Category: Economy

  • भारत के घरों में रखा ₹315 लाख करोड़ का सोना बनेगा अर्थव्यवस्था की ताकत, गोल्ड मार्केट में Gen Z का बड़ा रोल

    भारत के घरों में रखा ₹315 लाख करोड़ का सोना बनेगा अर्थव्यवस्था की ताकत, गोल्ड मार्केट में Gen Z का बड़ा रोल


    नई दिल्ली। भारत में सोने को लेकर निवेश का नजरिया तेजी से बदल रहा है। कभी परंपरा और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाने वाला सोना अब डिजिटल निवेश और वित्तीय संपत्ति के रूप में भी देखा जाने लगा है। इस बदलाव में देश की Gen Z पीढ़ी की भूमिका अहम मानी जा रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ के मुताबिक, युवा पीढ़ी पारंपरिक आभूषणों की तुलना में डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF जैसे विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रही है।

    Gen Z बदल रही गोल्ड में निवेश की परंपरा
    नई पीढ़ी सोने को केवल विरासत के तौर पर संभालकर रखने के बजाय इसे एक एसेट के रूप में देख रही है। डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF में निवेश के पीछे आसान खरीदारी, कम मात्रा में निवेश और जरूरत पड़ने पर उसे कैश में बदलने जैसी सुविधाएं प्रमुख वजह हैं।

    WGC के मुताबिक, वर्ष 2035 तक भारत की Gen Z की कुल खरीद क्षमता 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। ऐसे में इस पीढ़ी की निवेश आदतों में बदलाव का असर देश के गोल्ड मार्केट के साथ-साथ व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

    घरों में 31 हजार टन से ज्यादा सोना
    भारत के घरों में 31 हजार टन से अधिक सोना मौजूद होने का अनुमान है। इसकी कीमत 315 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है। इसके मुकाबले भारत के पास करीब 880 टन का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व है। बड़ी मात्रा में घरेलू सोना अभी वित्तीय व्यवस्था का सक्रिय हिस्सा नहीं है।

    ASSOCHAM की एक रिपोर्ट में भी भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की विशाल मात्रा का जिक्र किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, अगर घरेलू सोने का एक छोटा हिस्सा भी वित्तीय साधनों में लगाया जाता है तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त पूंजी मिल सकती है।

    सिर्फ 2% सोना अर्थव्यवस्था से जुड़ा तो बड़ा फायदा
    रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि घरेलू सोने का सिर्फ 2 प्रतिशत हिस्सा भी वित्तीय साधनों में स्थानांतरित होने पर वर्ष 2047 तक भारत की GDP में 7.5 ट्रिलियन डॉलर तक का अतिरिक्त योगदान हो सकता है। वहीं, अगर घरों में रखा 5 प्रतिशत सोना अर्थव्यवस्था से जुड़ता है तो भारत का आयात बिल करीब 90 अरब डॉलर तक कम हो सकता है।

    गोल्ड को उत्पादक संपत्ति में बदलने की तैयारी
    विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू सोने को वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने पर मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए पूंजी उपलब्ध हो सकती है। गोल्ड मॉनिटाइजेशन, गोल्ड-लिंक्ड सेविंग स्कीम और गोल्ड लोन जैसे विकल्प इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। गोल्ड लोन के बढ़ते आंकड़े भी इस बदलाव की ओर संकेत करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में नवंबर 2025 तक गोल्ड लोन का आंकड़ा 24.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है।

    अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक संपत्ति बन सकता है सोना
    देश में 38 करोड़ से अधिक Gen Z की बड़ी आबादी है। इस पीढ़ी की बदलती निवेश प्राथमिकताएं गोल्ड मार्केट का स्वरूप बदल सकती हैं। अगर घरेलू सोना बड़ी मात्रा में वित्तीय प्रणाली में आता है तो बाजार में पूंजी की उपलब्धता बढ़ सकती है, निवेश के लिए अधिक संसाधन मिल सकते हैं और सोने के आयात पर निर्भरता घट सकती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की भी संभावना है। ऐसे में भारत के घरों में पड़ा पुस्तैनी सोना आने वाले वर्षों में सिर्फ आभूषण या विरासत नहीं, बल्कि देश की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

  • पश्चिम एशिया तनाव का असर, सेंसेक्स 456 अंक टूटा और निफ्टी 24,600 से नीचे बंद हुआ

    पश्चिम एशिया तनाव का असर, सेंसेक्स 456 अंक टूटा और निफ्टी 24,600 से नीचे बंद हुआ


    नई दिल्ली ।वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन दबाव देखने को मिला। पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके चलते प्रमुख घरेलू सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।

    बाजार बंद होने पर बीएसई सेंसेक्स 455.59 अंक यानी 0.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,499.17 के स्तर पर रहा। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 में 65.35 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,570.65 पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ निफ्टी 24,600 के स्तर से नीचे चला गया।

    व्यापक बाजार की बात करें तो तस्वीर पूरी तरह कमजोर नहीं रही। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.22 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.05 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिलता है कि दबाव मुख्य रूप से बड़े और प्रमुख शेयरों में ज्यादा दिखाई दिया।

    सेक्टरवार कारोबार में वित्तीय सेवाओं, निजी बैंकों और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। इसके विपरीत ऑटो और आईटी क्षेत्र में मजबूती देखने को मिली। मेटल और पीएसयू बैंक सूचकांकों ने भी बाजार की गिरावट के बीच बेहतर प्रदर्शन किया।

    निफ्टी 50 में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, टीसीएस, हिंडाल्को, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचसीएल टेक और एसबीआई प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और श्रीराम फाइनेंस पर बिकवाली का दबाव रहा।

    बाजार में शुक्रवार की कमजोरी की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में दोबारा बढ़ता तनाव रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी नई अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है। तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई, कंपनियों की लागत और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर संभावित असर को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ती है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर भी जारी है और अलग-अलग कंपनियों के परिणामों के आधार पर शेयरों में प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू कारोबार पर दबाव बनाया।

    हालांकि बाजार के मौजूदा रुख को पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और संभावित शांति समझौते की दिशा में प्रगति होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। इससे भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है।

    कच्चे तेल की कीमतों का स्तर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। इसलिए तेल की कीमतों में लगातार तेजी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि कीमतों में नरमी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बन सकती है।

    फिलहाल निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन्हीं संकेतों के आधार पर बाजार की दिशा तय होने की संभावना रहेगी।

  • तेल कंपनी में नौकरी का मौका, IOCL ने टेक्नीशियन, ग्रेजुएट और ट्रेड अप्रेंटिस के 433 पदों पर निकाली भर्ती

    तेल कंपनी में नौकरी का मौका, IOCL ने टेक्नीशियन, ग्रेजुएट और ट्रेड अप्रेंटिस के 433 पदों पर निकाली भर्ती

    नई दिल्ली । इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड में अप्रेंटिस के तौर पर काम करने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। कंपनी ने टेक्नीशियन, ग्रेजुएट और ट्रेड अप्रेंटिस के कुल 433 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन पदों के लिए योग्य उम्मीदवार 7 अगस्त 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तारीख 6 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थियों को अंतिम समय का इंतजार किए बिना निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करने की सलाह दी गई है।

    आईओसीएल की ओर से जारी भर्ती में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में स्थित केंद्रों के लिए रिक्तियां शामिल हैं। कुल 433 पदों में सबसे अधिक 121 पद उत्तर प्रदेश के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके बाद राजस्थान में 76, पंजाब में 57, दिल्ली में 50, हरियाणा में 37, चंडीगढ़ में 30, हिमाचल प्रदेश में 22, जम्मू-कश्मीर में 20 और उत्तराखंड में भी 20 पद शामिल हैं। अलग-अलग राज्यों में पदों का वितरण उम्मीदवारों के लिए अपने क्षेत्र के अनुसार आवेदन का अवसर उपलब्ध कराता है।

    इन रिक्तियों में टेक्नीशियन अप्रेंटिस के लिए मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इंस्ट्रूमेंटेशन, सिविल, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषय शामिल हैं। ट्रेड अप्रेंटिस के तहत फिटर, इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक और मशीनिस्ट जैसे ट्रेड में अवसर दिए गए हैं। इसके अलावा ग्रेजुएट अप्रेंटिस और डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद भी भर्ती में शामिल हैं। इस तरह अलग-अलग शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता रखने वाले युवाओं के लिए आवेदन का विकल्प उपलब्ध है।

    ट्रेड अप्रेंटिस पदों के लिए उम्मीदवार के पास मैट्रिक के साथ संबंधित ट्रेड में नियमित रूप से दो वर्ष का आईटीआई होना जरूरी है। टेक्नीशियन अप्रेंटिस के लिए संबंधित इंजीनियरिंग विषय में तीन वर्ष का नियमित फुल टाइम डिप्लोमा और न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। ग्रेजुएट अप्रेंटिस पदों के लिए बीबीए, बीए, बीकॉम, बीएससी या किसी अन्य विषय में नियमित फुल टाइम स्नातक डिग्री के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं। डेटा एंट्री ऑपरेटर पद के लिए उम्मीदवार का 12वीं या इंटरमीडिएट पास होना जरूरी है।

    आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 24 वर्ष निर्धारित है। आयु की गणना 31 अगस्त 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। चयन प्रक्रिया में आवेदन की जांच, मेरिट सूची, दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल फिटनेस टेस्ट शामिल होंगे। चयनित उम्मीदवारों को अप्रेंटिस प्रशिक्षण के दौरान लागू नियमों के अनुसार स्टाइपेंड दिया जाएगा।

    आवेदन प्रक्रिया 7 अगस्त को सुबह 10 बजे से शुरू हो चुकी है और 6 सितंबर को शाम 5 बजे तक चलेगी। उम्मीदवारों को संबंधित पद के लिए निर्धारित एनएटीएस या एनएपीएस पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन और आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अप्रेंटिस प्रशिक्षण के दौरान निर्धारित स्टाइपेंड के अलावा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से अन्य खर्चों के लिए 2,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाने का भी प्रावधान बताया गया है। ऐसे में आईटीआई, डिप्लोमा और ग्रेजुएशन कर चुके युवाओं के लिए यह भर्ती व्यावहारिक प्रशिक्षण और करियर की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।

  • भारत-चीन सीमा वार्ता में डिलिमिटेशन, सीमा प्रबंधन और ट्रांस-बॉर्डर सहयोग पर बातचीत, एलएसी पर शांति बनाए रखने पर जोर

    भारत-चीन सीमा वार्ता में डिलिमिटेशन, सीमा प्रबंधन और ट्रांस-बॉर्डर सहयोग पर बातचीत, एलएसी पर शांति बनाए रखने पर जोर

    नई दिल्ली । भारत और चीन ने सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र यानी डब्ल्यूएमसीसी की 36वीं बैठक में सीमा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। नई दिल्ली में 6 अगस्त को आयोजित बैठक में दोनों देशों ने सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, मौजूदा तंत्र को मजबूत करने और सीमा पार सहयोग से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए। वार्ता के दौरान लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी एलएसी पर मौजूदा स्थिति की भी समीक्षा की गई।

    बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुजीत घोष ने किया, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई चीन के विदेश मंत्रालय के बाउंड्री और ओशनिक अफेयर्स डिपार्टमेंट की महानिदेशक होउ यांकी ने की। दोनों पक्षों के बीच बातचीत को स्पष्ट और व्यावहारिक बताया गया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने और लंबित मुद्दों के समाधान के लिए संवाद को आगे बढ़ाना रहा।

    भारत और चीन ने इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। एलएसी पर किसी भी तरह की गलतफहमी या गलत आकलन को रोकने के लिए दोनों पक्षों ने मौजूदा राजनयिक और सैन्य माध्यमों का इस्तेमाल जारी रखने पर सहमति जताई।

    इन माध्यमों में डब्ल्यूएमसीसी के अलावा स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकें और पहले से निर्धारित अन्य संवाद तंत्र शामिल हैं। दोनों देशों का मानना है कि नियमित बातचीत के जरिए सीमा पर पैदा होने वाली परिस्थितियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है और लंबित मामलों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

    बैठक में 24वें विशेष प्रतिनिधि स्तर के दौर की वार्ता के परिणामों के बाद सीमा से जुड़े विषयों पर आगे चर्चा की गई। इसमें सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, संस्थागत तंत्र के निर्माण और सीमा पार सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में आपसी संवाद और समन्वय बनाए रखने की जरूरत पर सहमति जताई।

    भारत ने सीमा पार नदियों से संबंधित विशेषज्ञ स्तर के तंत्र की अगली बैठक जल्द आयोजित करने की आवश्यकता भी दोहराई। भारतीय पक्ष ने विशेष रूप से चीन की ओर से ऊपरी क्षेत्रों में प्रस्तावित या संचालित परियोजनाओं से जुड़े तकनीकी विवरण साझा करने के महत्व पर जोर दिया। सीमा पार नदियों से जुड़े विषय भारत के लिए रणनीतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

    भारत और चीन के संबंधों में हाल के समय में लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने से जुड़े कुछ कदम भी उठाए गए हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा की दोबारा शुरुआत और दोनों देशों के बीच नागरिक विमानन संपर्क बहाल करना शामिल है। इन कदमों को दोनों देशों के बीच जनस्तरीय संपर्क सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विदेश मंत्रालय ने भी भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति की उम्मीद जताई है। मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए लोगों के बीच संपर्क बेहतर करने वाले कदम उठाए जा रहे हैं। भारत का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक माहौल मजबूत हो सकता है।

    इस बीच चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारतीयों और भारतीय संस्कृति के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री बढ़ने को लेकर भी भारतीय समुदाय की चिंताएं सामने आई हैं। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के एक खुले संवाद कार्यक्रम में समुदाय के सदस्यों ने यह मुद्दा उठाया था। सीमा संबंधी बातचीत के साथ लोगों के बीच संपर्क और आपसी विश्वास मजबूत करना भी भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

  • SBI Q1 Results: पहली तिमाही में मुनाफा 10.23 प्रतिशत बढ़कर 21,121 करोड़ रुपये, एनपीए में भी बड़ी गिरावट दर्ज

    SBI Q1 Results: पहली तिमाही में मुनाफा 10.23 प्रतिशत बढ़कर 21,121 करोड़ रुपये, एनपीए में भी बड़ी गिरावट दर्ज

    नई दिल्ली । भारतीय स्टेट बैंक ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 10.23 प्रतिशत बढ़कर 21,121.22 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2026 की समान तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा 19,160.44 करोड़ रुपये रहा था। मुनाफे में वृद्धि के साथ बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार दर्ज किया गया है।

    बैंक की ब्याज से होने वाली आय में भी पहली तिमाही के दौरान अच्छी वृद्धि रही। अप्रैल से जून 2026 की अवधि में ब्याज आय सालाना आधार पर 8.5 प्रतिशत बढ़कर 1,27,896.46 करोड़ रुपये हो गई। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आय 1,17,830.28 करोड़ रुपये रही थी।

    ब्याज आय के साथ अन्य आय को जोड़ने पर बैंक की कुल आय भी बढ़ी। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कुल आय 6.2 प्रतिशत बढ़कर 1,43,819.15 करोड़ रुपये रही। एक साल पहले इसी अवधि में एसबीआई की कुल आय 1,35,341.56 करोड़ रुपये थी।

    बैंक के खर्च में भी इस दौरान वृद्धि हुई। पहली तिमाही में एसबीआई का कुल खर्च 5.2 प्रतिशत बढ़कर 1,10,289.97 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में यह आंकड़ा 1,04,797.09 करोड़ रुपये था। खर्च बढ़ने के बावजूद बैंक ने अपने मुनाफे में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की।

    एसबीआई की नेटवर्थ में भी तिमाही आधार पर उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के अंत में बैंक की नेटवर्थ 4,95,244.32 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 4,08,108.34 करोड़ रुपये थी। इससे बैंक की पूंजीगत स्थिति में मजबूती का संकेत मिलता है।

    बैंक के प्रदर्शन में सबसे अहम सुधार एनपीए के मोर्चे पर देखने को मिला। एसबीआई का ग्रॉस एनपीए वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के 1.83 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 1.47 प्रतिशत रह गया। यानी खराब ऋणों के अनुपात में स्पष्ट कमी दर्ज की गई।

    इसी तरह बैंक का नेट एनपीए भी घटा है। पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 0.47 प्रतिशत रहा नेट एनपीए वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में घटकर 0.38 प्रतिशत हो गया। ग्रॉस और नेट एनपीए में गिरावट बैंक की ऋण परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार का संकेत देती है।

    एसबीआई के डेट-टू-इक्विटी रेश्यो में भी सुधार दर्ज हुआ। पहली तिमाही में यह अनुपात 0.54 रहा, जबकि वित्त वर्ष 2026 की समान तिमाही में यह 0.65 था। अनुपात में कमी बैंक की वित्तीय संरचना में आए सुधार को दर्शाती है।

    तिमाही नतीजों के बाद शेयर बाजार में भी एसबीआई के शेयर में तेजी देखी गई। दोपहर 2:30 बजे बैंक का शेयर 3.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,119 रुपये पर कारोबार कर रहा था। मजबूत मुनाफे, बढ़ी ब्याज आय और एनपीए में गिरावट ने बैंक के तिमाही प्रदर्शन को मजबूती दी है।

  • कचरे से ऊर्जा तक बड़ा बदलाव, गोबरधन योजना से सीबीजी उत्पादन दस गुना बढ़ाने और आयात निर्भरता घटाने की तैयारी

    कचरे से ऊर्जा तक बड़ा बदलाव, गोबरधन योजना से सीबीजी उत्पादन दस गुना बढ़ाने और आयात निर्भरता घटाने की तैयारी


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार की नई गोबरधन यानी राष्ट्रीय सर्कुलर बायो-एनर्जी योजना को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार के अनुसार, योजना के जरिए देश में कंप्रेस्ड बायोगैस यानी सीबीजी का उत्पादन तेजी से बढ़ाया जाएगा। इससे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने के साथ 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाने का अनुमान है।

    सरकार का कहना है कि योजना अगले दस वर्षों में सीबीजी उत्पादन को करीब दस गुना बढ़ाने में मदद करेगी। इसके साथ ही निजी निवेश को आकर्षित करने, जैविक कचरे के बेहतर इस्तेमाल और सर्कुलर बायोइकोनॉमी को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। इस क्षेत्र से राष्ट्रीय जीडीपी में 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक के योगदान की उम्मीद जताई गई है।

    योजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रोजगार सृजन भी है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक कचरे से सीबीजी उत्पादन बढ़ने पर लगभग 1.5 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। संयंत्रों के संचालन के अलावा कच्चे माल की आपूर्ति, परिवहन, जैविक खाद उत्पादन और कचरा प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार बढ़ने की संभावना है।

    गोबरधन योजना के तहत तैयार होने वाली स्वदेशी गैस जीवाश्म ईंधन की जगह इस्तेमाल की जा सकेगी। अनुमान है कि इसके जरिए करीब एक करोड़ मीट्रिक टन जीवाश्म ईंधन की खपत को प्रतिस्थापित किया जा सकता है। इससे ऊर्जा आयात पर दबाव कम होने के साथ देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।

    जैविक कचरे के इस्तेमाल से पर्यावरण को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक, कचरे को लैंडफिल में जाने से रोकने पर 40 मिलियन टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है। इसके अलावा करीब 250 मिलियन मीट्रिक टन जैविक उर्वरक के उत्पादन का अनुमान है, जिससे कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिल सकता है।

    सीबीजी उत्पादकों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने गैस खरीद की गारंटी से जुड़ा ढांचा तैयार किया है। सीबीजी के लिए 2,110 रुपये प्रति एमएमबीटीयू की प्रशासित कीमत निर्धारित की गई है। परियोजनाओं को क्षमता के आधार पर प्रति टन प्रतिदिन 2 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत सहायता देने का प्रावधान है। एमएसएमई इकाइयों को 85 प्रतिशत तक क्रेडिट गारंटी का लाभ भी दिया जाएगा।

    सीबीजी रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस के समान होती है और इसे मौजूदा गैस वितरण नेटवर्क में बड़े बदलाव के बिना शामिल किया जा सकता है। इससे परिवहन, घरेलू उपयोग, उद्योग और वाणिज्यिक क्षेत्रों में बढ़ती गैस मांग को घरेलू उत्पादन से पूरा करने में मदद मिल सकती है।

    योजना के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के जरिए सीबीजी मिश्रण बढ़ाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। वित्त वर्ष 2027 में 3 प्रतिशत, वित्त वर्ष 2028 में 4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2029 से 5 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है। ये लक्ष्य परिवहन में सीएनजी और घरेलू उपयोग में पीएनजी श्रेणियों पर लागू होंगे।

    देश में सीबीजी क्षेत्र का मौजूदा आधार भी तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 1,908 सीबीजी और बायो-सीएनजी संयंत्र पंजीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 217 संयंत्र चालू हैं, जबकि 339 निर्माणाधीन हैं। चालू संयंत्र प्रतिदिन करीब 0.4 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 23,731 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली गोबरधन योजना को मंजूरी दी गई है। यह योजना वित्त वर्ष 2027 से 2036 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य सीबीजी को देश के भविष्य के ऊर्जा मिश्रण का प्रमुख हिस्सा बनाना है। सरकार की योजना कचरे को संसाधन में बदलकर ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार, निवेश और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाने की है।

  • मार्केट आउटलुक: अगस्त में सेंसेक्स-निफ्टी की दिशा क्या होगी? इन अहम संकेतों पर रहेगी नजर

    मार्केट आउटलुक: अगस्त में सेंसेक्स-निफ्टी की दिशा क्या होगी? इन अहम संकेतों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 7 अगस्त का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर अब घरेलू और वैश्विक दोनों संकेतों पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा विदेशी बाजारों के रुख विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम से तय हो सकती है।

    यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दबाव बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।

    बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर पर इस कारोबारी सत्र में खास नजर रहने की संभावना है। यदि इन प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी का माहौल बना रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी चुनिंदा स्टॉक्स निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही निवेश करना बेहतर रहेगा।

    कॉरपोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जिन कंपनियों के वित्तीय परिणाम उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजों वाली कंपनियों के शेयर दबाव में रह सकते हैं। इसलिए निवेशकों को परिणाम घोषित करने वाली कंपनियों पर विशेष नजर रखनी चाहिए।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेंगी। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूत समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बढ़ा सकती है। इसके अलावा रुपये की चाल और डॉलर इंडेक्स पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है इसलिए जोखिम को ध्यान में रखते हुए निवेश करना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि अल्पकालिक निवेशकों को तकनीकी स्तरों पर नजर रखते हुए ट्रेडिंग करनी चाहिए। बिना शोध और जानकारी के किसी भी शेयर में निवेश करना नुकसान का कारण बन सकता है।

    बाजार में सफलता पाने के लिए धैर्य और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए। निवेश से पहले कंपनी के कारोबार वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना आवश्यक है। यदि निवेशक सही रणनीति के साथ आगे बढ़ते हैं तो बाजार की अस्थिरता के बीच भी बेहतर अवसर तलाश सकते हैं।

    कुल मिलाकर 7 अगस्त का कारोबारी सत्र कई महत्वपूर्ण आर्थिक और वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होगा। बाजार में उतार चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी लेकिन मजबूत सेक्टरों और गुणवत्तापूर्ण शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अवसर भी मौजूद रहेंगे। समझदारी से लिया गया निर्णय भविष्य में बेहतर रिटर्न देने में मददगार साबित हो सकता है।

  • बैंक ऑफ बड़ौदा में 206 पदों पर भर्ती शुरू, सीनियर मैनेजर समेत कई पदों के लिए 26 अगस्त तक आवेदन

    बैंक ऑफ बड़ौदा में 206 पदों पर भर्ती शुरू, सीनियर मैनेजर समेत कई पदों के लिए 26 अगस्त तक आवेदन

    नई दिल्ली । बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने विभिन्न विभागों में कुल 206 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत डिजिटल बैंकिंग, सुविधा प्रबंधन, सूचना सुरक्षा, सुरक्षा, एंटरप्राइज डेटा मैनेजमेंट और कॉर्पोरेट अकाउंट्स एवं टैक्स प्लानिंग जैसे प्रमुख विभागों में योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। इच्छुक अभ्यर्थी 26 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    भर्ती के तहत सबसे अधिक 88 पद सुविधा प्रबंधन विभाग में भरे जाएंगे। इसके अलावा सुरक्षा विभाग में 54, डिजिटल बैंकिंग विभाग में 19, सूचना सुरक्षा विभाग में 16, एंटरप्राइज डेटा मैनेजमेंट ऑफिस में 14 तथा कॉर्पोरेट अकाउंट्स एवं टैक्स प्लानिंग विभाग में 15 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें मैनेजर, सीनियर मैनेजर, चीफ मैनेजर, टेक्निकल ऑफिसर, डेटा साइंटिस्ट, डेटा क्वालिटी एनालिस्ट, डिजिटल प्रोडक्ट मैनेजर और टैक्सेशन से जुड़े कई पद शामिल हैं।

    डिजिटल बैंकिंग विभाग में डिजिटल प्रोडक्ट और डिजिटल लेंडिंग से जुड़े पदों पर भर्ती होगी। सुविधा प्रबंधन विभाग में सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से संबंधित तकनीकी अधिकारियों और प्रबंधकों की नियुक्ति की जाएगी। सूचना सुरक्षा विभाग में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए अवसर उपलब्ध हैं, जबकि एंटरप्राइज डेटा मैनेजमेंट विभाग में डेटा साइंटिस्ट, डेटा प्रोफाइलिंग, बिजनेस इंटेलिजेंस और डैशबोर्ड डेवलपमेंट से जुड़े अनुभवी उम्मीदवारों की भर्ती होगी।

    इन पदों के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र के अनुसार बीई, बीटेक, बीसीए, एमसीए, बीएससी, एमएससी, डेटा साइंस, कंप्यूटर साइंस, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी, आईसीडब्ल्यूए, ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन जैसी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना आवश्यक है। इसके साथ ही पद के अनुसार दो से दस वर्ष तक का कार्य अनुभव भी अनिवार्य रखा गया है।

    आयु सीमा भी पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है। न्यूनतम आयु 23 से 31 वर्ष तथा अधिकतम आयु 35 से 43 वर्ष तक रखी गई है। आयु की गणना 1 अगस्त के आधार पर होगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा।

    चयन प्रक्रिया में ऑनलाइन लिखित परीक्षा, साइकोमेट्रिक टेस्ट, व्यक्तिगत साक्षात्कार, दस्तावेज सत्यापन तथा आवश्यकता अनुसार अन्य मूल्यांकन शामिल किए जाएंगे। अंतिम चयन के बाद उम्मीदवारों को पद के अनुसार 48,480 रुपये से लेकर 1,20,940 रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा बैंक की सेवा शर्तों के अनुसार अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।

    आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। सामान्य, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 850 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि एससी, एसटी, दिव्यांग, पूर्व सैनिक और महिला अभ्यर्थियों के लिए शुल्क 175 रुपये रखा गया है। आवेदन करते समय उम्मीदवारों को सभी आवश्यक दस्तावेज, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अनुभव संबंधी जानकारी सही तरीके से दर्ज करनी होगी। बैंकिंग क्षेत्र में स्थायी और प्रतिष्ठित करियर की तलाश कर रहे योग्य उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।

  • PhonePe का बड़ा ऐलान, एक ही ऐप पर खुलेगी एफडी और 100 रुपये रोजाना से शुरू होगी डिजिटल आरडी

    PhonePe का बड़ा ऐलान, एक ही ऐप पर खुलेगी एफडी और 100 रुपये रोजाना से शुरू होगी डिजिटल आरडी


    नई दिल्ली ।
    डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करते हुए फोनपे ने अपने प्लेटफॉर्म पर फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) डिस्ट्रीब्यूशन सेवा शुरू कर दी है। इस नई सुविधा के जरिए अब ग्राहक सीधे फोनपे ऐप पर विभिन्न बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों की एफडी योजनाओं की तुलना कर निवेश कर सकेंगे। इसके साथ ही कंपनी ने शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक के सहयोग से एक नया डिजिटल माइक्रो-सेविंग्स प्रोडक्ट ‘डेली रिकरिंग डिपॉजिट (डेली आरडी)’ भी लॉन्च किया है, जिसमें केवल 100 रुपये प्रतिदिन से बचत शुरू की जा सकती है।

    नई सुविधा का उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और आसान बनाना है। अब ग्राहकों को अलग-अलग बैंकों की वेबसाइट या शाखाओं में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे एक ही ऐप पर उपलब्ध विभिन्न एफडी विकल्पों की तुलना कर अपनी जरूरत और निवेश अवधि के अनुसार उपयुक्त योजना चुन सकेंगे। इससे निवेश की प्रक्रिया तेज, सुविधाजनक और अधिक पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

    फोनपे के अनुसार, ऐप के माध्यम से खोली गई एफडी पर भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के तहत डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) की व्यवस्था के अनुसार पात्र जमा राशि पर 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर भी मिलेगा। इसके अलावा उपयोगकर्ता एक ही प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग बैंकों की एफडी को आसानी से ट्रैक और प्रबंधित कर सकेंगे।

    कंपनी ने छोटे निवेशकों, युवाओं, मिलेनियल्स, जेन-जी और नियमित बचत की आदत विकसित करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए डेली आरडी की शुरुआत की है। इस योजना में प्रतिदिन 100 रुपये से लेकर 1,000 रुपये तक का निवेश किया जा सकता है। यह सुविधा यूपीआई ऑटोपे आधारित है, जिससे तय राशि स्वतः निवेश होती रहेगी और ग्राहकों को बार-बार भुगतान करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

    डेली आरडी की एक विशेषता यह भी है कि निवेशक जरूरत पड़ने पर केवल सात दिन बाद ही अपनी जमा राशि निकाल सकते हैं। यदि कोई ग्राहक लगातार 15 दिनों तक निवेश नहीं कर पाता है, तब भी उस पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। साथ ही, वह किसी भी समय अपना यूपीआई ऑटोपे मैंडेट बंद करने का विकल्प भी चुन सकता है। इससे यह योजना लचीली और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनती है।

    फोनपे का कहना है कि उसका उद्देश्य देश के अधिक से अधिक लोगों तक सुरक्षित और सरल डिजिटल निवेश सुविधाएं पहुंचाना है। कंपनी का मानना है कि फिक्स्ड डिपॉजिट लंबे समय से भारतीय परिवारों की पसंदीदा बचत योजना रही है और अब इसे पूरी तरह डिजिटल बनाकर निवेशकों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराया जाएगा।

    एफडी या डेली आरडी शुरू करने के लिए ग्राहक फोनपे ऐप के होम स्क्रीन पर उपलब्ध “म्यूचुअल फंड्स एंड डिपॉजिट” सेक्शन में जाकर अपनी पसंद का विकल्प चुन सकते हैं। यहां सात दिन से लेकर दस वर्ष तक की अवधि वाली एफडी उपलब्ध होगी। निवेश प्रक्रिया के दौरान पैन और आधार के माध्यम से डिजिटल सत्यापन, नॉमिनी जोड़ने तथा यूपीआई या नेट बैंकिंग के जरिए भुगतान की सुविधा भी मिलेगी। कंपनी का कहना है कि जरूरत पड़ने पर निवेश की गई राशि को निर्धारित नियमों के अनुसार समय से पहले भी निकाला जा सकेगा।

  • भारतीय कंपनियों के पहली तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर, बैंकिंग और मेटल सेक्टर की मजबूत बढ़त से बढ़ा कॉरपोरेट मुनाफा

    भारतीय कंपनियों के पहली तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर, बैंकिंग और मेटल सेक्टर की मजबूत बढ़त से बढ़ा कॉरपोरेट मुनाफा


    नई दिल्ली ।
    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र का प्रदर्शन बाजार की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि के दौरान बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, धातु, सूचना प्रौद्योगिकी और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों की मजबूत वृद्धि ने कंपनियों के समग्र मुनाफे को मजबूती दी। हालांकि तेल विपणन कंपनियों को ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के कारण दबाव का सामना करना पड़ा, लेकिन अन्य प्रमुख क्षेत्रों के अच्छे प्रदर्शन से कुल आय पर इसका प्रभाव काफी हद तक संतुलित हो गया।

    तिमाही नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि यदि तेल विपणन कंपनियों को अलग कर दिया जाए तो भारतीय कंपनियों की आय में सालाना आधार पर करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव के बावजूद अधिकांश कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है और परिचालन स्तर पर बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है।

    प्रमुख क्षेत्रों में सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं का रहा, जहां आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। धातु क्षेत्र ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हासिल की। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 11 प्रतिशत और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे समग्र कॉरपोरेट आय को मजबूती मिली।

    अब तक अपने तिमाही परिणाम घोषित करने वाली निफ्टी की कई प्रमुख कंपनियों ने भी बाजार की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है। औसतन कंपनियों के मुनाफे में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि विश्लेषकों का अनुमान इससे काफी कम था। बड़ी संख्या में कंपनियां अपने अनुमानित लाभ से बेहतर नतीजे देने में सफल रहीं, जबकि अपेक्षाकृत कम कंपनियों के परिणाम अनुमान से कमजोर रहे।

    हालांकि सभी क्षेत्रों की स्थिति समान नहीं रही। तेल विपणन कंपनियों के अलावा सीमेंट, विमानन और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों पर लागत और मांग से जुड़ी चुनौतियों का असर देखने को मिला। विशेष रूप से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बनाया, जिससे इन क्षेत्रों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

    बाजार पूंजीकरण के आधार पर देखें तो बड़ी कंपनियों ने स्थिर प्रदर्शन करते हुए अपनी आय में वृद्धि दर्ज की। दूसरी ओर मिड-कैप कंपनियों के समग्र आंकड़ों में गिरावट दिखाई दी, जिसका प्रमुख कारण तेल विपणन कंपनियों का कमजोर प्रदर्शन रहा। हालांकि इन कंपनियों को अलग करने पर मिड-कैप श्रेणी की अधिकांश कंपनियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे स्पष्ट होता है कि व्यापक स्तर पर कारोबार की स्थिति सकारात्मक बनी हुई है।

    स्मॉल-कैप कंपनियों ने इस तिमाही में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। इन कंपनियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें वित्तीय क्षेत्र की मजबूती और अनुकूल तुलनात्मक आधार का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों में भी कारोबारी गतिविधियां बेहतर हो रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पहली तिमाही के मजबूत नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। हालांकि आने वाले महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और पूंजी बाजार में बढ़ती गतिविधियां निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। इसके बावजूद मौजूदा तिमाही के परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूती का सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।