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  • 10 नए बैटलशिप बना रहा अमेरिका, पुराने युद्धपोतों से 100 गुना ज्यादा ताकतवर होंगे: ट्रंप

    10 नए बैटलशिप बना रहा अमेरिका, पुराने युद्धपोतों से 100 गुना ज्यादा ताकतवर होंगे: ट्रंप

     वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) ने हाल ही में अमेरिकी सैन्य रणनीति और विदेश नीति को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसे 10 अत्याधुनिक बैटलशिप तैयार कर रहा है, जो पुराने युद्धपोतों की तुलना में करीब 100 गुना ज्यादा शक्तिशाली होंगे। ट्रंप के मुताबिक इन युद्धपोतों का मकसद दुश्मनों को सीधे टक्कर देने से पहले ही डर पैदा करना है, ताकि वे किसी तरह का जोखिम उठाने से बचें।

    ट्रंप ने बताया कि उन्होंने महंगे रॉकेट सिस्टम की जगह बड़े बैटलशिप्स के इस्तेमाल का सुझाव दिया था। उनके अनुसार 30 लाख डॉलर तक के महंगे रॉकेट दागने के बजाय बड़े गोले दागने वाले युद्धपोत अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं। उनका कहना है कि इन नए बैटलशिप्स की मौजूदगी ही दुश्मनों को चुनौती देने से रोकने के लिए काफी होगी।

    ‘शक्ति से शांति’ की नीति पर जोर
    डोनाल्‍ड ट्रंप ने खुद को शांतिवादी बताते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में कई बड़े संघर्षों को खत्म किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आठ युद्ध समाप्त करवाए और यूरोप की सुरक्षा के लिए भी लगातार प्रयास किए। ट्रंप का कहना था कि महासागरों से घिरे होने के कारण अमेरिका पर सीधे खतरे अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन फिर भी वैश्विक शांति बनाए रखने के लिए मजबूत सैन्य शक्ति जरूरी है।

    उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का भी जिक्र किया और कहा कि व्यापार और टैरिफ जैसे आर्थिक उपायों के जरिए संकट को कम करने में मदद मिली, जिससे संभावित बड़ा युद्ध टल गया।

    वेनेजुएला में ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’
    ट्रंप ने लैटिन अमेरिका की स्थिति पर बोलते हुए बताया कि जनवरी 2026 में अमेरिकी सेना ने ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत वेनेजुएला में एक विशेष कार्रवाई की। उनके मुताबिक इस ऑपरेशन में देश के तत्कालीन नेता Nicolás Maduro को पकड़ लिया गया।
    ट्रंप ने इस अभियान को “18 मिनट की शुद्ध सैन्य कार्रवाई” बताते हुए कहा कि इसके बाद वेनेजुएला में नई सरकार बनी है, जिसके साथ अमेरिका सहयोग कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बदलाव के बाद देश में तेल उत्पादन बढ़ा है और अमेरिका के साथ सोने तथा अन्य खनिजों को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता भी हुआ है।

    ईरान पर कार्रवाई का दावा
    राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को भी बड़ी सफलता बताया। उन्होंने दावा किया कि तीन दिनों के भीतर अमेरिकी सेना ने ईरान के 42 नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया। ट्रंप के अनुसार इस कार्रवाई में कुछ बड़े युद्धपोत भी शामिल थे, जिससे ईरान की नौसैनिक क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा।

    उन्होंने ‘मिडनाइट हैमर’ नामक बी-2 बमवर्षक हमले का भी जिक्र किया और कहा कि इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा। ट्रंप के मुताबिक उस समय ईरान परमाणु हथियार बनाने से कुछ ही महीनों दूर था, लेकिन अमेरिकी कार्रवाई से इस खतरे को टाल दिया गया।

    आक्रामक लेकिन निर्णायक विदेश नीति

    ट्रंप ने अपने बयानों में बार-बार कहा कि उनकी नीति “शक्ति के जरिए शांति” बनाए रखने की है। उनके अनुसार मजबूत सैन्य तैयारी, आर्थिक दबाव और रणनीतिक कार्रवाई के जरिए दुनिया में स्थिरता कायम की जा सकती है।

    उन्होंने नए बैटलशिप्स के निर्माण, वेनेजुएला में कार्रवाई और ईरान के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन को अपनी विदेश नीति की प्रमुख उपलब्धियों के तौर पर पेश किया। ट्रंप का कहना है कि उनकी रणनीति का उद्देश्य युद्ध शुरू करना नहीं, बल्कि संभावित संघर्षों को रोकना है।

  • Iran-US-Israel युद्ध का नौवां दिन…..गंभीर हुए मिडिल ईस्ट के हालात, ओस्लो में US एंबेसी के पास जोरदार धमाका

    Iran-US-Israel युद्ध का नौवां दिन…..गंभीर हुए मिडिल ईस्ट के हालात, ओस्लो में US एंबेसी के पास जोरदार धमाका


    तेहरान।
    ईरान (Iran), अमेरिका (America) और इजरायल (Israel) के बीच चल रहे युद्ध का आज 9वां दिन है. इस युद्ध के आगे बढ़ने के साथ दिनो ब दिन मिडिल ईस्ट (पश्चिमी एशिया) (Middle East- (Western Asia) में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) अपनी बात पर ही अड़े हुए हैं कि ईरान के साथ कोई भी बातचीत या समझौता नहीं होगा उन्हें सिर्फ ईरान का बिना किसी शर्त के सरेंडर चाहिए. ट्रंप ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर लिखा, ‘ईरान के साथ कोई डील नहीं होगी, सिर्फ अनकंडीशनल सरेंडर.’ ट्रंप ने कहा कि ईरान के सरेंडर के बाद वहां पर एक नया नेतृत्व चुना जाएगा. अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान को फिर से विकसित करने में उसकी मदद करेगा।

    इधर, नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में रविवार तड़के उस समय अफरा-तफरी मच गई जब United States Embassy in Oslo के पास एक तेज धमाके की आवाज सुनी गई. धमाके की सूचना मिलते ही इलाके में सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस तुरंत सक्रिय हो गईं और पूरे क्षेत्र को घेरकर जांच शुरू कर दी गई. धमाका इतना तेज था कि आसपास के लोगों में घबराहट फैल गई. इस घटना में अब तक किसी के घायल या हताहत होने की सूचना नहीं मिली है।


    इराक का कोई भी सैनिक ईरान में नहीं घुसाः हैदर अल-खर्की

    इराकी ब्रिगेडियर जनरल हैदर अल-खर्की का कहना है कि देश पर US-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से न तो इराकी सुरक्षा बल और न ही क्षेत्रीय कुर्द पेशमर्गा सेना के सदस्य ईरान में घुसे हैं. अल-खर्की ने बात करते हुए कहा कि इराकी सुरक्षा सैनिकों को ऑटोनॉमस क्षेत्र की सरकार के साथ मिलकर ईरान के साथ सीमा पर नियंत्रण और मजबूत करने के लिए इराक के सुलेमानियाह के कुर्द क्षेत्र में तैनात किया गया है. अल-खर्की का यह बयान ईरान-इराक सीमा पर बढ़ते तनाव और उन रिपोर्टों के बीच आया है कि US तेहरान में सरकार के खिलाफ विद्रोह भड़काने के लिए कुर्दों की भर्ती कर रहा है. लेकिन ट्रंप ने कुछ घंटे पहले रिपोर्टरों से करते हुए कहा था कि US नहीं चाहता कि कुर्द समूह इस युद्ध में हिस्सा लें, क्योंकि ‘हम युद्ध को पहले से भी ज़्यादा जटिल नहीं बनाना चाहते हैं’।


    लापता सैनिक की खोज का इजरायली सेना का विशेष ऑपरेशन

    ईरान के साथ चल रही लड़ाई के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बताया कि उनके सैनिक शुक्रवार की रात को एक विशेष अभियान पर रवाना हुए. यह अभियान 40 साल पहले लापता हुए एक सैनिक की खोज से जुड़ा हुआ है।


    कुर्दिश सेना ने इराक के सुलेमानिया में ड्रोन मार गिराया

    न्यूज आउटलेट रुडॉ के मुताबिक, कुर्दिश पेशमर्गा सेना ने उत्तरी इराक के सुलेमानिया के कुर्द इलाके के ऊपर एक ड्रोन मार गिराया है. इस इलाके पर कई हवाई हमले हो रहे हैं. रुडॉ ने X पर जो फुटेज पोस्ट की है, उसमें कुर्दिश सेना के आसमान में किसी चीज पर गोली चलाने के बाद आग और धुआं दिख रहा है।


    बेरूत में भीषण हमले कर रहा इजरायल

    ईरान में इजरायल के लगातार हमले जारी, बेरूत में भीषण हमले कर रहा इजरायल, मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट को टारेगट किया. इसके पहले तेहरान के तेल डिपो में एयरस्ट्राइक के बाद जोरदार धमाका हुआ।


    अमेरिकी सैनिकों के अंतिम संस्कार में शामिल हुए ट्रंप

    ईरान के जवाबी हमले में मारे गए 6 अमेरिकी सैनिकों के अंतिम संस्कार में शामिल हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. ये सैनिक कुवैत में ईरानी सैनिकों पर हमला कर रहे थे जिसकी जवाबी कार्रवाई में ये अमेरिकी सैनिक मारे गए थे. ईरान पर इजरायल और अमेरिकी हमले के बाद ये पहला ऐसा अंतिम संस्कार समारोह हुआ है जिसमें युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी गई।


    सुलेमानिया में फोर्स ने ड्रोन पर फायरिंग कर मार गिराया

    सुलेमानिया में सेकंड रीजन के हेडक्वार्टर में कई पेशमर्गा फोर्स ने एक ड्रोन पर फायरिंग की और उसे मार गिराया. यह आज रात प्रांत को टारगेट करके किए गए हमलों की एक सीरीज का हिस्सा था. ईरानी मीडिया ने बताया कि साउथ तेहरान में एक तेल डिपो पर हमला हुआ. फारस न्यूज एजेंसी ने बताया कि इजरायली डिफेंस फोर्स शहर को निशाना बनाकर नए हमले कर रही है. इन ताजा हमलों की वजह से पूरे इलाके में तबाही मच गई है.

  • Nepal: बालेन शाह ने किया बड़ा उलटफेर….., चार बार PM रह चुके केपी ओली को हराया

    Nepal: बालेन शाह ने किया बड़ा उलटफेर….., चार बार PM रह चुके केपी ओली को हराया


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) के झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र (Jhapa-5 Constituency) में आरएसपी नेता और रैपर से नेता बने बालेन शाह (Balen Shah) ने चार बार प्रधानमंत्री (Prime Minister) रह चुके के.पी. शर्मा ओली (K.P. Sharma Oli) को लगभग 50,000 मतों के भारी अंतर से हराया। निर्वाचन आयोग ने यहां यह जानकारी दी। राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (आरएसपी) के नेता और काठमांडू के पूर्व महापौर, जिन्हें लोकप्रिय रूप से केवल बालेन के नाम से जाना जाता है, अपनी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।

    निर्वाचन आयोग (ईसी) ने बताया कि 35 वर्षीय बालेन को 68,348 मत मिले, जबकि 74 वर्षीय ओली को 18,734 मत मिले। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) – (सीपीएन-यूएमएल) ने ओली को पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया था। नेपाल में पिछले साल हुए हिंसक ‘जेन जेड’ विरोध प्रदर्शनों के बाद बृहस्पतिवार को पहला आम चुनाव हुआ, जिसमें हिमालयी देश में राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मांग की गई थी।

    बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (आरएसपी) बड़ा बहुमत हासिल कर नेपाल की सत्ता पर काबिज़ होने जा रही है। शाह ने झापा-5 सीट पर ओली को चुनौती दी और अपने फैसले को सही साबित कर दिखाया। इस सीट पर कुल 1,06,372 वोट डाले गए। पूरे देश में आरएसपी के पक्ष में चल रही तेज लहर के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री दहल 10,240 मतों के साथ रुकुम पूर्व-1 सीट जीतने में सफल रहे हैं।

    नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, आरएसपी ने 60 से अधिक सीटों पर जीत हासिल कर ली है। दूसरी ओर, नेपाली कांग्रेस ने जहां सिर्फ नौ पर जीत हासिल की है। ओली की पार्टी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) 3, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी 2 सीटें जीत चुकी हैं। इन आंकड़ों के आने के बाद शाह का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।

    जेनरेशन-जेड के आंदोलन से पहले नेपाल की सत्ता पर काबिज़ रही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को मौजूदा आम चुनाव में करारी शिकस्त मिली है। पार्टी के उपाध्यक्ष बिष्णु पौडेल, गोकर्ण बिस्टा, महासचिव शंकर पोखरेल, सचिव महेश बसनेत, भानुभक्त ढकाल और राजन भट्टराई को हार का सामना करना पड़ा है। नेपाल की संसद (प्रतिनिधि सभा) की कुल 275 सीटों के लिए पांच मार्च को मतदान संपन्न हुआ था। इनमें से 165 सीटों पर प्रत्यक्ष मतदान के जरिए और शेष 110 सीटों पर आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से चुनाव कराए गए। निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस बार लगभग 60 प्रतिशत मतदान हुआ है।

    उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 में हुए व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी छात्र आंदोलनों के बाद ओली सरकार गिर गई थी और संसद भंग कर दी गई थी। इसके बाद गठित अंतरिम सरकार की देखरेख में ये चुनाव संपन्न हुए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल के युवा मतदाताओं ने पारंपरिक नेतृत्व को नकारते हुए एक नए और आधुनिक राजनीतिक दृष्टिकोण को चुना है। शाह अगर सत्ता संभालते हैं तो न केवल नेपाल की आंतरिक राजनीति बल्कि भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी एक नए युग की शुरुआत हो सकती है।

  • Iran-US War: ट्रंप की धमकी के बाद और तेज हुए ईरान के हमले….. दुबई की इमारतें हुईं धुआं-धुआं

    Iran-US War: ट्रंप की धमकी के बाद और तेज हुए ईरान के हमले….. दुबई की इमारतें हुईं धुआं-धुआं


    दुबई।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच छिड़ा युद्ध पूरी दुनिया को संकट में डालने वाला साबित हो रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने शनिवार को भी धमकी देते हुए कहा कि उनका हमला अब और तेज होगा। वहीं जानकारों का कहना है कि अगर एक सप्ताह युद्ध और चलता रहा तो कई देशों में मंदी जैसे हालात हो जाएंगे। उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान पर बहुत तगड़ा हमला होने वाला है। ईरान (Iran) के व्यवहार की वजह से उसे बड़ी तबाही झेलनी होगी।

    इससे पहले ईरानी राष्ट्रपति पजेश्कियां (Iranian President Pajeshkian) ने कहा था ईरान समर्पण करने वाला नहीं है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के बिना शर्त सरेंडर करने की मांग को ठुकरा दिया था। उन्होंने कहा था कि ईरानियों के आत्मसमर्पण करने का विचार डोनाल्ड ट्रंप को कहीं दफना देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि वह तब तक पड़ोसी खाड़ी देशों पर हमला नहीं करेंगे जब तक कि उधर से हमला नहीं होता है।

    बता दें कि ईरान पड़ोसी देशों में अमेरिका बेसों पर लगातार हमले कर रहा था। इसके अलावा ईरान ने यूएई के दुबई में खूब हमले किए। वह 28 फरवरी को हुए हवाई हमले के बाद युद्ध शुरू होने और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद से ईरान की देखरेख करने वाली त्रिपक्षीय नेतृत्व परिषद के एक सदस्य हैं। उन्होंने यह संदेश इस संघर्ष के पूरे क्षेत्र में फैलने के ठीक एक सप्ताह बाद दिया। इस संघर्ष से वैश्विक बाजार और हवाई यात्रा प्रभावित हुई तथा ईरान का अपना नेतृत्व सैकड़ों इजराइली और अमेरिकी हवाई हमलों से काफी कमजोर हो गया है।


    रेवोल्यूशनरी गार्ड ने पैदा कर दिया भ्रम

    ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता जनरल अबोलफजल शेखरची ने पेजेशकियान के बयान के बाद यह कहकर और भ्रम पैदा कर दिया कि तेहरान ने उन देशों पर हमला नहीं किया है जिन्होंने ‘अमेरिका को हमारे देश पर आक्रमण करने के लिए जगह नहीं दी।’ अमेरिकी हमले खाड़ी अरब देशों से नहीं हो रहे हैं, जिन पर अब हमला हो रहा है। संभवतः मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल के जवाब में, शनिवार को ईरान के एक प्रमुख धर्मगुरु, अयातुल्ला नासिर मकारम शिराजी ने देश की विशेषज्ञ सभा से नये सर्वोच्च नेता का नाम जल्द से जल्द तय करने का आग्रह किया। युद्ध में 88 धर्मगुरुओं की समिति से जुड़े भवनों पर हवाई हमले हुए हैं, जिससे समूह की किसी भी बैठक में देरी होने की संभावना है।


    और भीषण बमबारी होगी

    अमेरिका का कहना है कि आगे और भी भीषण बमबारी होगी। संघर्ष खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही। ट्रंप प्रशासन ने इजराइल को 15.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर के नये हथियार बिक्री की मंजूरी दे दी। वहीं ट्रंप ने कहा है कि ईरान के “बिना शर्त आत्मसमर्पण” के बिना वे उससे बातचीत नहीं करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने आगामी बमबारी अभियान की चेतावनी दी।


    संयुक्त राष्ट्र में क्या बोले ईरान के राजदूत

    संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने कहा कि देश अपनी रक्षा के लिए ‘सभी आवश्यक उपाय’ करेगा। एसोसिएटेड प्रेस के वीडियो में पश्चिमी तेहरान के ऊपर धमाका और धुआं उठता हुआ दिखाई दिया। इजराइल ने कहा कि उसने व्यापक स्तर पर हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर लगातार हमले किए हैं, जिनमें उसकी सैन्य क्षमताओं, नेतृत्व और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाया गया है।

    देशों के अधिकारियों के अनुसार, इस लड़ाई में ईरान में कम से कम 1,230 लोग, लेबनान में 200 से अधिक और इजराइल में 11 लोग मारे गए हैं। छह अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं। शनिवार सुबह, ईरान से मिसाइल दागे जाने के कारण पूरे इजराइल में लोग बचने के लिए आश्रयों की ओर भागे। इस बीच यरुशलम में जोरदार धमाके सुनाई दिए। इजराइल की आपातकालीन सेवाओं ने तत्काल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं दी। संघर्ष बढ़ने के साथ ही ईरान ने खाड़ी देशों पर हमले किए। दुबई में शनिवार सुबह कई धमाकों की आवाज सुनी गई और सरकार ने हवाई सुरक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी। अलर्ट बजने के बाद दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों का इंतजार कर रहे यात्रियों को विशाल हवाई अड्डे की सुरंगों में ले जाया गया।

  • Warning: महामंदी की तरफ बढ़ रही दुनिया…. 7 दिन और चला ईरान युद्ध तो हालात होंगे भयावह!

    Warning: महामंदी की तरफ बढ़ रही दुनिया…. 7 दिन और चला ईरान युद्ध तो हालात होंगे भयावह!


    तेहरान।
    स्कॉटलैंड की संस्था (Scottish Organization) वुड मैकेंजी (Wood Mackenzie) ने मध्य-पूर्व जंग से उपजे संकट को लेकर नई चेतावनी दी है। इसमें दावा किया कि अगर ईरान-इजराइल युद्ध (Iran-Israel War) अगले सात दिन तक और चलता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था 1929 की महा मंदी ‘ग्रेट डिप्रेशन’ के दौर में प्रवेश कर सकती है। इसमें यह भी कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में गतिरोध बने रहने से दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसके परिणाम 1970 के दशक के तेल संकट से भी बड़े होने की संभावना है।


    क्या है महामंदी

    यह 1929 में अमेरिका से शुरू हुई आधुनिक इतिहास की सबसे भयंकर वैश्विक आर्थिक गिरावट थी, जो 1939-40 तक चली। अक्तूबर, 1929 के वॉल स्ट्रीट शेयर बाजार के पतन से शुरू होकर बैंकों के ठप होने, उत्पादन में भारी कमी और रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी के साथ पूरी दुनिया में फैल गई। सिर्फ अमेरिका में ही 1933 तक 1.5 करोड़ लोग बेरोजगार हो गए थे।

    इसके पीछे 1929 का स्टॉक मार्केट क्रैश, बैंकों का विफल होना, गलत मौद्रिक नीतियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी जैसे अनेक मिश्रित कारण थे। यह एक दशक तक चलने वाला (1929-1939) आर्थिक संकट था। आर्थिक मंदी द्वितीय विश्व युद्ध (1939) के शुरू होने के साथ समाप्त हुई, जिसने उत्पादन को बढ़ावा दिया और रोजगार के अवसर पैदा किए।


    इस आधार पर आशंका

    वुड मैकेंजी के मुख्य अर्थशास्त्री पीटर मार्टिन के अनुसार, कच्चे तेल के दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के पास हैं। हॉर्मुज से गुजरने वाले 1.2 से 1.4 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति रुकने से कीमतें 125-150 डॉलर प्रति बैरेल तक जा सकती हैं। तेल 200 डॉलर प्रति बैरल को पार करता है तो यह 1970 के दशक जैसा झटका होगा।

    मध्य-पूर्व में जारी युद्ध शनिवार को आठवें दिन में प्रवेश कर गया। 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला कर दिया। पिछले एक हफ्ते से जारी लड़ाई में कुल 16 देश प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित हैं, जिससे लाखों लोगों के जीवन और आजीविका को खतरा पैदा हो गया है। हिंसा मध्य एशिया से लेकर यूरोप के छोर तक फैलती जा रही है। अगर ये जंग बढ़ती है तो हालात और भयावह होंगे।

    रिपोर्ट में गैस संकट को लेकर भी चिंता जताई गई है। दुनिया का 20 फीसदी एलएनजी हॉर्मुज से गुजरता है। इसकी रुकावट 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई गैस कटौती से कहीं अधिक गंभीर होगी। इससे यूरोप और एशिया में गैस की कीमतें 130 फीसदी तक बढ़ सकती हैं।

    वुड मैकेंजी का अनुमान है कि तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहने से वैश्विक जीडीपी विकास दर 2 फीसदी से नीचे गिर जाएगी। मुख्य अर्थशास्त्री पीटर मार्टिन ने कहा कि यह आधिकारिक तौर पर मंदी और फिर डिप्रेशन जैसे हालात को बढ़ावा देगा। उनके मुताबिक, बेरोजगारी और मुद्रास्फीति के कारण 1930 जैसी लंबी मंदी पैदा हो सकती है।


    ईरान युद्ध के बड़े अपडेट्स

    >>ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, एक सप्ताह पहले बमबारी शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान में 1,230 लोग मारे गए हैं, जबकि पांच हजार से अधिक घायल हैं।
    >>लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हमलों में 217 की मौत और 798 के घायल हुए, जबकि एक लाख विस्थापित हुए।
    >>इजरायल में 12 नागरिकों की मौत, 1,600 से अधिक घायल हैं
    >>अमेरिका के 6 सैन्य कर्मियों की मौत की पुष्टि हुई और 20 घायल हैं।
    >>कुवैत में चार, यूएई तीन, बहरीन दो और ओमान में एक मौत हुई
    >>युद्ध के पहले 5 दिनों में वैश्विक शेयर बाजारों से लगभग 3.2 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 265 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान होने का अनुमान है। इसमें डॉव जोन्स और एशियाई बाजारों में 2 मार्च को गिरावट दर्ज की गई।
    >>हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहने से वैश्विक मुद्रास्फीति में 1 फीसदी तक की वृद्धि का अनुमान है।
    >>ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें शनिवार को 92 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई। संघर्ष लंबा चलने पर 100-130 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है, जिससे पूरी दुनिया में माल ढुलाई 20 फीसदी महंगी हो जाएगी।
    >>हॉर्मुज के रास्ते 20 फीसदी तेल और एलएनजी की सप्लाई रुकने से चीन, भारत, जापान जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है।
    >>पिछले एक हफ्ते में दुनियाभर में 21,300 से अधिक उड़ानें रद्द की गई
    >>दुनिया भर के हवाई अड्डों पर 6 लाख से अधिक यात्री फंसे हुए।
    >>एयर इंडिया, इंडिगो, एमिरेट्स और कतर एयरवेज ने अपनी सेवाओं को निलंबित कर दिया है या रूट बदल दिए, जिससे प्रति उड़ान लागत 60,000 डॉलर तक बढ़ गई
    >>भारत से यूरोप जाने वाली उड़ानों को अब लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है, जिससे कीमतें बढ़ गई हैं।

  • ईरान युद्ध के बीच 52 हजार भारतीय लौटे स्वदेश, विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी

    ईरान युद्ध के बीच 52 हजार भारतीय लौटे स्वदेश, विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी



    नई दिल्ली। भारत ने शनिवार को कहा कि वह पश्चिम एशिया में उभरती सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और विदेश में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय ने देर रात जारी बयान में बताया कि पूरे क्षेत्र में हवाई मार्ग आंशिक रूप से खुलने के बाद 52,000 से अधिक भारतीय स्वदेश लौट आए हैं। मंत्रालय ने क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों से स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों और भारतीय मिशनों द्वारा जारी सलाह का पालन करने का आग्रह किया।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार विदेश में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण के लिए हर संभव सहायता प्रदान कर रही है और जरूरत पड़ने पर सभी लोगों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्र की स्थानीय सरकारों के साथ काम कर रही है। वर्तमान में पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति अनिश्चित बनी हुई है क्योंकि अमेरिका और इजराइल ने ईरानी ठिकानों पर बमबारी जारी रखी है, जबकि ईरान ने पूरे क्षेत्र में अमेरिकी और इजराइली ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है।

    मिशनों की हेल्पलाइन और सुरक्षा सलाह

    विदेश मंत्रालय ने बताया कि क्षेत्र में भारतीय मिशनों ने विस्तृत सलाह जारी की है और सहायता के लिए 24 घंटे चालू रहने वाली हेल्पलाइन भी स्थापित की गई है।

    हवाई परिचालन प्रभावित, 100 उड़ानें रद्द

    पश्चिम एशिया संकट के कारण शनिवार को दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों पर कम से कम 100 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गईं। अधिकारियों के अनुसार, मुंबई हवाई अड्डे से 35 प्रस्थान और 36 आगमन उड़ानें रद्द हुईं, जबकि दिल्ली हवाई अड्डे से 22 प्रस्थान और 17 आगमन उड़ानें रद्द हुईं।

    दिल्ली हवाई अड्डे के संचालक डीआईएएल ने कहा कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति के कारण पश्चिम की ओर जाने वाली कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में देरी या समय-सारणी में बदलाव हो सकता है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया में कुछ हवाई क्षेत्र बंद कर दिए गए हैं, जिससे कई एयरलाइन कंपनियां सीमित संख्या में ही उड़ानों का संचालन कर रही हैं।

  • रूस से तेल खरीदने की भारत को मिली मोहलत, ट्रंप बोले- वैश्विक दबाव कम करने का कदम

    रूस से तेल खरीदने की भारत को मिली मोहलत, ट्रंप बोले- वैश्विक दबाव कम करने का कदम


    वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने के बीच अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दे दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘थोड़ा दबाव कम करने’ के लिए उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला वैश्विक तेल बाजार पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। ट्रंप ने यह बयान एयर फोर्स वन में मीडिया से बातचीत के दौरान दिया।

    स्थिति जल्द सामान्य होगी: ट्रंप

    ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका वैश्विक तेल बाजार पर दबाव कम करने के और कदम उठा सकता है। उन्होंने बताया कि दुनिया में तेल की कोई कमी नहीं है और अमेरिका के पास पर्याप्त तेल उपलब्ध है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी इस बात की पुष्टि की कि यह निर्णय वैश्विक तेल आपूर्ति में अस्थायी कमी को दूर करने के लिए लिया गया है।

    खाड़ी क्षेत्र में संकट

    खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले शिपिंग मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। यह मार्ग तेल परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत अपनी लगभग 40 प्रतिशत तेल आयात मध्य पूर्व से करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी मोहलत दी है।

    ऊर्जा बाजार पर प्रभाव और भारत की सुरक्षा

    अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बताया कि भारत को रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की मोहलत, मध्य पूर्व में तनाव के कारण वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए उठाए गए अल्पकालिक उपायों का हिस्सा है।

    भारतीय अधिकारियों के अनुसार, देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहा है और वर्तमान में पर्याप्त एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल की उपलब्धता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि ऊर्जा उपभोक्ताओं को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। भारत को विभिन्न स्रोतों से पहले से अधिक ऊर्जा आपूर्ति मिल रही है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से संभावित बाधाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

    रूसी तेल का बढ़ता हिस्सा

    भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता लाई है। 2022 में रूस भारत के कुल कच्चे तेल आयात का केवल 0.2 प्रतिशत था, लेकिन फरवरी 2026 में यह लगभग 20 प्रतिशत यानी करीब 1.04 मिलियन बैरल प्रति दिन पहुंच गया।

    ईरान पर सैन्य अभियान: ट्रंप का दावा

    ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के पूरे नेतृत्व का सफाया कर दिया है और इसे पृथ्वी से एक बड़े ‘कैंसर’ को हटाने जैसा बताया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सैन्य अभियान ईरान में कुछ समय तक जारी रहेगा। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसेना के 44 जहाजों, सभी विमान और अधिकांश मिसाइलों को नष्ट कर दिया है। साथ ही मिसाइल निर्माण के क्षेत्रों को भारी नुकसान पहुंचाने के कारण उनकी ड्रोन क्षमता में कमी आई है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व के लगभग हर स्तर पर सफाया कर दिया गया है।

  • रूस ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा! ट्रंप बोले- इससे कोई खास फायदा नहीं

    रूस ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा! ट्रंप बोले- इससे कोई खास फायदा नहीं



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने शनिवार को उन रिपोर्टों को कम महत्व दिया, जिनमें कहा गया कि रूस ने ईरान को अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों पर हमले के लिए खुफिया जानकारी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ऐसा हुआ भी है, तो इससे ईरान को कोई खास लाभ नहीं हो रहा। यह टिप्पणी उन्होंने एयर फोर्स वन से मियामी के लिए रवाना होते समय की।

    अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा तनाव

    ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। युद्ध शुरू होने के एक दिन बाद कुवैत में ड्रोन हमले में अमेरिकी सेना के छह रिजर्व सैनिक मारे गए।

    राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को रूस द्वारा ईरान को लक्ष्य संबंधी जानकारी देने के ठोस सबूत मिले हैं या नहीं, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे युद्ध की दिशा पर बड़ा असर नहीं पड़ा है।

    रूस और अमेरिका संबंधों पर सवाल टाले

    जब ट्रंप से पूछा गया कि अगर रूस ईरान की मदद कर रहा है तो अमेरिका-रूस संबंधों पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने सवाल टालते हुए कहा कि “हम भी उनके खिलाफ वैसा ही कर सकते हैं।” उन्होंने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से अमेरिका यूक्रेन को खुफिया सहायता दे रहा है ताकि वह रूस के हमलों से बच सके।

    तेल बाजार पर युद्ध का असर

    पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के साथ ही तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार Hormuz Strait से रोजाना लगभग दो करोड़ बैरल तेल ले जाने वाले जहाज गुजरते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उनके आवागमन में रुकावट आई है। ईरान के जवाबी हमलों और क्षेत्र की ऊर्जा सुविधाओं को हुए नुकसान के कारण वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा, जिससे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।

    रणनीतिक तेल भंडार पर ट्रंप का रुख

    तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कदम उठाने को तैयार हैं, लेकिन फिलहाल अमेरिका के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी रणनीतिक तेल भंडार में पिछले महीने के अंत तक लगभग 41.5 करोड़ बैरल तेल था, जबकि इसकी कुल क्षमता 70 करोड़ बैरल से अधिक है। ट्रंप ने कहा कि देश में पर्याप्त तेल है और बाजार में आपूर्ति जल्दी सामान्य हो सकती है।

  • ईरानी हमले में अमेरिकी THAAD डिफेंस सिस्टम क्षतिग्रस्त, जॉर्डन का रडार तबाह; अमेरिका को बड़ा सैन्य और आर्थिक नुकसान

    ईरानी हमले में अमेरिकी THAAD डिफेंस सिस्टम क्षतिग्रस्त, जॉर्डन का रडार तबाह; अमेरिका को बड़ा सैन्य और आर्थिक नुकसान



    नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने सऊदी अरब, UAE और जॉर्डन में तैनात अमेरिकी टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम को निशाना बनाया। जॉर्डन के ‘मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस’ पर तैनात THAAD का रडार सिस्टम पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यह रडार सिस्टम THAAD का सबसे अहम हिस्सा है, जो दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों की पहचान और ट्रैकिंग करता है।

    एक पूरे THAAD सिस्टम की कीमत लगभग ₹22 हजार करोड़ होती है, जबकि केवल रडार सिस्टम की कीमत ही 2,700 करोड़ रुपए (लगभग 300 मिलियन डॉलर) तक है। अमेरिका के पास वैश्विक स्तर पर केवल 7-8 ऐसे सिस्टम हैं, इसलिए यह हमला उनके लिए गंभीर सैन्य और आर्थिक नुकसान के रूप में देखा जा रहा है। THAAD सिस्टम का नुकसान अमेरिका के क्षेत्रीय डिफेंस नेटवर्क पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

    इस बीच, ईरान का युद्धपोत IRIS लावन भारत के कोच्चि बंदरगाह पर रुका हुआ है। तकनीकी खराबी के कारण 28 फरवरी को ईरान ने भारत से मदद मांगी थी, और भारतीय नौसेना ने 1 मार्च को इसे डॉक करने की अनुमति दी। जहाज पर मौजूद 183 क्रू मेंबर फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहरे हुए हैं। यह युद्धपोत हाल ही में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR 2026) और मिलान 2026 नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था। इससे पहले अमेरिका ने भारत लौट रहे ईरानी युद्धपोत IRIS देना को श्रीलंका के पास हमला कर डुबा दिया था, जिसमें 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए थे।

    इजराइल ने भी ईरानी सेना के एयरफोर्स कमांड सेंटर पर हमला किया। इजराइली सेना ने दावा किया कि इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण स्थल, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य गोदाम को निशाना बनाया गया। यह हमला ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने और क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    UAE के राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed Al Nahyan ने कहा कि देश युद्ध जैसी स्थिति से गुजर रहा है, लेकिन वह अपने लोगों और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि UAE कमजोर नहीं है और किसी भी देश को आसानी से निशाना बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    साथ ही, ईरान ने बताया कि अमेरिका ने केशम आइलैंड पर स्थित पानी की सफाई प्लांट पर हमला किया, जिससे लगभग 30 गांवों में पीने के पानी की सप्लाई ठप हो गई। ईरान ने इस हमले को गंभीर और खतरनाक कदम बताया, जिससे क्षेत्रीय संकट और गहरा गया।

    मध्य-पूर्व में बिगड़ते हालात के बीच जर्मनी ने क्षेत्रीय देशों की मदद के लिए 100 मिलियन यूरो (लगभग 972 करोड़ रुपए) की सहायता देने की घोषणा की। यह धन उन लोगों की मदद के लिए होगा जिन्हें लड़ाई के कारण अपने घर छोड़ने पड़े हैं।

    इस पूरी स्थिति के बीच अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष तेज होता जा रहा है। THAAD सिस्टम के नुकसान से अमेरिकी सुरक्षा नेटवर्क कमजोर हो सकता है, जबकि क्षेत्रीय देशों के नागरिकों के लिए खतरा लगातार बढ़ रहा है। मध्य-पूर्व में यह संघर्ष वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है।

  • नेपाल चुनाव में बालेन शाह की RSP ने मारी बाजी: केपी ओली अपने ही गढ़ में 43,000 वोटों से हार गए

    नेपाल चुनाव में बालेन शाह की RSP ने मारी बाजी: केपी ओली अपने ही गढ़ में 43,000 वोटों से हार गए


    नई दिल्ली। नेपाल में आम चुनाव का परिणाम राजनीतिक इतिहास में एक नया मोड़ लेकर आया है। रैपर और काठमांडू के मेयर रह चुके बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) इस बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। शुरुआती रुझानों के अनुसार RSP ने अब तक 58 सीटें जीत ली हैं और 63 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। यह पार्टी सिर्फ चार साल पहले पत्रकार रहे रबि लामिछाने के प्रयासों से बनाई गई थी और अब यह युवा नेतृत्व नेपाल की राजनीति में अपनी मजबूती दिखा रहा है।

    पूर्व प्रधानमंत्री और भारत विरोधी रवैये के लिए जाने जाने वाले केपी शर्मा ओली को झापा-5 सीट पर बालेन शाह के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा। यहां ओली को केवल 16,350 वोट मिले, जबकि बालेन शाह को 59,568 वोट मिले, यानी 43,000 से अधिक मतों की भारी अंतर से वे पिछड़ गए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि ओली का अपना गढ़ भी अब उन्हें समर्थन नहीं दे रहा। ओली ने 2017 और 2022 में इसी सीट से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार युवा नेतृत्व और जनता की बदलती पसंद ने उनकी चुनौती को बढ़ा दिया।

    नेपाल की चुनाव प्रणाली मिश्रित मॉडल पर आधारित है। संसद की कुल 275 सीटों में से 165 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जहां निर्वाचन क्षेत्र के वोटरों का पसंदीदा उम्मीदवार जीतता है। बाकी 110 सीटें पार्टियों को कुल वोट प्रतिशत के आधार पर दी जाती हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य छोटे दलों और विभिन्न सामाजिक समूहों को भी संसद में प्रतिनिधित्व देना है। इस बार भी Balen Shah की RSP ने 54.8 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं, जो उसे संसद में मजबूत स्थिति प्रदान करता है।

    पिछले साल सितंबर में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद नेपाल में 5 मार्च को हुए चुनाव में लगभग 58% मतदाताओं ने हिस्सा लिया। चुनाव आयोग के अनुसार वोटों की गिनती पूरी करने में 3-4 दिन लग सकते हैं और 9 मार्च तक परिणाम आने की संभावना है।

    इस चुनाव के नतीजे नेपाल की राजनीति में युवा नेतृत्व के उदय और पुराने नेताओं के प्रभाव में गिरावट को दर्शाते हैं। बालेन शाह की RSP ने युवा और अलग सोच रखने वाले मतदाताओं का समर्थन हासिल किया, वहीं केपी ओली जैसी स्थापित पार्टी और नेता अब नए राजनीतिक परिदृश्य में चुनौती का सामना कर रहे हैं। इससे नेपाल की संसद में बदलाव की उम्मीद और नए गठबंधनों की संभावनाएं भी सामने आ रही हैं।

    कुल मिलाकर, नेपाल के इस चुनाव ने स्पष्ट कर दिया कि जनता अब युवा और नए दृष्टिकोण वाले नेताओं को प्राथमिकता दे रही है, और पारंपरिक, पुराने नेताओं को अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए नई रणनीतियों की आवश्यकता है।