Category: Entertainment

  • दिशा पाटनी के साथ रिश्ते की खबर पर तलविंदर ने चुप्पी तोड़ी

    दिशा पाटनी के साथ रिश्ते की खबर पर तलविंदर ने चुप्पी तोड़ी

    बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी अक्सर अपनी फिल्मों से ज्यादा निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में रहती हैं। टाइगर श्रॉफ के साथ उनके रिश्ते ने एक समय खूब सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन बाद में दोनों अलग हो गए। अब हाल के दिनों में दिशा का नाम पंजाबी गायक तलविंदर के साथ जोड़ा जा रहा है। दोनों के डेटिंग की खबरें सोशल मीडिया से लेकर एंटरटेनमेंट गलियारों तक छाई हुई हैं। इस बीच तलविंदर ने पहली बार इन चर्चाओं पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है।

    एक इंटरव्यू के दौरान तलविंदर ने दिशा के साथ अपने रिश्ते की अफवाहों पर बात करते हुए कहा कि (नुपुर सेनन और स्टेबिन बेन) से शादी पहले उनकी आपसी जान-पहचान बढ़ी थी, लेकिन अचानक सामने आई इन खबरों ने उन्हें भी हैरान कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी भी तरह के दबाव या अफवाहों के आगे झुकना नहीं चाहते और फिलहाल एक-दूसरे को समझने की कोशिश कर रहे हैं। गायक ने आगे जोड़ा, अगर लोग अफवाह फैलाना चाहते हैं, तो मैं इसे अफवाह ही रहने दूंगा।

    प्यार और रिश्तों पर अपने विचार शेयर करते हुए तलविंदर ने कहा, मैं हर दिन प्यार में पड़ जाता हूं, मैं अभी भी प्यार में पड़ रहा हूं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान ने फैंस की दिलचस्पी और बढ़ा दी है।

    गौरतलब है कि उदयपुर में नुपुर सैनन और स्टेबिन बेन की शादी के दौरान दिशा और तलविंदर को पहली बार साथ देखा गया था, जिसके बाद से दोनों के रिश्ते को लेकर कयासों का दौर जारी है।

  • ओटीटी फिल्म ''घूसखोर पंडत'' विवादों में घिरी, एनएचआरसी का आइबी मिनिस्ट्री को नोटिस

    ओटीटी फिल्म ''घूसखोर पंडत'' विवादों में घिरी, एनएचआरसी का आइबी मिनिस्ट्री को नोटिस


    नई दिल्ली। ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज होने वाली आगामी फिल्म ”घूसखोर पंडत” के नाम को लेकर मिली शिकायत के मद्देनजर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एनएचआरसी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है।नेटफ्लिक्स की क्राइम थ्रिलर घूसखोर पंडत की कहानी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है। जेम्स ऑफ बॉलीवुड के संस्थापक संजीव नेवार ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि फिल्म में जातिवादी और भेदभावपूर्ण सामग्री है।
    नेटफ्लिक्स की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।तीन फरवरी को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दायर शिकायत के अनुसार, यह नाम सीधे तौर पर एक विशेष जाति को भ्रष्टाचार और अनैतिक व्यवहार से जोड़ता है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि फिल्म का शीर्षक जातिगत तनावों के प्रति पहले से ही संवेदनशील समाज में सामाजिक शत्रुता को बढ़ावा दे सकता है।
    फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का टीजर देख भड़के उज्जैन के ब्राह्मण
    इंटरनेट माध्यम पर अभिनेता मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का टीजर जारी होने के बाद उज्जैन के ब्राह्मण आग बबूला हो गए हैं। ब्राह्मणों ने फिल्म के टाइटल का जमकर विरोध किया है। उनका कहना है कि देश में ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य को अपमानित करने का प्रचलन बढ़ रहा है। अगर शीर्षक नहीं बदला गया तो, फिल्म बनाने वालों के मुंह पर कालिख पोतेंगे।

    उज्जैन के तीर्थ पुरोहित पं. अमर डब्बावाला ने भी फिल्म का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि फिल्म के माध्यम से पंडितों को अपमानित करने का प्रयास किया जा रहा है। सेंसर बोर्ड को समाज में वैमनस्यता पैदा करने वाली फिल्मों पर रोक लगाना चाहिए।फिल्म घूसखोर पंडत प्रसारित होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। जयपुर और दिल्ली के बाद अब उज्जैन में भी इसके शीर्षक को लेकर विवाद छिड़ गया है।

    फिल्म के नाम में ही पुजारी, पुरोहित व ब्राह्मणों का अपमान है

    अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक पं. महेश पुजारी ने फिल्म के शीर्षक को ब्राह्मणों का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि देश में सवर्ण समाज को अपमानित किया जा रहा है। इस फिल्म के नाम में ही पुजारी, पुरोहित व ब्राह्मणों का अपमान है। हम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। फिल्म के निर्माता अगर हमारे सामने आएंगे तो मुंह पर कालिख पोती जाएगी।
  • कवि प्रदीप : शब्दों से राष्ट्रभावना जगाने वाले अमर गीतकार (शरद जोशी, रतलाम)

    कवि प्रदीप : शब्दों से राष्ट्रभावना जगाने वाले अमर गीतकार (शरद जोशी, रतलाम)


    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म संगीत और हिंदी काव्य जगत में कवि प्रदीप का नाम अत्यंत श्रद्धा, सम्मान और गौरव के साथ लिया जाता है। वे उन विरले रचनाकारों में से थे, जिनके शब्द केवल गीत नहीं बने, बल्कि राष्ट्र की आत्मा की आवाज़ बने।

    6 फ़रवरी 1915 को मध्यप्रदेश के उज्जैन ज़िले के बड़नगर में जन्मे कवि प्रदीप का वास्तविक नाम रामचंद्र नारायण द्विवेदी था। बचपन से ही उनमें काव्य प्रतिभा के स्पष्ट संकेत दिखाई देने लगे थे। उनकी साहित्यिक क्षमता से प्रभावित होकर महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने उन्हें प्रदीप उपनाम दिया-जो आगे चलकर उनकी स्थायी पहचान बना।

    कवि प्रदीप के जीवन का एक महत्वपूर्ण और अपेक्षाकृत कम चर्चित पक्ष रतलाम से जुड़ा है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रतलाम में उनके ननिहाल में हुई। यहाँ वे अपने नाना कामदार रामलाल जी जोशी के सान्निध्य में रहे, प्रदीप जी रिश्ते में लेखक के ताऊ थे।
    रतलाम की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना ने उनके विचारों को गहराई प्रदान की।

    बड़नगर के विद्यालय में अध्ययन के दौरान वे उस समय के मेधावी विद्यार्थियों में गिने जाते थे। उल्लेखनीय है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी उसी विद्यालय में उनके सहपाठी रहे-जो इस शैक्षणिक परिवेश की ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है।

    कवि प्रदीप ने हिंदी सिनेमा को केवल गीत नहीं दिए, बल्कि जनभावनाओं को स्वर दिया। उन्होंने लगभग 85 से अधिक फिल्मों के लिए 1800 से ज्यादा गीत लिखे और कई गीत स्वयं भी गाए। उनकी रचनाएँ मनोरंजन से आगे बढ़कर समाज, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति चेतना जगाने का कार्य करती रहीं।

    जागृति’ नास्तिक किस्मत जय संतोषी’ माँ हरिश्चंद्र तारामती पैगाम संबंध जैसी फिल्मों में उनके गीतों ने भक्ति, नैतिकता और सामाजिक जागरण को नई ऊँचाइयाँ दीं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में लिखे गए
    चल चल रे नौजवान और दूर हटो ऐ दुनिया वालों, हिंदुस्तान हमारा है देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान कितना बदल गया इंसान  जैसे गीतों ने देशवासियों के हृदय में राष्ट्रप्रेम की ज्वाला प्रज्ज्वलित की।

    1962 के भारत-चीन युद्ध के पश्चात रचित ऐ मेरे वतन के लोगों भारतीय इतिहास का अमर गीत बन गया। जब इस गीत को लता मंगेशकर ने स्वर दिया, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी भावुक होकर आँसू नहीं रोक सके। यह गीत आज भी शहीदों के बलिदान का जीवंत स्मारक है।

    कवि प्रदीप समाज की पीड़ा और नैतिक पतन के भी संवेदनशील कवि थे।
    देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान जैसा गीत समाज के आत्ममंथन का सशक्त दस्तावेज़ है। उनकी लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता थी-सरल शब्दों में गहन भावों की अभिव्यक्ति।

    उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें अनेक सम्मानों से नवाज़ा गया, जिनमें भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार प्रमुख है11 दिसंबर 1998 को वे इस दुनिया से विदा हो गए, किंतु उनके गीत आज भी जीवित हैं। हर राष्ट्रीय पर्व, सांस्कृतिक आयोजन और भावनात्मक अवसर पर उनके शब्द गूंजते हैं।

    कवि प्रदीप की सांस्कृतिक विरासत आज भी उनके परिवार के माध्यम से जीवंत है। उनके दो बेटियां थी सरगम और मितुल परिवार में अब अकेली रह गई पुत्री मितुल प्रदीप मुंबई के विले पार्ले क्षेत्र में तूलिका आर्ट्स सेंटर के माध्यम से फाइन आर्ट्स की कक्षाएँ संचालित कर रही हैं। वे चित्रकला के माध्यम से नई पीढ़ी को कला, संवेदना और सृजनशीलता का संस्कार दे रही हैं-यह उनके पिता की सांस्कृतिक चेतना की ही निरंतरता है।कवि प्रदीप केवल एक गीतकार नहीं थे, बल्कि वे राष्ट्रभावना, भक्ति और सामाजिक चेतना के अमर स्वर थे। उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेंगी।

  • कमिटमेंट हो तो ऐसा! 102 डिग्री बुखार में तप रहे थे नाना पाटेकर, इंजेक्शन लगवाकर पूरा किया 'ओ रोमियो' का एक्शन सीन

    कमिटमेंट हो तो ऐसा! 102 डिग्री बुखार में तप रहे थे नाना पाटेकर, इंजेक्शन लगवाकर पूरा किया 'ओ रोमियो' का एक्शन सीन

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अपनी बेमिसाल अदाकारी के साथ-साथ अपने कड़े अनुशासन और काम के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज ने उनकी इसी प्रतिबद्धता का एक हैरान कर देने वाला किस्सा साझा किया है। शाहिद कपूर स्टारर फिल्म ‘ओ रोमियो’ की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने यह साबित कर दिया कि एक महान कलाकार के लिए काम से बढ़कर कुछ नहीं होता।

    द फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, विशाल भारद्वाज ने बताया कि फिल्म के एक महत्वपूर्ण एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग एक ट्रेन सेट पर चल रही थी। उसी दौरान उन्हें पता चला कि नाना पाटेकर की तबीयत काफी खराब है और उनका शरीर 102 डिग्री बुखार से तप रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत डॉक्टर को सेट पर बुलाया गया। डॉक्टर ने नाना की हालत देख उन्हें एक इंजेक्शन लगाया और सख्त हिदायत दी कि वह शूटिंग न करें और तुरंत आराम करें।

    हालांकि, नाना पाटेकर ने डॉक्टर की सलाह को दरकिनार कर दिया। विशाल भारद्वाज ने इस पल को याद करते हुए बताया, “नाना सर आखिर नाना पाटेकर हैं! उन्होंने साफ कह दिया कि वह शूट कैंसिल नहीं करेंगे। उनका मानना था कि वह यह बोझ अपने सिर पर नहीं ले सकते कि उनकी वजह से पूरी यूनिट का काम रुके या लोकेशन का नुकसान हो।” नाना की इसी जिद के आगे पूरी टीम को झुकना पड़ा और अगले चार घंटों तक उन्होंने लगातार शूटिंग जारी रखी।

    विशाल भारद्वाज ने नाना के जज्बे की तारीफ करते हुए कहा कि उनका शरीर बुखार से इतना गर्म था कि छूने मात्र से तपिश महसूस हो रही थी। शॉट्स के बीच के समय में वह ट्रेन के सेट पर ही लेट जाते थे, लेकिन जैसे ही कैमरा रोल होता और परफॉर्म करने की बारी आती, उन्हें देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था कि वह बीमार हैं। एक महान कलाकार की यही पहचान होती है कि वह अपनी शारीरिक तकलीफ को अपने हुनर के आड़े नहीं आने देता। बता दें कि शाहिद कपूर और नाना पाटेकर स्टारर ‘ओ रोमियो’ इसी महीने 13 फरवरी को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है।

  • अभिषेक बच्चन का छलका दर्द: पिता अमिताभ की तारीफों और फिल्मी असफलताओं पर खुलकर बोले जूनियर बी

    अभिषेक बच्चन का छलका दर्द: पिता अमिताभ की तारीफों और फिल्मी असफलताओं पर खुलकर बोले जूनियर बी


    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन अक्सर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर अपने बेटे अभिषेक बच्चन के अभिनय और उनकी मेहनत की सराहना करते नजर आते हैं। पिता का यह स्नेह जहां प्रशंसकों को पसंद आता है, वहीं कई बार अभिषेक को इसके कारण आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ता है। हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान अभिषेक बच्चन ने इन तमाम पहलुओं पर अपनी बेबाक राय रखी और बताया कि एक ‘सुपरस्टार’ पिता के साये में रहकर अपनी पहचान बनाना कितना चुनौतीपूर्ण होता है।

    साल 2000 में फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिषेक ने स्वीकार किया कि 25 साल बीत जाने के बाद भी पिता से उनकी तुलना का दबाव कम नहीं हुआ है। अब 50 वर्ष के हो चुके अभिनेता ने माना कि लगातार मिलती सार्वजनिक असफलताएं और आलोचनाएं किसी भी इंसान को मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि जब आप हफ्ते दर हफ्ते जनता के बीच असफल साबित होते हैं, तो नकारात्मकता से दूर रहना और निराशावादी न होना बेहद मुश्किल हो जाता है। हालांकि, उन्होंने कड़वाहट पालने के बजाय हमेशा अपने काम पर ध्यान देने और अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की है।

    अमिताभ बच्चन द्वारा उनकी प्रशंसा किए जाने पर अभिषेक ने बहुत ही मानवीय दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि दुनिया अक्सर उनके पिता को एक ‘लार्जर देन लाइफ’ व्यक्तित्व के रूप में देखती है और मानती है कि उन्हें एक सामान्य इंसान की तरह व्यवहार करने की अनुमति नहीं है। लेकिन वास्तविकता यह है कि वह भी एक इंसान हैं, एक पिता हैं और एक दादा हैं। उन्हें भी अपने बच्चों की उपलब्धि पर गर्व महसूस करने और एक सामान्य माता-पिता की तरह प्रतिक्रिया देने का पूरा हक है।

    अभिषेक ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके माता-पिता, अमिताभ और जया बच्चन, उनके बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के बजाय उनकी मेहनत और प्रयासों पर गर्व करते हैं। उनके लिए सफलता का पैमाना हिट फिल्में नहीं, बल्कि ईमानदारी से किया गया काम है। वर्कफ्रंट की बात करें तो हाल ही में ‘हाउसफुल 5’ में नजर आए अभिषेक अब बड़े पर्दे पर धमाका करने को तैयार हैं। वह शाहरुख खान और सुहाना खान की बहुचर्चित फिल्म ‘किंग’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखेंगे, जिससे दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं।

  • मैं हूं ना 2: शाहरुख खान और फराह खान की जोड़ी फिर मचाएगी धमाल, डबल रोल में नजर आएंगे 'किंग खान'

    मैं हूं ना 2: शाहरुख खान और फराह खान की जोड़ी फिर मचाएगी धमाल, डबल रोल में नजर आएंगे 'किंग खान'


    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के गलियारों से शाहरुख खान के प्रशंसकों के लिए एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सोशल मीडिया पर हलचल तेज कर दी है। साल 2004 की ब्लॉकबस्टर फिल्म मैं हूं ना के सीक्वल को लेकर लंबे समय से कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है, वह किसी बड़े धमाके से कम नहीं है। खबर है कि शाहरुख खान और फराह खान एक बार फिर मैं हूं ना 2 के लिए साथ आ रहे हैं, और इस बार मनोरंजन का डोज़ दोगुना होने वाला है क्योंकि शाहरुख फिल्म में डबल रोल निभाते नजर आएंगे।

    पिंकविला की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, फराह खान ने शाहरुख के सामने एक ऐसा कॉन्सेप्ट रखा है जिसमें सुपरस्टार दो विपरीत किरदारों को पर्दे पर जीवंत करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि इस सीक्वल का मूल विचार खुद शाहरुख खान ने ही दिया है। फिल्म की कहानी में देशभक्ति का जज्बा, हाई-वोल्टेज एक्शन और वही सिग्नेचर कॉमेडी होगी जिसके लिए पहली फिल्म जानी जाती थी। सूत्र बताते हैं कि फिल्म में भारत के सामने आने वाली एक नई और बड़ी धमकी को दिखाया जाएगा, जिससे निपटने के लिए पुरानी स्टार कास्ट एक बार फिर साथ आ सकती है।

    हालांकि, फैंस को थोड़ा इंतजार करना होगा क्योंकि शाहरुख खान फिलहाल अपनी आगामी फिल्म किंग की शूटिंग में व्यस्त हैं। बताया जा रहा है कि किंग की रिलीज के बाद ही वह फराह खान से मैं हूं ना 2 की पूरी स्क्रिप्ट सुनेंगे और उसके बाद ही इस पर अंतिम मुहर लगाएंगे। किंग फिल्म भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है क्योंकि इसमें शाहरुख पहली बार अपनी बेटी सुहाना खान के साथ स्क्रीन शेयर करते दिखेंगे। साथ ही इस फिल्म में दीपिका पादुकोण, अभिषेक बच्चन और अनिल कपूर जैसे बड़े सितारे भी नजर आएंगे।

    शाहरुख और फराह की जोड़ी ने इससे पहले मैं हूं नाओम शांति ओम और हैप्पी न्यू ईयर जैसी सुपरहिट फिल्में दी हैं। ऐसे में मैं हूं ना 2 की घोषणा ने दर्शकों की उम्मीदों को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। फैंस का कहना है कि शाहरुख को दोबारा मेजर राम प्रसाद शर्मा के अंदाज में देखना किसी सपने के सच होने जैसा होगा, और ऊपर से डबल रोल का तड़का फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनाने के लिए काफी है। अब देखना यह होगा कि कब आधिकारिक तौर पर इस प्रोजेक्ट का ऐलान होता है और किंग खान एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर अपना जादू बिखेरते हैं।

  • जब चमकदार परदे से संसद तक का सफर अधूरा रह गया: राजनीति में ज्यादा दिन टिक नहीं पाए ये बॉलीवुड स्टार्स

    जब चमकदार परदे से संसद तक का सफर अधूरा रह गया: राजनीति में ज्यादा दिन टिक नहीं पाए ये बॉलीवुड स्टार्स


    नई दिल्ली ।बॉलीवुड और राजनीति का रिश्ता नया नहीं है। फिल्मों की लोकप्रियता और जनता के बीच गहरी पैठ के चलते कई सितारों ने सोचा कि वे सियासत में भी उतनी ही सफलता हासिल कर लेंगे। कुछ स्टार्स ने चुनाव जीते तो कुछ को हार का सामना करना पड़ा लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इनमें से कई ज्यादा समय तक राजनीति में टिक नहीं पाए और फिर वापस अपनी पुरानी दुनिया या निजी जिंदगी में लौट गए।

    महानायक अमिताभ बच्चन इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। साल 1984 में उन्होंने एक्टिंग से ब्रेक लेकर राजनीति में कदम रखा और इलाहाबाद सीट से रिकॉर्ड जीत दर्ज की। उस वक्त माना जा रहा था कि वह राजनीति में लंबी पारी खेलेंगे लेकिन तीन साल बाद ही 1987 में उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में कई मौकों पर बिग बी ने यह संकेत दिया कि राजनीति उनके स्वभाव के अनुकूल नहीं थी।

    गोविंदा भी उन स्टार्स में शामिल हैं जिन्होंने राजनीति को लेकर खुलकर पछतावा जताया। साल 2004 में कांग्रेस के टिकट पर मुंबई नॉर्थ से लोकसभा चुनाव जीतने वाले गोविंदा ने 2009 में राजनीति से दूरी बना ली। कई इंटरव्यू में उन्होंने माना कि राजनीति ज्वाइन करना उनके जीवन की एक बड़ी गलती थी।

    उर्मिला मातोंडकर ने भी कांग्रेस के साथ राजनीति में एंट्री ली। उन्होंने मुंबई नॉर्थ सीट से चुनाव लड़ा लेकिन हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के कुछ ही दिनों बाद उर्मिला ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राजनीति से पूरी तरह किनारा कर लिया।

    साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत ने भले ही चुनाव नहीं लड़ा लेकिन उनकी राजनीतिक घोषणा ने देशभर में हलचल मचा दी थी। 2017 में उन्होंने रजनी मक्कल मंडराम पार्टी बनाने का ऐलान किया मगर 2021 में खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए राजनीति में सक्रिय रूप से उतरने से इनकार कर दिया।

    संजय दत्त ने भी समाजवादी पार्टी के साथ सियासी सफर शुरू किया था। साल 2008 में पार्टी से जुड़े संजय को जनरल सेक्रेटरी बनाया गया लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने न सिर्फ पद छोड़ा बल्कि पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया।

    जावेद जाफरी ने 2014 में आम आदमी पार्टी ज्वाइन की और चुनाव लड़ा लेकिन हार के बाद वे राजनीति में सक्रिय नजर नहीं आए। वहीं शेखर सुमन ने 2009 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा हार के बाद 2012 में पार्टी छोड़ दी और बाद में साफ कहा कि वह दोबारा राजनीति में नहीं आएंगे।

    मराठी सिनेमा के चर्चित नाम महेश मांजरेकर ने भी 2014 में चुनाव लड़ा लेकिन हार के बाद उनका राजनीतिक सफर वहीं थम गया। इन सभी उदाहरणों से साफ है कि फिल्मों की लोकप्रियता राजनीति में सफलता की गारंटी नहीं होती। राजनीति की जटिलताएं दबाव और जिम्मेदारियां हर किसी के बस की बात नहीं होतीं और यही वजह है कि कई सितारे जल्द ही इस दुनिया से दूरी बना लेते हैं।

  • ओटीटी पर अनिल कपूर की एंट्री, 'फेमिली बिजनेस' का टीजर रिलीज

    ओटीटी पर अनिल कपूर की एंट्री, 'फेमिली बिजनेस' का टीजर रिलीज

    बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनिल कपूर एक बार फिर दर्शकों को नए और अलग अंदाज में नजर आने वाले हैं। उनकी आगामी वेब सीरीज ‘फेमिली बिजनेस’ का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है और नेटफ्लिक्स पर इसका टीजर भी जारी हो चुका है। इस सीरीज का निर्माण विक्रम मल्होत्रा, हंसल मेहता और निरेन भट्ट ने मिलकर किया है। टीजर में अनिल कपूर के साथ विजय वर्मा मुख्य भूमिका में दिखाई दे रहे हैं।

    ‘फेमिली बिजनेस’ की कहानी बाप-बेटे के रिश्ते और उनके बीच चलने वाली तकरार पर आधारित है। अनिल कपूर इसमें जेह डावर का किरदार निभा रहे हैं, जबकि विजय वर्मा उनके बेटे सिड मल्होत्रा की भूमिका में नजर आएंगे। कहानी एक अमीर घराने के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां पैसों और सत्ता की लड़ाई में रिश्तों की अहमियत कम हो जाती है और बाप-बेटे भी एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो जाते हैं।

    इस सीरीज के जरिए रिया चक्रवर्ती लंबे समय बाद अभिनय की दुनिया में वापसी कर रही हैं। उनके अलावा नेहा धूपिया, राइमा सेन और नंदिश संधू जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। दमदार स्टारकास्ट और अलग विषयवस्तु के चलते ‘फैमिली बिजनेस’ को लेकर दर्शकों में पहले से ही खासा उत्साह देखा जा रहा है।

  • ब्रेकअप के बाद शमिता शेट्टी को हुआ प्यार? बिजनेसमैन संग रिश्ते पर तोड़ी चुप्पी, बोलीं- सिंगल

    ब्रेकअप के बाद शमिता शेट्टी को हुआ प्यार? बिजनेसमैन संग रिश्ते पर तोड़ी चुप्पी, बोलीं- सिंगल


    नई दिल्ली । 2 फरवरी को शमिता शेट्टी ने धूमधाम से अपना 47वां बर्थडे सेलिब्रेट किया. शमिता ने बर्थडे का जश्न बहन शिल्पा शेट्टी और जीजू राज कुंद्रा के साथ मनाया. खास मौके पर उनके साथ टेक्नो आर्टिस्ट दीपेश शर्मा भी नजर आए. दीपेश और शमिता को साथ देखकर इनकी डेटिंग की अफवाहें शुरू हो गईं. लेकिन क्या सच में शमिता और दीपेश रिश्ते में हैं? एक्ट्रेस ने खुद इंस्टाग्राम पोस्ट में डेटिंग रूमर्स का सच बताया है.

    रिलेशनशिप में शमिता?

    बॉलीवुड डीवा शमिता शेट्टी अपनी पर्सनल और लव लाइफ को लेकर हमेशा से ही चर्चा में आ जाती हैं. बर्थडे के बाद से उनका नाम दीपेश शर्मा के साथ जोड़ा जा रहा है. इससे पहले बात बहुत आगे बढ़ती एक्ट्रेस ने खुद ही सारी चीजें क्लियर कर दीं हैं. डेटिंग रूमर्स का सच बताते हुए उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा- सिंगल और शांत. सच्ची दोस्ती को गलत तरीके से समझने वाले रूढ़िवादी बनना बंद करो. ये सब सच में बकवास है.

    कैसे शुरू हुई डेटिंग रूमर्स?

    दीपेश ने इंस्टाग्राम पर शमिता के जन्मदिन की कुछ फोटोज शेयर की थींजिसमें वो एक्ट्रेस के बेहद करीब नजर आए. उन्होंने कैप्शन में लिखा कि हैप्पी बर्थडे मेरी हमेशा की हंसी का राजजिसे मेरी सारी कहानियां पता हैं और फिर भी साथ है. लव यूमाई शम्स्टर. बस इसके बाद से ही उनका नाम शमिता के साथ जोड़ा जाने लगा.

    दीपेश शर्मा की बात करेंतो वो मुंबई बेस्ड टेक्नो आर्टिस्ट/डीजे हैं. वो टुमॉरोलैंड जैसे बड़े फेस्टिवल्स में परफॉर्म करते हैं. दीपेश का गोवा के क्रॉनिकल बीच पर एक क्लब भी है. वो सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं और इंस्टाग्राम पर उनके करीब 192K फॉलोअर्स हैं. दीपेश कई बॉलीवुड सेलेब्स संग अच्छा रिश्ता शेयर करते हैं.

    शमिता शेट्टी वो एक्ट्रेस हैं जिन्होंने कभी छिपकर किसी से प्यार नहीं किया. बिग बॉस ओटीटी में उनका रिश्ता राकेश बापट संग बना थालेकिन शो खत्म होने के बाद दोनों का ब्रेकअप हो गया. शमिता और राकेश भले ही साथ नहीं हैंलेकिन उनके बीच आज भी अच्छा बॉन्ड है.

  • अब बड़े पर्दे पर दिखेगा गुड्डू, मुन्ना और कालीन भैया का भौकाल, मिर्ज़ापुर द मूवी की रिलीज डेट आई सामने

    अब बड़े पर्दे पर दिखेगा गुड्डू, मुन्ना और कालीन भैया का भौकाल, मिर्ज़ापुर द मूवी की रिलीज डेट आई सामने

    नई दिल्ली । भारत की सबसे चर्चित वेब सीरीज़ मिर्ज़ापुर अब पहली बार फिल्म के रूप में सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। जिस क्राइमसत्ता और बदले की दुनिया ने ओटीटी पर तहलका मचाया थावही कहानी अब और बड़े स्केल के साथ बड़े पर्दे पर दिखाई देगी।जब से मिर्ज़ापुरद मूवी का ऐलान हुआ थाफैंस इसकी रिलीज़ डेट का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। अब मेकर्स ने इस इंतज़ार को खत्म करते हुए आधिकारिक तौर पर फिल्म की रिलीज़ डेट का ऐलान कर दिया है।
    मिर्ज़ापुरद मूवी 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।फिल्म दर्शकों को उसी रॉबेरहम और सत्ता की लड़ाई से भरी दुनिया में ले जाएगीजिसे उन्होंने वेब सीरीज़ में पसंद किया था लेकिन इस बार कहानी का स्केल और भी बड़ा होगा।फिल्म में पंकज त्रिपाठी एक बार फिर कालीन भैयाअली फज़ल गुड्डू पंडित और दिव्येंदु त्रिपाठी मुन्ना भैया के आइकॉनिक किरदारों में वापसी कर रहे हैं। इनके अलावा फिल्म में कई पुराने और नए चेहरे भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।
    फिल्म की स्टार कास्ट में जितेंद्र कुमाररवि किशनअभिषेक बनर्जीरसिका दुग्गलश्वेता त्रिपाठीश्रिया पिलगांवकरहर्षिता गौरसुशांत सिंहमोहित मलिकशीबा चड्ढाराजेश तैलंगकुलभूषण खरबंदा और सोनल चौहान जैसे कलाकार शामिल हैं।मिर्ज़ापुरद मूवी का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया हैजबकि इसकी कहानी पुनीत कृष्णा ने लिखी है। फिल्म को एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर प्रोड्यूस कर रहे हैं।अब देखना दिलचस्प होगा कि सत्ताबदले और खून-खराबे की ये कहानी बड़े पर्दे पर दर्शकों को कितना पसंद आती है।