Category: Economy

  • ग्लोबल मार्केट में भूचाल: एशिया में भारी गिरावट, क्या भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा असर?

    ग्लोबल मार्केट में भूचाल: एशिया में भारी गिरावट, क्या भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा असर?


    नई दिल्ली। हफ्ते की शुरुआत के साथ ही वैश्विक शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भी गिरावट देखने को मिलेगी? बीते शुक्रवार को जहां सेंसेक्स और निफ्टी मजबूती के साथ बंद हुए थे वहीं आज विदेशी बाजारों से बेहद कमजोर संकेत मिल रहे हैं।

    एशियाई बाजारों में सोमवार को भारी बिकवाली का माहौल है। जापान का निक्केई इंडेक्स करीब 4.10 फीसदी गिरकर 50 800 के स्तर पर आ गया जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी लगभग 3 फीसदी की गिरावट के साथ 24 532 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।

    सिर्फ एशिया ही नहीं बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी का असर दिख रहा है। DAX 2.01 फीसदी CAC 1.90 फीसदी और FTSE-100 करीब 1.50 फीसदी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।

    गिफ्ट निफ्टी से मिल रहे कमजोर संकेत

    भारतीय बाजार के लिए शुरुआती संकेत देने वाला गिफ्ट निफ्टी भी गिरावट के साथ रेड जोन में ट्रेड करता दिखा। खबर लिखे जाने तक यह करीब 50 अंक फिसलकर 23 737 के स्तर पर था। इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली थी जहां डाउ जोंस और उसके फ्यूचर्स लगभग 1 फीसदी गिरकर बंद हुए थे। इन नकारात्मक वैश्विक संकेतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है जो पिछले सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव से गुजरा है।

    शुक्रवार को दिखी थी मजबूती
    अगर पिछले कारोबारी दिन की बात करें तो गुरुवार की गिरावट के बाद शुक्रवार को बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली थी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 325.72 अंक चढ़कर 74 532.96 पर बंद हुआ था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 112.35 अंकों की बढ़त के साथ 23 114.50 के स्तर पर पहुंच गया था। नोट: शेयर बाजार में निवेश करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

  • PAN, पेट्रोल से लेकर HRA तक….. एक अप्रैल से बदलेंगे ये नियम, आम आदमी पर होगा सीधा असर

    PAN, पेट्रोल से लेकर HRA तक….. एक अप्रैल से बदलेंगे ये नियम, आम आदमी पर होगा सीधा असर


    नई दिल्ली।
    नया वित्त वर्ष 2026-27 (New Financial Year 2026-27) शुरू होते ही 1 अप्रैल से कई बड़े नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों, खासकर सैलरीड कर्मचारियों (Salaried Employees) और टैक्सपेयर्स (Taxpayers) पर पड़ेगा। पैन कार्ड, HRA, क्रेडिट कार्ड (Credit Card) और पेट्रोल से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं, जो आपकी जेब और टैक्स प्लानिंग दोनों को प्रभावित करेंगे।


    PAN कार्ड के नियम सख्त, अब सिर्फ आधार से काम नहीं चलेगा

    अब तक पैन कार्ड बनवाने के लिए सिर्फ आधार पर्याप्त था, लेकिन 1 अप्रैल 2026 से यह सुविधा खत्म हो जाएगी। नए नियमों के तहत पैन बनवाने या उसमें सुधार करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इससे पैन प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त और सुरक्षित हो जाएगी।


    HRA क्लेम में बड़ा बदलाव, बताना होगा मकान मालिक से रिश्ता

    सैलरीड कर्मचारियों के लिए HRA से जुड़ा नियम और सख्त किया गया है। अब अगर आप सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो आपको मकान मालिक का PAN देना होगा और साथ ही यह भी बताना होगा कि वह आपके परिवार का सदस्य है या नहीं। यह जानकारी नए फॉर्म 124 में देनी होगी। इसका उद्देश्य फर्जी HRA क्लेम पर रोक लगाना है।


    क्रेडिट कार्ड पर सख्ती, बड़े ट्रांजैक्शन सीधे आयकर विभाग की नजर में

    1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब बड़े ट्रांजैक्शन और भुगतान की जानकारी इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट को दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल डिजिटल माध्यम से चुकाता है या 1 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान कैश में करता है, तो इसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। इससे हर बड़ा खर्च सीधे आपके PAN रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा।


    अब क्रेडिट कार्ड से भी भर सकेंगे टैक्स

    सरकार ने करदाताओं को राहत देते हुए अब टैक्स भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड को भी मान्य कर दिया है। पहले यह सुविधा केवल नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड तक सीमित थी। हालांकि, भुगतान करते समय अतिरिक्त चार्ज या प्रोसेसिंग फीस का ध्यान रखना जरूरी होगा।


    कंपनी के क्रेडिट कार्ड पर खर्च पर टैक्स नियम स्पष्ट

    अगर किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है और उसका पेमेंट कंपनी करती है, तो यह एक प्रकार का लाभ माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है। हालांकि, यदि खर्च पूरी तरह आधिकारिक काम के लिए है और उसका सही रिकॉर्ड मौजूद है, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा।


    नया आयकर अधिनियम 2025 लागू

    1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू किया जाएगा, जो पुराने 1961 कानून की जगह लेगा। यह टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


    सख्त नियम
    पेट्रोल में 20% एथेनॉल अनिवार्य, गुणवत्ता भी बदलेगी

    अब पूरे देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर भी नए मानक लागू होंगे, जिससे प्रदूषण कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।


    क्या है इसका सीधा असर?

    इन सभी बदलावों का सीधा असर आपकी टैक्स प्लानिंग, खर्च और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। खासतौर पर सैलरीड लोगों और ज्यादा खर्च करने वालों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होगी, क्योंकि हर बड़ा ट्रांजैक्शन अब टैक्स सिस्टम की नजर में होगा।

  • शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे ग्लोबल संकेत, तेल-रुपया और मिडिल ईस्ट हालात पर फोकस

    शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे ग्लोबल संकेत, तेल-रुपया और मिडिल ईस्ट हालात पर फोकस


    नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। वैश्विक और घरेलू उत्पाद के बीच दोस्ती की नज़र मध्य पूर्व में जारी तनाव, डॉलर के डॉलर के डॉलर की चाल और कच्चे तेल की दुकान पर रहेगा। ये तीन बड़े फैक्टर बाजार की दिशा तय करने में अंतिम भूमिका निभाएंगे।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का कारण
    अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच रिलीज मॅथेल में अब चौथे हफ्ते में एंट्री कर दी गई है। सामान्य स्थिति के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं, जिससे वैश्विक उद्योगों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

    इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रीट पर चेतावनी देते हुए तनाव को और बढ़ाया है। यह वैश्वीकरण तेल शोषित का प्रमुख मार्ग है, ऐसे में यहां किसी भी क्षेत्र में सीधे कच्चे तेल के प्रवेश को प्रभावित किया जा सकता है।

    कच्चे तेल की दुकान में तेज़ उछाल
    मध्य पूर्व के तनाव का असर कच्चे तेल की झील पर साफ नजर आ रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम में एक सप्ताह में 8.77 प्रतिशत और पिछले एक महीने में 57.35 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है।

    तेल की टंकी में यह उछाल भारत जैसे तीर्थ-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हो सकती है और कंपनी की लागत पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव शेयर बाजार पर भी देखा जा सकता है।

    रुपयों की मंदी से बढ़ा दबाव
    डॉलर के थोक भारतीय मुद्रा की गिरावट के लिए भी बाजार में नकारात्मक संकेत दे रही है। पिछला सप्ताह पोर्टफोलियो 93.71 के रिकॉर्ड पर पहुंच गया। इस गिरावट का मुख्य कारण विदेशी फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा (FII) की लगातार बिकवाली रही। विदेशी निवेशकों के विश्वास को बाजार में प्रभावित किया जाता है और शेयर बाजार में जमा किया जाता है।

    एफओआई और डीओआई का संतुलन
    डेज वीक एफओआई ने लगभग 29,718.9 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे बाजार पर दबाव बना। हालाँकि, डोमेस्टिक एंटरप्राइज़ एंटरप्राइज़ (डीआईआई) ने 30,642 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो कुछ हद तक समर्थित है।

    यह बैलेंस बाज़ार में बड़े पैमाने पर गिरावट से बचा हुआ है, लेकिन अगर फ़ोई की बिकवाली जारी रहती है तो बाज़ार पर दबाव बढ़ सकता है।

    पिछली शनिवार की रिलीज़- रिलीज़
    16 से 20 मार्च के बीच शेयर बाजार में भारी उछाल- देखने को मिला। अंत में बीएसई सेंसेक्स 74,523.96 और निफ्टी 50 23,114.50 के स्तर पर बंद हुआ।

    सेक्टोरल स्टॉक्स में डिफेन्स, फ़्यूसीजी और रियल्टी स्टॉक में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। इन सेक्टरों में क्रमश: 2.41%, 1.91% और 1.89% की गिरावट जारी है। वहीं, ऑटो और मेटल सेक्टर में क्रमश: 2.15% और 1.06% की बढ़त दर्ज की गई।

    किशोरी के लिए क्या संकेत?
    आने वाले सप्ताह में सहकर्मियों को रहने की आवश्यकता है। वैश्विक घटना, विशेष रूप से मध्य पूर्व की स्थिति, रुपये की चाल और कच्चे तेल के वैश्विक बाजार को प्रभावित करती है। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि जब तक इन तीनों में स्थिरता नहीं आएगी, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

  • एविएशन अपडेट: मिडिल ईस्ट संकट के चलते IndiGo-Air India का सीमित ऑपरेशन

    एविएशन अपडेट: मिडिल ईस्ट संकट के चलते IndiGo-Air India का सीमित ऑपरेशन


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच भारत की प्रमुख एयरलाइंस इंडिगो और एयर इंडिया ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 22 मार्च से सीमित उड़ान संचालन फिर से शुरू करने का फैसला किया है। हालांकि, एयरलाइंस ने यात्रियों को घेर लिया है कि क्षेत्र की सीमित स्थिति के चलते आखिरी समय में बदलाव संभव हैं।

    इंडिगो का सतर्क कदम
    बजट एयरलाइन इंडिगो ने घोषणा की है कि वह सुलभ उड़ानों का संचालन शुरू कर रही है। कंपनी ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट के लिए खुलने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति जरूर जांच लें। इंडिगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अनिश्चित परिस्थितियों में भी उनकी टीमें 24 घंटे यात्रियों की मदद के लिए काम कर रही हैं। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी उड़ानें सुरक्षा मानकों और नियामकों के अनुसार ही संचालित की जा रही हैं।

    एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की संयुक्त पहल
    दूसरी ओर एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ मिलकर एयर इंडिया ने भी बड़ा कदम उठाया है। दोनों एयरलाइंस ने 22 मार्च को पश्चिम एशिया क्षेत्र से आने-जाने वाली लगभग 50 उड़ानों के संचालन की घोषणा की है। इनमें निर्धारित (Scheduled) और विशेष (Non-scheduled) दोनों प्रकार की उड़ानें शामिल हैं, जिससे ज़्यादा से ज़्यादा यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने में मदद मिल सके।

    जेद्दा और मस्कट जैसे रूट पर फोकस
    एयरलाइंस ने जेद्दा और मस्कट जैसे प्रमुख गंतव्यों के लिए नियमित सेवाएं जारी रखने का फैसला लिया है। भारत और जेद्दा के बीच कुल 20 उड़ानें संचालित की जाएंगी। इनमें एयर इंडिया दिल्ली और मुंबई से उड़ानें संचालित करेंगी, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस बेंगलुरु, मंगलुरु और कोझिकोड से अपनी सेवाएं जारी रखेगी। इसके अलावा, एयर इंडिया एक्सप्रेस दिल्ली, कोच्चि, मुंबई और कन्नूर से मस्कट के लिए आठ निर्धारित उड़ानें भी संचालित करेंगी, जिससे यात्रियों को राहत मिलेगी।

    विशेष उड़ानों का भी प्रबंध
    नियमित सेवाओं के अलावा एयरलाइंस संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के विभिन्न गंतव्यों के लिए लगभग 30 अतिरिक्त विशेष उड़ानें भी संचालित करने की योजना बना रही हैं। हालांकि, इन उड़ानों का संचालन स्लॉट की प्राप्ति, स्थानीय परिस्थितियों और संबंधित देशों के नियामक प्राधिकरणों की मंजूरी पर निर्भर करेगा। एयरलाइंस ने स्पष्ट किया है कि सभी उड़ानें आवश्यक सुरक्षा मानकों और अनुमतियों के साथ ही संचालित की जाएंगी।

    यात्रियों के लिए अहम सलाह
    एयरलाइंस ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति की जांच करें और संभावित उड़ानों के लिए तैयार रहें। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उड़ानों के समय और रूट में अचानक बदलाव संभव हैं।

  • अमेरिका के ईरान तेल निर्यात पर अस्थायी पाबंदी हटाने पर भारत को राहत, वैश्विक तेल संकट हो सकता है कम

    अमेरिका के ईरान तेल निर्यात पर अस्थायी पाबंदी हटाने पर भारत को राहत, वैश्विक तेल संकट हो सकता है कम

    नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा ईरान के तेल निर्यात पर अस्थायी पाबंदी हटाने का ऐलान किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक तेल संकट में कुछ राहत मिल सकती है। सीमित समय के लिए यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को कम करने में मदद कर सकता है और भारत को ऊर्जा संकट से निपटने में कुछ राहत मिल सकती है।

    भारत की रिफाइनरियों की तैयारी

    भारत की तेल रिफाइनरियों के पास उच्च तकनीक और लॉजिस्टिक क्षमता है जिससे वे कच्चे तेल को प्रोसेस करने में कुशल हैं। हाल के वर्षों में ये रिफाइनरियां रूसी तेल को प्रोसेस करने में भी बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय फिलहाल अमेरिका की ओर से स्पष्ट शर्तों का इंतजार कर रहा है। इसके बाद ही भारत की रिफाइनरियां खरीद का अंतिम निर्णय लेंगी।

    ईरानी तेल की स्थिति और भारत की लाभकारी स्थिति
    इस समय ईरान के 140 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल समुद्र में जहाजों पर हैं जिनमें बड़ा हिस्सा चीन के लिए निर्धारित है। शेष मात्रा अन्य देशों के लिए उपलब्ध है। भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है क्योंकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी है। वर्तमान में कच्चे तेल के दाम 156 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं।

    भारत का ईरान से तेल आयात इतिहास

    भारत अपनी ऊर्जा का लगभग 85 प्रतिशत विभिन्न देशों से आयात करता है। वर्ष 2018-19 में भारत के कुल क्रूड ऑयल आयात में ईरान की हिस्सेदारी 10.6 प्रतिशत थी। 2019 में अमेरिका द्वारा ईरान पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत का आयात घटा और अब सीमित मात्रा में ही ईरान से आयात होता है। साल 2025 में ईरान से भारत का आयात केवल 0.44 बिलियन डॉलर रहा जबकि ईरान का भारत को निर्यात 1.24 बिलियन डॉलर रहा।

  • ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी उपलब्धि, भारत ने फिर पार किया 1 अरब टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा

    ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी उपलब्धि, भारत ने फिर पार किया 1 अरब टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा


    नई दिल्ली देश की ऊर्जा ऊर्जा को पूरा करने की दिशा में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। लगातार दूसरे वर्ष भारत ने 1 अरब टन (बिलियन टन) कोयला उत्पादन का लक्ष्य पार कर लिया है, जो आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम उठाने पर विचार कर रहा है।

    20 मार्च को ऐतिहासिक लक्ष्य प्राप्त हुआ

    कोयला मंत्रालय के अनुसार, 20 मार्च को यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई। मंत्रालय ने इसे ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता और औद्योगिक विकास के लिए बेहद अहम बताया है। यह सफलता न केवल प्लाज्मा बिजली की मांग को पूरा करने में मदद करेगी, बल्कि प्लांट को प्लांटेशन की आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगी।

    सहयोग और रणनीति से मिली सफलता

    मंत्रालय का कहना है, इस उपलब्धि के पीछे बेहतर योजना, प्रभावशाली इंजीनियर और मजबूत शक्तिशाली चेन शेयरों की अहम भूमिका है। कोयला उत्पादन एवं वितरण में सभी हितधारकों के बीच इस लक्ष्य को संभव बनाया गया।

    सेक्टर सेक्टर में भी सुधार

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में देश के आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की संयुक्त यूनिट 2.3% बढ़ी है।

    कोयला उत्पादन: 2.3% वृद्धि
    बिजली उत्पादन: 0.5% वृद्धि
    ये दस्तावेज हैं कि देश की दृष्टि मजबूत संरचना मजबूत हो रही है।

    थर्मल पावर प्लांट्स के पास ऑटोमोबाइल स्टॉक

    पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बावजूद देश के ताप विद्युत संयंत्रों के पास करीब 53.41 मिलियन टन कोयला भंडार मौजूद है, जिसकी करीब 23 दिन की जरूरत है। इसके अलावा, खदानों के पास भी अतिरिक्त भंडार रखा जा रहा है, ताकि भविष्य की मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।

    जमाकर्ता की भूमिका सुनिश्चित करने में

    कोल इंडिया लिमिटेड भी छोटे, मध्यम और सभी बड़े उद्योगों के लिए मजबूत कोयला खदानों के लिए सक्रिय कदम उठा रही है।

    आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम

    इस उपलब्धि में यह शामिल है कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्थिर आपूर्ति, बेहतर प्रबंधन और व्यापक उत्पादन क्षमता देश की आर्थिक प्रगति को भी नई गति दे रही है।

  • ग्रीन एनर्जी और पावर ग्रिड पर बढ़ेगा सहयोग, Manohar Lal Khattar ने गिनाए अहम क्षेत्र

    ग्रीन एनर्जी और पावर ग्रिड पर बढ़ेगा सहयोग, Manohar Lal Khattar ने गिनाए अहम क्षेत्र


    नई दिल्ली देश में छोटे उद्यमियों और वित्तीय संस्थानों को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार की नई योजना ‘क्रेडिट सोसाइटी फॉर माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूट्स-2.0’ के तहत करीब 36 लाख लोगों को सीधे मिलने का फायदा मिलने का अनुमान है।

    यह योजना क्या है?

    इस स्कॉबी के तहत बैंकों और वित्तीय ग्राहकों को मफाइनेंस के लिए नीचे दिए गए ऋण पर ऋण कवर दिया जाएगा। यह सोसाइटी नेशनल क्रेडिट ट्रस्ट ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड के माध्यम से प्रदान की जाएगी, जिससे लोन डिफॉल्ट की स्थिति में जोखिम कम होगा।

    सरकार का मकसद साफ है- बैंकों को गैर-लाभकारी बनाना ताकि वे एनबीएफसी-एमएफआई और अन्य माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को भारी कर्ज दे सकें, जिससे यह संस्थान आसानी से लोन की सुविधा तक पहुंच सके।

    20,000 करोड़ रुपए तक कर्ज बढ़ाने का लक्ष्य

    इस योजना के तहत सरकार ने करीब 20,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इससे ग्रामीण और फ़्रैंचाइज़ी के लोगों को सस्ती और आसान ऋण मिलें मिलें, जिससे छोटे और उद्यमियों को बढ़ावा मिले।

    कितना उत्पादक कवर?

    सरकार ने अलग-अलग स्थानों के लिए डेमोक्रेट कवर तय किया है-

    छोटे अपलोड के लिए: 80% तक
    मध्यम दर्जे के लिए: 75% तक
    बड़े अपलोड के लिए: 70% तक

    इस कर्ज़ के रिलीज़ वाले प्रोजेक्ट रिस्क का काफी हद तक कम हो जाएगा और वे ज्यादातर संपत्तियों के साथ लोन दे देंगे।

    यह जरूरी क्यों था स्काइप?

    हाल के समय में मैकिनेंस सेक्टर पर वित्तीय दबाव बढ़ा है, जिसके तहत बैंकों ने कर्ज लेने की सलाह दी थी। इसका सीधा असर छोटे बैंकों पर पड़ा, जिसमें लोन मिलना मुश्किल हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय के अनुसार यह योजना नए और पुराने दोनों तरह के ऋण बैंकों को कवर करने के लिए है, जिससे सेक्टर में स्थिरता आएगी।

    वित्तीय समावेशन को बढ़ावा

    माइक्रोफाइनेंस सर्विसेज सेक्टर के लिए लोगों की जीवन रेखा है, जो पारंपरिक उपकरणों से दूर हैं। यह योजना न केवल छोटे पैमाने पर निवेशकों को आकर्षित करने के लिए है, बल्कि देश में वित्तीय समावेशन को भी नई नजर रखने के लिए।

    कब तक लागू रहेगी योजना?

    यह योजना 30 जून 2026 तक लागू होगी या तब तक, जब तक 20,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज़ कवर नहीं दिया जाएगा-जो भी पहले हो।

  • भारत-अफ्रीका साझेदारी में ऊर्जा सेक्टर पर फोकस, Manohar Lal Khattar का बयान

    भारत-अफ्रीका साझेदारी में ऊर्जा सेक्टर पर फोकस, Manohar Lal Khattar का बयान


    नई दिल्ली भारत और अफ्रीकी देशों के बीच ऊर्जा सहयोग अब नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। विद्युत मंत्री मनोहर और लाल रॉकेट ने स्पष्ट किया है कि सामुदायिक ऊर्जा, वन्यजीव आधुनिकीकरण ऊर्जा भंडार जैसे क्षेत्र दोनों के बीच केंद्रीय नामित के केंद्र में हैं।

    साझा लक्ष्य: समावेशी और स्थिर विकास

    भारत इलेक्ट्रिक समिति 2026 में प्रदर्शन करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत और अफ्रीका सामूहिक दुनिया की लगभग एक-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में दोनों का लक्ष्य समावेशी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए विकास मॉडल तैयार करना है। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली सिर्फ एक सुविधा नहीं है, बल्कि आर्थिक विकास को गति देना और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना और मजबूत आधार बनाना है।

    ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन वलय’ से वैश्विक बातचीत

    मंत्री ने वन सन, वन वर्ल्ड, वन मित्र पहल को वैश्विक ऊर्जा महत्व के लिए गेमचेंजर के बारे में बताया। इस योजना के तहत सौर ऊर्जा को जोड़े से लेकर दुनिया भर में ऊर्जा की दृष्टि से पर्यटन की कोशिश की जा रही है।

    बुनियादी ढांचे में सहायता का उदाहरण

    भारत और अफ्रीका के बीच सहयोग अब जमीन पर भी दिख रहा है। असोसिएट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और अफ्रीका पावर50 के बीच साझेदारी के तहत केन्या में मिक्सिंग प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है, जिससे मजबूत पावर प्लांट तैयार किया जा रहा है।

    सौर ऊर्जा से सशक्त कम्पनियाँ

    अंतर्राष्ट्रीय सूर्य एलायंस सबसे पहले भारत-अफ्रीका देशों के साथ मिलकर अपना सहयोग और मजबूती प्रदान कर रहा है। यह साझेदारी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि चमत्कारिक विकास और तकनीकी सहायता पर आधारित है।

    जमीन पर खोदाई पर जोर

    राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने कहा कि अब इस साझेदारी को केवल विशेष दृष्टिकोण तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि केंद्रीय स्तर पर इसे जमीनी स्तर पर लागू करना जरूरी है, ताकि सभी को आयुर्विज्ञान और पर्यटन ऊर्जा मिल सके। वहीं, सोयालिनी ने स्थिरता विकास और जल प्रबंधन को प्रगति का आधार बताया।

    ‘मदद नहीं, निवेश करना चाहिए’ – अफ्रीका का संदेश

    एलेन एबोबिन ने साफा से कहा कि अफ्रीका को मदद की नहीं, बल्कि निवेश की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अब निवेश पर ध्यान केंद्रित करने, निवेश नेटवर्क के विस्तार और निजी निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

  • विदेश में UPI का विस्तार, India-Bhutan के बीच जल्द शुरू होगी क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर सेवा

    विदेश में UPI का विस्तार, India-Bhutan के बीच जल्द शुरू होगी क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर सेवा


    नई दिल्ली। भारत की डिजिटल क्रांति अब सीमा से बाहर कदम रखने जा रही है। भारत और भूटान के बीच जल्द ही UPI आधारित क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर सेवा शुरू होने जा रही है। यह पहल दोनों देशों के बीच आर्थिक और डिजिटल क्रांति को नई बढ़त देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

    UPI से आसान होगा विदेश में पैसा खुशनुमा

    इस नई व्यवस्था के तहत यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) के पोस्टल ट्रांसफर सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसके जरिए लोग डाक नेटवर्क का इस्तेमाल कर बेहद आसान, तेज और सस्ते तरीकों से एक देश से दूसरे देश में पैसे भेज और हासिल कर सकेंगे। यह सुविधा जरूरी पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी, जो छोटे ट्रांजैक्शन करते हैं या जिनके पास पारंपरिक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सीमित है।

    डाक सेवाओं के जरिए मजबूत होगा सहयोग

    इस पहल को सफल बनाने के लिए इंडिया पोस्ट और भूटान पोस्ट के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया गया है। यह समझौता केवल मनी ट्रांसफर तक सीमित नहीं है, बल्कि डाक सेवाओं के कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाएगा। इसमें लॉजिस्टिक्स, टेक्निकल डेवलपमेंट, डाक टिकट (फिलेटली), और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे दोनों देशों के बीच सेवा गुणवत्ता और दक्षता में सुधार होगा।

    ट्रेनिंग और टेक्नीक पर खास फोकस

    समझौते के तहत भूटान के डाक अधिकारियों को भारत में ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए रफी अहमद किदवई राष्ट्रीय डाक अकादमी जैसे विद्यार्थियों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
    इन ट्रेनिंग प्रोग्राम में आधुनिक टेक्नीक, ऑपरेशन मैनेजमेंट और डिजिटल सेवाओं की जानकारी दी जाएगी, जिससे भूटान की डाक सेवाएं और अधिक उन्नत हो सकें।

    डिजिटल और लॉजिस्टिक्स सिस्टम मजबूत होगा

    भारत अपने डिजिटल पोस्टल सिस्टम और डिजिटल एड्रेस कोड जैसी तकनीकों का अनुभव भूटान के साथ साझा करेगा। इससे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा और सेवाओं की गति व सेवाएं जहां।
    साथ ही, यह सहयोग फाइनेंशियल इन्क्लूजन (वित्तीय समावेशन) को भी बढ़ावा देगा, जिससे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी आसानी से बैंकिंग और पेमेंट सेवाएं मिल सकेंगी।

    वैश्विक स्तर पर बढ़ेगा भारत का डिजिटल प्रभाव

    यूपीआई का यह विस्तार भारत की डिजिटल ताकत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है। इससे न सिर्फ दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ेगा, बल्कि भारत के डिजिटल पेमेंट मॉडल को वैश्विक पहचान भी मिलेगी।

  • कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट, डॉलर मजबूत होने से सोना 5.89% तक फिसला

    कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट, डॉलर मजबूत होने से सोना 5.89% तक फिसला


    नई दिल्ली। इस हफ्ते अनमोल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली, जहां कॉन्स्टैंट रिवाइवसूली (प्रोफिट शो) और डॉलर की कमाई के साथ सोने और चांदी की कीमत में तेज गिरावट दर्ज की गई। पूरे सप्ताह के दौरान सोने का भाव करीब 5.89 प्रतिशत तक टूट गया, जिससे उपभोक्ताओं के बीच स्थिरता बढ़ गई। हालांकि सप्ताह के अंतिम दिन के शेयरों की संख्या भी देखने को मिली, लेकिन कुल बाजार दबाव में ही कमी आ रही है।

    सप्ताहभर में सोना-रेवेअर में बड़ी गिरावट

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जबकि जोशक्स गोल्ड अमेरीका की शुक्रवार को बढ़त के साथ 1,44,825 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गयी, जबकि जनाबेक्स गोल्ड अमेरीका में 3,990 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट के साथ 2,27,470 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गयी।

    वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, 999 पाउंड वाला सोना 1,56,436 रुपये से लेकर 1,47,218 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। चांदी भी 2,48,711 रुपए टूटकर 2,32,364 रुपए प्रति लुढ़क गई, यानी इसमें 16,000 रुपए से ज्यादा की गिरावट आई।

    डॉलर की दोस्ती और रुचि का असर

    सिद्धांतों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की इज़ाजत और सरकारी अधिकारियों की समीक्षा नीति ने सोना-असलीयत पर दबाव डाला है। फ़ेडरल रिज़र्व, बैंक ऑफ़ जापान, बैंक ऑफ़ कनाडा और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के सख्त रुख के कारण ब्याज परिसंपत्ति जारी रह सकती है।

    ऐसे में मराठा में सोने से पैसा इन्वेस्टमेंट (सेफ हेवन) जैसे सोने से पैसा वाले निवेशकों की ओर से निवेश किया जाता है, जहां पर निवेशकों का दबाव बना रहता है।

    मध्य पूर्व तनाव का मिलाप-जुला असर

    मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष का असर बाजार पर भी दिख रहा है। पहले इस तनाव के कारण सोना-रेयाला की झील में तेजी आई थी, लेकिन अब अनिश्चितता और उत्कट-अवस्था से अविश्वास का घाटा हो गया है।

    तेल और गैस के उत्पाद में स्टॉक का खतरा बढ़ गया है, जिससे बाजार में स्टॉक बना हुआ है।

    सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल क्या कहते हैं?

    विशेषज्ञ के मुताबिक, सोना इस समय अपने अहम सपोर्ट लेवल के करीब है।

    रेजिस्टेंस: 1,50,000 – 1,52,000 रुपये
    सपोर्ट: 1,35,000 – 1,40,000 रुपये

    चांदी की बात करें तो यह 2,20,000 – 2,15,000 रुपये के डिजायन जोन के करीब पहुंच गया है। अगर बाजार में खरीदारी बहुतायत है, तो इसमें फिर से 2,40,000 रुपये तक की छूट संभव है।

    विदेशी मुद्रा भंडार और आरबीआई का हस्तक्षेप

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 13 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत के स्वर्ण भंडार में 664 करोड़ डॉलर की उछाल आई और यह 130.68 डॉलर तक पहुंच गई। हालाँकि कुल विदेशी मुद्रा भंडार 7.05 अरब डॉलर 709.76 अरब डॉलर रह गया। इसकी बड़ी वैल्यू आरबीआई का मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप है, जहां रुपये को सहारा देने के लिए डॉलर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

    डॉलर की साख, वैश्विक हित हितैषी का दबाव और भू-राजनीतिक साख ने सोना-ए-कीमत को झटका दिया है। निकट भविष्य में बाजार में जारी की जा सकती है, इसलिए आवेदकों को रणनीति निषेध की आवश्यकता है।