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  • बुधवार 19 अगस्त को Stock Market का क्या रहेगा हाल? तेजी आएगी या मुनाफावसूली बढ़ाएगी चिंता

    बुधवार 19 अगस्त को Stock Market का क्या रहेगा हाल? तेजी आएगी या मुनाफावसूली बढ़ाएगी चिंता


    नई दिल्ली। बुधवार 19 अगस्त को शेयर बाजार की चाल को लेकर निवेशकों की नजर घरेलू और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर रहेगी। पिछले कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल देखने को मिला है और ऐसे में बुधवार को भी सेंसेक्स और निफ्टी में हलचल बनी रहने की संभावना है। बाजार की दिशा तय करने में ग्लोबल मार्केट का रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियां रुपये की चाल कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों से जुड़ी खबरें अहम भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार में तेजी या गिरावट किसी एक संकेत पर निर्भर नहीं करती।

    अगर वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी बाजारों में खरीदारी का माहौल रहता है तो भारतीय शेयर बाजार को भी इसका फायदा मिल सकता है। ऐसी स्थिति में निफ्टी और सेंसेक्स में शुरुआती मजबूती देखने को मिल सकती है। बैंकिंग वित्तीय सेवाओं आईटी और बड़े कंपनियों वाले शेयरों में खरीदारी बाजार को सपोर्ट दे सकती है। हालांकि ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद मुनाफावसूली भी देखने को मिल सकती है। इसलिए केवल शुरुआती तेजी देखकर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है।

    दूसरी ओर अगर विदेशी बाजारों में कमजोरी रहती है या निवेशकों के बीच चिंता बढ़ाने वाली खबरें सामने आती हैं तो भारतीय बाजार पर दबाव पड़ सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की तेजी को कमजोर कर सकती है। रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी बाजार के लिए चिंता का कारण बन सकती है। खासतौर पर आयात पर निर्भर कंपनियों और कुछ सेक्टर के शेयरों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

    बुधवार के कारोबार में बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी खास नजर रह सकती है। इसके अलावा आईटी फार्मा ऑटो और मेटल सेक्टर में स्टॉक आधारित गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। किसी खास कंपनी से जुड़ी बड़ी खबर उसके शेयर में सामान्य बाजार से अलग तेज उतार-चढ़ाव पैदा कर सकती है। इसलिए निवेशकों को केवल इंडेक्स की दिशा देखकर किसी शेयर में पैसा लगाने से बचना चाहिए।

    छोटे निवेशकों के लिए बुधवार का कारोबारी सत्र खासतौर पर सावधानी बरतने वाला हो सकता है। बाजार अगर लगातार ऊपर जाता दिखाई दे तो तेजी के पीछे भागने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और वैल्यूएशन को समझना जरूरी है। इसी तरह अचानक गिरावट आने पर घबराकर मजबूत शेयरों में जल्दबाजी में बिकवाली करना भी नुकसानदेह हो सकता है। शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को अपने स्टॉप लॉस और रिस्क मैनेजमेंट का ध्यान रखना चाहिए।

    कुल मिलाकर 19 अगस्त को शेयर बाजार की दिशा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के बीच तय होगी। बाजार में तेजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन उतार-चढ़ाव भी बना रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए धैर्य रखना और अपने निवेश लक्ष्य के अनुसार फैसला लेना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। किसी भी शेयर में निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति कारोबार की संभावनाओं और जोखिम को समझना जरूरी है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए केवल बाजार की एक दिन की चाल देखकर निवेश का निर्णय नहीं लेना चाहिए।

  • वैश्विक दबाव में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एमसीएक्स पर सिल्वर करीब दो प्रतिशत फिसली

    वैश्विक दबाव में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, एमसीएक्स पर सिल्वर करीब दो प्रतिशत फिसली


    नई दिल्ली । 
    वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच बुधवार को घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमती धातुओं पर बने दबाव का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी में करीब दो प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि सोना भी 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे कारोबार करता नजर आया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4350 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार करता रहा। इसी तरह हाजिर चांदी करीब 62.8 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास कमजोर बनी रही। वैश्विक बाजार में कीमतों में नरमी के साथ घरेलू निवेशकों की बिकवाली ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया।

    एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र के 2,32,419 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद भाव से गिरकर 2,27,931 रुपये प्रति किलोग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गई। इस स्तर पर चांदी में 4,488 रुपये यानी 1.93 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और कारोबार के दौरान चांदी 3,734 रुपये यानी 1.61 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,28,685 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रही।

    बाजार विश्लेषकों के मुताबिक व्यापक कमोडिटी बाजार में कमजोरी और मुनाफावसूली ने चांदी पर अतिरिक्त दबाव डाला। चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग से जुड़े संकेतों और निवेश धारणा का भी असर पड़ता है, इसलिए बाजार में जोखिम बढ़ने पर इसमें सोने की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    सोने के वायदा भाव में भी गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स अपने पिछले बंद भाव 1,54,262 रुपये प्रति 10 ग्राम से 858 रुपये यानी 0.55 प्रतिशत गिरकर 1,53,404 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंचा। बाद में सोने में कुछ सुधार आया और यह 581 रुपये यानी 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,53,681 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता रहा।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की नरमी के साथ डॉलर इंडेक्स की मजबूती ने भी घरेलू कीमतों को प्रभावित किया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी को कीमती धातुओं के लिए महत्वपूर्ण दबाव वाले कारकों में शामिल किया जा रहा है। ऊंची बॉन्ड यील्ड निवेशकों को निश्चित रिटर्न वाले विकल्पों की ओर आकर्षित कर सकती है, जिससे ब्याज नहीं देने वाली संपत्तियों की मांग प्रभावित होती है।

    कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। डब्ल्यूटीआई क्रूड और ब्रेंट क्रूड की कीमतें क्रमशः करीब 85.5 डॉलर और 91.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। महंगे तेल से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है, जिससे प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की संभावना मजबूत हो सकती है।

    मध्य पूर्व की स्थिति भी सोने और चांदी की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व का रुख, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम कीमती धातुओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी रहती है तो सोने और चांदी पर दबाव जारी रह सकता है। दूसरी ओर वैश्विक तनाव बढ़ने या ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होने पर दोनों धातुओं को दोबारा सुरक्षित निवेश की मांग से समर्थन मिल सकता है।

  • जेप्टो ने फ्री डिलीवरी के लिए बढ़ाई न्यूनतम ऑर्डर राशि, सामान्य समय में 199 और पीक डिमांड में 299 रुपये खर्च जरूरी

    जेप्टो ने फ्री डिलीवरी के लिए बढ़ाई न्यूनतम ऑर्डर राशि, सामान्य समय में 199 और पीक डिमांड में 299 रुपये खर्च जरूरी


    नई दिल्ली । 
    क्विक कॉमर्स कंपनी जेप्टो ने ग्राहकों के लिए फ्री डिलीवरी से जुड़ी अपनी न्यूनतम ऑर्डर राशि में बदलाव किया है। अब सामान्य परिस्थितियों में मुफ्त डिलीवरी का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को कम से कम 199 रुपये का ऑर्डर करना होगा। इससे पहले यह सीमा 149 रुपये थी। वहीं अधिक मांग वाले समय में फ्री डिलीवरी के लिए न्यूनतम ऑर्डर राशि 299 रुपये तक पहुंच सकती है।

    नई व्यवस्था का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से कम कीमत की कुछ जरूरी वस्तुएं ही मंगाते हैं। पहले 149 रुपये के ऑर्डर पर फ्री डिलीवरी उपलब्ध होने के कारण छोटे ऑर्डर करना अपेक्षाकृत आसान था। अब ऐसे ग्राहकों को मुफ्त डिलीवरी पाने के लिए अपनी खरीदारी में अतिरिक्त सामान जोड़ना पड़ सकता है।

    जेप्टो की नई न्यूनतम ऑर्डर सीमा सामान्य समय और पीक डिमांड के हिसाब से अलग रखी गई है। सामान्य परिस्थितियों में ग्राहक को 199 रुपये का ऑर्डर करना होगा, जबकि जब मांग अधिक होगी, तब यह सीमा बढ़कर 299 रुपये तक हो सकती है। इस तरह फ्री डिलीवरी का लाभ लेने के लिए ग्राहक की ओर से किया जाने वाला न्यूनतम खर्च समय के अनुसार बदल सकता है।

    क्विक कॉमर्स कंपनियों के कारोबार में डिलीवरी की लागत एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। कुछ मिनटों में सामान पहुंचाने के लिए कंपनियों को डार्क स्टोर, डिलीवरी नेटवर्क, कर्मचारियों और लॉजिस्टिक्स पर लगातार खर्च करना पड़ता है। ऐसे में न्यूनतम ऑर्डर राशि बढ़ाने का उद्देश्य प्रति ऑर्डर मिलने वाले राजस्व और डिलीवरी लागत के बीच बेहतर संतुलन बनाना हो सकता है।

    इस बदलाव से जेप्टो की फ्री डिलीवरी नीति प्रतिस्पर्धी क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के करीब आती दिखाई दे रही है। बाजार में कंपनियां लगातार अपनी फीस, डिलीवरी शर्तों और न्यूनतम ऑर्डर मूल्य में बदलाव कर रही हैं। इसका उद्देश्य ग्राहकों को प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के साथ कारोबार की लाभप्रदता को बेहतर करना भी है।

    नई व्यवस्था से ग्राहकों की खरीदारी की आदतों में भी बदलाव आने की संभावना है। जिन उपभोक्ताओं को केवल एक या दो छोटी जरूरत की चीजें तत्काल मंगानी होती हैं, वे अतिरिक्त सामान खरीदने या डिलीवरी शुल्क का विकल्प चुनने के बीच फैसला कर सकते हैं। वहीं नियमित ग्राहक अपनी खरीदारी को एक साथ करने पर विचार कर सकते हैं, ताकि न्यूनतम ऑर्डर सीमा पूरी हो सके।

    क्विक कॉमर्स क्षेत्र में लाभप्रदता का मुद्दा पिछले कुछ समय से महत्वपूर्ण बना हुआ है। कंपनियां तेजी से डिलीवरी के साथ परिचालन लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। डिलीवरी शुल्क और न्यूनतम ऑर्डर राशि में बदलाव इसी व्यापक कारोबारी रणनीति का हिस्सा माने जा सकते हैं।

    ऑनलाइन डिलीवरी क्षेत्र में केवल क्विक कॉमर्स ही नहीं, बल्कि फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म भी शुल्क संबंधी बदलाव करते रहे हैं। मार्च में जोमैटो ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की थी। इसके बाद स्विगी ने भी प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म शुल्क बढ़ाया था। इन बदलावों से संकेत मिलता है कि डिलीवरी आधारित कारोबार में कंपनियां राजस्व बढ़ाने और परिचालन खर्च का दबाव कम करने के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारण रणनीतियों का इस्तेमाल कर रही हैं।

    जेप्टो की नई सीमा ऐसे समय सामने आई है जब भारतीय क्विक कॉमर्स बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज है। ग्राहकों के लिए कीमत, डिलीवरी समय और सुविधा महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। ऐसे में कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि वे लागत और लाभप्रदता को नियंत्रित करते हुए ग्राहकों को आकर्षक सेवा उपलब्ध कराती रहें। जेप्टो की बढ़ी हुई न्यूनतम ऑर्डर राशि इसी संतुलन की दिशा में उठाया गया कदम है।

  • सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे बोले, विनियमित संस्थाएं एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के उपयोग की खुद होंगी जिम्मेदार

    सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे बोले, विनियमित संस्थाएं एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के उपयोग की खुद होंगी जिम्मेदार

    नई दिल्ली ।भारतीय वित्तीय बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया है कि सेबी के दायरे में आने वाली सभी विनियमित संस्थाएं अपने द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एआई और मशीन लर्निंग उपकरणों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहेंगी।

    मुंबई में आयोजित एक उद्योग सम्मेलन को संबोधित करते हुए सेबी चेयरमैन ने कहा कि किसी संस्था द्वारा इस्तेमाल की जा रही तकनीक चाहे उसके भीतर विकसित की गई हो या किसी बाहरी कंपनी अथवा तीसरे पक्ष से प्राप्त की गई हो, उसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था की ही होगी। इसका उद्देश्य वित्तीय बाजारों में तकनीकी नवाचार के साथ जवाबदेही की व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना है।

    तुहिन कांत पांडे ने कहा कि वित्तीय बाजारों में तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण होगी। हालांकि, तकनीकी बदलाव के बीच निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार की विश्वसनीयता को प्राथमिकता देना जरूरी है। सेबी इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए नियामकीय ढांचे को विकसित करने पर काम कर रहा है।

    सेबी अध्यक्ष के अनुसार नियामकीय व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो नई तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा दे, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता और जवाबदेही से समझौता न हो। एआई आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि संस्थाएं अपने तकनीकी फैसलों और उनसे जुड़े संभावित जोखिमों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निभाएं।

    उन्होंने बाजार अवसंरचना संस्थानों की तकनीकी क्षमता और जोखिम से निपटने की तैयारी को मापने के लिए एक सूचना प्रौद्योगिकी सुदृढ़ता सूचकांक की संभावना पर भी जानकारी दी। सेबी इस तरह के ढांचे की व्यवहार्यता का अध्ययन कर रहा है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण तकनीकी प्रणालियों की मजबूती और जोखिम प्रतिरोधक क्षमता का वस्तुनिष्ठ तरीके से आकलन करना है।

    तुहिन कांत पांडे ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण में तकनीक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी। वित्तपोषण के नए माध्यम विकसित करने, निवेश के अवसरों का विस्तार करने और नियामकीय व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने में तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इसके लिए नियामक व्यवस्था को भी बदलते तकनीकी वातावरण के साथ आगे बढ़ना होगा।

    सेबी की रणनीति को उन्होंने संतुलित, अनुपातिक और भविष्य केंद्रित बताया। उनके अनुसार बाजार में नवाचार के लिए पर्याप्त अवसर होने चाहिए, लेकिन साथ ही निवेशकों के हित, निष्पक्षता, सुरक्षा और बाजार की विश्वसनीयता भी कायम रहनी चाहिए।

    सेबी चेयरमैन ने भारतीय पूंजी बाजार में घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि म्यूचुअल फंड और सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के माध्यम से बड़ी संख्या में परिवार बाजार आधारित निवेश से जुड़े हैं। इससे भारतीय पूंजी बाजार की पहुंच और मजबूती बढ़ी है, हालांकि निवेशकों की भागीदारी को और व्यापक बनाने की गुंजाइश अभी बनी हुई है।

    उन्होंने कहा कि भारतीय पूंजी बाजार अब केवल आर्थिक गतिविधियों का प्रतिबिंब नहीं रह गए हैं, बल्कि आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण माध्यमों में भी शामिल हो चुके हैं। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ निवेश और वित्तपोषण की जरूरतें भी बढ़ेंगी। ऐसे में पूंजी बाजार को अधिक गहरा और नवोन्मेषी बनाने के साथ उन्हें निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखना भी जरूरी होगा।

  • रियलमी पी4एस 5जी में सैमसंग एम14 डिस्प्ले तकनीक, 6500 निट्स लोकल पीक ब्राइटनेस और एआई गेमिंग फीचर्स मिलेंगे

    रियलमी पी4एस 5जी में सैमसंग एम14 डिस्प्ले तकनीक, 6500 निट्स लोकल पीक ब्राइटनेस और एआई गेमिंग फीचर्स मिलेंगे

    नई दिल्ली । भारत के स्मार्टफोन बाजार में खरीदारों की प्राथमिकताएं लगातार बदल रही हैं। कैमरा, प्रोसेसर और डिजाइन के साथ अब डिस्प्ले क्वालिटी भी फोन खरीदने के फैसले में अहम भूमिका निभा रही है। ओटीटी स्ट्रीमिंग, मोबाइल गेमिंग, सोशल मीडिया और वीडियो कॉलिंग के बढ़ते इस्तेमाल के कारण उपयोगकर्ता ऐसी स्क्रीन चाहते हैं जो लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान बेहतर विजुअल और स्मूथ अनुभव दे सके।

    इसी बदलते रुझान के बीच रियलमी अपनी पी सीरीज के तहत नया पी4एस 5जी स्मार्टफोन भारत में पेश करने की तैयारी कर रही है। कंपनी के अनुसार यह फोन 26 अगस्त को लॉन्च होगा और इसकी बिक्री फ्लिपकार्ट तथा रियलमी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से होगी। नए स्मार्टफोन में डिस्प्ले और गेमिंग अनुभव को प्रमुखता दी गई है।

    रियलमी पी4एस 5जी में 17.22 सेंटीमीटर यानी 6.78 इंच का सैमसंग 1.5के एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है। यह स्क्रीन 144 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है। कंपनी ने इसमें सैमसंग की एम14 ल्यूमिनसेंट मटेरियल तकनीक का इस्तेमाल किया है, जिसे आम तौर पर ज्यादा प्रीमियम स्मार्टफोन में देखा जाता है।

    कंपनी के मुताबिक यह डिस्प्ले पारंपरिक एमोलेड पैनल की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक ल्यूमिनस एफिशिएंसी और 50 प्रतिशत तक लंबी स्क्रीन लाइफ देने में सक्षम है। फोन में 1400 निट्स ग्लोबल पीक ब्राइटनेस भी दी गई है, जिससे तेज रोशनी वाले वातावरण में स्क्रीन की विजिबिलिटी बेहतर रहने का दावा किया गया है।

    एचडीआर कंटेंट के लिए फोन 6500 निट्स तक लोकल पीक ब्राइटनेस सपोर्ट करता है। इसके अलावा एचडीआर10 प्लस और नेटफ्लिक्स एचडीआर सपोर्ट भी दिया गया है। कंपनी के अनुसार इन सुविधाओं से वीडियो और अन्य कंटेंट में बेहतर कॉन्ट्रास्ट, डिटेल और रंगों का अनुभव मिल सकता है।

    गेमिंग को ध्यान में रखते हुए 144 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट के साथ 3000 हर्ट्ज इंस्टेंटेनियस टच सैंपलिंग रेट दिया गया है। इसका उद्देश्य स्क्रीन पर स्वाइप, एनिमेशन और गेमिंग कमांड को अधिक प्रतिक्रियाशील बनाना है। खासकर तेज गति वाले गेम में टच रिस्पॉन्स उपयोगकर्ता के नियंत्रण अनुभव को प्रभावित करता है।

    फोन में रियलमी का हाइपर विजन प्लस एआई क्लिप सिस्टम मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7400 अल्ट्रा चिपसेट के साथ काम करता है। कंपनी के अनुसार यह सेटअप एआई आधारित फ्रेम इंटरपोलेशन की मदद से गेमिंग के दौरान विजुअल फ्लूडिटी और प्रभावी फ्रेम रेट को बेहतर करने के लिए तैयार किया गया है।

    रियलमी पी4एस 5जी में आंखों के आराम को ध्यान में रखते हुए टीयूवी राइनलैंड लो ब्लू लाइट सर्टिफिकेशन भी दिया गया है। इसके साथ फुल ब्राइटनेस डीसी डिमिंग तकनीक मौजूद है, जिसका उद्देश्य अलग-अलग ब्राइटनेस स्तरों पर स्क्रीन फ्लिकर को कम करना है।

    पी सीरीज के पिछले मॉडल भी कंपनी के प्रदर्शन और डिजाइन केंद्रित पोर्टफोलियो का हिस्सा रहे हैं। कंपनी के अनुसार पी3 सीरीज की वैश्विक शिपमेंट तीन मिलियन यूनिट से अधिक रही है। अब पी4एस 5जी के जरिए रियलमी डिस्प्ले, गेमिंग और रोजमर्रा के उपयोग को एक साथ बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।

    कुल मिलाकर नए स्मार्टफोन में स्क्रीन को केवल एक स्पेसिफिकेशन के बजाय उपयोगकर्ता अनुभव के प्रमुख हिस्से के रूप में पेश किया गया है। 1.5के रिजॉल्यूशन, 144 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट, एम14 तकनीक, एचडीआर सपोर्ट और एआई गेमिंग फीचर्स इसे भारतीय बाजार में डिस्प्ले केंद्रित स्मार्टफोन के तौर पर स्थापित करने की कंपनी की कोशिश को दिखाते हैं।

  • भारत की तेल खरीद पर दोहरी मार: कच्चा तेल 10 डॉलर महंगा, रूसी क्रूड की छूट भी लगभग खत्म

    भारत की तेल खरीद पर दोहरी मार: कच्चा तेल 10 डॉलर महंगा, रूसी क्रूड की छूट भी लगभग खत्म


    नई दिल्ली। भारतीय तेल रिफाइनरियों के लिए कच्चा तेल खरीदना लगातार महंगा होता जा रहा है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत पिछले दो हफ्तों में करीब 10 डॉलर बढ़कर 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। वहीं, खाड़ी और पश्चिम अफ्रीकी तेल की कीमतों पर भी सप्लाई की कमी के चलते प्रीमियम बढ़ गया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि रूसी तेल पर मिलने वाली छूट लगभग खत्म हो चुकी है, जबकि वेनेजुएला के क्रूड पर भी डिस्काउंट काफी कम हो गया है।

    अगर खाड़ी क्षेत्र में तेल की सप्लाई सामान्य नहीं होती और रूसी क्रूड पर मिलने वाली छूट वापस नहीं आती, तो भारतीय रिफाइनरियों की लागत और बढ़ सकती है। इसका असर तेल कंपनियों के मार्जिन के साथ आगे चलकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो सकता है।

    खाड़ी का तेल ब्रेंट से करीब 10 डॉलर महंगा

    ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ के मुताबिक, बाजार में कच्चे तेल की कमी का फायदा ट्रेडर्स उठा रहे हैं। भारतीय रिफाइनरियों को खाड़ी देशों से तेल खरीदने के लिए स्पॉट मार्केट का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां अतिरिक्त प्रीमियम वसूला जा रहा है।

    खाड़ी के सप्लायर दुबई-ओमान बेंचमार्क पर करीब 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल अतिरिक्त प्रीमियम मांग रहे हैं। वहीं, दुबई-ओमान बेंचमार्क खुद ब्रेंट से करीब 6 से 7 डॉलर महंगा है। इस तरह भारतीय रिफाइनरों के लिए खाड़ी का कच्चा तेल ब्रेंट की तुलना में करीब 10 डॉलर प्रति बैरल तक महंगा पड़ रहा है।

    सऊदी अरामको की आधिकारिक सेल प्राइस दुबई-ओमान बेंचमार्क से 1.5 से 3 डॉलर नीचे जरूर हैं, लेकिन लाल सागर और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण टर्म डील के तहत मिलने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे भारतीय रिफाइनरियों की स्पॉट मार्केट पर निर्भरता बढ़ गई है।

    जहाजों की कमी ने बढ़ाई लागत

    संघर्ष वाले क्षेत्रों से कच्चा तेल लाने में जहाजों की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती बन गई है। जोखिम वाले समुद्री रास्तों से तेल पहुंचाने के लिए ट्रेडर्स अतिरिक्त प्रीमियम मांग रहे हैं। टर्म कॉन्ट्रैक्ट में तेल सस्ता होने के बावजूद भारत तक उसे पहुंचाने के लिए पर्याप्त जहाज नहीं मिलना रिफाइनरों की लागत बढ़ा रहा है।

    पश्चिम अफ्रीकी क्रूड भी महंगा

    खाड़ी के बाद पश्चिम अफ्रीका से मिलने वाला कच्चा तेल भी भारतीय रिफाइनरियों के लिए महंगा हो गया है। इसके चलते कंपनियां अब वैकल्पिक स्रोतों पर नजर डाल रही हैं। अमेरिका, ब्राजील और गुयाना जैसे देशों से कच्चा तेल खरीदने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है।

    रूसी तेल की सबसे बड़ी बढ़त खत्म

    कुछ समय पहले तक रूसी कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरों के लिए सबसे आकर्षक विकल्पों में था। इसकी बड़ी वजह उस पर मिलने वाली भारी छूट थी। अब यह डिस्काउंट लगभग खत्म हो चुका है। वेनेजुएला के तेल पर मिलने वाली छूट भी काफी कम हो गई है।

    इससे भारतीय रिफाइनरियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है—एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है और दूसरी तरफ सस्ता रूसी तेल भी पहले जैसा उपलब्ध नहीं है।

    अमेरिकी प्रतिबंध बढ़े तो मुश्किल और बढ़ेगी

    भारतीय तेल कंपनियों के लिए अमेरिकी प्रतिबंध भी बड़ा जोखिम हैं। अगर अमेरिका रूसी तेल खरीदने वाले देशों और कंपनियों पर प्रतिबंध और कड़े करता है, तो भारत के लिए रूसी क्रूड खरीदना और मुश्किल हो सकता है। ऐसे में रिफाइनरियों को दूसरे देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है।

  • चुनौतियों के बीच मजबूत हुई अदाणी समूह की वित्तीय स्थिति, ब्रोकरेज ने पोर्ट्स और पावर शेयरों पर बढ़ाया भरोसा

    चुनौतियों के बीच मजबूत हुई अदाणी समूह की वित्तीय स्थिति, ब्रोकरेज ने पोर्ट्स और पावर शेयरों पर बढ़ाया भरोसा

    नई दिल्ली ।वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने अदाणी समूह को लेकर अपना सकारात्मक रुख बरकरार रखा है। ब्रोकरेज ने अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन और अदाणी पावर को अपनी प्रमुख निवेश पसंद में शामिल किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में नियामकीय और बाजार से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद समूह की परियोजनाओं को पूरा करने और कारोबार का विस्तार करने की क्षमता मजबूत बनी हुई है।

    बर्नस्टीन ने अदाणी समूह से जुड़े प्रमुख घटनाक्रमों के दौरान कंपनी के प्रदर्शन का आकलन किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनौतियों के बावजूद समूह की परिचालन क्षमता पर बड़ा असर नहीं पड़ा और विभिन्न क्षेत्रों में परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की गति बनी रही।

    ब्रोकरेज के आकलन में समूह की वित्तीय स्थिति में भी सुधार का उल्लेख किया गया है। शेयरों को गिरवी रखने की प्रवृत्ति लगभग समाप्त होने और कर्ज के स्तर में कमी को वित्तीय मजबूती के सकारात्मक संकेत के रूप में देखा गया है। इससे समूह की बैलेंस शीट को पहले की तुलना में बेहतर स्थिति मिलने की बात कही गई है।

    अदाणी पोर्ट्स को लेकर बर्नस्टीन ने आउटपरफॉर्म रेटिंग कायम रखी है। ब्रोकरेज ने कंपनी का लक्ष्य मूल्य बढ़ाकर 1,973 रुपये प्रति शेयर कर दिया है, जो पहले 1,880 रुपये था। अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह कारोबार में मजबूत वृद्धि को देखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कार्गो वॉल्यूम वृद्धि का अनुमान भी बढ़ाया गया है।

    कंपनी के जुलाई कारोबार में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होने का उल्लेख किया गया है, जबकि पहले वृद्धि का अनुमान 10 प्रतिशत रखा गया था। इसके साथ ही अदाणी पोर्ट्स के लक्षित ईवी से ईबीआईटीडीए अनुपात को भी 16 गुना से बढ़ाकर 16.5 गुना किया गया है।

    बर्नस्टीन के अनुसार, अदाणी पोर्ट्स की प्रमुख ताकतों में मूल्य निर्धारण क्षमता, लॉजिस्टिक्स कारोबार का विस्तार और प्रतिस्पर्धियों की तुलना में आकर्षक मूल्यांकन शामिल हैं। कंपनी द्वारा परिसंपत्तियों का अधिग्रहण कर उन्हें विकसित करने की क्षमता को भी सकारात्मक पहलू माना गया है।

    अदाणी पावर पर भी ब्रोकरेज ने आउटपरफॉर्म रेटिंग बनाए रखी है। कंपनी के लिए लक्ष्य मूल्य 203.56 रुपये से बढ़ाकर 220 रुपये प्रति शेयर किया गया है। अनुमान के अनुसार आने वाले वर्षों में कंपनी का परिचालन लाभ मजबूत रह सकता है।

    रिपोर्ट में वर्ष 2027 के लिए अदाणी पावर का ईबीआईटीडीए 2,41,272 मिलियन रुपये और वर्ष 2028 के लिए 3,02,594 मिलियन रुपये रहने का अनुमान जताया गया है। इससे कंपनी की भविष्य की परिचालन क्षमता को लेकर सकारात्मक धारणा का संकेत मिलता है।

    हालांकि, अदाणी ग्रीन एनर्जी को लेकर बर्नस्टीन का रुख अलग है। ब्रोकरेज ने कंपनी पर अंडरपरफॉर्म रेटिंग बरकरार रखी है और लक्ष्य मूल्य 1,000 रुपये से घटाकर 980 रुपये प्रति शेयर कर दिया है।

    ब्रोकरेज के अनुसार, अदाणी ग्रीन का मौजूदा मूल्यांकन अपेक्षाकृत ऊंचा है, जिससे निकट अवधि में शेयर में तेजी की संभावनाएं सीमित हो सकती हैं। कंपनी से जुड़े संशोधित अनुमानों में वित्त वर्ष 2027 के ईबीआईटीडीए अनुमान में 10 प्रतिशत की कमी का भी उल्लेख किया गया है।

    कुल मिलाकर, बर्नस्टीन ने अदाणी समूह की वित्तीय और परिचालन स्थिति में सुधार को रेखांकित किया है। घटते कर्ज, बेहतर नकदी प्रवाह और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में समूह की व्यापक मौजूदगी को दीर्घकालिक विकास के लिए सकारात्मक माना गया है। हालांकि, समूह की सभी कंपनियों को लेकर ब्रोकरेज का नजरिया समान नहीं है और अदाणी ग्रीन एनर्जी पर उसने सावधानी बरतने की सलाह दी है।

  • भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तेज गिरावट, सेंसेक्स 493 अंक टूटा और निफ्टी 24155 के करीब बंद हुआ

    भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तेज गिरावट, सेंसेक्स 493 अंक टूटा और निफ्टी 24155 के करीब बंद हुआ

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,235.46 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 132.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत गिरकर 24,154.90 पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती कारोबार से ही दबाव दिखाई दिया और दिन बढ़ने के साथ प्रमुख सूचकांकों की कमजोरी बनी रही।

    बाजार की गिरावट में आईटी क्षेत्र की कंपनियों का प्रदर्शन प्रमुख कारणों में रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिन का सबसे कमजोर प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांक रहा। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी में 1.42 प्रतिशत, पीएसयू बैंक में 1.01 प्रतिशत और एफएमसीजी इंडेक्स में 0.77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी सर्विसेज इंडेक्स 0.68 प्रतिशत कमजोर रहा, जबकि मेटल इंडेक्स में 0.61 प्रतिशत की गिरावट आई। कंजप्शन इंडेक्स 0.50 प्रतिशत और इंफ्रास्ट्रक्चर इंडेक्स 0.42 प्रतिशत नीचे बंद हुए। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने बाजार की व्यापक कमजोरी को बढ़ाने का काम किया।

    हालांकि कुछ क्षेत्रों में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स 1.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ प्रमुख लाभार्थियों में रहा। मीडिया इंडेक्स में 0.40 प्रतिशत, ऑटो में 0.30 प्रतिशत, हेल्थकेयर में 0.21 प्रतिशत और ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 0.20 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई।

    बड़े शेयरों के साथ मिडकैप कंपनियों पर भी दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 277.60 अंक यानी 0.44 प्रतिशत गिरकर 63,539.40 पर बंद हुआ। दूसरी ओर निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट रहा और 19,808.85 के स्तर पर कारोबार समाप्त किया। इससे संकेत मिला कि व्यापक बाजार में गिरावट एक समान नहीं रही और कुछ हिस्सों में निवेशकों ने मजबूती बनाए रखी।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में एक्सिस बैंक, पावर ग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, बजाज फिनसर्व और एनटीपीसी बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी तरफ एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर और अल्ट्राटेक सीमेंट समेत कई बड़े शेयरों में गिरावट रही।

    बाजार के प्रदर्शन पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी प्रभाव रहा। कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। ऊंची तेल कीमतों से भारत जैसे तेल आयातक देश की कंपनियों की लागत और व्यापक आर्थिक परिस्थितियों पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसके साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी बाजार के sentiment पर दबाव बनाया।

    अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम के समाप्त होने के बाद मध्य पूर्व में तनाव को लेकर चिंता बढ़ी है। इससे निवेशकों के बीच मुद्रास्फीति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर सावधानी बढ़ी। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि से उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के आकर्षण पर भी असर पड़ सकता है।

    आईटी शेयरों पर विशेष दबाव की वजह वैश्विक स्तर पर तकनीकी खर्च को लेकर बनी चिंताएं रहीं। ऊंची ब्याज दरों के लंबे समय तक बने रहने की आशंका से कंपनियों के प्रौद्योगिकी खर्च में कमी आने की संभावना को लेकर निवेशक सतर्क रहे।

    घरेलू अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेतकों को अपेक्षाकृत मजबूत माना जा रहा है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमत और बढ़ती इनपुट लागत कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों, तेल कीमतों और ब्याज दरों से जुड़े घटनाक्रम पर बनी रहने की संभावना है।

  • केंद्र का बड़ा फोकस, औद्योगिक कॉरिडोरों में मंजूरी के बाद समयबद्ध निर्माण, निवेश और उत्पादन शुरू कराने की रणनीति तेज

    केंद्र का बड़ा फोकस, औद्योगिक कॉरिडोरों में मंजूरी के बाद समयबद्ध निर्माण, निवेश और उत्पादन शुरू कराने की रणनीति तेज

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने औद्योगिक कॉरिडोर और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर अपनी प्राथमिकता में बदलाव करते हुए अब केवल मंजूरी देने के बजाय उन्हें समय पर पूरा कराने, निवेश आकर्षित करने और उत्पादन शुरू कराने पर जोर दिया है। सरकार का मानना है कि किसी परियोजना की वास्तविक सफलता उसकी घोषणा या स्वीकृति से नहीं, बल्कि जमीन पर उसके क्रियान्वयन और आर्थिक गतिविधियों में बदलने से तय होती है।

    राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास एवं कार्यान्वयन न्यास की शीर्ष निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं की प्रगति और उनसे जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में राज्यों से भूमि उपलब्धता, परिवहन संपर्क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं, वैधानिक मंजूरियों तथा परियोजना विशेष प्रयोजन इकाइयों से जुड़ी बाधाओं को तेजी से दूर करने पर जोर दिया गया।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटन, सड़क और परिवहन संपर्क, आवश्यक उपयोगिताओं तथा नियामकीय मंजूरियों से जुड़ी अड़चनों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान होना चाहिए। उन्होंने पीएम गतिशक्ति के माध्यम से समेकित योजना बनाने और निवेशकों के लिए अनुकूल भूमि आवंटन व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

    सरकार की योजना औद्योगिक विकास को केवल फैक्टरियों और उत्पादन इकाइयों तक सीमित रखने की नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल विकास, सार्वजनिक परिवहन और अन्य जरूरी सामाजिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। इससे उद्योगों के आसपास एक ऐसा समग्र इकोसिस्टम विकसित करने की कोशिश है, जिसमें कर्मचारियों और कंपनियों दोनों की जरूरतें पूरी हो सकें।

    केंद्र सरकार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, राज्यों को सहायता और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए बेहतर ऋण सुविधा के माध्यम से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है। कर और सीमा शुल्क से जुड़े उपायों के जरिए देश में विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने औद्योगिक परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति के साथ जोड़कर समेकित क्षेत्रीय विकास मॉडल के तहत आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने निवेशकों तक पहुंच बढ़ाने और औद्योगिक नोड्स की प्रभावी मार्केटिंग पर जोर दिया। उनका कहना है कि वैश्विक निवेश के अवसरों को आकर्षित करने के लिए परियोजनाओं को निवेशकों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।

    मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए देश और क्षेत्र विशेष के औद्योगिक एन्क्लेव विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। इसके तहत प्लग एंड प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्लैटेड फैक्ट्री, श्रमिक आवास और आर्थिक-सामाजिक सुविधाओं से युक्त तैयार औद्योगिक व्यवस्था विकसित करने पर बल दिया गया।

    पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने औद्योगिक कॉरिडोरों को राष्ट्रीय जलमार्गों से जोड़ने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि जलमार्गों को औद्योगिक विकास की रीढ़ के रूप में विकसित करने से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में भी बेहतर कनेक्टिविटी, उपलब्ध भूमि और स्थानीय संसाधनों के आधार पर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दिया।

    नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने परियोजना एसपीवी को अधिक अधिकार देने की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि योजना निर्माण, विकास और नगर प्रशासन से जुड़े पर्याप्त अधिकार मिलने से औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारा जा सकेगा। सरकार का नया फोकस स्पष्ट रूप से मंजूरी से आगे बढ़कर परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और उन्हें वास्तविक आर्थिक गतिविधि में बदलने पर केंद्रित है।

  • दक्षिण कोरिया में जनरेटिव एआई का रोजगार पर असर, युवाओं की 2.85 लाख नौकरियां घटीं, वरिष्ठ कर्मचारियों को मिला फायदा

    दक्षिण कोरिया में जनरेटिव एआई का रोजगार पर असर, युवाओं की 2.85 लाख नौकरियां घटीं, वरिष्ठ कर्मचारियों को मिला फायदा


    नई दिल्ली ।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल का असर अब रोजगार बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरेटिव एआई तकनीकों के तेजी से विस्तार के बाद एआई से अधिक प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं के रोजगार में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि तकनीकी बदलाव का असर अलग-अलग आयु वर्ग के कर्मचारियों पर समान नहीं रहा है।

    जून 2022 से जून 2026 के बीच दक्षिण कोरिया में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लोगों द्वारा किए जा रहे कुल रोजगारों की संख्या में 2.85 लाख की कमी दर्ज की गई। इस गिरावट का सबसे बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों से जुड़ा रहा जिन्हें एआई के प्रभाव के प्रति अधिक संवेदनशील माना जाता है। कुल कम हुए रोजगारों में करीब 2.68 लाख यानी लगभग 94 प्रतिशत नौकरियां एआई प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित थीं।

    इन क्षेत्रों में आईटी सेवाएं, प्रकाशन, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और प्रोफेशनल सर्विसेज प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में ऐसे काम बड़ी संख्या में शामिल हैं जिन्हें जनरेटिव एआई, ऑटोमेशन और डिजिटल टूल्स के जरिए तेजी से बदला या आसान किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, आईटी सेवाओं में युवाओं का रोजगार 31.4 प्रतिशत घटा। यह उन क्षेत्रों में सबसे बड़ी गिरावट रही, जहां एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

    प्रकाशन क्षेत्र में भी युवा रोजगार में 27.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस श्रेणी में सॉफ्टवेयर और वेब डिजाइन से जुड़े पेशे भी शामिल हैं। कंप्यूटर प्रोग्रामिंग क्षेत्र में युवाओं के रोजगार में 16.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि प्रोफेशनल सर्विसेज में यह कमी 11.6 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि एआई का शुरुआती प्रभाव उन नौकरियों पर अधिक पड़ सकता है जिनमें डिजिटल, दोहराए जाने वाले या सामग्री आधारित कार्य बड़ी भूमिका निभाते हैं।

    इसके विपरीत 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के कर्मचारियों के रोजगार में इसी अवधि के दौरान 2.30 लाख की बढ़ोतरी हुई। खास बात यह रही कि इनमें से 1.73 लाख रोजगार एआई प्रभावित क्षेत्रों में ही बढ़े। इससे यह संकेत मिलता है कि अनुभव, विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र की गहरी समझ वाले कर्मचारियों की मांग कई जगहों पर अभी भी मजबूत बनी हुई है।

    रिपोर्ट में 2022 को आधार वर्ष माना गया है। इसी वर्ष के अंत में चैटजीपीटी के लॉन्च के बाद जनरेटिव एआई तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ा। इसके बाद कंपनियों में कंटेंट तैयार करने, कोडिंग, डेटा विश्लेषण और अन्य डिजिटल कार्यों के लिए एआई आधारित उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे कंपनियों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ कुछ पारंपरिक भूमिकाओं की जरूरत पर भी असर पड़ा है।

    शिक्षा के आधार पर रोजगार की स्थिति में भी बदलाव सामने आया है। 2019 से 2022 के बीच स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारकों की औसत बेरोजगारी दर 8.2 प्रतिशत रही, जबकि माध्यमिक या जूनियर कॉलेज स्तर तक पढ़े युवाओं में यह 8 प्रतिशत थी। 2022 के बाद उच्च शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी दर 7 प्रतिशत रही, जबकि कम शैक्षणिक योग्यता वाले युवाओं में यह 5.4 प्रतिशत दर्ज की गई।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दक्षिण कोरिया की लगातार घटती आबादी युवाओं के रोजगार में बदलाव का एक कारण हो सकती है। हालांकि एआई ने इस बदलाव को और तेज किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार एआई युवा कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन यही तकनीक कुछ भूमिकाओं में उनके काम को प्रतिस्थापित भी कर सकती है। इसलिए चुनौती केवल नौकरियां घटने की नहीं, बल्कि युवाओं के लिए पारंपरिक करियर की शुरुआती सीढ़ियों के कमजोर होने की भी है।