ाव और सीमित दायरे में कारोबार की संभावना बनी हुई है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। सितंबर की शुरुआत में वैश्विक जोखिम बढ़ने से विदेशी पूंजी के रुख पर नजर बनी हुई है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा देने का काम कर सकती है। भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत आंकड़े भी निवेशकों के लिए सकारात्मक पहलू हैं। हाल में जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही है जो बाजार की घरेलू बुनियाद को मजबूती देती है।

    इसके अलावा रुपये की चाल भी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। कच्चे तेल की तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच रुपये पर दबाव बना हुआ है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप से रुपये को कुछ सहारा मिल रहा है।

    कुल मिलाकर 3 सितंबर को बाजार में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए जल्दबाजी में ट्रेड लेने के बजाय बाजार की शुरुआती दिशा और ग्लोबल संकेतों पर नजर रखना अहम होगा। खासकर क्रूड ऑयल अमेरिकी बाजारों बॉन्ड यील्ड रुपये और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से बाजार को अगले संकेत मिल सकते हैं। मौजूदा परिस्थितियों में सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर माना जा सकता है। यह बाजार विश्लेषण है निवेश का व्यक्तिगत सुझाव नहीं।

  • AI की बढ़ती ताकत से डेटा सेंटर सेक्टर में बड़ा धमाका, 2029 तक भारत में 110 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान

    AI की बढ़ती ताकत से डेटा सेंटर सेक्टर में बड़ा धमाका, 2029 तक भारत में 110 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान


    नई दिल्ली। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड टेक्नोलॉजी की तेजी से बढ़ती मांग अब डेटा सेंटर उद्योग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी कर रही है। देश की डेटा सेंटर क्षमता जून 2026 में करीब 1.6 गीगावाट है और इसके 2029 तक बढ़कर 6 गीगावाट पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इस विशाल विस्तार के लिए करीब 110 अरब डॉलर की पूंजी की जरूरत होगी। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में एआई वर्कलोड और हाइपरस्केल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती तैनाती डेटा सेंटर सेक्टर के इस तेज विस्तार की सबसे बड़ी वजह बनने जा रही है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 की पहली छमाही में देश के डेटा सेंटर बाजार में 101 मेगावाट की मांग दर्ज की गई। यह आंकड़ा पिछले तीन वर्षों की पहली छमाही के औसत की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक है। इससे साफ है कि डिजिटल सेवाओं और एआई आधारित तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कंपनियों को बड़े स्तर पर डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग क्षमता की जरूरत पड़ रही है। इसी दौरान डेटा सेंटर की आपूर्ति में भी तेजी देखी गई और करीब 85 मेगावाट नई क्षमता जोड़ी गई।

    नई क्षमता का बड़ा हिस्सा मुंबई और चेन्नई जैसे प्रमुख बाजारों में केंद्रित रहा। हालांकि पहले से बुक की जा चुकी क्षमता को तेजी से उपलब्ध कराए जाने के कारण बाजार में खाली डेटा सेंटर क्षमता घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 2.8 प्रतिशत पर पहुंच गई। इतनी कम रिक्त क्षमता इस बात का संकेत है कि डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है और कंपनियां भविष्य की जरूरतों को देखते हुए पहले से ही बड़ी क्षमता सुरक्षित करने में जुटी हुई हैं।

    वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियां भी भारत के डेटा सेंटर बाजार की तस्वीर बदल रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार ये कंपनियां नई क्षमता का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा अपनी सेल्फ बिल्ड सुविधाओं के माध्यम से विकसित करने की तैयारी कर रही हैं। अनुमान है कि केवल हाइपरस्केल सेल्फ बिल्ड परियोजनाओं से ही 2029 तक करीब 1.4 गीगावाट क्षमता उपलब्ध हो सकती है। इससे भारत के तकनीकी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    बड़े निवेश के कारण हैदराबाद और विशाखापत्तनम जैसे शहर तेजी से गीगावाट स्तर के डेटा सेंटर हब के रूप में उभर सकते हैं। वहीं मुंबई और चेन्नई जैसे पहले से स्थापित बाजार भी अपनी क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में देश के कई शहर वैश्विक क्लाउड और एआई सेवाओं के महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं।

    डेटा सेंटर उद्योग को सरकारी नीतियों से भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालिया केंद्रीय बजट में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 20 साल की टैक्स हॉलिडे की घोषणा की गई है जिसे 31 मार्च 2047 तक बढ़ाया गया है। इस नीति से 50 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी निवेश प्रतिबद्धताएं सामने आने की बात कही गई है। इससे भारत को वैश्विक एआई और क्लाउड सेवाओं के एक बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

    रिपोर्ट के अनुसार 2029 तक डेटा सेंटर विस्तार के लिए रियल एस्टेट निर्माण पर करीब 4 अरब डॉलर मैकेनिकल इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर 18 अरब डॉलर तथा सर्वर और रैक जैसे आईटी उपकरणों पर करीब 88 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। भविष्य में बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर भी एक अहम विकल्प बन सकते हैं। 2033 तक इन तकनीकों के विकसित होने से बड़े डेटा सेंटर परिसरों को ऑफ ग्रिड बिजली उपलब्ध कराने की संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। कुल मिलाकर एआई की बढ़ती ताकत और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ भारत का डेटा सेंटर सेक्टर आने वाले वर्षों में तकनीकी विकास और बड़े निवेश का नया केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है।

  • ईरान-अमेरिका जंग में तेजी के बीच कच्चे तेल के दामों में भारी इजाफा

    ईरान-अमेरिका जंग में तेजी के बीच कच्चे तेल के दामों में भारी इजाफा


    तेहरान।
    पेट्रोल-डीजल (Petrol and Diesel) के सस्ता होने की उम्मीद कर रहे लोगों के लिए बुरी खबर है। ईरान और अमेरिका में जंग (Iran -America War) तेज हो गई है। मिसाइलों की बारिश ने क्रूड की कीमतों (Crude oil Prices) में आग लगा दी है। अब इंटरनेशन बेंचमार्क (International benchmark) ब्रेंट क्रूड तेजी से 100 डॉलर प्रति बैरल की ओर भाग रहा है। ऐसे में दुनिया भर में एक बार फिर ऊर्जा संकट के और बढ़ने के खतरे बढ़ गए हैं।

    बुधवार सुबह कारोबार शुरू होते ही कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1.5% से अधिक की बढ़ोतरी हुई। यह उछाल मंगलवार के तेज उछाल के बाद आया है, जब दोनों तरह के तेल 4 डॉलर से ज्यादा महंगे हो गए थे। ब्लूमबर्ग के अनुसार वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का दाम सुबह 7 बजे के 1.61 डॉलर प्रति बैरल चढ़कर 91.83 डॉलर पर कारोबार कर रहा था और अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.91 डॉलर प्रति बैरल चढ़कर 96.56 डॉलर पर था।


    अमेरिका-ईरान के बीच रातभर मिसाइलों की बारिश

    अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने पलटवार किया। दोनों देशों के बीच हफ्तों में यह सबसे गंभीर झड़प है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ये हमले ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की उन हालिया हरकतों के जवाब में किए गए, जिसमें उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर हमले की कोशिश की थी।


    होर्मुज पर संकट गहरा

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमलों से होर्मुज के रास्ते और भी ज्यादा बंद हो जाएंगे। गौरतलब है कि इसी रास्ते से दुनिया की कुल पांचवीं तेल खपत गुजरती थी, लेकिन अब ईरान ने इसे व्यावसायिक जहाजों के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया है।


    ईरान की जवाबी कार्रवाई और नए हमले

    IRGC ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और दावा किया कि बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए। ईरानी मीडिया के मुताबिक, बहरीन में अमेरिकी बेस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया गया। जॉर्डन की सेना ने 13 में से 10 मिसाइलें हवा में ही नष्ट कर दीं। अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक किसी भी नुकसान की पुष्टि नहीं की है। कुवैत ने भी दुश्मन ड्रोन गतिविधि के खिलाफ अपनी सेना तैनात कर दी है।


    टैंकरों पर हमले

    पिछले सप्ताहांत (जुलाई के बाद पहली बार) झड़पें तेज हुईं। सोमवार को होर्मुज से निकलते दो टैंकरों पर भी हमले हुए, जिससे तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है और कारोबारी वैकल्पिक रास्ते तलाशने पर मजबूर हैं।