Category: International

  • आसिम मुनीर ने तालिबान को फिर दी चेतावनी, कहा-पाकिस्तान या TTP में से किसी एक को चुनो

    आसिम मुनीर ने तालिबान को फिर दी चेतावनी, कहा-पाकिस्तान या TTP में से किसी एक को चुनो

    इस्लामाबाद । पाकिस्तानी सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर से तालिबान को चेतावनी दी है। मुनीर ने तालिबान सरकार से टीटीपी या फिर पाकिस्तान में से एक को चुनने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि सीमा पार से पाकिस्तान में घुसपैठ करने वाले ज्यादातर आतंकियों में अफगान नागरिक शामिल हैं। हाल ही में इस्लामाबाद में नेशनल उलेमा कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, मुनीर ने पाकिस्तान और 1,400 साल पहले पैगंबर द्वारा अरब क्षेत्र (आज के सऊदी अरब) में स्थापित राज्य के बीच समानताएं भी बताईं।

    हालांकि 10 दिसंबर को दिए गए भाषण का आधिकारिक विवरण सीमित था, लेकिन उनके भाषण के चुनिंदा क्लिप रविवार को स्थानीय टेलीविजन पर प्रसारित किए गए। मुनीर ने अफगान तालिबान सरकार से पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) में से किसी एक को चुनने के लिए कहा, और कहा कि सीमा पार से होने वाले आतंकवाद का बड़ा हिस्सा अफगान नागरिकों का है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में आने वाले टीटीपी के गुटों में 70 प्रतिशत अफगान हैं। क्या अफगानिस्तान हमारे पाकिस्तानी बच्चों का खून नहीं बहा रहा है?” उन्होंने अपनी बात दोहराई कि अफगान तालिबान को पाकिस्तान और TTP में से किसी एक को चुनना चाहिए।

    मुनीर ने आगे कहा कि एक इस्लामी देश में सरकार के अलावा कोई भी जिहाद का आदेश नहीं दे सकता। उन्होंने कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “अधिकार प्राप्त लोगों के आदेश, अनुमति और इच्छा के बिना कोई भी जिहाद का फतवा जारी नहीं कर सकता।” उनकी स्पीच में इस्लामिक बातों का जिक्र था, और उन्होंने अपने भाषण के दौरान कुरान की कई आयतें भी पढ़ीं।

  • रूस की सेना में 200 से ज्यादा भारतीय, यूक्रेन युद्ध में ले रहे भाग…अब तक 26 की मौत

    रूस की सेना में 200 से ज्यादा भारतीय, यूक्रेन युद्ध में ले रहे भाग…अब तक 26 की मौत


    मास्को।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia-Ukraine war) में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भारत सरकार (Government of India) ने संसद में खुलासा किया है कि अब तक 200 से अधिक भारतीय नागरिक (Indian citizen) रूसी सेना (Russian Army) में भर्ती होकर इस युद्ध में लड़ रहे हैं। यह आंकड़ा विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में सांसदों के सवालों के जवाब में दिया। भारत के विदेश मंत्रालय ने यह आंकड़ा शुक्रवार को राज्यसभा में सांसदों साकेत गोखले और रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा पूछे गए प्रश्नों के लिखित उत्तर में दिया।

    ‘रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की रिहाई’ शीर्षक वाले बयान में मंत्रालय ने कहा कि फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से 202 भारतीय नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती होने की जानकारी है। हालांकि, सरकार के कूटनीतिक प्रयासों से इनमें से 119 की समय से पहले छुट्टी कराई जा चुकी है। वहीं, मृतकों की संख्या के बारे में बयान में कहा गया है कि युद्ध में 26 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है और 7 को रूसी सीमा क्षेत्र में लापता बताया जा रहा है।

    मंत्रालय ने आगे बताया कि 50 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से रिहा कराने के प्रयास जारी हैं, साथ ही 10 मृतकों के शव वापस लाने की कोशिश भी की जा रही है। इस दौरान विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण और शीघ्र रिहाई के लिए भारत सरकार रूसी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में है। इस मामले पर दोनों देशों के नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों के बीच विभिन्न स्तरों पर चर्चा हो रही है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि मृत या लापता बताए गए 18 भारतीयों के डीएनए नमूने रूसी अधिकारियों के साथ साझा किए गए हैं।

    बता दें कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के युद्ध को आगे बढ़ाने के लिए 128 देशों में भर्ती अभियान तेज कर दिया है। अनुमान के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक 10 लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं या घायल हुए हैं। वहीं, रूस के करीब 7 लाख 90 हजार सैनिकों के हताहत होने का अनुमान है, जबकि लगभग 85 हजार सैनिक लापता बताए जाते हैं। करीब चार वर्षों में रूस यूक्रेन के 12 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर चुका है।

  • सऊदी अरब में शराब प्रतिबंध के नियमों में बदलाव, वाइन शॉप्स पर लगी लम्बी कतारें

    सऊदी अरब में शराब प्रतिबंध के नियमों में बदलाव, वाइन शॉप्स पर लगी लम्बी कतारें


    दुबई।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने चुपचाप एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। दरअसल, दशकों से लागू सख्त शराब प्रतिबंध (Alcohol Ban) के बीच बड़ा बदलाव किया गया है। सऊदी सरकार (Saudi Government) ने अपने एकमात्र शराब बेचने वाले स्टोर तक अमीरों की पहुंच बढ़ा दी है। इस बदलाव के बाद गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिक, जिनके पास प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट है, अब इस स्टोर से शराब खरीद सकते हैं। इस फैसले की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन खबर फैल चुकी है और सऊदी राजधानी रियाद के डिप्लोमैटिक क्वार्टर में स्थित बिना किसी पहचान वाले स्टोर के बाहर कारों और लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।


    शराब की दुकान कहां है?

    रिपोर्टों के अनुसार, यह शराब की दुकान रियाद के डिप्लोमैटिक क्वार्टर में स्थित है। यह दुकान बाहर से पूरी तरह सामान्य दिखती है और इस पर कोई नाम या पहचान नहीं है। बताया जाता है कि यह स्टोर जनवरी 2024 में खोला गया था, जहां पहले केवल गैर-मुस्लिम राजनयिकों को ही शराब खरीदने की अनुमति थी। लेकिन अब प्रीमियम रेजिडेंसी वाले गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिक भी यहां से शराब खरीद सकते हैं।


    प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट क्या है?

    प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट सऊदी अरब की एक खास नीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह निवेशकों, उद्यमियों और विशेष कौशल वाले लोगों को आकर्षित करना चाहता है। इस परमिट के लिए मुख्य शर्त उच्च आय और बड़ा निवेश है। इसके तहत विदेशी लोग बिना किसी सऊदी स्पॉन्सर के संपत्ति खरीद सकते हैं, बिजनेस शुरू कर सकते हैं और अपना परिवार भी साथ रख सकते हैं।


    शराब की कीमतें कितनी हैं?

    एसोसिएटेड प्रेस और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, स्टोर से बाहर निकलने वाले ग्राहकों ने बताया कि कीमतें काफी ज्यादा हैं। राजनयिकों को उनकी खरीदारी पर टैक्स में छूट मिलती है, लेकिन प्रीमियम रेजिडेंसी धारकों को नहीं। ग्राहकों ने स्टोर को अच्छी तरह से स्टॉक किया हुआ बताया, हालांकि कुछ ने कहा कि बीयर और वाइन का चयन अभी सीमित है।


    पहले लोग शराब कहां से पीते थे?

    सऊदी अरब में शराब पर सख्त प्रतिबंध होने के कारण यहां रहने वाले लोग अक्सर पड़ोसी देश बहरीन जाते थे, जहां मुसलमानों और गैर-मुसलमानों दोनों के लिए शराब कानूनी है। सप्ताह के अंत और छुट्टियों में सऊदी अरब और खाड़ी देशों से बड़ी संख्या में लोग बहरीन जाते हैं, जिससे यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है। इसके अलावा, कुछ लोग तस्करी वाली शराब का भी सहारा लेते हैं, जो बेहद महंगी होती है।


    सऊदी अरब ऐसा क्यों कर रहा है?

    यह बदलाव सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और किंग सलमान के नेतृत्व में पिछले कुछ सालों से हो रहे बड़े सामाजिक और आर्थिक सुधारों का हिस्सा है। यहां सिनेमा हॉल खोले गए हैं, महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति दी गई है और बड़े म्यूजिक फेस्टिवल आयोजित किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि ये फैसले पर्यटन बढ़ाने, विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने और तेल पर निर्भरता कम करने के लिए किए जा रहे हैं। यह बदलाव विजन 2030 के तहत देश को ज्यादा आधुनिक और वैश्विक बनाने की दिशा में एक कदम है।

  • Bangladesh: दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार

    Bangladesh: दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) के मयमनसिंह के भालुका इलाके में ईशनिंदा (Blasphemy) के आरोप में 25 वर्षीय फैक्ट्री कर्मचारी दीपू चंद्र दास (Factory worker Deepu Chandra Das) की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में अधिकारियों ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रशासन ने यह कार्रवाई हत्या के दो दिन बाद की है। इस घटना में भीड़ ने दीपू की हत्या कर उसके शव को एक मुख्य मार्ग पर पेड़ से लटकाकर आग लगा दी थी और घटना का लाइव प्रसारण भी किया था।

    मयमनसिंह रैपिड एक्शन बटालियन (रैब) के कार्यालय ने शनिवार को बताया कि गिरफ्तार किए गए 10 लोगों में से सात को उसने और तीन अन्य को पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर पकड़ा है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लिमोन सरकार (19), तारेक हुसैन (19), माणिक मियां (20), इरशाद अली (39), निझुम उद्दीन (20), आलमगीर हुसैन (38), मिराज हुसैन (46), अजमल सगीर (26), शाहीन मियां (19) और नजमुल (21) के रूप में हुई है।

    रैब के अपर पुलिस अधीक्षक शम्सुज्जामन ने बताया कि गिरफ्तार व्यक्तियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस को सौंप दिया जाएगा। रैब का दावा है कि फैक्ट्री के एक फ्लोर मैनेजर आलमगीर हुसैन ने दीपू चंद्र दास को नौकरी से इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने के बाद उसे आक्रोशित भीड़ के हवाले कर दिया था। रैब निदेशक नैमुल हसन ने बताया कि इस मामले में फ्लोर मैनेजर और उसी फैक्ट्री के क्वालिटी मैनेजर मिराज हुसैन आकन को भी गिरफ्तार किया गया है। जांचकर्ता इस बात का जवाब खोजने का प्रयास कर रहे हैं कि पुलिस को बुलाने के बजाय युवक को भीड़ के हवाले क्यों किया गया। उन्होंने संदेह जताया कि इसके पीछे पुरानी रंजिश या भीड़ का दबाव उद्देश्य हो सकता है।

    इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया हुई है। लेखिका तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि एक मुस्लिम सहकर्मी ने मामूली बात पर दीपू को सजा देने के लिए उस पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया था। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने इसे 21वीं सदी को शर्मसार करने वाली बर्बरता और मानवता की हार बताया। उन्होंने बंगलादेश नेतृत्व से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर ध्यान देने का आग्रह किया। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी घटना पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार से बंगलादेशी अधिकारियों के समक्ष अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाने का आग्रह किया है।

  • आर्थिक संकट से जूझ रहे Pak को बड़ी राहत.. वर्ल्ड बैंक ने भी दी 70 करोड़ डॉलर के कर्ज को मंजूरी

    आर्थिक संकट से जूझ रहे Pak को बड़ी राहत.. वर्ल्ड बैंक ने भी दी 70 करोड़ डॉलर के कर्ज को मंजूरी


    इस्लामाबाद।
    आर्थिक संकट (Economic crisis) से जूझ रहे पाकिस्तान (Pakistan) को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से लगातार राहत मिल रही है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) से बड़ी राशि की मंजूरी के बाद अब वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने भी पाकिस्तान के लिए करोड़ों डॉलर का ऐलान किया है। वर्ल्ड बैंक ने शुक्रवार को कहा कि उसने पाकिस्तान को 700 मिलियन डॉलर (70 करोड़ डॉलर) की वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है। यह राशि एक बहुवर्षीय पहल के तहत दी जा रही है, जिसका उद्देश्य देश की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता को मजबूत करना और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी में सुधार करना है।

    विश्व बैंक के मुताबिक, यह धनराशि समावेशी विकास के लिए सार्वजनिक संसाधन – बहु-चरणीय प्रोग्रामेटिक दृष्टिकोण (PRID-MPA) के अंतर्गत जारी की जाएगी। इस कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान को कुल मिलाकर 1.35 अरब डॉलर तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है। स्वीकृत 700 मिलियन डॉलर में से 600 मिलियन डॉलर केंद्र स्तर के कार्यक्रमों के लिए निर्धारित हैं, जबकि 100 मिलियन डॉलर दक्षिणी प्रांत सिंध में एक प्रांतीय कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए दिए जाएंगे।

    यह मंजूरी ऐसे समय आई है, जब अगस्त महीने में विश्व बैंक ने पाकिस्तान के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत पंजाब में प्राथमिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए 47.9 मिलियन डॉलर का अनुदान भी स्वीकृत किया था।

    हालांकि, पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की चिंता भी सामने आ चुकी है। नवंबर में प्रकाशित IMF-विश्व बैंक की एक संयुक्त रिपोर्ट, जिसे पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया था, में कहा गया कि देश में खंडित नियामक व्यवस्था, अपारदर्शी बजट प्रक्रिया और राजनीतिक दखल निवेश को प्रभावित कर रहे हैं और राजस्व संग्रह को कमजोर बना रहे हैं।

  • Pakistan: उत्तर वजीरिस्तान में सुसाइड बॉम्बर ने सैन्य चौकी को उड़ाया, 4 सैनिकों की मौत

    Pakistan: उत्तर वजीरिस्तान में सुसाइड बॉम्बर ने सैन्य चौकी को उड़ाया, 4 सैनिकों की मौत


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के उत्तर-पश्चिमी इलाके उत्तर वजीरिस्तान (North Waziristan) में शुक्रवार को एक बड़ा आतंकी हमला (Major terrorist attack) हुआ। सुसाइड कार बॉम्बर (Suicide car bomber) और तीन बंदूकधारियों ने एक गांव के पास स्थित सैन्य चौकी पर हमला किया, जिसके बाद घंटों चली गोलीबारी में चार पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। इस हमले में कम से कम 15 नागरिक घायल हो गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

    पाकिस्तानी सेना और स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह इलाका खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आता है, जो अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है और अतीत में पाकिस्तानी तालिबान तथा अन्य उग्रवादी संगठनों का गढ़ रहा है। पुलिस ने बताया कि धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के कई मकान ढह गए, जिससे स्थानीय नागरिकों को गंभीर चोटें आईं। सेना के बयान में कहा गया कि सभी हमलावरों को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ के दौरान मार गिराया।

    सेना के मुताबिक, हमलावरों ने पहले चौकी की सुरक्षा घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की, लेकिन असफल रहने पर विस्फोटकों से लदी एक गाड़ी को चौकी की बाहरी दीवार से टकरा दिया। इस विस्फोट से पास के घरों और एक मस्जिद को भी नुकसान पहुंचा। हालांकि किसी भी संगठन ने तुरंत हमले की जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने इस हमले के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को जिम्मेदार ठहराया है। सेना का दावा है कि इस हमले की योजना अफगान सीमा के उस पार बनाई गई और वहीं से इसे निर्देशित किया गया।

    इस पर अफगानिस्तान की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। अफगान तालिबान लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि वे किसी भी देश के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देते, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है। पाकिस्तानी सेना ने कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि अफगानिस्तान के तालिबान शासक अपने क्षेत्र से आतंकियों को पाकिस्तान पर हमले करने से रोकेंगे। साथ ही यह भी कहा कि पाकिस्तान को आतंकियों और उनके मददगारों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है।

    हमले के कुछ घंटे बाद ही पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय सक्रिय हुआ। मंत्रालय ने इस्लामाबाद में अफगान तालिबान के उप-मिशन प्रमुख को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि पाकिस्तान ने अफगान भूमि से संचालित आतंकवादी हमलों के दोषियों और मददगारों के खिलाफ पूर्ण जांच और निर्णायक कार्रवाई की मांग की है। बयान में यह भी कहा गया कि अफगान तालिबान से यह अपेक्षा की गई है कि वह अपने क्षेत्र में सक्रिय सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ ठोस, तत्काल और सत्यापन योग्य कदम उठाए तथा पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद के लिए अफगान जमीन के इस्तेमाल को पूरी तरह रोके।

    पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव हाल के महीनों में बढ़ा है। अक्टूबर में सीमा पर झड़पें हुई थीं, जब काबुल में 9 अक्टूबर को हुए विस्फोटों के लिए अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था। बाद में कतर की मध्यस्थता से युद्धविराम तो हुआ, लेकिन नवंबर में तुर्की में हुई बातचीत में दोनों देश किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सके।

  • इमरान खान और बुशरा बीबी को 17 साल की सजा, करप्शन केस में PAK कोर्ट का फैसला

    इमरान खान और बुशरा बीबी को 17 साल की सजा, करप्शन केस में PAK कोर्ट का फैसला


    नई दिल्ली । पाकिस्तान में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को करारा झटका लगा है. फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की विशेष अदालत ने तोशाखाना II भ्रष्टाचार मामले में दोनों को 17-17 साल की कठोर जेल की सजा सुनाई. अदालत ने इमरान खान और बुशरा बीबी को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया ।
    स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला वर्ष 2021 से जुड़ा है जब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस द्वारा इमरान खान को एक बेहद कीमती बुल्गारी ज्वेलरी सेट गिफ्ट में दिया गया था. जांच में सामने आया कि इस गहनों की वास्तविक कीमत 7 करोड़ 15 लाख पाकिस्तानी रुपये से अधिक थी लेकिन इसे मात्र 58 लाख रुपये में खरीदकर नियमों का उल्लंघन किया गया. अदालत ने इसे सरकारी विश्वास के साथ धोखाधड़ी और भ्रष्ट आचरण करार दिया ।
    इमरान खान 2023 से जेल में बंद
    यह फैसला अदियाला जेल में बनाए गए विशेष कोर्ट रूम में विशेष न्यायाधीश शाहरुख अरजुमंद ने सुनाया. गौरतलब है कि इमरान खान अगस्त 2023 से ही विभिन्न मामलों में जेल में बंद हैं. इससे पहले जनवरी 2025 में अल-कादिर ट्रस्ट मामले में भी इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की सजा सुनाई जा चुकी है. तोशाखाना केस पर हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक हालांकि तोशाखाना मामले में अप्रैल 2024 में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी थी. इमरान खान की कानूनी टीम ने संकेत दिए हैं कि वे तोशाखाना मामले के इस फैसले को भी हाईकोर्ट में चुनौती देंगे ।
  • बांग्लादेश संकट के बीच पाकिस्तान की गीदड़भभकी, इशाक डार बोले– पानी रोकना युद्ध की कार्रवाई के बराबर

    बांग्लादेश संकट के बीच पाकिस्तान की गीदड़भभकी, इशाक डार बोले– पानी रोकना युद्ध की कार्रवाई के बराबर


    नई दिल्ली
    /इस्लामाबाद:बांग्लादेश में जारी राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के खिलाफ तीखे बयान देकर माहौल गरमाने की कोशिश की है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत पर सिंधु जल संधि के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि पानी की आपूर्ति रोकी जाती है तो इसे युद्ध की कार्रवाई के तौर पर देखा जाएगा।इशाक डार ने यह बयान शुक्रवार 19 दिसंबर को मीडिया से बातचीत के दौरान दिया। यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान ने चिनाब नदी के जल प्रवाह में बदलाव को लेकर भारत से औपचारिक रूप से स्पष्टीकरण मांगा है।

    भारत संधि को कमजोर कर रहा है

    डार ने आरोप लगाया कि भारत लगातार 1960 की सिंधु जल संधि को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहाहमने इस साल अप्रैल में भारत की ओर से संधि से एकतरफा हटने जैसे कदम देखे लेकिन अब जो हो रहा है वह समझौते के मूल सिद्धांतों पर सीधा हमला है। इसका असर न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ेगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून की विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ जाएगी।
    पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री का कहना था कि भारत की ये कार्रवाइयां केवल तकनीकी मुद्दा नहीं हैं बल्कि इसके गंभीर रणनीतिक और मानवीय परिणाम हो सकते हैं।

    पहलगाम हमले के बाद बदले हालात

    गौरतलब है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े और दंडात्मक कदम उठाए थे। इन्हीं में से एक कदम था सिंधु जल संधि को स्थगित करना।यह संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुई थी जो भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे को नियंत्रित करती है। दशकों से यह संधि दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद कायम रही है लेकिन हालिया घटनाओं ने इसे फिर विवाद के केंद्र में ला दिया है।

    कृषि और आजीविका पर खतरे का दावा

    इशाक डार ने दावा किया कि भारत द्वारा किए जा रहे कथित जल प्रवाह में हेरफेर के कारण पाकिस्तान के सिंधु आयुक्त को अपने भारतीय समकक्ष को पत्र लिखकर जवाब मांगना पड़ा है।उन्होंने कहा कि कृषि चक्र के अहम समय में पानी के प्रवाह में बदलाव पाकिस्तान के किसानों खाद्य सुरक्षा और आम नागरिकों की आजीविका के लिए सीधा खतरा है।डार के मुताबिक सिंधु बेसिन पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और उसमें किसी भी तरह का असंतुलन गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

    बाढ़ और सूखे का खतरा

    पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि भारत ने संधि के तहत जरूरी जल विज्ञान संबंधी डेटा साझा करना पूर्व सूचना देना और संयुक्त निगरानी तंत्र को लगभग बंद कर दिया है।उनका कहना है कि इससे पाकिस्तान को अचानक बाढ़ या लंबे सूखे जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।इशाक डार ने चेतावनी भरे लहजे में कहापानी की आपूर्ति को हथियार बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इसे युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।

    चिनाब में पानी छोड़े जाने से बढ़ा विवाद

    पाकिस्तान की नाराजगी की एक बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि भारत ने हाल ही में बिना पूर्व सूचना के चिनाब नदी में पानी छोड़ा जिससे पाकिस्तान में बाढ़ जैसे हालात की आशंका पैदा हो गई। इस कदम के बाद इस्लामाबाद में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई।
    विश्लेषकों का मानना है कि आंतरिक और क्षेत्रीय दबावों के बीच पाकिस्तान एक बार फिर जल मुद्दे को कूटनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। भारत की ओर से फिलहाल इस बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

  • बांग्लादेश में ISI की सुनियोजित वापसी? पाक हाई कमीशन में स्पेशल सेल की खबरों से भारत अलर्ट

    बांग्लादेश में ISI की सुनियोजित वापसी? पाक हाई कमीशन में स्पेशल सेल की खबरों से भारत अलर्ट


    नई दिल्ली
    /बांग्लादेश में जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्टें दक्षिण एशिया की सुरक्षा तस्वीर को लेकर गंभीर चेतावनी दे रही हैं। करीब पंद्रह वर्षों के अंतराल के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस ISI की गतिविधियों की वापसी की आशंका जताई जा रही है। इन घटनाक्रमों ने न सिर्फ ढाका बल्कि नई दिल्ली में भी सतर्कता बढ़ा दी है।सूत्रों के मुताबिक अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश की विदेश और सुरक्षा नीति में जो बदलाव शुरू हुआ था वह अब एक संगठित रणनीतिक ढांचे का रूप लेता दिख रहा है। खुफिया विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस राजनीतिक संक्रमण को अवसर के रूप में देख रहा है और बांग्लादेश में अपना प्रभाव दोबारा स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

    सीएनएन न्यूज-18 की एक रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ी चिंता का विषय ढाका स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के भीतर एक विशेष ISI सेल की कथित स्थापना है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस सेल में एक ब्रिगेडियर दो कर्नल और चार मेजर सहित थलसेना नौसेना और वायुसेना से जुड़े अधिकारी तैनात हैं। यह व्यवस्था सामान्य कूटनीतिक गतिविधियों से कहीं आगे मानी जा रही है।खुफिया सूत्र बताते हैं कि यह पूरा ढांचा अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान के चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी जनरल साहिर शमशाद मिर्जा की चार दिवसीय ढाका यात्रा के बाद औपचारिक रूप से सक्रिय हुआ। इस दौरे के दौरान ISI के वरिष्ठ अधिकारियों ने बांग्लादेश की नेशनल सिक्योरिटी इंटेलिजेंस NSI और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस DGFI के अधिकारियों के साथ बंद कमरे में कई बैठकें कीं।

    आधिकारिक तौर पर इन बैठकों का उद्देश्य बंगाल की खाड़ी में समुद्री निगरानी और क्षेत्रीय सहयोग बताया गया लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असली फोकस भारत की पूर्वी सीमाओं पर रणनीतिक नजर रखना हो सकता है।अगस्त 2024 के बाद ढाका और इस्लामाबाद के बीच रिश्तों में आई तेजी को भी असामान्य माना जा रहा है। जुलाई 2025 में दोनों देशों के बीच राजनयिकों आधिकारिक पासपोर्ट धारकों और यहां तक कि सैन्य कर्मियों के लिए वीजा-फ्री एंट्री पर सहमति बनी। इसके अलावा रावलपिंडी और ढाका के बीच उच्च स्तरीय सैन्य आदान-प्रदान कराची–चित्तागांव शिपिंग रूट और प्रस्तावित सीधी उड़ानों को भी खुफिया आवाजाही के संभावित कवर के रूप में देखा जा रहा है। खुफिया एजेंसियों का दावा है कि ISI का दीर्घकालिक एजेंडा बांग्लादेशी समाज विशेषकर युवाओं के बीच कट्टरपंथी विचारधाराओं को बढ़ावा देना है। जमात-ए-इस्लामी और इनकलाब मंच जैसे संगठनों के जरिए धार्मिक उग्रवाद को मजबूत करने की कोशिशों की भी बात कही जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान का उद्देश्य एक ऐसा हाइब्रिड राजनीतिक ढांचा खड़ा करना है जो स्वाभाविक रूप से भारतीय हितों के प्रति शत्रुतापूर्ण हो।

    18 दिसंबर को छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका में भड़की हिंसा को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। कई पर्यवेक्षकों ने इसे एकमैनेज्ड क्राइसिस करार दिया है। ढाका में भारतीय उच्चायोग और चट्टोग्राम में सहायक उच्चायोग पर हमले मीडिया संस्थानों में आगजनी और सड़कों पर भय का माहौल-इन घटनाओं को फरवरी 12 को प्रस्तावित चुनावों को टालने और कट्टरपंथी ताकतों की पकड़ मजबूत करने की रणनीति से जोड़ा जा रहा है।इन सभी संकेतों के बीच भारत ने अपनी पूर्वी सीमाओं और कूटनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से बांग्लादेश में हो रहे इन घटनाक्रमों पर आने वाले दिनों में भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।

  • भीख और अवैध यात्रा से पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें, 50 हजार से ज्यादा नागरिकों को कई देशों ने किया बाहर

    भीख और अवैध यात्रा से पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें, 50 हजार से ज्यादा नागरिकों को कई देशों ने किया बाहर


    इस्लामाबाद/पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक और गंभीर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। आतंकवाद के आरोपों के बाद अब पाकिस्तानी भिखारियों और अवैध प्रवासियों के कारण कई देश परेशान हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि अलग-अलग देशों ने 50 हजार से अधिक पाकिस्तानी नागरिकों को या तो अपने यहां से बाहर निकाल दिया या एयरपोर्ट पर ही प्रवेश देने से रोक दिया।यह चौंकाने वाली जानकारी पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की ओवरसीज पाकिस्तानियों और मानवाधिकारों पर स्थायी समिति की बैठक में सामने आई। बैठक में फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी FIA के महानिदेशक रिफ्फत मुख्तार राजा ने विस्तृत आंकड़े पेश किए।

    सऊदी अरब सबसे सख्त हजारों पाकिस्तानी लौटाए गए

    एफआईए डीजी के मुताबिक इस साल सबसे ज्यादा निर्वासन सऊदी अरब से हुआ है। वहां भीख मांगने के आरोप में करीब 24000 पाकिस्तानी नागरिकों को देश से बाहर कर दिया गया। सऊदी प्रशासन का कहना है कि इन लोगों ने धार्मिक यात्राओं और वीजा की शर्तों का गलत इस्तेमाल किया।
    इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरातUAE ने भी 6000 पाकिस्तानियों को निर्वासित किया जबकि अजरबैजान से करीब 2500 लोगों को भिखारी होने के आरोप में बाहर निकाला गया। इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा नुकसान पहुंचा है।

    एयरपोर्ट पर ही रोके गए हजारों लोग

    एफआईए डीजी ने समिति को बताया कि सिर्फ निर्वासन ही नहीं बल्कि हजारों पाकिस्तानियों को विदेश यात्रा से पहले ही रोक दिया गया। जांच में सामने आया कि कई लोग उमरा वीजा का बहाना बनाकर यूरोप जाने की कोशिश कर रहे थे।उन्होंने कहा कि जब इन यात्रियों के दस्तावेजों की गहन जांच की गई तो उनमें यूरोपीय देशों में अवैध प्रवेश की योजना साफ नजर आई।एफआईए प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहामजबूत सबूतों के आधार पर ऐसे यात्रियों को एयरपोर्ट पर ही यात्रा की अनुमति नहीं दी गई।

    एशियाई देशों में भी संदिग्ध गतिविधियां

    एफआईए ने समिति को यह भी बताया कि कंबोडिया और म्यांमार जैसे देशों में भी पाकिस्तानी नागरिकों की संदिग्ध आवाजाही सामने आई है।आंकड़ों के अनुसार:इस साल 24000 पाकिस्तानी कंबोडिया गए जिनमें से 12000 अब तक वापस नहीं लौटे।वहीं 4000 लोग म्यांमार पर्यटक वीजा पर गए लेकिन करीब 2500 अभी तक लापता हैं।इन मामलों को मानव तस्करी अवैध काम और संगठित गिरोहों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    कड़े कदमों से पासपोर्ट रैंकिंग में सुधार

    हालांकि एफआईए डीजी ने यह भी दावा किया कि हाल के महीनों में कड़े नियंत्रण उपायों के चलते कुछ सुधार देखने को मिला है।उन्होंने बताया कि पाकिस्तान का पासपोर्ट रैंकिंग में 118वें स्थान से सुधरकर 92वें स्थान पर आ गया है।उनका कहना था कि पहले पाकिस्तान अवैध प्रवासन के मामलों में दुनिया के शीर्ष पांच देशों में शामिल था लेकिन नीतियों में बदलाव और सख्ती के कारण स्थिति में आंशिक सुधार हुआ है।

    पहले भी हो चुके हैं सामूहिक निर्वासन

    इससे पहले जनवरी महीने में भी सऊदी अरब और अमेरिका समेत कई देशों ने एक ही हफ्ते में 200 से ज्यादा पाकिस्तानियों को निर्वासित किया था।पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन निर्वासनों की वजह वीजा उल्लंघन कानूनी अपराध अवैध काम और मानव तस्करी रही।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंता
    इन घटनाओं ने पाकिस्तान की वैश्विक छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रहे निर्वासन और अवैध गतिविधियों के मामलों से साफ है कि कई देश अब पाकिस्तानी नागरिकों की आवाजाही को लेकर अधिक सख्त रुख अपना रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान ने इस समस्या पर ठोस और दीर्घकालिक कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में उसके नागरिकों के लिए विदेश यात्रा और रोजगार के रास्ते और मुश्किल हो सकते हैं।