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  • ट्रंप के बाद पाकिस्तान का साथ देने वाले चीन ने भी किया सीजफायर कराने का दावा

    ट्रंप के बाद पाकिस्तान का साथ देने वाले चीन ने भी किया सीजफायर कराने का दावा


    बीजिंग।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के बाद अब चीन (China) भी भारत और पाकिस्तान में सीजफायर (India-Pakistan, ceasefire) कराने का दावा कर रहा है।  चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को दावा किया कि इस वर्ष चीन द्वारा ‘मध्यस्थता’ किए गए प्रमुख संवेदनशील मुद्दों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भी शामिल रहे। भारत लगातार यह कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान से संबंधित मामलों में किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है।

    भारत का यह कहना रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सात से 10 मई के दौरान संघर्ष का समाधान दोनों देशों की सेनाओं के सैन्य संचालन महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच सीधी बातचीत के माध्यम से हुआ था। भारतीय सशस्त्र बलों ने सात मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था।

    बीजिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हालात और चीन के विदेश संबंधों पर संगोष्ठी में वांग ने कहा, ‘इस साल, द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से किसी भी समय की तुलना में स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष अधिक बार भड़के। भू-राजनीतिक उथल-पुथल लगातार फैलती जा रही है।’ उन्होंने कहा, ‘स्थायी शांति स्थापित करने के लिए, हमने एक वस्तुनिष्ठ और तर्कसंगत रुख अपनाया है, और लक्षणों और मूल कारणों दोनों को संबोधित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।’

    उन्होंने कहा, ‘गतिरोध वाले मुद्दों को सुलझाने के लिए चीन के इस दृष्टिकोण का अनुसरण करते हुए, हमने उत्तरी म्यांमा, ईरान के परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इजरायल के मुद्दों तथा कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हालिया संघर्ष में मध्यस्थता की।’


    पाकिस्तान को दी थी मदद

    इस वर्ष 7 से 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष में चीन की भूमिका, विशेष रूप से उसके द्वारा पाकिस्तान को प्रदान की गई सैन्य सहायता, गंभीर जांच और आलोचना के दायरे में आ गई। कूटनीतिक मोर्चे पर, चीन ने सात मई को भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने का आह्वान किया था।

    चीन की विदेश नीति संबंधी पहल पर अपने संबोधन में वांग ने भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की अच्छी गति का जिक्र किया। साथ ही अगस्त में तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बीजिंग द्वारा आमंत्रित किए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘इस वर्ष हमने भारत और उत्तर कोरिया के नेताओं को चीन में आमंत्रित किया। चीन-भारत संबंधों में अच्छी गति देखने को मिली और उत्तर कोरिया के साथ पारंपरिक मित्रता और मजबूत हुई तथा उसे और बढ़ावा मिला।’ उन्होंने यह भी कहा कि एससीओ शिखर सम्मेलन एक शानदार सफलता थी। वांग यी ने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ चीन का जुड़ाव अब साझा भविष्य वाले समुदाय के निर्माण के एक नए चरण में प्रवेश कर गया है, जो अब और तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

  • बांग्लादेश में जहां भीड़ ने ली थी जान, वहीं फिर खूनखराबा: मैमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या

    बांग्लादेश में जहां भीड़ ने ली थी जान, वहीं फिर खूनखराबा: मैमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या

    नई दिल्ली। पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की कड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। मैमनसिंह जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक हिंदू युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वही इलाका है, जहां कुछ दिन पहले ईशनिंदा के आरोप में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला था।
    लगातार हो रही हत्याओं से पूरे क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।

    ताजा मामले में बांग्लादेश के ग्रामीण अर्धसैनिक बल अंसार के सदस्य बजेंद्र बिस्वास की जान चली गई। सोमवार, 29 दिसंबर की शाम करीब 6:45 बजे भालुका उपजिला क्षेत्र स्थित लबीब ग्रुप की गारमेंट फैक्ट्री सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड में यह घटना हुई। बजेंद्र बिस्वास वहां सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात थे और फैक्ट्री परिसर में बने अंसार बैरक में अपने साथियों के साथ रहते थे।

    पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बातचीत के दौरान बजेंद्र के साथी नोमान मियां ने कथित तौर पर मजाक में सरकारी शॉटगन उनकी ओर तान दी। कुछ ही पलों बाद अचानक गोली चल गई, जो बजेंद्र की बाईं जांघ में जा लगी। गंभीर रूप से घायल बजेंद्र को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    घटना के बाद पुलिस ने आरोपी नोमान मियां को हिरासत में ले लिया और वारदात में इस्तेमाल की गई शॉटगन जब्त कर ली है। संबंधित थाने के प्रभारी मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है और मामले की गहन जांच की जा रही है।

    गौर करने वाली बात यह है कि बीते दो हफ्तों में यह इसी इलाके में हिंदू समुदाय से जुड़ी तीसरी हत्या है। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या और अब बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर मौत ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से भालुका और आसपास के क्षेत्रों में तनाव गहराता जा रहा है, जबकि स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दावे कर रहा है।

  • बांग्लादेश की लोकतंत्र की जननी खालिदा जिया का निधन, तारिक रहमान बोले ‘अल्लाह की पुकार’

    बांग्लादेश की लोकतंत्र की जननी खालिदा जिया का निधन, तारिक रहमान बोले ‘अल्लाह की पुकार’


    नई दिल्ली। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी (Bangladesh Nationalist Party) प्रमुख बेगम खालिदा जिया का मंगलवार, 30 दिसंबर 2025 को 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर ने देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोक की लहर दौड़ा दी। बेटे तारिक रहमान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, मेरी मां और BNP की अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया अल्लाह की पुकार सुनकर आज हमें छोड़कर चली गईं।

    तारिक ने अपने पोस्ट में कहा कि उनकी मां केवल राजनीतिक नेता नहीं थीं, बल्कि लोकतंत्र की जननी और बांग्लादेश की मां के रूप में जानी जाती थीं।

    उन्होंने जीवनभर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया और तानाशाही व राजनीतिक उत्पीड़न के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहीं। इसके अलावा, तारिक ने खालिदा जिया के मातृत्व और करुणा की भी तारीफ की, बताया कि राजनीतिक संघर्षों के बीच उन्होंने हमेशा अपने परिवार को संभाला और कठिन परिस्थितियों में भी साहस नहीं खोया।

    गिरफ्तारी, बीमारी और संघर्ष भरा जीवन
    खालिदा जिया का जीवन संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा।

    उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया, इलाज से वंचित रखा गया और लगातार राजनीतिक उत्पीड़न झेलना पड़ा। बावजूद इसके उनका व्यक्तित्व शांत, अडिग और मजबूत रहा। निजी जीवन में उन्हें अपने पति और बच्चों को खोने का दर्द भी सहना पड़ा, लेकिन उन्होंने देश की सेवा को अपना सर्वोच्च उद्देश्य बनाया और जनता को अपने परिवार की तरह अपनाया।

    लोकतांत्रिक विरासत और योगदान
    खालिदा जिया ने तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में सेवा की और महिलाओं की भागीदारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की।

    उनके नेतृत्व में BNP ने बांग्लादेश में राष्ट्रीयता, लोकतंत्र और विकास के मुद्दों को मजबूती से उठाया। उनके राजनीतिक जीवन और संघर्षों की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

    पारिवारिक जीवन और BNP में योगदान
    खालिदा जिया के पति, जियाउर रहमान, बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति थे, जिनकी हत्या 1981 में हुई। इस व्यक्तिगत और राजनीतिक सदमे के बावजूद, खालिदा जिया ने पार्टी और देश की सेवा जारी रखी। उनके बेटे तारिक रहमान भी BNP में सक्रिय भूमिका निभाते रहे और उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। BNP, बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी, 1978 में जियाउर रहमान द्वारा स्थापित की गई थी और यह राष्ट्रीयता, लोकतंत्र और विकास के मुद्दों पर सक्रिय रही है।

    देश और दुनिया के प्रति आभार
    तारिक रहमान ने परिवार की ओर से देश और दुनिया भर से मिले प्रेम, सम्मान और संवेदनाओं के लिए आभार जताया। खालिदा जिया का निधन बांग्लादेश की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनका जीवन, संघर्ष और लोकतांत्रिक सिद्धांत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

    खालिदा जिया का जीवन केवल बीएनपी या बांग्लादेश तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र और महिलाओं की राजनीति में उनकी पहचान अमिट रही। उनकी मातृत्व, नेतृत्व क्षमता और लोकतंत्र के प्रति समर्पण उन्हें हमेशा यादगार बनाए रखेंगे।

  • पुतिन के सरकारी आवास पर ड्रोन हमला? रूस ने 91 यूक्रेनी ड्रोन गिराने का दावा, यूक्रेन ने किया खारिज

    पुतिन के सरकारी आवास पर ड्रोन हमला? रूस ने 91 यूक्रेनी ड्रोन गिराने का दावा, यूक्रेन ने किया खारिज


    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में तनाव फिर चरम पर पहुंच गया है। रूस ने दावा किया है कि यूक्रेन ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नोवगोरोड स्थित सरकारी आवास पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की। रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने इस कथित हमला नाकाम कर दिया।

    रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के अनुसार 28 और 29 दिसंबर की रात कुल 91 ड्रोन रूस की ओर भेजे गए थे। इन सभी ड्रोन को अलग-अलग क्षेत्रों में मार गिराया गया। लावरोव ने इस हमले को आतंकवादी कार्रवाई करार दिया और चेतावनी दी कि राष्ट्रपति के आवास को निशाना बनाना रूस की संप्रभुता और सुरक्षा पर हमला है जिसका जवाब कड़ा होगा। हालांकि रूस ने अब तक इस ड्रोन हमले से जुड़े कोई वीडियो या तस्वीरें साझा नहीं की हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि हमले के समय पुतिन उस आवास पर मौजूद थे या नहीं।

    दूसरी ओर यूक्रेन ने रूस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे “पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत” बताया। उन्होंने कहा कि रूस इस तरह के दावों के जरिए कीव पर हमले का बहाना खोज रहा है। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यूक्रेन कूटनीतिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध है जबकि रूस युद्ध को लंबा खींचने के लिए बहाने तलाश रहा है।यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी आरोप लगाया कि रूस पहले भी इसी तरह के दावों के आधार पर कीव में सरकारी इमारतों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाता रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह रूस की मंशा को समझते हुए चुप न रहे।

    रूस की ओर से विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि पुतिन ने इस कथित हमले की जानकारी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को फोन पर दी। उशाकोव के अनुसार ट्रम्प इस जानकारी से हैरान थे। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में ट्रम्प और जेलेंस्की के बीच फ्लोरिडा में युद्ध समाप्त करने को लेकर लंबी बातचीत हुई थी।इसी बीच जेलेंस्की ने खुलासा किया कि अमेरिका ने शांति योजना के तहत यूक्रेन को 15 साल की सुरक्षा गारंटी का प्रस्ताव दिया है लेकिन कीव इससे अधिक मजबूत और दीर्घकालिक गारंटी चाहता है। रूस पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह यूक्रेन में NATO या पश्चिमी देशों की सैन्य मौजूदगी स्वीकार नहीं करेगा।

    विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन के आवास पर ड्रोन हमले का दावा शांति वार्ता के नाजुक दौर में दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह आरोप केवल कूटनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या संघर्ष को और तेज करता है।इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर भी इस पर बनी हुई है कि रूस और यूक्रेन के बीच मौजूदा तनाव का समाधान किस दिशा में होगा। दोनों देशों के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा संकट भी प्रभावित हो रहा है।

  • यूक्रेन ने पुतिन के आवास के आसपास दागे 91 ड्रोन…, ट्रंप के शांति डील के प्रयासों पर फिर सकता है पानी

    यूक्रेन ने पुतिन के आवास के आसपास दागे 91 ड्रोन…, ट्रंप के शांति डील के प्रयासों पर फिर सकता है पानी


    मास्को।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia and Ukraine war) को खत्म करने की कोशिशों के बीच एक बार फिर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं. रूस ने सोमवार को आरोप लगाया कि यूक्रेन (Ukraine) ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) के उत्तरी रूस में स्थित एक आवास पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की. रूस का दावा है कि इस कथित हमले में कुल 91 ड्रोन इस्तेमाल किए गए, जिन्हें रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते मार गिराया. शांति समझौतों पर बातचीत के बीच हुए इस हमले से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप खासा नाराज हैं. उनकी पुतिन से बात भी हुई है।

    यूक्रेन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इसे रूस की ओर से “झूठ का एक और दौर” बताया और कहा कि ऐसे बयान शांति वार्ता को कमजोर करने के लिए दिए जा रहे हैं. इस आरोप-प्रत्यारोप के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है।

    इस पूरे मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी बीच में आना पड़ा. ट्रंप ने बताया कि खुद राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें फोन कर इस कथित ड्रोन हमले की जानकारी दी. फ्लोरिडा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात से पहले ट्रंप ने मीडिया से कहा कि पुतिन ने सुबह-सुबह उन्हें बताया कि उन पर हमला हुआ है. ट्रंप ने कहा कि वह इस बात से नाराज हैं, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि यह दावा गलत भी हो सकता है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “एक बात युद्ध के दौरान हमला करने की होती है और दूसरी बात किसी नेता के घर पर हमला करने की. यह ऐसा करने का सही समय नहीं है.” उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर यह घटना सच साबित होती है, तो यह तनाव को और बढ़ा सकती है.

    बीते 24 घंटों में ट्रंप ने पुतिन से दो बार बात की है. इससे एक दिन पहले उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी. ट्रंप के मुताबिक, पुतिन के साथ उनकी बातचीत “काफी सकारात्मक” रही और कुछ जटिल मुद्दों के बावजूद शांति की उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है.

    हालांकि, इसी बीच राष्ट्रपति पुतिन ने अपने सैन्य बलों को यूक्रेन के जापोरिज़िया क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण हासिल करने के अभियान को तेज करने के निर्देश दिए हैं. क्रेमलिन ने एक बार फिर मांग की है कि यूक्रेन अपने सैनिकों को डोनबास के उन इलाकों से हटा ले, जहां अब भी उसकी मौजूदगी है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ड्रोन हमले का यह दावा सच साबित होता है, तो यह रूस-यूक्रेन युद्ध में एक और बड़ा तनावपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिससे पहले से नाजुक शांति प्रयासों को गंभीर झटका लग सकता है.

  • ट्रंप को शांति पुरस्कार से सम्मानित करेगा इस्राइल …. नेतन्याहू बोले- इनके लिए हम तोड़ रहे परंपरा

    ट्रंप को शांति पुरस्कार से सम्मानित करेगा इस्राइल …. नेतन्याहू बोले- इनके लिए हम तोड़ रहे परंपरा


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को इस्राइल के सर्वोच्च नागरिक सम्मान (Israel’s highest civilian honor) इस्राइल शांति पुरस्कार (Israel Peace Prize) से सम्मानित किया जाएगा। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने सोमवार को फ्लोरिडा में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के बाद एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये एलान किया। नेतन्याहू ने एलान करते हुए कहा कि इस्राइली सरकार ने फैसला किया है कि राष्ट्रपति ट्रंप को इस्राइल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाए। 80 साल में यह पुरस्कार किसी भी गैर इस्राइली नागरिक को नहीं दिया गया है और पहली बार है कि शांति श्रेणी में यह पुरस्कार दिया जाएगा।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस एलान पर खुशी जताई और कहा कि यह सम्मान उनके लिए अनापेक्षित था। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस्राइली प्रधानमंत्री ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप ने लोगों को चौंकाने के लिए कई परंपराएं तोड़ी हैं, इसलिए हमने भी तय किया है कि हम भी एक परंपरा तोड़ेंगे और नई बनाएंगे। वो ये है कि इस्राइल सम्मान, जो 80 साल से किसी गैर इस्राइली नागरिक को नहीं दिया गया है, उससे राष्ट्रपति ट्रंप को सम्मानित किया जाएगा। भोजन के दौरान हमारे शिक्षा मंत्री ने इसका एलान किया था और यह पुरस्कार राष्ट्रपति ट्रंप के इस्राइली और यहूदी लोगों की भलाई में दिए गए योगदान के लिए दिया जाएगा।’

    इस्राइली प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आपने इस्राइली लोगों के लिए जो किया, हमारी आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई में जो मदद की, उसके लिए हम लोग आपके शुक्रगुजार हैं।’


    इस्राइस के स्वतंत्रता दिवस समारोह में किया जाएगा सम्मानित

    इस्राइल पुरस्कार, इस्राइल का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो पारंपरिक रूप से विज्ञान, कला और मानविकी जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने के लिए इस्राइली नागरिकों को दिया जाता है। शांति श्रेणी में यह पुरस्कार पहले कभी नहीं दिया गया था। जुलाई 2025 में, इस्राइल ने पुरस्कार नियमों में संशोधन किया ताकि यह सम्मान किसी विदेशी नागरिक को भी दिया जा सके, जिससे ट्रंप के चयन का रास्ता साफ हो गया। ट्रंप पुरस्कार लेने के लिए इस्राइल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल हो सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी संकेत दिया कि वह समारोह में शामिल होने पर विचार करेंगे।

  • ताइवान ने दिया जवाब, काउंटर कॉम्बैट एक्सरसाइज लॉन्च; थल, जल और वायुसेना हाई अलर्ट पर

    ताइवान ने दिया जवाब, काउंटर कॉम्बैट एक्सरसाइज लॉन्च; थल, जल और वायुसेना हाई अलर्ट पर


    नई दिल्ली।/बीजिंग।ताइवान जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। चीन ने ताइवान को पांच दिशाओं से घेरते हुए बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी PLA ने ताइवान के उत्तर, उत्तर-पूर्व, पश्चिम, दक्षिण और पूर्वी तट के आसपास अलग-अलग सैन्य जोन बनाकर लाइव-फायर ड्रिल शुरू की है। इस कदम को हाल के वर्षों का सबसे आक्रामक सैन्य अभ्यास माना जा रहा है।चीन की इस कार्रवाई के जवाब में ताइवान ने भी तत्काल काउंटर कॉम्बैट एक्सरसाइज शुरू कर दी है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उसकी थलसेना, नौसेना और वायुसेना को पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया है और चीनी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    पांच दिशाओं से सैन्य घेराबंदी

    चीनी सेना ने इस सैन्य अभियान को ‘जस्टिस मिशन 2025’ नाम दिया है। PLA के मुताबिक, इस अभ्यास में नौसेना, वायुसेना और रॉकेट फोर्स को एक साथ तैनात किया गया है। युद्धाभ्यास में अत्याधुनिक युद्धपोत, फाइटर जेट, बॉम्बर विमान, ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस ड्रिल का उद्देश्य समुद्री और हवाई लक्ष्यों पर हमला करने, बंदरगाहों की नाकाबंदी, रणनीतिक ठिकानों को निष्क्रिय करने और बाहरी हस्तक्षेप को रोकने की तैयारी बताया जा रहा है। इसके साथ ही चीनी कोस्ट गार्ड को भी ताइवान के आसपास के समुद्री क्षेत्र में सक्रिय कर दिया गया है।

    ताइवान की जवाबी तैयारी

    ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वह किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। ताइवान की सेना ने कॉम्बैट-रेडीनेस ड्रिल शुरू की है, जिसमें वायु रक्षा प्रणाली, नौसैनिक गश्त और थलसेना की त्वरित तैनाती शामिल है।ताइवान कोस्ट गार्ड ने चीन पर आरोप लगाया है कि इस सैन्य अभ्यास से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को खतरा पैदा हो गया है। कोस्ट गार्ड के अनुसार, चीनी गतिविधियों के कारण समुद्री जहाजों की आवाजाही और मछुआरों की सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

    पूर्वी तट बना सबसे अहम मोर्चा

    अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार चीन का सैन्य अभ्यास पहले की तुलना में अधिक व्यापक और ताइवान के बेहद करीब किया जा रहा है। खास तौर पर ताइवान के पूर्वी तट के पास बनाए गए सैन्य जोन को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि संकट की स्थिति में इसी दिशा से ताइवान को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से सैन्य या मानवीय मदद मिल सकती है। ऐसे में पूर्वी तट पर दबाव बनाना चीन की रणनीतिक प्राथमिकता माना जा रहा है।

    अमेरिका-ताइवान हथियार सौदे से बढ़ा तनाव

    चीन के इस सैन्य अभ्यास के पीछे अमेरिका और ताइवान के बीच हाल ही में हुई बड़ी हथियार डील को अहम कारण माना जा रहा है। अमेरिका ने ताइवान को करीब 11.1 अरब डॉलर के रक्षा उपकरण बेचने की घोषणा की है, जो अब तक का सबसे बड़ा रक्षा पैकेज बताया जा रहा है।इस पैकेज में उन्नत मिसाइल सिस्टम, रॉकेट लॉन्चर और आधुनिक सैन्य तकनीक शामिल है। चीन इसे अपनी संप्रभुता में सीधा हस्तक्षेप मानता है। इसी नाराजगी के चलते चीन ने 26 दिसंबर को अमेरिका की 20 डिफेंस कंपनियों और 10 वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया था।

    ताइवान को लेकर चीन का रुख

    चीन ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और किसी भी तरह के अलगाव या विदेशी समर्थन का कड़ा विरोध करता है। वहीं, ताइवान खुद को एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक इकाई मानता है।भौगोलिक रूप से ताइवान जापान से सिर्फ 110 किलोमीटर दूर है। यह क्षेत्र जापान के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहीं से होकर उसका बड़ा समुद्री व्यापार मार्ग गुजरता है और जापान में अमेरिका का सबसे बड़ा विदेशी सैन्य अड्डा भी मौजूद है।मौजूदा हालात ने पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

  • ईरान ने अमेरिका, इजराइल और यूरोप को बताया युद्धरत पक्ष, राष्ट्रपति बोले-हम पर दबाव बढ़ा लेकिन ताकत भी बढ़ी

    ईरान ने अमेरिका, इजराइल और यूरोप को बताया युद्धरत पक्ष, राष्ट्रपति बोले-हम पर दबाव बढ़ा लेकिन ताकत भी बढ़ी


    नई दिल्ली।/तेहरान।मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बड़ा और सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान इस समय अमेरिका, इजराइल और यूरोपीय देशों के साथ पूर्ण स्तर के टकराव की स्थिति में है। यह बयान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है, जिससे इसकी राजनीतिक और रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि मौजूदा हालात 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध से भी अधिक जटिल और खतरनाक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं है, बल्कि आर्थिक राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चों पर भी ईरान को अभूतपूर्व दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

    यह पारंपरिक युद्ध से अलग है

    अपने बयान में राष्ट्रपति ने कहा कि आज का संघर्ष केवल हथियारों तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, हम पर प्रतिबंध, राजनीतिक अलगाव, साइबर हमले और सैन्य धमकियां-सब एक साथ हैं। यह पारंपरिक युद्ध से कहीं अधिक कठिन स्थिति है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को घुटनों पर लाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन देश पहले से ज्यादा संगठित और मजबूत हुआ है।

    राष्ट्रीय एकता की अपील

    पेजेशकियन ने ईरानी जनता से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुश्मन देश के भीतर विभाजन पैदा करना चाहते हैं ताकि आंतरिक अस्थिरता के जरिए ईरान को कमजोर किया जा सके। राष्ट्रपति के अनुसार, राष्ट्रीय एकता ही इस चुनौतीपूर्ण दौर में सबसे बड़ा हथियार है।

    परमाणु कार्यक्रम पर विवाद

    अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, ईरान लगातार इस आरोप को खारिज करता आया है। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और ऊर्जा व शोध के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।जनवरी 2025 में अमेरिका में सत्ता में लौटने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति को फिर से लागू किया। इसके तहत ईरान के तेल निर्यात को शून्य करने और नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने के कदम उठाए गए। वहीं, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने भी संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रतिबंधों को दोबारा लागू किया है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।

    जून 2025 का ईरान-इजराइल युद्ध
    जून 2025 में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिनों तक सीधा सैन्य संघर्ष हुआ था। इस दौरान इजराइल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान में इस युद्ध में 1,000 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि ईरानी मिसाइल हमलों में इजराइल में 28 लोग मारे गए।बाद में अमेरिका भी इस संघर्ष में शामिल हो गया और उसने नतांज, फोर्डो और इस्फहान स्थित ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके बाद अमेरिकी मध्यस्थता से संघर्षविराम लागू हुआ और अप्रैल से चल रही परमाणु वार्ता ठप हो गई।

    सेना को लेकर राष्ट्रपति का दावा

    राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि हालिया हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना हथियारों और मानव संसाधनों—दोनों मामलों में पहले से अधिक मजबूत है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फिर से हमला हुआ, तो ईरान कड़ा और निर्णायक जवाब देगा।

    संभावित युद्ध के असर

    विश्लेषकों के मुताबिक, यदि मौजूदा तनाव पूर्ण युद्ध में बदलता है तो इसका असर ईरान की अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सामाजिक स्थिरता पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। हालांकि ईरान का नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहा है कि देश किसी भी हालात का सामना करने के लिए तैयार है।

  • रूस- यूक्रेन युद्धः ट्रंप और जेलेंस्की यूक्रेन शांति योजना पर लगभग सहमत

    रूस- यूक्रेन युद्धः ट्रंप और जेलेंस्की यूक्रेन शांति योजना पर लगभग सहमत


    फ्लोरिडा।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने रविवार को संयुक्त बयान में कहा कि हम दोनों यूक्रेन शांति योजना पर लगभग सहमत हैं। दोनों नेताओं ने यहां के मार-ए-लागो में यूक्रेन-रूस के बीच शांति समझौते को लेकर अहम बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में यह बयान जारी किया। उन्होंने यूक्रेन-रूस युद्ध और संभावित शांति समझौते पर चर्चा की।

    सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा, “यह बैठक शानदार रही। मैंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी फोन पर लगभग दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत की। अब लग रहा है कि हम शांति योजना पर बहुत करीब आ गए हैं। पुतिन और मैंने अभी यूरोपीय नेताओं से भी बात की। हमने यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने पर बहुत प्रगति की है। यह लड़ाई दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे घातक है।” जेलेंस्की ने कुछ दिन पहले इस मसले पर अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से बातचीत कर चुके हैं।

    यहां यह महत्वपूर्ण है कि ट्रंप की 20 सूत्री योजना के मसौदे की अभी क्रेमलिन समीक्षा नहीं कर सका है। मॉस्को ने अब तक अपनी क्षेत्रीय मांगों पर कोई नरमी दिखाने के संकेत भी नहीं दिए हैं। जेलेंस्की ने जरूर रविवार को कहा कि वह और ट्रंप योजना पर 90 फीसद सहमत हैं। ट्रंप और जेलेंस्की ने डोनबास जैसे क्षेत्रीय मुद्दों को “बहुत कठिन सवाल” बताया। जेलेंस्की ने यूक्रेन के शुभचिंतक देशों से रूस के शनिवार को कीव पर हमला करने के बावजूद शांति योजना पर समर्थन जारी रखने का आग्रह किया।

    सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, जेलेंस्की ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रपति ट्रपं के जनवरी में वाशिंगटन में यूरोपीय नेताओं की मेजबानी करेंगे। इस बैठक में वह भी मौजूद रहेंगे। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने और जेलेंस्की ने फ्रांस, फिनलैंड, पोलैंड, नॉर्वे, इटली, यूके और जर्मनी के नेताओं के साथ नाटो और यूरोपीय आयोग के नेताओं से भी बात की। जेलेंस्की ने इस दौरान यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी के महत्व पर जोर दिया। युद्ध खत्म होने संभावित समय-सीमा के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि ” इसमें कुछ हफ्ते लग सकते हैं।

    ट्रंप और जेलेंस्की के बीच चली लगभग ढाई घंटे की बातचीत के दौरान मार-ए-लागो के डाइनिंग रूम में विटकॉफ और कुशनर, व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और युद्ध सचिव पीट हेगसेथ मौजूद रहे।

  • बांग्लादेश में हिंदुओं पर ईशनिंदा के आरोपों से बढ़ी हिंसा, ह्यूमन राइट्स रिपोर्ट में हुई चेतावनी

    बांग्लादेश में हिंदुओं पर ईशनिंदा के आरोपों से बढ़ी हिंसा, ह्यूमन राइट्स रिपोर्ट में हुई चेतावनी


    नई दिल्ली:बांग्लादेश में ईशनिंदा के आरोपों के तहत हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाओं में तेजी देखी जा रही है। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज HRCBM की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जून से दिसंबर 2025 के बीच कम से कम 71 हमले दर्ज किए गए। यह रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करती है कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि एक लगातार चल रहे पैटर्न का हिस्सा हैं।

    रिपोर्ट में बताया गया कि हिंसा बांग्लादेश के 30 से अधिक जिलों में हुई। इनमें रंगपुर, चांदपुर, चटगांव, दिनाजपुर, लालमोनिरहाट, सुनामगंज, खुलना, कुमिल्ला, गाजीपुर, टांगाइल और सिलहट जैसे जिले शामिल हैं। मानवाधिकार संगठन का कहना है कि इतने व्यापक इलाके में बार-बार इस तरह की घटनाओं का होना अल्पसंख्यक समुदाय की प्रणालीगत असुरक्षा को दर्शाता है।रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अक्सर सोशल मीडिया या निजी बातचीत में किसी व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगाया जाता है। इसके बाद पुलिस कार्रवाई होती है, भीड़ इकट्ठा हो जाती है और हिंसा फैलती है। अक्सर हिंसा सिर्फ आरोपी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हिंदू मोहल्लों के घर, मंदिर और दुकानों को भी निशाना बनाया जाता है।

    विशेष चिंता की बात यह है कि हिंसा में नाबालिग भी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 90 फीसदी से ज्यादा आरोपी हिंदू थे, जिनमें 15 से 17 साल के नाबालिग भी शामिल थे। उदाहरण के लिए, 27 जुलाई 2025 को रंगपुर के बेटगारी यूनियन में एक 17 वर्षीय लड़के की गिरफ्तारी के बाद भीड़ ने कम से कम 22 हिंदू घरों में तोड़फोड़ की।एचआरसीबीएम के मुताबिक, कई मामलों में सोशल मीडिया खासतौर से फेसबुक का इस्तेमाल आरोपों के लिए हुआ। कई बार अकाउंट हैक पाए गए और पोस्ट की सच्चाई साबित नहीं हो सकी। इसके बावजूद पुलिस ने भीड़ के दबाव में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच पूरी होने से पहले ही FIR दर्ज कर दी जाती थी।

    शिक्षण संस्थानों में भी इसका असर पड़ा। कई कॉलेज और यूनिवर्सिटी छात्रों को निलंबित किया गया, उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया और कुछ को पुलिस रिमांड में भेजा गया। रिपोर्ट में साइबर सिक्योरिटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या भी उल्लेखनीय बताई गई है।रिपोर्ट में कई मौतों का भी जिक्र है। 18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह में 30 वर्षीय हिंदू युवक को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और शव को जला दिया। खुलना में एक नाबालिग पर कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में हमला किया गया। इन घटनाओं ने कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

    भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय MEA ने हालात को लगातार जारी दुश्मनी करार दिया और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की।एचआरसीबीएम की रिपोर्ट साफ करती है कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यक विशेषकर हिंदू समुदाय लगातार असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और बांग्लादेश सरकार दोनों से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।