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  • शहरी रोजगार रिपोर्ट: देश के 46 बड़े शहरों में सात साल में तेजी से घटी बेरोजगारी दर, महिलाओं की स्थिति में भी बड़ा सुधार

    शहरी रोजगार रिपोर्ट: देश के 46 बड़े शहरों में सात साल में तेजी से घटी बेरोजगारी दर, महिलाओं की स्थिति में भी बड़ा सुधार

    नई दिल्ली। देश के बड़े शहरों में रोजगार के मोर्चे पर एक राहत भरी और सकारात्मक खबर सामने आई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के 46 प्रमुख शहरों में पिछले सात वर्षों के दौरान बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2018 से 2025 के बीच इन शहरों की कुल बेरोजगारी दर 7.9 फीसदी से घटकर अब महज 4.9 फीसदी के स्तर पर आ गई है। यह बदलाव दर्शाते हैं कि देश के बड़े महानगरीय और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

    इस रिपोर्ट में महिला और पुरुष दोनों ही श्रेणियों में बेरोजगारी दर में निरंतर आ रही कमी का विशेष उल्लेख किया गया है। पुरुषों की बात करें तो उनकी बेरोजगारी दर जो साल 2017-18 में 7.5 प्रतिशत थी, वह लगातार गिरते हुए वर्ष 2025 में 4.5 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है। इसी तरह महिलाओं के मामले में भी काफी बड़ा सुधार देखने को मिला है। साल 2018-19 में महिला बेरोजगारी दर बढ़कर 10.4 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, लेकिन इसके बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई और साल 2025 में यह घटकर 6.1 प्रतिशत रह गई। यह आंकड़े कामकाजी महिलाओं के लिए शहरी क्षेत्रों में बढ़ते अवसरों को रेखांकित करते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, इन 46 शहरों में रोजगार की सामान्य स्थिति 4.9 प्रतिशत रही, जबकि वर्तमान साप्ताहिक स्थिति के आधार पर यह 6.8 प्रतिशत दर्ज की गई। यह आंकड़े लगभग पूरे शहरी भारत के औसत के समान ही हैं, जहां क्रमशः यह दर 4.8 प्रतिशत और 6.8 प्रतिशत रही है। एक खास बात यह भी सामने आई है कि इन बड़े शहरों में काम करने वाले पुरुष और महिला श्रमिक पूरे देश के अन्य शहरी इलाकों के मुकाबले औसतन अधिक घंटे काम कर रहे हैं। इसके अलावा, 15 से 29 वर्ष के ऐसे युवाओं का अनुपात जो किसी भी प्रकार के रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण का हिस्सा नहीं हैं, इन शहरों में 22.2 फीसदी रहा, जो पूरे शहरी भारत के औसत (25.0 फीसदी) से काफी बेहतर है।

    मंत्रालय की रिपोर्ट में श्रम बल से बाहर रहने के मुख्य कारणों का भी विश्लेषण किया गया है। पुरुषों के मामले में 53.5 प्रतिशत ने श्रम बल से बाहर रहने की मुख्य वजह अपनी पढ़ाई जारी रखना बताया। वहीं, महिलाओं के मामले में 68.7 प्रतिशत ने बच्चों की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियों को रोजगार न करने या उससे बाहर रहने का प्राथमिक कारण बताया। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते देश में शहर आर्थिक गतिविधियों, नवाचार और रोजगार सृजन के मुख्य केंद्र बन चुके हैं, इसलिए इनकी आर्थिक संरचना को समझना बेहद जरूरी है।

    इसके साथ ही, इन 46 बड़े शहरों में रहने वाले लोगों की औसत आय देश के अन्य शहरी हिस्सों की तुलना में काफी बेहतर पाई गई है। आंकड़ों के मुताबिक, स्वरोजगार से जुड़े लोगों की पिछले 30 दिनों की औसत आय 30,858 रुपये रही, जबकि नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारियों की औसत आय 28,808 रुपये दर्ज की गई। दिहाड़ी या आकस्मिक श्रमिकों की बात करें तो वे रोजाना औसतन 624 रुपये कमा रहे हैं। इसके विपरीत, पूरे शहरी भारत में स्वरोजगार की औसत आय 23,013 रुपये, नियमित वेतनभोगियों की 26,258 रुपये और दिहाड़ी मजदूरों की कमाई 550 रुपये प्रतिदिन रही।

  • कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी…. 70 डॉलर पर आए दाम, जानें पेट्रोल-डीजल के आज के रेट

    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी…. 70 डॉलर पर आए दाम, जानें पेट्रोल-डीजल के आज के रेट


    नई दिल्ली।
    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट (Decline Crude Oil Prices) के बीच आज 30 जून को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel Rates) के नए रेट जारी कर दी हैं। देश भर में ईंधन की कीमतें स्थिर हैं। दूसरी ओर अमेरिकी WTI क्रूड 0.83 डॉलर सस्ता होकर 70.16 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वहीं ब्रेंट क्रूड भी 1 प्रतिशत से अधि टूटकर 72.40 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।

    एक अच्छी खबर यह है कि मॉर्गन स्टेनली ने तेल की कीमतों का अनुमान घटा दिया है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही उम्मीद से जल्दी सामान्य हो रही है। वहीं, अमेरिका से मजबूत सप्लाई और चीन की कमजोर मांग के कारण बाजार में सरप्लस का खतरा बढ़ गया है।


    70 डॉलर पर आएगा कच्चा तेल

    ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक बैंक ने अपने विश्लेषकों मार्टिन रैट्स, शार्लोट फिर्किंस और एमी गोवर के हवाले से सोमवार को जारी एक नोट में कहा कि उसने 2026 की तीसरी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड के दाम का अनुमान 15 डॉलर घटाकर 75 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।

    उम्मीद है कि अगले साल की तीसरी तिमाही तक कीमतें और गिरकर 70 डॉलर पर आ जाएंगी। उन्होंने कहा, “होर्मुज के रास्ते निर्यात उम्मीद से तेजी से सुधर रहा है।” हालांकि, सप्ताहांत में संघर्ष बढ़ने के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग पर यातायात धीमा हो गया था, जिसमें दो जहाजों को नुकसान पहुंचा, लेकिन इस बात के संकेत मिले हैं कि टैंकर होर्मुज से गुजरने को तैयार हैं।


    35 तेल और गैस टैंकर होर्मुज से बाहर निकले

    मॉर्गन स्टेनली ने बताया कि उसने गुरुवार को 35 तेल और गैस टैंकर होर्मुज से बाहर निकले। यह पहली बार है जब यह संख्या फरवरी में संघर्ष शुरू होने से पहले के आम स्तर (30 से 40) पर लौट आई है।

    बैंक के अनुसार, 2027 में तेल बाजार को संतुलित रखने के लिए होर्मुज से आवाजाही को केवल संघर्ष से पहले के स्तर के लगभग 65% (यानी करीब 11 से 12 लाख बैरल प्रतिदिन) तक पहुंचने की जरूरत है।


    126 डॉलर के ऊपर पहुंच गया था कच्चा तेल

    बता दें अप्रैल में ब्रेंट फ्यूचर्स 126 डॉलर के शिखर से ऊपर चले गए थे, लेकिन अब उनकी सारी बढ़त खत्म हो गई है क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच चार महीने के युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए बातचीत जारी है। सोमवार को सबसे सक्रिय सितंबर कांट्रैक्ट 73.91 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।


    आज क्या हैं पेट्रोल-डीजल के रेट?

    – अयोध्या: पेट्रोल 102.4 और डीजल 97.87 रुपये लीटर
    – लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 99.28 रुपये लीटर
    – पटना: पेट्रोल 112.70 रुपये और डीजल 99.87 रुपये लीटर
    – दिल्ली: पेट्रोल 102.12 और डीजल 95.20 रुपये लीटर
    – कोलकाता: पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये लीटर
    – चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये लीटर
    – मुंबई: पेट्रोल 111.21 और डीजल 97.83 रुपये लीटर
    – भोपाल: पेट्रोल 114.65 रुपये और डीजल 99.74 रुपये प्रति लीटर
    – इंदौर: पेट्रोल 114.61 और डीजल की 99.70 रुपये लीटर
    – जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये और डीजल 97.78 रुपये लीटर

  • July Bank Holiday 2026: जुलाई में 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, छुट्टियों की पूरी लिस्ट देखकर ही करें जरूरी काम की प्लानिंग

    July Bank Holiday 2026: जुलाई में 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, छुट्टियों की पूरी लिस्ट देखकर ही करें जरूरी काम की प्लानिंग

    नई दिल्ली। जुलाई 2026 की शुरुआत के साथ ही बैंक ग्राहकों के लिए छुट्टियों का कैलेंडर जानना जरूरी हो गया है। यदि आपको बैंक शाखा में जाकर नकदी जमा करनी है, चेक क्लियर कराना है, डिमांड ड्राफ्ट बनवाना है या किसी अन्य बैंकिंग सेवा का लाभ लेना है, तो पहले अपने शहर की अवकाश सूची जरूर देख लें। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी बैंक अवकाश कैलेंडर के अनुसार, जुलाई महीने में विभिन्न राज्यों में स्थानीय पर्व, सांस्कृतिक आयोजनों और नियमित साप्ताहिक अवकाश को मिलाकर कुल 12 दिन बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहेगा।

    हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि सभी छुट्टियां पूरे देश में एक साथ लागू नहीं होंगी। बैंक अवकाश की व्यवस्था राज्यवार और स्थानीय त्योहारों के आधार पर तय होती है। इसका मतलब है कि जिस दिन किसी राज्य में बैंक बंद रहेंगे, उसी दिन दूसरे राज्यों में बैंक सामान्य रूप से खुले भी रह सकते हैं। इसलिए ग्राहकों को अपने शहर और राज्य के अनुसार बैंक अवकाश की जानकारी पहले से प्राप्त कर लेनी चाहिए।

    महीने की शुरुआत में 5 जुलाई को रविवार होने के कारण देशभर में बैंक बंद रहेंगे। इसके बाद 6 जुलाई को मिजोरम की राजधानी आइजोल में एमएचआईपी डे के अवसर पर स्थानीय बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा। 9 जुलाई को मेघालय के शिलॉन्ग में बेह देइंखलाम पर्व के कारण बैंक बंद रहेंगे। वहीं 11 जुलाई को दूसरे शनिवार और 12 जुलाई को रविवार के कारण देशभर के सभी सरकारी और निजी बैंक शाखाओं में नियमित अवकाश रहेगा।

    जुलाई के मध्य में भी कई राज्यों में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी। 16 जुलाई को रथ यात्रा, कांग रथयात्रा और हरेला पर्व के अवसर पर भुवनेश्वर, देहरादून, इम्फाल और शिलॉन्ग में बैंक बंद रहेंगे। इसके अगले दिन 17 जुलाई को शिलॉन्ग में यू तिरोत सिंह की पुण्यतिथि पर स्थानीय अवकाश रहेगा। 18 जुलाई को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में द्रुकपा त्शे-जी पर्व के अवसर पर बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। 19 जुलाई को रविवार होने से पूरे देश में बैंकिंग अवकाश रहेगा।

    महीने के अंतिम सप्ताह में भी कुछ स्थानों पर बैंक बंद रहेंगे। 22 जुलाई को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में खर्ची पूजा के अवसर पर बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा। इसके अलावा 25 जुलाई को चौथा शनिवार और 26 जुलाई को रविवार होने के कारण पूरे देश में सभी बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। ऐसे में ग्राहकों को अपने जरूरी बैंकिंग कार्य इन तिथियों को ध्यान में रखकर पहले ही पूरे कर लेने चाहिए।

    बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों की डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड जैसी सभी ऑनलाइन सुविधाएं पहले की तरह चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक धन हस्तांतरण, बिल भुगतान, ऑनलाइन खरीदारी और नकदी निकासी जैसे अधिकांश कार्य बिना किसी रुकावट के कर सकेंगे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक शाखा में जाकर किए जाने वाले कार्यों की योजना पहले से बना लेने पर अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकता है। खासतौर पर व्यापारियों, वेतनभोगी कर्मचारियों और ऐसे ग्राहकों के लिए, जिन्हें शाखा आधारित सेवाओं की आवश्यकता होती है, बैंक अवकाश की जानकारी पहले से होना बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

  • Gold Price Today: सोने की कीमतों में फिर आई बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक टूटे भाव; शहरवार देखें नए रेट

    Gold Price Today: सोने की कीमतों में फिर आई बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक टूटे भाव; शहरवार देखें नए रेट

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते उतार-चढ़ाव और निवेशकों की बदली रणनीति का असर सोमवार को घरेलू सर्राफा बाजार में भी देखने को मिला। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोने की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई, जिससे लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कीमती धातु दबाव में रही। वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती और सुरक्षित निवेश की मांग में आई कमी के कारण सोने के भाव नरम बने हुए हैं। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है, जहां 24 कैरेट से लेकर 10 कैरेट तक लगभग सभी श्रेणियों के सोने की कीमतों में कमी दर्ज की गई।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 24 कैरेट सोने के वायदा भाव में लगभग 0.94 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान प्रति 10 ग्राम कीमत में 1,300 रुपये से अधिक की कमी देखने को मिली। वहीं सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमतें दबाव में रहीं। दिनभर के कारोबार में भावों में उतार-चढ़ाव देखने के बाद शाम तक कीमतें सुबह के मुकाबले नीचे रहीं। इससे स्पष्ट है कि बाजार में फिलहाल खरीदारी की गति कमजोर बनी हुई है।

    शुद्धता के आधार पर देखें तो 24 कैरेट सोना करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता रहा, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1.31 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रही। 18 कैरेट सोने के दाम भी एक लाख रुपये से ऊपर बने रहे। इसके अलावा 20, 16, 14, 12 और 10 कैरेट श्रेणियों में भी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसका लाभ उन उपभोक्ताओं को मिल सकता है जो निकट भविष्य में आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में समान रुख देखने को मिला। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, जयपुर, पटना, इंदौर, अहमदाबाद, पुणे, हैदराबाद और बेंगलुरु सहित अधिकांश शहरों में 24 कैरेट सोने के भाव में नरमी रही। हालांकि विभिन्न शहरों में स्थानीय करों और बाजार की परिस्थितियों के कारण कीमतों में मामूली अंतर बना रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों का असर फिलहाल सोने की चाल पर सबसे अधिक दिखाई दे रहा है। अमेरिकी डॉलर में मजबूती, अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों की बदलती धारणा और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में नरमी के कारण सोने में सुरक्षित निवेश की मांग कुछ कम हुई है। इसी वजह से वैश्विक बाजार में भी सोना दबाव में बना हुआ है, जिसका प्रभाव भारतीय बाजार पर लगातार पड़ रहा है।

    इंडियन बुलियन बाजार में दिनभर के दौरान भी कीमतों में कई बार बदलाव दर्ज किया गया। सुबह के मुकाबले दोपहर में कुछ तेजी दिखाई दी, लेकिन कारोबार समाप्त होने तक फिर गिरावट दर्ज हो गई। इससे साफ है कि बाजार अभी भी अस्थिर बना हुआ है और निवेशक नई आर्थिक परिस्थितियों का इंतजार कर रहे हैं।

    पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में भी सोने के भाव में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना भी महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे घरेलू बाजार पर दबाव और बढ़ गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, डॉलर की चाल, वैश्विक ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के आधार पर सोने की दिशा तय होगी। ऐसे में निवेशकों और आभूषण खरीदारों को बाजार की चाल पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • शानदार शुरुआत के बाद शेयर बाजार में बिकवाली, IT और ऑटो शेयरों की कमजोरी से सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद

    शानदार शुरुआत के बाद शेयर बाजार में बिकवाली, IT और ऑटो शेयरों की कमजोरी से सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की, लेकिन कारोबार के अंतिम चरण में तेज बिकवाली के चलते प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों की मुनाफावसूली, आईटी और ऑटो शेयरों में कमजोरी तथा बाजार में बढ़ी अस्थिरता ने दिनभर की बढ़त को पूरी तरह खत्म कर दिया।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 372.10 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,728.37 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 109.75 अंक यानी 0.46 प्रतिशत टूटकर 23,946.25 अंक पर आ गया। दिनभर के कारोबार में गिरावट वाले शेयरों की संख्या बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों से अधिक रही, जिससे बाजार में व्यापक बिकवाली का संकेत मिला।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में लगातार तेजी देखने को मिली थी। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और विदेशी निवेशकों की संभावित खरीदारी से बाजार पहले ही ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका था। ऐसे में निवेशकों ने ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली करना उचित समझा, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया।

    दिन की गिरावट में आईटी और ऑटो सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहा। प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली, जबकि ऑटो सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। दूसरी ओर फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में खरीदारी का रुख बना रहा, लेकिन यह तेजी पूरे बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही।

    तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,100 से 24,250 अंक का दायरा फिलहाल मजबूत प्रतिरोध स्तर बना हुआ है। बाजार इस स्तर को पार करने में सफल नहीं हो सका, जिसके बाद बिकवाली तेज हो गई। अब 24,000 और 23,800 अंक के स्तर को निकट भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है।

    इस दौरान बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX भी करीब 6 प्रतिशत बढ़कर 13.88 के आसपास पहुंच गया। आमतौर पर VIX में बढ़ोतरी आने वाले समय में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव की संभावना का संकेत देती है। यही वजह रही कि कई निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए अपने निवेश में मुनाफावसूली की।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निफ्टी 24,100 के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के रुख, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर बनी रहेगी।

  • भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 10 साल में 56 गुना बढ़ा, ब्रह्मोस समेत स्वदेशी हथियारों की वैश्विक मांग तेज

    भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 10 साल में 56 गुना बढ़ा, ब्रह्मोस समेत स्वदेशी हथियारों की वैश्विक मांग तेज

    नई दिल्ली: भारत वैश्विक रक्षा बाजार में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। पिछले 10 वर्षों में देश का रक्षा निर्यात 56 गुना बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। अब भारत में बने रक्षा उपकरण और हथियार 80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं, जबकि 145 से ज्यादा भारतीय कंपनियां रक्षा निर्यात के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

    वित्त वर्ष 2013-14 में भारत का रक्षा निर्यात केवल 686 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस तेज वृद्धि में सरकारी रक्षा उपक्रमों के साथ-साथ निजी कंपनियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल ने घरेलू रक्षा उत्पादन को नई गति दी है।

    भारतीय रक्षा निर्यात में सबसे अधिक चर्चा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की हो रही है। फिलीपींस के बाद वियतनाम ने भी ब्रह्मोस खरीदने के लिए समझौता किया है, जबकि इंडोनेशिया के साथ बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है। इसके अलावा आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, एटीएजीएस तोप और आधुनिक रडार सिस्टम जैसे स्वदेशी रक्षा उपकरण भी कई देशों की पहली पसंद बन रहे हैं। आर्मेनिया जैसे देशों ने इन प्रणालियों का इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है।

    भारतीय हथियारों की बढ़ती स्वीकार्यता के पीछे उनकी आधुनिक तकनीक, विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धी कीमत को प्रमुख कारण माना जा रहा है। हाल के वर्षों में भारतीय रक्षा प्रणालियों के सफल प्रदर्शन ने भी वैश्विक स्तर पर इनकी विश्वसनीयता को मजबूत किया है। इससे कई नए देशों ने भारतीय रक्षा उत्पादों में रुचि दिखाई है।

    रक्षा क्षेत्र में बढ़ते निर्यात का सीधा लाभ भारतीय उद्योग, रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी मिल रहा है। रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ने के साथ नई तकनीकों का विकास और निजी कंपनियों की भागीदारी भी लगातार मजबूत हो रही है। इससे भारत धीरे-धीरे रक्षा आयातक देश की छवि से बाहर निकलकर एक प्रमुख रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित हो रहा है।

    सरकार ने आने वाले वर्षों में रक्षा निर्यात को और बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। वित्त वर्ष 2029-30 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा गति बरकरार रहती है तो भारत वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत करेगा तथा स्वदेशी रक्षा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

  • सहकारी समितियों और किसान समूहों के लिए डिजिटल बाजार का नया रास्ता, डिजीहाट ने शुरू किया 'सहकार से समृद्धि' अभियान

    सहकारी समितियों और किसान समूहों के लिए डिजिटल बाजार का नया रास्ता, डिजीहाट ने शुरू किया 'सहकार से समृद्धि' अभियान

    नई दिल्ली। देश के सहकारी क्षेत्र को डिजिटल बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए डिजीहाट ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) प्लेटफॉर्म पर ‘सहकार से समृद्धि’ स्टोर की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमों के उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर ग्राहकों तक पहुंचाना और डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से उनकी आय बढ़ाने में मदद करना है।

    यह विशेष अभियान 29 जून से 6 जुलाई तक आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया है। अभियान के माध्यम से देशभर के उत्पादकों को एक साझा डिजिटल मंच उपलब्ध कराया गया है, जहां वे अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकेंगे। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिलने के साथ छोटे उत्पादकों की डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी भी मजबूत होगी।

    ‘सहकार से समृद्धि’ स्टोर के जरिए विभिन्न सहकारी संस्थाओं और सामुदायिक संगठनों के उत्पाद एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए गए हैं। ग्राहक अब देश के अलग-अलग राज्यों में तैयार किए गए उत्पादों की ऑनलाइन खरीदारी कर सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य बिचौलियों पर निर्भरता कम करना और उत्पादकों को सीधे बाजार से जोड़ना भी है।

    देश में वर्तमान समय में 8.5 लाख से अधिक पंजीकृत सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जिनसे लगभग 29 करोड़ सदस्य जुड़े हुए हैं। ये संस्थाएं कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, हथकरघा, हस्तशिल्प, ग्रामीण उद्योग और वित्तीय सेवाओं जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में सहकारी संस्थाओं और किसान समूहों को राष्ट्रीय ई-कॉमर्स बाजार तक पहुंच बनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नया डिजिटल मंच इस अंतर को कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    डिजीहाट का कहना है कि ओएनडीसी आधारित यह व्यवस्था सहकारी समितियों, एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों को देशभर के उपभोक्ताओं तक पहुंचने का अवसर देगी। इससे उनकी डिजिटल पहचान मजबूत होगी और उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। साथ ही छोटे और स्थानीय उत्पादकों को प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का बेहतर मंच मिलेगा।

    अभियान के दौरान ऑर्गेनिक खाद्य उत्पाद, किराना सामग्री, हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं और घरेलू जरूरत का सामान प्रमुख रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष ऑफर, चयनित उत्पाद संग्रह और विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के योगदान को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल कॉमर्स के विस्तार के साथ सहकारी संस्थाओं को नए बाजार मिलेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस तरह की पहल किसानों, कारीगरों और छोटे उद्यमों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी गति प्रदान कर सकती है।

  • 2029 तक भारत के एयरपोर्ट सेक्टर में 4.2 लाख करोड़ रुपये निवेश की उम्मीद, हवाई यात्रा को मिलेगा बड़ा विस्तार

    2029 तक भारत के एयरपोर्ट सेक्टर में 4.2 लाख करोड़ रुपये निवेश की उम्मीद, हवाई यात्रा को मिलेगा बड़ा विस्तार

    नई दिल्ली। भारत का विमानन क्षेत्र आने वाले वर्षों में बड़े विस्तार की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2029 तक देश के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में करीब 4.2 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश होने की संभावना है। इस निवेश का बड़ा हिस्सा पहले से घोषित परियोजनाओं और आगामी वर्षों में शुरू होने वाली नई योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती घरेलू हवाई यात्रा और सरकार की बुनियादी ढांचा विकास नीति इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश पहले से जारी है, जबकि आने वाले वर्षों में नई ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं और विस्तार योजनाओं के लिए भी अतिरिक्त पूंजी निवेश की उम्मीद है। इससे देश के विमानन नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ भविष्य की बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

    घरेलू हवाई यात्रा में लगातार बढ़ोतरी एयरपोर्ट सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है। रिकॉर्ड यात्री संख्या और एयरपोर्ट सेवाओं से होने वाली आय में वृद्धि के कारण ऑपरेटरों की आय में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आगामी वित्त वर्ष में भी घरेलू यात्री यातायात में लगातार वृद्धि बनी रहेगी, जिससे एयरपोर्ट कंपनियों के राजस्व और परिचालन क्षमता में और सुधार होगा।

    देशभर में कई मौजूदा एयरपोर्टों के विस्तार के साथ-साथ नए टर्मिनलों का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है। इसके अलावा टियर-2 और टियर-3 शहरों में हवाई सेवाओं का विस्तार भी प्राथमिकता पर है। नवी मुंबई और जेवर जैसे नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट शुरू होने के बाद देश की विमानन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

    हालांकि अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र अभी कुछ चुनौतियों का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ईंधन की बढ़ती कीमतें और कुछ अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर परिचालन संबंधी प्रतिबंधों के कारण विदेशी हवाई यात्रा की रफ्तार धीमी हुई है। चूंकि भारत की बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें पश्चिम एशिया से जुड़ी हैं, इसलिए इस क्षेत्र की स्थिति का सीधा प्रभाव विमानन उद्योग पर पड़ रहा है। इसके बावजूद घरेलू बाजार की मजबूत मांग इन चुनौतियों की भरपाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में नए एयरपोर्ट पूरी क्षमता से संचालित होने और शीतकालीन उड़ानों के विस्तार के साथ यात्री संख्या में और तेजी आ सकती है। इससे एयरपोर्ट ऑपरेटरों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। नए टर्मिनलों के शुरू होने से रिटेल स्टोर, व्यावसायिक सेवाओं और एयरपोर्ट शुल्क से होने वाली कमाई में भी इजाफा होने की संभावना है।

    रिपोर्ट में एयरपोर्ट सेक्टर का दीर्घकालिक परिदृश्य सकारात्मक बताया गया है। सरकार की क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना, एयरपोर्ट विकास कार्यक्रमों और ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति से इस क्षेत्र को अतिरिक्त गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत निवेश, आधुनिक बुनियादी ढांचे और बढ़ती यात्री मांग के कारण भारत का एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकता है।

  • किसान सारथी बना किसानों का डिजिटल साथी, 13 भाषाओं में विशेषज्ञ सलाह और 610 सरकारी योजनाओं की जानकारी

    किसान सारथी बना किसानों का डिजिटल साथी, 13 भाषाओं में विशेषज्ञ सलाह और 610 सरकारी योजनाओं की जानकारी

    नई दिल्ली। देश में कृषि क्षेत्र को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में किसान सारथी प्लेटफॉर्म तेजी से किसानों का भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरा है। केंद्र सरकार के अनुसार इस मंच से अब तक करीब 2.95 करोड़ किसान जुड़ चुके हैं, जिनमें 56 लाख से अधिक महिला किसान भी शामिल हैं। कृषि विशेषज्ञों से सीधे संवाद, स्थानीय भाषा में सलाह और सरकारी योजनाओं की जानकारी जैसी सुविधाओं के कारण यह प्लेटफॉर्म किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    सरकार ने बताया कि इस डिजिटल कृषि परामर्श मंच की शुरुआत वर्ष 2021 में किसानों को एकीकृत और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म से 4,767 कृषि वैज्ञानिक और 113 कृषि अनुसंधान संस्थान जुड़े हुए हैं। इन विशेषज्ञों के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है और खेती से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी सीधे खेत तक पहुंचाई जा रही है।

    अब तक इस मंच पर 19 लाख से अधिक कृषि संबंधी सवालों का समाधान किया जा चुका है। इसके अलावा विभिन्न फसलों और कृषि गतिविधियों से जुड़ी 21 हजार से अधिक वैज्ञानिक सलाह भी किसानों तक पहुंचाई गई हैं। इन सलाहों का उद्देश्य किसानों को मौसम, फसल प्रबंधन, कीट नियंत्रण, उर्वरक उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों के बारे में समय पर जानकारी देना है।

    अधिकांश किसानों ने अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से इस प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कराया है। इसके अलावा कॉल सेंटर, मोबाइल एप, वेब पोर्टल और कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए भी बड़ी संख्या में किसान इससे जुड़े हैं। सरकार का कहना है कि इस बहु-स्तरीय व्यवस्था से दूर-दराज के क्षेत्रों के किसानों को भी डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

    किसान सारथी की पहुंच देश के 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 768 जिलों तथा 6.63 लाख से अधिक गांवों तक हो चुकी है। यह प्लेटफॉर्म आधुनिक इंटरैक्टिव सूचना प्रणाली के माध्यम से किसानों और कृषि विशेषज्ञों के बीच दो-तरफा संवाद स्थापित करता है। इससे किसानों को अपनी समस्याओं का समाधान सीधे विशेषज्ञों से प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

    इस मंच के जरिए किसानों को केवल कृषि सलाह ही नहीं बल्कि मौसम पूर्वानुमान, सरकारी योजनाओं की जानकारी, कृषि अनुसंधान से जुड़े नवीनतम अपडेट और विशेषज्ञों से लाइव परामर्श जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्लेटफॉर्म 13 क्षेत्रीय भाषाओं में संवाद की सुविधा देता है, जिससे अलग-अलग राज्यों के किसान अपनी भाषा में सवाल पूछकर समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

    सरकार के अनुसार किसान सारथी को कई राष्ट्रीय सेवाओं के साथ एकीकृत किया गया है। इसके माध्यम से किसानों को 610 सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध होती है, जिनमें केंद्र सरकार की 102 प्रमुख योजनाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा यह मंच अनाज, दलहन, तिलहन, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, पोल्ट्री और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़ी उपयोगी जानकारी भी प्रदान करता है।

    सरकार का मानना है कि किसान सारथी प्लेटफॉर्म कृषि अनुसंधान और किसानों के बीच की दूरी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डिजिटल तकनीक के माध्यम से वैज्ञानिक सलाह को सीधे किसानों तक पहुंचाने से खेती अधिक वैज्ञानिक, उत्पादक और लाभकारी बनने की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

  • होर्मुज संकट के दौरान भारत की रणनीति रही असरदार, तेल आपूर्ति और कीमतों को सामान्य रखने में मिली सफलता

    होर्मुज संकट के दौरान भारत की रणनीति रही असरदार, तेल आपूर्ति और कीमतों को सामान्य रखने में मिली सफलता

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट के दौरान भारत ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तेजी से रणनीतिक कदम उठाए। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर लिए गए फैसलों, सक्रिय ऊर्जा कूटनीति और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की उपलब्धता के कारण देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी रही। इससे वैश्विक संकट के बावजूद घरेलू बाजार पर सीमित प्रभाव पड़ा।

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि संकट की शुरुआत के साथ ही भारत ने पारंपरिक सहयोगी देशों के साथ समन्वय और मजबूत किया। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता देशों के साथ पहले से स्थापित रणनीतिक संबंध इस दौरान काफी उपयोगी साबित हुए। उच्च स्तर पर लगातार संपर्क बनाए रखने से कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति बाधित नहीं हुई और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली।

    भारत ने केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा आयात के स्रोतों का भी विस्तार किया। रूस, अमेरिका, वेनेजुएला, नाइजीरिया, गैबॉन और गुयाना जैसे देशों से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई गई। इस रणनीति का उद्देश्य किसी एक क्षेत्र में संकट की स्थिति पैदा होने पर वैकल्पिक स्रोतों के माध्यम से आपूर्ति बनाए रखना था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा आयात का विविधीकरण भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

    वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में ईंधन की कीमतों को अपेक्षाकृत नियंत्रित रखा गया। इसके लिए सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने समन्वित रणनीति अपनाई। बढ़ी हुई लागत का एक बड़ा हिस्सा स्वयं वहन किया गया, जिससे आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा। साथ ही करों में राहत और मूल्य प्रबंधन के उपायों ने भी बाजार को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    सरकार ने घरेलू स्तर पर भी ऊर्जा प्रबंधन को प्राथमिकता दी। एलपीजी के घरेलू उत्पादन में वृद्धि, ईंधन वितरण प्रणाली की लगातार निगरानी और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित करने जैसे कदम उठाए गए। इससे देशभर में किसी बड़े ईंधन संकट की स्थिति नहीं बनी और आवश्यक सेवाओं पर भी इसका प्रभाव सीमित रहा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कई देशों में ऊर्जा संकट के कारण ईंधन की कमी, लंबी कतारें और आवश्यक सेवाओं पर असर देखने को मिला, लेकिन भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहा। इसका प्रमुख कारण समय पर लिए गए नीतिगत फैसले, मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और संकट प्रबंधन की प्रभावी रणनीति रही। इससे न केवल ऊर्जा आपूर्ति सुचारु बनी रही बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी निरंतर गति मिलती रही।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि भविष्य में भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक रणनीति अपनाना आवश्यक होगा। वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का विकास, आयात के विविध विकल्प और मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग भारत को संभावित वैश्विक संकटों से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पश्चिम एशिया संकट के दौरान अपनाई गई रणनीति को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।