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  • OTT पर धमाका: 8 से 14 जून के बीच 12 फिल्में और सीरीज होंगी रिलीज, नेटफ्लिक्स पर आएंगी 9 टाइटल्स

    OTT पर धमाका: 8 से 14 जून के बीच 12 फिल्में और सीरीज होंगी रिलीज, नेटफ्लिक्स पर आएंगी 9 टाइटल्स


    नई दिल्ली। जून का दूसरा हफ्ता ओटीटी दर्शकों के लिए मनोरंजन का बड़ा पैकेज लेकर आ रहा है। 8 जून से 14 जून 2026 के बीच अलग-अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कुल 12 फिल्में, वेब सीरीज और एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज होने जा रही हैं। खास बात यह है कि इनमें से 9 टाइटल्स अकेले नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होंगे, जिससे प्लेटफॉर्म पर इस हफ्ते जबरदस्त कंटेंट की भरमार देखने को मिलेगी।

    इस हफ्ते की शुरुआत बच्चों के लिए लोकप्रिय शैक्षिक कार्यक्रम ‘सेसमे स्ट्रीट’ के नए सीजन से होगी, जो 8 जून को रिलीज होगा। इसके बाद 9 जून को नेटफ्लिक्स पर स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री ‘नॉर्वे: द डार्क हॉर्स’ दर्शकों को फुटबॉल की एक इमोशनल कहानी से जोड़ती नजर आएगी।

    10 जून को ओटीटी पर कई बड़े टाइटल रिलीज होंगे। प्राइम वीडियो पर रोमांटिक फिल्म ‘एवरी इयर आफ्टर’ प्रेम और रिश्तों की उलझनों को दिखाएगी। इसी दिन नेटफ्लिक्स पर क्राइम थ्रिलर ‘कलर्स ऑफ इविल: ब्लैक’ और सर्वाइवल रियलिटी शो ‘आउटलास्ट: द जंगल’ भी रिलीज होंगे। फैमिली ड्रामा ‘माई फैमिली’ भी इसी दिन दर्शकों के सामने आएगा, जो परिवार और रिश्तों की भावनात्मक कहानी पेश करेगा।

    11 जून को नेटफ्लिक्स पर लीगल क्राइम थ्रिलर ‘द एविल लॉयर’, फील-गुड सीरीज ‘स्वीट मैगनोलियास’ का नया सीजन और जापानी एक्शन सीरीज ‘वायरल हिट’ रिलीज होगी। यह दिन खास तौर पर थ्रिलर और ड्रामा पसंद करने वालों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

    12 जून को ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर और भी विविध कंटेंट देखने को मिलेगा। हॉरर कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ (नेटफ्लिक्स) दर्शकों को मनोरंजन और डर का मिश्रण देगी, जबकि प्राइम वीडियो पर क्राइम थ्रिलर ‘राख’ 1978 के चर्चित रंगा-बिल्ला केस से प्रेरित कहानी दिखाएगी। वहीं जियो हॉटस्टार पर मलयालम फिल्म ‘ड्रिडम’ एक पुलिस अफसर की जांच पर आधारित थ्रिलर कहानी लेकर आएगी।

    इन रिलीज़ का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि हर जॉनर के दर्शकों के लिए कुछ न कुछ मौजूद है—क्राइम थ्रिलर से लेकर फैमिली ड्रामा, रोमांस, हॉरर और रियलिटी शो तक। नेटफ्लिक्स इस हफ्ते सबसे ज्यादा 9 टाइटल्स के साथ कंटेंट की दौड़ में आगे नजर आ रहा है, जबकि प्राइम वीडियो और जियो हॉटस्टार भी मजबूत लाइनअप के साथ दर्शकों को आकर्षित करने की तैयारी में हैं।

    ओटीटी की बढ़ती लोकप्रियता के बीच यह हफ्ता दर्शकों के लिए खास साबित होने वाला है। जहां एक तरफ बड़े बजट की सीरीज और फिल्में रिलीज हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ विविध विषयों पर आधारित कंटेंट दर्शकों को लगातार बांधे रखने का वादा कर रहा है।

  • 27 साल बाद फिर गूंज सकती है ‘ताल’ की धुन, सुभाष घई ने ‘ताल-2’ को लेकर फैंस से मांगी राय

    27 साल बाद फिर गूंज सकती है ‘ताल’ की धुन, सुभाष घई ने ‘ताल-2’ को लेकर फैंस से मांगी राय


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा की चर्चित म्यूजिकल फिल्मों में शामिल ‘ताल’ एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। फिल्म के निर्माता-निर्देशक Subhash Ghai ने इसके संभावित सीक्वल को लेकर ऐसा संकेत दिया है, जिससे फिल्म प्रेमियों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने प्रशंसकों से सीधा सवाल पूछा कि क्या उन्हें ‘ताल-2’ का निर्माण करना चाहिए। इस सवाल के सामने आते ही फिल्म के सीक्वल को लेकर उत्साह बढ़ गया है।

    सुभाष घई ने अपने पोस्ट में फिल्म ‘ताल’ से जुड़ी एक खास याद साझा की। उन्होंने बताया कि उन्हें इस फिल्म के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली थी। उन्होंने उस अवसर को याद किया जब प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक Roger Ebert ने फिल्म की प्रशंसा की थी। घई ने बताया कि एक विशेष फिल्म समारोह में ‘ताल’ के प्रदर्शन के दौरान फिल्म को संगीत, प्रस्तुति और अभिनय के लिए काफी सराहा गया था।

    निर्देशक के अनुसार, फिल्म को उस दौर में भारतीय सिनेमा की एक अलग पहचान के रूप में देखा गया था। इसकी कहानी, भावनात्मक प्रस्तुति और संगीत ने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों का भी ध्यान आकर्षित किया था। यही वजह है कि वर्षों बाद भी यह फिल्म दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में गिनी जाती है।

    अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सुभाष घई ने यह भी संकेत दिया कि यदि ‘ताल-2’ बनती है तो इसमें नई पीढ़ी के कलाकारों और एक युवा निर्देशक को अवसर दिया जा सकता है। उन्होंने सीधे तौर पर फैंस से राय मांगी कि क्या दर्शक इस क्लासिक फिल्म की नई कहानी को बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं। इस सवाल के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म प्रेमियों की प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आने लगी हैं।

    साल 1999 में रिलीज हुई Taal उस दौर की सबसे सफल और चर्चित फिल्मों में शामिल रही थी। फिल्म में Aishwarya Rai, Anil Kapoor और Akshaye Khanna ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसके गीत और संगीत भी जबरदस्त लोकप्रिय हुए थे। आज भी इसके कई गाने श्रोताओं की पसंदीदा सूची में शामिल हैं।

    फिल्म की सफलता का एक बड़ा कारण इसका संगीत भी माना जाता है। शानदार गीतों, आकर्षक लोकेशनों और प्रभावशाली अभिनय ने इसे उस समय की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल कर दिया था। बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल करने के साथ-साथ फिल्म ने कई पुरस्कार भी अपने नाम किए थे।

    फिल्म उद्योग के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्लासिक फिल्मों के सीक्वल और रीबूट को दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला है। ऐसे में यदि ‘ताल-2’ का निर्माण होता है तो यह नई पीढ़ी के दर्शकों को पुराने दौर की लोकप्रिय फिल्म से जोड़ने का अवसर भी बन सकता है। हालांकि, फिलहाल सीक्वल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सुभाष घई के सवाल ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि इस दिशा में संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

  • घंटों शूटिंग, मिनटों में डायलॉग याद और बदलते इमोशन्स, नेहा हरसोरा ने बताया डेली सोप का असली संघर्ष

    घंटों शूटिंग, मिनटों में डायलॉग याद और बदलते इमोशन्स, नेहा हरसोरा ने बताया डेली सोप का असली संघर्ष

    नई दिल्ली । टेलीविजन इंडस्ट्री की चमक-दमक और लोकप्रियता के पीछे कलाकारों की कड़ी मेहनत और निरंतर संघर्ष छिपा होता है। दर्शकों तक रोजाना नए एपिसोड पहुंचाने के लिए कलाकारों और पूरी टीम को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। इसी विषय पर अभिनेत्री नेहा हरसोरा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि डेली सोप में काम करना आसान नहीं है, लेकिन यही चुनौतियां उन्हें लगातार बेहतर बनने की प्रेरणा देती हैं।

    नेहा हरसोरा का कहना है कि डेली सोप की दुनिया बाहर से जितनी आकर्षक दिखाई देती है, वास्तविकता में उतनी ही मेहनत और समर्पण की मांग करती है। कलाकारों को कई बार लगातार घंटों तक शूटिंग करनी पड़ती है और सीमित समय में अपने किरदार के अनुरूप प्रदर्शन देना होता है। उनके अनुसार, अभिनय का यह क्षेत्र मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर कलाकारों की परीक्षा लेता है।

    उन्होंने बताया कि कई बार कलाकारों को शूटिंग शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही संवाद दिए जाते हैं। ऐसे में उन्हें तुरंत याद करना और कैमरे के सामने बिना किसी गलती के प्रस्तुत करना बड़ी चुनौती होती है। इसके अलावा, एक ही दिन में अलग-अलग भावनात्मक दृश्यों की शूटिंग करनी पड़ती है। कभी कलाकार को भावुक दृश्य निभाना होता है तो कुछ ही समय बाद हल्के-फुल्के या खुशमिजाज दृश्य में नजर आना पड़ता है। इस तरह तेजी से भावनाओं में बदलाव करना आसान नहीं होता।

    अभिनेत्री का मानना है कि डेली सोप का व्यस्त शेड्यूल कलाकारों की व्यक्तिगत जिंदगी को भी प्रभावित करता है। सुबह से देर रात तक चलने वाली शूटिंग के कारण कलाकारों को परिवार के साथ पर्याप्त समय बिताने का अवसर नहीं मिल पाता। हालांकि, उन्होंने कहा कि जो लोग अभिनय को अपना करियर चुनते हैं, उन्हें इन चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

    नेहा ने स्पष्ट किया कि कठिनाइयों के बावजूद उन्हें अपने काम से बेहद लगाव है। उनके अनुसार, कैमरे के सामने खड़े होकर किरदार को जीवंत बनाना, संवादों को आत्मसात करना और दर्शकों तक भावनाओं को पहुंचाना उन्हें संतुष्टि देता है। अभिनय उनके लिए केवल पेशा नहीं बल्कि एक जुनून है, जिसे वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाती हैं।

    उन्होंने फिल्मों और वेब सीरीज की कार्यप्रणाली की तुलना भी की। नेहा के अनुसार, फिल्मों और वेब सीरीज में कलाकारों को अपने किरदार को समझने, तैयारी करने और भाषा या व्यवहार पर काम करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। कई प्रोजेक्ट्स में कलाकारों के लिए विशेष वर्कशॉप भी आयोजित की जाती हैं। इसके विपरीत, डेली सोप में काम की गति काफी तेज होती है और कलाकारों को सीमित समय में ही सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना पड़ता है।

    उन्होंने कहा कि यही तेज रफ्तार और निरंतर चुनौतियां डेली सोप को अन्य माध्यमों से अलग बनाती हैं। हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने का अवसर मिलता है। उनके मुताबिक, संघर्ष और मेहनत से मिली सफलता का आनंद भी अलग होता है और यही बात उन्हें इस क्षेत्र से जोड़े रखती है।

  • णवीर सिंह के सतरंगी फैशन पर कभी हंसती थीं अभिनेत्री मधु: ट्रोल करने के बाद अब जागा साथ काम करने का अरमान, 'डॉन 3' स्टार को बताया शानदार कलाकार

    णवीर सिंह के सतरंगी फैशन पर कभी हंसती थीं अभिनेत्री मधु: ट्रोल करने के बाद अब जागा साथ काम करने का अरमान, 'डॉन 3' स्टार को बताया शानदार कलाकार

    नई दिल्ली। बॉलीवुड के ‘धुरंधर’ और वर्सेटाइल अभिनेता रणवीर सिंह अपने बेहतरीन अभिनय के साथ-साथ अपने सतरंगी, अनूठे और अजीबोगरीब ड्रेसिंग सेंस के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं। उनके इस जुदा अंदाज पर जहां लाखों फैंस फिदा रहते हैं, वहीं कई बार उन्हें सोशल मीडिया और इंडस्ट्री के भीतर भी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। अब इस फेहरिस्त में नब्बे के दशक की मशहूर अभिनेत्री मधु का नाम भी जुड़ गया है। मधु ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया है कि वह भी एक वक्त पर रणवीर सिंह के पहनावे और उनके फैशन चॉइस पर जमकर हंसती थीं और उन्हें ट्रोल किया करती थीं।

    अभिनेत्री मधु ने अपने पुराने दिनों और विचारों को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने शुरुआती दौर में रणवीर सिंह को पब्लिक अपीयरेंस और अवॉर्ड फंक्शन्स में लीक से हटकर कपड़े पहने हुए देखा था, तो उन्हें यह काफी अजीब लगा था। मधु के अनुसार, वह अक्सर रणवीर के लुक को देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पाती थीं और सोचती थीं कि कोई अभिनेता ऐसे अजीब कपड़े पहनकर बाहर कैसे आ सकता है। उन्होंने माना कि वह भी उन लोगों में शामिल थीं जो रणवीर सिंह के कपड़ों का मजाक उड़ाते थे और उनके स्टाइल स्टेटमेंट को समझ नहीं पाती थीं।

    हालांकि, समय बीतने के साथ-साथ रणवीर सिंह के प्रति मधु की सोच में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है। मधु ने कहा कि जैसे-जैसे उन्होंने रणवीर सिंह की फिल्मों को देखा और पर्दे पर उनके दमदार अभिनय को महसूस किया, वैसे-वैसे कपड़ों को लेकर उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया। उन्होंने महसूस किया कि रणवीर सिंह सिर्फ कपड़ों से नहीं, बल्कि अपनी असाधारण अभिनय क्षमता से इंडस्ट्री पर राज कर रहे हैं। ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘पद्मावत’ और ‘गली बॉय’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों ने मधु को प्रभावित किया।

    अपने इस बदले हुए नजरिए के बाद, अब अभिनेत्री मधु ने रणवीर सिंह के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करने की अपनी तीव्र इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वह रणवीर सिंह की अभिनय कला की बहुत बड़ी प्रशंसक बन चुकी हैं और भविष्य में यदि मौका मिले, तो वह उनके साथ एक फिल्म में काम करना पसंद करेंगी। मधु ने रणवीर सिंह को मौजूदा दौर का एक बेहद प्रभावशाली और ऊर्जावान कलाकार बताया, जो किसी भी किरदार में पूरी तरह जान फूंकने का दम रखता है।

    गौरतलब है कि रणवीर सिंह इन दिनों अपनी आगामी बड़ी फिल्मों को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं, जिनमें फरहान अख्तर के निर्देशन में बनने वाली ‘डॉन 3’ सबसे प्रमुख है। इसके अलावा वह इंडस्ट्री के कई बड़े प्रोजेक्ट्स का भी हिस्सा हैं। दूसरी तरफ, ‘रोजा’ और ‘जेंटलमैन’ जैसी कल्ट फिल्मों से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री मधु भी इन दिनों विभिन्न प्रोजेक्ट्स और इंटरव्यूज के जरिए लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। उनका यह बयान यह साफ तौर पर दिखाता है कि कला और टैलेंट के आगे अंततः हर तरह की रूढ़िवादिता और पूर्वाग्रह घुटने टेक देते हैं।

  • बॉक्स ऑफिस पर राम चरण की 'पेद्दी' का महातूफान: टिकट बिक्री में अपनी ही ब्लॉकबस्टर 'RRR' को पछाड़ा, ढाई दिन में बिके 20 लाख से ज्यादा टिकट

    बॉक्स ऑफिस पर राम चरण की 'पेद्दी' का महातूफान: टिकट बिक्री में अपनी ही ब्लॉकबस्टर 'RRR' को पछाड़ा, ढाई दिन में बिके 20 लाख से ज्यादा टिकट

    नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के ग्लोबल सुपरस्टार राम चरण और बॉलीवुड अभिनेत्री जाह्नवी कपूर की हालिया रिलीज फिल्म ‘पेद्दी’ ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी धुआंधार कमाई और टिकटों की रिकॉर्डतोड़ बिक्री से तहलका मचा दिया है। फिल्म समीक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रियाओं के बावजूद, इस एक्शन-ड्रामा फिल्म को देखने के लिए थिएटर्स में दर्शकों का हुजूम उमड़ रहा है। आलम यह है कि टिकट बुकिंग के सबसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बुकमाईशो पर इस फिल्म ने कमाई और बुकिंग के कई पुराने कीर्तिमानों को ध्वस्त करते हुए इतिहास रच दिया है। फिल्म ने महज ढाई दिनों के भीतर अपनी सफलता का जो परचम लहराया है, उसने ट्रेड एनालिस्ट्स को भी हैरान कर दिया है।

    रिलीज के साथ ही ‘पेद्दी’ ने टिकटों की रफ्तार के मामले में राम चरण की ही ऑस्कर विजेता और ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘RRR’ की बराबरी कर ली है। बुकमाईशो पर सबसे तेजी से 20 लाख टिकट बेचने वाली फिल्मों की सूची में ‘पेद्दी’ अब ‘RRR’ के साथ संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर आ गई है। इस ऐतिहासिक लिस्ट में केवल प्री-रिलीज के जरिए सबसे आगे रहने वाली ‘पुष्पा 2: द रूल’ पहले नंबर पर है, जबकि ‘कल्कि 2898 AD’ डेढ़ दिन के साथ दूसरे और ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूज़न’ दो दिन के रिकॉर्ड के साथ तीसरे स्थान पर काबिज है। ‘पेद्दी’ ने महज 2.5 दिनों में 20 लाख का आंकड़ा पार कर इस सूची में अपनी जगह पक्की की है।

    फिल्म की इस तूफानी रफ्तार का अंदाजा इसके शुरुआती आंकड़ों से लगाया जा सकता है। अपनी रिलीज से पहले ही भारी बज के कारण फिल्म के प्री-सेल में रिकॉर्ड 8,74,900 टिकट बिक चुके थे। इसके बाद गुरुवार को ओपनिंग डे पर जनता ने इस पर खूब प्यार लुटाया और पहले दिन 6,51,040 टिकटों की बुकिंग हुई। यह सिलसिला शुक्रवार को भी थमा नहीं और उस दिन भी 3,87,780 टिकट बिक गए। शनिवार की सुबह तक कुल बिक्री का ग्राफ 19,13,720 तक पहुंच चुका था, जो वीकेंड की छुट्टी शुरू होते ही कुछ ही घंटों में 20 लाख के पार चला गया। इस जबरदस्त रिस्पॉन्स के दम पर फिल्म ने केवल दो दिनों में ही दुनिया भर से लगभग 150 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया है।

    बात सिर्फ कुल टिकटों की संख्या तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ‘पेद्दी’ ने पीक आवर्स यानी सबसे व्यस्त घंटों के दौरान प्रति घंटा टिकट बिक्री में भी एक नया बेंचमार्क सेट किया है। बुकमाईशो पर इस फिल्म ने अपने सबसे व्यस्ततम समय में एक घंटे के भीतर 47,330 टिकट बेचने का रिकॉर्ड बनाया है। इस मामले में राम चरण की इस फिल्म ने जूनियर एनटीआर की ‘देवरा’ और खुद राम चरण की ही बहुचर्चित फिल्म ‘गेम चेंजर’ को बहुत पीछे छोड़ दिया है। ‘देवरा’ जहां पीक आवर्स में 38.02K टिकटों के साथ छठे और ‘गेम चेंजर’ 36.74K टिकटों के साथ सातवें नंबर पर है, वहीं ‘पेद्दी’ ने चौथे स्थान पर छलांग लगाई है।

    पीक आवर्स की इस विशिष्ट टॉप 10 सूची में भी अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा 2’ (107.65K) शीर्ष पर है, प्रभास की ‘कल्कि 2898 AD’ (95.71K) दूसरे और ‘सालार’ (54.76K) तीसरे स्थान पर बनी हुई है। ‘पेद्दी’ के बाद इस सूची में ‘राजा साहब’, ‘एमएसजी’, ‘दे कॉल हिम ओजी’ और ‘एसकेवी’ जैसी फिल्में शामिल हैं। हालांकि कई फिल्म समीक्षकों ने ‘पेद्दी’ की कहानी और स्क्रीनप्ले को लेकर कुछ कमजोर कड़ियां गिनाई थीं, लेकिन थिएटर्स की तरफ खिंची चली आ रही आम जनता के उत्साह ने यह साफ कर दिया है कि राम चरण का स्क्रीन प्रेजेंस और जाह्नवी कपूर के साथ उनकी नई ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में पूरी तरह कामयाब रही है।

  • "हिम्मत है तो शाहरुख खान से कहकर दिखाओ…" रोमांटिक फिल्मों के लिए अभिनेत्रियों की उम्र पर उठने वाले सवालों पर भड़कीं तापसी पन्नू

    "हिम्मत है तो शाहरुख खान से कहकर दिखाओ…" रोमांटिक फिल्मों के लिए अभिनेत्रियों की उम्र पर उठने वाले सवालों पर भड़कीं तापसी पन्नू


    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्रियों के करियर की उम्र और उनके किरदारों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। अब इस गंभीर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री तापसी पन्नू ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के दोहरे रवैये को उजागर किया है। तापसी पन्नू ने खुलासा किया है कि जैसे ही कोई अभिनेत्री 30 वर्ष की उम्र पार करती है, फिल्म गलियारों में उसे रोमांटिक-कॉमेडी फिल्मों के लिए अनुपयुक्त या ‘बड़ी उम्र’ का माना जाने लगता है। अभिनेत्री ने साफ किया कि यह रूढ़िवादी सोच सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण भारतीय सिनेमा (साउथ इंडस्ट्री) में भी पैर पसारे हुए है।

    एक हालिया इंटरव्यू में अपने संघर्ष और कड़वे अनुभवों को साझा करते हुए तापसी पन्नू ने कहा कि वह अपने ‘मिड 20’ (25-26 साल की उम्र) में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बनी थीं। इसके बाद किसी भी कलाकार को खुद को साबित करने और एक मजबूत मुकाम हासिल करने में कम से कम तीन से चार साल का कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब तक एक अभिनेत्री इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाती है और एक स्थापित पोजीशन पर पहुंचती है, तब तक उसकी उम्र 30 वर्ष को पार कर जाती है। इसके ठीक बाद मेकर्स और आलोचकों का यह कहना शुरू हो जाता है कि आप अब इतनी यंग नहीं बची हैं कि किसी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म में मुख्य भूमिका निभा सकें।

    तापसी पन्नू ने इस बात पर गहरी आपत्ति जताई कि पर्दे पर रोमांटिक किरदारों को निभाने के लिए हमेशा बहुत कम उम्र की ही लड़की की जरूरत क्यों समझी जाती है। उन्होंने पुरुषों और महिलाओं के बीच होने वाले इस उम्र के भेदभाव (एजिस्म) पर उंगली उठाते हुए कहा कि यह नियम केवल अभिनेत्रियों पर ही लागू होता है, पुरुष कलाकारों पर नहीं। उन्होंने समाज और इंडस्ट्री के इस सच को सामने रखते हुए कहा कि बड़ी उम्र के पुरुष अभिनेता पर्दे पर बेहद कम उम्र की लड़कियों के साथ रोमांस करते हैं, जिसे सहजता से स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन अभिनेत्रियों के मामले में नजरिया पूरी तरह बदल जाता है।

    इस दौरान तापसी ने साउथ फिल्म इंडस्ट्री का एक बेहद चौंकाने वाला किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने वहां के कुछ सीनियर सुपरस्टार्स के साथ फिल्में कीं, तो उसके बाद वहां के युवा अभिनेताओं ने उनके साथ काम करने से साफ मना कर दिया। युवा अभिनेताओं का मानना था कि सीनियर एक्टर्स के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करने के बाद तापसी उनके अपोजिट फिट नहीं बैठेंगी। इसी बात पर तीखा पलटवार करते हुए तापसी ने कहा कि क्या किसी में इतनी हिम्मत है कि वह यही बात सुपरस्टार शाहरुख खान से जाकर बोल सके? उन्होंने कहा कि शाहरुख खान जैसे महानायक के साथ काम करने के बाद किसी भी अभिनेत्री का करियर और जीवन पूरी तरह बदल जाता है, वहां उम्र का कोई टैबू नहीं होता, लेकिन अन्य स्तरों पर अभिनेत्रियों को इस रूढ़िवादिता का सामना करना पड़ता है।

    इंटरव्यू के दौरान तापसी ने सोशल मीडिया से करीब एक साल लंबे ब्रेक के बाद अपनी वापसी पर भी बात की। उन्होंने बताया कि वह वर्चुअल दुनिया में समय बर्बाद करने के बजाय अपनी वास्तविक जिंदगी का आनंद लेना चाहती थीं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज के दौर में ब्रांड्स की यह अनिवार्य शर्त होती है कि वे केवल उन्हीं चेहरों के साथ काम करना चाहते हैं जो सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय और दिखाई देते हैं। काम की बात करें तो तापसी आखिरी बार फिल्म ‘अस्सी’ में एक वकील की भूमिका में नजर आई थीं और आने वाले समय में वह ‘वो लड़की है कहां’ और ‘गांधारी’ जैसी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाती नजर आएंगी।

  • शिल्पा शिंदे के समर्थन में उतरीं अर्शी खान ने हिना खान पर निकाला पुराना गुस्सा, बीमारी के वक्त मैसेज का जवाब न देने पर लगाया गंभीर आरो

    शिल्पा शिंदे के समर्थन में उतरीं अर्शी खान ने हिना खान पर निकाला पुराना गुस्सा, बीमारी के वक्त मैसेज का जवाब न देने पर लगाया गंभीर आरो

    नई दिल्ली। टेलीविजन जगत के सबसे विवादित रियलिटी शो ‘बिग बॉस 11’ की पुरानी प्रतिद्वंद्विता एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए सतह पर आ गई है। अभिनेत्री शिल्पा शिंदे द्वारा हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान किए गए चौंकाने वाले खुलासे के बाद से ही मनोरंजन जगत में एक नई बहस छिड़ गई है। इस पूरे मामले में जब ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ फेम अभिनेत्री हिना खान ने शिल्पा शिंदे के रुख की आलोचना करते हुए उन पर निशाना साधा, तो दोनों अभिनेत्रियों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई। अब इस हाई-प्रोफाइल विवाद में उनकी पूर्व सह-प्रतियोगी अर्शी खान भी शामिल हो गई हैं, जिन्होंने हिना खान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

    यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब शिल्पा शिंदे ने भारती सिंह और हर्ष लिंबाचिया के टॉक शो में यह स्वीकार किया कि उन्होंने ‘भाभी जी घर पर हैं’ के शो मेकर्स पर जो सेक्शुअल हैरेसमेंट (यौन उत्पीड़न) का आरोप लगाया था, वह पूरी तरह से सच नहीं था बल्कि एक रणनीति का हिस्सा था। शिल्पा ने कहा कि उनके दिल पर यह एक बहुत बड़ा बोझ था, जिसे वह अब उतारना चाहती थीं। शिल्पा के इस कबूलनामे के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें बुरी तरह ट्रोल करना शुरू कर दिया। इसी क्रम में हिना खान ने भी शिल्पा के इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पर उंगली उठाई, जिसके बाद शिल्पा ने भी हिना पर पलटवार करते हुए उन पर पब्लिसिटी के लिए अपनी बीमारी का इस्तेमाल करने का ताना मार दिया।

    अब हिना और शिल्पा की इस आपसी जंग में अर्शी खान ने सीधे तौर पर एंट्री ली है और उन्होंने हिना खान पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी तीखी भड़ास निकाली है। अर्शी खान ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक स्टोरी साझा करते हुए हिना खान के रवैये की कड़े शब्दों में निंदा की। अर्शी ने लिखा कि जब कुछ समय पहले हिना खान बीमार थीं, तो उन्हें बहुत बुरा लगा था और उन्होंने हिना की सेहत के लिए बाकायदा दुआएं भी मांगी थीं। अर्शी के मुताबिक, उन्होंने हिना को सहानुभूति का एक संदेश भी भेजा था, लेकिन हिना खान ने पलटकर यह बताने के लिए एक साधारण सा रिप्लाई तक नहीं किया कि वह अब कैसी हैं।

    अर्शी खान ने हिना खान पर गंभीर आरोप लगाते हुए आगे लिखा कि इस महिला की हर एक चीज केवल और केवल पब्लिसिटी बटोरने के लिए होती है। अर्शी ने हिना के पुराने रियलिटी शो के सफर का जिक्र करते हुए उन्हें ‘काले दिल वाली’ तक कह डाला और दावा किया कि वह जो ‘बिग बॉस’ के घर के अंदर थीं, आज भी बिल्कुल वैसी ही हैं। इसके साथ ही अर्शी खान ने शिल्पा शिंदे की सराहना करते हुए लिखा कि शाबाश शिल्पा, हम इस पूरे मामले में सिर्फ तुम्हारे साथ खड़े हैं।

    शिल्पा शिंदे ने भी अर्शी खान के इस खुले समर्थन को हाथों-हाथ लिया और अर्शी की इस इंस्टाग्राम स्टोरी को अपने अकाउंट पर दोबारा शेयर करते हुए उनका सार्वजनिक रूप से धन्यवाद व्यक्त किया। गौरतलब है कि ‘बिग बॉस 11’ के दौरान भी अर्शी खान और शिल्पा शिंदे के बीच काफी अच्छा तालमेल देखा गया था और उस वक्त भी यह दोनों कंटेस्टेंट्स घर के भीतर हिना खान की रणनीतियों और उनके व्यवहार के खिलाफ लगातार मुखर रही थीं। शो खत्म होने के बरसों बाद भी इन अभिनेत्रियों के बीच का मनमुटाव कम नहीं हुआ है।

    दूसरी तरफ, अपने ऊपर हो रही भारी ट्रोलिंग को लेकर शिल्पा शिंदे ने एक वीडियो जारी कर साफ कहा है कि उन्हें लोगों की नकारात्मक टिप्पणियों से कोई फर्क नहीं पड़ता। शिल्पा का कहना है कि जब वह अतीत में मुश्किल दौर से गुजर रही थीं, तब भी इंडस्ट्री में किसी ने उनका साथ नहीं दिया था और आज भी उन्हें किसी से किसी तरह के समर्थन की उम्मीद नहीं है। बहरहाल, अर्शी खान के इस विवाद में कूदने के बाद से सोशल मीडिया पर हिना खान और शिल्पा शिंदे के फैंस के बीच भी जंग और तेज हो गई है।

  • जब मोहम्मद रफी के सदाबहार गीत पर अड़ गए थे शम्मी कपूर: राज कपूर के दखल के बाद रिलीज हुआ गाना, प्रीमियर पर खड़े होकर तालियां बजाने लगे थे देव आनंद और आरडी बर्मन

    जब मोहम्मद रफी के सदाबहार गीत पर अड़ गए थे शम्मी कपूर: राज कपूर के दखल के बाद रिलीज हुआ गाना, प्रीमियर पर खड़े होकर तालियां बजाने लगे थे देव आनंद और आरडी बर्मन

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में मोहम्मद रफी और शम्मी कपूर की जोड़ी को संगीत की दुनिया की सबसे कामयाब जोड़ियों में से एक माना जाता है। रफी साहब की बुलंद आवाज और शम्मी कपूर के अनूठे डांसिंग स्टाइल ने मिलकर बॉलीवुड को दर्जनों सदाबहार गाने दिए हैं। हालांकि, संगीत के इस सुनहरे सफर के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया था जब शम्मी कपूर खुद मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर के एक प्रतिष्ठित गाने के पूरी तरह खिलाफ हो गए थे। वह इस गाने को फिल्म से हटवाना या बदलवाना चाहते थे, लेकिन बाद में इसी गाने ने सिनेमाघरों में ऐसा तूफान लाया कि हर कोई देखता रह गया।

    यह पूरा विवाद साल 1962 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म ‘प्रोफेसर’ के एक बेहद लोकप्रिय गीत से जुड़ा हुआ है। इस फिल्म के संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी उस दौर की मशहूर संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन के कंधों पर थी। उन्होंने फिल्म के लिए एक बेहद खूबसूरत और रूहानी धुन तैयार की थी, जिसके बोल थे ‘आवाज देके हमें तुम बुलाओ’। इस रूमानी गीत को सुर कोकिला लता मंगेशकर और संगीत के सरताज मोहम्मद रफी ने अपनी जादुई आवाजों से सजाया था। रिकॉर्डिंग के बाद संगीत से जुड़े सभी लोग इस गाने की तारीफ कर रहे थे, लेकिन जैसे ही फिल्म के मुख्य अभिनेता शम्मी कपूर ने इसे सुना, उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जता दी।

    अभिनेता शम्मी कपूर को असल में इस बात से गहरी दिक्कत थी कि गाने की शुरुआत मुख्य अभिनेत्री की आवाज से हो रही थी और पूरे दृश्य में उनका खुद का स्क्रीन टाइम बहुत कम नजर आ रहा था। उनका मानना था कि एक मुख्य अभिनेता के तौर पर इस गाने में उनकी मौजूदगी को सही ढंग से नहीं दर्शाया गया है और वह इसमें नाममात्र के लिए ही दिखाई दे रहे हैं। शम्मी कपूर इस बात पर अड़ गए कि इस गाने को फिल्म से बदल दिया जाए। जब यह विवाद काफी बढ़ गया और मेकर्स असमंजस की स्थिति में आ गए, तब फिल्म इंडस्ट्री के ‘शोमैन’ राज कपूर को इस मामले में बीच-बचाव करने के लिए आगे आना पड़ा।

    राज कपूर ने शम्मी कपूर के गुस्से को शांत करते हुए उन्हें समझाया कि वह इस कंपोजिशन और गाने के मिजाज पर भरोसा रखें। उन्होंने शम्मी को सलाह दी कि गाने को बिना किसी बदलाव के फिल्म में वैसे ही रहने दिया जाए जैसा इसे रिकॉर्ड किया गया है। राज कपूर के दखल और उनके विजन पर भरोसा करते हुए शम्मी कपूर आखिरकार मान गए। इसके बाद जब फिल्म बनकर तैयार हुई, तो उद्योग के तमाम दिग्गजों के लिए फिल्म का एक भव्य प्रीमियर शो आयोजित किया गया। इस प्रीमियर में देव आनंद, आरडी बर्मन और महमूद जैसी सिनेमा जगत की कई नामचीन हस्तियां मौजूद थीं।

    थिएटर के भीतर जब फिल्म के दौरान यह गाना बजना शुरू हुआ, तो शुरुआत में लता मंगेशकर की सुरीली आवाज को हॉल में बैठे सभी दिग्गज बेहद शांति और एकाग्रता से सुन रहे थे। जैसे ही गाने के बीच में मोहम्मद रफी की जादुई लाइनें गूंजी, थिएटर का माहौल पूरी तरह बदल गया। रफी साहब की आवाज का जादू ऐसा चला कि वहां बैठे संगीतकार आरडी बर्मन, सदाबहार अभिनेता देव आनंद और मशहूर कॉमेडियन महमूद अपनी सीटों से खड़े हो गए और उत्साह में आकर लगातार तालियां बजाने लगे। थिएटर के अंदर मौजूद दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का यह अद्भुत रिस्पॉन्स देखकर खुद शम्मी कपूर भी पूरी तरह हैरान रह गए थे।

    इस घटना के बाद शम्मी कपूर को भी अहसास हो गया कि स्क्रीन टाइम से ज्यादा गाने की आत्मा और उसकी गायकी मायने रखती है। बाद में यह गाना न केवल चार्टबस्टर साबित हुआ, बल्कि इसे हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन गानों की फेहरिस्त में शामिल किया गया। मोहम्मद रफी ने इसके बाद भी शम्मी कपूर के लिए ‘चाहें कोई मुझे जंगली कहे’, ‘बदन पे सितारे’, ‘तारीफ करूं क्या उसकी’, और ‘ये चांद सा रोशन चेहरा’ जैसे अनगिनत कल्ट गाने गाए, जिन्होंने शम्मी कपूर को इंडस्ट्री का ‘एल्विस प्रेस्ली’ बनाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

  • मेथड एक्टिंग के चक्कर में नाना पाटेकर ने जड़ा था जोरदार तमाचा, सह-कलाकार मधु ने भी तुरंत सेट पर ही सिखाया सबक, आधा दिन पहले खत्म हुई थी शूटिंग

    मेथड एक्टिंग के चक्कर में नाना पाटेकर ने जड़ा था जोरदार तमाचा, सह-कलाकार मधु ने भी तुरंत सेट पर ही सिखाया सबक, आधा दिन पहले खत्म हुई थी शूटिंग

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत में कलाकारों के आपसी तालमेल और अभिनय के तौर-तरीकों को लेकर अक्सर कई तरह के किस्से सामने आते रहते हैं। ऐसा ही एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा अपने जमाने की मशहूर अभिनेत्री मधु ने किया है। उन्होंने नब्बे के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘यशवंत’ की शूटिंग के दौरान का एक ऐसा वाकया साझा किया है, जिसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मधु के अनुसार, एक बेहद संवेदनशील दृश्य की शूटिंग के दौरान उनके और दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के बीच सेट पर ही थप्पड़बाजी की नौबत आ गई थी।

    यह घटना फिल्म के सबसे महत्वपूर्ण दृश्य की शूटिंग के दौरान घटी थी, जिसके लिए निर्देशक अनिल मात्तू ने पूरा एक दिन निर्धारित किया था। मधु ने एक साक्षात्कार में बताया कि वह एक ऐसी अभिनेत्री रही हैं जो ‘स्विच ऑन और स्विच ऑफ’ पद्धति पर काम करती हैं, यानी कैमरे के सामने आते ही किरदार में आना और कट बोलते ही बाहर निकल जाना। इस सीन में उन्हें रोना था और इसके लिए वह आंखों में ग्लिसरीन का इस्तेमाल करना चाहती थीं, लेकिन उनके सह-कलाकार नाना पाटेकर इसके पूरी तरह खिलाफ थे। नाना पाटेकर फिल्म जगत में अपनी सजीव और ‘मेथड एक्टिंग’ के लिए जाने जाते हैं और वह चाहते थे कि दृश्य पूरी तरह वास्तविक लगे।

    अभिनेत्री के मुताबिक, कई बार रिहर्सल करने के बावजूद जब वह स्वाभाविक रूप से रोने में असमर्थ रहीं, तो नाना पाटेकर ने अचानक उन्हें बेहद जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। बिना किसी पूर्व सूचना या तैयारी के अचानक पड़े इस तमाचे से मधु अवाक रह गईं और दर्द तथा गुस्से के कारण उनकी आंखों से सचमुच आंसू निकल आए। नाना पाटेकर के इस अप्रत्याशित व्यवहार ने मधु को इतना क्रोधित कर दिया कि उन्होंने बिना सोचे-समझे तुरंत पलटवार किया और सेट पर मौजूद पूरी टीम के सामने नाना पाटेकर को भी एक करारा थप्पड़ रसीद कर दिया।

    इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद सेट पर कुछ समय के लिए सन्नाटा पसर गया था, लेकिन इसके कारण दृश्य में जो वास्तविक भावनाएं और गुस्सा उभरकर आया, उसने पूरे शॉट को एक ही टेक में जीवंत कर दिया। स्वाभाविक और वास्तविक प्रतिक्रिया होने के कारण निर्देशक को वह शॉट बेहद पसंद आया। नतीजा यह हुआ कि जिस महत्वपूर्ण दृश्य की शूटिंग के लिए पूरा दिन तय किया गया था, वह महज आधे दिन में ही पूरी तरह से संपन्न हो गया। इस शॉट के पूरा होते ही नाना पाटेकर ने भी स्थिति को संभालते हुए पैकअप की घोषणा कर दी।

    बरसों पुराने इस वाकये को याद करते हुए मधु ने स्पष्ट किया कि इस तीखी नोकझोंक के बावजूद नाना पाटेकर का इरादा कभी भी उनके साथ दुर्व्यवहार करने का नहीं था। वह केवल पर्दे पर अभिनय के स्तर को उत्कृष्ट बनाना चाहते थे। जब भी वह सेट पर ग्लिसरीन का उपयोग करती थीं या अपने किरदार से भटकती थीं, तो नाना पाटेकर थोड़े असहज और नाखुश दिखाई देते थे। मधु ने माना कि नाना पाटेकर चाहते थे कि सह-कलाकार केवल अभिनय न करें, बल्कि उस किरदार को पूरी शिद्दत से जिएं, और यही वजह थी कि उस दिन उन्होंने अनजाने में मधु को भी एक ‘मेथड एक्टर’ बना दिया था।

    बॉलीवुड में नाना पाटेकर के कड़क मिजाज और काम के प्रति उनके सख्त रवैये को लेकर पहले भी कई किस्से सामने आते रहे हैं। इससे पहले दिग्गज फिल्ममेकर सई परांजपे ने भी फिल्म ‘दिशा’ की शूटिंग के दौरान चप्पल के एक सीन को लेकर नाना पाटेकर के साथ हुई अपनी तीखी बहस का जिक्र किया था। बहरहाल, मधु द्वारा साझा किया गया यह संस्मरण यह दिखाता है कि सिनेमा के पर्दे पर दिखने वाले बेहतरीन दृश्यों के पीछे कलाकारों को कभी-कभी किस तरह की शारीरिक और मानसिक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है।

  • ‘विवाह’ की पूनम से बनीं करोड़ों दिलों की पसंद, अमृता राव की सादगी और अभिनय का आज भी कायम है जादू

    ‘विवाह’ की पूनम से बनीं करोड़ों दिलों की पसंद, अमृता राव की सादगी और अभिनय का आज भी कायम है जादू

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा और सादगी के बल पर दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाई। अभिनेत्री अमृता राव भी उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं जिन्होंने बिना किसी बड़े विवाद या अत्यधिक प्रचार के अपने अभिनय और व्यक्तित्व के दम पर अलग पहचान स्थापित की। खासतौर पर फिल्म ‘विवाह’ में निभाया गया उनका ‘पूनम’ का किरदार आज भी दर्शकों की स्मृतियों में जीवंत है।

    7 जून 1981 को मुंबई में जन्मीं अमृता राव का पालन-पोषण एक पारंपरिक कोंकणी परिवार में हुआ। बचपन से ही पढ़ाई और सांस्कृतिक गतिविधियों में रुचि रखने वाली अमृता ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में पूरी की। बाद में उन्होंने मनोविज्ञान विषय के साथ स्नातक की पढ़ाई शुरू की, लेकिन मॉडलिंग और मनोरंजन जगत में बढ़ती संभावनाओं ने उन्हें एक अलग दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    करियर की शुरुआत उन्होंने मॉडलिंग से की। कई विज्ञापनों में दिखाई देने के बाद उन्हें संगीत वीडियो में भी काम करने का अवसर मिला। कैमरे के सामने उनकी सहज उपस्थिति और आत्मविश्वास ने विज्ञापन जगत का ध्यान आकर्षित किया। धीरे-धीरे फिल्म निर्माताओं की नजर उन पर पड़ी और उन्हें फिल्मों में अवसर मिलने लगे।

    साल 2002 में रिलीज हुई फिल्म ‘अब के बरस’ से अमृता ने बॉलीवुड में कदम रखा। हालांकि उनकी वास्तविक पहचान वर्ष 2003 में आई फिल्म ‘इश्क विश्क’ से बनी। इस फिल्म में उनके अभिनय को सराहा गया और युवा दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। फिल्म की सफलता ने उन्हें उद्योग में मजबूत स्थान दिलाया और उनके लिए नए अवसरों के द्वार खोले।

    इसके बाद अमृता ने ‘मस्ती’, ‘मैं हूं ना’, ‘वाह लाइफ हो तो ऐसी’, ‘शिखर’ और ‘प्यारे मोहन’ जैसी फिल्मों में काम किया। हालांकि उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में फिल्म ‘विवाह’ को विशेष स्थान प्राप्त है। इस पारिवारिक फिल्म में निभाए गए ‘पूनम’ के किरदार ने उन्हें देशभर के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। उनके सरल, संस्कारी और संवेदनशील चरित्र को लोगों ने बेहद पसंद किया और यही भूमिका उनके करियर की पहचान बन गई।

    अमृता राव ने हिंदी फिल्मों के अलावा दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने तेलुगू फिल्म उद्योग में भी काम किया और कई चर्चित कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा की। इसके बाद ‘वेलकम टू सज्जनपुर’, ‘जॉली एलएलबी’, ‘सत्याग्रह’, ‘सिंह साहब द ग्रेट’ और ‘ठाकरे’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया।

    निजी जीवन में अमृता ने लंबे समय तक रेडियो जॉकी अनमोल सूद के साथ संबंध में रहने के बाद वर्ष 2016 में विवाह किया। दोनों ने सादगीपूर्ण तरीके से शादी की और आज एक बेटे के माता-पिता हैं। विवाह के बाद अमृता ने परिवार को प्राथमिकता देते हुए फिल्मों में अपनी सक्रियता सीमित कर दी।

    वर्तमान समय में अमृता राव डिजिटल माध्यमों के जरिए अपने प्रशंसकों से जुड़ी हुई हैं। वह अपने पति के साथ एक लोकप्रिय यूट्यूब चैनल संचालित करती हैं, जहां जीवन से जुड़े अनुभव, पारिवारिक किस्से और विभिन्न चर्चित हस्तियों के साथ बातचीत साझा करती हैं। अभिनय, सादगी और संतुलित जीवनशैली के कारण अमृता राव आज भी भारतीय दर्शकों के बीच सम्मान और लोकप्रियता बनाए हुए हैं।