Category: Entertainment

  • सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की रेनोवेशन के खिलाफ याचिका, 'मन्नत' में प्रस्तावित बदलावों को मिली कानूनी मंजूरी; नियमों के तहत निर्माण पर लगी मुहर

    सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की रेनोवेशन के खिलाफ याचिका, 'मन्नत' में प्रस्तावित बदलावों को मिली कानूनी मंजूरी; नियमों के तहत निर्माण पर लगी मुहर

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान और उनकी पत्नी गौरी खान को उनके मुंबई स्थित प्रतिष्ठित बंगले ‘मन्नत’ के रेनोवेशन मामले में महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें बंगले के प्रस्तावित पुनर्विकास और अतिरिक्त निर्माण को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अब रेनोवेशन योजना के तहत प्रस्तावित बदलावों और दो नई मंजिलों के निर्माण का मार्ग पूरी तरह साफ हो गया है। यह फैसला लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

    मामला मुंबई के बांद्रा स्थित शाहरुख खान के बंगले ‘मन्नत’ में प्रस्तावित निर्माण से जुड़ा था। योजना के अनुसार इमारत में सातवीं और आठवीं मंजिल जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके लिए संबंधित वैधानिक प्राधिकरण से आवश्यक अनुमति भी प्राप्त की गई थी। हालांकि, इस मंजूरी को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें निर्माण को तटीय क्षेत्र से जुड़े नियमों के विरुद्ध बताया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि प्रस्तावित निर्माण पर्यावरणीय मानकों और नियामकीय प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं है।

    इससे पहले यह विवाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण तक भी पहुंचा था। वहां याचिका पर विस्तृत सुनवाई के बाद अधिकरण ने संबंधित प्राधिकरणों द्वारा दी गई अनुमति को वैध मानते हुए चुनौती को खारिज कर दिया था। इसके बाद इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई, जहां मामले की दोबारा सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड, अनुमति प्रक्रिया और संबंधित नियमों का परीक्षण करने के बाद हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि जब सक्षम प्राधिकरण निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत अनुमति दे चुके हैं और रिकॉर्ड में किसी स्पष्ट कानूनी त्रुटि का आधार नहीं है, तब न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं बनती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की लोकप्रियता या सार्वजनिक पहचान न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करती। न्यायालय का निर्णय केवल उपलब्ध तथ्यों, कानून और नियमों के आधार पर लिया गया है।

    इस फैसले के साथ अब ‘मन्नत’ के रेनोवेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य भवन की संरचना और उपयोगिता को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना बताया गया है। आवश्यक अनुमतियों के अनुरूप निर्माण कार्य किए जाने की संभावना है। हालांकि, संबंधित सभी गतिविधियां निर्धारित नियमों और स्वीकृत शर्तों के अनुसार ही पूरी की जाएंगी।

    मुंबई के प्रमुख स्थलों में शामिल ‘मन्नत’ केवल एक निजी आवास नहीं, बल्कि शाहरुख खान के प्रशंसकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। अभिनेता के जन्मदिन सहित कई अवसरों पर देश और विदेश से बड़ी संख्या में प्रशंसक उनके निवास के बाहर पहुंचते हैं। वर्षों से यह बंगला मुंबई के सबसे चर्चित और पहचान वाले स्थलों में शामिल रहा है और फिल्म प्रेमियों के बीच इसकी अलग पहचान बनी हुई है।

    इस बीच शाहरुख खान अपने आगामी फिल्मी प्रोजेक्ट्स को लेकर भी चर्चा में हैं। अभिनेता जल्द ही निर्देशक सिद्धार्थ आनंद की फिल्म ‘किंग’ में नजर आएंगे। ऐसे समय में ‘मन्नत’ से जुड़े मामले में मिला यह कानूनी फैसला उनके लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अदालत के निर्णय के बाद अब रेनोवेशन परियोजना को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो गई है और निर्धारित योजना के अनुरूप आगे की प्रक्रिया पूरी किए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

  • पाकिस्तानी दर्शकों पर चढ़ा भारतीय फिल्मों का सुरूर, नेटफ्लिक्स पर हफ्तों से टॉप ट्रेंड में बनी हुई हैं ये 6 बेहतरीन मूवीज

    पाकिस्तानी दर्शकों पर चढ़ा भारतीय फिल्मों का सुरूर, नेटफ्लिक्स पर हफ्तों से टॉप ट्रेंड में बनी हुई हैं ये 6 बेहतरीन मूवीज


    नई दिल्ली ।
    पड़ोसी देश पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों और डिजिटल कंटेंट के प्रति दीवानगी लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। सांस्कृतिक और भौगोलिक सीमाओं को दरकिनार करते हुए, पाकिस्तानी दर्शक इस समय ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर भारतीय सिनेमा को बेहद चाव से देख रहे हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, नेटफ्लिक्स पाकिस्तान की टॉप 10 सूची में छह भारतीय फिल्मों ने अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है। इनमें से कुछ फिल्में तो ऐसी हैं जो पिछले कई हफ्तों से लगातार ट्रेंडिंग चार्ट में शीर्ष पर बनी हुई हैं, जिससे साफ पता चलता है कि दोनों देशों के बीच कला और मनोरंजन के स्तर पर जुड़ाव कितना गहरा है।

    इस सूची में जो फिल्म सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित कर रही है, वह है अभिनेता रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म का अनकट वर्जन ‘धुरंधर: रॉ और अनदेखा’। यह फिल्म अपनी रिलीज के समय से ही काफी विवादों में घिरी रही थी, लेकिन इसके बावजूद पिछले आठ हफ्तों से यह पाकिस्तान में नेटफ्लिक्स की टॉप 10 सूची में नौवें स्थान पर बनी हुई है। सेंसर बोर्ड की कैंची के बिना, पूरी तरह से अनसेंसर्ड और अनकट फॉर्मेट में रिलीज की गई इस थ्रिलर फिल्म को देखने के लिए दर्शकों में भारी उत्सुकता देखी जा रही है और विवादों के बाद भी इसका ट्रेंड में बने रहना बेहद चौंकाने वाला है।

    ट्रेंडिंग चार्ट में दूसरे नंबर पर दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार अर्जुन सरजा की फिल्म ‘ब्लास्ट’ का कब्जा है। सुभाष के राज के निर्देशन में बनी यह फिल्म थियेटरों में अपनी सफलता का परचम लहराने के बाद अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी कमाल कर रही है। फिल्म में प्रीति मुखुंधन और अभिरामी जैसे कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं और इसे पाकिस्तानी दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। इसके ठीक बाद तीसरे स्थान पर बॉलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार और वामिका गब्बी की हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ काबिज है। निर्देशक प्रियदर्शन की इस फिल्म को दर्शकों द्वारा खूब सराहा जा रहा है।

    पारिवारिक मनोरंजन की श्रेणी में कॉमेडी-ड्रामा फिल्म ‘दादी की शादी’ इस सूची में चौथे स्थान पर ट्रेंड कर रही है। इस फिल्म में कपिल शर्मा, नीतू कपूर और सादिया खातीब जैसे कलाकारों की जुगलबंदी लोगों को खूब हंसा रही है। वहीं, अभिनेता रितेश देशमुख की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म ‘राजा शिवाजी’ छठे नंबर पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रही है। इस फिल्म की खास बात इसमें सलमान खान का कैमियो रोल और संजय दत्त, विद्या बालन तथा अभिषेक बच्चन जैसे बड़े सितारों की मौजूदगी है, जिसने दर्शकों को अपनी ओर खींचा है।

    इस सूची को पूरा करती है सुरेश त्रिवेनी के निर्देशन में बनी ब्लैक कॉमेडी थ्रिलर फिल्म ‘मां बहन’, जो आठवें स्थान पर काबिज है। माधुरी दीक्षित, तृप्ति डीमरी और रवि किशन जैसे बेहतरीन कलाकारों से सजी इस फिल्म को इसके अनोखे विषय और सस्पेंस के कारण काफी पसंद किया जा रहा है। कुल मिलाकर, नेटफ्लिक्स का यह मौजूदा ट्रेंड यह साबित करता है कि कहानी कहने का बेहतरीन अंदाज और दमदार अभिनय हर तरह की सीमाओं को पार कर दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना ही लेता है।

  • सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने बयां किया आर्म्स एक्ट की सजा के वक्त का पूरा कोर्ट रूम ड्रामा

    सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने बयां किया आर्म्स एक्ट की सजा के वक्त का पूरा कोर्ट रूम ड्रामा

    नई दिल्ली । वर्ष 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले ने देश के साथ-साथ पूरे फिल्म जगत को हिलाकर रख दिया था। इस ऐतिहासिक मुकदमे में सबसे चर्चित चेहरा रहे बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की सजा और उनके अदालती संघर्ष की कहानियां आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। हाल ही में इस संवेदनशील मामले के विशेष सरकारी अभियोजक रहे वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम ने एक साक्षात्कार में उस वक्त के अदालती माहौल और फैसले के दिन संजय दत्त की मानसिक स्थिति को लेकर बेहद चौंकाने वाले और अनसुने खुलासे किए हैं। निकम ने बताया कि फैसला सुनाए जाने के वक्त अभिनेता किस कदर डरे हुए थे और सजा का ऐलान होते ही अदालत कक्ष के भीतर वह पूरी तरह टूट गए थे।

    मुंबई की विशेष टाडा अदालत में चल रहे इस लंबे मुकदमे के दौरान पूरे देश की निगाहें संजय दत्त पर टिकी हुई थीं। उज्ज्वल निकम के अनुसार, फैसला आने वाले दिन अदालत कक्ष के भीतर भारी तनाव और सन्नाटा पसरा हुआ था। संजय दत्त को उस समय सबसे बड़ा डर इस बात का था कि क्या उन पर देशद्रोह या आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का ठप्पा लगेगा। जब अदालत ने उन्हें टाडा यानी आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां अधिनियम के तहत लगे गंभीर आरोपों से बरी कर दिया, तो उनके चेहरे पर कुछ पल के लिए राहत जरूर दिखी थी। लेकिन इसके तुरंत बाद जब गैर-कानूनी हथियार रखने के आरोप में आर्म्स एक्ट के तहत उन्हें दोषी ठहराया गया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

    उज्ज्वल निकम ने बताया कि टाडा के आरोपों से मुक्ति मिलने के बाद संजय दत्त को लगा था कि शायद वे पूरी तरह बच जाएंगे या उन्हें प्रोबेशन का लाभ मिल जाएगा। लेकिन कानून अपनी राह पर चल रहा था। जैसे ही न्यायाधीश ने आर्म्स एक्ट के तहत सजा की अवधि का ऐलान करना शुरू किया, संजय दत्त के शरीर में कंपन होने लगा। निकम ने उस दृश्य को याद करते हुए साझा किया कि अभिनेता के हाथ-पैर कांप रहे थे और वह अदालत में खड़े होने की स्थिति में भी नहीं दिख रहे थे। उनकी आंखें आंसुओं से भर गईं और वह पूरी तरह लाचार नजर आने लगे थे। एक ऐसा अभिनेता जिसे स्क्रीन पर हमेशा कड़े और मजबूत किरदारों में देखा गया था, वह कानून के सामने पूरी तरह बेबस खड़ा था।

    अभियोजन पक्ष के रूप में उज्ज्वल निकम ने संजय दत्त के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत कड़ी सजा की वकालत की थी क्योंकि देश की सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रतिबंधित हथियार रखना एक अक्षम्य अपराध था। निकम ने खुलासा किया कि सजा के बाद संजय दत्त ने उनकी तरफ देखा था और उनकी आंखों में अपने भविष्य को लेकर एक गहरा डर और असमंजस साफ दिखाई दे रहा था। इस ऐतिहासिक मामले में संजय दत्त को पांच साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद उन्हें यरवदा जेल भेजा गया। उज्ज्वल निकम का यह संस्मरण न केवल एक वीआईपी आरोपी की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान की मनोवैज्ञानिक स्थिति को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति अपने प्रभाव या शोहरत के बल पर बच नहीं सकता।

  • दीपिका और होने वाले दूसरे बच्चे के लिए काम से लेंगे ब्रेक रणवीर सिंह ने चुना परिवार पहले फिर प्रलय की शूटिंग

    दीपिका और होने वाले दूसरे बच्चे के लिए काम से लेंगे ब्रेक रणवीर सिंह ने चुना परिवार पहले फिर प्रलय की शूटिंग


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह इन दिनों अपने करियर और निजी जिंदगी दोनों के बेहद खास दौर से गुजर रहे हैं। एक ओर उनकी फिल्मों को शानदार सफलता मिल रही है तो दूसरी ओर वह अपने परिवार के साथ नए सदस्य के स्वागत की तैयारियों में भी जुटे हैं। इसी बीच रणवीर सिंह को लेकर बड़ी खबर सामने आई है कि वह अपनी आगामी बिग बजट फिल्म प्रलय की शूटिंग के बीच पैटरनिटी लीव लेने वाले हैं ताकि पत्नी दीपिका पादुकोण और अपने परिवार के साथ इस खास समय को पूरी तरह जी सकें।

    रिपोर्ट्स के अनुसार रणवीर सिंह अगस्त 2026 से फिल्म प्रलय की शूटिंग शुरू करेंगे। फिल्म का शुरुआती शेड्यूल करीब दो महीने तक चलेगा। इसके बाद दीपिका पादुकोण की दूसरी डिलीवरी का समय करीब आने पर रणवीर अपने सभी पेशेवर कामों से कुछ समय के लिए दूरी बना लेंगे। बताया जा रहा है कि वह दिवाली के आसपास पैटरनिटी लीव पर जाएंगे और इस दौरान पत्नी दीपिका बेटी दुआ तथा परिवार के नए सदस्य के साथ पूरा समय बिताएंगे। फिल्म की बाकी शूटिंग उनकी वापसी के बाद वर्ष 2027 में फिर शुरू होगी।

    रणवीर सिंह हमेशा से अपने परिवार को प्राथमिकता देने के लिए जाने जाते हैं। बेटी दुआ के जन्म के बाद भी उन्होंने निजी जीवन को भरपूर समय दिया था। अब दूसरी बार पिता बनने की खुशी के बीच उन्होंने एक बार फिर परिवार को सबसे ऊपर रखने का फैसला किया है। उनके इस निर्णय की सोशल मीडिया पर भी काफी सराहना हो रही है जहां प्रशंसक इसे एक जिम्मेदार पिता की मिसाल बता रहे हैं।

    दूसरी ओर फिल्म प्रलय भी रणवीर सिंह के करियर की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिनी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 300 करोड़ रुपये के भारी भरकम बजट में तैयार हो रही यह फिल्म अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स से लैस होगी। फिल्म की कहानी एक डिस्टोपियन जॉम्बी थ्रिलर पर आधारित बताई जा रही है जिसमें बड़े स्तर पर वीएफएक्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी शूटिंग भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में की जाएगी जिससे यह अंतरराष्ट्रीय स्तर की भव्य फिल्म बनने की ओर बढ़ रही है।

    रणवीर सिंह के लिए पिछले कुछ वर्ष बेहद सफल रहे हैं। उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है और उन्हें लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स मिल रहे हैं। ऐसे समय में भी उन्होंने अपने परिवार के लिए काम से ब्रेक लेने का फैसला कर यह संदेश दिया है कि निजी जीवन और परिवार की खुशियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितनी पेशेवर सफलता।

    उधर दीपिका पादुकोण भी इन दिनों अपने दूसरे बच्चे के स्वागत की तैयारियों में व्यस्त हैं। अभिनेत्री फिलहाल फिल्मों से ब्रेक लेकर परिवार के साथ समय बिता रही हैं और बेटी दुआ की देखभाल पर पूरा ध्यान दे रही हैं। माना जा रहा है कि अक्टूबर या नवंबर 2026 में उनके घर नए मेहमान की किलकारी गूंज सकती है।

    ऐसे में आने वाले महीनों में रणवीर सिंह एक तरफ अपनी मेगा बजट फिल्म प्रलय को लेकर चर्चा में रहेंगे तो दूसरी ओर दूसरी बार पिता बनने की खुशी भी उनके जीवन का सबसे खास पल बनने वाली है।

  • जेठालाल कहीं नहीं जा रहे तारक मेहता के मेकर्स ने अफवाहों पर लगाया विराम दिलीप जोशी रहेंगे शो का हिस्सा

    जेठालाल कहीं नहीं जा रहे तारक मेहता के मेकर्स ने अफवाहों पर लगाया विराम दिलीप जोशी रहेंगे शो का हिस्सा


    नई दिल्ली । फिल्मों की शूटिंग के दौरान कलाकारों की सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड रखना आम बात है लेकिन हॉलीवुड की एक चर्चित फिल्म के सेट पर ऐसा भी दौर आया जब एक अभिनेता की सुरक्षा नहीं बल्कि उससे बाकी कलाकारों और पूरी यूनिट को बचाने के लिए बॉडीगार्ड तैनात करने पड़े। यह दिलचस्प और हैरान करने वाला किस्सा साल 1987 में रिलीज हुई सुपरहिट साइंस फिक्शन एक्शन फिल्म प्रिडेटर की शूटिंग से जुड़ा है।

    इस फिल्म में हॉलीवुड स्टार अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की शूटिंग मैक्सिको के दूरदराज जंगलों में बेहद कठिन परिस्थितियों में की जा रही थी। भीषण गर्मी उमस और चुनौतीपूर्ण लोकेशन के बीच कलाकारों और तकनीकी टीम के लिए काम करना आसान नहीं था। लंबे समय तक कठिन माहौल में शूटिंग होने से पूरी यूनिट मानसिक और शारीरिक दबाव से गुजर रही थी।

    इसी दौरान फिल्म में बिली का किरदार निभाने वाले अभिनेता सॉनी लैंडहम का व्यवहार लगातार बदलने लगा। बताया जाता है कि वह सेट पर असहज महसूस करने लगे थे। फिल्म में कई लंबे और मजबूत कदकाठी वाले कलाकार मौजूद थे और इसी वजह से सॉनी लैंडहम खुद को असुरक्षित और हीन भावना से घिरा हुआ महसूस करने लगे। धीरे धीरे इसका असर उनके व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा।

    रिपोर्टों के अनुसार सॉनी लैंडहम कई बार शूटिंग के दौरान सहयोग नहीं करते थे और गुस्से में साथी कलाकारों व क्रू के सदस्यों के साथ आक्रामक रवैया अपनाने लगते थे। स्थिति तब और गंभीर हो जाती थी जब वह जरूरत से ज्यादा शराब पी लेते थे। उनके गुस्से और अनियंत्रित व्यवहार से पूरी यूनिट में तनाव का माहौल बनने लगा था।

    हालात इतने बिगड़ गए कि फिल्म के निर्माताओं और प्रोडक्शन टीम को सुरक्षा के लिहाज से बड़ा फैसला लेना पड़ा। उन्होंने सॉनी लैंडहम के साथ हर समय एक विशेष बॉडीगार्ड तैनात कर दिया। यह बॉडीगार्ड उनकी सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि इस बात का ध्यान रखने के लिए रखा गया था कि यदि अभिनेता का व्यवहार बेकाबू हो जाए तो वह तुरंत स्थिति संभाल सके और बाकी कलाकारों व क्रू को सुरक्षित रखे।

    बताया जाता है कि मेकर्स ने इसके लिए करीब 6 फुट 8 इंच लंबे और बेहद मजबूत व्यक्ति को चुना था। उसका काम चौबीसों घंटे सॉनी लैंडहम के साथ रहना और किसी भी अप्रिय स्थिति में हस्तक्षेप करना था। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि फिल्म की शूटिंग बिना किसी बड़े विवाद या हादसे के पूरी की जा सके।

    हालांकि तमाम मुश्किलों के बावजूद प्रिडेटर सफलतापूर्वक पूरी हुई और रिलीज के बाद जबरदस्त हिट साबित हुई। अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर की यह फिल्म आज भी हॉलीवुड की सबसे प्रतिष्ठित एक्शन फिल्मों में गिनी जाती है। दूसरी ओर सॉनी लैंडहम का यह किस्सा फिल्म इंडस्ट्री के उन दुर्लभ घटनाक्रमों में शामिल हो गया जिसमें किसी अभिनेता की वजह से पूरी यूनिट की सुरक्षा के लिए अलग से बॉडीगार्ड नियुक्त करने पड़े।

  • फिल्म के हीरो नहीं बने सबसे बड़ी चुनौती इस अभिनेता की हरकतों से परेशान होकर मेकर्स ने उठाया बड़ा कदम

    फिल्म के हीरो नहीं बने सबसे बड़ी चुनौती इस अभिनेता की हरकतों से परेशान होकर मेकर्स ने उठाया बड़ा कदम


    नई दिल्ली । फिल्मों की शूटिंग के दौरान कलाकारों की सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड रखना आम बात है लेकिन हॉलीवुड की एक चर्चित फिल्म के सेट पर ऐसा भी दौर आया जब एक अभिनेता की सुरक्षा नहीं बल्कि उससे बाकी कलाकारों और पूरी यूनिट को बचाने के लिए बॉडीगार्ड तैनात करने पड़े। यह दिलचस्प और हैरान करने वाला किस्सा साल 1987 में रिलीज हुई सुपरहिट साइंस फिक्शन एक्शन फिल्म प्रिडेटर की शूटिंग से जुड़ा है।

    इस फिल्म में हॉलीवुड स्टार अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की शूटिंग मैक्सिको के दूरदराज जंगलों में बेहद कठिन परिस्थितियों में की जा रही थी। भीषण गर्मी उमस और चुनौतीपूर्ण लोकेशन के बीच कलाकारों और तकनीकी टीम के लिए काम करना आसान नहीं था। लंबे समय तक कठिन माहौल में शूटिंग होने से पूरी यूनिट मानसिक और शारीरिक दबाव से गुजर रही थी।

    इसी दौरान फिल्म में बिली का किरदार निभाने वाले अभिनेता सॉनी लैंडहम का व्यवहार लगातार बदलने लगा। बताया जाता है कि वह सेट पर असहज महसूस करने लगे थे। फिल्म में कई लंबे और मजबूत कदकाठी वाले कलाकार मौजूद थे और इसी वजह से सॉनी लैंडहम खुद को असुरक्षित और हीन भावना से घिरा हुआ महसूस करने लगे। धीरे धीरे इसका असर उनके व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा।

    रिपोर्टों के अनुसार सॉनी लैंडहम कई बार शूटिंग के दौरान सहयोग नहीं करते थे और गुस्से में साथी कलाकारों व क्रू के सदस्यों के साथ आक्रामक रवैया अपनाने लगते थे। स्थिति तब और गंभीर हो जाती थी जब वह जरूरत से ज्यादा शराब पी लेते थे। उनके गुस्से और अनियंत्रित व्यवहार से पूरी यूनिट में तनाव का माहौल बनने लगा था।

    हालात इतने बिगड़ गए कि फिल्म के निर्माताओं और प्रोडक्शन टीम को सुरक्षा के लिहाज से बड़ा फैसला लेना पड़ा। उन्होंने सॉनी लैंडहम के साथ हर समय एक विशेष बॉडीगार्ड तैनात कर दिया। यह बॉडीगार्ड उनकी सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि इस बात का ध्यान रखने के लिए रखा गया था कि यदि अभिनेता का व्यवहार बेकाबू हो जाए तो वह तुरंत स्थिति संभाल सके और बाकी कलाकारों व क्रू को सुरक्षित रखे।

    बताया जाता है कि मेकर्स ने इसके लिए करीब 6 फुट 8 इंच लंबे और बेहद मजबूत व्यक्ति को चुना था। उसका काम चौबीसों घंटे सॉनी लैंडहम के साथ रहना और किसी भी अप्रिय स्थिति में हस्तक्षेप करना था। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि फिल्म की शूटिंग बिना किसी बड़े विवाद या हादसे के पूरी की जा सके।

    हालांकि तमाम मुश्किलों के बावजूद प्रिडेटर सफलतापूर्वक पूरी हुई और रिलीज के बाद जबरदस्त हिट साबित हुई। अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर की यह फिल्म आज भी हॉलीवुड की सबसे प्रतिष्ठित एक्शन फिल्मों में गिनी जाती है। दूसरी ओर सॉनी लैंडहम का यह किस्सा फिल्म इंडस्ट्री के उन दुर्लभ घटनाक्रमों में शामिल हो गया जिसमें किसी अभिनेता की वजह से पूरी यूनिट की सुरक्षा के लिए अलग से बॉडीगार्ड नियुक्त करने पड़े।

  • हीरो नंबर 1 की वापसी तय गोविंदा ने नई फिल्म रूपा का किया ऐलान नई एक्ट्रेस रानी स्वर्णकार के साथ आएंगे नजर

    हीरो नंबर 1 की वापसी तय गोविंदा ने नई फिल्म रूपा का किया ऐलान नई एक्ट्रेस रानी स्वर्णकार के साथ आएंगे नजर


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के हीरो नंबर 1 के नाम से मशहूर गोविंदा ने आखिरकार अपने प्रशंसकों को वह खुशखबरी दे दी जिसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। कई वर्षों तक बड़े पर्दे से दूर रहने के बाद गोविंदा अब एक बार फिर फिल्मों में वापसी करने जा रहे हैं। उन्होंने आधिकारिक तौर पर अपनी नई फिल्म रूपा का ऐलान किया है। खास बात यह है कि इस फिल्म में वह सिर्फ मुख्य अभिनेता के रूप में ही नहीं बल्कि निर्माता की जिम्मेदारी भी संभालते नजर आएंगे। उनके साथ इस फिल्म में नई अभिनेत्री रानी स्वर्णकार बॉलीवुड में कदम रखेंगी।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गोविंदा ने अपने फिल्मी सफर के उतार चढ़ाव पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उनके करियर में कई ऐसे मौके आए जब उन्हें नजरअंदाज किया गया और लोगों ने यह तक कह दिया कि अब उनकी वापसी संभव नहीं है। हालांकि उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। गोविंदा ने कहा कि उन्होंने एक नई शुरुआत करने का फैसला किया है और उन्हें विश्वास है कि उनकी नई फिल्म दर्शकों का दिल जीतने में सफल होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह फिल्म खासतौर पर युवा दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है और उन्हें उम्मीद है कि थिएटर में इसे देखने वाले दर्शकों को एक नया अनुभव मिलेगा।

    गोविंदा ने बातचीत के दौरान अपनी जिंदगी में अंक 14 के महत्व का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह न्यूमरोलॉजी में विश्वास करते हैं और 14 हमेशा उनके लिए बेहद शुभ साबित हुआ है। उनके अनुसार 14 वर्ष की उम्र से ही उनकी जिंदगी में इस अंक का खास महत्व रहा है। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने सिर्फ एक सप्ताह में 14 फिल्में साइन की थीं और इसके बाद करीब 14 वर्षों तक लगातार सुपरस्टारडम का दौर देखा। बाद में वह 14वीं लोकसभा के सदस्य भी बने। उन्होंने अपने संघर्ष के वर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि हर कठिन दौर के बाद उन्हें नई शुरुआत करने का मौका मिला और अब एक बार फिर वह उसी विश्वास के साथ फिल्मों में लौट रहे हैं।

    गोविंदा ने यह भी कहा कि इस बार उन्होंने ज्यादा इंतजार नहीं किया और तय कर लिया कि अब फिर से अभिनय की दुनिया में सक्रिय होना है। उन्होंने भगवान का आशीर्वाद मिलने की बात कहते हुए उम्मीद जताई कि फिल्म रूपा उनके करियर का नया अध्याय साबित होगी। उनके प्रशंसकों के लिए भी यह वापसी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि लंबे समय से दर्शक उन्हें बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे थे।

    हाल ही में गोविंदा अपनी पत्नी सुनीता आहूजा का समर्थन करने के लिए रियलिटी शो लॉकअप 2 में भी पहुंचे थे। वहां उन्होंने अपनी चिरपरिचित कॉमिक टाइमिंग से सभी का मनोरंजन किया। शो के दौरान फराह खान के साथ उनकी मजेदार नोकझोंक और सुनीता आहूजा को लेकर किए गए हास्यपूर्ण संवाद सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रहे। इससे साफ है कि गोविंदा आज भी अपनी सहज हास्य शैली और शानदार स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों का मनोरंजन करने का हुनर रखते हैं।

    अब फिल्म रूपा के जरिए गोविंदा की वापसी पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है तो एक बार फिर बॉलीवुड को अपना चहेता हीरो नंबर 1 पुराने अंदाज में बड़े पर्दे पर देखने का मौका मिलेगा।

  • जब मोहम्मद रफी की आवाज ने रचा इतिहास इस एक गीत ने दिलाया जिंदगी का पहला और आखिरी नेशनल अवॉर्ड

    जब मोहम्मद रफी की आवाज ने रचा इतिहास इस एक गीत ने दिलाया जिंदगी का पहला और आखिरी नेशनल अवॉर्ड


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की बात जब भी होती है तो मोहम्मद रफी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उनकी आवाज में ऐसी मिठास ऐसी गहराई और ऐसा दर्द था जिसने करोड़ों लोगों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली। चार दशक से ज्यादा लंबे अपने शानदार करियर में उन्होंने हजारों गीत गाए और हर तरह की भावनाओं को अपनी गायकी से जीवंत कर दिया। रोमांस हो भक्ति हो देशभक्ति हो या फिर बिछड़ने का दर्द रफी साहब की आवाज हर एहसास को श्रोताओं तक पूरी सच्चाई के साथ पहुंचाती थी। यही वजह है कि आज भी उनके गीत उतने ही पसंद किए जाते हैं जितने अपने दौर में हुआ करते थे।

    मोहम्मद रफी को अपने करियर में कई सम्मान मिले लेकिन एक उपलब्धि ऐसी रही जिसने उनके नाम को भारतीय संगीत इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज कर दिया। यह उपलब्धि थी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार यानी नेशनल अवॉर्ड। खास बात यह रही कि उन्हें यह सम्मान अपने पूरे करियर में केवल एक बार मिला और वह भी एक ऐसे गीत के लिए जो आज भी लोगों की जुबान पर रहता है।

    साल 1977 में रिलीज हुई फिल्म हम किसी से कम नहीं उस दौर की सबसे चर्चित म्यूजिकल फिल्मों में शामिल थी। फिल्म में ऋषि कपूर और तारिक खान मुख्य भूमिका में नजर आए थे। आरडी बर्मन के संगीत से सजी इस फिल्म के लगभग सभी गीत सुपरहिट साबित हुए। बचना ऐ हसीनों चांद मेरा दिल है अगर दुश्मन जमाना और हमको तो यारा तेरी यारी जैसे गीतों ने फिल्म को जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई। लेकिन इन सभी गीतों के बीच एक ऐसा गाना था जिसने लोगों के दिलों को सबसे ज्यादा छुआ और वह था क्या हुआ तेरा वादा।

    यह गीत सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं बल्कि टूटे हुए प्यार के दर्द की ऐसी अभिव्यक्ति बन गया जिसे हर पीढ़ी ने अपनाया। पर्दे पर अभिनेता तारिक खान की भावनाओं को मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज से ऐसा जीवन दिया कि हर श्रोता इस गीत से जुड़ गया। उनकी आवाज में दर्द की गहराई और भावनाओं की सच्चाई इतनी प्रभावशाली थी कि यह गीत सुनने वालों की आंखें नम कर देता था।

    इसी गीत के लिए मोहम्मद रफी को सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का नेशनल अवॉर्ड मिला। यही उनके जीवन का पहला और आखिरी राष्ट्रीय सम्मान साबित हुआ। इतना ही नहीं इसी गीत के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला जबकि गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार प्रदान किया गया। इस गीत ने उस दौर के कई दिग्गज गायकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई और संगीत प्रेमियों के दिलों में स्थायी स्थान हासिल किया।

    फिल्म हम किसी से कम नहीं उस वर्ष की सबसे सफल फिल्मों में शामिल रही। अमिताभ बच्चन की कई बड़ी फिल्मों के बीच भी इस फिल्म ने अपने संगीत के दम पर अलग पहचान बनाई। आरडी बर्मन की धुनें और मोहम्मद रफी की जादुई आवाज ने इसे हिंदी फिल्म संगीत की अमर धरोहर बना दिया। आज भी जब क्या हुआ तेरा वादा सुनाई देता है तो यह सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि मोहम्मद रफी की महान गायकी और भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत की याद ताजा कर देता है। यही कारण है कि यह गीत और उससे जुड़ा यह राष्ट्रीय सम्मान हमेशा संगीत प्रेमियों के लिए खास बना रहेगा।

  • रोमांस से लेकर क्राइम और हॉरर तक सब कुछ, इस सप्ताह OTT पर मिलेगा मनोरंजन का फुल डोज

    रोमांस से लेकर क्राइम और हॉरर तक सब कुछ, इस सप्ताह OTT पर मिलेगा मनोरंजन का फुल डोज


    नई दिल्ली । ओटीटी दर्शकों के लिए 13 से 19 जुलाई का सप्ताह मनोरंजन से भरपूर रहने वाला है। इस पूरे सप्ताह नेटफ्लिक्स जियो हॉटस्टार और प्राइम वीडियो जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म पर कुल 13 नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज होने जा रही हैं। खास बात यह है कि इस बार कंटेंट की विविधता दर्शकों को हर तरह का मनोरंजन देने वाली है। रोमांटिक ड्रामा से लेकर क्राइम डॉक्यूसीरीज एक्शन एडवेंचर कॉमेडी हॉरर और साइकोलॉजिकल थ्रिलर तक लगभग हर जॉनर की नई पेशकश इस सप्ताह ओटीटी पर दस्तक देगी।

    इस सप्ताह सबसे ज्यादा हलचल नेटफ्लिक्स पर देखने को मिलेगी जहां अकेले आठ नई फिल्में और सीरीज रिलीज होंगी। इनमें जापानी एक्शन फिल्म गोल्डन कामुय अबाशिरी प्रिजन रेड साइकोलॉजिकल एडवेंचर ड्रामा सकर पंच जर्मन फिल्म 23000 लाइव्स इंडोनेशियन ड्रामा मी बिफोर मी और लोकप्रिय हॉलीवुड सीरीज यंग शेल्डन का छठा सीजन प्रमुख आकर्षण हैं। इसके अलावा क्वारंटाइन 2 टर्मिनल डिजायर और द मैप ऑफ लॉन्गिंग भी दर्शकों के लिए नई कहानी और अलग अनुभव लेकर आएंगी।

    जियो हॉटस्टार भी इस सप्ताह दो बड़ी रिलीज के साथ दर्शकों को आकर्षित करेगा। रोमांटिक पीरियड ड्रामा वुथरिंग हाइट्स क्लासिक उपन्यास पर आधारित एक भव्य प्रस्तुति है जिसमें भावनाओं और रिश्तों की गहराई देखने को मिलेगी। वहीं तमिल रियलिटी डेटिंग शो सेकेंड लव आधुनिक रिश्तों की नई कहानी लेकर आएगा जिसमें पुराने रिश्तों को पीछे छोड़ नए जीवनसाथी की तलाश दिखाई जाएगी। इसके अलावा रेडी ऑर नॉट 2 हेयर आई कम भी कॉमेडी और हॉरर का शानदार मिश्रण पेश करेगी।

    प्राइम वीडियो पर भी इस सप्ताह दो अलग तरह की कहानियां रिलीज होंगी। मर्डर 101 एक ऐसी डॉक्यूसीरीज है जो वर्षों पुराने हत्या के रहस्य की जांच को नए नजरिए से सामने लाती है। वहीं राइड एंड डाई एक्शन और कॉमेडी से भरपूर कहानी है जिसमें दो दोस्तों की जिंदगी एक खतरनाक मिशन के बाद पूरी तरह बदल जाती है और उनके सामने कई अप्रत्याशित चुनौतियां आ खड़ी होती हैं।

    इस सप्ताह की खास बात यह है कि अलग अलग देशों की फिल्में और सीरीज भी भारतीय दर्शकों के लिए उपलब्ध होंगी। जापान जर्मनी अमेरिका और इंडोनेशिया की कहानियां अब हिंदी सहित कई भाषाओं में देखने को मिलेंगी जिससे वैश्विक कंटेंट का दायरा और भी बड़ा हो जाएगा। यही वजह है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म अब सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि दुनिया भर की कहानियों को एक साथ देखने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके हैं।

    यदि आप रोमांस पसंद करते हैं तो वुथरिंग हाइट्स और डिजायर आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं। एक्शन प्रेमियों के लिए गोल्डन कामुय और रेडी ऑर नॉट 2 खास रहेंगे। वहीं सस्पेंस और क्राइम पसंद करने वाले दर्शकों के लिए मर्डर 101 और क्वारंटाइन 2 बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। कुल मिलाकर यह सप्ताह ओटीटी दर्शकों के लिए नई कहानियों नए किरदारों और भरपूर मनोरंजन का शानदार पैकेज लेकर आया है। घर बैठे अलग अलग जॉनर का आनंद लेने वालों के लिए यह पूरा सप्ताह किसी फिल्मी उत्सव से कम नहीं होगा।

  • महज 25 मिनट में लिख दिया गया था बॉलीवुड का यह अमर गीत, किशोर कुमार और लता की आवाज ने बना दिया सदाबहार

    महज 25 मिनट में लिख दिया गया था बॉलीवुड का यह अमर गीत, किशोर कुमार और लता की आवाज ने बना दिया सदाबहार


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के स्वर्णिम दौर में कई ऐसे गीत बने जिन्होंने समय की सीमाओं को पार करते हुए पीढ़ियों के दिलों में अपनी जगह बनाई। इन्हीं अमर गीतों में शामिल है फिल्म आन मिलो सजना का लोकप्रिय गीत अच्छा तो हम चलते हैं। यह गीत सिर्फ अपनी मधुर धुन और भावपूर्ण शब्दों की वजह से ही नहीं बल्कि इसके बनने की अनोखी कहानी के कारण भी आज तक याद किया जाता है। कहा जाता है कि इस गीत की शुरुआत महज चार साधारण शब्दों से हुई और पूरा गीत केवल 25 मिनट में तैयार हो गया।

    साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म आन मिलो सजना में राजेश खन्ना और आशा पारेख की जोड़ी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। फिल्म के इस गीत को महान गायक किशोर कुमार और सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी जबकि इसके बोल प्रसिद्ध गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की मशहूर जोड़ी ने तैयार किया। गीत में प्रेम और बिछड़ने की भावनाओं को बेहद सहज और खूबसूरत अंदाज में पिरोया गया है जिसकी वजह से यह आज भी लोगों की पसंदीदा प्लेलिस्ट का हिस्सा बना हुआ है।

    इस गीत के निर्माण से जुड़ा किस्सा भी कम रोचक नहीं है। बताया जाता है कि आनंद बख्शी और संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल पूरे दिन इस बात पर विचार करते रहे कि फिल्म की धुन पर कौन से शब्द सबसे उपयुक्त बैठेंगे। घंटों की मेहनत के बावजूद कोई संतोषजनक पंक्तियां नहीं बन सकीं। जैसे ही शाम होने लगी तो लक्ष्मीकांत ने बातचीत के दौरान सहज अंदाज में कहा अच्छा तो हम चलते हैं। इस पर आनंद बख्शी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया फिर कब मिलोगे। सामने से उत्तर आया जब तुम कहोगे। बस यही साधारण बातचीत गीत की पहली पंक्तियां बन गई।

    कहा जाता है कि इन चार शब्दों ने आनंद बख्शी की रचनात्मकता को नई दिशा दी और उन्होंने तुरंत लक्ष्मीकांत को रुकने के लिए कहा। इसके बाद महज 25 मिनट के भीतर पूरा गीत तैयार हो गया। यही वजह है कि यह गीत आज भी इस बात का उदाहरण माना जाता है कि कई बार सबसे यादगार रचनाएं अचानक और सहज रूप से जन्म लेती हैं।

    जब यह गीत रिकॉर्ड हुआ तो किशोर कुमार और लता मंगेशकर की जादुई आवाज ने इसमें ऐसी मिठास घोल दी कि यह रिलीज होते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। राजेश खन्ना और आशा पारेख पर फिल्माया गया यह गीत प्रेम और विदाई के भावों को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत करता है। इसकी धुन सरल है लेकिन दिल को छू लेने वाली है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बन गई।

    आज भी शादी समारोहों से लेकर रेडियो और संगीत कार्यक्रमों तक यह गीत उतने ही उत्साह के साथ सुना जाता है जितना पांच दशक पहले सुना जाता था। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि महान संगीत केवल लंबे समय की योजना से नहीं बल्कि रचनात्मक सोच और सही पल में जन्मे विचारों से भी तैयार हो सकता है। अच्छा तो हम चलते हैं सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की उस सुनहरी विरासत का हिस्सा है जिसे समय कभी पुराना नहीं कर सकता।