Category: Economy

  • कंपनी ने चौथी तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए, जिससे शेयर बाजार में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली।

    कंपनी ने चौथी तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए, जिससे शेयर बाजार में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली।

    नई दिल्ली ।टाटा समूह की प्रमुख लाइफस्टाइल और ज्वैलरी कंपनी Titan Company ने अपने हालिया तिमाही नतीजों में जबरदस्त प्रदर्शन कर बाजार और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कंपनी ने चौथी तिमाही में मुनाफे और रेवेन्यू दोनों में तेज़ उछाल दर्ज करते हुए यह साबित किया है कि उसका बिजनेस मॉडल लगातार मजबूत हो रहा है और उपभोक्ता मांग भी स्थिर रूप से बढ़ रही है। इसी प्रदर्शन के आधार पर कंपनी ने निवेशकों को प्रति शेयर ₹15 डिविडेंड देने की घोषणा की है, जिससे शेयरधारकों में उत्साह और बढ़ गया है।

    इस तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब 35 प्रतिशत बढ़कर 1,179 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 871 करोड़ रुपये था। वहीं, कंपनी की कुल आय में लगभग 78 प्रतिशत की बड़ी छलांग देखने को मिली और रेवेन्यू बढ़कर 23,934 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह वृद्धि कंपनी के विभिन्न बिजनेस सेगमेंट में मजबूत बिक्री और ग्राहकों की बढ़ती मांग का परिणाम मानी जा रही है।

    हालांकि कंपनी के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन मार्जिन में थोड़ी गिरावट देखने को मिली। इसके बावजूद कुल मिलाकर कंपनी का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा। बाजार में कंपनी की स्थिति को देखते हुए निवेशकों का भरोसा और भी मजबूत हुआ है, खासकर तब जब रेवेन्यू और प्रॉफिट दोनों में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई हो।

    सबसे बड़ा योगदान कंपनी के ज्वैलरी बिजनेस से आया है, जिसने इस तिमाही में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 18,195 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद ग्राहकों की मांग में कोई कमी नहीं आई, बल्कि प्रीमियम और ब्रांडेड ज्वैलरी की खरीदारी में और तेजी देखी गई। शादी और त्योहारों के सीजन ने भी इस सेगमेंट को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।

    इसके अलावा घड़ियों के कारोबार में भी कंपनी ने स्थिर और मजबूत प्रदर्शन किया है। प्रीमियम और एनालॉग घड़ियों की मांग बढ़ने से इस सेगमेंट की बिक्री में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। उपभोक्ता अब अधिक गुणवत्ता और डिजाइन आधारित उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसका सीधा फायदा कंपनी को मिला है।

    कंपनी के नेतृत्व ने इस वित्त वर्ष को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह साल कई मायनों में रिकॉर्ड तोड़ साबित हुआ है। कम समय में रेवेन्यू में तेज़ बढ़ोतरी ने कंपनी की रणनीति और बाजार में उसकी पकड़ को और मजबूत किया है।

    शेयर बाजार में भी कंपनी के नतीजों का सकारात्मक असर देखने को मिला। निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के कारण कंपनी के शेयर में तेजी दर्ज की गई और यह नए इंट्राडे स्तर तक पहुंच गया। डिविडेंड की घोषणा ने बाजार में और भी सकारात्मक माहौल बना दिया है, जिससे आने वाले समय में निवेशकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।

  • शेयर बाजार में शानदार आगाज़: ‘किश्त’ की पैरेंट कंपनी ने पहले दिन ही निवेशकों को कराया मुनाफा

    शेयर बाजार में शानदार आगाज़: ‘किश्त’ की पैरेंट कंपनी ने पहले दिन ही निवेशकों को कराया मुनाफा

    नई दिल्ली ।डिजिटल फाइनेंस और ऑनलाइन लोन सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से उभर रही OnEMI Technology Solutions ने शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत कर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कंपनी के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होते ही निवेशकों को अच्छा मुनाफा मिला, जिससे IPO में हिस्सा लेने वाले लोगों के चेहरे खिल उठे।

    कंपनी के शेयर अपने तय इश्यू प्राइस से करीब 11 प्रतिशत ऊपर खुले। शुरुआती कारोबार में ही शेयरों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला और यह लिस्टिंग निवेशकों के लिए फायदे का सौदा साबित हुई। बाजार में पहले से ही इस IPO को लेकर उत्साह बना हुआ था और लिस्टिंग के बाद वह भरोसा और मजबूत होता दिखाई दिया।

    हालांकि कुछ निवेशकों को इससे भी अधिक प्रीमियम की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा बाजार की अस्थिर परिस्थितियों के बीच इस प्रदर्शन को मजबूत शुरुआत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेंडिंग सेक्टर की बढ़ती मांग ने कंपनी के प्रति निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है।

    करीब 926 करोड़ रुपये के इस IPO को निवेशकों की ओर से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। अंतिम दिन तक यह इश्यू कई गुना सब्सक्राइब हुआ, जिससे साफ संकेत मिला कि बाजार में कंपनी को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है। खास बात यह रही कि बड़े संस्थागत निवेशकों ने कंपनी में सबसे अधिक रुचि दिखाई।

    संस्थागत निवेशकों के अलावा गैर-संस्थागत और रिटेल निवेशकों ने भी IPO में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में आवेदन मिलने से यह इश्यू बाजार में चर्चा का विषय बन गया। IPO खुलने से पहले ही कंपनी ने एंकर निवेशकों के जरिए बड़ी रकम जुटाकर अपनी मजबूत स्थिति का संकेत दे दिया था।

    OnEMI Technology Solutions की शुरुआत साल 2016 में हुई थी। कंपनी डिजिटल लेंडिंग और पेमेंट सेवाओं के क्षेत्र में काम करती है और अपने प्लेटफॉर्म के जरिए ग्राहकों को कई तरह की वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी पर्सनल लोन, छोटे कारोबारियों के लिए लोन, EMI फाइनेंसिंग और अन्य डिजिटल क्रेडिट सेवाओं के माध्यम से तेजी से अपने कारोबार का विस्तार कर रही है।

    बीते कुछ वर्षों में कंपनी ने करोड़ों यूजर्स तक अपनी पहुंच बनाई है। बड़ी संख्या में ग्राहकों के जुड़ने और डिजिटल सेवाओं की मांग बढ़ने से कंपनी का कारोबार लगातार मजबूत हुआ है। कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट भी तेजी से बढ़ा है, जो उसके विस्तार और ग्राहकों के भरोसे को दर्शाता है।

    वित्तीय आंकड़ों की बात करें तो कंपनी ने आय और मुनाफे दोनों में लगातार सुधार दर्ज किया है। यही वजह है कि निवेशकों ने कंपनी के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। डिजिटल फाइनेंस सेक्टर में बढ़ते अवसरों के कारण कंपनी को आगे भी मजबूत ग्रोथ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    कंपनी ने संकेत दिया है कि IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से अपने फाइनेंस कारोबार को और मजबूत करने में किया जाएगा। इसके जरिए कंपनी ज्यादा लोन ग्रोथ हासिल करने और डिजिटल फाइनेंस मार्केट में अपनी स्थिति को और बेहतर बनाने की योजना पर काम करेगी।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में डिजिटल क्रेडिट और ऑनलाइन फाइनेंस सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए विकास के बड़े अवसर मौजूद हैं। अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी रहेगी कि कंपनी अपनी मौजूदा ग्रोथ को भविष्य में किस तरह बनाए रखती है।

  • शेयर बाजार में दस्तक देने जा रही पैकेजिंग कंपनी, 50 रुपये प्रति शेयर वाला IPO बना चर्चा का विषय

    शेयर बाजार में दस्तक देने जा रही पैकेजिंग कंपनी, 50 रुपये प्रति शेयर वाला IPO बना चर्चा का विषय


    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में एक और नया आईपीओ निवेशकों के लिए अवसर लेकर आने वाला है। पैकेजिंग सेक्टर में काम करने वाली कंपनी आरएफबीएल फ्लेक्सी पैक जल्द ही अपना SME आईपीओ लॉन्च करने जा रही है। कम कीमत और तेजी से बढ़ते पैकेजिंग उद्योग की वजह से यह इश्यू निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कंपनी का आईपीओ 12 मई से खुलेगा, जबकि निवेशक 14 मई तक इसमें आवेदन कर सकेंगे।

    इस आईपीओ का प्राइस बैंड 47 रुपये से 50 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। कंपनी इस इश्यू के जरिए लगभग 35 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। इसके तहत करीब 71 लाख नए शेयर जारी किए जाएंगे। शेयर बाजार में इसकी संभावित लिस्टिंग 19 मई को हो सकती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कम कीमत वाला यह इश्यू छोटे और मध्यम निवेशकों को आकर्षित कर सकता है।

    आईपीओ में आवेदन करने के लिए रिटेल निवेशकों को कम से कम 3,000 शेयरों का एक लॉट खरीदना होगा। यदि कोई निवेशक ऊपरी प्राइस बैंड पर आवेदन करता है तो उसे लगभग 1.50 लाख रुपये का निवेश करना पड़ेगा। वहीं बड़े निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश राशि इससे कहीं अधिक रखी गई है। शेयर आवंटन की प्रक्रिया 15 मई तक पूरी होने की उम्मीद है।

    कंपनी पिछले कई वर्षों से फ्लेक्सिबल पैकेजिंग मटेरियल के निर्माण और व्यापार में सक्रिय है। यह मुख्य रूप से प्लास्टिक फिल्म रोल और पैकेजिंग पाउच तैयार करती है, जिनका इस्तेमाल खाद्य पदार्थ, फार्मा और घरेलू उत्पादों की पैकेजिंग में किया जाता है। कंपनी विभिन्न उद्योगों की जरूरतों के अनुसार कस्टमाइज पैकेजिंग समाधान भी उपलब्ध कराती है, जिससे उसकी बाजार में अच्छी पकड़ बनी हुई है।

    भारत में पैकेज्ड फूड, एफएमसीजी और फार्मास्यूटिकल सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इन उद्योगों में बढ़ती मांग का सीधा फायदा पैकेजिंग कंपनियों को मिल रहा है। इसी अवसर को देखते हुए कंपनी अपने कारोबार का विस्तार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी आधुनिक मल्टीलेयर पैकेजिंग तकनीक का इस्तेमाल करती है, जिससे उत्पादों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता भी लंबे समय तक बनी रहती है।

    कंपनी की उत्पादन इकाई गुजरात के हिम्मतनगर में स्थित है। सीमित संसाधनों के बावजूद कंपनी लगातार अपने कारोबार को मजबूत करने में लगी हुई है। आधुनिक तकनीक और मजबूत वितरण नेटवर्क की मदद से कंपनी पैकेजिंग उद्योग में अपनी स्थिति को और बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है।

    वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में 135 करोड़ रुपये से अधिक की आय दर्ज की थी। इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा भी मजबूत रहा, जिससे संकेत मिलता है कि कारोबार लगातार स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है। चालू वित्त वर्ष में भी कंपनी ने संतोषजनक प्रदर्शन किया है और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम जारी रखा है।

    आईपीओ से मिलने वाली राशि का उपयोग मुख्य रूप से कारोबार विस्तार, पूंजीगत खर्च और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार में अपनी मौजूदगी को मजबूत करना है। बढ़ती पैकेजिंग इंडस्ट्री और कम प्राइस बैंड को देखते हुए यह आईपीओ निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

  • शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूटा, बैंकिंग शेयरों में बिकवाली से निवेशकों की बढ़ी चिंता

    शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूटा, बैंकिंग शेयरों में बिकवाली से निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली ।सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में एक बार फिर कमजोरी का माहौल देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सामान्य स्थिति दिखाई देने के बावजूद दिन चढ़ने के साथ बाजार पर बिकवाली का दबाव बढ़ता गया और अंत तक दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में तेज मुनाफावसूली ने बाजार की रफ्तार को धीमा कर दिया, जबकि आईटी कंपनियों के शेयरों में आई मजबूती ने कुछ हद तक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की।

    कारोबार के दौरान निवेशकों का रुझान काफी सतर्क नजर आया। वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक चिंताओं और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इसका असर सबसे ज्यादा बैंकिंग शेयरों पर दिखाई दिया, जहां बड़े सरकारी और निजी बैंकों में लगातार बिकवाली देखने को मिली। कई प्रमुख बैंकिंग शेयर दिनभर दबाव में कारोबार करते रहे, जिससे पूरे बाजार का माहौल कमजोर पड़ गया।

    दिन के अंत तक सेंसेक्स में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। लगातार दूसरे दिन बाजार में कमजोरी आने से निवेशकों के बीच सतर्कता और बढ़ गई है। हालांकि इस गिरावट के बीच कुछ सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन कर बाजार को पूरी तरह टूटने से बचाने की कोशिश की।

    आईटी सेक्टर शुक्रवार को बाजार का सबसे मजबूत हिस्सा बनकर उभरा। टेक्नोलॉजी कंपनियों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे इस सेक्टर के शेयर तेजी के साथ बंद हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक डिजिटल मांग और तकनीकी सेवाओं की बढ़ती जरूरत के कारण निवेशक आईटी कंपनियों को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। इसके अलावा एफएमसीजी और कंज्यूमर सेक्टर में भी हल्की मजबूती देखने को मिली, जिसने बाजार को कुछ सहारा दिया।

    दूसरी ओर बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में गिरावट काफी गहरी रही। सरकारी बैंकों के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला, जबकि प्राइवेट बैंक और वित्तीय सेवा कंपनियां भी बिकवाली से नहीं बच सकीं। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, मेटल, एनर्जी और रियल एस्टेट सेक्टर भी कमजोरी के साथ बंद हुए।

    बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया। उपभोक्ता उत्पाद, हेल्थकेयर और पेंट सेक्टर से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों का भरोसा बना रहा। इन कंपनियों में आई तेजी ने यह संकेत दिया कि बाजार में अभी भी चुनिंदा क्षेत्रों में निवेश के अवसर मौजूद हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात स्थिर रहते हैं और बैंकिंग सेक्टर में बिकवाली कम होती है, तो बाजार में दोबारा सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशक सतर्क रणनीति के साथ मजबूत और स्थिर कंपनियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

  • नोएडा बना टेक इनोवेशन का नया केंद्र, अडोबी ने 1.58 लाख वर्गफुट में शुरू किया अत्याधुनिक ऑफिस

    नोएडा बना टेक इनोवेशन का नया केंद्र, अडोबी ने 1.58 लाख वर्गफुट में शुरू किया अत्याधुनिक ऑफिस

    नई दिल्ली । नोएडा के एक आधुनिक व्यावसायिक परिसर में हाल ही में एक ऐसा बदलाव देखने को मिला है, जिसने पूरे क्षेत्र की पहचान को और मजबूत कर दिया है। ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी अडोबी ने यहां अपने नए बड़े ऑफिस की शुरुआत कर दी है, जो न केवल एक कॉर्पोरेट विस्तार है बल्कि भारत के बढ़ते डिजिटल भविष्य का भी प्रतीक बन चुका है। करीब 1.58 लाख वर्गफुट में फैला यह नया कार्यस्थल इस बात का संकेत है कि भारत अब वैश्विक तकनीकी विकास का एक मजबूत केंद्र बनता जा रहा है।

    इस नए ऑफिस में 700 से अधिक पेशेवर एक साथ काम करेंगे, जिनमें मुख्य रूप से इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और ग्राहक अनुभव से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। आधुनिक तकनीक से सुसज्जित यह कार्यस्थल इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां नवाचार, सहयोग और रचनात्मकता को बढ़ावा मिल सके। जैसे-जैसे दुनिया एआई आधारित तकनीकों की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस केंद्र की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जाएगी।

    यह विस्तार केवल एक व्यावसायिक निर्णय नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे भारत में बढ़ते तकनीकी भरोसे और प्रतिभा की क्षमता से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत में वर्षों से विकसित हो रही डिजिटल स्किल्स और मजबूत इंजीनियरिंग इकोसिस्टम ने वैश्विक कंपनियों को लगातार आकर्षित किया है। इसी कड़ी में नोएडा का यह नया केंद्र आने वाले समय में बड़े इनोवेशन का हिस्सा बनने जा रहा है।

    इस पूरे कैंपस को इस तरह तैयार किया गया है कि यह भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम करे। यहां का माहौल न केवल तकनीकी विकास को बढ़ावा देता है बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को भी प्राथमिकता देता है। ऊर्जा की बचत करने वाली प्रणालियां, टिकाऊ निर्माण तकनीक और आधुनिक डिजाइन इस बात को दर्शाते हैं कि भविष्य के कार्यस्थल किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    भारत में कंपनी की यात्रा कई वर्षों पहले एक छोटे अनुसंधान केंद्र के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन आज यह देश इसके वैश्विक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। यहां मौजूद हजारों कर्मचारी न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि वैश्विक उत्पादों और सेवाओं के निर्माण में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इस नए विस्तार से यह योगदान और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

    नोएडा में इस तरह के बड़े निवेश यह भी दिखाते हैं कि यह क्षेत्र अब केवल एक औद्योगिक या आवासीय केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि यह एक पूर्ण तकनीकी और नवाचार हब के रूप में विकसित हो रहा है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल मानव संसाधन और तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम इसे वैश्विक कंपनियों के लिए एक आदर्श स्थान बना रहा है।

    आने वाले समय में इस प्रकार के निवेश न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी एक नई दिशा देंगे। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं, बल्कि तकनीक को बनाने और दिशा देने वाला देश बनता जा रहा है।

  • भारत–इजिप्ट रणनीतिक साझेदारी मजबूत, 2030 तक 12 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

    भारत–इजिप्ट रणनीतिक साझेदारी मजबूत, 2030 तक 12 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य



    नई दिल्ली। भारत और मिस्र (इजिप्ट) के बीच आर्थिक संबंधों में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। हाल ही में मुंबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एक बिजनेस डेलिगेशन मीटिंग में दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने पर जोर दिया।


    इस बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि दोनों देश आने वाले वर्षों में अपने द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान लगभग 5 अरब डॉलर से बढ़ाकर वर्ष 2030 तक 12 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
    इस मौके पर मुंबई में तैनात डाहलिया मोहम्मद नाजिह मोहम्मद तवाकोल ने कहा कि भारत और इजिप्ट के संबंध ऐतिहासिक और मजबूत रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने जून 2023 में रणनीतिक साझेदारी समझौता किया था, जिससे सहयोग के नए रास्ते खुले हैं।
    उन्होंने आगे कहा कि ऊर्जा, पर्यटन, कृषि, फार्मास्युटिकल और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच अपार संभावनाएं हैं। विशेष रूप से सूएज नहर आर्थिक क्षेत्र को भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ा निवेश केंद्र बताया गया है।
    इस अवसर पर विजय कलंत्री ने भी कहा कि भारत और इजिप्ट के बीच व्यापारिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच लगभग 5 अरब डॉलर का व्यापार हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 12 अरब डॉलर करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
    उन्होंने कहा कि फार्मास्युटिकल, केमिकल और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए इजिप्ट एक बड़ा बाजार बन सकता है। साथ ही, इजिप्ट में भारतीय निवेश भी बढ़ रहा है, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे।
    विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार के साथ-साथ पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। हालांकि कुछ लॉजिस्टिक और वीजा संबंधी चुनौतियां हैं, लेकिन दोनों देश इन्हें तेजी से हल करने की दिशा में काम कर रहे हैं। कुल मिलाकर, भारत और इजिप्ट की यह साझेदारी आने वाले समय में वैश्विक व्यापार के नए अवसर खोल सकती है और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकती है।
  • ईरान युद्ध से भड़के तेल के दाम… जानें दुनिया में कहां मिल रहा सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल?

    ईरान युद्ध से भड़के तेल के दाम… जानें दुनिया में कहां मिल रहा सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल?


    नई दिल्ली।
    ईरान युद्ध (Iran war) से दुनिया भर में तेल के दाम (Oil prices) में उछाल देखने को मिल है। इस बीच पूरी दुनिया में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत कहीं 2.25 रुपये है तो कहीं 394.95 रुपये। यानी पेट्रोल की कीमत कही भारत से 44 गुना सस्ता है तो कहीं करीब चार गुना महंगा। आइए जानें दुनिया में सबसे सस्ता और महंगा पेट्रोल और डीजल (Petrol Diesel Prices) कहां मिलता है?


    सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाले देश

    सबसे पहले बात दुनिया में सबसे महंगे पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देशों की। इस लिस्ट में सबसे ऊपर हांगकांग का नाम है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत करीब 400 रुपये है। इसके बाद मलावी का नाम आता है। यहां पेट्रोल का रेट 364.27 रुपये प्रति लीटर है।

    इजरायल में पेट्रोल जहां, 269.19 रुपये लीटर है वहीं, डेनमार्क में 265.74 रुपये। नीदरलैंड में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 260.15 रुपये है। ग्रीस में 231.57 और अल्बानिया में 231.49 रुपये लीटर है। स्विट्जरलैंड में पेट्रोल की कीमत 231.12 और सिंगापुर में 230.02 रुपये लीटर है।


    दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देश

    दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल लीबिया में है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 2.25 रुपये है। इसके बाद ईरान का नंबर है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 3.32 रुपये है। इसके बाद अंगोला में 31.08, कुवैत में 32.41, अल्जीरिया में 33.75 और तुर्कमेनिस्तान में 40.78 रुपये लीटर है।

    आठवें नंबर इजिप्ट है। यहां पेट्रोल की कीमत 42.78 रुपये है। नौवें पर कतर है, जहां पेट्रोल की कीमत 54.62 रुपये लीटर है। 10वें नंबर पर सऊदी अरब है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 59.62 रुपये है।


    किस देश में सबसे सस्ता डीजल

    सबसे सस्ता डीजल वेनेजुएला में मिलता है। यहां 1 लीटर डीजल की कीमत महज 39 पैसे है। इसके बाद ईरान में 54 पैसे और लीबिया में 2.25 रुपये लीटर। अल्जीरिया में एक लीटर डीजल की कीमत 22.26 रुपये है।

    तुर्कमेनिस्तान में डीजल 27.19 रुपये प्रति लीटर है तो कुवैत में 35.50 रुपये। इजिप्ट में डीजल का रेट 36.36 रुपये लीटर है तो अंगोला में 41.44 रुपये लीटर। सऊदी अरब में एक लीटर डीजल की कीमत 45.37 रुपये और कतर में 53.32 रुपये।


    हांगकांग में 446 रुपये लीटर है डीजल

    दुनिया में सबसे महंगा डीजल हांगकांग में 446 रुपये लीटर है। एक लीटर डीजल की कीमत मलावी में 365, सिंगापुर में 310.49, डेनमार्क में 273.16, स्विट्जरलैंड में 262.09, नीदरलैंड में 257 रुपये लीटर है। इजरायल में जहां एक लीटर डीजल 255.60 रुपये है तो फिनलैंड में 255.59 रुपये।

  • अगस्त से बदलेगी रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था, नई आरक्षण प्रणाली में शिफ्ट होंगी ट्रेनें

    अगस्त से बदलेगी रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था, नई आरक्षण प्रणाली में शिफ्ट होंगी ट्रेनें


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे जल्द ही यात्रियों को टिकट बुकिंग और यात्रा से जुड़ी सुविधाओं में बड़ा बदलाव देने जा रहा है। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि अगस्त 2026 से ट्रेनों को नई उन्नत यात्री आरक्षण प्रणाली में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह बदलाव पूरी तरह सुचारु तरीके से किया जाए और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
    रेल भवन में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान रेलवे की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था और नई तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म की तैयारियों का जायजा लिया गया। मौजूदा यात्री आरक्षण प्रणाली की शुरुआत वर्ष 1986 में हुई थी। पिछले चार दशकों में इसमें कई छोटे बदलाव किए गए, लेकिन अब रेलवे इसे पूरी तरह आधुनिक तकनीक से लैस करने जा रहा है।
    रेल मंत्रालय के मुताबिक नई प्रणाली की क्षमता को अत्याधुनिक तकनीक के जरिए काफी बढ़ाया गया है, ताकि भविष्य में बढ़ती यात्री संख्या और टिकट बुकिंग के दबाव को आसानी से संभाला जा सके। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय रेलवे लगातार डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में काम कर रहा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्टम है।
    वर्तमान में करीब 88 प्रतिशत रेलवे टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं। इसमें RailOne मोबाइल एप की अहम भूमिका रही है, जिसे पिछले साल जुलाई में लॉन्च किया गया था। यह ऐप अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। इस प्लेटफॉर्म पर टिकट बुकिंग, कैंसिलेशन, रिफंड और लाइव ट्रेन स्टेटस जैसी कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हैं।
    नई आरक्षण प्रणाली की सबसे खास बात इसमें शामिल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित प्रेडिक्शन सिस्टम है। यह फीचर वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की संभावना का अनुमान लगाता है। रेलवे के अनुसार, इस सुविधा की सटीकता पहले 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल रही है।
    इसके अलावा RailOne ऐप के जरिए यात्रियों को लाइव ट्रेन ट्रैकिंग, प्लेटफॉर्म और कोच की जानकारी, रेल मदद शिकायत निवारण सेवा और सीट तक भोजन पहुंचाने जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं। फिलहाल इस प्लेटफॉर्म के जरिए रोजाना करीब 9.29 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं, जिनमें आरक्षित और अनारक्षित दोनों तरह के टिकट शामिल हैं।
    सरकार ने यह भी दोहराया कि भारतीय रेलवे देश के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा बनी हुई है। वर्ष 2024-25 में रेलवे ने यात्री सब्सिडी पर 60,239 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे यात्रियों को औसतन 43 प्रतिशत तक किराए में राहत मिली। नई तकनीक आधारित आरक्षण प्रणाली से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में रेलवे यात्रा पहले से ज्यादा स्मार्ट, आसान और तेज हो जाएगी।
  • EPF और EPS में क्या है अंतर? रिटायरमेंट से पहले समझ लें पूरा गणित

    EPF और EPS में क्या है अंतर? रिटायरमेंट से पहले समझ लें पूरा गणित


    नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों की सैलरी स्लिप में हर महीने PF यानी प्रोविडेंट फंड की कटौती जरूर दिखाई देती है, लेकिन ज्यादातर कर्मचारियों को यह नहीं पता होता कि यह पैसा आखिर कहां जमा होता है और रिटायरमेंट के समय इससे कितना फायदा मिलता है। दरअसल, PF केवल एक सेविंग स्कीम नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और पेंशन का मजबूत आधार है। यही वजह है कि लंबे समय तक नौकरी करने वालों के लिए EPF और EPS दोनों बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए का 12 प्रतिशत हिस्सा हर महीने PF के रूप में काटा जाता है। इतनी ही राशि कंपनी की ओर से भी जमा की जाती है। हालांकि, कंपनी का पूरा 12 प्रतिशत सीधे EPF खाते में नहीं जाता। यही वह हिस्सा है जिसे लेकर अधिकांश कर्मचारियों के मन में भ्रम रहता है।

    कर्मचारी के योगदान का पूरा 12 प्रतिशत Employees’ Provident Fund यानी EPF खाते में जमा होता है। वहीं कंपनी के 12 प्रतिशत योगदान में से केवल 3.67 प्रतिशत EPF में जाता है, जबकि 8.33 प्रतिशत हिस्सा Employees’ Pension Scheme यानी EPS में ट्रांसफर कर दिया जाता है। EPS का मकसद कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन उपलब्ध कराना होता है।

    अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 25 हजार रुपये है, तो कर्मचारी की ओर से हर महीने 3 हजार रुपये EPF में जमा होंगे। कंपनी भी 3 हजार रुपये देगी, लेकिन इसमें से करीब 1,250 रुपये EPS में चले जाएंगे और बाकी राशि EPF खाते में जुड़ जाएगी। यानी कर्मचारी के EPF अकाउंट में हर महीने कर्मचारी और कंपनी दोनों के हिस्से मिलाकर रकम जमा होती रहती है, जिस पर सालाना ब्याज भी मिलता है।

    फिलहाल EPFO कर्मचारियों के EPF बैलेंस पर करीब 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दे रहा है। यही वजह है कि लंबे समय तक लगातार नौकरी करने पर PF का फंड लाखों से बढ़कर करोड़ों तक पहुंच सकता है। कंपाउंडिंग का फायदा इसमें सबसे बड़ा रोल निभाता है।

    वहीं EPS में जमा राशि पर ब्याज नहीं मिलता, क्योंकि यह पेंशन स्कीम के तहत संचालित होती है। हालांकि, 10 साल या उससे अधिक नौकरी करने वाले कर्मचारियों को 58 साल की उम्र के बाद मासिक पेंशन का लाभ मिलता है। पेंशन की राशि नौकरी की अवधि और सैलरी के आधार पर तय की जाती है।

    आजकल सोशल मीडिया और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी लोग EPS को लेकर सवाल पूछते नजर आते हैं। कई कर्मचारियों को लगता है कि उनका EPS बैलेंस दिखाई क्यों नहीं देता। विशेषज्ञों के मुताबिक EPS राशि सीधे पेंशन फंड में मैनेज होती है, इसलिए यह सामान्य EPF बैलेंस की तरह अलग से नहीं दिखती।

    कुल मिलाकर, PF केवल सैलरी से होने वाली कटौती नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद आर्थिक मजबूती का बड़ा सहारा है। सही जानकारी और लंबी अवधि तक नियमित निवेश से यही छोटी कटौती भविष्य में बड़ी वित्तीय सुरक्षा में बदल सकती है।

  • डेटा सुरक्षा और एआई विस्तार पर बड़ा कदम, भारत में तैयार होगा आईबीएम-योट्टा का नया क्लाउड प्लेटफॉर्म

    डेटा सुरक्षा और एआई विस्तार पर बड़ा कदम, भारत में तैयार होगा आईबीएम-योट्टा का नया क्लाउड प्लेटफॉर्म


    नई दिल्ली।

    भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा कदम सामने आया है, जहां आईबीएम और योट्टा डेटा सर्विसेज ने मिलकर एक नए एजेंटिक एआई प्लेटफॉर्म को विकसित करने की योजना बनाई है। यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह भारत स्थित क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित होगा और इसका उद्देश्य देश की कंपनियों और सरकारी संस्थानों को सुरक्षित, नियंत्रित और आधुनिक एआई समाधान उपलब्ध कराना है।

    इस पहल के तहत आईबीएम की उन्नत एआई तकनीक को योट्टा के स्वदेशी क्लाउड सिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा। इससे एक ऐसा डिजिटल ढांचा तैयार होगा जो डेटा सुरक्षा, नियामकीय अनुपालन और स्थानीय डेटा स्टोरेज की जरूरतों को पूरा करेगा। इस प्लेटफॉर्म के जरिए संगठन अपने विभिन्न विभागों जैसे आईटी सेवाएं, मानव संसाधन, वित्त, खरीद और ग्राहक सेवा में एआई आधारित एजेंट्स का उपयोग कर सकेंगे।

    कंपनियों में अब एआई को केवल प्रयोग के स्तर से आगे बढ़ाकर वास्तविक संचालन में शामिल करने की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है, जिससे कारोबारी प्रक्रियाएं अधिक तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित हो सकें। इसके साथ ही यह प्रणाली कंपनियों को यह सुविधा भी देगी कि वे एआई का उपयोग अपने नियंत्रण और अनुपालन मानकों के अनुसार कर सकें।

    इस परियोजना के तहत आईबीएम का सॉवरेन कोर सिस्टम भी योट्टा के क्लाउड प्लेटफॉर्म पर होस्ट किया जाएगा, जिससे एक मजबूत और स्वदेशी डिजिटल वातावरण तैयार होगा। यह व्यवस्था कंपनियों को डेटा सुरक्षा, ऑडिट ट्रैकिंग और नियंत्रित एआई संचालन जैसी सुविधाएं प्रदान करेगी, जिससे नियामकीय आवश्यकताओं का पालन आसान हो जाएगा।

    इस साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य भारतीय कंपनियों को आत्मनिर्भर एआई इकोसिस्टम प्रदान करना है, जहां वे बिना किसी बाहरी निर्भरता के अपने डेटा और तकनीकी प्रक्रियाओं को नियंत्रित कर सकें। योट्टा का क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और आईबीएम की एआई क्षमताएं मिलकर एक ऐसा समाधान तैयार करेंगी, जो बड़े पैमाने पर एआई अपनाने को सरल और सुरक्षित बनाएगा।

    कुल मिलाकर यह पहल भारत में एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर संकेत करती है, जो आने वाले समय में डिजिटल इनोवेशन को नई दिशा दे सकती है।