Category: Economy

  • RBI ने 6 माह में भारत में शिफ्ट किया 104 टन सोना…. जानें विदेशी मुद्रा भंडार का हाल

    RBI ने 6 माह में भारत में शिफ्ट किया 104 टन सोना…. जानें विदेशी मुद्रा भंडार का हाल


    नई दिल्ली।
    भारत (India) के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India- RBI) ने पिछले छह महीनों में अपने सोने के भंडार का बड़ा हिस्सा देश के भीतर शिफ्ट किया है, जिससे गोल्ड की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ी है।


    6 महीने में 104 टन सोना देश में शिफ्ट

    आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच करीब 104.23 मीट्रिक टन सोना विदेश से भारत लाया गया। इसके साथ ही देश में रखा गया कुल सोना बढ़कर 290.37 मीट्रिक टन हो गया है। हालांकि, कुल गोल्ड रिजर्व में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। मार्च 2026 तक RBI के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना है, जो सितंबर 2025 के 880.18 टन से थोड़ा ही ज्यादा है।

    विदेश में अभी भी कितना सोना रखा है
    आरबीआई अभी भी अपने सोने का एक बड़ा हिस्सा विदेश में सुरक्षित रखता है। करीब 197.67 मीट्रिक टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटेलमेंट्स (BIS) के पास सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा 2.80 टन सोना गोल्ड डिपॉजिट के रूप में है।


    गोल्ड की हिस्सेदारी में तेज बढ़ोतरी

    सोने की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ा है।मार्च 2026 तक फॉरेक्स रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़कर 16.7% हो गई, जो छह महीने पहले 13.92% थी। यह दिखाता है कि RBI धीरे-धीरे अपने रिजर्व में गोल्ड का महत्व बढ़ा रहा है।


    विदेशी मुद्रा भंडार का हाल

    भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA) का बड़ा हिस्सा है। कुल विदेशी मुद्रा 552.28 अरब डॉलर है। इसमें से 465.61 अरब डॉलर सिक्योरिटीज में निवेश है। 46.83 अरब डॉलर अन्य केंद्रीय बैंकों और BIS में जमा है। 39.84 अरब डॉलर विदेशी कमर्शियल बैंकों में जमा है।

    रणनीति में क्या बदलाव दिख रहा: रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि RBI धीरे-धीरे अपनी रणनीति बदल रहा है। सिक्योरिटीज और विदेशी बैंकों में जमा राशि थोड़ी घटाकर, अन्य केंद्रीय बैंकों और BIS में जमा बढ़ाई गई है।


    क्या है इसका मतलब

    विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम वैश्विक अनिश्चितता के बीच सुरक्षा बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए RBI अपने रिजर्व को ज्यादा स्थिर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

  • 4 साल के उच्च स्तर पर पहुंचा क्रूड…. ईरान युद्ध चरम पर था तब भी इतने नहीं बढ़े थे दाम

    4 साल के उच्च स्तर पर पहुंचा क्रूड…. ईरान युद्ध चरम पर था तब भी इतने नहीं बढ़े थे दाम


    तेहरान ।
    ईरान युद्ध (Iran War) जब चरम पर था, तब क्रूड (Crude) ने इतनी बड़ी छलांग नहीं लगाई थी। अब जब बातचीत की कोशिशें दिख रही हैं और युद्ध की रफ्तार धीमी हुई है, तब ब्रेंट क्रूड (Brent crude) उछलकर चार साल के उच्च स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। यह विरोधाभास नहीं है। तेल बाजार युद्ध की आवाज नहीं, आपूर्ति की सांस सुनता है।

    दरअसल, एक्सिओस की एक रिपोर्ट (Axios reports) आने के बाद बृहस्पतिवार को कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 126.41 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जो 9 मार्च, 2022 के बाद इसका उच्चतम स्तर है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बृहस्पतिवार को ईरान पर सैन्य हमलों की एक शृंखला की योजनाओं के बारे में जानकारी दी जानी है। ऐसा इस उम्मीद में किया जा रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए वापस लौट आएगा। ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका के इस रुख से संघर्ष और बढ़ सकता है, जिससे क्रूड आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट आ सकती है। 

    बाद में बिना किसी स्पष्ट कारण के ब्रेंट क्रूड में गिरावट आई और कीमतें 3.5 फीसदी गिरकर 113.89 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गईं। तेल ब्रोकर पीवीएम के तमास वर्गा ने कहा, क्रूड में यह गिरावट किसी खास घटना से जुड़ी नहीं लगती, बल्कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से बाजार में बढ़ी अस्थिरता को दर्शाती है। यह बस ट्रंप की दुनिया में ट्रेडिंग के अप्रत्याशित स्वभाव को संक्षेप में बताती है।


    डर ही नहीं बैरल भी कम

    बाजार में सिर्फ डर नहीं, असल में बैरल भी कम हैं। आईईए के आंकड़े बताते हैं, मार्च में वैश्विक तेल भंडार 8.5 करोड़ बैरल घटा है। खाड़ी के बाहर भंडार में 20.5 करोड़ बैरल की गिरावट आई। समुद्र में चल रहा तेल भी घटा है। ऑयल ऑन वाटर 10.7 करोड़ बैरल कम हुआ, क्योंकि होर्मुज के बंद होने से ट्रांजिट में मौजूद तेल 18.1 करोड़ बैरल घट गया।


    उबाल की असली वजह होर्मुज

    तेल में उबाल की असल वजह है होर्मुज। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, युद्ध से पहले होर्मुज से रोज 2 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइंड उत्पाद निकलते थे। अप्रैल के शुरू में यह घटकर सिर्फ 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। वैकल्पिक रास्तों से निर्यात जरूर बढ़कर 72 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंचा, लेकिन कुल निर्यात नुकसान अब भी 1.3 करोड़ बैरल प्रतिदिन से ज्यादा है।

    केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया कहते हैं, यही वह आंकड़ा है, जिसने बाजार को बेचैन किया है। युद्ध रुक भी जाए, तो जहाज तुरंत नहीं चलेंगे। बीमा, रूट, बंदरगाह, लोडिंग और रिफाइनरी आपूर्ति को सामान्य होने में समय लगेगा। यही बात तेल के बाजार को परेशान कर रही है।


    आपूर्ति का प्रभावित होना भी बड़ी वजह

    अर्थवृक्ष फाइनेंशियल सर्विसेज के संस्थापक रविंद्र राव ने बताया, आपूर्ति प्रभावित होने से भी क्रूड में मजबूती दिख रही है। उनका कहना है कि ट्रंप ने साफ कहा है कि जब तक ईरान परमाणु समझौता नहीं करता, जब तक उस पर नाकेबंदी जारी रहेगी, जिससे तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जब बाजार को पता है कि तेल अभी नहीं मिल रहा, तो जो कॉन्ट्रैक्ट आज डिलीवरी का है, वो सबसे ज्यादा महंगा हो जाता है। रिफाइनरी और ट्रेडर्स किसी भी दाम पर खरीदने को तैयार हो जाते हैं।

  • कमर्शियल LPG महंगी: 993 रुपये की बढ़ोतरी, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत जारी

    कमर्शियल LPG महंगी: 993 रुपये की बढ़ोतरी, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत जारी


    नई दिल्ली। देश में रसोई गैस की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तेल विपणन कंपनियों की ओर से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले के बाद कारोबारियों और व्यावसायिक संस्थानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। हालांकि, आम घरेलू उपभोक्ताओं को इस बार राहत दी गई है और उनके सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    राजधानी New Delhi में अब 19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 3,071.5 रुपये में उपलब्ध होगा। यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में आई तेजी के कारण की गई है।

    तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं, जिनकी संख्या देश में करीब 33 करोड़ है, उनके लिए एलपीजी सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई हैं। इसका सीधा फायदा आम परिवारों को मिलेगा, जिन पर फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

    यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का असर सीधे गैस और ईंधन बाजार पर पड़ रहा है। इससे पहले भी कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों की लागत लगातार बढ़ रही है।

    सरकारी तेल कंपनियों ने यह भी बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम जनता को राहत मिली है। इसके अलावा एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें भी स्थिर रखी गई हैं ताकि हवाई यात्रा की लागत में अचानक बढ़ोतरी न हो।

    वहीं सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगाए गए शुल्कों में भी संशोधन किया है, ताकि घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके। डीजल और एविएशन फ्यूल पर अलग-अलग दरों पर शुल्क लागू किया गया है, जबकि पेट्रोल पर निर्यात शुल्क शून्य रखा गया है।

    कुल मिलाकर, यह बदलाव एक तरफ व्यापारिक क्षेत्र के लिए चिंता बढ़ाने वाला है, तो दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में स्थिरता आने तक ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

  • मई की शुरुआत में झटका और राहत साथ-साथ: LPG महंगा, पेट्रोल-डीजल स्थिर, सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव

    मई की शुरुआत में झटका और राहत साथ-साथ: LPG महंगा, पेट्रोल-डीजल स्थिर, सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव


    नई दिल्ली। मई 2026 की शुरुआत आम जनता और कारोबारियों के लिए मिली-जुली खबर लेकर आई है। जहां एक ओर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी ने झटका दिया है। साथ ही, सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट और चांदी में लगातार तीसरे दिन कमजोरी देखने को मिली है।
    देश की राजधानी New Delhi में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद तेल कंपनियों ने आम जनता को राहत देते हुए ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। Mumbai, Kolkata और Chennai जैसे प्रमुख महानगरों में भी दाम जस के तस बने हुए हैं।
    हालांकि, कमर्शियल उपयोग करने वालों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹993 की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में इसकी कीमत ₹3,071.50 तक पहुंच गई है। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है। राहत की बात यह है कि घरेलू 14.2 किलो एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम घरों पर फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ा है।
    सर्राफा बाजार की बात करें तो सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली में 24 कैरेट सोना ₹1,50,820 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,38,260 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। पिछले कुछ दिनों में सोने की कीमतों में नरमी का रुख बना हुआ है। वहीं चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली है और यह ₹2,49,900 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है।
    विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, खासकर Iran और United States के बीच हालात, बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। इसका असर कच्चे तेल से लेकर सोना-चांदी तक सभी कमोडिटी पर देखने को मिल रहा है।
    वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs का अनुमान है कि आने वाले महीनों में सोने की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीद और अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित कटौती के चलते साल के अंत तक सोना ₹1.63 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। हालांकि, अल्पकाल में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई गई है।
    कुल मिलाकर, जहां ईंधन की स्थिर कीमतों ने आम जनता को राहत दी है, वहीं कमर्शियल एलपीजी की बढ़ी कीमतों से व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। सोना-चांदी में जारी उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत दे रहा है।

  • मजबूत घरेलू खपत और बैंकिंग सिस्टम ने वैश्विक झटकों को किया बेअसर।

    मजबूत घरेलू खपत और बैंकिंग सिस्टम ने वैश्विक झटकों को किया बेअसर।

    नई दिल्ली । दुनिया भर में छाई आर्थिक अनिश्चितता और विशेष रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था एक सुरक्षित और मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में पैदा हुई बड़ी बाधाओं के बावजूद भारत की आंतरिक मजबूती इसके बचाव में सबसे बड़ी ढाल बनी हुई है। रिपोर्ट यह रेखांकित करती है कि देश की मजबूत घरेलू मांग, प्रभावी सरकारी निवेश और एक बेहद लचीली वित्तीय प्रणाली ने मिलकर अर्थव्यवस्था को एक ऐसा सुरक्षा कवच प्रदान किया है, जो बाहरी झटकों को सहने में पूरी तरह सक्षम है।

    बाजार के वर्तमान आंकड़ों पर नजर डालें तो खपत का स्तर उम्मीद से कहीं बेहतर है। मार्च महीने के दौरान वाहनों और ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री में हुई बढ़ोतरी इस बात का प्रमाण है कि देश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मांग का पहिया तेजी से घूम रहा है। हालांकि, समीक्षा में इस बात को लेकर आगाह भी किया गया है कि भविष्य की आर्थिक दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनपुट लागत और आपूर्ति श्रृंखला पर कितना दबाव रहता है। उम्मीद जताई गई है कि साल 2026 के उत्तरार्ध तक मध्य पूर्व की स्थितियों में सुधार देखने को मिल सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार को राहत मिलेगी।

    चुनौतियों के मोर्चे पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसके राजकोषीय प्रभाव पड़ना तय है। इससे न केवल केंद्र बल्कि राज्यों की राजस्व प्राप्ति और खर्च करने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

    ऊर्जा और उर्वरक की आपूर्ति में संभावित अनिश्चितता मुद्रास्फीति (महंगाई) और व्यापार घाटे को बढ़ा सकती है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत का व्यापार घाटा पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़कर 333.2 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, और यह प्रवृत्ति अगले वित्त वर्ष में भी जारी रहने की संभावना है। इसके बावजूद, सरकार ने ‘आर्थिक स्थिरीकरण कोष’ जैसी रणनीतियों के माध्यम से किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त राजकोषीय गुंजाइश बना रखी है।

    आर्थिक विकास की इस गति को भविष्य में भी बनाए रखने के लिए सरकार अब नई तकनीकों और कौशल विकास पर दांव लगा रही है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और टिकाऊ व्यापार कौशल में निपुण बनाकर घरेलू विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।

    इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत के निर्यात की हिस्सेदारी भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सावधानीपूर्ण नीतिगत फैसलों और आंतरिक मजबूती के दम पर भारत वैश्विक संकटों के बीच भी अपनी विकास दर को सुरक्षित रखने में कामयाब रहेगा।

  • अदाणी पोर्ट्स का रिकॉर्ड प्रदर्शन, 50 करोड़ टन कार्गो के साथ आय और लाभ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी

    अदाणी पोर्ट्स का रिकॉर्ड प्रदर्शन, 50 करोड़ टन कार्गो के साथ आय और लाभ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी

    नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2026 अदाणी पोर्ट्स के लिए मजबूत प्रदर्शन और विस्तार का वर्ष साबित हुआ है, जहां कंपनी ने अपने मुनाफे और आय दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है। इस दौरान कंपनी ने न केवल वित्तीय रूप से मजबूती दिखाई, बल्कि परिचालन स्तर पर भी कई नए रिकॉर्ड स्थापित किए।

    कंपनी का शुद्ध लाभ इस वित्त वर्ष में 16 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12,782 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं, कुल आय में भी उल्लेखनीय उछाल देखा गया, जो 25 प्रतिशत बढ़कर 38,736 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि कंपनी ने अपने विभिन्न कारोबार क्षेत्रों में संतुलित और प्रभावी रणनीति अपनाई है।

    इस दौरान परिचालन लाभ यानी एबिटा में भी 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो 22,851 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आंकड़ा कंपनी की मजबूत कार्यप्रणाली और लागत नियंत्रण को दर्शाता है।

    परिचालन उपलब्धियों की बात करें तो कंपनी ने इस वर्ष एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया। एक ही वर्ष में 50 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक कार्गो को संभालना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, जिसने कंपनी को देश के अग्रणी एकीकृत परिवहन ऑपरेटर के रूप में स्थापित किया है।

    कंपनी के लॉजिस्टिक्स कारोबार ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई। इस सेगमेंट में 55 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई सेवाओं के विस्तार के कारण संभव हो पाई। वहीं समुद्री कारोबार में 134 प्रतिशत की तेज वृद्धि ने कंपनी के कुल प्रदर्शन को और मजबूती दी। बेड़े में जहाजों की संख्या बढ़ने से इस क्षेत्र में तेजी आई है।

    अंतरराष्ट्रीय संचालन से भी कंपनी को सकारात्मक परिणाम मिले हैं। विदेशी बंदरगाहों से प्राप्त राजस्व में 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो वैश्विक स्तर पर कंपनी के विस्तार को दर्शाता है।

    वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में भी कंपनी का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। इस अवधि में आय में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मुनाफा 9 प्रतिशत बढ़कर 3,308 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि वर्ष के अंत तक भी कंपनी की विकास दर बनी रही।

    भविष्य की योजनाओं को लेकर कंपनी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में वह अपनी क्षमता और दायरे को और बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने, सेवाओं का विस्तार करने और निवेश को संतुलित बनाए रखने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

  • कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता-बिकवाली के दबाव में बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट

    कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता-बिकवाली के दबाव में बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर देखने को मिला, जहां कारोबारी सत्र के अंत में प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना रहा, लेकिन अंततः निवेशकों की सतर्कता और बिकवाली के दबाव ने बाजार को लाल निशान में पहुंचा दिया।

    कारोबार की शुरुआत हल्की मजबूती के साथ हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बाजार पर दबाव बढ़ता गया। निवेशकों ने जोखिम लेने के बजाय मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिसके चलते सूचकांक धीरे-धीरे नीचे आते गए। दिन के अंत तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 0.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो यह दर्शाती है कि बाजार का मूड फिलहाल कमजोर बना हुआ है।

    इस गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम एक प्रमुख कारण रहा। वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे आर्थिक अनिश्चितता बढ़ गई। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई और उत्पादन लागत पर पड़ता है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाते हुए बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी।

    बाजार के विभिन्न सेक्टरों में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला। धातु, बैंकिंग, रियल एस्टेट और उपभोक्ता क्षेत्र से जुड़े शेयरों में खासा दबाव रहा। इन क्षेत्रों में आई गिरावट यह संकेत देती है कि व्यापक स्तर पर निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। हालांकि कुछ चुनिंदा सेक्टरों में हल्की बढ़त देखने को मिली, लेकिन वह समग्र गिरावट को संतुलित करने के लिए पर्याप्त नहीं रही।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, जो यह दर्शाता है कि बाजार का दबाव केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा। व्यापक बाजार में कमजोरी का मतलब है कि निवेशकों ने सभी स्तरों पर सतर्कता अपनाई है और जोखिम कम करने की कोशिश की है।

    व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो कुछ कंपनियों के शेयरों में मजबूती जरूर देखने को मिली, लेकिन गिरावट वाले शेयरों की संख्या ज्यादा रही। यह असंतुलन बाजार की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है, जहां सकारात्मक संकेत सीमित हैं और नकारात्मक कारक हावी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्थिति में स्थिरता नहीं आती और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में नहीं आतीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता और सोच-समझकर फैसले लेने का है।

  • होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी से ग्लोबल मार्केट में उथल-पुथल …. कच्चा तेल 120 डॉलर के पार

    होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी से ग्लोबल मार्केट में उथल-पुथल …. कच्चा तेल 120 डॉलर के पार


    तेहरान।
    ग्लोबल ऑयल मार्केट (Global Oil Market) में उथल-पुथल जारी है। अमेरिका के ईरान के खिलाफ सख्त रुख और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जारी नौसैनिक नाकाबंदी (Naval blockade) के चलते कच्चे तेल के दाम (Crude Oil Price) लगातार बढ़ रहे हैं। गुरुवार को कीमतों में और इजाफा देखने को मिला, जबकि एक दिन पहले ही इनमें करीब 7 प्रतिशत की उछाल आई थी।


    ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर के पार

    ब्लूमबर्ग के मुताबिक इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड का जून कॉन्ट्रैक्ट 120.08 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद स्तर से 1.74 प्रतिशत अधिक है। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (Nymex) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) का जून कॉन्ट्रैक्ट 0.55 प्रतिशत चढ़कर 107.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।


    ट्रंप का बयान: ‘सूअर की तरह घुट रहे हैं ईरान’

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में साफ किया कि जब तक ईरान के साथ परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी नहीं हटाई जाएगी। उन्होंने कहा, “यह नाकाबंदी बमबारी से कहीं ज्यादा कारगर है। वे (ईरान) सूअर की तरह घुट रहे हैं। उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।”


    ईरान का प्रस्ताव भी खारिज

    इससे पहले ईरान ने परमाणु वार्ता को टालते हुए होर्मुज को फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन ट्रंप इससे खुश नहीं थे क्योंकि इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा नहीं उठाया गया था। शांति वार्ता ठप होने और नाकाबंदी जारी रहने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चरमरा गई है। ध्यान रहे कि होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार की आवाजाही होती है।

    भारत पर क्या असर पड़ रहा है?
    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में इस नाकाबंदी ने देश के लिए एलपीजी, एलएनजी और क्रूड ऑयल की सप्लाई बुरी तरह बाधित की है। महंगे कच्चे तेल का सीधा असर आम नागरिक की जेब पर भी पड़ने के आसार प्रबल होते जा रहे हैं, हालांकि पेट्रोल-डीजल के रिटेल दाम अभी स्थिर हैं।


    इक्रा की चेतावनी: इन सेक्टरों पर दबाव

    रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बुधवार को अनुमान जताया कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में कच्चे माल की कीमतों में दबाव और सप्लाई कमी के चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs, फर्टीलाइजर सेक्टर, केमिकल इंडस्ट्री, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन क्षेत्र के मुनाफे पर असर पड़ेगा।


    OMCs का मुनाफा क्यों घट रहा है?

    इक्रा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने बताया कि क्रूड की ऊंची कीमतों के बावजूद पंप पर पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं, जिससे तेल कंपनियों की लाभप्रदता प्रभावित हुई है। हाल ही में एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद भी यह स्थिति बनी हुई है।


    कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर कितना हो रहा नुकसान

    उनके अनुसार, अगर क्रूड 120-125 डॉलर प्रति बैरल पर रहता है और लॉन्ग-टर्म औसत क्रैक स्प्रेड बना रहता है, तो पेट्रोल पर मार्केटिंग मार्जिन लगभग माइनस 14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर माइनस 18 रुपये प्रति लीटर रहने का अनुमान है।


    क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी जारी रहेगी और अमेरिका-ईरान वार्ता में सफलता नहीं मिलती, तब तक तेल की कीमतों में गिरावट की संभावना कम है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है।

  • पांच राज्यों के चुनाव के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं….

    पांच राज्यों के चुनाव के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं….


    नई दिल्ली।
    5 राज्यों के चुनाव के बाद आज पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel Price) के नए रेट जारी हो गए हैं। इस बीच बुरी खबर ये है कि कच्चा तेल (Crude oil) 119 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। आज 30 अप्रैल को सुबह 6 बजे सरकारी ऑयल माार्केटिंग कंपनियों (Government oil marketing companies) इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने फ्यूल के रेट अपडेट कीं। आज के ताजा रेट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। बता दें कि अप्रैल 2022 के शुरू से ही पेट्रोल और डीजल के रिटेल दाम नहीं बदले हैं।


    कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग

    ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 119 डॉलर प्रति बैरल के पार हैं। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा है। जबकि, WTI के भाव 106 डॉलर प्रति बैरल पर हैं।


    क्या कही थी सरकार

    केंद्र सरकार ने उन अटकलों को खारिज कर दिया था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। आज चुनाव के बाद भी तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।


    ₹10 और ₹12.50 की बढ़ोतरी की अफवाह

    बता दें चुनाव बाद पेट्रोल डीजल के रेट में इजाफे को लेकर सोशल मीडिया पर एक आदेश वायरल हो रहा है। इस दावा किया गया है कि आदेश पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमशः ₹10 और ₹12.50 की बढ़ोतरी की गई है।” पीआईबी फैक्ट चेक ने कहा कि भारत सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है।


    भारत में आज कहां मिल रहा सस्ता पेट्रोल

    – पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹82.46 प्रति लीटर
    – ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹90.87 प्रति लीटर
    – सिलवासा, दादरा और नगर हवेली: ₹92.37 प्रति लीटर
    – दमन, दमन और दीव: ₹92.55 प्रति लीटर
    – हरिद्वार, उत्तराखंड: ₹92.78 प्रति लीटर
    – रुद्रपुर, उत्तराखंड: ₹92.94 प्रति लीटर
    – ऊना, हिमाचल प्रदेश: ₹93.27 प्रति लीटर
    – देहरादून, उत्तराखंड: ₹93.35 प्रति लीटर
    – नैनीताल, उत्तराखंड: ₹93.41 प्रति लीटर
    स्रोत: इंडियन ऑयल


    भारत में सस्ता डीजल बेचने वाले शहर

    – पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹78.05 प्रति लीटर
    – ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹80.38 प्रति लीटर
    – जम्मू, जम्मू और कश्मीर: ₹81.32 प्रति लीटर
    – संबा, जम्मू और कश्मीर: ₹81.58 प्रति लीटर
    – कठुआ, जम्मू और कश्मीर: ₹81.97 प्रति लीटर
    – उधमपुर, जम्मू और कश्मीर: ₹82.15 प्रति लीटर
    – चंडीगढ़: ₹82.44 प्रति लीटर
    – राजौरी, जम्मू और कश्मीर: ₹82.64 प्रति लीटर
    स्रोत: इंडियन ऑयल


    पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेकाबू

    कच्चे तेल की कीमतों का असर से भारत के पड़ोसी देश के लोग पेट्रोल-डीजल की महंगाई की मार झेल रहे हैं। पाकिस्तान में 133.56 और चीन में 125.71 रुपये लीटर है। श्रीलंका में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 135.13 रुपये पर पहुंच गई है। नेपाल में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 137.13 रुपये तक पहुंच गई है। बंग्लादेश में भी पेट्रोल 107.78 रुपये लीटर है। जबकि, म्यांमार में 147.25 रुपये। भूटान में पेट्रोल 102.78 रुपये लीटर पर पहुंच गया है।