Category: Economy

  • 17 अगस्त को शेयर बाजार में क्या होगा? Nifty-Sensex की दिशा तय करेंगे ये बड़े ट्रिगर, निवेशकों को रहना होगा सतर्क

    17 अगस्त को शेयर बाजार में क्या होगा? Nifty-Sensex की दिशा तय करेंगे ये बड़े ट्रिगर, निवेशकों को रहना होगा सतर्क


    नई दिल्ली । 17 अगस्त 2026 सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत सतर्क माहौल के बीच होने की संभावना है। पिछले सप्ताह घरेलू बाजार कमजोर होकर बंद हुआ और Nifty 50 करीब 205 अंक की गिरावट के साथ 24366 के स्तर पर जबकि Sensex करीब 490 अंक टूटकर 78009.25 के स्तर पर बंद हुआ। लगातार कमजोर प्रदर्शन के बीच निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि बाजार निचले स्तरों पर खरीदारी का सहारा लेता है या बिकवाली का दबाव और बढ़ता है।
    बाजार की चाल पर इस समय सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव का पड़ रहा है। Reuters के मुताबिक शुक्रवार को Brent crude करीब 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था और तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई रुपये और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है। यही वजह है कि सोमवार के कारोबार में ऊर्जा कीमतों से जुड़ी खबरें बाजार के लिए महत्वपूर्ण ट्रिगर बनी रहेंगी। 
    तकनीकी नजरिए से Nifty के लिए 24250 से 24200 का क्षेत्र अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि इंडेक्स इस स्तर के नीचे फिसलता है तो बाजार में बिकवाली और तेज हो सकती है। वहीं ऊपर की तरफ 24500 से 24550 का क्षेत्र तत्काल चुनौती बना हुआ है। इस जोन के ऊपर मजबूती से टिकने पर बाजार में राहत की खरीदारी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा स्थिति में किसी एक दिशा में तेजी से दांव लगाने के बजाय प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रखना जरूरी है। 
    Bank Nifty के लिए भी 58000 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैंकिंग शेयरों में यदि खरीदारी लौटती है तो इंडेक्स को मजबूती मिल सकती है लेकिन कमजोर वैश्विक संकेत और बढ़ती बॉन्ड यील्ड दबाव बनाए रख सकते हैं। पिछले सप्ताह वित्तीय क्षेत्र में भी कमजोरी देखने को मिली थी। ऐसे में सोमवार को बैंकिंग और वित्तीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

    इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। पिछले सप्ताह वैश्विक जोखिमों और तेल की कीमतों के दबाव के बीच निवेशकों का रुख सावधान रहा। घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही नतीजों का असर भी अलग अलग शेयरों में दिखाई दे सकता है। ऐसे में पूरे बाजार की बजाय मजबूत नतीजों और बेहतर कारोबार वाली कंपनियों पर निवेशकों का फोकस रह सकता है। 

    हालांकि बाजार में कमजोरी के बावजूद लंबी अवधि को लेकर कुछ विशेषज्ञ भारतीय शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार Carnelian Asset Management का मानना है कि कॉरपोरेट आय में सुधार और वैश्विक निवेश धारणा में बदलाव से भारतीय इक्विटी बाजार में 2027 तक रिकवरी की संभावना बनी हुई है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा उतार चढ़ाव को केवल तत्काल गिरावट के नजरिए से नहीं देखा जा सकता।

    कुल मिलाकर 17 अगस्त को बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है। Nifty के लिए 24200 के आसपास का सपोर्ट और 24500 से 24550 का जोन अहम रहेगा जबकि Sensex की दिशा वैश्विक संकेतों और घरेलू खरीदारी पर निर्भर करेगी। निवेशकों को बाजार की चाल देखकर ही निर्णय लेना चाहिए और केवल एक दिन के उतार चढ़ाव के आधार पर जल्दबाजी में निवेश या बिकवाली से बचना बेहतर होगा। यह बाजार विश्लेषण सामान्य जानकारी के लिए है और निवेश की सलाह नहीं है।

  • FSSAI खाद्य सुरक्षा जांच, खाद्य उत्पाद लेबलिंग, FSSAI नोटिस कंपनियां, खाद्य पैकेजिंग नियम, भ्रामक खाद्य दावे

    FSSAI खाद्य सुरक्षा जांच, खाद्य उत्पाद लेबलिंग, FSSAI नोटिस कंपनियां, खाद्य पैकेजिंग नियम, भ्रामक खाद्य दावे

    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की ओर से भ्रामक दावों, गैर-मानकीकृत उत्पादों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर जारी नोटिसों के बाद कई खाद्य कारोबारियों ने सुधारात्मक कदम उठाए हैं। नियामक की ओर से रविवार को बताया गया कि नोटिस मिलने के बाद संबंधित कंपनियों ने अपने उत्पादों और पैकेजिंग में आवश्यक बदलाव शुरू किए हैं।

    खाद्य नियामक के अनुसार, सुधारात्मक कार्रवाई में उत्पादों के लेबल पर किए गए भ्रामक दावों को हटाना, उत्पादों के नाम में बदलाव करना और पैकेजिंग को लागू नियमों के अनुरूप बनाना शामिल है। इन कदमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।

    कुछ कंपनियों को भ्रामक ट्रेडमार्क के इस्तेमाल को लेकर नोटिस जारी किए गए थे। इनमें ऑनेस्ट इनोवेशन फॉर यू प्राइवेट लिमिटेड और हेलियोस्टोन स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। नोटिस मिलने के बाद दोनों कंपनियों ने अपने संबंधित उत्पादों के नाम में बदलाव किया।

    राजस्थान एग्रो एंड जनरल इंडस्ट्रीज के मामले में भी भ्रामक ट्रेडमार्क से जुड़ी आपत्ति सामने आई थी। कंपनी ने नियामकीय निर्देशों के अनुरूप उत्पादों से जुड़े भ्रामक दावों को हटाया। इसके अलावा उत्पादों से संबंधित संचार में पीपीएम शब्द का इस्तेमाल भी बंद कर दिया गया।

    एक अन्य मामले में आयोटा नैनोटेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को गैर-मानकीकृत उत्पाद से संबंधित नियमों के उल्लंघन के लिए चिन्हित किया गया। कंपनी ने संबंधित उत्पाद के लेबल से भ्रामक दावों को हटाने के साथ गैर-मानकीकृत पानी का उत्पादन भी बंद कर दिया।

    पंचामृत इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक से जुड़े मामले में नोटिस जारी किया गया था। नियामकीय कार्रवाई के बाद कंपनी ने संबंधित उत्पाद को अपनी वेबसाइट से हटा दिया। यह कदम कंपनी की ओर से नोटिस के बाद की गई सुधारात्मक कार्रवाई का हिस्सा रहा।

    लिव्योर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के उत्पाद ‘लिव्योर रोस्टेड एडामे बीन्स’ के लेबल पर किए गए ‘वीगन’ और ‘हेल्थी’ दावों को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई थी। कंपनी ने इन दावों को नियमों के अनुरूप नहीं होने की बात स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाए।

    कंपनी के अनुसार, लागू नियमों की जानकारी के अभाव में ये दावे अनजाने में उत्पाद के लेबल पर दर्ज हो गए थे। कंपनी ने इस मामले पर खेद जताते हुए माफी मांगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होने का आश्वासन दिया।

    इसके साथ ही कंपनी ने संशोधित लेबल भी तैयार किया। नियमों का उल्लंघन करने वाले दावों वाली मौजूदा पैकेजिंग सामग्री को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात भी कही गई। कंपनी ने अपने उत्पादों के लेबल की समीक्षा और संशोधन का काम भी शुरू कर दिया है।

    खाद्य उत्पादों के लेबल पर लिखी जानकारी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होती है। उत्पाद की प्रकृति, दावे और संबंधित विवरण में किसी तरह की गलत या भ्रामक जानकारी उपभोक्ता के फैसले को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में नियामकीय निगरानी का उद्देश्य कंपनियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप कारोबार करने के लिए बाध्य करना है।

    नोटिसों के बाद कंपनियों की ओर से किए गए बदलाव यह दिखाते हैं कि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में नियमों के पालन पर निगरानी बढ़ रही है। आने वाले समय में कंपनियों के लिए लेबलिंग दावों की सटीकता और नियामकीय अनुपालन पहले से अधिक महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

  • कॉरपोरेट आय सीजन में निफ्टी मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़ा, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने भी अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया

    कॉरपोरेट आय सीजन में निफ्टी मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़ा, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने भी अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया

    नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन ने बाजार अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। तिमाही आय सीजन के दौरान 19 सेक्टर्स का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। वित्तीय सेवाएं, मेटल्स, ऑयल एंड गैस, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों ने कॉरपोरेट आय में मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही का आय सीजन कुल मिलाकर मजबूत रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अलग रखने पर कंपनियों की बिक्री, ईबीआईटीडीए और टैक्स के बाद मुनाफे में सालाना आधार पर क्रमशः 18 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन तीनों क्षेत्रों में अनुमान क्रमशः 15 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि का था।

    इस प्रदर्शन में वित्तीय सेवाओं यानी बीएफएसआई क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मेटल्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को छोड़कर ऑयल एंड गैस क्षेत्र ने भी आय वृद्धि को मजबूती दी। टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन ने भी कुल कॉरपोरेट आय के आंकड़ों को बेहतर बनाने में योगदान किया।

    ऑटोमोबाइल, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में भी अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। इन क्षेत्रों के बेहतर नतीजों से संकेत मिलता है कि कंपनियों के कारोबार पर घरेलू मांग, परिचालन क्षमता और क्षेत्रवार परिस्थितियों का सकारात्मक असर पड़ा।

    हालांकि, सभी सेक्टरों का प्रदर्शन समान नहीं रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर खासा दबाव डाला। इन कंपनियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि में 162 अरब रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, जबकि इस बार करीब 181 अरब रुपये का नुकसान सामने आया। इससे कुल कॉरपोरेट आय के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

    सीमेंट और इंटरग्लोब एविएशन का प्रदर्शन भी कुल आय के आंकड़ों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल रहा। इसके बावजूद अन्य प्रमुख क्षेत्रों की मजबूती ने समग्र नतीजों को उम्मीद से बेहतर बनाए रखने में मदद की।

    निफ्टी कंपनियों के स्तर पर भी पहली तिमाही के आंकड़े महत्वपूर्ण रहे। निफ्टी का टैक्स के बाद मुनाफा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा। यह पिछले 10 तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि रही। खास बात यह रही कि यह प्रदर्शन 10 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि से काफी अधिक रहा।

    बाजार पूंजीकरण के अलग-अलग वर्गों में भी कंपनियों की आय वृद्धि अनुमानों से बेहतर रही। लार्जकैप कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अनुमान 14 प्रतिशत की वृद्धि का था। इससे बड़ी कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत मिलता है।

    मिडकैप कंपनियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। उनकी आय में 23 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जो पिछले 11 तिमाहियों का उच्चतम स्तर बताया गया है। वहीं स्मॉलकैप कंपनियों की आय में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि अनुमान 22 प्रतिशत का था।

    पहली तिमाही के ये आंकड़े भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं। खासकर वित्तीय सेवाओं, मेटल्स और कुछ अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर आय वृद्धि ने बाजार के अनुमान को पीछे छोड़ा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और कुछ कमजोर सेक्टरों से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की आय पर लागत, मांग और वैश्विक परिस्थितियों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 19 सेक्टर्स ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि फाइनेंशियल और मेटल्स प्रमुख बढ़त वाले क्षेत्र रहे।

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    नई दिल्ली ।

    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन ने बाजार अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। तिमाही आय सीजन के दौरान 19 सेक्टर्स का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। वित्तीय सेवाएं, मेटल्स, ऑयल एंड गैस, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों ने कॉरपोरेट आय में मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही का आय सीजन कुल मिलाकर मजबूत रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अलग रखने पर कंपनियों की बिक्री, ईबीआईटीडीए और टैक्स के बाद मुनाफे में सालाना आधार पर क्रमशः 18 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन तीनों क्षेत्रों में अनुमान क्रमशः 15 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि का था।

    इस प्रदर्शन में वित्तीय सेवाओं यानी बीएफएसआई क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मेटल्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को छोड़कर ऑयल एंड गैस क्षेत्र ने भी आय वृद्धि को मजबूती दी। टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन ने भी कुल कॉरपोरेट आय के आंकड़ों को बेहतर बनाने में योगदान किया।

    ऑटोमोबाइल, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में भी अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। इन क्षेत्रों के बेहतर नतीजों से संकेत मिलता है कि कंपनियों के कारोबार पर घरेलू मांग, परिचालन क्षमता और क्षेत्रवार परिस्थितियों का सकारात्मक असर पड़ा।

    हालांकि, सभी सेक्टरों का प्रदर्शन समान नहीं रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर खासा दबाव डाला। इन कंपनियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि में 162 अरब रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, जबकि इस बार करीब 181 अरब रुपये का नुकसान सामने आया। इससे कुल कॉरपोरेट आय के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

    सीमेंट और इंटरग्लोब एविएशन का प्रदर्शन भी कुल आय के आंकड़ों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल रहा। इसके बावजूद अन्य प्रमुख क्षेत्रों की मजबूती ने समग्र नतीजों को उम्मीद से बेहतर बनाए रखने में मदद की।

    निफ्टी कंपनियों के स्तर पर भी पहली तिमाही के आंकड़े महत्वपूर्ण रहे। निफ्टी का टैक्स के बाद मुनाफा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा। यह पिछले 10 तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि रही। खास बात यह रही कि यह प्रदर्शन 10 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि से काफी अधिक रहा।

    बाजार पूंजीकरण के अलग-अलग वर्गों में भी कंपनियों की आय वृद्धि अनुमानों से बेहतर रही। लार्जकैप कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अनुमान 14 प्रतिशत की वृद्धि का था। इससे बड़ी कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत मिलता है।

    मिडकैप कंपनियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। उनकी आय में 23 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जो पिछले 11 तिमाहियों का उच्चतम स्तर बताया गया है। वहीं स्मॉलकैप कंपनियों की आय में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि अनुमान 22 प्रतिशत का था।

    पहली तिमाही के ये आंकड़े भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं। खासकर वित्तीय सेवाओं, मेटल्स और कुछ अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर आय वृद्धि ने बाजार के अनुमान को पीछे छोड़ा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और कुछ कमजोर सेक्टरों से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की आय पर लागत, मांग और वैश्विक परिस्थितियों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।

  • शेयर बाजार में गिरावट से TCS, रिलायंस समेत पांच दिग्गज कंपनियों का मार्केटकैप एक लाख करोड़ रुपये घटा

    शेयर बाजार में गिरावट से TCS, रिलायंस समेत पांच दिग्गज कंपनियों का मार्केटकैप एक लाख करोड़ रुपये घटा

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में बीते सप्ताह हुई बिकवाली का असर देश की सबसे बड़ी कंपनियों की बाजार पूंजी पर भी दिखाई दिया। भारत की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से पांच के मार्केटकैप में करीब एक लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। इस दौरान पांच अन्य कंपनियों की बाजार वैल्यूएशन में कुल 55,149.45 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।

    बीते सप्ताह सेंसेक्स 489.92 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,009.25 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 204.65 अंक यानी 0.83 प्रतिशत फिसलकर 24,366 अंक पर रहा। बाजार में बिकवाली के दबाव का सीधा असर कई बड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा, जिससे उनकी कुल बाजार पूंजी घट गई।

    शीर्ष 10 कंपनियों में सबसे अधिक नुकसान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस को हुआ। कंपनी का मार्केटकैप 34,263.28 करोड़ रुपये घटकर 8.53 लाख करोड़ रुपये रह गया। आईटी क्षेत्र की इस प्रमुख कंपनी की बाजार वैल्यू में आई कमी ने शीर्ष कंपनियों के कुल मार्केटकैप पर भी असर डाला।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज की बाजार पूंजी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का मार्केटकैप 31,869.13 करोड़ रुपये घटकर 17.70 लाख करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद सप्ताह के अंत में रिलायंस इंडस्ट्रीज सबसे अधिक बाजार मूल्य वाली भारतीय कंपनी बनी रही।

    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मार्केटकैप में 25,891.88 करोड़ रुपये की कमी आई। सप्ताह के अंत में बैंक का बाजार मूल्यांकन 9.86 लाख करोड़ रुपये रहा। एचडीएफसी बैंक की बाजार पूंजी 7,165.37 करोड़ रुपये घटकर 11.21 लाख करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई बैंक की वैल्यूएशन 2,792.65 करोड़ रुपये कम होकर 10.18 लाख करोड़ रुपये रह गई।

    दूसरी ओर, शीर्ष 10 कंपनियों में पांच ऐसी भी रहीं जिनके मार्केटकैप में सप्ताह के दौरान बढ़ोतरी हुई। इनमें सबसे ज्यादा फायदा भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी को मिला। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 26,438.49 करोड़ रुपये बढ़कर 5.23 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई।

    भारती एयरटेल की बाजार पूंजी में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई। कंपनी का मार्केटकैप 20,592.13 करोड़ रुपये बढ़कर 12.43 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस बढ़ोतरी के साथ भारती एयरटेल शीर्ष कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद दूसरे स्थान पर रही।

    बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 3,548.79 करोड़ रुपये बढ़कर 6.77 लाख करोड़ रुपये हो गया। लार्सन एंड टुब्रो की बाजार वैल्यूएशन में 2,490.66 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और यह 5.59 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केटकैप भी 2,079.38 करोड़ रुपये बढ़कर 4.91 लाख करोड़ रुपये हो गया।

    सप्ताह के अंत में बाजार पूंजी के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही। इसके बाद भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

    शीर्ष कंपनियों के मार्केटकैप में यह बदलाव बताता है कि व्यापक बाजार में बिकवाली के बावजूद सभी बड़ी कंपनियों के शेयरों पर एक जैसा दबाव नहीं रहा। कुछ कंपनियों में निवेशकों की खरीदारी से बाजार मूल्य बढ़ा, जबकि दूसरी कंपनियों में बिकवाली के कारण वैल्यूएशन कम हुई। आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा इन कंपनियों के शेयर प्रदर्शन और निवेशकों के रुझान पर निर्भर करेगी।

  • सरसों तेल की कीमत में भारी उछाल…. 220 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंचे दाम

    सरसों तेल की कीमत में भारी उछाल…. 220 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंचे दाम


    नई दिल्ली।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में सुल्तानपुर, जौनपुर सहित अन्य आस-पास के जिलों में सरसों का दाम (Mustard price) प्रति क्विंटल 7000 रुपये से 7500 रुपये तक बिक रहा है। किसानों का उम्मीद है कि दाम 8000 रुपये तक भी जाएगा। वहीं, सरसों के तेल (Mustard oil) के फुटकर विक्रेता इस समय 220 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेच रहे हैं। महज एक महीने के अंदर ही कीमतों में यह तेजी देखने को मिली है।

    केंद्र सरकार (Central Government) के कंज्यूमर डिपार्टमेंट की तरफ से जारी किए गए रेट के अनुसार देशभर में औसतन आज सरसों का तेल 197.25 रुपये में बिक रहा है। एक महीना पहले यह 194.15 रुपये में बिक रहा था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल यानी 15 अगस्त 2025 को सरसों के तेल का दाम 188.20 रुपये था। यानी कीमतों में उछाल साफ देखने को मिल रही है।


    देश के प्रमुख शहरों में क्या है सरसों का रेट

    – दिल्ली में 209 रुपये प्रति किलोग्राम
    – मुंबई में 231 रुपये प्रति किलोग्राम
    – चेन्नई में 247 रुपये प्रति किलोग्राम


    मूंगफली, पाम ऑयल की कीमतों में भी लगी आग

    सिर्फ सरसों ही नहीं, पाम ऑयल के दाम भी पिछले साल की तुलना में इस बार काफी बढ़ गया है। 15 अगस्त को पाम ऑयल का रेट 149.57 रुपये है। एक साल पहले दाम 130.24 रुपये था। यानी पिछले साल की तुलना में इस बार कीमतों में 20 रुपये का इजाफा हुआ है। करीब 14% दाम बढ़ा है।

    सूरजमुखी के तेल का दाम पिछले साल की तुलना में इस बार 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बीते साल 15 अगस्त को दाम 159 रुपये था। आज यह 191.16 रुपये के स्तर पर है। मूंगफली की बात करें तो यहां भी कीमतों में तेज इजाफा देखने को मिल रहा है। इसका लेटेस्ट रेट 205.39 रुपये है। पिछले साल आज के दिन ही 185.62 रुपये दाम था। कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।


    दिल्ली में सब्जियों का क्या है रेट

    – आलू का दाम – 23 रुपये प्रति किलोग्राम
    – प्याज का दाम – 45 रुपये प्रति किलोग्राम
    – टमाटर का रेट – 45 रुपये प्रति किलोग्राम

  • LPG e-KYC की 16 अगस्त आखिरी डेडलाइन, रात 12 बजे के बाद बुकिंग और सब्सिडी पर पड़ेगा असर

    LPG e-KYC की 16 अगस्त आखिरी डेडलाइन, रात 12 बजे के बाद बुकिंग और सब्सिडी पर पड़ेगा असर


    नई दिल्‍ली । अगर घर में खाना बनाने के लिए LPG गैस सिलेंडर (LPG Gas Cylinder) का इस्तेमाल करते हैं, तो 16 अगस्त की तारीख बेहद खास है. आज अगर रविवार की छुट्टी मनाने और आराम के चक्कर में पड़कर आप कुकिंग गैस (Cooking gas) से e KYC का काम भूलते हैं, तो सिलेंडर की कीमत आपके लिए बढ़ जाएगी. सिर्फ कीमत ही नहीं, LPG गैस मिलने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.

    16 अगस्त LPG सिलेंडर के आधार बेस्ड e-KYC की डेडलाइन
    तेल कंपनियों ने गैस सिलेंडर की सप्लाई में किसी भी तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए घरेलू LPG सिलेंडर के लिए आधार बेस्ड e-KYC को अनिवार्य कर दिया है. 16 अगस्त की रात 12 बजे के बाद e-KYC नहीं कराने वाले ग्राहकों की मुश्किल बढ़ जाएगी. ग्राहकों को सिलेंडर के लिए ज्यादा दाम चुकाने पड़ सकते हैं.

    16 अगस्त की डेडलाइन मिस हुई, तो क्या होगा?
    अगर आप आज भी सिलेंडर की ई-केवाईसी नहीं करवाते हैं, तो आपके एलपीजी की सप्लाई अटक सकती है. गैस एजेंसियां आपकी बुकिंग रोक सकती हैं. गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी रुक जाएगी. उज्ज्वला कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए भी बिना ई-केवाईसी वाले कनेक्शन पर सब्सिडी बंद हो सकती है.

    कैसे करवा सकते हैं LPG की e-KYC ?
    एलपीजी सिलेंडर को आधार से लिंक करते हुए उसकी केवाईसी बेहद आसान है. आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीके से इसे पूरा कर सकते हैं.

    ऑनलाइन प्रोसेस: आपका कनेक्शन जिस गैस कंपनी का है, जैसे कि Indane, HP, Bharat Gas उसका ऐप डाउनलोड कर कुछ मिनटों में केवाईसी को पूरा किया जा सकता है. गैंस कंपनी के ऐप पर जाकर e-KYC का ऑप्शन चुनें. गैस कनेक्शन नबंर भरे. आधार नंबर भरने के बाद फेस ऑथेंटिफिकेशन के लिए Aadhaar FACE RD पर जाएं. ऐप के सामने के सामने अपना चेहरा स्कैन करें. स्कैनिंग पूरा होने के बाद सारी डिलीट सब्सिट करें. ओटीपी भरने के साथ ही आपका ई-केवाईसी पूरा हो जाएगा.

    ऑफलाइन प्रोसेस: आप ऑनलाइन नहीं कर पा रहे हैं, तो अपने LPG डिस्ट्रीब्यूटर या गैस एजेंसी में जाकर केवाईसी फॉर्म भरकर इसे पूरा कर सकते हैं. अगर गैस एजेंसी भी नहीं जाना चाहते हैं, तो गैस सिलेंडर लेकर आने वाले डिलीवरी ब्वॉय की मदद लें. डिलीवरी ब्वॉय के पास उपलब्ध आधिकारिक डिवाइस के जरिए भी बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन कराया जा सकता है.

    LPG eKYC से जुड़े मन में उठ रहे इन सवालों के जवाब जानिए…

    सवाल: क्या LPG ई-केवाईसी के लिए पैसे देने होंगे?
    जवाब: बिल्कुल भी नहीं, ई-केवाईसी पूरी तरह से निशुल्क है. गैस एजेंसी, डिलीवरी ब्वॉय कोई भी केवाईसी के लिए आपसे पैसे नहीं मांग सकता है.

    सवाल: अगर e-KYC नहीं कराया, तो क्या गैस कनेक्शन कैंसिल हो जाएगा?
    जवाब: नहीं,डेडलाइन खत्म होने के बाद भी अगर आपने ई-केवाईसी को पूरा नहीं करते हैं, तो कनेक्शन रद्द नहीं होगा, लेकिन सिलेंडर की डिलीवरी मिलने में दिक्कत हो सकती है. गैस सिलेंडर पर मिलने वाली छूट खत्म हो सकती है.

    सवाल: अगर ई-केवाईसी नहीं करवाया, तो क्या सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए जाएंगे?
    जवाब: गैस एजेंसियों की ओर से साझा किए गए पोस्ट के मुताबिक ई-केवाईसी न होने पर ग्राहकों को घरेलू के बजाय कॉमर्शियल दरों पर सिलेंडर खरीदना पड़ सकता है. मतलब ये कि अगर आप दिल्ली में रहते हैं और 16 अगस्त तक अपने घरेलू सिलेंडर कनेक्शन का केवाईसी पूरा नहीं करते हैं, तो 942 रुपये के बजाए आपको 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम यानी करीब 2738 रुपये में सिलेंडर लेना होगा.

  • पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स हुआ शून्य ….., डीजल और एटीएफ पर भी राहत…. आमजन को No Relief

    पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स हुआ शून्य ….., डीजल और एटीएफ पर भी राहत…. आमजन को No Relief


    नई दिल्ली।
    भारत सरकार (Government of India) ने शनिवार से पेट्रोल, डीजल (Petrol, Diesel) और हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले तेल एविएशन टर्बाइन फ्यूल (Aviation Turbine Fuel) यानी ATF के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall tax) को कम कर दिया है। यह जानकारी सरकार के एक आधिकारिक आदेश से मिली है। इस आदेश के अनुसार, डीजल निर्यात पर शुल्क को घटाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर से 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, पेट्रोल निर्यात पर पहले 3.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लगता था, अब इसे पूरी तरह से शून्य कर दिया गया है। एटीएफ के निर्यात पर भी शुल्क में कमी की गई है, जो 22 रुपये से घटकर 19.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है।


    आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

    टैक्स में इस कमी से आम जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस कटौती से निर्यातक कंपनियों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों पर नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में भी संशोधन जारी रह सकते हैं।

    गौरतलब है कि भारत ने जुलाई 2022 में पहली बार विंडफॉल टैक्स लागू किया था, ताकि तेल की बढ़ती कीमतों से होने वाले असाधारण मुनाफे पर नियंत्रण पाया जा सके। दो साल बाद इसे समाप्त कर दिया गया था, लेकिन मार्च 2026 में अमेरिका-इजराइल युद्ध के कारण ईरान पर हमले के बाद तेल की कीमतें फिर से बढ़ गईं, जिसके चलते इस कर को दोबारा लागू करना पड़ा।

    अभी भारत हर दो सप्ताह में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर इन निर्यात शुल्कों में संशोधन करता है। लेटेस्ट रेट के अनुसार, 1 अमेरिकी डॉलर लगभग 95.44 भारतीय रुपये के बराबर है।


    पिछली बार बढ़ा था विंडफॉल टैक्स

    पिछली बार 3 अगस्त को पेट्रोल निर्यात पर शुल्क 2.5 रुपये से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। डीजल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 15.5 रुपये से बढ़कर 25.5 रुपये प्रति लीटर हो गया था। इसमें लगभग 10 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई। वहीं, एटीएफ के निर्यात पर शुल्क 14.5 रुपये से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था।


    जुलाई में डीजल-एटीएफ पर टैक्स बढ़ा, पेट्रोल का घटा

    गौरतलब है कि इससे पहले 16 जुलाई को हुई समीक्षा में सरकार ने डीजल और एटीएफ के शुल्क बढ़ाए थे, जबकि पेट्रोल पर शुल्क घटाया था। उस समय डीजल 8.5 से बढ़कर 15.5 रुपये, एटीएफ 7.5 से बढ़कर 14.5 रुपये, और पेट्रोल 4 रुपये से घटकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। इससे पहले की समीक्षा में पेट्रोल पर शुल्क 1.5 से बढ़ाकर 4 रुपये, डीजल 14 से घटाकर 8.5 रुपये और एटीएफ 12.5 से घटाकर 7.5 रुपये किया गया था।


    अप्रैल का क्या रहा हाल

    अगर हालिया बदलावों पर नजर डालें तो 30 अप्रैल को डीजल पर 23 रुपये और एटीएफ पर 33 रुपये का शुल्क लगाया गया था, जबकि पेट्रोल पर शून्य था। वहीं, 30 जून को पेट्रोल पर 4 रुपये, डीजल पर 8.5 रुपये और एटीएफ पर 7.5 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया था।

  • आरबीआई के नियामकीय सुधारों से भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में 50 अरब डॉलर तक पूंजी आने की संभावना, रिपोर्ट में बड़ा अनुमान

    आरबीआई के नियामकीय सुधारों से भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में 50 अरब डॉलर तक पूंजी आने की संभावना, रिपोर्ट में बड़ा अनुमान


    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से हाल के महीनों में किए गए तरलता समर्थन उपायों और नियामकीय सुधारों से देश के बैंकिंग क्षेत्र में बड़े पूंजी प्रवाह की संभावना जताई गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इन पहलों के चलते भारतीय बैंकिंग प्रणाली में करीब 50 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त पूंजी आ सकती है। इससे बैंकों की पूंजीगत स्थिति मजबूत होने के साथ विदेशी मुद्रा तरलता में भी सुधार की उम्मीद है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई की एफसीएनआर बी जमा योजना के तहत भारतीय बैंक अब तक 36.7 अरब डॉलर जुटा चुके हैं। उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, विशेष सुविधा की निर्धारित समयसीमा समाप्त होने से पहले यह राशि बढ़कर करीब 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। इससे बैंकों को विदेशी मुद्रा संसाधनों का अतिरिक्त आधार मिलेगा और वित्तीय प्रणाली की मजबूती बढ़ सकती है।

    भारतीय बैंकिंग क्षेत्र फिलहाल व्यापक नियामकीय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। आरबीआई ने तरलता प्रबंधन, ऋण जोखिम, पूंजी पर्याप्तता, ग्राहक संरक्षण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से जुड़े गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में सुधारों को आगे बढ़ाया है। इनका उद्देश्य बैंकिंग व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, मजबूत और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना है।

    विदेशी मुद्रा जमा को बढ़ावा देने के लिए एफसीएनआर बी स्वैप सुविधा और अनिवासी भारतीयों की जमा दरों से संबंधित अस्थायी सीमा हटाने जैसे कदम भी उठाए गए हैं। इन उपायों से विदेशी जमाकर्ताओं के लिए भारतीय बैंकों में जमा करना अधिक आकर्षक हुआ है। साथ ही हेजिंग लागत में कमी आने से बैंकों को विदेशी मुद्रा संसाधन जुटाने में मदद मिली है।

    बैंकिंग क्षेत्र में हो रहे बदलाव केवल पूंजी जुटाने तक सीमित नहीं हैं। नियामकीय ढांचे में ऋण जोखिम और पूंजी प्रबंधन को लेकर भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किए जा रहे हैं। अपेक्षित क्रेडिट नुकसान यानी ईसीएल ढांचे और संशोधित बेसल तीन क्रेडिट रिस्क मानदंडों की दिशा में बढ़ना बैंकिंग क्षेत्र के लिए अहम बदलाव माना जा रहा है।

    इन प्रावधानों का असर बैंकों की ऋण मूल्य निर्धारण रणनीति पर पड़ सकता है। बैंकों को यह आकलन करना होगा कि किसी ऋण के लिए कितनी पूंजी रखी जाए, जोखिम के अनुरूप ब्याज दर कैसे तय की जाए और अलग-अलग पोर्टफोलियो में जोखिम का प्रबंधन किस तरह किया जाए। इससे बैंकिंग कारोबार की लागत, पूंजी आवंटन और लाभप्रदता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

    तकनीकी क्षेत्र में भी नियामकीय अपेक्षाएं बढ़ रही हैं। एआई गवर्नेंस से जुड़े नियमों का उद्देश्य बैंकों में नई तकनीकों के इस्तेमाल के दौरान जोखिम, पारदर्शिता और ग्राहक हितों को सुरक्षित रखना है। आने वाले समय में वे बैंक अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकते हैं जो पूंजी नियोजन, जोखिम प्रबंधन और तकनीकी गवर्नेंस में तेजी से बदलाव लागू करेंगे।

    आरबीआई के कदमों का असर भारत के बाहरी क्षेत्र पर भी दिखाई देने की संभावना जताई गई है। एक अन्य अनुमान के अनुसार, देश का पूंजी खाता अधिशेष बढ़कर करीब 108 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा लगभग 2 अरब डॉलर रहा था।

    भुगतान संतुलन को लेकर भी सकारात्मक अनुमान सामने आया है। वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का भुगतान संतुलन करीब 64 अरब डॉलर के अधिशेष में रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2025-26 में 23.6 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 5 अरब डॉलर का घाटा दर्ज किया गया था।

    यदि विदेशी मुद्रा प्रवाह और बैंकिंग क्षेत्र की पूंजी स्थिति में अपेक्षित सुधार होता है, तो इससे वित्तीय प्रणाली की स्थिरता को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, नियामकीय बदलावों का वास्तविक प्रभाव बैंकों की तैयारी, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों और घरेलू ऋण मांग सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।

  • घरेलू रसोई गैस की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं, देशभर में उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली बढ़ोतरी से राहत

    घरेलू रसोई गैस की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं, देशभर में उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली बढ़ोतरी से राहत


    नई दिल्ली ।
    देशभर में रसोई गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 14 अगस्त को राहत की खबर है। सरकारी तेल कंपनियों ने आज घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर के साथ 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी आज स्थिर रखे गए हैं। ऐसे में दिल्ली से पटना और मुंबई से हैदराबाद तक ग्राहकों को आज सिलेंडर के लिए वही कीमत चुकानी होगी जो पहले लागू थी।

    दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर का भाव 2,738 रुपये पर बना हुआ है। मुंबई में घरेलू सिलेंडर 941.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,691.50 रुपये में उपलब्ध है। नोएडा में घरेलू LPG की कीमत 939.50 रुपये, जबकि कमर्शियल सिलेंडर का भाव 2,738 रुपये है।

    जयपुर में घरेलू LPG सिलेंडर के लिए 945.50 रुपये देने होंगे। यहां 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,765.50 रुपये है। हैदराबाद में घरेलू सिलेंडर का भाव 994 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,985 रुपये है। वहीं पटना में घरेलू LPG सिलेंडर 1,031.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3,018 रुपये में मिल रहा है।

    चंडीगढ़ में 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर की कीमत 951.50 रुपये है, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर का भाव 2,760 रुपये है। कोलकाता में घरेलू LPG सिलेंडर 968 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,872.50 रुपये में उपलब्ध है। अलग-अलग शहरों में कीमतों में अंतर स्थानीय करों और अन्य लागतों के कारण देखने को मिलता है।

    महीने की शुरुआत में कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में 192 रुपये की बड़ी कटौती की गई थी। इसके बाद 14 अगस्त को कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। घरेलू LPG की कीमतों को स्थिर रखने से आम परिवारों के मासिक रसोई खर्च पर फिलहाल अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ा है।

    वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच भारत LPG की आपूर्ति को लेकर भी अपनी रणनीति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए भारत अलग-अलग देशों से LPG आपूर्ति हासिल करने पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र या आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता कम करना है।

    अमेरिका से LPG आयात भी भारत की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस वर्ष अगस्त तक अमेरिका से भारत को करीब 3.9 मिलियन टन LPG की आपूर्ति हो चुकी है। भारत 2027 के लिए अमेरिकी LPG की दीर्घकालिक आपूर्ति बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है।

    सरकारी तेल कंपनियां संभावित आपूर्तिकर्ताओं और उनके प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रही हैं। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और LPG की कीमतों, आयात लागत तथा वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर घरेलू और कमर्शियल गैस की कीमतों में बदलाव हो सकता है। फिलहाल 14 अगस्त को देश के प्रमुख शहरों में LPG सिलेंडर के दाम स्थिर हैं और उपभोक्ताओं को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ रहा है।

  • सोने की कीमत में एक दिन में 2800 रुपये की बड़ी गिरावट, 24 कैरेट गोल्ड के भाव में फिर दिखा नरमी का असर

    सोने की कीमत में एक दिन में 2800 रुपये की बड़ी गिरावट, 24 कैरेट गोल्ड के भाव में फिर दिखा नरमी का असर


    नई दिल्ली ।
    सोने और चांदी की कीमतों में पिछले दिनों की तेजी के बाद अब नरमी का दौर देखने को मिल रहा है। दिल्ली के सर्राफा बाजार में 13 अगस्त को सोने के भाव में एक दिन में 2,800 रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। लगातार करीब एक सप्ताह तक तेजी रहने के बाद आई इस गिरावट ने बाजार में खरीदारी करने वाले ग्राहकों का ध्यान खींचा है। चांदी की कीमत में भी गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई और इसके भाव में करीब 6,000 रुपये प्रति किलोग्राम की कमी आई।

    गिरावट के बाद दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 1,57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में इसकी कीमत 1,59,800 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इस तरह एक ही दिन में सोने की कीमत में 2,800 रुपये की कमी आई। लगातार बढ़ रहे भाव के बीच यह गिरावट सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    शुक्रवार को भी सोने की कीमतों में मामूली कमजोरी दिखाई दे रही है। उपलब्ध ताजा भाव के मुताबिक 24 कैरेट सोना 10 रुपये की गिरावट के साथ 1,53,590 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले इसका भाव 1,53,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था। हालांकि एक दिन पहले की बड़ी गिरावट की तुलना में शुक्रवार की कमी काफी मामूली है।

    22 कैरेट सोने की कीमत भी 10 रुपये नीचे आई है। शुक्रवार को 22 कैरेट सोना 1,40,790 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर दर्ज किया गया। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत 1,15,190 रुपये प्रति 10 ग्राम है। इसमें भी पिछले कारोबारी भाव की तुलना में 10 रुपये की मामूली गिरावट दर्ज की गई है।

    सोने के साथ चांदी के भाव में भी नरमी बनी हुई है। शुक्रवार को चांदी की कीमत 10 रुपये प्रति किलोग्राम की मामूली गिरावट के साथ 2,54,900 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई है। इससे पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर थी। यानी एक दिन में मामूली कमी के बावजूद चांदी अब भी काफी ऊंचे भाव पर कारोबार कर रही है।

    वर्तमान भाव के हिसाब से चांदी की कीमत प्रति ग्राम 254.90 रुपये है। वहीं 8 ग्राम चांदी की कीमत 2,039.20 रुपये और 10 ग्राम का भाव 2,549 रुपये है। 100 ग्राम चांदी खरीदने पर इसकी कीमत करीब 25,490 रुपये बैठती है। इन कीमतों में स्थानीय बाजार, टैक्स, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क के कारण वास्तविक खरीद मूल्य अलग हो सकता है।

    सोने की कीमतों में अचानक आई बड़ी गिरावट के बाद अब बाजार की नजर आगे के कारोबार पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल, डॉलर की स्थिति, निवेशकों की मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में लगातार तेजी के बाद आई यह नरमी ग्राहकों को कुछ राहत दे सकती है, लेकिन खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार का ताजा भाव और लागू शुल्क जरूर जांचना जरूरी है।