Category: International

  • ईरान-इजरायल तनाव के बीच राष्ट्रपति हर्जोग का कड़ा संदेश न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले के बाद बढ़ा संघर्ष

    ईरान-इजरायल तनाव के बीच राष्ट्रपति हर्जोग का कड़ा संदेश न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले के बाद बढ़ा संघर्ष


    नई दिल्ली:ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने एक बार फिर गंभीर मोड़ ले लिया है हाल ही में 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए सैन्य संघर्ष के दौरान ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर शहर अराद और डिमोना को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमले किए इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय चिंता को और बढ़ा दिया है क्योंकि पहली बार इस संघर्ष में न्यूक्लियर ठिकानों पर सीधा हमला हुआ

    हमले के बाद इजरायली राष्ट्रपति Isaac Herzog ने तुरंत प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और हालात का जायजा लिया अराद में स्थित एक बेकरी को भी इस हमले में नुकसान पहुंचा जहां उन्होंने बेकरी मालिक से मुलाकात कर उनकी स्थिति को जाना हालांकि इस हमले में किसी भी नागरिक की मौत नहीं हुई लेकिन इमारतों को क्षति पहुंची

    राष्ट्रपति हर्जोग ने अपने दौरे के दौरान स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए बताया कि संकट के बावजूद नागरिकों ने सतर्कता और अनुशासन का परिचय दिया उन्होंने कहा कि सायरन बजते ही लोग सुरक्षित स्थानों और बंकरों में चले गए जिससे बड़ी जनहानि टल गई यह दर्शाता है कि नागरिक सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी ने संभावित बड़े नुकसान को रोका

    हर्जोग ने सोशल मीडिया पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए एक परिवार की कहानी का उल्लेख किया जिनका बेकरी व्यवसाय हमले की चपेट में आया उन्होंने बताया कि इस परिवार के बेटे को 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के दौरान अगवा कर लिया गया था और बाद में उसे एक बंधक समझौते के तहत वापस लाया गया यह परिवार कई कठिनाइयों का सामना कर चुका है लेकिन इसके बावजूद उनकी हिम्मत और सकारात्मकता इजरायली समाज की मजबूती को दर्शाती है

    उन्होंने आगे कहा कि छोटे व्यवसायों का समर्थन करना केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि राष्ट्र की भावना को मजबूत करना है उन्होंने नागरिकों के धैर्य और साहस की सराहना करते हुए कहा कि इजरायली आत्मा इन कठिन परिस्थितियों में भी मजबूत बनी हुई है

    ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा कि मिसाइलों और हिंसा के जरिए इंसानियत को नुकसान पहुंचाने का प्रयास गलत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इजरायल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा और किसी भी खतरे का जवाब देने में सक्षम है

    अपने बयान में उन्होंने यह भी दोहराया कि इजरायल की रणनीति स्पष्ट है और वह अपने उद्देश्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है उन्होंने जोर देकर कहा कि संघर्ष का अंत तभी संभव है जब ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार और बैलिस्टिक क्षमताएं नहीं रहेंगी

    यह पूरा घटनाक्रम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को दर्शाता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता को और गहरा करता है इस संघर्ष का भविष्य क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है

  • बिना प्लान के युद्ध पड़ा भारी लियोन पैनेटा ने ट्रंप को घेरा अमेरिका मुश्किल में

    बिना प्लान के युद्ध पड़ा भारी लियोन पैनेटा ने ट्रंप को घेरा अमेरिका मुश्किल में


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब अमेरिका के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है और इस बीच अमेरिकी राजनीति और सुरक्षा हलकों से भी सवाल उठने लगे हैं। पूर्व सीआईए प्रमुख और रक्षा मंत्रीलियोन पेनेटा ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि बिना ठोस रणनीति के शुरू किया गया यह युद्ध अब अमेरिका को एक मुश्किल स्थिति में ले आया है।

    ओसामा बिन लादेन के खिलाफ ऑपरेशन की रणनीति में अहम भूमिका निभा चुके पैनेटा ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ने खुद को ऐसे मोड़ पर खड़ा कर लिया है जहां से निकलना आसान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर हमला करने से पहले न तो हालात का सही आकलन किया और न ही दीर्घकालिक रणनीति तैयार की।

    पैनेटा के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका में ईरान को लेकर चर्चा हुई हो। उन्होंने कहा कि पहले के सभी प्रशासन इस मुद्दे की जटिलता को समझते थे और हर कदम सोच समझकर उठाते थे। लेकिन इस बार बिना पूरी तैयारी के सैन्य कार्रवाई कर दी गई जो एक बड़ी राजनीतिक और रणनीतिक चूक साबित हो रही है।

    उन्होंने खास तौर परहोरमुज़ जलसंधि का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है और यहां किसी भी तरह का संकट पूरी दुनिया को प्रभावित करता है। उनके मुताबिक अगर पहले से योजना बनाई गई होती तो इस तरह की स्थिति का अनुमान लगाकर कदम उठाए जा सकते थे।

    पैनेटा ने ईरान के नेतृत्व में आए बदलाव को भी गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि अली खामेनेई के बाद अब उनके बेटे मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में एक नया और ज्यादा सख्त दौर शुरू हो सकता है। उनका मानना है कि नया नेतृत्व ज्यादा आक्रामक रुख अपना सकता है और बातचीत की गुंजाइश कम हो सकती है जिससे तनाव और बढ़ेगा।

    इस पूरे घटनाक्रम में नाटो सहयोगियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। पैनेटा ने आरोप लगाया कि ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों को विश्वास में लिए बिना ही युद्ध का फैसला किया जो एक आत्मघाती कदम साबित हुआ। उन्होंने कहा कि आज अमेरिका उन्हीं देशों से समर्थन मांग रहा है जिन्हें पहले नजरअंदाज किया गया था।

    दरअसल ट्रंप के कार्यकाल में नाटो को लेकर कई विवादित बयान सामने आए थे जिससे सहयोगी देशों के साथ रिश्तों में खटास आई। अब जब हालात गंभीर हो रहे हैं तो कई देश खुलकर समर्थन देने से हिचक रहे हैं।

    कुल मिलाकर ईरान के साथ बढ़ता संघर्ष अब केवल सैन्य टकराव नहीं बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक परीक्षा भी बन गया है। पूर्व सीआईए प्रमुख की यह चेतावनी साफ संकेत देती है कि अगर जल्द ही ठोस रणनीति नहीं बनाई गई तो यह संकट और गहरा सकता है और इसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाएगा।

  • तेल संकट गहराया श्रीलंका में कीमतों का विस्फोट बस किराया बढ़ाने की नौबत

    तेल संकट गहराया श्रीलंका में कीमतों का विस्फोट बस किराया बढ़ाने की नौबत


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है और इसका ताजा उदाहरण श्रीलंका है जहां ईंधन की कीमतों में भारी उछाल ने हालात को चिंताजनक बना दिया है। ईरान अमेरिका और इजरायल के बीच जारी टकराव ने वैश्विक तेल बाजार को हिला कर रख दिया है और इसका सीधा असर छोटे और आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है।

    इसी कड़ी में श्रीलंका सरकार ने रविवार आधी रात से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में औसतन 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। यह बढ़ोतरी एक सप्ताह के भीतर दूसरी और मार्च महीने की तीसरी बड़ी वृद्धि है। नई दरों के लागू होने के बाद देश में ईंधन की कीमतें 400 श्रीलंकाई रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई हैं जो आम जनता के लिए बड़ा झटका है।

    सरकारी ईंधन कंपनी सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार ऑटो डीजल की कीमत 303 रुपये से बढ़कर 382 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं सुपर डीजल 353 से बढ़कर 443 रुपये पहुंच गया है। 92 ऑक्टेन पेट्रोल 317 से बढ़कर 398 रुपये और 95 ऑक्टेन पेट्रोल 365 से बढ़कर 455 रुपये प्रति लीटर हो गया है। केरोसिन की कीमत में भी सबसे ज्यादा 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    दरअसल इस पूरे संकट की जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से को तेल की आपूर्ति होती है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई और उसके जवाब में ईरान की प्रतिक्रिया के चलते इस महत्वपूर्ण मार्ग पर असर पड़ा है जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और कीमतों में तेजी आई है।

    इस बढ़ोतरी ने श्रीलंका के परिवहन क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। निजी बस ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल की कीमत में यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है और बिना किराया बढ़ाए संचालन संभव नहीं है। बस मालिकों ने कम से कम 15 प्रतिशत किराया बढ़ाने की मांग की है जबकि राष्ट्रीय परिवहन आयोग के अनुसार 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी जरूरी है। यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी भी दी गई है।

    सरकार का कहना है कि बढ़ी कीमतों के बावजूद वह ईंधन पर भारी सब्सिडी दे रही है। सरकारी प्रवक्ता नलिंदा जयतिस्सा के मुताबिक डीजल पर 100 रुपये और पेट्रोल पर 20 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी दी जा रही है जिससे हर महीने 20 अरब रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उनका यह भी कहना है कि यदि कीमतें नहीं बढ़ाई जातीं तो सरकार को 1.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त भार उठाना पड़ता।

    हालांकि विपक्ष ने सरकार पर जनता पर बोझ डालने का आरोप लगाया है और कहा है कि ईंधन पर भारी टैक्स हटाकर राहत दी जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने 2022 के आर्थिक संकट की यादें ताजा कर दी हैं जब देश को भारी वित्तीय संकट और राजनीतिक अस्थिरता का सामना करना पड़ा था। कुल मिलाकर वैश्विक भू राजनीतिक तनाव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ऊर्जा पर निर्भरता किस तरह किसी देश की अर्थव्यवस्था और आम जीवन को प्रभावित कर सकती है।

  • बंगाल चुनाव में हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरेगी AIMIM, ओवैसी ने की घोषणा

    बंगाल चुनाव में हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरेगी AIMIM, ओवैसी ने की घोषणा


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया समीकरण उभरकर सामने आया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी हुमायूं कबीर की ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के साथ मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव में उतरेगी। ओवैसी 25 मार्च को कोलकाता में हुमायूं कबीर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस गठबंधन की रूपरेखा पेश करेंगे।

    हुमायूं कबीर की पार्टी ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वह 2026 के विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। AIMIM भी इस गठबंधन का हिस्सा होगी और लगभग 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है।

    अब तक कबीर की पार्टी ने 18 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें रानीनगर, भगवानगोला और मुर्शिदाबाद जैसी महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं। हुमायूं कबीर स्वयं तीन सीटों से चुनाव लड़ेंगे, भगवानगोला, नौदा और राजीनगर, जो मुर्शिदाबाद जिले में आती हैं।

    चुनाव की तारीखें

    पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव दो चरणों में होंगे:
    पहला चरण (152 सीटें): 23 अप्रैल 2026
    दूसरा चरण (142 सीटें): 29 अप्रैल 2026
    नतीजे: 4 मई 2026

    सियासी मायने

    ममता बनर्जी की TMC और मुख्य विपक्षी दल BJP के बीच मुकाबले में ओवैसी और कबीर का गठबंधन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। 2021 के चुनावों में कांग्रेस और वामपंथी दलों का प्रभाव कम हो गया था, ऐसे में यह नया मोर्चा राज्य की राजनीति में ‘तीसरे कोण’ के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है।

  • होर्मुज तनाव: एलएनजी संकट के बाद अब भारत में यूरिया उत्पादन पर असर, सप्लाई चेन प्रभावित

    होर्मुज तनाव: एलएनजी संकट के बाद अब भारत में यूरिया उत्पादन पर असर, सप्लाई चेन प्रभावित


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में युद्ध के बढ़ते खतरे और होर्मुज जलसंधि में रुकावट के कारण तेल और गैस संकट और गहरा गया है। इसका असर अब अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ने लगा है। एलपीजी संकट के बाद अब एलएनजी की वैश्विक आपूर्ति बाधित होने से भारत में यूरिया की कमी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के अनुसार होर्मुज तनाव के चलते देश के यूरिया संयंत्रों में उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत घट गया है।

    यूरिया उत्पादन में कटौती

    एक रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलसंधि के माध्यम से एलएनजी आपूर्ति में रुकावट के कारण ईंधन की उपलब्धता कम हो गई। इसका असर सीधे भारत के यूरिया संयंत्रों पर पड़ा और उत्पादन में लगभग आधी कटौती करनी पड़ी। सप्लायर्स ने फोर्स मेज्योर का हवाला दिया, जिससे पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड को भी अपने रिसीविंग टर्मिनल पर इसी तरह का कदम उठाना पड़ा। गैस की कम आपूर्ति का असर सप्लाई चेन पर भी देखने को मिला। गैल इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने रासगैस कॉन्ट्रैक्ट के तहत संचालित यूरिया संयंत्रों को गैस की आपूर्ति कम कर दी।

    कम उत्पादन, बढ़ा घाटा

    उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गैस की आपूर्ति सामान्य स्तर की तुलना में केवल 60-65 प्रतिशत रह गई है। ईंधन की कमी के कारण प्लांटों ने यूरिया उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत की कटौती की। इसके लिए संयंत्रों को अधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे वित्तीय नुकसान भी हो रहा है। एक प्लांट प्रबंधक के अनुसार, अचानक लोड परिवर्तन बड़े यूरिया और अमोनिया संयंत्रों के लिए संभव नहीं हैं। इससे उपकरण खराब होने, प्लांट ठप होने और परिचालन कर्मियों की सुरक्षा पर भी खतरा रहता है।

    भारत में यूरिया भंडार
    भारत दुनिया के सबसे बड़े यूरिया उपभोक्ताओं में से एक है। लंबे समय तक उत्पादन में व्यवधान रहने से खरीफ की बुवाई से पहले यूरिया की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, 19 मार्च 2026 तक देश में 61.14 लाख टन यूरिया का भंडार था, जबकि एक साल पहले यह 55.22 लाख टन था। इस आंकड़े से फिलहाल कुछ राहत मिलती है।

  • ट्रंप की करीबी का दावा—‘पत्नी की वजह से भड़क सकता है तीसरा विश्व युद्ध’, ईरान-इजरायल तनाव पर तीखे बयान

    ट्रंप की करीबी का दावा—‘पत्नी की वजह से भड़क सकता है तीसरा विश्व युद्ध’, ईरान-इजरायल तनाव पर तीखे बयान

    वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की राजनीति में भी तीखी बयानबाजी सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की करीबी मानी जाने वाली टिप्पणीकार Candace Owens ने दावा किया है कि मौजूदा हालात तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं।

    उन्होंने सोशल मीडिया मंच X (social media platform) पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस युद्ध को कुछ प्रभावशाली लोग बढ़ावा दे रहे हैं और इससे वैश्विक संकट पैदा हो सकता है।

    नेतन्याहू पर युद्ध भड़काने का आरोप

    ओवेन्स ने Benjamin Netanyahu पर आरोप लगाया कि ईरान के साथ तनाव को जानबूझकर बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध को लेकर आम जनता का समर्थन नहीं है, बल्कि कुछ समूह इसे आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह इजरायल या किसी भी युद्ध का समर्थन नहीं करती हैं।

    ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम

    तनाव के बीच United States और Iran ने एक-दूसरे के अहम ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। तेहरान ने कहा कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो Strait of Hormuz को बंद किया जा सकता है। इससे पहले ट्रंप ने समुद्री मार्ग खुला रखने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।

    इजरायल का पलटवार

    इस बीच Israel के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेंगे। उन्होंने Dimona और Arad का दौरा कर हमलों की स्थिति का जायजा लिया। उनका आरोप है कि ईरान ने रिहायशी इलाकों और संवेदनशील स्थलों को निशाना बनाया।

    ईरान का जवाब

    ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने ट्रंप के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान किसी दबाव में आने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि होर्मुज क्षेत्र अन्य देशों के लिए खुला रहेगा, लेकिन ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने वालों को जवाब दिया जाएगा।

    पश्चिम एशिया में बढ़ते इस टकराव ने वैश्विक राजनीति में नई चिंता पैदा कर दी है और कई विश्लेषक इसे बड़े संघर्ष की आशंका से जोड़कर देख रहे हैं।

  • कहां हैं मोजतबा खामेनेई? नए सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी पर CIA-मोसाद सतर्क

    कहां हैं मोजतबा खामेनेई? नए सुप्रीम लीडर की गैरमौजूदगी पर CIA-मोसाद सतर्क


    नई दिल्ली। ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei की सार्वजनिक अनुपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। बताया जा रहा है कि उनके पिता Ali Khamenei की हत्या के बाद 9 मार्च को उन्हें ईरान का तीसरा सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था, लेकिन तब से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। इस स्थिति ने Central Intelligence Agency (CIA) और Mossad जैसी खुफिया एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।

    नवरोज पर नहीं आया वीडियो संदेश

    फारसी नववर्ष Nowruz के मौके पर आमतौर पर सुप्रीम लीडर देश को संबोधित करते हैं, लेकिन इस बार केवल लिखित बयान जारी किया गया। उनके आधिकारिक चैनल पर कुछ पुरानी तस्वीरें साझा की गईं, जिससे उनकी मौजूदगी और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    ‘जीवित होने के संकेत’, लेकिन ठोस प्रमाण नहीं

    अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के अनुसार, कुछ संकेत मिले हैं कि ईरानी अधिकारी उनसे मुलाकात की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि वे वास्तव में आदेश दे रहे हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस स्थिति को “बेहद अजीब” बताया और कहा कि इतने बड़े पद पर किसी की सक्रियता का कोई स्पष्ट संकेत न मिलना असामान्य है।

    संभावित कारणों पर चर्चा

    रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसियां साझा की गई तस्वीरों की जांच कर रही हैं कि वे हाल की हैं या नहीं। इस बीच Masoud Pezeshkian ने नवरोज पर वीडियो संदेश जारी किया, जबकि मोजतबा खामेनेई सामने नहीं आए। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा कारणों से उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाया जा रहा हो सकता है।

    तेल अवीव स्थित Institute for National Security Studies से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा युद्ध जैसे हालात में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी जोखिम भरी हो सकती है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि स्वास्थ्य या चोट से जुड़ी वजहों के कारण वे सामने नहीं आ रहे हों।

    सत्ता संतुलन पर उठे सवाल

    बताया जा रहा है कि Israel ने उन्हें संभावित लक्ष्य सूची में ऊपर रखा है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या वास्तव में सत्ता की कमान उनके हाथ में है या Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) जैसे शक्तिशाली सैन्य संगठन निर्णय ले रहे हैं।

    खुफिया एजेंसियां उनकी गतिविधियों से जुड़े हर संकेत पर नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति ईरान की आंतरिक राजनीति और चल रहे संघर्ष की दिशा पर महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।

  • मिडिल ईस्ट में कब खत्म होगी जंग? ईरान ने अमेरिका से युद्ध खत्म करने को रख दीं 6 शर्तें ते

    मिडिल ईस्ट में कब खत्म होगी जंग? ईरान ने अमेरिका से युद्ध खत्म करने को रख दीं 6 शर्तें ते

    तेहरान। ईरान ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध समाप्त करने के लिए नए कानूनी और रणनीतिक ढांचे के हिस्से के रूप में छह शर्तें रखी हैं। यह युद्ध रविवार को अपने 23वें दिन में प्रवेश कर गया। ईरान की ओर से रखी गयी शर्तें हैं- होर्मुज स्ट्रेट के लिए नया कानूनी ढांचा तैयार करना, युद्ध की पुनरावृत्ति रोकने की गारंटी, क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करना, ईरान के इस्लामी गणराज्य को हर्जाने का भुगतान करना, सभी क्षेत्रीय मोर्चों पर युद्धों को समाप्त करना और ईरान के प्रति शत्रुता रखने वाले मीडिया जगत के लोगों पर मुकदमा चलाना और उनका प्रत्यर्पण करना।

    ईरान के ये प्रस्ताव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के एक दिन बाद आये हैं, जिसमें उन्होंने शनिवार को कहा था कि अमेरिका पश्चिम एशिया में सैन्य प्रयासों को ‘समेटने’ के लक्ष्यों को पूरा करने के ‘बहुत करीब’ है। उन्होंने संकेत दिया कि वह पश्चिम एशिया के अभियानों को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने अज्ञात वरिष्ठ राजनीतिक और सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि ईरान अमेरिका-इजरायल के खिलाफ अपने रक्षात्मक युद्ध में पूर्व-नियोजित, बहु-चरणीय योजना लागू कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह रणनीति महीनों पहले विकसित की गयी थी और इसे उच्च रणनीतिक धैर्य के साथ अंजाम दिया जा रहा है।

    अधिकारी ने कहा कि पूरे क्षेत्र में अमेरिकी-इजरायली हवाई रक्षा प्रणालियों और रडार बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने और नष्ट करने के बाद ईरान ने अब इजरायली सत्ता के हवाई क्षेत्र पर ‘पूर्ण नियंत्रण’ स्थापित कर लिया है। अधिकारी ने कहा कि ईरान ‘आक्रमणकारी को सजा देने’ की अपनी नीति तब तक जारी रखने का इरादा रखता है, जब तक वह अमेरिका-इजरायली आक्रामकता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘ऐतिहासिक सबक’ नहीं सिखा देता। अधिकारी ने आगे बताया कि कई क्षेत्रीय पक्षों और मध्यस्थों ने युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से ईरान को प्रस्ताव भेजे हैं। ईरान ने उनके सामने ऐसी शर्तें रखी हैं, जिन्हें किसी भी समझौते पर पहुंचने से पहले पूरा किया जाना और गंभीरता से लिया जाना जरूरी है।
    युद्ध के दो-तीन हफ्ते चलने की और उम्मीद

    वहीं, ‘एक्सियोस’ ने व्हाइट हाउस के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि वह संघर्ष को समेटने पर विचार कर रहे हैं, हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया कि वे अभी दो-तीन सप्ताह और सैन्य अभियानों की उम्मीद कर रहे हैं। इसके समानांतर सलाहकारों ने बातचीत के लिए जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है, ताकि यदि कोई अवसर मिले तो उसका लाभ उठाया जा सके। पर्दे के पीछे काम करते हुए विशेष दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ पहले से ही तेहरान के अधिकारियों के साथ कूटनीतिक संपर्क की शुरुआती योजना बनाने में जुटे हैं। अधिकारियों ने कहा है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खुलवाना, इस्लामिक गणराज्य के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के विशाल भंडार का समाधान करना और उसके परमाणु व मिसाइल कार्यक्रमों के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रॉक्सी मिलिशिया और आतंकी समूहों के समर्थन पर दीर्घकालिक सीमाएं तय करना आवश्यक होगा।

  • युद्ध के लिए फंडिंग…. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक जहाज निकालने के 20 लाख डॉलर वसूल रहा ईरान

    युद्ध के लिए फंडिंग…. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक जहाज निकालने के 20 लाख डॉलर वसूल रहा ईरान


    तेहरान।
    अमेरिका और इजरायल (America and Israel) से युद्ध लड़ रहा ईरान (Iran) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर जहाजों से वसूली (Recovery Ships) कर रहा है। खबर है कि कुछ जहाजों को गुजरने देने के लिए लाखों डॉलर लिए जा रहे हैं। ईरान के एक सांसद ने ही ऐसा दावा किया है। इससे पहले ईरान ने धमकी दी थी कि अगर अमेरिका की तरफ से हमले किए जाते हैं, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।

    ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य, अलादीन ब्रूजेर्दी ने कहा कि यह कदम पहले ही लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा, ‘अब, चूंकि युद्ध की अपनी लागत होती है, इसलिए स्वाभाविक रूप से हमें यह करना चाहिए और Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क लेना चाहिए।’

    ब्रूजेर्दी ने डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी का भी जिक्र किया, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि यदि 48 घंटों के भीतर स्ट्रेट को नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के बिजली और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। इसके जवाब में ब्रूजेर्दी ने कहा कि इजरायल का ऊर्जा ढांचा भी ईरान की पहुंच में है और उसे ‘एक दिन के भीतर’ पूरी तरह तबाह किया जा सकता है।


    अमेरिका अलर्ट

    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने रविवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ अपनी ‘रेड लाइन्स’ पर अडिग हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लगभग नाकेबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को बंधक नहीं बनाने देंगे।


    ट्रंप ने कहा था 48 घंटे में होर्मुज खोले ईरान

    अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर ईरान ने 48 घंटों के अंदर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से फिर नहीं खोला तो ईरान के बिजली संयंत्रों को पूरी तरह तबाह कर देंगे। ट्रंप का यह बयान शनिवार को दिए उनके बयान से उलट था। उन्होंने कहा था कि वह युद्ध को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन रविवार तड़के उन्होंने ईरान को नई धमकी दे डाली। ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी नौसैनिक और भारी लैंडिंग क्राफ्ट क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं।

    आईजी मार्केट विश्लेषक टोनी साइकैमोर ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी ने अब बाजारों पर 48 घंटे की अनिश्चितता का टिक टिक करता हुआ टाइम बम रख दिया है। यदि इस अल्टीमेटम को वापस नहीं लिया गया, तो हम सोमवार को दुनियाभर के शेयर बाजारों को ‘ब्लैक मंडे’ के रूप में गिरते हुए और तेल की कीमतों को काफी ऊंचे स्तर पर जाते हुए देखेंगे।


    बंद कर सकता है ईरान

    ईरान की सेना ने चेतावनी दी कि यदि ट्रंप देश के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाते हैं, तो वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर देंगे। सेना की ऑपरेशनल कमांड ‘खातम अल-अंबिया’ ने सरकारी टीवी द्वारा प्रसारित बयान में कहा, यदि ईरान के बिजली संयंत्रों के संबंध में अमेरिका की धमकियों पर अमल किया गया, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा, और इसे तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक कि हमारे नष्ट किए गए बिजली संयंत्रों का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता।

  • परमाणु ठिकानों पर हमलों से बढ़ा खतरा, डब्ल्यूएचओ ने दी गंभीर चेतावनी

    परमाणु ठिकानों पर हमलों से बढ़ा खतरा, डब्ल्यूएचओ ने दी गंभीर चेतावनी


    जिनेवा।
    अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर किए हमले से पश्चिम एशिया में संकट की स्थिति बनी हुई है। इस बीच ईरान के परमाणु ठिकानों पर हो रहे हमलों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।

    डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने बताया कि नतांज एनरिचमेंट कॉम्प्लेक्स और डिमोना जैसे संवेदनशील परमाणु स्थलों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी इन घटनाओं की जांच कर रही है। फिलहाल किसी तरह के रेडिएशन स्तर में वृद्धि के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    टेड्रोस ने चेतावनी दी कि परमाणु ठिकानों को निशाना बनाना बेहद खतरनाक है, क्योंकि इससे बड़े पैमाने पर जनस्वास्थ्य संकट और पर्यावरणीय नुकसान हो सकता है। अगर ऐसे हमले जारी रहते हैं, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

    डब्ल्यूएचओ ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से 13 देशों में अपने स्टाफ और संयुक्त राष्ट्र के कर्मियों को संभावित न्यूक्लियर आपात स्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

    डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाई में संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए और मौजूदा संकट का समाधान केवल शांति और संवाद के जरिए ही संभव है।