Category: Entertainment

  • ‘शूरवीर’ गाने पर बढ़ा विवाद, दिल्ली हाई कोर्ट में PIL दाखिल; ‘मिर्जापुर: द मूवी’ से हटाने की मांग

    ‘शूरवीर’ गाने पर बढ़ा विवाद, दिल्ली हाई कोर्ट में PIL दाखिल; ‘मिर्जापुर: द मूवी’ से हटाने की मांग

    नई दिल्ली । मिर्जापुर: द मूवी के ‘शूरवीर’ गाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। फिल्म के क्लाइमेक्स में इस्तेमाल किए गए इस गाने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका में अदालत से फिल्म के क्लाइमेक्स से इस गाने को हटाने या इसकी जगह कोई दूसरा ट्रैक इस्तेमाल करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह गाना महाराणा प्रताप की वीरता को समर्पित है, ऐसे में इसे फिल्म में गैंगस्टर और अपराधी किरदारों के साथ दिखाना गलत है। प्रशांत कुमार सिंह की ओर से दाखिल की गई PIL में कहा गया है कि ‘शूरवीर’ गीत मूल रूप से राजस्थान के महान योद्धा महाराणा प्रताप की वीरता और उनके गौरव को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाया गया था।

    इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म में इसी गीत का इस्तेमाल काल्पनिक गैंगस्टरों और अपराधियों को दिखाने वाले सीन में किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे गीत के मूल भाव और सांस्कृतिक महत्व का गलत अर्थ निकल सकता है। उनका तर्क है कि एक ऐतिहासिक और राष्ट्रीय नायक को समर्पित गीत को अपराध और गैंग संस्कृति से जोड़कर दिखाना सही नहीं है।

    ‘सांस्कृतिक को पहुंच सकता है नुकसान’

    याचिका में ये भी कहा गया है कि फिल्म में अपराधियों के सीन के साथ इस गाने का इस्तेमाल राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचा सकता है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, अगर ऐसे गीतों को उनके मूल संदर्भ से हटकर इस्तेमाल किया जाता है, तो लोगों के बीच ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को लेकर गलत मैसेज जाएगा।

    PIL में अदालत से सिर्फ फिल्म के क्लाइमेक्स से गाना हटाने की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि भविष्य के लिए भी कुछ दिशानिर्देश बनाने की अपील की गई है। इस याचिका में कहा गया है कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से अहम लोगों से जुड़े गानों और प्रतीकों का इस्तेमाल इस तरह न हो, जिससे उनका संबंध अपराध या गलत तरह की गतिविधियों से जुड़ता हुआ दिखाई दे।

    राजेंद्र राठौड़ ने भी जताई थी आपत्ति

    दिल्ली हाई कोर्ट में PIL दाखिल होने से एक दिन पहले राजस्थान के वरिष्ठ बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने ‘शूरवीर’ गीत को फिल्म से हटाने की मांग करते हुए सेंट्रल फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष को पत्र लिखा था। राठौड़ ने अपने पत्र को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप को समर्पित इस गीत को फिल्म में गैंगस्टर और आपराधिक किरदारों के साथ जोड़कर दिखाना ठीक नहीं है।

    ‘शूरवीर और गैंगस्टर के मूल्यों में अंतर’

    राठौड़ ने अपने लेटर में कहा कि शूरवीर और गैंगस्टर के कैरेक्टर और उनके मूल्यों में जमीन-आसमान का अंतर है। उनके मुताबिक वीरता, त्याग, स्वाभिमान और अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पण जैसे मूल्यों को अपराध, हिंसा और गैंग संस्कृति से जोड़कर दिखाना गलत है। उन्होंने CBFC से मांग की कि फिल्म से ‘शूरवीर’ गाने को हटाया जाए और आगे किसी भी ऐतिहासिक महापुरुषों से जुड़े गानों, प्रतीकों और चीजों के ऐसे इस्तेमाल की अनुमति न दी जाए, जिससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचे।

    अब अदालत के फैसले पर नजर

    फिलहाल, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ के ‘शूरवीर’ गाने को लेकर विवाद अदालत तक पहुंच चुका है। एक तरफ याचिकाकर्ता और बीजेपी नेता इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, वहीं इस पूरे मामले में अब दिल्ली हाई कोर्ट के रुख पर नजर रहेगी। फिल्म के क्लाइमेक्स से गाना हटेगा या नहीं, इस पर अंतिम फैसला अदालत के आदेश के बाद ही साफ होगा।

  • सलमान खान की ऑनस्क्रीन बहन आकांक्षा मल्होत्रा का राज कपूर परिवार से खास रिश्ता, रणबीर-करीना-करिश्मा से है नाता

    सलमान खान की ऑनस्क्रीन बहन आकांक्षा मल्होत्रा का राज कपूर परिवार से खास रिश्ता, रणबीर-करीना-करिश्मा से है नाता


    नई दिल्ली ।
    सलमान खान और अरबाज खान की फिल्म ‘गर्व: प्राइड एंड ऑनर’ साल 2004 में रिलीज हुई थी। फिल्म की कहानी एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर की थी, जिसे झूठे मामलों में फंसाया जाता है। फिल्म में सलमान खान ने ACP अर्जुन राणावत का किरदार निभाया था। वहीं, एक्ट्रेस आकांक्षा मल्होत्रा ने उनकी मुंह बोली बहन राखी दीक्षित की भूमिका निभाई थी। कम ही लोग जानते हैं कि आकांक्षा मल्होत्रा का राज कपूर के परिवार से पारिवारिक रिश्ता है।

    सलमान खान की ऑनस्क्रीन बहन

    ‘गर्व’ में आकांक्षा मल्होत्रा ने राखी का किरदार निभाया था। फिल्म में जब सलमान के किरदार को कोर्ट में सजा सुनाई जाती है, तब स्लो मोशन में आकांक्षा के किरदार राखी की एंट्री दिखाई जाती है। राखी कोर्ट में पहुंचकर बयान देती है, जिसके बाद ACP अर्जुन राणावत की ईमानदारी की सच्चाई सामने आती है। फिल्म की कहानी के अंत में आकांक्षा के किरदार की अहम भूमिका रहती है।

    इस फिल्म को आकांक्षा के परिवार से भी खास कनेक्शन था। फिल्म को उनके पिता और गुजरे जमाने के अभिनेता प्रेम किशन ने प्रोड्यूस किया था। फिल्म का निर्देशन पुनीत इस्सर ने किया था, जो दुर्योधन के किरदार से भी पहचाने जाते हैं।

    प्रेम नाथ और राज कपूर का रिश्ता

    आकांक्षा मल्होत्रा के दादा प्रेम नाथ अपने दौर के मशहूर अभिनेता थे। उन्होंने कई फिल्मों में विलेन की भूमिकाएं निभाईं। फिल्म ‘बॉबी’ में उन्हें डिंपल कपाड़िया के पिता के किरदार में देखा गया था। प्रेम नाथ की बहन कृष्णा ने अभिनेता और फिल्मकार राज कपूर से शादी की थी। इस रिश्ते के कारण राज कपूर, प्रेम नाथ के जीजा लगते थे।

    प्रेम नाथ के बेटे प्रेम किशन ने भी फिल्मों में बतौर अभिनेता काम किया। उन्होंने 70 और 80 के दशक में ‘दुल्हन वो ही जो पिया मन भाए’, ‘जय विजय’ और ‘हमारे तुम्हारे’ जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं। हालांकि, बतौर अभिनेता वह अपने पिता जैसी पहचान नहीं बना सके। बाद में उन्होंने टीवी सीरियल और फिल्मों के निर्माण का काम शुरू किया।

    प्रेम किशन का परिवार

    प्रेम किशन के दो बच्चे हैं, बेटी आकांक्षा मल्होत्रा और बेटे पी. सिद्धार्थ मल्होत्रा। आकांक्षा ने ‘गर्व’ में सलमान खान की बहन का किरदार निभाया था। वहीं, पी. सिद्धार्थ मल्होत्रा फिल्म निर्देशन में सक्रिय हैं। उन्होंने करीना कपूर के साथ ‘वी आर फैमिली’ का निर्देशन किया था। इसके अलावा उन्होंने रानी मुखर्जी की ‘हिचकी’ और आमिर खान के बेटे जुनैद खान की फिल्म ‘महाराज’ का निर्देशन किया। हाल ही में नेटफ्लिक्स पर आई फिल्म ‘इक्का’ का निर्देशन भी सिद्धार्थ मल्होत्रा ने किया है। इसमें सनी देओल और अक्षय खन्ना मुख्य भूमिकाओं में हैं।

    राज कपूर परिवार से कनेक्शन

    प्रेम किशन की बुआ कृष्णा राज कपूर थीं। इसी पारिवारिक रिश्ते के चलते आकांक्षा मल्होत्रा और उनके भाई पी. सिद्धार्थ मल्होत्रा का कपूर परिवार से संबंध बनता है। इस रिश्ते के अनुसार रणबीर कपूर, करीना कपूर और करिश्मा कपूर उनके पारिवारिक रिश्ते में भाई-बहन लगते हैं। हालांकि, यह रिश्ता अब दूर का है।

    आकांक्षा मल्होत्रा अब फिल्मों से दूर हैं और अपनी निजी जिंदगी में व्यस्त हैं। वह अपने परिवार और दो बेटियों के साथ समय बिताती हैं। इस तरह सलमान खान की फिल्म में उनकी ऑनस्क्रीन बहन का किरदार निभाने वाली आकांक्षा का फिल्म इंडस्ट्री के कपूर परिवार से भी पुराना पारिवारिक संबंध रहा है।

  • OTT पर इन 7 फिल्मों के ट्विस्ट कर देंगे दिमाग सुन्न, IMDb पर शानदार रेटिंग के साथ हर कहानी में छिपा है बड़ा राज

    OTT पर इन 7 फिल्मों के ट्विस्ट कर देंगे दिमाग सुन्न, IMDb पर शानदार रेटिंग के साथ हर कहानी में छिपा है बड़ा राज

    नई दिल्ली। वीकेंड पर अगर आप कुछ ऐसा देखना चाहते हैं, जिसकी कहानी आखिरी तक आपको बांधे रखे और जिसके ट्विस्ट दिमाग घुमा दें, तो OTT पर मौजूद ये 7 साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर फिल्में आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती हैं। इन फिल्मों को IMDb पर भी अच्छी रेटिंग मिली है। इनमें अपराध, रहस्य, मानसिक उलझन और ऐसे मोड़ देखने को मिलते हैं, जो कहानी को लगातार दिलचस्प बनाए रखते हैं।

    फाइट क्लब

    IMDb रेटिंग: 8.8

    साल 1999 में रिलीज हुई ‘फाइट क्लब’ का निर्देशन डेविड फिंचर ने किया है। फिल्म की कहानी एक ऐसे शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी पूंजीवादी जीवनशैली से खुश नहीं है। उसे नींद नहीं आने की समस्या रहती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात साबुन बेचने वाले एक शख्स से होती है और दोनों मिलकर अंडरग्राउंड फाइट क्लब की शुरुआत करते हैं। कहानी आगे बढ़ने के साथ कई ऐसे मोड़ आते हैं, जो दर्शकों को हैरान करते हैं।

    टैक्सी ड्राइवर

    IMDb रेटिंग: 8.2

    1976 में रिलीज हुई ‘टैक्सी ड्राइवर’ का निर्देशन मार्टिन स्कॉर्सेसे ने किया है। फिल्म की कहानी पूर्व नौसैनिक ट्रैविस के इर्द-गिर्द घूमती है, जो न्यूयॉर्क में टैक्सी ड्राइवर के तौर पर काम करता है। एक समय के बाद वह कम उम्र की एक प्रॉस्टिट्यूट को बचाने की कोशिश करने का फैसला करता है। इसके बाद कहानी अलग दिशा में आगे बढ़ती है और ट्रैविस के फैसले कई घटनाओं को जन्म देते हैं।

    बदला

    IMDb रेटिंग: 7.8

    2019 में रिलीज हुई ‘बदला’ में अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कहानी नैना के इर्द-गिर्द घूमती है। नैना एक शादीशुदा महिला है, जिसका अर्जुन नाम के युवक के साथ अफेयर होता है। उसकी जिंदगी उस समय बदल जाती है, जब उस पर अर्जुन की हत्या का आरोप लगता है। अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए नैना, बादल गुप्ता की मदद लेती है। इसके बाद सामने आने वाले रहस्य कहानी को लगातार उलझाते जाते हैं।

    फॉरगॉटन

    IMDb रेटिंग: 7.4

    2017 में रिलीज हुई ‘फॉरगॉटन’ की कहानी जिन-सियोक और उसके भाई की किडनैपिंग के इर्द-गिर्द घूमती है। जिन-सियोक एक नए घर में रहने आता है। वहां उसका भाई किडनैप हो जाता है। 19 दिन बाद जब उसका भाई वापस लौटता है, तो उसे पिछली घटनाओं के बारे में कुछ भी याद नहीं रहता। इसके बाद जिन सच का पता लगाने के मिशन पर निकलता है। फिल्म का निर्देशन जंग हैंग-जून ने किया है।

    मारीसन

    IMDb रेटिंग: 7.4

    ‘मारीसन’ 2025 में रिलीज हुई तमिल भाषा की क्राइम थ्रिलर फिल्म है। कहानी एक शातिर चोर से शुरू होती है, जो एक घर में चोरी करने पहुंचता है। वहां उसे एक बूढ़ा व्यक्ति बंधा हुआ मिलता है। वह व्यक्ति दावा करता है कि घर उसी का है और अगर चोर उसे वहां से छुड़ाकर ले जाए तो वह उसे एटीएम से पैसे निकालकर देगा। चोर उसकी बातों में आ जाता है और दोनों एक यात्रा पर निकलते हैं। इस यात्रा के दौरान होने वाली घटनाएं कहानी को कई अप्रत्याशित मोड़ देती हैं।

    कांथा

    IMDb रेटिंग: 7.2

    ‘कांथा’ का निर्देशन सेल्वमणि सेल्वराज ने किया है। यह तमिल भाषा की फिल्म है, जिसकी कहानी 1950 के मद्रास की पृष्ठभूमि में रखी गई है। फिल्म की कहानी आर्या नाम के एक दिग्गज निर्देशक और उसकी फिल्म के अभिनेता टी. के. महादेवन के बीच दुश्मनी के इर्द-गिर्द घूमती है।

    द कॉल

    IMDb रेटिंग: 7.1

    2020 में रिलीज हुई ‘द कॉल’ का निर्देशन ली चुंग-ह्योन ने किया है। फिल्म की कहानी एक ऐसे घर में घटती है, जहां वर्तमान समय में एक लड़की को फोन आता है। फोन पर दूसरी लड़की बताती है कि उसे टॉर्चर किया जा रहा है। मामले की जांच आगे बढ़ने पर पता चलता है कि फोन उसी घर से आ रहा है, लेकिन यह कॉल साल 1999 से की जा रही है। इसके बाद कहानी रहस्य और घटनाओं के ऐसे सिलसिले में बदल जाती है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है।

  • लता मंगेशकर के ‘थोड़ा रेशम लगता है’ की धुन पर बना अमेरिकी गाना हुआ हिट, कॉपीराइट विवाद में करोड़ों का दावा

    लता मंगेशकर के ‘थोड़ा रेशम लगता है’ की धुन पर बना अमेरिकी गाना हुआ हिट, कॉपीराइट विवाद में करोड़ों का दावा

    नई दिल्ली । लता मंगेशकर ने अपने करियर में कई ऐसे आईकॉनिक गाने दिए हैं, जिन्हें आज भी लोग पसंद करते हैं। उनके गानों की लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि विदेशों में भी उनके संगीत को पसंद किया गया। इसी कड़ी में साल 1981 की फिल्म ‘ज्योति’ का सुपरहिट गाना “थोड़ा रेशम लगता है” भी अंतरराष्ट्रीय संगीत विवाद से जुड़ा।

    यह गाना लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड किया गया था। इसका संगीत दिग्गज संगीतकार बप्पी लाहिड़ी ने तैयार किया था और इसे अरुणा ईरानी पर फिल्माया गया था। अपनी धुन और संगीत के कारण यह गाना उस दौर में काफी लोकप्रिय हुआ और आज भी इसे याद किया जाता है।

    मामला तब चर्चा में आया, जब अमेरिकी रैपर और प्रोड्यूसर DJ Quik ने इस गाने के संगीत और बीट्स का इस्तेमाल एक अमेरिकी गाने में किया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अमेरिकी सिंगर Truth Hurts के लिए “Addictive” नाम का गाना तैयार किया था। इस गाने में “थोड़ा रेशम लगता है” की धुन और संगीत के हिस्सों का इस्तेमाल किया गया था।

    “Addictive” गाना अमेरिका में काफी लोकप्रिय हुआ और बिलबोर्ड चार्ट के टॉप 10 में जगह बनाने में सफल रहा। यह गाना चार्ट पर नौवें स्थान तक पहुंचा था। हालांकि, इस गाने के निर्माण में भारतीय गाने के इस्तेमाल को लेकर अनुमति नहीं लिए जाने का विवाद बाद में सामने आया।

    जब भारतीय म्यूजिक कंपनी को इस मामले की जानकारी मिली, तो अमेरिकी म्यूजिक लेबल से जुड़े पक्षों के खिलाफ कॉपीराइट को लेकर कानूनी कार्रवाई की गई। मामले में 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के हर्जाने का दावा किए जाने की बात सामने आई। इसके साथ ही गाने की बिक्री और आगे होने वाली बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी की गई थी।

    इस विवाद ने भारतीय संगीत की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और कॉपीराइट अधिकारों को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी। लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड किया गया “थोड़ा रेशम लगता है” भारत में पहले ही लोकप्रिय था, लेकिन उसके संगीत के विदेशी इस्तेमाल के बाद यह गाना एक अलग वजह से भी सुर्खियों में आ गया।

    दिलचस्प बात यह है कि इस धुन से जुड़ा संगीत बाद में भारत में भी दोबारा इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी गाने के बाद संगीतकार हैरी आनंद ने इसी विदेशी धुन और स्टाइल से प्रेरित होकर “कलियों का चमन” तैयार किया। यह गाना भी भारत में काफी लोकप्रिय हुआ।

    इस तरह 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘ज्योति’ का “थोड़ा रेशम लगता है” कई दशक बाद अंतरराष्ट्रीय संगीत विवाद का हिस्सा बना। लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड इस गाने की धुन का इस्तेमाल अमेरिकी गाने में किया गया, जिसके बाद कॉपीराइट को लेकर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हुआ। गाने की लोकप्रियता और उससे जुड़े विवाद ने इसे भारतीय संगीत के उन चर्चित उदाहरणों में शामिल कर दिया, जिनकी गूंज देश से बाहर तक पहुंची।

  • गुजरात में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पर विवाद, परेश रावल बोले- गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है, हर राज्य में हों आयोजन

    गुजरात में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पर विवाद, परेश रावल बोले- गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है, हर राज्य में हों आयोजन

    नई दिल्ली । गुजरात में हो रहे 72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ समारोह को लेकर चल रहे विवाद पर एक्टर परेश रावल ने रिएक्टर किया है। 72 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ दिल्ली से बाहर आयोजित हो रहा है। इस साल 72वां ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ दिल्ली की जगह गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में आयोजित होगा। यह अवॉर्ड शो 22 सितंबर, 2026 को आयोजित किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पहली बार ऐसा होगा जब यह अवॉर्ड शो दिल्ली से बाहर आयोजित किया जाएगा। ऐसे में गुजरात में हो रहे 72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ समारोह को लेकर विवाद शुरू हो गया है।

    गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है?

    72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ समारोह को लेकर चल रहे विवाद पर परेश रावल ने अपना रिएक्शन दिया। उनसे पूछा गया कि पहली बार ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ दिल्ली से बाहर गुजरात में हो रहा है, इस पर आप क्या कहेंगे। इस सवाल पर परेश रावल ने कहा, ‘गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है? ये भी हमारे ही देश का हिस्सा है। गुजरात में ये आयोजन क्यों नहीं होने चाहिए? गुजरात में भी आयोजन होने चाहिए…मैं तो ये कहता हूं कि ऐसे आयोजन हर राज्य में होने चाहिए। इसमें कोई बुरी बात नहीं है।’

    उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने की आलोचना

    शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने 72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ के गुजरात में आयोजन करने के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार दिल्ली और राष्ट्रीय पुरस्कारों के महत्व को कम कर रही है। संजय राउत ने इसे राजनीतिक एजेंडा बताते हुए कलाकारों से इस समारोह का बहिष्कार करने तक की अपील की है।

    पहली बार कब और कहां शुरू हुआ था ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’

    पहली बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की शुरुआत 1954 में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई थी। उस समय इन्हें ‘राज्य फिल्म पुरस्कार’ (State Awards) कहा जाता था। पहले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में वर्ष 1953 में रिलीज हुई फिल्मों को सम्मानित किया गया था। पहली बार सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’ (Shyamchi Aai) को मिला था।

    इस बार किसे मिलेगा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार?

    72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ की लिस्ट सामने आ चुकी है। इस बार रणदीप हुड्डा की फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ को ‘बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर’ का अवॉर्ड दिया जाएगा। इस फिल्म में रणदीप हुड्डा की एक्टिंग की जमकर तारीफ हुई है। इसके अलावा यामी गौतम स्टारर मूवी ‘आर्टिकल 370’ को साल 2024 की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिलेगा। वहीं, राजकुमार राव की ‘श्रीकांत’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिलेगा।

    साथ ही साउथ एक्टर ममूटी की ‘ब्रह्मयुगम’ और कार्तिक आर्यन की मूवी ‘चंदू चैंपियन’ फिल्म के लिए ‘बेस्ट एक्टर इन ए लीडिंग रोल’ का पुरस्कार साझा करेंगे। ममूटी को चौथी बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

  • रामायण के हजारों करोड़ के बजट के बीच हनुमान अंश का कमाल महज 2 करोड़ में बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास

    रामायण के हजारों करोड़ के बजट के बीच हनुमान अंश का कमाल महज 2 करोड़ में बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में बड़े बजट की फिल्मों को अक्सर बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता की गारंटी माना जाता है। करोड़ों रुपये का बजट बड़े सितारे भव्य सेट और जबरदस्त प्रचार किसी फिल्म को रिलीज से पहले ही चर्चा में ला देते हैं। लेकिन फिल्म हनुमान अंश ने इस सोच को काफी हद तक चुनौती दे दी है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने अपनी कहानी और दर्शकों की पसंद के दम पर ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
    नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित यह फिल्म शुरुआत में बेहद सीमित स्तर पर रिलीज हुई थी। शुरुआती दिनों में इसकी कमाई भी बहुत ज्यादा नहीं थी लेकिन धीरे धीरे दर्शकों के बीच फिल्म की चर्चा बढ़ती गई। पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ ने इसकी रफ्तार बदल दी और सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ने लगी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म ने 35 दिनों में करीब 193 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया था। इसके बाद 36वें दिन भी फिल्म की कमाई का सिलसिला जारी रहा और घरेलू बॉक्स ऑफिस पर यह 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के ग्रॉस आंकड़े को पार कर गई। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म के 36वें दिन भी बड़ी संख्या में शो चल रहे थे।

    फिल्म की सबसे खास बात इसका बेहद कम बजट है। जहां बड़े प्रोजेक्ट्स में हजारों करोड़ रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं वहीं हनुमान अंश करीब 2 करोड़ रुपये में तैयार हुई। इसके बावजूद फिल्म का कलेक्शन उसके बजट से कई गुना ज्यादा पहुंच गया। यही वजह है कि अब इसकी तुलना बड़े बजट की आने वाली फिल्मों से भी की जा रही है।

    हनुमान अंश की सफलता सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं है। फिल्म की शुरुआत धीमी होने के बावजूद दर्शकों ने इसे धीरे धीरे अपनाया। फिल्म को बड़े स्टार सिस्टम का सहारा नहीं मिला था और न ही शुरुआत में बड़े पैमाने पर प्रचार हुआ था। इसके बावजूद दर्शकों की प्रतिक्रिया ने फिल्म को आगे बढ़ाया।

    फिल्म की सफलता में इसकी आध्यात्मिक कहानी को भी अहम माना जा रहा है। नीम करोली बाबा से जुड़ी आस्था और उनके जीवन से प्रेरित प्रसंगों ने खासतौर पर श्रद्धालुओं और आध्यात्मिक विषयों में रुचि रखने वाले दर्शकों को आकर्षित किया। फिल्म की चर्चा सोशल मीडिया और दर्शकों के बीच बढ़ती गई और यही चर्चा इसके लिए सबसे बड़ा प्रचार बन गई।

    अब इस फिल्म की सफलता को बड़े बजट वाली फिल्मों के लिए एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर 4000 करोड़ रुपये के भारी भरकम बजट वाली रामायण जैसे बड़े प्रोजेक्ट के सामने हनुमान अंश का उदाहरण यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि क्या बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ बजट ही सबसे बड़ा हथियार है। हालांकि दोनों फिल्मों का विषय पैमाना और निर्माण अलग है इसलिए सीधी तुलना करना सही नहीं होगा।

    फिर भी हनुमान अंश ने यह साबित कर दिया है कि कम बजट में बनी फिल्म भी मजबूत कहानी और दर्शकों के भरोसे के दम पर बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल कर सकती है। फिल्म की अंतरराष्ट्रीय रिलीज भी 11 सितंबर से शुरू हो चुकी है जिससे अब इसकी कमाई और आगे बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।

  • धोनी से लिंकअप ने बदली एक्ट्रेस की जिंदगी रिश्ता टूटा फिर भी पीछा नहीं छोड़ी खबरें राय लक्ष्मी ने बताया क्यों लगी थी इतनी चिढ़

    धोनी से लिंकअप ने बदली एक्ट्रेस की जिंदगी रिश्ता टूटा फिर भी पीछा नहीं छोड़ी खबरें राय लक्ष्मी ने बताया क्यों लगी थी इतनी चिढ़


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल महेंद्र सिंह धोनी का नाम अपने करियर के दौरान कई बार फिल्मी दुनिया की अभिनेत्रियों के साथ जोड़ा गया। इन्हीं में एक नाम साउथ सिनेमा की अभिनेत्री राय लक्ष्मी का भी रहा है। एक दौर में दोनों के रिश्ते की खबरों ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। हालांकि यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला लेकिन इसके खत्म होने के बाद भी राय लक्ष्मी का नाम लंबे समय तक धोनी के साथ जोड़ा जाता रहा। यही बात अभिनेत्री के लिए परेशानी का कारण बन गई थी।

    बताया जाता है कि साल 2009 के आसपास धोनी और राय लक्ष्मी के बीच नजदीकियों की खबरें सामने आई थीं। दोनों के रिश्ते को लेकर मीडिया में खूब चर्चा हुई। उस समय धोनी भारतीय क्रिकेट के बड़े सितारे बन चुके थे और राय लक्ष्मी भी दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही थीं। ऐसे में दोनों का नाम एक साथ जुड़ना स्वाभाविक रूप से लोगों के लिए काफी दिलचस्प खबर बन गया।

    धोनी ने इस रिश्ते को लेकर सार्वजनिक तौर पर ज्यादा कुछ नहीं कहा। दूसरी तरफ राय लक्ष्मी ने साल 2014 में एक इंटरव्यू के दौरान धोनी के साथ अपने रिश्ते की बात स्वीकार की थी। हालांकि समय के साथ दोनों अलग हो गए लेकिन ब्रेकअप के बाद भी जब भी धोनी के पुराने रिश्तों की चर्चा होती तो राय लक्ष्मी का नाम जरूर सामने आ जाता।

    यही सिलसिला धीरे धीरे अभिनेत्री के लिए परेशान करने वाला बन गया। राय लक्ष्मी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि लोगों के लगातार सवालों ने उन्हें इस हद तक परेशान कर दिया था कि उन्हें यह रिश्ता अपने जीवन पर पड़े किसी दाग जैसा महसूस होने लगा था। उनका कहना था कि हैरानी होती थी कि लोग इतने समय बाद भी उस रिश्ते को लेकर अपनी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं।

    राय लक्ष्मी ने यह भी चिंता जाहिर की थी कि भविष्य में जब उनके बच्चे बड़े होंगे और इंटरनेट या न्यूज रिपोर्ट में उनके बारे में ऐसी खबरें पढ़ेंगे तो वह उनसे क्या सवाल करेंगे। अभिनेत्री के लिए सबसे ज्यादा परेशानी की बात यही थी कि रिश्ता खत्म होने के बावजूद उसका जिक्र उनकी जिंदगी से पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

    धोनी से जुड़ी इन खबरों के बीच राय लक्ष्मी की अपनी फिल्मी पहचान भी रही है। उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्मों के अलावा हिंदी फिल्मों में भी काम किया। जूली 2 अर्जुन सिंह आईपीएस बैच 2000 और अकीरा जैसी फिल्मों में वह नजर आईं। इसके अलावा उन्होंने कई टीवी सीरियल्स में भी काम किया।

    राय लक्ष्मी और धोनी की कथित रिलेशनशिप भले ही बहुत पुरानी बात हो चुकी है लेकिन इसका असर लंबे समय तक अभिनेत्री की सार्वजनिक छवि के साथ जुड़ा रहा। एक तरफ धोनी ने इस मामले पर ज्यादा चर्चा नहीं की तो दूसरी तरफ राय लक्ष्मी को बार बार उन्हीं सवालों का सामना करना पड़ा। यही वजह रही कि समय बीतने के साथ वह इस लिंकअप की खबरों से काफी इरिटेट होने लगी थीं। उनके पुराने बयान यह बताते हैं कि किसी सेलिब्रिटी की निजी जिंदगी से जुड़ी खबरें खत्म हो जाने के बाद भी उनकी चर्चा किस तरह लंबे समय तक उसके साथ बनी रह सकती है।

  • धर्मेंद्र की फिल्मों में जब बदले गए सीन तो आगबबूला हुए सनी देओल डायरेक्टर को पीटने तक पहुंचा मामला लेखक ने बताई पर्दे के पीछे की कहानी

    धर्मेंद्र की फिल्मों में जब बदले गए सीन तो आगबबूला हुए सनी देओल डायरेक्टर को पीटने तक पहुंचा मामला लेखक ने बताई पर्दे के पीछे की कहानी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र की जिंदगी और फिल्मी करियर से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों के बीच चर्चा में रहते हैं। अपने लंबे करियर में एक समय ऐसा भी आया था जब धर्मेंद्र ने B और C ग्रेड फिल्मों में काम किया। इस दौर को लेकर अक्सर सवाल उठता रहा है कि आखिर इतने बड़े और सम्मानित अभिनेता को इस तरह की फिल्मों में काम करने की जरूरत क्यों पड़ी। अब नेशनल अवॉर्ड विनर राइटर रणबीर पुष्प ने इस पूरे मामले से जुड़ा एक किस्सा साझा किया है जिसने धर्मेंद्र के उस दौर की एक अलग तस्वीर सामने रख दी है।

    रणबीर पुष्प ने सिद्धार्थ कनन को दिए इंटरव्यू में धर्मेंद्र से जुड़ी कई बातें बताईं। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र बेहद जेंटलमैन अभिनेता थे और इंडस्ट्री में उनकी अपनी एक अलग इज्जत थी। रणबीर के मुताबिक उन्हें इस बात का स्पष्ट कारण नहीं पता कि धर्मेंद्र को B और C ग्रेड फिल्मों में काम क्यों करना पड़ा लेकिन संभव है कि फिल्मों की कहानी जिस तरह उन्हें बताई गई हो शूटिंग के दौरान चीजें वैसी नहीं रही हों।

    रणबीर ने बताया कि कई बार कलाकार के सामने कहानी और सीन को एक तरीके से पेश किया जाता है लेकिन फिल्म बनते समय उसमें बदलाव कर दिए जाते हैं। उनके मुताबिक ऐसा भी संभव है कि धर्मेंद्र को कुछ सीन सामान्य एक्शन या कहानी का हिस्सा बताए गए हों लेकिन बाद में उन्हें अलग अंदाज में फिल्माया गया हो। डायरेक्टर ने कहानी को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया हो और शूटिंग के दौरान तस्वीर कुछ और निकली हो।

    इसी सिलसिले में उन्होंने निर्देशक कांति शाह का जिक्र किया। रणबीर के मुताबिक कांति शाह ने एक्शन वाले सीन को रोमांटिक सीन में बदल दिया था। जब इस बदलाव की जानकारी सनी देओल को मिली तो वह काफी नाराज हुए। रणबीर ने दावा किया कि सनी देओल ने कांति शाह के साथ मारपीट भी की थी। इसके बाद सनी ने अपने पिता धर्मेंद्र से कहा था कि वह ऐसी फिल्मों में काम नहीं करेंगे।

    धर्मेंद्र के उस दौर को लेकर रणबीर ने यह भी कहा कि कभी कभी इंसान भरोसे या भोलेपन में भी ऐसे फैसले कर लेता है। संभव है कि किसी पुराने परिचित या फिल्म से जुड़े व्यक्ति ने धर्मेंद्र से कुछ सीन करने के लिए कहा हो और उन्होंने रिश्तों या भरोसे के चलते हामी भर दी हो। रणबीर ने धर्मेंद्र के व्यक्तित्व का जिक्र करते हुए कहा कि वह हमेशा रिश्ते निभाने वाले इंसान रहे हैं।

    कांति शाह बॉलीवुड में निर्देशक निर्माता और स्क्रीनराइटर के तौर पर जाने जाते हैं। उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती और धर्मेंद्र जैसे कलाकारों के साथ भी काम किया। उनके नाम मार धाड़ बसंती तांगेवाली मुन्नी बाई जरूरत और दरवाजा जैसी फिल्में जुड़ी हैं। B ग्रेड फिल्मों के दौर में कांति शाह का नाम भी काफी चर्चा में रहा।

    धर्मेंद्र ने अपने करियर में एक लंबा सफर तय किया और कई यादगार फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। ऐसे में उनके B और C ग्रेड फिल्मों वाले दौर की कहानी हमेशा लोगों की दिलचस्पी का विषय रही है। रणबीर पुष्प द्वारा साझा किया गया यह किस्सा इसी पुराने दौर से जुड़ी एक ऐसी परत सामने लाता है जिसमें फिल्म की कहानी और शूटिंग के दौरान हुए बदलावों को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं। हालांकि इस पूरे मामले में सामने आई बातें रणबीर पुष्प द्वारा साझा किए गए अनुभव और दावों पर आधारित हैं।

  • ‘हनुमान अंश’ के सेट पर आध्यात्मिक माहौल, चंदन आनंद ने बताया बंदरों के पहुंचने से लेकर शूटिंग के अनुभव का दिलचस्प किस्सा

    ‘हनुमान अंश’ के सेट पर आध्यात्मिक माहौल, चंदन आनंद ने बताया बंदरों के पहुंचने से लेकर शूटिंग के अनुभव का दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली ।
    फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों चर्चा में है और इसकी कहानी बाबा नीम करौली के जीवन पर आधारित है। फिल्म में अभिनेता चंदन आनंद ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने फिल्म की शूटिंग के दौरान के अपने अनुभव साझा करते हुए सेट के माहौल, अपनी भूमिका और वहां हुई कुछ ऐसी घटनाओं के बारे में बताया, जिन्हें उन्होंने चमत्कार जैसा अनुभव माना।

    चंदन आनंद के मुताबिक, वह फिल्म की शूटिंग के लिए शुरुआत में केवल तीन दिनों के लिए गए थे, जबकि उनकी शूटिंग सिर्फ एक दिन की थी। उन्हें नासिर अली नाम के सूबेदार की भूमिका के लिए बुलाया गया था। हालांकि अगले दिन निर्देशक ने उनसे दो-तीन दिन और रुकने को कहा।

    निर्देशक ने उनसे नरेटर यानी कथावाचक की भूमिका निभाने को लेकर भी बात की। चंदन आनंद के लिए यह जिम्मेदारी खास थी, क्योंकि इस भूमिका में फिल्म की पूरी कहानी को शब्दों के जरिए बताना था और बाबा नीम करौली के बारे में दर्शकों को जानकारी देनी थी। उन्होंने इसे अपने लिए आशीर्वाद जैसी बात बताया।

    अभिनेता ने बताया कि उन्होंने चित्रकूट में रुकने का फैसला किया और वहां बिताए दिनों का अनुभव उनके लिए अलग रहा। उनके अनुसार, फिल्म के सेट पर सुबह से ही एक विशेष तरह का माहौल रहता था। पूरी कास्ट सुबह उठती थी और सेट पर पूजा-पाठ किया जाता था।

    चंदन आनंद ने बताया कि उन्हें शुरुआत में यह जानकारी नहीं थी कि शूटिंग के दौरान सात्विक भोजन करना है। उन्हें एक अच्छे गेस्ट हाउस में ठहराया गया था। शाम के समय भी हनुमान जी के भजन-कीर्तन होते थे और हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता था।

    अभिनेता ने कहा कि उन्होंने पहले इस तरह का माहौल नहीं देखा था, इसलिए उन्हें खुद को उसके अनुरूप ढालने में थोड़ा समय लगा। शूटिंग से जुड़े ड्राइवर पूरी कास्ट के लिए खाना बनाकर खिलाते थे। उनके मुताबिक, जब पूरी टीम साथ मिलकर काम करती है तो सभी लोग एक-दूसरे के करीब आ जाते हैं।

    चंदन आनंद ने यह भी बताया कि वह वहां कुछ और दिन रुकना चाहते थे, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया। शूटिंग के दौरान चमत्कार से जुड़े अनुभव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि उन्होंने कास्ट के लोगों से सुना था कि वहां अचानक बंदरों का एक समूह पहुंच गया था।

    उनके मुताबिक, इससे पहले उस जगह पर बंदर दिखाई नहीं दिए थे। उन्होंने शूटिंग के लिए लोकेशन से जुड़ी दिक्कतों का भी जिक्र किया। शुरुआत में लोकेशन की अनुमति नहीं मिल रही थी या उपयुक्त लोकेशन उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। इसके बाद अचानक लोकेशन मिल जाना भी उन्हें किसी चमत्कार से कम नहीं लगा।

    चंदन आनंद ने अपने खानपान से जुड़ा एक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें पहले से यह जानकारी नहीं थी कि धूम्रपान और शराब से बचना है। वह कभी-कभी खुशी के मौके पर थोड़ा ड्रिंक कर लेते हैं। होटल में उन्होंने थोड़ा ड्रिंक लिया, लेकिन कुछ देर बाद ही उनके पेट में अचानक दर्द शुरू हो गया।

    अभिनेता ने कहा कि शूटिंग के दौरान उनके छह दिन चमत्कार जैसे रहे। इन दिनों उन्होंने मुख्य रूप से दाल और खिचड़ी खाई। उनके मुताबिक, फिल्म के सेट पर मिला आध्यात्मिक और सात्विक माहौल उनके लिए एक अलग अनुभव रहा।

  • जौहर विवाद पर कुमार विश्वास ने स्वरा भास्कर को घेरा, कहा- फिल्म या कहानी राजस्थान के गौरवशाली इतिहास को मिटा नहीं सकती

    जौहर विवाद पर कुमार विश्वास ने स्वरा भास्कर को घेरा, कहा- फिल्म या कहानी राजस्थान के गौरवशाली इतिहास को मिटा नहीं सकती

    नई दिल्ली । फिल्म पद्मावत में जौहर के दृश्य को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर की पुरानी टिप्पणी पर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। इसी विवाद के बीच कवि कुमार विश्वास ने स्वरा भास्कर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना ऐसे लोगों की आलोचना की, जो उनके अनुसार राजस्थान के इतिहास और संस्कृति को पर्याप्त रूप से जाने बिना उसकी व्याख्या करते हैं।

    स्वरा भास्कर ने संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत में रानी पद्मावती और उनके साथ जौहर करने वाली महिलाओं के संदर्भ में टिप्पणी की थी। उन्होंने जौहर के प्रसंग को बदसलूकी से जोड़ते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी थी। इसी बयान को लेकर राजपूत समाज और करणी सेना की ओर से विरोध की बात सामने आई है।

    विवाद के बीच कुमार विश्वास ने राजस्थान के इतिहास में दर्ज बलिदानों और गौरव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी फिल्म, कहानी या कुछ घंटों के कंटेंट के जरिए राजस्थान के इतिहास में दर्ज कुर्बानियों और गौरव को मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने लोगों से अपील की कि केवल किसी की टिप्पणी पर नाराज होने के बजाय आने वाली पीढ़ियों को सही इतिहास बताना ज्यादा जरूरी है।

    कुमार विश्वास ने राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत और वीरता का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान की मिट्टी से जुड़ी कुर्बानियों का महत्व किसी फिल्म या कहानी से प्रभावित नहीं हो सकता। उन्होंने इस संदर्भ में राजस्थान के गौरव और बलिदान को याद किया और कहा कि इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।

    उन्होंने लोगों को यह भी समझाने की कोशिश की कि किसी व्यक्ति की टिप्पणी या किसी रचनात्मक प्रस्तुति पर लगातार प्रतिक्रिया देने के बजाय अपनी अगली पीढ़ी को इतिहास से परिचित कराना अधिक महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, यदि लोग स्वयं ऐतिहासिक प्रसंगों को अपनी संतानों तक नहीं पहुंचाएंगे, तो भविष्य में इतिहास की समझ कमजोर हो सकती है।

    कुमार विश्वास ने ऐसे लोगों पर भी टिप्पणी की, जो उनके अनुसार देश के इतिहास और संस्कृति की व्याख्या करते हैं, लेकिन उन्होंने इतिहास को पर्याप्त रूप से नहीं पढ़ा या समझा है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से नाराज होने के बजाय अपनी पीढ़ी को राजस्थान के इतिहास और उसकी परंपराओं के बारे में बताना चाहिए।

    उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि वह खुद अपने परिवार को ऐतिहासिक स्थानों पर लेकर जाते हैं और बच्चों को वहां के इतिहास के बारे में बताते हैं। उन्होंने हल्दीघाटी और वृंदावन जैसे स्थानों का उल्लेख किया और कहा कि वह अपने परिवार के साथ ऐसी जगहों पर जाकर इतिहास समझने की कोशिश करते हैं।

    कुमार विश्वास ने महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी के इतिहास का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी निजता और सम्मान की लड़ाई को समझना चाहता है, तो उसे कुंभलगढ़ के उस छोटे से कक्ष को देखना चाहिए, जहां महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था।

    इस पूरे विवाद के बीच कुमार विश्वास का जोर इस बात पर रहा कि राजस्थान के इतिहास, बलिदान और गौरव को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी फिल्म, कहानी या टिप्पणी से राजस्थान के इतिहास की ऐतिहासिक विरासत प्रभावित नहीं हो सकती।