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  • तेल संकट के बीच पाकिस्तान को रूस ने दिया सस्ता तेल देने का प्रस्‍ताव

    तेल संकट के बीच पाकिस्तान को रूस ने दिया सस्ता तेल देने का प्रस्‍ताव


    मॉस्को/इस्लामाबाद।
     वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच रूस ने पाकिस्तान को सस्ते कच्चे तेल की पेशकश की है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है और पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

    पाकिस्तान में रूस के राजदूत अल्बर्ट खोरेव ने इस्लामाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि उनका देश रियायती दरों पर तेल उपलब्ध कराने के लिए “पूरी तरह तैयार” है। उन्होंने पाकिस्तान से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील भी की।

    औपचारिक प्रस्ताव का इंतजार

    खोरेव ने स्पष्ट किया कि अभी तक इस संबंध में पाकिस्तान की ओर से कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के सहयोग का प्रमुख आधार है और आगे की प्रगति इस्लामाबाद की पहल पर निर्भर करेगी।

    मध्य पूर्व संकट का असर
    होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका असर पाकिस्तान पर भी पड़ा है, जहां सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 20% तक बढ़ोतरी करनी पड़ी है। हालांकि, सरकार का कहना है कि हालात सामान्य होने पर कीमतों में राहत दी जा सकती है।

    पहले भी हो चुका है आयात
    पाकिस्तान पहले भी सीमित मात्रा में रूस से रियायती तेल खरीद चुका है, लेकिन उसकी अधिकांश जरूरतें सऊदी अरब और UAE जैसे खाड़ी देशों से पूरी होती हैं। मौजूदा संकट के चलते सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज हो गई है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2026 में पाकिस्तान को रूसी तेल की एक बड़ी खेप मिलने की संभावना है। हालांकि, तकनीकी चुनौती यह है कि पाकिस्तान की रिफाइनरियां हल्के कच्चे तेल के लिए अधिक अनुकूल हैं, जबकि रूसी ‘उराल्स’ क्रूड अपेक्षाकृत भारी होता है।

    अमेरिकी कार्रवाई पर रूस की प्रतिक्रिया
    रूसी राजदूत ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की।

    तेल संकट के बीच रूस की यह पेशकश पाकिस्तान के लिए राहत का विकल्प बन सकती है, लेकिन इसकी दिशा और प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।

  • नेतन्याहू को लेकर अटकलें तेज, डोनाल्ड ट्रंप की पहल के बाद सामने आया नया वीडियो

    नेतन्याहू को लेकर अटकलें तेज, डोनाल्ड ट्रंप की पहल के बाद सामने आया नया वीडियो


    नई दिल्ली।
     मौत की अटकलों के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक और वीडियो सामने आया है। इस बार नेतन्याहू ने अपने जीवित होने का सबूत पेश करते हुए दिलचस्प वीडियो शेयर किया। मंगलवार को पोस्ट किए गए इस वीडियो में वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत के साथ नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी दूत को यह सुनिश्चित करने के लिए ही भेजा गया था कि नेतन्याहू जिंदा हैं। इजरायली प्रधानमंत्री ने खुद इसकी जानकारी दी।

    इस वीडियो में नेतन्याहू और अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी साथ साथ नजर आ रहे हैं। सबसे पहले नेतन्याहू मुस्कुराते हुए कहते हैं, “मैं जिंदा हूं।” और फिर मौत की अटकलों पर तंज कसते हुए कहते हैं, “हम हर हाथ की पांच उंगलियों से हाथ मिलाते हैं।” इससे वह उन खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिनमें यह दावा किया गया था कि नेतन्याहू का AI जनरेटेड वीडियो शेयर किया जा रहा है और उनके हाथों पर छह उंगलियां दिखाई देने की बात कही गई थी।

    नए वीडियो पर भी उठे थे सवाल
    इसके बाद नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई वीडियो साझा कर इस बात को साबित करने की कोशिश की है वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने बीते दिनों एक कॉफी हाउस का वीडियो भी पोस्ट किया जिसमें वे अपने जिंदा होने की पुष्टि करने की कोशिश करते दिखे। हालांकि इंटरनेट पर लोगों ने इस वीडियो की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठा दिए। वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के चैट बॉट Grok ने इसे डीपफेक वीडियो बता दिया।

    अमेरिकी दूत से क्या बोले नेतन्याहू?
    अब नेतन्याहू ने अमेरिकी दूत के साथ वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो में वह हकाबी के साथ बातचीत करते हुए देखे जा सकते हैं। इस बीच हकाबी मजाक मजाक में कहते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें इजरायली नेता का हालचाल जानने के लिए भेजा था। हकाबी ने कहा, “मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, मैं चाहता हूं कि आप यह जानें कि राष्ट्रपति ने मुझे यहाँ आकर यह पक्का करने के लिए कहा था कि आप ठीक हैं।” इस पर नेतन्याहू जवाब देते हैं “हां, माइक। हां मैं ज़िंदा हूं।वीडियो में नेतन्याहू ने ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी आहे बासिज प्रमुख गुलाम रजा सुलेमानी की मौत को लेकर भी ईरान पर तंज कसा। नेतन्याहू ने कहा, “आज, मैंने पंच कार्ड से दो नाम मिटा दिए।” बता दें कि मंगलवार को इजरायल ने इन दोनों नेताओं के मारे जाने का दावा किया था। बुधवार को ईरान ने भी इसकी पुष्टि की है और बदला लेने की कसम खाई है।

  • Israel-Iran: ‘दुश्मनों को ढूंढकर खत्म करेंगे’, ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लेकर इस्राइल का सख्त संदेश

    Israel-Iran: ‘दुश्मनों को ढूंढकर खत्म करेंगे’, ईरान के नए सुप्रीम लीडर को लेकर इस्राइल का सख्त संदेश

    तेल अवीव। इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच इस्राइल रक्षा बल (आईडीएफ) ने स्पष्ट किया है कि वह हर उस व्यक्ति को निशाना बनाएगा जो उसके लिए खतरा है। इसमें ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई भी शामिल हैं। हालांकि, आईडीएफ ने यह भी माना है कि फिलहाल उन्हें खामेनेई के ठिकाने की जानकारी नहीं है।

    ठिकाने की जानकारी नहीं, लेकिन कार्रवाई तय

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आईडीएफ के सैन्य प्रवक्ता एफि डेफ्रिन ने कहा कि खामेनेई की लोकेशन को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि इस्राइल अपने दुश्मनों को छोड़ेगा नहीं। उनका कहना था कि जो भी इस्राइल के खिलाफ कदम उठाएगा, उसे ढूंढकर खत्म किया जाएगा।

    बासिज बलों पर भी इस्राइल की नजर

    आईडीएफ ने यह भी संकेत दिए हैं कि ईरान के अर्धसैनिक बासिज बल भी उसके निशाने पर हैं। डेफ्रिन ने दोहराया कि इस्राइल हर उस व्यक्ति तक पहुंचेगा, जो उसके खिलाफ काम कर रहा है। पहले आईडीएफ यह दावा कर चुका है कि उसने बासिज कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी को मार गिराया था।

    लंबे सैन्य अभियान की तैयारी

    इस्राइल ने साफ कर दिया है कि वह लंबे समय तक चलने वाले अभियान के लिए तैयार है। इसमें यहूदी पर्व फसह के दौरान भी सैन्य गतिविधियां जारी रह सकती हैं। इस बीच, ईरान की ओर से दागी जा रही मिसाइलों को रोकने के लिए भी इस्राइल लगातार अपने रक्षा तंत्र को सक्रिय रखे हुए है।

    तेल अवीव और यरुशलम में गूंजे सायरन

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल अवीव और यरुशलम में एयर रेड सायरन सुनाई दिए। रात के समय आसमान में तेज चमक देखी गई, जिसमें तेल अवीव के ऊपर क्लस्टर म्यूनिशन मिसाइल भी शामिल थी। इसके बाद बचाव दलों को ग्रेटर तेल अवीव के कई इलाकों में भेजा गया।

    बहरीन ने भी रोकीं मिसाइलें और ड्रोन

    इस बीच बहरीन रक्षा बल ने दावा किया है कि उसने ईरान से दागी गई 129 मिसाइलों और 233 ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया है। यह घटनाक्रम अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच सामने आया है, जो पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से जारी है।

  • नेतन्याहू जिंदा है या नहीं, पता करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने भेजा अपना दूत; नए वीडियो में क्या?


    नई दिल्ली। मौत की अटकलों के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक और वीडियो सामने आया है। इस बार नेतन्याहू ने अपने जीवित होने का सबूत पेश करते हुए दिलचस्प वीडियो शेयर किया। मंगलवार को पोस्ट किए गए इस वीडियो में वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत के साथ नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी दूत को यह सुनिश्चित करने के लिए ही भेजा गया था कि नेतन्याहू जिंदा हैं। इजरायली प्रधानमंत्री ने खुद इसकी जानकारी दी।

    इस वीडियो में नेतन्याहू और अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी साथ साथ नजर आ रहे हैं। सबसे पहले नेतन्याहू मुस्कुराते हुए कहते हैं, “मैं जिंदा हूं।” और फिर मौत की अटकलों पर तंज कसते हुए कहते हैं, “हम हर हाथ की पांच उंगलियों से हाथ मिलाते हैं।” इससे वह उन खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिनमें यह दावा किया गया था कि नेतन्याहू का AI जनरेटेड वीडियो शेयर किया जा रहा है और उनके हाथों पर छह उंगलियां दिखाई देने की बात कही गई थी।

    नए वीडियो पर भी उठे थे सवाल
    इसके बाद नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई वीडियो साझा कर इस बात को साबित करने की कोशिश की है वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने बीते दिनों एक कॉफी हाउस का वीडियो भी पोस्ट किया जिसमें वे अपने जिंदा होने की पुष्टि करने की कोशिश करते दिखे। हालांकि इंटरनेट पर लोगों ने इस वीडियो की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठा दिए। वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के चैट बॉट Grok ने इसे डीपफेक वीडियो बता दिया।

    अमेरिकी दूत से क्या बोले नेतन्याहू?
    अब नेतन्याहू ने अमेरिकी दूत के साथ वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो में वह हकाबी के साथ बातचीत करते हुए देखे जा सकते हैं। इस बीच हकाबी मजाक मजाक में कहते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन्हें इजरायली नेता का हालचाल जानने के लिए भेजा था। हकाबी ने कहा, “मिस्टर प्राइम मिनिस्टर, मैं चाहता हूं कि आप यह जानें कि राष्ट्रपति ने मुझे यहाँ आकर यह पक्का करने के लिए कहा था कि आप ठीक हैं।” इस पर नेतन्याहू जवाब देते हैं “हां, माइक। हां मैं ज़िंदा हूं।”

    वीडियो में नेतन्याहू ने ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी आहे बासिज प्रमुख गुलाम रजा सुलेमानी की मौत को लेकर भी ईरान पर तंज कसा। नेतन्याहू ने कहा, “आज, मैंने पंच कार्ड से दो नाम मिटा दिए।” बता दें कि मंगलवार को इजरायल ने इन दोनों नेताओं के मारे जाने का दावा किया था। बुधवार को ईरान ने भी इसकी पुष्टि की है और बदला लेने की कसम खाई है।

  • मिडिल ईस्ट संकट के बीच कई देशो ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, भारत में अभी तक राहत

    मिडिल ईस्ट संकट के बीच कई देशो ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, भारत में अभी तक राहत


    नई दिल्ली।
    दुनिया (World) के कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम (Petrol-Diesel Prices) बढ़ चुके हैं, लेकिन अभी तक भारत (India) के लोगों के लिए राहत है। ईरान-इजरायल युद्ध (Iran-Israel War.) की आग में जल रहे मिडिल-वेस्ट (Middle-West) के चलते कच्चे तेल में उबाल है।दुनिया (World) के कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम (Petrol-Diesel Prices) बढ़ चुके हैं, लेकिन अभी तक भारत (India) के लोगों के लिए राहत है। ईरान-इजरायल युद्ध (Iran-Israel War.) की आग में जल रहे मिडिल-वेस्ट (Middle-West) के चलते कच्चे तेल में उबाल है। इसका असर ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है। 23 फरवरी 2026 को जहां दुनिया भर में ईंधन की कीमतें सामान्य स्तर पर थीं, वहीं ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से हालात पूरी तरह बदल गए। ब्रेंट क्रूड ने 71 डॉलर प्रति बैरल से छलांग लगाते हुए 100 डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया। यह करीब 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, जो ग्लोबल एनर्जी मार्केट में युद्ध की गंभीर आशंकाओं को साफ दर्शाता है।


    कीमतों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर

    इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ना शुरू हो गया है। ग्लोबल पेट्रोल प्राइस डॉट कॉम के मुताबिक ग्लोबल लेवल पर पेट्रोल की औसत कीमतें 1.20 डॉलर प्रति लीटर से बढ़कर 1.27 डॉलर पर पहुंच गई हैं। जबकि, डीजल ने तो और भी तेज रफ्तार दिखाई है। डीजल की औसत कीमत 1.20 डॉलर से 1.33 डॉलर प्रति लीटर पर जा पहुंची। ये आंकड़े बताते हैं कि डीजल पर युद्ध की मार कहीं ज्यादा भारी पड़ी है।


    लाओस में डीजल ने लगाई 72.4 की छलांग

    लाओस में डीजल ने 72.4 प्रतिशत की छलांग लगाई है। वियतनाम में पेट्रोल की कीमतों में 50 प्रतिशत और डीजल में 65.8 प्रतिशत का उछाल आया है। कंबोडिया में डीजल 37.3 प्रतिशत महंगा हुआ है। ये आंकड़े बताते हैं कि दक्षिण पूर्व एशिया के इन देशों में ईंधन संकट ने विकराल रूप ले लिया है।


    नाइजीरिया में डीजल 62% महंगा, अमेरिका में भी भारी उछाल

    अफ्रीकी देश नाइजीरिया में पेट्रोल 39.5 प्रतिशत और डीजल 62.5 प्रतिशत महंगा हो चुका है। वहीं अमेरिका में भी डीजल में 27.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्यूर्टो रिको में तो डीजल 25.1 प्रतिशत महंगा हुआ है।


    यूरोप में जर्मनी और स्पेन सबसे ज्यादा प्रभावित

    यूरोपीय देशों में जर्मनी सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां डीजल 25.3 प्रतिशत महंगा हुआ है। स्पेन में भी डीजल ने 25.6 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया है। बेल्जियम, डेनमार्क और फ्रांस में भी डीजल के रेट 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़े हैं।


    भारत, चीन, रूस और सऊदी अरब में राहत

    हैरानी की बात है कि भारत, चीन, रूस और सऊदी अरब जैसे बड़े देशों में अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। अल्जीरिया, अर्जेंटीना, ब्राजील, मैक्सिको और वेनेजुएला सहित तमाम देश ऐसे हैं, जहां कीमतें स्थिर हैं। यह साफ दिखता है कि ये सरकारें या तो सब्सिडी दे रही हैं या फिर कीमतों को नियंत्रित कर रही हैं।


    क्या भारत में आगे चलकर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

    कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव तो भारत पर भी पड़ रहा है। इधर देश के 5 राज्यों में चुनाव का भी ऐलान हो चुका है। ऐसे में कई विशेषज्ञों को लगता है कि चुनाव से पहले शायद की पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े।


    कच्चे तेल का भारत पर क्या होगा असर

    क्रूड में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से सालाना आयात बिल में लगभग 2 अरब डॉलर का इजाफा होता है। अभी क्रूड 100 डॉलर के पार बना हुआ है। इसका असर ये होगा कि आयात बिल बढ़ेगा, रुपये पर दबाव बढ़ेगा, सरकारी खर्च बढ़ेगा। इन चीजों से इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। यही नहीं, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स, एविएशन,मैन्युफैक्चरिंग सब पर असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध जारी रहता है इसका असर लंबे समय तक रह सकता है।


    इन देशों में उल्टा असर: सस्ता हो गया पेट्रोल-डीजल

    कुछ देशों में तो कीमतें घटी भी हैं। फिजी में पेट्रोल 4.3 प्रतिशत और डीजल 1.8 प्रतिशत सस्ता हुआ है। मेडागास्कर में दोनों में 4 प्रतिशत की गिरावट आई है। जांबिया में पेट्रोल 4.6 प्रतिशत सस्ता हुआ है। यानी इन देशों की सरकारों ने जनता को राहत देने के लिए कीमतों में कटौती का फैसला किया है।


    यहां पेट्रोल-डीजल के रेट में विरोधाभासी तस्वीर

    सीरिया में जहां पेट्रोल 5 प्रतिशत सस्ता हुआ है, वहीं डीजल 1.7 प्रतिशत महंगा हुआ है। उरुग्वे में पेट्रोल 1.2 और डीजल 3.2 प्रतिशत सस्ता हुआ है। यह अंतर बताता है कि इन देशों में सरकारें दोनों पेट्रोल और डीजल पर अलग-अलग नीति अपना रही हैं।


    युद्ध का लंबा साया: क्या और खराब होंगे हालात

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। आमतौर पर रिटेल मार्केट में तेल की कीमतों का पूरा असर दिखने में दो-तीन हफ्ते लग जाते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कुछ और भी देशों में कीमतें बढ़ सकती हैं। अगर युद्ध लंबा खिंचा तो नियंत्रित बाजार वाले देश भी तेल की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हो सकते हैं। फिलहाल यह तय है कि आम आदमी के लिए आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ा सकती है।

  • काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग

    काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग


    काबुल/इस्लामाबाद/जेनेवा।
    अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए भीषण हमले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। अफगान अधिकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले में 500 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 250 लोग घायल हुए हैं। यह हमला हाल के वर्षों में अफगानिस्तान में हुआ सबसे घातक हवाई हमला माना जा रहा है। इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से तत्काल संघर्ष रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने इस हमले पर गहरी चिंता जताते हुए इसकी स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और हिंसा को तुरंत रोका जाना चाहिए।


    2000 बेड वाले अस्पताल पर हमला

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2000 बेड वाले ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर सोमवार रात यह हमला हुआ। यह अफगानिस्तान के सबसे बड़े नशा मुक्ति केंद्रों में से एक माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भर्ती थे। हमले में अस्पताल की इमारत का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया और कई लोग मलबे में दब गए। बचाव दल लगातार शव और घायलों को निकाल रहे हैं।

    अफगान अधिकारियों का कहना है कि हमले के बाद अस्पताल की कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं और परिसर में भारी तबाही का मंजर देखने को मिला। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाकर शव और घायलों को निकाल रहे हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। तालिबान प्रशासन ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” बताते हुए कड़ी निंदा की है।


    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया भयावह मंजर

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमले के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई इमारतें ध्वस्त हो गईं और चारों ओर मलबा फैल गया। सैकड़ों लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पताल के मलबे के बीच भटकते नजर आए।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के इलाके में भी कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और देर रात तक बचाव अभियान जारी रहा।


    संयुक्त राष्ट्र की सख्त टिप्पणी

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि काबुल के नशा मुक्ति केंद्र में हुआ यह विस्फोट बेहद दुखद है और इसकी तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और जांच के नतीजे सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

    संयुक्त राष्ट्र ने यह भी याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों को विशेष सुरक्षा प्राप्त होती है। युद्ध के नियमों के अनुसार किसी भी हमले में अंतर, अनुपात और सावधानी के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है, जबकि चिकित्सा संस्थानों को अतिरिक्त सुरक्षा दी जाती है।


    अफगानिस्तान का कड़ा रुख

    इस बीच अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतिन काने ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि काबुल पर किए गए हमले का “मुंहतोड़ जवाब” दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव दल मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

    अफगान सरकार ने इस घटना को अपनी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा है कि ऐसे हमले बिना जवाब के नहीं छोड़े जाएंगे। पिछले एक महीने से दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव और सीमा पार झड़पों के कारण बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत और हजारों लोगों के विस्थापित होने की खबरें भी सामने आई हैं।


    पाकिस्तान ने आरोपों को बताया निराधार

    दूसरी ओर पाकिस्तान ने अस्पताल को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज कर दिया है। इस्लामाबाद का कहना है कि उसकी वायुसेना ने काबुल और नंगरहार में “आतंकी ढांचे और हथियार भंडार” को निशाना बनाते हुए सटीक कार्रवाई की। पाकिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक हमले में गोला-बारूद के डिपो और आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया गया और किसी अस्पताल या नागरिक केंद्र को लक्ष्य नहीं बनाया गया।


    बढ़ते संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय चिंता

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमलों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। हालिया झड़पों के बाद दोनों देशों के बीच हालात “खुले संघर्ष” की स्थिति तक पहुंच चुके हैं।

    ऐसी स्थिति में भारत समेत कई देशों ने भी इस हमले की निंदा करते हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव कम करने की अपील की है। साथ ही वर्तमान में बने ऐसे हालात पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच यह टकराव जारी रहा तो पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  • ईरान संघर्ष के बीच ट्रंप ने टाली चीन यात्रा, बोले युद्ध ज्यादा लंबा नहीं चलेगा

    ईरान संघर्ष के बीच ट्रंप ने टाली चीन यात्रा, बोले युद्ध ज्यादा लंबा नहीं चलेगा


    वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच अपनी चीन यात्रा फिलहाल टाल दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए उनका व्हाइट हाउस में रहना जरूरी है और यही कारण है कि उन्होंने बीजिंग दौरे को करीब एक महीने के लिए स्थगित करने का अनुरोध किया है।

    ट्रंप की यह यात्रा 28 मार्च से 1 अप्रैल के बीच प्रस्तावित थी लेकिन अब नई तारीखों की घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि वे चीन जाने के इच्छुक हैं और दोनों देशों के रिश्ते अच्छे हैं लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका में रहना प्राथमिकता है।

    ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष पर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है और यह ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह जरूरी नहीं कि युद्ध इसी सप्ताह समाप्त हो जाए।

    ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक सुरक्षा के हित में उठाया गया है। उनके अनुसार यदि यह कार्रवाई नहीं की जाती तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो गई है जिसमें उसकी नौसेना वायुसेना और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से युद्ध से बचना चाहते थे लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें यह फैसला लेने के लिए मजबूर किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कदम केवल अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।

    शेयर बाजार पर संभावित असर को लेकर ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि बाजार में ज्यादा गिरावट देखने को मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके मुताबिक अगर थोड़े समय के लिए असर पड़ता भी है तो यह बहुत छोटी कीमत है।

    जब उनसे भविष्य की सैन्य रणनीति या जमीनी सेना भेजने की संभावना पर सवाल किया गया तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कुल मिलाकर ईरान के साथ जारी तनाव के बीच ट्रंप का यह फैसला वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा पर गहरा असर डाल सकता है जबकि दुनिया की नजर अब इस संघर्ष के संभावित अंत पर टिकी हुई है।

  • फिनलैंड के राष्ट्रपति की अपील पश्चिम एशिया में सीजफायर के लिए भारत निभाए अहम भूमिका

    फिनलैंड के राष्ट्रपति की अपील पश्चिम एशिया में सीजफायर के लिए भारत निभाए अहम भूमिका


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत से अहम कूटनीतिक भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने अमेरिका ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच तुरंत सीजफायर की जरूरत बताई है।

    ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में स्टब ने कहा कि वैश्विक समुदाय को दुश्मनी रोकने और संवाद के रास्ते खोलने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि भारत अपनी संतुलित विदेश नीति के चलते इस संकट को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    स्टब ने कहा हमें तत्काल सीजफायर की जरूरत है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने एस. जयशंकर द्वारा पहले की गई शांति अपील का भी उल्लेख किया।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के बीच सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। हाल ही में विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की। इस दौरान ईरान ने मौजूदा संघर्ष को अमेरिका और इजरायल के हमलों का परिणाम बताया और आत्मरक्षा के अपने अधिकार पर जोर दिया।

    भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। खासतौर पर क्षेत्रीय स्थिरता ऊर्जा आपूर्ति और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार सतर्क है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से भी बातचीत की।

    बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने आम नागरिकों की बढ़ती मौतों पर चिंता जताते हुए शांति और स्थिरता बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता भारत की प्राथमिकता है।मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत मध्यस्थता की भूमिका निभाता है तो यह क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

  • अफगानिस्तान में पाकिस्तान का एयरस्ट्राइक हमला, हॉस्पिटल पर वार में 400 नागरिकों की मौत; 1,15,000 लोग बेघर

    अफगानिस्तान में पाकिस्तान का एयरस्ट्राइक हमला, हॉस्पिटल पर वार में 400 नागरिकों की मौत; 1,15,000 लोग बेघर

    नई दिल्ली। अफगानिस्तान में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तान के पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए एयरस्ट्राइक में 400 आम नागरिकों की मौत हुई है। यह हमला स्थानीय समयानुसार रात 9 बजे एक ड्रग ट्रीटमेंट हॉस्पिटल पर हुआ जिसमें करीब 2,000 मरीज उपचाराधीन थे। वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है।

    अधिकारियों ने बताया कि यह हमला फरवरी से शुरू हुए पाकिस्तान अफगानिस्तान संघर्ष का हिस्सा है। सीमा क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच लगातार झड़पें हो रही हैं। पाकिस्तान का दावा है कि उसने केवल आतंकवाद समर्थित ठिकानों और अफगान तालिबान के तकनीकी व एम्युनिशन स्टोरेज को निशाना बनाया जबकि अफगान पक्ष इसे आम नागरिकों के खिलाफ जानबूझकर हमला बता रहा है।

    अफगानिस्तान के उप सरकारी प्रवक्ता मंदुल्लाह फितरत के अनुसार 2,000 बेड वाले अस्पताल का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया है। मरने वालों की संख्या 400 पहुंच गई है जबकि 250 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और आग को नियंत्रित करने तथा शवों को निकालने का काम चल रहा है।

    यह हमला 2021 में तालिबान के कब्जे और अमेरिकी सैनिकों की वापसी के दौरान हुए हमले के बाद सबसे खतरनाक हमला माना जा रहा है। फरवरी के बाद पाकिस्तान अफगानिस्तान में शासन बदलने और तालिबान को दबाने की कोशिश में है लेकिन इसके परिणामस्वरूप आम नागरिकों को भारी नुकसान हुआ है। अब तक कम से कम 475 नागरिक मारे गए हैं और 1,15,000 लोग बेघर हो गए हैं।

    अफगान अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान का यह कदम देश में आतंक फैलाने और आम लोगों को डराने की कोशिश है। इसके उलट अफगान नागरिक बॉर्डर पर जाकर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मुकाबले के लिए तैयार हैं।

    हालांकि पाकिस्तान ने हमले में शामिल होने से इनकार किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने कहा कि अस्पताल को कोई निशाना नहीं बनाया गया और सभी हमले केवल सैन्य ठिकानों पर हुए। यह हमला न केवल अफगान नागरिकों के लिए खतरनाक साबित हुआ है बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चेतावनी है।

  • पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक से अफगानिस्तान में तबाही, 400 लोगों की मौत, 250 से ज्यादा घायल; तालिबान बोला- अस्पताल पर गिराया बम

    पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक से अफगानिस्तान में तबाही, 400 लोगों की मौत, 250 से ज्यादा घायल; तालिबान बोला- अस्पताल पर गिराया बम


    नई दिल्ली।काबुल में बीती रात जोरदार धमाकों से अफरा-तफरी मच गई। अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान की वायुसेना ने शहर के कई हिस्सों पर एयरस्ट्राइक की, जिससे भारी तबाही हुई। अफगान अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों में करीब 400 लोगों की मौत हो गई, जबकि 250 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। राहत और बचाव दल लगातार मलबे से लोगों को निकालने में जुटे हैं।

    अस्पताल पर बमबारी का आरोप
    तालिबान प्रशासन का आरोप है कि हमले में एक बड़े सरकारी अस्पताल को भी निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि यह अस्पताल हजारों मरीजों की क्षमता वाला था और बमबारी के बाद पूरी तरह जल उठा।

    कई इलाकों को बनाया निशाना
    जानकारी के अनुसार, हमले में रक्षा मंत्रालय के पास के रिहायशी इलाके, खुफिया एजेंसी के आसपास का क्षेत्र, राष्ट्रपति भवन के पास की बस्तियां और एयरपोर्ट के पास पुराना बेस शामिल था। पूरे शहर में आग और धुएं का गुबार देखा गया। वहीं, पाकिस्तान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि उनकी ओर से ऐसा कोई हमला नहीं किया गया।

    मंजूर पश्तीन का तीखा बयान
    मंजूर पश्तीन ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह निर्दोष लोगों पर हमला है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को शर्म करनी चाहिए। पश्तीन ने यह भी कहा कि सीमा के दोनों ओर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और आम लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की। फिलहाल काबुल में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। अस्पताल और रिहायशी इलाकों से लगातार शव और घायलों को निकाला जा रहा है। स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है और मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है।