Category: International
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मध्यस्थता नाकाम, फिर भी ‘नोबेल’ की मांग-पाकिस्तान में उठा नया सियासी प्रस्ताव
इस्लामाबाद। ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव और हालिया 40 दिन के संघर्ष के बीच जहां मध्यस्थता की कोशिशें ठोस नतीजे नहीं दे सकीं, वहीं पाकिस्तान में एक अलग ही सियासी पहल चर्चा में है। देश के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग उठी है।यह मांग मंगलवार को खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय विधानसभा में पेश एक प्रस्ताव के जरिए सामने आई। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन (PML-N) की विधायक फ़राह खान द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव में दोनों नेताओं की “कूटनीतिक कोशिशों” को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में अहम बताया गया है। “शांति प्रयासों” की सराहना प्रस्ताव में दावा किया गया है कि शहबाज़ शरीफ और आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान ने वैश्विक स्तर पर खुद को एक जिम्मेदार और शांति-समर्थक देश के रूप में पेश किया है। इसमें उनके “दूरदर्शी नेतृत्व, रणनीतिक समझ और लगातार कूटनीतिक प्रयासों” की खुलकर तारीफ की गई है। साथ ही यह भी कहा गया कि इन प्रयासों ने संभावित बड़े वैश्विक संकट को टालने और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबाव को कम करने में भूमिका निभाई। लेकिन पास होना मुश्किल हालांकि राजनीतिक जानकार इस प्रस्ताव के भविष्य को लेकर संशय में हैं।पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के बहुमत के चलते इसके सदन में पारित होने की संभावना कम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि प्रस्ताव पर चर्चा भी शायद ही हो पाए। पहले भी आ चुका है ऐसा प्रस्ताव गौरतलब है कि इससे पहले पंजाब प्रांत की विधानसभा 16 अप्रैल को इसी तरह का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर चुकी है। उसमें भी दोनों नेताओं को मध्य पूर्व में शांति प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की सिफारिश की गई थी। सवाल भी उठ रहे दिलचस्प बात यह है कि जिस मध्यस्थता को आधार बनाकर यह मांग उठ रही है, वही कोशिशें अब तक ठोस परिणाम नहीं दे पाई हैं। ऐसे में इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल भी उठ रहे हैं—क्या यह वास्तविक कूटनीतिक उपलब्धि है या सिर्फ सियासी संदेश देने की कोशिश? ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर जहां बहस जारी है, वहीं शहबाज़ शरीफ और आसिम मुनीर के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग ने इस मुद्दे को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया है। -

सीजफायर का ‘टाइम’ बना पहेली: अमेरिका-ईरान के बीच खत्म कब होगा युद्धविराम?
वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्धविराम को लेकर अब समय-सीमा ही विवाद का कारण बन गई है। अलग-अलग बयानों की वजह से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि आखिर सीजफायर कब और किस समय समाप्त होगा। समय को लेकर क्यों बना भ्रम?पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के मुताबिक, युद्धविराम 22 अप्रैल सुबह 4:50 बजे (पाकिस्तानी समय) खत्म होना तय है। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप का बयान इससे अलग तस्वीर पेश करता है। उन्होंने संकेत दिया है कि सीजफायर वॉशिंगटन समय के अनुसार शाम तक जारी रह सकता है। यानी दोनों पक्ष अलग-अलग टाइम ज़ोन के हिसाब से सीजफायर की समाप्ति को देख रहे हैं—यही इस भ्रम की सबसे बड़ी वजह है।ईरान की चुप्पी से बढ़ी अनिश्चितता इस पूरे मामले में ईरान की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान नहीं आया है। क्या तेहरान तय समय पर सीजफायर खत्म मानेगा?या बातचीत के लिए इसे बढ़ाने को तैयार है?इन सवालों पर सस्पेंस बना हुआ है, जिससे कूटनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है। ट्रंप की सख्त चेतावनी डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर तय अवधि तक कोई समझौता नहीं होता, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।उन्होंने कहा कि ईरान के पास समझौते का मौका है, लेकिन वे सीजफायर बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। बातचीत भी अधर में 11–12 अप्रैल को हुई पहली दौर की वार्ता बेनतीजा रहीदूसरे दौर को लेकर अब भी स्थिति साफ नहींपाकिस्तान ने भी कहा है कि उसे ईरान की भागीदारी पर औपचारिक जवाब का इंतजार हैघड़ी चल रही है, लेकिन समय तय नहीं इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी समस्या यही है कि सीजफायर का “एक तय समय” सभी पक्षों के बीच सहमति से निर्धारित नहीं है। जब तक ईरान अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तब तक यह दुविधा बनी रह सकती है—और इसके साथ ही युद्ध फिर भड़कने का खतरा भी। -

US–Iran तनाव फिर गहराया: सीजफायर एक्सटेंशन पर तेहरान ने खड़े किए सवाल, बातचीत पर संकट
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा युद्धविराम (सीजफायर) बढ़ाने के ऐलान के बावजूद ईरान ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है और इसे नई चाल करार दिया है।ट्रंप ने बढ़ाया सीजफायर, लेकिन नाकाबंदी जारी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ जारी युद्धविराम को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखने का आदेश भी दिया। ट्रंप का कहना है कि ईरान को बातचीत आगे बढ़ाने के लिए पहले एक “एकजुट प्रस्ताव” पेश करना होगा।ईरान ने बताया ‘सरप्राइज अटैक की तैयारी’
ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf के एक सलाहकार ने ट्रंप के इस कदम को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह सीजफायर बढ़ाना असल में “सरप्राइज अटैक” की तैयारी का हिस्सा हो सकता है। ईरान ने इसे उकसावे की कार्रवाई बताया और इसके खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।सैन्य जवाब की मांग
ईरानी पक्ष से यह भी कहा गया है कि अमेरिकी नाकाबंदी के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर उकसावे के तौर पर देख रहा है।पाकिस्तान और अंदरूनी मतभेदों का हवाला
Donald Trump ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के अनुरोध और ईरान के अंदरूनी मतभेदों को देखते हुए लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सरकार में गंभीर विभाजन है, इसलिए अमेरिका ने हमले को रोकते हुए सीजफायर बढ़ाने का फैसला किया।अमेरिका ने रद्द की वार्ता यात्रा
इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस्लामाबाद की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी है, जहां ईरान के साथ बातचीत का अगला दौर होना था। व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका फिलहाल ईरान के जवाब का इंतजार कर रहा है।ईरान की शर्त: पहले हटे नाकाबंदी
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह तब तक बातचीत में शामिल नहीं होगा, जब तक अमेरिका नाकाबंदी नहीं हटाता। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी “युद्ध का कृत्य” है। साथ ही, एक व्यावसायिक जहाज पर हमले और चालक दल को बंधक बनाने को भी गंभीर उल्लंघन बताया गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत की स्थिति साफ नहीं है, लेकिन हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। -

सीजफायर की डेडलाइन नजदीक, अमेरिका-ईरान के बीच 24 घंटे में तय होगा जंग या बातचीत का रास्ता
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच लागू सीजफायर 22 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है, और ऐसे में दोनों देशों के लिए आने वाले 24 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। इस दौरान यह साफ हो सकता है कि हालात युद्ध की ओर बढ़ेंगे या कूटनीतिक बातचीत से समाधान निकलेगा।अमेरिका की ओर से बातचीत के लिए डेलिगेशन के पाकिस्तान जाने को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। सोमवार को खबरें आई थीं कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जल्द इस्लामाबाद पहुंच सकता है, लेकिन बाद में ये खबरें गलत साबित हुईं। सीजफायर की समयसीमा खत्म होने से पहले अगर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो एक बार फिर संघर्ष शुरू होने की आशंका है। फिलहाल यह भी तय नहीं है कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच कोई बैठक होगी या नहीं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेडी वेंस मंगलवार को पाकिस्तान के लिए रवाना हो सकते हैं। वहीं Bloomberg से बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सीजफायर अमेरिकी समयानुसार बुधवार रात 8 बजे तक लागू रहेगा। इस हिसाब से दोनों देशों के पास गुरुवार सुबह तक निर्णय लेने का समय होगा।
दूसरी ओर, ईरान ने साफ किया है कि उसकी कोई भी आधिकारिक या अनौपचारिक टीम बातचीत के लिए पाकिस्तान नहीं गई है। सरकारी मीडिया के अनुसार, इस तरह की सभी खबरें गलत हैं। ईरान का कहना है कि वह धमकियों के माहौल में बातचीत नहीं करेगा और जब तक अमेरिका अपना रुख नहीं बदलता, तब तक वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी।
बातचीत में अड़चन क्यों?
ईरान के बातचीत से पीछे हटने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की आक्रामक और दबाव वाली रणनीति ने हालात को जटिल बना दिया है। ट्रंप अक्सर सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर बड़े दावे करते हैं, जिनका ईरान खंडन कर देता है।
ईरान के बातचीत से पीछे हटने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की आक्रामक और दबाव वाली रणनीति ने हालात को जटिल बना दिया है। ट्रंप अक्सर सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर बड़े दावे करते हैं, जिनका ईरान खंडन कर देता है।ट्रंप जहां तेजी से समझौता करना चाहते हैं, वहीं ईरान धैर्य के साथ लंबी रणनीति अपनाए हुए है। ट्रंप का दावा है कि वह ईरान के साथ बराक ओबामा से बेहतर परमाणु समझौता करेंगे, लेकिन ईरान का कहना है कि अमेरिका भरोसेमंद नहीं है, क्योंकि एक सरकार समझौता करती है और दूसरी उसे तोड़ देती है।
ईरान की चेतावनी
ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि युद्ध फिर से शुरू होता है, तो ईरान नए तरीकों से जवाब देगा। उन्होंने संकेत दिया कि युद्धविराम के दौरान ईरान ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत किया है, जिसमें मिसाइल और ड्रोन क्षमता भी शामिल है। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी तरह के दबाव या थोपे गए शर्तों को स्वीकार नहीं करेगा। अब नजर इस बात पर है कि सीजफायर खत्म होने के बाद हालात टकराव की ओर बढ़ते हैं या कूटनीति से कोई रास्ता निकलता है। -

ईरान के लिए ‘परमाणु हथियार’ जैसा है होर्मुज, पूर्व अमेरिकी जनरल ने बताया-इसे खोलना क्यों आसान नहीं
तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब बातचीत के दौर में पहुंच चुका है, लेकिन Strait of Hormuz को लेकर हालात अब भी बेहद जटिल बने हुए हैं। Iran ने इस अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण सख्त कर रखा है, जबकि United States ने ईरानी जहाजों के खिलाफ नाकाबंदी कर दी है।
इस बीच पूर्व अमेरिकी जनरल और नाटो के सुप्रीम अलाइड कमांडर रह चुके Wesley Clark ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जबरन होर्मुज को खोलने की कोशिश करता है, तो यह उसके लिए बेहद महंगा और लंबा सैन्य अभियान साबित हो सकता है।
CNN से बातचीत में क्लार्क ने कहा कि मौजूदा हालात 1980 के दशक के “टैंकर युद्ध” से बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने साफ किया कि आज का ईरान पहले से कहीं ज्यादा तैयार और रणनीतिक रूप से मजबूत है। ऐसे में किसी भी सैन्य कार्रवाई की कीमत बहुत भारी हो सकती है।
‘ईरान का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है होर्मुज’
क्लार्क ने होर्मुज की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि यह तेहरान के लिए किसी परमाणु बम से कम नहीं है। उनके मुताबिक, ईरान इस जलमार्ग का इस्तेमाल केवल सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक दबाव के तौर पर भी कर रहा है।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के सामने कई तरह के खतरे मौजूद हैं-समुद्री बारूदी सुरंगें, तेज रफ्तार हमलावर नौकाएं, मिसाइलें और आधुनिक ड्रोन। ये सभी मिलकर किसी भी ऑपरेशन को बेहद जोखिमभरा बना देते हैं।
‘किले में तब्दील हो चुका है यह रास्ता’
क्लार्क के अनुसार, ईरान ने दशकों में होर्मुज को एक किलेबंद क्षेत्र में बदल दिया है। संकरे समुद्री मार्ग और आसपास की पहाड़ियों का फायदा उठाते हुए ईरानी सेना यहां हर गतिविधि पर नजर रख सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को उन्नत तकनीकी सहयोग, खासकर China से, उसकी सैन्य क्षमता को और मजबूत बनाता है।
खोलना ही नहीं, सुरक्षित रखना भी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका किसी तरह इस समुद्री मार्ग को खोल भी ले, तब भी इसे सुरक्षित बनाए रखना आसान नहीं होगा। हाल के घटनाक्रम बताते हैं कि ईरान ने सीमित हमलों के जरिए ही व्यापारिक जहाजों पर दबाव बना दिया, जिसके बाद कई जहाजों ने खुद ही उसके साथ तालमेल बैठा लिया।
असल चुनौती यही है कि जब तक ईरान की सहमति न हो, तब तक Strait of Hormuz को पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू रूप से चालू रखना लगभग असंभव माना जा रहा है।
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होर्मुज पर पहली बार खुलकर बोला चीन, अमेरिका-ईरान दोनों को दी नसीहत-क्या कहा बीजिंग ने?
बीजिंग। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच China ने पहली बार खुलकर Strait of Hormuz को लेकर अपना रुख सामने रखा है। चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए साफ किया कि यहां जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहनी चाहिए।
चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman से फोन पर बातचीत में कहा कि होर्मुज को फिर से सामान्य नौवहन के लिए खोला जाना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि यह कदम न केवल क्षेत्रीय देशों बल्कि पूरी दुनिया के साझा हितों से जुड़ा हुआ है।
गौरतलब है कि Iran द्वारा होर्मुज बंद करने और United States की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी के बाद यह चीन का पहला आधिकारिक बयान है। इस टकराव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाला है, खासकर एशियाई देशों के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
चीन, जो ईरानी तेल का बड़ा आयातक है, लंबे समय तक चलने वाले इस संघर्ष से चिंतित है। शी जिनपिंग ने कहा कि चीन क्षेत्र में शांति, विकास और सहयोग पर आधारित व्यवस्था का समर्थन करता है, ताकि स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
इस बयान की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि चीन ने 2023 में Saudi Arabia और ईरान के बीच रिश्तों को बहाल कराने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसे पश्चिम एशिया में बड़ी कूटनीतिक सफलता माना गया था।
इसी बीच चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्रवाई पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun ने एक चीनी-सम्बद्ध मालवाहक जहाज को अमेरिकी नौसेना द्वारा रोके जाने और उस पर गोलीबारी की घटना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्षों को जिम्मेदारी दिखानी चाहिए और हालात को और बिगड़ने से बचाना चाहिए।
भारतीय झंडे वाले जहाजों पर कथित हमलों को लेकर पूछे गए सवाल पर भी चीन ने दोहराया कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय मार्ग है और इसे सुरक्षित तथा खुला रखना सभी देशों के हित में है।
चीन ने साफ संकेत दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने की दिशा में काम करने को तैयार है।
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हॉर्मुज में भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरानी फायरिंग के बाद ऐक्शन में भारत…
नई दिल्ली। भारत (India) ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps.- IRGC) के सैनिकों द्वारा की गई गोलीबारी की घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। यह घटना 18 अप्रैल को हुई थी। सरकार ने तत्काल कूटनीतिक कदम उठाते हुए ईरानी राजदूत को तलब किया और इस घटना पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। अभी भी हॉर्मुज में करीब 14 भारतीय जहाज फंसे हैं जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए भारत ने प्रयास तेज कर दिए हैं। दूसरी ओर भारतीय नौसेना ने 7 युद्धपोत तैनात कर जहाजों को एस्कॉर्ट करना शुरू कर दिया है।
कूटनीतिक प्रतिक्रिया और भारत का रुख
गोलीबारी की घटना के बाद भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूत से मुलाकात कर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से इस क्षेत्र से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि भारत ने राजनयिक चैनलों के माध्यम से तेजी से कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा- हम भारतीय जहाजों की सुरक्षा के संबंध में ईरानी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं और उन्हें सुरक्षित रास्ता दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।यह फायरिंग ईरानी अधिकारियों और स्थानीय IRGC यूनिट के बीच ‘संचार की कमी’ का नतीजा प्रतीत होती है। राहत की बात ये है कि जहाजों को कोई बड़ा ढांचागत नुकसान नहीं पहुंचा है। घटना के दौरान जहाजों के कुछ हिस्सों में शीशे (कांच) टूटने की सूचना मिली है।
UKMTO की रिपोर्ट और हमलों का विवरण
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने भी अपनी रिपोर्ट में इस घटना का जिक्र किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल को कुल तीन जहाजों को निशाना बनाया गया, जिनमें से दो भारतीय थे।पहली घटना: एक भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकर के पास दो ईरानी सैन्य गनबोट (हथियारबंद नावें) आईं और बिना किसी पूर्व चेतावनी या रेडियो संपर्क के फायरिंग शुरू कर दी। गनीमत रही कि चालक दल पूरी तरह सुरक्षित बच गया।
दूसरी घटना: इसके कुछ ही समय बाद, ओमान के तट के पास एक अन्य भारतीय सुपरटैंकर को निशाना बनाया गया। इस जहाज पर एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल (गोला/मिसाइल) टकराने की खबर है, जिससे इस अहम समुद्री मार्ग में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
इस गंभीर घटना के बीच, भारतीय नौसेना ने क्षेत्र में 7 युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। फंसे जहाजों को लारक आइलैंड से दूर रहने और केवल अनुमति मिलने पर आगे बढ़ने की एडवाइजरी जारी की गई है। नौसेना जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है।
वर्तमान स्थिति और भारतीय जहाजों की मौजूदगी
इस समय स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है। हॉर्मुज स्ट्रेट में कम से कम 14 भारतीय ध्वज वाले जहाज अभी भी लंगर डाले हुए हैं, जिनमें तीन बड़े तेल टैंकर और एक एलपीजी (LPG) कैरियर शामिल हैं। 28 फरवरी को मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद से भारत पहले ही 10 भारतीय एलपीजी और तेल टैंकरों को इस क्षेत्र से सुरक्षित निकाल चुका है। अब बाकी बचे 14 जहाजों की सुरक्षित वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं। ईरान में भारी संख्या में भारतीय नागरिक भी मौजूद हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना नई दिल्ली की सर्वोच्च प्राथमिकता है।स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत लगातार ईरान पर कूटनीतिक दबाव बना रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति न हो और भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी मिल सके।
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.भारत-यूक्रेन के बीच जल्द होगा रक्षा और सुरक्षा को लेकर अहम समझौता, जेलेंस्की ने दी जानकारी
नई दिल्ली। भारत और यूक्रेन के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर एक अहम समझौता जल्द ही आधिकारिक रूप ले सकता है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। यह घोषणा यूक्रेन के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोव की हालिया भारत यात्रा के बाद सामने आई, जहां उन्होंने एनएसए अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय बातचीत की।
सैन्य अनुभव साझा करने पर जोर
रूस के साथ जारी युद्ध के पांचवें वर्ष में पहुंच चुके यूक्रेन ने ड्रोन तकनीक और वायु रक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण अनुभव हासिल किए हैं। अब वह इन अनुभवों को साझेदार देशों के साथ साझा कर रहा है। भारत भी यूक्रेन की इस विशेषज्ञता से लाभ उठाने में रुचि दिखा रहा है।
भारत का रुख: संवाद से समाधान
बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एक बार फिर भारत की उस नीति को दोहराया, जिसमें किसी भी विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने पर बल दिया जाता है।शांति प्रयासों में सहयोग की उम्मीद
रुस्तम उमेरोव ने स्थायी शांति की दिशा में भारत की भूमिका और समझ की सराहना की। फरवरी 2022 से जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान भारत ने संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपनी रूस और यूक्रेन यात्राओं के दौरान यह स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत शांति स्थापित करने के प्रयासों में हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है। -

भारत के इस पड़ोसी देश में सरकारी कर्मियों को महीने में दो बार मिलेगी सैलरी…
काठमांडू। भारत (India) के पड़ोसी देश नेपाल (Neighboring country Nepal) में युवा सरकार आने के बाद लगातार रिफॉर्म्स हो रहे हैं। इसी क्रम में रविवार को बालेन सरकार (Balen Government) के वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि अब से नेपाली सरकारी कर्मचारियों (Nepali Government Employees) को एक महीने में दो बारे वेतन मिलेगी।एजेंसी के मुताबिक नेपाली सरकार के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि 17 अप्रैल को बालेन सरकार ने इस फैसले पर मुहर लगाई है। अब से नेपाल के सिविल सेवकों, पुलिसकर्मियों और अन्य कर्मचारियों को हर 15 दिन के अंतर पर सैलरी मिलेगी।
नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, सरकार का यह निर्णय अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के प्रयास के फलस्वरूप लिया गया है। क्योंकि सरकार का मानना है कि महीने में दो बार वेतन मिलने से कर्मचारियों के खर्च में वृद्धि हो सकती है, जिससे बाजार में ज्यादा पैसा आएगा और नकदी सुधार संभव होगा।
बालेन सरकार के इस फैसले पर नेपाली कर्मचारियों की वेतन नियंत्रित करने वाली संस्था का भी बयान सामने आया है। एफसीजीओ के प्रवक्ता दीपक लामिछाने ने कहा, “तकनीकी रूप से, हमें इस प्रणाली को लागू करने में कोई समस्या नहीं है। हम सिविल सेवकों, नेपाल सेना, पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और अन्य सरकारी कर्मचारियों का वेतन किसी भी समय जारी कर सकते हैं।” हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नए फैसले को लागू करने के लिए कानूनी संसोधनों की आवश्यकता होगी।
बता दें, नेपाल के संविधान के अनुसार प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को महीने के अंत में वेतन देने का प्रावधान है। लामिछाने ने कहा कि सरकार अपने इस फैसले को लेकर प्रतिबद्ध है। वह जल्दी ही कोई रास्ता निकालकर इस फैसले को लागू करेगी।
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हॉर्मुज में जहाजों पर फायरिंग के बाद भारत सतर्क, नौसेना की एडवाइजरी, ‘हमारी बिना अनुमति के न गुजरें’
नई दिल्ली। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों पर फायरिंग की घटना के बाद भारत ने सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। 18 अप्रैल को भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी में संचालित भारतीय जहाजों के लिए नई एडवाइजरी जारी की जिसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे केवल नेवी के आदेश मिलने पर ही इस संवेदनशील मार्ग से गुजरें।नेवी की निगरानी में ही होगा जहाजों का मूवमेंट
सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना ने हॉर्मुज पार करने वाले सभी भारतीय जहाजों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। अब तक 11 जहाज इस जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं। हालांकि हाल ही में दो भारतीय जहाजों जग अर्नव और सनमार हेराल्ड पर गोलीबारी के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा था।देश गरिमा को मिल रही नौसेना की सुरक्षा
भारतीय टैंकर देश गरिमा 18 अप्रैल को हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। फिलहाल इसे अरब सागर में भारतीय नौसेना की सुरक्षा मिल रही है और इसके 22 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की संभावना है।
लारक द्वीप के आसपास बढ़ाई गई सतर्कताएडवाइजरी में खासतौर पर जहाजों को लारक द्वीप से दूर रहने को कहा गया है। यह द्वीप हॉर्मुज के सबसे संकरे हिस्से में स्थित है और ईरान के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम केंद्र माना जाता है। इसी कारण यहां सुरक्षा बेहद कड़ी रहती है और हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है।वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है जहां से पहले वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% गुजरता रहा है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
भारतीय नौसेना की मजबूत तैनातीफिलहाल फारस की खाड़ी में 14 भारतीय जहाज मौजूद हैं जो हॉर्मुज पार करने का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय नौसेना इन सभी जहाजों के संपर्क में है और उन्हें अनुमति मिलने के बाद ही आगे बढ़ने की सलाह दी गई है। इसके अलावा क्षेत्र में भारतीय नौसेना के 7 युद्धपोत तैनात किए गए हैं जो जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करेंगे।