Category: Entertainment

  • जब मुश्किलों में घिरा था परिवार, तब लोगों ने उड़ाया मजाक; त्रिशला दत्त ने सुनाया दर्दभरा किस्सा

    जब मुश्किलों में घिरा था परिवार, तब लोगों ने उड़ाया मजाक; त्रिशला दत्त ने सुनाया दर्दभरा किस्सा


    नई दिल्ली । साल 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के दौरान संजय दत्त पर एके 56 राइफल और 9 एमएम पिस्टल समेत प्रतिबंधित हथियारों को रखने का आरोप लगा था। इसके लिए संजय दत्त को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। जब संजय दत्त इन परेशानियों से गुजर रहे थे, तब उनकी बेटी त्रिशला महज 5 साल की थीं। अब त्रिशला ने उस बुरे वक्त को याद करते हुए बताया कि कैसे उस वक्त उनका परिवार परेशानी झेल रहा था।

    जब जेल गए थे संजय दत्त

    इनसाइड थॉट्स आउट लाउड से खास बातचीत में 38 साल की त्रिशला ने बताया, “बहुत कम उम्र में ही उन्हें नशे की लत से जूझना पड़ा, उससे बाहर आना, फिर जेल जाना, वहां लगभग तीन साल रहना और फिर वहां से बाहर आना। मैं सोच भी नहीं सकती कि वो क्या महसूस कर रहे होंगे।”
    त्रिशला बोलीं- कभी अपने पिता से किसी भी चीज के लिए नाराज नहीं हुई
    त्रिशला ने इस बारे में भी बात की कि जब पूरा देश उनके परिवार के संघर्षों को देख रहा था, तब उस स्थिति से डील करना उनके लिए कितना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कहा, वो बहुत मुश्किल था क्योंकि मैं उनसे बात नहीं कर पा रही थी क्योंकि वो किसी चीज से गुजर रहे थे, और अगर मैं उन्हें कॉल कर भी रही थी, उनके आसपास लोग होते थे।
    उस वक्त उनसे इस बारे में बात करना भी मुश्किल हो रहा था। लेकिन जब दुनिया आपके परिवार को बिखरता हुआ देखती है, तो वो आसान नहीं होता है। मुझे लगता है बहुत सारे लोग मुझे इसलिए देखते थे कि मेरा रिएक्शन क्या होगा। मेरा रिएक्शन था कि मुझे अपने पिता के लिए स्ट्रॉन्ग बनना है। मैं कभी भी अपने पिता से गुस्सा नहीं हुई, किसी भी चीज के लिए।

    मेरे पिता के खराब वक्त में लोग मना रहे थे जश्न

    त्रिशला ने बताया कि कैसे बहुत से लोग उस वक्त उनके पिता के पतन का जश्न मना रहे थे। उन्होंने कहा, “मैंने सब देखा है। सब पढ़ा है। बहुत लोग जश्न मना रहे थे। वो वहां वापस जा रहे थे क्योंकि लोगों की अपनी राय थी।”
    त्रिशला पर गर्व करते हैं संजय दत्त
    त्रिशला ने इस बात को माना कि इतनी कम उम्र में इतना ट्रॉमा झेलने के बाद, उन्हें बुली भी किया गया। उन्होंने कहा कि उससे निकलने के लिए उन्हें सालों लग गए। त्रिशला ने कहा कि वो कह सकती हैं कि उनके पिता को आज उनमें बदलाव नजर आता है।
    त्रिशला ने कहा कि कभी उनके पिता ने सीधेतौर पर तो ये नहीं कहा कि वो मुझमें बदलाव देख सकते हैं, लेकिन वो कहते हैं कि उन्हें मुझपर गर्व है। मुझे गर्व है कि तुम इतना आगे आ गई हो। बस ध्यान रखो कि अपने काम पर फोकस करो, अपना फोकस मत खो। वो कहते हैं कि अगर मुझे जरूरत है तो वो हमेशा मेरे साथ हैं।इतने संघर्षों के बीच त्रिशला ने जो अपने पिता से सीखा वो है जरूरतमंदों की मदद करना। अगर कोई मुसीबत में है, तो उसकी मदद करो। किसी को नीचा मत दिखाओ और कभी मत सोचो की आप दूसरों से बेहतर हैं।
  • सगाई के दो साल बाद मौत ने छीना प्यार, अकेलेपन में गुजर गई दिग्गज एक्ट्रेस की पूरी जिंदगी

    सगाई के दो साल बाद मौत ने छीना प्यार, अकेलेपन में गुजर गई दिग्गज एक्ट्रेस की पूरी जिंदगी

    नई दिल्ली ।  पर्दे पर प्यार भरे और रोमांटिक रोल निभाने वाले स्टार को असल जिंदगी में भी ये सारी खुशियां नसीब हों ये जरूरी नहीं। कई बार किस्मत ऐसा खेल खेलती है सपने एक पल में चकनाचूर हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही बॉलीवुड की एक टॉप एक्ट्रेस के साथ भी हुआ है। एक तरफ वो शादी के सपने सजा रही थी और दूसरी तरफ किस्मत ने उसके साथ ऐसा खेल रचा कि बिना शादी के ही उसे ताउम्र विधवा की जिंदगी जीनी पड़ी। आइए जानते है कौन है वो एक्ट्रेस?

    अपने जमाने की सुपरस्टार थी ये एक्ट्रेस

    हम बात कर रहे हैं 1960 और 1970 के दशक तक बॉलीवुड पर राज करने वाली दिग्गज अभिनेत्री नंदा की। नंदा का असली नाम नंदिनी कर्नाटकी था। नंदा ने लगभग 30 वर्षों तक बॉलीवुड पर राज किया और 70 से ज्यादा फिल्मों में अपने बेहतरीन अभिनय का प्रदर्शन किया। अपने करियर के शुरुआती दौर में कई हिट फिल्मों में काम करने के साथ ही उन्होंने शशि कपूर, राजेश खन्ना, देवानंद, जितेंद्र, धर्मेंद्र जैसे एक्टर्स संग स्क्रीन शेयर किया। नंदा उस दौर की सुपरस्टार रही हैं। यही नहीं, नंदा उस जमाने की हाई पेड एक्ट्रेसेस में गिनी जाती थीं।
    शादीशुदा डायरेक्टर से हुआ प्यार
    नंदा का फिल्मी करियर काफी सुपरहिट रहा, लेकिन पर्सनल लाइफ में उन्होंने काफी दर्द झेले। 70 के दशक में नंदा को शादीशुदा डायरेक्टर और प्रोड्यूसर से प्यार हो गया। ये कोई और नहीं, बल्कि मनमोहन देसाई थे। मनमोहन की शादी जीवनप्रभा संग हुई थी, लेकिन अप्रैल 1979 में उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। दोनों का एक बेटा भी है केतन देसाई जो फिल्मों में आए। केतन ने शम्मी कपूर और गीता बाली की बेटी कंचन कपूर संग शादी की।
    वहीदा रहमान बनीं थीं नंदा-मनमोहन के बीच की कड़ी
    पिंकविला को दिए इंटरव्यू में एक बार नंदा के भाई जयप्रकाश ने नंदा और मनमोहन की लव स्टोरी को लेकर बातचीत की थी। उन्होंने बताया था, ‘दोनों की लव स्टोरी में एक्ट्रेस वहीदा रहमान की काफी अहम भूमिका थी। एक बार दोनों को मिलवाने के लिए वहीदा ने एक डिनर प्लान किया। वहीं, उन्होंने डिनर के बीच में ही दीदी और मनमोहन जी को अकेला छोड़ दिया ताकि फिल्ममेकर अपनी दिल की बात नंदा से कह पाए और हुआ भी कुछ ऐसा ही। उसी डिनर नाइट पर डायरेक्टर ने नंदा से कहा कि वो उनसे शादी करना चाहते हैं।’
    नंदा के लिए आया था रिश्ता
    इंटरव्यू में जयप्रकाश ने आगे बताया कि नंदा के लिए बेहद सिंपल तरीके से शादी का प्रपोजल आया था। फिर उनकी दीदी ने सोच विचार किया। नंदा ने इसके बाद एक दिन वहीदा रहमान को फोन किया और नंदा ने इस रिश्ते के लिए हां कह दिया।

    बालकनी से गिरकर हुई मौत होने मंगेतर की मौत

    नंदा के हां करते ही मनमोहन देसाई संग उनकी सगाई हो गई। दोनों की सगाई साल 1992 में हुई थी और वो भी काफी प्राइवेट तरीके से। मगर उन्होंने सोचा भी नहीं था कि उनकी जिंदगी में पहाड़ टूटने वाला है। नंदा एक तरफ अपनी शादी को लेकर तरह-तरह के सपने संजोए थीं, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। 1994 में मनमोहन देसाई की एक दुखद दुर्घटना में मृत्यु हो गई। वे अपने घर की बालकनी से गिर गए थे। इस हादसे ने नंदा को पूरी तरह से तोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने कभी शादी नहीं की और जीवन भर अकेली रही और विधवा की तरह जिंदगी बिताई। उन्होंने मनमोहन के निधन के बाद उन्होंने ताउम्र सफेद कपड़े ही पहने। क्योंकि वो मनमोहन को अपना पति मान चुकी थीं।
  • Cannes में ऐश्वर्या का जलवा, ब्लू आउटफिट में दिखीं बेहद स्टाइलिश

    Cannes में ऐश्वर्या का जलवा, ब्लू आउटफिट में दिखीं बेहद स्टाइलिश

    नई दिल्ली। कान्स फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival) 2026 में एक बार फिर भारतीय सिनेमा की ग्लोबल पहचान बनीं अभिनेत्री Aishwarya Rai Bachchan ने अपने स्टाइल और ग्रेस से सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रेड कारपेट पर उनका पहला लुक सामने आते ही सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो गए।

    इस बार ऐश्वर्या राय मिडनाइट ब्लू स्कल्प्टेड गाउन में नजर आईं, जिसे मशहूर डिजाइनर अमित अग्रवाल ने तैयार किया है। हैवी सीक्वेंस और डिटेलिंग से सजा यह गाउन न केवल बेहद आकर्षक था, बल्कि इसमें ऐश्वर्या की क्लासिक ग्लैमरस अपील भी साफ झलक रही थी। गाउन के साथ उन्होंने उसी शेड का दुपट्टा कैरी किया, जिससे उनका लुक और भी रॉयल नजर आया।

    रेड कारपेट पर ऐश्वर्या ने अपने सिग्नेचर स्टाइल में कैमरों के सामने पोज दिए। मुस्कुराते हुए पैपाराज़ी की ओर हाथ हिलाना, फ्लाइंग किस देना और हार्ट शेप बनाकर फैंस का अभिवादन करना उनके लुक को और भी खास बना रहा था। उनकी ग्लोइंग स्किन, साइड-पार्टेड कर्ली हेयर और डायमंड ज्वेलरी ने उनके ओवरऑल लुक में चार चांद लगा दिए।

    हालांकि इस बार उनके लुक को लेकर एक और बात चर्चा में रही—उनकी फिटनेस। फैंस और सोशल मीडिया यूजर्स ने नोटिस किया कि ऐश्वर्या पहले के मुकाबले ज्यादा स्लिम नजर आ रही हैं। इसके बावजूद उनकी ग्रेस और स्क्रीन प्रेजेंस में कोई कमी नहीं दिखी, बल्कि उनके चाहने वालों ने इसे उनकी खूबसूरती का नया रूप बताया।

    कान्स में यह पहला मौका नहीं है जब ऐश्वर्या ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर रिप्रेजेंट किया हो। वे साल 2002 से लगातार इस प्रतिष्ठित इवेंट का हिस्सा रही हैं और हर बार अपने लुक्स के कारण सुर्खियों में रहती हैं। उनका हर रेड कारपेट अपीयरेंस फैशन और स्टाइल की दुनिया में एक नया ट्रेंड सेट करता है।

    इस बार भी उनका यह अवतार साबित करता है कि समय के साथ उनकी स्टार अपील और ग्लैमर में कोई कमी नहीं आई है। फैन्स का कहना है कि ऐश्वर्या जैसी उपस्थिति बहुत कम सेलेब्रिटीज में देखने को मिलती है, जो ग्लोबल इवेंट में भारत का प्रतिनिधित्व इतनी मजबूती और गरिमा के साथ करती हैं।

    ऐश्वर्या इस बार भी अपनी बेटी Aaradhya Bachchan के साथ कान्स पहुंची हैं, जो अक्सर उनके साथ इस अंतरराष्ट्रीय यात्रा का हिस्सा रहती हैं। मां-बेटी की यह जोड़ी भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

    कुल मिलाकर, कान्स 2026 में ऐश्वर्या राय बच्चन का यह लुक न सिर्फ फैशन वर्ल्ड के लिए चर्चा का विषय बना है, बल्कि एक बार फिर उन्होंने साबित किया है कि वह भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली ग्लोबल आइकन में से एक हैं।

  • सैफ से पहले किस नेता पर आया था करीना का दिल? पुराना इंटरव्यू बना सुर्खी

    सैफ से पहले किस नेता पर आया था करीना का दिल? पुराना इंटरव्यू बना सुर्खी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री Kareena Kapoor Khan एक बार फिर अपने पुराने बयान को लेकर सुर्खियों में आ गई हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक पुराना इंटरव्यू तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने सैफ अली खान से शादी से पहले एक राजनीतिक शख्सियत को लेकर दिलचस्प बात कही थी।

    यह मामला उस समय का है जब करीना कपूर अपने करियर के शुरुआती दौर में थीं और चर्चित चैट शो ‘Rendezvous with Simi Garewal’ में पहुंची थीं। शो के दौरान होस्ट सिमी ग्रेवाल ने उनसे सवाल किया था कि अगर उन्हें किसी एक शख्स को डेट करने का मौका मिले तो वह कौन होगा।

    इस सवाल पर करीना कपूर थोड़ी हिचकिचाईं और उन्होंने कहा था कि वह जवाब देने को लेकर असहज महसूस कर रही हैं क्योंकि यह “थोड़ा कंट्रोवर्शियल” हो सकता है। इसके बाद उन्होंने जिस नाम का जिक्र किया, वह उस समय देश की राजनीति में बेहद चर्चित नाम था—Rahul Gandhi।

    करीना कपूर ने बातचीत के दौरान कहा था कि वह राहुल गांधी को जानना चाहेंगी क्योंकि वह उन्हें दिलचस्प व्यक्ति लगते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि फिल्म और राजनीतिक परिवार से होने के कारण दोनों के बीच बातचीत रोचक हो सकती है। यह बयान उस समय काफी चर्चा में आ गया था और मीडिया से लेकर आम लोगों तक में इस पर बहस होने लगी थी।

    हालांकि, यह बयान लंबे समय तक कायम नहीं रहा। जैसे-जैसे करीना कपूर का करियर आगे बढ़ा और 2009 में उनकी फिल्म ‘ओमकारा’ रिलीज हुई, उन्होंने इस बयान से दूरी बनानी शुरू कर दी। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा था कि वह राहुल गांधी को डेट करना चाहती थीं।
    हालांकि, यह बयान लंबे समय तक कायम नहीं रहा। जैसे-जैसे करीना कपूर का करियर आगे बढ़ा और 2009 में उनकी फिल्म ‘ओमकारा’ रिलीज हुई, उन्होंने इस बयान से दूरी बनानी शुरू कर दी। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा था कि वह राहुल गांधी को डेट करना चाहती थीं।

    करीना कपूर ने आगे कहा था कि यह उस समय की एक हल्की-फुल्की बातचीत थी, जिसे जरूरत से ज्यादा गंभीरता से लिया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब यह पुरानी बात है और वह इसे आगे बढ़ाना नहीं चाहतीं।

    बाद में जब करीना कपूर का नाम अभिनेता Saif Ali Khan के साथ जुड़ा, तो उनकी निजी जिंदगी लगातार मीडिया की सुर्खियों में रही। दोनों ने बाद में शादी कर ली और बॉलीवुड के चर्चित कपल्स में शामिल हो गए।

    आज भी जब यह पुराना वीडियो सामने आता है, तो सोशल मीडिया पर लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देते हैं। कुछ इसे मजाकिया बयान मानते हैं तो कुछ इसे एक पुराने दौर की बेबाकी के रूप में देखते हैं।

    कुल मिलाकर, यह मामला दिखाता है कि सेलेब्रिटी के पुराने बयान समय के साथ किस तरह नए संदर्भ में वायरल होकर चर्चा का विषय बन जाते हैं।

  • राम गोपाल वर्मा का अजीब बयान, माइकल जैक्सन से नफरत के बावजूद दिल आज भी भारी

    राम गोपाल वर्मा का अजीब बयान, माइकल जैक्सन से नफरत के बावजूद दिल आज भी भारी

    नई दिल्ली । फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा एक बार फिर अपने बेबाक और अप्रत्याशित बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने विश्वविख्यात पॉप स्टार माइकल जैक्सन को लेकर ऐसा भावुक और विरोधाभासी बयान दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। वर्मा ने अपने एक पोस्ट में न केवल माइकल जैक्सन के प्रति अपने गहरे जुड़ाव का जिक्र किया, बल्कि यह भी कहा कि वे उनसे ‘नफरत’ करते हैं, हालांकि यह भावना उनके अत्यंत सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ी हुई है।

    निर्देशक ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि माइकल जैक्सन के काम ने उनके जीवन और सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। उन्होंने कहा कि 1984 में विजयवाड़ा में एक छोटे से अंधेरे वीडियो पार्लर में पहली बार उन्होंने माइकल का प्रसिद्ध म्यूजिक वीडियो देखा था। उस अनुभव को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वह केवल एक गाना या प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि एक असाधारण ऊर्जा और कला का विस्फोट था, जिसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उनके अनुसार माइकल की स्टेज प्रेजेंस, डांस और संगीत की शक्ति इतनी प्रभावशाली थी कि वह किसी अलौकिक अनुभव जैसी लगती थी।

    राम गोपाल वर्मा ने यह भी कहा कि माइकल जैक्सन के कई गाने और वीडियो उनके लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। “बीट इट”, “बिली जीन”, “स्मूथ क्रिमिनल” और “ब्लैक ऑर व्हाइट” जैसे गीत उनके लिए केवल संगीत नहीं बल्कि एक तरह की कला की पाठशाला जैसे थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अपने फिल्मी करियर में उन्होंने कई बार माइकल की शैली और प्रस्तुति से प्रेरणा ली।

    हालांकि, उनके बयान का सबसे भावुक हिस्सा वह था जब उन्होंने माइकल जैक्सन की मृत्यु को याद किया। उन्होंने बताया कि 25 जून 2009 की सुबह जब उन्होंने समाचार देखा कि माइकल अब नहीं रहे, तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। यह खबर उनके लिए बेहद सदमे वाली थी और उन्होंने इसे एक बुरे सपने जैसा महसूस किया। लंबे समय तक यह खबर उनके मन को विचलित करती रही।

    वर्मा ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि वे माइकल जैक्सन से ‘नफरत’ करते हैं, लेकिन यह नफरत किसी नकारात्मक भावना से नहीं बल्कि उस दर्द से जुड़ी है जो उनकी मृत्यु ने उन्हें दिया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि माइकल भी एक सामान्य इंसान थे, जिनका दिल रुक सकता था और जिन्हें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत थी। यही वास्तविकता उन्हें सबसे ज्यादा आहत करती है।

    उन्होंने आगे यह भी कहा कि माइकल के प्रति उनका सम्मान और प्रेम इतना गहरा है कि उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार माइकल जैक्सन आज भी अपने संगीत और कला के माध्यम से जीवित हैं और शायद किसी अलग आकाशीय दुनिया में अपनी अनोखी “मूनवॉक” जारी रखे हुए हैं।

  • आर.डी. बर्मन और आनंद बख्शी की जादुई रचना का खुलासा, विशाल ददलानी ने बताया ‘चिंगारी कोई भड़के’ का अनसुना किस्सा

    आर.डी. बर्मन और आनंद बख्शी की जादुई रचना का खुलासा, विशाल ददलानी ने बताया ‘चिंगारी कोई भड़के’ का अनसुना किस्सा

    नई दिल्ली /मुंबई। हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर के कई गीत आज भी लोगों की यादों में उतने ही ताज़ा हैं जितने अपने समय में थे। ऐसे ही एक अमर गीत ‘चिंगारी कोई भड़के’ के बनने की कहानी हाल ही में संगीतकार और गायक विशाल ददलानी ने साझा की, जिसने एक बार फिर इस क्लासिक गीत के प्रति लोगों की रुचि बढ़ा दी है। यह किस्सा न केवल संगीत की रचनात्मकता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे एक साधारण जीवन अनुभव कालजयी कला में बदल सकता है।

    विशाल ददलानी ने एक सिंगिंग रियलिटी शो के दौरान इस गीत की पृष्ठभूमि का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस गीत की धुन मशहूर संगीतकार आर. डी. बर्मन ने तैयार की थी, जिन्हें संगीत की दुनिया में पंचम दा के नाम से जाना जाता है। धुन तैयार होने के बाद इसे गीतकार आनंद बख्शी को दिया गया ताकि वह इसके बोल लिख सकें।

    कहानी के अनुसार, उस समय मौसम बेहद सुहावना था और बारिश हो रही थी। आनंद बख्शी देर रात घर लौट रहे थे, और रास्ते में उन्होंने सिगरेट जलाने की कोशिश की। लेकिन लगातार बारिश की वजह से उनका लाइटर बार-बार बुझ जा रहा था। यह बेहद साधारण सा पल था, लेकिन इसी क्षण ने उनके मन में एक गहरी कल्पना को जन्म दिया।

    उन्हीं परिस्थितियों में उनके दिमाग में एक ऐसी पंक्ति आई, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में से एक बन गई—“चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाए।” यह पंक्ति केवल एक गीत का हिस्सा नहीं बनी, बल्कि भावनाओं और प्रतीकों का ऐसा संगम बन गई, जिसने सुनने वालों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।

    विशाल ददलानी ने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा कि असली कलाकार वही होता है जो जीवन के छोटे-छोटे पलों को भी गहराई से महसूस करता है और उन्हें कला में बदल देता है। उनके अनुसार, सामान्य लोग ऐसे अनुभवों को शायद नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन महान रचनाकार उन्हीं क्षणों को अमर बना देते हैं। उन्होंने आर. डी. बर्मन और आनंद बख्शी की जोड़ी को भारतीय संगीत का एक अनमोल रत्न बताया।

    यह गीत वर्ष 1972 में रिलीज हुई फिल्म ‘अमर प्रेम’ का हिस्सा था, जिसमें राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म के साथ-साथ इसके गीतों ने भी दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। ‘चिंगारी कोई भड़के’ को प्रसिद्ध गायक किशोर कुमार ने अपनी आवाज दी थी, जिसने इस गीत को और भी भावनात्मक और प्रभावशाली बना दिया।

    आज भी यह गीत संगीत प्रेमियों के बीच उतनी ही लोकप्रियता रखता है जितनी इसके रिलीज के समय थी। इसकी गहराई, शब्दों की सादगी और संगीत की भावनात्मक पकड़ इसे समय से परे एक क्लासिक बनाती है। विशाल ददलानी द्वारा साझा किया गया यह किस्सा एक बार फिर याद दिलाता है कि महान कला अक्सर सबसे साधारण क्षणों से जन्म लेती है।

  • स्ट्रे डॉग्स विवाद पर गरमाई बहस, सोनम बाजवा ने उठाई संवेदनशील समाधान की मांग

    स्ट्रे डॉग्स विवाद पर गरमाई बहस, सोनम बाजवा ने उठाई संवेदनशील समाधान की मांग


    नई दिल्ली। देश में स्ट्रे डॉग्स को लेकर चल रही बहस एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। इसी मुद्दे पर अभिनेत्री सोनम बाजवा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील करते हुए बेजुबान जानवरों के लिए उचित व्यवस्था और शेल्टर इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान केवल हटाने से नहीं बल्कि एक व्यवस्थित और मानवीय दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए।

    सोनम बाजवा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को गलत तरीके से समझा जा रहा है। उनके अनुसार अदालत ने स्ट्रे डॉग्स को पूरी तरह हटाने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि एबीसी यानी एनिमल बर्थ कंट्रोल, वैक्सीनेशन और शेल्टरिंग जैसे उपायों के जरिए समस्या के समाधान की बात कही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली सवाल यह है कि आखिर इन जानवरों के लिए पर्याप्त शेल्टर और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर कहां है।

    अभिनेत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ दया और जिम्मेदारी का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर दोबारा विचार किया जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए जो मानव और पशु दोनों के हित में हो।

    उन्होंने सुझाव दिया कि इस विषय पर पशु कल्याण से जुड़े विशेषज्ञों, एनजीओ, पशु चिकित्सकों और प्रशासनिक अधिकारियों को एक साथ बैठाकर एक व्यावहारिक योजना तैयार की जानी चाहिए। उनके अनुसार केवल सख्त कदम उठाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता, बल्कि एक व्यवस्थित नीति और मजबूत ढांचे की जरूरत है।

    यह मुद्दा उस समय और अधिक चर्चा में आ गया है जब सुप्रीम कोर्ट ने स्ट्रे डॉग्स से जुड़े मामलों में राज्य सरकारों को एबीसी कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी कहा है कि कई क्षेत्रों में इस कार्यक्रम के सही तरीके से लागू न होने के कारण समस्या लगातार बढ़ रही है और इससे सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ी है।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद कई राज्यों में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है, जहां एक तरफ सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात हो रही है तो दूसरी तरफ पशु अधिकारों और उनके संरक्षण की मांग भी उठ रही है। सोनम बाजवा की यह अपील इसी बहस को एक नया दृष्टिकोण देती है, जिसमें समाधान को केवल नियंत्रण तक सीमित न रखकर एक संवेदनशील और व्यवस्थित नीति की जरूरत पर जोर दिया गया है।

  • कमल हासन की देशवासियों से अपील: संकट के समय राजनीति नहीं, राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए

    कमल हासन की देशवासियों से अपील: संकट के समय राजनीति नहीं, राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने देशवासियों से एकजुटता और जिम्मेदारी की अपील की है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा समय केवल आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह ऐसा दौर है जब पूरे देश को मिलकर राष्ट्रहित में सोचने और कार्य करने की आवश्यकता है।

    कमल हासन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि ईरान क्षेत्र में जारी संघर्षऔर समुद्री व्यापार मार्गों में बाधाओं का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत जैसे देशों पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं। इसके कारण पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल सरकारों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी जिम्मेदारी का समय है। कमल हासन ने लोगों से अपील की कि वे ईंधन और बिजली की खपत कम करने जैसे छोटे-छोटे कदम उठाकर देश की आर्थिक स्थिरता में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई विकसित देश पहले ही ऊर्जा संरक्षण को लेकर सख्त नीतियां अपना चुके हैं और नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है।

    अपने संदेश में उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट के समय भारत ने हमेशा एकजुटता दिखाई है। उन्होंने 1962 के युद्ध और 1965 के खाद्य संकट का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय देशवासियों ने त्याग और सहयोग की मिसाल पेश की थी। उन्होंने कहा कि आज भले ही परिस्थितियां उतनी गंभीर न हों, लेकिन सामूहिक जिम्मेदारी उतनी ही आवश्यक है।

    कमल हासन ने यह भी कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, कोल गैसीफिकेशन और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने इस प्रयास को सकारात्मक बताते हुए कहा कि विदेशी तेल और गैस पर निर्भरता कम करना दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी है।

    उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से भी अपील की कि वे मिलकर ईंधन पर लगने वाले करों में संतुलन लाएं और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुलभ और किफायती बनाएं। उनका कहना था कि यदि बस, ट्रेन और मेट्रो जैसे साधनों को बढ़ावा दिया जाए तो निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और ईंधन की बचत संभव होगी।

    कमल हासन ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री से सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक संयुक्त बैठक बुलाने का भी आग्रह किया, ताकि ऊर्जा संकट और उससे जुड़ी चुनौतियों पर सामूहिक रणनीति बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि देश को इस समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सोचने की आवश्यकता है, क्योंकि राष्ट्रहित सबसे महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि देशवासी मिलकर ऊर्जा बचत और जिम्मेदारी से खपत की दिशा में कदम उठाते हैं, तो भारत इस वैश्विक संकट से और अधिक मजबूत होकर बाहर निकल सकता है। उनके अनुसार, आज बचाया गया हर यूनिट बिजली और हर लीटर ईंधन भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण निवेश है।

  • जेनजी में बढ़ती लोकप्रियता पर बोले जैकी श्रॉफ, इंसानियत और अपनापन ही मेरी असली पहचान है

    जेनजी में बढ़ती लोकप्रियता पर बोले जैकी श्रॉफ, इंसानियत और अपनापन ही मेरी असली पहचान है

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ अपनी अलग शैली, सहज व्यक्तित्व और दमदार अभिनय के लिए लंबे समय से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाए हुए हैं। 80 और 90 के दशक में बड़े पर्दे पर अपनी छाप छोड़ने के बाद भी आज वह नई पीढ़ी यानी जेनजी के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं। सोशल मीडिया से लेकर युवा दर्शकों तक उनकी बढ़ती लोकप्रियता लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।

    इसी बीच अपनी आगामी फिल्म के प्रमोशन के दौरान बातचीत में जैकी श्रॉफ ने अपनी इस लोकप्रियता का कारण बेहद सरल शब्दों में बताया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा लोगों को उम्र के आधार पर नहीं देखते, बल्कि इंसानियत और व्यवहार को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं। उनके अनुसार कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी उम्र का हो, हर किसी के साथ समान सम्मान और अपनापन रखना ही उनके स्वभाव की असली पहचान है।

    अभिनेता ने कहा कि उनके लिए जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज इंसानी रिश्ते हैं। वह मानते हैं कि जब कोई व्यक्ति अपने दिल को खुला रखता है और दूसरों की बातों को ध्यान से सुनता है, तो संबंध अपने आप मजबूत हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है, इसलिए खुद को किसी से बड़ा या बेहतर समझना सही नहीं है।

    जैकी श्रॉफ ने यह भी बताया कि वह हमेशा लोगों के साथ सहजता से जुड़ने की कोशिश करते हैं, चाहे वह बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग। उनके अनुसार जब व्यवहार में सादगी और अपनापन होता है, तो पीढ़ियों के बीच की दूरी अपने आप खत्म हो जाती है। यही कारण है कि वह अलग-अलग उम्र के दर्शकों से आसानी से जुड़ पाते हैं और उनकी लोकप्रियता हर पीढ़ी में बनी रहती है।

    नई दिल्ली। अपनी आगामी फिल्म को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए बेहद खास है क्योंकि इसमें एक अनोखी और अलग सोच को दिखाया गया है। फिल्म में उनका किरदार एक दादा का है, जो अपने पोते के साथ दोस्त जैसा रिश्ता साझा करता है। यह कहानी पारिवारिक संबंधों को एक नए दृष्टिकोण से पेश करती है, जहां उम्र की दीवारें रिश्तों को सीमित नहीं करतीं।

    अभिनेता ने कहा कि इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसका नया कॉन्सेप्ट है, जो पारंपरिक सोच से हटकर एक ताजा अनुभव देता है। यह फिल्म यह संदेश देती है कि प्यार, समझ और अपनापन किसी भी पीढ़ी के बीच दूरी को खत्म कर सकता है।

    जैकी श्रॉफ का यह नजरिया न केवल उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक कलाकार अपने व्यवहार और सोच के जरिए सभी उम्र के दर्शकों से जुड़ा रह सकता है। उनकी सरलता और मानवीय दृष्टिकोण ही उन्हें आज भी दर्शकों के बीच खास बनाता है।

  • बांसुरी, मोर पंख और देसी अंदाज: कान्स में सान्या ठाकुर ने भारतीय परंपरा को बनाया ग्लोबल आकर्षण

    बांसुरी, मोर पंख और देसी अंदाज: कान्स में सान्या ठाकुर ने भारतीय परंपरा को बनाया ग्लोबल आकर्षण


    नई दिल्ली । दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में शामिल कान्स फिल्म फेस्टिवल में इस बार भारतीय संस्कृति की एक अनोखी और आध्यात्मिक झलक देखने को मिली, जब बिहार की अभिनेत्री सान्या ठाकुर ने ‘राधा रानी’ से प्रेरित अपने विशेष लुक के साथ रेड कार्पेट पर कदम रखा। ग्लैमर और फैशन से भरे इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर सान्या का यह पारंपरिक और सांस्कृतिक अंदाज हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचता नजर आया।

    सान्या ठाकुर का यह लुक केवल फैशन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भारतीय परंपरा, कृष्ण भक्ति और सांस्कृतिक सौंदर्य का गहरा समावेश दिखाई दिया। जैसे ही उन्होंने रेड कार्पेट पर एंट्री ली, उनका देसी अंदाज विदेशी मेहमानों और फैशन प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया। बांसुरी, मोर पंख और पारंपरिक श्रृंगार के साथ सान्या ने ऐसा प्रभाव छोड़ा, जिसने उनके लुक को साधारण फैशन से कहीं आगे पहुंचा दिया।

    सान्या ने इस खास मौके के लिए भारी कढ़ाई वाला पारंपरिक लहंगा चुना, जिसमें भारतीय कला और शिल्प की खूबसूरत झलक दिखाई दी। उनके लहंगे में ऑफ-व्हाइट और क्रीम बेस के साथ पेस्टल रंगों की बारीक कढ़ाई की गई थी। फ्लोरल और ट्रेडिशनल मोटिफ्स से सजा यह परिधान बेहद आकर्षक और शाही नजर आ रहा था। सिल्वर थ्रेड, मिरर वर्क और सेक्विन डिटेलिंग ने पूरे आउटफिट को और अधिक भव्य बना दिया।

    लहंगे के साथ उन्होंने मैचिंग ब्लाउज और हल्के डिजाइन वाला नेट दुपट्टा कैरी किया, जिसने उनके लुक में संतुलन और ग्रेस जोड़ दिया। सान्या की स्टाइलिंग में हर छोटी डिटेल पर विशेष ध्यान दिया गया था। माथा पट्टी, बड़े झुमके, रंग-बिरंगी चूड़ियां और हाथों में आलता उनके पारंपरिक रूप को और निखार रहे थे। वहीं नथ और हल्के नेकलेस ने पूरे लुक को एक शास्त्रीय और पौराणिक स्पर्श दिया।

    हालांकि उनके पूरे लुक की सबसे बड़ी खासियत रही बांसुरी और मोर पंख की डिटेलिंग, जिसने ‘राधा रानी’ की थीम को जीवंत कर दिया। बालों को सॉफ्ट कर्ल्स के साथ स्टाइल करते हुए उसमें गजरा लगाया गया था, जबकि हाथ में थामी बांसुरी और उस पर सजा मोर पंख उनके कृष्ण भक्ति वाले रूप को और प्रभावशाली बना रहा था।

    मेकअप को भी बेहद सॉफ्ट और पारंपरिक रखा गया। ग्लॉसी पिंक लिप्स, हल्के रंगों का प्रयोग और माथे पर कुमकुम से बनाई गई फूलों जैसी बिंदी ने उनके चेहरे की सुंदरता को और उभार दिया। यह पूरा अंदाज किसी पौराणिक चित्र या सांस्कृतिक प्रस्तुति जैसा प्रतीत हो रहा था, जिसने रेड कार्पेट पर मौजूद लोगों को खासा प्रभावित किया।

    कुल मिलाकर, सान्या ठाकुर का यह कान्स डेब्यू केवल एक फैशन स्टेटमेंट नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का अंतरराष्ट्रीय मंच पर खूबसूरत प्रदर्शन बन गया। आधुनिक ग्लैमर की भीड़ में उनका यह एथनिक और सांस्कृतिक रूप सबसे अलग और यादगार नजर आया।