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  • इस मुस्लिम देश की सुरक्षा एजेंसी ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता को किया गिरफ्तार

    इस मुस्लिम देश की सुरक्षा एजेंसी ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता को किया गिरफ्तार


    तेहरान।
    ईरान की सुरक्षा एजेंसियों (Iranian Security Agencies) ने शुक्रवार को 2023 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नर्गेस मोहम्मदी (Peace Prize laureate Narges Mohammadi ) को हिरासत में ले लिया है। यह जानकारी शुक्रवार को मोहम्मदी के फाउंडेशन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी है। जानकारी के मुताबिक मोहम्मदी को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान गिरफ्तार किया गया है। फाउंडेशन ने बताया कि उन्हें आज सुबह सुरक्षा और पुलिस बलों ने जबरन हिरासत में ले लिया। हालांकि ईरान की तरफ से इस बारे में अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक नर्गेस मोहम्मदी ईरान के वकील खोसरो अलीकोर्दी की याद में आयोजित समारोह में शामिल हुई थीं, जिनकी इस महीने की शुरुआत में मौत हो गई थी। तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। बता दें कि 45 वर्षीय अलीकोर्दी उन वकीलों में से एक थे जो संवेदनशील मामलों को संभालते थे, जिनमें 2022 में हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार लोगों की पैरवी भी शामिल थी। बीते 5 दिसंबर को उनके दफ्तर से उनका शव बरामद हुआ था। कई मानवाधिकार संगठनों ने उनकी मौत की जांच की मांग की है।

    इससे पहले मोहम्मदी को दिसंबर 2024 में जेल से अस्थायी रिहाई मिली थी। 53 वर्षीय नर्गेस मोहम्मदी को आखिरी बार नवंबर 2021 में गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने पिछले एक दशक का अधिकांश समय जेल में बिताया है। 2023 में ओस्लो में आयोजित समारोह में उनके जुड़वां बच्चों ने उनकी ओर से नोबेल पुरस्कार ग्रहण किया था।

  • पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पहुंचे नॉर्वे के राजदूत, शहबाज सरकार ने भेजा समन

    पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पहुंचे नॉर्वे के राजदूत, शहबाज सरकार ने भेजा समन


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान (Pakistan)के सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) की एक सुनवाई में नॉर्वे के राजदूत अल्बर्ट इलसास(Ambassador Albert Ilsas) भी पहुंच गए। इससे पाकिस्तानी सरकार इतना भड़क गई कि इलसास को समन भेज दिया गया। जानकारी के मुताबिक मानवाधिकार से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान नॉर्वे के राजदूत सुप्रीम कोर्ट में मौजूद थे। ऐक्टिविस्ट इणान जैनब मजारी और उनके पति हादी अली चत्ता की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इलसास को समन किया है और कहा है कि देश के आंतरिक मामलों में दखल देना उचित नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में उपस्थित होकर नॉर्वे के राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है।

    अंदराबी ने कहा, उन्होंने जो कुछ भी किया है उसे देश के आंतरिक मामलों में दखल माना जा रहा है। किसी भी देश के राजदूत से उम्मीद की जाती है कि वह विएना कन्वेंशन के नियमों का पालन करे। वहीं इमान ने राजदूत का पक्ष लेते हुए कहा है कि राजदूत का सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान उपस्थित रहना यह कतई नहीं दिखाता है कि वह किसी पक्ष में थे। यह एक आम बात है, हालांकि पाकिस्तान की सरकार एक राजदूत की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है।

    बता दें कि इमान और उनके पति के खिलाफ पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक ऐक्ट 2016 के तहत केस दर्ज किया गया है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट में उन्होंने अंतरिम राहत के लिए अपील की थी। उनकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद दंपती ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

  • बांग्लादेश में चुनावी तारीख घोषित, शेख हसीना की पार्टी ने किया खारिज, कहा- यूनुस के बस की बात नहीं

    बांग्लादेश में चुनावी तारीख घोषित, शेख हसीना की पार्टी ने किया खारिज, कहा- यूनुस के बस की बात नहीं


    नई दिल्‍ली । पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना(Sheikh Hasina) की पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग ने 12 फरवरी, 2026 के लिए घोषित चुनावी तारीख को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आवामी लीग ने बांग्लादेश(Bangladesh) चुनाव आयोग के इस कदम को गैर-कानूनी बताया है। पार्टी ने कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता और मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस(Muhammad Yunus) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार एक किलर-फासीस्ट(killer-fascist) गिरोह की तरह काम कर रही है, जो किसी भी हाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और सहभागी चुनाव नहीं करा सकती।

    अवामी लीग का कड़ा बयान
    गुरुवार को जारी एक तीखे बयान में पार्टी ने कहा कि उसने गैरकानूनी, कब्जाधारी, हत्यारे-फासीस्ट यूनुस गिरोह के गैरकानूनी निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम का गहन अध्ययन किया है और यह स्पष्ट है कि मौजूदा प्रशासन पूरी तरह पक्षपाती है। पार्टी के अनुसार उनके नियंत्रण में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनता की इच्छा का प्रतिबिंब सुनिश्चित करना असंभव है।

    अवामी लीग ने अपने बयान में कहा- यह अब स्पष्ट है कि मौजूदा कब्जाधारी सत्ता पूरी तरह पक्षपाती है और उनके नियंत्रण में सामान्य, स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल संभव नहीं। चुनाव जनता की लोकप्रियता का पैमाना हैं। अवामी लीग एक चुनाव-उन्मुख पार्टी है और जनता के सामने खड़े होने की क्षमता, साहस और ताकत रखती है।

    ऐतिहासिक भूमिका और चुनावी विरासत का उल्लेख
    अवामी लीग ने जोर देकर कहा कि अपनी स्थापना से लेकर अब तक उसने 13 राष्ट्रीय चुनावों में हिस्सा लिया है, जिनमें से 9 बार विजयी होकर सरकार बनाई है। पार्टी ने दावा किया कि उसकी भागीदारी के बिना चुनाव करवाना देश को गहरे संकट में धकेलने के बराबर है। पार्टी ने साफ कहा कि बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनाव कराना यूनुस के बस की बात नहीं है।

    पार्टी की मुख्य मांगें
    – अवामी लीग ने चुनाव कार्यक्रम को खारिज करते हुए कई बड़े कदमों की मांग की है:
    – पार्टी पर लगाए गए सभी प्रतिबंध तत्काल हटाए जाएं
    – शेख हसीना सहित नेताओं पर दर्ज फर्जी मामलों को वापस लिया जाए
    – सभी राजनीतिक बंदियों को बिना शर्त रिहा किया जाए
    – मौजूदा अंतरिम सरकार को हटाकर एक तटस्थ केयरटेकर सरकार बनाई जाए, जो स्वतंत्र और सहभागी चुनाव करा सके
    – पार्टी ने कहा कि देश की आजादी की अगुवाई करने वाली पार्टी को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखने की कोशिश राष्ट्र को अस्थिरता की ओर ले जाएगी।

    CEC का ऐलान: 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय चुनाव और जनमत संग्रह
    इससे पहले बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ए.एम.एम. नासिर उद्दीन ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए घोषणा की कि देश में 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय चुनाव होंगे। यह चुनाव अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद होने वाला पहला राष्ट्रीय मतदान होगा, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाया था।

    उसी दिन जुलाई चार्टर पर एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह भी कराया जाएगा। इस चार्टर में कार्यपालिका की शक्तियां सीमित करने और न्यायपालिका को मजबूत करने जैसे बड़े सुधार प्रस्तावित हैं। मतदान देश की 300 संसदीय सीटों पर एक साथ होगा- यह बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार ट्विन पोल्स होंगे।

    चुनावी प्रक्रिया की समयरेखा
    – नामांकन दाखिल: 29 दिसंबर 2025 से
    – चुनाव प्रचार: 22 जनवरी 2026 से शुरू
    – चुनाव प्रचार समाप्ति: मतदान से 48 घंटे पहले

    आगामी चुनाव का संभावित मुकाबला
    विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनाव में मुख्य प्रतिस्पर्धा इन दलों के बीच रहने की संभावना है:
    – बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP)- नेतृत्व बेगम खालिदा जिया
    – जमात-ए-इस्लामी
    – नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP)- जिसने 2024 के छात्र आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

    अवामी लीग की अनुपस्थिति चुनावी परिदृश्य को जटिल बना सकती है, और उसकी सख्त आपत्तियों के कारण बांग्लादेश का राजनीतिक तापमान एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है।

  • इमरान खान को अडियाला जेल से हटाकर कहीं और ले जाने की तैयारी में शहबाज सरकार !

    इमरान खान को अडियाला जेल से हटाकर कहीं और ले जाने की तैयारी में शहबाज सरकार !

    इस्‍लामाबाद। लगातार बढ़ते दबाव और विरोध प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार अब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अडियाला जेल से दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है। जानकारी के मुताबिक 2 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद इमरान खान को जल्द ही रावलपिंडी की इस जेल से दूसरी जेल भेजा जा सकता है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इमरान खान के समर्थन में लगातार हो रहे प्रदर्शनों से प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है और और सुरक्षा एजेंसियों को चिंता है कि हालात और बिगड़ सकते हैं।

    Wion न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच बातचीत के बाद खान को दूसरी जगह भेजने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

    रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री को अटॉक डिस्ट्रिक्ट जेल में शिफ्ट किया जा सकता है।
    शरीफ सरकार का क्या बहाना?

    जहां एक तरफ शहबाज शरीफ की सरकार इन प्रदर्शनों के बाद जवाब नहीं दे पा रही है, वहीं दूसरी तरह सरकार नए बहाने बना रही है। प्रधानमंत्री के प्रवक्ता इख्तियार वली ने कहा है कि लगातार प्रदर्शनों से जेल के आसपास रहने वाले लोगों का रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। सरकार की तरफ से यह भी कहा है कि सार्वजनिक प्रदर्शनों की आड़ में PTI के कुछ नेता जानबूझकर हालात बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
    फिर भड़की हिंसा

    इससे पहले अडियाला जेल के बाहर एक बार फिर प्रदर्शन उग्र हो गया है। बीते मंगलवार को तनाव तब और बढ़ गया जब जेल अधिकारियों ने इमरान खान की बहनों और उनकी लीगल टीम को खान से मिलने की इजाजत नहीं दी। इसके बाद अलीमा खान और उजमा खान ने अन्य समर्थकों के साथ जेल के बाहर डेरा डाल दिया और जमकर नारेबाजी की।

  • अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर नागरिकता हासिल करना तो अब लगेगा झटका

    अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर नागरिकता हासिल करना तो अब लगेगा झटका

    वॉशिंगटन । भारत में अमेरिकी दूतावास ने साफ किया है कि ऐसे लोगों को टूरिस्ट वीजा नहीं मिलेगा, जिनका मकसद अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर अमेरिकी नागरिकता हासिल करने का होगा। अमेरिकी दूतावास ने झटका देते हुए कहा कि अगर इस बात का कोई संकेत मिलता है कि टूरिस्ट अमेरिकी धरती पर बच्चे को जन्म देकर नागरिकता पाने का शॉर्टकट अपनाना चाहता है, तो अमेरिका वीजा एप्लीकेशन प्रोसेस नहीं करेगा।

    भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,, “अमेरिकी काउंसलर अधिकारी टूरिस्ट वीजा एप्लीकेशन को मना कर देंगे, अगर उन्हें लगता है कि यात्रा का मुख्य मकसद अमेरिका में बच्चे को जन्म देकर बच्चे के लिए अमेरिकी नागरिकता हासिल करना है। इसकी इजाजत नहीं है।”

    इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दस लाख डॉलर की ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’ योजना शुरु करने की घोषणा की है। यह एक वीजा कार्यक्रम है, जो अप्रवासियों को अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने का मार्ग प्रदान करेगा। ट्रंप का कहना है कि भारत और चीन जैसे देशों के छात्रों का अमेरिका के शीर्ष विश्वविद्यालयों से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्वदेश लौटना शर्मनाक है। बुधवार को घोषित किया गया ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’ योजना एक ऐसा वीजा कार्यक्रम है जो अमेरिका को पर्याप्त लाभ प्रदान करने की किसी व्यक्ति की क्षमता पर आधारित है।

    ट्रंप ने दावा किया कि ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’ योजना कंपनियों को देश में इस तरह की प्रतिभाओं को नियुक्त करने और बनाए रखने में सक्षम बनाएगी। व्हाइट हाउस में एक बैठक में ट्रंप ने कहा, ‘‘किसी महान व्यक्ति का हमारे देश में आना एक उपहार के समान है, क्योंकि हमें लगता है कि ये कुछ ऐसे असाधारण लोग होंगे जिन्हें यहां रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कॉलेज से स्नातक करने के बाद, उन्हें भारत वापस जाना पड़ता है, उन्हें चीन वापस जाना पड़ता है, उन्हें फ्रांस वापस जाना पड़ता है। उन्हें वापस वहीं जाना पड़ता है, जहां से वे आए थे। वहां रुकना बहुत मुश्किल है। यह शर्मनाक है। यह एक हास्यास्पद बात है। हम इस पर ध्यान दे रहे हैं।’’

  • अमेरिका को NATO से निकालो, US कांग्रेस में पेश हुआ बिल

    अमेरिका को NATO से निकालो, US कांग्रेस में पेश हुआ बिल

    बिल को पेश करते हुए कहा है कि यह सैन्य गठबंधन अब भी कोल्ड वॉर की मानसिकता से गुजर रहा है और इससे अमेरिकी टैक्सपेयर्स के ट्रिलियन डॉलर बर्बाद हो रहे हैं।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक केंटकी के सांसद थॉमस मैसी ने बीते मंगलवार को यह बिल कांग्रेस में पेश किया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि NATO उस वक्त बनाया गया था, जब सोवियत यूनियन मौजूद था, लेकिन अब वह खतरा खत्म हो चुका है।

    मैसी ने कहा, “अमेरिका को NATO से बाहर निकलना चाहिए और उस पैसे को अपने देश की सुरक्षा पर लगाना चाहिए, ना कि सोशलिस्ट देशों पर। NATO की वजह से अमेरिकी टैक्सपेयर्स के ट्रिलियन डॉलर खर्च हुए हैं और इससे अमेरिका के वैश्विक जंगों में उलझने का भी जोखिम बना रहता है।” सांसद ने कहा कि अमेरिका पूरी दुनिया के लिए सुरक्षा कवच नहीं बन सकता, खासकर तब जब अमीर देश अपनी खुद की रक्षा पर खर्च नहीं करना चाहते।”

    जानकारी के मुताबिक अगर यह बिल संसद से पास हो जाता है, तो अमेरिकी सरकार को औपचारिक रूप से NATO को सूचित करना होगा कि वह सदस्यता खत्म कर रही है। साथ ही, अमेरिका से NATO के बजट में जाने वाला पैसा भी रोक दिया जाएगा।
    पहले भी उठी है मांग

    इससे पहले रिपब्लिकन सीनेटर माइक ली ने भी पिछले साल इस तरह की साल उठाई थी। माइक ली ने कहा था कि NATO में बने रहना अब अमेरिका की रणनीतिक जरूरतों से मेल नहीं खाता।वहीं पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके कई रिपब्लिकन सहयोगी लंबे समय से NATO पर यह आरोप लगाते रहे हैं कि अमेरिका इस गठबंधन में अपनी हिस्सेदारी से कई गुना ज्यादा पैसा खर्च करता है।

  • अरबपतियों की सूची में मस्क की नंबर वन कुर्सी से टला खतरा, लैरी एलिसन ने दूसरा स्थान भी खोया

    अरबपतियों की सूची में मस्क की नंबर वन कुर्सी से टला खतरा, लैरी एलिसन ने दूसरा स्थान भी खोया


    वाशिंगटन।
    टेक शेयरों (Tech stocks) में गिरावट के कारण दुनिया के टॉप-10 अरबपतियों (World’s Top 10 Billionaires) की लिस्ट में उथल-पुथल देखने को मिल रही है। कभी मस्क की अरबपति नंबर वन की कुर्सी के खतरा बन रहे लैरी एलिसन (Larry Ellison) से अरबपति नंबर 2 की कुर्सी छिन गई है। गुरुवार को एलिसन 24.9 अरब डॉलर गंवाने वाले टॉप लूजर रहे। इनकी कंपनी ओरेकल के शेयर 10 पर्सेंट से अधिक लुढ़क गए। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) में अब दूसरे नंबर पर लैरी पेज आ गए हैं। हालांकि, इन्हें भी 5.73 अरब डॉलर की चोट पहुंची है।

    कुछ दिन पहले दूसरे नंबर पर रहे गूगल अल्फाबेट के को-फाउंडर सर्गेई ब्रिन अब पांचवें नंबर पर हैं। टेस्ला के एलन मस्क पहले नंबर पर काबिज हैं। भारत के मुकेश अंबानी एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। अडानी 84.3 अरब डॉलर के साथ अब भी वह 20वें स्थान पर हैं।

    साल 2025 के सबसे बड़े गेनर
    इस साल के सबसे बड़े गेनर्स अब लैरी पेज हैं। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक उनकी दौलत में इस साल अबतक 100 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। वहीं, दूसरे नंबर पर सर्गेई ब्रिन हैं, जिनकी दौलत इस साल 91.3 अरब डॉलर बढ़ी है। लैरी एलिसन की कमाई अब 65.6 अरब डॉलर पर पहुंच गई है।

    दुनिया टॉप-10 अमीर
    ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक एलन मस्क अभी भी दुनिया के सबसे बड़े रईस हैं। उनकी कुल संपत्ति 462 अरब डॉलर है और इसमें गुरुवार को 3.27अरब डॉलर का नुकसान हुआ। इस साल अबतक इनकी संपत्ति 29.4 अरब डॉलर बढ़ी है। दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति लैरी पेज को गुरुवार को 5.7 अरब डॉलर का नुकसान हुआ और इनकी कुल संपत्ति 268 अरब डॉलर हो गई है।

    लैरी एलिसन को गुरुवार को 24.9 अरब डॉलर का बड़ा झटका लगा। अब 258 अरब डॉलर के साथ एलिसन दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में तीसरे नंबर पर हैं। वहीं अमेजन के जेफ बेजोस की संपत्ति 1.17 अरब डॉलर गिरकर 253 अरब डॉलर हो गई। इसके बावजूद उन्हें एक पायदान का फायदा हुआ है। बेजोस अब 5वें से चौथे स्थान पर हैं। इनका नेटवर्थ 253 अरब डॉलर है।

    सर्गेई ब्रिन की दौलत में 5.29 अरब डॉलर की गिरावट हुई और अब उनके पास 250 अरब डॉलर का नेटवर्थ है। ये ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स में 5वें स्थान पर आ गए हैं। मार्क जुकरबर्ग की संपत्ति में 934 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ। अब इनका नेटवर्थ 231 अरब डॉलर हो गया है। दुनिया के अमीरों की लिस्ट में जुकरबर्ग छठे स्थान पर हैं। सातवें स्थान पर फ्रांस के बर्नार्ड अर्नाल्ट हैं। इनकी संपत्ति में 2.86 अरब डॉलर का इजाफा हुआ और उनके पास 202 अरब डॉलर का नेटवर्थ है।

    स्टीव बाल्मर ने 1.84 अरब डॉलर कमाए। इनका नेटवर्थ अब 168 अरब डॉलर हो गया है। ये 8वें पोजीशन पर हैं। एनवीडिया के मालिक जेनसेंग हुआंग को 2.38 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। अब इनके पास 157 अरब डॉलर की संपत्ति है और ये दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 9वें पायदान पर आ गए हैं। इस साल इनकी संपत्ति में 43 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। माइकल डेल एक बार फिर टॉप-10 में आ गए हैं। अब उनके पास 157 अरब डॉलर की दौलत है।

  • अमेरिकी नागरिकता का नया दावा! ट्रंप का ‘Gold Card’ प्रोग्राम चर्चा में-जानें फीस और पूरा प्रोसेस

    अमेरिकी नागरिकता का नया दावा! ट्रंप का ‘Gold Card’ प्रोग्राम चर्चा में-जानें फीस और पूरा प्रोसेस


    अमेरिका। में स्थायी रूप से बसने का सपना देखने वालों के लिए बड़ी चर्चा सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया इन्वेस्टर-आधारित इमिग्रेशन मॉडल “Trump Gold Card” लॉन्च किया है, जिसे अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम का बड़ा बदलाव बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह प्रोग्राम योग्य व्यक्तियों को भविष्य में अमेरिकी नागरिकता तक पहुँचने का अवसर प्रदान कर सकता है।

    माना जा रहा है कि Gold Card दो श्रेणियों में जारी किया जा रहा है-पहला Gold Card, जो व्यक्तिगत आवेदकों के लिए है, और दूसरा Corporate Gold Card, जो उन कर्मचारियों के लिए है जिन्हें उनकी कंपनी अमेरिका भेजना चाहती है। इसके अलावा एक Platinum Card शुरू करने की भी बात सामने आ रही है, जो लगभग 270 दिन तक अमेरिका में रहने की अनुमति दे सकता है।

    इस कार्ड की लागत को लेकर किए गए दावों के अनुसार, Gold Card के लिए $15,000 का नॉन-रिफंडेबल आवेदन शुल्क देना होगा, और मंजूरी मिलने पर $1 मिलियन की एकमुश्त रकम जमा करनी होगी। वहीं Corporate Gold Card के लिए कंपनियों से मंजूरी के बाद $2 मिलियन तक का भुगतान लेने की बात कही जा रही है। इसे निवेश और टैलेंट को अमेरिका की ओर आकर्षित करने का प्रयास बताया जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक आवेदन प्रक्रिया सरल है-बता‍या गया है कि आवेदक को trumpcard.gov वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरना होता है और अंतरराष्ट्रीय अथवा अमेरिकी क्रेडिट कार्ड के जरिए भुगतान किया जा सकता है। हालांकि, इस प्रोग्राम की आधिकारिक पुष्टि अमेरिकी सरकारी वेबसाइटों पर उपलब्ध नहीं है।

    इसी वजह से विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वीज़ा, इमिग्रेशन और नागरिकता से जुड़ी किसी भी जानकारी या आवेदन से पहले USCIS और U.S. State Department जैसे आधिकारिक स्रोतों को ही अंतिम आधार माना जाए, ताकि किसी भी तरह की भ्रमित जानकारी या गलत दावे से बचा जा सके।

  • कनाडा में भारतीय मूल का युवक गिरफ्तार, महिला डॉक्टरों के सामने अश्लील हरकतों के आरोप में हुई कार्रवाई

    कनाडा में भारतीय मूल का युवक गिरफ्तार, महिला डॉक्टरों के सामने अश्लील हरकतों के आरोप में हुई कार्रवाई


    नई दिल्ली । कनाडा (Canada)के मिसिसॉगा शहर(Mississauga City) में एक 25 वर्षीय भारतीय मूल के युवक को गिरफ्तार किया गया है। उस पर कई मेडिकल क्लीनिकों (Medical clinics)में महिला स्टाफ, विशेषकर महिला डॉक्टरों के सामने खुद को अश्लील रूप से प्रदर्शित करने के आरोप लगे हैं। इस मामले की पुष्टि पील रीजनल पुलिस (PRP) ने की है।

    पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान वैभव के रूप में हुई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि वैभव बीते कई महीनों से मिसिसॉगा के अलग-अलग मेडिकल सेंटर और क्लीनिकों में बार-बार पहुंचता था। वह नकली मेडिकल समस्याएं बताकर महिला डॉक्टरों से अनुचित शारीरिक संपर्क करवाने की कोशिश करता था।

    PRP ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि 12 डिवीजन क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशंस ब्यूरो (CIB) ने इंडीसेंट एक्ट जांच के सिलसिले में ब्रैम्पटन निवासी एक व्यक्ति को गिरफ्तार और चार्ज किया है।

    झूठी पहचान भी करता था इस्तेमाल
    पुलिस ने आरोप लगाया है कि वैभव ने कई बार महिला मेडिकल स्टाफ के सामने खुद को नंगा कर दिया और कई मौकों पर नकली पहचान भी अपनाई। जांच में सामने आया है कि वह कभी-कभी आकाशदीप सिंह नाम का इस्तेमाल करता था, ताकि डॉक्टरों को धोखे में रख सके।

    PRP के अनुसार- आरोपी ने कई बार मेडिकल कंडीशन का नाटक किया ताकि महिला डॉक्टर उसकी शरीर की अनुचित तरीके से जांच करें। कुछ मामलों में उसने झूठी पहचान का भी इस्तेमाल किया। वैभव को 4 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया और वह फिलहाल हिरासत में है। उसकी बेल (जमानत) हियरिंग अभी पेंडिंग है।

    कई गंभीर आरोप दर्ज
    सार्वजनिक स्थान पर अशोभनीय हरकत
    किसी लाभ के उद्देश्य से पहचान धोखाधड़ी
    पहचान दस्तावेज का अवैध कब्जा
    पहचान चोरी

    पुलिस को अन्य पीड़ितों की तलाश
    जांचकर्ताओं का मानना है कि ऐसी और भी महिलाएं हो सकती हैं जो इस आरोपी की हरकतों का शिकार हुई हों, लेकिन अब तक आगे नहीं आईं। पुलिस ने कहा- जो भी व्यक्ति इस मामले से जुड़ी कोई भी जानकारी रखता है, वह 12 डिवीजन CIB से 905-453-2121, एक्सटेंशन 1233 पर संपर्क करे। पील रीजनल पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि इस तरह की घटनाओं की रिपोर्ट करने में हिचकिचाएं नहीं, ताकि जांच आगे बढ़ सके और पीड़ितों को न्याय मिल सके।

  • अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 विमानों के अपग्रेड के लिए 686 मिलियन डॉलर के पैकेज को दी मंजूरी

    अमेरिका ने पाकिस्तान के F-16 विमानों के अपग्रेड के लिए 686 मिलियन डॉलर के पैकेज को दी मंजूरी


    नई दिल्ली । अमेरिकी(American) विदेश विभाग ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए 686 मिलियन डॉलर (68.6 करोड़ डॉलर) के पैकेज को मंजूरी दे दी है। यह पैकेज पाकिस्तान वायु सेना (Pakistan Air Force)की क्षमताओं को बढ़ाने, अंतरसंचालन(Interoperability) को मजबूत करने और विमानों की सर्विस लाइफ को 2040 तक विस्तारित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ट्रंप प्रशासन(Trump administration) ने इस प्रस्ताव को संसद के पास भेज दिया है, जहां इसे 30 दिनों की समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा।

    इस सौदे में लिंक-16 डेटा लिंक सिस्टम, क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, एवियोनिक्स अपग्रेड, प्रशिक्षण मॉड्यूल और व्यापक रखरखाव समर्थन शामिल हैं। अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (डीएससीए) के अनुसार, यह अपग्रेड पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े की विश्वसनीयता और रखरखाव क्षमता को बढ़ाएगा, साथ ही अमेरिकी और पाकिस्तानी वायु सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा। डीएससीए ने एक बयान में कहा- यह प्रस्तावित बिक्री अमेरिकी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थन करती है। पाकिस्तान एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी देश है।

    पाकिस्तान के पास वर्तमान में लगभग 75 एफ-16 विमान हैं, जो 1980 के दशक से उसकी वायु सेना का मुख्य आधार हैं। यह अपग्रेड विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान के एफ-16 बेड़े को आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए अपग्रेडेड कम्युनिकेशन और सेंसर सिस्टम की आवश्यकता है।

    अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग का इतिहास लंबा रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यह उतार-चढ़ाव से गुजरा है। 2018 में ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता निलंबित कर दी थी, लेकिन अब इस अपग्रेड पैकेज से संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस मंजूरी का स्वागत किया है, इसे अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के रूप में देखते हुए। दूसरी ओर, अमेरिकी कांग्रेस में कुछ सदस्यों ने पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी प्रतिबद्धताओं पर सवाल उठाए हैं, लेकिन डीएससीए ने स्पष्ट किया कि यह पैकेज केवल मौजूदा बेड़े के रखरखाव और अपग्रेड के लिए है, न कि नए विमानों की बिक्री के लिए।

    यह विकास ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। पाकिस्तान ने हाल ही में अपनी वायु सेना को आधुनिक बनाने के लिए चीन से जे-10सी विमान भी प्राप्त किए हैं, लेकिन एफ-16 अमेरिकी तकनीक पर निर्भर उसकी मुख्य ताकत बनी हुई है। यदि कांग्रेस इस सौदे को मंजूरी देती है, तो यह पाकिस्तान की सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।