Category: Economy

  • एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड पर 'पंप-एंड-डंप' का आरोप, सेबी ने शुरू की जांच

    एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड पर 'पंप-एंड-डंप' का आरोप, सेबी ने शुरू की जांच


    नई दिल्ली  शेयर बाजार में निवेशकों के लिए एक बड़ा अलर्ट सामने आया है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के शेयरों में कथित ‘पंप-एंड-डंप’ घोटाले के संकेत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। यह मामला शेयर कीमतों में असामान्य तेजी और उसके बाद आई तेज गिरावट से जुड़ा हुआ है।

    60 गुना उछाल के बाद अचानक गिरावट ने बढ़ाए शक
    सेबी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कंपनी के शेयरों में बेहद कम समय में 60 गुना से ज्यादा की उछाल आई। इसके बाद कीमतों में अचानक गिरावट देखी गई, जो आमतौर पर ‘पंप-एंड-डंप’ स्कीम का संकेत माना जाता है। इस तरह के मामलों में पहले कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाई जाती हैं और फिर ऊंचे स्तर पर शेयर बेचकर मुनाफा कमाया जाता है।

    प्रमोटरों और जुड़े पक्षों की भूमिका पर सवाल
    नियामक को संदेह है कि कंपनी के प्रमोटरों और उनसे जुड़े पक्षों ने आपसी तालमेल से ट्रेडिंग की और फंड ट्रांसफर के जरिए शेयर की कीमतों को ऊपर पहुंचाया। जांच में यह भी सामने आया कि ऊंचे दामों पर शेयर बेचने वालों में कंपनी के अंदरूनी लोग शामिल हो सकते हैं। प्रमोटर विपिन शर्मा को इस मामले में एक प्रमुख विक्रेता के तौर पर चिन्हित किया गया है।

    आय में असामान्य उछाल ने खड़े किए सवाल
    सेबी ने कंपनी के वित्तीय आंकड़ों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का राजस्व दो वर्षों में करीब 686 गुना बढ़ा, जो असामान्य माना जा रहा है। खासतौर पर सितंबर 2025 तिमाही में आय 525 करोड़ रुपए से बढ़कर 2,195.8 करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जिसने नियामक की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

    भ्रामक जानकारी से निवेशकों को गुमराह करने का शक
    जांचकर्ताओं को यह भी आशंका है कि कंपनी ने अपने वास्तविक कारोबार से ज्यादा मजबूत तस्वीर दिखाने के लिए भ्रामक कॉर्पोरेट खुलासे किए। इसका उद्देश्य शेयर की कीमतों में तेजी लाकर खुदरा निवेशकों को आकर्षित करना हो सकता है।

    खुलासे में लापरवाही भी जांच के दायरे में
    सेबी ने कंपनी पर गंभीर खुलासा संबंधी चूक का आरोप भी लगाया है। खासकर 408 करोड़ रुपए के जीएसटी विवाद जैसी अहम जानकारी समय पर शेयरधारकों को नहीं दी गई। इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं को या तो देर से बताया गया या पूरी तरह छिपाया गया।

    जांच जारी, हो सकते हैं कड़े एक्शन
    नियामक इस पूरे मामले में ट्रेडिंग पैटर्न, फाइनेंशियल डेटा और संबंधित पक्षों के बीच संबंधों की गहराई से जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद कंपनी और संबंधित लोगों पर भारी जुर्माना, बाजार से प्रतिबंध जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

    शेयर में गिरावट, निवेशकों में चिंता
    इस खबर के बाद सोमवार को बीएसई पर एलीटकॉन इंटरनेशनल का शेयर करीब 5% गिरकर 48.38 रुपए पर बंद हुआ, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।

    क्या होता है ‘पंप-एंड-डंप’?
    ‘पंप-एंड-डंप’ एक धोखाधड़ी वाली रणनीति होती है, जिसमें शेयर की कीमत को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जाता है (पंप) और फिर ऊंचे स्तर पर बेचकर (डंप) निवेशकों को नुकसान में छोड़ दिया जाता है।

  • पश्चिम एशिया संकट का असर: महंगाई से धीमी ग्रोथ तक, IMF की चेतावनी

    पश्चिम एशिया संकट का असर: महंगाई से धीमी ग्रोथ तक, IMF की चेतावनी


    नई दिल्ली वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर चुकी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। संस्था के अनुसार, इस संकट का सीधा असर महंगाई में बढ़ोतरी और आर्थिक विकास की रफ्तार में गिरावट के रूप में देखने को मिलेगा।

    ऊर्जा संकट से बढ़ेगा दबाव, आयातक देशों पर सबसे ज्यादा असर
    आईएमएफ के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दुनिया के करीब 25-30 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है। ऐसे में यदि यहां किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका सीधा असर एशिया और यूरोप के उन देशों पर पड़ेगा, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।

    गरीब और विकासशील देशों पर दोहरी मार
    रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका और एशिया के कई गरीब देश पहले ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। अब बढ़ती ऊर्जा कीमतों और सप्लाई में कमी के कारण उनकी स्थिति और खराब हो सकती है। इन देशों को महंगे दाम पर भी पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

    खाद्य और उर्वरक संकट गहराने का खतरा
    आईएमएफ ने आगाह किया है कि यह संकट केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगा। खाद्य और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी से भी वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ेगा। खासकर गरीब देशों में खाद्य संकट गहरा सकता है और उन्हें बाहरी सहायता की जरूरत पड़ सकती है।

    लंबा चला युद्ध तो बढ़ेगा संकट का दायरा
    संस्था का मानना है कि अगर यह संघर्ष अल्पकालिक रहा, तो तेल-गैस की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिलेगा। लेकिन यदि यह लंबे समय तक चला, तो ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहेंगी, जिससे आयात करने वाले देशों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी।

    उद्योग और आम उपभोक्ता दोनों प्रभावित
    एशिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों में ईंधन और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो रहा है। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। साथ ही कई देशों में भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ने से उनकी मुद्रा भी कमजोर हो रही है।

    यूरोप में दोहराया जा सकता है गैस संकट जैसा हाल
    आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि यूरोप में 2021-22 जैसा गैस संकट फिर से पैदा हो सकता है। इटली और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जबकि फ्रांस और स्पेन अपनी परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कारण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकते हैं।

    सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पर भी असर
    इस संघर्ष के चलते वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। जहाजों के रूट बदलने से ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत बढ़ गई है, जिससे सामान की डिलीवरी में देरी हो रही है। साथ ही, खाड़ी क्षेत्र से मिलने वाले हीलियम और अन्य जरूरी संसाधनों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।

    वित्तीय बाजारों में बढ़ी अस्थिरता
    इस भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी दिख रहा है। शेयर बाजारों में गिरावट, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। हालांकि, यह गिरावट अभी पिछले बड़े संकटों जितनी गंभीर नहीं है, लेकिन इससे वित्तीय स्थितियां सख्त हो गई हैं।

    आईएमएफ की सलाह: सतर्क रहें और सही नीतियां अपनाएं
    आईएमएफ ने देशों को सलाह दी है कि वे इस स्थिति से निपटने के लिए संतुलित और प्रभावी नीतियां अपनाएं। खासतौर पर कम संसाधनों वाले देशों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि “अनिश्चितता भरे इस दौर में अधिक देशों को समर्थन की जरूरत है और हम उनके साथ खड़े हैं।”

  • 1 अप्रैल 2026 से बदलेंगे कई नियम, नए टैक्स सिस्टम के साथ वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत

    1 अप्रैल 2026 से बदलेंगे कई नियम, नए टैक्स सिस्टम के साथ वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत


    नई दिल्ली  भारत में 1 अप्रैल 2026 से नए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ ही टैक्स सिस्टम में कई बड़े और अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं। सरकार द्वारा पेश किया गया नया आयकर अधिनियम, 2025 अब लागू होगा, जो लगभग 60 साल पुराने कानून की जगह लेगा। इन बदलावों का मकसद टैक्स प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और अधिक व्यवस्थित बनाना है।

    अब ‘टैक्स ईयर’ से होगी पहचान, खत्म होंगे FY और AY
    नए सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव ‘फाइनेंशियल ईयर (FY)’ और ‘असेसमेंट ईयर (AY)’ की जगह एक ही ‘टैक्स ईयर’ का कॉन्सेप्ट लागू होना है। इससे टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न फाइलिंग और समझने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी। अब अलग-अलग सालों के भ्रम से राहत मिलने की उम्मीद है।

    ITR फाइलिंग की समयसीमा में राहत
    सरकार ने आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा में भी बदलाव किया है। जहां सैलरीड क्लास के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन पहले की तरह बनी रहेगी, वहीं नॉन-ऑडिट केस वाले करदाताओं जैसे फ्रीलांसर और प्रोफेशनल्स को अब 31 अगस्त तक का समय मिलेगा। इससे उन्हें अतिरिक्त समय का फायदा मिलेगा।

    डेरिवेटिव ट्रेडिंग होगी महंगी
    फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में निवेश करने वालों के लिए झटका है। सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया गया है, जिससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। इसका असर शेयर बाजार के सक्रिय निवेशकों पर साफ दिखाई देगा।

    HRA क्लेम के नियम हुए सख्त
    हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर टैक्स छूट लेने के नियमों को भी सख्त किया गया है। अब कई मामलों में मकान मालिक का PAN देना अनिवार्य होगा। हालांकि राहत की बात यह है कि बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों को अधिक छूट वाली सूची में शामिल किया गया है।

    टैक्स बेनिफिट्स में भी मिली राहत
    सरकार ने कुछ मामलों में टैक्सपेयर्स को राहत भी दी है। खाने-पीने से जुड़े टैक्स बेनिफिट्स बढ़ाए गए हैं और टैक्स-फ्री गिफ्ट की सीमा में भी इजाफा किया गया है। साथ ही पुराने टैक्स सिस्टम में बच्चों की शिक्षा और हॉस्टल खर्च पर मिलने वाली छूट भी बढ़ाई गई है।

    शेयर और निवेश पर बदले नियम
    अब शेयर बायबैक पर टैक्स डिविडेंड के बजाय कैपिटल गेन के रूप में लगेगा। वहीं, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स छूट केवल मूल इश्यू के दौरान खरीदे गए बॉन्ड्स पर ही लागू होगी। इसके अलावा, डिविडेंड और म्यूचुअल फंड आय पर लिए गए कर्ज के ब्याज पर टैक्स छूट खत्म कर दी गई है।

    TDS और TCS नियमों में बदलाव
    अब टैक्सपेयर्स एक ही घोषणा पत्र के जरिए कई इनकम सोर्स पर TDS से बच सकते हैं। NRI से प्रॉपर्टी खरीदने पर अब TAN की जरूरत नहीं होगी, सिर्फ PAN से काम चल जाएगा। विदेश यात्रा पर TCS घटाकर 2% कर दिया गया है, जबकि शिक्षा और इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर भी राहत दी गई है।

    रिवाइज्ड रिटर्न और ITR फॉर्म में बदलाव
    अब टैक्सपेयर्स 31 मार्च तक अपने रिटर्न में संशोधन कर सकेंगे, हालांकि दिसंबर के बाद देरी से करने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। साथ ही ITR-1 फॉर्म में अब दो मकानों से होने वाली आय दिखाने की सुविधा भी दी गई है, जिससे कई लोगों के लिए फाइलिंग आसान हो जाएगी।

  • ग्रामीण विकास को रफ्तार: केंद्र ने 6 राज्यों को जारी किए 1500 करोड़ से ज्यादा

    ग्रामीण विकास को रफ्तार: केंद्र ने 6 राज्यों को जारी किए 1500 करोड़ से ज्यादा

    नई दिल्ली  ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार ने 15वां वित्त आयोग के तहत 6 राज्यों को 1,500 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की है। इस फंड का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों को मजबूत बनाकर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को गति देना है।

    किन राज्यों को मिला फायदा

    इस वित्तीय सहायता का लाभ तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मिजोरम और मेघालय को मिला है। यह राशि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ग्रामीण ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास योजनाओं को लागू करने में मदद करेगी।

    तेलंगाना और उत्तराखंड को मिली पहली किस्त

    तेलंगाना को 247.94 करोड़ रुपए की अनटाइड ग्रांट जारी की गई है, जिससे राज्य की 12,600 ग्राम पंचायतों को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं उत्तराखंड को 91.31 करोड़ रुपए की दूसरी किस्त दी गई है, जिससे जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा रुकी हुई राशि भी जारी कर दी गई है, जिससे अतिरिक्त पंचायतों को भी फायदा पहुंचेगा।

    राजस्थान और मेघालय में विकास को बल

    राजस्थान को 315.61 करोड़ रुपए की दूसरी किस्त जारी की गई है। इससे राज्य की जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायतों को मजबूती मिलेगी। वहीं मेघालय को स्वायत्त जिला परिषदों और ग्राम परिषदों के लिए कुल मिलाकर करीब 49 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि दी गई है, जिससे स्थानीय प्रशासन को और सशक्त बनाया जा सकेगा।

    महाराष्ट्र को कई मदों में बड़ी सहायता

    महाराष्ट्र को अलग-अलग मदों में बड़ी रकम जारी की गई है। इसमें टाइड और अनटाइड ग्रांट की कई किस्तें शामिल हैं। इस राशि से जिला और ब्लॉक पंचायतों के साथ हजारों ग्राम पंचायतों को फायदा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी।

    क्या है इस फंड का उद्देश्य

    15वां वित्त आयोग के तहत जारी यह फंड ग्रामीण भारत में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, स्वच्छता, जल प्रबंधन, सड़क निर्माण और अन्य आवश्यक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए दिया जाता है। इससे स्थानीय निकायों को अपनी जरूरतों के हिसाब से योजनाएं लागू करने की स्वतंत्रता भी मिलती है।

    जमीनी स्तर पर दिखेगा असर

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वित्तीय मदद से गांवों में विकास की रफ्तार तेज होगी और स्थानीय प्रशासन अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
    निष्कर्ष केंद्र सरकार का यह कदम ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने और पंचायतों को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

  • डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 पार, करेंसी मार्केट में बड़ा बदलाव

    डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 पार, करेंसी मार्केट में बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली।भारतीय रुपए ने सोमवार को डॉलर के मुकाबले पहली बार 95 के स्तर को पार किया और 95.2 का नया निचला स्तर देखा। हालांकि दिन के अंत में रुपया 94.83 पर बंद हुआ, जो कि शुक्रवार के 94.81 के बंद से 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।

    मध्य पूर्व तनाव और तेल की कीमतों का असर

    विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के चलते रुपए में कमजोरी लगातार बढ़ रही है। अकेले मार्च महीने में भारतीय मुद्रा ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भी सोमवार को गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,947.55 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत कमजोर होकर 22,331.40 पर बंद हुआ। मार्च 2026 में निफ्टी में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई, जो कि मार्च 2020 के बाद मासिक आधार पर सबसे बड़ी गिरावट है।

    आरबीआई की नई दिशा, ओवरनाइट नेट ओपन लिमिट

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में बैंकों के लिए ओवरनाइट नेट ओपन पोजिशन लिमिट को 100 मिलियन डॉलर करने का निर्णय लिया। इसके बाद रुपया शुरुआती कारोबार में मजबूती के साथ खुला, लेकिन सत्र के दौरान 160 पैसे गिरावट के साथ शुरुआती स्तर खो दिया। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को कहा था कि बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 10 अप्रैल तक हर कारोबारी दिन के अंत में उनकी नेट ओपन रुपया पोजिशन 100 मिलियन डॉलर से अधिक न हो। अनुमान है कि इन निवेशों का आकार 25 अरब डॉलर से लेकर 50 अरब डॉलर तक हो सकता है।

    तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव

    पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 115 डॉलर प्रति बैरल पर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 101.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की बढ़ती कीमतों और मुद्रा कमजोर होने के कारण भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव बढ़ा है। निवेशकों ने सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख किया, जिससे बाजार में गिरावट और तेज हुई।

    मार्च 2026 का आखिरी कारोबारी सप्ताह भारतीय निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। रुपए ने पहली बार 95 का स्तर पार कर नई चुनौतियों का संकेत दिया, वहीं शेयर बाजार में गिरावट ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व तनाव, तेल की ऊंची कीमतें और आरबीआई की नई दिशा रुपए और शेयर बाजार दोनों पर असर डाल रही हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा और निवेशकों की प्रतिक्रिया इस समय की आर्थिक नीतियों और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी।

  • ब्लैक बॉक्स ने प्रेफरेंशियल इश्यू पूरा किया, वारंट कन्वर्जन से मिले 386 करोड़ रुपए

    ब्लैक बॉक्स ने प्रेफरेंशियल इश्यू पूरा किया, वारंट कन्वर्जन से मिले 386 करोड़ रुपए


    नई दिल्ली। ग्लोबल डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी ब्लैक बॉक्स लिमिटेड ने सोमवार को बताया कि 27 सितंबर, 2024 को जारी किए गए वारंटों के कन्वर्जन के माध्यम से 386.36 करोड़ रुपए सफलतापूर्वक प्राप्त किए गए हैं। इस कदम से कंपनी की वित्तीय मजबूती और निवेशकों के प्रति विश्वास को और बढ़ावा मिला है।

    वारंट कन्वर्जन का पूरा लाभ

    कंपनी ने 92,65,215 वारंट को 417 रुपए प्रति शेयर के निर्गम मूल्य पर इक्विटी शेयरों में बदल दिया। सभी वारंट धारकों ने अपने अधिकारों का पूर्ण रूप से उपयोग किया, और किसी ने भी अपने अधिकार नहीं गंवाए। इस पूरी प्रक्रिया के समय पर और सफलतापूर्वक होने से ब्लैक बॉक्स के व्यापारिक सिद्धांत, विकास रणनीति और क्रियान्वयन क्षमता में निवेशकों और प्रमोटरों का मजबूत विश्वास दिखाई देता है।

    प्रमोटरों ने किया बड़ा योगदान

    इस प्रेफरेंशियल इश्यू में प्रमोटरों का योगदान भी अहम रहा, जिन्होंने कुल निवेश का 51.76 प्रतिशत यानी लगभग 200 करोड़ रुपए जुटाए। हस्तांतरण के बाद प्रमोटरों की कुल शेयरधारिता 69.99 प्रतिशत हो गई है। यह कंपनी के प्रति उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और शेयरधारकों के साथ एकजुटता को दर्शाता है।

    विकास और रणनीतिक उपयोग

    ब्लैक बॉक्स के सीईओ संजीव वर्मा ने कहा”हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि प्रमोटरों और निवेशकों दोनों की पूर्ण भागीदारी के साथ यह पूंजी जुटाना सफल रहा। 386 करोड़ रुपए के इस निवेश से हमारी बैलेंस शीट मजबूत हुई है और विकास लक्ष्यों को गति देने के लिए हमें अतिरिक्त लचीलापन मिला है।उन्होंने आगे कहा कि यह राशि कंपनी को डिजिटल अवसंरचना क्षमताओं को बढ़ाने, बाजार में उपस्थिति का विस्तार करने और ग्राहकों एवं शेयरधारकों को लगातार मूल्य प्रदान करने में मदद करेगी।

    वित्तीय दृष्टिकोण और निवेशकों का विश्वास

    ब्लैक बॉक्स के मुख्य वित्तीय अधिकारी दीपक बंसल ने कहा,”हम अपने निवेशकों के निरंतर विश्वास और समर्थन के लिए आभारी हैं। यह पूंजी हमें प्राथमिकता वाले विकास क्षेत्रों में निवेश करने की क्षमता देती है और पूंजी आवंटन, परिचालन दक्षता और प्रतिफल के प्रति अनुशासित दृष्टिकोण बनाए रखने में भी सहायक है।उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी अब सभी बाजारों में उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है।

    ब्लैक बॉक्स का यह प्रेफरेंशियल इश्यू न केवल 386 करोड़ रुपए की पूंजी जुटाने में सफल रहा, बल्कि प्रमोटरों और निवेशकों के बीच विश्वास और सहयोग को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है। कंपनी अब डिजिटल अवसंरचना क्षेत्र में विस्तार और मजबूत वित्तीय स्थिति के साथ अपने अगले विकास चरण की ओर बढ़ रही है।

  • कोटक महिंद्रा प्राइम में बड़ा बदलाव: सूरज राजप्पन बने नए CEO, शाहरुख टोडीवाला को हटाया

    कोटक महिंद्रा प्राइम में बड़ा बदलाव: सूरज राजप्पन बने नए CEO, शाहरुख टोडीवाला को हटाया


    नई दिल्ली।वाहन फाइनेंस कंपनी कोटक महिंद्रा प्राइम लिमिटेड (केएमपीएल) ने सोमवार को अपने नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सूरज राजप्पन को मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 1 जून 2026 से शुरू होगा और तीन साल के लिए होगा, हालांकि इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी आवश्यक है।

    शाहरुख टोडीवाला का संन्यास, तीन दशक का योगदान

    कंपनी ने यह भी बताया कि मौजूदा एमडी और सीईओ शाहरुख टोडीवाला 31 मई 2026 को रिटायर होंगे। शाहरुख टोडीवाला ने कोटक ग्रुप के साथ तीन दशक से अधिक समय तक काम किया और कंपनी को मजबूत और संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ाया।

    सूरज राजप्पन का अनुभव और कंपनी में योगदान

    सूरज राजप्पन ने अपने करियर की शुरुआत ही केएमपीएल से की थी और उनके पास कंपनी में 24 साल का अनुभव है। केएमपीएल, कोटक महिंद्रा बैंक की एक सहायक कंपनी है। कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी और सीईओ अशोक वासवानी ने कहा,सूरज राजप्पन का अनुभव और कार्यकुशलता कंपनी को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। सूरज राजप्पन ने भी कहा कि केएमपीएल आगे संतुलित विकास, नवाचार और बेहतर ग्राहक अनुभव पर ध्यान देगा। साथ ही कंपनी अपने ओईएम और डीलर पार्टनर्स के साथ रिश्तों को और मजबूत करेगी।

    केएमपीएल का तीन दशक का सफर

    केएमपीएल की स्थापना 1996 में कोटक महिंद्रा फाइनेंस और फोर्ड क्रेडिट इंटरनेशनल के बीच 60:40 के जॉइंट वेंचर के रूप में हुई थी।
    बाद में 2005 में कोटक महिंद्रा बैंक ने फोर्ड क्रेडिट की हिस्सेदारी खरीद ली और कंपनी को पूरी तरह अपनी सहायक कंपनी बना लिया। इसके बाद इसका नाम बदलकर कोटक महिंद्रा प्राइम लिमिटेड कर दिया गया। कंपनी ने पिछले तीन दशकों में भारत के ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर क्रेडिट मार्केट में खुद को मजबूत किया। साथ ही, जोखिम प्रबंधन, बेहतर गवर्नेंस और मजबूत सिस्टम पर विशेष ध्यान दिया।

    स्टार्टअप इकोसिस्टम में योगदान

    केएमपीएल ने 2025 में डीपीआईआईटी के साथ समझौता (एमओयू) भी किया था। इसका उद्देश्य देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करना है। इस साझेदारी के तहत स्टार्टअप्स को बैंकिंग सेवाएं, लोन, फंडिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यह कदम भारत में स्टार्टअप्स के विकास और वित्तीय सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है।

    सूरज राजप्पन के सीईओ बनने से केएमपीएल की संतुलित विकास नीति, नवाचार और ग्राहक-केंद्रित रणनीति और मजबूत होगी। वहीं, शाहरुख टोडीवाला के योगदान ने कंपनी को तीन दशकों से स्थिर और विकसित संगठन बनाने में अहम भूमिका निभाई है। अब केएमपीएल की नजर ऑटो फाइनेंस और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर खोलने पर होगी।

  • मध्य पूर्व तनाव का असर: वित्त वर्ष के आखिरी सत्र में सेंसेक्स 1,635 अंक लुढ़का

    मध्य पूर्व तनाव का असर: वित्त वर्ष के आखिरी सत्र में सेंसेक्स 1,635 अंक लुढ़का


    नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष (2025-26) के आखिरी कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,947.55 और निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,331.40 पर था।

    बाजार में चौतरफा गिरावट देखी गई। करीब सभी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी पीएसयू बैंक (4.56 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस (3.49 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (3.37 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (2.84 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (2.80 प्रतिशत), निफ्टी सर्विसेज (2.72 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ( 2.58 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया (2.50 प्रतिशत) और निफ्टी ऑटो (2.39 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

    लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,447.80 अंक या 2.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 52,650 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 416.20 अंक या 2.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 15,203.80 पर था।सेंसेक्स पैक में 30 में केवल दो शेयर हरे निशान में बंद हुए।

    बजाज फाइनेंस, एसबीआई, इंडिगो, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा और एशियन पेंट्स लूजर्स थे। केवल टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड ही हरे निशान में बंद हुए।

    शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केटकैप करीब 10 लाख करोड़ रुपए कम होकर 412 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि शुक्रवार को 422 लाख करोड़ रुपए था।

    बाजार में गिरावट की वजह मध्य पूर्व में तनाव का बढ़ना है, जिसके समाप्त होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। इससे बाजार में निवेशकों की धारणा कमजोरी हुई है।

    एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स प्रमुख सुदीप शाह ने कहा कि वित्त वर्ष 26 के आखिरी दिन बाजार की शुरुआत गैप डाउन के साथ हुई है और हालांकि, बाद में हल्की रिकवरी हुई, लेकिन ऊपरी स्तर से लगातार बिकवाली ने बाजार में गिरावट को बढ़ावा दिया। इससे दिन के अंत में निफ्टी 2.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

    उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए सपोर्ट 22,200 से लेकर 22,150 के आसपास है और अगर यहां से गिरावट बढ़ती है तो निफ्टी 22,000 और फिर 21,800 तक जा सकता है। हालांकि, 22,450-22,500 रुकावट का स्तर है।

  • अश्विनी वैष्णव का ऐलान: भारत में प्रोडक्ट डिज़ाइन न करने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को नहीं मिलेगा सरकारी लाभ

    अश्विनी वैष्णव का ऐलान: भारत में प्रोडक्ट डिज़ाइन न करने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को नहीं मिलेगा सरकारी लाभ


    नई दिल्ली केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव अश्विनी वैष्णव ने साफ कर दिया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी स्कॉबी (ईएमएस) के तहत सरकारी प्रोत्साहन केवल तभी आवश्यक है, जब वे भारत में निवेश पोर्टफोलियो से उत्पाद डिजाइन करेंगे।

    सरकार का फोकस: डिजाइन, गुणवत्ता और इंजीनियरिंग

    वैष्णव ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि अब सरकारी सहायता और प्रोत्साहन इस बात पर निर्भर है कि देश में डिजाइन, गुणवत्ता और इंजीनियरिंग इंजीनियरिंग को कितना विकसित किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर एंटरप्राइज़ सरकार की चार प्रमुख पार्टियों पर काम नहीं किया गया, तो अगली असेंबली असेंबली में उन्हें भी शामिल नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा,
    अगर एंटरप्राइज़ कंपनियों के कहे अनुसार कदम नहीं उठाया जाता है, तो हम आगे की मंजूरी और फंडिंग रोक सकते हैं।”

    असेंबली नहीं, संपूर्ण डिज़ाइन क्षमता आवश्यक

    मंत्री ने स्पष्ट किया कि कंपनी को केवल असेंबली या फैक्ट्री मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें कॉन्सेप्चुअल डिज़ाइन, इंजीनियरिंग डिज़ाइन और विनिर्माण डिज़ाइन तक अपनी क्षमता में सुधार करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पहले से स्वीकृत प्राप्त प्रोजेक्ट्स में भी अगर रिज़र्वेशन पूरी तरह से नहीं था, तो फंड जारी नहीं किया जाएगा।
    “जिन एप्लायंस को मंजूरी दे दी गई है, उन्हें भी हमने पैसा नहीं दिया अगर हमारी मांग पूरी नहीं हुई।”

    ईसीएमएस में निवेश और मंजूरी का अपडेट

    मंत्रालय ने ईसीएमएस के चौथे चरण में 29 आवेदनों को मंजूरी दी है, जिसमें कुल 7,104 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
    ईसीएमएस के तहत कुल निवेश का लक्ष्य 59,350 करोड़ रुपये था, जबकि अब तक 61,671 करोड़ रुपये के प्रस्ताव रखे जा चुके हैं।
    वैष्णव ने कहा कि असली उत्पाद समान दिखते हैं, जब उत्पाद डिजाइन भारत में किया जाता है। मैन्युफैक्चरिंग करना जरूरी है, लेकिन अधिक कॉम्प्लेक्स और डिजाइन प्रक्रिया के कारण डिजाइन करना भी महत्वपूर्ण है।

    ग्लोबल क्वालिटी और मॉडल मैनपावर पर जोर

    मंत्री ने वैश्वीकरण मानक पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर की गुणवत्ता के लिए सिक्स सिग्मा जैसी सोया का पालन जरूरी है।
    उन्होंने कहा, ”इसके बिना उत्पाद पूरे नहीं माने जाएंगे।’ इसके अलावा, उन्होंने सरकार के फोकस को भी स्थापित, स्थिर और तटस्थ रखा। वैष्णव ने इंडस्ट्री से यह भी अपील की कि वे स्टोल्ड मैनपावर तैयार करने पर ध्यान दें। सरकार पूरे इकोसिस्टम को सहयोग प्रदान करती है, लेकिन सरकार खुद आगे डिजाइन और इंजीनियरिंग में कुशल प्रतिभा तैयार करना चाहती है।

  • रुपये में गिरावट जारी, डॉलर के मुकाबले ₹95 के पार, वैश्विक तनाव से बढ़ा दबाव

    रुपये में गिरावट जारी, डॉलर के मुकाबले ₹95 के पार, वैश्विक तनाव से बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय मुद्रा में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। भारतीय रुपया ने शुरुआत तो मजबूती के साथ की, लेकिन दिन बढ़ने के साथ यह गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.22 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 93.62 प्रति डॉलर पर खुला और कुछ समय के लिए 93.57 तक मजबूत भी हुआ, लेकिन यह बढ़त टिक नहीं सकी।

    कच्चे तेल और वैश्विक हालात का असर
    रुपये पर दबाव की मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता तनाव है। खासतौर पर ईरान-अमेरिका तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया 94.85 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का रिकॉर्ड निचला स्तर था।

    आम लोगों की जेब पर सीधा असर
    रुपये की कमजोरी का असर सीधे आम आदमी पर पड़ेगा। जब रुपया गिरता है, तो आयात महंगा हो जाता है। भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे, जिससे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है।

    रोजमर्रा के खर्च में भी बढ़ोतरी
    विदेश से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे मोबाइल, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स भी महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई या यात्रा करने वालों को अब ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे। माल ढुलाई की लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों समेत रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल सकता है।