Category: International

  • जापान में 7.4 तीव्रता का भूकंप, तटीय इलाकों में सुनामी का अलर्ट जारी

    जापान में 7.4 तीव्रता का भूकंप, तटीय इलाकों में सुनामी का अलर्ट जारी


    नई दिल्ली। जापान के उत्तरी हिस्से में सोमवार को जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.4 मापी गई जिससे कई इलाकों में दहशत फैल गई। नेशनल ब्रॉडकास्टर NHK के मुताबिक भूकंप के तुरंत बाद तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी का अलर्ट जारी कर दिया गया।
    अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इवाते प्रीफेक्चर और होक्काइडो के कुछ हिस्सों में समुद्री लहरें करीब 3 मीटर तक ऊंची उठ सकती हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर चले जाएं।

    सरकार और आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन संभावित नुकसान का आकलन करने में जुटा हुआ है। जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि सुनामी की लहरें तट तक पहुंचना शुरू हो चुकी हैं और ये एक बार नहीं बल्कि कई बार आ सकती हैं। ऐसे में लोगों को बिना देरी किए प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की सलाह दी गई है।

  • भारत श्रीलंका संबंधों ,को नई मजबूती तमिल समुदाय के लिए हाउसिंग प्रोजेक्ट ,और कई अहम समझौते

    भारत श्रीलंका संबंधों ,को नई मजबूती तमिल समुदाय के लिए हाउसिंग प्रोजेक्ट ,और कई अहम समझौते


    नई दिल्ली । भारत और श्रीलंका के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने श्रीलंका के दौरे के दौरान कई अहम कार्यक्रमों में भाग लिया। अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने नुवारा एलिया पहुंचकर भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लिए चलाई जा रही आवास परियोजना का जायजा लिया। यह परियोजना भारत द्वारा श्रीलंका में चलाए जा रहे व्यापक विकास सहयोग कार्यक्रम का हिस्सा है जिसका उद्देश्य तमिल समुदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।

    नुवारा एलिया में उपराष्ट्रपति ने इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट की विभिन्न साइट्स का निरीक्षण किया और वहां चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। यह परियोजना खास तौर पर प्लांटेशन क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय मूल के तमिल परिवारों को बेहतर आवास सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई है। इसके तहत हजारों परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए जा रहे हैं जिससे उनके जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

    इससे पहले उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ साथ सांस्कृतिक और विकासात्मक सहयोग को बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों यानी एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए जो स्वास्थ्य शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देंगे।

    इन समझौतों में मुल्लैतिवु में एक आधुनिक मेडिकल वार्ड कॉम्प्लेक्स का निर्माण शामिल है जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा पूर्वी प्रांत में महिला सशक्तीकरण के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने और विभिन्न अस्पतालों में विशेष यूनिट विकसित करने जैसे कदम भी उठाए जाएंगे। साथ ही कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग क्लस्टर और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेद गांव विकसित करने की योजना भी शामिल है।

    भारत और श्रीलंका के बीच हुई घोषणाओं में भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लिए ओसीआई सुविधा को छठी पीढ़ी तक बढ़ाने का फैसला भी अहम माना जा रहा है। इससे इस समुदाय के लोगों को भारत से जुड़े अधिकार और सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी होगी। इसके अलावा इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट के तीसरे चरण के पूरा होने की घोषणा भी की गई जिसमें हजारों घर बनाए गए हैं।

    रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी सहयोग को बढ़ावा देते हुए नॉर्दर्न रेलवे लाइन पर ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने और विभिन्न प्रांतों में पुलों के निर्माण की घोषणा की गई है। वहीं छात्रों के लिए स्कॉलरशिप बढ़ाने और श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस में शामिल होने की सहमति भी दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।

    यह दौरा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ केवल कूटनीतिक संबंध ही नहीं बल्कि विकास और मानवीय सहयोग को भी प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं का लाभ सीधे तौर पर श्रीलंका के तमिल समुदाय और अन्य स्थानीय नागरिकों को मिलेगा जिससे दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत होंगे।

  • समुद्र में सियासी संग्राम ,अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान का कड़ा रुख, बोला मुंहतोड़ जवाब देंगे

    समुद्र में सियासी संग्राम ,अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान का कड़ा रुख, बोला मुंहतोड़ जवाब देंगे

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है जहां अमेरिका और ईरान के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना द्वारा एक ईरानी जहाज को जब्त किए जाने के बाद हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सीधी उकसावे वाली कार्रवाई बताया है और जवाब देने की चेतावनी दी है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि ईरान के झंडे वाला एक बड़ा कार्गो जहाज अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था। उनके अनुसार लगभग 900 फीट लंबे इस जहाज को रोकने के लिए पहले चेतावनी दी गई लेकिन जब जहाज के क्रू ने निर्देशों का पालन नहीं किया तो अमेरिकी नौसेना को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।

    बताया जा रहा है कि अमेरिकी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Spruance ने जहाज को रोकने के लिए उसके इंजन रूम को निशाना बनाया जिससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया। इसके बाद अमेरिकी मरीन ने जहाज को अपने कब्जे में ले लिया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इस जहाज पर पहले से वित्तीय प्रतिबंध लगे हुए थे और यह गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहा है।

    वहीं दूसरी ओर ईरान ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गलत बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ईरानी सेना ने इसे समुद्री रास्ते में की गई डकैती करार दिया है और आरोप लगाया है कि अमेरिका ने न केवल जहाज को रोका बल्कि उसके नेविगेशन सिस्टम को भी नुकसान पहुंचाया और उस पर सैन्य कब्जा कर लिया। ईरान के सरकारी माध्यमों के जरिए जारी बयान में स्पष्ट कहा गया है कि इस कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा और जल्द ही जवाबी कदम उठाए जाएंगे।

    यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा चल रही थी। खबरों के अनुसार अमेरिका की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के इस्लामाबाद जाने वाला है जहां संभावित वार्ता हो सकती है। इस प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल बताए जा रहे हैं।

    हालांकि ईरान की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से इस बैठक की पुष्टि नहीं की गई है और वहां के मीडिया में भी इस पर संदेह जताया जा रहा है। ऐसे में यह घटना दोनों देशों के बीच संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर भी असर डाल सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान की खाड़ी जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा सकती है क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

    फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान अपनी चेतावनी को किस हद तक अमल में लाता है और क्या दोनों देश बातचीत के जरिए इस तनाव को कम करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं या यह टकराव और गंभीर रूप ले लेता है।

  • फिर चर्चा में ट्रंप का ‘नोबेल कनेक्शन’: मचाडो बोलीं—वह ऐसे नेता…

    फिर चर्चा में ट्रंप का ‘नोबेल कनेक्शन’: मचाडो बोलीं—वह ऐसे नेता…

    वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप और नोबेल पुरस्कार को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार वजह बनी हैं कोरिना मचाडो, जिन्होंने ट्रंप की खुलकर तारीफ करते हुए उन्हें ऐसा नेता बताया है, जिसने वेनेजुएला की आज़ादी के लिए जोखिम उठाया।
    मचाडो ने क्या कहा?

    मैड्रिड में आयोजित एक कार्यक्रम में मचाडो ने कहा कि दुनिया ट्रंप को ऐसे नेता के रूप में देखती है, जिन्होंने वेनेजुएला को तानाशाही से मुक्त कराने के प्रयास में अपने देश के नागरिकों की जान तक खतरे में डाली।
    उन्होंने यह भी साफ किया कि अपने फैसलों को लेकर उन्हें कोई पछतावा नहीं है।

    ‘नोबेल पदक’ को लेकर क्यों मचा विवाद?

    रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में मचाडो को नोबेल शांति पुरस्कार मिला था, जिसके बाद उन्होंने अपना पदक ट्रंप को सौंप दिया।

    इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी।

    हालांकि, नोबेल समिति ने स्पष्ट किया कि

    पुरस्कार किसी एक व्यक्ति को ही दिया जाता है
    इसे न ट्रांसफर किया जा सकता है, न साझा

    यानी पदक भले किसी के पास हो, लेकिन सम्मान का अधिकार मूल विजेता के पास ही रहता है।

    ट्रंप और नोबेल—पुराना रिश्ता

    ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर चर्चा में रहे हैं।

    उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोकने का दावा करते हुए खुद को इस पुरस्कार का दावेदार बताया था।

    लेकिन समिति ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए उनके नाम पर विचार नहीं किया।

    वेनेजुएला की राजनीति भी बनी वजह

    इस पूरे मामले के पीछे निकोलस मादुरो सरकार के खिलाफ अमेरिकी रुख भी एक अहम कारण रहा। मचाडो ने इसे वेनेजुएला के लिए ऐतिहासिक बताया, जबकि कई विशेषज्ञ इसे राजनीतिक रणनीति मानते हैं।

    ट्रंप और नोबेल पुरस्कार को लेकर विवाद नया नहीं है, लेकिन मचाडो के ताजा बयान ने इसे फिर सुर्खियों में ला दिया है। यह मामला सिर्फ एक पदक का नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति, छवि और प्रभाव की जंग का हिस्सा बन चुका है।
  • अंतरिक्ष में भारतीय संस्कृति की झलक, स्पेस स्टेशन पर हुआ बिहू डांस वायरल

    अंतरिक्ष में भारतीय संस्कृति की झलक, स्पेस स्टेशन पर हुआ बिहू डांस वायरल


    नई दिल्ली। अंतरिक्ष की शून्यता में जब धरती की संस्कृति की झलक दिखे तो वह पल अपने आप में खास बन जाता है। ऐसा ही एक अनोखा दृश्य तब देखने को मिला जब माइक फिंके ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर बिहू नृत्य कर सभी को चौंका दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में फिंके पारंपरिक असमिया ‘गमोसा’ पहने नजर आते हैं और बिहू गीत की धुन पर थिरकते दिखाई देते हैं। खास बात यह है कि फिंके का असम से निजी जुड़ाव भी है उनकी पत्नी रेनिता सैकिया असम की रहने वाली हैं, जिसके चलते यह प्रस्तुति और भी भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण बन जाती है। अंतरिक्ष जैसे वैज्ञानिक माहौल में इस तरह भारतीय लोकसंस्कृति की झलक देखना लोगों के लिए गर्व का विषय बन गया है।

    सीएम सरमा ने की सराहना, बोले असम की संस्कृति का वैश्विक सम्मान
    इस अनोखे प्रदर्शन की सराहना करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वीडियो साझा किया। उन्होंने ‘बिहू बिनंदिया’ टैग के साथ लिखा कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में बिहू नृत्य देखना असम की संस्कृति के लिए गौरव का क्षण है। सरमा ने फिंके के इस प्रयास को असमिया परंपरा के प्रति सम्मान बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिहू पर दिए गए विशेष ध्यान के बाद अब इस त्योहार को वैश्विक पहचान मिल रही है। गौरतलब है कि असम में हर साल रोंगाली बिहू के अवसर पर नववर्ष का स्वागत बड़े उत्साह से किया जाता है और यह त्योहार राज्य की पहचान बन चुका है।

    पहले भी दिखा चुके हैं अंतरिक्ष में भारतीय संस्कृति की झलक
    यह पहला मौका नहीं है जब माइक फिंके ने अंतरिक्ष में भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन किया हो। इससे पहले भी वे अपनी एक अंतरिक्ष यात्रा के दौरान बिहू नृत्य का वीडियो साझा कर चुके हैं। चार अंतरिक्ष मिशनों का हिस्सा रह चुके फिंके ने जनवरी के मध्य में अपनी हालिया उड़ान पूरी की थी। हालांकि, वायरल हो रहा यह नया वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। फिर भी यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और लोग इसे संस्कृति और विज्ञान के अनोखे संगम के रूप में देख रहे हैं।

    ‘बिहू बिनंदिया’ से बना विश्व रिकॉर्ड, पीएम मोदी भी रहे साक्षी
    असम में बिहू को लेकर उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल 2023 में गुवाहाटी में लगभग 10,000 कलाकारों ने एक साथ ‘बिहू बिनंदिया’ प्रस्तुति देकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इस ऐतिहासिक आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे थे। अब जब अंतरिक्ष तक बिहू की गूंज पहुंच चुकी है, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि असम की यह पारंपरिक कला वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों को छू रही है।

  • UAE का भारी-भरकम कर्ज चुकाने की तैयारी में पाकिस्तान…. US-ईरान की डील से हुआ मालामाल

    UAE का भारी-भरकम कर्ज चुकाने की तैयारी में पाकिस्तान…. US-ईरान की डील से हुआ मालामाल


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) 23 अप्रैल तक संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.- UAE) का 1.5 अरब डॉलर का बकाया कर्ज चुकाने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक (Central Bank) स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (State Bank of Pakistan.-SBP) ने शनिवार को कहा कि वह 3.5 अरब डॉलर के कर्ज में से बाकी बची राशि को तय समयसीमा तक लौटा देगा। इससे पहले पाकिस्तान ने यूएई को 2 अरब डॉलर का भुगतान कर दिया है। यह भुगतान उस समय किया गया जब सऊदी अरब ने अपनी सहायता के तहत 3 अरब डॉलर में से 2 अरब डॉलर की राशि SBP में जमा कराई। बताया गया कि मध्यस्थता की भूमिका के चलते पाकिस्तान को सऊदी अरब से यह मोटी धनराशि मिली।

    SBP के प्रवक्ता के अनुसार, यूएई की ओर से जमा की गई 3.5 अरब डॉलर की राशि में से 2 अरब डॉलर की अवधि पूरी होने पर वापस कर दी गई है और शेष 1.5 अरब डॉलर 23 अप्रैल तक चुकाने हैं। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने वाशिंगटन में कहा कि देश को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से लगभग 1.2 अरब डॉलर की अगली किश्त मिलने की उम्मीद है। IMF की कार्यकारी बोर्ड की बैठक मई के मध्य में प्रस्तावित है, जिसमें इस समझौते की समीक्षा होगी और अगली राशि जारी हो सकती है। यूएई ने पाकिस्तान को भुगतान संतुलन को संभालने के लिए 3.5 अरब डॉलर की सहायता दी थी। हाल ही में पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते UAE ने यह राशि जल्द वापस करने की मांग की थी।


    सऊदी अरब ने कैसे की पाकिस्तान की मदद

    वहीं, सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ 3 अरब डॉलर की जमा राशि की अवधि बढ़ाने का समझौता किया है, जिससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिला है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 27 मार्च तक पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 16.4 अरब डॉलर था, जो लगभग तीन महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। हालांकि, यूएई को भुगतान के कारण देश के बाहरी वित्तीय संसाधनों पर दबाव बना हुआ है।

    पाकिस्तान की ओर से UAE का कर्ज ऐसे समय चुकाया जा रहा है जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत होनी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी वार्ताकार सोमवार को ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचेंगे। होर्मुज स्ट्रेट वार्ता के पहले दौर के दौरान प्रमुख विवादों में से एक था। शनिवार को इसे लेकर जारी गतिरोध तब और बढ़ गया, जब ईरान ने संकरे जलमार्ग को पार करने की कोशिश कर रहे जहाजों पर गोलीबारी की, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखी।

  • Malaysia के इस राज्य में लगी भीषण आग में 1000 मकान जलकर राख… 9000 से ज्यादा लोग हुए बेघर

    Malaysia के इस राज्य में लगी भीषण आग में 1000 मकान जलकर राख… 9000 से ज्यादा लोग हुए बेघर


    कुआलालंपुर।
    मलेशिया (Malaysian) के सबाह (Sabah) राज्य के संडाकन जिले (Sandakan District) में रविवार को लगी भीषण आग ने एक गांव के करीब 1000 घरों को पूरी तरह राख कर दिया। बताया जा रहा है कि इस दुर्घटना में 9000 से अधिक लोग बेघर हो गए, हालांकि किसी की जान जाने की खबर नहीं है। दमकल विभाग के अनुसार, बोर्नियो द्वीप पर स्थित सबाह के संडाकन जिले में स्थित इस जल-आधारित गांव (वॉटर विलेज) में आग की सूचना रविवार तड़के लगभग 1.32 बजे (1732 जीएमटी) मिली। जिले के अग्निशमन और बचाव प्रमुख जिम्मी लगुंग (Jimmy Lagung) ने बयान में कहा कि तेज हवाओं और घरों की निकटता के कारण आग तेजी से फैल गई। कम ज्वार की वजह से खुले पानी का स्रोत प्राप्त करना भी मुश्किल हो गया।

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह आग सबाह के उन जल-आधारित गांवों में से एक में लगी, जहां खंभों पर बने लकड़ी के घर होते हैं। ये क्षेत्र देश के सबसे गरीब समुदायों का निवास स्थान है, जिसमें कई राज्यविहीन और स्वदेशी समूह शामिल हैं। संडाकन पुलिस ने राज्य समाचार एजेंसी बरनामा को बताया कि आग से 9000 से अधिक निवासी प्रभावित हुए हैं। हालांकि, अब तक किसी की मौत की कोई खबर नहीं है।

    रिपोर्ट के अनुसार, दमकल विभाग के अनुसार, आग पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं। फिलहाल मौके पर कई टीमें पहुंची हैं और हताहतों को मौके से निकालकर राहत केंद्रों में शिफ्ट किया जा रहा है। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम (Prime Minister Anwar Ibrahim) ने कहा कि संघीय सरकार प्रभावित लोगों को बुनियादी सहायता और अस्थायी पुनर्वास उपलब्ध कराने के लिए सबाह अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है। फेसबुक पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री इब्राहिम ने लिखा कि अभी प्राथमिकता पीड़ितों की सुरक्षा और मौके पर तत्काल सहायता प्रदान करना है।

  • US रिपोर्ट में दावा: ट्रंप प्रशासन के लिए ‘रेड फ्लैग’ हो सकते हैं जनरल मुनीर, ईरान से करीबी रिश्तों पर सवाल

    US रिपोर्ट में दावा: ट्रंप प्रशासन के लिए ‘रेड फ्लैग’ हो सकते हैं जनरल मुनीर, ईरान से करीबी रिश्तों पर सवाल


    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को लेकर अमेरिकी खुफिया तंत्र में चिंता जताई गई है।
    एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके ईरान के सैन्य नेतृत्व से पुराने संबंध डोनाल्ड ट्रंप के संभावित प्रशासन के लिए जोखिम बन सकते हैं। यह दावा Fox News की रिपोर्ट और अमेरिकी एजेंसियों के आकलन में सामने आया है।

    ईरान से गहरे संबंधों पर चिंता

    रिपोर्ट में कहा गया है कि जनरल मुनीर के ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारियों से लंबे समय से व्यक्तिगत रिश्ते रहे हैं। इनमें कासिम सुलेमानी और होसैन सलामी जैसे नाम शामिल बताए गए हैं। इन संबंधों को अमेरिकी हितों के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है।

    ‘बैकडोर डिप्लोमेसी’ में भूमिका

    बताया जा रहा है कि मौजूदा हालात में मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पर्दे के पीछे मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। उनका प्रयास दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने और बातचीत को आगे बढ़ाने का बताया गया है।

    ट्रंप की तारीफ, एजेंसियों की चिंता

    रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर मुनीर की तारीफ करते हुए उन्हें अपना ‘पसंदीदा फील्ड मार्शल’ कहा है। हालांकि, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि उनकी यह दोहरी भूमिका भविष्य में अमेरिकी रणनीतिक हितों को प्रभावित कर सकती है।

    पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड पर सवाल

    रिपोर्ट में पाकिस्तान के पिछले रिकॉर्ड को लेकर भी चिंता जताई गई है, खासकर अफगानिस्तान में उसकी भूमिका को लेकर।

    विश्लेषकों का कहना है कि इस्लामाबाद का इतिहास उसे पूरी तरह भरोसेमंद सहयोगी के रूप में स्थापित नहीं करता।

    विशेषज्ञों की चेतावनी

    विशेषज्ञ बिल रोगियो ने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान पर आंख बंद कर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि मुनीर के ईरानी सैन्य ढांचे से संबंध भविष्य में रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव बना हुआ है और पाकिस्तान की भूमिका पर नई बहस छिड़ गई है।

  • अमेरिका: रूस से तेल खरीदने की छूट पर घर में घिरे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, सांसद बोले- शर्मनाक कदम

    अमेरिका: रूस से तेल खरीदने की छूट पर घर में घिरे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, सांसद बोले- शर्मनाक कदम

    वाशिंगटन। अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने एक फैसले से घर में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप ने रूस से पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद की अनुमति देने वाली छूट की अवधि को एक माह के लिए बढ़ा दिया है, जबकि कुछ दिन पूर्व उन्होेंने यह विशेष राहत आगे न बढ़ाने की बात कही थी। अमेरिकी डेमोक्रेट सांसदों ने रूस से तेल खरीदी को दोबारा छूट देना ट्रंप प्रशासन का 180 डिग्री यू-टर्न और शर्मनाक कदम बताया है। सीनेट में भी इसका विरोध हुआ।

    अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात आदेश जारी कर रूसी तेल पर लगी पाबंदी से छूट की अवधि 16 मई तक बढ़ा दी।

    डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि एक तरफ रूस की ओर से यूक्रेन पर बड़े हमले जारी हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका उसे आर्थिक लाभ पहुंचा रहा है। डेमोक्रेटिक नेता जीन शाहीन, चक शूमर और एलिजाबेथ वॉरेन ने साझा बयान जारी कर ‘रूस जनरल लाइसेंस 134’ को फिर से लागू करने की निंदा की। यह लाइसेंस उन कंपनियों को सजा से बचाता है जो रूसी तेल खरीद रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 15 अप्रैल को व्हाइट हाउस में कहा था कि सरकार रूस-ईरान के तेल पर पाबंदी में और ढील नहीं देगी। लेकिन सिर्फ दो दिन में सरकार ने फैसला बदल लिया।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने कई वैश्विक विवादों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है। इसी दावे के साथ, उन्होंने ट्रुथ सोशल पर ट्रंप वॉर रूम की एक पोस्ट में एक डिजिटल पोस्टर दिखाया, जिसमें ट्रंप को शांति के राष्ट्रपति के तौर पर बताया गया है। ट्रुथ सोशल के हैंडल ने कहा, ट्रंप पर भरोसा करें।

    घबराने वालों पर नहीं। इससे पहले ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत आठ युद्धों को खत्म कराने पर अपनी भूमिका याद दिलाई।

    ट्रंप ने जोर देकर कहा, मेरे दखल से बड़े पैमाने पर जानमाल की क्षति रोकने में मदद मिली। एरिजोना के फीनिक्स में टर्निंग प्वाइंट यूएसए कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय विवादों पर बोलते हुए उन्होंने कहा, मैं शांतिदूत हूं। मैं ही वह व्यक्ति हूं जिसने आठ युद्धों को सुलझाया। मैंने भारत-पाकिस्तान के बीच एक ऐसे युद्ध को सुलझाया जिसमें 3-5 करोड़ लोगों की जान जा सकती थी। एजेंसी

    नई समयसीमा और भारत पर असर…
    अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अधिकृत दस्तावेज के मुताबिक, अब 17 अप्रैल तक जहाजों पर लोड हुए रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को 16 मई तक खरीदी की मंजूरी मिल गई है। पिछली छूट 11 अप्रैल को खत्म हो गई थी। नए फैसले का लाभ भारत समेत उन तमाम देशों को मिलेगा जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर हैं।

    सरकार का तर्क है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें न बढ़ें, इसलिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि, अमेरिका में विपक्षी सांसद इस तर्क से सहमत नहीं हैं।

    दूसरे दौर की वार्ता की तैयारी में पाकिस्तान
    होर्मुज पर जारी तनाव के बावजूद मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका और ईरान के बीच 22 अप्रैल की युद्धविराम की समयसीमा से पहले समझौता हो जाएगा। विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच लड़ाई प्रमुख मुद्दा था। पाकिस्तान अगले सप्ताह की शुरुआत में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी करेगा।

    नए अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे: ईरान
    ईरान ने कहा कि वह अमेरिका की ओर से भेजे गए नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने हाल ही में तेहरान दौरे के दौरान ईरान को ये प्रस्ताव सौंपे थे। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ वार्ता अच्छी चल रही है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है, लेकिन उसने यह बताने से इन्कार कर दिया कि प्रस्ताव में क्या है।

  • कर्ज के दबाव में मालदीव, अब भारत से फिर उम्मीद; करेंसी स्वैप बढ़ाने की गुहार

    कर्ज के दबाव में मालदीव, अब भारत से फिर उम्मीद; करेंसी स्वैप बढ़ाने की गुहार


    नई दिल्ली। आर्थिक संकट से जूझ रहे मालदीव ने एक बार फिर भारत की ओर रुख किया है। बढ़ते कर्ज और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के बीच राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने भारत से करेंसी स्वैप सुविधा को आगे बढ़ाने की अपील की है। हालांकि, भारत के लिए मौजूदा नियमों और शर्तों के चलते इस मांग पर फैसला लेना आसान नहीं माना जा रहा।
    दरअसल, मालदीव इस समय गंभीर वित्तीय दबाव में है। अंतरराष्ट्रीय कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है। ऊपर से पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पर्यटन सेक्टर को झटका दिया है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी ने संकट को और गहरा कर दिया है।

    नियम बने बड़ी बाधा

    सूत्रों के अनुसार, मालदीव ने भारत से करेंसी स्वैप सुविधा के विस्तार की मांग की है, लेकिन भारतीय व्यवस्था में दो बार निकासी के बीच ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ अनिवार्य होता है। इसके अलावा कर्ज को आगे बढ़ाने (रोल-ओवर) की भी सीमाएं तय हैं। ऐसे में तकनीकी कारणों से भारत के लिए तुरंत राहत देना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि इस बार मदद नहीं मिलती, तो मालदीव की आर्थिक हालत और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    भारत पहले भी दे चुका है सहारा

    भारत पहले भी कई बार मालदीव की मदद करता रहा है। अक्टूबर 2024 में 400 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा दी गई थी, जिसे दो बार बढ़ाया गया। इसके अलावा 2025 में 50-50 मिलियन डॉलर के ब्याज मुक्त ट्रेजरी बिलों की अवधि भी बढ़ाई गई।

    जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान 565 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट देने और कर्ज चुकाने की शर्तों में राहत का ऐलान भी किया गया था।

    रेटिंग एजेंसियों की चेतावनी

    वैश्विक एजेंसियों ने भी मालदीव की स्थिति को चिंताजनक बताया है। Fitch Ratings ने देश की रेटिंग ‘CC’ पर रखी है, जो डिफॉल्ट के उच्च खतरे का संकेत देती है, जबकि Moody’s ने ‘CAA2’ रेटिंग बरकरार रखी है।

    कर्ज चुकाने से खाली हुआ खजाना

    अप्रैल 2026 में मालदीव पर करीब 1 अरब डॉलर चुकाने का दबाव था। इसमें 500 मिलियन डॉलर का सुकुक बॉन्ड शामिल था, जिसे सरकार ने अपने सॉवरेन डेवलपमेंट फंड से चुका दिया। हालांकि, इससे विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी कमी आ गई।

    पर्यटन पर टिकी अर्थव्यवस्था

    मालदीव की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है। लेकिन मिडिल ईस्ट संकट के चलते पर्यटकों की संख्या घटी है और ईंधन महंगा हुआ है। ऐसे हालात में नए कर्ज जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है।

    कुल मिलाकर, मालदीव इस समय आर्थिक मोर्चे पर नाजुक दौर से गुजर रहा है और उसकी नजरें एक बार फिर भारत की मदद पर टिकी हैं।