Category: Economy

  • मई 2026 में बैंक छुट्टियां: 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, RBI कैलेंडर जारी

    मई 2026 में बैंक छुट्टियां: 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, RBI कैलेंडर जारी


    नई दिल्ली| मई 2026 में बैंक से जुड़े काम करने वालों के लिए जरूरी खबर है। Reserve Bank of India की ओर से जारी छुट्टियों की लिस्ट (Banking Holidays List) के मुताबिक इस महीने कुल 12 दिन बैंक बंद रहेंगे। इसमें वीकेंड के अलावा कई बड़े त्योहार भी शामिल हैं, ऐसे में ग्राहकों को पहले से प्लानिंग करना जरूरी होगा।

    12 दिन बंद रहेंगे बैंक, वीकेंड और त्योहारों का असर
    मई महीने में कुल 12 दिन बैंक बंद रहने वाले हैं। इसमें सभी रविवार और दूसरे व चौथे शनिवार की छुट्टियां शामिल हैं। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में स्थानीय त्योहारों और आयोजनों के चलते भी बैंक बंद रहेंगे। इसलिए यह जरूरी है कि ग्राहक अपने शहर के हिसाब से छुट्टियों की लिस्ट जरूर चेक कर लें, ताकि किसी जरूरी काम में परेशानी न हो।

    बुद्ध पूर्णिमा और ईद जैसे त्योहारों पर भी रहेगी छुट्टी
    इस महीने कई अहम त्योहार पड़ रहे हैं, जिनमें Buddha Purnima और Eid al-Adha जैसे मौके शामिल हैं। इन त्योहारों के कारण अलग-अलग राज्यों में बैंक बंद रहेंगे। हालांकि सभी छुट्टियां पूरे देश में लागू नहीं होतीं, कुछ छुट्टियां क्षेत्रीय होती हैं।

    जरूरी काम पहले निपटाएं, ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी चालू
    लगातार छुट्टियों को देखते हुए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने जरूरी बैंकिंग काम पहले ही निपटा लें। कैश निकालने, चेक क्लियरेंस या ब्रांच विजिट से जुड़े काम छुट्टियों से पहले कर लेना बेहतर रहेगा।

    हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं इन दिनों में भी चालू रहेंगी, जिससे ग्राहकों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

  • होर्मुज खुलने की चर्चा से कमोडिटी मार्केट में हलचल…. तेजी से गिरे सोने-चांदी के रेट

    होर्मुज खुलने की चर्चा से कमोडिटी मार्केट में हलचल…. तेजी से गिरे सोने-चांदी के रेट


    नई दिल्‍ली।
    सोने और चांदी के भाव (Gold- Silver Rate) में अचानक से बड़ी गिरावट आई है. भारतीय कमोडिटी मार्केट (Indian Commodity Market) में सोने और चांदी के भाव तेजी से गिरे हैं. शाम के करोबार के दौरान चांदी करीब 7000 रुपये गिर गई. इसी तरह, 10 ग्राम सोने का फ्यूचर रेट भी गिरा है. कमोडिटी मार्केट में सोने-चांदी के भाव में यह गिरावट, ईरान-अमेरिका तनाव (Iran-America tension) और होर्मुज खोलने (Opening of Hormuz) की चर्चा के बीच आई है. ऐसे में यह संकेत दिख रहा है कि ग्‍लोबल मार्केट में कुछ तो हलचल चल रही है।

    मंगलवार की रात करीब 7.45 बजे कमोडिटी मार्केट MCX पर 3 जुलाई फ्यूचर के लिए 1 किलो चांदी की कीमत 2.40 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई थी, जो 6900 रुपये से ज्‍यादा या 3 फीसदी की गिरावट है. इसी तरह, 5 जून फ्यूचर के लिए सोने का भाव भी 1.70 फीसदी या 2500 रुपये टूटकर 1.49 लाख रुपये पर आ गया।


    अचानक क्‍यों आई ये बड़ी गिरावट?

    डॉलर में तेजी देखी गई है, जिस कारण कमोडिटी मार्केट में कीमती धातुओं के दाम गिरे हैं. रुपया डॉलर की तुलना में 94.5 के ऊपर जा पहुंचा है. इसी तरह, ब्रेंट क्रूड ऑयल में भी करीब 3 फीसदी की तेजी देखी जा रही है, जो होमुर्ज पर बढ़ते तनाव का संकेत दे रहा है. हालांकि, रिपोर्ट्स और डोनाल्‍ड ट्रंप का दावा है कि ईरान ने जंग रोकने और होर्मुज खोलने का प्रताव दिया है. यह दावा तब किया जा रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता अभी तक नहीं हो पाई है।

    वहीं कुछ खबरें यह भी दावा कर रही हैं कि अमेरिका और ईरान समुद्र में अपनी ताकत को बढ़ा रहे हैं, जो एक तनाव का संकेत दे रहा है. वहीं एशियाई, भारतीय और अमेरिकी शेयर बाजार में व्‍यापक स्‍तर पर गिरावट दिख रही है.


    इंटरनेशनल गोल्‍ड-सिल्‍वर प्राइस

    अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी सोने और चांदी के भाव में भारी गिरावट आई है. सोना 2.30 फीसदी या 108 डॉलर प्रति औंस गिरकर 4586 डॉलर पर औंस पर आ चुका है. वहीं चांदी की बात करें तो 3.20 फीसदी या 2.5 डॉलर टूटकर 72.6 डॉलर पर औंस पर आ चुका है।


    रिकॉर्ड हाई से कितना सस्‍ता हुआ गोल्‍ड-सिल्‍वर?

    एमसीएक्‍स के मुताबिक, गोल्‍ड का रिकॉर्ड हाई लेवल 2.02 लाख रुपये है, जो अब 53 हजार रुपये गिरकर 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ चुका है. इसी तरह, चांदी का लाइफटाइम हाई लेवल 4.57 लाख रुपये है, जो अब 2.07 लाख रुपये सस्‍ती होकर 2.40 लाख रुपये पर आ चुकी है।

  • मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान

    मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान


    नई दिल्ली। बुधवार सुबह 9:18 बजे भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला। सेंसेक्स 306 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,193 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 88 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,085 पर कारोबार करता नजर आया। वैश्विक संकेतों में सुधार और निवेशकों की मजबूत धारणा के चलते बाजार में शुरुआती खरीदारी हावी रही।

    डिफेंस और ऑटो सेक्टर बने बाजार के स्टार परफॉर्मर

    शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी डिफेंस और ऑटो सेक्टर में देखने को मिली। निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी ऑटो इंडेक्स टॉप गेनर्स में रहे। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑयल एंड गैस, रियल्टी, FMCG, एनर्जी और फार्मा सेक्टर भी मजबूती के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि दूसरी ओर मेटल, फाइनेंशियल सर्विसेज और पीएसई सेक्टर में हल्की गिरावट देखने को मिली, जिससे बाजार में सेक्टोरल मिक्स ट्रेंड बना रहा।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी जारी

    बाजार में सिर्फ लार्जकैप ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 149 अंक यानी 0.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,125 पर पहुंच गया।
    निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 208 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,628 पर कारोबार कर रहा था। इससे साफ है कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में मारुति सुजुकी, आईटीसी, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स, एचयूएल, टीसीएस और एसबीआई जैसे शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। वहीं टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स और एचसीएल टेक में हल्का दबाव देखने को मिला।

    वैश्विक बाजारों और तेल की कीमतों का असर

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यूएई के ओपेक से बाहर होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों पर थोड़ा दबाव देखने को मिला है, हालांकि अमेरिका-ईरान तनाव के कारण तेल अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी है, जिसका फैसला आज रात आने वाला है। यह निर्णय वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुख

    एशियाई बाजारों में भी बुधवार को मजबूती देखने को मिली। शंघाई, हांगकांग, सोल, जकार्ता और बैंकॉक के बाजार हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि जापानी बाजार राष्ट्रीय अवकाश के कारण बंद रहे।

    अमेरिकी बाजारों में कमजोरी

    इसके विपरीत, अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स 0.05 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स 0.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे वैश्विक बाजारों में मिश्रित संकेत देखने को मिले।

    कुल मिलाकर वैश्विक संकेतों और घरेलू खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की है। हालांकि निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेड के फैसले पर है, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकता है।

  • सोना-चांदी में हल्की चमक, फेड के फैसले से पहले बाजार में सतर्कता

    सोना-चांदी में हल्की चमक, फेड के फैसले से पहले बाजार में सतर्कता


    नई दिल्ली | अमेरिकी फेड के अहम फैसले से पहले बुधवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में हल्की तेजी दर्ज की गई। 5 जून 2026 का सोना कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,027 रुपये के मुकाबले 693 रुपये यानी 0.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,50,720 रुपये पर खुला।

    हालांकि शुरुआती तेजी के बाद इसमें हल्का दबाव भी देखने को मिला। सुबह 9:55 बजे तक सोना 19 रुपये यानी 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 1,50,008 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दिनभर के कारोबार में सोने ने 1,49,720 रुपये का निचला स्तर और 1,51,527 रुपये का ऊपरी स्तर छुआ, जिससे यह साफ हुआ कि बाजार फिलहाल किसी बड़े ट्रेंड की बजाय इंतजार की स्थिति में है।

    चांदी में भी सीमित तेजी, निवेशकों की नजर फेड के फैसले पर

    चांदी ने भी बुधवार को हल्की मजबूती दिखाई। 3 जुलाई 2026 का चांदी कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,42,763 रुपये के मुकाबले 826 रुपये यानी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,43,589 रुपये पर खुला।
     दिन के दौरान चांदी 712 रुपये यानी 0.29 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,43,475 रुपये पर कारोबार करती रही। इस दौरान इसका न्यूनतम स्तर 2,42,972 रुपये और अधिकतम स्तर 2,43,835 रुपये दर्ज किया गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी का रुख

    वैश्विक बाजारों में भी सोना और चांदी मजबूती के साथ कारोबार करते दिखे। सोना 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,616 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 0.81 प्रतिशत की तेजी के साथ 73.81 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

    फेड का फैसला बना सबसे बड़ा फैक्टर

    विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की नजर अब पूरी तरह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले पर टिकी है, जो देर रात आने की उम्मीद है। यह फैसला ऐसे समय पर आ रहा है जब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि फेड ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है या भविष्य में बढ़ोतरी के संकेत देता है, तो इसका असर सोने की कीमतों पर नकारात्मक पड़ सकता है और इसमें दबाव बढ़ सकता है।

    एक साल में शानदार रिटर्न, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी ने पिछले एक साल में निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। डॉलर में सोना लगभग 40 प्रतिशत तक चढ़ा है, जबकि चांदी ने करीब 120 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दर्ज किया है। इसी वजह से इनकी मांग और निवेश रुचि लगातार बनी हुई है।

    फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही फेड के फैसले से पहले ‘वेट एंड वॉच’ मोड में हैं। आने वाले समय में अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीति ही इनकी दिशा तय करेगी—तेजी या दबाव, दोनों की संभावनाएं खुली हुई हैं।

  • शेयर बाजार में जोरदार तेजी: सेंसेक्स 358 अंक उछला, निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार

    शेयर बाजार में जोरदार तेजी: सेंसेक्स 358 अंक उछला, निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार


    नई दिल्ली | हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में मजबूत तेजी दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही खरीदारी का दबाव देखने को मिला, जिससे पूरा बाजार सकारात्मक रुख में आ गया।

    BSE Sensex में आज करीब 358 अंकों की तेजी देखने को मिली और यह मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं Nifty 50 भी 101 अंकों की बढ़त के साथ हरे निशान में रहा। इस तेजी ने निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ाया और बाजार में उत्साह का माहौल बना रहा।

    बाजार में खरीदारी का दबदबा

    सुबह से ही बाजार में बैंकिंग, आईटी और एनर्जी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली, जिससे इंडेक्स को सपोर्ट मिला। कई लार्जकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिससे पूरे बाजार का मूड सकारात्मक रहा।

     वैश्विक संकेतों का मिला-जुला असर

    वैश्विक बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। मिडिल ईस्ट में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और तेल बाजार में हलचल ने निवेशकों को सतर्क रखा। इसके बावजूद घरेलू बाजार ने मजबूती दिखाई।

    अमेरिकी बाजारों में हाल की गिरावट जहां Nasdaq Composite और Dow Jones Industrial Average में कमजोरी देखने को मिली उसका भी हल्का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा, लेकिन भारत में इसका प्रभाव सीमित रहा।

    एशियाई बाजारों का रुख

    एशिया के अन्य बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ इंडेक्स में हल्की बढ़त रही, जबकि कुछ में गिरावट दर्ज की गई। जापान के बाजार अवकाश के कारण बंद रहे।

    निवेशकों के लिए संकेत

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी सकारात्मक संकेत है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसलिए निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।

  • पेट्रोल 100 के पार, सोना-चांदी में नरमी-जानिए आज के ताजा भाव

    पेट्रोल 100 के पार, सोना-चांदी में नरमी-जानिए आज के ताजा भाव


    नई दिल्ली |  देशभर में आज 29 अप्रैल को पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन कुछ शहरों में पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों और आम लोगों दोनों की नजर बाजार पर बनी हुई है।

    पेट्रोल-डीजल की कीमतें: कहां कितना रेट?
    तेल कंपनियां हर रोज सुबह 6 बजे नए रेट जारी करती हैं। आज भी कई शहरों में कीमतें स्थिर हैं, लेकिन राज्यों के हिसाब से फर्क देखने को मिल रहा है।

    दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77 | डीजल ₹87.67
    मुंबई: पेट्रोल ₹103.54 | डीजल ₹90.03
    चेन्नई: पेट्रोल ₹100.80 | डीजल ₹92.39
    कोलकाता: पेट्रोल ₹105.45 | डीजल ₹92.02
    बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92 | डीजल ₹90.99
    अमरावती: पेट्रोल ₹110.10 | डीजल ₹97.92
    जयपुर: पेट्रोल ₹104.88 | डीजल ₹90.36
    लखनऊ: पेट्रोल ₹94.65 | डीजल ₹87.76

    क्या चुनाव के बाद बढ़ेंगी कीमतें?
    सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कंपनियों के नुकसान को देखते हुए भविष्य में बढ़ोतरी की अटकलें बनी हुई हैं।

    सोने की कीमत में गिरावट
    देश में सोने के भाव में गिरावट आई है। 18 से लेकर 24 कैरेट तक सभी कैटेगरी में कीमतें नीचे आई हैं।

    दिल्ली: 24 कैरेट: ₹1,51,070 प्रति 10 ग्राम
    22 कैरेट: ₹1,38,490 प्रति 10 ग्राम
    मुंबई/कोलकाता: 24 कैरेट: ₹1,50,920
    22 कैरेट: ₹1,38,340
    चेन्नई: 24 कैरेट: ₹1,53,810
    22 कैरेट: ₹1,40,990
    बेंगलुरु/पुणे: 24 कैरेट: ₹1,50,920
    22 कैरेट: ₹1,38,340

    क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मजबूत डॉलर के कारण सोने-चांदी पर दबाव बना है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक बॉन्ड की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं, जिससे सोने-चांदी की मांग घटती है।

    चांदी भी हुई सस्ती
    चांदी की कीमत में भी गिरावट दर्ज की गई है आज का भाव: ₹2,59,900 प्रति किलोग्राम, अंतरराष्ट्रीय बाजार: $73.18 प्रति औंस, एक तरफ जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं, वहीं सोना और चांदी सस्ते हुए हैं। ऐसे में निवेश करने वालों के लिए यह अच्छा मौका हो सकता है, जबकि आम लोगों को ईंधन की कीमतों में राहत बनी हुई है।

  • 8वां वेतन आयोग: महंगाई के बीच सैलरी बढ़ाने की मांग तेज, जानिए कैसे तय होती है कर्मचारियों की तनख्वाह

    8वां वेतन आयोग: महंगाई के बीच सैलरी बढ़ाने की मांग तेज, जानिए कैसे तय होती है कर्मचारियों की तनख्वाह

    नई दिल्ली| देशभर में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत में लगातार हो रही वृद्धि के कारण अब कर्मचारी सैलरी में बड़े इजाफे की मांग कर रहे हैं। शिक्षक, पोस्टमैन समेत कई वर्गों का कहना है कि मौजूदा वेतन उनकी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है, ऐसे में सरकार को वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव करना चाहिए।

    कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने की है। फिटमेंट फैक्टर वह अहम फॉर्मूला होता है, जिसके जरिए पुरानी बेसिक सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 गुना रखा गया था, लेकिन अब कर्मचारी इसे बढ़ाकर 3.5 गुना या उससे अधिक करने की मांग कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में सीधा बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

    सैलरी तय करने का गणित केवल फिटमेंट फैक्टर तक सीमित नहीं होता। इसके साथ महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे कई भत्ते भी जुड़े होते हैं, जो कुल वेतन को प्रभावित करते हैं। महंगाई भत्ता खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बढ़ती कीमतों के असर को संतुलित करने के लिए दिया जाता है। जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती है, DA में भी वृद्धि की जाती है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलती है।

    इसके अलावा, पे मैट्रिक्स सिस्टम के तहत हर कर्मचारी का एक लेवल तय होता है। इसी लेवल के आधार पर उसकी बेसिक सैलरी और प्रमोशन के बाद होने वाली बढ़ोतरी निर्धारित होती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस बार वेतन तय करते समय परिवार के वास्तविक खर्च को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि सैलरी मौजूदा आर्थिक हालात के अनुरूप हो।

    8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को क्या फायदा मिल सकता है, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि अगर मांगों को माना गया, तो खासकर निचले स्तर के कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उनकी क्रय शक्ति भी बढ़ेगी, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक रूप से पड़ सकता है।

    हालांकि, अंतिम फैसला केंद्र सरकार के हाथ में है और वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल, लाखों कर्मचारियों की नजर इस पर टिकी है कि सरकार उनकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।

  • ग्लोबल टेंशन से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद..

    ग्लोबल टेंशन से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद..

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को निवेशकों के लिए दिन कमजोर साबित हुआ। बाजार खुलने से लेकर बंद होने तक दबाव बना रहा और अंत में प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। दिनभर की ट्रेडिंग में लगातार बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में आ गए।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स में करीब 416 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में ही बाजार की कमजोरी के संकेत मिल गए थे, जो पूरे दिन जारी रहे। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

    इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के चलते निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। तेल की कीमतें 100 डॉलर के आसपास पहुंचने से उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ता है।

    तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ता है, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी कारण निवेशकों ने शेयरों में खरीदारी कम कर दी और बिकवाली का रुख अपनाया।

    सेक्टरवार बात करें तो बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। कई बड़े शेयरों में गिरावट के कारण पूरे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा। हालांकि कुछ एनर्जी और मेटल शेयरों में हल्की खरीदारी जरूर देखने को मिली, लेकिन वह बाजार को संभाल नहीं सकी।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में शुरुआत में स्थिरता दिखी, लेकिन बाद में ये भी दबाव में आ गए। इससे यह साफ हुआ कि केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि व्यापक बाजार भी वैश्विक संकेतों से प्रभावित हुआ है।

    एशियाई बाजारों में भी आज मिश्रित रुख रहा, जहां कुछ बाजारों में गिरावट देखने को मिली और कुछ में हल्की मजबूती रही। वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल के कारण निवेशक फिलहाल सतर्कता बरत रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को सोच-समझकर और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ ही फैसले लेने की सलाह दी जा रही है।

  • फिनटेक सेक्टर में नया ट्रेंड: शुरुआती कंपनियों में गिरावट, बड़े सौदों पर बढ़ा निवेश

    फिनटेक सेक्टर में नया ट्रेंड: शुरुआती कंपनियों में गिरावट, बड़े सौदों पर बढ़ा निवेश

    नई दिल्ली।भारत के फिनटेक सेक्टर की कहानी इस साल की पहली तिमाही में एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंची है। आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में इस सेक्टर में करीब 513 मिलियन डॉलर की फंडिंग दर्ज की गई, जो पिछले साल की तुलना में हल्की बढ़त दिखाती है। हालांकि यह बढ़ोतरी सिर्फ 2 प्रतिशत की रही, लेकिन असली बदलाव फंडिंग के तरीके में देखने को मिला।

    पहले जहां दर्जनों छोटे-बड़े निवेश राउंड होते थे, वहीं अब तस्वीर बदल गई है। इस बार कुल 99 की जगह सिर्फ 45 फंडिंग डील्स हुईं। यानी निवेशक अब कम सौदों में ज्यादा पैसा लगाने की रणनीति अपना रहे हैं। औसतन निवेश राशि भी पहले से काफी बढ़ गई है, जिससे साफ है कि ध्यान अब मजबूत और स्थापित कंपनियों पर ज्यादा है।

    इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण लेट-स्टेज कंपनियां हैं, जहां निवेश 273 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया—जो पिछली तिमाही से दोगुने से भी ज्यादा है। इसके उलट शुरुआती स्टार्टअप्स को मिलने वाली फंडिंग में गिरावट आई है, जो यह दिखाती है कि जोखिम लेने की बजाय अब निवेशक सुरक्षित विकल्प चुन रहे हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि पूरे निवेश का बड़ा हिस्सा सिर्फ एक ही क्षेत्र—ऑनलाइन लेंडिंग—को मिला, जो लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि ऐसे मॉडल ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं जिनकी कमाई पहले से साबित हो चुकी है और जिनमें स्थिरता दिखती है।

    अगर भौगोलिक बदलाव की बात करें तो इस बार मुंबई ने बड़ा उछाल दिखाया है। कुल फंडिंग का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा मुंबई की कंपनियों को मिला, जबकि बेंगलुरु का हिस्सा घटकर करीब 30 प्रतिशत रह गया। पहले तस्वीर इसके उलट थी, जहां बेंगलुरु आगे रहता था।

    इस बदलाव की एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि मुंबई में बैंकिंग, एनबीएफसी और बीमा कंपनियों का मजबूत नेटवर्क मौजूद है, जिससे फिनटेक कंपनियों को तेजी से स्केल करने में मदद मिल रही है।

  • यात्रियों के लिए नई राहत: अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई ट्रेनें शुरू, उत्तर से महाराष्ट्र तक सीधी कनेक्टिविटी

    यात्रियों के लिए नई राहत: अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई ट्रेनें शुरू, उत्तर से महाराष्ट्र तक सीधी कनेक्टिविटी

    नई दिल्ली। भारतीय रेल ने यात्रियों को बड़ी सुविधा देते हुए अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई सेवाओं की शुरुआत की है, जो उत्तर भारत और महाराष्ट्र के बीच यात्रा को अधिक आसान और किफायती बनाएंगी। नई ट्रेन सेवाएं अयोध्या से मुंबई और वाराणसी से पुणे के बीच चलाई जा रही हैं, जिससे लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

    इन ट्रेनों के शुरू होने से लंबे समय से प्रतीक्षित सीधी कनेक्टिविटी अब साकार हो गई है। विशेष रूप से वाराणसी से पुणे तक चलने वाली ट्रेन उत्तर भारत और महाराष्ट्र के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए एक सुविधाजनक विकल्प बनकर उभरेगी। यह ट्रेन अपने मार्ग में कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहराव करेगी, जिससे विभिन्न शहरों के यात्रियों को भी इसका लाभ मिल सकेगा।

    इसी तरह अयोध्या से मुंबई के बीच शुरू की गई ट्रेन धार्मिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। यह सेवा राम मंदिर अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को सरल बनाएगी, वहीं मुंबई जैसे बड़े महानगर तक सीधी पहुंच भी उपलब्ध कराएगी।

    नई सेवाओं के संचालन के साथ रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग, तीर्थ स्थलों की लोकप्रियता और राज्यों के बीच बढ़ते आवागमन को ध्यान में रखा है। इन ट्रेनों के रूट ऐसे चुने गए हैं, जो प्रमुख शहरों और महत्वपूर्ण जंक्शनों को जोड़ते हैं, जिससे यात्रा समय और लागत दोनों में कमी आएगी।

    इस पहल का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। छोटे व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और छात्रों के लिए यह कनेक्टिविटी नई संभावनाएं लेकर आएगी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।