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  • डिमोना-अराद मिसाइल स्ट्राइक: ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया

    डिमोना-अराद मिसाइल स्ट्राइक: ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया


    नई दिल्ली । इजरायल के दक्षिणी शहरों डिमोना और अराद में शनिवार को ईरान ने बड़े पैमाने पर मिसाइल हमला किया जिसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। घायलों में से 11 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इजरायली मीडिया के अनुसार ईरान की ओर से ताबड़तोड़ हमलों में इजरायली एयर डिफेंस कम से कम दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा।

    हमलों के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायल डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा कि देश अपने दुश्मनों से हर मोर्चे पर लड़ता रहेगा। हमलों में गंभीर रूप से घायल लोगों में डिमोना में हुए हमले के कारण 12 साल का एक लड़का और अराद में 5 साल की एक लड़की शामिल हैं।

    डिमोना इलाके में ईरान ने कई मिसाइल हमले किए जिन्हें न्यूक्लियर रिसर्च फैसिलिटी को निशाना बनाने के लिए किया गया था। यह फैसिलिटी डिमोना से लगभग 10 किलोमीटर और अराद से 30 किलोमीटर दूर स्थित है। ईरानी मीडिया ने बताया कि यह हमला इजरायल के परमाणु केंद्रों पर बदले के तौर पर किया गया है। अमेरिका और इजरायल पहले से ही ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए लगातार दबाव डाल रहे हैं।

    इजरायल के मैगन डेविड एडोम इमरजेंसी सर्विस के अनुसार डिमोना में हमले के दौरान गंभीर रूप से घायल लड़के के अलावा 30 साल की एक महिला को भी कांच के टुकड़ों से मामूली चोटें आईं। शहर में 31 अन्य लोगों को हल्की चोटों का इलाज किया गया जबकि 14 लोगों को एक्यूट एंग्जायटी के लिए मेडिकल सहायता मिली। एमडीए पैरामेडिक कार्मेल कोहेन ने कहा कि हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मची हुई थी और बहुत ज्यादा नुकसान हुआ।

    बीर्शेबा के सोरोका मेडिकल सेंटर ने जानकारी दी कि हमले में घायल सात लोगों को भर्ती किया गया जिनमें गंभीर रूप से घायल 12 साल का बच्चा भी शामिल था। बच्चों और अन्य गंभीर घायलों का इलाज ट्रॉमा रूम और सर्जिकल इमरजेंसी रूम में किया जा रहा है।

    डिमोना में हुए हमले के कुछ घंटों बाद पास के अराद में भी एक बैलिस्टिक मिसाइल के टकराने से कई इमारतों को नुकसान हुआ। एमडीए की टीम ने अराद में हमले के दौरान 71 लोगों का इलाज किया और उन्हें अस्पताल भेजा। इसमें 10 गंभीर घायल शामिल थे जिनमें 5 साल की बच्ची भी थी। 13 लोगों की हालत स्थिर बताई गई जबकि 48 लोगों को हल्की चोटें आईं। चार और लोगों को अतिरिक्त इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    इस हमले ने इजरायल के न्यूक्लियर शहरों और नागरिक सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न किया है। विशेषज्ञ इसे ईरान की ओर से इजरायल के परमाणु कार्यक्रम और सुरक्षा रणनीति पर बड़ा प्रहार मान रहे हैं। इस घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक स्थिरता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

  • भारत में यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी पर रूस का बड़ा हमला दूतावास की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

    भारत में यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी पर रूस का बड़ा हमला दूतावास की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

    नई दिल्ली: भारत में हाल ही में जापानी नागरिकों के अपराधी मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया विवाद खड़ा किया गया है, राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 13 मार्च को नई दिल्ली, कोलकाता और कोलकाता के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर छह जापानी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिकों पर मामला दर्ज किया था।

    रूस के विदेश मंत्री की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने आरोप लगाया कि ये जापानी नागरिक सीमा पार कर मिजोरम के रास्ते भारत में बचे हुए थे और उन्होंने स्थानीय हथियार बंद विचारधारा से संपर्क स्थापित किया था और उनका उद्देश्य कथित तौर पर यूरोप में बने साम्राज्य पर हमला करना और इन विचारधाराओं को कम्युनिस्ट असेंबल करना और इलेक्ट्रॉनिक वॉर्सफेयर की ट्रेनिंग देना था।

    रूस ने यह भी दावा किया है कि उत्तर पूर्व भारत में सक्रिय विद्रोही सहयोगियों के साथ संबंध हो सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।

    इस पूरी घटना में रूस ने भारत में यूक्रेनी दूतावास की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। मारिया जखारोवा ने कहा कि दूतावास की प्रतिक्रिया हैरान करने वाली है और वह अपने देश के सहयोगियों को अलग करने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जापान ने भारत के समकक्ष टेररिज्म कानून के उल्लंघन पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी और समर्थित मीडिया पर आरोप लगाया।

    रूस ने इस अंक में वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के नेतृत्व वाले वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के नेतृत्व में इस मुद्दे को रखा है, जिसमें कहा गया है कि दुनिया भर में कम्युनिस्ट पार्टी का केंद्र बनाया जा रहा है और पश्चिमी देशों द्वारा सैन्य समर्थन के कारण स्थिति और जटिल हो रही है।

    रूस का दावा है कि जापान से जुड़े नेटवर्क को मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और अफ्रीका तक सक्रिय किया जा सकता है।

    इस मामले में पूरे भारत में सुरक्षा शैक्षणिक संस्थान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को एक बार फिर से उजागर किया गया है, वहीं यह घटना वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव और आरोप प्रत्यारोप के नए दौर की ओर भी संकेत दिए गए हैं, इस मामले में इस मामले पर और घोषणा होने की संभावना है, जिससे स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

  • ईरान में युद्ध का कहर: तेहरान सहित देशभर में हमलों की संख्या 80,000 से ऊपर

    ईरान में युद्ध का कहर: तेहरान सहित देशभर में हमलों की संख्या 80,000 से ऊपर


    नई दिल्ली । ईरान के रेड क्रेसेंट सोसायटी के अध्यक्ष पीरहुसैन कोलिवंद ने एक बयान में कहा है कि युद्ध की शुरुआत के बाद से अमेरिका और इजरायल ने ईरान में 80 000 से अधिक नागरिक स्थलों पर हमला किया है। इन हमलों में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन भी शामिल है। कोलिवंद ने बताया कि इनमें से 20 000 से अधिक हमले तेहरान में हुए हैं जबकि शेष 60 000 अन्य इलाकों में दर्ज किए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि इन हमलों में करीब 18 790 व्यापारिक प्रतिष्ठान 266 मेडिकल सेंटर और 498 स्कूल निशाने पर रहे। हमलों में कम से कम 12 स्वास्थ्यकर्मी मारे गए और 90 से अधिक घायल हुए। युद्ध की शुरुआत से अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है जिनमें बच्चे और 231 महिलाएं भी शामिल हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस संघर्ष में अब तक 1 500 से अधिक लोग मारे गए हैं।

    इसी बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने देश के मध्य हवाई क्षेत्र में इजरायल के एफ-16 लड़ाकू विमान को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार तेहरान की सेना ने तेल अवीव के पास बेन गुरियन एयरपोर्ट पर सैन्य विमानों के ईंधन टैंकों पर भी हमला किया।

    ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फ़ागरी ने चेतावनी दी कि यदि संयुक्त अरब अमीरात से दक्षिणी ईरानी द्वीपों पर हमले दोहराए गए तो रास अल-खैमाह पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर हमला उसी जगह पर जवाब देगा जहां से हमला हुआ।

    28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर हमला किया था। इस हमले में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और आम नागरिक मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

    इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक तेल और ऊर्जा बाजार पर भी गहरा प्रभाव डाला है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पर चिंता व्यक्त की है और युद्ध की तत्काल समाप्ति की आवश्यकता को रेखांकित किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपने नागरिकों और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई का जवाब देगा।

    इस संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित किया है बल्कि वैश्विक मानवाधिकार और युद्ध कानून की स्थितियों को भी चुनौती दी है। नागरिक इलाकों स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों पर हमले ने एक मानवीय संकट को जन्म दिया है जिसे तत्काल अंतरराष्ट्रीय ध्यान की आवश्यकता है।

  • जी7 ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की, कहा ये वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा

    जी7 ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की, कहा ये वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा


    वॉशिंगटन । जी7 देशों ने ईरान द्वारा पश्चिम एशिया में किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इन हरकतों से न केवल प्रभावित देशों बल्कि वैश्विक सुरक्षा को भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। समूह ने साथ ही प्रभावित देशों के प्रति अपना समर्थन भी जाहिर किया।

    जी7 देशों के विदेश मंत्रियों ने यूरोपीय संघ के हाई रिप्रेजेंटेटिव के साथ संयुक्त बयान में कहा कि वे ईरान और उसके प्रॉक्सी के हमलों के खिलाफ अपने साझेदारों का समर्थन करते हैं। बयान में उल्लेख किया गया कि बहरीन कुवैत ओमान कतर सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात जॉर्डन और इराक में आम नागरिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए हमलों की निंदा करते हैं जिसमें ऊर्जा सुविधाएं भी शामिल हैं।

    समूह ने चेतावनी दी कि ईरानी गतिविधियां क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने तेहरान से अपील की कि अपनी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकें। जी7 ने खासकर होर्मुज स्ट्रेट और उससे जुड़े महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की अहमियत पर जोर दिया।

    बयान में कहा गया कि वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा मार्केट की स्थिरता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। जी7 ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्यों द्वारा 11 मार्च को किए गए स्टॉक रिलीज फैसले का हवाला देते हुए ग्लोबल ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई।

    इसके अलावा समूह ने दोहराया कि ईरान को कभी भी न्यूक्लियर हथियार हासिल नहीं करने चाहिए। उन्होंने ईरान से बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रोकने अस्थिर गतिविधियों को खत्म करने और अपने ही नागरिकों के खिलाफ हिंसा बंद करने की अपील की।

    जी7 ने प्रभावित देशों के हमलों से खुद की रक्षा करने के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि ये देश अपने नागरिकों और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए उचित कदम उठा सकते हैं। समूह ने इराक में ईरान और उसकी मिलिशिया द्वारा डिप्लोमैटिक सुविधाओं और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की भी निंदा की खासकर अमेरिका और काउंटर आईएसआईएस कोएलिशन फोर्स के खिलाफ। बयान में निष्कर्ष निकाला गया कि जी7 क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी और आवश्यक क़दम उठाने के लिए तैयार हैं।

  • ट्रेन की टक्कर से बस पर तबाही, 12 मृतक और दर्जनों घायल, रेलवे जांच में जुटी

    ट्रेन की टक्कर से बस पर तबाही, 12 मृतक और दर्जनों घायल, रेलवे जांच में जुटी


    नई दिल्ली । बांग्लादेश के कोमिला में रविवार सुबह एक दर्दनाक रेल हादसा हुआ। पडुआ बाजार लेवल क्रॉसिंग पर मेल ट्रेन और बस की भीषण टक्कर में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए। घटना इतनी भयानक थी कि बस के परखच्चे उड़ गए और कई यात्रियों की चीखें सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे।

    कोमिला सदर साउथ पुलिस स्टेशन के ईपीजेड चौकी के सब इंस्पेक्टर सैफुल इस्लाम ने बताया कि मरने वालों में सात पुरुष, तीन महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि इलाज के दौरान अन्य मृतकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई।

    स्थानीय सूत्रों और पुलिस के अनुसार, ट्रेन मामून स्पेशल बस को जंगल्या कचुआ क्षेत्र में लगभग आधा किलोमीटर तक घसीटती हुई ले गई। घटना के समय क्रॉसिंग पर कोई गेटमैन मौजूद नहीं था। घटना के बाद फायर सर्विस, हाईवे पुलिस और स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुँचे और घायल यात्रियों को अस्पताल ले गए।

    बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, हादसे वाली बस चपैनवाबगंज से लक्ष्मीपुर जा रही थी। ट्रेन के इंजन में बस उलझ गई और ट्रेन रुकने से पहले लगभग एक किलोमीटर तक बस घिसटती चली गई। इसके कारण बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक 18 घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जिनमें से आठ अभी भी भर्ती हैं।

    रेलवे प्रशासन ने घटना की जांच के लिए दो कमेटियां गठित की हैं, एक डिविजनल और एक रीजनल। इसके अलावा, पडुआर बाजार क्रॉसिंग के दो गेटमैन मेहदी हसन और हेलाल उद्दीन को सस्पेंड कर दिया गया है। हादसे के कारण ढाका चटगांव रेल मार्ग पर ट्रेन सेवा तीन घंटे तक बाधित रही। बांग्लादेश रेलवे के अधिकारियों ने कहा कि दुर्घटना का कारण और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच की जा रही है। घटना ने पूरे इलाके में चिंता और सदमे का माहौल पैदा कर दिया है।

  • नेपाल में बदलाव की बयार बालेन शाह का नया राजनीतिक अध्याय और हिंदुत्व बहस की नई दिशा

    नेपाल में बदलाव की बयार बालेन शाह का नया राजनीतिक अध्याय और हिंदुत्व बहस की नई दिशा


    नई दिल्ली
    : नेपाल की राजनीति इन दिनों एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है हाल ही में हुए आम चुनावों ने देश के सत्ता समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है अब 35 वर्ष के युवा नेता बालेंद्र शाह देश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं उनकी शपथ को लेकर खास चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि वे 27 मार्च को राम नवमी के दिन पद की शपथ लेंगे यह तारीख केवल एक औपचारिक निर्णय नहीं मानी जा रही बल्कि इसे गहरे राजनीतिक और सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है

    बालेंद्र शाह जिन्हें लोग बालेन के नाम से भी जानते हैं पहले एक रैपर के रूप में लोकप्रिय हुए थे उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से भ्रष्टाचार और सिस्टम की खामियों पर खुलकर सवाल उठाए थे इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 2022 में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई अब वही युवा नेता प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं और यह नेपाल की राजनीति में एक नया अध्याय माना जा रहा है

    उनका राजनीतिक सफर केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है बल्कि यह एक बड़े बदलाव का संकेत भी देता है वे मधेशी समुदाय से आते हैं और इस समुदाय से प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता हैं यह उपलब्धि नेपाल की सामाजिक संरचना में समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने हालिया चुनावों में भारी बहुमत हासिल किया है और 275 सदस्यीय संसद में 182 सीटें जीतकर स्पष्ट जनादेश प्राप्त किया है

    विशेषज्ञों का मानना है कि राम नवमी के दिन शपथ लेने का निर्णय एक रणनीतिक संदेश है यह जनता की आस्था से जुड़ने का प्रयास माना जा रहा है और इसे राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण समझा जा रहा है कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम यह दर्शाता है कि नया नेतृत्व धार्मिक भावनाओं को स्वीकार करता है लेकिन वह पारंपरिक राजनीति से अलग दिशा में आगे बढ़ना चाहता है

    यह भी माना जा रहा है कि बालेंद्र शाह का यह निर्णय नेपाल की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने का प्रयास है नेपाल हमेशा से अपनी अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने का पक्षधर रहा है ऐसे में राम नवमी जैसे पवित्र दिन पर शपथ लेना उस परंपरा को आगे बढ़ाने जैसा है

    दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि इसे भारत के संदर्भ में सीधे तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए नेपाल की अपनी राजनीतिक और धार्मिक पहचान है और वहां की राजनीति अपनी परिस्थितियों के अनुसार विकसित होती है बालेन शाह की सोच पुराने राजशाही मॉडल से अलग है जहां राजा को भगवान का अवतार माना जाता था इसके विपरीत वे आधुनिक और लोकतांत्रिक सोच के समर्थक माने जाते हैं

    उनके समर्थक मुख्य रूप से युवा वर्ग से हैं जो परिवर्तन की मांग कर रहे थे यह युवा नेतृत्व नेपाल की राजनीति में नई ऊर्जा और नई सोच लेकर आया है अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री के रूप में बालेंद्र शाह किस तरह देश की आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करते हैं

  • अगले माह चांद के लिए रवाना होगा NASA, लेकिन सूरज की क्यों कर रहा निगरानी ? जानिए कारण

    अगले माह चांद के लिए रवाना होगा NASA, लेकिन सूरज की क्यों कर रहा निगरानी ? जानिए कारण


    नई दिल्ली। साल 1972 के बाद NASA का आर्टेमिस II मिशन अगले महीने 1 अप्रैल 2026 को लॉन्च होने जा रहा है। यह मिशन इंसानों को पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से बाहर लेकर चांद के करीब ले जाएगा। हालांकि रोमांचक यह सफर, सूर्य से निकलने वाले घातक रेडिएशन के खतरे के साथ भी है।

    सौर कणों से खतरा और 24 घंटे निगरानी

    चांद की यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्री लगभग 10 दिनों तक रहेंगे। इस दौरान सबसे बड़ा खतरा सूरज से निकलने वाले सोलर एनर्जेटिक पार्टिकल्स सौर कण का होगा। ये कण सूरज पर होने वाले विस्फोटों के समय इतनी तेज़ी से यात्रा करते हैं कि एक घंटे से भी कम समय में अंतरिक्ष यान तक पहुँच सकते हैं। ये न केवल यान के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर की कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    मंगल पर परसीवरेंस रोवर देगा एडवांस वार्निंग

    NASA ने सूरज के इस खतरे से निपटने के लिए मंगल ग्रह पर मौजूद परसीवरेंस रोवर की मदद लेने का अनोखा तरीका निकाला है। रोवर का मास्टकैम-Z कैमरा सूरज के उस हिस्से की तस्वीरें खींचेगा, जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता। इससे वैज्ञानिकों को दो हफ्ते पहले पता चल जाएगा कि कौन से सनस्पॉट्स पृथ्वी और चांद की ओर आने वाले हैं। यह एडवांस वार्निंग वैज्ञानिकों को संभावित सौर तूफानों के लिए तैयार रहने का समय देगी।

    Orion यान में रेडिएशन सुरक्षा

    आर्टेमिस II मिशन के Orion अंतरिक्ष यान में HERA हाइब्रिड इलेक्ट्रॉनिक विकिरण मूल्यांकन नामक एडवांस सेंसर लगाया गया है। यह सेंसर लगातार रेडिएशन के स्तर की निगरानी करेगा। यदि रेडिएशन खतरनाक स्तर पर पहुंचता है, तो यान अलार्म बजाएगा। ऐसी स्थिति में अंतरिक्ष यात्री इम्प्रोवाइज्ड स्टॉर्म शेल्टर अस्थायी सुरक्षा घेरा बनाने के लिए प्रशिक्षित होंगे। यान के अंदर मौजूद सामान और वजन का इस्तेमाल करके वे सुरक्षा दीवार बनाएंगे, जिससे सौर कणों के सीधे हमले से बचा जा सके।

  • ईरान के राष्ट्रपति ने PM मोदी से की अमेरिका-इजरायल को हमला करने से रोकेने की अपील

    ईरान के राष्ट्रपति ने PM मोदी से की अमेरिका-इजरायल को हमला करने से रोकेने की अपील


    तेहरान।
    मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष (Middle East Conflict) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन (Iranian President Masoud Pezeshkian) से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मार्ग को सुरक्षित रखने की भी अपील की। ईरान के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के समक्ष विदेशी हस्तक्षेप के बिना क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने के लिए पश्चिम एशियाई देशों को शामिल करते हुए एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

    वार्ता के ईरानी ब्योरे के अनुसार, पेजेश्कियन ने भारत से आग्रह किया कि वह ब्रिक्स (BRICS) के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की शत्रुता को रोकने के लिए अपनी स्वतंत्र भूमिका का लाभ उठाए।

    आपको बता दें कि ब्रिक्स दुनिया की पांच सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। ब्रिक्स के सदस्य देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। वर्ष 2024 में समूह में विस्तार के बाद अब इसके सदस्य देशों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। नए सदस्यों में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।


    परमाणु हथियारों के पक्ष में नहीं थे खामेनेई

    ब्योरे के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने उस अमेरिकी दावे को खारिज कर दिया कि अमेरिका ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए उसके खिलाफ सैन्य हमला शुरू किया था। ब्योरे में कहा गया है कि पेजेश्कियन ने इस बात पर भी जोर दिया कि दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने परमाणु हथियारों का दृढ़ता से विरोध किया था और उनके विकास की दिशा में किसी भी कदम को प्रतिबंधित करने के लिए प्रशासनिक और धार्मिक दोनों तरह के निर्देश जारी किए थे।


    पीएम मोदी ने दी ईद की बधाई

    ईरान के राष्ट्रपति के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और आशा जताई कि त्योहार का यह मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाए। प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ”राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात की और ईद एवं नवरोज की शुभकामनाएं दीं। हमने आशा व्यक्त की कि त्योहार का मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाए।”


    ईरान के समर्थन की सराहना

    मोदी ने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं। उन्होंने कहा, ”नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया कि जहाजरानी मार्ग खुले और सुरक्षित रहें।” प्रधानमंत्री ने ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए ईरान के निरंतर समर्थन की भी सराहना की।

    मौजूदा संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति के बीच टेलीफोन पर यह दूसरी बातचीत थी। पश्चिम एशियाई गैस केंद्रों पर नए हमलों को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के मद्देनजर दोनों नेताओं के बीच यह वार्ता हुई।


    अमेरिका-इजरायल को रोकना होगा

    ईरान द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र से इतर विश्व नेताओं के साथ संवाद करने के लिए ईरान की निरंतर तत्परता को दोहराया जिसमें तेहरान की शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों की पुष्टि और निगरानी के लिए वार्ताएं शामिल हैं। वार्ता के ब्योरे के अनुसार, ”राष्ट्रपति ने पश्चिमी एशिया के देशों से मिलकर एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा, जिसका उद्देश्य विदेशी हस्तक्षेप के बिना क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना है। ब्योरे के मुताबिक, ”उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्र में युद्ध और संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका और इजरायल द्वारा आक्रामकता का तत्काल समापन आवश्यक है।”

    ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता का जिक्र करते हुए पेजेश्कियन ने समूह से ईरान के खिलाफ आक्रामकता रोकने और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता की रक्षा करने में स्वतंत्र भूमिका निभाने का आह्वान किया। ईरान की ओर से जारी वार्ता के ब्योरे में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और फारस की खाड़ी में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।

    ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने 12 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी को ईरान की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी थी और क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम पर अपना दृष्टिकोण साझा किया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में उभर रही सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और भारत के इस रुख को दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।

    अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने अपने पड़ोसी देशों और इजरायल को निशाना बनाया। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को भी नियंत्रित करता है, जो एक महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन मार्ग है। इसके माध्यम से विश्व के 20 प्रतिशत ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। संघर्ष के बाद से, ईरान ने बहुत कम जहाजों को इससे गुजरने की अनुमति दी है। संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के नेताओं से भी बात की है। इनमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस और मलेशिया के नेता शामिल हैं।

  • लंबे युद्ध की तैयारी….. फूड सप्लाई सुरक्षित करने में जुटा ईरान, खाद्यान  से भरे 6 जहाज होर्मुज से गुजरे

    लंबे युद्ध की तैयारी….. फूड सप्लाई सुरक्षित करने में जुटा ईरान, खाद्यान से भरे 6 जहाज होर्मुज से गुजरे


    तेहरान।
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर ईरान (Iran) की सख्त पहरेदारी है। तेल वाले जहाजों को यहां से गुजरने की मनाही है। सिर्फ इक्का-दुक्का जहाज ही, ईरान की सहमति से इधर से जा रहे हैं। इस बीच ईरान ने कुछ और जहाजों को भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी है। यह कार्गो जहाज हैं, जिन पर खाद्यान्न और अन्य कृषि पदार्थ लदे हुए हैं। अमेरिका (America) के साथ चल रहे युद्ध के बीच ईरान अपने देश में फूड सप्लाई को सुरक्षित रखना चाहता है। इसे इस तरह भी देखा जा रहा है कि अगर युद्ध लंबा चलता है तो ईरान में भुखमरी की हालत न पैदा होने पाए। यह सभी जहाज ग्रीक मैनेजमेंट की निगरानी वाले हैं। बता दें कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से बहुत कम जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरे हैं। इसमें भी पश्चिम के जहाजों के लिए तो यह रास्ता लगभग बंद ही है। 11 मार्च को स्टार ग्वानेथ नाम का जहाज यहां से गुजर रहा था, जिस पर मिसाइल से हमले हुए थे।


    15 और 16 मार्च को गुजरे

    मरीन ट्रैकिंग डेटा के आंकड़ों के मुताबिक कम से कम छह जहाज, 15 और 16 मार्च के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरे हैं। इन सभी ने उत्तरी खाड़ी के बेहद महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्र, ईरान के इमाम खुमैनी बंदरगाह पर माल उतारा। एनालिस्ट फर्म केपलर के मुताबिक नौ मार्च के बाद से पोर्ट पर माल उतारने के बाद पांच अन्य जहाज भी होर्मुज से होकर गुजरे हैं। इन सभी ने वैकल्पिक शिपिंग लेन का उपयोग किया। इन जहाजों में से एक, गियाकोमेटी था, जिसमें कनाडाई सोयाबीन ले जाई गई। इसने शुक्रवार को खाड़ी में प्रवेश किया। इनके आने का उद्देश्य घरेलू खाद्य आपूर्ति को बनाए रखना दिखाई देता है। बता दें कि ईरान अपनी खाद्य जरूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खुद पैदा करता है। वहीं, अनाज और तेल बीजों के आयात पर निर्भर रहता है। इनका इस्तेमाल कुकिंग ऑयल और पशु चारे के लिए किया जाता है।


    अनाज स्टोर करने पर जोर

    ग्रेन कंसल्टेंसी सॉइकॉन के मैनेजिंग डायरेक्टर आंद्रे सिजोव के मुताबिक, ईरान हर साल करीब 1.5 मिलियन टन मक्के का उत्पादन करता है। वहीं, ब्राजील से 8 मिलियन से 10 मिलियन टन तक का आयात भी करता है। उन्होंने बताया कि कृषि इस देश के लिए एक बड़ी परेशानी है। वजह, यहां पर पानी की कमी के चलते उत्पादन ठीक नहीं रहता। यह किसानों के लिए एक बड़ी समस्या है। बता दें कि युद्ध से पहले ईरान ने करीब 4 मिलियन टन गेहूं का रणनीतिक भंडार तैयार कर लिया था। यह चार महीने तक उसकी घरेलू मांग को पूरा करने में सक्षम है। कृषि मंत्री गोलामरेजा नूरी गेजेलजेह ने हाल ही में कहा कि बेकरीज को लगभग दो महीने के आटे का आवंटन किया गया है। नागरिकों से अपील की गई है कि वह घबराकर खरीदारी न करें।

    गौरतलब है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध के चलते ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी कर रखी है। बहुत ही सीमित संख्या में यहां से जहाजों का आना-जाना हो रहा है। होर्मुज को लेकर ईरान की सख्ती के चलते वैश्विक व्यापार को बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। गौरतलब है कि दुनिया के तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। अब यहां से सप्लाई बंद होने के चलते तेल और गैस की कीमतों में काफी ज्यादा इजाफा हो रहा है।

  • Afghanistan में एक ही दिन में दो बार आया भूकंप… 4.5 और 4.6 रही तीव्रता

    Afghanistan में एक ही दिन में दो बार आया भूकंप… 4.5 और 4.6 रही तीव्रता


    काबुल।
    अफगानिस्तान (Afghanistan) में शनिवार देर रात 4.6 तीव्रता (Magnitude 4.6) का भूकंप (Earthquake) दर्ज किया गया। यह जानकारी नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (National Centre for Seismology- NCS) ने दी है। एजेंसी के अनुसार, यह भूकंप रात 10:43 बजे (भारतीय समयानुसार) आया और इसकी गहराई करीब 82 किलोमीटर दर्ज की गई। भूकंप (Earthquake) का केंद्र देश के उत्तरी-पूर्वी हिस्से में स्थित था।


    एक ही दिन में दूसरा झटका

    इससे पहले शनिवार सुबह भी 4.5 तीव्रता का एक और भूकंप आया था। उस झटके की गहराई लगभग 130 किलोमीटर बताई गई थी। लगातार आ रहे झटकों से क्षेत्र में सतर्कता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के अनुसार, अफगानिस्तान भूकंप, भूस्खलन और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील है। लंबे समय से संघर्ष और सीमित संसाधनों के कारण यहां की आबादी इन आपदाओं से उबरने में कठिनाइयों का सामना करती है।


    क्यों आता है भूकंप?

    पृथ्वी के अंदर 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं और डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।


    जानें क्या है भूंकप के केंद्र और तीव्रता का मतलब?

    भूकंप का केंद्र उस स्थान को कहते हैं जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का कंपन ज्यादा होता है। कंपन की आवृत्ति ज्यों-ज्यों दूर होती जाती हैं, इसका प्रभाव कम होता जाता है। फिर भी यदि रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है। लेकिन यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंपीय आवृत्ति ऊपर की तरफ है या दायरे में। यदि कंपन की आवृत्ति ऊपर को है तो कम क्षेत्र प्रभावित होगा।


    कैसे मापा जाता है भूकंप की तिव्रता और क्या है मापने का पैमाना?

    भूंकप की जांच रिक्टर स्केल से होती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। रिक्टर स्केल पर भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र यानी एपीसेंटर से मापा जाता है। भूकंप के दौरान धरती के भीतर से जो ऊर्जा निकलती है, उसकी तीव्रता को इससे मापा जाता है। इसी तीव्रता से भूकंप के झटके की भयावहता का अंदाजा होता है।