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  • 'सूअर के मल से उगा मक्का खा रहे बांग्लादेशी'

    'सूअर के मल से उगा मक्का खा रहे बांग्लादेशी'


    ढाका । अमेरिका से बांग्लादेश में मक्का (कॉर्न) के आयात ने सोशल मीडिया पर एक अनोखा विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी दूतावास की एक पोस्ट के बाद लोग व्यंग्य कर रहे हैं कि यह मक्का ‘सूअर के मल की अच्छाई’ से भरपूर है, क्योंकि अमेरिका में मक्का की खेती में सूअर के मल (पिग मैन्योर) को आमतौर पर खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। बांग्लादेश एक मुस्लिम-बहुल देश है, जहां इस्लामी शरीअत के तहत सूअर और उससे जुड़े उत्पाद हराम (निषिद्ध) माने जाते हैं। ऐसे में पिग मैन्योर के उपयोग का मुद्दा धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ गया।

    क्या था अमेरिकी दूतावास का पोस्ट?
    अमेरिकी दूतावास ने अपने पोस्ट में लिखा था कि इस महीने अमेरिकी मकई बांग्लादेश पहुंचने वाली है। पोस्ट में मकई को पौष्टिक बताते हुए कहा गया कि इसका उपयोग कॉर्नब्रेड, ब्रेकफास्ट सीरियल्स जैसे खाद्य पदार्थों के साथ-साथ पशुओं के चारे में भी होता है, जिससे मांस, डेयरी और अंडों की आपूर्ति सुनिश्चित होती है। हालांकि, पोस्ट में सीधे तौर पर सूअर के मल का जिक्र नहीं था, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स ने अमेरिकी खेती पद्धतियों का हवाला देते हुए इस बिंदु को उछाल दिया।

    पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने व्यंग्यात्मक और आलोचनात्मक लहजे में प्रतिक्रियाएं दीं। एक पत्रकार ने कटाक्ष करते हुए लिखा- डॉन (ट्रंप) की चापलूसी के बदले बांग्लादेश को सूअर के मल से उगा अमेरिकी मकई मिला। अन्य यूजर ने इसे सांस्कृतिक असंवेदनशीलता बताते हुए कहा कि यह बांग्लादेश जैसे देश के लिए अपमानजनक है। अब तक अमेरिकी दूतावास की ओर से इस आलोचना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
    पहले भी उठ चुका है ‘पॉर्क’ का मुद्दा

    यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में पोर्क से जुड़ा विवाद सामने आया हो। कुछ साल पहले मछली और पशु आहार के लिए आयात किए जा रहे मीट एंड बोन मील (MBM) में पोर्क (सूअर के मांस) के अंश पाए गए थे। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने MBM के आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।
    अमेरिकी मकई और पिग मैन्योर

    मकई की अधिक पैदावार के लिए भारी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता होती है और अमेरिका में सुअर के मल का उपयोग आम है। इस साल अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर मकई उत्पादन हुआ है, जिसके चलते वह बांग्लादेश और भारत जैसे बाजारों में निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अधिक उत्पादन के कारण अमेरिकी किसान सड़कों के किनारे मकई फेंकने को मजबूर हुए।
    भारत की हिचक और व्यापार वार्ता

    भारत ने अमेरिकी दबाव के बावजूद बड़े पैमाने पर अमेरिकी मकई और सोयाबीन आयात से परहेज किया है। भारत का तर्क है कि इससे छोटे किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। हालांकि, रायटर्स के अनुसार, भारत एथेनॉल उत्पादन के लिए सीमित मात्रा में आयात की अनुमति दे सकता है। माना जा रहा है कि इसी मुद्दे पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत अटकी हुई है।
    अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार तनाव

    बांग्लादेश का अमेरिका के साथ लगभग 6 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव भी देखने को मिला।

    इस वर्ष अमेरिका ने बांग्लादेश पर 37% टैरिफ लगाया था, जिससे उसके कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट निर्यात को बड़ा झटका लगा। बांग्लादेश के कुल निर्यात में कपड़ा क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 80% है।

    बाद में बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर अमेरिका से आयात बढ़ाने का वादा किया, जिसके बाद टैरिफ घटाकर 20% कर दिया गया। इस वादे में अमेरिकी गेहूं, मकई और सोयाबीन शामिल थे। हाल ही में बांग्लादेश सरकार ने सरकार-से-सरकार समझौते के तहत करीब 2.20 लाख मीट्रिक टन अमेरिकी गेहूं खरीदने की मंजूरी भी दी है।
    बांग्लादेश के लिए धार्मिक और स्वास्थ्य पहलू

    बांग्लादेश में 90% से अधिक आबादी मुस्लिम है, जहां सूअर का मांस खाना इस्लामी नियमों के खिलाफ है। हालांकि, मक्का में खाद के रूप में सूअर के गोबर का उपयोग वैज्ञानिक रूप से सामान्य है और इसमें कोई सूअर का मांस अवशेष नहीं रहता। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं से जुड़कर वायरल हो गया।

  • हाफिज सईद के साथी ने भी माना, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिया गहरा जख्म

    हाफिज सईद के साथी ने भी माना, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिया गहरा जख्म

    इस्‍लामाबाद । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने बीते मई महीने में ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकियों को करारा सबक सिखाया। भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान भारत ने ना सिर्फ उनके ठिकानों को समतल कर दिया, बल्कि सौ से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। आतंकी इस ऑपरेशन की मार से अब तक उबर नहीं पाए हैं। हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के टॉप लीडर और हाफिज सईद के करीबी ने माना है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकियों को कितना गहरा जख्म दिया।

    पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी ने ऑपरेशन सिंदूर से मिले दर्द को खुद कबूला है। तिलमिलाए कसूरी ने इस दौरान भारत के खिलाफ जमकर जहर भी उगला है। कसूरी ने कहा है कि भारत ने आतंकी कैंपों को निशाना बनाकर गलती की है। वहीं उसने ऐलान किया है कि लश्कर “कश्मीर मिशन से कभी पीछे नहीं हटेगा।”

    इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सैफुल्लाह कसूरी ने हजारों लोगों की भीड़ के सामने एक सार्वजनिक सभा में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर बहुत बड़ी गलती की।” उसने आगे कहा, “…जो पाबंदियां लगाते हैं, जो रुकावट पैदा करते हैं, वो सुनो, जो हमें आतंकवादी कहते हैं, सुनो। पूरी दुनिया को पलटा जा सकता है, सिस्टम बदला जा सकता है। हम अपने कश्मीर मिशन से कभी पीछे नहीं हटेंगे।”

    गौरतलब है कि बीते 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों को बेरहमी से मार दिया था। इस दौरान आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म पूछकर गोलियां बरसाई थीं। इसके बाद भारत ने पाक और पाक अधिकृत कश्मीर में ऑपरेशन सिंदूर के तहत कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। भारतीय सशस्त्र बलों ने इस कार्रवाई के दौरान करीब 150 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया।

  • सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव, बीच में आया पाकिस्तान?

    सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव, बीच में आया पाकिस्तान?


    इस्लामाबाद । यमन में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के संबंधों में आई दरार ने पूरे मध्य पूर्व को हिला दिया है। सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हवाई हमले किए, जिसमें यूएई से आई हथियारों की खेप को निशाना बनाया गया। रियाद का आरोप है कि ये हथियार यूएई समर्थित अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) के लिए थे, जो सऊदी की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान भी खुलकर सामने आ गया है।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत कर यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला पर हालिया सऊदी हवाई हमले के बाद सऊदी अरब के प्रति पूर्ण एकजुटता व्यक्त की। यह जानकारी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में दी गई।

    बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से चले आ रहे भाईचारे वाले संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में कहा गया कि हाल के महीनों में द्विपक्षीय रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं।

    प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने फोन कॉल के लिए शहबाज़ शरीफ का आभार जताया और पाकिस्तान के साथ आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की सऊदी अरब की इच्छा दोहराई। उन्होंने अगले वर्ष पाकिस्तान की आधिकारिक यात्रा करने का भी इरादा व्यक्त किया।

    यमन में बढ़ता तनाव

    गौरतलब है कि सऊदी अरब ने मंगलवार को मुकल्ला पर हवाई हमला किया था। यह हमला संयुक्त अरब अमीरात से कथित रूप से हथियारों की एक खेप के पहुंचने के बाद किया गया, जिसके बारे में माना जा रहा है कि वह यमन के अलगाववादी बलों के लिए थी। यह घटनाक्रम यूएई समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल की प्रगति से जुड़े बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस टकराव से यमन के एक दशक से जारी संघर्ष में एक नया मोर्चा खुलने की आशंका पैदा हो गई है, जहां ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने वाली ताकतें आपस में भी भिड़ सकती हैं। यमन पहले ही अरब दुनिया का सबसे गरीब देश माना जाता है और वहां मानवीय संकट बेहद गंभीर है।
    पाकिस्तान के लिए कठिन कूटनीतिक चुनौती

    पाकिस्तान के लिए यह स्थिति कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि उसके संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब- दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। इस सप्ताह रियाद और अबू धाबी के बीच बढ़े तनाव ने इस्लामाबाद के सामने कठिन संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी कर दी है।

    इसी क्रम में शहबाज शरीफ ने क्राउन प्रिंस से बात करने से एक दिन पहले यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान से मुलाकात की थी। यह बैठक पंजाब के रहीम यार ख़ान में हुई, जहां यूएई राष्ट्रपति इस्लामाबाद की आधिकारिक यात्रा के बाद ठहरे हुए थे। अधिकारियों के अनुसार, इस मुलाकात का मकसद क्षेत्रीय तनाव को कम करना था।
    रक्षा, निवेश और तेल आपूर्ति

    गौरतलब है कि इस्लामाबाद और रियाद ने सितंबर में एक आपसी रक्षा समझौता किया था, जिसके तहत किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। सऊदी अरब लंबे समय से पाकिस्तान का प्रमुख आर्थिक और सुरक्षा साझेदार रहा है। हाल के वर्षों में उसने पाकिस्तान को अरबों डॉलर के ऋण दिए हैं, जिससे देश को विदेशी कर्ज के संकट और संभावित डिफॉल्ट से बचाने में मदद मिली। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात ने भी पाकिस्तान को वित्तीय सहायता दी है। वर्ष 2024 में पाकिस्तान ने कहा था कि यूएई ने देश में 10 अरब डॉलर तक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
    विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

    इस बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी बुधवार को एक बयान जारी कर यमन में दोबारा भड़की हिंसा पर चिंता जताई। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि यमन के किसी भी पक्ष द्वारा उठाए गए एकतरफा कदम संघर्ष को और भड़का सकते हैं तथा पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकते हैं। बयान में पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा, यमन की एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति समर्थन दोहराया और संकट को कम करने तथा देश में शांति व स्थिरता बहाल करने के लिए किए जा रहे क्षेत्रीय प्रयासों का स्वागत किया। तेल आपूर्ति के लिहाज से भी सऊदी अरब पाकिस्तान का एक प्रमुख साझेदार है। ऊर्जा जरूरतों के साथ-साथ आर्थिक सहयोग के चलते रियाद और इस्लामाबाद के रिश्ते रणनीतिक रूप से बेहद अहम बने हुए हैं।

  • ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब होगा बैन

    ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब होगा बैन


    नई दिल्‍ली। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है। इस मसौदे के तहत, बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए नया प्रयास किया जाएगा और सितंबर 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।

    ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह दुनिया का पहला देश है जिसने ऐसा कदम उठाया। अब खबर है कि फ्रांस भी इसी तरह का कानून लाने की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है। इस मसौदे के तहत, बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए नया प्रयास किया जाएगा और सितंबर 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
    बताया जा रहा है कि इस पहल को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि संसद को जनवरी में इस प्रस्ताव पर बहस शुरू कर देनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने विश्व में पहली बार 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू किया है।

    फ्रांसीसी मसौदे में कहा गया है कि कई अध्ययन और रिपोर्टें अब किशोरों द्वारा डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से होने वाले विभिन्न जोखिमों की पुष्टि करती हैं। सरकार ने कहा कि जिन बच्चों को ऑनलाइन सेवाओं तक बेरोकटोक पहुंच मिली हुई है, वे ‘अनुचित सामग्री’ के संपर्क में आ रहे हैं, साइबर उत्पीड़न का शिकार हो सकते हैं या उनकी नींद के पैटर्न में बदलाव आ सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, इस मसौदा कानून में दो मुख्य अनुच्छेद हैं। पहला अनुच्छेद 15 वर्ष से कम आयु के नाबालिग को ऑनलाइन सोशल मीडिया सेवा प्रदान करने को गैरकानूनी बनाता है। दूसरा अनुच्छेद माध्यमिक विद्यालयों में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान करता है।

  • नास्त्रेदमस ने कौन-कौन सी की हैं भविष्यवाणियां, साल 2026 डराने वाला होगा !

    नास्त्रेदमस ने कौन-कौन सी की हैं भविष्यवाणियां, साल 2026 डराने वाला होगा !


    नई दिल्‍ली। नया साल 2026 दस्तक दे चुका है। साल 2025 खत्म हो गया और नया साल आ चुका है । हर साल की तरह इस बार भी अगले साल की भविष्यवाणियों को लेकर काफी हलचल है। नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां काफी सटीक रही हैं और लोग उन्हें जानना चाहते हैं। अगले साल 2026 के लिए नास्त्रेदमस ने कई डराने व हैरान करने वाली भविष्यवाणियां की हैं। इसमें युद्ध, बिजली गिरने से महान व्यक्ति की मौत समेत अन्य बातें शामिल हैं।

    सात महीने बड़ा युद्ध
    नास्त्रेदमस ने अगले साल के लिए जो भविष्यवाणी की है, उसमें सात महीने तक चलने वाले युद्ध की भी आशंका जताई है। इसकी वजह से बड़ी संख्या में लोगों की मौत होगी। इस भविष्यवाणी को यूरोप और उसके बाहर चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव से जोड़ा जा रहा है। हालांकि मूल टेक्स्ट में आधुनिक दुनिया या किसी खास टाइमलाइन का कोई सीधा जिक्र नहीं है।
    पर्यावरण और सामाजिक उथल-पुथल

    नास्त्रेदमस ने अगले साल के लिए पर्यावरण और सामाजिक उथल-पुथल का भी जिक्र किया है। दावा किया जा रहा है कि भीषण सूखा और मौसम की अन्य चरम घटनाएं हो सकती हैं। हालांकि, भाषा सामान्य है, लेकिन 21वीं सदी के व्याख्याकारों ने इसे 2026 और उसके बाद पर्यावरण में बढ़ती अस्थिरता के लिए एक संभावित चेतावनी के रूप में फिर से पेश किया है।
    तकनीकी और सांस्कृतिक बदलाव

    संघर्ष और जलवायु के अलावा, कुछ आधुनिक व्याख्याएं नास्त्रेदमस की अस्पष्ट पंक्तियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उदय और सामाजिक विखंडन से जोड़ने की भी कोशिश करती हैं। हालांकि, ये कनेक्शन पाठ्य के बजाय रचनात्मक हैं।
    ‘बिजली गिरने से मारा जाएगा महान आदमी’

    ब्रिटेन की इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स के अनुसार, नास्त्रेदमस ने एक डराने वाली भविष्यवाणी की है, उसमें आसमान से अचानक बिजली के हमले में एक महान व्यक्ति के मारे जाने को लेकर है। सेंचुरी I के 26वें छंद में कहा गया है कि ‘एक महान आदमी दिन में बिजली गिरने से मारा जाएगा’। आज के समय में यह महान आदमी दुनिया का बड़ा नेता या ग्लोबल सेलिब्रिटी तक कोई भी हो सकता है।

  • कुरान पर शपथ लेकर आज न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बनेंगे भारतीय मूल के ममदानी… रचेंगे इतिहास

    कुरान पर शपथ लेकर आज न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम मेयर बनेंगे भारतीय मूल के ममदानी… रचेंगे इतिहास


    न्यूयॉर्क।
    भारतीय मूल (Indian origin) के जोहरान ममदानी (Zohran Mamdani) गुरुवार को इतिहास रचने जा रहे हैं। आधी रात को शपथ लेते ही वह अमेरिका के सबसे बड़े शहर (Largest city America), न्यूयॉर्क (New York) के पहले मुस्लिम मेयर (First Muslim mayor) बन जाएंगे। इस दिन को खास बनाने के लिए ममदानी एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहे हैं। वे मेयर पद के लिए कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेने जा रहे हैं। यह पहली बार होगा जब न्यूयॉर्क शहर का कोई मेयर शपथ लेने के लिए इस्लाम के पवित्र ग्रंथ का इस्तेमाल करेगा।

    34 साल के डेमोक्रेट जोहरान ममदानी सिटी हॉल के नीचे एक लंबे समय से बंद सबवे स्टेशन में मेयर की शपथ लेने जा रहे हैं। शपथ लेते ही वह इस पद को संभालने वाले पहले मुस्लिम, पहले दक्षिण एशियाई और अफ्रीका में जन्मे पहले व्यक्ति बन जाएंगे।

    जानकारी के मुताबिक ममदानी की पत्नी, रमा दुवाजी ने इस पवित्र ग्रंथ को चुनने में उनकी मदद की। इसे अमेरिका के सबसे अधिक आबादी वाले शहर के मुस्लिम निवासियों को एक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। जहां एक तरफ उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में एफोर्डिबिलिटी को मुद्दा बनाया था, वहीं वे अपने मुस्लिम धर्म के बारे में भी खुलकर बात करते थे। वह अक्सर मस्जिदों में दिखाई देते थे और उन्होंने इससे अपने समर्थकों का बेस तैयार किया। जोहरान ममदानी को वोट देने वालों में कई पहली बार वोट देने वाले दक्षिण एशियाई और मुस्लिम मतदाता थे।


    तीन कुरान का इस्तेमाल करेंगे ममदानी

    ममदानी सबवे समारोह के दौरान दो कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेंगे। इनमें से एक उनके दादा का कुरान है। वहीं वे एक दूसरे पॉकेट साइज के संस्करण पर भी हाथ रखेंगे, जो 18वीं या 19वीं सदी का है। यह न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के शॉम्बर्ग सेंटर फॉर रिसर्च इन ब्लैक कल्चर के कलेक्शन का हिस्सा है। लाइब्रेरी की क्यूरेटर हिबा आबिद ने बताया है कि कुरान की यह कॉपी शहर के मुसलमानों की विविधता और पहुंच का प्रतीक है। वहीं साल के पहले दिन सिटी हॉल में होने वाल शपथ ग्रहण समारोह के लिए, ममदानी अपने दादा और दादी दोनों के कुरान का इस्तेमाल करेंगे।


    रचा था इतिहास

    इससे पहले बीते नवंबर में भारतीय मूल के जोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर चुनाव में निर्णायक और ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। उन्होंने अपने विजय भाषण के दौरान पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के शब्दों को जिक्र करते हुए कहा था कि शहर नए युग की ओर बढ़ रहा है। ममदानी प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्माता मीरा नायर और कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर महमूद ममदानी के पुत्र हैं। ममदानी का जन्म युगांडा में हुआ था। इस जीत के साथ ही वह अमेरिका के सबसे बड़े शहर में मेयर बनने वाले पहले दक्षिण एशियाई और मुस्लिम व्यक्ति बन गए हैं।

  • कनाडा की नेवी को ईरान ने घोषित किया आतंकी संगठन, जानिए वजह ?

    कनाडा की नेवी को ईरान ने घोषित किया आतंकी संगठन, जानिए वजह ?

    तेहरान । कनाडा की नेवी को ईरान ने आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। मंगलवार को शिया इस्लामिक देश ने यह फैसला लिया। उसका कहना है कि कनाडा ने 2024 में ईरान की सेना रिवॉलूशनरी गार्ड्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। उसके जवाब में ही यह कदम उठाया गया है। ईरान की ओर से कहा गया कि ओटावा ने हमारी सेना की वैचारिक शाखा को आतंकी समूह घोषित किया था। यह फैसला पूरी तरह से गलत था और अंतरराष्ट्रीय कानूनों एवं सिद्धांतों के विपरीत था। उसी का जवाब देते हुए हम ऐसा कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईरान को यह अधिकार है कि वह अपने खिलाफ उठाए गए किसी कदम का जवाब दे सके।

    उन्होंने कहा कि हम अपने जवाब देने के अधिकार का ही इस्तेमाल करते हुए रॉयल कनैडियन नेवी को आतंकी संगठन घोषित करते हैं। ईरान ने कहा कि यदि कोई हमारे खिलाफ आता है तो हमें भी कुछ कदम तो उठाने ही होंगे। दरअसल कनाडा ने 19 जून, 2024 को ईरान के रिवॉलूशनरी गार्ड्स को एक आतंकी समूह घोषित कर दिया था। इसके तहत ईरान की सेना की इस यूनिट के किसी भी मेंबर के कनाडा में प्रवेश पर पाबंदी लगाई गई थी। इसके अलावा कनाडा के किसी भी नागरिक या समूह के साथ किसी भी तरह की डीलिंग करने से भी रोका था।

    इसके अलावा यह आदेश भी कनाडा की ओर से था कि यदि ईरानी सेना की कोई संपत्ति कनाडा में है तो उसे भी जब्त कर लिया जाए। कनाडा ने इस फैसले के पीछे दलील दी थी कि ईरान की सेना अपने देश में और बाहर मानवाधिकारों का हनन कर रही है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया था। दरअसल तेहरान से जनवरी 2020 में उड़ाने भरने वाले एक कनाडाई विमान को मार गिराया गया था। इस घटना में 176 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 85 कनाडाई नागरिक थे।
    इस घटना को लेकर ईरान के रिवॉलूशनरी गार्ड्स ने गलती मानी थी और उसका कहना था कि हमसे चूक हुई है। हमने किसी भ्रम के चलते ऐसी घटना को अंजाम दिया था। हम इसके लिए माफी मांगते हैं। फिर भी कनाडा ने ईरान की सेना पर पाबंदियां थोप दी थीं। बता दें कि ईरान के साथ कनाडा ने 2012 में ही कूटनीतिक संबंध खत्म कर दिए थे। कनाडा का कहना था कि ईरान वैश्विक शांति के लिए खतरा है और इसीलिए हम ऐसा कदम उठा रहे हैं।

  • बांग्लादेश तुर्की से खरीदने जा रहा सिरिट लेजर मिसाइल

    बांग्लादेश तुर्की से खरीदने जा रहा सिरिट लेजर मिसाइल

    ढाका। भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई तल्खी के बीच ढाका अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से मजबूत कर रहा है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के नेतृत्व में बांग्लादेश ने तुर्की का रुख किया है और सिरिट (Cirit) लेजर-गाइडेड मिसाइलों खरीदने का फैसला लिया है। ये ‘स्मार्ट’ मिसाइलें, जो पहले से बांग्लादेश के ड्रोनों और आने वाले हमलावर हेलीकॉप्टरों पर एकीकृत हैं, आधुनिक युद्ध में सटीक हमलों की क्षमता बढ़ाएंगी। दरअसल, शेख हसीना के कार्यकाल के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार में बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंध मजबूत हुए हैं। पाकिस्तान पहले से ही तुर्की से बड़े पैमाने पर हथियार खरीदता है।

    गौरतलब है कि बांग्लादेश ने तुर्की से बायराकटार टीबी-2 ड्रोन पहले ही खरीद लिए हैं, जिनका उपयोग भारतीय सीमा की निगरानी में हो रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, रक्षा मंत्रालय की निविदा प्रक्रिया के बावजूद तुर्की की सिरिट मिसाइल प्रणाली चुने जाने की संभावना मजबूत है। तुर्की की कंपनी रोकेत्सन द्वारा निर्मित यह मिसाइल सटीक और किफायती है, जिसे हमलावर हेलीकॉप्टरों पर भी लगाया जा सकता है। यह स्थिर और गतिशील दोनों लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है, जिसमें बख्तरबंद और गैर-बख्तरबंद वाहन शामिल हैं।

    अब सवाल है कि सिरिट मिसाइल का भारत पर क्या असर हो सकता है? दरअसल, यह मिसाइल छोटे रॉकेट और निर्देशित टैंक-रोधी मिसाइलों के बीच की कमी को पूरा करती है। निर्माता के अनुसार, इसे विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर आसानी से लगाया जा सकता है। बांग्लादेशी रक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह देश की सैन्य जरूरतों के लिए आदर्श है। ड्रोन और हमलावर हेलीकॉप्टरों पर इसका परीक्षण हो चुका है। इन मिसाइलों से बांग्लादेश वायु सेना भारत के निकट चटगांव पहाड़ी क्षेत्र में दुश्मन ठिकानों को निशाना बना सकती है।

    इतना ही नहीं, बांग्लादेश तुर्की से छह टी-129 अटैक हमलावर हेलीकॉप्टर खरीदने की बातचीत कर रहा है। भविष्य में देश शक्तिशाली चौथी पीढ़ी के यूरोफाइटर जेट हासिल करना चाहता है।

  • पाकिस्तान की हालत खस्ता : एयरलाइंस के बाद अब बैंक, होटल बेचने की तैयारी में शरीफ सरकार

    पाकिस्तान की हालत खस्ता : एयरलाइंस के बाद अब बैंक, होटल बेचने की तैयारी में शरीफ सरकार


    इस्‍लामाबाद। बीते दिनों सरकारी एयरलाइंस की सार्वजनिक नीलामी के बाद अब पाकिस्तान की सरकार बैंकों और होटलों को भी बेचने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आर्थिक तंगी से जूझ रहे PAK के पास निजीकरण के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है और इस क्रम में शहबाज शरीफ की सरकार ने बैंक, होटल, बिजली कंपनियां, बीमा और यहां तक की रिटेल नेटवर्क तक को बेचने की योजना बना ली है।

    पाकिस्तानी हुकूमत के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों को पूरा करने और डिफॉल्ट से बचने के लिए सरकार को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ा है। पाकिस्तानी अफसरों ने तो यह तक कह दिया है कि स्थिति ‘करो या मरो’ जैसी बन गई है। न्यूज 18 की एक रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेजों और कैबिनेट मीटिंग्स का हवाला देकर बताया गया है कि 2026 के अंत तक कई बड़े सरकारी आउटलेट प्राइवेट हाथों में सौंपे जा सकते हैं। इनमें बिजली वितरण कंपनियां, बैंक, होटल, इंश्योरेंस और एनर्जी सेक्टर शामिल हैं।
    क्या है ‘एजेंडा-5’?

    जानकारी के मुताबिक शरीफ सरकार ने निजीकरण के लिए अगले 12 महीनों में पांच बड़े सेक्टर चिन्हित किए हैं, जिसे अनौपचारिक तौर पर ‘एजेंडा-5’ का नाम दिया गया है। इनमें बिजली वितरण कंपनियां, बैंकिंग सेक्टर, होटल और रियल एस्टेट, एनर्जी जनरेशन कंपनियां और बीमा और रिटेल नेटवर्क के कुछ वर्टिकल शामिल हैं।

    यह पूरा प्राइवेटाइजेशन प्रोग्राम पाकिस्तान के हाइब्रिड पॉलिटिकल सिस्टम के तहत चल रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की भूमिका अहम बताई जा रही है। हालांकि इस फैसले का पाकिस्तान में भारी विरोध भी हो रहा है। जहां समर्थकों का कहना है कि आर्थिक सुधार का यह इकलौता रास्ता है, वहीं दूसरी तरफ विरोधियों का आरोप है कि यह शहबाज शरीफ की सरकार की नाकामी दिखाती है। इसे देश की संप्रभुता से खिलवाड़ भी कहा जा रहा है।
    पाकिस्तान की हालत खस्ता

    पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते दिनों पाक को अपनी सरकारी एयरलाइंस, नेशनल एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) की सार्वजनिक नीलामी करनी पड़ी। वहीं पाकिस्तान पर मौजूदा समय में करीब 131 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी कर्ज है। हालात यह हैं कि सरकार रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए भी उधार ले रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की स्थिति अगर यही बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब पाकिस्तान में श्रीलंका जैसे हालात पैदा हो जाएं।

  • पाक आर्मी चीफ मुनीर ने सगे भाई के बेटे से ही करा दिया बेटी का निकाह

    पाक आर्मी चीफ मुनीर ने सगे भाई के बेटे से ही करा दिया बेटी का निकाह

    लाहोर। पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बेटी की शादी हो गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि मुनीर ने अपने ही सगे भाई के बेटे से अपनी बेटी की शादी कराई है। यह शादी पिछले हफ्ते रावलपिंडी में हुई और इसमें तमाम राजनीतिक हस्तियों और सैन्य अफसरों ने हिस्सा लिया। हालांकि हाई प्रोफाइल मेहमानों के बावजूद, इसे बिल्कुल निजी रखा गया था।

    पत्रकार ने की परिवार में शादी की पुष्टि
    पाकिस्तानी पत्रकार जाहिद गिशकोरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि आसिम मुनीर की बेटी का निकाह उनके भाई के बेटे से हुआ है। एक अन्य पत्रकार रजा मुनीब ने भी इस बात की पुष्टि की है। रजा ने कहा कि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपनी बेटी की शादी, भाई कासिम मुनीर के बेटे से की है। यह शादी रावलपिंडी में हुई।

    पिछले हफ्ते हुआ निकाह
    अपने वीडियो में गिशकोरी ने बताया कि दूल्हे का नाम अब्दुर रहमान है। यह एक हाई प्रोफाइल शादी थी। उन्होंने आगे बताया कि रहमान पहले पाकिस्तान आर्मी में कैप्टन था। गिशकोरी ने इस वीडियो में आसिम मुनीर की बेटियों के बारे में भी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मुनीर की चार बेटियां हैं। यह उनकी तीसरी बेटी की शादी है, जिसका नाम महनूर है।

    क्या करता है दूल्हा?
    दूल्हे के बारे में और ज्यादा जानकारी देते हुए गिशकोरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना में कैप्टन रहने के बाद वह सिविल सर्विसेज की तरफ चला गया। फिलहाल वह आर्मी अफसरों के सिविल सर्विसेज कोटा के तहत असिस्टेंट कमिश्नर है। गिशकोरी ने बताया कि इस शादी में वर्तमान पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पाकिस्तान स्थित पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ समेत कई रिटायर्ड जनरल्स और पूर्व आर्मी चीफ मौजूद रहे।
    पूरी तरह गोपनीय रखी गई शादी
    इस शादी में यूएई के राष्ट्रपति के शामिल होने की भी खबरें थीं। हालांकि गिशकोरी ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया कि यूएई के राष्ट्रपति वहां आए नहीं थे। उन्होंने बताया कि इस शादी में 400 से ज्यादा मेहमान मौजूद थे और सुरक्षा कारणों से शादी को पूरी तरह से गोपनीय रखा गया था।