Category: International

  • अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर? सुप्रीम लीडर खामेनेई का बड़ा दांव, लारिजानी को सौंपी अहम जिम्मेदारी

    अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर? सुप्रीम लीडर खामेनेई का बड़ा दांव, लारिजानी को सौंपी अहम जिम्मेदारी


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित टकराव की आशंकाओं के बीच ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यापक अधिकार अपने भरोसेमंद सहयोगी अली लारीजानी को सौंप दिए हैं। इस कदम को संभावित युद्ध परिस्थिति में कमान को केंद्रीकृत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

    लारिजानी के हाथ में सैन्य और कूटनीतिक कमान

    रिपोर्ट के अनुसार लारिजानी अब सुरक्षा सैन्य संचालन और कूटनीतिक पहलुओं से जुड़े अहम फैसले लेने की स्थिति में हैं। वे सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख पद पर रहते हुए परमाणु वार्ताओं क्षेत्रीय सहयोगियों से समन्वय और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि संभावित संघर्ष की स्थिति में तेज और एकीकृत निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए यह बदलाव किया गया है।

    राष्ट्रपति की भूमिका सीमित उत्तराधिकार की तैयारी
    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की भूमिका इस बदलाव के बाद अपेक्षाकृत सीमित बताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व ने आकस्मिक परिस्थितियों यहां तक कि नेतृत्व स्तर पर किसी अप्रत्याशित घटना को ध्यान में रखते हुए उत्तराधिकार की बहुस्तरीय व्यवस्था पर काम शुरू किया है। सेना को हाई अलर्ट पर रखने मिसाइल सिस्टम की रणनीतिक तैनाती और आंतरिक सुरक्षा बलों को तैयार रखने की खबरें भी सामने आई हैं।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी गतिविधियां
    रणनीतिक दृष्टि से अहम  क्षेत्र में ईरान की सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है। मिसाइल परीक्षण और नौसैनिक अभ्यासों की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह जलमार्ग विश्व के बड़े हिस्से के तेल निर्यात का प्रमुख रास्ता है इसलिए यहां की हलचल का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

    क्षेत्रीय समीकरण और वैश्विक नजर

    मध्य पूर्व पहले से ही संवेदनशील भू-राजनीतिक समीकरणों का केंद्र रहा है। ऐसे में तेहरान का यह कदम संकेत देता है कि ईरान संभावित टकराव की आशंका को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि आधिकारिक स्तर पर व्यापक युद्ध की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन सैन्य और सुरक्षा ढांचे में यह पुनर्संरचना बताती है कि देश किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की रणनीति अपना रहा है।

  • वैश्विक टैरिफ बढ़ोतरी के साए में भारत अमेरिका व्यापार वार्ता स्थगित, हालात की समीक्षा के बाद होगा अगला दौर

    वैश्विक टैरिफ बढ़ोतरी के साए में भारत अमेरिका व्यापार वार्ता स्थगित, हालात की समीक्षा के बाद होगा अगला दौर


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर होने वाली अहम बैठक को फिलहाल रीशेड्यूल कर दिया गया है। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार दोनों देशों ने बदलते वैश्विक व्यापारिक हालात और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को ध्यान में रखते हुए आधिकारिक बैठक को टालने का निर्णय लिया है।

    दरअसल दोनों देशों के मुख्य ट्रेड नेगोशिएटर्स की अगुवाई वाली टीमों के बीच तीन दिन की बैठक 23 फरवरी से अमेरिका में प्रस्तावित थी। इस बैठक में अंतरिम व्यापार समझौते के कई अहम बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जाना था। हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ उपायों को अवैध करार दिए जाने के बाद परिस्थितियां तेजी से बदलीं और दोनों पक्षों ने पहले कानूनी और नीतिगत प्रभावों का अध्ययन करने का फैसला किया।

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि भारतीय टीम का प्रस्तावित वॉशिंगटन दौरा फिलहाल टाल दिया गया है। दोनों देश पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके बाद उत्पन्न परिस्थितियों की विस्तार से समीक्षा करेंगे। इसके बाद आपसी सहमति से नई तारीख तय की जाएगी। अधिकारी ने कहा कि निर्णय दोनों पक्षों की सुविधा और रणनीतिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

    गौरतलब है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ उपायों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने 6-3 के फैसले में कहा कि कार्यपालिका ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर आयात शुल्क लगाकर अपने संवैधानिक अधिकार का अतिक्रमण किया। इस फैसले के बाद ट्रंप के कई टैरिफ अमान्य हो गए हालांकि सभी नहीं।

    कोर्ट के इस निर्णय के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया देते हुए पहले लगाए गए 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ को बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा कर दी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैसले को शर्मनाक बताते हुए कहा कि कई देश दशकों से अमेरिका के साथ असंतुलित व्यापार कर रहे हैं और उनके पास वैकल्पिक योजना भी तैयार है।

    इन घटनाक्रमों ने वैश्विक व्यापारिक माहौल को अस्थिर बना दिया है। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम समझौता ऐसे समय में हो रहा था जब दोनों देश आपसी व्यापार को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश में हैं। भारत की ओर से बाजार पहुंच, शुल्क संरचना और निवेश से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता की अपेक्षा है जबकि अमेरिका भी संतुलित व्यापारिक ढांचे पर जोर दे रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और टैरिफ बढ़ोतरी से उत्पन्न अनिश्चितता के बीच दोनों देशों का सावधानीपूर्वक कदम उठाना रणनीतिक रूप से उचित है। पहले कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी उसके बाद ही किसी औपचारिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ना सुरक्षित माना जा रहा है।

    फिलहाल दोनों पक्ष हालात पर नजर बनाए हुए हैं और नई तारीख जल्द तय होने की संभावना जताई जा रही है। यह स्पष्ट है कि वैश्विक टैरिफ नीति और कानूनी पेचीदगियां भारत अमेरिका व्यापार संबंधों की गति और दिशा दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।

  • US: जेपीमॉर्गन ने 6 जनवरी 2021 के बाद बंद कर दिए थे ट्रंप के खाते… कोर्ट में बैंक ने पहली बार स्वीकारा

    US: जेपीमॉर्गन ने 6 जनवरी 2021 के बाद बंद कर दिए थे ट्रंप के खाते… कोर्ट में बैंक ने पहली बार स्वीकारा


    वॉशिंगटन।
    छह जनवरी 2021 को अमेरिकी कैपिटल (American Capitol) पर हुए हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप (President Trump) के बैंक खातों को बंद किए जाने का मामला फिर चर्चा में है। जेपीमॉर्गन चेज (JPMorgan Chase) ने पहली बार अदालत में स्वीकार किया है कि फरवरी 2021 में ट्रंप और उनकी कुछ कंपनियों के खाते बंद किए गए थे। यह स्वीकारोक्ति उस मुकदमे के दौरान सामने आई है जिसमें ट्रंप ने बैंक और उसके प्रमुख जेमी डाइमोन पर 5 अरब डॉलर का दावा ठोका है। ट्रंप का आरोप है कि उनके खाते राजनीतिक कारणों से बंद किए गए, जिससे उनके कारोबार को नुकसान हुआ।

    दायर हलफनामे में बैंक के पूर्व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी डैन विल्कनिंग ने लिखा कि फरवरी 2021 में निजी बैंक और कमर्शियल बैंक से जुड़े कुछ खाते बंद करने की सूचना दी गई थी। अब तक बैंक केवल सामान्य तौर पर खाते बंद करने की नीतियों पर बात करता रहा था, लेकिन यह पहली बार है जब उसने सीधे तौर पर ट्रंप के खातों के बंद होने की पुष्टि की है। बैंक ने पहले कहा था कि यह मुकदमा बेबुनियाद है।


    ट्रंप ने क्या आरोप लगाए

    ट्रंप ने यह मुकदमा पहले फ्लोरिडा की अदालत में दायर किया था, जहां अब उनका मुख्य निवास है। उनका कहना है कि बैंक ने ‘ट्रेड लाइबल’ किया और फ्लोरिडा के अनुचित और भ्रामक व्यापार कानून का उल्लंघन किया। मुकदमे में आरोप है कि जब खाते बंद किए जा रहे थे, तब ट्रंप ने जेमी डाइमोन से व्यक्तिगत रूप से बात की थी और उन्होंने मामले को देखने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    ट्रंप के वकीलों ने आरोप लगाया है कि बैंक ने राष्ट्रपति और उनकी कंपनियों को एक ‘ब्लैकलिस्ट’ में डाल दिया। उनका कहना है कि इस सूची का उपयोग अन्य बैंक भी करते हैं। इससे भविष्य में नए खाते खोलने या सेवाएं लेने में दिक्कत आती है। वकीलों का दावा है कि इससे ट्रंप परिवार और उनके कारोबार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।


    डीबैंकिंग को लेकर फिर बहस तेज

    यह मामला तथाकथित ‘डीबैंकिंग’ की बहस को फिर से तेज कर रहा है। डीबैंकिंग तब होता है जब बैंक किसी ग्राहक के खाते बंद कर देता है या उसे सेवाएं देने से मना कर देता है। पिछले कुछ वर्षों में यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। कई रूढ़िवादी नेताओं का आरोप रहा है कि 6 जनवरी की घटना के बाद ‘जोखिम’ के नाम पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

    जेपीमॉर्गन अब इस केस को न्यूयॉर्क स्थानांतरित कराने की कोशिश कर रहा है, जहां खाते संचालित होते थे। यह ट्रंप का किसी बड़े बैंक के खिलाफ पहला मामला नहीं है। मार्च 2025 में ट्रंप ऑर्गनाइजेशन ने क्रेडिट कार्ड कंपनी कैपिटल वन पर भी इसी तरह का मुकदमा दायर किया था, जो अभी लंबित है।

  • China: स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में छाए ह्यूमनॉइड रोबोट… एक साल में बदली तस्वीर

    China: स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में छाए ह्यूमनॉइड रोबोट… एक साल में बदली तस्वीर


    बीजिंग।
    जो ह्यूमनॉइड रोबोट (Humanoid Robots) एक साल पहले सार्वजनिक प्रदर्शनों में गिरते-पड़ते नजर आते थे और जिनकी तकनीकी क्षमता पर संदेह जताया जाता था, वही अब कुंग फू फ्लिप्स (Kung Fu Flips), जिम्नास्टिक (Gymnastics) और हाई-प्रिसिजन डांस मूव्स (High-precision dance moves) के साथ चीन के स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में छा गए हैं। दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले इस टीवी शो में चीनी स्टार्टअप्स के रोबोट्स ने यह साफ कर दिया कि तकनीक कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है।

    इस प्रदर्शन ने जहां दर्शकों को रोमांचित किया, वहीं अमेरिका-चीन टेक रेस, नौकरियों के भविष्य और एआई आधारित मशीनों की बढ़ती ताकत पर वैश्विक बहस भी तेज कर दी है। हालांकि विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि असली परीक्षा अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल और जटिल मानवीय वातावरण में विश्वसनीय प्रदर्शन की होगी।

    एक रिपोर्ट के अनुसार चीन के स्प्रिंग फेस्टिवल गाला में इस बार कई स्टार्टअप कंपनियों के ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने हिस्सा लिया। इन रोबोट्स ने कुंग फू स्टंट, समन्वित नृत्य और जिम्नास्टिक जैसे जटिल प्रदर्शन किए। यह प्रस्तुति 2025 के गाला से बिल्कुल अलग रही, जब अपेक्षाकृत कम उन्नत रोबोट्स रूमाल घुमाते हुए लोकनृत्य करते नजर आए थे और उनकी चाल अस्थिर दिखी थी। पिछले वर्ष अप्रैल में आयोजित एक रोबोट मैराथन भी सुर्खियों में रहा था, जहां कई रोबोट ठोकर खाते, गिरते या तकनीकी खराबी के कारण रुक जाते देखे गए थे। उस समय इन मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठे थे। लेकिन केवल एक वर्ष में तकनीकी सुधार ने धारणा बदल दी है। इस संबंध में सेमीएनालिसिस के विश्लेषक रेक नूटसेन ने कहा कि अब इन रोबोट्स को हल्के में नहीं लिया जा सकता। उनके अनुसार स्प्रिंग गाला के प्रदर्शन के बाद रोबोट पहले से अधिक संतुलित, लचीले और सक्षम दिखे हैं।


    निर्माण और तैनाती में चीन की शुरुआती बढ़त

    बार्कलेज के आंकड़ों के अनुसार 2025 में दुनिया भर में लगभग 15,000 ह्यूमनॉइड रोबोट इंस्टॉलेशन हुए, जिनमें से 85 प्रतिशत से अधिक चीन में थे, जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग 13 प्रतिशत रही। बार्कलेज की थीमैटिक एफआईसीसी रिसर्च प्रमुख जोर्नित्सा तोदोरोवा के मुताबिक चीन की सबसे बड़ी ताकत उसकी लगभग पूर्णतः वर्टिकली इंटीग्रेटेड रोबोटिक्स वैल्यू चेन है, रेयर अर्थ खनिजों और उच्च- प्रदर्शन मैग्नेट से लेकर भौतिक पुर्जों और बैटरियों तक।

    अमेरिका में टेस्ला का ऑप्टिमस रोबोट प्रमुख ह्यूमनॉइड परियोजनाओं में से एक है। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने जनवरी 2025 की अर्निंग कॉल में कहा, यदि वार्षिक उत्पादन 10 लाख इकाइयों तक पहुंचता है तो उत्पादन लागत 20,000 डॉलर से नीचे लाई जा सकती है, हालांकि अंतिम कीमत बाजार मांग पर निर्भर करेगी।

  • नेपाल में हुई चीन-पाक की Secret Meeting…. भारत के खिलाफ साजिश रोडमैप किया तैयार

    नेपाल में हुई चीन-पाक की Secret Meeting…. भारत के खिलाफ साजिश रोडमैप किया तैयार


    बीजिंग।
    नेपाल (Nepal) की राजधानी काठमांडो के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले रिहायशी इलाके बालुवाटार में 16 फरवरी को पाकिस्तान और चीन के अधिकारियों (Pakistani and Chinese officials) की एक सीक्रेट बैठक (Secret Meeting) आयोजित की गई। इस बैठक में चीन और पाकिस्तान के आला अधिकारी मौजूद थे। खास बात यह रही कि इस बैठक में नेपाल स्थित पाकिस्तान दूतावास में तैनात पाकिस्तानी डिफेंस अटैची कर्नल हफीज उर रहमान भी शामिल हुए।

    इस बैठक में भारत को अस्थिर करने के लिए अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के नाम पर साजिश का एक रोडमैप तैयार किया गया। इसके लिए बाकायदा चीन और पाकिस्तान में नेपाल के स्थानीय पत्रकारों से लेकर समाजसेवियों व दक्षिणी नेपाल के मधेशिया समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोगों को चिन्हित कर टास्क देने की पूरी योजना बनाई गई। केंद्रीय खुफिया एजेंसी को लगातार मिल रहे इनपुट के आधार पर इस बात के पुख्ता प्रमाण मिल चुके हैं कि भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए चीन और पाकिस्तान नेपाल की जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में पाकिस्तान और चीन के सात प्रमुख अधिकारी शामिल थे। तकरीबन पौने दो घंटे चली इस बैठक में चीन की ओर से भारत को अस्थिर करने के लिए अरुणाचल प्रदेश का जिक्र किया गया। बैठक 20 फरवरी को मनाए जाने वाले अरुणाचल प्रदेश के स्थापना दिवस पर माहौल खराब करने के लिए की गई थी। इसके लिए बाकायदा चीन ने 23 स्थानीय लोगों का चयन किया था।


    एक्सचेंज प्रोग्राम की आड़ में भड़काने की योजना

    इस योजना के तहत नेपाल के उन लोगों को चयनित किया गया था जो कि चीन के अलग-अलग हिस्सों में बीते दो वर्षों के दौरान यात्रा करके आए थे। हालांकि यह बात अलग है चीन और पाकिस्तान की बड़ी साजिश जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तवांग को अपना हिस्सा बताने का नैरेटिव सेट करने की थी पूरी तरह फ्लॉप हो गई। इसमें योजना यह बनाई गई थी कि नेपाल के इन 23 लोगों में से कुछ लोगों को भारत भेजा जाएगा। अभी भी इसमें से 14 लोगों को नॉर्थ ईस्ट जाकर पूरी जानकारियां इकट्ठा करने के लिए भेजने की योजना बनाई जा रही है।

    केंद्रीय खुफिया एजेंसी को मिले इनपुट के आधार पर इस बात की भी पुष्टि हुई है कि इस पूरी योजना के पीछे चीन के चेंगदू स्थित पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के पश्चिमी थिएटर कमान के कुछ अधिकारियों की पूरी साजिश थी। दरअसल दिसंबर 2024 से चीन ने नेपाल के ललितपुर और कीर्तिपुर में अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और धरोहरों के साथ अपनी भाषा के प्रचार के लिए दो केंद्र स्थापित किए हैं।


    अब तक हो चुकीं कई बैठकें

    सूत्रों के मुताबिक बीते कुछ समय से चीन और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच में काठमांडू में लगातार कई बैठकें आयोजित की जा चुकी है। इसमें कई बैठकें तो ऐसी भी आयोजित हुई हैं जिसमें दूतावास के कार्यक्रमों के बहाने पकिस्तान की आईएसआई से जुड़े अधिकारी भी नेपाल पहुंचे। पिछले सोमवार को आयोजित हुई इस बैठक में पकिस्तान के डिफेंस अटैची समेत दूतावास के तीन प्रमुख अधिकारी भी शामिल थे।

    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस बैठक में पाकिस्तान के अधिकारियों ने चीनी अधिकारियों के साथ बलूचिस्तान में हो रहे विद्रोह और उसके चलते पाकिस्तान में चीन की ओर से चलाई जाने वाले प्रोजेक्ट की पूरी रिपोर्ट की चर्चा की गई।

  • पाकिस्तान ने फिर अफगानिस्तान में घुसकर की सैन्य कार्रवाई, 7 आतंकी ठिकानों पर दागी मिसाइल

    पाकिस्तान ने फिर अफगानिस्तान में घुसकर की सैन्य कार्रवाई, 7 आतंकी ठिकानों पर दागी मिसाइल


    इस्लामाबाद/काबुल।
    पाकिस्तान (Pakistan) ने एक बार फिर अफगानिस्तान (Afghanistan.) के भीतर घुसकर सैन्य कार्रवाई (Military Action) की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि सीमा पार सात आतंकी कैंप और ठिकानों को निशाना बनाया गया।

    इस्लामाबाद का कहना है कि ये ठिकाने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और इस्लामिक स्टेट-खोरासान (ISKP) से जुड़े लोगों के थे. पाकिस्तान सरकार TTP को ‘फितना अल खवारिज’ कहती है. बयान में कहा गया कि हाल के आत्मघाती हमलों, जिनमें इस्लामाबाद की इमाम बारगाह, बाजौर और बन्नू में धमाके शामिल हैं, के बाद यह जवाबी कार्रवाई की गई. रमजान के महीने में हुए ताजा हमले को भी इसका कारण बताया गया. पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके पास पक्के सबूत हैं कि ये हमले अफगानिस्तान में बैठे नेतृत्व और संचालकों के इशारे पर कराए गए. बयान में कहा गया कि जिम्मेदारी भी अफगानिस्तान में मौजूद टीटीपी और ISKP ने ली थी. पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर चुने हुए ठिकानों पर की गई. इस हमले पर तालिबान ने कहा है कि अब वह सही समय पर जवाब देगा।

    बलूच एक्टिविस्ट मीर यार बलोच ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान की कायर सेना ने एक बार फिर अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया और पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में ड्रोन और हवाई हमले किए. उनके मुताबिक इन हमलों में एक धार्मिक मदरसे को निशाना बनाया गया, जहां मौजूद कुरान की प्रतियां भी नष्ट हो गईं. मीर यार बलोच ने इसे ‘दमनकारी सैन्य कार्रवाई’ करार दिया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्र में अस्थिरता और नफरत को और बढ़ाएगी. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने रमजान से पहले कार्रवाई की धमकी दी थी।


    तालिबान के प्रवक्ता ने क्या कहा?

    अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बीती रात पाकिस्तानी सेना ने अफगान क्षेत्र में घुसकर नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में बमबारी की. उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में महिलाएं और बच्चे भी मारे गए और कई लोग घायल हुए हैं. मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा नाकामियों को छिपाने के लिए अफगान जमीन को निशाना बना रहा है और ऐसे कदम क्षेत्र में हालात और बिगाड़ेंगे।


    एयर स्ट्राइक से पहले दहला पाकिस्तान

    इस हमले से पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में एक आत्मघाती हमला हुआ था. पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR के अनुसार, एक खुफिया अभियान के दौरान सेना के काफिले को निशाना बनाया गया. हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सिपाही की मौत हो गई. सेना ने कहा कि पांच आतंकियों को मार गिराया गया, लेकिन एक विस्फोटक वाहन सेना की गाड़ी से टकरा गया, जिससे भारी नुकसान हुआ. इससे पहले 16 फरवरी को बाजौर में भी एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था. उसमें 11 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई थी. एक बच्ची की भी जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे. पाकिस्तान ने कहा कि हमलावर अफगान तालिबान की विशेष इकाई से जुड़ा था और टीटीपी ने हमले की जिम्मेदारी ली थी।


    पाकिस्तान का क्या है आरोप?

    पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि अफगान तालिबान सरकार अपनी जमीन से टीटीपी को काम करने से रोकने में नाकाम रही है. बयान में कहा गया कि कई बार चेतावनी देने के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए. पाकिस्तान ने दोहा समझौते का हवाला देते हुए कहा कि अफगान अंतरिम सरकार को अपनी जमीन किसी दूसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए।


    पहले भी किया है हमला

    यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने सीमा पार हमला किया हो. पिछले साल भी अफगानिस्तान के खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमलों की खबर आई थी. उस समय काबुल ने पाकिस्तान पर बमबारी का आरोप लगाया था, हालांकि इस्लामाबाद ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी. दोनों देशों के रिश्ते 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद से लगातार बिगड़ते रहे हैं. सीमा पर झड़पें आम हो चुकी हैं।

  • SC के फैसले के खिलाफ ट्रंप के तीखे तेवर… रिफंड की बजाए नए टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 15% किया

    SC के फैसले के खिलाफ ट्रंप के तीखे तेवर… रिफंड की बजाए नए टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 15% किया


    नई दिल्ली/वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक बड़े फैसले के बाद हार मानने के बजाय अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं. कल सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ (Emergency Tariff) को अवैध करार दे दिया था. कोर्ट का कहना था कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है. इस फैसले से उन कंपनियों को बड़ी राहत मिली थी जो अरबों डॉलर का टैक्स भर रही थीं. लेकिन ट्रंप ने तुरंत पलटवार करते हुए नए ग्लोबल टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का फैसला किया है.।

    ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ट्रेड पॉलिसी से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि वह ‘सेक्शन 122’ जैसी दूसरी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे. राष्ट्रपति का यह अड़ियल रवैया बता रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच तनाव और बढ़ेगा. इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल रिफंड को लेकर खड़ा हो गया है. कंपनियां अपने अरबों डॉलर वापस मांग रही हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन लंबी कानूनी लड़ाई की तैयारी में है।


    1. सेक्शन 122 क्या है और ट्रंप इसे हथियार क्यों बना रहे हैं?

    सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रंप ने अब ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 122 का सहारा लिया है. यह कानून राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि वह गंभीर व्यापार घाटे को रोकने के लिए 15% तक का अस्थाई टैरिफ लगा सकते हैं. हालांकि, इसकी एक बड़ी सीमा है कि यह सिर्फ 150 दिनों के लिए ही प्रभावी रह सकता है. इसके बाद राष्ट्रपति को संसद यानी कांग्रेस से मंजूरी लेनी होगी.

    ट्रंप का मानना है कि इससे उन्हें वह ताकत वापस मिल जाएगी जो कोर्ट ने उनसे छीनी है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जजों पर भी निशाना साधा और इसे देश के लिए एक बुरा फैसला बताया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसमें जांच की लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती. वह इसे तुरंत लागू करके अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को बरकरार रखना चाहते हैं।


    2. इलिनोय के गवर्नर ने ट्रंप को 8.7 अरब डॉलर का बिल क्यों थमाया?

    इस पूरे विवाद में अब राजनीति भी गर्मा गई है. इलिनोय के गवर्नर जेबी प्रित्ज़कर ने ट्रंप को एक औपचारिक इनवॉइस यानी बिल भेजा है. इसमें उन्होंने ट्रंप से 8.68 अरब डॉलर के रिफंड की मांग की है. गवर्नर का तर्क है कि ट्रंप के अवैध टैरिफ की वजह से उनके राज्य के हर परिवार को करीब 1700 डॉलर का नुकसान हुआ है. उन्होंने इसे ‘पास्ट ड्यू’ यानी बकाया राशि बताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा।

    हालांकि, कानूनी तौर पर यह मामला इतना सीधा नहीं है. टैरिफ का भुगतान कंपनियां करती हैं, आम जनता नहीं. कंपनियां इस बोझ को ग्राहकों पर डालती हैं जिससे महंगाई बढ़ती है. ऐसे में अगर रिफंड मिलता भी है, तो वह कंपनियों को मिलेगा न कि सीधे आम लोगों को. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वॉलमार्ट या कॉस्टको जैसी कंपनियां ग्राहकों को पुराना पैसा वापस नहीं करेंगी।

    3. क्या रिफंड की जंग अगले 5 सालों तक खिंच सकती है?

    रिफंड के मुद्दे पर ट्रंप ने जो बयान दिया है, उसने बिजनेस जगत की नींद उड़ा दी है. ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि इस पर अगले दो साल या शायद पांच साल तक मुकदमा चलेगा’. इसका मतलब है कि जिन कंपनियों ने पिछले साल अरबों डॉलर का टैक्स दिया है, उन्हें अपना पैसा वापस पाने के लिए कोर्ट के चक्कर काटने होंगे. ट्रंप प्रशासन ने पहले वादा किया था कि अगर कोर्ट का फैसला खिलाफ आया तो पैसा वापस कर दिया जाएगा।

    अब प्रशासन अपने ही वादे से मुकरता दिख रहा है. हजारों कंपनियों ने पहले ही सरकार पर केस कर रखा है. अब इन मामलों की सुनवाई ‘कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ में होगी. छोटे व्यापारियों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, क्योंकि उनके पास लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए फंड नहीं है।


    4. भारत और ग्लोबल मार्केट पर इस फैसले का क्या असर होगा?

    भारत के लिए यह खबर मिली-जुली है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत पर लगे कुछ पुराने टैरिफ अवैध हो गए हैं. लेकिन ट्रंप के नए 10-15% ग्लोबल टैरिफ ने फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है. भारत का वाणिज्य मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर रख रहा है. मंत्रालय ने कहा है कि वह कोर्ट के फैसले और ट्रंप के बयानों का एनालिसिस कर रहा है।


    5. क्या बर्बाद होगा ग्लोबल मार्केट?

    ट्रंप ने हिंट दिया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच वह तेल और अन्य चीजों पर दबाव बनाने के लिए मिलिट्री एक्शन भी ले सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा जाएगी. भारतीय निर्यातकों के लिए आने वाले 150 दिन बहुत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि ट्रंप की नई नीति किसी भी वक्त लागू हो सकती है।

  • NASA का मून मिशन स्थगित, मार्च में होने वाला था लांच, जानिए क्‍या रही वजह?

    NASA का मून मिशन स्थगित, मार्च में होने वाला था लांच, जानिए क्‍या रही वजह?



    नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने बहुप्रतीक्षित मून मिशन को फिलहाल स्थगित कर दिया है। एजेंसी मानवयुक्त फ्लाइबाइ मिशन आर्टेमिस-2 को मार्च में लॉन्च करने की तैयारी में थी, लेकिन ऐन वक्त पर सामने आई तकनीकी समस्या के कारण रॉकेट और यान दोनों को लॉन्च पैड से हटा लिया गया। जानकारी के अनुसार रॉकेट में हीलियम लीक की समस्या पाई गई, जिसके चलते मिशन को टालने का निर्णय लिया गया।

    नासा के प्रमुख जेरेड आइजैकमैन ने शनिवार को बताया कि स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) में हीलियम रिसाव का पता चला है। इस तकनीकी खामी के कारण अब मार्च में मिशन की लॉन्चिंग संभव नहीं होगी। उन्होंने स्वीकार किया कि इस फैसले से पूरी टीम निराश है, क्योंकि मिशन की तैयारी में लंबे समय से कड़ी मेहनत की जा रही थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बड़े और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों में सावधानी सर्वोपरि होती है। 1960 के दशक में भी जब नासा ने ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की थीं, तब कई चुनौतियों और देरी का सामना करना पड़ा था।

    रॉकेट सिस्टम में हीलियम की अहमियत
    किसी भी रॉकेट प्रणाली में हीलियम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह प्रोपेलेंट टैंक में आवश्यक दबाव बनाए रखने और इंजन के संचालन में मदद करता है। हीलियम में आई गड़बड़ी को देखते हुए अब एसएलएस रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान को मरम्मत के लिए व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में ले जाया जाएगा, जहां विस्तृत जांच और सुधार का काम किया जाएगा।

    क्या था मिशन का उद्देश्य
    आर्टेमिस-2 मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री शून्य-गुरुत्वाकर्षण में एक छोटे केबिन में काम करने वाले थे। पृथ्वी की निचली कक्षा में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की तुलना में अधिक रेडिएशन का सामना करना पड़ता, हालांकि इसे सुरक्षित दायरे में माना गया था। मिशन की योजना के अनुसार वापसी के दौरान अंतरिक्ष यात्री वायुमंडल से गुजरते हुए एक चुनौतीपूर्ण रिएंट्री का अनुभव करते और अमेरिका के पश्चिमी तट से दूर प्रशांत महासागर में लैंडिंग करते।

    गौरतलब है कि इसके बाद लक्ष्य चंद्रमा पर इंसानों की स्थायी मौजूदगी सुनिश्चित करना है। आगे चलकर आर्टेमिस-4 और आर्टेमिस-5 मिशनों के जरिए ‘गेटवे’ नामक एक छोटा स्पेस स्टेशन स्थापित किया जाएगा, जो चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करेगा।

    उल्लेखनीय है कि नासा ने आखिरी बार 1960 और 1970 के दशक में अपोलो कार्यक्रम के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा था। अब आर्टेमिस कार्यक्रम के जरिए एजेंसी चंद्रमा पर दीर्घकालिक और स्थायी उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, हालांकि फिलहाल तकनीकी अड़चन ने उसकी रफ्तार पर अस्थायी विराम लगा दिया है।

  • जयशंकर ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला से की मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर हुई चर्चा

    जयशंकर ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला से की मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर हुई चर्चा


    नई दिल्ली/ भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा कि भारत के राजकीय दौरे पर आए राष्ट्रपति लूला से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं उन्होंने बताया कि लूला ने साझा हितों और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए अपनी गाइडेंस और गर्मजोशी भरी भावनाओं का प्रदर्शन किया उन्होंने यह भी कहा कि आज बाद में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक से द्विपक्षीय संबंधों को नई रफ्तार मिलेगी इसके बाद ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और पीएम मोदी से भी मुलाकात की और उसके बाद दोनों नेता द्विपक्षीय बैठक करेंगे विदेश मंत्रालय ने पहले ही बताया था
    कि दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे प्रधानमंत्री आने वाले गणमान्य व्यक्ति के सम्मान में लंच होस्ट करेंगे और आपसी हितों के क्षेत्रीय और ग्लोबल मुद्दों पर विचार करेंगे जिसमें बहुपक्षीय फोरम में सहयोग रिफॉर्म्ड मल्टीलेटरलिज्म ग्लोबल गवर्नेंस और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दे शामिल हैं राष्ट्रपति लूला दूसरे एआई इम्पैक्ट समिट के लिए 18 फरवरी को भारत आए उनके साथ करीब 14 मंत्री और ब्राजील की कंपनियों के टॉप सीईओ का डेलीगेशन भी है जो अपने भारतीय समकक्षों के साथ मीटिंग करेंगे
    यह राष्ट्रपति लूला का भारत का छठा दौरा है वे पहली बार 2004 में रिपब्लिक डे सेलिब्रेशन के गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में भारत आए थे और आखिरी बार सितंबर 2023 में जी20 समिट के लिए भारत आए थे प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लूला अक्सर मिलते रहे हैं प्रधानमंत्री 7 से 8 जुलाई 2025 तक राजकीय दौरे पर ब्रासीलिया में थे और नवंबर 2025 में जी20 के दौरान जोहान्सबर्ग में भी उनकी मुलाकात हुई भारत और ब्राजील के बीच करीबी और रणनीतिक साझेदारी साझा डेमोक्रेटिक मूल्यों लोगों के बीच गहरे रिश्तों और खास सेक्टरों में बढ़ते सहयोग पर आधारित है दोनों देश 2006 से रणनीतिक साझेदार हैं
    ब्राजील एलएसी इलाके में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और व्यापार निवेश रक्षा कृषि स्वास्थ्य फार्मास्यूटिकल्स ऊर्जा जिसमें रिन्यूएबल्स जरूरी मिनरल्स रेयर अर्थ मटीरियल्स साइंस टेक्नोलॉजी और नवाचार शामिल हैं जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का जुड़ाव लगातार गहरा होता जा रहा है
    इसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एआई स्पेस और लोगों के बीच जुड़ाव के क्षेत्र में सहयोग भी शामिल है दोनों देश यूएन रिफॉर्म्स क्लाइमेट चेंज और आतंकवाद से लड़ने जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समान विचार रखते हैं विदेश मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रपति लूला का यह राजकीय दौरा दोनों पक्षों को आपसी फायदे के मुद्दों पर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और द्विपक्षीय क्षेत्रीय और ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर सहयोग को और गहरा करने का अवसर देगा
  • राष्ट्रपति भवन से हैदराबाद हाउस तक भारत ब्राजील रिश्तों को नई ऊंचाई देने की दिशा में निर्णायक वार्ता

    राष्ट्रपति भवन से हैदराबाद हाउस तक भारत ब्राजील रिश्तों को नई ऊंचाई देने की दिशा में निर्णायक वार्ता


    नई दिल्ली का पारा शनिवार को कूटनीतिक गर्मी से चढ़ा रहा जब भारत और ब्राजील के प्रगाढ़ संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डी सिल्वा का राष्ट्रपति भवन के भव्य प्रांगण में पूरे राजकीय सम्मान के साथ स्वागत किया गया। इस औपचारिक समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति लूला का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। राष्ट्रपति भवन में दी गई ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ और पारंपरिक औपचारिकताओं के बीच दोनों देशों के झंडे एक साथ लहराते हुए ग्लोबल साउथ की दो महाशक्तियों की अटूट मित्रता की गवाही दे रहे थे।

    औपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लूला दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस पहुंचे जहाँ दोनों नेताओं के बीच एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता का दौर शुरू हुआ। इस बैठक के केंद्र में व्यापार निवेश रक्षा ऊर्जा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र रहे। विशेष रूप से ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में राष्ट्रपति लूला की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देश केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहते बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य की डिजिटल तकनीकों में भी एक-दूसरे का हाथ थामने को तैयार हैं।

    राष्ट्रपति लूला की यह पांच दिवसीय18-22 फरवरी यात्रा केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं है। उनके साथ ब्राजील के 14 कद्दावर मंत्रियों और शीर्ष कंपनियों के सीईओ का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल भारत आया है। यह दर्शाता है कि ब्राजील भारत के विशाल बाजार और बढ़ती आर्थिक ताकत को कितनी गंभीरता से ले रहा है। द्विपक्षीय वार्ता के अलावा दोनों देशों के बीच व्यापारिक संभावनाओं को तलाशने के लिए एक विशेष ‘बिजनेस फोरम’ का भी आयोजन किया जा रहा है जो आने वाले समय में निवेश के नए द्वार खोलेगा।

    इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी राष्ट्रपति लूला और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा से मुलाकात कर कूटनीतिक जमीन तैयार की। जयशंकर ने भरोसा जताया कि यह यात्रा ‘ग्लोबल गवर्नेंस’ और बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों की साझा आवाज को और बुलंद करेगी। राष्ट्रपति लूला की यह छठी भारत यात्रा न केवल उनके व्यक्तिगत लगाव को दर्शाती है बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि नई वैश्विक व्यवस्था में भारत और ब्राजील की रणनीतिक साझेदारी अब एक अपरिहार्य शक्ति बन चुकी है।