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  • अमेरिका का सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार, ट्रंप के लिए बढ़ी आर्थिक चुनौती

    अमेरिका का सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के पार, ट्रंप के लिए बढ़ी आर्थिक चुनौती

    वॉशिंगटन। अमेरिका का कुल सरकारी कर्ज पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को कारोबार खत्म होने तक सरकार का कुल बकाया कर्ज बढ़कर 40.05 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया। कर्ज का यह स्तर कांग्रेस के बजट कार्यालय (CBO) के अनुमान से भी ज्यादा है।

    कर्ज में यह तेज बढ़ोतरी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती मानी जा रही है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने सरकारी खर्च कम करने और सरकारी कामकाज में दक्षता बढ़ाने का वादा किया था।

    CBO के अनुमान से भी आगे निकला कर्ज

    CBO ने वित्त वर्ष 2026 के अंत तक अमेरिका के कुल सरकारी कर्ज के करीब 39.4 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया था। लेकिन वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले ही कर्ज इस अनुमान से ऊपर निकल गया।

    सरकारी कर्ज में तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें बढ़ता संघीय खर्च, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला खर्च तथा पुराने कर्ज पर बढ़ता ब्याज भुगतान प्रमुख हैं।

    ब्याज भुगतान ने बढ़ाई मुश्किल

    अमेरिकी सरकार के लिए कर्ज का बढ़ता ब्याज खर्च एक बड़ी चिंता बन गया है। जैसे-जैसे सरकारी कर्ज बढ़ता है, उस पर ब्याज का बोझ भी बढ़ता जाता है। इसके साथ ही महंगाई और सरकारी खर्च को लेकर बाजार में बनी चिंता के कारण सरकार के लिए नए सिरे से कर्ज लेना भी महंगा हुआ है।

    सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर लगातार बढ़ता खर्च भी अमेरिका के दीर्घकालिक वित्तीय दबाव को बढ़ा रहा है।

    ट्रंप के खर्च घटाने के दावे पर सवाल

    ट्रंप प्रशासन ने संघीय कर्मचारियों, सरकारी एजेंसियों और सरकारी खर्च में कटौती के लिए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) के जरिए कई कदम उठाए हैं। सरकार की वेबसाइट पर फिलहाल करीब 215 अरब डॉलर की बचत का दावा किया गया है।

    हालांकि, स्वतंत्र विशेषज्ञ इन आंकड़ों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार की ओर से बताई गई बचत और वास्तव में हासिल हुई बचत में अंतर हो सकता है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि खर्च में कटौती का सरकारी कर्ज पर कितना वास्तविक असर पड़ा है।

    दोनों पार्टियों के सांसदों ने जताई चिंता

    अमेरिकी सरकारी कर्ज के 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचने पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के सांसदों की ओर से चिंता जताई गई है। बढ़ता कर्ज अमेरिका की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भविष्य के बजट पर भी दबाव बढ़ा रहा है।

    कर्ज का यह रिकॉर्ड स्तर ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका को सामाजिक योजनाओं, रक्षा और अन्य सरकारी कार्यक्रमों पर बड़े पैमाने पर खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले समय में खर्च घटाने, टैक्स नीति और कर्ज नियंत्रण को लेकर ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव और बढ़ सकता है।

  • ट्रंप की सबसे बड़े विरोधी से फिर यारी! कभी कोर्ट में खिलाफ गवाही देने वाले कोहेन के शो में पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति

    ट्रंप की सबसे बड़े विरोधी से फिर यारी! कभी कोर्ट में खिलाफ गवाही देने वाले कोहेन के शो में पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके पूर्व करीबी सहयोगी माइकल कोहेन के बीच सालों पुरानी कड़वाहट अब कम होती नजर आ रही है। कभी ट्रंप के खिलाफ अदालत में अहम गवाही देने वाले कोहेन के रेडियो शो में ट्रंप पहुंचे। बातचीत के दौरान दोनों के बीच पुरानी तल्खी की जगह दोस्ताना अंदाज दिखाई दिया। कोहेन ने पुराने दिनों को याद करते हुए ट्रंप को फिर ‘बॉस’ कहकर संबोधित किया।

    कभी ट्रंप के लिए सबकुछ करने को तैयार थे कोहेन

    माइकल कोहेन लंबे समय तक ट्रंप के बेहद करीबी माने जाते थे। करीब 15 साल तक दोनों साथ रहे। उस दौर में कोहेन खुद को ट्रंप का बेहद वफादार बताते थे। लेकिन 2018 में दोनों के रिश्तों में बड़ी दरार आ गई।

    जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद कोहेन ने ट्रंप के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 2019 में अमेरिकी कांग्रेस के सामने भी गवाही दी और ट्रंप से जुड़े कई मामलों पर अपनी बात रखी।

    हश-मनी केस में ट्रंप के खिलाफ गवाही

    2024 में कोहेन ट्रंप के हश-मनी मामले में अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाह बने। उन्होंने दावा किया कि 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले ऐसी जानकारियों को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश की गई थी, जो ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए नुकसानदेह हो सकती थीं।

    इस मुकदमे में ट्रंप को 34 मामलों में दोषी ठहराया गया। कोहेन की गवाही केस की अहम कड़ी रही। दूसरी तरफ कोहेन खुद भी कानूनी मामलों में फंसे और कई आरोपों में दोष स्वीकार करने के बाद उन्हें तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई।

    किताब में ट्रंप पर लगाए थे गंभीर आरोप

    कोहेन ने 2020 में प्रकाशित अपनी किताब में ट्रंप पर तीखे आरोप लगाए थे। उन्होंने ट्रंप को बेहद चालाक और लोगों को प्रभावित करने वाला व्यक्ति बताया था। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने संकेत दिया था कि पुराने रिश्ते और भावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं।

    बाद में कोहेन ने अपने रुख में बदलाव करते हुए दावा किया कि ट्रंप के खिलाफ गवाही देने के दौरान जांच एजेंसियों ने उन पर दबाव बनाया था। ट्रंप ने भी कोहेन के इन बयानों को सोशल मीडिया पर साझा किया था।

    एक साल से फिर हो रही थी बातचीत

    कोहेन ने बताया कि पिछले करीब एक साल से दोनों के बीच कई बार बातचीत हुई है। उनका कहना है कि दोनों ने पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि माफी का मतलब अतीत को मिटा देना नहीं है, बल्कि आगे बढ़ना है।

    रेडियो शो का माहौल भी दोनों के बदले रिश्ते की झलक दे रहा था। कार्यक्रम में दोस्ती और दोबारा साथ आने की थीम वाले गाने बजाए गए।

    कोहेन ने फिर मांगी सजा में राहत

    कोहेन ने यह भी बताया कि उन्होंने व्हाइट हाउस में अपनी सजा माफी की अर्जी दोबारा भेजी है। पहले उनकी अर्जी खारिज हो चुकी है। अब उन्होंने नए सिरे से राहत की मांग की है और जल्द ही इस संबंध में फिर संपर्क करने की बात कही है।

    कभी ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले कोहेन और उनके ‘बॉस’ का दोबारा दोस्ताना अंदाज अमेरिकी राजनीति में रिश्तों के बदलते समीकरण की नई तस्वीर पेश कर रहा है।

  • हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित हुई मोरारी बापू की ऐतिहासिक रामकथा, भारत से पहुंचे प्रमुख साधु-संतों ने भी लिया भाग

    हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित हुई मोरारी बापू की ऐतिहासिक रामकथा, भारत से पहुंचे प्रमुख साधु-संतों ने भी लिया भाग

    नई दिल्ली ।अमेरिका के कैम्ब्रिज स्थित प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय के सैंडर्स थिएटर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला, जहां प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु मोरारी बापू द्वारा नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन किया गया। इस विशेष कथा में भारत के विभिन्न प्रमुख तीर्थ स्थलों से आए बड़ी संख्या में साधु-संतों और विद्वानों ने सहभागिता की। कथा के दौरान विश्वविद्यालय प्रांगण में गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ मनाई गई।

    नौ दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त को हुई, जिसका समापन 23 अगस्त को होगा। इस आयोजन के दौरान शिक्षाविदों और आचार्यों के बीच तीन दिवसीय विशेष विद्वत चर्चा का भी आयोजन किया गया। मोरारी बापू ने कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सावन के पवित्र महीने में तुलसी जयंती के अवसर पर यह आयोजन ज्ञान, सत्य, प्रेम और करुणा के मूलभूत सिद्धांतों को उजागर करने के उद्देश्य से किया गया है।

    विश्वविद्यालय के लक्ष्मी मित्तल एंड फैमिली साउथ एशिया इंस्टीट्यूट की फैकल्टी डायरेक्टर प्रोफेसर डायना ने इस अवसर पर कहा कि भगवान राम की अयोध्या से शुरू होकर रामेश्वरम तक की 14 वर्षों की यात्रा ने भारतीय उपमहाद्वीप में पवित्र सांस्कृतिक स्थलों का निर्माण किया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि रामलीला और रामचरितमानस की परंपरा भारत की सीमाओं से निकलकर थाईलैंड, इंडोनेशिया और कंबोडिया जैसे देशों तक विस्तृत हुई है।

    समारोह में पहुंचे अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य ‘वेरिटास’ यानी सत्य की तुलना भारतीय दर्शन के सत्य, प्रेम और करुणा के मूल्यों से की। वक्ताओं ने कहा कि यह आयोजन दुनिया की सबसे प्राचीन पाठ और वाचन परंपराओं को दुनिया के शीर्ष शिक्षण संस्थानों के साथ जोड़ने का एक अनूठा प्रयास है।

    मोरारी बापू द्वारा वर्ष 2010 में तुलसी जयंती के अवसर पर शुरू की गई इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य सनातन संस्कृति, ज्ञान परंपरा और रामचरितमानस के संदेशों को वैश्विक पटल पर संरक्षित और प्रसारित करना है। इससे पूर्व भी वे कैलाश मानसरोवर, वेटिकन सिटी, संयुक्त राष्ट्र संघ और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय जैसे ऐतिहासिक स्थानों पर रामकथा का आयोजन कर चुके हैं।

    हार्वर्ड में आयोजित इस कार्यक्रम में अयोध्या, वाराणसी और चित्रकूट जैसे आध्यात्मिक केंद्रों से पहुंचे साधु- संन्यासियों की उपस्थिति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मध्य प्रदेश सहित भारत के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने भी इस वैश्विक आयोजन में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इस आयोजन को वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति और दर्शन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • US: सरकारी मदद पाने वाले प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन हो सकते हैं रद्द…. 18 सितंबर को लागू होंगे नए नियम

    US: सरकारी मदद पाने वाले प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन हो सकते हैं रद्द…. 18 सितंबर को लागू होंगे नए नियम


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) में स्थायी नागरिकता यानी ग्रीन कार्ड (Green Card Applications) पाने की कोशिश कर रहे प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ट्रंप प्रशासन ने सार्वजनिक बोझ से जुड़े नियमों का दायरा बढ़ा दिया है। नए नियम के तहत सरकारी आर्थिक मदद लेने वाले कुछ प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन (Green Card Applications) पर सवाल उठ सकते हैं और आवेदन खारिज भी किया जा सकता है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (U.S. Citizenship and Immigration Services) का यह नियम 18 सितंबर से लागू होगा। इसका असर अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और उनके परिवारों पर भी पड़ सकता है।


    क्या सरकारी मदद लेने से ग्रीन कार्ड पर असर पड़ेगा?

    पहले सार्वजनिक बोझ का आकलन मुख्य रूप से दो तरह की सरकारी मदद के आधार पर किया जाता था। नए नियम में अधिकारियों को ज्यादा पहलुओं को देखने का अधिकार दिया गया है। अब आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति, आर्थिक हालत और शिक्षा को भी देखा जा सकेगा। इसके अलावा आवेदक पर निर्भर लोगों की ओर से ली गई कुछ सरकारी मदद को भी आवेदन पर फैसला करते समय ध्यान में रखा जा सकता है।


    भारतीयों पर कितना पड़ सकता है असर?
    वर्ष 2023 में 78,100 भारतीयों को अमेरिका का ग्रीन कार्ड मिला था। इनमें करीब 60 प्रतिशत भारतीयों ने परिवार के किसी सदस्य या अमेरिकी नागरिक रिश्तेदार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल किया था। नए नियम के कारण ऐसे परिवारों में सरकारी सहायता लेने की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर परिवार का कोई सदस्य सरकारी सब्सिडी का इस्तेमाल करता है तो अधिकारी आवेदक की आयु, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए आवेदन पर फैसला कर सकते हैं।


    क्या अधिकारियों को आवेदन खारिज करने की ज्यादा ताकत मिलेगी?

    आव्रजन मामलों के जानकारों के अनुसार नए नियम से अधिकारियों के पास आवेदन को लेकर फैसला करने की गुंजाइश बढ़ जाएगी। यानी केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि आवेदक ने सरकारी मदद ली है या नहीं। अधिकारी उसकी पूरी परिस्थिति को देखकर यह आकलन कर सकते हैं कि वह भविष्य में सरकार पर आर्थिक रूप से निर्भर हो सकता है या नहीं। इससे ग्रीन कार्ड आवेदन की जांच पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त हो सकती है।


    किन लोगों को नियम से छूट मिलेगी?

    नए नियम का असर सभी प्रवासियों पर एक जैसा नहीं होगा। शरणार्थियों, उत्पीड़न के पीड़ितों और कुछ विशेष श्रेणियों के आवेदकों को इससे छूट दी गई है। यानी इन लोगों के आवेदन पर सार्वजनिक बोझ से जुड़े नए नियम उसी तरह लागू नहीं होंगे। हालांकि सामान्य ग्रीन कार्ड आवेदकों के लिए उम्र, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और परिवार की परिस्थितियां अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं।


    18 सितंबर के बाद क्या बदलेगा?
    यह नया नियम 2022 में बाइडन प्रशासन के दौरान लागू किए गए नियम को रद्द करने के बाद आया है। 18 सितंबर से इसके लागू होने के बाद ग्रीन कार्ड आवेदन की जांच में सरकारी सहायता के साथ आवेदक की व्यक्तिगत और पारिवारिक स्थिति को भी ज्यादा महत्व दिया जाएगा। भारतीयों की बड़ी संख्या परिवार आधारित ग्रीन कार्ड के जरिए स्थायी नागरिकता हासिल करती है। ऐसे में नए नियम के बाद भारतीय आवेदकों को अपनी आर्थिक और पारिवारिक स्थिति को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

  • Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग

    Bangladesh: राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज हो रहा मतदान….35 साल बाद सीधे संसद में वोटिंग


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में गुरुवार को नया राष्ट्रपति (New President) चुनने के लिए मतदान होने जा रहा है. 35 सालों के लंबे समय के बाद ये पहली बार है जब देश के राष्ट्रपति पद के लिए सीधे संसद में वोट डाले जाएंगे। राष्ट्रपति पद की रेस में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के दिग्गज नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर (Mirza Fakhrul Islam Alamgir) और 11 दलीय विपक्षी गठबंधन के प्रत्याशी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद (Oli Ahmed) के बीच है.

    चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान जातीय संसद (संसद भवन) में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा. निर्वाचन आयोग ने 16 अगस्त को ही दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को वैध करार दिया था।

    मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बीएनपी का प्रमुख चेहरा हैं, जबकि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद बीर बिक्रम जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलीय विपक्षी मोर्चे के उम्मीदवार हैं.


    BNP की बैठक में भावुक हुए फखरुल

    बुधवार को BNP संसदीय दल की बैठक के दौरान फखरुल ने अपनी ही पार्टी के सांसदों से समर्थन की अपील की. लंबे समय तक पार्टी के महासचिव रहे फखरुल बैठक में बेहद भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए.

    उन्होंने सांसदों से कहा, ‘अगर मेरे कार्यकाल के दौरान मुझसे कोई भूल हुई हो या अनजाने में किसी का दिल दुखा हो, तो मैं माफी मांगता हूं. उन्होंने देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता से कभी समझौता न करने का संकल्प भी लिया.


    शुक्रवार को नए राष्ट्रपति लेंगे शपथ

    चुनावी नतीजों के तुरंत बाद नए राष्ट्रपति शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे.

    बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद ये पद खाली हुआ था. संविधान के तहत पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है. फिलहाल सभपति (स्पीकर) हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति पद पर हैं।


    BNP का पलड़ा भारी

    इस साल 12 फरवरी को हुए आम चुनावों में बीएनपी ने सत्ता में वापसी की थी. संसद में बीएनपी के पास दो-तिहाई से ज्यादा का बहुमत है. ऐसे में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के घोषित उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की जीत लगभग तय मानी जा रही है। पेशे से अर्थशास्त्री रहे फखरुल 1990 के दशक में बीएनपी में शामिल हुए थे. वो पहले कृषि राज्य मंत्री और स्थानीय सरकार मंत्री भी रह चुके हैं।

  • नौ महीने बाद इमरान खान से मिलीं बुशरा बीबी और नूरीन नियाजी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से परिवार को राहत

    नौ महीने बाद इमरान खान से मिलीं बुशरा बीबी और नूरीन नियाजी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश से परिवार को राहत

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान से करीब नौ महीने बाद उनके परिवार के सदस्यों ने मुलाकात की। रावलपिंडी स्थित अडियाला जेल में उनकी पत्नी बुशरा बीबी और बहन नूरीन नियाजी ने उनसे मुलाकात की। लंबे समय बाद परिवार के साथ हुई इस मुलाकात को इमरान खान के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

    यह मुलाकात पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद हुई है। अदालत ने इमरान खान को हर सप्ताह परिवार के सदस्यों से मिलने की अनुमति दी है। इसके साथ ही उनकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए मेडिकल जांच और आवश्यक उपचार को लेकर भी निर्देश जारी किए गए हैं।

    नूरीन नियाजी ने इस साल पहली बार अपने भाई इमरान खान से मुलाकात की। जेल के कॉन्फ्रेंस रूम में हुई यह मुलाकात करीब 15 मिनट तक चली। इस दौरान इमरान खान की सेहत और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत हुई। नूरीन ने उन्हें अदालत के उस निर्देश की जानकारी भी दी, जिसके तहत मेडिकल जांच और उपचार के लिए उन्हें शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने की बात कही गई है।

    इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी ने भी जेल में उनसे मुलाकात की। यह मुलाकात करीब 30 से 35 मिनट तक चली। इसके बाद बुशरा बीबी ने अपने परिवार के अन्य सदस्यों से भी मुलाकात की। इस दौरान उनके बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी संपर्क हुआ।

    सुप्रीम कोर्ट ने परिवार से मुलाकात की अनुमति के साथ कुछ शर्तें भी तय की हैं। अदालत के अनुसार यदि इन मुलाकातों का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों या राजनीतिक लाभ के लिए किया जाता है, तो दी गई राहत वापस ली जा सकती है। इस व्यवस्था के तहत जेल में होने वाली पारिवारिक मुलाकातों को राजनीतिक गतिविधियों से अलग रखने पर जोर दिया गया है।

    इस बार इमरान खान की बहनों अलीमा खान और उजमा खान तथा उनके चचेरे भाई कासिम जमान को उनसे मिलने की अनुमति नहीं मिली। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के किसी राजनीतिक नेता को भी इस मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई। इससे स्पष्ट है कि अदालत की ओर से दी गई राहत को निर्धारित शर्तों के साथ लागू किया जा रहा है।

    इमरान खान वर्ष 2023 से अडियाला जेल में बंद हैं। वह कई मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। वर्तमान में वह अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में 14 वर्ष की सजा काट रहे हैं। जेल में लंबे समय से बंद रहने और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण उनके इलाज का मुद्दा भी अदालत के सामने पहुंचा है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इमरान खान को दो दिनों के भीतर शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया है। अदालत ने उन्हें 16 सितंबर तक अस्पताल में रखने की बात कही है। इसी दिन उनके इलाज से संबंधित याचिकाओं पर अगली सुनवाई होनी है।

    करीब नौ महीने बाद परिवार से मुलाकात और स्वास्थ्य जांच तथा उपचार से जुड़े अदालत के निर्देश इमरान खान के मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं। अब उनकी अस्पताल में स्थानांतरण प्रक्रिया और 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर ध्यान रहेगा। इन दोनों घटनाक्रमों से उनके स्वास्थ्य और आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • अमेरिका ईरान तनाव के बीच यूएई में मिसाइल खतरे का अलर्ट, एयर डिफेंस ने कार्रवाई कर स्थिति संभाली

    अमेरिका ईरान तनाव के बीच यूएई में मिसाइल खतरे का अलर्ट, एयर डिफेंस ने कार्रवाई कर स्थिति संभाली


    नई दिल्ली । 
    पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर संयुक्त अरब अमीरात में भी देखने को मिला। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश की ओर बढ़ रहे मिसाइल खतरे का पता एयर डिफेंस सिस्टम ने लगाया। इसके बाद दुबई में लोगों के मोबाइल फोन पर पहली बार मिसाइल खतरे को लेकर इमरजेंसी अलर्ट भेजा गया। प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय आधिकारिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की।

    मिसाइल अलर्ट जारी होने के दौरान दुबई और आसपास के इलाकों में आसमान से तेज आवाजें सुनाई देने की जानकारी सामने आई। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन आवाजों का संबंध एयर डिफेंस सिस्टम की कार्रवाई से था। सुरक्षा प्रणाली ने देश की ओर बढ़ रहे मिसाइल खतरे का मुकाबला करने और मिसाइलों को हवा में रोकने की कोशिश की।

    यूएई सरकार ने कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखी। कुछ समय बाद एक दूसरा अलर्ट जारी किया गया, जिसमें बताया गया कि मिसाइल का खतरा समाप्त हो गया है और स्थिति सामान्य हो गई है।

    यूएई के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि ईरान की ओर से दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। मंत्रालय के अनुसार, इनमें से एक मिसाइल यूएई की समुद्री सीमा से बाहर जाकर गिरी, जबकि दूसरी मिसाइल देश की सीमा के अंदर गिरी। अधिकारियों ने लोगों को भरोसा दिलाया कि स्थिति नियंत्रण में है और सुरक्षा व्यवस्था लगातार सक्रिय है।

    मिसाइल अलर्ट के बाद यूएई में नागरिक सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ गई। मोबाइल फोन पर जारी आपात संदेश का उद्देश्य लोगों को संभावित खतरे के प्रति तत्काल सावधान करना था। प्रशासन की ओर से नागरिकों को अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक निर्देशों पर भरोसा करने की अपील की गई।

    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने दोनों देशों के बीच तत्काल बातचीत की किसी योजना से भी इनकार किया।

    ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि समुद्री मार्ग जहाजों के लिए खुला है और पानी में बिछाई गई माइंस को हटा दिया गया है। दूसरी ओर, ईरान की ओर से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की बात सामने आने के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का प्रभाव पश्चिम एशिया से बाहर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ी है। तेल की कीमतों में लंबे समय तक मजबूती बनी रहने पर कई देशों में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

    तनाव बढ़ने का असर शेयर बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ने से कई बाजारों में दबाव देखने को मिला है। इसके साथ ही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज की लागत बढ़ने की चिंता भी सामने आई है।

    फिलहाल यूएई में मिसाइल खतरा समाप्त होने की घोषणा के बाद स्थिति सामान्य बताई गई है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। आने वाले समय में दोनों देशों के सैन्य कदम, कूटनीतिक संपर्क और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

  • मिसाइल हमले के आरोपों पर ईरान का यूएई को जवाब, तेहरान बोला- पहले सबूत दें, फिर लगाएं इल्जाम

    मिसाइल हमले के आरोपों पर ईरान का यूएई को जवाब, तेहरान बोला- पहले सबूत दें, फिर लगाएं इल्जाम


    नई दिल्ली। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। यूएई की ओर से ईरान पर दो बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आरोप लगाए जाने के बाद तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि बिना ठोस सबूत के इस तरह के गंभीर आरोप लगाने से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि मिसाइल घटना के पीछे किसी फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार ईरान से दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। दोनों मिसाइलें समुद्र में गिरीं। इनमें से एक यूएई के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में जबकि दूसरी उसके बाहर गिरी। यूएई का दावा है कि मिसाइलों का निशाना समुद्री यातायात हो सकता था। हालांकि इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या किसी तरह के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। यूएई प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों और गलत सूचनाओं पर भरोसा न करें और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर विश्वास करें।

    मिसाइल घटना के बाद यूएई के गृह मंत्रालय ने लोगों के मोबाइल फोन पर सुरक्षा अलर्ट भी भेजा। शुरुआती खतरे की चेतावनी के बाद प्रशासन ने स्थिति को सुरक्षित बताया और लोगों से सामान्य गतिविधियां फिर शुरू करने की अपील की। दूसरी तरफ ईरान ने यूएई के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस और विश्वसनीय सबूत सामने रखे जाने चाहिए। तेहरान ने चेतावनी दी कि बिना प्रमाण के आरोप क्षेत्र में किसी बड़े टकराव की वजह बन सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूएई ने ईरान के साथ अपने संबंधों को लेकर बड़ा फैसला भी लिया है। यूएई के विदेश मंत्रालय की संचार निदेशक अफरा अल हमेली के मुताबिक क्षेत्रीय परिस्थितियों को देखते हुए ईरान के साथ सभी व्यापारिक वाणिज्यिक और वित्तीय लेनदेन अगले आदेश तक निलंबित कर दिए गए हैं। इस फैसले से दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों पर और असर पड़ने की आशंका है।

    मिसाइल विवाद ऐसे समय सामने आया है जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर क्षेत्रीय तनाव पहले से बेहद संवेदनशील बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी क्षेत्र के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी सैन्य गतिविधि या सुरक्षा संकट का असर केवल ईरान और यूएई तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

    फिलहाल ईरान जहां मिसाइल हमले के आरोपों को पूरी तरह नकार रहा है वहीं यूएई अपने सुरक्षा आकलन के आधार पर घटना को गंभीर मान रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते आरोप प्रत्यारोप ने खाड़ी क्षेत्र में नई चिंता पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में इस घटना को लेकर और तथ्य सामने आने के साथ ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मिसाइलें वास्तव में कहां से दागी गई थीं और उनका वास्तविक उद्देश्य क्या था। फिलहाल इतना तय है कि इस विवाद ने ईरान और यूएई के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है और होर्मुज क्षेत्र में किसी भी नए घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

  • डोनाल्ड ट्रंप और किंम जोंग उन के बीच इसी साल नवंबर में होने वाली है बड़ी मीटिंग

    डोनाल्ड ट्रंप और किंम जोंग उन के बीच इसी साल नवंबर में होने वाली है बड़ी मीटिंग


    नई दिल्ली।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन (North Korean leader Kim Jong Un) के बीच एक बार फिर आमने-सामने मुलाकात की तैयारी चल रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप अपने अधिकारियों से इस साल नवंबर में किम के साथ बैठक कराने को लेकर चर्चा कर रहे हैं. यह मुलाकात ट्रंप की एशिया यात्रा के दौरान चीन के शेनझेन में होने वाली एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (Asia-Pacific Economic Cooperation) यानी APEC बैठक के आसपास हो सकती है।

    ट्रंप और किम की संभावित मुलाकात ऐसे वक्त हो रही है, जब कोरियाई प्रायद्वीप में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और नॉर्थ कोरिया के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर चर्चा में है. खास बात यह है कि ट्रंप ने हाल ही में दक्षिण कोरिया के साथ होने वाली संयुक्त सैन्य ड्रिल को सीमित करने का निर्देश दिया है।

    ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ये सैन्य अभ्यास महंगे हैं और नॉर्थ कोरिया के लिए एक गलत और दुश्मनी के संकेत भेजते हैं. उन्होंने दक्षिण कोरिया की तरफ से ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की जंग में मदद नहीं करने पर भी नाराजगी जताई।


    ट्रंप ने बताया किम जोंग उन मिलने को तैयार, दिया रिस्पॉन्स

    राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को यह भी दावा किया कि किम जोंग उन ने उनके हालिया संपर्क का जवाब दिया है. जब उनसे पूछा गया कि किम ने उनकी बातचीत की अपील का जवाब क्यों नहीं दिया, तो ट्रंप ने कहा, “आपको कैसे पता कि उसने जवाब नहीं दिया?” इसके बाद उन्होंने कहा, “हां, उसने जवाब दिया है.”

    राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बातचीत को “बहुत सकारात्मक” बताया, हालांकि उन्होंने इसकी कोई जानकारी साझा नहीं की. नॉर्थ कोरिया की तरफ से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. उधर, दक्षिण कोरिया ने साफ किया है कि अमेरिका के साथ सैन्य अभ्यास का मकसद नॉर्थ कोरिया पर हमला करना नहीं है.

    पहले कब-कब मिले ट्रंप-किम?
    अगर ट्रंप और किम जोंग उन की प्रस्तावित मुलाकात होती है, तो यह ट्रंप के पहले कार्यकाल के बाद दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने बैठक होगी. इससे पहले दोनों नेताओं के बीच तीन अहम मुलाकातें हो चुकी हैं:

    – जून 2018, सिंगापुर समिट: ट्रंप और किम की यह पहली ऐतिहासिक मुलाकात थी. किसी मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति और नॉर्थ कोरिया के नेता के बीच पहली बार आमने-सामने बातचीत हुई. दोनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में काम करने पर सहमति जताई.

    – फरवरी 2019, हनोई समिट: दोनों नेताओं की दूसरी औपचारिक बैठक वियतनाम के हनोई में हुई. हालांकि, परमाणु निरस्त्रीकरण और नॉर्थ कोरिया पर लगे प्रतिबंधों में राहत को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी और बैठक बिना किसी समझौते के खत्म हो गई.

    – जून 2019, DMZ मुलाकात: ट्रंप और किम ने कोरियाई सीमा पर स्थित डिमिलिटराइज्ड जोन यानी DMZ में अचानक मुलाकात की. इस दौरान ट्रंप नॉर्थ कोरिया की सीमा में कुछ कदम अंदर जाने वाले पहले मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति बने. यह मुलाकात काफी प्रतीकात्मक रही और दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत कूटनीति की एक और मिसाल बनी.

  • भारत की तर्ज पर अमेरिका में भी SIR ….. वोटर लिस्ट की सफाई में जुटे ट्रंप, अब तक मिले 24 हजार फर्जी मतदाता

    भारत की तर्ज पर अमेरिका में भी SIR ….. वोटर लिस्ट की सफाई में जुटे ट्रंप, अब तक मिले 24 हजार फर्जी मतदाता


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में वोटर लिस्ट (Voter List) की शुद्धता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने दावा किया है कि 2020 के वोटर रिकॉर्ड और नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड के मिलान किया गया है. इस दावे के मुताबिक, 12.8 करोड़ मतदाताओं के शुरुआती विश्लेषण में 24 हजार से अधिक गैर-नागरिक मतदाताओं की पहचान हुई है।

    ट्रंप ने इसकी जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth पर पोस्ट की और कहा कि अब बचे हुए 3.2 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी जिसके बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

    ट्रंप ने लिखा, ‘पहले 12.8 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच में यूएस सेंसस ब्यूरो ने साबित कर दिया है कि 24,000 से अधिक गैर-नागरिकों ने अवैध वोट डाले. अभी अगले 3.2 करोड़ मतदाताओं का विश्लेषण बाकी है और यह आंकड़ा और बढ़ेगा. मैं चुनाव जीता था! हमें हर हाल में ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पास करना होगा.।

    व्हाइट हाउस द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, जिन गैर-नागरिकों के वोटर रिकॉर्ड मिले हैं उनमें मेक्सिको में जन्मे लोगों की संख्या सबसे अधिक (3,800) बताई गई है. इसके बाद कनाडा (950), फिलीपींस (900), जमैका (900), जर्मनी (700), ब्रिटेन (650), क्यूबा (450), वियतनाम (400), हैती (400) और दक्षिण कोरिया (350)का नंबर आता है. ट्रंप का दावा है कि है कि बाकी बचे 3.2 करोड़ वोटों के विश्लेषण के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।

    ट्रंप ने कहा कि यूएस सेंसस ब्यूरो 2020 के मतदाता रिकॉर्ड की नागरिकता संबंधी रिकॉर्ड के साथ जांच कर रहा है. उन्होंने इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ते हुए दावा किया कि इससे 2020 के चुनाव को लेकर उनकी पुरानी आपत्तियां पुख्ता होती हैं. हालांकि, ट्रंप के इन दावों को लेकर भी सवार उठ रहे हैं।

    इस पूरे विवाद के बीच ट्रंप ने एक बार फिर ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को पारित करने की मांग दोहराई है. इस प्रस्तावित कानून के तहत संघीय चुनावों में मतदान के लिए नागरिकता का प्रमाण और फोटो पहचान पत्र अनिवार्य करने का प्रावधान है. साथ ही राज्यों को मतदाता सूचियों से गैर-नागरिकों के नाम हटाने की दिशा में भी कदम उठाने होंगे।

    भारत के चुनावी मॉडल की कर चुके हैं तारीफ
    दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने इस मुद्दे पर भारत के चुनावी मॉडल की भी सराहना की थी. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा था कि भारत में 64.6 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया और लगभग सभी मतदाताओं के पास वैध फोटो पहचान पत्र था. ट्रंप ने भारत की मतदाता पहचान प्रणाली को अमेरिका के लिए एक उदाहरण बताया।

    हालांकि, इस मुद्दे पर अमेरिका में राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं. आलोचकों का कहना है कि बड़े पैमाने पर गैर-नागरिकों के मतदान के दावों के समर्थन में पर्याप्त सार्वजनिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन इसे चुनावी सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार मान रहा है।