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  • थाईलैंड का फुकेत: सिर्फ ₹15,000 में नए साल 2026 पर शानदार विदेशी सैर..

    थाईलैंड का फुकेत: सिर्फ ₹15,000 में नए साल 2026 पर शानदार विदेशी सैर..


    नई दिल्ली। सिर्फ ₹15000 में विदेशी मौज: नए साल 2026 पर फुकेत है बेस्ट चॉइस  अगर आप नए साल 2026 की शुरुआत किसी विदेशी गंतव्य पर खासकर समुद्र किनारे ग्लैमर और स्टाइल के साथ करना चाहते हैं लेकिन बजट को लेकर चिंतित हैं तो थाईलैंड का फुकेत Phuket आपके लिए एक बेहतरीन और किफायती विकल्प हो सकता है। भारतीय सैलानियों के बीच फुकेत की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण यह है कि यहां न्यू ईयर सेलिब्रेशन हर तरह के बजट में उपलब्ध है।

    फुकेत में कम लागत वाली हाई-एनर्जी बीच पार्टियों से लेकर एक्सक्लूसिव यॉट डिनर और लग्जरी गाला डिनर तक कई शानदार अनुभव आपका इंतजार कर रहे हैं। यहां हम आपको 31 दिसंबर 2025 को होने वाली प्रमुख न्यू ईयर पार्टियों और उनके अनुमानित खर्च की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं। ध्यान दें: नीचे बताई गई सभी कीमतें फ्लाइट टिकट के खर्च के अलावा हैं।

    बजट के अनुसार फुकेत में न्यू ईयर पार्टी के विकल्प
    ₹15000 से कम का धमाकेदार अनुभव कम बजट हाई एनर्जी बजट ट्रैवलर्स के लिए जो हाई-एनर्जी बीच पार्टी और आतिशबाजी का मजा लेना चाहते हैं उनके लिए बैंगताओ बीच Bangtao Beach स्थित कैच बीच क्लब Catch Beach Club एक आदर्श विकल्प है। अनुमानित खर्च: लगभग ₹14100 प्रति व्यक्ति। विशेषता: इस खर्च में बीचफ्रंट डीजे पार्टी लाइव परफॉर्मेंस और ठीक आधी रात को शानदार फायरवर्क्स का अनुभव शामिल है। यह विकल्प युवाओं और कम बजट में शानदार माहौल चाहने वालों के बीच बेहद लोकप्रिय है। अतिरिक्त खर्च: यदि आप 1 जनवरी को न्यू ईयर डे ब्रंच का आनंद लेना चाहते हैं तो इसका खर्च लगभग ₹11000 अलग से हो सकता है।

    ₹25000 से शुरू: मिड-रेंज लग्जरी और गाला डिनर
    जिनका बजट थोड़ा ज्यादा है और जो एक विशिष्ट और सुरुचिपूर्ण माहौल में जश्न मनाना चाहते हैं उनके लिए मिड-रेंज लग्जरी विकल्प उपलब्ध हैं। द स्लेट The Slate – नाई यांग बीच Nai Yang Beach: अनुमानित खर्च: करीब ₹26800 प्रति व्यक्ति से शुरू। विशेषता: यहां इंटरनेशनल बुफे प्रीमियम ड्रिंक्स लाइव बैंड परफॉर्मेंस और व्यक्तिगत फायरवर्क्स शो शामिल होते हैं। पार्टी अक्सर एक विशिष्ट थीम जैसे माउलिन रूज स्टाइल गाला पर आधारित होती है जो एक क्लासिक और यादगार अनुभव देती है। ट्विनपाम्स Twinpalms – सुरिन बीच Surin Beach: अनुमानित खर्च: लगभग ₹42400 प्रति व्यक्ति तक। विशेषता: यह विकल्प सी-फूड लवर्स के लिए शानदार है जिसमें लॉब्स्टर ऑयस्टर कैवियार और ग्लोबल व्यंजनों का बेहतरीन बुफे शामिल होता है।

    ₹42000 से ₹60000 तक: प्रीमियम और एक्सक्लूसिव विकल्प 

    प्रीमियम अनुभव चाहने वालों के लिए फुकेत दो बेहद एक्सक्लूसिव और स्टाइलिश विकल्प प्रदान करता है: द लेज़ी कोकोनट The Lazy Coconut – बैंगताओ बीच:अनुमानित खर्च: करीब ₹42400 प्रति व्यक्ति। विशेषता: यह जगह उन लोगों के लिए है जो स्टाइलिश लेकिन कैजुअल माहौल पसंद करते हैं। यहां बीच बीबीक्यू रेगे म्यूजिक और बीचफायर के साथ बेहद रिलैक्स्ड वाइब्स मिलती हैं। यह प्रीमियम अनुभव चाहने वाले छोटे समूहों के लिए लोकप्रिय है। बाबा नेस्ट  श्री पनवा अनुमानित खर्च: लगभग ₹47700 प्रति व्यक्ति।

    विशेषता: रूफटॉप और सनसेट व्यू के प्रेमियों के लिए यह एक शानदार ऑप्शन है। यहां 360 डिग्री पैनोरमिक व्यू मिलता है जिसमें सनसेट कॉकटेल्स और न्यू ईयर काउंटडाउन के दौरान शानदार फायरवर्क्स देखने का मौका मिलता है। यह विशेष रूप से कपल्स और छोटे एक्सक्लूसिव ग्रुप्स के बीच पसंद की जाती है और इंस्टाग्राम फ्रेंडली लोकेशन के रूप में मशहूर है।

    क्यों फुकेत है सर्वश्रेष्ठ विकल्प?
    फुकेत न केवल पार्टी और जश्न का केंद्र है बल्कि यहां की शानदार समुद्री गुफाएं बौद्ध मंदिर और थाई कल्चर भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। भारतीय मुद्रा के मुकाबले थाई बहत की विनिमय दर भी यात्रा को अपेक्षाकृत किफायती बनाती है। कम पैसे में शानदार विदेशी सैर और न्यू ईयर सेलिब्रेशन का यह संयोजन फुकेत को 2026 की शुरुआत के लिए सबसे शानदार और स्मार्ट ट्रैवल डेस्टिनेशन बनाता है।

  • सूडान में UN सुविधा केंद्र पर बड़ा हमला, 6 बांग्लादेशी शांतिरक्षकों की मौत

    सूडान में UN सुविधा केंद्र पर बड़ा हमला, 6 बांग्लादेशी शांतिरक्षकों की मौत


    काहिरा। युद्धग्रस्त सूडान में शनिवार को ड्रोन हमले ने संयुक्त राष्ट्र सुविधा को निशाना बनाया। इस हमले में छह बांग्लादेशी शांतिरक्षकों की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हुए।

    हमले की जानकारी:
    स्थान: मध्य क्षेत्र कोर्डोफान, कदुगली शहर में यूएन लॉजिस्टिक्स बेस

    पीड़ित: सभी बांग्लादेशी नागरिक, यूएन अंतरिम सुरक्षा बल (UNISFA) में तैनात

    घायलों की संख्या: 8

    सूदानी सेना ने आरोप लगाया
    हमला रैपिड सपोर्ट फोर्सेस (RSF) द्वारा किया गया बताया गया।

    RSF सूडान का कुख्यात अर्धसैनिक समूह है, जो सेना के साथ दो साल से अधिक समय से सत्ता संघर्ष में लगा है।

    सेना ने कहा कि यह हमला विद्रोही मिलिशिया और उनके समर्थनकर्ताओं के विध्वंसक दृष्टिकोण को उजागर करता है।

    संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया
    UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे युद्ध अपराध करार दिया और जिम्मेदारों को जवाबदेह ठहराने की मांग की।

    गुटेरेस ने सूडान में तत्काल युद्धविराम और एक व्यापक, समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया।

    सूडान का युद्ध परिदृश्य
    अप्रैल 2023 में सेना और RSF के बीच सत्ता संघर्ष ने खार्तूम और अन्य हिस्सों में खुला युद्ध पैदा किया।

    अब तक 40,000 से अधिक लोग मारे गए हैं।

    संघर्ष का केंद्र कोर्डोफान और दारफूर क्षेत्र है।

    युद्ध में शहर तबाह हुए, सामूहिक बलात्कार और जातीय हत्याएं हुईं, जिन्हें यूएन और अधिकार समूहों ने युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध बताया।

    हमले का वीडियो सामने आया
    सूडानी सेना ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें यूएन सुविधा के पास घने काले धुएं के गुबार दिखाई दे रहे हैं। यह दिखाता है कि हमला कितने व्यापक पैमाने पर हुआ।

    सूडान में जारी संघर्ष ने न केवल नागरिकों बल्कि शांति मिशन के जवानों को भी निशाना बनाया है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा तत्काल युद्धविराम और राजनीतिक समाधान की जरूरत जताई जा रही है।

  • अमेरिकी सेना ने समुद्र में गिरे सैन्य उपकरणों को सफलतापूर्वक निकाला, चीन की नजरों से बची तकनीक

    अमेरिकी सेना ने समुद्र में गिरे सैन्य उपकरणों को सफलतापूर्वक निकाला, चीन की नजरों से बची तकनीक


    नई दिल्‍ली । अमेरिका ने एशिया के दो बेहद संवेदनशील इलाकों में समुद्र में गिरे अपने अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया है। दक्षिण कोरिया के पश्चिमी समुद्र तट के पास क्रैश हुआ MQ-9 रीपर ड्रोन और साउथ चाइना सागर से एफ-18 फाइटर जेट और एमएच-60 हेलीकॉप्टर को रिकवर किया गया। ये ऑपरेशन अमेरिका की सुरक्षा और तकनीकी श्रेष्ठता के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं।

    1. MQ-9 रीपर ड्रोन – सियोल के पास क्रैश
    कब हुआ था: 24 नवंबर

    कहां गिरा: सियोल से करीब 180 किलोमीटर दक्षिण में, माल्डो-री द्वीप के पास पीले सागर में

    ऑपरेशन: अमेरिकी वायुसेना और दक्षिण कोरियाई नौसेना ने करीब 20 दिनों में ड्रोन का पूरा मलबा निकाल लिया

    उद्देश्य: निगरानी और हमले के लिए तैनात, उत्तर कोरिया की गतिविधियों और पीले सागर में चीन की मौजूदगी पर नजर रखने के लिए

    महत्व: ड्रोन की तकनीक सुरक्षित रखना और इसे दुश्मन के हाथों न पड़ने देना

    2. फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर – साउथ चाइना सागर
    कब गिरे: अक्टूबर में USS निमिट्ज एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरते वक्त

    कौन से उपकरण: एफ-18 फाइटर जेट और एमएच-60 हेलीकॉप्टर

    गहराई: करीब 400 फीट

    रिकवरी की तारीख: 5 दिसंबर

    महत्व: चीन जैसे देशों के हाथ लगने पर सैन्य तकनीक का नुकसान होने से बचाना

    सुरक्षा: उपकरण अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सुरक्षित सैन्य ठिकाने पर भेजे गए हैं

    रणनीतिक महत्व
    साउथ चाइना सागर को लेकर चीन और कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच विवाद लंबा है। चीन लगभग पूरे समुद्री क्षेत्र पर दावा करता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग मानता है और अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखता है। समुद्र में गिरे अमेरिकी सैन्य उपकरणों की रिकवरी को रणनीतिक सुरक्षा कदम के रूप में देखा जा रहा है।

    अमेरिका ने समय रहते समुद्र में गिरे अपने महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों को सुरक्षित निकालकर अपनी तकनीक और सुरक्षा सुनिश्चित की। इस ऑपरेशन से यह भी जाहिर होता है कि आधुनिक युद्ध में तकनीक और सुरक्षा का महत्व कितनी तेजी से बढ़ता जा रहा है।

  • धरती के करीब आते ही हरा हो गया 3I/ATLAS कॉमेट, वैज्ञानिक हुए हैरान, जानिए क्यों बदला रंग?

    धरती के करीब आते ही हरा हो गया 3I/ATLAS कॉमेट, वैज्ञानिक हुए हैरान, जानिए क्यों बदला रंग?


    नई दिल्‍ली । अंतरिक्ष से आए धूमकेतु (Comet)की नई तस्वीरों में यह पक्का होता है कि अक्टूबर के अंत में सूरज के पास आने के बाद यह अनोखी चीज ज्यादा चमकदार(Shiny) और हरी हो गई है. इसका मतलब है कि अगले हफ्ते जब यह धूमकेतु धरती के सबसे करीब आएगा तो इसमें से नई चमकदार चीजें तेजी से बाहर निकल सकती हैं. ये नई तस्वीरें हवाई के एक बंद ज्वालामुखी मौना केआ(Mauna Kea volcano) के ऊपर रखे जेमिनी नॉर्थ टेलीस्कोप से 26 नवंबर को ली गई थीं. इसमें कॉमेट अपने सबसे सक्रिय दौर में दिख रहा है. साथ ही, धूमकेतु के चारों तरफ एक चमकीले बादल जैसा घेरा और उसके पीछे लंबी, चमकती पूंछ बन रही है.

    वैज्ञानिकों ने इसके बारे में क्या कहा?
    नेशनल साइंस फाउंडेशन के NOIRLab के बयान के मुताबिक, 3I/ATLAS से निकलने वाली गैसों में द्विपरमाण्विक कार्बन भी शामिल है. यह दो कार्बन परमाणुओं का एक अणु (Molecule) है और यह हरी रोशनी छोड़ता है. सौरमंडल के कई धूमकेतु सूरज की गर्मी से सक्रिय होने पर ऐसा ही हरा रंग छोड़ते हैं. इनमें पिछले साल खोज गया मदर ऑफ ड्रैगन्स भी शामिल है.

    कब आएगा धरती के करीब?
    जैसे-जैसे Interstellar Comet 19 दिसंबर को धरती के सबसे करीब आएगा, वैज्ञानिकों को और भी ज्यादा हैरान करने वाली चीजें देखने को मिल सकती हैं. NOIRLab के अनुसार, यह अभी पता नहीं है कि सूरज के पास से निकलने और ठंडा होने पर यह धूमकेतु कैसा व्यवहार करेगा. कई धूमकेतु देर से सूरज की गर्मी महसूस करते हैं क्योंकि गर्मी के कॉमेट के अंदर पहुंचने में समय लगता है.

    कैस रहा 3I/ATLAS का सफर?
    3I/ATLAS, 1I/’Oumuamua और 2I/Borisov के बाद खोजा गया तीसरा अंतरतारकीय पिंड है. इसका पता जून के अंत में तब चला जब यह हमारे सौरमंडल से लगभग 2,10,000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर रहा था. यह एक ऐसे टेढ़े रास्ते पर घूम रहा है जिसके कारण यह भविष्य में कभी भी हमारे आस-पास से नहीं गुजरेगा.

  • अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में खौफनाक गोलीबारी, फाइनल एग्ज़ाम के बीच 2 की मौत; 9 छात्र घायल 📝 शॉर्ट डिस्क्रिप्शन

    अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में खौफनाक गोलीबारी, फाइनल एग्ज़ाम के बीच 2 की मौत; 9 छात्र घायल 📝 शॉर्ट डिस्क्रिप्शन


    नई दिल्ली /अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में फाइनल परीक्षाओं के दौरान हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई जबकि नौ छात्र घायल हुए हैं। शूटर की तलाश जारी है।अमेरिका के रोड आइलैंड राज्य स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी शनिवार को उस समय दहशत और खून-खराबे का गवाह बन गई जब फाइनल परीक्षाओं के दौरान एक अज्ञात हमलावर ने कैंपस के भीतर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। इस भयावह घटना में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई जबकि नौ अन्य छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए।घटना के बाद पूरे आइवी लीग कैंपस में अफरातफरी मच गई। सायरनों की आवाज लॉकडाउन अलर्ट और चीख-पुकार के बीच छात्र-छात्राएं जान बचाने के लिए इमारतों में छिपते नजर आए। पुलिस और आपातकालीन टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और पूरे इलाके को घेर लिया गया।

    फाइनल परीक्षा के दौरान बरसी गोलियां
    यह गोलीबारी शनिवार दोपहर को बारुस एंड होली इंजीनियरिंग बिल्डिंग में हुई जहां उस समय इंजीनियरिंग डिजाइन की परीक्षाएं चल रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार काले कपड़े और मास्क पहने एक व्यक्ति ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। हमलावर के हाथ में हैंडगन थी और उसने पहली मंजिल की एक कक्षा में घुसकर गोलियां चलाईं।यूनिवर्सिटी की अध्यक्ष क्रिस्टीना पैक्सन ने पुष्टि की कि गोली लगने से घायल हुए सभी लोग छात्र थे। शुरुआती जानकारी में 10 छात्रों के घायल होने की बात कही गई थी जिनमें से बाद में दो की मौत हो गई।


    आरोपी अब भी फरार

    प्रोविडेंस पुलिस के उप प्रमुख टिमोथी ओ’हारा के मुताबिक संदिग्ध एक पुरुष था जिसकी उम्र करीब 30 साल बताई जा रही है। उसे आखिरी बार इंजीनियरिंग इमारत से निकलते देखा गया लेकिन उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फाइनल परीक्षा के दौरान जब कई कमरों में बैज एक्सेस जरूरी था तब शूटर अंदर कैसे घुसा। शुरुआत में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया था कि संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है लेकिन बाद में इस सूचना को गलत बताया गया। मेयर ब्रेट स्माइली ने कहा कि एक व्यक्ति को पूछताछ के लिए रोका गया था लेकिन जांच में उसका घटना से कोई संबंध नहीं पाया गया।

    कैंपस सील शेल्टर-इन-प्लेस आदेश
    घटना के तुरंत बाद पूरे कैंपस और आसपास के रिहायशी इलाकों में शेल्टर-इन-प्लेस आदेश जारी कर दिया गया। छात्रों और स्थानीय निवासियों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई। आमतौर पर वीकेंड पर गुलजार रहने वाली सड़कें पूरी तरह सुनसान नजर आईं। करीब पांच घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद टैक्टिकल गियर में तैनात पुलिसकर्मियों ने छात्रों को अलग-अलग इमारतों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

    घायलों की हालत
    रॉड आइलैंड अस्पताल की प्रवक्ता केली ब्रेनन ने बताया कि सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से छह छात्रों को आईसीयू में रखना पड़ा हालांकि उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। एक घायल की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।

    छात्रों ने बयां किया खौफ
    केमिकल इंजीनियरिंग की छात्रा एम्मा फेरारो ने बताया कि वह लॉबी में प्रोजेक्ट पर काम कर रही थीं तभी उन्हें गोलियों की आवाज सुनाई दी। उन्हें जब एहसास हुआ कि यह फायरिंग है तो वे जान बचाकर पास की इमारत में भागीं और कई घंटों तक छिपी रहीं।एक अन्य छात्र एलेक्स ब्रूस ने कहाजब सायरन बजे और एक्टिव शूटर का मैसेज आया तो मैं कांप गया। यह पल जिंदगी भर नहीं भूलूंगा। इस हमले ने न केवल ब्राउन यूनिवर्सिटी बल्कि पूरे अमेरिका में कैंपस सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • किम जोंग उन ने स्वीकारा, यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों ने निभाया सबसे खतरनाक रोल

    किम जोंग उन ने स्वीकारा, यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों ने निभाया सबसे खतरनाक रोल


    नई दिल्‍ली । रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine)के बीच जारी युद्ध में उत्तर कोरियाई (North Korean)सैनिकों की मौजूदगी ने एक वक्त पर जमकर सुर्खियां बटोरीं थीं। अब इन सैनिकों के बारे में उनके तानाशाह ने खुलासा किया है कि इन्होंने कैसे युद्ध क्षेत्र का सबसे मुश्किल काम किया। तानाशाह किम(Dictator Kim) के मुताबिक इस साल की शुरुआत में कुर्स्क क्षेत्र (Kursk region)में भेजे गए उत्तर कोरियाई सैनिकों ने यहां पर बारूदी सुरंगे हटाने का काम किया, जिसकी वजह से हजारों रूसी सैनिकों की जान बची।

    शनिवार को उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया पर प्रसारित एक कार्यक्रम में किम जोंग उन ने रूस से वापस लौटे अपने इन सैनिकों की सराहना की। तानाशाह ने कहा, “अगस्त से शुरू हुई 120 दिनों की तैनाती के दौरान हमारे सैनिकों ने अभूतपूर्व साहस दिखाया। चाहे अधिकारी हों या सैनिक सभी ने लगभग हर दिन अपनी कल्पना से परे मानसिक और शारीरिक दबावों पर काबू पाते हुए सामूहिक वीरता का परिचय दिया। बारूदी सुरंगे हटाने के काम के दौरान यह लोग अपने शहरों और गांवों को पत्र भी भेजते थे।”

    किम ने आगे कहा, “तीन महीने से भी कम समय में हमारे सैनिकों ने एक बड़े खतरनाक क्षेत्र को रूसी सेना के लिए पूरी तरह से सुरक्षित कर दिया। इसमें हमारे जिन भी सैनिकों की जान गई है। उनकी बहादुरी को हमेशा के लिए अमर बनाने के उद्देश्य से राज्य उनको सम्मान प्रदान करेगा।”

    सरकारी मीडिया की तरफ से जारी की गई फोटोस में किम साफ तौर पर वापस आए सैनिकों को गले लगाते हुए देखे जा सकते हैं। इनमें से कुछ सैनिक घायल और व्हील चेयर पर भी दिखाई दिए।

    इससे पहले, उत्तर कोरिया शुरुआत से ही पुतिन की मदद के लिए कुर्स्क क्षेत्र में सैनिक भेज रहा है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक इस युद्ध में उत्तर कोरिया ने हजारों सैनिक भेजे हैं। इसके बदले में रूस उसकी वित्तीय सहायता, सैन्य तकनीक, खाद्य सामग्री और ऊर्जा आपूर्ति में मदद कर रहा है। इसकी वजह से अपने परमाणु कार्यक्रम के कारण अलग-थलग पड़े इस देश को अपने अभियान चलाने में मदद मिल रही है।

  • तुर्की में बढ़ते सिंकहोल: गेहूं की ज्यादा उपज और घटते भूजल ने खोखली की जमीन

    तुर्की में बढ़ते सिंकहोल: गेहूं की ज्यादा उपज और घटते भूजल ने खोखली की जमीन


    नई दिल्ली / तुर्की का कोन्या मैदान जिसे देश का ‘अन्न भंडार’ कहा जाता है इन दिनों एक गंभीर संकट से जूझ रहा है। यह इलाका गेहूं और अन्य अनाज के उत्पादन में तुर्की का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है लेकिन अत्यधिक फसल उत्पादन और भूजल का अत्यधिक उपयोग जमीन के लिए खतरा बन गया है। तुर्की आपदा प्रबंधन एजेंसी AFAD की नई रिपोर्ट के अनुसार अब तक 684 सिंकहोल की पहचान हुई है। कोन्या तकनीकी विश्वविद्यालय के अनुसार 2017 में यहां केवल 299 सिंकहोल थे जो 2021 तक बढ़कर 2550 हो गए। साल 2025 में करीब 20 नए बड़े गड्ढे बन चुके हैं जिनकी गहराई 30 मीटर और चौड़ाई 100 फीट तक है।

    संकट के मुख्य कारण

    विशेषज्ञों के अनुसार सिंकहोल की समस्या मानवजनित गतिविधियों और प्राकृतिक कारणों का मिश्रण है।भूवैज्ञानिक संरचना: कोन्या मैदान ‘कार्स्ट’ संरचना वाला इलाका है। यह घुलनशील चट्टानों जैसे कार्बोनेट और जिप्सम से बना है। पानी के प्रभाव से ये चट्टानें धीरे-धीरे घुलती हैं और सिंकहोल बनाती हैं। बारिश में कमी: पिछले 15 सालों में क्षेत्र में वर्षा की मात्रा काफी घट गई है। जलवायु परिवर्तन के चलते भूजल पुनर्भरण धीमा हो गया है जिससे जमीन कमजोर हो रही है। ग्राउंड वाटर का अत्यधिक दोहन: चुकंदर मक्का और अन्य पानी-गहन फसलों की सिंचाई के लिए हजारों वैध और अवैध कुएं उपयोग में हैं। कुछ इलाकों में ग्राउंड वाटर स्तर 60 मीटर तक गिर चुका है। इससे जमीन का सहारा कम होता है और अचानक धसाव आता है।

    प्रशासन और बचाव प्रयास

    AFAD ने 1850 क्षेत्रों में संभावित धसाव के संकेत पाए हैं। सरकार अवैध कुओं पर रोक लगा रही है और बेहतर जल प्रबंधन की दिशा में कदम उठा रही है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर ग्राउंड वाटर दोहन और अधिक हुआ तो सिंकहोल की संख्या तेजी से बढ़ सकती है और पड़ोसी क्षेत्र भी प्रभावित हो सकते हैं।

    कृषि और आर्थिक प्रभाव
    कोन्या मैदान तुर्की का प्रमुख अनाज उत्पादन केंद्र है। सिंकहोल के कारण किसानों के हजारों हेक्टेयर खेत बर्बाद हो रहे हैं जिससे अनाज उत्पादन घट सकता है। यह कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।

    सामाजिक और पर्यावरणीय असर

    सिंकहोल न केवल खेती प्रभावित कर रहे हैं बल्कि ग्रामीण आबादी के पलायन को भी बढ़ावा दे रहे हैं। भूजल की कमी जैव विविधता पर भी असर डाल रही है। इससे शहरीकरण और सामाजिक असंतुलन की समस्याएं बढ़ सकती हैं।विशेषज्ञों का निष्कर्ष: यदि वर्तमान स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो तुर्की में सिंकहोल की समस्या और गंभीर होगी। सतत जल प्रबंधन और निगरानी ही इस संकट से बचाव का रास्ता है।

  • पाकिस्तान में 1947 के बाद पहली बार संस्कृत पढ़ाई जाएगीस्कूलों में मिलेगा भगवद गीता का ज्ञान

    पाकिस्तान में 1947 के बाद पहली बार संस्कृत पढ़ाई जाएगीस्कूलों में मिलेगा भगवद गीता का ज्ञान


    नई दिल्ली । पाकिस्तान में 1947 के विभाजन के बाद पहली बार संस्कृत को औपचारिक रूप से शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज ने शास्त्रीय संस्कृत में चार क्रेडिट का कोर्स शुरू किया हैजिसमें महाभारत और भगवद गीता के ज्ञान को छात्रों तक पहुँचाया जाएगा। यह कदम पाकिस्तान में सांस्कृतिक और भाषाई एकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

    LUMS का संस्कृत कोर्स

    लाहौर विश्वविद्यालय ने संस्कृत को लेकर एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की हैजिसमें शास्त्रीय संस्कृत का अध्ययन कराया जाएगा। इस चार क्रेडिट कोर्स की शुरुआत तीन महीने चलने वाली वीकेंड वर्कशॉप से हुई थीजिसे छात्रों और विद्वानों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इस कोर्स के अंतर्गत महाभारत टेलीविजन श्रृंखला की प्रसिद्ध थीम ‘है कथा संग्राम की का उर्दू संस्करण भी पढ़ाया जाएगा।

    यह कोर्स विशेष रूप से उन छात्रों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो संस्कृत के शास्त्रीय ज्ञान और भारतीय साहित्य से जुड़ी गहरी समझ प्राप्त करना चाहते हैं। यह पहल भारतीय साहित्य और संस्कृति को समझने का एक सशक्त मंच प्रदान करती हैजिससे पाकिस्तान में संस्कृत के प्रति जागरूकता और रुचि में वृद्धि होगी।

    पाकिस्तान के समृद्ध संस्कृत संग्रह पर ध्यान

    गुरमानी सेंटर के निदेशक डॉ. अली उस्मान कासमी ने पाकिस्तान के संस्कृत संग्रह की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पंजाब विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में संस्कृत के सबसे समृद्ध लेकिन उपेक्षित संग्रहों में से एक हैजिसे 1930 के दशक में विद्वान जेसीआर वूल्नर ने सूचीबद्ध किया था। हालांकि1947 के बाद से किसी पाकिस्तानी विद्वान ने इस संग्रह से जुड़ी गहरी रिसर्च नहीं की।

    डॉ. कासमी का मानना है कि यदि स्थानीय विद्वानों को प्रशिक्षित किया जाएतो पाकिस्तान में संस्कृत के अध्ययन और शोध को एक नई दिशा मिल सकती है। उनका कहना है कि संस्कृत के माध्यम से पाकिस्तान में महाभारत और भगवद गीता जैसे महत्वपूर्ण भारतीय ग्रंथों का अध्ययन करने से न केवल सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित किया जा सकता हैबल्कि यह क्षेत्रीय इतिहास और साहित्य को भी एक नया आयाम देगा।

    डॉ. शाहिद रशीद का योगदान

    फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहिद रशीद ने इस पहल को संभव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने संस्कृत का अध्ययन करते हुए इस कोर्स को शुरू करने के लिए प्रेरित किया। डॉ. रशीद ने अरबी और फारसी के अध्ययन के बाद संस्कृत सीखी और इस क्षेत्र के प्रसिद्ध विद्वान एंटोनिया रुपेल और मैकमास टेलर के मार्गदर्शन में संस्कृत व्याकरण का अध्ययन किया। डॉ. रशीद का मानना है कि शास्त्रीय भाषाओंविशेष रूप से संस्कृत मेंमानवता के लिए गहन ज्ञान छिपा हुआ हैजो अन्यथा अनुपस्थित रह सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृत केवल एक धर्म विशेष की भाषा नहीं हैबल्कि यह पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर है।

    संस्कृत के माध्यम से सांस्कृतिक एकता

    डॉ. शाहिद रशीद ने संस्कृत के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह भाषा ना सिर्फ भारतीय साहित्य और संस्कृति की पहचान हैबल्कि पाकिस्तान और भारत के बीच सांस्कृतिक पुल बनाने का एक माध्यम भी हो सकती है। उन्होंने आशा जताई कि यदि भारत में हिंदू और सिख अरबी भाषा सीखेंऔर पाकिस्तान में अधिक मुस्लिम संस्कृत सीखेंतो यह दोनों देशों के बीच भाषा के माध्यम से बेहतर समझ और सामंजस्य स्थापित कर सकता है।

    भविष्य की योजना और उम्मीदें

    डॉ. कासमी ने भविष्य की योजनाओं का खुलासा करते हुए कहा कि अगले 10-15 वर्षों में पाकिस्तान में महाभारत और भगवद गीता के विद्वान उभर सकते हैं। यह पहल पाकिस्तान में शास्त्रीय संस्कृत शिक्षा को नया जीवन देगीजिससे सांस्कृतिक अध्ययन और शोध को नई दिशा मिलेगी।
    इस प्रकारपाकिस्तान में संस्कृत को शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करना न केवल एक ऐतिहासिक कदम हैबल्कि यह एक बड़ी सांस्कृतिक और शैक्षिक क्रांति की शुरुआत हो सकती हैजो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और भाषाई संबंधों को प्रगाढ़ बनाएगी।

  • CDS जनरल अनिल चौहान का कड़ा संदेश, कहा- 'खोखले दावों से नहीं जीती जाती जंग', पाकिस्तान पर परोक्ष हमला

    CDS जनरल अनिल चौहान का कड़ा संदेश, कहा- 'खोखले दावों से नहीं जीती जाती जंग', पाकिस्तान पर परोक्ष हमला


    भारत । के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बयान दिया, जिसमें उन्होंने युद्ध जीतने के लिए साफ उद्देश्य, अनुशासन और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका यह बयान पाकिस्तान के खिलाफ परोक्ष रूप से था, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान द्वारा की जा रही जीत के दावों पर प्रतिक्रिया के रूप में।

    जनरल चौहान एयर फोर्स अकादमी, डुंडीगल में दिसंबर 2025 की संयुक्त दीक्षांत परेड के दौरान युवा सैन्य अधिकारियों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, “युद्ध केवल बयानबाज़ी और दिखावे से नहीं जीते जाते, बल्कि तैयारी, सही फैसलों और उनका ज़मीन पर लागू करने से जीते जाते हैं।” यह टिप्पणी पाकिस्तान के झूठे दावों के संदर्भ में थी, जहां ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारी नुकसान के बावजूद पाकिस्तान ने अपनी जीत का दावा किया था।

    सीडीएस ने आगे कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में अस्थिरता इसलिए बढ़ रही है क्योंकि वहां के संस्थान कमजोर हैं और निर्णय जल्दबाजी में लिए जाते हैं। इसके विपरीत, भारत की ताकत उसकी मजबूत संस्थाएं, लोकतांत्रिक व्यवस्था और पेशेवर सोच वाले सशस्त्र बलों में है।

    उन्होंने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा कि अनुशासन और जिम्मेदारी के प्रति समर्पण ही देश की सुरक्षा का मुख्य आधार है। नए अधिकारियों से उन्होंने अपील की कि वे इस मजबूत परंपरा के संरक्षक बनें और हर स्थिति में सतर्क और तैयार रहें।

    जनरल चौहान ने अंत में युवा अधिकारियों से कहा कि वे खुद को उदाहरण के रूप में पेश करें। उनका मानना था कि सतर्कता, तैयारी और पेशेवर रवैया ही किसी भी सैन्य अधिकारी की सफलता की कुंजी है, चाहे वह युद्ध का समय हो या शांति का।

    यह बयान पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश था, और यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की सैन्य शक्ति केवल बातों में नहीं, बल्कि असलियत में उस शक्ति को जमीन पर लागू करने में है।

  • सीजफायर में फिर फेल हुए डोनाल्ड ट्रंप, कंबोडिया ने बताया थाई सेना अभी भी हमलावर, बमबारी जारी

    सीजफायर में फिर फेल हुए डोनाल्ड ट्रंप, कंबोडिया ने बताया थाई सेना अभी भी हमलावर, बमबारी जारी


    नई दिल्‍ली । दुनिया में किन्हीं दो देशों के बीच युद्ध शुरू हो जाए और उसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump)दखल देने की कोशिश न करें ऐसा होना मुश्किल है। इस साल की शुरुआत में ट्रंप के दबाव में सीजफायर(Ceasefire) करने के लिए राजी हुए थाईलैंड (Thailand)और कंबोडिया (Cambodia)एक बार फिर से युद्ध में उलझ गए थे। हालांकि, ट्रंप ने एक बार फिर से सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों देश फिर से सीजफायर करने के लिए राजी हो गए हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद भी थाईलैंड और कंबोडिया के नेताओं ने एक-दूसरे पर बमबारी जारी रखने का आरोप लगाया है।

    इस साल की शुरुआत में हुई भीषण लड़ाई के बाद दोनों ही देश मलेशिया और ट्रंप की मध्यस्थता के बाद सीजफायर पर पहुंचे थे। इसके बाद भी दोनों के बीच में हल्की झड़पें जारी थी। जुलाई में हुए इस सीजफायर में ट्रंप ने दोनों देशों को व्यापारिक विशेषाधिकार समाप्त करने की धमकी दी थी। इसके बाद दोनों ही देश शांति के लिए मान गए थे। ट्रंप ने इस युद्ध को सुलझाने का दावा करते हुए इसे भी अपने नोबेल जीतने की कोशिश में शामिल कर लिया था। लेकिन अभी फिर से इन दोनों देशों के बीच में हालात जरूरत से ज्यादा बिगड़ गए इसके बाद ट्रंप को दोबारा दोनों देशों के नेताओं से बात करनी पड़ी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविरकुल और कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन मानेट के साथ बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर यह घोषणा की। ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ हैंडल पर पोस्ट में कहा, ‘‘दोनों नेता आज शाम से हर तरह की गोलीबारी रोकने और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की सहायता से मेरे साथ हुए मूल शांति समझौते को बहाल करने पर सहमत हो गए हैं। दोनों देश शांति और अमेरिका के साथ निरंतर व्यापार के लिए तैयार हैं।’’

    ट्रंप के इस दावे के बाद कंबोडिया की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया कि थाईलैंड अभी भी उनकी सीमा पर बम बरसा रहा है। कंबोडियाई रक्षा मंत्रायल की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि 13 दिसंबर 2025 को थाई सेना ने दो एफ-16 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर कई ठिकानों पर सात बम गिराए। थाई सेना ट्रंप की घोषणा के बाद भी बमबारी बंद नहीं कर रहा है।