Category: Entertainment

  • जब मोहम्मद रफी की आवाज ने रचा इतिहास इस एक गीत ने दिलाया जिंदगी का पहला और आखिरी नेशनल अवॉर्ड

    जब मोहम्मद रफी की आवाज ने रचा इतिहास इस एक गीत ने दिलाया जिंदगी का पहला और आखिरी नेशनल अवॉर्ड


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की बात जब भी होती है तो मोहम्मद रफी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उनकी आवाज में ऐसी मिठास ऐसी गहराई और ऐसा दर्द था जिसने करोड़ों लोगों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली। चार दशक से ज्यादा लंबे अपने शानदार करियर में उन्होंने हजारों गीत गाए और हर तरह की भावनाओं को अपनी गायकी से जीवंत कर दिया। रोमांस हो भक्ति हो देशभक्ति हो या फिर बिछड़ने का दर्द रफी साहब की आवाज हर एहसास को श्रोताओं तक पूरी सच्चाई के साथ पहुंचाती थी। यही वजह है कि आज भी उनके गीत उतने ही पसंद किए जाते हैं जितने अपने दौर में हुआ करते थे।

    मोहम्मद रफी को अपने करियर में कई सम्मान मिले लेकिन एक उपलब्धि ऐसी रही जिसने उनके नाम को भारतीय संगीत इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज कर दिया। यह उपलब्धि थी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार यानी नेशनल अवॉर्ड। खास बात यह रही कि उन्हें यह सम्मान अपने पूरे करियर में केवल एक बार मिला और वह भी एक ऐसे गीत के लिए जो आज भी लोगों की जुबान पर रहता है।

    साल 1977 में रिलीज हुई फिल्म हम किसी से कम नहीं उस दौर की सबसे चर्चित म्यूजिकल फिल्मों में शामिल थी। फिल्म में ऋषि कपूर और तारिक खान मुख्य भूमिका में नजर आए थे। आरडी बर्मन के संगीत से सजी इस फिल्म के लगभग सभी गीत सुपरहिट साबित हुए। बचना ऐ हसीनों चांद मेरा दिल है अगर दुश्मन जमाना और हमको तो यारा तेरी यारी जैसे गीतों ने फिल्म को जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई। लेकिन इन सभी गीतों के बीच एक ऐसा गाना था जिसने लोगों के दिलों को सबसे ज्यादा छुआ और वह था क्या हुआ तेरा वादा।

    यह गीत सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं बल्कि टूटे हुए प्यार के दर्द की ऐसी अभिव्यक्ति बन गया जिसे हर पीढ़ी ने अपनाया। पर्दे पर अभिनेता तारिक खान की भावनाओं को मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज से ऐसा जीवन दिया कि हर श्रोता इस गीत से जुड़ गया। उनकी आवाज में दर्द की गहराई और भावनाओं की सच्चाई इतनी प्रभावशाली थी कि यह गीत सुनने वालों की आंखें नम कर देता था।

    इसी गीत के लिए मोहम्मद रफी को सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का नेशनल अवॉर्ड मिला। यही उनके जीवन का पहला और आखिरी राष्ट्रीय सम्मान साबित हुआ। इतना ही नहीं इसी गीत के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला जबकि गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी को सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर पुरस्कार प्रदान किया गया। इस गीत ने उस दौर के कई दिग्गज गायकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई और संगीत प्रेमियों के दिलों में स्थायी स्थान हासिल किया।

    फिल्म हम किसी से कम नहीं उस वर्ष की सबसे सफल फिल्मों में शामिल रही। अमिताभ बच्चन की कई बड़ी फिल्मों के बीच भी इस फिल्म ने अपने संगीत के दम पर अलग पहचान बनाई। आरडी बर्मन की धुनें और मोहम्मद रफी की जादुई आवाज ने इसे हिंदी फिल्म संगीत की अमर धरोहर बना दिया। आज भी जब क्या हुआ तेरा वादा सुनाई देता है तो यह सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि मोहम्मद रफी की महान गायकी और भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत की याद ताजा कर देता है। यही कारण है कि यह गीत और उससे जुड़ा यह राष्ट्रीय सम्मान हमेशा संगीत प्रेमियों के लिए खास बना रहेगा।

  • रोमांस से लेकर क्राइम और हॉरर तक सब कुछ, इस सप्ताह OTT पर मिलेगा मनोरंजन का फुल डोज

    रोमांस से लेकर क्राइम और हॉरर तक सब कुछ, इस सप्ताह OTT पर मिलेगा मनोरंजन का फुल डोज


    नई दिल्ली । ओटीटी दर्शकों के लिए 13 से 19 जुलाई का सप्ताह मनोरंजन से भरपूर रहने वाला है। इस पूरे सप्ताह नेटफ्लिक्स जियो हॉटस्टार और प्राइम वीडियो जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म पर कुल 13 नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज होने जा रही हैं। खास बात यह है कि इस बार कंटेंट की विविधता दर्शकों को हर तरह का मनोरंजन देने वाली है। रोमांटिक ड्रामा से लेकर क्राइम डॉक्यूसीरीज एक्शन एडवेंचर कॉमेडी हॉरर और साइकोलॉजिकल थ्रिलर तक लगभग हर जॉनर की नई पेशकश इस सप्ताह ओटीटी पर दस्तक देगी।

    इस सप्ताह सबसे ज्यादा हलचल नेटफ्लिक्स पर देखने को मिलेगी जहां अकेले आठ नई फिल्में और सीरीज रिलीज होंगी। इनमें जापानी एक्शन फिल्म गोल्डन कामुय अबाशिरी प्रिजन रेड साइकोलॉजिकल एडवेंचर ड्रामा सकर पंच जर्मन फिल्म 23000 लाइव्स इंडोनेशियन ड्रामा मी बिफोर मी और लोकप्रिय हॉलीवुड सीरीज यंग शेल्डन का छठा सीजन प्रमुख आकर्षण हैं। इसके अलावा क्वारंटाइन 2 टर्मिनल डिजायर और द मैप ऑफ लॉन्गिंग भी दर्शकों के लिए नई कहानी और अलग अनुभव लेकर आएंगी।

    जियो हॉटस्टार भी इस सप्ताह दो बड़ी रिलीज के साथ दर्शकों को आकर्षित करेगा। रोमांटिक पीरियड ड्रामा वुथरिंग हाइट्स क्लासिक उपन्यास पर आधारित एक भव्य प्रस्तुति है जिसमें भावनाओं और रिश्तों की गहराई देखने को मिलेगी। वहीं तमिल रियलिटी डेटिंग शो सेकेंड लव आधुनिक रिश्तों की नई कहानी लेकर आएगा जिसमें पुराने रिश्तों को पीछे छोड़ नए जीवनसाथी की तलाश दिखाई जाएगी। इसके अलावा रेडी ऑर नॉट 2 हेयर आई कम भी कॉमेडी और हॉरर का शानदार मिश्रण पेश करेगी।

    प्राइम वीडियो पर भी इस सप्ताह दो अलग तरह की कहानियां रिलीज होंगी। मर्डर 101 एक ऐसी डॉक्यूसीरीज है जो वर्षों पुराने हत्या के रहस्य की जांच को नए नजरिए से सामने लाती है। वहीं राइड एंड डाई एक्शन और कॉमेडी से भरपूर कहानी है जिसमें दो दोस्तों की जिंदगी एक खतरनाक मिशन के बाद पूरी तरह बदल जाती है और उनके सामने कई अप्रत्याशित चुनौतियां आ खड़ी होती हैं।

    इस सप्ताह की खास बात यह है कि अलग अलग देशों की फिल्में और सीरीज भी भारतीय दर्शकों के लिए उपलब्ध होंगी। जापान जर्मनी अमेरिका और इंडोनेशिया की कहानियां अब हिंदी सहित कई भाषाओं में देखने को मिलेंगी जिससे वैश्विक कंटेंट का दायरा और भी बड़ा हो जाएगा। यही वजह है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म अब सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि दुनिया भर की कहानियों को एक साथ देखने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके हैं।

    यदि आप रोमांस पसंद करते हैं तो वुथरिंग हाइट्स और डिजायर आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं। एक्शन प्रेमियों के लिए गोल्डन कामुय और रेडी ऑर नॉट 2 खास रहेंगे। वहीं सस्पेंस और क्राइम पसंद करने वाले दर्शकों के लिए मर्डर 101 और क्वारंटाइन 2 बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। कुल मिलाकर यह सप्ताह ओटीटी दर्शकों के लिए नई कहानियों नए किरदारों और भरपूर मनोरंजन का शानदार पैकेज लेकर आया है। घर बैठे अलग अलग जॉनर का आनंद लेने वालों के लिए यह पूरा सप्ताह किसी फिल्मी उत्सव से कम नहीं होगा।

  • महज 25 मिनट में लिख दिया गया था बॉलीवुड का यह अमर गीत, किशोर कुमार और लता की आवाज ने बना दिया सदाबहार

    महज 25 मिनट में लिख दिया गया था बॉलीवुड का यह अमर गीत, किशोर कुमार और लता की आवाज ने बना दिया सदाबहार


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के स्वर्णिम दौर में कई ऐसे गीत बने जिन्होंने समय की सीमाओं को पार करते हुए पीढ़ियों के दिलों में अपनी जगह बनाई। इन्हीं अमर गीतों में शामिल है फिल्म आन मिलो सजना का लोकप्रिय गीत अच्छा तो हम चलते हैं। यह गीत सिर्फ अपनी मधुर धुन और भावपूर्ण शब्दों की वजह से ही नहीं बल्कि इसके बनने की अनोखी कहानी के कारण भी आज तक याद किया जाता है। कहा जाता है कि इस गीत की शुरुआत महज चार साधारण शब्दों से हुई और पूरा गीत केवल 25 मिनट में तैयार हो गया।

    साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म आन मिलो सजना में राजेश खन्ना और आशा पारेख की जोड़ी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। फिल्म के इस गीत को महान गायक किशोर कुमार और सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी जबकि इसके बोल प्रसिद्ध गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की मशहूर जोड़ी ने तैयार किया। गीत में प्रेम और बिछड़ने की भावनाओं को बेहद सहज और खूबसूरत अंदाज में पिरोया गया है जिसकी वजह से यह आज भी लोगों की पसंदीदा प्लेलिस्ट का हिस्सा बना हुआ है।

    इस गीत के निर्माण से जुड़ा किस्सा भी कम रोचक नहीं है। बताया जाता है कि आनंद बख्शी और संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल पूरे दिन इस बात पर विचार करते रहे कि फिल्म की धुन पर कौन से शब्द सबसे उपयुक्त बैठेंगे। घंटों की मेहनत के बावजूद कोई संतोषजनक पंक्तियां नहीं बन सकीं। जैसे ही शाम होने लगी तो लक्ष्मीकांत ने बातचीत के दौरान सहज अंदाज में कहा अच्छा तो हम चलते हैं। इस पर आनंद बख्शी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया फिर कब मिलोगे। सामने से उत्तर आया जब तुम कहोगे। बस यही साधारण बातचीत गीत की पहली पंक्तियां बन गई।

    कहा जाता है कि इन चार शब्दों ने आनंद बख्शी की रचनात्मकता को नई दिशा दी और उन्होंने तुरंत लक्ष्मीकांत को रुकने के लिए कहा। इसके बाद महज 25 मिनट के भीतर पूरा गीत तैयार हो गया। यही वजह है कि यह गीत आज भी इस बात का उदाहरण माना जाता है कि कई बार सबसे यादगार रचनाएं अचानक और सहज रूप से जन्म लेती हैं।

    जब यह गीत रिकॉर्ड हुआ तो किशोर कुमार और लता मंगेशकर की जादुई आवाज ने इसमें ऐसी मिठास घोल दी कि यह रिलीज होते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। राजेश खन्ना और आशा पारेख पर फिल्माया गया यह गीत प्रेम और विदाई के भावों को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत करता है। इसकी धुन सरल है लेकिन दिल को छू लेने वाली है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बन गई।

    आज भी शादी समारोहों से लेकर रेडियो और संगीत कार्यक्रमों तक यह गीत उतने ही उत्साह के साथ सुना जाता है जितना पांच दशक पहले सुना जाता था। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि महान संगीत केवल लंबे समय की योजना से नहीं बल्कि रचनात्मक सोच और सही पल में जन्मे विचारों से भी तैयार हो सकता है। अच्छा तो हम चलते हैं सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की उस सुनहरी विरासत का हिस्सा है जिसे समय कभी पुराना नहीं कर सकता।

  • 24 हजार करोड़ कमाने वाली Avatar पर लगा भारतीय फिल्म की कहानी अपनाने का दावा, जानिए पूरा मामला

    24 हजार करोड़ कमाने वाली Avatar पर लगा भारतीय फिल्म की कहानी अपनाने का दावा, जानिए पूरा मामला


    नई दिल्ली । अक्सर बॉलीवुड फिल्मों पर हॉलीवुड या दक्षिण भारतीय फिल्मों की कहानी कॉपी करने के आरोप लगते रहे हैं लेकिन अब एक ऐसा दावा सामने आया है जिसने इस बहस को नया मोड़ दे दिया है। अभिनेता और कॉमेडियन राजीव ठाकुर ने एक इंटरव्यू में कहा कि दुनिया की सबसे सफल फिल्मों में शामिल Avatar की कहानी भारतीय फिल्म ठिकाना से काफी मिलती है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग दोनों फिल्मों की कहानी की तुलना करने लगे हैं।

    राजीव ठाकुर ने बातचीत के दौरान कहा कि हमेशा भारतीय फिल्मों पर कहानी चुराने के आरोप लगाए जाते हैं लेकिन कभी यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या विदेशी फिल्मों ने भी भारतीय सिनेमा से प्रेरणा ली है। उन्होंने दावा किया कि यदि कोई ठिकाना फिल्म की कहानी ध्यान से देखे तो उसे Avatar की कहानी से कई समानताएं दिखाई देंगी। हालांकि उन्होंने यह भी नहीं कहा कि उनके पास इस बात का कोई आधिकारिक प्रमाण है बल्कि उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत राय और कहानी की समानता के आधार पर रखा।

    राजीव ठाकुर के अनुसार ठिकाना की कहानी में एक पुलिस अधिकारी अपराधियों के बीच अपनी पहचान छिपाकर पहुंचता है। वहां वह उस समुदाय का विश्वास जीतता है और उनके साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है। बाद में जब उसी समुदाय पर हमला होने की स्थिति बनती है तो वह उनके पक्ष में खड़ा होकर संघर्ष करता है। उनका कहना है कि Avatar में भी मुख्य किरदार दूसरी दुनिया में जाकर वहां के लोगों के साथ जुड़ता है और अंत में उन्हीं की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ता है। इसी आधार पर उन्होंने दोनों फिल्मों के कथानक में समानता होने का दावा किया।

    हालांकि फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी दो फिल्मों में कुछ कथानक या पात्रों की समानता मिल जाना यह साबित नहीं करता कि एक फिल्म दूसरी की कॉपी है। साहित्य और सिनेमा में नायक का किसी नए समाज में जाना वहां के लोगों का विश्वास जीतना और अंत में उनके लिए संघर्ष करना जैसी संरचनाएं लंबे समय से अलग अलग कहानियों में इस्तेमाल होती रही हैं। इसलिए केवल कहानी के कुछ हिस्सों के आधार पर कॉपी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता।

    जेम्स कैमरून के निर्देशन में बनी Avatar वर्ष 2009 में रिलीज हुई थी और यह दुनिया की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म ने वैश्विक बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड कमाई की और आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स के नए मानक स्थापित किए। वहीं ठिकाना अपने समय की चर्चित हिंदी फिल्मों में शामिल रही थी लेकिन दोनों फिल्मों के बीच किसी आधिकारिक स्तर पर कहानी की समानता या कॉपीराइट विवाद कभी सामने नहीं आया।

    फिलहाल राजीव ठाकुर का बयान चर्चा का विषय बना हुआ है लेकिन इसे तथ्य के बजाय एक व्यक्तिगत दावा माना जा रहा है। जब तक किसी आधिकारिक पक्ष या कानूनी दस्तावेज के जरिए इसकी पुष्टि नहीं होती तब तक यह कहना सही नहीं होगा कि Avatar की कहानी वास्तव में भारतीय फिल्म से ली गई थी। फिर भी इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि प्रेरणा और कॉपी के बीच की सीमा आखिर कहां तय होती है।

  • फराह से लेकर रितेश और कंटेस्टेंट्स तक लॉकअप के हर एपिसोड और हर हफ्ते की फीस ने चौंकाया

    फराह से लेकर रितेश और कंटेस्टेंट्स तक लॉकअप के हर एपिसोड और हर हफ्ते की फीस ने चौंकाया


    नई दिल्ली । नेटफ्लिक्स का चर्चित रियलिटी शो लॉकअप इन दिनों लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। शो में मनोरंजन जगत और सोशल मीडिया की दुनिया के कई चर्चित चेहरे एक साथ नजर आ रहे हैं जिसकी वजह से दर्शकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। शो में होने वाले टास्क भावनात्मक खुलासे और कंटेस्टेंट्स के बीच होने वाले टकराव के साथ साथ अब उनकी फीस भी चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। अलग अलग मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि शो के होस्ट और प्रतियोगियों को हर एपिसोड और हर सप्ताह के हिसाब से लाखों रुपये का भुगतान किया जा रहा है। हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि अब तक मेकर्स की ओर से नहीं की गई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म निर्माता और कोरियोग्राफर फराह खान को लॉकअप के हर एपिसोड के लिए करीब 15 से 25 लाख रुपये की फीस मिल रही है। वहीं अभिनेता रितेश देशमुख कथित तौर पर प्रति एपिसोड 30 से 40 लाख रुपये तक का मेहनताना ले रहे हैं। दोनों की मौजूदगी शो की लोकप्रियता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है और दर्शकों को उनका अंदाज काफी पसंद आ रहा है।

    शो में वाइल्ड कार्ड एंट्री के तौर पर पहुंचीं टीवी अभिनेत्री शिल्पा शिंदे भी लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें हर सप्ताह करीब 15 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। जेल में एंट्री लेते ही उन्होंने अपने बेबाक अंदाज और तीखे तेवर से माहौल बदल दिया जिससे शो में नया रोमांच देखने को मिला।

    लोकप्रिय टीवी अभिनेत्री शिवांगी जोशी भी लॉकअप का अहम चेहरा बनी हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें हर सप्ताह लगभग 10 से 12 लाख रुपये मिल रहे हैं। अपनी सादगी और मजबूत व्यक्तित्व की वजह से वह दर्शकों के बीच लगातार लोकप्रिय बनी हुई हैं।

    टीवी के चर्चित अभिनेता राम कपूर भी इस शो का हिस्सा हैं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उन्हें हर सप्ताह 15 से 20 लाख रुपये का भुगतान किया जा रहा है। हाल ही में उन्होंने अपने जीवन से जुड़ा एक बेहद भावुक अनुभव साझा किया जिसने दर्शकों के साथ साथ शो की होस्ट फराह खान को भी भावुक कर दिया। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी चर्चा हुई।

    टीवी अभिनेता धीरज धूपर कथित तौर पर शो के सबसे अधिक फीस पाने वाले प्रतियोगियों में शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें हर सप्ताह करीब 25 लाख रुपये मिल रहे हैं। वहीं लोकप्रिय अभिनेता हर्षद चोपड़ा को प्रति सप्ताह 12 से 15 लाख रुपये दिए जाने की बात सामने आई है। दोनों कलाकारों की मजबूत फैन फॉलोइंग शो की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद कर रही है।

    हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन सभी फीस से जुड़े आंकड़े अलग अलग मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। नेटफ्लिक्स या शो के निर्माताओं ने अब तक किसी भी कलाकार की फीस को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है। ऐसे में इन रकमों को अंतिम या प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद दर्शकों के बीच यह जानने की उत्सुकता बनी हुई है कि आखिर उनके पसंदीदा सितारे इस चर्चित रियलिटी शो के लिए कितना मेहनताना ले रहे हैं।

  • सोहेल खान ने निजी जिंदगी पर तोड़ी चुप्पी, सीमा सजदेह संग रिश्ते, बच्चों की परवरिश और तलाक के बाद की समझदारी पर खुलकर की बात

    सोहेल खान ने निजी जिंदगी पर तोड़ी चुप्पी, सीमा सजदेह संग रिश्ते, बच्चों की परवरिश और तलाक के बाद की समझदारी पर खुलकर की बात

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता सोहेल खान ने अपनी निजी जिंदगी और पूर्व पत्नी सीमा सजदेह के साथ अपने रिश्ते को लेकर खुलकर बात की है। एक रियलिटी शो में बातचीत के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि जीवन के कठिन दौर में उनके व्यवहार ने उनके वैवाहिक रिश्ते को प्रभावित किया और इसी वजह से उन्होंने उस इंसान को खो दिया, जिससे वह बेहद प्यार करते थे। हालांकि अलग होने के बाद भी दोनों अपने बच्चों की परवरिश के लिए सम्मान और समझदारी के साथ एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं।

    रियलिटी शो के नए एपिसोड में सीमा सजदेह की मौजूदगी ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। दोनों ने वर्षों पुराने रिश्ते, मतभेदों और वर्तमान संबंधों पर खुलकर बातचीत की। शो के दौरान सीमा ने कहा कि उनके बीच कई बार मतभेद और विवाद हुए, लेकिन अब वे इस मंच पर एक नई शुरुआत और सकारात्मक सोच के साथ आए हैं। उनकी इस टिप्पणी के बाद दोनों के बीच सहज बातचीत देखने को मिली।

    सोहेल खान ने भी सीमा का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति से दोबारा मिलना हमेशा अच्छा लगता है, जो कभी उनके परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा हो। उन्होंने माना कि समय बदलने के साथ जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन पुराने रिश्तों के प्रति सम्मान आज भी पहले जैसा ही बना हुआ है।

    बातचीत के दौरान सोहेल ने अपने जीवन के कठिन दौर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब पेशेवर जीवन उम्मीद के मुताबिक नहीं चल रहा था और मानसिक रूप से भी वह चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर रहे थे। उन्होंने स्वीकार किया कि उसी दौर में उनके व्यवहार का असर उनके निजी रिश्तों पर पड़ा और अंततः उन्होंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण संबंध को खो दिया। उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का बड़ा सबक बताया।

    अभिनेता ने यह भी स्पष्ट किया कि तलाक के बावजूद उनके और सीमा के बीच आपसी सम्मान कायम है। उन्होंने कहा कि सीमा उनके दोनों बच्चों की मां हैं और वह उनके प्रति हमेशा सम्मान की भावना रखते हैं। उनके अनुसार, इस शो ने दोनों को फिर से खुलकर बातचीत करने, पुराने अनुभव साझा करने और रिश्ते में आई दूरी को कम करने का अवसर दिया है।

    सोहेल ने बच्चों की परवरिश को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों बच्चे उनके साथ रहते हैं, जबकि सीमा नियमित रूप से उनसे मिलने घर आती हैं। सप्ताह में कई बार वह बच्चों के साथ समय बिताती हैं और उनकी देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। अभिनेता ने यह भी बताया कि सीमा के लिए उनके घर के दरवाजे हमेशा खुले हैं और उन्होंने उन्हें घर की चाबियां भी दे रखी हैं, जिससे दोनों के बीच विश्वास और सहजता का रिश्ता आज भी बना हुआ है।

    सोहेल खान और सीमा सजदेह ने वर्ष 1998 में विवाह किया था। लंबे वैवाहिक जीवन के बाद दोनों ने अलग होने का निर्णय लिया, लेकिन उन्होंने अपने व्यक्तिगत मतभेदों का असर बच्चों की परवरिश पर नहीं पड़ने दिया। आज भी दोनों एक जिम्मेदार अभिभावक के रूप में मिलकर अपने बच्चों का भविष्य संवारने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी यह सोच बताती है कि वैवाहिक संबंध समाप्त होने के बाद भी आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग के जरिए परिवार की जिम्मेदारियों को सकारात्मक ढंग से निभाया जा सकता है।

  • 'आत्मसम्मान से कभी समझौता नहीं किया', इंडस्ट्री के कठिन दौर को याद कर छलका कल्पना अय्यर का दर्द, सम्मान बचाने के लिए छोड़ दिया अभिनय

    'आत्मसम्मान से कभी समझौता नहीं किया', इंडस्ट्री के कठिन दौर को याद कर छलका कल्पना अय्यर का दर्द, सम्मान बचाने के लिए छोड़ दिया अभिनय

    नई दिल्ली । अभिनेत्री कल्पना अय्यर ने अपने लंबे अभिनय सफर और उससे जुड़े संघर्षों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपने करियर में कई कठिन दौर देखे, लेकिन कभी भी आत्मसम्मान और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि मनोरंजन जगत में काम करना उनके लिए केवल पेशा नहीं था, बल्कि अपने मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का माध्यम भी था। जब परिस्थितियां ऐसी बनने लगीं कि सम्मान से समझौता किए बिना काम करना मुश्किल हो गया, तब उन्होंने अभिनय से दूरी बनाने का निर्णय लिया।

    कल्पना अय्यर ने सोशल मीडिया पर अपनी पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए अपने करियर के विभिन्न पड़ावों को याद किया। उन्होंने बताया कि टेलीविजन की दुनिया में उनका प्रवेश एक ऐसे अवसर से हुआ, जिसने उनके अभिनय जीवन को नई दिशा दी। उन्होंने उस महिला निर्देशक का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिन्होंने उनकी पहले से बनी छवि से अलग एक किरदार में उनकी क्षमता को पहचाना और उन पर भरोसा जताया। उसी विश्वास के कारण उन्होंने अपना पहला टेलीविजन शो करने का निर्णय लिया, जिसने उनके लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए।

    उन्होंने कहा कि शुरुआती सफलता के बाद उन्हें कई लोकप्रिय धारावाहिकों में अभिनय करने का मौका मिला। इन परियोजनाओं ने उन्हें एक कलाकार के रूप में पहचान दिलाई और लंबे समय तक वह लगातार काम करती रहीं। इस दौरान उन्हें रचनात्मक संतुष्टि के साथ आर्थिक स्थिरता भी मिली। उन्होंने स्वीकार किया कि वह अपने करियर और निजी जीवन दोनों से संतुष्ट थीं और उस दौर को अपने जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय मानती हैं।

    अभिनेत्री ने बताया कि समय के साथ मनोरंजन उद्योग में कई बदलाव आए। नई कार्यशैली और बदलते माहौल ने कलाकारों के लिए परिस्थितियां अलग बना दीं। उनके अनुसार धीरे-धीरे ऐसे अवसर सामने आने लगे, जहां सम्मानजनक व्यवहार की कमी महसूस होने लगी। कई बार छोटे किरदारों और कम पारिश्रमिक के साथ काम करने का दबाव भी बढ़ा। उन्हें यह महसूस होने लगा कि यदि इंडस्ट्री में बने रहना है तो बिना सवाल किए हर तरह की शर्त स्वीकार करनी होगी।

    कल्पना अय्यर ने कहा कि उन्होंने इस स्थिति पर गंभीरता से विचार किया और अपने जीवन के मूल्यों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया। उनके लिए आत्मसम्मान किसी भी पेशेवर अवसर से अधिक महत्वपूर्ण था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह केवल काम करते रहने के लिए अपनी ईमानदारी, गरिमा और सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकती थीं। यही कारण रहा कि उन्होंने अभिनय से दूर होकर जीवन में आगे बढ़ने का फैसला किया।

    उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए यह भी संकेत दिया कि हर कलाकार के सामने ऐसे क्षण आते हैं, जब उसे सफलता और आत्मसम्मान के बीच चुनाव करना पड़ता है। उनके अनुसार किसी भी पेशे में सम्मान और नैतिक मूल्यों का महत्व सबसे अधिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में लिए गए कुछ फैसले आसान नहीं होते, लेकिन यदि वे अपने सिद्धांतों की रक्षा करते हैं तो लंबे समय में वही सबसे सही साबित होते हैं।

    कल्पना अय्यर की यह भावनात्मक टिप्पणी मनोरंजन जगत में बदलते कार्य परिवेश और कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी ध्यान आकर्षित करती है। उनका मानना है कि किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान उसका आत्मसम्मान और उसके मूल्य होते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने करियर का कठिन लेकिन महत्वपूर्ण फैसला लिया और आज भी उसे सही मानती हैं।

  • बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली लेकिन इतिहास में दर्ज हुई मुंबई मेरी जान दो साल बाद आई फिल्म ने जीता नेशनल अवॉर्ड

    बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली लेकिन इतिहास में दर्ज हुई मुंबई मेरी जान दो साल बाद आई फिल्म ने जीता नेशनल अवॉर्ड

    नई दिल्ली । 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इन हमलों में सैकड़ों लोगों की जान गई और हजारों परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई। इस दर्दनाक घटना के करीब दो साल बाद निर्देशक निशिकांत कामत ने इसी त्रासदी से प्रेरित फिल्म मुंबई मेरी जान बनाई जिसने दर्शकों को मनोरंजन नहीं बल्कि समाज की सच्चाई से रूबरू कराया। वर्ष 2008 में रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी लेकिन समय के साथ इसे भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में गिना जाने लगा। अपनी संवेदनशील कहानी और बेहतरीन प्रस्तुति के दम पर फिल्म ने राष्ट्रीय पुरस्कार भी अपने नाम किया और आज इसकी पहचान एक क्लासिक फिल्म के रूप में होती है।

    मुंबई मेरी जान किसी अपराधी की तलाश या जांच की कहानी नहीं है बल्कि यह उन आम लोगों की मानसिक स्थिति को सामने लाती है जिनकी जिंदगी एक आतंकी हमले के बाद पूरी तरह बदल जाती है। फिल्म कई अलग अलग किरदारों के माध्यम से यह दिखाती है कि आतंकवाद का असर केवल जानमाल के नुकसान तक सीमित नहीं रहता बल्कि समाज की सोच रिश्तों और इंसानी भरोसे को भी गहराई से प्रभावित करता है। यही वजह है कि यह फिल्म आज भी उतनी ही प्रासंगिक महसूस होती है जितनी अपनी रिलीज के समय थी।

    फिल्म में केके मेनन आर माधवन परेश रावल सोहा अली खान इरफान खान और आयशा रजा मिश्रा जैसे शानदार कलाकारों ने अपने अभिनय से कहानी को जीवंत बना दिया। केके मेनन ने ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाया है जो धमाकों के बाद हर मुस्लिम नागरिक को शक की नजर से देखने लगता है। उनका किरदार समाज में फैलने वाले डर और पूर्वाग्रह को बेहद प्रभावशाली तरीके से सामने लाता है।

    आर माधवन फिल्म में रोजाना लोकल ट्रेन से सफर करने वाले निखिल अग्रवाल बने हैं जो धमाके के बाद मानसिक आघात का शिकार हो जाते हैं। उनका किरदार बताता है कि आतंकवादी घटनाओं का असर केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी लोगों को लंबे समय तक परेशान करता है। दूसरी ओर परेश रावल एक अनुभवी पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आते हैं जो अपने व्यवहार और समझदारी से लोगों को नफरत की बजाय इंसानियत का रास्ता अपनाने का संदेश देते हैं।

    सोहा अली खान ने एक टीवी पत्रकार की भूमिका निभाई है जिसकी निजी जिंदगी भी इस हादसे से प्रभावित होती है। वहीं इरफान खान ने थॉमस का किरदार निभाया है जो अफवाहों और भय के माहौल में गलतियां करता है लेकिन अंत में अपनी भूल का एहसास भी करता है। उनका किरदार समाज में फैलती अफवाहों और उनके खतरनाक परिणामों को बेहद संवेदनशील तरीके से दर्शाता है।

    करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सीमित कमाई की लेकिन इसकी कहानी और तकनीकी गुणवत्ता की खूब सराहना हुई। फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया और आज भी इसे भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली ट्रेजेडी ड्रामा फिल्मों में गिना जाता है। IMDb पर 7.7 की रेटिंग इस बात का प्रमाण है कि समय के साथ इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है।

    मुंबई मेरी जान केवल एक फिल्म नहीं बल्कि आतंकवाद के खिलाफ इंसानियत की आवाज है। यह दर्शाती है कि भय और नफरत के बीच भी संवेदनशीलता और आपसी विश्वास ही समाज को मजबूत बनाते हैं। यही संदेश इस फिल्म को वर्षों बाद भी प्रासंगिक और यादगार बनाता है।

  • महाराष्ट्र के मंत्री का आमिर खान पर सीधा हमला: तीसरी शादी को लेकर दिया विवादित बयान, सियासी गलियारों में मची हलचल

    महाराष्ट्र के मंत्री का आमिर खान पर सीधा हमला: तीसरी शादी को लेकर दिया विवादित बयान, सियासी गलियारों में मची हलचल


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता आमिर खान एक बार फिर अपनी व्यक्तिगत जिंदगी को लेकर बड़े राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गए हैं। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता नितेश राणे ने आमिर खान की कथित तीसरी शादी को लेकर बेहद तीखा और आक्रामक रुख अपनाया है। राणे ने अभिनेता पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें ‘लव जिहाद का ब्रांड एंबेसडर’ तक कह डाला है। इस बयान के सामने आने के बाद फिल्म उद्योग से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में एक नई बहस छिड़ गई है और सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा नेता नितेश राणे अपने बेबाक और कड़े बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान आमिर खान के पिछले विवाहों और हालिया चर्चाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि ऐसी शादियां समाज में एक खास तरह का संदेश देती हैं, जिसे वे स्वीकार्य नहीं मानते। राणे ने अभिनेता के निजी फैसलों को सामाजिक और धार्मिक चश्मे से देखते हुए उन पर यह गंभीर टिप्पणी की है। महाराष्ट्र की राजनीति में इस बयान को लेकर अचानक से तापमान बढ़ गया है।

    आमिर खान की बात करें तो वे अपनी बेहतरीन फिल्मों और अभिनय के लिए जाने जाते हैं, लेकिन अपनी शादियों और बयानों के कारण वे अक्सर ट्रोल्स और कुछ राजनीतिक संगठनों के निशाने पर भी रहे हैं। उनकी पहली शादी रीना दत्ता और दूसरी शादी किरण राव से हुई थी, और दोनों ही शादियां आपसी सहमति से तलाक के मोड़ पर खत्म हुईं। हाल के दिनों में उनकी तीसरी शादी से जुड़ी कुछ खबरें और अफवाहें मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तैर रही थीं, जिसने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।

    इस पूरे मामले पर अभी तक आमिर खान या उनके आधिकारिक प्रवक्ताओं की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आमतौर पर आमिर खान ऐसे व्यक्तिगत विवादों पर चुप्पी साधे रखना ही पसंद करते हैं, लेकिन फिल्म जगत के कई समर्थकों और प्रशंसकों ने नितेश राणे के इस बयान को पूरी तरह से गैर-जरूरी और किसी के निजी जीवन में अत्यधिक हस्तक्षेप बताया है। विपक्ष के कुछ नेताओं ने भी भाजपा पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयानों का सहारा लेने का आरोप लगाया है।

    चुनावों और राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के बीच इस तरह के संवेदनशील मुद्दों का उछलना कोई नई बात नहीं है। नितेश राणे के इस बयान ने मनोरंजन जगत और राजनीति के बीच की कड़वाहट को एक बार फिर से उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या यह विवाद महज एक राजनीतिक बयानबाजी बनकर शांत हो जाता है या फिर इस पर बॉलीवुड और अन्य राजनीतिक दलों की तरफ से कोई बड़ी और संगठित प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।

  • संगीत जगत को अपूरणीय क्षति नहीं रहीं महान पार्श्व गायिका एस जानकी छह दशक तक सुरों से सजाया भारतीय सिनेमा

    संगीत जगत को अपूरणीय क्षति नहीं रहीं महान पार्श्व गायिका एस जानकी छह दशक तक सुरों से सजाया भारतीय सिनेमा


    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत की सबसे सशक्त और मधुर आवाजों में शुमार महान पार्श्व गायिका एस जानकी अब हमारे बीच नहीं रहीं। 88 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली और अपने पीछे ऐसा संगीत खजाना छोड़ गईं जो आने वाली कई पीढ़ियों तक श्रोताओं के दिलों में गूंजता रहेगा। उनके निधन से फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर है। दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर पूरे देश के संगीत प्रेमी इस खबर से भावुक हैं क्योंकि एक ऐसा युग समाप्त हो गया जिसने अपनी आवाज से लाखों लोगों की भावनाओं को शब्द और सुर दिए।

    जानकारी के अनुसार शुक्रवार रात उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई जिसके बाद मैसुरु के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि परिवार की ओर से की गई। उनकी पोती अप्सरा व्यद्युला ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए बताया कि उनकी प्रिय दादी और महान गायिका अब इस दुनिया में नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि परिवार के बीच शांतिपूर्वक विदा लेने वाली जानकी ने अपने गीतों के जरिए करोड़ों लोगों के जीवन में खुशियां और यादें छोड़ी हैं। उन्होंने लोगों से परिवार की निजता का सम्मान करने की भी अपील की।

    एस जानकी का नाम भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने अपने छह दशक लंबे करियर में लगभग 48 हजार गीत गाए और यह उपलब्धि उन्हें देश की सबसे अधिक गीत रिकॉर्ड करने वाली गायिकाओं में शामिल करती है। उनकी आवाज केवल तमिल कन्नड़ तेलुगु और मलयालम फिल्मों तक सीमित नहीं रही बल्कि उन्होंने हिंदी उड़िया बंगाली पंजाबी उर्दू सहित करीब 20 भारतीय भाषाओं में भी अपनी गायकी का जादू बिखेरा। फिल्मों के अलावा उन्होंने एल्बम टेलीविजन और रेडियो के लिए भी अनेक यादगार गीत गाए जिनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है।

    23 अप्रैल 1938 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के गुंटूर जिले में जन्मी एस जानकी का संगीत से जुड़ाव बचपन से ही हो गया था। महज नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी थी। उनके पिता आयुर्वेदिक चिकित्सक और शिक्षक थे जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नादस्वरम वादक पेडीस्वामी से संगीत की शुरुआती शिक्षा ली लेकिन विशेष बात यह रही कि उन्होंने कभी शास्त्रीय संगीत की औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की। अपनी स्वाभाविक प्रतिभा और अथक अभ्यास के दम पर उन्होंने भारतीय संगीत जगत में वह मुकाम हासिल किया जिसकी मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है।

    एस जानकी की आवाज की सबसे बड़ी विशेषता उसकी भावनात्मक गहराई और विविधता थी। रोमांटिक गीतों से लेकर भक्ति संगीत लोकधुनों और संवेदनशील रचनाओं तक उन्होंने हर शैली को पूरी आत्मा के साथ निभाया। उनकी गायकी ने अनगिनत फिल्मों को यादगार बनाया और कई पीढ़ियों के संगीत प्रेमियों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बनी रही।

    उनका निधन केवल एक कलाकार का जाना नहीं बल्कि भारतीय संगीत की एक अमूल्य विरासत का युगांत है। हालांकि वह अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी आवाज उनके गीत और उनकी कला हमेशा जीवित रहेंगे। भारतीय संगीत जगत उन्हें हमेशा श्रद्धा सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करेगा।