Category: International

  • ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर चीन का प्रोपेगेंडा: J-10CE अपग्रेड कर राफेल पर फिर किया दावा, वीडियो से मचा विवाद

    ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर चीन का प्रोपेगेंडा: J-10CE अपग्रेड कर राफेल पर फिर किया दावा, वीडियो से मचा विवाद



    नई दिल्ली। चीन की ओर से एक बार फिर अपने लड़ाकू विमान J-10CE को लेकर नए दावे सामने आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय सैन्य और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ के आसपास चीनी मीडिया और कुछ आधिकारिक चैनलों ने इस फाइटर जेट से जुड़ा एक नया वीडियो और अपग्रेड की जानकारी साझा की है।

    दावा किया जा रहा है कि चीन ने अपने मल्टी-रोल फाइटर जेट Chengdu J-10CE में तकनीकी सुधार किए हैं, जिसमें इसके हथियार सिस्टम और कॉम्बैट क्षमता को और उन्नत बनाने की बात कही गई है। इसके साथ ही मीडिया रिपोर्ट्स में लंबी दूरी की मिसाइल PL-15 का भी जिक्र किया गया है, जिसे इस विमान की ताकत के रूप में पेश किया जा रहा है।

    चीनी मीडिया ने अपने प्रसारण में यह भी दावा दोहराया है कि J-10C/CE का उपयोग हाल के संघर्षों में किया गया था और इससे दुश्मन के विमानों को नुकसान पहुंचा था। हालांकि, इन दावों के समर्थन में स्वतंत्र और पुष्ट प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं, और कई विशेषज्ञ इन्हें प्रचार (propaganda) का हिस्सा मानते हैं।

    रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि चीन अपने इस विमान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक सीमित देशों को छोड़कर इसे बड़े स्तर पर कोई नया खरीदार नहीं मिला है। पाकिस्तान इस विमान का प्रमुख उपयोगकर्ता बताया जाता है।

    इसी बीच चीनी रक्षा उद्योग से जुड़े अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा गया है कि J-10CE के नए वर्जन में कई सुधार किए जा रहे हैं ताकि इसकी मल्टी-डोमेन कॉम्बैट क्षमता और बढ़ सके, जिसमें हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री लक्ष्य पर हमले की क्षमता शामिल है।

    कुल मिलाकर यह मामला केवल तकनीकी अपग्रेड का नहीं बल्कि वैश्विक हथियार बाजार और रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा का हिस्सा माना जा रहा है, जहां दावों और वास्तविकता के बीच अंतर को लेकर लगातार बहस जारी है।

  • ईरान के यूरेनियम भंडार पर US की नजर…. ट्रंप बोले- उसके पास गए तो उड़ा दिए जाओगे

    ईरान के यूरेनियम भंडार पर US की नजर…. ट्रंप बोले- उसके पास गए तो उड़ा दिए जाओगे


    वाशिंगटन।
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने रविवार को कहा कि अमेरिका (America) ईरान (Iran) के संवर्धित यूरेनियम भंडार (Enriched Uranium Reserves) पर सख्त नजर रखे हुए है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी उस स्थान के पास पहुंचने की कोशिश करता है तो वाशिंगटन को तुरंत पता चल जाएगा और उसे उड़ा दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि हमें वो किसी न किसी समय मिल ही जाएगा… हम उस पर नजर रख रहे हैं। मैंने ‘स्पेस फोर्स’ नाम की एक संस्था बनाई है और वे उस पर नजर रख रहे हैं। अगर कोई भी उस जगह के पास पहुंचा, तो हमें पता चल जाएगा और हम उसे उड़ा देंगे।

    शैरिल एटकिंसन के साथ बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि हमें वो किसी न किसी समय मिल ही जाएगा… हम उस पर नजर रख रहे हैं। मैंने ‘स्पेस फोर्स’ नाम की संस्था बनाई है और वे उस पर पूरी नजर रखे हुए हैं। अगर कोई भी उस जगह के पास पहुंचा तो हमें पता चल जाएगा और हम उसे उड़ा देंगे। उन्होंने आगे कहा कि स्पेस फोर्स इतना सक्षम है कि अगर कोई अंदर घुसा भी तो उसका नाम, पता और बैज नंबर तक बता सकता है।

    वहीं, ईरान के साथ चल रहे सैन्य संघर्ष पर बोलते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पूरी तरह से सैन्य रूप से पराजित हो चुका है। उन्होंने कहा कि उनके पास न नौसेना बची है, न वायुसेना, न विमानरोधी हथियार और न ही कोई नेता। ट्रंप ने कहा कि ईरान लगातार समझौते करता और तोड़ता रहा, लेकिन अब सैन्य दृष्टि से वह पूरी तरह कमजोर हो गया है। इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर अमेरिका आज ईरान को अकेला छोड़ दे तो उसे अपने ढांचे को दोबारा खड़ा करने में करीब 20 साल लग जाएंगे।

    ईरान में जारी अमेरिकी सैन्य अभियान के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने बताया कि अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हम दो हफ्ते और अभियान जारी रख सकते हैं। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने 70 प्रतिशत लक्ष्यों को नष्ट कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि यह तो बस अंतिम काम होगा… लेकिन अगर हम वह भी नहीं करते तो भी उन्हें पुनर्निर्माण में 20 साल लग जाएंगे।

    इस दौरान ट्रंप ने जोर देकर कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की कभी अनुमति नहीं देंगे और इसे ‘पागलपन’ करार दिया। उन्होंने ओबामा प्रशासन द्वारा 2015 में हस्ताक्षरित संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) का जिक्र करते हुए कहा कि अगर उन्होंने उस समझौते को समाप्त नहीं किया होता तो ईरान अब तक इजराइल और पूरे मध्य पूर्व पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर चुका होता।

  • हंगरी में 16 साल बाद बदली सत्ता… नया PM के शपथ समारोह में सहयोगी सांसदों ने जमकर किया डांस

    हंगरी में 16 साल बाद बदली सत्ता… नया PM के शपथ समारोह में सहयोगी सांसदों ने जमकर किया डांस


    बुडापेस्ट।
    हंगरी (Hungary) के नए प्रधानमंत्री पीटर माग्यार (New Prime Minister Peter Magyar) ने शनिवार को पद की शपथ ली। नई संसद के उद्घाटन सत्र में हुए मतदान के बाद उन्होंने देश की व्यवस्था बदलने का संकल्प लिया। शपथ ग्रहण समारोह (Swearing Ceremony) के दौरान उनके सहयोगी सांसद और ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ ज्सोल्ट हेगेदुस ने अलग अंदाज में डांस कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, 45 वर्षीय पीटर माग्यार ने औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री पद संभाल लिया, जिसके साथ ही विक्टर ओर्बन (Viktor Orban) का 16 साल लंबा शासन समाप्त हो गया। माग्यार की तिस्जा पार्टी ने 12 अप्रैल को हुए संसदीय चुनाव में भारी जीत दर्ज की थी और 199 सीटों वाली संसद में 141 सीटें हासिल की है।

    शपथ ग्रहण के बाद माग्यार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि हंगरी की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह। हंगेरियन होना इतना सुखद कभी नहीं रहा। समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मैं हंगरी पर शासन नहीं करूंगा, बल्कि अपने देश की सेवा करूंगा। उन्होंने हंगरी के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू करने और ऐसी सरकार बनाने का वादा किया जो न सिर्फ सत्ता बल्कि पूरी व्यवस्था को बदल दे।

    इस दौरान मग्यार ने कहा कि मैं यहां इसलिए नहीं खड़ा हूं क्योंकि मैं देश में किसी और से अलग हूं। मैं यहां इसलिए खड़ा हूं क्योंकि लाखों हंगरीवासियों ने बदलाव लाने का फैसला किया है। हमें जो विश्वास मिला है, वह हमारे लिए सम्मान और नैतिक दायित्व दोनों है, लेकिन साथ ही एक अद्भुत एहसास भी है।

    हालांकि माग्यार का भाषण पूरी तरह राजनीतिक था, लेकिन सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य मंत्री पद की दावेदारी रखने वाले ज्सोल्ट हेगेदुस के डांस की हो रही है। अप्रैल में तिस्जा पार्टी की चुनावी रैली में उनके जोशीले नृत्य का वीडियो पहले ही वायरल हो चुका था। शनिवार को उन्होंने संसद की सीढ़ियों पर और डेन्यूब नदी किनारे जमा हजारों समर्थकों के सामने फिर से अपना डांस दोहराया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में माग्यार अन्य सांसदों के साथ तालियां बजाते नजर आ रहे हैं।

    दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि हंगरी में मग्यार की सरकार आने से हंगरी के यूरोपीय संघ के साथ राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आएगा। दरअसल, पूर्व प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण निर्णयों पर बार-बार वीटो किया है, जिनमें हाल में पड़ोसी यूक्रेन को समर्थन देने से संबंधित निर्णय को वीटो करना शामिल है।

  • बांग्लादेश में बड़ा फैसला: चिन्मय दास को जमानत नहीं, वकील हत्या केस में ट्रायल जारी

    बांग्लादेश में बड़ा फैसला: चिन्मय दास को जमानत नहीं, वकील हत्या केस में ट्रायल जारी




    नई दिल्ली। बांग्लादेश से जुड़ा एक बड़ा कानूनी मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां हाईकोर्ट ने हिंदू साधु चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि चटग्राम में चल रहे 2024 के वकील हत्या मामले का ट्रायल अभी शुरुआती और अहम चरण में है, जिसमें गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, इसलिए इस समय जमानत देना उचित नहीं होगा।

    यह मामला चटग्राम के वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या से जुड़ा हुआ है, जिसमें कुल 39 लोगों पर आरोप तय किए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इनमें से कुछ आरोपी हिरासत में हैं, जबकि कई अब भी फरार बताए जा रहे हैं। इसी केस के चलते चिन्मय कृष्ण दास न्यायिक हिरासत में हैं और उन पर देशद्रोह सहित अन्य गंभीर आरोप भी पहले लगाए गए थे।

    अदालत की दो सदस्यीय बेंच ने यह भी कहा कि जब ट्रायल सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा हो और सबूतों व गवाहों की सुनवाई जारी हो, तो जमानत पर विचार करना प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका अस्वीकार की गई है।

    इससे पहले भी चिन्मय कृष्ण दास को एक अन्य मामले में जमानत मिली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी थी। उनकी गिरफ्तारी और उनके संगठन से जुड़े आंदोलनों को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी बहस हुई थी, साथ ही भारत ने भी इस मामले पर चिंता जताई थी।

    कुल मिलाकर यह मामला अब केवल एक कानूनी ट्रायल नहीं रहा, बल्कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक मुद्दों और राजनीतिक तनाव से भी जुड़ता दिख रहा है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।

  • किम जोंग-उन पर हमला हुआ तो तुरंत न्यूक्लियर पलटवार की चेतावनी, उत्तर कोरिया का सख्त रुख बढ़ा

    किम जोंग-उन पर हमला हुआ तो तुरंत न्यूक्लियर पलटवार की चेतावनी, उत्तर कोरिया का सख्त रुख बढ़ा



    नई दिल्ली। उत्तर कोरिया को लेकर हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया गया है कि देश ने अपनी परमाणु नीति में एक बेहद सख्त और नया प्रावधान जोड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन की हत्या होती है या किसी बाहरी हमले में देश की शीर्ष नेतृत्व व्यवस्था प्रभावित होती है, तो उत्तर कोरिया को तत्काल परमाणु जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार दिया जा सकता है।

    इन दावों के अनुसार यह बदलाव उत्तर कोरिया की उस पुरानी रणनीति को और मजबूत करता है जिसमें नेतृत्व और शासन को सीधे देश की “राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्तित्व” से जोड़ा जाता है। कहा जा रहा है कि हाल के वर्षों में दुनिया में कुछ देशों के खिलाफ हुए तेज और लक्षित सैन्य अभियानों ने उत्तर कोरिया की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, खासकर ऐसे हमलों को लेकर जो किसी देश की टॉप लीडरशिप को निशाना बनाते हैं।

    विशेषज्ञों के हवाले से यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया लंबे समय से अपनी सुरक्षा व्यवस्था को बेहद गुप्त और मजबूत बनाए हुए है, लेकिन आधुनिक निगरानी तकनीक और सैटेलाइट सिस्टम की बढ़ती क्षमता ने उसके रणनीतिक चिंता स्तर को और बढ़ा दिया है। इसी कारण वह अपनी परमाणु नीति को और अधिक आक्रामक और “तुरंत जवाबी कार्रवाई” की दिशा में ढाल रहा है।

    हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ये जानकारी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और विश्लेषणों पर आधारित है और किसी स्वतंत्र आधिकारिक दस्तावेज़ से इसकी पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे एक रणनीतिक और राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, न कि पूरी तरह से घोषित और औपचारिक कानून के रूप में।

    कुल मिलाकर यह घटनाक्रम यह दिखाता है कि उत्तर कोरिया अपनी सुरक्षा और नेतृत्व को लेकर पहले से कहीं ज्यादा संवेदनशील और सख्त रुख अपना रहा है, और वह किसी भी संभावित खतरे को अपने अस्तित्व से जोड़कर देख रहा है।

  • Pakistan Army Chief Statement: ऑपरेशन सिंदूर पर बौखलाए असीम मुनीर, हार छिपाने के लिए दिए विवादित बयान

    Pakistan Army Chief Statement: ऑपरेशन सिंदूर पर बौखलाए असीम मुनीर, हार छिपाने के लिए दिए विवादित बयान




    नई दिल्ली। भारत के आतंकवाद विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने भारतीय कार्रवाई को “दो विचारधाराओं की लड़ाई” बताते हुए दावा किया कि पाकिस्तान की रणनीति भारत से बेहतर रही। हालांकि, अपने दावों के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया।

    दरअसल, पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया था। भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। भारतीय कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकियों के मारे जाने का दावा किया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिन तक तनावपूर्ण सैन्य स्थिति बनी रही।

    रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान असीम मुनीर ने कहा कि 6 से 10 मई के बीच भारत ने पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन किया, जिसका उनकी सेना ने “करारा जवाब” दिया। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने भारत के 26 ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया।

    पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने युद्धविराम को लेकर भी बड़ा दावा करते हुए कहा कि भारत ने अमेरिका के जरिए सीजफायर की पहल की थी। हालांकि भारत पहले ही साफ कर चुका है कि सैन्य तनाव कम करने का फैसला दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हॉटलाइन बातचीत के जरिए हुआ था।

    भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि उसका लक्ष्य केवल सीमा पार से संचालित आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करना है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर का मकसद आतंकवाद के ढांचे को कमजोर करना और भविष्य के हमलों को रोकना था।

    इस बीच पाकिस्तान ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने की बात भी कही है। असीम मुनीर ने तकनीक आधारित युद्ध, रॉकेट फोर्स और नई पनडुब्बियों का जिक्र करते हुए सेना के आधुनिकीकरण की बात कही। हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उसका रुख पहले की तरह सख्त रहेगा।

    ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारत ने फिर दोहराया कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और आतंकवाद के खिलाफ हर हमले का जवाब मजबूती से दिया जाएगा।

  • Pakistan US Relations: ‘पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता’, पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन का बड़ा बयान

    Pakistan US Relations: ‘पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता’, पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन का बड़ा बयान


    नई दिल्ली। अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में हाल के महीनों में भले ही नरमी और नजदीकी देखने को मिली हो, लेकिन भरोसे को लेकर सवाल अब भी कायम हैं। इसी बीच पेंटागन के पूर्व अधिकारी और मिडिल ईस्ट मामलों के विशेषज्ञ Michael Rubin ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करना चाहिए और भविष्य में इस्लामाबाद से किए गए किसी भी वादे को निभाने के लिए वॉशिंगटन बाध्य नहीं होगा।

    माइकल रुबिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश नीति में पाकिस्तान को कभी स्थायी सहयोगी के रूप में नहीं देखा गया। उनके मुताबिक, वॉशिंगटन ने हमेशा पाकिस्तान को केवल रणनीतिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया और मौजूदा नेतृत्व भी उसी नीति का हिस्सा है।

    रुबिन ने कहा कि Donald Trump प्रशासन का कार्यकाल खत्म होने के बाद चाहे रिपब्लिकन सरकार आए या डेमोक्रेट, दोनों इस बात पर सहमत होंगे कि पाकिस्तान पूरी तरह भरोसेमंद साझेदार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पाक सेना प्रमुख Asim Munir से किए गए किसी भी वादे को निभाने के लिए खुद को मजबूर महसूस नहीं करेगा।

    दरअसल, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में बदलाव देखने को मिला है। ट्रंप कई मौकों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और आर्मी चीफ असीम मुनीर की तारीफ कर चुके हैं। इतना ही नहीं, ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और वार्ता में भी अमेरिका ने पाकिस्तान की भूमिका को अहम बताया है।

    हालांकि, पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। अमेरिका को शक था कि आतंकी संगठन अल-कायदा सरगना Osama bin Laden को पाकिस्तान में पनाह मिली हुई है। इसके बाद साल 2011 में अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान के एबटाबाद में ऑपरेशन चलाकर ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे।

    स्थिति यह रही कि साल 2006 के बाद से किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया। वहीं 2011 के बाद लंबे समय तक अमेरिका के बड़े अधिकारी भी इस्लामाबाद जाने से बचते रहे। हालांकि हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने ईरान वार्ता के सिलसिले में पाकिस्तान का दौरा किया, जिसे दोनों देशों के बीच नए समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है।

  • खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस चौकी पर बड़ा आतंकी हमला, 21 जवानों की मौत; अस्पतालों में इमरजेंसी

    खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस चौकी पर बड़ा आतंकी हमला, 21 जवानों की मौत; अस्पतालों में इमरजेंसी


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में शनिवार रात बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसमें कम से कम 21 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। हमला बन्नू जिले की एक पुलिस चौकी पर किया गया, जहां पहले विस्फोटकों से भरी कार में जोरदार धमाका किया गया और उसके बाद घात लगाकर फायरिंग शुरू कर दी गई। इस हमले के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई और सरकारी अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने पहले सुरक्षा चौकी के पास बारूद से भरी गाड़ी को उड़ा दिया। धमाका इतना तेज था कि पुलिस पोस्ट का बड़ा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया। इसके बाद हथियारबंद विद्रोहियों ने चौकी पर धावा बोल दिया और भारी गोलीबारी शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि हमले के दौरान ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है।

    स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, धमाके के बाद जब अतिरिक्त पुलिस बल और राहत टीमें मौके पर पहुंचीं, तब हमलावरों ने उन पर भी घात लगाकर हमला कर दिया। इस वजह से मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ी। कई घायल पुलिसकर्मियों को बन्नू के सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां इमरजेंसी लागू कर दी गई है।

    इस हमले की जिम्मेदारी ‘इत्तेहाद-उल-मुजाहिदीन पाकिस्तान’ नाम के हथियारबंद संगठन ने ली है। बन्नू जिला अफगानिस्तान सीमा से लगा हुआ है और लंबे समय से आतंकियों तथा विद्रोही गुटों की गतिविधियों का केंद्र माना जाता रहा है। आशंका जताई जा रही है कि हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद सीमा पार अफगानिस्तान की ओर भाग निकले।

    घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में पूरी पुलिस चौकी तबाह नजर आई। इलाके में ईंटों, जली हुई गाड़ियों और मलबे के ढेर दिखाई दिए। धमाके से आसपास के रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचा और कुछ आम नागरिकों के घायल होने की खबर है।

    सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेरकर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। पाकिस्तान में हाल के महीनों में सुरक्षा बलों पर हमलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील इलाकों में। इस हमले के बाद अफगान सीमा से जुड़े इलाकों में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है।

  • पाकिस्तान में खूनी आतंकी हमला: बन्नू पुलिस चौकी पर आत्मघाती विस्फोट, 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत

    पाकिस्तान में खूनी आतंकी हमला: बन्नू पुलिस चौकी पर आत्मघाती विस्फोट, 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में आतंकियों ने पुलिस चौकी पर बड़ा आत्मघाती हमला कर दिया। विस्फोटकों से भरी गाड़ी से किए गए धमाके और उसके बाद हुई भारी फायरिंग में कम से कम 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आतंकियों ने पहले विस्फोटकों से लदी गाड़ी को पुलिस पोस्ट की ओर बढ़ाया। सुरक्षा बलों ने जब वाहन को रोकने की कोशिश करते हुए फायरिंग की, तभी जोरदार धमाका हो गया। धमाका इतना भीषण था कि पुलिस चौकी की इमारत पूरी तरह तबाह हो गई और आसपास के कई घरों की छतें भी गिर गईं। कई सुरक्षाकर्मी मलबे में दब गए, जिन्हें बाद में रेस्क्यू टीमों ने बाहर निकाला।

    हमले के तुरंत बाद बड़ी संख्या में आतंकियों ने पुलिस पोस्ट पर धावा बोल दिया, जिसके बाद दोनों ओर से लंबे समय तक गोलीबारी चलती रही। इलाके को घेरकर सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि कितने आतंकी मारे गए या गिरफ्तार किए गए हैं।

    खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल अफरीदी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे कायराना हरकत बताया है। उन्होंने घायलों के बेहतर इलाज और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

    गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में आतंकी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में दक्षिण वजीरिस्तान में भी सुरक्षा बलों ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी लेकर चेकपोस्ट की तरफ बढ़ रहे एक संदिग्ध आतंकी को मार गिराया था।

    हालिया हमले की जिम्मेदारी अभी किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन पाकिस्तान सरकार पहले भी प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर ऐसे हमलों के आरोप लगाती रही है। लगातार बढ़ते आतंकी हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और सरकार की आतंकवाद विरोधी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, बोला- तेल टैंकरों पर हमला हुआ तो US ठिकानों और जहाजों पर बरसेंगी मिसाइलें

    ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, बोला- तेल टैंकरों पर हमला हुआ तो US ठिकानों और जहाजों पर बरसेंगी मिसाइलें



    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर फारस की खाड़ी या Strait of Hormuz में ईरानी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर बड़ा हमला किया जाएगा।

    IRGC की नौसेना इकाई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर दावा किया कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी जहाज अब ईरानी मिसाइलों और ड्रोन की रेंज में हैं। इसके बाद IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने भी कहा कि उनके ड्रोन और मिसाइल सिस्टम अमेरिकी ठिकानों पर “लॉक” किए जा चुके हैं और अब सिर्फ आदेश का इंतजार है।

    इस बीच The Wall Street Journal की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान को 14 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भेजा है, जिस पर तेहरान के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने उम्मीद जताई थी कि जल्द जवाब मिल सकता है, लेकिन ईरान ने फिलहाल किसी समयसीमा को मानने से इनकार कर दिया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा जारी है और जवाब “उचित समय” पर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी बाहरी दबाव या समयसीमा के तहत फैसला नहीं करेगा।

    उधर, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। दक्षिणी Lebanon में इजराइली हमलों और Hezbollah की जवाबी कार्रवाई ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार भी प्रभावित हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

    कुवैत ने भी अपने एयरस्पेस में संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की पुष्टि की है, जबकि कतर से पाकिस्तान जा रहे एक गैस जहाज के होर्मुज स्ट्रेट पार करने के दौरान कुछ समय तक उसका सिग्नल गायब रहने से क्षेत्र में चिंता और बढ़ गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।