Category: Entertainment

  • थलापति विजय की विदाई फिल्म ‘जना नायगन’ को लेकर जबरदस्त दीवानगी, एडवांस बुकिंग में रिकॉर्ड मांग, 2500 रुपये तक पहुंची टिकट कीमत

    थलापति विजय की विदाई फिल्म ‘जना नायगन’ को लेकर जबरदस्त दीवानगी, एडवांस बुकिंग में रिकॉर्ड मांग, 2500 रुपये तक पहुंची टिकट कीमत


    नई दिल्ली ।
    दक्षिण भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता थलापति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जना नायगन’ की रिलीज से पहले ही दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। लंबे इंतजार के बाद 23 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही इस फिल्म की एडवांस बुकिंग ने कई शहरों में रिकॉर्ड स्तर की मांग दर्ज की है। विजय की कथित तौर पर आखिरी फिल्म मानी जा रही इस परियोजना को लेकर प्रशंसकों में खासा उत्साह है, जिसका असर टिकट बिक्री और सिनेमाघरों में बढ़ती भीड़ के रूप में दिखाई दे रहा है।

    फिल्म के लिए देश के कई प्रमुख शहरों में एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी है। बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली, केरल और अन्य स्थानों पर शुरुआती शो के टिकट तेजी से बिक रहे हैं। कई सिनेमाघरों में बुकिंग खुलते ही सुबह के शो हाउसफुल हो गए, जबकि कुछ स्थानों पर प्रीमियर शो के टिकट कुछ ही समय में समाप्त हो गए। दर्शकों की भारी मांग को देखते हुए अतिरिक्त शो जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है।

    फिल्म की टिकट कीमतें भी इस समय चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई हैं। अधिकांश सिनेमाघरों में टिकट की कीमत लगभग 100 रुपये से 800 रुपये के बीच रखी गई है, लेकिन कुछ प्रीमियम स्क्रीन और विशेष श्रेणी की सीटों के लिए कीमत इससे कहीं अधिक है। बेंगलुरु के एक मल्टीप्लेक्स में रिक्लाइनर सीट का टिकट 2500 रुपये तक पहुंच गया है, जिसे इस फिल्म के लिए अब तक की सबसे महंगी टिकटों में गिना जा रहा है। वहीं कुछ प्रीमियर शो के टिकट 800 से 1000 रुपये के बीच उपलब्ध कराए गए, जो बुकिंग शुरू होते ही तेजी से बिक गए।

    दूसरी ओर चेन्नई में टिकटों की कीमत अपेक्षाकृत नियंत्रित रखी गई है। यहां सामान्य टिकट लगभग 190 रुपये में उपलब्ध हैं, जबकि सबसे कम कीमत 54 रुपये निर्धारित की गई है। शुरुआती शो के दौरान भीड़ और अव्यवस्था से बचने के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है। एक प्रमुख सिनेमाघर ने दावा किया कि उसने कुछ ही मिनटों में लगभग 10 हजार टिकटों की बिक्री दर्ज की, जिससे फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    फिल्म की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं है। आधिकारिक रिलीज की घोषणा से पहले ही विदेशों में इसकी एडवांस बुकिंग शुरू हो चुकी थी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी फिल्म को अच्छा प्रतिसाद मिला है और शुरुआती चरण में ही बड़ी संख्या में टिकट बिकने की जानकारी सामने आई है। इससे संकेत मिलते हैं कि फिल्म को घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में मजबूत शुरुआत मिल सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि थलापति विजय के बड़े प्रशंसक वर्ग, फिल्म को लेकर लंबे समय से बनी उत्सुकता और इसे अभिनेता की आखिरी फिल्म बताए जाने की चर्चाओं ने दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ा दी है। रिलीज से पहले जिस तरह एडवांस बुकिंग के आंकड़े सामने आ रहे हैं, उससे फिल्म के शुरुआती दिनों में शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। अब सभी की निगाहें 23 जुलाई पर टिकी हैं, जब यह बहुप्रतीक्षित फिल्म सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच पहुंचेगी और बॉक्स ऑफिस पर अपनी वास्तविक परीक्षा देगी।

  • आमिर खान के नाम कथित धमकी से बढ़ी सुरक्षा चिंता, सोशल मीडिया पोस्ट और ऑडियो संदेश की मुंबई पुलिस कर रही जांच

    आमिर खान के नाम कथित धमकी से बढ़ी सुरक्षा चिंता, सोशल मीडिया पोस्ट और ऑडियो संदेश की मुंबई पुलिस कर रही जांच

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान को लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के नाम पर कथित धमकी मिलने का मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस सतर्क हो गई है। अधिकारियों के अनुसार सोशल मीडिया पर प्रसारित एक पोस्ट और उससे जुड़े ऑडियो संदेश की जांच की जा रही है। हालांकि, इस मामले में अभी तक अभिनेता आमिर खान या उनकी ओर से किसी प्रतिनिधि ने पुलिस के पास कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और संदेश की प्रामाणिकता सहित सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

    मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पोस्ट और ऑडियो संदेश का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदेश किसने जारी किया, उसका वास्तविक स्रोत क्या है और उसमें किए गए दावों की सत्यता कितनी है। जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते आकलन किया जा सके।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह कथित संदेश आरजू बिश्नोई और टायसन बिश्नोई नाम से जुड़े सोशल मीडिया खातों के माध्यम से साझा किया गया है। इन व्यक्तियों ने स्वयं को लॉरेंस बिश्नोई का सहयोगी बताया है। संदेश में आमिर खान पर कथित रूप से “लव जिहाद” को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। यह दावा अभिनेता के निजी जीवन और हाल के वैवाहिक संबंधों का उल्लेख करते हुए किया गया है। हालांकि, इन आरोपों या संदेश में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस इन्हें जांच के दायरे में रखकर आगे बढ़ रही है।

    कथित ऑडियो संदेश में राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में एक किशोरी से जुड़े आपराधिक मामले का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही कुछ राजनीतिक नेताओं को चेतावनी देने जैसी बातें भी कही गई हैं। पुलिस इन सभी संदर्भों की अलग-अलग जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संदेश का उद्देश्य क्या था और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

    यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे पहले अभिनेता सलमान खान को भी लंबे समय से लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की ओर से धमकियां मिलने के कई मामले सामने आ चुके हैं। वर्ष 1998 के काले हिरण शिकार प्रकरण के बाद से सलमान खान का नाम इस विवाद से जुड़ता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में उनके आवास के बाहर गोलीबारी की घटना और लगातार मिलती धमकियों के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था भी कई स्तरों पर मजबूत की गई थी।

    आमिर खान से जुड़ी कथित धमकी के मामले में फिलहाल पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार का आपराधिक तत्व सामने आता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले पर सतर्कता बनाए हुए है और किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम को गंभीरता से देखते हुए सभी आवश्यक कदम उठा रही है।

  • '10 मिनट तक थम गई थी धड़कन', श्रेयस तलपड़े ने सुनाया जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई का दर्दनाक अनुभव

    '10 मिनट तक थम गई थी धड़कन', श्रेयस तलपड़े ने सुनाया जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई का दर्दनाक अनुभव

    नई दिल्ली । अभिनेता श्रेयस तलपड़े ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को याद करते हुए उस घटना का जिक्र किया, जब उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आया था। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनकी दिल की धड़कन करीब 10 मिनट तक बंद रही थी। यह अनुभव उनके लिए जीवन बदल देने वाला साबित हुआ और इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बना लिया।

    श्रेयस ने कहा कि घटना से पहले उन्हें लगातार थकान महसूस हो रही थी, लेकिन व्यस्त दिनचर्या के कारण उन्होंने इन संकेतों को गंभीरता से नहीं लिया। काम पूरा करने के बाद उन्हें बेचैनी, सांस लेने में परेशानी और हाथ में दर्द महसूस हुआ। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य समस्या समझा, लेकिन कुछ ही देर में उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। समय रहते अस्पताल पहुंचने के कारण उन्हें तुरंत आपातकालीन उपचार मिल सका।

    अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर देखते हुए तुरंत आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया शुरू की। उपचार के दौरान उनकी एंजियोप्लास्टी की गई और लगातार प्रयासों के बाद उनकी जान बचाई जा सकी। होश में आने के बाद जब उन्हें पूरी घटना के बारे में जानकारी मिली तो उन्हें एहसास हुआ कि वह मौत के बेहद करीब पहुंच चुके थे। उन्होंने कहा कि उस पल ने उन्हें जीवन की असली अहमियत समझा दी।

    श्रेयस के अनुसार इस घटना के बाद उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। पहले वह लगातार काम को प्राथमिकता देते थे, लेकिन अब परिवार, स्वास्थ्य और मानसिक शांति को सबसे अधिक महत्व देते हैं। उन्होंने अपनी दिनचर्या में नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को शामिल किया है। उनका मानना है कि शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, अत्यधिक थकान या किसी भी तरह की असामान्य शारीरिक परेशानी महसूस हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। उनके अनुसार कई बार लोग व्यस्तता या लापरवाही के कारण शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है। समय पर इलाज मिलने से कई गंभीर परिस्थितियों से बचा जा सकता है।

    अभिनेता ने यह भी कहा कि इस अनुभव ने उन्हें परिवार और रिश्तों की अहमियत पहले से कहीं अधिक समझाई। अब वह हर दिन को एक नए अवसर की तरह जीने की कोशिश करते हैं और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने माना कि सफलता और व्यस्तता से कहीं अधिक जरूरी स्वस्थ रहना है, क्योंकि अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। कार्डियक अरेस्ट से उबरने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने पेशेवर जीवन में वापसी की और अब अपने अनुभव के जरिए लोगों को हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का संदेश भी दे रहे हैं।

  • सिनेमाघरों में दिखेगा मनोरंजन का महासंग्राम, 20 से 26 जुलाई के बीच थलपति विजय की 'जन नायगन' समेत 6 बड़ी फिल्में होंगी रिलीज

    सिनेमाघरों में दिखेगा मनोरंजन का महासंग्राम, 20 से 26 जुलाई के बीच थलपति विजय की 'जन नायगन' समेत 6 बड़ी फिल्में होंगी रिलीज

    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म उद्योग के लिए जुलाई का आगामी सप्ताह बेहद व्यस्त और रोमांचक रहने वाला है। 23 जुलाई से 24 जुलाई 2026 के बीच देशभर के सिनेमाघरों में अलग-अलग शैलियों की छह बड़ी फिल्में रिलीज होने जा रही हैं। इस सप्ताह दर्शकों को राजनीतिक एक्शन, कोर्टरूम ड्रामा, पारिवारिक कॉमेडी, रोमांटिक ड्रामा और रहस्य से भरपूर फिल्मों का शानदार मिश्रण देखने को मिलेगा। इन फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की उम्मीद की जा रही है। साथ ही मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन थिएटरों में दर्शकों की भीड़ बढ़ने की संभावना है। फिल्म कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि यह रिलीज़ लाइनअप सिनेमाघरों में नए दर्शकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    इस सप्ताह की सबसे चर्चित रिलीज ‘जन नायगन’ है, जो 23 जुलाई 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यह एक बड़े बजट की राजनीतिक एक्शन थ्रिलर फिल्म है, जिसमें थलपति विजय और बॉबी देओल पहली बार आमने-सामने दिखाई देंगे। फिल्म में पूजा हेगड़े और प्रकाश राज भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इसकी कहानी एक ऐसे आम नागरिक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भ्रष्टाचार और सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए लोगों की उम्मीद का प्रतीक बन जाता है। दमदार स्टारकास्ट और बड़े पैमाने पर बने एक्शन दृश्यों की वजह से इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्साह है।

    24 जुलाई 2026 को कई अलग-अलग विषयों पर आधारित फिल्में एक साथ रिलीज होंगी। इनमें ‘उत्तर दा पुत्तर’ एक पारिवारिक कॉमेडी ड्रामा है, जिसमें अन्नू कपूर, पवन मल्होत्रा और बृजेंद्र काला मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कहानी भारतीय परिवारों में वास्तु, अंधविश्वास और पारिवारिक रिश्तों से जुड़ी मजेदार परिस्थितियों के इर्द-गिर्द घूमती है। इसी दिन श्रेयस तलपड़े और काजल अग्रवाल अभिनीत ‘द इंडिया स्टोरी’ भी रिलीज होगी। यह कोर्टरूम ड्रामा कृषि क्षेत्र और खाद्य सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर मामले को कानूनी लड़ाई के माध्यम से बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करता है।

    पारिवारिक मनोरंजन पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ‘दुल्हनिया ले आएगी’ भी 24 जुलाई को सिनेमाघरों में आएगी। खुशहाली कुमार, महेश मांजरेकर और पीयूष मिश्रा अभिनीत यह फिल्म एक उद्योगपति परिवार की शादी के दौरान होने वाली हास्यपूर्ण और भावनात्मक घटनाओं को दिखाती है। वहीं रहस्य और रोमांच पसंद करने वालों के लिए ‘इंद्रजाल’ एक दिलचस्प विकल्प होगी, जिसकी कहानी ब्रिटिश काल के एक रहस्यमयी खजाने और पूर्ण सूर्य ग्रहण से जुड़े रहस्यों पर आधारित है। इसके अलावा अमन इंद्र कुमार, आकांक्षा शर्मा और परेश रावल अभिनीत रोमांटिक ड्रामा ‘तेरा यार हूं मैं’ भी इसी दिन रिलीज होगी। यह फिल्म छोटे शहर से महानगर पहुंचे एक युवक के संघर्ष, सपनों, प्रेम और पारिवारिक रिश्तों की भावनात्मक यात्रा को पर्दे पर उतारती है। विविध विषयों और अलग-अलग दर्शक वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार की गई ये सभी फिल्में जुलाई के अंतिम सप्ताह में सिनेमाघरों की रौनक बढ़ाने के लिए तैयार हैं।

  • सुनील ग्रोवर की 'सनफ्लावर 2' से लेकर 'हाथरस' तक, ये क्राइम शोज उड़ा देंगे होश..

    सुनील ग्रोवर की 'सनफ्लावर 2' से लेकर 'हाथरस' तक, ये क्राइम शोज उड़ा देंगे होश..

    नई दिल्ली । डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर कंटेंट की बढ़ती लोकप्रियता के बीच ओटीटी दर्शकों के लिए मनोरंजन के कई दमदार विकल्प उपलब्ध हैं। यदि आप वीकेंड पर रोमांच और रहस्य से भरपूर सीरीज देखना चाहते हैं, तो जी5 पर मौजूद सात हिंदी क्राइम थ्रिलर और डॉक्यूसीरीज बेहतरीन चुनाव साबित हो सकती हैं। इन शोज की खास बात यह है कि इनमें से कई कहानियां वास्तविक घटनाओं से प्रेरित हैं, जो सिर्फ मनोरंजन ही नहीं करतीं बल्कि समाज के कई गंभीर पहलुओं पर भी सोचने के लिए मजबूर करती हैं। दमदार अभिनय, मजबूत कहानी और शानदार प्रस्तुति के चलते इन सीरीज को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

    इस सूची में शामिल ‘सतरंगी बदले का खेल’ एक ऐसे युवक की कहानी है, जो अपने पिता की हत्या के बाद न्याय और प्रतिशोध की राह पर निकल पड़ता है। इस सीरीज को लगभग 6.9 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। इसमें बबलू महतो का किरदार दिन में पारंपरिक लोक कलाकार के रूप में जीवन बिताता है, जबकि रात के अंधेरे में अपने पिता के हत्यारों तक पहुंचने की गुप्त योजना बनाता है। वहीं, वास्तविक घटनाओं पर आधारित ‘हाथरस: 16 डेज’ इस सूची की सबसे संवेदनशील डॉक्यूमेंट्री सीरीज मानी जाती है, जिसे करीब 8.1 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। यह सीरीज वर्ष 2020 के चर्चित हाथरस मामले के बाद न्यायिक प्रक्रिया, सामाजिक माहौल और पीड़ित परिवार के संघर्ष को विस्तार से सामने लाती है।

    सच्ची घटनाओं पर आधारित अपराध कथाओं में रुचि रखने वालों के लिए ‘हनीमून से हत्या’ भी एक शानदार विकल्प है। लगभग 7.2 आईएमडीबी रेटिंग वाली यह छह एपिसोड की डॉक्यूसीरीज उन मामलों को सामने लाती है, जहां वैवाहिक रिश्तों में पैदा हुए तनाव ने भयावह अपराध का रूप ले लिया। दूसरी ओर, रहस्य और हल्के हास्य का मिश्रण पेश करने वाली ‘सनफ्लावर 2’ को करीब 7.6 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। सुनील ग्रोवर अभिनीत यह सीरीज एक हाउसिंग सोसाइटी में हुई हत्या की गुत्थी को बेहद दिलचस्प अंदाज में पेश करती है, जहां हर किरदार शक के दायरे में नजर आता है।

    सस्पेंस और मनोवैज्ञानिक खेल पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ‘बिच्छू का खेल’ भी एक लोकप्रिय सीरीज है, जिसे लगभग 7.4 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। इसकी कहानी एक ऐसे युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो खुद हत्या की बात स्वीकार करता है, लेकिन कानून को उसे दोषी साबित करने की खुली चुनौती देता है। वहीं, मुंबई के अंडरवर्ल्ड की पृष्ठभूमि पर बनी ‘मुर्शिद’ को करीब 7.5 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। इसमें एक पूर्व गैंगस्टर की कहानी दिखाई गई है, जिसे परिस्थितियां फिर से अपराध की दुनिया में लौटने के लिए मजबूर कर देती हैं। सूची की आखिरी सीरीज ‘नक्सलबाड़ी’ है, जिसे लगभग 7.1 आईएमडीबी रेटिंग मिली है। यह एक एसटीएफ अधिकारी के मिशन पर आधारित है, जो नक्सल प्रभावित इलाके में आतंक और हिंसा के नेटवर्क को खत्म करने की चुनौती का सामना करता है। दमदार कहानी, रहस्य, रोमांच और प्रभावशाली अभिनय के कारण ये सभी सीरीज ओटीटी पर क्राइम थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए बेहतरीन विकल्प मानी जाती हैं।

  • कार्तिक आर्यन और ममूटी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित, 'चंदू चैंपियन' के लिए कार्तिक ने जीता पहला नेशनल अवॉर्ड

    कार्तिक आर्यन और ममूटी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित, 'चंदू चैंपियन' के लिए कार्तिक ने जीता पहला नेशनल अवॉर्ड

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के हालिया एलान ने भारतीय सिनेमा जगत में उत्साह और गौरव की एक नई लहर पैदा कर दी है। देश के सबसे प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही कई कलाकारों के करियर में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। इस वर्ष के पुरस्कारों में सबसे बड़ा आकर्षण बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन रहे, जिन्हें उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण और बेहतरीन अभिनय के लिए देश का सर्वोच्च अभिनय सम्मान दिया गया है। कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में उनके असाधारण प्रदर्शन के लिए संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित किया गया है। उनके साथ ही दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी को भी उनके शानदार अभिनय के लिए इस शीर्ष सम्मान से नवाजा गया है, जो उनके सफर का चौथा राष्ट्रीय पुरस्कार है।

    इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा होते ही विजेता अभिनेता के घर और प्रशंसकों के बीच जश्न का माहौल बन गया। कार्तिक आर्यन ने अपनी इस बड़ी कामयाबी की झलक सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक और गरिमापूर्ण पोस्ट के जरिए साझा की है। उन्होंने एक वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट किया है जिसमें वह अपने परिवार के साथ बैठकर लैपटॉप की स्क्रीन पर लाइव पुरस्कारों की घोषणा देख रहे हैं। जैसे ही स्क्रीन पर विजेता के रूप में उनका नाम आता है, पूरा परिवार खुशी से झूम उठता है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कार्तिक गर्व से स्क्रीन की तरफ उंगली दिखाकर अपने माता-पिता और परिजनों को अपना नाम दिखा रहे हैं, जिसके बाद पूरा परिवार गले मिलकर इस ऐतिहासिक क्षण को साझा करता है।

    इस अविस्मरणीय पल को अपने प्रशंसकों के साथ साझा करते हुए अभिनेता ने लिखा कि वह अभी भी इस अद्भुत एहसास को पूरी तरह आत्मसात करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन में कुछ पल ऐसे आते हैं जो शब्दों की सीमा से बहुत परे होते हैं और यह पुरस्कार उनके लिए बिल्कुल वैसा ही है। उन्होंने यह भी साझा किया कि वर्षों से देखा गया उनका एक बड़ा सपना आज आखिरकार सच हो गया है, जिसके लिए वह सिनेमा जगत, जूरी और अपने प्रशंसकों के प्रति हमेशा विनम्र और आभारी रहेंगे। यह पुरस्कार उनके लिए मात्र एक सम्मान नहीं, बल्कि उनके सालों के कड़े परिश्रम और समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण है।

    कार्तिक आर्यन ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 2011 में फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से की थी, जिसके बाद लंबे समय तक उन्हें मुख्य रूप से रोमांटिक-कॉमेडी और ड्रामा फिल्मों के लिए पहचाना जाता रहा। उन्होंने ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’, ‘लुका छुपी’ और ‘सत्यप्रेम की कथा’ जैसी व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों में काम करके बॉक्स ऑफिस पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाई थी। हालांकि, निर्देशक कबीर खान के मार्गदर्शन में बनी स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ ने उनके करियर की पूरी दिशा ही बदल दी। यह फिल्म भारत के पहले पैरालिंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर के संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक जीवन पर आधारित है, जिसके मुख्य किरदार को बड़े पर्दे पर जीवंत करने के लिए कार्तिक आर्यन ने अभूतपूर्व शारीरिक और मानसिक बदलाव किए थे। फिल्म समीक्षकों और दर्शकों ने रिलीज के समय ही उनके इस काम को उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना था और अब राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस मान्यता ने इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

    इस वर्ष के राष्ट्रीय पुरस्कारों में ‘चंदू चैंपियन’ के अलावा अन्य फिल्मों का भी दबदबा रहा। फिल्म ‘आर्टिकल 370’ में अपनी सशक्त और गंभीर भूमिका के लिए अभिनेत्री यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के खिताब से नवाजा गया है, जिन्होंने पुरस्कार जीतने के बाद अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सपने सच होते हैं। वहीं दूसरी ओर, फिल्म ‘भक्षक’ में अपने बेहतरीन और यथार्थवादी अभिनय के लिए जाने-माने अभिनेता संजय मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला है। अभिनेता रणदीप हुड्डा को भी उनकी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर’ के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया है, जिसे उन्होंने अपने करियर की सबसे कठिन फिल्म बताया था। कला जगत और खेल पृष्ठभूमि पर आधारित सिनेमा को इस बार राष्ट्रीय मंच पर जो सराहना मिली है, उसने भारतीय फिल्म उद्योग में गुणवत्तापूर्ण और कंटेंट-आधारित कहानियों के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है।

  • रामायण के मेगा इवेंट में सितारों का महाकुंभ रणबीर बने राम साई बनीं सीता यश के रावण अवतार ने बढ़ाया रोमांच

    रामायण के मेगा इवेंट में सितारों का महाकुंभ रणबीर बने राम साई बनीं सीता यश के रावण अवतार ने बढ़ाया रोमांच


    नई दिल्ली । बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण की रिलीज से पहले दिल्ली में आयोजित भव्य रेड कारपेट इवेंट ने दर्शकों के उत्साह को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी की इस महत्वाकांक्षी फिल्म का ट्रेलर पहली बार बड़े स्तर पर प्रदर्शित किया गया जहां पूरी स्टारकास्ट ने अपनी मौजूदगी से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। रणबीर कपूर साई पल्लवी यश सनी देओल अरुण गोविल रवि दुबे और कई अन्य कलाकारों ने मंच पर फिल्म से जुड़े अनुभव साझा किए और बताया कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए कितना खास है।

    कार्यक्रम की शुरुआत ट्रेलर प्रदर्शन के साथ हुई जिसके बाद सबसे पहले रणबीर कपूर और साई पल्लवी ने मंच संभाला। पारंपरिक भारतीय परिधान में पहुंचे दोनों कलाकारों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। निर्देशक नितेश तिवारी ने बताया कि उन्होंने इन दोनों कलाकारों को केवल अभिनय क्षमता के आधार पर नहीं चुना बल्कि उनकी आंखों में उन्हें राम और सीता का व्यक्तित्व दिखाई देता था। उनका कहना था कि इन किरदारों के लिए वह किसी और की कल्पना नहीं कर सकते थे।

    निर्माता नमित मल्होत्रा ने फिल्म की परिकल्पना और निर्माण यात्रा पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी विश्व स्तर पर विजुअल इफेक्ट्स के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुकी है लेकिन अब समय आ गया था कि भारतीय संस्कृति की सबसे महान कथा को उसी भव्यता के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाए। इसी सोच के साथ रामायण पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया गया ताकि भारतीय विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सके।

    निर्देशक नितेश तिवारी ने स्पष्ट किया कि फिल्म की मूल कथा और भावनाओं से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और शानदार विजुअल इफेक्ट्स के माध्यम से दर्शकों को रामायण का ऐसा अनुभव मिलेगा जो पहले कभी बड़े पर्दे पर नहीं देखा गया। उन्होंने संकेत दिया कि लंका दहन किशकिंधा और अन्य महत्वपूर्ण दृश्यों को अत्यंत भव्य रूप में प्रस्तुत किया गया है।

    कार्यक्रम में अभिनेता अरुण गोविल ने भी भावुक कर देने वाला अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब रामानंद सागर की रामायण बन रही थी तब शुरुआत में उन्हें भगवान राम की भूमिका नहीं मिली थी लेकिन बाद में वही किरदार उनकी पहचान बन गया। इस फिल्म में वह राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं और उन्होंने कहा कि इस सेट पर काम करते समय उन्हें हमेशा आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हुआ।

    रणबीर कपूर ने मंच से अरुण गोविल के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि बचपन से उन्होंने उन्हें भगवान राम के रूप में देखा है और यदि वह उनके अभिनय का थोड़ा सा भी अंश अपने किरदार में ला सके तो यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि होगी। वहीं साई पल्लवी ने कहा कि उन्होंने इस भूमिका को स्वीकार करने से पहले माता सीता से प्रार्थना की कि उन्हें इस दिव्य चरित्र को निभाने की शक्ति मिले।

    रवि दुबे ने लक्ष्मण की भूमिका मिलने को अपना सौभाग्य बताया जबकि साउथ सुपरस्टार यश ने रावण का किरदार निभाने का अवसर मिलने पर मेकर्स का आभार व्यक्त किया। उनकी एंट्री पर दर्शकों ने जोरदार तालियों से स्वागत किया। वहीं सनी देओल के मंच पर आते ही पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह फिल्म हर भारतीय तक पहुंचेगी और दर्शकों का भरपूर प्यार हासिल करेगी।

    कार्यक्रम में कवि कुमार विश्वास ने भगवान राम की कथा का महत्व बताया जबकि सितार वादक ऋषभ शर्मा की भक्तिमय प्रस्तुति ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। कार्यक्रम के अंत में ट्रेलर को एक बार फिर प्रदर्शित किया गया जिसे दर्शकों ने उत्साह के साथ देखा। इस भव्य आयोजन ने साफ कर दिया कि रामायण केवल एक फिल्म नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था को आधुनिक तकनीक के साथ बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने का एक विशाल प्रयास है।

  • 'कहानी का जनक और मालिक मैं ही हूं'; परेश रावल के आरोपों पर बोले फिल्म निर्माता अमित राय, पटकथा में बदलाव के दावों को नकारा

    'कहानी का जनक और मालिक मैं ही हूं'; परेश रावल के आरोपों पर बोले फिल्म निर्माता अमित राय, पटकथा में बदलाव के दावों को नकारा

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की बेहद सफल और सामाजिक विषय पर आधारित फिल्म ‘ओह माय गॉड 2’ (ओएमजी 2) को लेकर अभिनेता परेश रावल के हालिया बयान के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दिग्गज अभिनेता परेश रावल ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि इस फिल्म का मूल विचार और अवधारणा उनकी थी, लेकिन अभिनेता अक्षय कुमार के इस परियोजना से जुड़ने के बाद पटकथा में व्यापक बदलाव किए गए और उन्हें इसका उचित श्रेय नहीं दिया गया। अब इस पूरे विवाद पर पहली बार फिल्म के लेखक और निर्देशक अमित राय ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और फिल्म की मौलिकता को लेकर अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है।

    अमित राय ने एक विशेष साक्षात्कार में वरिष्ठ अभिनेता परेश रावल के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि वह एक महान कलाकार हैं और उनके द्वारा लिए गए नाम कद में काफी बड़े हैं, इसलिए वह उन पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, फिल्म के लेखन और उसके स्वामित्व के कानूनी पक्ष पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फिल्म का विचार पूरी तरह से उनके अपने मस्तिष्क की उपज है। इस कहानी के सृजनकर्ता, लेखक और विधिक रूप से मालिक वही हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह भावनात्मक और रचनात्मक दोनों ही स्तरों पर इस फिल्म की पटकथा के वास्तविक जनक हैं।

    क्रेडिट न दिए जाने के आरोपों का तार्किक जवाब देते हुए निर्देशक ने कहा कि यदि इस प्रकार के दावे किए जा रहे हैं, तो संबंधित पक्षों को फिल्म के आधिकारिक क्रेडिट रोल को पुनः खोलकर ध्यान से देखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि फिल्म के शुरुआती और मुख्य क्रेडिट्स में परेश रावल की पत्नी और उनके व्यावसायिक साझीदार का नाम बतौर निर्माता स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है। ऐसे में यह कहना कि उन्हें या उनके परिवार को इस परियोजना से अलग रखा गया या कोई श्रेय नहीं दिया गया, पूरी तरह से अनुचित और तथ्यों से परे है।

    फिल्म उद्योग के भीतर चल रही उन चर्चाओं को भी निर्देशक ने पूरी तरह से नकार दिया जिनमें यह कहा जा रहा था कि सुपरस्टार अक्षय कुमार के फिल्म में शामिल होने के बाद इसकी मूल कहानी और पटकथा की संरचना में बड़े बदलाव किए गए थे। अमित राय ने कहा कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री उनके इस स्वभाव से भली-भांति परिचित है कि वह अपनी लिखी हुई चार पंक्तियों को भी किसी के दबाव में आकर नहीं बदलते हैं। अपनी कलात्मक दृढ़ता को रेखांकित करने के लिए उन्होंने संगीतकार आर.डी. बर्मन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार एक सच्चा संगीतकार अपनी बनाई धुनों से कोई समझौता नहीं करता, उसी प्रकार वह भी अपनी कहानी के मूल स्वरूप की रक्षा करते हैं।

    उन्होंने अपने लंबे संघर्ष का हवाला देते हुए कहा कि यदि वह परिस्थितियों के अनुसार अपनी पटकथाओं और विचारों को बदलने वाले लचीले व्यक्ति होते, तो उन्हें फिल्म उद्योग में काम पाने के लिए 14 वर्षों तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। इस स्पष्टीकरण के साथ निर्देशक ने यह साफ कर दिया है कि ‘ओएमजी 2’ पूरी तरह से उनकी मौलिक सिनेमाई अभिव्यक्ति है, जिसमें व्यावसायिक सफलताओं के लिए कोई कृत्रिम बदलाव नहीं किए गए थे। इस बयान के बाद फिल्म के वैधानिक और रचनात्मक अधिकारों को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर पूर्ण विराम लग गया है।

  • पूर्व अभिनेत्री सोमी अली ने बयां किया बचपन का गहरा मानसिक आघात; चार साल की उम्र से ही घर के भीतर हुईं गंभीर उत्पीड़न का शिकार

    पूर्व अभिनेत्री सोमी अली ने बयां किया बचपन का गहरा मानसिक आघात; चार साल की उम्र से ही घर के भीतर हुईं गंभीर उत्पीड़न का शिकार

    नई दिल्ली । मनोरंजन जगत की कई जानी-मानी हस्तियां समय-समय पर अपने जीवन के ऐसे अनसुने और संवेदनशील पहलुओं को उजागर करती हैं, जो न केवल समाज को झकझोर देते हैं बल्कि सुरक्षा और सामाजिक मानसिकता पर भी बड़े सवाल खड़े करते हैं। इसी क्रम में, पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री सोमी अली का एक नवीनतम साक्षात्कार इन दिनों व्यापक चर्चा में है। उन्होंने अपने बचपन के दौरान घरेलू परिवेश में झेले गए गंभीर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न को लेकर कई अत्यंत दुखद और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सोमी अली ने स्पष्ट किया कि मात्र चार वर्ष की कोमल आयु से ही वह अपने ही घर के घरेलू सहायकों द्वारा निरंतर यौन शोषण और प्रताड़ना का शिकार होती रहीं, जिसका गहरा मानसिक आघात वह आज भी महसूस करती हैं।

    अपने हर विचार को बिना किसी झिझक के साझा करने के लिए पहचानी जाने वाली सोमी अली ने एक हालिया साक्षात्कार में बाल शोषण की इस वीभत्स हकीकत पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि यह दर्दनाक सिलसिला तब शुरू हुआ जब वह महज चार वर्ष की थीं। इसके बाद, जब वह पांच वर्ष की हुईं, तो उनके घर के मुख्य रसोइए (खानसामे) ने उनके साथ कई बार अनैतिक और गंदी हरकतें कीं। यहीं पर यह ज्यादती नहीं रुकी, बल्कि जब वह नौ वर्ष की आयु में पहुंचीं, तो घर की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बहला-फुसफुसाकर सर्वेंट क्वार्टर में ले जाकर शारीरिक रूप से गंभीर प्रताड़ना दी। इन घटनाओं ने उनके बाल मन को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया था।

    इस दर्दनाक घटनाक्रम के दौरान पारिवारिक प्रतिक्रिया और प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई के अभाव पर बात करते हुए पूर्व अभिनेत्री ने बताया कि उस दौर में उनके पिता एक संपन्न फिल्म निर्माता, निर्देशक और वितरक थे और उनका परिवार एक भव्य बहुमंजिला इमारत में निवास करता था। जब उन्होंने पहली बार अपनी मां के माध्यम से और बाद में इंटरकॉम पर अपने पिता को रसोइए अब्दुल द्वारा चूजे दिखाने के बहाने कमरे में ले जाकर तीन बार की गई इस हैवानियत के बारे में सूचित किया, तो उनके पिता ने आरोपी को कानूनी रूप से पुलिस के हवाले करने के बजाय एक अनुचित और हिंसक मार्ग चुना।

    सोमी अली के अनुसार, उनके पिता ने आरोपी रसोइए को अन्य कर्मचारियों के माध्यम से सेट पर ही अत्यधिक लहूलुहान होने तक पिटवाया और बिना किसी पुलिस शिकायत के नौकरी से निष्कासित कर दिया। एक पांच वर्ष की अबोध बच्ची के लिए अपने सामने इस प्रकार का अत्यधिक खून-खराबा और मारपीट देखना एक अन्य गहरे मनोवैज्ञानिक आघात (ट्रॉमा) का कारण बन गया। इससे भी अधिक दुखद स्थिति तब उत्पन्न हुई जब नौ वर्ष की आयु में उनके साथ दोबारा ऐसी ही घटना घटी और उनकी माता ने इस विषय पर वैधानिक कार्रवाई करने के स्थान पर उन्हें लोकलाज के डर से पूरी तरह चुप रहने की नसीहत दे डाली।

    साक्षात्कार के दौरान सोमी अली ने भारतीय और दक्षिण एशियाई समाज की इस रूढ़िवादी और शोषक मानसिकता पर गहरा क्षोभ और दुख व्यक्त किया, जहां पीड़ित बच्ची को ही यह कहकर चुप करा दिया जाता है कि यदि समाज को इस सच का पता चला तो भविष्य में कोई उससे विवाह नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि माता-पिता का यह सुरक्षाहीन रवैया और सामाजिक दृष्टिकोण बच्चों के मानसिक विकास पर अत्यंत विनाशकारी प्रभाव डालता है। अपने इस सच को सार्वजनिक करने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य समाज में बाल सुरक्षा के प्रति चेतना जागृत करना और पीड़ित बच्चों को अपनी आवाज उठाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि भविष्य में कोई अन्य बच्चा इस प्रकार के एकाकी संघर्ष और आघात से न गुजरे।

  • राज कपूर के गैर-पेशेवर व्यवहार के कारण उनसे नाराज थीं साधना; 'दूल्हा दुल्हन' के बाद फिर कभी साथ काम न करने की खाई थी कसम

    राज कपूर के गैर-पेशेवर व्यवहार के कारण उनसे नाराज थीं साधना; 'दूल्हा दुल्हन' के बाद फिर कभी साथ काम न करने की खाई थी कसम


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के इतिहास में ‘शोमैन’ के नाम से विख्यात दिग्गज अभिनेता और निर्देशक राज कपूर अपनी बेहतरीन फिल्मों के साथ-साथ सह-कलाकारों के साथ अपने संबंधों को लेकर भी सदैव चर्चा में रहे। जहां एक ओर फिल्म उद्योग की अधिकांश अभिनेत्रियां उनके साथ काम करने के अवसर तलाशती थीं, वहीं दूसरी ओर साठ के दशक की शीर्ष और बेहद खूबसूरत अभिनेत्री साधना शिवदसानी के साथ उनके रिश्तों में एक ऐसी तल्खी आई जो जीवनभर बरकरार रही। फिल्मी गलियारों में यह बात आज भी बेहद चर्चा का विषय रहती है कि अपनी बेमिसाल खूबसूरती और अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली साधना, राज कपूर के एक विशेष व्यवहार के कारण उनसे अत्यधिक नाराज थीं और उन्होंने जीवन में दोबारा कभी उनके साथ स्क्रीन साझा नहीं की।
    इस ऐतिहासिक तल्खी और विवाद की मुख्य वजह वर्ष 1964 में प्रदर्शित हुई लोकप्रिय फिल्म ‘दूल्हा दुल्हन’ के निर्माण के दौरान सामने आई थी। तत्कालीन समय की फिल्मी पत्रिकाओं और सूत्रों के अनुसार, इस फिल्म के मुख्य अभिनेता राज कपूर उस दौर में अपने कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स और निर्देशन कार्यों में अत्यधिक व्यस्त थे। इस व्यस्तता के कारण वह अक्सर फिल्म ‘दूल्हा दुल्हन’ के सेट पर काफी विलंब से पहुंचते थे, जिसके चलते पूरी यूनिट का काम प्रभावित होता था। सेट पर समय की पाबंद और अपने काम के प्रति बेहद गंभीर रहने वाली अभिनेत्री साधना को राज कपूर के इस इंतजार में घंटों बैठना पड़ता था, जिसे उन्होंने पूरी तरह से गैर-पेशेवर आचरण माना।

    साधना ने इस व्यवहार को अपने काम और समय का अनादर समझा और इसी स्वाभिमान के चलते उन्होंने निर्णय लिया कि वह भविष्य में कभी भी राज कपूर के साथ किसी भी फिल्म में काम नहीं करेंगी। यद्यपि इस तल्खी को लेकर दोनों ही कलाकारों ने कभी सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया और न ही इसके कोई लिखित पुख्ता प्रमाण मिलते हैं, परंतु इसके बाद का फिल्मी इतिहास गवाह है कि इस सुपरहिट जोड़ी को दोबारा किसी फिल्म निर्माता ने एक साथ साइन नहीं किया। दोनों ने अपने पूरे करियर में मुख्य भूमिकाओं के रूप में केवल इसी एक फिल्म में साथ काम किया।

    दिलचस्प बात यह है कि व्यावसायिक रूप से ‘दूल्हा दुल्हन’ बॉक्स ऑफिस पर एक बेहद सफल फिल्म साबित हुई थी और इसके मधुर गीत आज भी संगीत प्रेमियों द्वारा बेहद पसंद किए जाते हैं। बहुत कम लोग इस ऐतिहासिक तथ्य से परिचित हैं कि इस मुख्य फिल्म से कई वर्ष पूर्व, जब साधना मात्र 15-16 वर्ष की थीं और एक स्थानीय डांस स्कूल में नृत्य की शिक्षा ले रही थीं, तब उन्होंने राज कपूर की कालजयी फिल्म ‘श्री 420’ के प्रसिद्ध गीत ‘मुड़ मुड़ के न देख’ में एक साधारण बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम किया था। उस समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि पृष्ठभूमि में नाचने वाली यही बच्ची आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे बड़ी स्टार बनेगी और शोमैन के सामने अपने सिद्धांतों के लिए खड़ी होगी।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के पुराने सिनेमा प्रेमी आज भी इन दोनों कलाकारों के अभिनय और उनके बीच की इस मूक असहमति को बॉलीवुड के स्वर्णिम युग की एक अनसुनी दास्तान के रूप में याद करते हैं। साधना का यह कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि उस दौर की अभिनेत्रियां न केवल अपने स्टारडम बल्कि अपने आत्मसम्मान और कार्यस्थल पर व्यावसायिकता को लेकर कितनी सजग थीं, भले ही सामने फिल्म उद्योग का सबसे बड़ा नाम ही क्यों न खड़ा हो। राज कपूर के साथ दोबारा काम न करने के फैसले के बावजूद साधना ने अपने दौर के अन्य सभी सुपरस्टार्स के साथ एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं और हिंदी सिनेमा में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया।