Category: International

  • सिडनी शूटआउट के बाद इजरायलियों के लिए 'अर्जेंट एडवाइजरी'  सुरक्षा को लेकर जारी हुए नए निर्देश

    सिडनी शूटआउट के बाद इजरायलियों के लिए 'अर्जेंट एडवाइजरी' सुरक्षा को लेकर जारी हुए नए निर्देश


    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बोंडी बीच पर हनुका उत्सव के दौरान हुई गोलीबारी की घटना ने इजरायल सरकार को गंभीर सुरक्षा कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया है। इस घटना में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने अपने नागरिकों को विदेश यात्रा करते समय खास सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं।

    इन दिशानिर्देशों में मुख्य रूप से सामूहिक आयोजनों से बचने की सलाह दी गई है विशेषकर उन स्थानों पर जहां सुरक्षा व्यवस्था ठीक से लागू नहीं हो पाती। इसके अलावा यहूदी और इजरायली स्थलों के आसपास सतर्कता बढ़ाने का आह्वान किया गया है और यात्रियों को संदिग्ध व्यक्तियों या वस्तुओं की जानकारी तुरंत स्थानीय सुरक्षा बलों को देने की सलाह दी गई है।

    इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यहूदी-विरोधी भावना को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए और इसके परिणामस्वरूप यहूदियों पर हमले हुए। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि तुष्टीकरण की बजाय कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।

    सिडनी में हुई इस गोलीबारी के बाद ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने बंदूक कानूनों को सख्त करने की योजना बनाई है। राष्ट्रीय बंदूक समझौते पर फिर से चर्चा की जाएगी और नए कानून पारित करने के लिए एनएसडब्ल्यू संसद को जल्द बुलाया जा सकता है। प्रमुख सुधारों में बंदूकों की अधिकतम संख्या को सीमित करना कानूनी बंदूकों के प्रकारों पर प्रतिबंध लगाना और बंदूक लाइसेंस के लिए ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता अनिवार्य करना शामिल है। यह घटनाक्रम न केवल इजरायल और ऑस्ट्रेलिया के बीच सुरक्षा संबंधों को प्रभावित कर रहा है बल्कि इसने दुनिया भर में आतंकवादी हमलों और बंदूक नियंत्रण पर नए सिरे से बहस शुरू कर दी है।

  • नेपाल में अब भारत के 200 और 500 रुपये के नोट चलेंगे; जानें शर्तें

    नेपाल में अब भारत के 200 और 500 रुपये के नोट चलेंगे; जानें शर्तें


    नई दिल्ली । भारत और नेपाल के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर सामने आई है। नेपाल सरकार ने 200 रुपये और 500 रुपये के भारतीय नोटों पर लगे लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में किए गए नियमों में संशोधन के बाद लिया गया है जिससे दोनों देशों के बीच इन नोटों का आयात-निर्यात संभव हो सकेगा।

    नेपाल के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री जगदीश खरेल ने बताया कि सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। हालांकि खरेल ने यह भी स्पष्ट किया कि इस नए निर्णय के तहत नेपाली या भारतीय नागरिकों के लिए प्रति व्यक्ति अधिकतम 25 000 रुपये लाने और ले जाने की सीमा तय की गई है।

    यह बदलाव 2016 में भारत द्वारा की गई नोटबंदी के बाद से नेपाल में लागू प्रतिबंध को समाप्त करने का संकेत है। उस समय भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़े नोटों के आयात-निर्यात पर रोक लगाई थी जिसके कारण नेपाल में भारतीय 200 और 500 रुपये के नोट प्रचलन में नहीं थे।

    नेपाल सरकार ने अब भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए संशोधन का पालन करते हुए इन नोटों के आयात-निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया है। हालांकि इससे पहले 2016 के बाद जारी किए गए भारतीय नोटों को ही नेपाल में प्रचलन में लाया जा सकेगा।

    नोटबंदी के समय नेपाल में भारतीय मुद्रा के लगभग 5 करोड़ रुपये मूल्य के नोट बैंकिंग सिस्टम में थे जिनका अब तक विनिमय नहीं हो सका था। इस फैसले से नेपाल के व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा और नेपाल-भारत सीमा पर व्यापारिक गतिविधियां और अधिक आसान हो जाएंगी।
    यह कदम नेपाल और भारत के बीच वित्तीय सहयोग और व्यापार को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगा।

  • बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दी धमकी

    बांग्लादेशी नेता ने भारत के खिलाफ तीखा बयान दिया, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर दी धमकी


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में जैसे-जैसे आम चुनाव नजदीक आ रहे हैं वहीं राजनीतिक माहौल में भी गर्माहट बढ़ गई है। नेताओं ने भारत के खिलाफ आरोप लगाना शुरू कर दिया है। इस बीच नेशनल सिटिजन पार्टी के प्रमुख संयोजक हसनत अब्दुल्ला ने तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर भारत ने बांग्लादेश के चुनावी प्रक्रिया में दखल दिया तो इसका असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर पड़ेगा और वे एक-दूसरे से अलग-थलग हो जाएंगे।

    यह बयान पूर्वोत्तर भारत के राज्यों को लेकर आया है जिन्हें “सेवल सिस्टर्स” के नाम से जाना जाता है। इनमें अरुणाचल प्रदेश असम मणिपुर मेघालय नगालैंड मिजोरम और त्रिपुरा शामिल हैं। यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से संवेदनशील है और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के जरिए मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ है। हसनत का यह बयान एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है कि अगर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में कोई हस्तक्षेप किया गया तो इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।

    हसनत ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की सरकार के खिलाफ विदेशी एजेंटों को समर्थन देने वालों को बांग्लादेश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। उनका आरोप था कि शेख हसीना और उनके समर्थक अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए भारत का समर्थन लेते हैं जिससे बांग्लादेश की संप्रभुता खतरे में पड़ सकती है।

    हसनत ने आगे कहा “यदि भारत ने उन ताकतों को शरण दी जो बांग्लादेश की स्वतंत्रता और संप्रभुता का उल्लंघन करती हैं तो इसका परिणाम गंभीर होगा और यह पूरे क्षेत्र में अशांति पैदा करेगा।” बांग्लादेश के इस वरिष्ठ नेता का मानना है कि भारत को अपनी नीतियों में बदलाव लाकर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए वरना दोनों देशों के बीच रिश्ते और भी तनावपूर्ण हो सकते हैं।

    यह बयान बांग्लादेश में बढ़ते राजनीतिक तनाव और शेख हसीना सरकार के खिलाफ विरोध को भी दर्शाता है। हालांकि बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति में बदलाव के बावजूद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को सुधारने की आवश्यकता है ताकि दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक माहौल बना रहे।

  • पूर्व डीजीपी आर श्रीलेखा बनीं तिरुवनंतपुरम के पहले बीजेपी मेयर उम्मीदवार वाम मोर्चे को दी हार

    पूर्व डीजीपी आर श्रीलेखा बनीं तिरुवनंतपुरम के पहले बीजेपी मेयर उम्मीदवार वाम मोर्चे को दी हार


    नई दिल्ली । केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और पूर्व डीजीपी आर श्रीलेखा ने तिरुवनंतपुरम में हुए निकाय चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उन्होंने संस्थामंगलम डिवीजन में बड़ी जीत हासिल की है जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी उन्हें तिरुवनंतपुरम नगर निगम का मेयर बना सकती है। यह चुनाव केरल की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है खासकर तब जब बीजेपी ने एलडीएफ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा को हराकर नगर निगम में सत्ता हासिल की है। एलडीएफ को 40 साल बाद इस नगर निगम से बाहर किया गया है।

    लेखा का राजनीतिक सफर

    आर श्रीलेखा ने 2024 में बीजेपी जॉइन की थी और इसके बाद उन्होंने नगर निगम चुनाव में वॉर्ड सदस्य के रूप में चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया। श्रीलेखा की जीत ने यह साबित कर दिया कि जनता ने उनकी मेहनत और प्रयासों को सराहा है। वह पार्टी के फैसले को सम्मान देने का बयान देती हैं और कहती हैं कि वह तिरुवनंतपुरम में बीजेपी की पहली महिला मेयर बनने को लेकर खुश हैं अगर पार्टी उन्हें यह जिम्मेदारी देती है।

    एलडीएफ और कांग्रेस की आलोचनाओं के बावजूद जीत

    श्रीलेखा ने इस दौरान यह भी कहा कि जब उनकी उम्मीदवारी की घोषणा हुई थी तब एलडीएफ और कांग्रेस ने उनकी कड़ी आलोचना की थी। दोनों पार्टियों ने उनके खिलाफ कई आरोप लगाए थे लेकिन श्रीलेखा ने जनता के समर्थन को धन्यवाद दिया और कहा कि उन्होंने पार्टी विरोधियों को उचित जवाब दिया है।

    तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव के परिणाम

    शनिवार को हुए चुनाव परिणामों के बाद यह साफ हो गया कि बीजेपी ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने में सफलता प्राप्त की है। बीजेपी ने 101 सदस्यीय नगर निगम में 50 वॉर्डों में जीत हासिल की है जबकि एलडीएफ को सिर्फ 29 सीटें मिली हैं। कांग्रेस की अगुआई वाली यूडीएफ को 19 सीटें मिलीं। यह परिणाम बीजेपी की ताकत और पार्टी के लिए केरल में एक नई शुरुआत का प्रतीक है।

    आर श्रीलेखा का आईपीएस करियर

    आर श्रीलेखा ने जनवरी 1987 में केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी के तौर पर सेवा शुरू की थी। उन्होंने अपने करियर में कई अहम पदों पर कार्य किया जिनमें सीबीआई केरल क्राइम ब्रांच विजिलेंस फायर फोर्स और मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट शामिल हैं। 2017 में वह केरल की डीजीपी बनीं और इसके बाद उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए जाना गया। उनके सीबीआई कार्यकाल के दौरान उन्हें “रेड श्रीलेखा” का उपनाम भी मिला था क्योंकि वह बिना किसी डर के छापे मारती थीं और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाती थीं।

    राजनीति में कदम

    रिटायरमेंट के बाद आर श्रीलेखा ने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वह अक्सर सार्वजनिक मामलों में अपनी राय रखती रहीं जैसे कि अभिनेता दिलीप पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों और कांग्रेस नेता राहुल मामकूटाथिल पर केस में देरी को लेकर सवाल उठाना। अक्टूबर 2024 में उन्होंने औपचारिक रूप से बीजेपी जॉइन की और अब चर्चा है कि पार्टी उन्हें तिरुवनंतपुरम नगर निगम का मेयर बना सकती है।

    आर श्रीलेखा की तिरुवनंतपुरम में मिली जीत न केवल उनके राजनीतिक करियर की सफलता का प्रतीक है बल्कि यह केरल की राजनीति में भी एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है। अगर उन्हें बीजेपी का मेयर बनाया जाता है तो यह केरल में पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी खासकर तब जब राज्य में वाम मोर्चे के कई दशकों से कायम रहे प्रभुत्व को चुनौती मिल रही है।

  • ट्रंप के बयान के बाद इल्हान उमर का दावा: बेटे से ICE ने मांगा नागरिकता का सबूत..

    ट्रंप के बयान के बाद इल्हान उमर का दावा: बेटे से ICE ने मांगा नागरिकता का सबूत..


    नई दिल्ली /अमेरिका में प्रवासियों को लेकर सख्त नीतियों और बयानबाज़ी के बीच एक नया विवाद सामने आया है। मिनेसोटा से डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर ने दावा किया है कि उनके बेटे अदनान हिरसी को अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट ICE के एजेंट्स ने सार्वजनिक स्थान पर रोककर उसकी नागरिकता का सबूत मांगा। यह घटना ऐसे वक्त हुई है जब कुछ ही दिन पहले पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इल्हान उमर को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

    इल्हान उमर के अनुसार शनिवार को उनका बेटा एक स्टोर से खरीदारी कर रहा था। तभी वहां मौजूद कुछ फेडरल एजेंट्स ने उसे रोका और उसकी पहचान व नागरिकता से जुड़े दस्तावेज दिखाने को कहा। उमर ने बताया कि उनका बेटा अपना अमेरिकी पासपोर्ट साथ रखता है जिसे दिखाने के बाद एजेंट्स ने उसे जाने दिया।उन्होंने इस घटना को अमेरिका में प्रवासियों और अल्पसंख्यकों के साथ बढ़ती सख्ती का उदाहरण बताया। उमर का कहना है कि मौजूदा माहौल में केवल नाम रंग या पृष्ठभूमि के आधार पर लोगों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है।

    सीबीएस न्यूज के अनुसार हाल के दिनों में फेडरल एजेंसियों को अवैध अप्रवासियों की पहचान और जांच के लिए ज्यादा सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि इल्हान उमर के बेटे से हुई इस घटना पर ICE की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।इल्हान उमर अमेरिका की राजनीति में एक चर्चित नाम हैं। वह सोमालिया मूल की अमेरिकी नागरिक हैं और कांग्रेस में अपने बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं। कश्मीर मुद्दे पर भारत सरकार की आलोचना और पाकिस्तान के पक्ष में दिए गए बयानों को लेकर भी वह कई बार विवादों में रही हैं।डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान और उसके बाद भी इल्हान उमर पर कई निजी हमले किए हैं। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से उन्हें “कचरा कहा था और यह तक कहा था कि वह नहीं चाहते कि इल्हान उमर अमेरिका में रहें। ट्रंप ने उन पर यह आरोप भी लगाया कि उन्होंने अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए अपने ही भाई से शादी की हालांकि इन आरोपों को कभी कानूनी तौर पर साबित नहीं किया जा सका।

    कौन हैं अदनान हिरसी?

    अदनान हिरसी इल्हान उमर और उनके पूर्व पति अहमद हिरसी के बेटे हैं। उनके दो बहनें भी हैं लेकिन इल्हान उमर ने हमेशा अपने बच्चों को सार्वजनिक और राजनीतिक सुर्खियों से दूर रखा है। जब इल्हान उमर 2016 में पहली बार कांग्रेस के लिए चुनी गई थीं उस समय अदनान लगभग 10 साल के थे। इल्हान उमर ने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उनके बेटे को इस तरह की जांच का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले एक बार वह मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे थे तभी वहां एजेंट्स पहुंचे और मौजूद लोगों से पूछताछ की गई। बाद में सभी को बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।इस घटना के बाद एक बार फिर अमेरिका में नस्लीय प्रोफाइलिंग प्रवासियों के अधिकार और फेडरल एजेंसियों की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है। इल्हान उमर ने साफ कहा है कि वह इस मुद्दे को केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि नागरिक स्वतंत्रता से जुड़ा मामला मानती हैं।

  • लश्कर आतंकी अब्दुल रऊफ का भड़काऊ वीडियो 'दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे एस-400 और राफेल कुछ नहीं

    लश्कर आतंकी अब्दुल रऊफ का भड़काऊ वीडियो 'दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे एस-400 और राफेल कुछ नहीं


    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रऊफ ने भारतीय सेना और उसके अत्याधुनिक हथियारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन को बेकार बताते हुए कहा कि “यह सब हमारे सामने कुछ भी नहीं हैं।

    दिल्ली पर कब्जे की धमकी

    रऊफ ने वीडियो में यह भी दावा किया कि कश्मीर में युद्ध खत्म नहीं हुआ है और वह भविष्य में कश्मीर में हिंसा जारी रखने की बात कर रहा है। उसने यह कहा कि उनका असली लक्ष्य दिल्ली पर कब्जा करना है जो भारत की राजधानी है। उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों का भी हवाला दिया और कहा कि भारतीय वायुसेना अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। रऊफ के इस वीडियो से पाकिस्तान की नापाक नीयत एक बार फिर सामने आई है जो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने की साजिशों में शामिल है। यह वीडियो पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और वहां के आतंकी संगठनों के एजेंडे को उजागर करता है।

    रऊफ और पाकिस्तान का कनेक्शन

    अब्दुल रऊफ लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और वह अक्सर पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के साथ दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया था रऊफ को पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र पर कलमा पढ़ते हुए देखा गया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी भी वहां मौजूद थे जो पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इस तरह के भड़काऊ बयान इसे और बढ़ा सकते हैं। रऊफ का यह बयान भारतीय सेना और नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की एक और कोशिश प्रतीत होती है।

    भारत का जवाब

    भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कड़े कदमों से यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। रऊफ के इस वीडियो और पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद भारत का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

    अब्दुल रऊफ का यह वीडियो पाकिस्तान के आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसकी नापाक साजिशों का एक और प्रमाण है। हालांकि भारत के पास हर प्रकार की सुरक्षा तंत्र और शक्ति है लेकिन ऐसे भड़काऊ बयानों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
    भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रऊफ ने भारतीय सेना और उसके अत्याधुनिक हथियारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन को बेकार बताते हुए कहा कि “यह सब हमारे सामने कुछ भी नहीं हैं।

    दिल्ली पर कब्जे की धमकी

    रऊफ ने वीडियो में यह भी दावा किया कि कश्मीर में युद्ध खत्म नहीं हुआ है और वह भविष्य में कश्मीर में हिंसा जारी रखने की बात कर रहा है। उसने यह कहा कि उनका असली लक्ष्य दिल्ली पर कब्जा करना है जो भारत की राजधानी है। उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों का भी हवाला दिया और कहा कि भारतीय वायुसेना अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। रऊफ के इस वीडियो से पाकिस्तान की नापाक नीयत एक बार फिर सामने आई है जो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने की साजिशों में शामिल है। यह वीडियो पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और वहां के आतंकी संगठनों के एजेंडे को उजागर करता है।

    रऊफ और पाकिस्तान का कनेक्शन

    अब्दुल रऊफ लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और वह अक्सर पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के साथ दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया था रऊफ को पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र पर कलमा पढ़ते हुए देखा गया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी भी वहां मौजूद थे जो पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इस तरह के भड़काऊ बयान इसे और बढ़ा सकते हैं। रऊफ का यह बयान भारतीय सेना और नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की एक और कोशिश प्रतीत होती है।

    भारत का जवाब

    भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कड़े कदमों से यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। रऊफ के इस वीडियो और पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद भारत का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। अब्दुल रऊफ का यह वीडियो पाकिस्तान के आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसकी नापाक साजिशों का एक और प्रमाण है। हालांकि भारत के पास हर प्रकार की सुरक्षा तंत्र और शक्ति है लेकिन ऐसे भड़काऊ बयानों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • सऊदी अरब में श्रमिकों के लिए नए नियम: 90 दिन का प्रोबेशन 30 पेड लीव ओवरटाइम और खाना-ब्रेक की सुविधाएं

    सऊदी अरब में श्रमिकों के लिए नए नियम: 90 दिन का प्रोबेशन 30 पेड लीव ओवरटाइम और खाना-ब्रेक की सुविधाएं


    नई दिल्ली । सऊदी अरब में घरेलू कामगारों और कृषि तथा पशुपालन से जुड़े श्रमिकों के लिए नए नियम लागू किए गए हैं जो उनके रोजगार के अधिकारों को बेहतर तरीके से संरक्षित करेंगे। इन नियमों का उद्देश्य श्रमिकों को न्यायसंगत कामकाजी स्थितियां पारदर्शिता और सुरक्षा प्रदान करना है। ये नए दिशा-निर्देश कर्मचारियों को न केवल बेहतर वेतन बल्कि उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई सुविधाएं प्रदान करते हैं।

    30 पेड लीव और आर्थिक मुआवजा
    नए नियमों के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी को प्रतिवर्ष कम से कम 30 दिनों की पेड लीव का लाभ मिलेगा। यदि कर्मचारी का अनुबंध छुट्टी से पहले समाप्त होता है तो उन्हें आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाएगा। इसमें रमजान के 29वें दिन से शुरू होने वाली ईद-उल-फित्र की चार छुट्टियां राष्ट्रीय दिवस और स्थापना दिवस भी शामिल हैं। यह कदम कर्मचारियों को मानसिक और शारीरिक विश्राम देने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
    दैनिक कार्य समय और आराम
    दैनिक कार्य समय आठ घंटों से अधिक नहीं होगा। यदि कर्मचारी पांच घंटे से अधिक निरंतर काम करता है तो उसे कम से कम आधे घंटे का ब्रेक दिया जाएगा ताकि वह आराम कर सके और भोजन कर सके। यह नया प्रावधान कर्मचारियों की भलाई और कार्य क्षमता को बढ़ाने के लिए है। इसके अलावा कर्मचारियों को साप्ताहिक 24 घंटे का अनिवार्य अवकाश दिया जाएगा। यदि कामकाजी दिन में काम करना पड़े तो उसे वैकल्पिक अवकाश देना होगा।
    ओवरटाइम और वेतन
    नए नियमों के अनुसार ओवरटाइम काम करने पर कर्मचारी को उसके मूल वेतन का 50% अतिरिक्त भुगतान मिलेगा। हालांकि सरकारी अवकाशों के दौरान किए गए काम को ओवरटाइम में शामिल नहीं किया जाएगा। इस नियम से श्रमिकों के लिए अतिरिक्त कमाई के अवसर बढ़ेंगे और उनकी मेहनत का सही मुआवजा मिलेगा।
    प्रोबेशन और अन्य अधिकार
    नए नियमों में प्रोबेशन अवधि को अधिकतम 90 दिनों तक सीमित किया गया है। इस दौरान किसी भी पक्ष को बिना मुआवजे के अनुबंध समाप्त करने का अधिकार होगा। हालांकि यह प्रोबेशन अवधि एक ही नियोक्ता के साथ दोबारा नहीं बढ़ाई जा सकती। इसके अलावा कर्मचारियों को उचित आवास भोजन या भत्ता प्रदान करना अनिवार्य होगा और अगर आवास कार्यस्थल से दूर है तो नियोक्ता को परिवहन की व्यवस्था करनी होगी। नियोक्ता वीजा निवास परमिट या अन्य संबंधित शुल्क नहीं ले सकते और कर्मचारियों के पासपोर्ट या व्यक्तिगत सामान को अपने पास नहीं रख सकते।
    कर्मचारियों की मृत्यु और अन्य प्रावधान
    अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो नियोक्ता को अंतिम संस्कार या शव को वापस भेजने का खर्च वहन करना होगा। कर्मचारियों को अपने परिवार से संपर्क करने की अनुमति मिलनी चाहिए और उन्हें भर्ती शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। इन नए नियमों के लागू होने से सऊदी अरब में श्रमिकों के अधिकारों को अधिक सम्मान मिलेगा और उनके लिए एक बेहतर कार्य वातावरण सुनिश्चित होगा।

  • पाकिस्तान में बढ़ता फर्जी शादियों का ट्रेंड, युवाओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया..

    पाकिस्तान में बढ़ता फर्जी शादियों का ट्रेंड, युवाओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया..


    नई दिल्ली /पाकिस्तान में हाल ही में एक नया ट्रेंड उभरकर सामने आया है-फर्जी शादियां। इन शादियों में हिस्सा लेने वाले युवा केवल मनोरंजन और सामाजिक अनुभव के लिए शादी करते हैं। इसमें कोई भी पारिवारिक दबाव या जीवन भर की जिम्मेदारी नहीं होती। यह ट्रेंड खासकर शहरों और विश्वविद्यालयों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    शादी दक्षिण एशियाई समाज में हमेशा से एक बड़ा उत्सव रही है। भारत और पाकिस्तान में शादी का आयोजन कई दिनों तक चलता है, जिसमें हल्दी, मेहंदी, संगीत और विदाई जैसी रस्में शामिल होती हैं। पारंपरिक शादियों में दूल्हा-दुल्हन के अलावा परिवार और समाज की जिम्मेदारियां भी बड़ी होती हैं। लेकिन फर्जी शादियों में इसका उल्टा माहौल होता है-युवाओं को केवल अनुभव और मनोरंजन का अवसर मिलता है।पाकिस्तान में इस ट्रेंड की शुरुआत लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज से हुई। वहां दो छात्राओं ने एक फर्जी शादी का आयोजन किया, जिसमें शादी की सारी रस्में और सजावट वही थी जो असली शादी में होती हैं। सोशल मीडिया पर इस शादी के वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश में ध्यान खींचा गया। युवाओं में इसे लेकर उत्सुकता और उत्साह बढ़ा।

    हालांकि, इस घटना ने विरोध भी खड़ा किया। कुछ लोगों ने इसे समलैंगिक विवाह समझकर आपत्ति जताई। वीडियो वायरल होने के बाद दुल्हन बनने वाली छात्रा को ऑनलाइन ट्रोलिंग और आलोचना का सामना करना पड़ा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा और निजता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए। सबसे पहले वीडियो और फोटो को ऑनलाइन पोस्ट करने पर रोक लगा दी गई। साथ ही केवल उन लोगों को ही इस आयोजन में आने की अनुमति दी जाने लगी, जो इसे केवल मनोरंजन के रूप में लेते हों।

    फर्जी शादी में दुल्हन बनने वाली छात्रा के परिवार को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके विपरीत, दूल्हा बनी छात्रा का परिवार इस पूरे मामले में अपेक्षाकृत शांत रहा। इस अनुभव के बावजूद, इस ट्रेंड ने युवाओं में लोकप्रियता हासिल की और कई समूहों ने इसे व्यवस्थित रूप से आयोजित करना शुरू कर दिया।एक ऐसा ही समूहहुनर क्रिएटिव मार्केट है, जिसकी संस्थापक रिदा इमरान ने महिलाओं के लिए विशेष फर्जी शादियों और मेहंदी पार्टियों का आयोजन किया। इसमें कारीगरों, कलाकारों, कंटेंट क्रिएटर्स और इवेंट मैनेजर्स ने हिस्सा लिया। इस तरह की घटनाएं खासतौर पर उन लोगों के लिए वरदान साबित हुईं जो पारंपरिक शादियों की थकावट और सामाजिक दबाव के कारण शादी का असली आनंद नहीं ले पाते।

    फर्जी शादियों का यह ट्रेंड युवा पीढ़ी में खुद को व्यक्त करने और सामाजिक अनुभव का मज़ा लेने का एक नया तरीका बन गया है। इसमें विवाह के वास्तविक दायित्वों की कमी होने के बावजूद लोग शादी की रस्मों, उत्सव और उत्साह का आनंद ले सकते हैं।पाकिस्तान में फर्जी शादियों का यह चलन यह दिखाता है कि समाज में नई पीढ़ी पारंपरिक धारणाओं और सामाजिक दबावों से हटकर, स्वतंत्र और रचनात्मक तरीके से अपनी खुशियों का अनुभव करना चाहती है। यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि युवाओं के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक प्रयोग का एक नया रूप बन चुका है।

  • बॉन्डी बीच आतंकी हमला: हनुक्का उत्सव पर फायरिंग से 16 की मौत, बाप-बेटे पर शक; ऑस्ट्रेलिया में 29 साल बाद सबसे बड़ा शूटआउट

    बॉन्डी बीच आतंकी हमला: हनुक्का उत्सव पर फायरिंग से 16 की मौत, बाप-बेटे पर शक; ऑस्ट्रेलिया में 29 साल बाद सबसे बड़ा शूटआउट

     
    नई दिल्ली/ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बॉन्डी बीच पर रविवार को हुई सामूहिक गोलीबारी ने देश को हिला कर रख दिया है। यह हमला उस समय हुआ, जब यहूदी समुदाय के लोग समुद्र तट पर हनुक्का पर्व का उत्सव मना रहे थे। ऑस्ट्रेलियाई पुलिस के अनुसार, इस आतंकी हमले में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 45 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में एक 10 वर्षीय बच्ची और एक इजराइली नागरिक भी शामिल हैं।

    पुलिस जांच में सामने आया है कि हमले को अंजाम देने वाले दोनों आरोपी आपस में बाप-बेटे थे। उनकी पहचान 50 वर्षीय साजिद अकरम और उसके 24 वर्षीय बेटे नवीद अकरम के रूप में हुई है। शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस को संदेह है कि दोनों का मूल पाकिस्तान से जुड़ा हो सकता है। हमले के बाद मौके पर ही पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए साजिद अकरम को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई, जबकि नवीद अकरम गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में भर्ती है।

    ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बर्क ने बताया कि साजिद अकरम 1998 में छात्र वीजा पर ऑस्ट्रेलिया आया था। बाद में उसने एक ऑस्ट्रेलियाई महिला वेरेना से शादी की और पार्टनर वीजा प्राप्त किया। इसके बाद वह रेजिडेंट रिटर्न वीजा पर ऑस्ट्रेलिया में रह रहा था, लेकिन उसके पास ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता नहीं थी। वहीं उसका बेटा नवीद ऑस्ट्रेलिया में ही जन्मा था और वह ऑस्ट्रेलियाई नागरिक है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, नवीद अकरम वर्ष 2019 में ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा खुफिया संगठन ASIO की निगरानी में आया था, लेकिन उस समय उसके खिलाफ हिंसक गतिविधियों से जुड़ा कोई ठोस सबूत नहीं मिला था। परिवार ने भी इस घटना पर हैरानी जताई है। साजिद की पत्नी वेरेना ने मीडिया से कहा कि उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि उनके पति और बेटे इस तरह के आतंकी हमले में शामिल हो सकते हैं।

    पुलिस ने बताया कि साजिद अकरम के पास लाइसेंसी हथियार थे। वह एक गन क्लब का सदस्य था और कानून के तहत उसके पास कुल छह बंदूकें दर्ज थीं, जिनका इस्तेमाल वह शिकार के लिए करता था। हमले वाले दिन बाप-बेटे ने घर से निकलते समय परिवार को बताया था कि वे मछली पकड़ने जा रहे हैं। बाद में पुलिस ने उनके किराए के घर पर छापेमारी की, जहां से जांच से जुड़े अहम सुराग जुटाए गए। इस भयावह घटना के दौरान साहस की एक मिसाल भी देखने को मिली। अहमद नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक आतंकी से बंदूक छीन ली। वायरल वीडियो में दिखता है कि अहमद चुपचाप पीछे से हमलावर के पास पहुंचे और उस पर काबू पा लिया। उनकी बहादुरी से कई लोगों की जान बच सकी।

    इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार की नीतियों को इस हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पहले ही प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को चेतावनी दी थी कि कुछ नीतियां देश में यहूदी-विरोधी भावनाओं को बढ़ावा दे रही हैं। वहीं भारत, ब्रिटेन और अमेरिका सहित कई देशों के नेताओं ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए पीड़ितों के प्रति संवेदना जताई है।

    गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया में बड़े पैमाने पर गोलीबारी की घटनाएं बेहद दुर्लभ हैं। 1996 के पोर्ट आर्थर नरसंहार के बाद यहां सख्त गन कानून लागू किए गए थे। यही वजह है कि बॉन्डी बीच की यह घटना बीते लगभग तीन दशकों में सबसे गंभीर सामूहिक गोलीबारी मानी जा रही है। इस हमले ने एक बार फिर सुरक्षा, कट्टरता और सामाजिक सौहार्द पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी

    पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान का बड़ा कदम, वैश्विक मंच पर बेनकाब करने की तैयारी


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तालिबान सरकार अब इस्लामाबाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा डिप्लोमैटिक अभियान शुरू करने की तैयारी में है। अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान उसकी सीमा के भीतर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए सैन्य हमले कर रहा है और आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। इसी को लेकर तालिबान प्रशासन दुनिया के अलग-अलग देशों में अपने प्रतिनिधि भेजने की योजना बना रहा है।

    तालिबान की ओर से तैयार किए गए एक विस्तृत डोजियर में पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने, मानवाधिकारों के उल्लंघन और अफगान नागरिकों व शरणार्थियों पर दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस डोजियर में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान आर्थिक दबाव और जबरन निर्वासन के जरिए अफगानिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगान विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने मिलकर यह दस्तावेज तैयार किया है, जिसे तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा की मंजूरी के बाद प्रभावशाली और पड़ोसी देशों को सौंपा जाएगा। इसमें पाकिस्तान को “आतंकवादियों के लिए सुविधा केंद्र” बताया गया है और आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां ISIS और अन्य आतंकी संगठनों को लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता दे रही हैं।

    अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तान इन आतंकी संगठनों का इस्तेमाल अफगानिस्तान, भारत और ईरान जैसे देशों को अस्थिर करने के लिए कर रहा है और उसके पास इन आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत मौजूद हैं। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार अफगान तालिबान पर टीटीपी को समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा बंद है और हाल के महीनों में तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है।

    इस डिप्लोमैटिक अभियान के जरिए तालिबान का उद्देश्य पाकिस्तान की कथित नीतियों को वैश्विक मंच पर उजागर करना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचना बताया जा रहा है।