Category: Economy

  • Stock Market Closing: बैंकिंग शेयरों की तेजी और क्रूड ऑयल में नरमी से लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ भारतीय बाजार

    Stock Market Closing: बैंकिंग शेयरों की तेजी और क्रूड ऑयल में नरमी से लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ भारतीय बाजार

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। निवेशकों की सकारात्मक धारणा, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 373.76 अंकों की बढ़त के साथ 78,954.76 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 11.35 अंक चढ़कर 24,636.00 पर पहुंच गया। निफ्टी का 24,600 के ऊपर बंद होना बाजार की मजबूती का संकेत माना जा रहा है।

    कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंतिम चरण में चुनिंदा हैवीवेट और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। इससे पहले मंगलवार की गिरावट के बाद भी बाजार ने वापसी करते हुए लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज की है। निवेशकों का मानना है कि घरेलू आर्थिक संकेतकों और वैश्विक परिस्थितियों में सुधार से आगे भी बाजार को समर्थन मिल सकता है।

    सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो पीएसयू बैंक शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, फाइनेंशियल सर्विसेज और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मीडिया, रियल्टी, ऑटो, मेटल और आईटी सेक्टर में मुनाफावसूली के कारण गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद व्यापक बाजार में स्मॉलकैप शेयरों की मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा।

    निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में एसबीआई, बीईएल, टाइटन, श्रीराम फाइनेंस, सिप्ला और इटरनल में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। वहीं पावर ग्रिड, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, टीसीएस और बजाज ऑटो के शेयर दबाव में रहे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और पश्चिम एशिया में समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने की दिशा में जारी कूटनीतिक प्रयासों ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है। इससे महंगाई पर दबाव कम होने और कंपनियों की लागत घटने की उम्मीद बढ़ी है, जिसका सकारात्मक असर कॉर्पोरेट मुनाफे पर पड़ सकता है। इसी वजह से निवेशकों का भरोसा बाजार में बना हुआ है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के स्थिर नीतिगत रुख और आर्थिक विकास को लेकर सकारात्मक संकेतों ने भी निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है। बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में आई खरीदारी इसी भरोसे को दर्शाती है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों की संभावना निवेशकों को आकर्षित कर सकती है।

    हालांकि कुछ क्षेत्रों में मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन स्मॉलकैप और चुनिंदा वैल्यू शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। विशेष रूप से ऊर्जा, टेलीकॉम और रिटेल से जुड़े कारोबार में लंबी अवधि की संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी। इससे बाजार का समग्र रुख सकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहे।

  • ओल्ड मॉन्क, रॉयल चैलेंज और मैकडॉवेल्स समेत कई शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक, एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई

    ओल्ड मॉन्क, रॉयल चैलेंज और मैकडॉवेल्स समेत कई शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक, एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई

    नई दिल्ली । खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को लेकर देश में नियामकीय सख्ती के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कई लोकप्रिय शराब उत्पादों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने नियमों के कथित उल्लंघन, भ्रामक दावों और बिना अनुमति वाले फ्लेवर के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में कई प्रसिद्ध शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इस कार्रवाई के बाद शराब उद्योग में हलचल तेज हो गई है और संबंधित कंपनियों से जवाब भी मांगा जा रहा है।

    एफएसएसएआई के अनुसार जांच और प्रयोगशाला परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कुछ उत्पादों में ऐसे बाहरी फ्लेवर का उपयोग किया गया, जिनकी अनुमति निर्धारित मानकों के तहत नहीं थी। नियामक का कहना है कि रम और व्हिस्की जैसे उत्पादों में स्वाद और खुशबू का विकास उत्पादन की प्राकृतिक प्रक्रिया, जैसे फर्मेंटेशन, डिस्टिलेशन और मैच्योरेशन के माध्यम से होना चाहिए। यदि किसी उत्पाद में कृत्रिम या बाहरी फ्लेवर मिलाए जाते हैं, तो उसे उसी श्रेणी के अनुरूप स्पष्ट रूप से लेबल किया जाना आवश्यक है।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ उत्पाद मुख्य रूप से एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल या न्यूट्रल स्पिरिट से तैयार किए गए थे और बाद में उनमें स्वाद तथा खुशबू के लिए अतिरिक्त फ्लेवर मिलाए गए। नियामक का मानना है कि ऐसे उत्पादों को सामान्य रम या व्हिस्की के रूप में प्रस्तुत करना उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है। इसलिए ऐसे उत्पादों की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट करने के लिए उचित लेबलिंग अनिवार्य है, ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।

    कार्रवाई के दौरान जिन उत्पादों पर रोक लगाई गई है उनमें ओल्ड मॉन्क के कुछ वेरिएंट, मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की, रॉयल चैलेंज व्हिस्की, बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की, ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम, सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर XXX रम सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। नियामक का कहना है कि इन उत्पादों की बिक्री तब तक प्रतिबंधित रहेगी, जब तक संबंधित नियमों और मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता।

    एफएसएसएआई ने यह भी कहा कि कुछ उत्पादों पर किए गए आयु और गुणवत्ता संबंधी दावे उपलब्ध तथ्यों से मेल नहीं खाते थे। ऐसे दावों को उपभोक्ताओं के लिए भ्रामक माना गया है। नियामक ने स्पष्ट किया कि खाद्य और पेय पदार्थों की पैकेजिंग पर दी जाने वाली प्रत्येक जानकारी सत्य, प्रमाणित और निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। यदि किसी उत्पाद में फ्लेवर आधारित विशेषताएं हैं तो उन्हें उसी रूप में प्रदर्शित किया जाना चाहिए, न कि मानक श्रेणी के उत्पाद के रूप में।

    इस कार्रवाई को खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रभावी पालन और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शराब उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण, पारदर्शी लेबलिंग और नियामकीय अनुपालन पर अधिक जोर दिया जाएगा। आने वाले समय में संबंधित कंपनियां नियामकीय निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक सुधार कर सकती हैं, जबकि उपभोक्ताओं को भी उत्पाद खरीदते समय लेबल और गुणवत्ता संबंधी जानकारी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

  • शेयर बाजार में तेजी का माहौल, जूनिपर ग्रीन एनर्जी की दमदार लिस्टिंग ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    शेयर बाजार में तेजी का माहौल, जूनिपर ग्रीन एनर्जी की दमदार लिस्टिंग ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान सकारात्मक रुख देखने को मिला। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 250 अंकों की बढ़त के साथ 78,850 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी भी मामूली तेजी के साथ 24,650 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती घंटे में निवेशकों की ओर से बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। कारोबार के दौरान निवेशकों का रुझान चुनिंदा बड़े शेयरों की ओर अधिक दिखाई दिया, जिससे बाजार का माहौल सकारात्मक बना रहा।

    आज के कारोबार में बैंकिंग कंपनियों के शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी निवेशकों ने भरोसा दिखाया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर मजबूत निवेश गतिविधियों और चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी के कारण बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है। हालांकि वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के चलते निवेशक सतर्क भी नजर आए और सीमित दायरे में कारोबार जारी रहा।

    इसी बीच रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र की कंपनी जूनिपर ग्रीन एनर्जी ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की। कंपनी का शेयर राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज पर 245 रुपये और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर 242 रुपये के स्तर पर सूचीबद्ध हुआ। यह कंपनी के 225 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक रहा। मजबूत लिस्टिंग ने उन निवेशकों को शुरुआती दिन ही लाभ दिया जिन्होंने कंपनी के सार्वजनिक निर्गम में निवेश किया था।

    कंपनी का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम 30 जुलाई से 3 अगस्त के बीच निवेशकों के लिए खुला था। इस इश्यू का प्राइस बैंड 214 से 225 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। निवेशकों की अच्छी भागीदारी के चलते इस निर्गम को लगभग 7.97 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं और निवेशकों के सकारात्मक रुख का लाभ कंपनी को सूचीबद्ध होने के पहले ही दिन मिला।

    दूसरी ओर एशियाई बाजारों में कमजोरी का माहौल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग सभी प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता और विभिन्न आर्थिक संकेतकों का असर एशियाई बाजारों पर स्पष्ट रूप से नजर आया। वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान मिला-जुला प्रदर्शन दर्ज किया गया, जहां डाउ जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में हल्की गिरावट रही।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो हाल के सात कारोबारी दिनों में उन्होंने कुल 2,703 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की है। हालांकि ताजा कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों की ओर से सीमित बिकवाली दर्ज की गई, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को संतुलित बनाए रखा। पिछले कारोबारी दिन भी सेंसेक्स 152 अंकों की बढ़त के साथ 78,581 के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे दिन शुरुआती तेजी ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी भी घरेलू बाजार में बना हुआ है और आगामी कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कॉर्पोरेट गतिविधियों पर भी बाजार की नजर रहेगी।

  • सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी, अगस्त के छह दिनों में निवेशकों को मिला मजबूत तेजी का संकेत

    सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी, अगस्त के छह दिनों में निवेशकों को मिला मजबूत तेजी का संकेत


    नई दिल्ली ।
    घरेलू सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जोरदार तेजी दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव प्रति 10 ग्राम ₹2,735 बढ़कर ₹1,48,361 पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत ₹931 की बढ़त के साथ ₹2,25,493 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। अगस्त महीने की शुरुआत से अब तक केवल छह दिनों के भीतर सोना ₹5,501 और चांदी ₹7,198 महंगी हो चुकी है। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों और आभूषण खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। दिल्ली, जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोना लगभग ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है। भोपाल, पटना और अहमदाबाद में भी कीमतें लगभग इसी स्तर पर बनी हुई हैं, जबकि मुंबई, कोलकाता और रायपुर में भाव कुछ कम रहने के बावजूद रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बने हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि पूरे देश में सर्राफा बाजार में तेजी का माहौल कायम है।

    कैरेट के आधार पर भी सोने की कीमतों में उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला। 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,48,361, 22 कैरेट का ₹1,35,899, 18 कैरेट का ₹1,11,271 और 14 कैरेट सोने का भाव ₹86,791 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। शुद्धता के अनुसार कीमतों में यह अंतर उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत और बजट के अनुरूप विकल्प चुनने का अवसर देता है।

    यदि पूरे वर्ष के प्रदर्शन पर नजर डालें तो वर्ष 2026 में अब तक सोने की कीमत में लगभग ₹15 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। वर्ष 2025 के अंतिम कारोबारी दिन सोने का भाव करीब ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर ₹1.48 लाख के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि चांदी की कीमत साल की शुरुआत की तुलना में अभी भी कुछ नीचे बनी हुई है। वर्ष के दौरान दोनों धातुओं ने अपने उच्चतम स्तर भी छुए थे, जिसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तर पर भी सोना और चांदी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। उनका सुझाव है कि निवेश एकमुश्त करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से किया जाए, जिससे कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सके। उनका अनुमान है कि यदि वैश्विक और घरेलू परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो वर्ष के अंत तक सोना ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2.80 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है।

    जो निवेशक भौतिक सोना या चांदी खरीदने के बजाय बाजार आधारित विकल्प चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड और सिल्वर ETF भी एक प्रभावी माध्यम माने जा रहे हैं। इन योजनाओं में निवेश शेयर बाजार की तरह डीमैट खाते के माध्यम से किया जा सकता है। इसमें वास्तविक धातु की डिलीवरी नहीं मिलती, बल्कि निवेशक को उस समय के बाजार मूल्य के अनुसार लाभ या हानि प्राप्त होती है। कम राशि से निवेश शुरू करने की सुविधा के कारण यह विकल्प छोटे निवेशकों के बीच भी लगातार लोकप्रिय हो रहा है।

  • मेटा के एआई मॉडल ने टेस्टिंग के दौरान बाहरी सिस्टम में लगाई सेंध, इंटरनेट कनेक्शन की गड़बड़ी बनी वजह

    मेटा के एआई मॉडल ने टेस्टिंग के दौरान बाहरी सिस्टम में लगाई सेंध, इंटरनेट कनेक्शन की गड़बड़ी बनी वजह

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती क्षमताओं के बीच एक नया मामला सामने आया है, जिसने एआई सुरक्षा और परीक्षण प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। मेटा ने खुलासा किया है कि उसके एक एआई मॉडल ने साइबर सिक्योरिटी परीक्षण के दौरान अनजाने में इंटरनेट तक पहुंच बना ली और इसके बाद एक बाहरी सर्विस सिस्टम की सुरक्षा कमजोरी का फायदा उठाकर उसमें अनधिकृत प्रवेश कर लिया। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह घटना परीक्षण के दौरान हुई तकनीकी गड़बड़ी का परिणाम थी और इसकी विस्तृत जांच जारी है।

    कंपनी के अनुसार यह घटना उसके हाल ही में जारी किए गए एआई मॉडल ‘म्यूज स्पार्क 1.1’ के परीक्षण के दौरान हुई। परीक्षण के लिए तैयार किए गए विशेष वातावरण में एक गलत कॉन्फिगरेशन के कारण मॉडल इंटरनेट से कनेक्ट हो गया। सामान्य परिस्थितियों में इस प्रकार के परीक्षण पूरी तरह नियंत्रित और सीमित नेटवर्क पर किए जाते हैं, लेकिन तकनीकी त्रुटि के चलते मॉडल बाहरी नेटवर्क तक पहुंच गया। इसके बाद उसने एक थर्ड पार्टी सर्विस में मौजूद सुरक्षा कमजोरी का उपयोग करते हुए अनधिकृत पहुंच प्राप्त कर ली।

    मेटा ने कहा कि परीक्षण प्रक्रिया एक स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी पार्टनर के सहयोग से संचालित की जा रही थी। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि तकनीकी सेटअप में हुई कॉन्फिगरेशन संबंधी गलती के कारण यह स्थिति बनी। कंपनी ने जोर देकर कहा कि यह किसी जानबूझकर किए गए साइबर हमले का मामला नहीं था, बल्कि परीक्षण वातावरण में हुई चूक के कारण उत्पन्न हुई अप्रत्याशित घटना थी। पूरे घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा की जा रही है और सभी तथ्य सामने आने के बाद विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया भर की प्रमुख एआई कंपनियां अधिक सक्षम और स्वायत्त मॉडल विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान अन्य बड़ी एआई कंपनियों ने भी परीक्षण के दौरान अपने मॉडल्स द्वारा बाहरी सिस्टम तक अनपेक्षित पहुंच बनाने जैसी घटनाओं की जानकारी साझा की थी। इन घटनाओं ने यह सवाल और गहरा कर दिया है कि अत्यधिक सक्षम एआई मॉडल्स के परीक्षण के लिए वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक एआई एजेंट अब केवल निर्देशों का पालन करने तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि वे नेटवर्क संरचना, सिस्टम की कमजोरियों और संभावित सुरक्षा खामियों की पहचान करने में भी पहले से अधिक सक्षम हो रहे हैं। यदि परीक्षण वातावरण पूरी तरह सुरक्षित और अलग-थलग न हो तो इस प्रकार की घटनाएं भविष्य में बड़े जोखिम का कारण बन सकती हैं। यही वजह है कि नियंत्रित परीक्षण ढांचे, मजबूत नेटवर्क आइसोलेशन और बहुस्तरीय सुरक्षा उपायों की आवश्यकता लगातार बढ़ती जा रही है।

    घटना के बाद एआई सुरक्षा मानकों और परीक्षण प्रक्रियाओं की समीक्षा की मांग भी तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई पीढ़ी के एआई मॉडल्स की बढ़ती क्षमताओं को देखते हुए केवल पारंपरिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। कंपनियों को अधिक कठोर परीक्षण प्रोटोकॉल, सुरक्षित नेटवर्क संरचना और स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट अपनाने होंगे ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। फिलहाल मेटा पूरे मामले की जांच में जुटा है और अंतिम निष्कर्ष आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • प्लास्टिक के 10-20 रुपये के नोट कब आएंगे? आरबीआई गवर्नर ने फील्ड ट्रायल और लॉन्च प्लान पर दी अहम जानकारी

    प्लास्टिक के 10-20 रुपये के नोट कब आएंगे? आरबीआई गवर्नर ने फील्ड ट्रायल और लॉन्च प्लान पर दी अहम जानकारी

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक देश में पॉलिमर यानी प्लास्टिक बैंक नोटों को प्रचलन में लाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल जारी है। इन परीक्षणों के नतीजों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर बाजार में उतारने का अंतिम फैसला लिया जाएगा। यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं तो वित्त वर्ष 2027-28 तक इन नोटों को चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाने की संभावना है।

    आरबीआई के अनुसार, पॉलिमर नोटों का परीक्षण देश के विभिन्न क्षेत्रों और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये नोट भारतीय मौसम, लगातार उपयोग और दैनिक लेनदेन की परिस्थितियों में कितने टिकाऊ और प्रभावी साबित होते हैं। परीक्षण के दौरान नोटों की मजबूती, घिसाव, सुरक्षा और परिचालन संबंधी कई पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।

    केंद्रीय बैंक का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक समय तक उपयोग योग्य रहते हैं। विशेष रूप से 10 और 20 रुपये जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों का लेनदेन सबसे अधिक होता है, जिसके कारण वे जल्दी खराब हो जाते हैं। ऐसे में पॉलिमर सामग्री से बने नोट लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं और बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता भी कम हो सकती है। इससे नोटों की छपाई और प्रतिस्थापन पर होने वाले खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।

    सरकार पहले ही 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे चुकी है। पायलट परियोजना के तहत दोनों मूल्यवर्ग के बड़ी संख्या में नोट जारी कर विभिन्न परिस्थितियों में उनकी उपयोगिता का परीक्षण किया जा रहा है। इन परीक्षणों से प्राप्त आंकड़ों और अनुभवों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

    पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। इनमें पारदर्शी विंडो, उन्नत सुरक्षा फीचर और नकली नोटों की पहचान आसान बनाने वाली तकनीक शामिल हो सकती है। इससे जालसाजी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही नोटों की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा।

    आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागजी मुद्रा को पूरी तरह बंद करने की कोई योजना नहीं है। पॉलिमर नोट जारी होने के बाद भी मौजूदा कागजी नोट कानूनी रूप से मान्य रहेंगे और दोनों प्रकार की मुद्रा समानांतर रूप से प्रचलन में रहेगी। इससे लोगों को नए नोटों को अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और नकदी व्यवस्था पर किसी प्रकार का अचानक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है तो भारत भी उन देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां पॉलिमर मुद्रा का व्यापक उपयोग किया जाता है। इससे नोटों की उम्र बढ़ाने, नकली मुद्रा पर अंकुश लगाने और नकदी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल सभी की नजर फील्ड ट्रायल के परिणामों और आरबीआई के अंतिम निर्णय पर बनी हुई है।

  • कीमती धातुओं में जबरदस्त तेजी, गोल्ड-सिल्वर मार्केट ने बनाया नया रिकॉर्ड; क्या है वजह?

    कीमती धातुओं में जबरदस्त तेजी, गोल्ड-सिल्वर मार्केट ने बनाया नया रिकॉर्ड; क्या है वजह?


    नई दिल्ली। पिछले 48 घंटों में सोना और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है जिसने निवेशकों और खरीदारों दोनों को हैरान कर दिया है। घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक कीमती धातुओं में तेज खरीदारी देखने को मिली है। महज दो दिनों के भीतर सोने की कीमत में 5750 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई जबकि चांदी ने 11000 रुपये से अधिक की छलांग लगाकर बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भू राजनीतिक घटनाक्रमों ने निवेशकों का रुख एक बार फिर सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ दिया है।

    एमसीएक्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार बुधवार रात सोना लगभग 148650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ जबकि सोमवार को यह 142900 रुपये के स्तर पर था। यानी केवल 48 घंटे में सोने की कीमत 5750 रुपये बढ़ गई। इसी अवधि में चांदी 216506 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर करीब 227590 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। इस तरह चांदी में भी 11084 रुपये की तेज बढ़त दर्ज की गई।

    हालांकि इतनी तेज रिकवरी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं अभी भी अपने ऑल टाइम हाई से नीचे कारोबार कर रही हैं। सोना जनवरी में बने अपने रिकॉर्ड स्तर 193096 रुपये प्रति 10 ग्राम से अभी भी लगभग 44446 रुपये सस्ता है। वहीं चांदी भी अपने रिकॉर्ड स्तर 420048 रुपये प्रति किलोग्राम से करीब 192458 रुपये नीचे बनी हुई है। इसका मतलब है कि हालिया तेजी के बावजूद लंबी अवधि के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने में अभी काफी दूरी बाकी है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। सोना 4300 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया जो पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है। चांदी में भी लगातार मजबूती दर्ज की गई और निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर इन दोनों धातुओं में दिलचस्पी दिखाई। वैश्विक बाजार में आई इस तेजी का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस उछाल की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया से आई सकारात्मक खबरें हैं। ईरान और ओमान के बीच संभावित समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सुचारु रूप से खोलने की उम्मीद ने वैश्विक बाजार की धारणा बदल दी है। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ और महंगाई को लेकर निवेशकों की चिंता भी कुछ हद तक घटी। इसी कारण वित्तीय बाजारों में स्थिरता लौटने लगी और सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश बढ़ गया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ बातचीत को लेकर दिए गए सकारात्मक बयान ने भी बाजार को मजबूती दी है। निवेशकों को उम्मीद है कि तनाव कम होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। इसके साथ ही अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर भी बाजार की उम्मीदें बदली हैं। अब माना जा रहा है कि इस वर्ष ब्याज दरों में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी होगी। कम ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए सकारात्मक माना जाता है क्योंकि इन पर ब्याज नहीं मिलता और निवेशक इन्हें सुरक्षित विकल्प के रूप में चुनते हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल पूरी तरह वैश्विक घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी मौद्रिक नीति पर निर्भर करेगी। यदि भू राजनीतिक तनाव कम होता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रहती है तो कीमतों में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय बाजार की दिशा पर नजर रखते हुए सोच समझकर निवेश करना चाहिए।

  • UPI, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड, जानिए कौन-सा पेमेंट विकल्प सबसे सस्ता, सुरक्षित और सबसे ज्यादा फायदेमंद

    UPI, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड, जानिए कौन-सा पेमेंट विकल्प सबसे सस्ता, सुरक्षित और सबसे ज्यादा फायदेमंद

    नई दिल्ली । भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से आम लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। बाजार, ऑनलाइन शॉपिंग, बिल भुगतान या यात्रा टिकट बुकिंग जैसे अधिकांश काम अब UPI, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से आसानी से किए जा रहे हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर भुगतान का सबसे सस्ता और फायदेमंद तरीका कौन-सा है। इसका जवाब उपयोग के उद्देश्य, खर्च की आदत और मिलने वाले लाभों पर निर्भर करता है।

    सामान्य तौर पर बैंक खाते से किए जाने वाले UPI भुगतान पर ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता। अधिकांश लेनदेन बिना किसी अतिरिक्त लागत के पूरे हो जाते हैं और भुगतान की पूरी राशि सीधे सामने वाले के खाते में पहुंचती है। यही कारण है कि रोजमर्रा की खरीदारी, छोटे भुगतान और तत्काल लेनदेन के लिए UPI को सबसे सुविधाजनक और किफायती विकल्प माना जाता है। इसकी तेज प्रक्रिया और व्यापक स्वीकार्यता ने इसे देश का सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान माध्यम बना दिया है।

    वहीं डेबिट और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए जाने वाले भुगतान में कुछ परिस्थितियों में अतिरिक्त शुल्क जुड़ सकता है। कई मामलों में बैंक और पेमेंट नेटवर्क व्यापारियों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वसूलते हैं। हालांकि यह शुल्क आमतौर पर ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाता, लेकिन कुछ व्यापारी या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सुविधा शुल्क के रूप में इसकी भरपाई ग्राहकों से कर सकते हैं। विशेष रूप से ऑनलाइन टिकट बुकिंग या कुछ सेवाओं में अतिरिक्त शुल्क देखने को मिल सकता है।

    क्रेडिट कार्ड का सबसे बड़ा लाभ इसके साथ मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक, विशेष छूट और अन्य प्रीमियम सुविधाएं हैं। कई कार्डधारकों को एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस, यात्रा बीमा, शॉपिंग ऑफर और ब्याज-मुक्त क्रेडिट अवधि जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। यदि उपभोक्ता समय पर पूरा बिल चुका देता है तो इन सुविधाओं का लाभ बिना अतिरिक्त ब्याज के उठाया जा सकता है। लेकिन निर्धारित समय तक भुगतान नहीं करने पर ब्याज और लेट फीस का बोझ काफी बढ़ सकता है।

    डेबिट कार्ड उन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है जो सीधे अपने बैंक खाते से भुगतान करना चाहते हैं और कर्ज से बचना चाहते हैं। इसमें खर्च उसी राशि तक सीमित रहता है जो खाते में उपलब्ध होती है। दूसरी ओर क्रेडिट कार्ड जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने पर अधिक लाभ दे सकता है, लेकिन लापरवाही की स्थिति में यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बन सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और नियमित भुगतान के लिए UPI सबसे सस्ता और आसान विकल्प है, जबकि बड़े खर्च, ऑनलाइन खरीदारी और रिवॉर्ड्स का लाभ लेने के इच्छुक उपभोक्ताओं के लिए क्रेडिट कार्ड अधिक उपयोगी हो सकता है। वहीं डेबिट कार्ड उन लोगों के लिए संतुलित विकल्प है जो सीधे बैंक खाते से सुरक्षित भुगतान करना पसंद करते हैं। इसलिए किसी एक माध्यम को सभी परिस्थितियों में सर्वोत्तम नहीं कहा जा सकता, बल्कि आवश्यकता और भुगतान की प्रकृति के अनुसार सही विकल्प चुनना अधिक लाभदायक होता है।

  • सेंसेक्स निफ्टी में गुरुवार को रहेगा उतार चढ़ाव या मिलेगी तेजी निवेश से पहले जान लें अहम संकेत

    सेंसेक्स निफ्टी में गुरुवार को रहेगा उतार चढ़ाव या मिलेगी तेजी निवेश से पहले जान लें अहम संकेत


    नई दिल्ली। गुरुवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार की नजर घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के संकेतों पर रहेगी। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है और निवेशक हर नए आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे में गुरुवार का दिन भी निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि कई ऐसे फैक्टर हैं जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजारों का रुख भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत पर असर डाल सकता है। अगर अमेरिका और एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो सेंसेक्स और निफ्टी मजबूत शुरुआत कर सकते हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और डॉलर इंडेक्स की चाल भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकती है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    गुरुवार के कारोबार में बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर खास नजर रहेगी। अगर इन प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी का माहौल बना रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी गतिविधि देखने को मिल सकती है क्योंकि हाल के दिनों में इन शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को किसी भी अफवाह या छोटी अवधि की तेजी को देखकर जल्दबाजी में निवेश नहीं करना चाहिए। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर ही भरोसा बनाए रखना चाहिए। अच्छे वित्तीय प्रदर्शन मजबूत प्रबंधन और भविष्य की विकास संभावनाओं वाली कंपनियां लंबे समय में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं।

    गुरुवार को कई कंपनियों के तिमाही नतीजे भी निवेशकों के लिए अहम रहेंगे। उम्मीद से बेहतर या कमजोर परिणाम संबंधित शेयरों के साथ पूरे सेक्टर की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा देश और विदेश से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर भी बाजार की नजर रहेगी। महंगाई ब्याज दर और औद्योगिक उत्पादन से जुड़े संकेत भविष्य की निवेश रणनीति तय करने में मदद करेंगे।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नए निवेशक बिना पूरी जानकारी के किसी भी शेयर में पैसा लगाने से बचें। निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति कारोबार का भविष्य और जोखिम का सही आकलन करना जरूरी है। अगर किसी शेयर में बहुत तेजी आ चुकी है तो उसमें प्रवेश करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। वहीं गिरावट के दौरान मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध तरीके से निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

    कुल मिलाकर गुरुवार का कारोबारी सत्र कई महत्वपूर्ण संकेतों के बीच शुरू होगा। बाजार में तेजी और गिरावट दोनों की संभावना बनी रहेगी इसलिए निवेशकों को धैर्य के साथ सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए। सही रिसर्च और संतुलित निवेश रणनीति ही लंबे समय में बेहतर लाभ दिलाने का सबसे सुरक्षित तरीका मानी जाती है।

  • EPFO का ई-ऑफिस सिस्टम होगा अपग्रेड, शाम 6 से 9:30 बजे तक कई डिजिटल सेवाएं रहेंगी प्रभावित

    EPFO का ई-ऑफिस सिस्टम होगा अपग्रेड, शाम 6 से 9:30 बजे तक कई डिजिटल सेवाएं रहेंगी प्रभावित

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सभी सदस्यों, नियोक्ताओं और संबंधित अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। संगठन का ई-ऑफिस सिस्टम 5 अगस्त की शाम 6:00 बजे से रात 9:30 बजे तक निर्धारित तकनीकी अपग्रेडेशन के कारण अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं रहेगा। इस दौरान ई-ऑफिस से जुड़ी कई आंतरिक डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए उपयोगकर्ताओं को सलाह दी गई है कि जिन कार्यों की समय-सीमा निकट है, उन्हें निर्धारित समय से पहले पूरा कर लें।

    यह तकनीकी कार्य राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा किया जाएगा। अपग्रेडेशन के तहत ई-ऑफिस पोर्टल के मौजूदा संस्करण को नए और अधिक उन्नत संस्करण में बदला जाएगा। इसके साथ ही ई-फाइल सिस्टम का नया संस्करण भी लागू किया जाएगा, जिससे डिजिटल फाइल प्रबंधन और सिस्टम की कार्यक्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। पूरे अपग्रेडेशन की अवधि लगभग साढ़े तीन घंटे निर्धारित की गई है।

    रखरखाव के दौरान ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म पर आंतरिक फाइल प्रोसेसिंग, डिजिटल दस्तावेजों की आवाजाही और कार्यालयी कार्य अस्थायी रूप से रुक सकते हैं। इसका असर कुछ ऑनलाइन सेवाओं और भविष्य निधि से जुड़े कार्यों पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से पीएफ क्लेम की प्रोसेसिंग में मामूली देरी संभव है। इसके अलावा उमंग (UMANG) ऐप के माध्यम से उपलब्ध कुछ संबंधित सेवाओं के संचालन पर भी अस्थायी प्रभाव पड़ सकता है।

    ईपीएफओ ने उपयोगकर्ताओं से अनुरोध किया है कि वे इस निर्धारित समय से पहले अपने आवश्यक ऑनलाइन कार्य, दस्तावेजों की प्रक्रिया और अन्य समयबद्ध गतिविधियां पूरी कर लें। इससे अपग्रेडेशन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सकेगा। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अस्थायी व्यवधान केवल सिस्टम को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    तकनीकी उन्नयन के बाद ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म की कार्यक्षमता पहले की तुलना में बेहतर होने की उम्मीद है। नए संस्करण के लागू होने से सिस्टम की गति बढ़ेगी, फाइलों की प्रोसेसिंग अधिक तेज होगी और डिजिटल सेवाओं की दक्षता में सुधार आएगा। साथ ही डेटा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा स्तर भी जोड़े जाएंगे, जिससे उपयोगकर्ताओं की वित्तीय और व्यक्तिगत जानकारी की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर होने वाले ऐसे तकनीकी अपग्रेडेशन से डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ती है। इससे भविष्य में सिस्टम के धीमा होने, अचानक बंद होने या तकनीकी बाधाओं की संभावना कम होती है। ईपीएफओ ने भरोसा दिलाया है कि निर्धारित रखरखाव कार्य पूरा होने के बाद सभी सेवाएं सामान्य रूप से पुनः शुरू कर दी जाएंगी और उपयोगकर्ताओं को पहले से अधिक बेहतर डिजिटल अनुभव मिलेगा।