Category: International

  • विदेश नीति पर फोकस, इजरायल यात्रा के अनुभव साझा करते हुए पीएम का बड़ा संदेश

    विदेश नीति पर फोकस, इजरायल यात्रा के अनुभव साझा करते हुए पीएम का बड़ा संदेश


    नई दिल्ली। दो दिवसीय इजरायल दौरे से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत–इजरायल साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत होगी। उन्होंने दौरे की झलकियों वाला एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से स्वागत, भारतीय समुदाय से मुलाकात, सांस्कृतिक कार्यक्रम और इजरायली संसद में उनके संबोधन के दृश्य शामिल हैं।

    संसद में संबोधन से लेकर सर्वोच्च सम्मान तक
    वीडियो में इजरायली संसद में पीएम के स्वागत, तालियों की गूंज और दोनों देशों के बीच हुए अहम समझौतों के हस्ताक्षर के पल दिखाए गए। प्रधानमंत्री ने लिखा, “इजरायल की खास यात्रा की कुछ खास बातें… अच्छी बातचीत और मजबूत सहयोग। हमारी पार्टनरशिप आगे बढ़ती रहे!”

    रक्षा, तकनीक और व्यापार में नई गति
    दौरे के दौरान रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए इंडि‍या-मिडिल ईस्‍ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) और भारत-इजरायल-यूएई-यूएसए (आई2यू2) पहल को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

    अहम एमओयू: खनिज, समुद्री विरासत और यूपीआई
    खनिज अन्वेषण में उन्नत जियोफिजिकल और एआई तकनीक के उपयोग पर सहयोग के लिए समझौता हुआ। गुजरात के लोथल स्थित नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के विकास को लेकर भी सहमति बनी, जिससे साझा समुद्री विरासत को बढ़ावा मिलेगा।

    डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में बड़ी पहल के तहत एनपीसीआई इंटरनेशनल और इजरायल की एमएएसएवी के बीच यूपीआई को लागू करने पर समझौता हुआ। इससे दोनों देशों के बीच सीमा-पार रेमिटेंस को आसान बनाने की दिशा में कदम बढ़ेगा।

    कृषि, शिक्षा और वित्तीय सहयोग
    भारत-इजरायल इनोवेशन सेंटर फॉर एग्रीकल्चर की स्थापना के लिए आईसीएआर और एमएएसएचएवी के बीच समझौता हुआ। मत्स्य पालन और जलीय कृषि में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

    वित्तीय क्षेत्र में International Financial Services Centres Authority और Israel Securities Authority के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसके अलावा एआई आधारित शिक्षा, वाणिज्यिक मध्यस्थता और विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग को लेकर भी कई समझौते हुए, जिनमें Nalanda University और Hebrew University of Jerusalem के बीच एमओयू प्रमुख है।

  • बिकिनी पहनी दो महिलाओं के बीच लेटे दिखे स्टीफन हॉकिंग

    बिकिनी पहनी दो महिलाओं के बीच लेटे दिखे स्टीफन हॉकिंग

    वॉशिंगटन। अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के एक नए बैच के सार्वजनिक होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर बहस छिड़ गई है। इन दस्तावेजों के साथ सामने आई एक तस्वीर में प्रख्यात वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग दिखाई दे रहे हैं, जिससे सोशल मीडिया और मीडिया जगत में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

    तस्वीर में हॉकिंग दो महिलाओं के बीच लेटे हुए नजर आते हैं। दोनों महिलाओं ने स्विमवियर पहन रखा है और उनकी पहचान छिपाने के लिए चेहरों को काले रंग से ढका गया है। तीनों के हाथों में पेय पदार्थ दिखाई दे रहे हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि फोटो कब और किस संदर्भ में ली गई थी।

    अमेरिकी मीडिया, जिनमें New York Post भी शामिल है, ने इस तस्वीर का उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी पृष्ठभूमि और परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।

    परिवार ने आरोपों को बताया निराधार
    हॉकिंग के परिवार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रोफेसर हॉकिंग ने 20वीं सदी में भौतिकी के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया और वे मोटर न्यूरॉन बीमारी से दशकों तक जूझते रहे। बयान में किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार के संकेतों को “पूरी तरह गलत” बताया गया।


    स्टीफन हॉकिंग का 2018 में 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। वे लंबे समय तक गंभीर बीमारी के बावजूद वैज्ञानिक अनुसंधान और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे।

    2006 के सम्मेलन से जुड़ा संदर्भ
    रिपोर्ट्स के अनुसार, हॉकिंग उन वैज्ञानिकों के समूह में शामिल थे जिन्होंने मार्च 2006 में कैरिबियन क्षेत्र के सेंट थॉमस द्वीप पर आयोजित एक सम्मेलन में भाग लिया था। यह कार्यक्रम एपस्टीन द्वारा वित्तपोषित बताया जाता है और उस समय हुआ था जब उनके खिलाफ बाद में सामने आए आपराधिक आरोप सार्वजनिक नहीं हुए थे।

    पुराने आरोपों का भी हुआ जिक्र
    दस्तावेजों में अमेरिकी नागरिक वर्जीनिया गिउफ्रे के पूर्व आरोपों का भी उल्लेख मिलता है, जिनमें उन्होंने एपस्टीन नेटवर्क से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों पर सवाल उठाए थे। हालांकि, हॉकिंग के खिलाफ किसी भी आपराधिक कृत्य का आधिकारिक आरोप कभी सिद्ध नहीं हुआ।

  • पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में अफगानिस्तान की जवाबी कार्रवाई, 15 चौकियां कब्जे में लेने का दावा

    पाकिस्तान के हवाई हमलों के जवाब में अफगानिस्तान की जवाबी कार्रवाई, 15 चौकियां कब्जे में लेने का दावा

    नई दिल्ली।  पाकिस्तान द्वारा कथित हवाई हमलों के बाद अफगानिस्तान ने सीमा क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने बयान जारी कर कहा कि गुरुवार रात शुरू किए गए अभियान में दुश्मन की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है। उनके मुताबिक इस कार्रवाई में कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि कुछ को जिंदा पकड़ने का भी दावा किया गया है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    डूरंड लाइन पर ऑपरेशन, रणनीतिक बढ़त का दावा
    अफगान पक्ष का कहना है कि डूरंड लाइन के आसपास तैनात विशेष इकाइयों ने अत्याधुनिक उपकरणों के साथ अभियान चलाया। बयान में कहा गया कि रात के अंधेरे में दुश्मन की गतिविधियों को निशाना बनाया जा रहा है और सीमा पर रणनीतिक बढ़त हासिल की जा रही है। क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बताए जा रहे हैं।

    पहले हुए थे हवाई हमले, नागरिक हताहत
    तनाव की पृष्ठभूमि में हालिया हवाई हमलों की घटना है। United Nations Assistance Mission in Afghanistan (यूएनएएमए) ने पुष्टि की थी कि पाकिस्तान के सैन्य हमलों में अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में 13 नागरिकों की मौत हुई। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जबकि सात अन्य घायल हुए थे। ये हमले 21-22 फरवरी की दरमियानी रात नंगरहार के बेहसूद और खोगियानी जिलों में किए गए बताए गए।

    स्कूल और मस्जिद भी निशाने पर
    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पक्तिका के बरमल क्षेत्र में एक स्कूल और मस्जिद को निशाना बनाया गया, जबकि ओर्गुन जिले में एक रिहायशी घर पर भी एयर स्ट्राइक की गई। इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी सीमा विवाद और अधिक गहरा गया है।

    आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
    अफगानिस्तान के दावों और पाकिस्तान की चुप्पी के बीच स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। स्वतंत्र स्रोतों से 15 चौकियों पर कब्जे की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात नहीं संभले तो क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

  • ट्रंप ने यूक्रेन और ईरान वार्ता की कमान अपने दामाद और दोस्त के हाथों में सौंपी

    ट्रंप ने यूक्रेन और ईरान वार्ता की कमान अपने दामाद और दोस्त के हाथों में सौंपी


    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दामाद जेरेड कुश्नर और पुराने मित्र स्टीव विटकॉफ को दुनिया के दो सबसे बड़े संकटों यूक्रेन युद्ध और ईरान के तनाव को संभालने की जिम्मेदारी दी है। गुरुवार को दोनों ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अलग-अलग बैठकों में इन मुद्दों पर चर्चा की।

    जिनेवा में व्यस्त कूटनीतिक दौरा
    कुश्नर और विटकॉफ ने अपने जिनेवा दौरे की शुरुआत ओमान के राजदूत के आवास से की जहां उन्होंने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की। इसका उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक समझौते पर मुहर लगाना और अमेरिका तथा इजरायल द्वारा संभावित हमलों को रोकना था। इसके कुछ ही घंटों बाद दोनों ने इंटरकॉन्टिनेंटल होटल में यूक्रेनी अधिकारियों से बैठक की। रूसी आक्रमण अब अपने पांचवें वर्ष में है इसलिए यह वार्ता बेहद अहम मानी जा रही थी। इसके बाद फोर सीजन्स होटल में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मंजिलों पर मुलाकात की गई। शाम तक दोनों फिर से ओमान के राजदूत के आवास लौटे और गुरुवार देर रात अमेरिका के लिए रवाना हुए।

    गाजा शांति समझौते में भूमिका

    कुश्नर और विटकॉफ की जिम्मेदारी केवल यूरोप या ईरान तक सीमित नहीं है। एक सप्ताह से भी कम समय पहले उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की उद्घाटन बैठक में हिस्सा लिया था। यह संस्था गाजा पट्टी में हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

    ट्रंप की कूटनीतिक रणनीति
    ट्रंप की यह कवायद उनकी कूटनीतिक रणनीति को साफ दर्शाती है। वे अमेरिकी सरकार के पारंपरिक तंत्र पर भरोसा करने की बजाय अपनी सबसे अहम प्राथमिकताओं के लिए भरोसेमंद सहयोगियों दामाद और मित्र पर निर्भर हैं।

    विशेषज्ञों की चिंता और वाइट हाउस का बचाव

    कई विशेषज्ञों ने कहा है कि तीन बड़े और जटिल मुद्दों को केवल दो लोग संभालना चुनौतीपूर्ण है। ‘कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस’ के वरिष्ठ फेलो आरोन डेविड मिलर ने कहा कि हर वार्ता स्वयं में कई जटिल विवरणों का महासागर है। वहीं वाइट हाउस के एक अधिकारी ने इनका बचाव करते हुए कहा कि कुश्नर और विटकॉफ का सफलता का ट्रैक रिकॉर्ड और समय प्रबंधन उन्हें इन जिम्मेदारियों के लिए सक्षम बनाता है। दोनों को नियमित रूप से खुफिया ब्रीफिंग भी दी जाती है।

    व्यावसायिक हितों पर उठ रहे सवाल

    दोनों के बड़े व्यावसायिक हितों के कारण उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जेरेड कुश्नर की निवेश फर्म ‘एफिनिटी पार्टनर्स’ अरबों डॉलर का प्रबंधन करती है जिसमें कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड का पैसा शामिल है। स्टीव विटकॉफ की क्रिप्टो फर्म ‘वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल’ में हिस्सेदारी है जो अबू धाबी सरकार से जुड़े फंड्स के साथ मध्य पूर्व में सौदे कर रही है। इसके अलावा विटकॉफ और रूस के वार्ताकार किरिल दिमित्रीव ने युद्ध के बाद आर्थिक समझौतों पर चर्चा की। रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने कहा कि ये अच्छे व्यापारी हो सकते हैं लेकिन सीनेट की मंजूरी या सरकारी निगरानी के अधीन नहीं हैं।

    यूक्रेन का नजरिया

    यूक्रेन ने कुश्नर और विटकॉफ की भागीदारी का स्वागत किया है। मार्च की शुरुआत में रूसी अधिकारियों के साथ अगली त्रिपक्षीय चर्चा की उम्मीद है जिससे राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन की बैठक का रास्ता साफ हो सके। अमेरिका में यूक्रेन की राजदूत ओल्गा स्टेफनिशिना ने कहा कि सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से संपर्क होने की वजह से वे दोनों उनके लिए उपयोगी हैं। हालांकि ट्रंप के पहले कार्यकाल में यूक्रेन वार्ता के विशेष दूत रहे कर्ट वोल्कर ने माना कि सीधा संपर्क सकारात्मक है लेकिन कुश्नर और विटकॉफ को इन मुद्दों की पूरी गहन समझ नहीं है।

  • इस कंपनी ने 4000 कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता… 25% उछले शेयर

    इस कंपनी ने 4000 कर्मचारियों को दिखाया बाहर का रास्ता… 25% उछले शेयर

    वाशिंगटन। ट्विटर के को-फाउंडर (Twitter Co-Founder) जैक डोर्सी (J
    ack Dorsey) की कंपनी ब्लॉक इंक (Blockchain Inc) ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने 4,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला किया है। गुरुवार, 26 फरवरी को आई इस खबर के बाद कंपनी के शेयरों में वॉल स्ट्रीट पर 25% की जबरदस्त उछाल देखी गई। कंपनी का कहना है कि यह कटौती उसके कुल कर्मचारियों की संख्या को 10,000 से घटाकर लगभग 6,000 कर देगी।


    डोर्सी ने क्या कहा? ‘यह फैसला मुश्किल है, लेकिन जरूरी’

    शेयरधारकों को लिखे एक पत्र में जैक डोर्सी ने इस फैसले को “बेहद मुश्किल” बताया। कंपनी की सीएफओ अमृता आहूजा के मुताबिक, यह कदम कंपनी को लंबी अवधि की वृद्धि के अगले चरण के लिए तैयार करेगा। दिसंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, ब्लॉक में कुल 10,205 कर्मचारी कार्यरत थे।


    प्रभावित कर्मचारियों को मिलेगा यह मुआवजा पैकेज

    डोर्सी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अलग से बताया कि नौकरी जाने से प्रभावित लोगों को 20 सप्ताह का वेतन और कंपनी में बिताए हर साल के लिए एक अतिरिक्त सप्ताह का वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा, उन्हें मई के अंत तक के लिए इक्विटी, छह महीने का स्वास्थ्य बीमा, कंपनी के डिवाइस और संक्रमण में मदद के लिए 5,000 डॉलर की अतिरिक्त राशि भी प्रदान की जाएगी।

    कंपनी पर कितना पड़ेगा खर्च?
    छंटनी के इस पूरे अभियान के चलते ब्लॉक पर लगभग 500 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च आएगा। इसमें ज्यादातर राशि विच्छेद भुगतान, कर्मचारी लाभ और कुछ गैर-नकद खर्च शामिल हैं, जिसका असर अगली तिमाही के वित्तीय नतीजों में देखने को मिलेगा।


    AI का बढ़ता प्रभाव: क्या यही है बड़ी वजह?

    ब्लॉक के सह-सीईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला कंपनी के संकट में होने की वजह से नहीं लिया गया है। डोर्सी ने लिखा, “हम पहले से ही देख रहे हैं कि हम जो इंटेलिजेंस टूल (AI) बना और इस्तेमाल कर रहे हैं, वे छोटी टीमों के साथ मिलकर काम करने का एक नया तरीका सक्षम कर रहे हैं। यह मूल रूप से बदल रहा है कि किसी कंपनी को बनाने और चलाने का क्या मतलब है, और यह बदलाव तेजी से हो रहा है।” उनका कहना है कि अन्य कंपनियां भी इसी तरह अपने कार्यबल में बदलाव कर सकती हैं क्योंकि ये AI उपकरण उनके लिए दक्षता में बढ़ोतरी ला रहे हैं।


    AI के चलते छंटनी करने वाली कंपनियों की लिस्ट में शामिल हुआ ब्लॉक

    ब्लॉक, जो एक वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी है, अब उन कंपनियों की सूची में शामिल हो गई है, जिन्होंने AI के कारण अपने कार्यबल में बदलाव का हवाला देते हुए छंटनी की घोषणा की है। इससे पहले Pinterest, CrowdStrike और Chegg जैसी कंपनियां भी इस सूची में शामिल हो चुकी हैं। कंपनी ने यह घोषणा अपने चौथी तिमाही के नतीजों के साथ की, जो काफी हद तक उम्मीदों के अनुरूप रहे।

  • इस देश में खुलेआम किस करने पर दो महिलाएं गिरफ्तार… यहां समलैंगिकता है जघन्य अपराध!

    इस देश में खुलेआम किस करने पर दो महिलाएं गिरफ्तार… यहां समलैंगिकता है जघन्य अपराध!


    कंपाला।
    दुनिया में आज भी कई ऐसे देश हैं, जिनमें समलैंगिकता (Homosexuality) को जघन्य अपराध माना जाता है। अफ्रीकी देश युगांडा (African Country Uganda) भी उन्हीं देशों में से एक है। यहां पर दो युवा महिलाओं (Two Young Women) को खुले आम प्यार का इजहार करना महंगा पड़ गया। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महिलाओं को किस करते हुए देखा गया, चूंकि यह देश के कानून के खिलाफ है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

    पुलिस के बयान के मुताबिक एक महिला की उम्र करीब 22 साल है, जबकि दूसरी की उम्र करीब 21 साल है। दोनों को देश के अरुआ शहर से गिरफ्तार किया गया है, जहां पर वह खुले आम किस करने और असामान्य कृत्यों में संलिप्त थीं, जिन्हें यौन प्रकृति का माना जाता है।

    आपको बता दें, युगांडा में वर्ष 2023 में एंटी होमोसेक्सुएलिटी एक्ट लागू किया गया है। देश की सरकार द्वारा लागू किए गए इस कानून का पश्चिमी देशों ने भरपूर विरोध किया था लेकिन यहां की सरकार सबसे कठोर एलजीबीटीक्यू विरोधी कानून लागू करने पर लगी हुई है। इस कानून के तहत समलैंगिक संबंध रखने वाले लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है, जबकि गंभीर मामलों में मृत्युदंड का भी प्रावधान है।


    बार-बार पकड़े जाने पर मृत्युदंड का प्रावधान
    समलैंगिक संबंधों को लेकर युगांड़ा का कानून सबसे ज्यादा कठोर है। 2023 में पारित किए गए कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति बार-बार समलैंगिक संबंध बनाते पकड़ा जाता है, या ऐसा समलैंगिक संबंध जिससे लाइलाज बीमारी फैलती हो, नाबालिग, बुजुर्ग या दिव्यांग व्यक्ति के साथ समलैंगिक संबंध बनाने पर व्यक्ति को मृत्युदंड दिया जा सकता है।

    गौरतलब है कि युगांडा पूर्वी अफ्रीका का एक रूढ़िवादी और मुख्यतः ईसाई बहुल देश है। इस कानून के कारण मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में व्यापक आक्रोश फैल गया था और संयुक्त राष्ट्र तथा पश्चिमी देशों ने इसकी निंदा की थी। विश्व बैंक ने देश को दी जाने वाली वित्तीय सहायता निलंबित कर दी थी, हालांकि 2025 के मध्य में इसे फिर से बहाल कर दिया गया। इस महीने की शुरुआत में, एक युगांडा अदालत ने “गंभीर समलैंगिकता” श्रेणी के तहत आरोपित पहले व्यक्ति के खिलाफ मामला खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि लंबी न्यायिक हिरासत के कारण उसकी मानसिक स्थिति अस्थिर हो गई थी।

  • US से वार्ता के बीच रूस का यूक्रेन पर भयंकर हमला… रातभर में बरसाए 420 ड्रोन और 39 मिसाइल…

    US से वार्ता के बीच रूस का यूक्रेन पर भयंकर हमला… रातभर में बरसाए 420 ड्रोन और 39 मिसाइल…


    कीव।
    जिनेवा (Geneva) में अमेरिका (America) और यूक्रेन (Ukraine) के बीच चल रही वार्ता के बीच रूस ने कीव पर भयंकर हवाई हमला किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (President Volodymyr Zelensky) ने गुरुवार को कहा कि रूस (Russia) ने रात भर में यूक्रेन पर 420 ड्रोन और 39 मिसाइलों से हमला किया। यह हमला अमेरिकी और यूक्रेनी दूतों द्वारा जिनेवा में युद्ध समाप्त करने के लिए और अधिक बातचीत करने से कुछ घंटे पहले हुआ, जो अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। जेलेंस्की ने बताया कि इस हमले में 11 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं और यूक्रेन के आठ क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे तथा आवासीय इलाकों को निशाना बनाया गया। अधिकारियों के अनुसार, बच्चों सहित दर्जनों लोग घायल हुए हैं, हालांकि मृतकों की सटीक संख्या की तुरंत पुष्टि नहीं की गई।

    जेलेंस्की ने बुधवार देर रात कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की और शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में उनके प्रयासों तथा भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया। अमेरिका की मध्यस्थता में मॉस्को और कीव के बीच वार्ता जारी है, लेकिन रूस द्वारा दावा किए गए यूक्रेनी क्षेत्र के मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है। जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ शिखर सम्मेलन की मांग की है और कहा है कि आमने-सामने की बैठक किसी समझौते तक पहुंचने में निर्णायक साबित हो सकती है। हालांकि, क्रेमलिन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, सिवाय यूक्रेनी राष्ट्रपति को मॉस्को आमंत्रित करने के, जिसे जेलेंस्की ने ठुकरा दिया।

    ट्रंप के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने वार्ता में हिस्सा लिया। ये दोनों जिनेवा में ईरान के साथ परमाणु वार्ता पर विचार करने के बाद यूक्रेन युद्ध पर चर्चा के लिए पहुंचे थे। उन्होंने यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के प्रमुख रुस्तम उमेरोव से मुलाकात की। वे जेलेंस्की के साथ ट्रंप की बातचीत में भी शामिल हुए। उमेरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दूतों के साथ यूक्रेन को आर्थिक सहायता, पुनर्निर्माण, निवेश आकर्षित करने के तरीकों और दीर्घकालिक सहयोग के ढांचे पर चर्चा हुई। उनके अनुसार, बैठक में रूस को शामिल करके त्रिपक्षीय वार्ता के अगले दौर की तैयारियों पर भी विचार किया गया, साथ ही कैदियों के संभावित आदान-प्रदान पर भी बात हुई।

    जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने पोल्टावा क्षेत्र में गैस बुनियादी ढांचे तथा कीव और ड्नीप्रो क्षेत्रों में बिजली सबस्टेशनों पर हमला किया। राजधानी कीव सहित पांच अन्य क्षेत्रों में आपातकालीन दल मौके पर पहुंचे। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली ने रूस की अधिकांश मिसाइलों को मार गिराया और पश्चिमी सहयोगियों को समय पर अतिरिक्त वायु रक्षा हथियारों की आपूर्ति के लिए धन्यवाद दिया। रूस की बड़ी सेना के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के लिए यूक्रेन को विदेशी मदद की सख्त जरूरत है।

    यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने सहयोगी देशों से अधिक सैन्य सहायता देने की अपील की। उन्होंने विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर पोस्ट में कहा कि जब पूरी दुनिया मॉस्को से इस व्यर्थ युद्ध को रोकने की मांग कर रही है, तो पुतिन और अधिक आतंक, हमलों और आक्रामकता पर उतारू हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी वायु रक्षा ने रात भर में कई रूसी क्षेत्रों के साथ-साथ काला सागर और आज़ोव सागर के ऊपर 17 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। यूक्रेन के स्वदेशी लंबी दूरी के ड्रोन ने रूस के अंदरूनी इलाकों में तेल रिफाइनरियों, ईंधन डिपो और सैन्य रसद केंद्रों पर हमले किए हैं।


    रूस और यूक्रेन ने सैनिकों के शवों का किया आदान-प्रदान

    गौरतलब है कि पिछली वार्ताओं में रूसी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख व्लादिमीर मेदिंस्की ने गुरुवार को बताया कि रूस ने 1000 शहीद यूक्रेनी सैनिकों के शव यूक्रेन को सौंपे और बदले में अपने 35 शहीद सैनिकों के शव वापस लिए। उन्होंने यह नहीं बताया कि यह आदान-प्रदान कब हुआ। बाद में यूक्रेन के युद्धबंदियों के समन्वय मुख्यालय ने शवों की वापसी की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने कहा कि रूसी पक्ष की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ये यूक्रेनी रक्षकों के हो सकते हैं।

  • US में F-35 का रिटायर्ड पायलट गिरफ्तार, चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त प्रशिक्षण देने का आरोप

    US में F-35 का रिटायर्ड पायलट गिरफ्तार, चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त प्रशिक्षण देने का आरोप


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पर पूर्व अमेरिकी वायु सेना (American Air Force) के एलीट फाइटर पायलट और एफ-35 प्रशिक्षक (F-35 Trainer) गेराल्ड एडी ब्राउन जूनियर को चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त रूप से लड़ाकू प्रशिक्षण देने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि उन्हें शस्त्र निर्यात नियंत्रण अधिनियम (AECA) के उल्लंघन के तहत आरोपित किया गया है। उन्हें 26 फरवरी 2026 को इंडियाना के दक्षिणी जिले में मजिस्ट्रेट जज के समक्ष पेश किया जाना है।

    राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन ए आइजेनबर्ग ने कहा कि अमेरिकी वायु सेना ने मेजर ब्राउन को एक विशिष्ट लड़ाकू पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया था और राष्ट्र की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब उन पर चीनी सैन्य पायलटों को प्रशिक्षण देने का आरोप है। न्याय विभाग के अनुसार, 24 वर्ष से अधिक समय तक अमेरिकी वायु सेना में सेवा देने वाले पूर्व एफ-35 प्रशिक्षक पायलट ब्राउन ने कथित तौर पर अगस्त 2023 से चीनी सैन्य पायलटों (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स – PLAAF) को लड़ाकू विमान प्रशिक्षण प्रदान करने की साजिश रची। यह प्रशिक्षण अंतर्राष्ट्रीय शस्त्र व्यापार विनियम (ITAR) के तहत रक्षा सेवा माना जाता है, जिसके लिए स्टेट डिपार्टमेंट से लाइसेंस जरूरी था, जो ब्राउन के पास नहीं था।

    ब्राउन के सैन्य करियर में संवेदनशील इकाइयों का नेतृत्व, युद्ध अभियानों का संचालन और एफ-4, एफ-15, एफ-16, ए-10 तथा एफ-35 जैसे विमानों पर लड़ाकू पायलट एवं सिम्युलेटर प्रशिक्षक के रूप में सेवा शामिल थी। 1996 में सक्रिय सेवा छोड़ने के बाद उन्होंने वाणिज्यिक पायलट और अमेरिकी रक्षा ठेकेदारों के लिए अनुबंध सिम्युलेटर प्रशिक्षक के तौर पर काम किया। दिसंबर 2023 में ब्राउन चीन गए, जहां उन्होंने PLAAF पायलटों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। शिकायत के मुताबिक, पहले दिन उन्होंने अमेरिकी वायु सेना के बारे में तीन घंटे तक सवालों के जवाब दिए, दूसरे दिन खुद के बारे में प्रस्तुति दी, और फरवरी 2026 की शुरुआत तक अमेरिका लौटने तक सिम्युलेटर एवं उड़ान प्रशिक्षण संचालित किया। उन्होंने अमेरिकी वायु सेना के अभियानों पर विस्तृत जानकारी भी साझा की।

    एफबीआई के काउंटरइंटेलिजेंस और जासूसी प्रभाग के सहायक निदेशक रोमन रोजहाव्स्की ने कहा कि ब्राउन ने कथित तौर पर अपने देश के साथ विश्वासघात किया, क्योंकि उन्होंने चीनी पायलटों को उन लोगों के खिलाफ लड़ने का प्रशिक्षण दिया जिनकी रक्षा करने की उन्होंने शपथ ली थी। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ है। यह गिरफ्तारी 2017 में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के पूर्व पायलट डैनियल एडमंड डुग्गन के खिलाफ इसी तरह के आरोपों के बाद हुई है। न्याय विभाग ने जोर दिया कि चीन अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नाटो और सहयोगी देशों के वर्तमान एवं पूर्व सैन्य कर्मियों को निशाना बनाना जारी रखे हुए है।

  • अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दागी नई बैलिस्टिक मिसाइल

    अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दागी नई बैलिस्टिक मिसाइल


    वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने नई सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है।
    ‘खैबर’ नाम की इस चौथी पीढ़ी की मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 2000 किलोमीटर बताई जा रही है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार मिसाइल का प्रक्षेपण एक गोपनीय स्थान से किया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्रीय सुरक्षा हालात संवेदनशील बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच सैन्य तथा कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। अमेरिका की ओर से खाड़ी क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की खबरें भी सामने आती रही हैं।

    परमाणु वार्ता का तीसरा दौर शुरू

    इसी बीच दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता का तीसरा दौर जेनेवा में शुरू हुआ। यह बातचीत ओमान की मध्यस्थता में हो रही है। वार्ता का उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करना और कूटनीतिक समाधान तलाशना है।

    ईरान ने परमाणु हथियार बनाने से किया इनकार

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि उनका देश परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम नहीं कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई पहले ही परमाणु हथियारों के विकास पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।

    पेजेशकियन के अनुसार, “जब सर्वोच्च नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु हथियार नहीं बनाए जाएंगे, तो ईरान उसी नीति पर कायम है।”

    पुराना विवाद, नई कोशिश

    गौरतलब है कि 2000 के दशक की शुरुआत में खामेनेई ने एक धार्मिक आदेश (फतवा) जारी कर परमाणु हथियारों के निर्माण को प्रतिबंधित बताया था। इसके बावजूद अमेरिका लगातार ईरान पर परमाणु क्षमता हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाता रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार, एक ओर जहां मिसाइल परीक्षण शक्ति प्रदर्शन का संकेत है, वहीं दूसरी ओर जारी कूटनीतिक वार्ता इस बात का संकेत देती है कि दोनों देश टकराव से बचते हुए समाधान की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं।

  • भारतीय सिनेमा का गौरव: ‘बूंग’ फिल्म ने BAFTA 2026 में चिल्ड्रन्स एंड फैमिली कैटेगरी में धमाकेदार सफलता

    भारतीय सिनेमा का गौरव: ‘बूंग’ फिल्म ने BAFTA 2026 में चिल्ड्रन्स एंड फैमिली कैटेगरी में धमाकेदार सफलता


    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का पल आया है, जब लक्ष्मीप्रिया देवी की फिल्म बूंग ने BAFTA फिल्म अवार्ड्स 2026 में सर्वश्रेष्ठ चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म का पुरस्कार जीता। सूचना और प्रसारण मंत्रालय और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने फिल्म निर्माता लक्ष्मीप्रिया देवी और बूंग की पूरी टीम को इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई दी।

    बूंग की सफलता भारतीय सिनेमा की विविधता और सार्थक कहानी कहने की परंपरा को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का प्रतीक है। यह पुरस्कार न केवल फिल्म के निर्माता और कलाकारों के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग की गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर बढ़ती सराहना को भी दर्शाता है।

    आपको बता दें कि बूंग की यात्रा 2023 में शुरू हुई थी। फिल्म को वर्क इन प्रोग्रेस लैब और फिल्म बाजार रिकमेंड्स के तहत फिल्म बाजार में पेश किया गया था। यह पहल होनहार फिल्म निर्माताओं को आगे बढ़ाने और उन्हें वैश्विक उद्योग से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी। इसके बाद फिल्म को 2024 में 55वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित किया गया, जहां इसे सर्वश्रेष्ठ डेब्यू डायरेक्टर कैटेगरी में चुना गया। इस सफलता ने फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समालोचक प्रशंसा दिलाई और इसकी पहचान पक्की की।

    सूचना और प्रसारण मंत्रालय और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने फिल्म के निर्माण और प्रदर्शन में सहयोग करने वाले विभिन्न प्लेटफॉर्म्स की भी सराहना की। फिल्म बाजार, वर्क इन प्रोग्रेस लैब और भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जैसे प्लेटफॉर्म फिल्म निर्माताओं को वैश्विक दर्शकों से जोड़ते हैं और रचनात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देते हैं। इस प्रकार बूंग ने न केवल अपने कंटेंट के दम पर नाम कमाया बल्कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की अंतर्राष्ट्रीय पहुंच को भी मजबूती दी।

    फिल्म के निर्माता लक्ष्मीप्रिया देवी ने कहा कि यह पुरस्कार उनकी पूरी टीम की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बूंग की कहानी बच्चों और परिवारों को जोड़ने के साथ-साथ जीवन के सकारात्मक संदेश देती है। इस पुरस्कार से भारतीय सिनेमा की नई और विविध कथाओं को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बूंग जैसी फिल्मों की सफलता यह दर्शाती है कि भारतीय फिल्म उद्योग केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक दर्शकों के लिए उच्च गुणवत्ता, भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक मूल्य भी पेश कर सकता है। इस उपलब्धि से फिल्म निर्माताओं में नए प्रोजेक्ट्स और नवाचार के लिए प्रेरणा मिलेगी।