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  • Canada के अल्बर्टा सैन्य अड्डे पर लगी भीषण आग….. कई लोगों की मौत

    Canada के अल्बर्टा सैन्य अड्डे पर लगी भीषण आग….. कई लोगों की मौत


    टोरंटो।
    कनाडा (Canada) के अल्बर्टा प्रांत ( of Alberta) में स्थित सैन्य अड्डे ( Canadian Military Base ) पर एक गंभीर घटना के बाद भीषण आग लग गई। इस घटना में कई लोगों की मौत हुई है और अन्य घायल हुए हैं। कनाडा के रक्षा मंत्री डेविड मैकगिन्टी (Defence Minister David McGinty) ने शनिवार को इसकी पुष्टि की। हालांकि, उन्होंने मृतकों और घायलों की संख्या या घटना के कारणों का खुलासा नहीं किया है।

    एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, आग तेज हवाओं के कारण तेजी से फैल रही है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि आग सैन्य अड्डे की बाड़ पार कर आसपास के इलाके की ओर बढ़ गई थी। कई क्षेत्रों के अग्निशमन दल आग बुझाने के अभियान में जुटे हैं। फिलहाल, प्रशासन ने आसपास के लोगों के लिए किसी तरह का निकासी आदेश जारी नहीं किया है।


    रक्षा मंत्री बोले- स्थिति बेहद संवेदनशील

    कनाडा के रक्षा मंत्री डेविड मैकगिन्टी ने कहा कि सैन्य अड्डे पर हुई घटना में लोगों की जान गई है और कई लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा “मुझे यह बताते हुए दुख हो रहा है कि सैन्य अड्डे पर हुई घटना के परिणामस्वरूप लोगों की मौत हुई है और कई लोग घायल भी हुए हैं।”

    मैकगिन्टी ने घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थिति को बेहद सक्रिय और संवेदनशील बताया। उन्होंने कहा कि अधिकारी अभी यह पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर हुआ क्या था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मामले में आगे और जानकारी दी जाएगी। रक्षा मंत्री के मुताबिक, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस भी जांच में शामिल है।


    तेज हवाओं के कारण तेजी से फैल रही आग

    वेनराइट के म्युनिसिपल डिस्ट्रिक्ट ने बताया कि शनिवार को आग सैन्य अड्डे की बाड़ पार कर गई और तेज हवाओं के कारण तेजी से फैलने लगी। आग पर काबू पाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से अग्निशमन दल बुलाए गए हैं। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कनाडाई सशस्त्र बलों के साथ संघीय, प्रांतीय और स्थानीय अधिकारी मिलकर काम कर रहे हैं। आसपास के वेनराइट समुदाय की ओर से अस्पताल और अग्निशमन संबंधी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।


    पीएम कार्नी ने बताया गंभीर घटना

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शनिवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अल्बर्टा स्थित सीएफबी वेनराइट सैन्य अड्डे पर आग लगने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एक गंभीर घटना के कारण यहां बड़ी आग लगी है। कार्नी ने घटना से प्रभावित सभी महिला और पुरुष सैन्यकर्मियों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सोच और प्रार्थनाएं प्रभावित लोगों के साथ हैं। वहीं, अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने आग को गंभीर और दुखद घटना बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना से कई सैन्यकर्मी प्रभावित हुए हैं। संघीय और प्रांतीय प्रशासन के अधिकारी राहत एवं आपातकालीन कार्रवाई के समन्वय में जुटे हैं।

    कनाडा के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों में शामिल है वेनराइट

    सीएफबी वेनराइट सैन्य अड्डा अल्बर्टा में एडमंटन से करीब 180 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यह कनाडा के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों में से एक है, जहां सैनिकों को युद्ध अभियानों की तैयारी कराई जाती है। यहां कनाडाई मैन्यूवर ट्रेनिंग सेंटर स्थित है, जहां युद्धक्षेत्र जैसी परिस्थितियों में सैन्य अभ्यास कराया जाता है। इसके अलावा, यहां तीसरे कनाडाई डिवीजन का प्रशिक्षण केंद्र भी है, जो सैनिकों को सैन्य प्रशिक्षण देता है।

  • डूरंड लाइन पर फिर बढ़ा तनाव…. अफगान बलों के साथ भीषण झड़प में पाकिस्तान के 7 सैनिकों की मौत

    डूरंड लाइन पर फिर बढ़ा तनाव…. अफगान बलों के साथ भीषण झड़प में पाकिस्तान के 7 सैनिकों की मौत


    इल्लामाबाद।
    पाकिस्तान और अफगानिस्तान (Pakistan and Afghanistan) के बीच विवादित डूरंड लाइन (Disputed Durand Line) पर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई भीषण झड़प में तकरीबन सात पाकिस्तानी सैनिकों (Pakistani Soldiers) की मौत की खबर है. लड़ाई अफगानिस्तान के पक्तिया प्रांत के दांड पटान जिले में हुई. यह इलाका खारलाची गेट और टॉप सर और कोंज अली सेक्टरों के पास स्थित है।

    मिली जानकारी के मुताबिक, दोपहर के आसपास शुरू हुई गोलीबारी की वजह से सीमा पार व्यापार प्रभावित हुआ. आसपास के गांवों के लोगों को भी अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। अफगान सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि उनकी सेना ने पाकिस्तानी गोलीबारी का जवाब दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सीमा पर बिना इजाजत के चौकियां बना रहा था. अफगान पक्ष ने दावा किया कि झड़प में पाकिस्तानी सेना के जवानों को नुकसान पहुंचा।

    वहीं, पाकिस्तानी अधिकारियों ने गोलीबारी शुरू करने का आरोप अफगान सीमा रक्षकों पर लगाया है. उनका कहना है कि अफगान गार्ड्स ने पाकिस्तान के कुर्रम जिले में चौकियों को निशाना बनाया. इसके जवाब में पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई की.


    पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच क्यों बढ़ रहा तनाव?

    दरअसल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में पिछले कुछ समय से तनाव बना हुआ है. सीमा पर बार-बार होने वाली झड़पों के पीछे आतंकवादी गतिविधियों, सीमा पार हमलों और सैन्य ठिकानों को लेकर मतभेद बताए जाते हैं.

    पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर आरोप लगाया है कि वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के लड़ाकों को अफगान क्षेत्र में सक्रिय रहने देती है. पाकिस्तान का दावा है कि ये लड़ाके अफगानिस्तान से सीमा पार करके उसके इलाके में हमले करते हैं. काबुल इन आरोपों से इनकार करता रहा है.

    शनिवार को पाकिस्तान के कुर्रम जिले में भी पाकिस्तानी सैनिकों और अफगान तालिबान के जवानों के बीच कई जगहों पर गोलीबारी हुई थी. पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि उनकी सेना ने तोपखाने की मदद से तालिबान के ठिकानों को निशाना बनाया और अफगानिस्तान से घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी. इस घटना पर तालिबान सरकार की तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।


    सीमा पर सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

    डूरंड लाइन पर लगातार होने वाली झड़पों से सीमा की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. सीमा नियंत्रण, उग्रवादी गतिविधियों और सैन्य तैनाती को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बार-बार सशस्त्र संघर्ष का रूप ले लेते हैं. ताजा झड़प के बाद इलाके में तनाव बना हुआ है।

  • दुनिया के इन 10 देशों में भूख का बड़ा संकट, पाकिस्तान से बांग्लादेश और अफगानिस्तान तक बिगड़े हालात, 17.7 करोड़ लोगों पर मंडराया खतरा

    दुनिया के इन 10 देशों में भूख का बड़ा संकट, पाकिस्तान से बांग्लादेश और अफगानिस्तान तक बिगड़े हालात, 17.7 करोड़ लोगों पर मंडराया खतरा


    नई दिल्ली। दुनिया के कई देशों में खाद्य संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। पाकिस्तान भी उन देशों में शामिल है जहां लाखों लोगों के सामने दो वक्त की रोटी जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन एक्शन अगेंस्ट हंगर की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में वर्ष 2026 के दौरान करीब 1.06 करोड़ लोगों को जीवित रहने के लिए तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है। यह आंकड़ा देश में गरीबी बेरोजगारी महंगाई और प्राकृतिक आपदाओं के कारण पैदा हुए संकट की गंभीरता को उजागर करता है। रिपोर्ट में पाकिस्तान के अलावा दुनिया के नौ अन्य देशों को भी गंभीर खाद्य संकट से प्रभावित बताया गया है।
    पाकिस्तान में आर्थिक हालात लंबे समय से आम लोगों के लिए चुनौती बने हुए हैं। महंगाई के कारण खाने पीने की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई परिवारों की आमदनी उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है। बेरोजगारी और आय के सीमित अवसरों के कारण लोगों की भोजन और पौष्टिक आहार तक पहुंच प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक संकेतकों में सुधार के दावों के बावजूद बड़ी आबादी के सामने खाद्य सुरक्षा की समस्या बनी हुई है।
    पाकिस्तान में खाद्य संकट की एक बड़ी वजह प्राकृतिक आपदाएं भी हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ सूखा भीषण गर्मी और अनियमित मानसूनी बारिश जैसी घटनाओं का असर खेती पर पड़ता है। फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों की आमदनी घटती है और खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता तथा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही पशुपालन पर निर्भर परिवारों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। जलवायु परिवर्तन और मौसम की अनिश्चितता ने पहले से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
    मानवीय सहायता में कमी आने से हालात और चिंताजनक हो सकते हैं। जब जरूरतमंद परिवारों को पर्याप्त आर्थिक मदद और भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता तो उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतों में कटौती करनी पड़ती है। कुछ परिवार कम भोजन करने या दिन में एक समय का खाना छोड़ने के लिए मजबूर हो सकते हैं। आर्थिक संकट से जूझ रहे लोगों को अपने पशु और दूसरी संपत्तियां बेचने जैसे कदम भी उठाने पड़ सकते हैं। बच्चों की शिक्षा पर भी इसका असर पड़ने की आशंका रहती है क्योंकि परिवारों को सीमित संसाधनों में भोजन और अन्य जरूरी खर्चों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। लंबे समय तक पर्याप्त पोषण नहीं मिलने से बच्चों और महिलाओं में कुपोषण का खतरा बढ़ सकता है।
    एक्शन अगेंस्ट हंगर की रिपोर्ट में पाकिस्तान के अलावा नाइजीरिया कांगो सूडान यमन अफगानिस्तान म्यांमार बांग्लादेश दक्षिण सूडान और सीरिया को भी गंभीर खाद्य संकट का सामना करने वाले देशों में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन दस देशों में लगभग 17.7 करोड़ लोग गंभीर भूख की समस्या से प्रभावित हैं। इन देशों में संघर्ष राजनीतिक अस्थिरता गरीबी जलवायु संबंधी आपदाएं और मानवीय सहायता की कमी जैसे अलग-अलग कारण खाद्य संकट को बढ़ाते हैं। हालांकि हर देश में संकट की परिस्थितियां और उसकी तीव्रता अलग-अलग हैं।
    वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट का बढ़ना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। भूख से निपटने के लिए केवल भोजन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि प्रभावित परिवारों की आय बढ़ाने कृषि व्यवस्था मजबूत करने और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता विकसित करने की भी जरूरत है। पाकिस्तान समेत दूसरे प्रभावित देशों में समय पर मानवीय सहायता पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि संकट से निपटने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो करोड़ों लोगों के जीवन और भविष्य पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

  • ईरान पर परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेंगे ट्रंप, जमीनी सेना भेजने से भी किया इनकार, हमलों के लिए नए विकल्पों पर विचार

    ईरान पर परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेंगे ट्रंप, जमीनी सेना भेजने से भी किया इनकार, हमलों के लिए नए विकल्पों पर विचार


    नई दिल्ली ।अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा। इसके साथ ही उन्होंने ईरान की जमीन पर अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने की संभावना से भी इनकार किया है। हालांकि, ईरान के ऊर्जा ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अमेरिकी सैन्य स्तर पर नए विकल्पों पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े सवाल पर कहा कि उन्हें इसकी जरूरत नहीं है और वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान की जमीन पर अपने सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा होता नहीं दिख रहा। उनके इस बयान से फिलहाल परमाणु हथियारों के इस्तेमाल और जमीनी सैनिकों की तैनाती को लेकर अमेरिकी प्रशासन की घोषित स्थिति सामने आई है।

    ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल पर भी चर्चा हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य योजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया है कि ट्रंप ने ईरान पर नए हमलों के विकल्प तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इन विकल्पों में ईरान के ऊर्जा ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की योजनाएं शामिल हैं। इनमें अमेरिका के शक्तिशाली गैर-परमाणु बम एमओएबी का इस्तेमाल भी एक संभावित विकल्प बताया गया है।

    एमओएबी को आम तौर पर ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ कहा जाता है। यह एक शक्तिशाली पारंपरिक बम है, परमाणु हथियार नहीं। ट्रंप ने भी बातचीत के दौरान इसी अंतर को स्पष्ट किया। परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार करने के बावजूद, ईरान के खिलाफ पारंपरिक हथियारों से संभावित हमलों के विकल्पों पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    ईरान के पिकैक्स माउंटेन क्षेत्र में स्थित ठिकाने को निशाना बनाने का विचार भी चर्चा में है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहता। उन्होंने दावा किया कि पहले किए गए अमेरिकी हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, ईरान की कुछ परमाणु सुविधाएं पहाड़ों के नीचे स्थित हैं। इसी संदर्भ में पिकैक्स माउंटेन पर हमले की संभावना पर विचार किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि इन संभावित सैन्य विकल्पों में से किसी को अंतिम मंजूरी दी गई है या नहीं। फिलहाल नए हमलों की योजनाएं तैयार करने और विभिन्न विकल्पों पर विचार किए जाने की बात सामने आई है। इसलिए संभावित कार्रवाई और वास्तविक रूप से किए गए हमलों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।

    ट्रंप ने बातचीत के दौरान अमेरिका, रूस और चीन के परमाणु हथियार भंडार का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हथियार भंडार है, जबकि रूस दूसरे और चीन तीसरे स्थान पर है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन अगले पांच वर्षों में अमेरिका के करीब पहुंच सकता है। यह उनका आकलन है, न कि भविष्य की स्थिति का स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष।

    अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, अमेरिका रूस और चीन के साथ परमाणु हथियारों में कमी लाने को लेकर बातचीत कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन चर्चाओं के जरिए परमाणु हथियारों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इस तरह ट्रंप के बयान में एक ओर ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों और जमीनी सैनिकों के इस्तेमाल से इनकार किया गया है, वहीं दूसरी ओर संभावित पारंपरिक सैन्य कार्रवाई और वैश्विक परमाणु हथियारों में कमी को लेकर बातचीत का उल्लेख भी किया गया है।

  • सऊदी अरब जाने वाली उड़ानों पर 24 अक्टूबर तक रोक, एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने यात्रियों को दी राहत

    सऊदी अरब जाने वाली उड़ानों पर 24 अक्टूबर तक रोक, एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने यात्रियों को दी राहत

    नई दिल्ली ।सऊदी अरब के मौजूदा हालात को देखते हुए एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने अपनी उड़ानों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। दोनों एयरलाइंस ने सऊदी अरब के तीन प्रमुख शहरों जेद्दा, रियाद और दम्माम के लिए 24 अक्टूबर 2026 तक अपनी सभी उड़ानें अस्थायी रूप से रद्द कर दी हैं। इस फैसले से प्रभावित यात्रियों को राहत देने के लिए टिकट की तारीख बदलने और पूरा रिफंड लेने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

    एयरलाइंस के इस निर्णय से उन यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिन्होंने निर्धारित अवधि के दौरान सऊदी अरब आने-जाने के लिए टिकट बुक कराए थे। ऐसे यात्रियों को अपनी यात्रा से संबंधित विकल्पों की जानकारी लेकर उसी के अनुसार आगे की योजना बनाने की सलाह दी गई है। यात्रियों के लिए तारीख बदलने की सुविधा बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराई गई है।

    जिन यात्रियों के पास 15 अक्टूबर 2026 या उससे पहले की कन्फर्म बुकिंग है और जिनकी यात्रा 9 से 25 अक्टूबर के बीच निर्धारित थी, वे 10 नवंबर 2026 तक अपनी यात्रा की तारीख बिना अतिरिक्त शुल्क के बदल सकते हैं। इस व्यवस्था के तहत प्रभावित यात्रियों को अपनी यात्रा दोबारा निर्धारित करने का अवसर दिया गया है। हालांकि, यात्रा में बदलाव करते समय संबंधित एयरलाइन की शर्तों और उपलब्ध उड़ानों की जानकारी लेना जरूरी होगा।

    एयरलाइंस ने यात्रियों को वैकल्पिक स्टेशन से यात्रा करने का विकल्प भी दिया है। इसके तहत यात्री अपनी सुविधा और संबंधित एयरलाइन की सेवाओं के आधार पर खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) क्षेत्र के किसी दूसरे स्टेशन से आने-जाने के लिए बुकिंग में बदलाव कर सकते हैं। इस सुविधा का उद्देश्य उन यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जिनकी मूल उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।

    एअर इंडिया के यात्रियों को दुबई या दोहा से आने-जाने वाली उड़ानों के लिए अपनी बुकिंग में बदलाव करने की सुविधा दी गई है। वहीं, एअर इंडिया एक्सप्रेस के यात्री अबू धाबी, अल ऐन, बहरीन, दोहा, दुबई, कुवैत, मस्कट, रास अल खैमाह, सलालाह या शारजाह से आने-जाने वाली उड़ानों के लिए अपनी बुकिंग बदल सकते हैं। इन विकल्पों के जरिए यात्री अपनी जरूरत और उपलब्ध सेवाओं के अनुसार यात्रा की नई योजना बना सकते हैं।

    जिन यात्रियों की उड़ानें रद्द हुई हैं और वे अब यात्रा नहीं करना चाहते, उनके लिए पूरा रिफंड लेने का विकल्प भी रखा गया है। ऐसे यात्री टिकट की तारीख बदलने के बजाय अपनी बुकिंग रद्द कर धनवापसी का अनुरोध कर सकते हैं। इस तरह प्रभावित यात्रियों के पास यात्रा को आगे बढ़ाने या उसे पूरी तरह छोड़ने के दोनों विकल्प उपलब्ध हैं।

    एयरलाइंस का यह फैसला सऊदी अरब में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ईरान समर्थित हूती समूह की हमले से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आने की खबरों के बाद क्षेत्रीय हालात पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे पहले ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने भी अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी सलाह जारी की थी। शुक्रवार को जारी सलाह में ब्रिटिश नागरिकों को सऊदी अरब की गैर-जरूरी यात्राओं से बचने की सिफारिश की गई थी।

    ऐसे हालात में सऊदी अरब जाने या वहां से भारत लौटने की योजना बना रहे यात्रियों के लिए अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि करना महत्वपूर्ण है। जिन यात्रियों की बुकिंग प्रभावित हुई है, वे तारीख बदलने, वैकल्पिक स्टेशन से यात्रा करने या पूरा रिफंड लेने के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

  • Pakistan: ईशनिंदा के आरोप के बाद भड़की हिंसा… डर के मारे 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों ने छोड़ा गांव

    Pakistan: ईशनिंदा के आरोप के बाद भड़की हिंसा… डर के मारे 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों ने छोड़ा गांव


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के पंजाब प्रांत (Punjab Province) में एक ईसाई व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगने के बाद मुस्लिम भीड़ ने उसके घर और दुकान में आग लगा दी. घटना के बाद हिंसा (Violence) की आशंका से 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों (Christian families) को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. इस्लामाबाद में 16 अक्टूबर को एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना पंजाब के घड़ियाल कलां गांव की है, जहां 40 वर्षीय ईसाई व्यक्ति कामरान मसीह एक छोटी फार्मेसी चलाते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, घटना से एक दिन पहले पुलिस ने कामरान मसीह को गिरफ्तार किया था. स्थानीय मुसलमानों ने उन पर व्हाट्सऐप ग्रुप में ईशनिंदा से जुड़ा वीडियो साझा करने का आरोप लगाया था. ‘क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल-मॉर्निंग स्टार न्यूज’ ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि मसीह की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही उनके परिवार और गांव के अन्य ईसाई परिवार भीड़ के हमले के डर से घर छोड़कर भागने लगे. सूत्र के मुताबिक, कई मुसलमान मसीह की दुकान और घर के पास इकट्ठा हुए, विरोध प्रदर्शन किया और दोनों इमारतों में आग लगा दी।


    पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों पर उठे सवाल

    ‘क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों की आलोचना की है. उनका कहना है कि इन कानूनों का इस्तेमाल निजी विवादों और दूसरे झगड़ों में किया जा सकता है, जिसका सबसे बुरा असर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर पड़ता है. 22 जुलाई को एक प्रमुख अल्पसंख्यक समूह ने पाकिस्तान पर इन कानूनों के दुरुपयोग को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया था. समूह ने झूठे आरोपों, आरोपियों के खिलाफ भीड़ की हिंसा और अल्पसंख्यकों को ऐसी घटनाओं के नतीजों से बचाने में नाकामी का मुद्दा उठाया।


    मानवाधिकार संगठन ने न्याय व्यवस्था पर उठाए सवाल

    ‘वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी’ (वीओपीएम) के अनुसार, पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक हैं. संगठन का कहना है कि इनका धार्मिक अल्पसंख्यकों पर गहरा असर पड़ता है और सरकारी संस्थाएं इनके दुरुपयोग को रोकने में लगातार विफल रही हैं. वीओपीएम ने कहा कि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक यह है कि वह निर्दोष लोगों को झूठे आरोपों से बचाने में सक्षम नहीं रही है. संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायपालिका और कानून लागू करने वाली एजेंसियां ईशनिंदा के आरोपों का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में विफल रही हैं. उसके मुताबिक, झूठे आरोप लगाने वालों को जवाबदेह नहीं ठहराए जाने से ऐसा संदेश जाता है कि इस तरह की हरकतें बिना किसी परिणाम के जारी रह सकती हैं. इससे कानूनी व्यवस्था में जनता का भरोसा कमजोर होता है।


    रिमशा मसीह का मामला भी उठाया

    वीओपीएम ने डाउन सिंड्रोम से पीड़ित पाकिस्तानी ईसाई लड़की रिमशा मसीह के मामले का भी जिक्र किया. उस पर कुरान के अपमान का आरोप लगाया गया था, लेकिन बाद में सामने आए सबूतों से आरोप गढ़े जाने की बात सामने आई. रिमशा को बाद में रिहा कर दिया गया, लेकिन मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, तब तक उसके परिवार को भारी दबाव का सामना करना पड़ा था. संगठन का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि अदालत में तथ्यों की जांच होने से पहले ही कोई व्यक्ति ईशनिंदा जैसे गंभीर आरोपों का शिकार बन सकता है।

    रिपोर्ट में मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच, झूठे आरोप लगाने वालों की जवाबदेही और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है।

  • US: ट्रंप ने मिडटर्म चुनाव को बताया बेहदअहम….. , बोले- मुझे उम्मीदवार समझकर करें वोटिंग

    US: ट्रंप ने मिडटर्म चुनाव को बताया बेहदअहम….. , बोले- मुझे उम्मीदवार समझकर करें वोटिंग


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने आगामी मिडटर्म चुनाव (Midterm Elections) को देश के लिए बेहद अहम बताया है. 16 अक्टूबर को जॉर्जिया के डाल्टन में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने समर्थकों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में वोट डालने की अपील की. ट्रंप ने कहा कि इस चुनाव में लोग ऐसा समझें, जैसे वह खुद भी बैलेट पर उम्मीदवार हों।

    ट्रंप ने कहा कि जब वह चुनाव लड़ते हैं, तब उन्हें 49 फीसदी ज्यादा वोट मिलते हैं. उन्होंने दावा किया कि उनके उम्मीदवार न होने पर लोग उतनी संख्या में वोट करने नहीं पहुंचते. ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ने जो काम किए हैं, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए समर्थकों को मतदान करना होगा।


    ‘हमारे काम को हमसे छिनने नहीं दे सकते’

    रैली में ट्रंप ने कहा कि यह शायद अमेरिका के इतिहास का सबसे अहम मिडटर्म चुनाव है. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसे काम किए हैं, जैसा पहले कभी नहीं हुआ. उन्होंने समर्थकों से कहा कि वे वोट डालने जरूर जाएं. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को पहले से ज्यादा महान बनाया गया है. उनकी सरकार की उपलब्धियों को आगे बढ़ाने के लिए मतदान जरूरी है. उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती दो सालों को भी बेहद सफल बताया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दो साल पूरे होने में अभी चार महीने बाकी हैं।

    ट्रंप के संबोधन के दौरान कुछ लोगों ने विरोध किया. इस दौरान कई लोगों को कार्यक्रम स्थल से बाहर ले जाया गया. इसके बाद ट्रंप ने कहा कि ये लोग पैसे लेकर प्रदर्शन करने आए थे. उन्होंने कहा कि वे पैसे लेकर आए प्रदर्शनकारी हैं. हमारे यहां ऐसे दो या तीन लोग थे.

    अर्थव्यवस्था और रोजगार पर किए दावे
    ट्रंप ने रैली में अमेरिकी अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए रोजगार, व्यक्तिगत आय और गरीबी दर को लेकर कई दावे किए. उन्होंने कहा कि देश में पहले से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं और व्यक्तिगत आय अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका में गरीबी दर ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में नई फैक्ट्रियां बन रही हैं. उनके मुताबिक, कार और दवा कंपनियां भी बड़े निवेश कर रही हैं।

    रैली के दौरान ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर ‘ट्रंप स्ट्रेट’ रखने को लेकर भी मजाक किया. उन्होंने कहा कि उनके पास गोल्फ कोर्स और झील है और अब वह एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी चाहते हैं. ट्रंप ने इस विचार को एक मजाकिया अंदाज में पेश किया और कहा कि अब केवल एक महासागर की कमी है. रैली में ट्रंप का मेन मैसेज आगामी मिडटर्म चुनाव में वोटिंग को लेकर था. उन्होंने समर्थकों से वोट डालने की अपील करते हुए कहा कि चुनाव में उनकी सरकार के कामकाज का भविष्य दांव पर है।

  • यमन में हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला … अदन एयरपोर्ट पर दागीं दो मिसाइलें

    यमन में हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला … अदन एयरपोर्ट पर दागीं दो मिसाइलें


    सना।
    यमन (Yemen) के बंदरगाह शहर अदन ( Port City Aden) के एयरपोर्ट (Airport) पर शुक्रवार रात दो मिसाइलों से हमला हुआ. स्थानीय पुलिस ने इसके लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) को जिम्मेदार ठहराया है. अधिकारियों का कहना है कि हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. दस दिन से भी कम समय में एयरपोर्ट पर यह दूसरा हमला बताया गया है।


    विमान से करीब 500 मीटर दूर गिरीं मिसाइलें

    यमन सरकार के सूचना मंत्री ने बताया कि मिसाइलें यमनिया एयरवेज के एक प्लेन से करीब 500 मीटर दूर गिरीं. यह विमान उड़ान भरने की तैयारी कर रहा था. एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि विमान में सवार यात्रियों को तुरंत बाहर निकाल लिया गया।

    हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी सबा ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से बताया कि समूह ने एयरपोर्ट के पास स्थित एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया था. अधिकारी के मुताबिक, इस ठिकाने पर सऊदी नेतृत्व वाली सेना का कमांड सेंटर और हथियारों का भंडार है।


    दो दिन में अदन में दूसरा बड़ा हमला

    अदन में दो दिन के अंदर यह दूसरा बड़ा हमला है. इससे पहले गुरुवार को हूती विद्रोहियों ने राष्ट्रपति भवन के परिसर पर हमला किया था. यह परिसर यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का केंद्र है. उस हमले में पांच लोगों की मौत हुई थी. अधिकारियों के मुताबिक, 7 अक्टूबर को भी अदन एयरपोर्ट पर दो मिसाइलें दागी गई थीं. उस हमले में भी किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी।

    यमन के परिवहन मंत्रालय ने हमले को जरूरी बुनियादी ढांचे और सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाने की सुनियोजित कोशिश बताया. मंत्रालय ने आरोप लगाया कि हूती विद्रोहियों की कार्रवाई से आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।

    दरअसल, यमन में हाल के महीनों में लड़ाई फिर तेज हुई है. यह संघर्ष व्यापक ईरान युद्ध से जुड़े तनाव के बीच बढ़ा है. हूती विद्रोहियों ने पड़ोसी सऊदी अरब के एयरपोर्ट, तेल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को भी निशाना बनाया है.


    लाल सागर और बाब अल मंदेब स्ट्रेट पर भी तनाव

    हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तटीय इलाकों में बाब अल मंदेब स्ट्रेट के पास भी अपनी पकड़ बढ़ाई है. यह समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है और होर्मुज स्ट्रेट के विकल्पों में गिना जाता है.

    हूती विद्रोहियों को इस इलाके से हटाने और खोया हुआ क्षेत्र वापस लेने के लिए सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है. इस बीच यमन के ताइज जैसे शहरों में आम नागरिकों को भी संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है. बढ़ती लड़ाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक बाजारों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

  • बेल आउट पैकेज पर गुजारा करने वाला पाकिस्तान अब विश्व बैंक और IMF में बड़ी भूमिका में

    बेल आउट पैकेज पर गुजारा करने वाला पाकिस्तान अब विश्व बैंक और IMF में बड़ी भूमिका में


    इस्लामाबाद।
    IMF के बेल आउट पैकेज (Bailout package) से गुजर बसर करने वाला पाकिस्तान (Pakistan) अब बड़ी टेबल पर बैठता हुआ नजर आएगा। जी हां, IMF से 1.2 अरब डॉलर के पैकेज की मंजूरी का इंतजार कर रहा पाकिस्तान अब इस वैश्विक संस्था के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (Global Institution Board of Governors) की अध्यक्षता करने जा रहा है। पाकिस्तान सरकार के मुताबिक 1953 के बाद यह पहली बार है, जब इस्लामाबाद इस पद पर बैठेगा। बता दें, इस पद के तहत पाकिस्तान उन बैठकों की अध्यक्षता करेगा, जिनमें सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर शामिल होते हैं। हालांकि कर्ज देने के मामले में पाकिस्तान की कोई सीधी भूमिका नहीं होगी।

    पाकिस्तान सरकार की तरफ से बताया गया कि बैंकॉक में हुए विश्व बैंक और IMF की वार्षिक बैठकों के दौरान वहां पाकिस्तान के गवर्नर अहद खान चीमा को 2027 के लिए आगामी अध्यक्ष के रूप में नामित किया गया है। पाकिस्तान की तरफ से इस नियुक्ति को एक ऐतिहासिक पल करार दिया गाय है।

    कर्ज लेकर पलने वाला देश अब बड़ी भूमिका में
    पाकिस्तान अपनी स्थापना के बाद लगातार IMF से बेल आउट पैकेज ले चुका है। 1950 में IMF की स्थापना के बाद करीब 25 बार पाकिस्तान IMF की मदद लेकर अपना देश चलाने की कोशिश कर रहा है। बार-बार IMF के पास जाने से पता चलता है कि पाकिस्तान को अपनी बाहरी देनदारियों को पूरा करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा जुटाने में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, देश में महंगाई और फंडिंग का दबाव भी बना हुआ है।

    वर्तमान की स्थिति में पाकिस्तान IMF से करीब 1.2 बिलियन डॉलर निकालने की जुगत में है। इसमें एक्सटेंटेड फंड फैसिलिटी और जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए दी जाने वाली मदद शामिल है। लेकिन इस पैसे को निकालने के लिए IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है, जो कि अभी तक मिली नहीं है।


    पाकिस्तान का अर्थव्यवस्था का मॉडल अस्थिर- विश्वबैंक

    आईएमएफ की तरफ से पाकिस्तान को लगातार एक अस्थिर अर्थव्यवस्था वाला देश कहा जाता रहा है। विश्व बैंक ने भी हाल में पाकिस्तान के विकास मॉडल को अस्थिर ही बताया था। विश्व बैंक की तरफ से कहा गया था कि पाकिस्तान में सार्वजनिक खपत का उच्च स्तर, कम उत्पादकता और भारी मात्रा में कर्ज लेना। अब असली चुनौती यह है कि क्या ये लोन ऐसे विकास को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे भविष्य में किसी और ‘बेलआउट’ (आर्थिक मदद) की जरूरत न पड़े।

    पाकिस्तान शुरुआत से ही दुनिया के लिए एक बड़ा संकट बनकर उभरता रहता है। एक इस्लामिक देश, जिसके पास परमाणु हथियार है। वह अपने आप की मदद करने के लिए दुनिया को लगातार इस मामले में चैक पर रखता है कि वह आतंकवाद से लड़ रहा है। अगर उसकी मदद नहीं की गई, तो परमाणु हथियार खतरे में पड़ सकते हैं। इसलिए पश्चिम एशिया से लेकर अमेरिका तक पाकिस्तान और उसकी सेना का अपने मन मुताबिक उपयोग करके पैसे के जरिए इस्लामाबाद की सत्ता के संभाले रहते हैं।

    शहबाज शरीफ की सरकार के आने के बाद IMF और सऊदी अरब ने खुले मन से पाकिस्तान की मदद की है। IMF का कहना है कि पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष के बावजूद, पाकिस्तान ने अपनी व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखी है। इसमें मजबूत नीतियों और IMF के लोन कार्यक्रम के तहत मिली मदद ने अहम भूमिका निभाई है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तीन तिमाहियों में वास्तविक GDP में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालाँकि, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में रुकावटों के कारण विकास की गति धीमी हो गई, जिससे पूरे साल के लिए विकास दर 3.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

  • 75 हजार साल पुराने कत्ल का खुला राज, गुफा में मिले कंकाल के कंधे में छेद ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

    75 हजार साल पुराने कत्ल का खुला राज, गुफा में मिले कंकाल के कंधे में छेद ने वैज्ञानिकों को चौंकाया


    नई दिल्ली। इराक की एक प्राचीन गुफा में मिला 75 हजार साल पुराना मानव कंकाल इतिहास की एक रहस्यमयी घटना की ओर इशारा कर रहा है। पुरातत्वविदों ने इस कंकाल का अध्ययन करने के बाद आशंका जताई है कि प्राचीन मानव की मौत किसी नुकीले हथियार से लगी चोट के कारण हुई हो सकती है। कंकाल के कंधे की हड्डी में मिला गोल छेद इस संभावना को मजबूत करता है कि व्यक्ति पर भाले जैसी किसी वस्तु से वार किया गया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह मामला इंसानी इतिहास में जानबूझकर की गई हिंसा के सबसे पुराने संभावित उदाहरणों में शामिल हो सकता है। हालांकि शोधकर्ता अभी निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि यह हत्या थी या किसी अन्य परिस्थिति में लगी जानलेवा चोट। इस खोज ने प्राचीन मानवों के जीवन और उनके बीच होने वाली हिंसक घटनाओं को समझने का एक नया रास्ता खोल दिया है।
    यह कंकाल इराक की प्रसिद्ध शानिदार गुफा में मिला था। यह स्थान नेअंडरथल मानवों के अवशेषों और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्यों के लिए जाना जाता है। यहां पहले भी ऐसे अवशेष मिले हैं जो बताते हैं कि प्राचीन मानव अपने मृतकों के साथ विशेष व्यवहार करते थे और संभवतः उन्हें दफनाने की परंपरा भी निभाते थे। शोधकर्ताओं ने इस नए कंकाल को शनिदार ए नाम दिया है। हालांकि इसके सभी अंग सुरक्षित नहीं मिले हैं। अवशेषों में दायां हाथ लगभग पूरा है जबकि तीन पसलियां छह दांत और बाएं कंधे की हड्डी भी शामिल हैं। इन्हीं हड्डियों की जांच के दौरान वैज्ञानिकों को ऐसी चोट का निशान मिला जिसने पूरे अध्ययन को खास बना दिया।
    शोधकर्ताओं की नजर कंधे की हड्डी के किनारे मौजूद लगभग 1.5 सेंटीमीटर व्यास वाले गोल छेद पर पड़ी। इसके आसपास हड्डी का एक छोटा गोल टुकड़ा भी मिला जो ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी नुकीली वस्तु के दबाव से बाहर की ओर धकेला गया हो। वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि यह छेद व्यक्ति की मृत्यु के बाद जमीन में दबे रहने के कारण बना या चोट जीवनकाल के अंतिम समय में लगी थी। चोट की बनावट और उसके आसपास मौजूद निशानों के अध्ययन से यह संभावना सामने आई कि नुकसान मृत्यु के आसपास के समय हुआ होगा। इसी आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि किसी भाले या दूसरे नुकीले हथियार से वार किया गया हो सकता है।
    वैज्ञानिकों के अनुसार हमला सामने की ओर से हुआ हो सकता है और हथियार सीने या कंधे के क्षेत्र तक पहुंचा होगा। यह भी संभव है कि भाला फेंककर मारा गया हो या नजदीक से जोर लगाकर शरीर में घोंपा गया हो। यदि यह हमला जानबूझकर किया गया था तो यह प्राचीन मानवों के बीच गंभीर हिंसा का एक महत्वपूर्ण प्रमाण हो सकता है। लेकिन शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं कि हमलावर कोई दूसरा नेअंडरथल था या चोट शिकार के दौरान हुए हादसे में लगी थी। इसलिए इस घटना को निश्चित रूप से इतिहास का सबसे पुराना कत्ल कहना जल्दबाजी होगी। फिलहाल इसे प्राचीन काल में संभावित जानलेवा हिंसा के एक अहम मामले के रूप में देखा जा रहा है।
    इस खोज का महत्व केवल संभावित हत्या तक सीमित नहीं है। कंकाल के दांतों की जांच से भी उस व्यक्ति के जीवन के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। उसके छह दांत काफी घिस चुके थे और सामने का एक दांत जीवनकाल में ही टूटकर दो हिस्सों में बंट गया था। दांत पर जमा मोटी परत से संकेत मिलता है कि वह टूटने के बाद भी लंबे समय तक जीवित रहा होगा। अनुमान है कि वह कम से कम एक साल या उससे अधिक समय तक जीवित रहा हो सकता है। चेहरे और जबड़े पर पुरानी चोट लगने की संभावना भी जताई गई है। इससे पता चलता है कि प्राचीन मानवों को चोट लगने के बाद भी लंबे समय तक जीवन बिताना पड़ता था और उनकी शारीरिक स्थिति का अध्ययन उनके जीवन की परिस्थितियों को समझने में मदद करता है।
    शानिदार गुफा में इससे पहले भी गंभीर चोटों वाले नेअंडरथल के अवशेष मिले हैं। वर्ष 2009 में मिले एक वयस्क पुरुष के कंकाल की पसली पर कट का निशान पाया गया था। ऐसे प्रमाण बताते हैं कि प्राचीन मानवों का जीवन केवल भोजन जुटाने और जीवित रहने के संघर्ष तक सीमित नहीं था बल्कि उन्हें चोटों दुर्घटनाओं और संभावित हिंसक टकरावों का भी सामना करना पड़ता था। इराक की इस गुफा से मिला नया कंकाल हजारों साल पुराने जीवन की अनकही कहानी सामने लाता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष के लिए वैज्ञानिक साक्ष्यों और उनकी व्याख्या को सावधानी से समझना जरूरी है।