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  • निफ्टी में उतार-चढ़ाव के बीच भी मजबूत तेजी की उम्मीद, जानें अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

    निफ्टी में उतार-चढ़ाव के बीच भी मजबूत तेजी की उम्मीद, जानें अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

    नई दिल्ली ।
    शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से निफ्टी 50 इंडेक्स एक अस्थिर लेकिन दिलचस्प स्थिति में बना हुआ है। एक ओर जहां बाजार में उतार-चढ़ाव लगातार देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी चार्ट यह संकेत दे रहे हैं कि निफ्टी में अभी भी ऊपर जाने की क्षमता बची हुई है। निवेशकों के बीच फिलहाल अनिश्चितता का माहौल है, लेकिन बाजार का समग्र ढांचा पूरी तरह कमजोर नहीं माना जा रहा है।

    पिछले सप्ताह निफ्टी ने कई बार दिशा बदली। शुरुआती सत्रों में इंडेक्स ने मजबूती दिखाते हुए 24500 के करीब पहुंचने की कोशिश की, जिससे बाजार में थोड़ी सकारात्मकता देखने को मिली। लेकिन इसके बाद किसी मजबूत सकारात्मक संकेत के अभाव में बाजार दबाव में आ गया और इंडेक्स नीचे की ओर फिसलने लगा। 24000 का स्तर इस दौरान एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर सामने आया, जहां से बार-बार खरीदारी का समर्थन मिलता रहा।

    मध्य सप्ताह में निफ्टी ने इसी सपोर्ट से उभरते हुए फिर से ऊपर की ओर रुख किया और कुछ समय के लिए तेजी का माहौल भी बना। लेकिन यह तेजी टिक नहीं सकी और अंततः बाजार एक बार फिर अस्थिरता की ओर लौट आया। सप्ताह के अंत तक इंडेक्स ने लगभग 24176 के स्तर पर क्लोजिंग दी, जबकि दिन के दौरान लगभग 150 अंकों की गिरावट भी देखने को मिली।

    इसके बावजूद तकनीकी संकेत यह दर्शाते हैं कि बाजार पूरी तरह दबाव में नहीं है। वीकली चार्ट पर बनी डोजी कैंडल इस बात का संकेत देती है कि बाजार में अनिश्चितता जरूर है, लेकिन ट्रेंड अभी भी पूरी तरह टूटता हुआ नहीं दिख रहा है। ऊपरी स्तरों से आई बिकवाली के बावजूद निचले स्तरों पर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है, जो बाजार को गिरने से रोक रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 23920 के आसपास का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है। जब तक यह स्तर सुरक्षित रहता है, तब तक बाजार में ऊपर जाने की संभावना बनी रह सकती है। वहीं दूसरी ओर 24500 का स्तर एक मजबूत रेजिस्टेंस की तरह काम कर रहा है, जिसे पार करना बाजार के लिए अगला बड़ा संकेत होगा। यदि निफ्टी इस स्तर को मजबूती से तोड़ता है, तो आगे 24800 और फिर 25000 तक के स्तर देखने को मिल सकते हैं।

    हालांकि बाजार की दिशा काफी हद तक बाहरी घटनाओं और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। किसी भी सकारात्मक अंतरराष्ट्रीय विकास से बाजार को तेजी का नया ट्रिगर मिल सकता है, जबकि नकारात्मक संकेत दबाव बढ़ा सकते हैं। इसी कारण आने वाले सत्रों को बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर निफ्टी फिलहाल एक ऐसे मोड़ पर है जहां गिरावट के बावजूद तेजी की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल अगले बड़े मूवमेंट की दिशा तय करेंगे।

  • स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर

    स्विगी का वित्त वर्ष 2025-26 में घाटा 33% बढ़ा, पहुंचा 4,154 करोड़ पर


    नई दिल्ली। मुंबई में ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने वित्त वर्ष 2025-26 के अपने ताजा नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी के शुद्ध घाटे में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष में स्विगी का कुल शुद्ध घाटा बढ़कर 4,154 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 3,117 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत अधिक है।
    हालांकि, चौथी तिमाही के आंकड़ों में कंपनी की स्थिति कुछ बेहतर नजर आई है। 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में स्विगी का घाटा घटकर 800 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,081 करोड़ रुपये था। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के खर्च नियंत्रण और ऑपरेशनल सुधारों का असर धीरे-धीरे दिखने लगा है।
    रेवेन्यू के मोर्चे पर कंपनी ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में परिचालन से आय 45 प्रतिशत बढ़कर 6,383 करोड़ रुपये पहुंच गई। वहीं, कुल आय 46.74 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 6,649 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 4,531 करोड़ रुपये थी।
    कंपनी के खर्चों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। विज्ञापन और बिक्री प्रमोशन पर खर्च बढ़कर 1,577 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि कंपनी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है।
    स्विगी के प्रबंधन ने बताया कि उसका क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और यूनिट इकॉनॉमिक्स को सुधारने पर ध्यान दिया जा रहा है। कंपनी के अनुसार, इंस्टामार्ट का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) 68.8 प्रतिशत बढ़कर 7,881 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, फूड डिलीवरी सेगमेंट में भी स्थिर ग्रोथ देखी गई है, जहां कुल ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू 9,005 करोड़ रुपये रही और ऑर्डर संख्या 18.3 मिलियन तक पहुंच गई।
    स्विगी के एमडी और सीईओ ने कहा है कि कंपनी का फोकस अब लाभप्रदता और ऑपरेशनल दक्षता बढ़ाने पर है। उनका लक्ष्य आने वाली तिमाहियों में बेहतर मार्जिन और ब्रेकईवन की दिशा में आगे बढ़ना है।
    कुल मिलाकर, हालांकि स्विगी का वार्षिक घाटा बढ़ा है, लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ और क्विक कॉमर्स सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देता है कि कंपनी विस्तार और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
  • Bank of Baroda FD Scheme: 2 लाख की FD पर मिलेगा 1 लाख से ज्यादा ब्याज, सुरक्षित निवेश का शानदार मौका

    Bank of Baroda FD Scheme: 2 लाख की FD पर मिलेगा 1 लाख से ज्यादा ब्याज, सुरक्षित निवेश का शानदार मौका


    नई दिल्ली। देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में शामिल Bank of Baroda की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) स्कीम इन दिनों निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। सुरक्षित निवेश और तय रिटर्न की वजह से FD हमेशा से भरोसेमंद विकल्प मानी जाती रही है। खास बात यह है कि बैंक की लंबी अवधि वाली FD स्कीम में ₹2 लाख जमा करने पर निवेशक को मैच्योरिटी तक करीब ₹1.03 लाख तक ब्याज मिल सकता है।
    बैंक फिलहाल अलग-अलग अवधि की FD पर 3.50 प्रतिशत से लेकर 7.05 प्रतिशत तक ब्याज दर ऑफर कर रहा है। वरिष्ठ नागरिकों और 80 वर्ष से अधिक आयु वाले सुपर सीनियर सिटीजन को अतिरिक्त ब्याज का लाभ भी दिया जा रहा है। बैंक की चर्चित “bob Square Drive Deposit Scheme” 444 दिनों की अवधि पर आम ग्राहकों को 6.45 प्रतिशत, वरिष्ठ नागरिकों को 6.95 प्रतिशत और सुपर सीनियर सिटीजन को 7.05 प्रतिशत तक ब्याज दे रही है।
    अगर कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए ₹2 लाख की FD कराता है और ब्याज को कंपाउंडिंग के साथ निवेश में ही रहने देता है, तो मैच्योरिटी पर कुल रकम ₹3 लाख से अधिक पहुंच सकती है। कई FD कैलकुलेशन के अनुसार, 5 साल या उससे ज्यादा की अवधि में ब्याज की राशि ₹1 लाख से अधिक हो सकती है। यही वजह है कि सुरक्षित और स्थिर रिटर्न चाहने वाले निवेशक FD की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
    FD का सबसे बड़ा फायदा यह माना जाता है कि इसमें शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड की तरह बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता। निवेशक को पहले से तय ब्याज दर के अनुसार निश्चित रिटर्न मिलता है। यही कारण है कि रिटायरमेंट प्लानिंग, बच्चों की शिक्षा या भविष्य के सुरक्षित निवेश के लिए लोग FD को प्राथमिकता देते हैं।
    विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी बैंक की FD उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है जो बिना जोखिम के निवेश करना चाहते हैं। खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त ब्याज दर इस योजना को और आकर्षक बनाती है।
    हालांकि निवेश से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। FD कराने से पहले ब्याज दर, निवेश अवधि, कंपाउंडिंग का तरीका और समय से पहले पैसा निकालने के नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। बैंक समय-समय पर ब्याज दरों में बदलाव करते रहते हैं, इसलिए निवेश से पहले ताजा ब्याज दर जरूर जांच लें।
    वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई निवेशक सुरक्षित, स्थिर और गारंटीड रिटर्न चाहता है, तो सरकारी बैंक की FD आज भी सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्पों में से एक मानी जाती है।
  • दो दिन में 97 लाख से ज्यादा LPG सिलेंडर की डिलीवरी, ऑनलाइन बुकिंग 99% तक पहुंची: सरकार

    दो दिन में 97 लाख से ज्यादा LPG सिलेंडर की डिलीवरी, ऑनलाइन बुकिंग 99% तक पहुंची: सरकार


    नई दिल्ली।  पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से सामान्य और सुचारू बनी हुई है। मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो दिनों में करीब 87.66 लाख सिलेंडर की बुकिंग के मुकाबले 97 लाख से अधिक सिलेंडर की डिलीवरी की गई है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग का स्तर बढ़कर लगभग 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो डिजिटल प्रणाली की ओर बढ़ते उपभोक्ता व्यवहार को दर्शाता है। मंत्रालय ने बताया कि उपभोक्ताओं को रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए ऑथेंटिकेशन कोड के आधार पर लगभग 95 प्रतिशत डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर किसी भी तरह की गड़बड़ी या हेराफेरी को रोका जा सके।

    पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बावजूद देश में एलपीजी सप्लाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है और किसी भी रिटेल गैस एजेंसी पर स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति नहीं देखी गई है।

    इसके अलावा, पिछले दो दिनों में 1.11 लाख छोटे 5 किलोग्राम वाले सिलेंडरों की भी बिक्री हुई है। सरकार के अनुसार, यह छोटे सिलेंडर खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों और छोटे उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।

    सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम लगातार एलपीजी वितरण व्यवस्था को मजबूत करने में लगी हुई हैं। साथ ही कमर्शियल एलपीजी की बिक्री भी पिछले दो दिनों में 15,493 मीट्रिक टन से अधिक दर्ज की गई, जो लगभग 8.15 लाख 19 किलो वाले सिलेंडरों के बराबर है।

    मंत्रालय ने यह भी बताया कि देश में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन का विस्तार तेजी से हो रहा है। अब तक करीब 6.5 लाख कनेक्शनों में गैस सप्लाई शुरू हो चुकी है, जबकि कुल कनेक्शन संख्या 9.16 लाख तक पहुंच गई है। इसके अलावा, 7.08 लाख नए उपभोक्ताओं ने कनेक्शन के लिए आवेदन किया है।

    सरकार ने बताया कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए देशभर में सख्त कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में 2,000 से अधिक जगहों पर छापेमारी की गई, जिसमें 378 डिस्ट्रीब्यूटरों पर जुर्माना लगाया गया और 76 एजेंसियों को निलंबित किया गया।

    पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। सभी सरकारी तेल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।

    सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर अतिरिक्त खरीदारी न करें। साथ ही उपभोक्ताओं को डिजिटल माध्यम से बुकिंग करने और गैस एजेंसियों पर अनावश्यक भीड़ से बचने की सलाह दी गई है।

  • लॉरियल के साथ भारत के ब्यूटी सेक्टर पर बड़ी चर्चा, पीयूष गोयल ने मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात बढ़ाने पर दिया जोर

    लॉरियल के साथ भारत के ब्यूटी सेक्टर पर बड़ी चर्चा, पीयूष गोयल ने मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात बढ़ाने पर दिया जोर


    नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को फ्रांस की प्रमुख ब्यूटी और पर्सनल केयर कंपनी L’Oréal Group के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अहम बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत में ब्यूटी और पर्सनल केयर सेक्टर को और अधिक मजबूत बनाना, स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना और निर्यात के नए अवसर तलाशना रहा।

    पीयूष गोयल ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए बताया कि उन्होंने लॉरियल के दक्षिण एशिया, प्रशांत, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र के अध्यक्ष विस्मय शर्मा के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। इस दौरान भारत से सोर्सिंग, मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक बाजारों में निर्यात को विस्तार देने पर विस्तार से चर्चा हुई।

    बैठक में खास तौर पर इस बात पर जोर दिया गया कि भारत को ब्यूटी और पर्सनल केयर इंडस्ट्री का एक प्रमुख वैश्विक हब बनाया जा सकता है। इसके लिए निवेश को बढ़ावा देने और तकनीक आधारित उत्पादन क्षमता विकसित करने की जरूरत पर सहमति बनी।

    मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि लॉरियल ने हाल ही में हैदराबाद में अपना विश्व का सबसे बड़ा ब्यूटी टेक ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर स्थापित किया है। यह केंद्र कंपनी की वैश्विक रणनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और भारत को एआई आधारित ब्यूटी इनोवेशन के केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।

    इस परियोजना के तहत लॉरियल ने करीब 383.4 मिलियन डॉलर के शुरुआती निवेश से ब्यूटी टेक और इनोवेशन हब विकसित किया है। कंपनी का लक्ष्य इसे भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल ब्यूटी सॉल्यूशंस का वैश्विक केंद्र बनाना है। अनुमान है कि 2030 तक इस पहल से लगभग 2,000 तकनीकी नौकरियां भी पैदा होंगी।

    यह केंद्र न केवल टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन और डिजिटल सेवाओं के विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। इससे भारत की भूमिका वैश्विक ब्यूटी इंडस्ट्री में और मजबूत होने की उम्मीद है।

    बैठक के दौरान भारत और फ्रांस के व्यापारिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार पिछले कुछ वर्षों में स्थिर वृद्धि के साथ आगे बढ़ा है और वित्त वर्ष 2024-25 में कुल व्यापार 12.67 अरब यूरो तक पहुंच गया। इसमें भारत का निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है।

    इसके अलावा, वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल वस्तु और सेवा निर्यात 4.6 प्रतिशत बढ़कर 863.11 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और टैरिफ विवादों के बावजूद भारत की मजबूत निर्यात क्षमता को दर्शाता है।

    पीयूष गोयल ने हाल ही में विभागीय अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में भी इस बात पर जोर दिया कि भारत को नए वैश्विक बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और अधिक से अधिक निर्यातकों को अवसर देने की दिशा में काम करना चाहिए।

    इस तरह लॉरियल के साथ हुई यह बैठक भारत के ब्यूटी और पर्सनल केयर सेक्टर को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • वैश्विक तनाव की मार से डगमगाया बाजार: सेंसेक्स 516 अंक टूटा, निवेशकों की संपत्ति पर बड़ा असर

    वैश्विक तनाव की मार से डगमगाया बाजार: सेंसेक्स 516 अंक टूटा, निवेशकों की संपत्ति पर बड़ा असर

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती राजनीतिक और रणनीतिक तनातनी ने वैश्विक निवेश माहौल को अस्थिर कर दिया, जिसका सीधा प्रभाव घरेलू बाजार पर पड़ा। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार ने कमजोरी के साथ समापन किया और पूरे दिन बिकवाली का दबाव बना रहा।

    कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में अनिश्चितता का माहौल देखने को मिला। निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बिकवाली का दबाव बढ़ता गया। प्रमुख सूचकांक लगातार नीचे खिसकते रहे और अंत में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार में यह लगातार दूसरा दिन रहा जब कमजोरी का रुख बना रहा, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

    सेंसेक्स पूरे दिन उतार-चढ़ाव के बीच रहा, लेकिन अंततः यह महत्वपूर्ण अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी ने भी समान रुझान दिखाते हुए कमजोरी दर्ज की। शुरुआती कारोबार में थोड़ी स्थिरता जरूर दिखी, लेकिन वैश्विक संकेतों के दबाव ने बाजार की दिशा को पूरी तरह बदल दिया।

    हालांकि पूरे बाजार में गिरावट का माहौल रहा, लेकिन कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में हल्की खरीदारी भी देखने को मिली। सूचना प्रौद्योगिकी और कुछ उपभोक्ता आधारित सेक्टरों में मामूली तेजी रही, जिसने बाजार को पूरी तरह टूटने से बचाया। इसके विपरीत बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, धातु, तेल और गैस जैसे क्षेत्रों में भारी दबाव देखा गया, जिसने कुल मिलाकर बाजार को नीचे खींच दिया।

    कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, खासकर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में दबाव ज्यादा रहा। वहीं कुछ उपभोक्ता और तकनीकी कंपनियों में हल्की बढ़त देखने को मिली, लेकिन यह पूरे बाजार के नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं थी।

    दिन के अंत में निवेशकों की संपत्ति में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार पूंजीकरण में कमी आने से एक ही सत्र में निवेशकों को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ। यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि वैश्विक घटनाएं अब भारतीय बाजार को तेजी से प्रभावित कर रही हैं और निवेशक भावनाएं अंतरराष्ट्रीय समाचारों से सीधे जुड़ गई हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव और भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों को सावधानी के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है।

    फिलहाल बाजार की नजरें वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि बाजार स्थिरता की ओर लौटता है या उतार-चढ़ाव का दौर अभी और लंबा चलता है।

  • कारोबारों को मजबूत बनाने पर जोर, वैश्विक व्यापार में बढ़ेगा भारत का असर..

    कारोबारों को मजबूत बनाने पर जोर, वैश्विक व्यापार में बढ़ेगा भारत का असर..

    नई दिल्ली । 2026 में ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता संभालने की तैयारी के साथ भारत एक ऐसी रणनीति पर काम कर रहा है, जिसका सीधा असर छोटे और मध्यम उद्योगों पर देखने को मिलेगा। इस पूरी पहल का केंद्र MSME sector है, जिसे देश की आर्थिक रीढ़ माना जाता है। भारत का लक्ष्य है कि इस सेक्टर को सिर्फ घरेलू स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी मजबूत पहचान दिलाई जाए।

    इस योजना के तहत भारत ब्रिक्स के ढांचे में एमएसएमई सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। इसमें खासतौर पर वित्तीय पहुंच को आसान बनाना, तकनीकी सहयोग बढ़ाना और छोटे कारोबारों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने जैसे कदम शामिल हैं। माना जा रहा है कि इससे छोटे उद्योगों को नई संभावनाएं मिलेंगी और वे वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकेंगे।

    भारत की अध्यक्षता के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकों और एक बड़े एमएसएमई फोरम का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों का मुख्य फोकस छोटे उद्योगों की सबसे बड़ी समस्या यानी वित्तीय संसाधनों की कमी को दूर करना होगा। इसमें यह समझने की कोशिश की गई है कि कैसे आसान ऋण व्यवस्था, डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक समाधान के जरिए छोटे व्यवसायों को मजबूती दी जा सकती है।

    चर्चाओं में यह बात भी सामने आई है कि छोटे और मध्यम उद्योग न केवल रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि नवाचार और आर्थिक विकास को भी गति देते हैं। इसके बावजूद इन उद्योगों को अक्सर पर्याप्त वित्त और तकनीकी सहायता नहीं मिल पाती, जिससे उनकी ग्रोथ प्रभावित होती है। इसी अंतर को कम करने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति तैयार की जा रही है।

    भारत इस दिशा में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर भी जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य है कि सभी सदस्य देश अपने अनुभव और नीतिगत मॉडल साझा करें, जिससे एक ऐसा इकोसिस्टम बन सके जो छोटे व्यवसायों के लिए अनुकूल हो और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिले।

    इसके अलावा, डिजिटल भुगतान प्रणाली, वित्तीय साक्षरता और क्रेडिट क्षमता बढ़ाने जैसे पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि इन प्रयासों से छोटे कारोबारों को न केवल घरेलू बाजार में मजबूती मिलेगी, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

    भारत पहले ही कुछ देशों के साथ साझेदारी कर चुका है, जिसका उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र में निवेश और व्यापार को बढ़ावा देना है। यह रणनीति भारत को वैश्विक आर्थिक मंच पर और मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    कुल मिलाकर यह पूरी योजना छोटे उद्योगों को नई पहचान देने और उन्हें वैश्विक विकास की मुख्य धारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है, जिससे आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • टेक इंडस्ट्री में हलचल, Cloudflare ने एआई बदलाव के बीच बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा

    टेक इंडस्ट्री में हलचल, Cloudflare ने एआई बदलाव के बीच बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा

    नई दिल्ली । तकनीक की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलाव अब कंपनियों की कार्यशैली को पूरी तरह बदल रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने जहां कामकाज को तेज और अधिक प्रभावी बनाया है, वहीं इसका असर रोजगार संरचना पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में Cloudflare ने बड़ा कदम उठाते हुए 1,100 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी का फैसला किया है, जिसे कंपनी ने अपने व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा बताया है।

    कंपनी के अनुसार पिछले कुछ समय में एआई आधारित सिस्टम और टूल्स के उपयोग में तेज वृद्धि हुई है। अब इंजीनियरिंग से लेकर वित्त, मानव संसाधन और मार्केटिंग तक कई विभागों में रोजमर्रा के कार्यों के लिए एआई एजेंट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इस बदलाव ने पारंपरिक कार्य प्रक्रियाओं को काफी हद तक बदल दिया है और कंपनी के संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत पैदा की है।

    Cloudflare ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय केवल लागत घटाने या प्रदर्शन आधारित छंटनी नहीं है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य कंपनी को एक नए तकनीकी युग के अनुसार ढालना है, जहां एआई आधारित कार्य प्रणाली प्रमुख भूमिका निभाएगी। कंपनी का कहना है कि वह अपने सभी विभागों और भूमिकाओं की समीक्षा कर रही है ताकि उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

    छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को लेकर कंपनी ने कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानकारी दी जाएगी और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा। इसके लिए आधिकारिक संचार के साथ-साथ व्यक्तिगत सूचनाएं भी भेजी जाएंगी।

    कंपनी ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए राहत पैकेज की भी घोषणा की है। इसके तहत उन्हें तय अवधि तक वेतन का भुगतान किया जाएगा और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी कुछ समय तक जारी रहेगा। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों को उनके सेवा काल के अनुसार अतिरिक्त लाभ भी दिए जाएंगे।

    Cloudflare ने यह भी निर्णय लिया है कि यह पूरा पुनर्गठन एक ही चरण में पूरा किया जाएगा, ताकि भविष्य में बार-बार बदलाव और अनिश्चितता की स्थिति न बने। कंपनी का मानना है कि तेज बदलते तकनीकी माहौल में स्पष्ट और स्थिर रणनीति बेहद जरूरी है।

    कंपनी ने यह भी स्वीकार किया है कि एआई अब केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं रहा, बल्कि यह पूरे उद्योग के संचालन मॉडल को बदल रहा है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा में बने रहने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव आवश्यक हो गया था।

    इसके साथ ही कंपनी ने संकेत दिया है कि वह एआई आधारित सेवाओं और उत्पादों में अपने निवेश को और बढ़ाएगी। इसका उद्देश्य कंपनी को अधिक आधुनिक, तेज और नवाचार आधारित बनाना है, ताकि बदलते तकनीकी दौर में वह अपनी स्थिति मजबूत बनाए रख सके।

    इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि एआई जहां एक ओर कार्यक्षमता और गति बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह पारंपरिक नौकरियों के ढांचे को भी तेजी से बदल रहा है।

  • व्यापारिक माहौल सुधरने पर बंगाल में औद्योगिक विकास की वापसी की उम्मीद तेज

    व्यापारिक माहौल सुधरने पर बंगाल में औद्योगिक विकास की वापसी की उम्मीद तेज

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल के आर्थिक भविष्य को लेकर एक बार फिर सकारात्मक उम्मीदें सामने आ रही हैं। व्यापार जगत से जुड़े प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल और स्थिर नीतिगत ढांचा तैयार किया जाए, तो बंगाल एक बार फिर देश के प्रमुख व्यापार और उद्योग केंद्रों में अपनी मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

    व्यापारिक समुदाय का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के औद्योगिक ढांचे को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इनमें निवेश में गिरावट, छोटे उद्योगों पर दबाव, और कारोबारियों के पलायन जैसी स्थितियां प्रमुख रही हैं। इसके कारण राज्य के एमएसएमई सेक्टर और पारंपरिक उद्योगों पर सीधा असर पड़ा है।

    कई व्यापारिक प्रतिनिधियों का मानना है कि एक समय पश्चिम बंगाल देश के औद्योगिक विकास में अग्रणी राज्यों में शामिल था, लेकिन समय के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ने और नीतिगत स्थिरता की कमी के कारण यह गति धीमी हो गई। परिणामस्वरूप कई छोटे और मध्यम उद्योग या तो बंद हो गए या बेहतर अवसरों की तलाश में अन्य राज्यों में स्थानांतरित हो गए।

    अब व्यापारिक जगत को उम्मीद है कि यदि राज्य में उद्योगों के लिए सरल नियम, निवेशकों के लिए भरोसेमंद माहौल और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाई जाती है, तो स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है। खासकर यह माना जा रहा है कि छोटे और मध्यम उद्योगों को यदि उचित सहयोग दिया जाए तो वे फिर से राज्य की आर्थिक रीढ़ बन सकते हैं।

    पारंपरिक उद्योगों जैसे चाय, जूट, हथकरघा, चमड़ा और मिठाई व्यवसाय को बंगाल की पहचान माना जाता है। लेकिन बढ़ती लागत, जटिल नियमों और सीमित सहायता के कारण इन क्षेत्रों को भी दबाव का सामना करना पड़ा है। व्यापारिक वर्ग का कहना है कि यदि इन उद्योगों के लिए विशेष नीतिगत समर्थन दिया जाए, तो बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर दोबारा पैदा हो सकते हैं।

    इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है। बेहतर सड़क, परिवहन और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं औद्योगिक विकास को नई गति दे सकती हैं। साथ ही औद्योगिक गलियारों के विस्तार से बड़े स्तर पर निवेश आकर्षित किया जा सकता है।

    व्यापार जगत यह भी मानता है कि यदि राज्य में केंद्र की विभिन्न विकास योजनाओं की भावना के अनुरूप नीतियां लागू की जाएं, तो बंगाल एक बार फिर निवेशकों की पसंदीदा जगह बन सकता है। इससे न केवल उद्योगों का विस्तार होगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    कुल मिलाकर, व्यापारिक प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि सही दिशा में नीतिगत सुधार किए जाएं और निवेश के लिए स्थिर वातावरण बनाया जाए, तो पश्चिम बंगाल में एक नया औद्योगिक दौर शुरू हो सकता है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है।

  • 8वें वेतन आयोग पर दिल्ली में निर्णायक मंथन: रेलवे और रक्षा कर्मियों की सैलरी-पेंशन में बड़े बदलाव की उम्मीद

    8वें वेतन आयोग पर दिल्ली में निर्णायक मंथन: रेलवे और रक्षा कर्मियों की सैलरी-पेंशन में बड़े बदलाव की उम्मीद

    नई दिल्ली । देश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर उम्मीदें एक बार फिर तेज हो गई हैं। लंबे समय से जिन बदलावों का इंतजार किया जा रहा था, अब वे धीरे-धीरे चर्चा के केंद्र में आते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में दिल्ली में होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक को इस पूरे प्रक्रिया का निर्णायक चरण माना जा रहा है, जहां रेलवे और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी संगठनों की भागीदारी विशेष रूप से अहम रहने वाली है।

    इस बैठक का उद्देश्य केवल औपचारिक बातचीत नहीं बल्कि कर्मचारियों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को समझना और भविष्य की वेतन संरचना की दिशा तय करना है। महंगाई के बढ़ते दबाव और जीवनयापन की लागत में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर में सुधार और शुरुआती वेतन में बढ़ोतरी की मांग को प्रमुखता से उठाया है। इसके साथ ही महंगाई भत्ता, पदोन्नति प्रणाली और पेंशन संरचना जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

    इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयोग ने इस बार बैठकों में शामिल होने की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से जोड़ दिया है, जिससे केवल पंजीकृत और अधिकृत प्रतिनिधि ही चर्चा का हिस्सा बन सकेंगे। इसके लिए एक विशेष पहचान प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिसमें ऑनलाइन आवेदन और एक विशिष्ट पहचान संख्या का निर्माण अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि केवल योग्य और आधिकारिक प्रतिनिधित्व रखने वाले संगठन ही अपनी बात रख सकें।

    कर्मचारी संगठनों के लिए यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पहली बार नीति निर्धारण की शुरुआती अवस्था में ही उनकी राय को औपचारिक रूप से शामिल किया जा रहा है। इससे पहले कई बार यह शिकायत रही है कि सुझाव अंतिम चरण में शामिल होते हैं, लेकिन इस बार प्रक्रिया को शुरुआत से ही अधिक सहभागी बनाने की कोशिश की जा रही है।

    बैठक के दौरान विभिन्न विभागों की आवश्यकताओं और आर्थिक परिस्थितियों का भी विस्तृत आकलन किया जाएगा। विशेष रूप से रेलवे और रक्षा जैसे बड़े क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों की सेवा शर्तों, जोखिम भत्तों और पेंशन ढांचे पर गहराई से चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि इन चर्चाओं के आधार पर एक प्रारंभिक ढांचा तैयार किया जाएगा, जो आगे चलकर अंतिम रिपोर्ट का आधार बनेगा।

    इस पूरे आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए सीमित समय दिया गया है, ऐसे में शुरुआती बैठकें बेहद निर्णायक मानी जा रही हैं। इन बैठकों के परिणाम न केवल वर्तमान वेतन संरचना को प्रभावित करेंगे, बल्कि आने वाले वर्षों में सरकारी नौकरी की आर्थिक आकर्षण क्षमता पर भी असर डाल सकते हैं।

    फिलहाल देशभर के कर्मचारियों की नजरें दिल्ली में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस प्रक्रिया से वेतन और पेंशन व्यवस्था में ऐसे बदलाव सामने आएंगे, जो लंबे समय से चली आ रही मांगों को आंशिक या पूर्ण रूप से संबोधित कर सकेंगे।