Category: Economy

  • अटल पेंशन योजना में हो सकती है बढ़ोत्‍तरी, ₹10,000 तक करने पर सरकार कर रही विचार

    अटल पेंशन योजना में हो सकती है बढ़ोत्‍तरी, ₹10,000 तक करने पर सरकार कर रही विचार

    नई दिल्ली । भारत सरकार असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है। बढ़ती महंगाई और रिटायरमेंट के बाद बढ़ते खर्चों को देखते हुए, सरकार अटल पेंशन योजना (APY) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन की ऊपरी सीमा को बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह तक करने की संभावना पर मंथन कर रही है। यह जानकारी मिंट ने तीन सरकारी अधिकारियों के हवाले से दी है, जिन्होंने नाम सार्वजनिक नहीं किया।

    असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर फोकस
    भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की हिस्सेदारी करीब 90% है। इनमें रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, दिहाड़ी मजदूर और स्वरोजगार करने वाले लोग शामिल हैं। इस वर्ग के लिए नौकरी की सुरक्षा, नियमित वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं सीमित होती हैं, जिससे बुढ़ापे में आर्थिक असुरक्षा बढ़ जाती है।

    क्या है अटल पेंशन योजना?
    अटल पेंशन योजना की शुरुआत मई 2015 में की गई थी, जिसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के लोगों को वृद्धावस्था में आर्थिक सहारा देना है। फिलहाल इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद ₹1,000 से ₹5,000 प्रति माह तक की गारंटीड पेंशन दी जाती है। हालांकि, बढ़ती महंगाई के कारण यह राशि अब पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

    सदस्यता तो बढ़ी, लेकिन नियमित योगदान में कमी
    अब तक इस योजना से 9 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। हालांकि इनमें से लगभग आधे सदस्य समय पर नियमित योगदान नहीं कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 1.35 करोड़ नए सदस्य जुड़े हैं, जो योजना के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है। सरकार का मानना है कि पेंशन राशि बढ़ाने से न केवल नए लोग जुड़ेंगे, बल्कि पुराने सदस्य भी योजना में बने रहेंगे।

    पेंशन बढ़ाने पर चल रहा मंथन
    वित्त मंत्रालय और पेंशन फंड नियामक प्राधिकरण (PFRDA) मिलकर इस प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं। विचार यह है कि वर्तमान अधिकतम पेंशन सीमा को ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह तक किया जाए। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम योजना को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाएगा और इसे अधिक आकर्षक भी करेगा।

    सरकारी योगदान और विस्तार की योजना
    शुरुआती वर्षों में सरकार ने कुछ लाभार्थियों को सह-योगदान (co-contribution) भी दिया था। अब सरकार इस योजना को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए ‘पेंशन सखी’ और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट नेटवर्क का विस्तार करने की तैयारी में है। योजना को वित्त वर्ष 2031 तक जारी रखने की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है।

    खजाने पर सीमित असर की संभावना
    विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रस्ताव से सरकारी वित्त पर बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह योजना मुख्य रूप से लाभार्थियों के अपने योगदान पर आधारित है। ऐसे में पेंशन राशि बढ़ने के बावजूद राजकोष पर सीमित प्रभाव ही पड़ेगा।

  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार को मिला बढ़ावा, एपीवाई में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज..

    सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार को मिला बढ़ावा, एपीवाई में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज..


    नई दिल्ली: दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा संचालित अटल पेंशन योजना ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जहां इस योजना के तहत कुल नामांकन संख्या 9 करोड़ के पार पहुंच गई है। यह आंकड़ा देश में सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ती जागरूकता और सरकारी योजनाओं के प्रति लोगों के भरोसे को दर्शाता है। विशेष रूप से वित्त वर्ष 2025-26 में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब तक के किसी भी एक वर्ष में सबसे अधिक बताई जा रही है।

    अटल पेंशन योजना को वर्ष 2015 में इस उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था कि देश के नागरिकों को वृद्धावस्था में एक सुनिश्चित आय का सहारा मिल सके। यह योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के कामगारों और कम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि वे रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सकें। इस योजना के तहत लाभार्थियों को 60 वर्ष की आयु के बाद निश्चित मासिक पेंशन प्रदान की जाती है, जो उनकी चुनी गई राशि पर आधारित होती है।

    योजना के अंतर्गत 18 से 40 वर्ष की आयु के नागरिक इसमें शामिल हो सकते हैं, जिससे उन्हें लंबी अवधि तक योगदान करने और भविष्य के लिए पेंशन सुनिश्चित करने का अवसर मिलता है। इस व्यवस्था में सरकार की ओर से एक मजबूत संरचना तैयार की गई है, जो पेंशन फंड प्रबंधन के माध्यम से योजना को स्थिर और प्रभावी बनाती है।

    अटल पेंशन योजना की एक विशेषता यह भी है कि यह केवल व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार की सुरक्षा को भी ध्यान में रखती है। लाभार्थी की मृत्यु के बाद पेंशन का लाभ उनके जीवनसाथी को मिलता है, और दोनों की अनुपस्थिति में संचित राशि नामित व्यक्ति को वापस की जाती है। इससे यह योजना सामाजिक सुरक्षा के व्यापक दायरे को कवर करती है।

    पिछले एक दशक में इस योजना के विस्तार में बैंकों, डाक विभाग और अन्य वित्तीय संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभिन्न स्तरों पर जागरूकता अभियानों और जनसंपर्क प्रयासों के माध्यम से योजना को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पहुंचाया गया है। इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों और बहुभाषी जानकारी ने भी इसके प्रसार में अहम योगदान दिया है।

    वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार इस योजना की बढ़ती लोकप्रियता का मुख्य कारण इसकी सरल संरचना और सुनिश्चित लाभ है, जो आम नागरिकों को भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। विशेष रूप से उन वर्गों के लिए यह योजना महत्वपूर्ण साबित हुई है, जिनके पास रिटायरमेंट के बाद स्थायी आय का कोई साधन नहीं होता।

    सरकारी प्रयासों के तहत इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। इसके साथ ही वित्तीय जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे लोगों को बचत और भविष्य की सुरक्षा के महत्व को समझाया जा सके।

  • वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में कंपनी के प्रदर्शन पर दबाव, आय और लाभ दोनों प्रभावित…

    वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में कंपनी के प्रदर्शन पर दबाव, आय और लाभ दोनों प्रभावित…


    नई दिल्ली । ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ी कंपनी Maharashtra Scooters Limited ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी किए हैं, जिनमें मुनाफे में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर लगभग 92 प्रतिशत घटकर 4.01 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 51.63 करोड़ रुपये था। इस गिरावट ने कंपनी के समग्र प्रदर्शन पर दबाव को स्पष्ट रूप से सामने रखा है।

    कंपनी की आय में भी इस तिमाही के दौरान कमी देखी गई है। कुल राजस्व सालाना आधार पर 3.55 प्रतिशत घटकर 6.51 करोड़ रुपये पर आ गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम है। इसके साथ ही कर पूर्व मुनाफा भी करीब 91 प्रतिशत गिरकर 5.46 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले 62.05 करोड़ रुपये था। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि कंपनी की लाभप्रदता पर कई स्तरों पर असर पड़ा है।

    हालांकि लागत के मोर्चे पर कंपनी ने कुछ राहत दर्ज की है। मार्च तिमाही में कुल खर्च में सालाना आधार पर लगभग 55 प्रतिशत की गिरावट आई और यह घटकर 1.05 करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद कर्मचारी लागत में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो तीन गुना से अधिक बढ़कर 0.22 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वहीं अन्य खर्चों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 0.83 करोड़ रुपये पर आ गया।

    कमजोर वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड की घोषणा की है। बोर्ड ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए प्रति शेयर 60 रुपये का अंतिम डिविडेंड प्रस्तावित किया है, जो अंकित मूल्य के आधार पर 600 प्रतिशत के बराबर है। यह प्रस्ताव आगामी वार्षिक आम बैठक में अनुमोदन के अधीन रहेगा। यदि इसे स्वीकृति मिलती है तो भुगतान 4 अगस्त 2026 तक किया जा सकता है, जबकि पात्र शेयरधारकों के निर्धारण के लिए रिकॉर्ड तिथि 30 जून 2026 तय की गई है।

    कंपनी का मुख्य व्यवसाय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए डाई, जिग्स, फिक्स्चर और डाई कास्टिंग कंपोनेंट्स के निर्माण से जुड़ा है, हालांकि वर्तमान में यह एक सक्रिय वाहन निर्माता के बजाय मुख्य रूप से निवेश कंपनी के रूप में कार्य कर रही है। यह कंपनी Bajaj Holdings and Investment Limited की सहायक इकाई है और एक गैर पंजीकृत कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में संचालित होती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार कंपनी की आय का प्रमुख स्रोत उसके निवेश पोर्टफोलियो से प्राप्त रिटर्न है, जिसमें समूह की अन्य कंपनियों में किया गया निवेश शामिल है। ऐसे में बाजार की परिस्थितियों और निवेश से मिलने वाले लाभ में उतार चढ़ाव का सीधा असर इसके वित्तीय परिणामों पर पड़ता है। हालिया तिमाही के नतीजे भी इसी प्रवृत्ति को दर्शाते हैं, जहां निवेश आधारित आय में कमी ने समग्र लाभप्रदता को प्रभावित किया है।

  • शेयर बाजार में कमजोरी: शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty 50 दोनों में गिरावट

    शेयर बाजार में कमजोरी: शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty 50 दोनों में गिरावट


    नई दिल्ली। सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार, 22 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। शुरुआती कारोबार में ही बाजार पर दबाव देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और NSE Nifty 50 लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए।

    Sensex और Nifty की कमजोर शुरुआत
    सुबह बाजार खुलते ही 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 253 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 79,000 के आसपास खुला। वहीं निफ्टी 50 भी 100 अंकों से ज्यादा फिसलकर 24,470 के करीब पहुंच गया। कुछ ही देर में गिरावट और बढ़ी और सेंसेक्स करीब 365 अंक टूटकर 78,900 के आसपास कारोबार करने लगा, जबकि निफ्टी भी करीब 90 अंक गिरकर 24,485 के स्तर पर आ गया।

    किन शेयरों में रही तेजी और गिरावट?
    बाजार में आई इस गिरावट के बीच कुछ शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली। Trent Ltd, Bajaj Finance, Maruti Suzuki और ITC Limited जैसे शेयरों में तेजी रही। वहीं दूसरी ओर HCL Technologies, Tech Mahindra, Infosys, Tata Consultancy Services और ICICI Bank के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

    मंगलवार को बाजार में रही थी तेजी
    इससे पहले मंगलवार को बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 753 अंक चढ़कर 79,273 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 211 अंक की बढ़त के साथ 24,576 के स्तर पर पहुंच गया था। उस दिन बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली थी।

    क्या है गिरावट की वजह?
    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बुधवार को आई गिरावट के पीछे मुख्य वजह मुनाफावसूली और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत हैं। पिछले सत्र में तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार पर दबाव बना। हालांकि जानकारों का कहना है कि इस तरह की गिरावट बाजार का सामान्य हिस्सा है। लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सोच-समझकर निवेश रणनीति बनानी चाहिए।

  • Gold & Petrol-Diesel Price Today: तेल के दाम स्थिर, सोने में उतार-चढ़ाव; जानें आपके शहर का ताजा रेट

    Gold & Petrol-Diesel Price Today: तेल के दाम स्थिर, सोने में उतार-चढ़ाव; जानें आपके शहर का ताजा रेट


    नई दिल्ली। देश में बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर तेल के दाम स्थिर बने हुए हैं, जिससे आम लोगों को राहत मिली है।

    देश के प्रमुख शहरों की बात करें तो दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर मिल रहा है। मुंबई में पेट्रोल ₹103.54 और डीजल ₹90.03 प्रति लीटर है। वहीं कोलकाता में पेट्रोल ₹105.41 और डीजल ₹92.02, चेन्नई में पेट्रोल ₹100.84 और डीजल ₹92.61 प्रति लीटर बिक रहा है। बेंगलुरु में पेट्रोल ₹102.96 और डीजल ₹90.99, जबकि हैदराबाद में पेट्रोल ₹107.50 और डीजल ₹95.70 प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के बावजूद भारत में कीमतें स्थिर हैं। इसके पीछे सरकार की नीतियां और चुनावी माहौल को भी एक कारण माना जा रहा है।

    सोने की कीमतों में फिर उछाल
    दूसरी ओर, सोने की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 कैरेट सोना करीब 1.01% की बढ़त के साथ ₹1,53,200 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया।

    इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, आज 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,355 प्रति 10 ग्राम है। वहीं 22 कैरेट सोना ₹1,39,557 और 18 कैरेट सोना ₹1,14,266 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है।

    अगर शहरों के हिसाब से देखें तो दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और लखनऊ में 24 कैरेट सोना ₹1,55,430 प्रति 10 ग्राम के आसपास बिक रहा है। मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में यह ₹1,55,280 के करीब है, जबकि चेन्नई में यह ₹1,55,990 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है।

    क्यों बढ़ रहे हैं सोने के दाम?
    विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा डॉलर की मजबूती और वैश्विक अनिश्चितता भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही है।

    शहरों में अलग-अलग क्यों होते हैं रेट?
    पेट्रोल-डीजल और सोने की कीमतें हर शहर में अलग होती हैं। इसकी मुख्य वजह केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स, परिवहन लागत और स्थानीय मांग होती है। इसी कारण अलग-अलग शहरों में कीमतों में फर्क देखने को मिलता है।

    क्या है आम लोगों के लिए मतलब?
    जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता आम जनता को राहत दे रही है, वहीं सोने की बढ़ती कीमतें खरीदारों और निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक हालात के आधार पर इनकी दिशा तय होगी।

  • RBI का बड़ा फैसला: ₹15,000 तक के ऑटो-पेमेंट पर नहीं लगेगा OTP, डिजिटल पेमेंट हुआ आसान

    RBI का बड़ा फैसला: ₹15,000 तक के ऑटो-पेमेंट पर नहीं लगेगा OTP, डिजिटल पेमेंट हुआ आसान


    नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए Reserve Bank of India (RBI) ने ई-मैंडेट से जुड़े नए नियम लागू कर दिए हैं। इस नए फ्रेमवर्क के तहत अब ₹15,000 तक के ऑटो-पेमेंट के लिए हर बार OTP डालने की जरूरत नहीं होगी।

    क्या है नया नियम?
    RBI की ओर से जारी Digital Payment E-Mandate Framework 2026 के अनुसार, बार-बार होने वाले ट्रांजैक्शन (Recurring Payments) को आसान बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है। नए नियम के तहत ₹15,000 तक के भुगतान बिना OTP के पूरे हो सकेंगे, जबकि इससे ज्यादा राशि के ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर OTP जरूरी होगा। हालांकि, कुछ खास कैटेगरी जैसे बीमा, म्यूचुअल फंड और क्रेडिट कार्ड बिल के लिए ₹1 लाख तक के ऑटो-पेमेंट बिना OTP के किए जा सकेंगे। यह सुविधा ग्राहकों को बार-बार OTP डालने की झंझट से राहत देगी।

    ई-मैंडेट क्या होता है?
    ई-मैंडेट एक ऐसी सुविधा है, जिसमें ग्राहक पहले से किसी पेमेंट की अनुमति दे देता है। इसके बाद तय समय पर अपने आप खाते से पैसे कट जाते हैं। यह सुविधा आमतौर पर OTT सब्सक्रिप्शन, मोबाइल बिल, EMI और इंश्योरेंस प्रीमियम जैसे भुगतान के लिए इस्तेमाल होती है।

    हर ट्रांजैक्शन से पहले मिलेगा अलर्ट
    RBI के नए नियम के मुताबिक, हर ऑटो-पेमेंट से कम से कम 24 घंटे पहले ग्राहक को नोटिफिकेशन भेजा जाएगा। इस नोटिफिकेशन में मर्चेंट का नाम, पेमेंट की राशि, तारीख और समय जैसी सभी जरूरी जानकारी दी जाएगी। ग्राहक SMS या ईमेल के जरिए यह अलर्ट प्राप्त कर सकता है।

    बदलाव या कैंसिल करने का नियम
    अगर ग्राहक ई-मैंडेट में कोई बदलाव करना चाहता है या उसे बंद करना चाहता है, तो इसके लिए OTP जरूरी होगा। ग्राहक किसी भी समय ऑटो-पेमेंट को रोक (opt-out) सकता है, लेकिन इसके लिए भी सुरक्षा प्रक्रिया का पालन करना होगा। पहला ट्रांजैक्शन हमेशा OTP के साथ ही पूरा किया जाएगा। अगर रजिस्ट्रेशन के समय ही पेमेंट किया जाता है, तो दोनों प्रक्रियाएं एक साथ पूरी हो सकती हैं। कुछ मामलों में प्री-नोटिफिकेशन जरूरी नहीं होगा, जैसे FASTag और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) के ऑटो रिचार्ज। इन सेवाओं में ऑटो-पेमेंट पहले से तय नियमों के तहत जारी रहेगा। RBI के इस नए कदम से डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और ज्यादा सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने की कोशिश की गई है। इससे ग्राहकों को राहत मिलेगी और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ग्लोबल मार्केट में हलचल… पेट्रोल-डीजल भी हो सकते हैं महंगे

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ग्लोबल मार्केट में हलचल… पेट्रोल-डीजल भी हो सकते हैं महंगे


    नई दिल्ली।
    वैश्विक बाजार (Global market) में कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil Prices) में मंगलवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) के एक बयान के बाद तेल की कीमतें करीब 5% तक बढ़ गईं, जिससे पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई। ट्रंप ने साफ कहा कि वे ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम (ceasefire) को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो अमेरिकी सेना कार्रवाई के लिए तैयार है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

    इस बयान का असर तुरंत बाजार पर दिखा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब $99.78 प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल WTI (West Texas Intermediate) भी बढ़कर लगभग $94.36 प्रति बैरल हो गया। तेल की कीमतों में यह उछाल सीधे तौर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का नतीजा है।


    क्यों बढ़ी तेल की कीमत?

    तेल की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईरान-अमेरिका तनाव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने एक ईरानी ऑयल टैंकर को समुद्र में रोक लिया, जिससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि ईरान शांति वार्ता में शामिल होगा या नहीं। ऐसी अनिश्चितता के कारण निवेशकों में डर बढ़ जाता है और वे तेल जैसे कमोडिटी में पैसा लगाते हैं, जिससे कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं।


    होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर

    तेल सप्लाई के लिए दुनिया का सबसे अहम रास्ता स्ट्रेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) भी इस तनाव से प्रभावित हुआ है। यह रास्ता दुनिया की लगभग 20% तेल और LNG सप्लाई को संभालता है, लेकिन हालात इतने खराब हैं कि पिछले 24 घंटों में यहां से सिर्फ 3 जहाज ही गुजर पाए। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो तेल की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।

    दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
    तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है, यानी कि इससे महंगाई (Inflation) बढ़ सकती है। यूरोप में तो हालात को देखते हुए एयरलाइंस के लिए भी एडवाइजरी जारी करने की तैयारी हो रही है, ताकि जेट फ्यूल की कमी जैसी स्थिति से निपटा जा सके।


    रूस और यूरोप की स्थिति

    इस बीच रूस और यूरोप के बीच तेल सप्लाई को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने संकेत दिया है कि एक अहम पाइपलाइन दोबारा शुरू हो सकती है, लेकिन दूसरी तरफ खबर है कि रूस मई से कुछ सप्लाई रोक सकता है। इससे भी वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।


    आगे क्या होगा?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रह सकता है और सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, तो तेल की कीमतें $100 के पार भी जा सकती हैं। हालांकि, अगर कूटनीतिक बातचीत सफल रहती है, तो कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है।

  • तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तूफानी तेजी सेंसेक्स 800 अंक उछला निफ्टी 24550 के पार

    तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तूफानी तेजी सेंसेक्स 800 अंक उछला निफ्टी 24550 के पार


    नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए मजबूत तेजी लेकर आया, जहां निवेशकों के बीच उत्साह और भरोसा दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिली। पूरे दिन के कारोबार में बाजार ने सकारात्मक रुख बनाए रखा और प्रमुख सूचकांक लगातार ऊंचाई की ओर बढ़ते नजर आए। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने इस तेजी को और मजबूती दी।

    कारोबार के दौरान सेंसेक्स में करीब 800 अंकों की तेज बढ़त दर्ज की गई और यह 79 हजार 296 के स्तर के आसपास पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 24 हजार 550 के पार कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार की इस तेजी ने निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया और खरीदारी का रुझान बढ़ा।

    इस उछाल का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। ब्रेंट क्रूड के दाम 94 से 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर चिंताएं कुछ कम हुईं। तेल की कीमतों में नरमी से कंपनियों की लागत घटने की उम्मीद बढ़ी, जिसका असर सीधे तौर पर शेयर बाजार पर देखने को मिला।

    इसके साथ ही एशियाई बाजारों में आई मजबूती ने भी भारतीय बाजार को सहारा दिया। एशिया के प्रमुख बाजारों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला, जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी और घरेलू बाजार में भी खरीदारी तेज हो गई। वैश्विक स्तर पर स्थिरता के संकेतों ने भारतीय निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।

    सेक्टोरल स्तर पर देखें तो बैंकिंग शेयरों ने बाजार की तेजी में सबसे अहम भूमिका निभाई। बड़े निजी बैंकों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे निफ्टी बैंक इंडेक्स में करीब डेढ़ प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। वित्तीय शेयरों में आई इस तेजी ने पूरे बाजार को ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    रियल्टी सेक्टर ने आज सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और इसमें करीब तीन प्रतिशत के आसपास की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा मेटल, ऑटो, इंफ्रास्ट्रक्चर और पीएसयू बैंक सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इससे यह साफ संकेत मिला कि बाजार में व्यापक स्तर पर निवेशकों की भागीदारी बनी हुई है और तेजी केवल कुछ ही सेक्टरों तक सीमित नहीं है।

    आईटी सेक्टर ने भी आज मजबूती दिखाई और शुरुआती कमजोरी से उबरकर इसमें सुधार देखने को मिला। प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि कुछ इंश्योरेंस शेयरों में हल्की कमजोरी देखने को मिली, लेकिन इसका असर पूरे बाजार पर सीमित रहा।

    बाजार के आंकड़ों के अनुसार अधिकतर शेयरों में तेजी देखने को मिली, जिससे निवेशकों के बीच सकारात्मक भावना और मजबूत हुई। वोलैटिलिटी इंडेक्स में गिरावट यह संकेत देती है कि बाजार में घबराहट कम हुई है और निवेशक अधिक आत्मविश्वास के साथ ट्रेडिंग कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी का 24 हजार 300 के ऊपर बने रहना बाजार के लिए मजबूत संकेत है। आने वाले समय में 24 हजार 450 से 24 हजार 500 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि नीचे की ओर 24 हजार 150 से 24 हजार 200 का स्तर सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। हालांकि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम बाजार की दिशा पर असर डाल सकते हैं।

  • सोने में फिर जोरदार उछाल चांदी की कीमत गिरी बाजार में बढ़ी हलचल 10 ग्राम गोल्ड ₹1.52 लाख के पार

    सोने में फिर जोरदार उछाल चांदी की कीमत गिरी बाजार में बढ़ी हलचल 10 ग्राम गोल्ड ₹1.52 लाख के पार


    नई दिल्ली: देश के सर्राफा बाजार में आज फिर कीमती धातुओं के दामों में उतार चढ़ाव देखने को मिला है। निवेशकों और ग्राहकों के लिए यह बदलाव एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। आज के ताजा कारोबार में सोने की कीमत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है जबकि चांदी के भाव में गिरावट आई है, जिससे बाजार में हल्की अस्थिरता का माहौल देखा जा रहा है।

    आज 24 कैरेट सोने की कीमत में मामूली लेकिन महत्वपूर्ण बढ़त देखने को मिली है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 10 ग्राम सोना बढ़कर लगभग ₹1,52,155 के स्तर पर पहुंच गया है। इससे पहले इसके दाम थोड़े कम थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू मांग में बदलाव के चलते इसमें उछाल देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि शादी और त्योहारी सीजन की मांग के कारण भी सोने की कीमतों पर असर पड़ रहा है।

    दूसरी ओर चांदी के बाजार में गिरावट दर्ज की गई है। एक किलो चांदी का भाव घटकर लगभग ₹2,50,063 के आसपास पहुंच गया है। पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में इसमें कुछ सौ रुपये की कमी आई है। चांदी की कीमतों में यह गिरावट औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार के दबाव के कारण बताई जा रही है। हालांकि जानकारों का कहना है कि चांदी की कीमतें अक्सर ज्यादा उतार चढ़ाव दिखाती हैं क्योंकि इसका उपयोग निवेश के साथ साथ उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है।

    देश के प्रमुख शहरों में सोने के भाव में थोड़ा अंतर देखने को मिला है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, जयपुर और अन्य बड़े शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग समान स्तर पर बनी हुई है, जो ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेंड कर रही है। वहीं चेन्नई जैसे शहरों में यह दर थोड़ी अधिक दर्ज की गई है। यह अंतर स्थानीय टैक्स और परिवहन लागत के कारण देखा जाता है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय संकेतों, डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में बदलाव से प्रभावित होती हैं। जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी कीमत में बढ़ोतरी होती है। इसी तरह चांदी की कीमतें भी वैश्विक मांग और औद्योगिक उपयोग पर निर्भर करती हैं।

    निवेशकों के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोना खरीदते समय उसकी शुद्धता की जांच करना बेहद जरूरी है। हमेशा हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए, जिससे उसकी गुणवत्ता और असली होने की पुष्टि हो सके। इसके साथ ही खरीदारी से पहले बाजार भाव की सही जानकारी लेना भी आवश्यक माना जाता है ताकि किसी प्रकार का नुकसान न हो।

    वहीं चांदी की खरीदारी में भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है क्योंकि बाजार में नकली धातुओं की संभावना बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार सरल परीक्षण जैसे चुंबक परीक्षण, बर्फ परीक्षण और कपड़े से रगड़कर जांच जैसी विधियों से इसकी शुद्धता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

  • अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम

    अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम


    नई दिल्ली: देश के ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही अदाणी पावर लिमिटेड ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है कंपनी ने एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली स्टेप डाउन सहायक इकाई के गठन की घोषणा की है जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में काम करेगी इस कदम को भारत के दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप एक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है

    कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड ने रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक नई इकाई का गठन किया है यह नई कंपनी 20 अप्रैल 2026 को स्थापित की गई है और इसे 5 लाख रुपए की अधिकृत पूंजी के साथ शुरू किया गया है इस पूंजी को 10 रुपए प्रति शेयर के 50 हजार इक्विटी शेयरों में विभाजित किया गया है

    इस नई इकाई की संरचना को देखें तो यह पूरी तरह से समूह के नियंत्रण में है रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड के पास है और अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की पूरी हिस्सेदारी अदाणी पावर लिमिटेड के पास है इस प्रकार यह कंपनी समूह की एक स्टेप डाउन सहायक इकाई के रूप में कार्य करेगी जो न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशेगी

    इसी क्रम में समूह की एक अन्य इकाई ने भी न्यूक्लियर क्षेत्र में अपनी सक्रियता दिखाई है अदाणी एनर्जी ने कोस्टल महा एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक और स्टेप डाउन पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी का गठन किया है यह इकाई परमाणु ऊर्जा के उत्पादन ट्रांसमिशन और वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में संलग्न रहेगी जिससे ऊर्जा क्षेत्र में विविधता और मजबूती आएगी

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल व्यावसायिक विस्तार तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के स्वच्छ और सतत ऊर्जा भविष्य की दिशा में भी एक बड़ा संकेत है देश तेजी से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से हटकर स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ रहा है और न्यूक्लियर एनर्जी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है

    वर्तमान समय में भारत की स्थापित न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता लगभग 8 दशमलव 7 गीगावाट है लेकिन देश ने वर्ष 2047 तक इसे बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है

    अदाणी समूह का यह कदम दर्शाता है कि वह भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो को विविध बना रहा है और नई तकनीकों तथा क्षेत्रों में निवेश कर रहा है न्यूक्लियर एनर्जी में यह विस्तार न केवल कंपनी के लिए नए अवसर खोलेगा बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगा