Category: International

  • तीस्ता पर चीन-बांग्लादेश समझौता, भारत के लिए बढ़ी टेंशन? सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास नई रणनीतिक हलचल

    तीस्ता पर चीन-बांग्लादेश समझौता, भारत के लिए बढ़ी टेंशन? सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास नई रणनीतिक हलचल


    नई दिल्ली । चीन और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी परियोजना को लेकर सहयोग का नया अध्याय शुरू हो गया है। दोनों देशों ने तीस्ता सहित अन्य नदियों के जल प्रबंधन, तकनीकी सहयोग और संभावित वित्तीय सहायता को लेकर सहमति जताई है। इस फैसले को भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि तीस्ता नदी परियोजना भारत के बेहद संवेदनशील सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ के निकट स्थित है। यही संकरा भूभाग पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला सबसे अहम संपर्क मार्ग है।

    बीजिंग में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, जल संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास पर व्यापक सहयोग को लेकर चर्चा हुई। बांग्लादेश ने तीस्ता परियोजना के लिए चीन से आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहयोग की मांग भी की है। चीन लंबे समय से इस परियोजना में रुचि दिखाता रहा है और अब दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों ने इस सहयोग को नई गति दे दी है।

    तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला आधिकारिक चीन दौरा माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने जल संसाधन प्रबंधन के अलावा कई अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि तीस्ता परियोजना से सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी, बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलेगी और लाखों लोगों की आजीविका बेहतर होगी।

    हालांकि इस समझौते को भारत की सुरक्षा और रणनीतिक हितों के नजरिए से भी देखा जा रहा है। तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से गुजरते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। परियोजना का स्थान सिलिगुड़ी कॉरिडोर के काफी निकट होने के कारण विशेषज्ञ इसे सामरिक दृष्टि से संवेदनशील मानते हैं। यही कारण है कि चीन की बढ़ती मौजूदगी पर भारत की नजर बनी हुई है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। पश्चिम बंगाल की सहमति नहीं बनने के कारण दोनों देशों के बीच व्यापक जल समझौता अब तक नहीं हो सका है। ऐसे में बांग्लादेश द्वारा चीन के साथ बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल यह सहयोग जल संसाधन प्रबंधन और विकास परियोजनाओं तक सीमित बताया जा रहा है, लेकिन भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर रखेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परियोजना का वास्तविक स्वरूप क्या होता है और इसका क्षेत्रीय सुरक्षा तथा कूटनीतिक संबंधों पर कितना प्रभाव पड़ता है।

  • डेनमार्क में अजान पर बैन की तैयारी! सरकार बोली- ऐसा न लगे कि इस्लामाबाद में हैं

    डेनमार्क में अजान पर बैन की तैयारी! सरकार बोली- ऐसा न लगे कि इस्लामाबाद में हैं


    नई दिल्ली । यूरोप में प्रवासन और धार्मिक पहचान को लेकर जारी बहस के बीच डेनमार्क ने एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। देश की सरकार मस्जिदों से लाउडस्पीकर पर दी जाने वाली अजान पर कानूनी प्रतिबंध लगाने की संभावना की समीक्षा कर रही है। सरकार का कहना है कि यह फैसला देश की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक वातावरण को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया जा रहा है। हालांकि अभी यह केवल प्रस्ताव के स्तर पर है और इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।

    डेनमार्क के इमिग्रेशन मंत्री मोर्टेन बोडस्कोव ने कहा कि सरकार यह जांच कर रही है कि क्या धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के प्रावधानों के तहत अजान पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेनमार्क की छतों के ऊपर लाउडस्पीकर से अजान की आवाज नहीं सुनाई देनी चाहिए और लोगों को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि वे किसी दूसरे देश के धार्मिक माहौल में हैं। उनके इस बयान ने पूरे यूरोप में नई बहस छेड़ दी है।

    सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक उद्घोषणाओं को नियंत्रित करना देश की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए जरूरी हो सकता है। वहीं दूसरी ओर इस प्रस्ताव के विरोध में यह दलील दी जा रही है कि डेनमार्क का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और सार्वजनिक रूप से धार्मिक गतिविधियां करने की स्वतंत्रता देता है। ऐसे में किसी विशेष धार्मिक परंपरा पर रोक लगाने का फैसला कानूनी चुनौती का सामना कर सकता है।

    डेनमार्क में लगभग 2.7 लाख मुस्लिम आबादी रहती है और पूरे देश में करीब 100 मस्जिदें हैं। हाल के वर्षों में यूरोप के कई देशों में प्रवासन हिजाब धार्मिक पहचान और सार्वजनिक धार्मिक गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हुई है। कई देशों ने पहले भी धार्मिक प्रतीकों और सार्वजनिक आयोजनों को लेकर नए नियम लागू किए हैं।

    सरकार फिलहाल कानूनी विशेषज्ञों की राय ले रही है ताकि यह तय किया जा सके कि प्रस्ताव संविधान और मानवाधिकार संबंधी कानूनों के अनुरूप है या नहीं। यदि कानूनी समीक्षा सकारात्मक रहती है तो सरकार संसद में नया विधेयक ला सकती है। हालांकि इसके लिए राजनीतिक सहमति और संसदीय मंजूरी भी जरूरी होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल अजान तक सीमित नहीं है बल्कि यूरोप में राष्ट्रीय पहचान धार्मिक स्वतंत्रता और प्रवासन नीति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में डेनमार्क सरकार की कानूनी समीक्षा और राजनीतिक निर्णय पर पूरे यूरोप की नजर रहेगी क्योंकि इसका असर अन्य देशों की नीतियों पर भी पड़ सकता है।

  • भारत-सेशेल्स रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती, स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होंगे प्रधानमंत्री मोदी

    भारत-सेशेल्स रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती, स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होंगे प्रधानमंत्री मोदी


    नई दिल्ली । सेशेल्स की आजादी की 50वीं वर्षगांठ भारत और सेशेल्स के रिश्तों को नई ऊंचाई देने का अवसर बनने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून 2026 तक सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर रहेंगे, जहां वह राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर होने वाली यह यात्रा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे भरोसेमंद संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर सेशेल्स में उत्साह का माहौल है। स्थानीय नागरिकों से लेकर भारतीय समुदाय तक सभी इस यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि भारत और सेशेल्स के बीच पिछले कुछ वर्षों में सहयोग लगातार बढ़ा है और प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा इस साझेदारी को नई गति देगी। उनका मानना है कि व्यापार, निवेश, समुद्री सुरक्षा और विकास परियोजनाओं में सहयोग और मजबूत होगा।

    सेशेल्स में रहने वाले भारतीय समुदाय ने भी प्रधानमंत्री के दौरे का गर्मजोशी से स्वागत किया है। समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध बेहद मजबूत हैं। बड़ी संख्या में भारतीय सेशेल्स की अर्थव्यवस्था, व्यापार और विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ऐसे में शीर्ष स्तर की यह यात्रा दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्तों को और गहरा करेगी तथा नए अवसरों के द्वार खोलेगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले वर्ष 2015 में सेशेल्स की यात्रा कर चुके हैं। इस बार उनका दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है क्योंकि यह सेशेल्स की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती के अवसर पर हो रहा है। समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी हिस्सा लेंगे, जो दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा और समुद्री सहयोग का प्रतीक होंगे।

    दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता व्यापार, निवेश, विकास सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, जलवायु परिवर्तन और हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदारी सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। प्रधानमंत्री सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगे और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे।

    भारत और सेशेल्स के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोगों के बीच गहरे संपर्क पर आधारित रहे हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में सेशेल्स भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है। भारत के ‘महासागर’ विजन और ग्लोबल साउथ को मजबूत करने की नीति में भी सेशेल्स की अहम भूमिका है। यही वजह है कि यह यात्रा केवल एक औपचारिक राजकीय दौरा नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा और व्यापक होगा तथा हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास के साझा लक्ष्य को नई मजबूती मिलेगी।

  • संयुक्त राष्ट्र में भारत की दमदार पैरवी शांति निर्माण के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व और समान साझेदारी पर दिया जोर

    संयुक्त राष्ट्र में भारत की दमदार पैरवी शांति निर्माण के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व और समान साझेदारी पर दिया जोर


    नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र महासभा में आयोजित उच्चस्तरीय बहस के दौरान भारत ने वैश्विक शांति निर्माण को लेकर अपना स्पष्ट और दूरदर्शी दृष्टिकोण दुनिया के सामने रखा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने कहा कि किसी भी देश में स्थायी शांति तभी स्थापित की जा सकती है जब उसकी अगुवाई स्वयं उस देश के नेतृत्व के हाथों में हो और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बराबरी सम्मान तथा विश्वास के आधार पर आगे बढ़े। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब पारंपरिक दाता और प्राप्तकर्ता वाले मॉडल से आगे बढ़ने का समय आ गया है।

    पी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र में पहले पीसबिल्डिंग वीक के दौरान आयोजित शांति निर्माण आयोग के वार्षिक सत्र और संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्चस्तरीय बहस में भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि शांति निर्माण की पूरी प्रक्रिया मांग आधारित होनी चाहिए। इसका उद्देश्य संबंधित देशों की वास्तविक जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप समाधान तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका सहयोगी की होनी चाहिए न कि निर्णय थोपने वाले पक्ष की।

    उन्होंने कहा कि किसी भी शांति निर्माण अभियान की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब वह संबंधित देश की संस्थागत क्षमता को मजबूत करे और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए उसे आत्मनिर्भर बनाए। मजबूत संस्थाएं और सक्षम प्रशासन ही दीर्घकालिक शांति की सबसे बड़ी गारंटी हैं।

    भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र की शांति निर्माण संरचना के बीस वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवधि में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं। इनमें संयुक्त राष्ट्र की शांति निर्माण व्यवस्था की चौथी समीक्षा पहली राष्ट्रीय शांति निर्माण रणनीति की प्रस्तुति और पीसबिल्डिंग फंड के साथ पहला वार्षिक रणनीतिक संवाद शामिल है। उन्होंने इन पहलों को वैश्विक शांति प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

    उन्होंने यह भी चिंता जताई कि पिछले तीन वर्षों में पीसबिल्डिंग फंड के लिए स्वैच्छिक योगदान में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा वित्तीय स्थिति का भी शांति निर्माण कार्यक्रमों पर असर पड़ा है। भारत का मानना है कि सीमित संसाधनों का उपयोग सबसे अधिक उन देशों में किया जाना चाहिए जो संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। इससे उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    पी हरीश ने कहा कि इस वर्ष आयोजित पीसबिल्डिंग वीक की थीम नवाचार समावेशन और प्रभाव के लिए साझेदारी वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में बेहद प्रासंगिक है। भारत भरोसे और समानता पर आधारित साझेदारी को शांति निर्माण की सबसे मजबूत नींव मानता है। उन्होंने कहा कि ऐसी साझेदारी तभी सफल होगी जब राष्ट्रीय स्वामित्व हर प्रक्रिया का मूल सिद्धांत बना रहेगा।

    भारत ने महिलाओं की भूमिका को भी शांति निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया। पी हरीश ने हाल ही में भारत की मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 का मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर सम्मान मिलने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह महिलाओं शांति और सुरक्षा के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्र निर्माण के अनुभव और विकास मॉडल को दुनिया के साथ साझा करने के लिए पूरी तरह तैयार है तथा वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए सभी साझेदार देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।

  • वीजा प्रक्रिया होगी हाईटेक ट्रंप प्रशासन एआई और मोबाइल ऐप से बदलेगा अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम

    वीजा प्रक्रिया होगी हाईटेक ट्रंप प्रशासन एआई और मोबाइल ऐप से बदलेगा अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम


    नई दिल्ली । अमेरिका की ट्रंप सरकार वीजा प्रोसेसिंग और कानूनी इमिग्रेशन सेवाओं में बड़ा डिजिटल बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नई तकनीक और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए पूरी इमिग्रेशन प्रक्रिया को पहले से अधिक तेज सुरक्षित और पारदर्शी बनाना चाहती है। इस पहल का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया में होने वाली देरी कम करना कागजी कार्रवाई घटाना और सुरक्षा जांच को अधिक प्रभावी बनाना है। इससे भविष्य में लाखों वीजा आवेदकों को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब कमेटी के समक्ष बताया कि गृह सुरक्षा विभाग तेजी से इमिग्रेशन सिस्टम का आधुनिकीकरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग ऐसा ऑटोमेटेड प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से आवेदन प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाएगा और मानवीय त्रुटियों को काफी हद तक कम करेगा।

    मुलिन के अनुसार पहला एआई आधारित प्लेटफॉर्म अगले 30 दिनों के भीतर शुरू किया जाएगा। शुरुआती चरण में इसका इस्तेमाल डेफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स यानी डीएसीए कार्यक्रम के लंबित मामलों के निपटारे के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे वर्षों से लंबित आवेदनों का तेजी से समाधान संभव होगा और आगे आने वाले आवेदनों का भी शीघ्र निस्तारण किया जा सकेगा।

    सरकार आवेदन प्रक्रिया में होने वाली सामान्य गलतियों को भी समाप्त करना चाहती है। इसी उद्देश्य से ऐसा डिजिटल सिस्टम विकसित किया जा रहा है जिसमें अधूरा या गलत आवेदन जमा ही नहीं किया जा सकेगा। इससे बार बार दस्तावेज लौटने और सुधार के कारण होने वाली देरी कम होगी। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा तकनीक इस बदलाव को संभव बना सकती है और अब जरूरत केवल उसे व्यापक स्तर पर लागू करने की है।

    गृह सुरक्षा विभाग वाणिज्य विभाग के साथ मिलकर एक आधुनिक मोबाइल एप्लीकेशन भी विकसित कर रहा है। इस ऐप के माध्यम से आवेदक अपने दस्तावेज जमा कर सकेंगे आवेदन की स्थिति देख सकेंगे और आवश्यक प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से पूरी कर पाएंगे। मार्कवेन मुलिन ने बताया कि उन्होंने इस योजना की जानकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी दी है और राष्ट्रपति ने इस पहल का समर्थन किया है।

    सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक अपनाने से न केवल आवेदकों को सुविधा मिलेगी बल्कि उद्योग जगत और नियोक्ताओं को भी लाभ होगा। वीजा प्रक्रिया में होने वाली देरी का असर सीधे अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार पर पड़ता है। इसलिए सरकार तकनीक के जरिए दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है।

    मुलिन ने बताया कि एच टू ए कृषि वीजा की प्रोसेसिंग अवधि पहले ही घटाकर लगभग 15 दिन कर दी गई है। अब सरकार डेयरी फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी दूर करने के लिए भी नए विकल्पों पर विचार कर रही है क्योंकि वर्तमान वीजा नियम वहां की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं।

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछली सरकार के दौरान स्वीकृत कई इमिग्रेशन मामलों की दोबारा जांच की जा रही है ताकि सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाया जा सके। इसके लिए अतिरिक्त स्क्रीनिंग सिस्टम भी विकसित किए गए हैं जिससे केवल पात्र और नियमों के अनुरूप आवेदकों को ही मंजूरी मिले।

    भारत अमेरिका में पढ़ाई रोजगार और उच्च कौशल वाले पेशेवरों के लिए सबसे बड़े स्रोत देशों में शामिल है। ऐसे में यदि एआई आधारित वीजा प्रोसेसिंग सफल होती है तो हजारों भारतीय छात्रों पेशेवरों और कानूनी आवेदकों को तेज सेवा और बेहतर डिजिटल अनुभव का लाभ मिल सकता है। हालांकि अंतिम मंजूरी मौजूदा अमेरिकी इमिग्रेशन कानूनों और सुरक्षा मानकों के अनुसार ही दी जाएगी।

  • बढ़ते साइबर हमलों से निपटने की तैयारी में अमेरिका ट्रंप प्रशासन करेगा साइबर रक्षा एजेंसी का बड़ा पुनर्गठन

    बढ़ते साइबर हमलों से निपटने की तैयारी में अमेरिका ट्रंप प्रशासन करेगा साइबर रक्षा एजेंसी का बड़ा पुनर्गठन


    नई दिल्ली । दुनिया भर में तेजी से बढ़ते साइबर हमलों और डिजिटल जासूसी की घटनाओं के बीच अमेरिका अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी साइबर रक्षा एजेंसी साइबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी यानी सीआईएसए का व्यापक पुनर्गठन किया जाएगा ताकि चीन रूस ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों से मिलने वाली साइबर चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

    अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब कमेटी के समक्ष कहा कि मौजूदा समय में साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा बन चुकी है। उनके अनुसार विदेशी साइबर हमले केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं हैं बल्कि निजी कंपनियों बैंकिंग नेटवर्क ऊर्जा क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में सीआईएसए की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

    मुलिन ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में एजेंसी अपनी मूल जिम्मेदारियों से भटक गई थी और अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सकी। उन्होंने कहा कि अब सरकार का लक्ष्य केवल एजेंसी को दोबारा सक्रिय करना नहीं बल्कि उसे दुनिया की सबसे सक्षम साइबर सुरक्षा संस्थाओं में शामिल करना है। इसके लिए नए नेतृत्व की नियुक्ति की जा रही है और अनुभवी विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा ताकि एजेंसी आधुनिक साइबर खतरों का तेजी से जवाब देने में सक्षम बन सके।

    उन्होंने बताया कि फिलहाल एजेंसी अपनी जरूरत के मुकाबले लगभग आधे कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। सरकार का अनुमान है कि करीब 600 नए विशेषज्ञों की भर्ती से इसकी कार्यक्षमता में बड़ा सुधार आएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी पुराने पदों को भरना जरूरी नहीं है बल्कि जरूरत के अनुसार विशेषज्ञता आधारित नियुक्तियां की जाएंगी।

    गृह सुरक्षा सचिव के अनुसार एजेंसी का पुनर्गठन एक लंबी प्रक्रिया होगी और नए निदेशक के कार्यभार संभालने के बाद इसे पूरी तरह प्रभावी बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है। इस दौरान संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के साथ तकनीकी क्षमताओं को भी नई दिशा दी जाएगी।

    मुलिन ने सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर साझेदारी पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि मेटा गूगल जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियां अकेले साइबर अपराधियों और विदेशी हैकर समूहों का मुकाबला नहीं कर सकतीं। इसके लिए सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों के बीच सूचनाओं के आदान प्रदान तथा संयुक्त रणनीति की आवश्यकता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि गृह सुरक्षा विभाग अपने आंतरिक नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है ताकि अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं को खत्म किया जा सके और साइबर ऑपरेशन अधिक तेज और प्रभावी बन सकें। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से विकसित हो रही डिजिटल तकनीकों को देखते हुए भविष्य में कांग्रेस से नए कानूनी दिशा निर्देश भी मांगे जा सकते हैं।

    अमेरिका लगातार अपने सहयोगी देशों के साथ साइबर सुरक्षा सहयोग को भी मजबूत कर रहा है। भारत सहित कई साझेदार देशों के साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा साइबर रेजिलिएंस और उभरती तकनीकों की सुरक्षा को लेकर संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में साइबर युद्ध और डिजिटल सुरक्षा किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का सबसे अहम आधार बनने वाले हैं और इसी दिशा में अमेरिका अपनी तैयारियों को नई गति दे रहा है।

  • 7.5 तीव्रता के भूकंप ने वेनेजुएला को झकझोरा, 235 लोगों की मौत, बचाव अभियान तेज, अंतरराष्ट्रीय सहायता जुटाने में सरकार सक्रिय

    7.5 तीव्रता के भूकंप ने वेनेजुएला को झकझोरा, 235 लोगों की मौत, बचाव अभियान तेज, अंतरराष्ट्रीय सहायता जुटाने में सरकार सक्रिय


    नई दिल्ली । वेनेजुएला में बुधवार शाम आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है। शुरुआती रिपोर्टों के मुकाबले हालात कहीं अधिक गंभीर साबित हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 235 हो गई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं और कई अब भी मलबे में फंसे हुए हैं। लगातार चल रहे राहत एवं बचाव अभियान के बीच सरकार ने पुनर्वास और पुनर्निर्माण की दिशा में भी बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं।

    समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज करने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने निजी कंपनियों को भारी मशीनें और मलबा हटाने वाले उपकरण तत्काल उपलब्ध कराने का आदेश दिया है ताकि बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही सरकार ने 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर का विशेष राहत कोष बनाने का फैसला किया है जिससे प्रभावित परिवारों और क्षेत्रों को आर्थिक सहायता मिल सके। कारोबारियों को राहत देने के लिए विशेष ऋण सुविधा भी शुरू की जा रही है ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को जल्द दोबारा पटरी पर लाया जा सके।

    नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने बताया कि यह देश में कई दशकों बाद आई सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। उनके अनुसार करीब 200 लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। बचाव दल दिन रात अभियान चला रहे हैं और समय के साथ जीवन बचाने की चुनौती लगातार कठिन होती जा रही है। उन्होंने कहा कि हर संभव संसाधन बचाव अभियान में लगाए गए हैं और प्राथमिकता अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की है।

    विदेश मंत्री इवान गिल ने जानकारी दी कि वेनेजुएला सरकार अंतरराष्ट्रीय सहायता के समन्वय के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कर रही है। उन्होंने बताया कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से कम से कम एक दर्जन देशों ने राहत सामग्री विशेषज्ञ टीमों और तकनीकी सहयोग की पेशकश की है। सरकार इन प्रस्तावों पर तेजी से काम कर रही है ताकि प्रभावित इलाकों तक जल्द सहायता पहुंचाई जा सके।

    बुधवार को आए दोनों भूकंपों की तीव्रता क्रमशः 7.2 और 7.5 मापी गई थी। दोनों झटके लगभग 10 किलोमीटर की कम गहराई पर आए जिससे उनका असर अत्यधिक विनाशकारी रहा। उत्तर मध्य राज्य ला गुएरा और राजधानी काराकस महानगरीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया। दोनों भूकंपों के बीच एक मिनट से भी कम का अंतर था और उसके बाद आए लगातार आफ्टरशॉक्स ने पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों के गिरने का खतरा और बढ़ा दिया है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वेनेजुएला को व्यापक समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है और सभी संबंधित एजेंसियों को तत्काल राहत कार्यों के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने भी वेनेजुएला के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए बचाव एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम भेजने की तैयारी का ऐलान किया है। वैश्विक सहयोग के बीच अब वेनेजुएला के सामने सबसे बड़ी चुनौती राहत कार्यों को तेज करते हुए प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और सामान्य जीवन बहाल करना है।

  • ट्रैफिक और पुलिस पर वीडियो बनाना पड़ा महंगा, मोरक्को में विदेशी कंटेंट क्रिएटर को अदालत ने सुनाई एक साल की सजा

    ट्रैफिक और पुलिस पर वीडियो बनाना पड़ा महंगा, मोरक्को में विदेशी कंटेंट क्रिएटर को अदालत ने सुनाई एक साल की सजा

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो को लेकर मोरक्को में एक विदेशी कंटेंट क्रिएटर को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। फ्रेंच-अल्जीरियाई इन्फ्लुएंसर यास नौबेले को स्थानीय अदालत ने एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। मामला उस वीडियो से जुड़ा है जिसमें उन्होंने मोरक्को की ट्रैफिक व्यवस्था, स्थानीय नागरिकों की ड्राइविंग शैली और पुलिस व्यवस्था पर सार्वजनिक टिप्पणियां की थीं। अदालत ने इन टिप्पणियों को सरकारी संस्थाओं की कथित मानहानि और सार्वजनिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला माना।

    जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय यास नौबेले निजी यात्रा पर मोरक्को के ऐतिहासिक शहर माराकेश पहुंची थीं। इसी दौरान उन्होंने टैक्सी में यात्रा करते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर दिया। वीडियो में उन्होंने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था, सड़क सुरक्षा, वाहन चालकों के व्यवहार और यातायात नियमों के पालन को लेकर कई आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं, जो बाद में व्यापक चर्चा का विषय बन गईं।

    वीडियो में उन्होंने स्थानीय ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि बिना उचित कारण लोगों को रोका जाता है। इसके अलावा उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप भी लगाए और मोरक्को की व्यवस्थाओं की तुलना दूसरे देशों से करते हुए उन्हें कमजोर बताया। सोशल मीडिया पर वीडियो के तेजी से वायरल होने के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद संबंधित एजेंसियों ने इसकी जांच शुरू कर दी।

    प्रशासन के अनुसार, जांच में वीडियो की सामग्री का परीक्षण किया गया और इसे सरकारी संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला माना गया। इसके बाद इन्फ्लुएंसर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। बताया गया कि यात्रा पूरी होने के बाद जब वह फ्रांस लौटने के लिए एयरपोर्ट पहुंचीं, तब सीमा अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने संबंधित वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया था, लेकिन तब तक जांच प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने वीडियो, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा की। न्यायालय ने उन्हें मोरक्को के नागरिकों और पुलिस बल के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी करने का दोषी मानते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इसके साथ आर्थिक दंड भी लगाया। हालांकि फैसले के बाद उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर उच्च अदालत में अपील करने का कानूनी अधिकार भी प्रदान किया गया है।

    यह मामला एक बार फिर इस तथ्य को सामने लाता है कि अलग-अलग देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानहानि और सरकारी संस्थाओं पर सार्वजनिक टिप्पणी से जुड़े कानून अलग-अलग हो सकते हैं। किसी भी विदेशी नागरिक या सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर के लिए यह आवश्यक है कि वह जिस देश की यात्रा कर रहा हो, वहां के स्थानीय कानूनों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी रखे तथा उनका पालन करे। इंटरनेट पर साझा की गई सामग्री कई बार सीमाओं से परे भी कानूनी परिणाम उत्पन्न कर सकती है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच यह घटना सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है। अधिक लोकप्रियता या व्यापक पहुंच हासिल करने की प्रतिस्पर्धा में प्रकाशित सामग्री यदि स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करती है या किसी देश की संस्थाओं को लेकर कानूनी विवाद खड़ा करती है, तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इसलिए ऑनलाइन सामग्री साझा करते समय तथ्यात्मकता, जिम्मेदारी और स्थानीय नियमों का पालन करना पहले से कहीं अधिक आवश्यक माना जा रहा है।

  • भारत पर अमेजन का बड़ा दांव, 2030 तक 48 अरब डॉलर निवेश; 38 लाख रोजगार और AI विस्तार का रोडमैप तैयार

    भारत पर अमेजन का बड़ा दांव, 2030 तक 48 अरब डॉलर निवेश; 38 लाख रोजगार और AI विस्तार का रोडमैप तैयार


    नई दिल्ली । भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता पर भरोसा जताते हुए अमेजन ने देश में बड़े निवेश का ऐलान किया है। अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद घोषणा की कि कंपनी वर्ष 2030 तक भारत में 48 अरब डॉलर का निवेश करेगी। इस निवेश का बड़ा हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर केंद्रित होगा। यह फैसला भारत को वैश्विक डिजिटल और तकनीकी केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक के बाद एंडी जेसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भारत में अमेजन की यात्रा अभी शुरुआत भर है। उन्होंने कहा कि कंपनी पिछले एक दशक से देश के ग्राहकों, विक्रेताओं, स्टार्टअप्स, डेवलपर्स और उद्योगों के साथ मिलकर काम कर रही है और आने वाले वर्षों में इस साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा।

    जेसी ने बताया कि अगले पांच वर्षों में किए जाने वाले कुल 48 अरब डॉलर के निवेश में 21 अरब डॉलर से अधिक राशि केवल एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर खर्च की जाएगी। इसके साथ ही 2026 से 2030 के बीच भारत में अमेजन का कुल नियोजित एआई और क्लाउड निवेश 21 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा, जो इस क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े विदेशी निवेशों में से एक माना जा रहा है।

    अमेजन वेब सर्विसेज के तहत मुंबई और हैदराबाद स्थित डेटा सेंटर नेटवर्क का भी विस्तार किया जाएगा। इससे भारतीय स्टार्टअप्स, उद्योगों और सरकारी संस्थानों को आधुनिक एआई तकनीक, एडवांस्ड कंप्यूटिंग क्षमता, सुरक्षित क्लाउड सेवाएं और अत्याधुनिक डेवलपर टूल्स तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी। कंपनी का मानना है कि इससे भारत की डिजिटल प्रतिस्पर्धात्मकता और नवाचार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    अमेजन ने रोजगार सृजन को लेकर भी बड़ा लक्ष्य तय किया है। कंपनी के अनुसार वर्ष 2030 तक लगभग 38 लाख रोजगार अवसरों का समर्थन किया जाएगा। इसके अलावा 80 अरब डॉलर के ई-कॉमर्स निर्यात को सक्षम बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अमेजन का उद्देश्य देश के 1.5 करोड़ छोटे व्यवसायों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना और 40 लाख सरकारी स्कूलों के छात्रों तक एआई आधारित शिक्षा और तकनीकी अवसर पहुंचाना भी है।

    कंपनी ने अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने की भी योजना बनाई है। इस वर्ष देशभर में 20 से अधिक नए फुलफिलमेंट सेंटर और 100 से ज्यादा नए लास्ट माइल डिलीवरी स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इससे खासकर टियर-3 और टियर-4 शहरों में ग्राहकों को तेज और भरोसेमंद डिलीवरी सुविधा मिलेगी। साथ ही डिलीवरी सहयोगियों के कल्याण के लिए सम्मान नामक विशेष कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा।

    अमेजन के अनुसार वर्ष 2010 से 2030 तक भारत में कंपनी का कुल निवेश 88 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। कंपनी का कहना है कि उसने अब तक 1.2 करोड़ छोटे कारोबारों को डिजिटल बनाने में मदद की है, 20 अरब डॉलर से अधिक के ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा दिया है और 28 लाख रोजगारों का समर्थन किया है। इसके अलावा 1 करोड़ से अधिक भारतीयों को क्लाउड स्किल्स की ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है।

    एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत में ई-कॉमर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेजन भारत के विकसित और आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य में दीर्घकालिक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • एयर सुविधा 2.0, इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य निगरानी होगी और मजबूत

    एयर सुविधा 2.0, इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य निगरानी होगी और मजबूत


    नई दिल्ली। इबोला वायरस के बढ़ते वैश्विक खतरे के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नागर विमानन मंत्रालय ने दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के सहयोग से अत्याधुनिक और पूरी तरह कॉन्टैक्टलेस Air Suvidha 2.0 पोर्टल लॉन्च किया है। इस नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना और संक्रामक बीमारियों के संभावित प्रसार को समय रहते रोकना है।

    सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला तथा बुंडिबुग्यो वायरस बीमारी के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है। इसके बाद कई देशों ने अपनी सीमा और स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्थाओं को मजबूत करना शुरू कर दिया है। भारत ने भी एहतियाती कदम उठाते हुए एयर सुविधा 2.0 को लागू किया है ताकि किसी भी संभावित संक्रमण की समय रहते पहचान की जा सके।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज के सहयोग से विकसित इस पोर्टल के तहत भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन हेल्थ सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा। इस फॉर्म में यात्रियों को पिछले 21 दिनों की यात्रा का पूरा विवरण देना होगा। इसके अलावा उन्हें यह भी बताना होगा कि वे किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं या नहीं तथा उनमें किसी प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी लक्षण मौजूद हैं या नहीं।

    नई व्यवस्था के अनुसार यह प्रक्रिया इमिग्रेशन क्लियरेंस से पहले पूरी करनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग अधिक सटीक और तेज होगी। साथ ही स्वास्थ्य एजेंसियों को संभावित जोखिम वाले यात्रियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

    Air Suvidha 2.0 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी रियल टाइम डेटा शेयरिंग क्षमता है। यह सिस्टम यात्रियों द्वारा दी गई जानकारी को तुरंत एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन, इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम और संबंधित राज्य निगरानी अधिकारियों के साथ साझा करेगा। इससे किसी भी संदिग्ध मामले की पहचान होने पर तुरंत निगरानी, चिकित्सा जांच और आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय शुरू किए जा सकेंगे।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल और कॉन्टैक्टलेस होगी। यात्रियों को एयरपोर्ट पर पहुंचकर कागजी फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी। वे अपनी उड़ान से 24 घंटे पहले तक ऑनलाइन सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भर सकते हैं। विशेष रूप से वेब चेक इन के दौरान यह प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है ताकि भारत पहुंचने पर इमिग्रेशन और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया तेज और सुगम हो सके।

    फॉर्म जमा करने के बाद यात्रियों को केवल डाउनलोड किया गया सेल्फ डिक्लेरेशन दस्तावेज स्वास्थ्य डेस्क या इमिग्रेशन अधिकारियों को दिखाना होगा। इससे एयरपोर्ट पर समय की बचत होगी और भीड़भाड़ भी कम होगी।

    अधिकारियों ने सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सही जानकारी के साथ समय पर फॉर्म भरें। उनका कहना है कि Air Suvidha 2.0 न केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि भविष्य में किसी भी संभावित स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।