Category: Economy

  • ETF में निवेश का बढ़ता दायरा: सोना-चांदी से आगे बैंकिंग, टेक और ग्लोबल मार्केट में भी मौका

    ETF में निवेश का बढ़ता दायरा: सोना-चांदी से आगे बैंकिंग, टेक और ग्लोबल मार्केट में भी मौका


    नई दिल्ली। कई निवेशक हाल के दिनों में थोड़ा निराश हैं, क्योंकि जब वे देखते हैं कि पिछले एक साल में सोने ने करीब 56% और चांदी ने 155% तक का रिटर्न दिया है, तो उन्हें लगता है कि उन्होंने निवेश का अच्छा मौका गंवा दिया। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश की दुनिया अब केवल सोने-चांदी तक सीमित नहीं रही है। Exchange Traded Fund यानी ईटीएफ आज निवेश का एक ऐसा विकल्प बन चुका है, जिसमें बैंकिंग, आईटी, सरकारी बॉन्ड और यहां तक कि विदेशी बाजारों में भी निवेश का मौका मिलता है। यह निवेशकों के लिए एक तरह की “मल्टी-कुजीन थाली” जैसा बन गया है, जहां अलग-अलग विकल्प मौजूद हैं।

    भारत में पैसिव निवेश को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। इसी का नतीजा है कि वित्त वर्ष 2025-26 में ईटीएफ में निवेश पिछले साल की तुलना में लगभग 94% तक बढ़ गया है।

    सोना-चांदी बने सबसे बड़े आकर्षण
    पिछले साल ईटीएफ निवेश में सबसे ज्यादा पैसा गोल्ड और सिल्वर फंड्स में आया। गोल्ड ईटीएफ में करीब 350% और सिल्वर ईटीएफ में लगभग 296% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी वजह मजबूत रिटर्न रहा है। हालांकि कुछ अन्य ईटीएफ ऐसे भी हैं जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में 250% तक का रिटर्न दिया है।

    क्यों बढ़ रहा है ETF का क्रेज?
    ईटीएफ की लोकप्रियता के पीछे मुख्य तीन कारण हैं—
    कम लागत: कम एक्सपेंस रेशियो के कारण यह सस्ता निवेश विकल्प है।
    पारदर्शिता: यह सीधे किसी इंडेक्स को फॉलो करता है, जिससे पोर्टफोलियो साफ-सुथरा रहता है।
    लिक्विडिटी: स्टॉक एक्सचेंज पर इसे कभी भी खरीदा और बेचा जा सकता है।

    ETF के प्रमुख प्रकार
    ईटीएफ कई तरह के होते हैं—
    इक्विटी ईटीएफ: जैसे Nifty 50, बैंकिंग, आईटी और सेक्टर आधारित फंड
    कमोडिटी ईटीएफ: सोना और चांदी आधारित फंड
    डेट/बॉन्ड ईटीएफ: सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश
    इंटरनेशनल ईटीएफ: जैसे NASDAQ 100 या S&P 500 में निवेश का अवसर

    निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखें
    विशेषज्ञों के अनुसार ईटीएफ चुनते समय तीन बातें जरूरी हैं—
    लिक्विडिटी: ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले ETF चुनें
    एक्सपेंस रेशियो: कम खर्च वाला फंड बेहतर होता है
    ट्रैकिंग एरर: इंडेक्स और ETF रिटर्न में अंतर जितना कम हो, फंड उतना बेहतर माना जाता है

    निवेश में समझदारी जरूरी
    ईटीएफ में निवेश करते समय ध्यान रखना चाहिए कि इसमें कोई सक्रिय फंड मैनेजर लगातार निर्णय नहीं लेता। इसलिए एसेट एलोकेशन, एंट्री-एग्जिट और पोर्टफोलियो रीबैलेंस की जिम्मेदारी निवेशक की होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश को केवल ट्रेंड के आधार पर नहीं, बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और लंबी अवधि की रणनीति के अनुसार करना चाहिए।

  • आज शेयर बाजार में तेजी के संकेत: गिफ्ट निफ्टी 185 अंक ऊपर, ग्लोबल मार्केट से मिला सपोर्ट

    आज शेयर बाजार में तेजी के संकेत: गिफ्ट निफ्टी 185 अंक ऊपर, ग्लोबल मार्केट से मिला सपोर्ट


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत होने के संकेत मिल रहे हैं। बीएसई सेंसेक्स और NSE Nifty 50 के ऊंचे स्तर पर खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। आज Coal India Limited, UltraTech Cement, Adani Total Gas, SBI Cards and Payment Services समेत कई कंपनियों के शेयर फोकस में रहेंगे, क्योंकि ये अपनी चौथी तिमाही के नतीजे जारी करने वाली हैं।

    ग्लोबल मार्केट्स से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी दिख सकता है। एशियाई बाजारों में सोमवार को बढ़त दर्ज की गई। जापान का Nikkei 225 0.53% चढ़ा, जबकि दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 1% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर के आसपास पहुंच गया। हांगकांग का Hang Seng Index फ्यूचर्स भी मजबूत शुरुआत का संकेत दे रहा है। वहीं, गिफ्ट निफ्टी लगभग 24,108 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद स्तर से करीब 185 अंकों का प्रीमियम है। इसे भारतीय बाजार के लिए पॉजिटिव ओपनिंग का संकेत माना जा रहा है।

    अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी दिन तेजी देखने को मिली। टेक शेयरों में खरीदारी से Nasdaq Composite और S&P 500 रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए। एसएंडपी 500 करीब 0.80% की बढ़त के साथ 7,165.08 पर और नैस्डैक 1.63% चढ़कर 24,836.60 पर बंद हुआ।

    कॉरपोरेट अपडेट की बात करें तो Reliance Industries ने चौथी तिमाही में मुनाफे में 12.6% की गिरावट दर्ज की है, हालांकि कंपनी की आय में लगभग 13% की वृद्धि हुई है। साथ ही, कंपनी ने ₹6 प्रति शेयर डिविडेंड देने की घोषणा भी की है।

    सेंसेक्स के तकनीकी स्तरों की बात करें तो विशेषज्ञों के अनुसार 77,000 का स्तर बेहद अहम बना हुआ है। इसके नीचे फिसलने पर यह 76,000 तक आ सकता है और गिरावट बढ़ने पर 75,700 से 75,500 तक जाने की संभावना है। वहीं, अगर यह 77,000 के ऊपर टिकता है, तो 78,000 से 78,200 तक उछाल देखने को मिल सकता है।

    Nifty 50 के लिए भी तकनीकी संकेत थोड़ा कमजोर नजर आ रहे हैं। साप्ताहिक चार्ट पर गिरावट के संकेत मिल रहे हैं, जिससे मुनाफावसूली का अंदेशा है। विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी 23,500 तक फिसल सकता है, जबकि 24,100 के स्तर पर तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है। वहीं, Bank Nifty के लिए 55,500-55,400 का स्तर सपोर्ट जोन माना जा रहा है। इसके नीचे जाने पर यह 55,000 और फिर 54,500 तक गिर सकता है। दूसरी ओर, 56,500-56,600 के दायरे में मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है।

  • शेयर बाजार में अगले हफ्ते बड़ा उतार-चढ़ाव संभव, ग्लोबल फैक्टर्स रहेंगे अहम..

    शेयर बाजार में अगले हफ्ते बड़ा उतार-चढ़ाव संभव, ग्लोबल फैक्टर्स रहेंगे अहम..


    नई दिल्ली।
    भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह कई अहम घटनाओं से भरा रहने वाला है, जिनका सीधा असर बाजार की दिशा और निवेशकों की रणनीति पर पड़ सकता है। इस समय बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और वैश्विक से लेकर घरेलू स्तर तक कई ऐसे कारक हैं जो आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव को बढ़ा सकते हैं।

    सबसे महत्वपूर्ण घटना अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक मानी जा रही है, जो 28 और 29 अप्रैल के बीच होने वाली है। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर लिए जाने वाले फैसले पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां पहले से ही अस्थिर हैं और ऐसे में किसी भी नीति निर्णय का प्रभाव सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर देखने को मिल सकता है, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ेगा।

    इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। वैश्विक तनाव और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। तेल की कीमतों में किसी भी तरह का बदलाव महंगाई और कंपनियों की लागत संरचना को प्रभावित कर सकता है, जिससे बाजार की चाल पर सीधा असर पड़ता है।

    वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियां भी इस समय बाजार की दिशा को प्रभावित कर रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों में चल रही अनिश्चितताओं और बातचीत की स्थिति में बदलाव का असर निवेशकों की धारणा पर साफ दिखाई देता है। यही कारण है कि अगले सप्ताह बाजार में सतर्कता और अस्थिरता दोनों बनी रह सकती है।

    घरेलू स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं, जिनमें औद्योगिक उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े आंकड़े शामिल हैं। ये डेटा देश की आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत प्रदान करते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर बाजार में सेक्टर आधारित हलचल देखने को मिल सकती है।

    इसके अलावा, कॉरपोरेट सेक्टर में भी चौथी तिमाही के नतीजों का सिलसिला जारी रहेगा। कई बड़ी कंपनियां अपने वित्तीय परिणाम घोषित करेंगी, जिनमें बैंकिंग, ऑटो, एनर्जी और अन्य प्रमुख सेक्टर शामिल हैं। इन नतीजों के आधार पर संबंधित कंपनियों के शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है और निवेशकों की रणनीति भी इसी के अनुसार बदलेगी।

    पिछला सप्ताह बाजार के लिए कमजोर साबित हुआ था, जहां प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई थी। कई सेक्टरों में दबाव देखने को मिला था, जबकि कुछ क्षेत्रों में सीमित मजबूती भी दिखाई दी थी। कुल मिलाकर बाजार में अनिश्चितता और अस्थिरता का माहौल बना रहा था।

    आने वाले सप्ताह में भी यही स्थिति जारी रहने की संभावना है, जहां वैश्विक घटनाक्रम, आर्थिक डेटा और कंपनियों के नतीजे मिलकर बाजार की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता और सोच-समझकर निर्णय लेने का रहेगा।

  • टैक्स प्लानिंग 2027: पुरानी और नई व्यवस्था में से कौन देगा ज्यादा फायदा, जानिए पूरा गणित..

    टैक्स प्लानिंग 2027: पुरानी और नई व्यवस्था में से कौन देगा ज्यादा फायदा, जानिए पूरा गणित..

    नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही सैलरीड कर्मचारियों के सामने एक बार फिर वही अहम सवाल खड़ा हो गया है कि पुरानी टैक्स व्यवस्था को चुना जाए या नई टैक्स व्यवस्था को अपनाया जाए। दोनों ही सिस्टम अपने-अपने तरीके से अलग फायदे और सीमाएं लेकर आते हैं, इसलिए सही विकल्प व्यक्ति की आय और वित्तीय योजना पर निर्भर करता है।

    हालांकि इस साल टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कुछ नए अपडेट और स्पष्टताओं के बाद यह चर्चा फिर से तेज हो गई है कि किस व्यवस्था में ज्यादा लाभ मिलेगा। कई मामलों में देखा जा रहा है कि इस बार लोगों के लिए पिछली तुलना में चुनाव अलग भी हो सकता है।

    पुरानी टैक्स व्यवस्था में टैक्सपेयर्स को कई तरह की छूट का लाभ मिलता है। इसमें निवेश पर मिलने वाली कटौती, स्वास्थ्य बीमा, होम लोन पर ब्याज, एचआरए और अन्य भत्ते शामिल हैं। इन सुविधाओं के कारण टैक्सेबल इनकम काफी कम हो जाती है, लेकिन इसके बदले टैक्स दरें अपेक्षाकृत अधिक होती हैं।

    वहीं दूसरी ओर नई टैक्स व्यवस्था को सरल और सीधा बनाया गया है। इसमें टैक्स स्लैब अलग-अलग आय स्तरों पर लागू होते हैं और दरें तुलनात्मक रूप से कम रखी गई हैं, लेकिन अधिकतर छूट और डिडक्शन हटा दिए गए हैं। इसका उद्देश्य टैक्स सिस्टम को आसान बनाना और फाइलिंग प्रक्रिया को कम जटिल करना है।

    अगर किसी व्यक्ति की आय सीमित है और वह ज्यादा निवेश या टैक्स सेविंग विकल्पों का उपयोग नहीं करता, तो नई टैक्स व्यवस्था उसके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकती है। इसमें कम दरों के कारण हर महीने मिलने वाली सैलरी यानी टेक-होम इनकम ज्यादा रहती है।

    इसके विपरीत, जो लोग नियमित रूप से निवेश करते हैं, बीमा पॉलिसी लेते हैं या होम लोन पर ब्याज चुकाते हैं, उनके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था ज्यादा लाभकारी हो सकती है। खासकर उन परिवारों के लिए जहां कई प्रकार के खर्च और वित्तीय जिम्मेदारियां होती हैं, यह विकल्प टैक्स बचत में मदद करता है।

    सरकार द्वारा समय-समय पर दोनों व्यवस्थाओं में कुछ बदलाव किए जाते हैं ताकि करदाता अपनी जरूरत के अनुसार सही विकल्प चुन सकें। कुछ भत्तों और अलाउंस में संशोधन के कारण टैक्स प्लानिंग पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए सही जानकारी के साथ निर्णय लेना जरूरी हो जाता है।

     यह साफ है कि कोई भी एक टैक्स सिस्टम सभी के लिए सबसे बेहतर नहीं हो सकता। सही चुनाव पूरी तरह व्यक्ति की आय, खर्च, निवेश की आदत और भविष्य की वित्तीय योजना पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले अपनी पूरी आर्थिक स्थिति का आकलन करना सबसे जरूरी कदम है।

  • नीति आयोग को मिला बड़ा महत्व, पीएम मोदी ने बताया देश की नीति-निर्माण व्यवस्था का मजबूत स्तंभ

    नीति आयोग को मिला बड़ा महत्व, पीएम मोदी ने बताया देश की नीति-निर्माण व्यवस्था का मजबूत स्तंभ


    नई दिल्ली। देश की विकास और नीति-निर्माण प्रणाली में नीति आयोग की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। केंद्र सरकार के अनुसार यह संस्था न केवल नीतियों को आकार देने का काम कर रही है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में विकास को गति देने में भी अहम योगदान निभा रही है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग को भारत की नीति-निर्माण व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बताया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संस्था सहकारी संघवाद को मजबूत करने, प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाने और नागरिकों के जीवन को आसान बनाने यानी ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नीति आयोग आज एक ऐसे मंच के रूप में उभर चुका है जहां नवाचार, दीर्घकालिक सोच और प्रभावी रणनीति पर काम किया जाता है।

    हाल ही में सरकार द्वारा नीति आयोग का पुनर्गठन किया गया, जिसके बाद इसके नए नेतृत्व को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। प्रधानमंत्री ने नए उपाध्यक्ष और अन्य पूर्णकालिक सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि वे अपने कार्यकाल में प्रभावशाली और परिणाम देने वाला कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि यह टीम देश की नीति निर्माण प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने में योगदान देगी।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि नीति आयोग का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने में भी सहायता करना है। यह संस्था केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत बनाकर विकास को संतुलित दिशा देने का कार्य कर रही है।

    इस अवसर पर उन्होंने विशेष रूप से नए उपाध्यक्ष के अनुभव की सराहना की। अर्थशास्त्र और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि उनके मार्गदर्शन में नीति आयोग की भूमिका और अधिक प्रभावी होगी। सरकार का मानना है कि ऐसे अनुभवी विशेषज्ञों की भागीदारी से नीतियों की गुणवत्ता और कार्यान्वयन क्षमता दोनों में सुधार होगा।

    नीति आयोग देश के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए काम करता है। यह केवल आर्थिक नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक, तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों को भी अपनी कार्ययोजना में शामिल करता है। इसका उद्देश्य भारत को एक समग्र विकास मॉडल की ओर ले जाना है, जहां हर क्षेत्र को समान अवसर मिल सके।

    वर्तमान समय में जब भारत तेजी से आर्थिक और सामाजिक बदलावों से गुजर रहा है, नीति आयोग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। यह संस्था सरकार को नीतिगत सुझाव देने के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के विकास मॉडल का विश्लेषण कर बेहतर समाधान प्रस्तुत करने का काम करती है।

    प्रधानमंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि सरकार नीति आयोग को भविष्य की विकास रणनीति के केंद्र में देख रही है। आने वाले समय में यह संस्था देश के विकास एजेंडे को दिशा देने में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है, जिससे भारत के ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के लक्ष्य को गति मिलेगी।

  • आईओएल में नौकरी का बड़ा मौका, इंजीनियर और मैनेजमेंट पदों पर 6 वैकेंसी, आवेदन 15 मई तक

    आईओएल में नौकरी का बड़ा मौका, इंजीनियर और मैनेजमेंट पदों पर 6 वैकेंसी, आवेदन 15 मई तक

    नई दिल्ली। देहरादून स्थित इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड ने युवाओं के लिए रोजगार का एक नया अवसर जारी किया है। कंपनी ने प्रोजेक्ट इंजीनियर सहित कुल 6 पदों पर भर्ती की घोषणा की है, जो अनुबंध आधारित होगी। इस भर्ती में तकनीकी और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिए अवसर शामिल हैं।

    जारी की गई भर्ती में प्रोजेक्ट इंजीनियर, सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर और सहायक प्रोजेक्ट इंजीनियर जैसे पद शामिल हैं। प्रत्येक पद पर दो-दो रिक्तियां निर्धारित की गई हैं। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन माध्यम से शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 15 मई तय की गई है।इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता के रूप में उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में इंजीनियरिंग, फिजिक्स या मैनेजमेंट से जुड़ी डिग्री होना आवश्यक है। इसके साथ ही न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ बीई, बीटेक या पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा अनिवार्य रखा गया है।

    उम्मीदवारों की आयु सीमा पद के अनुसार निर्धारित की गई है, जिसमें न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 30 से 40 वर्ष के बीच हो सकती है। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी।चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। इसमें पहले आवेदन की स्क्रीनिंग की जाएगी, उसके बाद शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया जाएगा। अंतिम चयन मेरिट सूची और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार 40,000 रुपये से लेकर 1,80,000 रुपये प्रति माह तक का वेतन दिया जाएगा।

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को निर्धारित फॉर्म डाउनलोड कर उसे सावधानीपूर्वक भरना होगा। इसके बाद आवश्यक दस्तावेजों को संलग्न कर फॉर्म को तय पते पर डाक के माध्यम से भेजना होगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन की एक प्रति भविष्य के लिए सुरक्षित रखें।

    यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जो तकनीकी और प्रबंधन क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं और एक प्रतिष्ठित संगठन के साथ जुड़कर अनुभव हासिल करना चाहते हैं।

  • निवेशकों की बिकवाली भारी पड़ी, एक हफ्ते में सोना 500 और चांदी 7,000 रुपये से ज्यादा कमजोर

    निवेशकों की बिकवाली भारी पड़ी, एक हफ्ते में सोना 500 और चांदी 7,000 रुपये से ज्यादा कमजोर


    नई दिल्ली।इस सप्ताह कीमती धातुओं के बाजार में कमजोरी का माहौल देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों ही मुनाफावसूली के दबाव में आ गए। शुरुआती मजबूती के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर अपनी होल्डिंग बेचनी शुरू कर दी, जिससे कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि सप्ताह के अंतिम दिन हल्की रिकवरी देखने को मिली, लेकिन पूरे सप्ताह का रुझान गिरावट की ओर ही रहा।

    सोने की कीमतों में साप्ताहिक आधार पर करीब 0.34 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। हफ्ते के अंत में इसमें मामूली सुधार हुआ और कीमत करीब 1,52,799 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गई। दिन के दौरान सोने ने 1,53,164 रुपये का उच्च स्तर और 1,50,750 रुपये का निचला स्तर छुआ, जो बाजार में जारी अस्थिरता को दर्शाता है। पूरे सप्ताह में सोना करीब 523 रुपये सस्ता हो गया, जो यह बताता है कि निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

    चांदी के मामले में गिरावट और ज्यादा गहरी रही। एक हफ्ते के दौरान इसकी कीमत में 7,000 रुपये से अधिक की कमी दर्ज की गई। हालांकि अंतिम कारोबारी दिन इसमें तेजी आई और यह करीब 2,44,321 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। दिनभर के कारोबार में चांदी ने 2,45,555 रुपये का उच्च स्तर और 2,38,291 रुपये का निचला स्तर छुआ, जिससे इसके दामों में तेज उतार-चढ़ाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह मुनाफावसूली रही। जब कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो निवेशक लाभ सुरक्षित करने के लिए बिकवाली करते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर चल रहे घटनाक्रमों ने भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच कूटनीतिक हल निकलने की उम्मीदों ने सुरक्षित निवेश की मांग को थोड़ा कमजोर किया, जिससे सोने और चांदी पर दबाव पड़ा।

    हालांकि बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने सोने को कुछ समर्थन दिया, क्योंकि इससे बिना ब्याज वाली संपत्तियों की आकर्षण क्षमता बढ़ती है। इसके बावजूद बाजार में मजबूत तेजी नहीं आ सकी, क्योंकि निवेशक अभी भी अनिश्चित परिस्थितियों को लेकर सतर्क हैं। निचले स्तरों पर खरीदारी जरूर देखने को मिली, लेकिन यह तेजी को स्थायी रूप नहीं दे सकी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार संतुलन की स्थिति में है, जहां न तो तेज गिरावट की आशंका है और न ही मजबूत तेजी के स्पष्ट संकेत। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर की चाल और आर्थिक नीतियां कीमती धातुओं की दिशा तय करेंगी। ऐसे में निवेशकों को सावधानी के साथ रणनीति बनानी होगी, क्योंकि बाजार में अस्थिरता आगे भी जारी रह सकती है।

  • टेक्नोलॉजी ने बदली निवेश की तस्वीर, ट्रेडिंग और सलाह का पूरा सिस्टम हुआ डिजिटल..

    टेक्नोलॉजी ने बदली निवेश की तस्वीर, ट्रेडिंग और सलाह का पूरा सिस्टम हुआ डिजिटल..


    नई दिल्ली। 
    वित्तीय बाजार आज जिस तेजी से बदल रहे हैं, उसका सबसे बड़ा कारण तकनीकी प्रगति को माना जा रहा है। हाल ही में एक उच्च स्तरीय आर्थिक कार्यक्रम के दौरान यह बात सामने आई कि निवेश, ट्रेडिंग और वित्तीय सलाह देने के पारंपरिक तरीके अब लगभग पूरी तरह डिजिटल ढांचे में बदल चुके हैं। यह बदलाव सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे निवेशकों के व्यवहार और बाजार की संरचना में भी गहरा परिवर्तन आया है।

    आज का निवेशक पहले की तुलना में कहीं अधिक डिजिटल रूप से सक्रिय और जागरूक है। मोबाइल और इंटरनेट की आसान पहुंच ने निवेश को हर व्यक्ति के लिए सरल बना दिया है। अब लोग बिना किसी भौतिक प्रक्रिया के सीधे बाजार से जुड़ सकते हैं और तुरंत निर्णय ले सकते हैं। इसी कारण नए निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है और बाजार का दायरा भी व्यापक हुआ है।

    तकनीक ने ट्रेडिंग सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां निवेश के लिए लंबी प्रक्रियाएं और मध्यस्थों पर निर्भरता होती थी, वहीं अब सब कुछ कुछ सेकंड में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संभव हो गया है। इसके साथ ही निवेश सलाह और वित्तीय सेवाएं भी ऑनलाइन माध्यमों पर शिफ्ट हो गई हैं, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों में सुधार हुआ है।

    इस बदलाव का असर केवल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूंजी प्रवाह भी अब वैश्विक स्तर पर अधिक सक्रिय हो गया है। निवेशक अब देश की सीमाओं से बाहर जाकर भी अवसरों की तलाश कर रहे हैं। इससे बाजार अधिक जुड़ा हुआ और गतिशील बन गया है, लेकिन इसके साथ जोखिमों का स्वरूप भी जटिल हो गया है क्योंकि अब वैश्विक घटनाओं का सीधा असर स्थानीय बाजारों पर पड़ता है।

    भारतीय शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यह अब केवल आंकड़ों का खेल नहीं रह गया है। करोड़ों निवेशकों की भागीदारी और हजारों सूचीबद्ध कंपनियों की मौजूदगी यह दिखाती है कि बाजार में विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में बाजार पूंजीकरण और निवेश साधनों में भी तेज वृद्धि देखी गई है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिली है।

    हालांकि, इस तेजी के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। जब बाजार तेजी से बढ़ता है और तकनीक हर प्रक्रिया को आसान बनाती है, तब नियमों और निगरानी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। जरूरत इस बात की है कि नवाचार और सुरक्षा दोनों के बीच सही संतुलन बना रहे, ताकि निवेशकों का भरोसा कायम रहे और बाजार स्थिरता के साथ आगे बढ़े।

    अंत में यह कहा जा सकता है कि तकनीक ने निवेश की दुनिया को पूरी तरह नया रूप दे दिया है। अब बाजार केवल खरीद-बिक्री का स्थान नहीं रहा, बल्कि यह एक डिजिटल इकोसिस्टम बन चुका है, जहां जानकारी, गति और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

  • मेटा में AI जॉब्स का क्रेज, इंजीनियरों को मिल रहा रिकॉर्डतोड़ वेतन….

    मेटा में AI जॉब्स का क्रेज, इंजीनियरों को मिल रहा रिकॉर्डतोड़ वेतन….


    नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने नौकरी और कमाई के पैटर्न को पूरी तरह बदल दिया है। इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियों में देखने को मिल रहा है, जहां AI और मशीन लर्निंग इंजीनियरों को बेहद ऊंचे पैकेज दिए जा रहे हैं। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं बल्कि एक हाई-वैल्यू स्किल बन चुकी है, जिसकी वजह से इस क्षेत्र में काम करने वालों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

    मेटा में AI इंजीनियरों की कमाई कई स्तरों पर तय होती है, लेकिन शुरुआती बेस सैलरी ही इतनी ज्यादा है कि यह आमतौर पर करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती है। मशीन लर्निंग और AI से जुड़े इंजीनियरों को सालाना लाखों डॉलर तक की बेस सैलरी दी जा रही है, जो भारतीय मुद्रा में करोड़ों रुपये के बराबर बैठती है। यह दिखाता है कि कंपनी अपने एआई टैलेंट को सबसे महत्वपूर्ण संसाधन मान रही है।

    सिर्फ इंजीनियरिंग रोल्स ही नहीं, बल्कि डेटा साइंस और रिसर्च से जुड़े पदों पर भी भारी वेतन दिया जा रहा है। डेटा से जुड़ी रणनीति बनाने वाले प्रोफेशनल्स की सैलरी भी करोड़ों रुपये तक पहुंच रही है। इससे यह साफ होता है कि सिर्फ कोडिंग ही नहीं, बल्कि डेटा को समझने और उसका उपयोग करने वाले लोगों की भी भारी मांग है।

    मेटा में सीनियर लेवल पर काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की कमाई भी काफी ज्यादा है। अनुभव और जिम्मेदारी बढ़ने के साथ-साथ सैलरी में भी बड़ा उछाल देखने को मिलता है। कई मामलों में कुल पैकेज कई करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है, जिससे यह इंडस्ट्री दुनिया की सबसे ज्यादा भुगतान देने वाली इंडस्ट्री में शामिल हो जाती है।

    भारत में भी मेटा अपने इंजीनियरों को बहुत आकर्षक पैकेज ऑफर करती है। यहां शुरुआती स्तर पर ही अच्छी सैलरी मिलती है, जबकि अनुभवी AI इंजीनियरों के लिए यह पैकेज करोड़ों रुपये तक जा सकता है। यह भारत के टेक सेक्टर में सबसे हाई-पेइंग जॉब्स में से एक माना जाता है।

    इस पूरे पैकेज में सिर्फ बेस सैलरी ही नहीं बल्कि स्टॉक ऑप्शंस और बोनस भी शामिल होते हैं। इन्हीं अतिरिक्त फायदों के कारण कुल कमाई और भी ज्यादा बढ़ जाती है। कई सीनियर इंजीनियरों की कुल सालाना कमाई कई करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है, जिससे यह क्षेत्र और भी आकर्षक बन जाता है।

  • महंगाई के संकेत सोना चांदी गिरे लेकिन बाजार में तेजी पेट्रोल डीजल के दाम जस के तस

    महंगाई के संकेत सोना चांदी गिरे लेकिन बाजार में तेजी पेट्रोल डीजल के दाम जस के तस


    नई दिल्ली । देश में 25 अप्रैल 2026 को सोना चांदी और ईंधन की कीमतों को लेकर मिली जुली स्थिति देखने को मिल रही है। जहां एक ओर सराफा बाजार में गिरावट दर्ज की गई है वहीं कमोडिटी बाजार में तेजी का रुख बना हुआ है। इस बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं जिससे आम लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है।

    अखिल भारतीय सराफा संघ के अनुसार नई दिल्ली में 24 कैरेट सोना घटकर लगभग 155900 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। वहीं चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली है और यह करीब 247000 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। हालांकि इसके उलट Multi Commodity Exchange यानी एमसीएक्स पर सोना और चांदी दोनों में तेजी दर्ज की गई है। यहां सोना करीब 152830 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी लगभग 244845 रुपए प्रति किलो के आसपास ट्रेड करती नजर आई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इन कीमतों में उतार चढ़ाव के पीछे कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। डॉलर की मजबूती पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार को प्रभावित कर रही हैं। इन कारणों से निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है और इसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ रहा है।

    ईंधन की बात करें तो देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपए और डीजल 87.67 रुपए प्रति लीटर बना हुआ है। मुंबई में पेट्रोल 103.54 रुपए और डीजल 90.03 रुपए है जबकि चेन्नई में पेट्रोल 100.80 रुपए और डीजल 92.39 रुपए प्रति लीटर पर स्थिर है।

    इस बीच बाजार में एक और चिंता पाम ऑयल की कमी को लेकर सामने आई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और खासकर इंडोनेशिया से सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। यदि यह स्थिति बनी रहती है तो आने वाले समय में खाद्य तेल समेत रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

    एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी फिलहाल कोई नया बदलाव नहीं किया गया है हालांकि पिछले कुछ महीनों में इसमें बढ़ोतरी देखी गई थी। कुल मिलाकर जहां पेट्रोल डीजल के दाम स्थिर हैं वहीं सोना चांदी में उतार चढ़ाव जारी है और वैश्विक परिस्थितियों के चलते महंगाई बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।