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  • माधुरी दीक्षित की बहू दीक्षा जुनेजा के बोल्ड सीन से मचा तहलका वेब सीरीज ने उड़ाई रातों की नींद

    माधुरी दीक्षित की बहू दीक्षा जुनेजा के बोल्ड सीन से मचा तहलका वेब सीरीज ने उड़ाई रातों की नींद


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की लिजेंड माधुरी दीक्षित इन दिनों अपनी नई वेब सीरीज मिसेज देशपांडे को लेकर चर्चा में हैं। इस सीरीज में माधुरी ने एक अलग तरह की भूमिका निभाई है लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रही हैं उनकी ऑन-स्क्रीन बहू तन्वी का किरदार निभा रही अभिनेत्री दीक्षा जुनेजा।

    दीक्षा जुनेजा की एक्टिंग और स्क्रीन पर उनकी केमिस्ट्री ने इस सीरीज को और भी खास बना दिया है। खासकर पहले एपिसोड में दीक्षा और अभिनेता सिद्धार्थ चंदेकर के बीच फिल्माया गया एक बोल्ड सीन सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। यह सीन दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है और दीक्षा जुनेजा की लोकप्रियता में जबरदस्त इजाफा हुआ है।

    दीक्षा का करियर भी काफी दिलचस्प रहा है। वह पहले एक महिला पत्रकार थीं लेकिन बाद में उन्होंने एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपनी पहचान बनाने के बाद उन्होंने मिसेज देशपांडे में अपनी एक्टिंग से दर्शकों का दिल जीत लिया। इससे पहले वह सारे जहां से अच्छा सीरीज में भी नसीमा के किरदार में नजर आ चुकी हैं।

    दीक्षा जुनेजा अपनी स्टाइल और ग्लैमरस अंदाज के लिए भी सोशल मीडिया पर फेमस हैं। उनकी तस्वीरें और अपडेट्स हमेशा वायरल होते रहते हैं और उनके फैंस उन्हें बेहद पसंद करते हैं। यदि आप भी इस सीरीज को देखना चाहते हैं तो मिसेज देशपांडे जियो हॉटस्टार पर उपलब्ध है। छह एपिसोड की यह सस्पेंस और इमोशन से भरपूर सीरीज आपको अंत तक बांधे रखेगी।

  • भारत से रिश्ते सुधारने के प्रयास…. यूनुस सरकार ने 50000 टन चावल खरीदने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

    भारत से रिश्ते सुधारने के प्रयास…. यूनुस सरकार ने 50000 टन चावल खरीदने के प्रस्ताव को दी मंजूरी


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) की अंतरिम सरकार (Interim Government) के वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद (Finance Advisor Salehuddin Ahmed) ने मंगलवार को कहा कि मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्तों को आसान बनाने के लिए कदम उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन आर्थिक हितों को राजनीतिक बयानबाजी से अलग रखते हुए भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है।

    अहमद ने यह टिप्पणी अपने कार्यालय में सरकारी खरीद से जुड़े सलाहकार परिषद समिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में की। उन्होंने कहा कि मुख्य सलाहकार भारत के साथ राजनयिक रिश्तों में सुधार के लिए विभिन्न हितधारकों से संवाद कर रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या यूनुस ने सीधे भारत से बात की है, तो अहमद ने कहा कि मुख्य सलाहकार ने सीधे तौर पर नहीं, लेकिन इस मसले से जुड़े लोगों से बातचीत जरूर की है।

    वित्त सलाहकार ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश की व्यापार नीति राजनीतिक कारणों से संचालित नहीं होती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि भारत से चावल आयात करना वियतनाम या अन्य देशों की तुलना में सस्ता पड़ता है, तो आर्थिक दृष्टि से भारत से ही खरीदना उचित है। अहमद ने बताया कि भारत के बजाय वियतनाम से चावल मंगाने पर प्रति किलोग्राम लगभग 10 टका (0.082 अमेरिकी डॉलर) अधिक खर्च आता है।

    इस बीच, बांग्लादेश सरकार ने मंगलवार को भारत से 50,000 टन चावल खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। अहमद ने कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों की दिशा में भी मददगार साबित हो सकता है, साथ ही इससे बांग्लादेश को आर्थिक लाभ भी होगा।

    अहमद की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कूटनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ढाका और नई दिल्ली के बीच संबंध 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। हाल के महीनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया है और दोनों राजधानियों समेत विभिन्न स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए हैं।

    हालांकि, वित्त सलाहकार ने इन आकलनों से आंशिक रूप से असहमति जताई। उन्होंने कहा- स्थिति इतनी खराब नहीं हुई है। उनके अनुसार, बाहरी तौर पर भले ही ऐसा लगे कि कई तरह की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन कुछ बयान ऐसे होते हैं जिन्हें पूरी तरह रोका नहीं जा सकता।

    जब उनसे पूछा गया कि क्या लोग या बाहरी ताकतें भारत विरोधी बयान दे रही हैं, तो अहमद ने कहा कि बांग्लादेश किसी भी तरह की कड़वाहट नहीं चाहता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई बाहरी तत्व दोनों देशों के बीच तनाव भड़काने की कोशिश कर रहा है, तो यह किसी के भी हित में नहीं है।

    अहमद ने स्पष्ट किया कि ऐसे बयान या घटनाएं राष्ट्रीय अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं, बल्कि वे बांग्लादेश के लिए अनावश्यक रूप से जटिल हालात पैदा करती हैं। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य व्यावहारिक और आर्थिक तर्कों के आधार पर फैसले लेना और पड़ोसी देशों के साथ स्थिर तथा सहयोगपूर्ण रिश्ते बनाए रखना है।

    बहरहाल, बांग्लादेश सरकार के इस रुख से संकेत मिलता है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक लाभ को प्राथमिकता देते हुए भारत के साथ संबंधों में सुधार की राह तलाश रही है, भले ही राजनीतिक बयानबाजी और कूटनीतिक तनावों की चुनौतियां बनी हुई हों।

  • US: अभी खत्म नहीं हुआ ट्रंप के Tariff का खेल, चाइना पर फिर फूटेगा टैरिफ बम

    US: अभी खत्म नहीं हुआ ट्रंप के Tariff का खेल, चाइना पर फिर फूटेगा टैरिफ बम


    वाशिगटन।
    डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ (Donald Trump Tariff) का खेल अभी खत्म नहीं हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति (American President) एक बार फिर चीन पर टैरिफ लगाने (US Tariff On China) के लिए तैयार हैं और इसके लिए तारीख भी तय कर दी गई है. जी हां, अमेरिका चीन से आयात सेमीकंडक्टर चिप (Tariff On Chinese chips) टैरिफ बढ़ाने की तैयारी में है और लेकिन इसे 18 महीने के लिए अभी टाला गया है. चाइनीज चिप आयात पर ट्रंप कितना टैरिफ लगाएंगे इसकी दर भी कम से कम एक महीने पहले तय की जाएगी।


    18 महीने तक जीरो, फिर होगा फैसला

    न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चीनी चिप्स पर टैरिफ में 18 महीने बाद बढ़ोतरी करेगा. Donald Trump प्रशासन ने मंगलवार को फेडरल रजिस्टर में दाखिल एक दस्तावेज में साफ किया है कि अमेरिका जून 2027 में चीनी सेमीकंडक्टर आयात पर टैरिफ बढ़ाएगा और इसके लागू होने से महीनेभर पहले Tariff Rate भी तय कर दिया जाएगा।

    डॉक्युमेंट्स के मुताबिक, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय द्वारा शेयर जानकारी में बताया गया है कि चीन से सेमीकंडक्टर आयात पर प्रारंभिक टैरिफ दर इन 18 महीनों के लिए शून्य (Zero Tariff) ही रहेगा. अमेरिका ने पाया है कि चीन सेमीकंडक्टर बिजनेस में अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त है. यह नोटिस पुराने चिप्स पर केंद्रित प्रोसेस का अगला चरण है, जो बिजनेस एक्ट की धारा 301 के तहत बाइडेन प्रशासन के दौरान शुरू हुई थी।


    23 जून की तारीख हो गई तय

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की ओर से फाइलिंग में कहा गया है कि दशकों से China ने इस उद्योग पर अपना दबदबा कायम करने का टारगेट बनाकर तेजी से आक्रामक और व्यापक गैर-बाजार नीतियों को अपनाया है. हालांकि, नए टैरिफ को कम से कम 18 महीनों के लिए टालने का Donald Trump का निर्णय इस बात का संकेत भी देता है कि ट्रंप प्रशासन अमेरिका और चीन के बीच किसी भी व्यापारिक शत्रुता को कम करने की कोशिश कर रहा है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीते अक्टूबर महीने में ट्रेड टेंशन को खत्म करने के लिए एक करार किया था, जिसके अमेरिका ने कुछ Tariff Cut किया और चीन ने दुर्लभ पृथ्वी धातुओं (Rare Earth Metals) के निर्यात की अनुमति दी थी. अमेरिकी आयकर विभाग (USTR) द्वारा मंगलवार को दाखिल किए गए दस्तावेज में US Tariff On China की डेट 23 जून 2027 तय की गई है।

    टैरिफ के असर पर बारीक नजर
    NYT की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा टैरिफ बढ़ाने के लिए तय की गई 2027 की नई तारीख अमेरिकी कंपनियों को स्पष्टता प्रदान करती है, जिन्होंने कहा है कि वे इस बात पर बारीकी से नजर रख रही हैं कि अमेरिकी टैरिफ उनके व्यवसायों या आपूर्ति श्रृंखलाओं को कैसे प्रभावित (US Tariff Imapct) कर सकते हैं. ये टैरिफ कानून की धारा 232 के तहत ट्रंप प्रशासन द्वारा चीनी चिप्स आयात (China Cips Import) पर लगाए जाने वाले अन्य शुल्कों से अलग हैं।

  • तुर्किये में लीबिया के प्रतिनिधिमंडल को लेकर लौट रहा प्लेन क्रैश…आर्मी चीफ समेत 7 लोगों की मौत

    तुर्किये में लीबिया के प्रतिनिधिमंडल को लेकर लौट रहा प्लेन क्रैश…आर्मी चीफ समेत 7 लोगों की मौत


    अंकारा।
    तुर्किये (Turkey) में बड़ा विमान हादसा (Major Plane Crash) हो गया है। लीबिया (Libya ) के प्रधानमंत्री अब्दुल-हमीद दबीबे (Prime Minister Abdul-Hamid Dbeibeh) ने तुर्किये में हुए विमान हादसे में देश के सैन्य प्रमुख (मिलिट्री चीफ) मुहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद (Military Chief Muhammad Ali Ahmed Al-Haddad) समेत सात लोगों की मौत की पुष्टि की है। यह हादसा मंगलवार शाम उस समय हुआ, जब लीबियाई प्रतिनिधिमंडल तुर्किये की राजधानी अंकारा से आधिकारिक दौरे के बाद अपने देश लौट रहा था।

    प्रधानमंत्री दबीबा की ओर से जारी बयान में इस घटना को दुर्घटनापूर्ण और बेहद दुखद बताते हुए कहा कि यह लीबिया के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की। लीबिया के सैन्य प्रमुख, चार अन्य अधिकारियों और तीन चालक दल के सदस्यों को ले जा रहा एक निजी विमान राजधानी अंकारा से उड़ान भरने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। लीबियाई अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना का कारण विमान में तकनीकी खराबी थी।


    तकनीकी खराबी के कारण टूटा संपर्क

    लीबिया के अधिकारियों के अनुसार उड़ान भरने के करीब 30 मिनट बाद विमान से संपर्क पूरी तरह टूट गया। प्रारंभिक जानकारी में कहा गया है कि यह संपर्क तकनीकी खराबी के कारण समाप्त हुआ। तुर्किये के अधिकारियों ने बताया कि लीबियाई प्रतिनिधिमंडल दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उच्च स्तरीय रक्षा वार्ता के लिए अंकारा में था।

    मलबा बरामद, हादसे की पुष्टि
    इससे पहले के गृह मंत्री अली येरलिकाया ने बताया था कि लीबियाई मिलिट्री चीफ और चार अन्य लोगों को ले जा रहे फाल्कन-50 श्रेणी के निजी जेट का मलबा अंकारा के पास बरामद कर लिया गया है। हालांकि, बाद में लीबिया के प्रधानमंत्री ने सभी के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि कर दी।

    इस दुर्घटना में मारे गए अन्य चार अधिकारी लीबिया के जमीनी बलों के प्रमुख जनरल अल-फितौरी गरैबिल, सैन्य विनिर्माण प्राधिकरण के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल महमूद अल-कतावी, चीफ ऑफ स्टाफ के सलाहकार मोहम्मद अल-असावी दियाब और चीफ ऑफ स्टाफ के कार्यालय में कार्यरत सैन्य फोटोग्राफर मोहम्मद उमर अहमद महजूब थे। तीनों चालक दल के सदस्यों की पहचान तुरंत पता नहीं चल पाई।

    उड़ान के तुरंत बाद हुआ हादसा
    तुर्किये के गृह मंत्री के मुताबिक, विमान ने मंगलवार शाम करीब 8:30 बजे अंकारा के एसेनबोगा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। करीब 40 मिनट बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल का विमान से संपर्क टूट गया। इससे पहले विमान ने अंकारा के दक्षिण में स्थित हायमाना जिले के पास इमरजेंसी लैंडिंग का सिग्नल भेजा था। स्थानीय टीवी चैनलों पर दिखाए गए सुरक्षा कैमरा फुटेज में हायमाना क्षेत्र के आसमान में अचानक तेज रोशनी दिखाई दी, जिसे संभावित विस्फोट के रूप में देखा गया।

    तुर्किये दौरे पर थे अल-हद्दाद
    मुहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद तुर्की के आधिकारिक दौरे पर अंकारा आए थे, जहां उन्होंने तुर्की के रक्षा मंत्री यासर गुलर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी। अल-हद्दाद पश्चिमी लीबिया के शीर्ष सैन्य कमांडर थे और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में चल रहे लीबिया की बंटी हुई सेना को एकजुट करने के प्रयासों में उनकी अहम भूमिका मानी जाती थी।

    एयरपोर्ट बंद, उड़ानें डायवर्ट
    हादसे की खबर के बाद अंकारा एयरपोर्ट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया और कई उड़ानों को अन्य स्थानों पर डायवर्ट किया गया। फिलहाल हादसे के कारणों की जांच जारी है। इस घटना को लीबिया की सुरक्षा और राजनीति के लिहाज से गंभीर झटका माना जा रहा है।

  • बांग्लादेश मामले पर बोले इमरान मसूद, प्रियंका गांधी को PM बनाइए, फिर देखिए., राहुल गांधी को लेकर भी दी राय

    बांग्लादेश मामले पर बोले इमरान मसूद, प्रियंका गांधी को PM बनाइए, फिर देखिए., राहुल गांधी को लेकर भी दी राय


    नई दिल्‍ली। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के एक व्यक्ति दीपू चंद्र दास की कथित ईश निंदा के आरोप में पीट-पीटकर हत्या के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस पर सियासत भी गर्मा गई है। बीजेपी ने विपक्षी कांग्रेस और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर निशाना साधा यह आरोप लगाते हुए कि वे बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर चुप हैं और केवल गाजा पर ही बोलती हैं। इस पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पलटवार किया।

    क्‍या बोले इमरान मसूद?

    इमरान मसूद ने कहा कि बांग्लादेश में हालात पर सबसे ज्यादा आवाज प्रियंका गांधी ने उठाई है। मसूद ने कहा कि प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री बनाइए फिर देखिए कैसे जवाब देती हैं इंदिरा गांधी की तरह। वह भारत विरोधी गतिविधियों को रोकने में सक्षम होंगी। हालांकि राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल किए जाने पर मसूद की टोन बदल गई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भी वही करेंगे जो प्रियंका गांधी करेंगी। ये दोनों एक ही चेहरे की दो आंखें हैं अलग-अलग नहीं देखना चाहिए। राहुल गांधी हमारे नेता हैं और प्रियंका गांधी के भी। कौन क्या भूमिका निभाएगा यह पार्टी तय करेगी। मैं तो सिर्फ एक छोटा सिपाही हूं। इमरान मसूद ने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब वह असम और बंगाल जाते हैं तो केवल चुनाव की बात करते हैं और अपना एजेंडा चलाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बांग्लादेश से हिंदुओं के पलायन और भारत विरोधी गतिविधियों पर चिंता जताई और कहा कि प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के हाथ में कमान आने पर पूरी दुनिया उनकी सक्रियता देखेगी।

    इमरान मसूद ने प्रियंका गांधी और शशि थरूर पर दी सफाई

    इमरान मसूद ने मीडिया से बातचीत में प्रियंका गांधी और शशि थरूर को लेकर सफाई दी। मसूद ने कहा कि उनसे प्रियंका गांधी को लेकर सवाल पूछा गया था और उन्होंने जवाब दिया कि अगर प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री बनतीं तो वह इंदिरा गांधी की तरह स्पष्ट और निर्णायक जवाब देतीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रियंका गांधी केवल पीएम मोदी की तरह भाषण नहीं देतीं बल्कि ठोस कार्रवाई करती। इमरान मसूद ने शशि थरूर को लेकर भी कहा। उन्होंने कहा कि शशि थरूर दिशा भ्रमित हो गए हैं और जिस विचारधारा के समर्थन में उन्होंने चुनाव जीता था उसके खिलाफ बात कर रहे हैं। मसूद ने यह भी कहा कि शशि थरूर जिनकी तारीफ कर रहे हैं वह उनके राज्य में भी मौजूद नहीं हैं।
  • अमेरिका ने स्वेच्छा से देश छोड़ने वाले अवैध प्रवासियों को 3,000 डॉलर और मुफ्त हवाई टिकट देने की घोषणा की।

    अमेरिका ने स्वेच्छा से देश छोड़ने वाले अवैध प्रवासियों को 3,000 डॉलर और मुफ्त हवाई टिकट देने की घोषणा की।


    नई दिल्ली।अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग DHS ने अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे प्रवासियों के लिए बड़ा ऐलान किया है। इसमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। विभाग ने सेल्फ-डिपोर्टेशन यानी स्वेच्छा से अपने देश लौटने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 1,000 डॉलर से बढ़ाकर 3,000 डॉलर कर दी है। इसके साथ ही सरकार की ओर से मुफ्त हवाई टिकट भी दिया जाएगा, ताकि प्रवासी बिना किसी खर्च के अपने देश लौट सकें।

    31 दिसंबर तक रजिस्ट्रेशन करने पर मिलेगा लाभ

    DHS के अनुसार, जो प्रवासी 31 दिसंबर तक CBP One ऐप के जरिए सेल्फ-डिपोर्टेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराएंगे, वे इस योजना का पूरा लाभ उठा सकेंगे। ऐसे लोगों को 3,000 डॉलर नकद, सरकार द्वारा प्रायोजित यात्रा और वीजा अवधि से अधिक रुकने पर लगने वाले नागरिक जुर्माने या दंडों से छूट मिलेगी।

    तेज, मुफ्त और आसान प्रक्रिया

    गृह सुरक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया को तेज, मुफ्त और आसान बताया है। इसके लिए केवल CBP One ऐप डाउनलोड कर अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी। यात्रा की पूरी व्यवस्था अमेरिकी सरकार करेगी, जिससे प्रवासियों को किसी तरह की भागदौड़ न करनी पड़े।

    विकल्प नहीं चुना तो सख्त कार्रवाई

    DHS ने साफ चेतावनी दी है कि जो अवैध प्रवासी इस योजना का लाभ नहीं लेंगे, उन्हें गिरफ्तार कर निर्वासित किया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में अमेरिका में प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में चल रहे सख्त आव्रजन अभियान का हिस्सा है।

    निर्वासन खर्च में 70% तक कटौती का दावा

    विभाग का दावा है कि सेल्फ-डिपोर्टेशन से निर्वासन की लागत में करीब 70 प्रतिशत तक कमी आएगी। मई 2025 तक एक अवैध प्रवासी को गिरफ्तार करने, हिरासत में रखने और निर्वासित करने की औसत लागत 17,121 डॉलर आ रही थी।

    सीमित समय का मौका

    गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने इसे सीमित समय का अवसर बताते हुए कहा कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे बचाने के लिए यह प्रोत्साहन बढ़ाया गया है। उन्होंने अवैध प्रवासियों से अपील की कि वे इस मौके का लाभ उठाएं।

    2026 में और सख्ती की तैयारी

    DHS के मुताबिक जनवरी 2025 से अब तक करीब 19 लाख अवैध प्रवासी स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ चुके हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि 2026 में और सख्त आव्रजन अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत नई फंडिंग, अधिकारियों की भर्ती और हिरासत क्षमता बढ़ाने की योजना है।

  • पिता की जमानत, बेटे की बोली, हॉलीवुड के सबसे बड़े सौदे की कहानी

    पिता की जमानत, बेटे की बोली, हॉलीवुड के सबसे बड़े सौदे की कहानी

    वाशिंगटन। हॉलीवुड की मशहूर कंपनी वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने की होड़ में एक नया और दिलचस्प मोड़ आया है। ओरेकल कंपनी के सह-संस्थापक और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल लैरी एलिसन ने इस सौदे के लिए अपनी निजी जमानत देने का फैसला किया है। यह कदम पैरामाउंट स्काइडेंस कंपनी द्वारा वॉर्नर ब्रदर्स को खरीदने की अपनी पेशकश को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

    वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के बोर्ड ने पिछले हफ्ते पैरामाउंट की पेशकश को ठुकराते हुए नेटफ्लिक्स के साथ समझौते का रास्ता चुना था। उनकी एक बड़ी आपत्ति यही थी कि पैरामाउंट के पास सौदे को पूरा करने के लिए पर्याप्त पैसा साबित नहीं है और एलिसन परिवार की तरफ से कोई पूरी निजी गारंटी नहीं है।

    बोर्ड का कहना था कि पैरामाउंट ने शेयरधारकों को गुमराह किया है क्योंकि उसकी पिछली प्रस्तावित इक्विटी प्रतिबद्धता के लिए “एलिसन परिवार की कोई प्रतिबद्धता किसी भी तरह की नहीं है”।

    उन्होंने साफ किया था कि इसका एकमात्र समाधान लैरी एलिसन की निजी जमानत ही हो सकती है। पैरामाउंट ने अब सोमवार को जारी एक सरकारी दस्तावेज में एलिसन की इस ‘अपरिवर्तनीय व्यक्तिगत गारंटी’ की पुष्टि की है ।
    40.4 अरब डॉलर का निजी भरोसा

    लैरी एलिसन ने पैरामाउंट स्काइडेंस की तरफ से की गई पेशकश के लिए 40.4 अरब डॉलर की इक्विटी फाइनेंसिंग की निजी जमानत देने का वादा किया है। उन्होंने यह भी सहमति दी है कि जब तक यह लेन-देन पूरा नहीं हो जाता, वह ‘एलिसन फैमिली ट्रस्ट’ को रद्द नहीं करेंगे और न ही उसकी संपत्तियों को कहीं और ले जाएंगे।

    पैरामाउंट ने यह भी बताया है कि इस ट्रस्ट के पास ओरेकल कंपनी के लगभग 1.16 अरब शेयर हैं, जिससे इसकी वित्तीय ताकत का पता चलता है । लैरी एलिसन की कुल संपत्ति लगभग 243 अरब डॉलर आंकी गई है ।
    दो दिग्गजों की टक्कर: पैरामाउंट बनाम नेटफ्लिक्स

    यह मामला असल में हॉलीवुड की कीमती संपत्तियों को लेकर पैरामाउंट और नेटफ्लिक्स के बीच की जंग है ।
    पैरामाउंट स्काइडेंस की पेशकश

    पैरामाउंट, जिसका नेतृत्व लैरी एलिसन के बेटे डेविड एलिसन कर रहे हैं, वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी की पूरी कंपनी (इसके केबल टीवी नेटवर्क्स सहित) 108.4 अरब डॉलर में खरीदना चाहता है। यह पेशकश प्रति शेयर 30 डॉलर नकद के हिसाब से है, जो नेटफ्लिक्स की पेशकश से ज्यादा है। पैरामाउंट का दावा है कि यह सौदा शेयरधारकों के लिए ज्यादा फायदेमंद है और इससे कंटेंट का उत्पादन बढ़ेगा ।
    नेटफ्लिक्स की पेशकश

    नेटफ्लिक्स लगभग 83 अरब डॉलर में सिर्फ वॉर्नर ब्रदर्स के स्टूडियो और स्ट्रीमिंग बिजनेस (जैसे HBO, HBO Max) को खरीदना चाहता है। वॉर्नर ब्रदर्स के समाचार और खेल चैनलों (जैसे CNN, TNT) को एक अलग कंपनी में बदल दिया जाएगा ।

    बाजार और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
    इस खबर का बाजार पर सकारात्मक असर देखने को मिला। वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के शेयरों में 3.5% से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जबकि पैरामाउंट स्काइडेंस के शेयर 4% से भी ज्यादा चढ़े। दूसरी ओर, नेटफ्लिक्स के शेयरों में 1% से अधिक की गिरावट आई। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि पैरामाउंट अभी भी मुश्किल स्थिति में है।

    पीपी फोरसाइट के विश्लेषक पाओलो पेस्काटोर के अनुसार, यह कदम सही दिशा में उठाया गया है, लेकिन संभव है कि यह पर्याप्त न हो । एसएंडपी ग्लोबल के एक अन्य विश्लेषक सेठ शाफर का कहना है कि शायद ही कोई शेयरधारक सिर्फ लैरी एलिसन की गारंटी न मिलने की वजह से सौदे के खिलाफ वोट दे रहा होगा, यानी और भी मुद्दे हैं।
    आगे की राह: मंजूरी और राजनीति

    यह लड़ाई अब सिर्फ शेयरधारकों तक सीमित नहीं रही। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस मामले में दिलचस्पी दिखा चुके हैं। उन्होंने कहा है कि नेटफ्लिक्स का बाजार में हिस्सा बहुत बड़ा है और वॉर्नर ब्रदर्स के साथ मिलकर यह और बढ़ जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सौदे को विनियामक मंजूरी देने के फैसले में वह “शामिल” होंगे। दोनों में से किसी भी सौदे को अमेरिका और यूरोप में प्रतिस्पर्धा कानून की कड़ी जांच का सामना करना पड़ेगा।
    शेयरधारकों का वोट और सरकारी मंजूरी का इंतजार

    लैरी एलिसन की 40.4 अरब डॉलर की निजी जमानत ने वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने की जंग में पैरामाउंट की पेशकश को एक नया जीवन दिया है। यह कदम सीधे तौर पर वॉर्नर ब्रदर्स के बोर्ड की चिंता का जवाब है। क्या यह बदलाव वॉर्नर ब्रदर्स के बोर्ड और शेयरधारकों को नेटफ्लिक्स के बजाय पैरामाउंट के साथ जाने के लिए राजी कर पाएगा। अगला पड़ाव शेयरधारकों का वोट और सरकारी मंजूरी का इंतजार होगा।

  • रूसी सेना में 200 से अधिक भारतीय नागरिक 26 की युद्ध में मौत विदेश मंत्रालय ने संसद में किया खुलासा

    रूसी सेना में 200 से अधिक भारतीय नागरिक 26 की युद्ध में मौत विदेश मंत्रालय ने संसद में किया खुलासा


    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसमें भारत सरकार ने बताया कि 202 भारतीय नागरिकों को फरवरी 2022 में शुरू हुए इस युद्ध के दौरान रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किया गया था। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को राज्यसभा में सांसदों के सवालों के जवाब में यह आंकड़ा प्रस्तुत किया।विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस समय तक कुल 202 भारतीय नागरिकों ने रूसी सेना में शामिल होने के लिए आवेदन किया और उन्हें भर्ती किया गया। हालांकि भारतीय सरकार ने अपनी कूटनीतिक कार्रवाई के तहत 119 नागरिकों को समय से पहले छुट्टी दिलवाने में सफलता हासिल की है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में सांसदों साकेत गोखले और रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा पूछे गए प्रश्नों के लिखित उत्तर में दी।

    वहीं इस बयान में मंत्रालय ने यह भी बताया कि अब तक इस युद्ध में 26 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। साथ ही सात भारतीय नागरिकों को रूस की सीमा क्षेत्र में लापता बताया गया है। इसके अलावा 50 भारतीय नागरिकों को रूस की सेना से रिहा कराने की कोशिशें जारी हैं। सरकार ने यह भी कहा कि 10 मृतकों के शवों को वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कहा कि भारतीय सरकार लगातार रूस के अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए हुए है। दोनों देशों के नेताओं और मंत्रियों के स्तर पर इस मामले को लेकर बातचीत जारी है।

    वहीं मंत्रालय ने यह भी बताया कि जिन 18 भारतीयों की मौत या लापता होने की खबरें आई हैं उनके डीएनए नमूने रूस के अधिकारियों के साथ साझा किए गए हैं ताकि शवों की पहचान की जा सके और परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाई जा सके।यह खुलासा उस समय हुआ है जब रूस ने 2022 में युद्ध की शुरुआत के बाद से 128 देशों में भर्ती अभियान तेज कर दिया था। रूस ने अपनी सेना को मजबूत करने के लिए दुनिया भर से सैनिकों की भर्ती शुरू की जिसमें भारतीय नागरिकों का भी शामिल होना बड़ा मुद्दा बना है। यूक्रेन-रूस युद्ध के परिणामस्वरूप अब तक अनुमानित 10 लाख से अधिक लोग मारे गए हैं या घायल हुए हैं।

    रूस के करीब 7 लाख 90 हजार सैनिकों के हताहत होने का अनुमान है जबकि लगभग 85 हजार सैनिक लापता बताए जा रहे हैं। इस युद्ध ने पूरी दुनिया में भारी संकट पैदा कर दिया है और रूस ने लगभग चार वर्षों में यूक्रेन के 12 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है।भारत सरकार ने अपनी कूटनीतिक पहल जारी रखते हुए इस संघर्ष में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूस के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है। इसके अलावा सरकार ने नागरिकों को इस युद्ध के बारे में सतर्क रहने और ऐसे संघर्षों में न फंसे रहने की सलाह दी है। भारत सरकार की कोशिशें यह सुनिश्चित करने की हैं कि इस युद्ध में कोई भारतीय नागरिक अनावश्यक रूप से जोखिम में न पड़े और उनके परिवारों को पूरी जानकारी और सहायता समय पर मिल सके। 
  • भारत-न्यूजीलैंड FTA: 20 मिलियन डॉलर निवेश का ऐलान, ट्रंप को लगा झटका

    भारत-न्यूजीलैंड FTA: 20 मिलियन डॉलर निवेश का ऐलान, ट्रंप को लगा झटका


    नई दिल्ली/भारत और न्यूजीलैंड ने नौ महीनों की तेज वार्ता के बाद ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते FTA की घोषणा की है जो दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा। भारत ने वैश्विक व्यापार और कूटनीति के मोर्चे पर एक और बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हाल ही में हुई टेलीफोन वार्ता में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते FTA की ऐतिहासिक और संयुक्त घोषणा की गई। यह समझौता न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा बल्कि वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।
    9 महीने में पूरा हुआ ऐतिहासिक समझौता
    भारत और न्यूजीलैंड के बीच एफटीए पर बातचीत मार्च 2025 में शुरू हुई थी जब प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन भारत दौरे पर आए थे। मात्र नौ महीनों के भीतर इस समझौते का पूरा होना दोनों देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और रणनीतिक सोच को दर्शाता है। इस तेजी ने वैश्विक व्यापार जगत में भी ध्यान खींचा है।

    पांच साल में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

    दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि एफटीए के लागू होने के बाद अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना किया जाएगा। यह समझौता व्यापार निवेश नवाचार और सप्लाई चेन सहयोग को नई गति देगा। विशेषज्ञों के अनुसार इससे कृषि डेयरी फूड प्रोसेसिंग शिक्षा टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप क्षेत्रों में विशेष अवसर खुलेंगे।

    15 साल में भारत में 20 मिलियन डॉलर का निवेश

    न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में कुल 20 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा। इससे न सिर्फ नए रोजगार पैदा होंगे बल्कि तकनीकी और औद्योगिक सहयोग भी मजबूत होगा। यह निवेश भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती और अर्थव्यवस्था की स्थिरता को भी बढ़ावा देगा।

    भारत का सातवां बड़ा FTA वैश्विक नेटवर्क मजबूत
    न्यूजीलैंड के साथ यह भारत का सातवां प्रमुख FTA है। इससे पहले भारत ने ओमान UAE यूके ऑस्ट्रेलिया मॉरीशस और EFTA देशों के साथ समझौते किए हैं। यह श्रृंखला भारत को तेजी से एक भरोसेमंद वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित करती है।

    ट्रंप की व्यापार नीति को परोक्ष झटका

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब अमेरिका खासकर डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी और टैरिफ-केंद्रित नीति पर जोर दे रहा है भारत का लगातार नए FTA करना वैश्विक व्यापार के लिए वैकल्पिक और खुला मॉडल पेश करता है। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए इसी दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

  • जेलेंस्की पड़े नरम,रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप के पीस प्लान पर पुतिन तैयार

    जेलेंस्की पड़े नरम,रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप के पीस प्लान पर पुतिन तैयार


    वाशिंगटन। रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से चल रहे युद्ध के बीच अच्छी और बड़ी खबर सामने आई है। रूस की ओर से कहा गया है कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शांति वार्ता फ्लोरिडा में ‘रचनात्मक’ तरीके से आगे बढ़ रही है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि संबंधित पक्षों की बातचीत तेजी से प्रगति कर रही है। यह वार्ता ट्रंप प्रशासन द्वारा महीनों से किए जा रहे शांति प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें इस सप्ताह की शुरुआत में बर्लिन में यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ बैठकें भी शामिल हैं।

    रूसी सरकारी समाचार एजेंसी ‘आरआईए नोवोस्ती’ के अनुसार, रूसी दूत किरिल दिमित्रीव ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि चर्चाएं रचनात्मक रूप से आगे बढ़ रही हैं। ये आज भी जारी हैं और कल भी जारी रहेंगी। खबर के मुताबिक, दिमित्रीव ने मियामी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से मुलाकात की।

    वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने रविवार को टेलीग्राम पर लिखा कि राजनयिक प्रयास काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और फ्लोरिडा में हमारी टीम अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ काम कर रही है।

    जेलेंस्की के इस बयान से लग रहा है कि अब वे नरम पड़ गए हैं। इससे पहले, शुक्रवार को यूक्रेन के प्रमुख वार्ताकार ने कहा था कि अमेरिका में उनका प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी और यूरोपीय पक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें पूरी कर चुका है।

    ट्रंप ने युद्ध को समाप्त करने के लिए व्यापक राजनयिक प्रयास शुरू किए हैं, लेकिन उनके प्रयासों को रूस और यूक्रेन की ओर से परस्पर विरोधी मांगों का सामना करना पड़ रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह यूक्रेन पर अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे, क्योंकि भारी नुकसान के बावजूद रूसी सेनाएं युद्ध के मैदान में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं। शुक्रवार को पुतिन ने विश्वास जताया था कि यदि यूक्रेन शांति वार्ता में रूस की शर्तों को नहीं मानता, तो क्रेमलिन अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर लेगा।

    दूसरी ओर फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत करने की पुतिन की इच्छा का स्वागत किया और कहा कि वह ‘आने वाले दिनों में’ आगे की प्रक्रिया तय करेगा। इससे पहले खबर आई थी कि पुतिन अगर परस्पर राजनीतिक इच्छा हो तो फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। मैक्रों के कार्यालय ने कहा है कि किसी भी बातचीत का उद्देश्य राष्ट्रपति जेलेंस्की और हमारे यूरोपीय भागीदारों के साथ पूरी पारदर्शिता के साथ यूक्रेन और यूरोप के लिए एक ठोस और स्थायी शांति में योगदान देना होगा।