Category: Economy

  • नीट पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक से मचा असर, 15 करोड़ से अधिक भारतीय यूजर्स प्रभावित होने का दावा

    नीट पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक से मचा असर, 15 करोड़ से अधिक भारतीय यूजर्स प्रभावित होने का दावा

    नई दिल्ली । नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर देश में डिजिटल प्लेटफॉर्म नियमन और परीक्षा सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल डुरोव ने दावा किया है कि इस प्रतिबंध के कारण भारत में 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों की कथित गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में सामान्य उपयोगकर्ताओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ा।

    डुरोव ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि भारतीय अधिकारियों द्वारा परीक्षा से जुड़ी कथित लीक सामग्री को रोकने के उद्देश्य से प्लेटफॉर्म पर सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध लगाया गया। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम ने पहले ही ऐसे सैकड़ों चैनलों और समूहों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिन पर परीक्षा से संबंधित संदिग्ध सामग्री साझा करने और कथित धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे थे। कंपनी का दावा है कि वह लगातार ऐसे कंटेंट की निगरानी और हटाने की प्रक्रिया को मजबूत बना रही है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर संवेदनशील माहौल बना हुआ है। नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। इससे पहले प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए थे। इसी पृष्ठभूमि में परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए गए हैं।

    सरकारी एजेंसियों और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर परीक्षा से संबंधित गलत जानकारी, भ्रामक दावे और कथित लीक सामग्री तेजी से प्रसारित की जा सकती है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों का उद्देश्य पुनर्परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, अफवाह या अनुचित गतिविधि को रोकना बताया जा रहा है।

    मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर से भी जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ मामलों में संदेशों को बाद में संपादित कर पुराने समय का दिखाने या भ्रामक प्रमाण तैयार करने की कोशिश की गई थी। इसी कारण प्लेटफॉर्म को सीमित अवधि के लिए इस सुविधा को भी निष्क्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यह कदम डिजिटल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    डुरोव ने कहा है कि कंपनी इस चुनौती को गंभीरता से ले रही है और संदेशों पर दिखाई देने वाले एडिटेड लेबल को और अधिक स्पष्ट बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनका मानना है कि इससे सामग्री में बदलाव को आसानी से पहचाना जा सकेगा और किसी भी प्रकार की डिजिटल हेरफेर की संभावना कम होगी। कंपनी तकनीकी स्तर पर ऐसे उपाय विकसित कर रही है जो पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर सकें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल एक मैसेजिंग एप्लीकेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, डेटा संचार की स्वतंत्रता और परीक्षा सुरक्षा जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है। एक ओर सरकारें संवेदनशील परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करना चाहती हैं, वहीं दूसरी ओर करोड़ों उपयोगकर्ताओं की डिजिटल पहुंच और संचार सेवाओं की निरंतर उपलब्धता भी महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है।

    आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रतिबंध और तकनीकी नियंत्रणों को लेकर क्या निर्णय लिए जाते हैं। फिलहाल यह मामला देश में डिजिटल नियमन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भूमिका पर गंभीर चर्चा का केंद्र बन गया है।

  • एमआईटी छोड़कर शुरू किया था स्टार्टअप, अब स्पेसएक्स अधिग्रहण के बाद अरबपतियों की सूची में चमके अमन सांगर

    एमआईटी छोड़कर शुरू किया था स्टार्टअप, अब स्पेसएक्स अधिग्रहण के बाद अरबपतियों की सूची में चमके अमन सांगर


    नई दिल्ली ।
    कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय मूल के युवा उद्यमी अमन सांगर वैश्विक कारोबारी जगत में चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। एआई कोडिंग प्लेटफॉर्म कर्सर की मूल कंपनी एनीस्फीयर के स्पेसएक्स द्वारा 60 अरब डॉलर के शेयर खरीद समझौते की घोषणा के बाद 25 वर्षीय अमन सांगर की अनुमानित संपत्ति लगभग 5.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। यह सौदा न केवल एआई उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि युवा उद्यमिता और तकनीकी नवाचार का भी एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

    अमन सांगर एनीस्फीयर के सह-संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में अपने तीन साथियों के साथ प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की पढ़ाई बीच में छोड़कर स्टार्टअप की शुरुआत की थी। उस समय कंपनी का उद्देश्य इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए एआई आधारित समाधान तैयार करना था, लेकिन बाद में टीम ने अपनी रणनीति बदलते हुए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के लिए उन्नत एआई कोडिंग प्लेटफॉर्म विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया।

    इसी रणनीतिक बदलाव ने कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। एनीस्फीयर द्वारा विकसित कर्सर प्लेटफॉर्म ने सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के काम करने के तरीके को काफी हद तक बदल दिया। यह प्लेटफॉर्म पूरे कोडबेस का विश्लेषण कर जटिल समस्याओं के समाधान सुझाने और कोड तैयार करने में सक्षम माना जाता है। तकनीकी कंपनियों के बीच इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और देखते ही देखते यह वैश्विक स्तर पर एआई-संचालित कोडिंग समाधानों की अग्रणी सेवाओं में शामिल हो गया।

    न्यूयॉर्क में जन्मे अमन सांगर ने किशोरावस्था में ही प्रोग्रामिंग की दुनिया में कदम रख दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने मात्र 14 वर्ष की आयु में कोडिंग सीखना शुरू कर दिया था। बाद में एमआईटी में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात माइकल ट्रुएल, सुलेह आसिफ और आर्विड लुनेमार्क से हुई। यही टीम आगे चलकर एनीस्फीयर की नींव बनी। कंपनी के विकास में अमन सांगर ने उत्पाद रणनीति, व्यवसाय विस्तार और डेवलपर समुदाय के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कंपनी की वित्तीय प्रगति भी बेहद तेज रही है। कुछ वर्षों के भीतर ही कर्सर ने वैश्विक तकनीकी उद्योग में मजबूत पहचान बना ली। बड़ी संख्या में डेवलपर्स और कॉरपोरेट संस्थानों ने इसे अपने सॉफ्टवेयर विकास कार्यों में अपनाया। वर्तमान में दुनिया भर की हजारों कंपनियों के लाखों डेवलपर्स इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। इससे कंपनी की आय में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई, जिसने निवेशकों का विश्वास और मजबूत किया।

    स्पेसएक्स का यह अधिग्रहण एआई और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के बीच संभावित सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस सौदे के बाद उन्नत एआई मॉडल के विकास और बड़े पैमाने पर तकनीकी अनुसंधान को नई गति मिल सकती है। अधिग्रहण की घोषणा के बाद अमन सांगर ने भी भविष्य की संभावनाओं को लेकर उत्साह व्यक्त किया और अत्याधुनिक एआई मॉडलों के विकास पर काम करने की बात कही।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा आने वाले वर्षों में एआई उद्योग की दिशा तय करने वाले प्रमुख घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है। साथ ही, अमन सांगर की सफलता दुनिया भर के युवा उद्यमियों के लिए यह संदेश भी देती है कि नवाचार, तकनीकी दृष्टि और जोखिम लेने का साहस वैश्विक स्तर पर असाधारण उपलब्धियां दिला सकता है।

  • वैश्विक तनाव घटा, घरेलू बाजार चमका; बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर, मिडकैप-स्मॉलकैप में भी जोरदार तेजी

    वैश्विक तनाव घटा, घरेलू बाजार चमका; बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर, मिडकैप-स्मॉलकैप में भी जोरदार तेजी

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र की मजबूती ने भारतीय पूंजी बाजार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तक पहुंचा दिया है। निवेशकों के बढ़ते भरोसे, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक बार फिर 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर गया। यह लगभग छह सप्ताह का सर्वोच्च स्तर माना जा रहा है और इससे बाजार की सकारात्मक धारणा को नई मजबूती मिली है।

    हाल के दिनों में वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में आए बदलावों का असर भारतीय बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। पश्चिम एशिया से जुड़े तनावों में नरमी और अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर सामने आए सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों की चिंताओं को कम किया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए राहत का माहौल बनाया है। इसका सीधा प्रभाव निवेशकों के विश्वास और बाजार की दिशा पर देखा गया।

    विश्लेषकों का मानना है कि तेल की कीमतों में कमी से महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही चालू खाते के घाटे पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। इन परिस्थितियों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल मजबूत हुआ है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान बाजार में आई तेजी ने कंपनियों के कुल मूल्यांकन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है।

    बाजार की यह मजबूती केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही है। व्यापक बाजार में भी उत्साह दिखाई दिया है। मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप श्रेणी के शेयरों ने हाल के महीनों में बड़े शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में तेजी केवल चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेशकों की भागीदारी विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों में फैल रही है। व्यापक भागीदारी को किसी भी तेजी के टिकाऊ होने का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।

    हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बिकवाली का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है, फिर भी घरेलू निवेशकों की लगातार सक्रियता बाजार को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। व्यवस्थित निवेश योजनाओं और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने बाजार को स्थिरता देने में अहम भूमिका निभाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में विदेशी निवेश का प्रवाह भी सकारात्मक होता है तो बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।

    भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाएं भी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। संरचनात्मक सुधारों, मजबूत कॉरपोरेट बैलेंस शीट, बढ़ते पूंजीगत निवेश और बेहतर नकदी प्रवाह जैसे कारक कंपनियों की विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कॉरपोरेट क्षेत्र ने कर्ज के स्तर को नियंत्रित करने और परिचालन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है, जिसका लाभ अब बाजार मूल्यांकन में दिखाई दे रहा है।

    बुधवार के कारोबार में भी प्रमुख सूचकांकों ने सकारात्मक रुख बनाए रखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जिससे निवेशकों का उत्साह और मजबूत हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चरण में बैंकिंग, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    कुल मिलाकर, वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और घरेलू आर्थिक मजबूती के संयुक्त प्रभाव ने भारतीय शेयर बाजार को नई ऊर्जा प्रदान की है। बीएसई का बाजार पूंजीकरण 5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचना न केवल निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।

  • LPG उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली राहत, जून में बढ़ी कीमतें बरकरार; सिलेंडर बुकिंग से पहले जानें ताजा रेट

    LPG उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली राहत, जून में बढ़ी कीमतें बरकरार; सिलेंडर बुकिंग से पहले जानें ताजा रेट

    नई दिल्ली । देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर का उपयोग करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए 17 जून को राहत और चिंता दोनों तरह की स्थिति बनी हुई है। राहत इस बात की है कि आज घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई नई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि चिंता का कारण यह है कि जून महीने में लागू हुई बढ़ी हुई दरें अभी भी प्रभावी हैं। ऐसे में गैस सिलेंडर बुक कराने वाले उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है।

    देश में एलपीजी की कीमतों की समीक्षा आमतौर पर प्रत्येक महीने की शुरुआत में की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत जून में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। इस फैसले के बाद विभिन्न महानगरों और प्रमुख शहरों में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। वर्तमान में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें पिछले संशोधन के अनुसार ही लागू हैं और आज इनमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है।

    राजधानी दिल्ली सहित देश के कई बड़े शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें पहले की तुलना में अधिक स्तर पर बनी हुई हैं। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, चंडीगढ़, भुवनेश्वर और पटना जैसे शहरों में भी उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई दरों का सामना करना पड़ रहा है। अलग-अलग राज्यों में करों और परिवहन लागत के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिलता है, लेकिन कुल मिलाकर अधिकांश क्षेत्रों में गैस उपभोक्ताओं की मासिक रसोई लागत बढ़ी है।

    घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भी लागत का दबाव बढ़ा है। होटल, रेस्तरां, कैटरिंग सेवाएं और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं। जून में कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई थी, जिसका सीधा प्रभाव व्यवसायिक संचालन लागत पर पड़ा है। कई क्षेत्रों में छोटे व्यापारियों ने बढ़ती ऊर्जा लागत को लेकर चिंता भी व्यक्त की है।

    ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा मांग में बदलाव जैसी परिस्थितियां एलपीजी मूल्य निर्धारण को प्रभावित करती हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों में गैस कीमतों में अस्थिरता देखने को मिली है।

    विशेषज्ञों के अनुसार एलपीजी केवल घरेलू ईंधन नहीं बल्कि व्यापक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्पाद है। इसकी कीमतों में बदलाव का असर परिवारों के मासिक बजट से लेकर छोटे व्यवसायों की लागत संरचना तक दिखाई देता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में एलपीजी की बढ़ती खपत को देखते हुए उपभोक्ता मूल्य परिवर्तन पर लगातार नजर बनाए रखते हैं।

    वर्तमान स्थिति में उपभोक्ताओं को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ रहा है, लेकिन जून में लागू संशोधित दरें अभी भी प्रभावी हैं। ऐसे में गैस सिलेंडर बुक कराने से पहले अपने क्षेत्र की मौजूदा कीमतों की जानकारी प्राप्त करना उपयोगी माना जा रहा है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की दिशा और घरेलू मूल्य समीक्षा के आधार पर एलपीजी दरों में आगे बदलाव संभव हो सकता है।

    फिलहाल 17 जून को एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि कीमतों में कोई नया संशोधन नहीं हुआ है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी का असर अभी भी पूरी तरह बना हुआ है और इसका प्रभाव घरेलू बजट तथा व्यावसायिक खर्चों पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

  • सोने पर बढ़ा दुनिया का भरोसा: केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे गोल्ड रिजर्व, कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत

    सोने पर बढ़ा दुनिया का भरोसा: केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे गोल्ड रिजर्व, कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत

    नई दिल्ली । वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच सोना एक बार फिर सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में उभर रहा है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के ताजा वार्षिक सर्वेक्षण ने यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में यह रुझान और तेज हो सकता है। इससे न केवल गोल्ड रिजर्व का महत्व बढ़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    सर्वेक्षण में 76 केंद्रीय बैंकों ने हिस्सा लिया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। इसमें शामिल 84 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में वैश्विक भंडार में सोने की हिस्सेदारी मौजूदा स्तर की तुलना में काफी अधिक होगी। दिलचस्प बात यह है कि विकसित देशों के साथ-साथ उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के केंद्रीय बैंक भी इस मुद्दे पर लगभग एक जैसी राय रखते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में हो रहे बदलावों के कारण केंद्रीय बैंक अपनी आरक्षित संपत्तियों में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं। लंबे समय तक अमेरिकी डॉलर को सबसे सुरक्षित रिजर्व मुद्रा माना जाता रहा, लेकिन हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों और वैश्विक व्यापार में बदलावों के चलते कई देशों ने वैकल्पिक सुरक्षित संपत्तियों की तलाश शुरू कर दी है। सोना इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आया है।

    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़े भी इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी लगातार घट रही है। सर्वेक्षण में शामिल 74 प्रतिशत रिजर्व प्रबंधकों का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में डॉलर की हिस्सेदारी और कम हो सकती है। ऐसे में सोना केंद्रीय बैंकों के लिए सुरक्षा कवच की भूमिका निभा सकता है।

    बाजार विशेषज्ञ और केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया का कहना है कि दीर्घकालिक दृष्टि से सोने का रुख बेहद मजबूत बना हुआ है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई के दबाव के कारण निकट भविष्य में सोने पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इसकी संभावनाएं सकारात्मक हैं। उनका अनुमान है कि अगले एक वर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

    सोने की बढ़ती मांग केवल निवेशकों तक सीमित नहीं है। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी बाजार को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। जब दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय संस्थान अपनी संपत्तियों का बड़ा हिस्सा सोने में स्थानांतरित करते हैं, तो यह निवेशकों के लिए भी एक मजबूत संकेत माना जाता है। यही कारण है कि आर्थिक संकट, युद्ध, महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन जैसी परिस्थितियों में सोने की मांग तेजी से बढ़ जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है और केंद्रीय बैंक इसी तरह सोना खरीदते रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में गोल्ड मार्केट में नई तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और दीर्घकालिक निवेश का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बनता जा रहा है।

  • भारत की डिजिटल ताकत का फ्रांस में प्रदर्शन, गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा शुरू; पीयूष गोयल बोले- वैश्विक पहुंच का बड़ा पड़ाव

    भारत की डिजिटल ताकत का फ्रांस में प्रदर्शन, गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा शुरू; पीयूष गोयल बोले- वैश्विक पहुंच का बड़ा पड़ाव


    नई दिल्ली ।
    भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत करते हुए फ्रांस के प्रमुख रिटेल केंद्रों में प्रवेश कर लिया है। फ्रांस के नीस मैसेना स्थित प्रतिष्ठित गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा की शुरुआत के साथ भारतीय डिजिटल भुगतान नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक नई पहचान मिली है। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने इसे भारत की डिजिटल क्षमताओं और तकनीकी नवाचार की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    यूपीआई सेवा शुरू होने के बाद अब भारतीय पर्यटक और ग्राहक फ्रांस के इस प्रसिद्ध रिटेल स्टोर में सीधे यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे। इससे न केवल भुगतान प्रक्रिया अधिक आसान और सुरक्षित होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय डिजिटल इकोसिस्टम की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल सीमापार डिजिटल लेनदेन को सरल बनाने और वैश्विक भुगतान प्रणाली में भारत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    पीयूष गोयल ने इस अवसर पर कहा कि फ्रांस के प्रमुख रिटेल गंतव्यों में से एक गैलरीज लाफायेट में यूपीआई का लॉन्च होना भारत की तकनीकी प्रगति और विश्वस्तरीय डिजिटल भुगतान समाधान की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि यूपीआई के वैश्विक विस्तार की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी और इससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

    इस पहल को सफल बनाने में डिजिटल भुगतान क्षेत्र की कंपनियों और तकनीकी साझेदारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की साझेदारियां वैश्विक स्तर पर सहज, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल भुगतान व्यवस्था विकसित करने में मदद करेंगी। साथ ही इससे विदेशी बाजारों में भारतीय फिनटेक समाधानों के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे।

    भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग के संदर्भ में भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक, औद्योगिक, तकनीकी और नवाचार आधारित सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यूपीआई का विस्तार इसी मजबूत होते संबंध का एक नया उदाहरण माना जा रहा है।

    फ्रांस दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के साथ भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने भारत में उपलब्ध निवेश अवसरों, डिजिटल परिवर्तन और नवाचार आधारित विकास मॉडल पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने फ्रांसीसी उद्योग जगत से भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान भी किया।

    यात्रा के दौरान मंत्री ने यूरोप के प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र Sophia Antipolis का भी दौरा किया। यह केंद्र शोध, तकनीक और उद्योग के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है, जहां हजारों तकनीकी कंपनियां अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार केंद्र भविष्य की अर्थव्यवस्था को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली को वैश्विक मान्यता दिलाने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और सीमा-पार वित्तीय लेनदेन को भी नई गति देगा। आने वाले वर्षों में अन्य देशों और प्रमुख वैश्विक बाजारों में भी यूपीआई की पहुंच बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

  • दुनिया के सबसे खूबसूरत एयरपोर्ट्स में भारत का दबदबा, अडानी ग्रुप के नवी मुंबई और गुवाहाटी टर्मिनल को वैश्विक सम्मान

    दुनिया के सबसे खूबसूरत एयरपोर्ट्स में भारत का दबदबा, अडानी ग्रुप के नवी मुंबई और गुवाहाटी टर्मिनल को वैश्विक सम्मान

    नई दिल्ली । भारत की विमानन अवसंरचना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिली है। अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड के अंतर्गत विकसित दो प्रमुख हवाई अड्डों को वर्ष 2026 की दुनिया के सबसे खूबसूरत एयरपोर्ट्स की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। इस उपलब्धि ने न केवल भारतीय विमानन क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है, बल्कि आधुनिक वास्तुकला, यात्रियों के अनुभव और सतत विकास के क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता को भी वैश्विक मंच पर स्थापित किया है।

    दुनियाभर में वास्तुकला और डिजाइन उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध प्रिक्स वर्साय पुरस्कारों के तहत नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तथा गुवाहाटी स्थित लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 को इस विशेष सूची में स्थान मिला है। यह सम्मान उन परियोजनाओं को दिया जाता है जो वास्तु सौंदर्य, नवाचार, पर्यावरणीय संतुलन और यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं।

    नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 को उसके अनूठे और भविष्यवादी डिजाइन के लिए सराहा गया है। इसका स्थापत्य स्वरूप भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण प्रतीक कमल के फूल से प्रेरित है। आधुनिक तकनीक, विशाल संरचना, ऊर्जा दक्षता और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह टर्मिनल भारत के उभरते बुनियादी ढांचे की नई पहचान बनकर सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना देश में आधुनिक विमानन केंद्रों के विकास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

    वहीं, गुवाहाटी एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 ने भी अपनी विशिष्ट डिजाइन अवधारणा के कारण वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। इसके निर्माण में असम की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संपदा और स्थानीय जैव विविधता को विशेष महत्व दिया गया है। टर्मिनल का डिजाइन बांस और ऑर्किड जैसे क्षेत्रीय प्राकृतिक तत्वों से प्रेरित है, जो पूर्वोत्तर भारत की विशिष्ट पहचान को दर्शाता है। पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकों और स्थानीय सौंदर्य को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ने का प्रयास इसे अन्य परियोजनाओं से अलग बनाता है।

    इस वैश्विक सूची में दुनिया के कई प्रतिष्ठित हवाई अड्डों को भी स्थान मिला है। इनमें यूरोप, अमेरिका और एशिया के प्रमुख विमानन केंद्र शामिल हैं, जिन्हें उनकी उन्नत सुविधाओं और विशिष्ट डिजाइन के लिए जाना जाता है। ऐसे प्रतिस्पर्धी वैश्विक परिदृश्य में भारतीय परियोजनाओं का चयन देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में तेजी से विकसित हो रहे विमानन क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व विस्तार देखा है। बढ़ती हवाई यात्रा, आधुनिक हवाई अड्डों का निर्माण और यात्रियों की सुविधाओं में सुधार ने देश को वैश्विक विमानन मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। नवी मुंबई और गुवाहाटी की यह उपलब्धि उसी परिवर्तनशील यात्रा का हिस्सा मानी जा रही है।

    विमानन और अवसंरचना क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय मान्यता भविष्य में भारत में निवेश आकर्षित करने, पर्यटन को बढ़ावा देने और विश्वस्तरीय हवाई अड्डों के विकास को नई गति देने में सहायक होगी। साथ ही यह उपलब्धि भारतीय डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को भी दर्शाती है।

    वर्ष 2026 के अंत में इन चयनित परियोजनाओं में से कुछ को सर्वोच्च वैश्विक खिताब प्रदान किए जाने की संभावना है। ऐसे में भारतीय हवाई अड्डों की यह उपलब्धि आने वाले महीनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकती है तथा देश के विमानन क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।

  • ट्रेड सीक्रेट मामले में टीसीएस की कानूनी लड़ाई लगभग समाप्त, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी राहत; करोड़ों डॉलर की अतिरिक्त देनदारी बढ़ी

    ट्रेड सीक्रेट मामले में टीसीएस की कानूनी लड़ाई लगभग समाप्त, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी राहत; करोड़ों डॉलर की अतिरिक्त देनदारी बढ़ी

    नई दिल्ली । भारत की अग्रणी आईटी सेवा कंपनी टीसीएस को अमेरिका में लंबे समय से चल रहे ट्रेड सीक्रेट विवाद में बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने निचली अदालतों द्वारा दिए गए फैसले की समीक्षा की मांग की थी। शीर्ष अदालत के इस निर्णय के बाद कंपनी के खिलाफ पूर्व में दिए गए हर्जाने के आदेश प्रभावी बने रहेंगे और टीसीएस को इस मामले में कुल लगभग 220 मिलियन डॉलर का वित्तीय प्रभाव झेलना पड़ेगा।

    कंपनी द्वारा नियामकीय सूचना में बताया गया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मामले की पुनर्समीक्षा करने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही अपीलीय अदालत द्वारा पहले दिए गए फैसले को चुनौती देने की सभी प्रमुख कानूनी संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं। इस घटनाक्रम को कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी और वित्तीय झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला कई वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में चल रहा था।

    विवाद की जड़ वर्ष 2019 में दायर एक मुकदमे से जुड़ी है। आरोप लगाया गया था कि टीसीएस ने एक बीमा क्षेत्र से जुड़े बड़े प्रौद्योगिकी प्रोजेक्ट के दौरान प्रतिस्पर्धी कारोबारी जानकारी और गोपनीय व्यावसायिक प्रक्रियाओं का अनुचित लाभ उठाया। शिकायतकर्ताओं का दावा था कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति के बाद प्राप्त जानकारी का उपयोग प्रतिस्पर्धी तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित करने में किया गया, जिससे उनके व्यावसायिक हित प्रभावित हुए।

    मामले की सुनवाई के दौरान अमेरिकी अदालत में कई स्तरों पर बहस हुई। वर्ष 2023 में जूरी ने निष्कर्ष निकाला कि कंपनी द्वारा ट्रेड सीक्रेट्स के अनुचित उपयोग से संबंधित दावों में पर्याप्त आधार मौजूद है। इसके बाद जूरी ने 210 मिलियन डॉलर के भुगतान की सिफारिश की थी। हालांकि बाद में संघीय न्यायाधीश ने इस राशि को घटाकर 168 मिलियन डॉलर कर दिया। संशोधित राशि में वास्तविक हर्जाना और दंडात्मक हर्जाना दोनों शामिल थे।

    इसके बाद कंपनी ने फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायिक मंचों का दरवाजा खटखटाया। अपीलीय अदालत ने भी निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा। टीसीएस ने अपने पक्ष में यह तर्क रखा था कि शिकायतकर्ता पक्ष वास्तविक वित्तीय नुकसान को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सका है और दंडात्मक हर्जाने की राशि भी अत्यधिक है। इसके बावजूद अदालतों ने पूर्व निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं किया।

    सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार न किए जाने के बाद कंपनी को अब मामले से जुड़े वित्तीय प्रावधानों में वृद्धि करनी होगी। कंपनी पहले ही इस विवाद से संबंधित बड़ी राशि का प्रावधान अपने खातों में कर चुकी थी। अब अतिरिक्त देनदारियों, ब्याज और कानूनी व्ययों को शामिल करते हुए और राशि अलग रखी जाएगी। यह प्रभाव आगामी वित्तीय तिमाहियों के परिणामों में एक असाधारण खर्च के रूप में दिखाई देगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला वैश्विक आईटी उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देता है। तकनीकी सेवाओं, डेटा प्रबंधन और बौद्धिक संपदा से जुड़े क्षेत्रों में कंपनियों के लिए ट्रेड सीक्रेट संरक्षण और अनुपालन मानकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को विभिन्न देशों के कानूनी ढांचे के अनुरूप अपनी प्रक्रियाओं को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

    हालांकि वित्तीय प्रभाव उल्लेखनीय है, फिर भी टीसीएस जैसी बड़ी वैश्विक कंपनी की समग्र कारोबारी क्षमता पर इसका दीर्घकालिक असर सीमित माना जा रहा है। इसके बावजूद यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस, बौद्धिक संपदा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी विवादों के संदर्भ में आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जाएगा।

  • भारत-फ्रांस तकनीकी साझेदारी को नई रफ्तार, इनोवेशन और निवेश के जरिए वैश्विक विकास का साझा रोडमैप तैयार

    भारत-फ्रांस तकनीकी साझेदारी को नई रफ्तार, इनोवेशन और निवेश के जरिए वैश्विक विकास का साझा रोडमैप तैयार


    नई दिल्ली ।
    भारत और फ्रांस के बीच तकनीक, नवाचार और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में संबंध लगातार मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने फ्रांस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के नेतृत्व में द्विपक्षीय संबंधों ने पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय गति प्राप्त की है और अब यह साझेदारी भविष्य की प्रौद्योगिकियों तथा नवाचार आधारित विकास पर केंद्रित होती जा रही है।

    फ्रांस में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और बैठकों के दौरान गोयल ने उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षाविदों और नवाचार क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग केवल व्यापारिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उभरती तकनीकों, अनुसंधान, स्टार्टअप विकास और सतत आर्थिक प्रगति जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हो चुका है। दोनों देशों के बीच बढ़ती भागीदारी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने यूरोप के प्रमुख विज्ञान और तकनीकी केंद्र सोफिया एंटीपोलिस का भी भ्रमण किया। उन्होंने इसे यूरोप की सिलिकॉन वैली बताते हुए कहा कि यह केंद्र इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि किस प्रकार अनुसंधान, प्रतिभा और उद्योग एक साथ मिलकर नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं। यहां हजारों कंपनियां अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में कार्यरत हैं और वैश्विक स्तर पर नई तकनीकों के विकास में योगदान दे रही हैं।

    गोयल ने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से उभरते नवाचार और विनिर्माण केंद्रों में शामिल हो चुका है। देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार विस्तार कर रहा है और नई तकनीकों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। उन्होंने फ्रांसीसी कंपनियों और निवेशकों को भारत में निवेश बढ़ाने, तकनीकी सहयोग स्थापित करने और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं में भागीदारी करने का निमंत्रण दिया।

    मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत का नवाचार ढांचा वैश्विक भागीदारी को प्रोत्साहित कर रहा है। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के विकास, ज्ञान साझेदारी और अनुसंधान सहयोग के माध्यम से दोनों देश न केवल अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत कर सकते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव छोड़ सकते हैं। उनके अनुसार, तकनीकी क्षेत्र में संयुक्त प्रयास आने वाले वर्षों में नई संभावनाओं के द्वार खोलेंगे।

    फ्रांस के शहर नीस में आयोजित बैठकों के दौरान भी भारत और फ्रांस के बीच नवाचार तथा निवेश सहयोग को विस्तार देने पर चर्चा हुई। इस दौरान स्थानीय प्रशासन, उद्योग जगत, निवेश संस्थानों और नवाचार क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न संभावित साझेदारियों पर विचार-विमर्श किया गया। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को व्यावहारिक परियोजनाओं में बदलना और दीर्घकालिक निवेश अवसरों को बढ़ावा देना था।

    नीस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम ने भी व्यापक ध्यान आकर्षित किया। इस आयोजन में देश के विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े स्टार्टअप और प्रमुख संस्थानों ने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वैश्विक निवेशकों और वेंचर कैपिटल प्रतिनिधियों की भागीदारी ने यह संकेत दिया कि भारत का नवाचार और स्टार्टअप क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विश्वास अर्जित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और फ्रांस के बीच बढ़ता तकनीकी सहयोग भविष्य में आर्थिक विकास, अनुसंधान साझेदारी और वैश्विक नवाचार नेटवर्क को नई मजबूती प्रदान कर सकता है।

  • दो दिनों की तेजी के बाद सोने-चांदी में बड़ी मुनाफावसूली, घरेलू और वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ा, निवेशकों की सतर्कता से कीमतों में आई तेज गिरावट

    दो दिनों की तेजी के बाद सोने-चांदी में बड़ी मुनाफावसूली, घरेलू और वैश्विक बाजारों में दबाव बढ़ा, निवेशकों की सतर्कता से कीमतों में आई तेज गिरावट

    नई दिल्ली । लगातार दो कारोबारी सत्रों तक मजबूत बढ़त दर्ज करने के बाद मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार से लेकर हाजिर बाजार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में कीमतों में आई तेज बढ़त के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिसके चलते दोनों धातुओं के भाव कमजोर पड़े।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने के अगस्त 2026 वायदा अनुबंध की शुरुआत मामूली कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में स्थिरता दिखाई देने के बावजूद बाद के सत्रों में दबाव बढ़ता गया और कीमतें लाल निशान में कारोबार करती रहीं। दोपहर तक सोने के भाव में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे हालिया तेजी का कुछ हिस्सा कम हो गया। कारोबार के दौरान सोने ने ऊपरी और निचले दोनों स्तरों को छुआ, जो बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।

    चांदी के बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। जुलाई वायदा अनुबंध में शुरुआत से ही कमजोरी दिखाई दी और दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद लाभ सुरक्षित करने को प्राथमिकता दी। कारोबार के दौरान चांदी के भाव में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव भी दर्ज किया गया।

    हाजिर बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतों में नरमी देखने को मिली। 24 कैरेट सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम आधार पर महत्वपूर्ण कमी दर्ज की गई। इसी प्रकार 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के भाव भी नीचे आए। ज्वेलरी कारोबार और खुदरा बाजार पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि कीमतों में गिरावट से उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी अपेक्षाकृत सस्ती हो जाती है।

    चांदी के हाजिर भाव में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रति किलोग्राम के आधार पर कीमतों में हजारों रुपये की कमी देखने को मिली, जिससे औद्योगिक और निवेश दोनों श्रेणियों के खरीदारों की गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। चांदी का उपयोग निवेश के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों में भी व्यापक रूप से किया जाता है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का प्रभाव कई क्षेत्रों तक पहुंचता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजारों में कमजोरी का असर भी घरेलू कीमतों पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी दोनों के दाम दबाव में रहे, जिससे भारतीय बाजार में भी नकारात्मक संकेत मिले। वैश्विक निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश साधनों में नई रणनीति अपनाने और हालिया तेजी के बाद लाभ बुक करने की प्रवृत्ति ने कीमतों को प्रभावित किया है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि कीमती धातुओं में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशक अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे माहौल में सोने और चांदी की कीमतें आने वाले दिनों में नई दिशा तय कर सकती हैं। फिलहाल मंगलवार का कारोबारी सत्र यह संकेत देता है कि हालिया रिकॉर्ड स्तरों के बाद बाजार में संतुलन स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और निवेशक सावधानीपूर्वक अपने निवेश निर्णय ले रहे हैं।