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  • 1968 का माई लाई नरसंहार: वियतनाम युद्ध की वह घटना जिसने दुनिया को झकझोर दिया

    1968 का माई लाई नरसंहार: वियतनाम युद्ध की वह घटना जिसने दुनिया को झकझोर दिया

    नई दिल्ली । वियतनाम युद्ध के दौरान 16 मार्च 1968 को दक्षिण वियतनाम के छोटे गांव My Lai में अमेरिकी सेना द्वारा किए गए नरसंहार ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। अमेरिकी सैनिकों को यह सूचना मिली थी कि गांव में वियतकांग विद्रोही छिपे हुए हैं। इसी आधार पर चार्ली कंपनी को तलाशी अभियान पर भेजा गया जिसका नेतृत्व विलियम कैलीकर रहे थे।

    जब सैनिक गांव पहुंचे तो वहां कोई संगठित प्रतिरोध नहीं था। बावजूद इसके उन्होंने महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों समेत सैकड़ों निहत्थे नागरिकों को मार डाला। कई घरों को जला दिया गया और ग्रामीणों को समूहों में खड़ा कर गोली मारी गई। बाद में सामने आए आंकड़ों के अनुसार लगभग 500 नागरिक मारे गए।

    शुरुआत में अमेरिकी सेना ने इस अभियान को सफल सैन्य कार्रवाई बताया। हालांकि कुछ सैनिकों और पत्रकारों की कोशिशों से धीरे धीरे सच्चाई सामने आई। विशेषकर अमेरिकी सैनिक ह्यू थॉम्पसन जूनियर की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। वे हेलीकॉप्टर से इलाके का निरीक्षण कर रहे थे और निहत्थे नागरिकों पर हो रही गोलीबारी को देखकर हस्तक्षेप किया। उन्होंने कई ग्रामीणों को बचाने की कोशिश भी की।

    1969 में अमेरिकी पत्रकार सीमोर हर्षकी रिपोर्ट के बाद माई लाई नरसंहार वैश्विक सुर्खियों में आया। अमेरिका में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और वियतनाम युद्ध के खिलाफ जनता की नाराजगी बढ़ी।जांच के बाद कई सैनिकों पर मुकदमा चला लेकिन केवल विलियम कैली को दोषी ठहराया गया। उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई हालांकि बाद में यह सजा कम कर दी गई और वे कुछ वर्षों में रिहा हो गए। माई लाई नरसंहार न केवल युद्ध अपराध के प्रतीक के रूप में इतिहास में दर्ज है बल्कि यह उस दौर के मानवाधिकार संकट और युद्ध की क्रूरता को भी उजागर करता है।

  • दुबई एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले के बाद सभी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित, कोच्चि फ्लाइट वापस लौटी

    दुबई एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले के बाद सभी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित, कोच्चि फ्लाइट वापस लौटी

    नई दिल्ली । दुबई एयरपोर्ट ने सोमवार को सुरक्षा कारणों के चलते सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। यह कदम तब उठाया गया जब एयरपोर्ट के पास एक ड्रोन का ईंधन टैंक से टकराने के बाद आग लग गई। दुबई एयरपोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है। एयरपोर्ट ने यात्रियों को अपनी एयरलाइन से ताजा उड़ान अपडेट लेने की सलाह दी।

    दुबई नागरिक उड्डयन प्राधिकरण और मीडिया कार्यालय ने भी कहा कि आग बुझाने और सुरक्षा उपायों को लागू करने के बाद किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं है। आपातकालीन टीम और नागरिक सुरक्षा दल तुरंत तैनात किए गए।

    इस घटना के चलते सोमवार को कोच्चि से दुबई जा रही एमिरेट्स की फ्लाइट ईके533 को वापस लौटने का निर्देश दिया गया। सीआईएएल के प्रवक्ता ने बताया कि विमान में 325 यात्री सवार थे और एयरपोर्ट अचानक बंद होने की वजह से विमान को कोच्चि लौटना पड़ा।

    सुरक्षा और आपातकालीन उपायों के बावजूद संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में छह लोगों की मौत की सूचना दी है। इनमें चार नागरिक और दो सैनिक शामिल हैं। सैनिकों की मौत हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई जो तकनीकी खराबी के कारण हुई।

    दुबई एयरपोर्ट ने यात्रियों से अपील की है कि वे उड़ानों और सुरक्षा संबंधी जानकारी के लिए आधिकारिक चैनलों से अपडेट लेते रहें। अधिकारियों ने कहा कि आगे की जानकारी उपलब्ध होते ही सभी को सूचित किया जाएगा।

  • ट्रंप का आरोप: अमेरिकी अदालतें रिपब्लिकन के खिलाफ पक्षपाती, जजों की सोच ने फैसलों को प्रभावित किया

    ट्रंप का आरोप: अमेरिकी अदालतें रिपब्लिकन के खिलाफ पक्षपाती, जजों की सोच ने फैसलों को प्रभावित किया


    नई दिल्ली:  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अदालतों पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका जरूरत से ज्यादा राजनीतिक हो चुकी है और कई मामलों में जजों की सोच फैसलों से अधिक प्रभाव डालती है। ट्रंप का आरोप है कि अदालतें अक्सर रिपब्लिकन नेताओं और उनके साथ जुड़े मामलों में अनुचित रुख अपनाती हैं और कई बार ऐसे लोगों को संरक्षण देती दिखाई देती हैं जिन्हें नहीं बचाया जाना चाहिए।

    इसके साथ ही ट्रंप ने वॉशिंगटन डीसी में स्थित फेडरल रिजर्व कॉम्प्लेक्स के नवीनीकरण प्रोजेक्ट में बजट और समय की अनियमितताओं की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट बजट से कहीं अधिक खर्च कर रहा है और तय समय से पीछे चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले की पूरी पारदर्शी जांच होनी चाहिए और प्रोजेक्ट से जुड़े कॉन्ट्रैक्टरों की जिम्मेदारी तय की जाए।

    ट्रंप ने विशेष रूप से जज जेम्स बोसबर्ग पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनके और रिपब्लिकन नेताओं से जुड़े मामलों में पक्षपातपूर्ण रुख अपनाया। ट्रंप ने कहा कि बोसबर्ग ने डी.सी. सर्किट में बेगुनाह रिपब्लिकन को दोषी ठहराने का समर्थन किया और अब फेडरल रिजर्व की वित्तीय गड़बड़ी की जांच रोक रहे हैं। उन्होंने जज बोसबर्ग को ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम (टीडीएस) के उच्च स्तर से पीड़ित बताया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने अदालतों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक एजेंडे से दूर रहकर केवल कानून और न्याय के सिद्धांतों पर ध्यान दें। ट्रंप ने बोसबर्ग को उनके और रिपब्लिकन से जुड़े सभी केसों से हटाने और उन पर गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई लेने की मांग की।

    ट्रंप के बयान ने अमेरिकी न्यायपालिका और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि उन्होंने न्यायिक निष्पक्षता और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

  • रूसी तेल को लेकर अमेरिका पर ईरान का तंज, कहा- 'भारत समेत दुनिया के सामने भीख मांग रहा अमेरिका'

    रूसी तेल को लेकर अमेरिका पर ईरान का तंज, कहा- 'भारत समेत दुनिया के सामने भीख मांग रहा अमेरिका'


    तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्‍बास अराघची (Abbas Araghchi) ने रूसी तेल के मुद्दे पर अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो अमेरिका (United States) पहले भारत समेत कई देशों पर रूस (Russia) से तेल आयात रोकने के लिए दबाव बना रहा था, वही अब दुनिया के देशों से रूसी कच्चा तेल खरीदने की गुहार लगा रहा है।

    अराघची ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर की। उन्होंने अपनी पोस्ट में Financial Times की एक रिपोर्ट भी साझा की, जिसमें कहा गया है कि ईरान से जुड़े युद्ध ने रूस की तेल इंडस्ट्री को बड़ा फायदा पहुंचाया है।

    अमेरिका पर साधा निशाना

    अराघची ने पोस्ट में लिखा कि अमेरिका ने महीनों तक India को रूस से तेल आयात बंद करने के लिए धमकाया। लेकिन ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्ध के बाद अब White House दुनिया के देशों—जिनमें भारत भी शामिल है—से रूसी कच्चा तेल खरीदने की अपील कर रहा है।
    उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप को लगा था कि ईरान के खिलाफ कथित अवैध युद्ध का समर्थन करने से उसे रूस के खिलाफ अमेरिका का साथ मिलेगा।

    रूसी तेल खरीदने पर अस्थायी राहत

    अराघची की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने हाल ही में कहा कि अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर लगे प्रतिबंध में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है।
    उन्होंने बताया कि वित्त विभाग ने 30 दिनों के लिए उस रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी है जो पहले से समुद्र में मौजूद है। कुछ दिन पहले भारत को भी इसी तरह की राहत दी गई थी।

    बेसेंट के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखना और ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना है। उन्होंने कहा कि इससे रूस को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि जिस तेल को मंजूरी दी गई है वह पहले से ही समुद्र में है।

    ईरान युद्ध से रूस को बड़ा फायदा

    वहीं Financial Times की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान से जुड़े युद्ध और तेल संकट के कारण रूस को रोजाना लगभग 150 मिलियन डॉलर (करीब 1389 करोड़ रुपये) की अतिरिक्त कमाई हो रही है। इसकी एक वजह यह भी बताई जा रही है कि ईरान ने Strait of Hormuz को बंद कर दिया है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्ष के शुरुआती 12 दिनों में ही रूस ने तेल निर्यात से लगभग 1.3 से 1.9 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय अर्जित की। यदि मौजूदा कीमतें इसी तरह बनी रहती हैं तो महीने के अंत तक Moscow को 3.3 अरब से 5 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।

  • नेपाल में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों में भारी वृद्धि, जानें कितनी बढ़ी कीमतें

    नेपाल में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों में भारी वृद्धि, जानें कितनी बढ़ी कीमतें


    काठमांडू।
    ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध (Iran and US-Israeli War) के साथ खाड़ी देशों की वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए नेपाल (Nepal) में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी वृद्धि (Increase Petroleum Products Prices) की घोषणा की गई है.

    नेपाल ऑयल निगम की रविवार देर रात तक चली बैठक में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया गया. निगम द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और आपूर्ति प्रबंधन में आ रही चुनौतियों के कारण यह निर्णय लिया गया है. नई दरें आज रात 12 बजे से लागू कर दी गई हैं।

    नए मूल्य समायोजन के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 31 रुपये प्रति लीटर, डीजल में 54 रुपये प्रति लीटर तथा एलपीजी गैस में 296 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है।

    मूल्य वृद्धि के बाद अब पेट्रोल की कीमत 188 रुपये प्रति लीटर, डीजल की कीमत 196 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी गैस का मूल्य 2,126 रुपये प्रति सिलेंडर तय किया गया है। निगम ने कहा है कि हाल के समय में मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

    प्रेस विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि नेपाल जैसे पेट्रोलियम उत्पादन न करने वाले देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मूल्य वृद्धि का सीधा असर पड़ता है. इससे पहले भी वैश्विक परिस्थितियों के कारण आपूर्ति प्रणाली प्रभावित हुई थी और निगम को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को भुगतान करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था.

    निगम ने मौजूदा समय में भी नेपाल को निरंतर पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति जारी रखने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का आभार व्यक्त किया है। नेपाल ऑयल निगम ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में यह समायोजन किया गया है, ताकि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखा जा सके।

  • UAE में भ्रामक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में 35 लोग गिरफ्तार… 19 भारतीय भी शामिल

    UAE में भ्रामक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में 35 लोग गिरफ्तार… 19 भारतीय भी शामिल


    दुबई।
    संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.- UAE) में सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी वीडियो (Misleading and Fake Videos) पोस्ट करने के आरोप में 35 लोगों की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया है। इन आरोपियों में 19 भारतीय नागरिक (19 Indian Citizens) भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन लोगों ने क्षेत्रीय तनाव के बीच इंटरनेट पर ऐसी सामग्री साझा की जिससे लोगों में भ्रम और डर फैल सकता था।

    यूएई की आधिकारिक समाचार एजेंसी WAM के अनुसार, सभी आरोपियों को तेज सुनवाई (फास्ट-ट्रैक ट्रायल) के लिए अदालत में पेश किया जाएगा।


    डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी के बाद कार्रवाई

    यूएई के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की सख्त निगरानी के दौरान यह सामने आया कि कुछ लोग झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाकर सार्वजनिक व्यवस्था और देश की स्थिरता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। जांच में पाया गया कि आरोपी तीन अलग-अलग समूहों में काम कर रहे थे और उन्होंने अलग-अलग तरीकों से भ्रामक सामग्री पोस्ट की।


    पहला समूह: असली वीडियो के साथ भ्रामक दावे

    पहले समूह के 10 लोगों ने वास्तविक वीडियो क्लिप पोस्ट किए, जिनमें देश के हवाई क्षेत्र में मिसाइलों के गुजरने या उन्हें रोकने के दृश्य दिखाए गए थे। इन वीडियो के साथ ऐसे कमेंट और साउंड इफेक्ट जोड़े गए जिससे यह लगे कि देश पर हमला हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार इससे लोगों में डर और घबराहट फैल सकती थी। इस समूह में 5 भारतीय, 1 पाकिस्तानी, 1 नेपाली, 2 फिलीपीन नागरिक और 1 मिस्र का नागरिक शामिल है।


    दूसरा समूह: एआई से बनाए गए फर्जी वीडियो

    दूसरे समूह के 7 लोगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके विस्फोट, मिसाइल हमलों और आग लगने जैसे नकली दृश्य तैयार किए। इन वीडियो में राष्ट्रीय झंडे और तारीखें भी जोड़ी गईं ताकि लोग इन्हें असली समझ लें। कई वीडियो ऐसे थे जिन्हें दूसरे देशों की घटनाओं से जोड़कर यूएई का बताया गया। इस समूह में पांच भारतीय, एक नेपाली और एक बांग्लादेशी शामिल हैं।


    तीसरा समूह: दूसरे देश की सैन्य कार्रवाई का प्रचार

    तीसरे समूह के 6 लोगों पर एक ऐसे देश की सैन्य कार्रवाई और नेतृत्व की तारीफ करते हुए सामग्री साझा करने का आरोप है जिसे यूएई ने शत्रुतापूर्ण राज्य बताया है। इस समूह में पांच भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल है। इसके अलावा दो और भारतीयों पर भी इसी तरह के आरोप लगाए गए हैं।


    पहले भी 10 लोगों की गिरफ्तारी का आदेश

    इससे पहले शनिवार को भी 10 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, जिनमें दो भारतीय शामिल थे। अभियोजन पक्ष ने सभी आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और उन्हें हिरासत में भेज दिया गया है।


    सख्त सजा का प्रावधान

    यूएई के कानून के अनुसार, इस तरह के अपराधों में कम से कम एक साल की जेल और एक लाख दिरहम (लगभग 22 लाख रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अटॉर्नी जनरल अल शम्सी ने कहा कि हालिया क्षेत्रीय तनाव का फायदा उठाकर झूठी जानकारी फैलाने की कोशिश की गई, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को खतरा हो सकता था।

  • जंग के बीच भारत के लिए रवाना हुआ तेल टैंकर ‘जग लाडकी’, कच्चा तेल लेकर सुरक्षित निकला फुजैरा से

    जंग के बीच भारत के लिए रवाना हुआ तेल टैंकर ‘जग लाडकी’, कच्चा तेल लेकर सुरक्षित निकला फुजैरा से



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह से भारतीय ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर ‘जग लाडकी’ सुरक्षित रूप से रवाना हो गया है। सरकार ने रविवार को जानकारी दी कि हमले के बावजूद जहाज ने सफलतापूर्वक तेल लोड किया और भारत की ओर प्रस्थान कर गया।

    सरकार के मुताबिक यह जहाज करीब 80,800 टन मुर्बन कच्चा तेल लेकर भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे फुजैरा से निकला। जहाज पर मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। यह युद्ध प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने वाला चौथा भारतीय ध्वज वाला जहाज है।

    हमले के दौरान कर रहा था तेल लोडिंग
    सरकारी जानकारी के अनुसार 14 मार्च 2026 को जब ‘जग लाडकी’ फुजैरा के सिंगल प्वाइंट मूरिंग पर कच्चा तेल लोड कर रहा था, उसी समय फुजैरा के तेल टर्मिनल पर हमला हुआ था। इसके बावजूद जहाज ने अपनी लोडिंग प्रक्रिया पूरी की और सुरक्षित तरीके से भारत के लिए रवाना हो गया।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित
    माना जा रहा है कि इस जहाज का सुरक्षित निकलना भारत के लिए अहम है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा है। यह मार्ग खाड़ी देशों से तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख रास्ता माना जाता है।

    दो गैस टैंकर भी पार कर चुके हैं क्षेत्र
    शनिवार को भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भी युद्ध प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुके हैं। इन जहाजों में लगभग 92,712 टन एलपीजी लदा हुआ है। ‘शिवालिक’ 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पहुंचेगा, जबकि ‘नंदा देवी’ 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है। ये दोनों जहाज उन 24 जहाजों में शामिल थे, जो क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे।

    कुल 28 जहाज फंसे थे क्षेत्र में
    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में 24 जहाज और पूर्वी हिस्से में 4 जहाज फंसे हुए थे। पूर्वी हिस्से में फंसे जहाजों में भारतीय ध्वज वाला टैंकर ‘जग प्रकाश’ भी शामिल था। ‘जग प्रकाश’ ने शुक्रवार को इस मार्ग को पार कर लिया। यह जहाज ओमान के सोहार बंदरगाह से पेट्रोल लेकर तंजानिया के तांगा बंदरगाह की ओर रवाना हुआ है और इसके 21 मार्च तक वहां पहुंचने की उम्मीद है।

    भारतीय नाविक सुरक्षित
    सरकार ने बताया कि इस क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाज और नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और समुद्री गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। फिलहाल फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज हैं, जिनमें 611 भारतीय नाविक सवार हैं।

    ऊर्जा जरूरतों पर असर
    भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल, 50% प्राकृतिक गैस और लगभग 60% एलपीजी आयात करता है। संघर्ष से पहले भारत के कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आता था। वहीं गैस का लगभग 30% और एलपीजी का 85 से 90% हिस्सा सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों से आयात किया जाता था।

    तनाव के चलते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में भारत ने रूस जैसे देशों से तेल खरीदकर कुछ कमी की भरपाई की है। वहीं औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए गैस आपूर्ति घटाई गई है और होटल व रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलने वाली एलपीजी में भी कटौती की गई है।

    सरकार की निगरानी जारी
    सरकार के अनुसार जहाजरानी महानिदेशालय जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर हालात पर लगातार नजर रख रहा है। नियंत्रण कक्ष सक्रिय होने के बाद अब तक नाविकों और उनके परिवारों से जुड़े करीब 2,995 फोन कॉल और 5,357 से अधिक ईमेल का जवाब दिया जा चुका है। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र से अब तक 276 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाने में भी मदद की गई है, जिनमें पिछले 24 घंटों में लौटे 23 नाविक शामिल हैं।

  • नेपाल में तीर्थयात्रियों की बस खाई में गिरी, 7 की मौत, 7 घायल

    नेपाल में तीर्थयात्रियों की बस खाई में गिरी, 7 की मौत, 7 घायल


    नई दिल्ली । नेपाल के गंडकी प्रांत के गोरखा जिले में शनिवार रात एक दुखद सड़क हादसा हुआ जिसमें भारतीय तीर्थयात्रियों से भरी बस खाई में गिर गई। मनाकामना मंदिर से दर्शन कर लौट रही इस बस में 7 लोगों की मौत हो गई और 7 घायल हो गए। हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन देर रात तक जारी रहा।

    पुलिस के अनुसार श्रद्धालुओं को लेकर जा रही माइक्रोबस मनाकामना मंदिर से तनहुन जिले के अंबुखैरेनी इलाके की ओर जा रही थी तभी सड़क फिसलने के कारण लगभग 200 फीट गहरी खाई में गिर गई। बस में एक दर्जन से ज्यादा यात्री सवार थे। घायल यात्रियों को भरतपुर स्थित चितवन मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए भेजा गया।

    गोरखा जिला ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रमुख सूरज अर्याल ने बताया कि मृतकों में दो महिलाएं और पांच पुरुष शामिल हैं सभी भारतीय नागरिक हैं। जिला पुलिस प्रमुख भरत बहादुर बीके ने मृतकों की पहचान मुथु कुमार (58) अनामालिक (58) मीनाक्षी (59) शिवगामी (53) विजयल (57) मीना (58) और तमिलरसी (60) के रूप में की। हादसे में बस का ड्राइवर सुरक्षित बच गया जबकि उसका सहायक घायल हुआ।

    नेपाल में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या और गंभीरता पिछले वर्षों में लगातार बढ़ी है। विश्व बैंक की स्टडी के अनुसार 2007 के बाद नेपाल में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाला आर्थिक नुकसान तीन गुना बढ़ चुका है और अब यह देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) का लगभग 1.5% है। सड़क हादसों में मरने वालों में 70% से अधिक पैदल यात्री साइकिल सवार और मोटरसाइकिल चालक जैसे संवेदनशील रोड यूजर शामिल होते हैं।

    नेपाल में पहाड़ी इलाकों में संकरी और खराब सड़कें भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाएं भूकंप और भूगर्भीय अस्थिरता परिवहन व्यवस्था की सीमाएं और वाहन ओवरलोडिंग जैसी वजहों से सड़क हादसे आम हैं। उदाहरण के तौर पर फरवरी में धादिंग जिले में एक पर्यटक बस 200 मीटर गहरी खाई में गिर गई थी जिसमें 19 लोगों की मौत हुई थी और 25 घायल हुए थे।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि नेपाल का ज्यादातर क्षेत्र पहाड़ी और दुर्गम है। सड़क किनारों पर गहरी खाइयां और ढलान होने के कारण थोड़ी सी गलती या खराब मौसम में वाहन आसानी से फिसल सकते हैं। संकरी घुमावदार सड़कें सुरक्षा दीवारों की कमी भूस्खलन और मिट्टी खिसकने जैसी घटनाएं हादसों की संभावना बढ़ाती हैं। पुराने वाहन ओवरलोडिंग और ड्राइवरों का अपर्याप्त प्रशिक्षण भी जोखिम बढ़ाता है।

    सरल शब्दों में कहें तो नेपाल में पहाड़ खराब सड़कें भारी बारिश और कमजोर बुनियादी ढांचा मिलकर सड़क हादसों की संख्या और गंभीरता को बढ़ाते हैं। मनाकामना मंदिर से लौटते समय हुए इस दुखद हादसे ने एक बार फिर नेपाल की सड़क सुरक्षा की चिंताओं को उजागर किया है।

  • ईरान ने खाड़ी देशों और तेल जहाजों को भी निशाना बनाया, आईडीएफ प्रवक्ता ने जताया गंभीर खतरा

    ईरान ने खाड़ी देशों और तेल जहाजों को भी निशाना बनाया, आईडीएफ प्रवक्ता ने जताया गंभीर खतरा


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष से पूरे इलाके में तनाव चरम पर है। इस बीच इजरायल डिफेंस फोर्स आईडीएफ के प्रवक्ता बीजी एफी डेफ्रिन ने आईएएनएस को हालात की गंभीरता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हालिया संघर्ष का मुख्य मकसद ईरान की न्यूक्लियर और मिसाइल क्षमताओं को नियंत्रित करना है।

    आईडीएफ प्रवक्ता ने कहा हमने दो हफ्ते पहले इजरायल पर संभावित खतरे को हटाने के लिए कार्रवाई की। ईरान ने वर्षों से अपनी न्यूक्लियर क्षमता विकसित की है और जून में किए गए हमले के बाद वे इसे फिर से शुरू कर रहे थे। उनका प्रयास यह था कि न्यूक्लियर प्रोजेक्ट को जमीन के नीचे छिपाया जाए ताकि इजरायल और अमेरिका के बमों से बचा जा सके। यह हमारे लिए गंभीर खतरा है।

    एफी डेफ्रिन ने ईरान के मिसाइल प्रोजेक्ट का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार ईरान हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्चर बना रहा था जिनकी रेंज 2 000 से 3 000 किलोमीटर तक थी। इन मिसाइलों का उद्देश्य इजरायल पर हमला करना था। वे महीने में सैकड़ों हथियार तैयार करने की योजना बना रहे थे और यह स्तर हमारे लिए बर्दाश्त के बाहर था उन्होंने कहा।

    प्रवक्ता ने कहा कि अब ईरान ने खाड़ी देशों और कमर्शियल तेल जहाजों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। वे अपने पुराने मित्र देशों ओमान यूएई बहरीन और सऊदी अरब पर हमला कर रहे हैं जिन्होंने ईरान के साथ कभी बुरा नहीं किया। इनके हमले मिलिट्री टारगेट पर नहीं बल्कि सिविलियन टारगेट जैसे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और बुर्ज खलीफा पर हो रहे हैं। यह केवल उनकी असली प्रवृत्ति दिखाता है।

    एफी डेफ्रिन ने जोर देकर कहा कि आईडीएफ इस स्थिति को गंभीरता से देख रहा है। पड़ोसी देशों के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं और यह इतिहास का एक मौका है। हमारा लक्ष्य पूरे इलाके में स्थायी शांति बनाना है। ईरान केवल इजरायल के लिए खतरा नहीं है बल्कि यह एक क्षेत्रीय समस्या है जिसे सुलझाना जरूरी है।

    आईडीएफ प्रवक्ता की यह प्रतिक्रिया यह स्पष्ट करती है कि इजरायल ईरानी न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रमों साथ ही उनके बढ़ते आक्रामक रवैये को लेकर सतर्क है। साथ ही खाड़ी देशों और वैश्विक तेल परिवहन पर ईरानी हमलों को गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

    इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया में तनाव और सुरक्षा खतरे केवल द्विपक्षीय नहीं हैं बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण हैं। आईडीएफ के अनुसार इलाके में शांति बनाए रखना और पड़ोसी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब उनकी प्राथमिकता बन गई है।

  • व्हाइट हाउस के बाहर ईरान विरोधी रैली, अमेरिकी कार्रवाई पर इरानियों ने जताया उत्साह

    व्हाइट हाउस के बाहर ईरान विरोधी रैली, अमेरिकी कार्रवाई पर इरानियों ने जताया उत्साह


    नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की हालिया कार्रवाई को लेकर कई लोग खुलेआम समर्थन जता रहे हैं। इस समर्थन और ईरानी खामेनेई शासन का विरोध करने के लिए प्रदर्शनकारी व्हाइट हाउस के बाहर एक बड़ी रैली में जुटे। रैली में शामिल अधिकांश लोग कभी ईरान में रहते थे और उन्होंने अमेरिकी मीडिया को बताया कि वे ट्रंप के हमलों को 1979 से देश पर राज कर रहे इस्लामिक शासन को गिराने का अवसर मानते हैं।

    प्रदर्शनकारी साइरस कियान ने कहा कि उन्होंने अपनी पहली 25 साल की जिंदगी ईरान में बिताई। उन्होंने जोर देकर कहा अगर ट्रंप आसमान से दबाव डालना जारी रखते हैं तो ईरानी लोग इस राज को खत्म कर देंगे। रैली में शामिल लोगों ने अमेरिकी कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद किया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने लाल रंग की हैट पहनी थी जिस पर मेक ईरान ग्रेट अगेन लिखा था।

    इस रैली को आयोजित करने वाले संगठन डीसी प्रोटेस्ट्स फॉर ईरान के वॉलंटियर रेजा मौसवी ने कहा राष्ट्रपति ने कहा था कि मदद आ रही है। उन्होंने वादा किया और उस पर कायम रहे। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मौजूदा ईरानी शासन को खत्म करना और देश के आखिरी शाह के बेटे रेजा पहलवी को अगला नेता बनाने के लिए समर्थन देना था।

    प्रदर्शन में शामिल वॉलंटियर मरजीह मिर्जासलेही ने कहा हम चाहते हैं कि हमारे शाह ईरान वापस आएं क्योंकि वे अकेले ही ईरान को फिर से महान बना सकते हैं। मरजीह ने 2007 में ईरान छोड़ दिया था। कई प्रदर्शनकारी अमेरिकी और ईरानी झंडे और पोस्टर लेकर आए थे जिनमें पहलवी को ट्रंप के साथ खड़ा दिखाया गया था।

    वहीं ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी जारी की है। उन्होंने अमेरिका से कहा कि अमेरिकी इंडस्ट्रियल प्लांट्स को इलाके से हटाया जाए। IRGC ने आम लोगों से भी अपील की कि वे उन जगहों को खाली करें जहां अमेरिकी शेयरहोल्डर मौजूद हैं ताकि किसी भी खतरे या नुकसान से बचा जा सके।

    यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पिछले दो दिनों में ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निशाना बनाकर किए गए हमलों के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है। ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि इन हमलों में गैर-सैन्य फैक्ट्रियों को निशाना बनाया गया और कई आम लोग मारे गए। इससे क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति और अस्थिर हो गई है और अमेरिकी-ईरानी तनाव चरम पर है।

    इस रैली और ईरानी प्रतिक्रिया से साफ है कि अमेरिका की हालिया कार्रवाई ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गहरा प्रभाव डाला है। प्रदर्शनकारी अमेरिकी हस्तक्षेप को ईरानी शासन को बदलने का अवसर मान रहे हैं जबकि ईरान अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और नागरिकों को जोखिम से बचाने के लिए सतर्क है।