Category: Entertainment

  • दीपिका पादुकोण मैटरनिटी लीव से पहले नाइट शिफ्ट में भी कर रहीं काम…

    दीपिका पादुकोण मैटरनिटी लीव से पहले नाइट शिफ्ट में भी कर रहीं काम…


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा जगत की शीर्ष अभिनेत्रियों में शुमार दीपिका पादुकोण इन दिनों अपनी आगामी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘राका’ के फिल्मांकन में पूरी गंभीरता के साथ व्यस्त हैं। वर्तमान में सात महीने की गर्भवती होने के बावजूद वह अपनी मैटरनिटी लीव पर जाने से पहले फिल्म के महत्वपूर्ण हिस्सों की शूटिंग को समय पर संपन्न करने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। फिल्म निर्माण से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वह न केवल देर रात के शेड्यूल में सक्रियता से भाग ले रही हैं, बल्कि फिल्म की आवश्यकता के अनुसार कठिन एक्शन दृश्यों को भी स्वयं फिल्मा रही हैं। शारीरिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण इस समय में उनका यह व्यावसायिक समर्पण मनोरंजन जगत में व्यापक स्तर पर प्रशंसा बटोर रहा है।

    मीडिया रिपोर्ट्स और सेट से जुड़े क्रू सदस्यों के अनुसार, दीपिका पादुकोण बिना किसी अतिरिक्त विश्राम के लगातार काम कर रही हैं ताकि परियोजना अपने निर्धारित समय पर पूरी हो सके। हाल ही में उद्योग जगत में उनकी आठ घंटे की कार्य अवधि की मांग को लेकर काफी चर्चाएं और विवाद सामने आए थे, किंतु वर्तमान में उनका यह कठोर परिश्रम उन सभी कयासों को खारिज करता है। सेट पर मौजूद तकनीकी और प्रशासनिक दल के सदस्यों का कहना है कि इस स्थिति में भी दीपिका को पूरी ऊर्जा के साथ परफॉर्म करते देखना वहां उपस्थित प्रत्येक कर्मचारी और सह-कलाकार के लिए अत्यंत प्रेरणादायक साबित हो रहा है। इसके साथ ही वह अपनी डेढ़ वर्षीय बेटी दुआ की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी पूरी सहजता से निर्वहन कर रही हैं।

    उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व फिल्म उद्योग में काम के घंटों को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई थी, जब मीडिया में यह अपुष्ट खबरें आईं कि आठ घंटे की शिफ्ट की मांग के कारण दीपिका पादुकोण को संदीप रेड्डी वांगा की आगामी फिल्म ‘स्पिरिट’ और नाग अश्विन की ‘कल्कि 2’ जैसी बड़ी परियोजनाओं से अलग कर दिया गया था। उस समय फिल्म निर्माताओं के एक वर्ग ने इस मांग पर असंतोष व्यक्त किया था, जबकि दूसरे वर्ग ने कलाकारों के स्वास्थ्य और अधिकारों के पक्ष में इसका पुरजोर समर्थन किया था। हालांकि, वर्तमान फिल्म के सेट पर उनका देर रात तक काम करना यह स्पष्ट करता है कि वह काम की गुणवत्ता और अपनी प्रतिबद्धता से कोई समझौता नहीं कर रही हैं।

    यदि फिल्म ‘राका’ की बात करें, तो इसका निर्देशन भारतीय सिनेमा के सफल निर्देशकों में गिने जाने वाले एटली कर रहे हैं। यह एक उच्च बजट वाली साइंस-फिक्शन थ्रिलर फिल्म होगी, जिसमें दर्शकों को आधुनिक तकनीक और अभूतपूर्व एक्शन दृश्यों का संयोजन देखने को मिलेगा। इस फिल्म के माध्यम से पहली बार तेलुगु सुपरस्टार अल्लू अर्जुन और दीपिका पादुकोण की जोड़ी बड़े पर्दे पर एक साथ मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाली है। इन दोनों शीर्ष कलाकारों के अतिरिक्त फिल्म की मुख्य स्टारकास्ट में रश्मिका मंदाना, जाह्नवी कपूर और मृणाल ठाकुर जैसी लोकप्रिय अभिनेत्रियां भी महत्वपूर्ण किरदारों में दिखाई देंगी।

    प्रशासनिक और वितरण सूत्रों के अनुसार, इस भव्य सिनेमाई परियोजना को अगले वर्ष तक देश भर के सिनेमाघरों में बड़े स्तर पर प्रदर्शित करने की योजना बनाई गई है। ‘राका’ के अतिरिक्त दीपिका पादुकोण इस वर्ष शाहरुख खान के अभिनय से सजी फिल्म ‘किंग’ में भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देने वाली हैं, जो इसी साल के अंत तक बड़े पर्दे पर दस्तक दे सकती है। मातृत्व के इस पड़ाव पर भी एक के बाद एक बड़ी व्यावसायिक फिल्मों की शूटिंग को सफलतापूर्वक पूरा करना दीपिका पादुकोण की मजबूत ब्रांड वैल्यू और पेशेवर दृष्टिकोण को प्रमाणित करता है।

  • स्टारडम के घमंड में रेखा के पहले हीरो ने ठुकराई थीं 'दीवार' जैसी फिल्में, बाद में अमिताभ बच्चन के सामने फैलाना पड़ा हाथ

    स्टारडम के घमंड में रेखा के पहले हीरो ने ठुकराई थीं 'दीवार' जैसी फिल्में, बाद में अमिताभ बच्चन के सामने फैलाना पड़ा हाथ

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत की चकाचौंध और अनिश्चितता का इतिहास बेहद पुराना रहा है, जहां समय का चक्र कब किसी शीर्ष कलाकार को जमीन पर ला दे, यह कहना असंभव है। साठ और सत्तर के दशक में बॉक्स ऑफिस पर एकछत्र राज करने वाले अभिनेता नवीन निश्चल के जीवन की कहानी भी कुछ ऐसी ही उतार-चढ़ाव से भरी रही है। एक समय अपने स्टारडम के चरम पर रहने वाले इस अभिनेता को अपनी सफलता पर इस कदर अहंकार हो गया था कि उन्होंने महानायक अमिताभ बच्चन को एक बेहद साधारण और छोटा कलाकार समझकर न केवल उनकी बेइज्जती की, बल्कि उनके साथ सार्वजनिक रूप से खड़े होने से भी इंकार कर दिया था। दिलचस्प तथ्य यह है कि नवीन निश्चल वही अभिनेता हैं, जिनके साथ सदाबहार अभिनेत्री रेखा ने बॉलीवुड में अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी।

    फिल्म उद्योग में अपने कदम जमाने वाले नवीन निश्चल ने वर्ष 1970 में प्रदर्शित हुई सुपरहिट फिल्म ‘सावन भादो’ से अभिनेत्री रेखा के साथ मुख्य अभिनेता के रूप में पदार्पण किया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई, जिसने नवीन को रातोंरात निर्माताओं की पहली पसंद बना दिया। इसके ठीक अगले वर्ष 1971 में उनकी पांच बड़ी फिल्में प्रदर्शित हुईं, जिनमें ‘बुड्ढा मिल गया’, ‘नादान’, ‘संसार’, ‘गंगा तेरा पानी अमृत’ और ‘परवाना’ शामिल थीं। इन फिल्मों की निरंतर सफलता ने उनके भीतर एक गहरे अहंकार को जन्म दे दिया, जो आगे चलकर उनके करियर के पतन का मुख्य कारण बना।

    इसी दौर में आई फिल्म ‘परवाना’ के निर्माण और प्रचार के दौरान एक ऐसी घटना घटी, जिसने फिल्म जगत में काफी सुर्खियां बटोरीं। इस फिल्म में नवीन निश्चल मुख्य भूमिका में थे, जबकि संघर्ष कर रहे अमिताभ बच्चन एक बेहद छोटे और नकारात्मक किरदार में नजर आए थे। फिल्म के प्रचार प्रसार के दौरान नवीन निश्चल ने अमिताभ बच्चन को अपने स्तर से बहुत छोटा अभिनेता मानते हुए उनके साथ संयुक्त तस्वीरें खिंचवाने से साफ मना कर दिया था। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने इसी घमंड के चलते ‘मेरे अपने’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ तथा ऐतिहासिक फिल्म ‘दीवार’ जैसी बड़ी फिल्मों के प्रस्तावों को बेहद छोटा और अपने स्तर के विपरीत समझकर ठुकरा दिया था, जिन्हें बाद में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर ने स्वीकार कर इतिहास रच दिया।

    सिनेमाई गलियारों में उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, शुरुआती दौर में मिली इस अपार सफलता ने नवीन निश्चल के व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया था। सह-कलाकारों के प्रति सम्मान की कमी, फिल्म के सेट पर अनुचित नखरे दिखाना, अत्यधिक नशा और निर्देशकों व निर्माताओं के सुझावों को पूरी तरह नजरअंदाज करने जैसी गलत आदतों ने धीरे-धीरे उन्हें फिल्म उद्योग से अलग-थलग कर दिया। निर्माता-निर्देशकों ने उनकी इन हरकतों के कारण उन्हें फिल्मों में लेना बंद कर दिया, जिसके चलते वह देखते ही देखते गुमनामी के अंधेरे में खो गए और गंभीर आर्थिक संकट से घिर गए।

    समय का चक्र ऐसा बदला कि जिस अमिताभ बच्चन को कभी नवीन निश्चल ने अपमानित किया था, वही बिग बी सत्तर और अस्सी के दशक में भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार बनकर उभरे। अपनी गुरबत और तंगहाली के दिनों में नवीन निश्चल को विवश होकर उसी अभिनेता के पास जाना पड़ा, जिसकी उन्होंने कभी उपेक्षा की थी। उन्होंने अमिताभ बच्चन से अपने लिए काम की गुहार लगाई और उनके सहयोग से बिग बी की ही एक फिल्म में बेहद छोटा सा सहायक रोल स्वीकार कर अपनी आजीविका चलाई। यह घटनाक्रम आज भी फिल्म उद्योग में उगते सूरज को सलाम करने और मानवीय व्यवहार की अनिश्चितता का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है।

  • भूख हड़ताल के बीच एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने परीक्षा धांधली पर उठाए कड़े सवाल, 'सुपर 30' स्टार ऋतिक रोशन ने बयां किया छात्रों का मानसिक तनाव

    भूख हड़ताल के बीच एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने परीक्षा धांधली पर उठाए कड़े सवाल, 'सुपर 30' स्टार ऋतिक रोशन ने बयां किया छात्रों का मानसिक तनाव

    नई दिल्ली । देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित धांधली, पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर देश भर के छात्रों का असंतोष एवं आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर जवाबदेही तय करने और परीक्षार्थियों के भविष्य की सुरक्षा की मांग को लेकर लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनकी भूख हड़ताल अब अपने अत्यंत नाजुक दौर में प्रवेश कर चुकी है। इस बीच, छात्रों के इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को उस समय एक बड़ा संबल मिला जब फिल्म उद्योग के दिग्गज अभिनेता ऋतिक रोशन ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के हक में अपनी आवाज बुलंद की।

    सिनेमाई पर्दे पर ‘सुपर 30’ जैसी शिक्षा केंद्रित फिल्म में एक शिक्षक की जीवंत भूमिका निभाने वाले अभिनेता ऋतिक रोशन ने सोनम वांगचुक का एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और विचारणीय वीडियो साझा किया है। इस डिजिटल संदेश के साथ अभिनेता ने देश के युवा परीक्षार्थियों द्वारा झेले जा रहे अभूतपूर्व मानसिक तनाव और अवसाद पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि एक शिक्षक के किरदार को जीने के दौरान उन्हें बेहद करीब से यह समझने का अवसर मिला था कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं के अनिश्चित माहौल में छात्र किस प्रकार के मानसिक आघात और दबाव का सामना करने को विवश हैं।

    उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 की सफल फिल्म ‘सुपर 30’ में ऋतिक रोशन ने बिहार के प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार का किरदार निभाया था, जो आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर पृष्ठभूमि के मेधावी बच्चों को आईआईटी की कठिन प्रवेश परीक्षा के लिए निःशुल्क प्रशिक्षित करते हैं। इस वास्तविक जीवन पर आधारित चरित्र को पर्दे पर जीवंत करने के कारण ही अभिनेता छात्रों की समस्याओं और उनके शैक्षणिक संघर्षों को इतनी संवेदनशीलता और गहराई के साथ महसूस कर पा रहे हैं। यही कारण है कि इस परीक्षा संकट के समय वह मूकदर्शक बने रहने के बजाय सार्वजनिक रूप से छात्रों के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

    साझा किए गए वीडियो में गंभीर स्वास्थ्य गिरावट के बावजूद बिस्तर पर लेटे हुए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने देश की सामूहिक अंतरात्मा और जिम्मेदार अधिकारियों पर तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने अत्यंत क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली की इन प्रशासनिक विफलताओं के कारण अब तक लगभग 20 युवा परीक्षार्थी अत्यंत आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो चुके हैं। मेधावी छात्र अपनी पूरी ऊर्जा और जीवन के अनमोल वर्ष परीक्षाओं की निष्पक्ष तैयारी में लगा देते हैं, लेकिन अंत में उन्हें यह पता चलता है कि संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया ही लीक या फिक्सिंग की भेंट चढ़ चुकी थी।

    सामाजिक कार्यकर्ता ने इस कुप्रथा को पूरे समाज के अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में रेखांकित किया है। उन्होंने सचेत किया कि यदि योग्यता के बजाय नकल और भ्रष्टाचार के माध्यम से अयोग्य लोग चिकित्सा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश पा लेंगे, तो भविष्य में देश के नागरिकों का स्वास्थ्य और जीवन पूरी तरह असुरक्षित हो जाएगा। यही नियम अभियंताओं और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों पर भी समान रूप से लागू होता है। इस बीच, मनोरंजन जगत की कई अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी इस मुहिम को अपना नैतिक समर्थन दिया है, जिससे इस छात्र आंदोलन को एक व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय आयाम मिल गया है।

  • जानिए रुपहले पर्दे पर राज करने वाले कपूर परिवार के 8 सदस्यों की मौत की असली वजह

    जानिए रुपहले पर्दे पर राज करने वाले कपूर परिवार के 8 सदस्यों की मौत की असली वजह

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत में दशकों तक एकछत्र राज करने वाले और भारतीय फिल्म उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने वाले प्रतिष्ठित कपूर परिवार का इतिहास जितना गौरवशाली रहा है, स्वास्थ्य के मोर्चे पर इस परिवार का संघर्ष उतना ही त्रासद रहा है। पृथ्वीराज कपूर से लेकर वर्तमान पीढ़ी के रणबीर कपूर तक, इस कुनबे ने भारतीय सिनेमा को कई नायाब फिल्ममेकर और अभिनेता दिए हैं। हालांकि, पर्दे पर करोड़ों दिलों को जीतने वाले इस परिवार के कई दिग्गज सदस्यों को बेहद कम उम्र में गंभीर बीमारियों के कारण दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। इस परिवार के आठ प्रमुख सदस्यों की जीवन यात्रा और उनकी मृत्यु के कारणों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि कैंसर, हृदय घात और क्रॉनिक बीमारियां इस प्रतिष्ठित परिवार के लिए बेहद घातक साबित हुईं।

    कपूर खानदान की नींव रखने वाले महान अभिनेता पृथ्वीराज कपूर, जिन्होंने ऐतिहासिक फिल्म मुगल-ए-आजम में सम्राट अकबर की भूमिका निभाकर अभिनय के नए मापदंड स्थापित किए थे, वह अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित हो गए थे। वर्ष 1972 में मात्र 65 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। इस त्रासदी का सबसे संवेदनशील पहलू यह रहा कि उनकी पत्नी रामसरनी मेहरा भी इसी घातक बीमारी से ग्रसित थीं और अपने पति के निधन के ठीक 16 दिन बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इसी तरह, पृथ्वीराज कपूर के छोटे भाई और अपने दौर के बेहद सफल अभिनेता त्रिलोक कपूर का निधन वर्ष 1988 में 76 वर्ष की आयु में अचानक आए तीव्र हृदय घात के कारण हुआ था।

    भारतीय सिनेमा के ‘शोमैन’ कहे जाने वाले राज कपूर का अंतिम समय बेहद कष्टदायक रहा। गंभीर अस्थमा से पीड़ित राज कपूर को मई 1988 में एक पुरस्कार समारोह के दौरान दिल्ली में सांस का तीव्र दौरा पड़ा था। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराने के बाद चिकित्सकों को ज्ञात हुआ कि उनका निमोनिया बेहद गंभीर स्थिति में पहुंच चुका था। लगभग एक महीने तक वेंटिलेटर और कोमा में रहने के बाद आखिरकार 2 जून 1988 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके नक्शेकदम पर चलते हुए सिनेमा को नई ऊर्जा देने वाले उनके भाई शम्मी कपूर अपने अंतिम वर्षों में गुर्दे की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, जिसके कारण 14 अगस्त 2011 को उनका निधन हो गया। वहीं, अपनी उत्कृष्ट संवाद अदायगी के लिए विख्यात शशि कपूर का वर्ष 2017 में सीने में संक्रमण और लंबे समय से चल रही अस्वस्थता के चलते मुंबई के एक अस्पताल में निधन हुआ था।

    राज कपूर की अगली पीढ़ी भी इन गंभीर आनुवंशिक और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से अछूती नहीं रही। उनकी बड़ी बेटी रितु नंदा का निधन वर्ष 2020 में कैंसर के कारण हुआ था। इसके कुछ ही समय बाद, हिंदी सिनेमा के सबसे रोमांटिक और ऊर्जावान अभिनेताओं में शुमार ऋषि कपूर भी ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर की चपेट में आ गए। अमेरिका में लंबे समय तक चले उपचार के बाद वह ठीक होकर भारत लौटे थे, किंतु संक्रमण और बीमारी के दोबारा उभरने के कारण 30 अप्रैल 2020 को उनका देहावसान हो गया। इस सिलसिले में सबसे कम उम्र में दुनिया छोड़ने वाले सदस्य राजीव कपूर रहे, जो राज कपूर के सबसे छोटे बेटे थे। फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से लोकप्रियता हासिल करने वाले राजीव कपूर वर्ष 2021 में मात्र 58 वर्ष की आयु में तीव्र हृदय घात का शिकार हो गए और 60 की उम्र भी पार नहीं कर सके। इस प्रकार, इस महान कलात्मक परिवार के स्वास्थ्य इतिहास में कैंसर और हृदय संबंधी बीमारियां सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरीं।

  • 'मेरा बस चलता तो 5-6 बच्चे पैदा करती', चैरिटी इवेंट में भावुक हुईं गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा

    'मेरा बस चलता तो 5-6 बच्चे पैदा करती', चैरिटी इवेंट में भावुक हुईं गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और ‘हीरो नंबर 1’ गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा इन दिनों मनोरंजन जगत और सोशल मीडिया पर लगातार अपनी बेबाक बयानबाजी को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं। बैक-टू-बैक रियलिटी शोज और एकता कपूर की आगामी फिल्म में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने के बाद सुनीता की लोकप्रियता में भारी इजाफा देखा जा रहा है। हाल ही में रियलिटी शो ‘लॉकअप’ से बाहर आने के बाद वे गुरुवार को माइंड कोच सारा अरफीन खान की फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक विशेष चैरिटी इवेंट में शामिल होने पहुंचीं, जहां मीडिया कर्मियों से बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं और पारिवारिक प्राथमिकताओं पर खुलकर बात की।

    यह चैरिटी इवेंट सुनीता आहूजा के लिए बेहद खास और भावनात्मक रहा, क्योंकि 16 जुलाई को ही उनकी बेटी टीना का भी जन्मदिन है। इस खास मौके पर गरीब बच्चों के बीच समय बिताने और उन्हें दान देने को लेकर सुनीता ने अपनी गहरी खुशी जाहिर की। उन्होंने इस नेक काम के लिए मुख्य आयोजक सारा अरफीन खान का आभार व्यक्त किया। इवेंट के दौरान सुनीता और सारा ने जरूरतमंद बच्चों को मानसून के मौसम को देखते हुए रेनकोट और छाते वितरित किए। इस दौरान बच्चों ने भी सुनीता पर भरपूर प्यार लुटाया और पैपराजी ने इस पूरे दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया।

    कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए सुनीता आहूजा ने बच्चों के प्रति अपने अत्यधिक लगाव को साझा किया। उन्होंने एक रिपोर्टर के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें बच्चे बहुत ज्यादा पसंद हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अगर उनका बस चलता तो वे केवल दो बच्चों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि 5 से 6 बच्चे पैदा करतीं। बच्चों को भगवान का रूप बताते हुए उन्होंने कहा कि बच्चे पूरी तरह से मासूम और पवित्र होते हैं और उनके मन में किसी भी प्रकार का छल-कपट या द्वेष नहीं होता है। इसी बातचीत में उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी कहा कि ‘लॉकअप’ शो के भीतर होने वाली अत्यधिक लड़ाइयों को देख-देखकर उनका डायबिटीज का स्तर भी काफी बढ़ गया है।

    बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए जब एक रिपोर्टर ने उनसे अभिनेता गोविंदा के आगामी चर्चित प्रोजेक्ट ‘रूपा’ को लेकर सवाल पूछा और उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो सुनीता के तेवर अचानक बदल गए। उन्होंने इस विषय पर किसी भी तरह की चर्चा करने से साफ मना कर दिया। सुनीता ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि यह पवित्र चैरिटी इवेंट इस तरह के व्यावसायिक प्रोजेक्ट या ‘रूपा’ के बारे में बात करने के लिए बिल्कुल सही जगह नहीं है। उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट चिढ़ और असहमति व्यक्त की।

    सुनीता आहूजा ने वहां मौजूद पैपराजी और मीडिया कर्मियों से सीधे तौर पर अपील करते हुए कहा कि वे केवल उनके और उनके बेटे यशवर्धन की आने वाली फिल्म से जुड़े रचनात्मक पहलुओं पर ही बात करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने काम के अलावा किसी अन्य व्यक्ति या विषय को लेकर कोई डिस्कशन नहीं करना चाहती हैं। अपने बेटे यशवर्धन की तारीफों के पुल बांधते हुए सुनीता ने कहा कि उनका बेटा बेहद संस्कारी है और उसकी परवरिश उन्होंने खुद बहुत अच्छे मूल्यों के साथ की है। उन्होंने विश्वास जताया कि यशवर्धन का काम बेहद शानदार है और वह आने वाले समय में 100 प्रतिशत अपने पिता गोविंदा से भी काफी आगे निकल जाएगा।

  • ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर आदित्य धर की 'धुरंधर' का जबरदस्त दबदबा, प्रभास की फ्लॉप फिल्म 'द राजा साब' को भी दर्शकों ने सिर-आंखों पर बिठाया

    ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर आदित्य धर की 'धुरंधर' का जबरदस्त दबदबा, प्रभास की फ्लॉप फिल्म 'द राजा साब' को भी दर्शकों ने सिर-आंखों पर बिठाया


    नई दिल्ली ।
    देश के डिजिटल मनोरंजन जगत में दर्शकों की पसंद और व्यूअरशिप के आंकड़ों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आई है। साल 2026 के शुरुआती छह महीनों के भीतर ओटीटी (ओवर द टॉप) प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज हुई तमाम फिल्मों, वेब सीरीज और रियलिटी शोज का पूरा हिसाब-किताब लेकर प्रसिद्ध मीडिया कंसल्टिंग फर्म ओरमैक्स मीडिया ने अपनी ताजा रिपोर्ट जारी कर दी है। इस अर्धवार्षिक रिपोर्ट के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि इंटरनेट और डिजिटल स्क्रीन पर इस वक्त किस कंटेंट का दबदबा है। रिपोर्ट के अनुसार, मशहूर कॉमेडियन समय रैना के रियलिटी शो ने व्यूअरशिप के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए सूची में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि अभिनेता रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म ने भी डिजिटल बाजार में अपनी मजबूत धाक जमाई है।

    जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, समय रैना के बेहद चर्चित शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ ने रिलीज होते ही इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एक अभूतपूर्व तहलका मचाया है। इस शो को भारत में रिकॉर्ड तोड़ 38.5 मिलियन (करीब 3.85 करोड़) व्यूज मिले हैं, जिसके साथ यह साल 2026 का अब तक का सबसे बड़ा और सफल हिट शो बनकर उभरा है। समय रैना की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनका एक और स्टैंड-अप स्पेशल शो ‘स्टिल अलाइव’ भी 13.1 मिलियन व्यूज बटोरने में कामयाब रहा और उसने शीर्ष 50 की सूची में 15वां स्थान अपने नाम किया। एक ही समय में दो अलग-अलग शोज का शीर्ष श्रेणियों में बने रहना डिजिटल स्पेस में उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

    इस सूची में दूसरा सबसे बड़ा नाम निर्देशक आदित्य धर की महत्वाकांक्षी एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ का है, जिसमें रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में नजर आए हैं। सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन और बॉक्स ऑफिस पर गदर मचाने के बाद इस फिल्म ने ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर भी अपनी सफलता के झंडे गाड़े हैं। यह फिल्म 35.2 मिलियन व्यूज के साथ सूची में चौथे स्थान पर रही, जबकि इसके तुरंत बाद रिलीज हुए दूसरे भाग यानी ‘धुरंधर: द रिवेंज’ को भी भारतीय दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। इस सीक्वल ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 27.8 मिलियन व्यूज हासिल किए और टॉप 10 शोज की सूची में छठा स्थान अपने नाम करने में सफलता पाई।

    ओरमैक्स की इस रिपोर्ट से एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला ट्रेंड भी सामने आया है, जिसमें देखा गया कि कुछ फिल्में बड़े पर्दे पर फ्लॉप होने के बावजूद ओटीटी पर सुपरहिट साबित हुईं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण दक्षिण भारतीय सुपरस्टार प्रभास की हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘द राजा साब’ है। यह फिल्म सिनेमाघरों के बॉक्स ऑफिस पर भले ही कोई विशेष कमाल दिखाने में पूरी तरह सुस्त और असफल रही हो, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आते ही दर्शकों ने इसे हाथों-हाथ लिया और 17.5 मिलियन व्यूज के साथ यह शीर्ष 10 में 9वें पायदान पर जगह बनाने में कामयाब रही। इसके अलावा गंभीर विषयों और बेहतरीन अभिनय से सजी नसीरुद्दीन शाह और जिम सरभ की नई ड्रामा सीरीज ‘मेड इन इंडिया: ए टाइटन स्टोरी’ को भी समीक्षकों की तारीफों के साथ-साथ 17.8 मिलियन दर्शकों का मजबूत साथ मिला।

    इस व्यापक सर्वेक्षण सूची में कंटेंट आधारित और मनोरंजन से भरपूर कई अन्य शोज को भी शामिल किया गया है, जिसमें जियोहॉटस्टार की मौलिक सीरीज ‘चिरैया’ को 16.3 मिलियन व्यूज और जाने-माने फिल्म निर्माता नीरज पांडे की खोजी सीरीज ‘तस्करी: द स्मगलर्स वेब’ को 14.2 मिलियन व्यूज के साथ सराहा गया है। लोकप्रिय टेलीविजन और डिजिटल शो ‘लाफ्टर शेफ्स सीजन 3’ ने भी 14.1 मिलियन व्यूज लेकर 12वां स्थान पाया है। ओरमैक्स मीडिया ने स्पष्ट किया है कि यह राष्ट्रीय रिपोर्ट पूरे देश के विभिन्न हिस्सों से साप्ताहिक आधार पर 3,000 से अधिक सक्रिय ओटीटी उपभोक्ताओं के गहन सर्वेक्षण और वैज्ञानिक डेटा विश्लेषण के बाद तैयार की गई है, जिसमें कम से कम 30 मिनट तक देखे गए कंटेंट को ही मुख्य मानक माना गया है।

  • सोहेल खान ने बयां किया बचपन में हुए यौन उत्पीड़न का भयानक दर्द, सालों बाद पिता के सामने खोला जिंदगी का सबसे बड़ा राज

    सोहेल खान ने बयां किया बचपन में हुए यौन उत्पीड़न का भयानक दर्द, सालों बाद पिता के सामने खोला जिंदगी का सबसे बड़ा राज

    नई दिल्ली । भारतीय मनोरंजन उद्योग के जाने-माने अभिनेता और फिल्म निर्माता सोहेल खान ने अपने जीवन के एक बेहद संवेदनशील और दर्दनाक अनुभव को साझा करते हुए बड़ा खुलासा किया है। एक चर्चित रियलिटी शो के मंच पर उन्होंने स्वीकार किया कि बचपन के दिनों में वे लंबे समय तक यौन उत्पीड़न (सेक्सुअल हैरेसमेंट) का शिकार रहे थे। उन्होंने इस बेहद खौफनाक और तकलीफदेह राज को कई वर्षों तक अपने दिल में दबाए रखा था और किसी से भी इसका जिक्र नहीं किया था। जब वे बड़े हुए और इस मानसिक आघात को समझने में सक्षम हुए, तब जाकर उन्होंने अपने पिता और फिल्म जगत के दिग्गज लेखक सलीम खान के सामने इस सत्य को उजागर किया था।

    टेलीविजन स्क्रीन पर प्रसारित हो रहे इस रियलिटी शो के हालिया एपिसोड के दौरान जब घर के सभी प्रतिभागी रैगिंग और बदमाशी (बुलींग) जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे, तब सोहेल खान ने अपनी जीवन यात्रा के इस स्याह पन्ने को सबके सामने रखा। उन्होंने बेहद भावुक होते हुए कहा कि जब वे बहुत छोटे थे, तब कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके साथ बार-बार इस घिनौनी हरकत को अंजाम दिया था। लोक-लाज और सामाजिक संकोच के कारण वे बचपन में किसी के भी सामने अपना दर्द बयां नहीं कर सके थे, जिसके कारण वे लंबे समय तक मानसिक तनाव से गुजरते रहे।

    अपने पिता के साथ हुए उस भावनात्मक संवाद को याद करते हुए सोहेल खान ने बताया कि वयस्क होने के बाद उन्होंने हिम्मत जुटाकर अपने पिता से कहा था कि बचपन में उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार हुआ था। यह सुनकर उनके पिता भी स्तब्ध रह गए थे और उन्होंने बेहद दुख के साथ पूछा था कि उन्होंने यह बात इतने सालों तक क्यों छुपा कर रखी। इस पर सोहेल ने अपने पिता से माफी मांगते हुए कहा था कि भले ही इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी, लेकिन उस उम्र में वे इस विषय पर बात करने को लेकर बेहद शर्मिंदगी और डर महसूस कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चा खुद को ही दोषी मानने लगता है, जो कि पूरी तरह गलत है।

    इस गहरे व्यक्तिगत अनुभव से सीख लेते हुए सोहेल खान ने बताया कि वे अपने दोनों बेटों, निर्वान और योहान की परवरिश को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं। वे लगातार अपने बच्चों से संवाद करते हैं और उन्हें यह हिदायत देते हैं कि यदि स्कूल, कॉलेज या समाज में कोई भी व्यक्ति उन्हें किसी भी तरह से परेशान या प्रताड़ित करने की कोशिश करे, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट या डर के तुरंत अपने माता-पिता को बताएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी बच्चे को कभी भी किसी भी अत्याचार को चुपचाप सहन नहीं करना चाहिए, क्योंकि चुप्पी अपराधियों के हौसले और ज्यादा बुलंद करती है।

    इस बेहद संवेदनशील और साहसी खुलासे के बाद रियलिटी शो के सह-प्रतियोगियों ने सोहेल खान के साहस और ईमानदारी की जमकर सराहना की। शो के अन्य सदस्यों ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाया और समाज के सामने इस विषय पर खुलकर बोलने के लिए उनकी बहादुरी को सलाम किया। वर्तमान में इस चर्चित रियलिटी शो की कमान अभिनेता कुणाल खेमू के हाथों में है, जो इसे होस्ट कर रहे हैं। हाल के दिनों में इस शो की लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ है, जिसमें सोहेल खान के साथ-साथ उनकी पूर्व पत्नी सीमा सजदेह और टीवी अभिनेता अली गोनी जैसे कई मशहूर चेहरे एक प्रतियोगी के रूप में गेम खेल रहे हैं।

  • आगामी 24 जुलाई को बॉक्स ऑफिस पर देखने को मिलेगा महामुकाबला, विक्रांत मैसी और केके मेनन की चर्चित सीरीज समेत चार बड़े प्रोजेक्ट्स होंगे रिलीज

    आगामी 24 जुलाई को बॉक्स ऑफिस पर देखने को मिलेगा महामुकाबला, विक्रांत मैसी और केके मेनन की चर्चित सीरीज समेत चार बड़े प्रोजेक्ट्स होंगे रिलीज

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा प्रेमियों के लिए आने वाले कुछ महीने मनोरंजन से भरपूर होने वाले हैं। वैश्विक फिल्म डेटाबेस प्लेटफॉर्म आईएमडीबी द्वारा जारी की गई सर्वाधिक प्रतीक्षित भारतीय फिल्मों और वेब सीरीज की ताजा रियल-टाइम व्यूज सूची में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। इस सूची में सुपरस्टार यश की बहुचर्चित एक्शन क्राइम ड्रामा फिल्म ‘टॉक्सिक’ ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। दर्शकों की बढ़ती उत्सुकता और डिजिटल सर्च के आधार पर तैयार की गई इस सूची में देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले 10 बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट्स को शामिल किया गया है, जो आगामी महीनों में बड़े पर्दे और विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    इस सूची में शीर्ष पर काबिज कन्नड़ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक’ आगामी 26 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। एक एक्शन क्राइम ड्रामा के रूप में तैयार की गई इस फिल्म की निर्माण प्रक्रिया और रिलीज की तारीखों में पूर्व में कई बार बदलाव किए जा चुके हैं। फिल्म के शुरुआती टीज़र के आने के बाद से ही इसे लेकर दर्शकों में गहरा कौतूहल बना हुआ है। सूची में दूसरे स्थान पर तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और लोकप्रिय अभिनेता सी. जोसेफ विजय की अंतिम फिल्म ‘जन नायगन’ बनी हुई है। सेंसरशिप की जटिलताओं के कारण लंबे समय तक अटकी रहने के बाद आखिरकार इस फिल्म को 23 जुलाई की रिलीज डेट मिल गई है, जिसे लेकर दक्षिण भारतीय सिनेमा प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

    इसके अलावा, आर. माधवन और कृष्णकुमार रामकुमार की मुख्य भूमिकाओं से सजी बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म ‘जीडीएन’ 17 जुलाई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है। बॉलीवुड के बहुमुखी अभिनेता इमरान हाशमी की बहुचर्चित रोमांटिक ड्रामा थ्रिलर फ्रेंचाइजी ‘आवारापन 2’ भी इस सूची में चौथे स्थान पर मजबूती से बनी हुई है, जो आगामी 14 अगस्त को दर्शकों के सामने आएगी। वहीं, डार्क रोमांटिक ड्रामा जॉनर की फिल्म ‘डीसी’ को भी दर्शकों की तरफ से जबरदस्त सर्च मिल रही है, जिसे निर्माताओं ने 7 अगस्त को हिंदी सहित कई प्रमुख भाषाओं में सीधे सिनेमाघरों में रिलीज करने का फैसला लिया है।

    आगामी 24 जुलाई का दिन भारतीय मनोरंजन उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है, क्योंकि इस एक ही दिन चार बड़े और बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट्स एक साथ मनोरंजन बाजार में उतर रहे हैं। इस दिन डिजिटल प्लेटफॉर्म प्राइम वीडियो पर दिग्गज अभिनेता केके मेनन और अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह अभिनीत बहुचर्चित ड्रामा सीरीज ‘आदर्श बाल विद्यालय’ का प्रीमियर होने जा रहा है। इसी तारीख को अन्नु कपूर, नितिन अरोड़ा, पवन मल्होत्रा और सुमित गुलाटी जैसे मंझे हुए कलाकारों की शानदार जुगलबंदी वाली सामाजिक कॉमेडी फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ बड़े पर्दे पर रिलीज होने के लिए तैयार है।

    इसी दिन सिनेमाघरों में रहस्य और रोमांच से भरपूर मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म ‘इंद्रजाल’ भी रिलीज होगी, जिसमें मुख्य भूमिकाएं महेश निकम और शनाया त्रिपाठी ने निभाई हैं। 24 जुलाई को ही नेटफ्लिक्स पर विक्रांत मैसी की बेहद अनूठी रोमांटिक सीरीज ‘मुसाफिर कैफे’ भी रिलीज होने जा रही है। इस सूची में 7 अगस्त को प्रदर्शित होने वाली जिम्मी शेरगिल और अभय वर्मा की ऐतिहासिक सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ कारगिल वॉर’ भी शामिल है, जो सिनेमाघरों के माध्यम से कारगिल युद्ध के अनसुने पहलुओं को दर्शकों के सामने पेश करेगी। इन सभी बड़ी रिलीज के कारण आगामी हफ्तों में भारतीय बॉक्स ऑफिस और डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों की भारी भीड़ जुटने की पूरी संभावना है।

  • बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का सिंगर ने लगाया आरोप, कहा- देश की शिक्षा व्यवस्था और भविष्य को लेकर चिंतित होना हर नागरिक का अधिकार

    बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का सिंगर ने लगाया आरोप, कहा- देश की शिक्षा व्यवस्था और भविष्य को लेकर चिंतित होना हर नागरिक का अधिकार

    नई दिल्ली । देश की जानी-मानी भजन गायिका अनुराधा पौडवाल ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान अयोध्या राम मंदिर में कथित चोरी और देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए अपने बयान पर मचे भारी राजनीतिक व सामाजिक बवाल के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है। सोशल मीडिया पर लगातार हो रही आलोचनाओं और विवादों के बीच, गायिका ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबा और विस्तृत स्पष्टीकरण पत्र साझा किया है। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने अपने बयान के पीछे की वास्तविक मंशा को साफ करते हुए आलोचकों और वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाले सोशल मीडिया क्रिएटर्स को करारा जवाब दिया है।

    अनुराधा पौडवाल ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट की शुरुआत देश की जनता, अपने प्रशंसकों, मित्रों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए की। उन्होंने लिखा कि एक सार्वजनिक हस्ती होने के नाते वह समाज में अपने प्रभाव और जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी राष्ट्र और व्यक्ति के समग्र विकास तथा सुनहरे भविष्य की असली नींव सिर्फ और सिर्फ मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही होती है। वह हमेशा से देश में बेहतर शिक्षा और साक्षरता की पक्षधर रही हैं और भविष्य में भी इस विचार पर पूरी दृढ़ता से कायम रहेंगी।

    विवाद के मुख्य बिंदु पर स्पष्टीकरण देते हुए सिंगर ने उन हालिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया जिनमें देश भर में 94,000 से अधिक सरकारी या प्राथमिक स्कूलों के बंद होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि हर दिन औसतन 24 स्कूलों का बंद होना एक भारतीय नागरिक के तौर पर उनके लिए बेहद चौंकाने वाला और गंभीर रूप से चिंताजनक था। इसके साथ ही उन्होंने अयोध्या में श्री राम लल्ला मंदिर परिसर में हुई कथित चोरी की घटना पर भी गहरा दुख और व्यक्तिगत पीड़ा व्यक्त की थी। उनके अनुसार, देश के सांस्कृतिक और शैक्षणिक प्रतीकों के साथ जुड़ी ऐसी खबरें किसी भी संवेदनशील नागरिक को आहत कर सकती हैं।

    गायिका ने अपने पत्र में लोकतांत्रिक मूल्यों की वकालत करते हुए लिखा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है, जहां प्रत्येक नागरिक को देश के हित में सम्मानपूर्वक अपनी राय रखने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। रचनात्मक संवाद और अलग-अलग दृष्टिकोण ही हमारे समाज और लोकतंत्र को आंतरिक रूप से मजबूत बनाते हैं। उन्होंने देश के वर्तमान नेतृत्व और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति अपना पूर्ण सम्मान व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या राजनीतिक एजेंडा चलाना बिल्कुल नहीं था।

    पोस्ट के अंतिम हिस्से में अनुराधा पौडवाल ने कुछ डिजिटल क्रिएटर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपना तीव्र असंतोष और निराशा जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में कही गई उनकी बातों को कुछ तत्वों द्वारा जानबूझकर आधा-अधूरा काटा गया और वीडियो को गुमराह करने वाले संदर्भों के साथ इंटरनेट पर प्रसारित कर सनसनी फैलाने की कोशिश की गई। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे ऐसे संकीर्ण सोच वाले और सिर्फ व्यूज के लिए बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को बढ़ावा न दें।

  • ओरिजिनल कॉन्सेप्ट का क्रेडिट न मिलने पर भड़का परेश रावल का गुस्सा, 'ओएमजी 2' के पीछे की कहानी का किया सनसनीखेज खुलासा

    ओरिजिनल कॉन्सेप्ट का क्रेडिट न मिलने पर भड़का परेश रावल का गुस्सा, 'ओएमजी 2' के पीछे की कहानी का किया सनसनीखेज खुलासा

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता परेश रावल ने फिल्म ‘ओएमजी 2’ की स्क्रिप्टिंग और इसके ओरिजिनल कॉन्सेप्ट को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर अपना दर्द बयां करते हुए कहा है कि इस फिल्म का मूल विचार उनका था, जिसे उन्होंने निर्देशक अमित राय के साथ मिलकर तैयार किया था। अभिनेता का आरोप है कि बाद में जब इस प्रोजेक्ट में बदलाव किए गए तो उन्हें इस बात का क्रेडिट तक नहीं दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम और रचनात्मक मतभेदों के बाद ही उन्होंने खुद को इस बेहद सफल फ्रेंचाइजी के दूसरे हिस्से से पूरी तरह अलग कर लिया था।

    एक विशेष बातचीत के दौरान परेश रावल ने स्पष्ट किया कि उनकी मूल कहानी मुख्य रूप से पिता और पुत्र के संवेदनशील रिश्ते के इर्द-गिर्द बुने गए एक सामाजिक ड्रामा पर आधारित थी। इस ड्रामा में स्कूली शिक्षा, सेक्स एजुकेशन, सामाजिक बदनामी और अपने बच्चे के न्याय के लिए माता-पिता द्वारा लड़ी जाने वाली कानूनी व मानसिक लड़ाई को केंद्र में रखा गया था। उन्होंने बताया कि इस कहानी के शुरुआती प्रारूप में किसी भी प्रकार के दैवीय या भगवान के किरदार का कोई स्थान नहीं था। इसे कभी भी साल 2012 में आई सुपरहिट फिल्म ‘ओएमजी’ के सीधे सीक्वल या आध्यात्मिक उत्तराधिकारी के रूप में नहीं देखा गया था।

    अभिनेता ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके लिए सबसे अधिक पीड़ादायक बात यह रही कि उनके इस मूल विचार को फिल्म की क्रेडिट लाइन में कोई स्थान नहीं मिला। पूरी फिल्म की टीम और इंडस्ट्री में उनका नाम तक कहीं नहीं लिया गया, जबकि फिल्म के मुख्य पहलुओं की नींव उन्होंने ही रखी थी। उनके अनुसार फिल्म जगत के कई प्रभावशाली लोग और निर्माता-निर्देशक इस सच से भलीभांति वाकिफ हैं कि इस कहानी का मुख्य विचार कहां से उत्पन्न हुआ था। उन्होंने दावा किया कि अमित राय और अक्षय कुमार के अलावा अजय देवगन, करण जौहर और सलमान खान जैसे बड़े सितारे भी जानते थे कि यह उनका विचार था।

    कहानी की पृष्ठभूमि को साझा करते हुए परेश रावल ने बताया कि उन्होंने फिल्म ‘रोड टू संगम’ के निर्देशक अमित राय के काम से प्रभावित होकर उनसे संपर्क किया था। उन्होंने अमित को एक ऐसे स्कूली छात्र की कहानी पर काम करने का सुझाव दिया था, जिसकी एक निजी हरकत का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो जाता है। इसके बाद समाज और स्कूल प्रशासन उस बच्चे का बहिष्कार कर देते हैं। इस विषम परिस्थिति में बच्चे का पिता पूरी ताकत के साथ उसके सम्मान की रक्षा करने और समाज की संकीर्ण मानसिकता को अदालत में चुनौती देने के लिए खड़ा होता है।

    बाद में जब इस प्रोजेक्ट में अक्षय कुमार की एंट्री हुई, तो पूरी कहानी का ढांचा बदल दिया गया। परेश रावल के अनुसार अक्षय कुमार ने खुद उन्हें इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, स्क्रिप्ट में हुए बड़े बदलावों और मूल भावना के खत्म हो जाने के कारण उन्होंने इस प्रस्ताव को बेहद शालीनता से ठुकरा दिया। अभिनेता ने अक्षय कुमार को साफ कह दिया था कि यह वह फिल्म नहीं है जिसकी उन्होंने कल्पना की थी। अंततः फिल्म में परेश रावल की जगह पंकज त्रिपाठी को लिया गया और अक्षय कुमार ने फिल्म में भगवान शिव के दूत की भूमिका निभाई।