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  • OTT से बॉलीवुड तक अपनी अदाओं का जादू बिखेर चुकी सपना पब्बी अब ‘बंदर’ में बनेंगी बॉबी देओल की सबसे बड़ी मुसीबत

    OTT से बॉलीवुड तक अपनी अदाओं का जादू बिखेर चुकी सपना पब्बी अब ‘बंदर’ में बनेंगी बॉबी देओल की सबसे बड़ी मुसीबत


    नई दिल्ली ।
    टीवी शो ‘घर आजा परदेसी’ और ’24’ में उन्हें अहम किरदार निभाते देखा गया. एक वक्त पर वो यामी गौतम के साथ ‘फेयर एंड लवली’ के विज्ञापन में भी नजर आई करती थीं. 2015 में फिल्म ‘खामोशियां’ से उन्होंने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया था. पिक्चर में अली फजल संग केमिस्ट्री और बोल्ड सीन्स के चलते उनके खूब चर्चे हुए थे.
    हिंदी के साथ-साथ सपना पब्बी ने पंजाबी और तेलुगू सिनेमा में भी काम किया है. उन्हें ‘टोली प्रेमा’, ‘मार गए ओए लोको’, ‘अरदास करां’, ‘ड्राइव’, ‘सार्जेंट’, ‘सरदार जी 3’ जैसी फिल्मों में देखा गया है. जल्द सपना, फिल्म ‘बंदर’ में नजर आएंगी. इस पिक्चर का प्रीमियर 2025 में हुए टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल यानी TIFF में हुआ था.

    टेलीवीजन और फिल्मी दुनिया के साथ-साथ सपना पब्बी का दबदबा ओटीटी की दुनिया में भी खूब है. उन्हें ‘द ट्रिप’, ‘ब्रीद’, ‘बॉम्बर्स’, ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज’, ‘इनसाइड एज’, ‘लंदन फाइल्स’, नेवर किस योर बेस्ट फ्रेंड 2′ समेत यूनाइटेड कच्चे’ जैसी सीरीज में देखा जा चुका है.

    2012 से लेकर अभी तक सपना पब्बी काफी काम कर चुकी हैं. उन्होंने अपने करियर के साथ-साथ ढेरों एक्सपेरिमेंट कर खुद को बेहतर बनाया है और अपने टैलेंट को साबित करके दिखाया है. देखना होगा कि फिल्म ‘बंदर’ में वो क्या कमाल करती हैं. ये फिल्म 5 जून को सिनेमाघरों में हो रही है.
  • 2.30 घंटे का धैर्य टेस्ट! ‘चांद मेरा दिल’ में प्यार तो है, लेकिन कहानी और लेखन ने किया निराश

    2.30 घंटे का धैर्य टेस्ट! ‘चांद मेरा दिल’ में प्यार तो है, लेकिन कहानी और लेखन ने किया निराश

    नई दिल्ली ।  ‘चांद मेरा दिल’ को सबसे खतरनाक यूजलेस फिल्म क्या बनाता है? क्या वो पिक्चर की खराब कहानी है? या उसके क्रिंज डायलॉग या फिर डायरेक्टर विवेक सोनी की ऑडेसिटी जो ये सोच रहे थे कि वो इस जमाने की सबसे बेहतरीन रोमांटिक फिल्म बना रहे हैं? इसका जवाब है- सबकुछ.
    बॉलीवुड में बीते काफी वक्त से रीमेक और सीक्वल बन रहे हैं. ऐसे में कोई नई कहानी ऑडियंस को परोसना मेकर्स के लिए शायद मुश्किल हो गया है, या फिर हमने पूरी तरह से कोशिश करना छोड़ दिया है. जो भी है…
    ओटीटी के जमाने में जनता को फिल्म देखने के लिए थिएटर तक खींचना बड़ी बात हो गई है. ऐसे में आपकी पिक्चर एकदम बेदम हो तो चीजें और खराब हो जाती हैं.कुछ कहानियां आइडिया में बहुत अच्छी लगती हैं. मगर इसका मतलब यह नहीं है कि वो पर्दे परभी उतनी ही खूबसूरत लगें, जितनी पन्ने पर लग रही थी. ‘चांद मेरा दिल’ भी कुछ ऐसी ही है. किसी नए राइटर की नई-सी किताब में अगर इस कहानी को पढ़ा होता तो 14-15 साल की बच्चियां फिर भी इसे पचा लेतीं. पर हमसे ये न हो पाई, भैया!

    क्या है फिल्म की कहानी?

    कहानी है आरव रावत (लक्ष्य) और चांदनी प्रसाद (अनन्या पांडे) की. 21 साल की उम्र में इंजीनियरिंग कॉलेज में मिले आरव और चांदनी को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है. मगर एक दूसरे की आंखों में खोए, मैसेज में एम्बेरेसिंग बातें करने वाले ‘आरु और चांद’ नहीं जानते कि जिंदगी में सिर्फ प्यार काफी नहीं होता. दोनों एकदम अलग परिवारों से आए हैं. चांदनी ऐसे घर में पली-बढ़ी है, जिसमें उसने अपनी मां को घरेलू हिंसा का शिकार होते देखा है. तो वहीं आरव के मां-बाप को हमेशा से अपने बच्चों से ज्यादा इमेज की चिंता रही है. अपने घरों में अनदेखे हुए और कम प्यार पाकर जिए आरव-चांदनी एक दूसरे के लिए ‘दुनिया खूबसूरत’ बना रहे हैं.
    दोनों की जिंदगी में एक क्राइसिस आता है और परिवार उनसे मुंह फेर लेता है. अब आरव और चांदनी दुनिया में एक दूसरे का सहारा हैं. उनके पास बड़ी जिम्मेदारी है, जिसके बोझ तले वो दब रहे हैं. एक दिन वो होता है, जो किसी ने नहीं सोचा और दोनों की जिंदगी बदल जाती है. इमेजिन करने में कहानी प्यारी लग रही है, है न? देखने में नहीं है! देखने में ये बॉलीवुड की बहुत ही पुराने जमाने की कहानी है, जिसमें बच्चे खुद को समझदार समझकर बड़े फैसले ले लेते हैं और फिर उन्हें समझ आता है कि अब हमारे बस की तो ये है नहीं, अब हम फंस गए. ऐसी कहानियां हम बहुत बार बॉलीवुड में बनते देख चुके हैं. अगर ये कोई शॉर्ट फिल्म भी होती तो शायद खूबसूरत लगती. मगर एक पूरी लगभग 2.30 घंटे की पिक्चर के रूप में ‘चांद मेरा दिल’, बोरिंग, प्रेडिक्टेबल और क्रिंज है.
    परफॉरमेंस
    आरव के रोल में लक्ष्य ने बढ़िया काम किया है. वो अच्छे एक्टर हैं, इस बात में कोई दोराय नहीं है. मगर ये फिल्म उनके टैलेंट के हिसाब की है ही नहीं. ‘किल’ और ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ के साथ लक्ष्य ने अपने एक्टिंग टैलेंट को साबित किया है. ‘चांद मेरा दिल’ में उनका किरदार फिर भी समझदार था. अनन्या पांडे ने भी पिक्चर में अच्छा काम किया है. मगर उनका किरदार चांदनी इतना इरिटेटिंग है कि आपका उसपर चिल्लाने का मन करता है. चांदनी इस रिश्ते में टॉक्सिक इंसान है. वो डेलुलु में जीती है और कन्फ्यूज ही रहती है. बेवकूफी भरी हरकत करती है, लेकिन अगर कोई बोल दे दो तो उसे बुरा लग जाता है. फिल्म में मनीष चौधरी और चारु शंकर संग अन्य कलाकारों ने भी काम किया है. उनका काम लिमिटेड था और सही भी रहा.
    सब्र का लेगी इम्तिहान
    डायरेक्टर विवेक सोनी और तुषार परांजपे का स्क्रीनप्ले काफी खराब और बोरिंग है. इसको और खराब बनाते हैं पिक्चर के डायलॉग. आरव और चांदनी, दोनों के ही किरदार आपको शुरुआत से पसंद नहीं आते. दोनों बेहद चीजी हरकतें करते हैं, बचपना दिखाते हैं और फिर आप सोचते हो कि अभी तो ये बच्चे हैं कोई बात नहीं. मगर इस सबका अंत कहीं नहीं होता. पिक्चर की कहानी आप बैठे-बैठे जो सोच रहे हैं वही जाती है.
    आपको ये जानने के लिए इसे देखने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी कि इसमें आखिर क्या हुआ. ‘चांद मेरा दिल’ शुरुआत से ही आपका ध्यान अपनी ओर खींचने में नाकाम होती है. इंटरवल आते-आते आप सोचने लगते हैं कि क्या इसे छोड़कर घर वापस लौट जाना चाहिए. आप खुद को इसे अंत तक देखने के लिए फोर्स करते हैं और फिर आरव और चांदनी के बीच एक बात आपकी हिट करती है. पिक्चर के अंत में आरव, चांदनी से पूछता है, ‘कहीं हम गलती तो नहीं कर रहे?’ वो कहती है, ‘अगर गलत है तो गलत सही.’ यहां थिएटर में बैठे आप सोचते हो, ‘गलती तो मैंने कर दी इस मूवी को देखने आकर.’
    ‘चांद मेरा दिल’ की अच्छी बात सिर्फ उसके गाने हैं. इस फिल्म को देखने के एक्सपीरिएंस की सबसे अच्छी बात थी चांद देखना. नहीं, फिल्म में किसी चांद को नहीं, बल्कि थिएटर से बाहर निकलकर घर आते हुए असली चांद को. वो सुंदर लग रहा था.
  • कम रेटिंग समझकर जिन हॉरर फिल्मों को लोगों ने किया नजरअंदाज, अब वही बन रही हैं डर की सबसे बड़ी वजह, दर्शकों ने कहा- रातभर नहीं आई नींद

    कम रेटिंग समझकर जिन हॉरर फिल्मों को लोगों ने किया नजरअंदाज, अब वही बन रही हैं डर की सबसे बड़ी वजह, दर्शकों ने कहा- रातभर नहीं आई नींद


    नई दिल्ली ।  अक्सर जब हम कोई नई हॉरर फिल्म देखने बैठते हैं, तो सबसे पहले उसकी IMDb रेटिंग चेक करते हैं। अगर रेटिंग 6 या 6.5 के आसपास हो, तो हम मान लेते हैं कि फिल्म ठीक ठाक होगी और उसे स्किप कर देते हैं। लेकिन हॉरर जॉनर के साथ ऐसा करना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।सिनेमा लवर्स सोशल मीडिया पर ऐसी तीन फिल्में रीकमंड कर रहे हैं जिनकी रेटिंग कम है, लेकिन डर के मामले में बेस्ट है। ये फिल्में लोगों के पसीने छुड़ा दे रही हैं। आइए आपको बताते हैं कि इन तीन फिल्मों की खास बात क्या है।
    द टेकिंग ऑफ डेबोरा लोगान (The Taking of Deborah Logan)
    क्यों देखें ये फिल्म?: अगर आपको लगता है कि आपने सबकुछ देख लिया है और अब आपको डर नहीं लगता, तो ये फिल्म आपका भ्रम तोड़ देगी। ये फिल्म ‘फाउंड फुटेज’ स्टाइल में बनी है, जिससे स्क्रीन पर दिखने वाली हर घटना एकदम असली महसूस होती है।
    कहानी और डर का फैक्टर: कहानी एक मेडिकल टीम की है जो अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित एक बुजुर्ग महिला पर डॉक्यूमेंट्री बना रही है। शुरुआत में ये एक इमोशनल लगती है, लेकिन धीरे-धीरे अल्जाइमर पेशेंट की हरकतें इतनी अजीब और खौफनाक होने लगती हैं कि पूरी टीम की जान पर बन आती है।
    लोग क्या बोल रहे: सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि फिल्म का आखिरी का 20 मिनट का एक सीन इतना भयानक और डिस्टर्बिंग है कि कमजोर दिल वाले उसे झेल नहीं पाएंगे।
    2. द डार्क एंड द विक्ड (The Dark and The Wicked)

    क्यों देखें ये फिल्म?: यह कोई आम भूतिया फिल्म नहीं है जहां अचानक कोई सामने आकर आपको डराए, बल्कि ये एक ऐसी साइकोलॉजिकल हॉरर फिल्म है जो आपके दिमाग से खेलती है।
    कहानी और डर का फैक्टर: इस फिल्म में दो भाई-बहन की कहानी दिखाई गई है जो अपने बीमार पिता की देखभाल करने के लिए एक बेहद सुनसान फार्महाउस पर जाते हैं। वहां पहुंचते ही उन्हें महसूस होता है कि कोई बेहद खतरनाक ताकत उनके पूरे परिवार को खत्म करना चाहती है।
    लोग क्या बोल रहे: लोग कह रहे हैं कि ये फिल्म थोड़ी स्लो है, जिसकी वजह से इसकी रेटिंग कम रह गई। हालांकि हॉरर फिल्में देखने वालों के लिए ये मास्टरपीस है।

    यहां देखिए फिल्म का ट्रेलर
    क्यों देखें ये फिल्म?: थाईलैंड के काले जादू, ओझा और अंधविश्वास पर बनी ये फिल्म रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। इसे मॉक्युमेंट्री स्टाइल में शूट किया गया है यानी आपको ऐसा लगेगा जैसे आप कोई असली घटना लाइव देख रहे हैं।
    कहानी और डर का फैक्टर: ये फिल्म थाईलैंड के एक छोटे से गांव की कहानी है, जहां एक लड़की पर किसी प्राचीन और बहुत ही दुष्ट आत्मा का साया आ जाता है। फिल्म का पहला पार्ट धीरे-धीरे सस्पेंस बनाता है, लेकिन सेकेंड हाफ और इसका क्लाइमेक्स इतना ज्यादा खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला है कि इसे अकेले या अंधेरे में देखने की गलती बिल्कुल न करें।
  • पहली ही फिल्म से मिला ऐसा नाम, जिसने राजीव भाटिया को बना दिया बॉलीवुड का सुपरस्टार अक्षय कुमार

    पहली ही फिल्म से मिला ऐसा नाम, जिसने राजीव भाटिया को बना दिया बॉलीवुड का सुपरस्टार अक्षय कुमार

    अक्षय कुमार ने आखिर क्यों बदला अपना असली नाम?
     नई दिल्ली ।  बॉलीवुड इंडस्ट्री में कई स्टार्स ऐसे हैं, जिन्होंने अपने असली नाम की जगह किसी और नाम से अपनी पहचान बनाई। इस लिस्ट में दिलीप कुमार से लेकर अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान जैसे सुपरस्टार्स का नाम शामिल है। वहीं, इस लिस्ट में बॉलीवुड खिलाड़ी यानी अक्षय कुमार का नाम भी शामिल है।

    अक्षय कुमार का असली नाम ये है
    अक्षय कुमार का असली नाम राजीव हरिओम भाटिया है। उन्होंने फिल्मों में आने से पहले अपना नाम बदल कर अक्षय कुमार कर लिया।

    जानते हैं क्यों अक्षय कुमार ने बदला नाम
    लेकिन इसके पीछे का मजेदार किस्सा शायद ही आप जानते होंगे। अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं आखिर किस वजह से अक्षय ने अपना नाम चेंज किया।

    इंटरव्यू में बताया दिलचस्प किस्सा
    Galatta Plus के साथ एक इंटरव्यू में, बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार (जिनका जन्म राजीव भाटिया के रूप में हुआ था) ने अपना नाम बदलने के पीछे की दिलचस्प कहानी बताई। आम धारणा के विपरीत, उन्होंने नाम बदलने का ये फैसला किसी पंडित या ज्योतिषीय सलाह से प्रभावित होकर नहीं लिया था।


    महज 8 मिनट का रोल

    Galatta Plus के साथ एक इंटरव्यू में, बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार (जिनका जन्म राजीव भाटिया के रूप में हुआ था) ने अपना नाम बदलने के पीछे की दिलचस्प कहानी बताई। आम धारणा के विपरीत, उन्होंने नाम बदलने का ये फैसला किसी पंडित या ज्योतिषीय सलाह से प्रभावित होकर नहीं लिया था।


    एक्ट्रेस को सिखाते हैं मार्शल आर्ट

    इंटरव्यू में अक्षय ने बताया, ‘उन्होंने महेश भट्ट की फिल्म ‘आज’ में महज 8 सेकंड का एक छोटा सा रोल किया था। इस फिल्म में वो 8 सेकंड के लिए आते हैं और एक्ट्रेस को मार्शल आर्ट सिखाते हैं और चले जाते हैं।’


    कुमार गौरव की वजह से बदला नाम

    अक्षय ने आगे कहा, ‘उस फिल्म में शायद ही किसी ने मुझे नोटिस किया हो। इस फिल्म में मेन लीड एक्टर कुमार गौरव थे और फिल्म में उनका नाम ‘अक्षय’ था। तो ये मुझे बहुत अच्छा लगा कि यार ये मेरी पहली फिल्म है और कुमार गौरव का नाम अक्षय है तो मैंने सोचा कि मैं अपना नाम बदल लेता हूं।’

    ऐसे राजीव से अक्षय बने एक्टर
    बस फिर क्या था ये राजीव भाटिया से वो बॉलीवुड के चमकते सितारे अक्षय कुमार बन गए। आज पूरी दुनिया उन्हें इसी नाम से जानती है।

    भूत बंगला के बाद इस फिल्म में आएंगे नजर
    अक्षय कुमार ने अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्में दी हैं। हाल ही में अक्षय कुमार की फिल्म ‘भूत बंगला’ रिलीज हुई थी। वहीं, इन दिनों अक्षय कुमार अपनी अपकमिंग मूवी ‘वेलकम टू द जंगल’ को लेकर सुर्खियों में हैं। ‘वेलकम टू द जंगल’ 26 जून, 2026 को सिनेमाघरों में आएगी

  • जब मोहब्बत हार गई धर्म की दीवारों से, हसरत जयपुरी के दर्द ने जन्म दिया हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक गीत को

    जब मोहब्बत हार गई धर्म की दीवारों से, हसरत जयपुरी के दर्द ने जन्म दिया हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक गीत को

    नई दिल्ली ।  हिंदी सिनेमा के दिग्गज लिरिसिस्ट कुछ ऐसे गाने लिख गए जिन पर आज भी चर्चा होती है। ऐसा ही एक गाना है हसरत जयपुरी का लिखा गाना दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर। यह गाना शम्मी कपूर पर फिल्माया गया है। वह शूट के वक्त मुश्किल से अपने आंसू रोक पाए थे। कम लोग जानते हैं कि हसरत जयपुरी ने जिस दिन यह गाना लिखा था, उनकी प्रेमिका की शादी थी। वह जिसे पसंद करते थे वह हिंदू थी। धर्म की वजह से दोनों नहीं मिल सके और उसकी डोली उठी तो हसरत ने उसकी यादों को दुलहन बनाकर दिल के पास रखने का फैसला लिया।
    लड़कपन में लिखा था गाना
    हसरत जयपुरी ने हिंदी सिनेमा को कई बेहतरीन गाने दिए। वह छोटी उम्र से ही गीत लिखने लगे थे। जब बड़े हुए तो कच्ची उम्र के प्यार के दौरान लिखे गए गाने उन्होंने फिल्मों में दे दिए। ऐसा ही एक गाना था दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर। हसरत जयपुरी को उनके पड़ोस में रहने वाली लड़की से प्यार था। उस जमाने का प्यार बस आंखों-आंखों में और लव-लेटर वाला होता था। हसरत राधा के लिए लव-लेटर और गाने लिखते लेकिन दे नहीं पाते थे। इसी डर में उन्होंने लिख डाला था, ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज ना होना।

    धर्म की वजह से नहीं बनी बात
    दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे। लेकिन धर्म अलग था तो राहें अलग होनी ही थीं। एक दिन आया जब राधा की शादी हो गई। हसरत को कुछ कर नहीं सकते थे लेकिन अपने दर्द को उन्होंने गाने का रूप दिया। उन्होंने लिखा, दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर, यादों को तेरी मैं दुलहन बनाकर, रखूंगा मैं दिल के पास, मत हो मेरी जां उदास…शम्मी कपूर की फिल्म ब्रह्मचारी की सिचुएशन पर यह गाना फिट बैठ गया। हसरत ने यह गाना दिया।

    जब शम्मी कपूर नहीं रोक पाए अपने आंसू
    इस गाने की शूटिंग से जुड़ा किस्सा भी इंट्रेस्टिंग है। इंडियन आइडल के एपिसोड में मनोज मुंतशिर ने बताया था कि गाना गाने के लिए शम्मी कपूर ने पहले मना कर दिया था। उन्होंने जब गाना सुना तो इस सिचुएशन को विजुअलाइज किया। वह इमोशंस कंट्रोल नहीं कर पाए और उनके आंसू आने लगे। उन्होंने गाना सुनकर मना कर दिया और बोले, प्लीज इसे बदल दो। दरअसल इस सीन में उनको रोना नहीं था। शम्मी को लग रहा था कि सीन में घुस गए तो आंसू रोकना मुश्किल हो जाएगा।

  • अजय देवगन का भोजपुरी कनेक्शन: मनोज तिवारी के साथ सुपरहिट फिल्म का जलवा

    अजय देवगन का भोजपुरी कनेक्शन: मनोज तिवारी के साथ सुपरहिट फिल्म का जलवा


    नई दिल्ली।  बॉलीवुड के दमदार अभिनेता Ajay Devgn अपनी बहुआयामी अदाकारी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में एक्शन, रोमांस और कॉमेडी जैसे हर जॉनर में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अजय देवगन ने भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी और वहां भी दर्शकों के बीच जबरदस्त प्रभाव छोड़ा था।

    साल 2006 में आई भोजपुरी फिल्म ‘धरती कहे पुकार के’ में अजय देवगन ने स्पेशल अपीयरेंस किया था। इस फिल्म में उनके साथ भोजपुरी सुपरस्टार Manoj Tiwari मुख्य भूमिका में नजर आए थे। फिल्म में अजय देवगन के साथ बॉलीवुड एक्ट्रेस शर्बानी मुखर्जी भी अहम किरदार में थीं। फिल्म का निर्देशन असलम शेख ने किया था।

    फिल्म की कहानी एक ग्रामीण परिवेश पर आधारित थी, जहां एक गांव को एक अत्याचारी विलेन “वीर मंगिया” के जुल्मों से परेशान दिखाया गया। इसी संघर्ष में मनोज तिवारी और अजय देवगन मिलकर गांव की रक्षा करते हैं और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं। अजय देवगन ने फिल्म में एक पुलिस अधिकारी एसपी कुणाल सिंह का किरदार निभाया था, जो कहानी में निर्णायक मोड़ लेकर आता है।

    फिल्म का एक खास सीन आज भी दर्शकों को याद है, जिसमें मनोज तिवारी पर हमला होता है और अजय देवगन की एंट्री होती है। वह अपनी जान पर खेलकर उन्हें बचाते हैं और गुंडों का सामना करते हैं। यही सीन फिल्म का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ था।

    ‘धरती कहे पुकार के’ सिर्फ अपनी कहानी के कारण ही नहीं, बल्कि अपने गानों और संगीत के कारण भी सुपरहिट रही। फिल्म के गाने मनोज तिवारी, पामेला जैन, मधुश्री, अनुराधा पौडवाल, कैलाश खेर, सोनू कक्कड़ और उदित नारायण जैसे बड़े गायकों ने गाए थे। संगीत निर्देशन धनंजय मिश्रा ने किया था और गीत विनय बिहारी ने लिखे थे।

    फिल्म का बजट लगभग 2 करोड़ रुपये बताया जाता है, जबकि इसका कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन करीब 7 करोड़ रुपये तक पहुंचा था, जिससे यह उस समय की सुपरहिट भोजपुरी फिल्मों में शामिल हो गई। IMDb पर भी फिल्म को अच्छी रेटिंग मिली है।

    आज भी यह फिल्म यूट्यूब पर उपलब्ध है और करोड़ों दर्शक इसे देख चुके हैं। टी-सीरीज के भोजपुरी चैनल पर मौजूद इस फिल्म को अब तक 1 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है, जो इसकी लोकप्रियता को साबित करता है।

    कुल मिलाकर, अजय देवगन का यह भोजपुरी अवतार उनके करियर का एक अनोखा और यादगार हिस्सा बन गया, जिसने साबित किया कि असली स्टारडम भाषा या इंडस्ट्री का मोहताज नहीं होता।

  • रेड कार्पेट पर छाईं मौनी रॉय, नया लुक सोशल मीडिया पर वायरल

    रेड कार्पेट पर छाईं मौनी रॉय, नया लुक सोशल मीडिया पर वायरल

     
    नई दिल्ली। कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 में इस बार बॉलीवुड सितारों का ग्लैमर लगातार चर्चा में बना हुआ है और इसी बीच मौनी रॉय का नया लुक सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। अपने स्टाइलिश अंदाज और खूबसूरती के लिए मशहूर मौनी ने कान्स के रेड कार्पेट पर एक बार फिर ऐसा फैशन स्टेटमेंट दिया, जिसने फैंस को दीवाना बना दिया।

    हाल ही में अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में रहीं मौनी रॉय अब अपने ग्लैमरस अंदाज को लेकर चर्चा बटोर रही हैं। कान्स 2026 से सामने आई उनकी तस्वीरों में उनका ट्रेडिशनल और मॉडर्न फ्यूजन लुक हर किसी का ध्यान खींच रहा है। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार उनके इस नए अवतार की तारीफ कर रहे हैं।

    मौनी ने इस खास मौके पर बेहद क्लासिक लेकिन एलिगेंट आउटफिट चुना। उनका यह ड्रेस डिजाइन गुजरात की प्रसिद्ध पाटन पटोला कला से प्रेरित बताया जा रहा है। नीले बेस कलर पर बने मल्टीकलर प्रिंट्स पूरे आउटफिट को बेहद आकर्षक बना रहे थे। पारंपरिक डिजाइनों और मॉडर्न सिल्हूट का यह मिश्रण उनके लुक को अलग पहचान दे रहा था।

    उनकी ड्रेस की सबसे खास बात पीछे लगी लंबी चमकदार नीली ट्रेल रही, जिसने पूरे लुक में रॉयल टच जोड़ दिया। रेड कार्पेट पर चलते समय यह ट्रेल बेहद शानदार दिखाई दे रही थी और कैमरों की नजरें लगातार उन्हीं पर टिकी रहीं।

    मौनी रॉय ने अपने इस लुक को बहुत ही सटल और मिनिमल तरीके से स्टाइल किया। उन्होंने बेहद हल्का मेकअप रखा और खुले बालों के साथ सिंपल लेकिन क्लासी अंदाज अपनाया। खास बात यह रही कि उन्होंने ‘नो ज्वेलरी’ ट्रेंड को फॉलो किया, जिससे पूरा फोकस उनके आउटफिट और नैचुरल ब्यूटी पर बना रहा।

    सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों पर फैंस लगातार कमेंट कर रहे हैं। कोई उन्हें “क्वीन ऑफ एलिगेंस” बता रहा है तो कोई उनके लुक को कान्स के सबसे खूबसूरत फैशन मोमेंट्स में शामिल कर रहा है। फैशन एक्सपर्ट्स भी उनके इस फ्यूजन स्टाइल की तारीफ कर रहे हैं।

    कान्स फिल्म फेस्टिवल हमेशा से ही इंटरनेशनल फैशन और ग्लैमर का सबसे बड़ा मंच माना जाता है, जहां दुनियाभर के सितारे अपने खास अंदाज से लोगों का ध्यान खींचते हैं। ऐसे में मौनी रॉय का यह रॉयल और स्टाइलिश लुक भारतीय फैशन की खूबसूरती को भी शानदार तरीके से पेश करता नजर आया।

  • बरसात और सोल्जर से स्टारडम पाने के बाद जब बड़े पर्दे से गायब हो गए बॉबी देओल, तब रेस 3 की खौफनाक परफॉर्मेंस ने इंडस्ट्री में दोबारा कायम किया सिक्का

    बरसात और सोल्जर से स्टारडम पाने के बाद जब बड़े पर्दे से गायब हो गए बॉबी देओल, तब रेस 3 की खौफनाक परफॉर्मेंस ने इंडस्ट्री में दोबारा कायम किया सिक्का

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा जगत में स्टारडम और संघर्ष का चोली-दामन का साथ रहा है, जहाँ चमकते सितारों को भी एक वक्त के बाद गुमनामी का सामना करना पड़ता है। ऐसा ही कुछ दौर बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता बॉबी देओल ने भी देखा, जिन्होंने हाल ही में अपने करियर के सबसे मुश्किल दिनों और बड़े पर्दे पर अपनी वापसी की दास्तां को खुलकर साझा किया है। नब्बे के दशक में सुपरहिट फिल्मों से अपने करियर की धमाकेदार शुरुआत करने वाले अभिनेता का ग्राफ एक समय के बाद बॉक्स ऑफिस पर लगातार असफलता मिलने के कारण काफी धीमा पड़ गया था। हालात इस कदर बदल चुके थे कि सिनेमा हॉल से दूरी बनने की वजह से देश की युवा और नई पीढ़ी उन्हें लगभग पूरी तरह से भूलने लगी थी, जिससे उनके भीतर अपनी पहचान खोने का एक गहरा डर पैदा हो गया था।

    करियर के इसी अंधकार भरे और हताशा से भरे दौर में उनके जीवन में एक ऐसा टर्निंग पॉइंट आया जिसने सब कुछ पूरी तरह से बदलकर रख दिया। अभिनेता ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि जब वह काम की तलाश और पहचान के संकट से जूझ रहे थे, तब अचानक फिल्म इंडस्ट्री के दबंग खान ने उन्हें फोन किया। बातचीत के दौरान सुपरस्टार ने बेहद दोस्ताना और मजाकिया लहजे में उनसे पूछा कि क्या वह फिल्म के लिए अपनी शर्ट उतारने को तैयार हैं। इस पर बिना एक पल की भी देरी किए अभिनेता ने भावुक होकर जवाब दिया कि वह अपने काम और वापसी के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। बस इसी एक छोटे से संवाद ने उनकी किस्मत का बंद दरवाजा खोल दिया और उन्हें एक बड़ी मल्टीस्टारर एक्शन फिल्म का हिस्सा बनने का सुनहरा मौका मिल गया।

    साल दो हजार अठारह में आई इस बड़ी कमर्शियल फिल्म ने भले ही समीक्षकों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया पाई हो, लेकिन इसने अभिनेता को दोबारा लाइमलाइट में लाने का सबसे बड़ा जरिया ढूंढ निकाला। बड़े पर्दे पर उनके बदले हुए लुक, शानदार फिजीक और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस को दर्शकों ने खूब सराहा, जिससे इंडस्ट्री के मेकर्स का ध्यान एक बार फिर उनकी तरफ आकर्षित हुआ। नब्बे के दशक में चॉकलेट बॉय और रोमांटिक हीरो के रूप में पहचान बनाने वाले इस कलाकार को अब एक नए और परिपक्व अवतार में देखा जाने लगा था, जिसने उनके अभिनय की दूसरी पारी की एक मजबूत नींव रख दी।

    इस शानदार कमबैक के बाद अभिनेता के करियर की गाड़ी ने जो रफ्तार पकड़ी, वह आज तक थमने का नाम नहीं ले रही है। इसके बाद उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक बेहद लोकप्रिय वेब सीरीज में एक ढोंगी बाबा का मुख्य नकारात्मक किरदार निभाने का मौका मिला, जिसने उनकी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया। इसके तुरंत बाद एक बेहद चर्चित और ब्लॉकबस्टर एक्शन फिल्म में उनके छोटे लेकिन बेहद खूंखार और मूक खलनायक के किरदार ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। आज यह अभिनेता न केवल बड़े निर्देशकों की पहली पसंद बन चुके हैं बल्कि अपनी आगामी फिल्मों के जरिए एक बार फिर भारतीय सिनेमा में अपना पुराना और मजबूत मुकाम हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

  • धर्मेंद्र की याद में टूटे बॉबी देओल, कहा-उनके जाने के बाद जिंदगी में खालीपन रह गया, हर बात आज भी याद आती है

    धर्मेंद्र की याद में टूटे बॉबी देओल, कहा-उनके जाने के बाद जिंदगी में खालीपन रह गया, हर बात आज भी याद आती है

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल एक बातचीत के दौरान उस समय भावुक हो गए जब उन्होंने अपने दिवंगत पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को याद किया। एक चर्चित कार्यक्रम में शामिल हुए बॉबी देओल ने अपने पिता के साथ जुड़ी यादों और उनके व्यक्तित्व को साझा करते हुए कहा कि धर्मेंद्र केवल एक बड़े कलाकार ही नहीं बल्कि उनके लिए जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा थे। बातचीत के दौरान कई बार उनका भावुक होना साफ दिखाई दिया, जिससे माहौल भी गंभीर और संवेदनशील हो गया।

    बॉबी देओल ने कहा कि उनके पिता धर्मेंद्र का व्यक्तित्व इतना सरल, स्नेहपूर्ण और प्रभावशाली था कि उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति उन्हें दिल से पसंद करता था। उन्होंने बताया कि धर्मेंद्र के जाने के बाद परिवार ही नहीं बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के जीवन में भी एक गहरा खालीपन आ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है। बॉबी ने कहा कि उनके लिए उनके पिता का हर पहलू खास था, चाहे वह उनका प्यार हो, उनका व्यवहार हो या फिर उनका गुस्सा, जो भी उन्हें मिला वह हमेशा अपनापन ही महसूस कराता था।

    कार्यक्रम के दौरान जब उनसे उनकी पहचान के बारे में सवाल किया गया तो बॉबी देओल ने बेहद सादगी से जवाब दिया कि उनके लिए सबसे बड़ी पहचान उनका नाम या स्टारडम नहीं बल्कि यह है कि वे धर्मेंद्र के बेटे हैं। इस जवाब ने वहां मौजूद माहौल को और भी भावनात्मक बना दिया। उन्होंने कहा कि यह पहचान उनके लिए गर्व की बात है और जीवनभर रहेगी, क्योंकि उनके पिता ने उन्हें केवल अभिनय ही नहीं बल्कि इंसानियत और विनम्रता भी सिखाई है।

    बॉबी देओल ने यह भी साझा किया कि पिता के जाने के बाद भी उनकी यादें उनके हर दिन का हिस्सा बनी रहती हैं और जीवन के हर महत्वपूर्ण क्षण में उन्हें उनकी कमी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि समय भले ही आगे बढ़ रहा हो लेकिन पिता की मौजूदगी का एहसास आज भी उतना ही मजबूत है। इस दौरान उनकी आंखों में भावुकता साफ झलक रही थी और उनके शब्दों में एक बेटे का दर्द और प्रेम दोनों दिखाई दे रहे थे।

    फिल्मी करियर की बात करें तो बॉबी देओल इन दिनों अपनी आगामी परियोजनाओं को लेकर भी चर्चा में हैं, लेकिन इस बातचीत में उनका पूरा ध्यान अपने निजी जीवन और पिता की यादों पर ही केंद्रित रहा। यह बातचीत दर्शाती है कि एक सफल कलाकार होने के बावजूद उनके भीतर एक बेटे का भावनात्मक पक्ष आज भी उतना ही गहरा और संवेदनशील है।

    Too short description:
    बॉबी देओल अपने पिता धर्मेंद्र को याद करते हुए भावुक हो गए और कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी पहचान “धर्मेंद्र का बेटा होना” है।

    English Keywords:
    Bobby Deol, Dharmendra, emotional interview, Bollywood news, Shekhar Suman show

  • प्रीतम ने ‘मशूका’ पर लगे आरोपों को बताया गलत, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस..

    प्रीतम ने ‘मशूका’ पर लगे आरोपों को बताया गलत, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस..


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘कॉकटेल 2’ का नया गाना ‘मशूका’ रिलीज होते ही जहां दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया, वहीं इसके साथ ही विवादों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस गाने की धुन पर सवाल उठाते हुए इसे कॉपी बताया, जिसके बाद यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। विवाद बढ़ने के साथ ही संगीतकार प्रीतम ने सामने आकर इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी और ट्रोलर्स को स्पष्ट संदेश दिया कि लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।

    सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का दावा है कि ‘मशूका’ की धुन 1993 में रिलीज हुए एक इटालियन गीत से मिलती-जुलती है। इस तुलना के बाद इंटरनेट पर बहस तेज हो गई और कई यूजर्स ने संगीतकार को ट्रोल करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह मुद्दा संगीत प्रेमियों और फिल्म इंडस्ट्री के बीच चर्चा का केंद्र बन गया। हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच गाने की लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ा और यह लगातार ट्रेंड करता रहा।

    विवाद बढ़ने के बाद प्रीतम ने इंस्टाग्राम स्टोरी के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि हर नए गाने के साथ कुछ लोग स्वयंभू संगीत विशेषज्ञ बनकर सामने आ जाते हैं और बेवजह समानताएं खोजने लगते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल गलत हैं बल्कि बिना आधार के किसी कलाकार की मेहनत पर सवाल खड़ा करती हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जहां कुछ लोग उनके समर्थन में आए तो कुछ ने बहस को और आगे बढ़ा दिया।

    फिल्म ‘कॉकटेल 2’ को लेकर पहले से ही दर्शकों में काफी उत्साह है और अब इस नए गाने ने फिल्म के प्रति जिज्ञासा और बढ़ा दी है। निर्माताओं ने पहले ही संकेत दिया है कि फिल्म का ट्रेलर जल्द ही जारी किया जाएगा, जिससे दर्शकों को कहानी की पहली झलक देखने को मिलेगी। इसके बाद फिल्म की रिलीज को लेकर भी उत्सुकता और तेज हो गई है।

    यह फिल्म एक लोकप्रिय पूर्व फिल्म की आध्यात्मिक अगली कड़ी मानी जा रही है, जिसमें नई कहानी और नए किरदारों के साथ दर्शकों को एक ताजा अनुभव देने की तैयारी है। फिल्म में प्रमुख कलाकारों की मौजूदगी भी इसे और अधिक चर्चा में ला रही है।

    कुल मिलाकर ‘मशूका’ गाने को लेकर उठा यह विवाद एक बार फिर यह दिखाता है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी रचना को लेकर तुरंत प्रतिक्रियाएं सामने आ जाती हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने फिल्म और इसके संगीत को और अधिक चर्चा में ला दिया है, जिससे रिलीज से पहले ही इसकी लोकप्रियता बढ़ती दिखाई दे रही है।