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  • US-Iran War: होर्मुज पर कम हो रहा ईरान का नियंत्रण…. 80 फीसदी जहाजों ने बदला रूट

    US-Iran War: होर्मुज पर कम हो रहा ईरान का नियंत्रण…. 80 फीसदी जहाजों ने बदला रूट


    वाशिंगटन।
    अमेरिका-ईरान युद्ध (America-Iran War) का सबसे विवादास्पद मोर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) है. तेहरान और वाशिंगटन दोनों इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना दबदबा जता रहे हैं, लेकिन शिपिंग डेटा फर्म (Shipping data firm) ने दावा किया है कि होर्मुज पर ईरान (Iran) का नियंत्रण कमजोर पड़ रहा है. ट्रैकिंग फर्म केपलर के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में 80 फीसदी से ज्यादा जहाजों ने ईरानी मार्ग को छोड़कर अमेरिका द्वारा अधिकृत ओमान रूट का रुख किया है।

    ट्रैकिंग फर्म केपलर (Kpler) के शिपिंग डेटा के अनुसार, होर्मुज से गुजरने वाले 80 फीसदी से अधिक वाणिज्यिक जहाजों ने पिछले दो हफ्तों में ईरान के मार्ग को छोड़कर ओमान की ओर वाले रूट का इस्तेमाल किया है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा अधिकृत इस समुद्री रास्ते का ईरान कड़ा विरोध करता रहा है. अमेरिकी नौसेना बलों की मौजूदगी और सुरक्षा के भरोसे जहाज ईरानी हमलों के जोखिम के बावजूद ओमान के तटवर्ती रास्ते से आवाजाही कर रहे हैं. इस बड़े बदलाव से इस रणनीतिक जलमार्ग पर तेहरान का दबदबा आंशिक रूप से कमजोर होता दिख रहा है।


    ओमान रूट पर शिफ्ट हुए जहाज

    केपलर के क्रूड ऑयल एनालिसिस प्रमुख हुमायूं फलकशाही के अनुसार, आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि ईरान ने जलडमरूमध्य पर से कम से कम आंशिक नियंत्रण खो दिया है. एक महीने पहले तक ओमान वाले रूट पर न के बराबर शिपिंग गतिविधि देखी जा रही थी. ईरान इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क यानी टोल वसूलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जहाजों द्वारा ईरानी रूट से बचने के कारण तेहरान के लिए टोल लागू करना बेहद मुश्किल हो गया है।


    ज्यादातर देश नहीं देना चाहते टैक्स

    पिकरिंग एनर्जी पार्टनर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी डैन पिकरिंग के मुताबिक मिडिल ईस्ट के अधिकांश लोग या पक्ष ईरान को टोल टैक्स नहीं देना चाहते हैं और न ही वे ऐसा कर रहे हैं. हालांकि, ईरान अभी-भी जहाजों को धमकाने और शिपिंग को बाधित करने की क्षमता रखता है. इसके बावजूद अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी ने कमर्शियल ट्रैफिक को एक सुरक्षित और वैकल्पिक रास्ता दे दिया है।

    VLCC से ट्रांसफर हो रहा है कच्चा तेल
    तनाव के बीच खाड़ी देशों के तेल उत्पादकों ने भी कच्चे तेल के परिवहन का तरीका बदल दिया है. कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने फारस की खाड़ी से होर्मुज के रास्ते तेल निकालने के लिए वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCCs) किराए पर लिए हैं. इसके बाद कच्चे तेल को ओमान की खाड़ी में खतरे के क्षेत्र से बाहर अन्य टैंकरों में ट्रांसफर किया जा रहा है।


    ट्रांसपोंडर बंद करने का जोखिम

    ईरानी हमलों के खतरे से बचने के लिए कई तेल टैंकरों ने अतिरिक्त कदम उठाए हैं. इन टैंकरों ने कई हफ्तों तक अपने ट्रांसपोंडर (पहचान सिग्नल) बंद रखे हैं. इससे ‘डार्क ट्रैफिक’ पैदा हो रहा है, जिससे पारंपरिक शिपिंग ट्रैकर्स के लिए तेल की वास्तविक आवाजाही का सटीक आकलन लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया है. हालांकि, सैटेलाइट इमेजरी के जरिए कुछ जहाजों का पता लगाया जा सकता है.


    क्या है ट्रंप का दावा

    उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना के संचालन के चलते इस जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है. ट्रंप ने होर्मुज का नक्शा साझा करते हुए इसे ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ तक घोषित करने की इच्छा जताई।

    वहीं, अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बताया कि एक हफ्ते में होर्मुज और परिवर्तित मार्गों से तेल की ढुलाई करीब 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन रही जो युद्ध पूर्व के 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन के करीब है. हालांकि, जमीनी हालात दोनों देशों के दावों से अलग हैं. ईरान के लगातार हमले और युद्ध पूर्व स्तर से कम तेल प्रवाह ये साबित करता है कि अमेरिका का भी इस जलमार्ग पर पूरी तरह अनियंत्रित कब्जा नहीं है. वहीं, दूसरी ओर जहाजों का ओमान रूट चुनना ये दर्शाता है कि ईरान भी अपनी शर्तों को मनवाने में संघर्ष कर रहा है।


    ईरान-ओमान की सीधी बातचीत से US नाखुश

    बता दें कि तनाव के बीच ईरान और ओमान के बीच नेविगेशन की स्वतंत्रता बहाल करने को लेकर सीधी बातचीत चल रही है. दोनों देश होर्मुज के साथ बॉर्डर साझा करते हैं. ये वार्ता बिना किसी प्रत्यक्ष अमेरिकी भागीदारी के हो रही है, जिससे डोनाल्ड ट्रंप खुश नहीं हैं. मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि न तो ईरान और न ही अमेरिका इस जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण का दावा कर सकते हैं।

  • ईरान-UAE में बढ़ा तनाव: मिसाइल हमले के आरोप पर तेहरान का पलटवार, बोला- ‘जंग भड़काने की कोशिश’

    ईरान-UAE में बढ़ा तनाव: मिसाइल हमले के आरोप पर तेहरान का पलटवार, बोला- ‘जंग भड़काने की कोशिश’


    नई दिल्ली। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। UAE ने ईरान पर दो बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आरोप लगाया है। हालांकि, तेहरान ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘बेबुनियाद’ बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बिना ठोस सबूत के ऐसे आरोप लगाने से बचना चाहिए।

    UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान की ओर से दो मिसाइलें दागी गईं, लेकिन दोनों समुद्र में गिर गईं। इनमें से एक UAE के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में और दूसरी उसके बाहर गिरी। घटना में किसी के घायल होने या नुकसान की सूचना नहीं है।

    समुद्री यातायात को निशाना बनाने का दावा
    UAE के रक्षा मंत्रालय ने अपने आकलन के आधार पर दावा किया कि मिसाइलों को समुद्री यातायात को निशाना बनाने के लिए दागा गया था। मंत्रालय ने लोगों से अफवाहों और गलत सूचनाओं से बचने तथा घटना से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की।

    मिसाइल घटना के बीच UAE ने ईरान के साथ सभी व्यापारिक, वाणिज्यिक और वित्तीय लेनदेन को अगले आदेश तक रोकने का फैसला किया है। UAE विदेश मंत्रालय की संचार निदेशक अफरा अल हमेली ने इसकी पुष्टि की।

    ईरान ने जताई ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ की आशंका
    मिसाइल खतरे के बाद UAE के गृह मंत्रालय ने लोगों के मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजा। बाद में स्थिति को सुरक्षित बताते हुए लोगों से सामान्य गतिविधियां शुरू करने को कहा गया।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने UAE के आरोपों को खारिज करते हुए ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि बिना ठोस सबूत ईरान को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

    होर्मुज स्ट्रेट पर भी बढ़ी चिंता
    यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खाड़ी क्षेत्र का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।

    मिसाइल विवाद के बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। UAE ने जहां ईरान के साथ आर्थिक लेनदेन रोक दिया है, वहीं तेहरान ने पूरे घटनाक्रम को लेकर UAE के दावे पर सवाल खड़े किए हैं।

  • पाकिस्तान में Google का पहला ऑफिस खुला, PM शहबाज शरीफ ने किया उद्घाटन

    पाकिस्तान में Google का पहला ऑफिस खुला, PM शहबाज शरीफ ने किया उद्घाटन


    इस्लामाबाद। गूगल ने पाकिस्तान में अपना पहला ऑफिस खोल दिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गूगल के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात के दौरान इस ऑफिस का उद्घाटन किया। सरकार के मुताबिक, गूगल की स्थानीय मौजूदगी से पाकिस्तान में टेक्नोलॉजी और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ युवाओं के डिजिटल और AI स्किल विकसित करने में मदद मिलेगी।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से X पर साझा जानकारी के मुताबिक, गूगल का प्रतिनिधिमंडल सरकार और सार्वजनिक नीति मामलों के उपाध्यक्ष विल्सन व्हाइट के नेतृत्व में शहबाज शरीफ से मिला। प्रतिनिधिमंडल में इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास की चार्ज डी’अफेयर्स नताली बेकर भी मौजूद थीं।

    डिजिटल बदलाव पर पाकिस्तान का फोकस
    शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान बड़े स्तर पर डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसमें अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण भी शामिल है। उन्होंने सरकार के ‘डिजिटल नेशन पाकिस्तान’ विजन की जानकारी देते हुए आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    प्रधानमंत्री ने युवाओं को आईटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ट्रेनिंग देने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने में गूगल अहम भूमिका निभा सकता है।

    स्थानीय मौजूदगी से साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद
    शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान में ऑफिस खोलने के गूगल के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों के बीच साझेदारी मजबूत होगी और पाकिस्तान की डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में गूगल की भूमिका बढ़ेगी।

    प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि गूगल पाकिस्तान के युवाओं के स्किल डेवलपमेंट से जुड़े कार्यक्रमों का विस्तार करेगा। उनके मुताबिक, स्थानीय मौजूदगी स्थापित होने के बाद पाकिस्तान में बड़े स्तर पर प्रभावी कार्यक्रम चलाना आसान होगा।

    Chromebook असेंबली लाइन पर भी चर्चा
    गूगल के उपाध्यक्ष विल्सन व्हाइट ने प्रधानमंत्री को पाकिस्तान में कंपनी की भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने स्थानीय साझेदारों के साथ स्थापित की गई Chromebook असेंबली लाइन पर भी खुशी जताई।

    व्हाइट ने कहा कि पाकिस्तान में असेंबल किए जा रहे Chromebook को क्षेत्र के दूसरे देशों में एक्सपोर्ट करने की काफी संभावनाएं हैं।

  • दुबई की ओर बढ़ा मिसाइल का खतरा, सायरन बजते ही मचा हड़कंप; लोगों को सुरक्षित जगहों पर रहने की सलाह

    दुबई की ओर बढ़ा मिसाइल का खतरा, सायरन बजते ही मचा हड़कंप; लोगों को सुरक्षित जगहों पर रहने की सलाह

    दुबई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में मंगलवार को मिसाइल खतरे को लेकर अचानक इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया। राष्ट्रीय आपातकालीन संकट एवं आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NCEMA) की चेतावनी के बाद कई इलाकों में सायरन बजने लगे। लोगों को खुले स्थानों से दूर रहने और सुरक्षित जगहों पर रहने की सलाह दी गई।

    अलर्ट के बाद दुबई और आसपास के इलाकों में कुछ देर तक तेज धमाकों की आवाजें सुनाई देने की खबर सामने आई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यूएई की एयर डिफेंस प्रणाली ने हवाई क्षेत्र की ओर आ रहे खतरे को इंटरसेप्ट किया। हालांकि, हमले के स्रोत और मिसाइल की सटीक जानकारी को लेकर आधिकारिक स्तर पर अभी पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं हुई है।

    लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह

    अलर्ट जारी होने के बाद प्रशासन ने नागरिकों, प्रवासियों और पर्यटकों से खुले स्थानों, सड़कों और समुद्र तटों से दूर रहने को कहा। लोगों को इमारतों के अंदर सुरक्षित स्थानों पर रहने और खिड़कियों तथा शीशे से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई। साथ ही किसी भी अफवाह पर भरोसा न करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं को मानने की अपील की गई।

    हमले के पीछे कौन, अभी तस्वीर साफ नहीं

    मिसाइल खतरे की जिम्मेदारी फिलहाल किसी देश या संगठन ने आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं की है। हालांकि, क्षेत्र में जारी तनाव के कारण ईरान समर्थित समूहों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। यूएई पहले भी क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान मिसाइल और ड्रोन हमलों के खतरे का सामना कर चुका है।

    यूएई में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी भी इसे क्षेत्रीय तनाव के लिहाज से संवेदनशील बनाती है। हालांकि, किसी खास संगठन को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले आधिकारिक जांच और पुष्टि का इंतजार जरूरी है।

    THAAD और Patriot सिस्टम से सुरक्षा

    यूएई ने अपनी हवाई सुरक्षा के लिए अमेरिकी निर्मित THAAD और Patriot जैसी आधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणालियां तैनात कर रखी हैं। इनका उद्देश्य बैलिस्टिक मिसाइलों और दूसरे हवाई खतरों को पहचानकर उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने से पहले रोकना है।

    मिसाइल अलर्ट के दौरान इन प्रणालियों की भूमिका को लेकर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन किसी विशेष इंटरसेप्टर सिस्टम ने इस घटना में वास्तव में क्या कार्रवाई की, इसकी आधिकारिक पुष्टि के बिना दावा करना जल्दबाजी होगी।

    बढ़ते तनाव से खाड़ी क्षेत्र पर दबाव

    दुबई में यह अलर्ट ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर पड़ रहा है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने के साथ समुद्री मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

    दुबई दुनिया के प्रमुख कारोबारी और पर्यटन केंद्रों में शामिल है। ऐसे में सुरक्षा को लेकर बार-बार जारी होने वाले अलर्ट का असर विमानन, पर्यटन और निवेश के माहौल पर पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह मिसाइल खतरा कितना गंभीर था और इसके पीछे कौन था। आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

  • पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट से इमरान खान को बड़ी राहत, मेडिकल जांच के लिए दो दिन में अस्पताल शिफ्ट करने का आदेशपरिवार की हर सप्ताह मुलाकात होगी

    पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट से इमरान खान को बड़ी राहत, मेडिकल जांच के लिए दो दिन में अस्पताल शिफ्ट करने का आदेशपरिवार की हर सप्ताह मुलाकात होगी

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लंबे समय बाद सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जेल में बंद इमरान खान के स्वास्थ्य से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया है कि उन्हें दो दिन के भीतर इस्लामाबाद स्थित शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में जांच के लिए ले जाया जाए।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इमरान खान के परिवार के सदस्यों से मुलाकात की व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के परिवार के सदस्यों को उनसे प्रत्येक सप्ताह मुलाकात करने की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इस व्यवस्था को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।

    मामले की सुनवाई तीन न्यायाधीशों की पीठ ने की। पीठ की अध्यक्षता जस्टिस शाहिद वाहिद ने की, जबकि जस्टिस नईम अख्तर अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम भी इसमें शामिल थे। इमरान खान के स्वास्थ्य और मेडिकल जांच से जुड़े मामले में दायर याचिका पर विस्तार से सुनवाई के बाद अदालत ने ये निर्देश जारी किए।

    अदालत ने संबंधित अधिकारियों से इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए आवश्यक मेडिकल जांच कराने को कहा है। अस्पताल में उनकी जांच कराने का उद्देश्य उनके स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति का चिकित्सकीय आकलन करना है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ परिवार से नियमित संपर्क के अधिकार को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।

    इससे पहले रावलपिंडी की अदियाला जेल के अधिकारियों ने अदालत को इमरान खान की आंखों की स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। जेल अधिकारियों के मुताबिक उनकी आंखों की रोशनी अब लगभग सामान्य हो गई है और पहले की तुलना में उनकी स्थिति में सुधार हुआ है। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया है।

    इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। उन्हें पांच अगस्त 2023 को तोशाखाना मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में उन पर प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए विदेशी मेहमानों से मिले महंगे उपहारों का कथित तौर पर गलत तरीके से निपटान करने और उनसे संबंधित जानकारी छिपाने के आरोप लगे थे।

    इमरान खान की जेल में लंबी अवधि के दौरान उनके स्वास्थ्य और परिवार से मुलाकात का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। उनके समर्थक और परिवार समय समय पर उनके स्वास्थ्य तथा जेल में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से उनके मेडिकल परीक्षण और परिवार से नियमित मुलाकात को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनने की उम्मीद है।

    अदालत के निर्देश के बाद संबंधित जेल और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अब इमरान खान को निर्धारित समयसीमा में अस्पताल ले जाने और उनके परिवार की साप्ताहिक मुलाकात सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। मेडिकल जांच के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी आगे की व्यवस्था चिकित्सकीय रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों के आकलन पर निर्भर करेगी।

    सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इमरान खान के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे उन्हें जेल से बाहर अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच कराने का अवसर मिलेगा। साथ ही परिवार से हर सप्ताह मुलाकात की व्यवस्था उनके परिजनों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने में मदद करेगी। अब संबंधित अधिकारियों द्वारा अदालत के निर्देशों के पालन पर नजर रहेगी।

  • सऊदी अरब जाने वाले पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी, वीजा नियम तोड़ने और अवैध फंड जुटाने पर कार्रवाई

    सऊदी अरब जाने वाले पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी, वीजा नियम तोड़ने और अवैध फंड जुटाने पर कार्रवाई

    नई दिल्ली । पाकिस्तान ने सऊदी अरब जाने वाले अपने नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी करते हुए उन्हें भीख मांगने, बिना अनुमति धन जुटाने और वीजा नियमों का उल्लंघन करने से बचने की चेतावनी दी है। यह सलाह खास तौर पर उमराह यात्रियों और कामगारों के लिए जारी की गई है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि सऊदी अरब में स्थानीय कानूनों और वीजा की शर्तों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

    पाकिस्तान की ओर से जारी संदेश में नागरिकों से सऊदी अरब के कानूनों का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है। उन्हें यह भी हिदायत दी गई है कि किसी भी तरह की आर्थिक मदद या धन संग्रह का काम बिना अनुमति के नहीं किया जाए। धार्मिक यात्रा के दौरान भी स्थानीय नियमों का पालन करना अनिवार्य बताया गया है।

    एडवाइजरी में वीजा की अवधि को लेकर भी यात्रियों को सावधान किया गया है। नागरिकों से कहा गया है कि वीजा की वैधता समाप्त होने से पहले सऊदी अरब से निर्धारित प्रक्रिया के तहत बाहर निकलें। वीजा अवधि खत्म होने के बाद वहां रुकना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है और इसके कारण कानूनी कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।

    पाकिस्तानी नागरिकों को सऊदी अरब में किसी भी ऐसी गतिविधि से दूर रहने की सलाह दी गई है, जिसे वहां के कानूनों के तहत अपराध माना जाता है। विशेष रूप से सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगने और बिना अनुमति के लोगों से धन एकत्र करने को लेकर चेतावनी दी गई है। नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों को हिरासत में लिए जाने या देश से बाहर भेजे जाने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

    इस चेतावनी के साथ एक वीडियो संदेश भी प्रसारित किया गया है, जिसमें सऊदी पुलिस द्वारा एक व्यक्ति को हिरासत में ले जाने का दृश्य दिखाया गया है। संदेश के जरिए पाकिस्तान से आने वाले उमराह यात्रियों और कामगारों को समझाने की कोशिश की गई है कि वे धार्मिक यात्रा या रोजगार के लिए सऊदी अरब पहुंचने के बाद वहां के कानूनों को प्राथमिकता दें।

    पाकिस्तान में यात्रियों के सऊदी अरब जाने से जुड़े मामलों को लेकर पहले भी चिंता सामने आती रही है। वर्ष 2025 में पाकिस्तान के अलग अलग हवाई अड्डों पर बड़ी संख्या में यात्रियों को विदेश जाने से रोके जाने की खबर सामने आई थी। अधिकारियों को आशंका थी कि कुछ लोग सऊदी अरब में भीख मांगने के उद्देश्य से यात्रा कर रहे हैं। इसके बाद यात्रियों की जांच और निगरानी को लेकर सख्ती बढ़ाई गई थी।

    सऊदी अरब में धार्मिक यात्राओं के दौरान नियमों का पालन कराने पर लगातार जोर दिया जाता है। उमराह या अन्य धार्मिक यात्रा के लिए पहुंचने वाले लोगों को अपने वीजा की शर्तों, स्थानीय कानूनों और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करना होता है। किसी अन्य उद्देश्य के लिए जारी वीजा का इस्तेमाल अलग गतिविधियों के लिए करना भी परेशानी का कारण बन सकता है।

    पाकिस्तान की ताजा एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य अपने नागरिकों को सऊदी अरब के कानूनों के संभावित उल्लंघन से बचाना है। इसमें यात्रियों को जिम्मेदारी से व्यवहार करने और किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी करने पर संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तारी, हिरासत या निर्वासन जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

  • बैदोआ में अल-शबाब और लाफ्टागरीन समर्थक हथियारबंद मिलिशिया की चुनौती, सोमाली सेना ने जवाबी कार्रवाई में 30 आतंकी मार गिराए

    बैदोआ में अल-शबाब और लाफ्टागरीन समर्थक हथियारबंद मिलिशिया की चुनौती, सोमाली सेना ने जवाबी कार्रवाई में 30 आतंकी मार गिराए


    नई दिल्ली ।
    सोमालिया के बैदोआ शहर में सोमवार को सुरक्षाबलों और हथियारबंद लड़ाकों के बीच भीषण संघर्ष हुआ। सुरक्षा बलों ने हमलावरों को पीछे धकेलते हुए शहर पर अपना नियंत्रण बनाए रखने का दावा किया है। इस कार्रवाई में करीब 30 लड़ाकों के मारे जाने की जानकारी दी गई है।

    सोमालिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सुबह करीब पांच बजे हथियारबंद समूहों ने शहर में सुरक्षा बलों की चौकियों को निशाना बनाकर हमला किया। हमलावरों में अल-शबाब के सदस्य और साउथवेस्ट स्टेट के पूर्व राष्ट्रपति अब्दिअजीज हसन मोहम्मद लाफ्टागरीन के प्रति वफादार लड़ाके शामिल होने की बात कही गई है।

    सुरक्षाबलों ने हमले का जवाब देते हुए व्यापक सैन्य कार्रवाई शुरू की। कई घंटे तक चले संघर्ष के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों से गोलीबारी और विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं। सेना ने हमलावरों को पीछे हटने के लिए मजबूर किया और उनके कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस सुरक्षित करने की कार्रवाई की।

    रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अभियान के दौरान करीब 30 लड़ाके मारे गए और कुछ अन्य के घायल होने की जानकारी है। सुरक्षा बलों ने हमलावरों के हथियार और वाहनों को भी जब्त करने का दावा किया है। हालांकि, सैन्य बलों की ओर से अपने जवानों के बीच हुए नुकसान का विस्तृत आंकड़ा तत्काल उपलब्ध नहीं कराया गया।

    संघर्ष के बाद सुरक्षाबलों ने बैदोआ के विभिन्न हिस्सों में तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों का कहना है कि कुछ लड़ाके अभी भी शहर के कुछ इलाकों में छिपे हो सकते हैं। इसलिए सैन्य बल संदिग्ध स्थानों की जांच कर रहे हैं और शहर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।

    बैदोआ सोमालिया के महत्वपूर्ण शहरों में शामिल है और लंबे समय से देश के राजनीतिक तथा सुरक्षा संघर्ष का केंद्र रहा है। यहां संघीय सरकार और क्षेत्रीय राजनीतिक शक्तियों के बीच तनाव के साथ अल-शबाब की गतिविधियां भी सुरक्षा चुनौती बनी हुई हैं।

    ताजा संघर्ष का संबंध लाफ्टागरीन के समर्थक सशस्त्र समूहों और संघीय सरकार के बीच जारी राजनीतिक तनाव से भी जुड़ा हुआ है। मार्च में संघीय बलों ने बैदोआ पर नियंत्रण स्थापित किया था। इसके बाद लाफ्टागरीन ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। सोमवार की कार्रवाई में उनके समर्थक लड़ाकों की मौजूदगी ने संघर्ष को राजनीतिक और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बना दिया है।

    अल-शबाब सोमालिया में लंबे समय से सक्रिय सशस्त्र संगठन है और सरकारी बलों तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाता रहा है। संगठन के खिलाफ सोमाली सुरक्षा बलों के अभियान लगातार जारी हैं। बैदोआ और आसपास के इलाकों में सरकारी नियंत्रण बनाए रखना इन अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद सुरक्षा बलों ने शहर को पूरी तरह सुरक्षित करने और बचे हुए लड़ाकों की तलाश जारी रखने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, अभियान पूरा होने के बाद संघर्ष और उससे हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • ट्रंप प्रशासन ने बिग बेंड नेशनल पार्क में विवादित सीमा परियोजना पर लगाई रोक, पर्यावरणीय नुकसान को लेकर उठे थे सवाल

    ट्रंप प्रशासन ने बिग बेंड नेशनल पार्क में विवादित सीमा परियोजना पर लगाई रोक, पर्यावरणीय नुकसान को लेकर उठे थे सवाल

    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने दक्षिणी टेक्सास में बिग बेंड नेशनल पार्क से होकर गुजरने वाली विवादित सीमा परियोजना के निर्माण पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह परियोजना लंबे समय से पर्यावरण और राष्ट्रीय उद्यान की प्राकृतिक संरचना को लेकर विवादों में रही थी। परियोजना के विरोध में उठाई गई प्रमुख आपत्तियों में क्षेत्र के संवेदनशील पर्यावरणीय भू-भाग पर संभावित असर और सीमा सुरक्षा के लिए इसकी वास्तविक जरूरत शामिल थी।

    बिग बेंड नेशनल पार्क टेक्सास के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक विशाल और दूरस्थ प्राकृतिक क्षेत्र है। यहां का भू-भाग कठिन होने के कारण सामान्य आवाजाही पहले से ही सीमित मानी जाती है। सीमा परियोजना के आलोचकों का तर्क रहा है कि इस प्राकृतिक क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां अपने आप में प्रवासियों और तस्करों के लिए बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में इस इलाके में अतिरिक्त सीमा अवरोध खड़ा करने की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए।

    विवादित परियोजना को राजनीतिक स्तर पर भी विरोध का सामना करना पड़ा। आलोचकों में दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल रहे हैं। उनका कहना था कि सीमा सुरक्षा के उद्देश्य से बनाई जाने वाली किसी भी परियोजना में पर्यावरणीय प्रभाव और क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत को ध्यान में रखना जरूरी है। विशेष रूप से राष्ट्रीय उद्यान जैसे संवेदनशील इलाके में निर्माण कार्य को लेकर अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता बताई गई।

    ट्रंप प्रशासन की ओर से परियोजना को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला एक एजेंसी प्रमुख के टेक्सास दौरे के बाद किए गए जमीनी मूल्यांकन से जुड़ा बताया गया है। अधिकारियों की ओर से क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को देखने और परियोजना के संभावित प्रभावों का आकलन करने के बाद निर्माण रोकने का निर्णय लिया गया।

    दक्षिणी टेक्सास में प्रस्तावित सीमा परियोजना का एक हिस्सा राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र से होकर गुजरना था। इसे लेकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों और अन्य आलोचकों ने आशंका जताई थी कि निर्माण से प्राकृतिक भू-भाग प्रभावित हो सकता है। उनका कहना था कि बिग बेंड जैसे संवेदनशील इलाके में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य से वहां के पारिस्थितिक संतुलन और प्राकृतिक स्वरूप पर असर पड़ सकता है।

    परियोजना पर रोक लगाए जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया को लेकर निगाहें प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी हैं। अस्थायी रोक का अर्थ यह नहीं है कि परियोजना को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से क्षेत्र के मूल्यांकन और परियोजना की उपयोगिता पर आगे भी विचार किया जा सकता है।

    बिग बेंड में सीमा परियोजना को लेकर विवाद अमेरिका में सीमा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बहस को भी सामने लाता है। एक तरफ सीमा पर अवैध प्रवेश और तस्करी रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की मांग की जाती रही है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय उद्यानों और संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्रों को निर्माण से बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया जाता है।

    फिलहाल ट्रंप प्रशासन के फैसले से बिग बेंड नेशनल पार्क के उस क्षेत्र में प्रस्तावित सीमा निर्माण को तत्काल राहत मिली है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे किए जाने वाले मूल्यांकन के बाद परियोजना को पूरी तरह रद्द किया जाता है या किसी संशोधित योजना के साथ इसे दोबारा आगे बढ़ाया जाता है।

  • इजरायल ने सीरिया के इदलिब में एयरबेस पर किए हवाई हमाले…. रनवे को उड़ाया

    इजरायल ने सीरिया के इदलिब में एयरबेस पर किए हवाई हमाले…. रनवे को उड़ाया


    नई दिल्ली। 1
    8 अगस्त 2026 की रात सीरिया (Syria) के उत्तर-पश्चिमी प्रांत इदलिब (Eastern Northwestern Province Idlib) के पूर्वी इलाके में स्थित अबू अल-दुहुर सैन्य एयरबेस (Abu al-Duhur Military Airbase) पर चार हवाई हमले हुए हैं. स्थानीय सीरियाई स्रोत, सोशल मीडिया अकाउंट्स और कुछ समाचार एजेंसियों ने बताया कि हमलों का मुख्य निशाना एयरबेस का रनवे था. आकाश में रोशनी वाले फ्लेयर छोड़े जाने का भी जिक्र है, जो आमतौर पर रात के ऑपरेशन में लक्ष्य को रोशन करने या निगरानी के लिए इस्तेमाल होते हैं।

    इन हमलों को इजरायली लड़ाकू विमानों द्वारा अंजाम दिया गया बताया, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में अभी यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि हमला किसने किया. अब तक इजरायल, तुर्की या सीरिया की नई सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इसलिए ये खबरें अभी तक स्वतंत्र रूप से पूरी तरह पुष्ट नहीं हुई हैं।

    अबू अल-दुहुर एयरबेस सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान महत्वपूर्ण रहा है. 2012 से 2015 तक विद्रोही ताकतों ने इसे घेरे रखा था और आखिरकार कब्जा कर लिया था. बाद में असद शासन ने इसे वापस लिया, लेकिन दिसंबर 2024 में असद शासन के पतन के बाद विद्रोही समूहों ने इसे फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया.

    फिलहाल यह बेस सीरिया की नई और सीमित वायुसेना के नियंत्रण में बताया जाता है. यहां पुराने सोवियत काल के Su-22 लड़ाकू-बमवर्षक, L-39 ट्रेनर विमान और कुछ हेलीकॉप्टर रखे गए हैं. हाल के हफ्तों में इन पुराने Su-22 विमानों के प्रशिक्षण उड़ानें भरने की खबरें आई थीं, जिससे इजरायल में चिंता जताई गई थी कि नई सीरियाई वायुसेना धीरे-धीरे अपनी क्षमताएं बढ़ा रही है।


    रणनीतिक महत्व और संभावित उद्देश्य

    इदलिब क्षेत्र तुर्की के प्रभाव क्षेत्र के करीब है और सीरिया के नए प्रशासन के लिए उत्तरी हिस्से में नियंत्रण बनाए रखने के लिहाज से अहम है. रनवे को निशाना बनाना यह संकेत देता है कि हमला करने वाली ताकत एयरबेस की परिचालन क्षमता को सीमित करना चाहती थी, ताकि विमान उड़ान न भर सकें.

    इजरायल लंबे समय से सीरिया में किसी भी सैन्य क्षमता के विकास को रोकने की नीति अपनाता रहा है, खासकर असद शासन के पतन के बाद जब उसने कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे, ताकि हथियार और विमान नए प्रशासन के हाथ में पूरी तरह न जा सकें. हालिया Su-22 उड़ानों के बाद इस हमले को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में तुर्की बलों की मौजूदगी का भी जिक्र है, जिससे क्षेत्रीय जटिलताएं और बढ़ सकती हैं।


    क्षेत्रीय प्रभाव और अनिश्चितता

    यह घटना मध्य पूर्व की नाजुक सुरक्षा स्थिति को और तनावपूर्ण बना सकती है. सीरिया की नई सरकार अपनी सैन्य क्षमताएं फिर से खड़ी करने की कोशिश कर रही है, जबकि इजरायल अपनी सुरक्षा रेखा बनाए रखना चाहता है. तुर्की की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि वह इदलिब में प्रभाव रखता है.

    फिलहाल नुकसान का पूरा आकलन उपलब्ध नहीं है. न ही किसी बड़े हताहत की पुष्टि हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आधिकारिक पुष्टि या सैटेलाइट चित्र नहीं आते, तब तक पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं होगी. यह घटना दिखाती है कि असद के बाद के सीरिया में भी बाहरी शक्तियां सक्रिय रूप से सैन्य संतुलन प्रभावित कर रही हैं.

  • ट्रंप के फैसले से शांति की उम्मीद, लेकिन सुरक्षा पर भी सवाल, दक्षिण कोरिया ने अमेरिका-उत्तर कोरिया में फिर बातचीत की जताई उम्मीद

    ट्रंप के फैसले से शांति की उम्मीद, लेकिन सुरक्षा पर भी सवाल, दक्षिण कोरिया ने अमेरिका-उत्तर कोरिया में फिर बातचीत की जताई उम्मीद


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण कोरिया के साथ सैन्य अभ्यास में कटौती के फैसले से कोरियाई प्रायद्वीप में एक ओर अमेरिका-उत्तर कोरिया के बीच बातचीत की उम्मीद जगी है, तो दूसरी ओर दक्षिण कोरिया में सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ी है। ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ अपने अच्छे रिश्तों का हवाला देते हुए सैन्य अभ्यास कम करने का आदेश दिया है। माना जा रहा है कि यह कदम किम के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने की कोशिश का हिस्सा है।

    दरअसल, किम जोंग उन अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यासों को उत्तर कोरिया पर संभावित हमले की तैयारी के तौर पर देखते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते परमाणु हथियारों और रूस के साथ सैन्य सहयोग के चलते उत्तर कोरिया अब पहले से अधिक आत्मविश्वास में है। ऐसे में अमेरिका से बड़ी रियायतें मिले बिना किम के बातचीत की मेज पर लौटने की संभावना कम मानी जा रही है।

    11 दिन का सैन्य अभ्यास शुरू, कटौती पर स्थिति साफ नहीं
    दक्षिण कोरिया और अमेरिका का 11 दिवसीय उल्ची फ्रीडम शील्ड सैन्य अभ्यास सोमवार सुबह तय कार्यक्रम के मुताबिक शुरू हो गया। हालांकि, अभ्यास के किन हिस्सों में कटौती की जाएगी, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ट्रंप के ऐलान से दक्षिण कोरिया में हैरानी है, क्योंकि उत्तर कोरिया के परमाणु खतरे के बीच अमेरिका उसका प्रमुख सुरक्षा सहयोगी है।

    ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सैन्य अभ्यास महंगा होने के साथ उत्तर कोरिया को गलत और आक्रामक संकेत भी देता है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में उत्तर कोरिया ने कोई खतरा पैदा नहीं किया और सम्मानजनक रवैया अपनाया। ट्रंप ने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को अभ्यास में बड़ी कटौती करने का निर्देश दिया है।

    दक्षिण कोरिया को बातचीत से शांति की उम्मीद
    दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि ट्रंप और किम के बीच दोस्ताना बातचीत अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच सार्थक संवाद की शुरुआत कर सकती है। इससे कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता को लेकर बातचीत आगे बढ़ सकती है। दक्षिण कोरिया ने कहा कि वह इसके लिए जरूरी कूटनीतिक प्रयास करेगा।

    राष्ट्रपति ली जे म्युंग उत्तर कोरिया के साथ रिश्ते सुधारने के पक्षधर हैं। सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने सीमा पर लगाए गए लाउडस्पीकर बंद करने समेत कई कदम उठाए हैं। इन लाउडस्पीकरों से पहले पॉप गाने और अंतरराष्ट्रीय खबरें प्रसारित की जाती थीं।

    परमाणु हथियार और रूस से बढ़ता सहयोग चिंता का कारण
    विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु हथियार और रूस के साथ मजबूत होते सैन्य संबंध उसकी रणनीतिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में केवल सैन्य अभ्यासों में कटौती से किम जोंग उन को बातचीत के लिए तैयार करना आसान नहीं होगा।

    दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया और अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल करने को लेकर सैन्य सहयोग पर भी बातचीत कर रहे हैं। इससे साफ है कि ट्रंप के फैसले के बावजूद दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।