Category: Economy

  • आईटी शेयरों की दमदार खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़त के साथ बंद, निवेशकों का भरोसा मजबूत

    आईटी शेयरों की दमदार खरीदारी से बाजार में लौटी रौनक, सेंसेक्स-निफ्टी बढ़त के साथ बंद, निवेशकों का भरोसा मजबूत

    नई दिल्ली । सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार का समापन किया। शुरुआती सत्र में जोरदार बढ़त दर्ज करने के बाद बाजार ने दिनभर उतार-चढ़ाव का सामना किया, लेकिन अंततः प्रमुख सूचकांक हरे निशान पर बंद होने में सफल रहे। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 250 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ 77,763 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 90 अंकों से ज्यादा मजबूत होकर 24,270 के ऊपर टिकने में सफल रहा। लगातार दूसरे सत्र में सकारात्मक रुख ने निवेशकों के विश्वास को और मजबूत किया।

    दिनभर के कारोबार में सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों ने बाजार को सबसे अधिक सहारा दिया। इस सेक्टर में लगातार खरीदारी देखने को मिली, जिसके कारण प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। मजबूत निवेश के चलते तकनीकी क्षेत्र बाजार की बढ़त का प्रमुख आधार बना और निवेशकों ने इस सेक्टर में विशेष रुचि दिखाई।

    दूसरी ओर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों पर दबाव बना रहा। कई बड़े बैंकिंग शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जिससे बाजार की बढ़त कुछ सीमित रही। इसके बावजूद अन्य क्षेत्रों में हुई खरीदारी ने इस कमजोरी की भरपाई कर दी और प्रमुख सूचकांकों को सकारात्मक दायरे में बनाए रखा।

    कारोबार की शुरुआत भी बेहद उत्साहजनक रही थी। शुरुआती घंटों में सेंसेक्स में 650 अंकों तक की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 24,375 के स्तर के करीब पहुंच गया। आईटी, मेटल, फार्मा और केमिकल सेक्टर में मजबूत खरीदारी के चलते शुरुआती कारोबार में बाजार ने शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि दिन बढ़ने के साथ निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की, जिससे शुरुआती बढ़त कुछ कम हुई, लेकिन बाजार अंत तक मजबूती बनाए रखने में सफल रहा।

    विदेशी संकेतों ने भी घरेलू बाजार के माहौल को समर्थन दिया। वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों को लेकर बनी उम्मीदों और निवेशकों की सकारात्मक धारणा का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। इसी कारण दिनभर निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर बना रहा और कई प्रमुख शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई।

    मुद्रा बाजार में भी भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में रुपये में मजबूती दर्ज होने से आयात आधारित कंपनियों और निवेशकों का भरोसा बढ़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की स्थिरता और वैश्विक संकेत निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निकट अवधि में निवेशकों को सतर्क आशावादी रणनीति अपनानी चाहिए। उनका मानना है कि निफ्टी का 24,000 के ऊपर बने रहना तेजी के रुख को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यदि बाजार 24,300 और उसके ऊपर के स्तर को पार करने में सफल रहता है तो आगे और मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं, किसी भी गिरावट की स्थिति में 24,050 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में सीमित सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी है कि निवेशक वैश्विक तकनीकी शेयरों में चल रही गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखें, क्योंकि आने वाले कारोबारी सत्रों में इन्हीं कारकों का बाजार की चाल पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

  • जुलाई 2026 में करियर की परीक्षा या तरक्की का मौका? ग्रहों की चाल से आईटी, बैंकिंग, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए बड़े बदलावों के संकेत

    जुलाई 2026 में करियर की परीक्षा या तरक्की का मौका? ग्रहों की चाल से आईटी, बैंकिंग, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए बड़े बदलावों के संकेत


    नई दिल्ली ।
    जुलाई 2026 का महीना भारतीय कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाले लाखों पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की बढ़ती गति के बीच कंपनियां अपने प्रदर्शन, लागत नियंत्रण और कार्यप्रणाली की समीक्षा में जुटी हुई हैं। ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार इस अवधि में ग्रहों की स्थिति कॉर्पोरेट क्षेत्र में पुनर्मूल्यांकन, रणनीतिक बदलाव और कौशल आधारित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाली मानी जा रही है।

    भारत की स्वतंत्रता कुंडली में वर्तमान समय में मंगल महादशा का प्रभाव माना जा रहा है। द्वितीय भाव में स्थित मंगल वित्तीय संसाधन, राजस्व और आर्थिक निर्णयों से जुड़े विषयों को सक्रिय करता है। इस कारण जुलाई के दौरान कॉर्पोरेट निवेश, वित्तीय नीतियां, लागत प्रबंधन और राजस्व संरचना पर अधिक ध्यान केंद्रित रहने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई कंपनियां अपने पुराने सिस्टम, डेटा सुरक्षा और परिचालन खर्चों की व्यापक समीक्षा कर सकती हैं।

    आईटी, एआई और फिनटेक सेक्टर के लिए यह अवधि अपेक्षाकृत अवसरों वाली मानी जा रही है। वैश्विक स्तर पर एआई आधारित सेवाओं और डिजिटल समाधानों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जो पेशेवर नई तकनीकों को अपनाने, रिस्किलिंग और अपस्किलिंग पर ध्यान दे रहे हैं, उनके लिए नए प्रोजेक्ट, जिम्मेदारियां और करियर अवसर बढ़ सकते हैं। ज्ञान आधारित क्षेत्रों में नवाचार और रणनीतिक सोच को विशेष महत्व मिलने के संकेत बताए गए हैं।

    दूसरी ओर स्टार्टअप और वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम में चयनात्मक हायरिंग का रुझान बना रह सकता है। जिन कंपनियों का फोकस लाभप्रदता और स्थिर व्यवसाय मॉडल पर है, उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में माना जा रहा है, जबकि उच्च बर्न-रेट वाले स्टार्टअप्स को फंडिंग और विस्तार योजनाओं में सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

    मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर में कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स लागत का दबाव चर्चा का विषय बना रह सकता है। ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के कारण संचालन दक्षता बढ़ाने की आवश्यकता अधिक महसूस की जा सकती है। इस क्षेत्र में सप्लाई चेन, ऑपरेशंस और प्रोडक्शन से जुड़े पेशेवरों पर प्रदर्शन बनाए रखने का दबाव बढ़ने के संकेत हैं।

    बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में क्रेडिट रिस्क असेसमेंट, ऑडिट और अनुपालन प्रक्रियाएं अधिक सख्त हो सकती हैं। खुदरा और खाद्य महंगाई के दबाव के बीच वित्तीय संस्थानों द्वारा जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना जताई गई है। इससे बैंकिंग पेशेवरों के लिए यह समय समीक्षा, रिपोर्टिंग और प्रदर्शन मूल्यांकन के लिहाज से व्यस्त रह सकता है।

    जुलाई के दूसरे पखवाड़े में सूर्य के कर्क राशि में गोचर को नेतृत्व और प्रबंधन से जुड़े निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि किसी कर्मचारी का प्रदर्शन मजबूत रहा है, तो इस अवधि में प्रमोशन, सैलरी हाइक या नई जिम्मेदारियों से जुड़ी फाइलों में तेजी आने की संभावना बताई गई है। हालांकि कार्यस्थल पर संवाद शैली, धैर्य और पेशेवर व्यवहार बनाए रखने की सलाह भी दी गई है, क्योंकि छोटी गलतफहमियां तनाव का कारण बन सकती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार 7 से 24 जुलाई के बीच वक्री बुध के प्रभाव में डेटा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और संचार से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी आवश्यक हो सकती है। महत्वपूर्ण ईमेल, वित्तीय लेनदेन और अनुबंधों की दोबारा जांच करने की सलाह दी जा रही है। वहीं 24 जुलाई के बाद अटके हुए इंटरव्यू, जॉब चेंज या कॉर्पोरेट निर्णयों में स्पष्टता आने की संभावना मानी जा रही है।

    समग्र रूप से जुलाई 2026 का संदेश यही माना जा रहा है कि यह समय निष्क्रिय रहने का नहीं, बल्कि स्वयं को लगातार अपडेट करने का है। जो पेशेवर अपस्किलिंग, संयमित संवाद और तकनीकी जागरूकता पर ध्यान देंगे, वे बदलते कॉर्पोरेट माहौल में बेहतर अवसर हासिल कर सकते हैं।

  • शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 650 अंक उछला, निफ्टी 24,000 के पार; वैश्विक संकेतों से निवेशकों का बढ़ा भरोसा

    शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 650 अंक उछला, निफ्टी 24,000 के पार; वैश्विक संकेतों से निवेशकों का बढ़ा भरोसा


    नई दिल्ली ।
    सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का उत्साह बढ़ा दिया। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बढ़े भरोसे के बीच घरेलू शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत में बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स लगभग 650 अंकों की तेजी के साथ 78 हजार के स्तर को पार कर गया, जबकि एनएसई का निफ्टी 24 हजार के ऊपर पहुंचकर मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।

    विश्लेषकों के अनुसार बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आए हालिया आर्थिक संकेत रहे। जून महीने के रोजगार आंकड़े अपेक्षा से कमजोर रहने के बाद निवेशकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में और बढ़ोतरी से बच सकता है। इससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी और उभरते बाजारों सहित भारतीय शेयर बाजार को भी इसका सकारात्मक लाभ मिला।

    बाजार खुलते ही विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटो, पूंजीगत वस्तुओं और चुनिंदा आईटी कंपनियों के शेयरों ने शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज की। निवेशकों का रुझान मजबूत कंपनियों और बड़े बाजार पूंजीकरण वाले शेयरों की ओर अधिक दिखाई दिया, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला।

    वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ प्रमुख बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि अन्य में सीमित बढ़त रही। इसके बावजूद भारतीय बाजार ने घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के कारण मजबूती दिखाई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की धारणा में सुधार भी बाजार की तेजी को समर्थन दे रहा है।

    अमेरिकी शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान मिश्रित प्रदर्शन देखने को मिला। प्रमुख औद्योगिक सूचकांक ने नए रिकॉर्ड स्तर को छुआ, जबकि तकनीकी क्षेत्र के कुछ शेयरों में दबाव रहा। इसके बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े ताजा आंकड़ों ने निवेशकों के बीच यह उम्मीद बढ़ाई कि आगे चलकर ब्याज दरों को लेकर राहत मिल सकती है, जिसका सकारात्मक असर वैश्विक निवेश भावना पर पड़ा है।

    अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी भारतीय बाजार के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। कच्चे तेल के दाम नियंत्रित रहने से आयात लागत और महंगाई के दबाव में कमी आने की संभावना रहती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट आय पर पड़ सकता है। यही कारण है कि ऊर्जा कीमतों में नरमी को भी बाजार के लिए अनुकूल कारक माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों, विदेशी निवेश प्रवाह और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेत मजबूत रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रह सकता है। फिलहाल सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन की मजबूत शुरुआत ने निवेशकों के विश्वास को नई मजबूती प्रदान की है।

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत, फिलहाल राहत बरकरार, सस्ती दरों पर फैसला करेगा ग्लोबल क्रूड का रुख

    पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत, फिलहाल राहत बरकरार, सस्ती दरों पर फैसला करेगा ग्लोबल क्रूड का रुख


    नई दिल्ली ।
    देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत भरी स्थिति बनी हुई है। शुक्रवार को भी सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। वहीं भविष्य में कीमतों में संभावित राहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी।

    केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार नजर बनाए हुए है। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने का असर खुदरा ईंधन की कीमतों पर तुरंत दिखाई नहीं देता, क्योंकि कच्चे तेल की खरीद, परिवहन, भंडारण और रिफाइनिंग की पूरी प्रक्रिया में समय लगता है। वर्तमान में पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध ईंधन उस कच्चे तेल से तैयार किया गया है जिसकी खरीद लगभग दो महीने पहले हुई थी।

    सरकार का कहना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर स्थिर रहती हैं या उनमें और गिरावट आती है, तो आने वाले दिनों में स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए नियमित अंतराल पर मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके बाद आवश्यक होने पर खुदरा कीमतों में बदलाव पर निर्णय लिया जा सकता है।

    हाल के दिनों में देश की एक निजी ईंधन विपणन कंपनी द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती किए जाने के बाद उपभोक्ताओं के बीच यह उम्मीद बढ़ी है कि सरकारी तेल कंपनियां भी कीमतों में राहत दे सकती हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का निर्णय बाजार की वास्तविक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के रुख को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर बनी रही। वहीं मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों और वैट के कारण ईंधन की कीमतों में अंतर बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और कर संरचना जैसे कई कारक घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसलिए वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में गिरावट आने के बावजूद खुदरा कीमतों में तत्काल कमी होना हमेशा संभव नहीं होता।

    सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले सप्ताहों में वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है, तो उपभोक्ताओं को भविष्य में ईंधन कीमतों में राहत मिलने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें यथावत बनी हुई हैं और उपभोक्ताओं को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

  • सोने में 3 हफ्ते की सबसे बड़ी तेजी, 4,151 डॉलर के पार पहुंचा भाव, चांदी में भी जोरदार उछाल

    सोने में 3 हफ्ते की सबसे बड़ी तेजी, 4,151 डॉलर के पार पहुंचा भाव, चांदी में भी जोरदार उछाल


    नई दिल्ली। कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी का रुख जारी है। पिछले दो दिनों में लगातार बढ़त दर्ज करते हुए सोना पिछले तीन हफ्तों की सबसे बड़ी छलांग के साथ नए स्तर पर पहुंच गया है। इससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी कमजोर पड़ गई है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,150 डॉलर के पार
    सिंगापुर स्पॉट मार्केट में सोना 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,151.48 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता देखा गया। इससे पहले पिछले सत्र में सोने में 2.3 प्रतिशत की तेज बढ़त दर्ज की गई थी, जो पिछले तीन हफ्तों में सबसे बड़ी दैनिक बढ़त मानी जा रही है।

    चांदी भी मजबूत रुख के साथ 1 प्रतिशत बढ़कर 61.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे पहले यह लगातार तीन सत्रों में करीब 5 प्रतिशत तक चढ़ चुकी है। ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स में पिछले सत्र की 0.5 प्रतिशत गिरावट के बाद हल्की मजबूती देखने को मिली है।

    घरेलू बाजार में भी उतार-चढ़ाव
    घरेलू वायदा बाजार (MCX) में गुरुवार रात करीब 11:30 बजे सोना मामूली गिरावट के साथ 1,45,723 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं चांदी भी कमजोर होकर 2,33,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना 1,43,003 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,28,850 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बंद हुई।

    अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का असर
    गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में जून महीने में रोजगार वृद्धि की रफ्तार में तेज गिरावट दर्ज की गई है। इससे संकेत मिला है कि मजबूत दिखने के बावजूद अमेरिकी श्रम बाजार अब भी दबाव में है।

    इन आंकड़ों के बाद जुलाई में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी कम हो गई है। पहले जहां दर बढ़ोतरी की उम्मीद अधिक थी, वहीं अब स्वैप मार्केट में इसकी संभावना घटकर लगभग 18 प्रतिशत रह गई है, जो सप्ताह की शुरुआत में करीब 33 प्रतिशत थी।

    तेल और भू-राजनीतिक कारकों का भी असर
    हाल के महीनों में महंगाई को बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारण रहे कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी देखी जा रही है। होर्मुज जलमार्ग से टैंकरों की आवाजाही बढ़ने और अमेरिका-ईरान के बीच कतर में हुई सकारात्मक वार्ता के बाद तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर के करीब आ गई हैं। इन घटनाक्रमों का असर वैश्विक महंगाई के दबाव को कम करने की दिशा में देखा जा रहा है।

    आगे और तेजी की संभावना सीमित
    टीडी सिक्योरिटीज में कमोडिटी रणनीति प्रमुख बार्ट मेलेक के अनुसार, कम ऊर्जा कीमतें और कमजोर रोजगार वृद्धि आने वाले समय में मुद्रास्फीति के दबाव को घटा सकती हैं। उनका कहना है कि इससे सोने में शॉर्ट पोजीशन कवरिंग बढ़ी है, जबकि नई बिकवाली का दबाव कम हुआ है।

    हालांकि, उनका मानना है कि सोने में तेजी फिलहाल 4,280 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक सीमित रह सकती है। वहीं, लंबे समय में 5,300 डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद फिलहाल अगले साल तक टल सकती है।

  • 3 जुलाई का शेयर बाजार अपडेट बाजार में रहेगा उतार चढ़ाव या बनेगा नया रिकॉर्ड निवेश से पहले पढ़ें पूरी रिपोर्ट

    3 जुलाई का शेयर बाजार अपडेट बाजार में रहेगा उतार चढ़ाव या बनेगा नया रिकॉर्ड निवेश से पहले पढ़ें पूरी रिपोर्ट


    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में 3 जुलाई का कारोबारी सत्र कई महत्वपूर्ण घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होगा। पिछले कुछ दिनों से बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर अब वैश्विक आर्थिक आंकड़ों कच्चे तेल की कीमतों विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी हुई है। ऐसे में आज का कारोबार भी काफी हलचल भरा रहने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत हल्की बढ़त या सीमित उतार चढ़ाव के साथ हो सकती है। यदि विदेशी बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो बैंकिंग आईटी ऑटो और कैपिटल गुड्स सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं वैश्विक स्तर पर किसी नकारात्मक खबर का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई और घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की खरीद बिक्री अहम भूमिका निभाएगी। यदि विदेशी निवेशकों का भरोसा बरकरार रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है जबकि बिकवाली बढ़ने पर मुनाफावसूली का दबाव भी देखने को मिल सकता है।

    आईटी सेक्टर पर निवेशकों की विशेष नजर बनी रहेगी क्योंकि आने वाले दिनों में बड़ी कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे सामने आने वाले हैं। इसके अलावा बैंकिंग शेयरों में भी गतिविधि तेज रहने की उम्मीद है। यदि ब्याज दरों को लेकर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो वित्तीय शेयरों को समर्थन मिल सकता है।

    ऑटो सेक्टर में मासिक बिक्री के आंकड़े निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। अच्छी बिक्री दर्ज करने वाली कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर भी रक्षात्मक निवेश के लिहाज से आकर्षण का केंद्र बने रह सकते हैं।

    ऊर्जा और तेल गैस कंपनियों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव का सीधा असर इन कंपनियों के प्रदर्शन पर पड़ता है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और कई सेक्टर्स को राहत मिल सकती है।

    विशेषज्ञ फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकता है। इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए आज का सत्र अवसरों के साथ जोखिम भी लेकर आ सकता है इसलिए स्टॉप लॉस का पालन करना जरूरी रहेगा।

    बाजार की चाल पर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों वैश्विक महंगाई की स्थिति डॉलर इंडेक्स और एशियाई बाजारों के प्रदर्शन का भी प्रभाव रहेगा। यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक रहते हैं तो भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है। हालांकि किसी भी अप्रत्याशित अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से बाजार में अचानक उतार चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।

    कुल मिलाकर 3 जुलाई का कारोबारी दिन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। समझदारी से निवेश करने वाले निवेशकों के लिए बाजार में अच्छे अवसर बन सकते हैं जबकि बिना रणनीति के निवेश करने वालों को सतर्क रहने की जरूरत होगी।

  • 'एनर्जी ड्रिंक' दावों पर सख्त हुआ एफएसएसएआई, रेड बुल, स्टिंग, कैम्पा समेत कई ब्रांड्स को जारी किए नोटिस

    'एनर्जी ड्रिंक' दावों पर सख्त हुआ एफएसएसएआई, रेड बुल, स्टिंग, कैम्पा समेत कई ब्रांड्स को जारी किए नोटिस


    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के उपयोग और उत्पादों पर किए जा रहे कथित भ्रामक दावों को लेकर कई प्रमुख पेय पदार्थ ब्रांड्स को नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    नियामक के अनुसार, मौजूदा खाद्य सुरक्षा कानून और संबंधित नियमों में ‘एनर्जी ड्रिंक’ श्रेणी के लिए कोई अलग मानक निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे में किसी उत्पाद को इस नाम से प्रस्तुत करना या उसकी पैकेजिंग एवं प्रचार सामग्री में ऐसे शब्दों का उपयोग करना नियामकीय जांच के दायरे में आता है। इसी आधार पर संबंधित कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

    नोटिस में यह भी कहा गया है कि उत्पादों की ब्रांडिंग और लेबलिंग के दौरान ऐसे दावों से बचना आवश्यक है, जिनसे यह संकेत मिले कि संबंधित पेय शरीर या मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाता है, ऊर्जा स्तर में वृद्धि करता है, ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है या सामान्य कमजोरी दूर करने जैसे चिकित्सीय अथवा कार्यात्मक लाभ प्रदान करता है। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत इस प्रकार के दावों को स्वीकृति प्राप्त नहीं है।

    खाद्य नियामक का कहना है कि उत्पादों की पैकेजिंग, विज्ञापन और प्रचार सामग्री उपभोक्ताओं को स्पष्ट, तथ्यात्मक और नियमों के अनुरूप जानकारी उपलब्ध कराए। यदि किसी उत्पाद के बारे में ऐसे दावे किए जाते हैं जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, तो उन्हें भ्रामक माना जा सकता है। इसी कारण संबंधित कंपनियों से जवाब तलब किया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य एवं पेय उद्योग में ब्रांडिंग और मार्केटिंग के दौरान किए जाने वाले दावों की पारदर्शिता उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। किसी भी उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और उसके संभावित प्रभावों के बारे में सही जानकारी उपलब्ध होना उपभोक्ताओं के सूचित निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    हाल के समय में खाद्य उत्पादों की लेबलिंग, प्रचार और गुणवत्ता को लेकर नियामकीय निगरानी लगातार बढ़ी है। इससे पहले भी विभिन्न खाद्य कारोबार संचालकों को उत्पादों के दावों, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और उपभोक्ता शिकायतों से जुड़े नियमों के कथित उल्लंघन के मामलों में नोटिस जारी किए जा चुके हैं। साथ ही उन्हें निर्धारित नियमों के अनुरूप आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए थे।

    विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई का उद्देश्य उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाना, उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध खाद्य एवं पेय उत्पाद निर्धारित कानूनी मानकों और लेबलिंग नियमों का पूरी तरह पालन करें। इससे भविष्य में उत्पादों की प्रस्तुति और विपणन के तौर-तरीकों में भी अधिक जवाबदेही देखने को मिल सकती है।

  • HDFC बैंक डेबिट कार्ड यूजर्स के लिए बड़ी राहत, स्मार्ट इस्तेमाल से हर महीने हजारों रुपये तक की बचत का मौका

    HDFC बैंक डेबिट कार्ड यूजर्स के लिए बड़ी राहत, स्मार्ट इस्तेमाल से हर महीने हजारों रुपये तक की बचत का मौका

    नई दिल्ली । डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दौर में डेबिट कार्ड केवल नकदी निकालने का साधन नहीं रह गया है। यदि ग्राहक उपलब्ध सुविधाओं और ऑफर्स का सही तरीके से उपयोग करें तो रोजमर्रा के खर्चों में उल्लेखनीय बचत की जा सकती है। एचडीएफसी बैंक अपने डेबिट कार्ड धारकों के लिए कई ऐसे लाभ उपलब्ध कराता है, जिनकी मदद से ऑनलाइन खरीदारी, यात्रा बुकिंग और नियमित बिल भुगतान पर अतिरिक्त फायदा मिल सकता है।

    बैंक की डिजिटल भुगतान सेवाओं का उपयोग करने वाले ग्राहकों के लिए विशेष कैशबैक और रिवॉर्ड ऑफर्स उपलब्ध हैं। डेबिट कार्ड को डिजिटल वॉलेट से लिंक कर भुगतान करने पर पात्र ग्राहकों को निर्धारित शर्तों के अनुसार कैशबैक का लाभ मिल सकता है। इससे डिजिटल ट्रांजैक्शन न केवल आसान बनते हैं, बल्कि खर्च का कुछ हिस्सा भी वापस मिलने की संभावना रहती है।

    यात्रा और ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ग्राहकों के लिए भी कई आकर्षक ऑफर्स उपलब्ध हैं। फ्लाइट, होटल और बस टिकट की बुकिंग के साथ-साथ प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करने पर भी कैशबैक या अन्य लाभ मिल सकते हैं। ऐसे ऑफर्स का लाभ उठाकर ग्राहक अपने मासिक बजट पर पड़ने वाले खर्च को कम कर सकते हैं।

    कॉन्टैक्टलेस डेबिट कार्ड सुविधा भी ग्राहकों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। ‘टैप टू पे’ तकनीक के जरिए बिना कार्ड स्वाइप किए तेज और सुरक्षित भुगतान किया जा सकता है। पात्र लेनदेन पर कैशबैक जैसे लाभ भी उपलब्ध हो सकते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से किराना, रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप और अन्य दैनिक भुगतान के दौरान समय बचाने के साथ अतिरिक्त बचत का अवसर भी देती है।

    नियमित बिलों के लिए ऑटो-पेमेंट सुविधा अपनाने वाले ग्राहकों को भी निर्धारित शर्तों के अनुसार अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। बिजली, मोबाइल, गैस, इंटरनेट और अन्य आवश्यक सेवाओं के बिल समय पर स्वतः जमा होने से लेट फीस से बचाव होता है। इसके साथ पात्र ग्राहकों को कैशबैक या अन्य प्रोत्साहन का लाभ भी मिल सकता है।

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग उत्पादों के साथ मिलने वाले ऑफर्स का लाभ तभी अधिक मिलता है, जब ग्राहक उनकी शर्तों और पात्रता को समझकर उनका उपयोग करें। अनावश्यक खर्च करने के बजाय आवश्यक खरीदारी और नियमित भुगतान में इन सुविधाओं का इस्तेमाल करने से मासिक बजट पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

    ग्राहकों को किसी भी ऑफर का लाभ लेने से पहले उसकी वैधता, न्यूनतम लेनदेन राशि, पात्रता और अन्य नियमों की जानकारी अवश्य प्राप्त करनी चाहिए। समय-समय पर बैंक विभिन्न ऑफर्स में बदलाव भी करते हैं, इसलिए अपडेट जानकारी के आधार पर ही ट्रांजैक्शन करना बेहतर माना जाता है। सही योजना और समझदारी के साथ डेबिट कार्ड का उपयोग करने पर डिजिटल भुगतान अधिक सुविधाजनक होने के साथ बचत का प्रभावी माध्यम भी बन सकता है।

  • कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार, बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी; कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

    कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार, बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी; कारोबार को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने कोयला क्षेत्र में कारोबार को अधिक सरल, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने आवंटित कोयला ब्लॉकों के लिए निष्पादन बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा श्योरिटी बॉन्ड के उपयोग को मंजूरी दे दी है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य कोयला ब्लॉक आवंटियों को अधिक वित्तीय लचीलापन प्रदान करना और खनन परियोजनाओं के विकास की प्रक्रिया को गति देना है।

    नए प्रावधान के तहत कोयला ब्लॉक आवंटी अब अपनी निष्पादन सुरक्षा संबंधी अनिवार्यता पूरी करने के लिए बैंक गारंटी या बीमा श्योरिटी बॉन्ड, दोनों में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकेंगे। यह सुविधा केवल नए आवंटियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पहले से आवंटित कोयला ब्लॉकों पर भी लागू होगी। ऐसे आवंटी निर्धारित नियमों के अनुसार पहले से जमा बैंक गारंटी को बीमा श्योरिटी बॉन्ड से प्रतिस्थापित कर सकेंगे।

    सरकार का मानना है कि इस बदलाव से पारंपरिक बैंक गारंटी व्यवस्था से जुड़े वित्तीय दबाव में कमी आएगी। अब कंपनियों को बड़ी राशि बैंक गारंटी के रूप में लंबे समय तक रोककर नहीं रखनी पड़ेगी। इससे उनके पास उपलब्ध पूंजी का उपयोग खदानों के विकास, आधारभूत ढांचे के निर्माण, मशीनरी की खरीद और परिचालन गतिविधियों में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

    नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य निवेशकों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करना भी है। बीमा श्योरिटी बॉन्ड के विकल्प से कंपनियों के लिए पूंजी प्रबंधन आसान होगा और उन्हें अन्य वित्तीय आवश्यकताओं के लिए संसाधन उपलब्ध रहेंगे। इसके साथ ही सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इस व्यवस्था के बावजूद निष्पादन सुरक्षा से जुड़े सभी सरकारी हित पूरी तरह सुरक्षित बने रहेंगे।

    प्रारंभिक चरण में यह सुविधा उन कोयला ब्लॉकों के लिए लागू की जाएगी जिनका आवंटन खान एवं खनिज संबंधी प्रावधानों के तहत किया गया है। इसके बाद सरकार इस व्यवस्था का विस्तार अन्य संबंधित कानूनों के तहत आवंटित कोयला ब्लॉकों तक भी करने की दिशा में आगे बढ़ेगी, ताकि पूरे क्षेत्र में समान और आधुनिक वित्तीय ढांचा विकसित किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुधार से कोयला क्षेत्र में निवेश का माहौल और बेहतर होगा। परियोजनाओं के समयबद्ध विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा नई खदानों के संचालन में आने वाली वित्तीय बाधाएं कम होंगी। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सहायता मिलने की संभावना है।

    सरकार पिछले कुछ वर्षों से खनन क्षेत्र में प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है। बीमा श्योरिटी बॉन्ड को मंजूरी भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे भविष्य में कोयला क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी, आधुनिक और निवेशकों के लिए आकर्षक बन सकेगा, जबकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी अपेक्षित गति आने की उम्मीद है।

  • वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत पर पीएम मोदी का भरोसा, बोले- निवेश और कारोबार के लिए सबसे मजबूत बन रहा देश

    वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत पर पीएम मोदी का भरोसा, बोले- निवेश और कारोबार के लिए सबसे मजबूत बन रहा देश

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की विकास यात्रा और आर्थिक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि देश आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में व्यवधान, व्यापारिक अनिश्चितता और मांग में कमी जैसी परिस्थितियों के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक प्रदर्शन किया है और लगातार सुधारों के जरिए निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार किया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अनेक आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है, लेकिन कठिन परिस्थितियां ही किसी देश की वास्तविक क्षमता की परीक्षा लेती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत ने ऐसे समय में अपनी आर्थिक मजबूती साबित की है और आने वाले वर्षों में भी विकास की गति बनाए रखने की पूरी क्षमता रखता है।

    उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 7.7 प्रतिशत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर्ज की, जो वैश्विक परिस्थितियों के बीच देश की मजबूत आर्थिक नींव का संकेत है। उनके अनुसार पिछले बारह वर्षों में सरकार ने निरंतर सुधार की नीति अपनाते हुए अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक बदलाव किए हैं। लगातार सुधार और बेहतर नीतियों के माध्यम से देश के आर्थिक ढांचे को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाया गया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के महीनों में कर व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और कारोबार सुगमता से जुड़े नई पीढ़ी के सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य निवेशकों के लिए अनावश्यक बाधाओं को कम करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और उद्योगों को अधिक अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र की भागीदारी को लगातार बढ़ावा दे रही है और अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निवेश के लिए खोल दिया गया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में प्रोत्साहन योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों को मिल सकता है। सरकार का प्रयास है कि उद्योगों को नीति स्थिरता, बेहतर बुनियादी ढांचा और तेज निर्णय प्रक्रिया उपलब्ध कराई जाए, जिससे भारत वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन सके।

    प्रधानमंत्री ने जापानी उद्योग जगत का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में भारत जापानी कंपनियों के लिए सबसे पसंदीदा निवेश स्थलों में शामिल रहा है। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी और आपसी विश्वास का परिणाम बताया। उन्होंने जापानी निवेशकों से भारत में उपलब्ध नए अवसरों का लाभ उठाने और दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का आग्रह किया।

    इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से विशेष ‘जापान बिजनेस वीक’ का आयोजन किया जाएगा। इस पहल के तहत वरिष्ठ अधिकारी जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद करेंगे, उनकी समस्याओं और सुझावों को सुनेंगे तथा कारोबार सुगमता से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए आवश्यक कदमों पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों के साथ निरंतर संवाद और सहयोग के माध्यम से भारत को वैश्विक उद्योग एवं निवेश का और अधिक आकर्षक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।