Category: Economy

  • हर महीने सिर्फ 5,000 रुपये का निवेश बना सकता है करोड़पति, जानिए तीन निवेश विकल्पों का पूरा गणित

    हर महीने सिर्फ 5,000 रुपये का निवेश बना सकता है करोड़पति, जानिए तीन निवेश विकल्पों का पूरा गणित


    नई दिल्‍ली । हर व्यक्ति आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य का सपना देखता है और करोड़पति बनने की इच्छा भी रखता है। अच्छी बात यह है कि इसके लिए शुरुआत में बड़ी पूंजी होना जरूरी नहीं है। यदि निवेश की शुरुआत समय रहते की जाए और हर महीने नियमित रूप से छोटी राशि निवेश की जाए, तो चक्रवृद्धि ब्याज की ताकत लंबे समय में बड़ा फंड तैयार कर सकती है।

    अगर कोई व्यक्ति हर महीने 5,000 रुपये निवेश करता है, तो अलग-अलग निवेश विकल्पों और उनके अनुमानित रिटर्न के आधार पर करीब 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक का फंड तैयार किया जा सकता है।

    सोने में निवेश से तैयार हो सकता है 1 करोड़ से ज्यादा का फंड
    लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से सोना भी एक अच्छा विकल्प माना जाता है। यदि हर महीने 5,000 रुपये का निवेश किया जाए और औसतन 10 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिले, तो करीब 29 साल में 1 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई जा सकती है।

    मासिक निवेश: 5,000 रुपये
    निवेश अवधि: 29 वर्ष
    अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 10%
    कुल निवेश: 17.40 लाख रुपये
    अनुमानित रिटर्न: 85,19,021 रुपये
    कुल फंड वैल्यू: करीब 1,02,59,021 रुपये

    म्यूचुअल फंड SIP से 25.5 साल में बन सकता है करोड़ का फंड
    लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना के कारण म्यूचुअल फंड SIP निवेशकों के बीच लोकप्रिय विकल्प है। हालांकि इसमें रिटर्न की गारंटी नहीं होती, लेकिन अनुमानित 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न के आधार पर 5,000 रुपये की मासिक SIP से करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

    निवेश का माध्यम: म्यूचुअल फंड SIP
    हर महीने निवेश: 5,000 रुपये
    निवेश अवधि: करीब 25.5 वर्ष
    अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
    कुल निवेश: 15.30 लाख रुपये
    अनुमानित रिटर्न: 85,72,957 रुपये
    कुल फंड: करीब 1,01,02,957 रुपये

    कम जोखिम वालों के लिए PPF भी है विकल्प
    जो निवेशक सुरक्षित और कम जोखिम वाला विकल्प चाहते हैं, उनके लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) बेहतर माना जाता है। हालांकि इसमें ब्याज दर अपेक्षाकृत कम होने के कारण 1 करोड़ रुपये का फंड तैयार करने में अधिक समय लगता है।

    सालाना निवेश: 60,000 रुपये
    अनुमानित ब्याज दर: 7.1%
    निवेश अवधि: करीब 37 वर्ष
    कुल निवेश: 22.20 लाख रुपये
    ब्याज से कमाई: 83.27 लाख रुपये
    मैच्योरिटी राशि: करीब 1.05 करोड़ रुपये

    नियमित निवेश, लंबी अवधि और चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ मिलकर छोटी बचत को भी बड़ी संपत्ति में बदल सकते हैं। इसलिए निवेश की शुरुआत जितनी जल्दी की जाए, भविष्य में बड़ा फंड तैयार करने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।

  • ट्रेड डील लगभग तय, पीयूष गोयल ने बताया बातचीत का सबसे अनोखा अनुभव; भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मिलेगा बड़ा लाभ

    ट्रेड डील लगभग तय, पीयूष गोयल ने बताया बातचीत का सबसे अनोखा अनुभव; भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मिलेगा बड़ा लाभ


    नई दिल्ली ।
    भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ अंतिम बिंदुओं पर चर्चा शेष है। उनका कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के लिए संतुलित और पारस्परिक हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।

    पीयूष गोयल ने बातचीत के दौरान सामने आई सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूरी वार्ता के दौरान सबसे अधिक परेशानी दोनों देशों के बीच समय के अंतर के कारण हुई। दिल्ली और वॉशिंगटन के अलग-अलग टाइम ज़ोन के चलते कई दौर की बैठकें देर रात तक चलीं, जिससे अधिकारियों और वार्ता टीमों को अपने कार्य समय में लगातार बदलाव करना पड़ा। हालांकि उन्होंने इसे तकनीकी चुनौती बताया और कहा कि इससे बातचीत की सकारात्मक गति प्रभावित नहीं हुई।

    उन्होंने कहा कि दोनों देशों की वार्ता टीमों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग का माहौल रहा। बातचीत के दौरान किसी बड़े मतभेद के बजाय अधिकांश मुद्दों पर रचनात्मक चर्चा हुई और समाधान निकालने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार दोनों पक्षों ने समझौते को व्यावहारिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाया है।

    केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर लेकर आएगा। उनका कहना है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी। इससे कई क्षेत्रों के उद्योगों को लाभ मिलने की संभावना है और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को भी मजबूत करेगा। उनके अनुसार भारत को ऐसे कई क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है, जहां अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के साथ मुकाबला अधिक चुनौतीपूर्ण रहा है। इससे निवेश, निर्यात और औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

    दोनों देशों के बीच पिछले कई महीनों से व्यापार से जुड़े विभिन्न विषयों पर लगातार बातचीत जारी है। इस दौरान बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और व्यापारिक सहयोग जैसे अनेक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई है। अब अधिकांश विषयों पर सहमति बनने के बाद अंतिम चरण की बातचीत पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता तय समय के अनुसार अंतिम रूप लेता है, तो इससे भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर भी विकसित होंगे। फिलहाल दोनों पक्ष शेष बिंदुओं पर सहमति बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं और जल्द ही समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।

  • ओडिशा में एल्युमीनियम क्षेत्र की सबसे बड़ी औद्योगिक पहल, अदाणी ग्रुप और आईएचसी का 1.08 लाख करोड़ रुपये निवेश; हजारों रोजगार और वैश्विक विनिर्माण क्षमता को मिलेगा नया आधार

    ओडिशा में एल्युमीनियम क्षेत्र की सबसे बड़ी औद्योगिक पहल, अदाणी ग्रुप और आईएचसी का 1.08 लाख करोड़ रुपये निवेश; हजारों रोजगार और वैश्विक विनिर्माण क्षमता को मिलेगा नया आधार

    नई दिल्ली । भारत के औद्योगिक विकास को नई दिशा देने वाली एक बड़ी पहल के तहत अदाणी ग्रुप ने अबु धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (आईएचसी) के साथ मिलकर ओडिशा में अत्याधुनिक एल्युमीनियम परियोजना स्थापित करने की घोषणा की है। करीब 11.5 अरब डॉलर यानी लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाली यह परियोजना देश के धातु उद्योग के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक पहलों में शामिल मानी जा रही है। इसके माध्यम से भारत की एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    भुवनेश्वर में आयोजित समझौता हस्ताक्षर कार्यक्रम के दौरान कंपनी की ओर से बताया गया कि यह परियोजना केवल एक औद्योगिक इकाई तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पूरी एल्युमीनियम वैल्यू चेन को एकीकृत रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखेगी। इसके तहत कच्चे माल के प्रसंस्करण से लेकर तैयार उत्पादों के निर्माण तक की सभी प्रमुख गतिविधियां एक ही औद्योगिक परिसर में संचालित की जाएंगी। इससे उत्पादन लागत में कमी आने के साथ आपूर्ति श्रृंखला भी अधिक प्रभावी बन सकेगी।

    प्रस्तावित परियोजना में प्रतिवर्ष लगभग 40 लाख टन क्षमता वाली एल्युमिना रिफाइनरी स्थापित की जाएगी, जबकि करीब 20 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला एल्युमीनियम स्मेल्टर भी विकसित होगा। इसके अलावा लगभग 10 लाख टन वार्षिक क्षमता वाला डाउनस्ट्रीम एल्युमीनियम पार्क तैयार किया जाएगा, जहां विभिन्न औद्योगिक और उपभोक्ता क्षेत्रों के लिए मूल्यवर्धित एल्युमीनियम उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इससे देश में आयात पर निर्भरता कम होने और निर्यात क्षमता बढ़ने की संभावना है।

    परियोजना के सुचारु संचालन के लिए लगभग 4,000 मेगावाट क्षमता का कैप्टिव पावर सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही करीब 400 मेगावाट हरित ऊर्जा का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे उत्पादन प्रक्रिया में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी। यह पहल उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इस निवेश का सबसे बड़ा प्रभाव रोजगार के क्षेत्र में देखने को मिलेगा। निर्माण चरण के दौरान करीब 35 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने का अनुमान है। वहीं परियोजना के पूर्ण रूप से संचालित होने के बाद लगभग 18,500 स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इसके अतिरिक्त परिवहन, लॉजिस्टिक्स, लघु उद्योग, सेवा क्षेत्र और स्थानीय कारोबार से जुड़े हजारों लोगों को भी आर्थिक गतिविधियों का लाभ मिलने की संभावना है।

    कंपनी का मानना है कि इस परियोजना के माध्यम से केवल एक औद्योगिक संयंत्र का निर्माण नहीं होगा, बल्कि ओडिशा में व्यापक आर्थिक गतिविधियों का नया केंद्र विकसित होगा। इससे स्थानीय उद्यमों को नए बाजार, युवाओं को कौशल आधारित रोजगार और छोटे व्यवसायों को दीर्घकालिक अवसर प्राप्त होंगे। परियोजना के आसपास सहायक उद्योगों के विकसित होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी उल्लेखनीय गति मिलने की उम्मीद है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर एल्युमीनियम की बढ़ती मांग को देखते हुए यह निवेश भारत के धातु उद्योग को नई ऊंचाई प्रदान कर सकता है। एकीकृत उत्पादन मॉडल, आधुनिक तकनीक, ऊर्जा दक्षता और बड़े पैमाने की विनिर्माण क्षमता के कारण यह परियोजना आने वाले वर्षों में भारत को एल्युमीनियम क्षेत्र में वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही यह औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और निवेश आकर्षित करने के क्षेत्र में ओडिशा के लिए भी एक नई पहचान बनाने का आधार बनेगी।

  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों का विस्तार, इंडिगो ने 8 नए शहर जोड़े, अकासा एयर ने मुंबई के लिए शुरू की सेवा

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों का विस्तार, इंडिगो ने 8 नए शहर जोड़े, अकासा एयर ने मुंबई के लिए शुरू की सेवा


    नई दिल्ली। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हवाई कनेक्टिविटी लगातार मजबूत हो रही है। देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) ने एयरपोर्ट से आठ नए शहरों के लिए उड़ानें शुरू कर अपने नेटवर्क का बड़ा विस्तार किया है। वहीं, अकासा एयर (Akasa Air) ने भी 2 जुलाई से मुंबई के लिए अपनी नियमित फ्लाइट सेवा शुरू कर दी है। इससे नोएडा एयरपोर्ट से यात्रियों के लिए हवाई सफर के विकल्प और बढ़ गए हैं।

    इंडिगो ने 8 नए शहरों को जोड़ा
    15 जून 2026 को शुरू हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इंडिगो ने शुरुआत में बेंगलुरु, हैदराबाद, लखनऊ, जम्मू और अमृतसर के लिए उड़ानें संचालित की थीं।

    अब 1 जुलाई से एयरलाइन ने जयपुर, जोधपुर, चंडीगढ़, देहरादून, धर्मशाला, भोपाल, बरेली और पंतनगर के लिए भी फ्लाइट सेवा शुरू कर दी है। इसके अलावा 2 जुलाई से किशनगढ़ को भी नेटवर्क में शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही नोएडा एयरपोर्ट से इंडिगो के गंतव्यों (डेस्टिनेशन) की संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी।

    मुंबई के लिए अकासा एयर की नई उड़ान
    अकासा एयर ने 2 जुलाई से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने वाली नई उड़ान सेवा शुरू कर दी है।

    एयरलाइन के बुकिंग पोर्टल के अनुसार, मुंबई रूट पर प्रतिदिन दो नई उड़ानें संचालित की जाएंगी। इससे पहले अकासा एयर देश की पहली एयरलाइन बनी थी, जिसने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे दो नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को आपस में जोड़ने की शुरुआत की थी।

    जुलाई में रोजाना 40 से अधिक उड़ानों का लक्ष्य
    इंडिगो और अकासा एयर ने 16 जून से नोएडा एयरपोर्ट पर अपना परिचालन शुरू किया था। उस समय दोनों एयरलाइंस मिलकर प्रतिदिन 12 उड़ानें संचालित कर रही थीं, जिनमें आठ इंडिगो और चार अकासा एयर की थीं।

    इंडिगो द्वारा शुरू किए गए नए रूटों में बरेली, जोधपुर और किशनगढ़ के लिए उड़ानें एक दिन छोड़कर संचालित होंगी, जबकि अन्य सभी शहरों के लिए दैनिक उड़ानें उपलब्ध रहेंगी।

    इसके अलावा इंडिगो 13 जुलाई से चंडीगढ़ रूट पर दो अतिरिक्त दैनिक उड़ानें भी शुरू करने जा रही है। इन नई सेवाओं के साथ जुलाई के दौरान नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से प्रतिदिन 40 से 42 उड़ानें संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है।

  • सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट, चेन्नई में तेजी का रुख, चांदी के दाम में जोरदार उछाल

    सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट, चेन्नई में तेजी का रुख, चांदी के दाम में जोरदार उछाल


    नई दिल्ली। घरेलू सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने की कीमतों में मिलाजुला रुख देखने को मिला। चेन्नई को छोड़कर देश के अधिकांश प्रमुख बाजारों में सोने के दाम घटे, जबकि चेन्नई में सोना महंगा हुआ। वहीं चांदी की कीमतों में भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई।

    बाजार में आई गिरावट के चलते अधिकांश शहरों में सोना 1,170 से 1,280 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो गया। इसके विपरीत चेन्नई में 24 और 22 कैरेट सोने के दाम 520 से 570 रुपये प्रति 10 ग्राम तक बढ़ गए। चांदी की कीमत में भी उछाल आया और यह 5,200 रुपये प्रति किलोग्राम तक महंगी हो गई।

    कीमतों में बदलाव के बाद देश के अधिकांश सर्राफा बाजारों में 24 कैरेट सोना 1,40,770 रुपये से 1,44,560 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत 1,29,040 रुपये से 1,32,510 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच दर्ज की गई। दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी का भाव बढ़कर 2,40,100 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया।

    राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,40,920 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,29,190 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर कारोबार कर रहा है। मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,40,770 रुपये और 22 कैरेट सोने का भाव 1,29,040 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना 1,40,820 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,29,090 रुपये प्रति 10 ग्राम पर उपलब्ध है।

    चेन्नई में 24 कैरेट सोना 1,44,560 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,32,510 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। वहीं कोलकाता में 24 कैरेट सोने का भाव 1,40,770 रुपये और 22 कैरेट का भाव 1,29,040 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। भोपाल में 24 कैरेट सोना 1,40,820 रुपये तथा 22 कैरेट सोना 1,29,090 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

    जयपुर और लखनऊ में 24 कैरेट सोने का भाव 1,40,920 रुपये, जबकि 22 कैरेट सोना 1,29,190 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। पटना में 24 कैरेट सोना 1,40,820 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,29,090 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बिक रहा है।

    दक्षिण और पूर्वी भारत के प्रमुख बाजारों में भी सोने की कीमतों में नरमी देखने को मिली। बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना 1,40,770 रुपये तथा 22 कैरेट सोना 1,29,040 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

  • जेट फ्यूल हुआ सस्ता, एयरलाइंस को राहत, आने वाले दिनों में हवाई किराए घटने की उम्मीद

    जेट फ्यूल हुआ सस्ता, एयरलाइंस को राहत, आने वाले दिनों में हवाई किराए घटने की उम्मीद


    नई दिल्ली। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 1 जुलाई से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) यानी जेट फ्यूल की कीमतों में कटौती कर दी है। नई दरों के अनुसार राजधानी दिल्ली में जेट फ्यूल का दाम करीब 5 रुपये प्रति लीटर घटकर 115 रुपये से 110 रुपये प्रति लीटर रह गया है। वहीं, थोक (बल्क) दर 1.15 लाख रुपये प्रति किलोलीटर से घटाकर 1.10 लाख रुपये प्रति किलोलीटर कर दी गई है।

    जेट फ्यूल की कीमत में आई इस कमी से घरेलू एयरलाइंस कंपनियों को परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) में राहत मिलने की उम्मीद है। ऐसे में यदि यह राहत आगे भी बनी रहती है, तो आने वाले समय में हवाई यात्रियों को किराए में भी कुछ कमी देखने को मिल सकती है।

    जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद एटीएफ के दाम घटाए गए हैं। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के दौरान जेट फ्यूल की कीमत रिकॉर्ड स्तर 1.15 लाख रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई थी। उसके बाद पहली बार इसमें कटौती की गई है।

    आमतौर पर हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के औसत भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर के आधार पर एटीएफ की कीमतों में संशोधन किया जाता है। हालांकि, किसी आपात या विशेष परिस्थिति में कीमतों में बीच महीने भी बदलाव किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत में सबसे बड़ा हिस्सा जेट फ्यूल का होता है। ऐसे में एटीएफ सस्ता होने से कंपनियों का खर्च कम होगा, जिसका लाभ भविष्य में यात्रियों तक भी पहुंच सकता है।

    टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) तारकेश्वर नाथ वैष्णव के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होने से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता घटी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक गिरावट आई है और फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 70 से 73 डॉलर प्रति बैरल के बीच कारोबार कर रहा है।

    उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी करीब 10 डॉलर प्रति बैरल तक की गिरावट आती है, तो जेट फ्यूल के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी कटौती की संभावना बन सकती है।

    वैष्णव ने बताया कि निजी क्षेत्र की नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की शुरुआत कर दी है। अब बाजार की नजर सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) पर है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नरम बनी रहती हैं, तो ये कंपनियां भी पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने का फैसला ले सकती हैं।

  • जून में जीएसटी कलेक्शन में 13.9% की बढ़ोतरी, राजस्व संग्रह बढ़कर 1.95 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचा

    जून में जीएसटी कलेक्शन में 13.9% की बढ़ोतरी, राजस्व संग्रह बढ़कर 1.95 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंचा


    नई दिल्ली। देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। जून 2026 में सकल जीएसटी राजस्व संग्रह बढ़कर करीब 1.95 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 13.9 प्रतिशत अधिक है। इससे पहले मई में भी जीएसटी संग्रह 1.94 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया था।

    जीएसटी महानिदेशालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में कुल 1,94,812 करोड़ रुपये का सकल जीएसटी संग्रह दर्ज किया गया। पिछले वर्ष जून में यह आंकड़ा 1,71,105 करोड़ रुपये था। इस तरह एक साल में जीएसटी राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

    आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू लेनदेन से प्राप्त जीएसटी संग्रह 6.5 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये रहा। वहीं, आयात से मिलने वाला राजस्व 34.6 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी के साथ 60,038 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसने कुल संग्रह में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जून महीने में करदाताओं को दिए गए रिफंड (प्रतिदाय) में भी वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान कुल रिफंड 29.1 प्रतिशत बढ़कर 32,436 करोड़ रुपये रहा।

    चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान भी जीएसटी संग्रह में मजबूत बढ़त देखने को मिली। इस अवधि में कुल 6,31,699 करोड़ रुपये का जीएसटी संग्रह हुआ, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 5,82,542 करोड़ रुपये था। यानी पहली तिमाही में राजस्व संग्रह में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिफंड समायोजित करने के बाद जून में शुद्ध जीएसटी संग्रह 11.2 प्रतिशत बढ़कर 1.62 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।

    गौरतलब है कि देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था लागू हुए अब नौ वर्ष पूरे हो चुके हैं। यह कर प्रणाली 1 जुलाई 2017 से पूरे देश में लागू की गई थी और तब से यह अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का प्रमुख आधार बनी हुई है।

  • चार दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हुईं निर्मला सीतारमण, द्विपक्षीय साझेदारी पर होगा फोकस

    चार दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना हुईं निर्मला सीतारमण, द्विपक्षीय साझेदारी पर होगा फोकस


    नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को फ्रांस के लिए रवाना हो गईं। इस दौरे का उद्देश्य भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना, आर्थिक सहयोग को नई गति देना तथा निवेश, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में संबंधों को और विस्तार देना है।

    यात्रा के दौरान वित्त मंत्री कई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगी। इस दौरे का प्रमुख आकर्षण भारत-फ्रांस आर्थिक एवं वित्तीय संवाद (Economic and Financial Dialogue-EFD) होगा, जिसकी सह-अध्यक्षता वह फ्रांस के अर्थव्यवस्था, वित्त तथा औद्योगिक एवं ऊर्जा संप्रभुता मंत्री रोलैंड लेस्क्योर के साथ ऐक्स-एन-प्रोवेंस में करेंगी। इस बैठक में दोनों देश आर्थिक सहयोग के नए अवसरों और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर विचार-विमर्श करेंगे।

    निर्मला सीतारमण वैश्विक कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों (सीईओ) के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगी। इसके अलावा वह प्रमुख उद्योगपतियों के साथ आयोजित एक राउंडटेबल चर्चा में शामिल होकर भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति, जारी संरचनात्मक सुधारों, निवेश की संभावनाओं और दीर्घकालिक विकास के अवसरों को प्रस्तुत करेंगी।

    वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त मंत्री यूरोप के प्रतिष्ठित वार्षिक मंच ‘लेस रेन्कॉन्ट्रेस इकोनॉमिक्स डी’एक्स-एन-प्रोवेंस’ में “नए मध्यम वर्ग के विकास को कैसे बढ़ावा दें” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में भी हिस्सा लेंगी। इस सम्मेलन में दुनिया भर के नीति-निर्माता, केंद्रीय बैंक प्रमुख, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, अर्थशास्त्री और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञ वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर विचार साझा करेंगे।

    अपने दौरे के दौरान सीतारमण फ्रांस के कैडाराश स्थित इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) परियोजना का भी दौरा करेंगी। यह परमाणु संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) ऊर्जा से जुड़ी दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजनाओं में शामिल है, जिसमें भारत और फ्रांस सहित 30 से अधिक देशों की भागीदारी है।

    इसके अलावा वित्त मंत्री ‘कैंपस साइबर’ का भी दौरा करेंगी, जो फ्रांस में साइबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास का प्रमुख केंद्र है। इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में अनुभवों एवं सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान की उम्मीद है।

    यात्रा के दौरान सीतारमण प्रोवेंस-आल्प्स-कोटे डी’अजूर (PACA) क्षेत्र के अध्यक्ष रेनॉड म्यूसेलियर से भी मुलाकात करेंगी। इस बैठक में निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।

    अपने चार दिवसीय दौरे के अंतिम चरण में वित्त मंत्री फ्रांस में रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ आयोजित एक सामुदायिक कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगी।

  • अडाणी ग्रीन एनर्जी ने रचा इतिहास, 20 गीगावाट क्षमता हासिल करने वाली बनी देश की पहली कंपनी

    अडाणी ग्रीन एनर्जी ने रचा इतिहास, 20 गीगावाट क्षमता हासिल करने वाली बनी देश की पहली कंपनी


    नई दिल्ली। अडाणी समूह की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए 20 गीगावाट (GW) परिचालन क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही कंपनी यह उपलब्धि हासिल करने वाली भारत की पहली कंपनी बन गई है। खास बात यह है कि इस क्षमता का अधिकांश हिस्सा नए ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के माध्यम से विकसित किया गया है।

    कंपनी के अनुसार, वर्तमान में एजीईएल हर वर्ष 52 अरब यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन कर रही है, जो भारत की कुल बिजली खपत का लगभग तीन प्रतिशत है। यह उत्पादन न्यूयॉर्क शहर की सालभर की बिजली जरूरत या मुंबई और नई दिल्ली की संयुक्त वार्षिक बिजली खपत के लगभग बराबर माना जा रहा है।

    बुधवार को जारी बयान में कंपनी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उसने 5,051 मेगावाट नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी। कंपनी का दावा है कि चीन के बाहर किसी भी ऊर्जा कंपनी द्वारा एक वर्ष में जोड़ी गई यह सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता है।

    इस उपलब्धि पर एजीईएल के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने कहा कि 20 गीगावाट का आंकड़ा पार करना कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति, अनुशासित कार्यान्वयन और टीम की प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कंपनी आज अपने सहयोगियों और साझेदारों के साथ मिलकर इतनी स्वच्छ बिजली उपलब्ध करा रही है, जो मुंबई और नई दिल्ली की संयुक्त वार्षिक बिजली आवश्यकता के बराबर है।

    कंपनी ने भविष्य की योजनाओं का भी खुलासा किया है। एजीईएल वित्त वर्ष 2026-27 में 10 गीगावाट-घंटा (GWh) बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता जोड़ने की तैयारी कर रही है। अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 50 गीगावाट-घंटा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने की योजना को गति मिलेगी।

    अडाणी ग्रीन एनर्जी वर्तमान में भारत की सबसे बड़ी और दुनिया की प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में शामिल है। कंपनी ग्रिड से जुड़ी सौर, पवन, हाइब्रिड और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के विकास, स्वामित्व और संचालन के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ावा देने पर काम कर रही है।

  • शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत, सेंसेक्स 395 अंक और निफ्टी 122 अंक चढ़ा

    शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत, सेंसेक्स 395 अंक और निफ्टी 122 अंक चढ़ा


    नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार ने बुधवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की खरीदारी से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में अच्छी तेजी देखने को मिली। बीच-बीच में मुनाफावसूली के चलते हल्की बिकवाली जरूर हुई, लेकिन बाजार पर खरीदारी का दबदबा बना रहा।

    कारोबार के पहले घंटे के बाद सुबह 10:15 बजे बीएसई सेंसेक्स 395.44 अंक यानी 0.52 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,874.11 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं एनएसई निफ्टी 122.15 अंक यानी 0.51 प्रतिशत चढ़कर 23,987.90 अंक के स्तर पर पहुंच गया।

    सेंसेक्स ने 66.54 अंकों की बढ़त के साथ 76,545.21 अंक पर कारोबार की शुरुआत की थी। शुरुआती खरीदारी के दम पर सूचकांक लगातार ऊपर बढ़ता गया, हालांकि बीच-बीच में मुनाफावसूली का असर भी देखने को मिला। इसके बावजूद बाजार की सकारात्मक धारणा कायम रही।

    इसी तरह निफ्टी ने 31.90 अंकों की बढ़त के साथ 23,897.65 अंक पर ओपनिंग की। कारोबार के दौरान यह करीब 10 बजे 23,996.40 अंक तक पहुंच गया और बाद में मामूली उतार-चढ़ाव के बीच मजबूती के साथ कारोबार करता रहा।

    शुरुआती कारोबार में महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, नेस्ले, हिंदुस्तान यूनिलीवर और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही। इनमें करीब 2.01 प्रतिशत से 2.99 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई।

    वहीं दूसरी ओर टेक महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, एचसीएल टेक्नोलॉजी, डॉ. रेड्डीज लेबोरेट्रीज और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इन शेयरों में 0.77 प्रतिशत से 2.08 प्रतिशत तक की कमजोरी दर्ज की गई।

    बाजार की चौड़ाई भी सकारात्मक रही। शुरुआती एक घंटे में 2,732 शेयरों में कारोबार हुआ, जिनमें 1,837 शेयर बढ़त के साथ हरे निशान में रहे, जबकि 895 शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

    सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 19 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि 11 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं निफ्टी के 50 शेयरों में से 30 बढ़त और 20 गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

    गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। बीएसई सेंसेक्स 249.70 अंक (0.33 प्रतिशत) टूटकर 76,478.67 अंक पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई निफ्टी 80.50 अंक (0.34 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 23,865.75 अंक पर बंद हुआ था।