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  • बांग्लादेश मामले पर बोले इमरान मसूद, प्रियंका गांधी को PM बनाइए, फिर देखिए., राहुल गांधी को लेकर भी दी राय

    बांग्लादेश मामले पर बोले इमरान मसूद, प्रियंका गांधी को PM बनाइए, फिर देखिए., राहुल गांधी को लेकर भी दी राय


    नई दिल्‍ली। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के एक व्यक्ति दीपू चंद्र दास की कथित ईश निंदा के आरोप में पीट-पीटकर हत्या के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस पर सियासत भी गर्मा गई है। बीजेपी ने विपक्षी कांग्रेस और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर निशाना साधा यह आरोप लगाते हुए कि वे बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर चुप हैं और केवल गाजा पर ही बोलती हैं। इस पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पलटवार किया।

    क्‍या बोले इमरान मसूद?

    इमरान मसूद ने कहा कि बांग्लादेश में हालात पर सबसे ज्यादा आवाज प्रियंका गांधी ने उठाई है। मसूद ने कहा कि प्रियंका गांधी को प्रधानमंत्री बनाइए फिर देखिए कैसे जवाब देती हैं इंदिरा गांधी की तरह। वह भारत विरोधी गतिविधियों को रोकने में सक्षम होंगी। हालांकि राहुल गांधी की भूमिका पर सवाल किए जाने पर मसूद की टोन बदल गई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भी वही करेंगे जो प्रियंका गांधी करेंगी। ये दोनों एक ही चेहरे की दो आंखें हैं अलग-अलग नहीं देखना चाहिए। राहुल गांधी हमारे नेता हैं और प्रियंका गांधी के भी। कौन क्या भूमिका निभाएगा यह पार्टी तय करेगी। मैं तो सिर्फ एक छोटा सिपाही हूं। इमरान मसूद ने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब वह असम और बंगाल जाते हैं तो केवल चुनाव की बात करते हैं और अपना एजेंडा चलाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बांग्लादेश से हिंदुओं के पलायन और भारत विरोधी गतिविधियों पर चिंता जताई और कहा कि प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के हाथ में कमान आने पर पूरी दुनिया उनकी सक्रियता देखेगी।

    इमरान मसूद ने प्रियंका गांधी और शशि थरूर पर दी सफाई

    इमरान मसूद ने मीडिया से बातचीत में प्रियंका गांधी और शशि थरूर को लेकर सफाई दी। मसूद ने कहा कि उनसे प्रियंका गांधी को लेकर सवाल पूछा गया था और उन्होंने जवाब दिया कि अगर प्रियंका गांधी प्रधानमंत्री बनतीं तो वह इंदिरा गांधी की तरह स्पष्ट और निर्णायक जवाब देतीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रियंका गांधी केवल पीएम मोदी की तरह भाषण नहीं देतीं बल्कि ठोस कार्रवाई करती। इमरान मसूद ने शशि थरूर को लेकर भी कहा। उन्होंने कहा कि शशि थरूर दिशा भ्रमित हो गए हैं और जिस विचारधारा के समर्थन में उन्होंने चुनाव जीता था उसके खिलाफ बात कर रहे हैं। मसूद ने यह भी कहा कि शशि थरूर जिनकी तारीफ कर रहे हैं वह उनके राज्य में भी मौजूद नहीं हैं।
  • अमेरिका ने स्वेच्छा से देश छोड़ने वाले अवैध प्रवासियों को 3,000 डॉलर और मुफ्त हवाई टिकट देने की घोषणा की।

    अमेरिका ने स्वेच्छा से देश छोड़ने वाले अवैध प्रवासियों को 3,000 डॉलर और मुफ्त हवाई टिकट देने की घोषणा की।


    नई दिल्ली।अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग DHS ने अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे प्रवासियों के लिए बड़ा ऐलान किया है। इसमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। विभाग ने सेल्फ-डिपोर्टेशन यानी स्वेच्छा से अपने देश लौटने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 1,000 डॉलर से बढ़ाकर 3,000 डॉलर कर दी है। इसके साथ ही सरकार की ओर से मुफ्त हवाई टिकट भी दिया जाएगा, ताकि प्रवासी बिना किसी खर्च के अपने देश लौट सकें।

    31 दिसंबर तक रजिस्ट्रेशन करने पर मिलेगा लाभ

    DHS के अनुसार, जो प्रवासी 31 दिसंबर तक CBP One ऐप के जरिए सेल्फ-डिपोर्टेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराएंगे, वे इस योजना का पूरा लाभ उठा सकेंगे। ऐसे लोगों को 3,000 डॉलर नकद, सरकार द्वारा प्रायोजित यात्रा और वीजा अवधि से अधिक रुकने पर लगने वाले नागरिक जुर्माने या दंडों से छूट मिलेगी।

    तेज, मुफ्त और आसान प्रक्रिया

    गृह सुरक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया को तेज, मुफ्त और आसान बताया है। इसके लिए केवल CBP One ऐप डाउनलोड कर अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी। यात्रा की पूरी व्यवस्था अमेरिकी सरकार करेगी, जिससे प्रवासियों को किसी तरह की भागदौड़ न करनी पड़े।

    विकल्प नहीं चुना तो सख्त कार्रवाई

    DHS ने साफ चेतावनी दी है कि जो अवैध प्रवासी इस योजना का लाभ नहीं लेंगे, उन्हें गिरफ्तार कर निर्वासित किया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में अमेरिका में प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में चल रहे सख्त आव्रजन अभियान का हिस्सा है।

    निर्वासन खर्च में 70% तक कटौती का दावा

    विभाग का दावा है कि सेल्फ-डिपोर्टेशन से निर्वासन की लागत में करीब 70 प्रतिशत तक कमी आएगी। मई 2025 तक एक अवैध प्रवासी को गिरफ्तार करने, हिरासत में रखने और निर्वासित करने की औसत लागत 17,121 डॉलर आ रही थी।

    सीमित समय का मौका

    गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने इसे सीमित समय का अवसर बताते हुए कहा कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे बचाने के लिए यह प्रोत्साहन बढ़ाया गया है। उन्होंने अवैध प्रवासियों से अपील की कि वे इस मौके का लाभ उठाएं।

    2026 में और सख्ती की तैयारी

    DHS के मुताबिक जनवरी 2025 से अब तक करीब 19 लाख अवैध प्रवासी स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ चुके हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि 2026 में और सख्त आव्रजन अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत नई फंडिंग, अधिकारियों की भर्ती और हिरासत क्षमता बढ़ाने की योजना है।

  • पिता की जमानत, बेटे की बोली, हॉलीवुड के सबसे बड़े सौदे की कहानी

    पिता की जमानत, बेटे की बोली, हॉलीवुड के सबसे बड़े सौदे की कहानी

    वाशिंगटन। हॉलीवुड की मशहूर कंपनी वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने की होड़ में एक नया और दिलचस्प मोड़ आया है। ओरेकल कंपनी के सह-संस्थापक और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल लैरी एलिसन ने इस सौदे के लिए अपनी निजी जमानत देने का फैसला किया है। यह कदम पैरामाउंट स्काइडेंस कंपनी द्वारा वॉर्नर ब्रदर्स को खरीदने की अपनी पेशकश को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

    वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के बोर्ड ने पिछले हफ्ते पैरामाउंट की पेशकश को ठुकराते हुए नेटफ्लिक्स के साथ समझौते का रास्ता चुना था। उनकी एक बड़ी आपत्ति यही थी कि पैरामाउंट के पास सौदे को पूरा करने के लिए पर्याप्त पैसा साबित नहीं है और एलिसन परिवार की तरफ से कोई पूरी निजी गारंटी नहीं है।

    बोर्ड का कहना था कि पैरामाउंट ने शेयरधारकों को गुमराह किया है क्योंकि उसकी पिछली प्रस्तावित इक्विटी प्रतिबद्धता के लिए “एलिसन परिवार की कोई प्रतिबद्धता किसी भी तरह की नहीं है”।

    उन्होंने साफ किया था कि इसका एकमात्र समाधान लैरी एलिसन की निजी जमानत ही हो सकती है। पैरामाउंट ने अब सोमवार को जारी एक सरकारी दस्तावेज में एलिसन की इस ‘अपरिवर्तनीय व्यक्तिगत गारंटी’ की पुष्टि की है ।
    40.4 अरब डॉलर का निजी भरोसा

    लैरी एलिसन ने पैरामाउंट स्काइडेंस की तरफ से की गई पेशकश के लिए 40.4 अरब डॉलर की इक्विटी फाइनेंसिंग की निजी जमानत देने का वादा किया है। उन्होंने यह भी सहमति दी है कि जब तक यह लेन-देन पूरा नहीं हो जाता, वह ‘एलिसन फैमिली ट्रस्ट’ को रद्द नहीं करेंगे और न ही उसकी संपत्तियों को कहीं और ले जाएंगे।

    पैरामाउंट ने यह भी बताया है कि इस ट्रस्ट के पास ओरेकल कंपनी के लगभग 1.16 अरब शेयर हैं, जिससे इसकी वित्तीय ताकत का पता चलता है । लैरी एलिसन की कुल संपत्ति लगभग 243 अरब डॉलर आंकी गई है ।
    दो दिग्गजों की टक्कर: पैरामाउंट बनाम नेटफ्लिक्स

    यह मामला असल में हॉलीवुड की कीमती संपत्तियों को लेकर पैरामाउंट और नेटफ्लिक्स के बीच की जंग है ।
    पैरामाउंट स्काइडेंस की पेशकश

    पैरामाउंट, जिसका नेतृत्व लैरी एलिसन के बेटे डेविड एलिसन कर रहे हैं, वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी की पूरी कंपनी (इसके केबल टीवी नेटवर्क्स सहित) 108.4 अरब डॉलर में खरीदना चाहता है। यह पेशकश प्रति शेयर 30 डॉलर नकद के हिसाब से है, जो नेटफ्लिक्स की पेशकश से ज्यादा है। पैरामाउंट का दावा है कि यह सौदा शेयरधारकों के लिए ज्यादा फायदेमंद है और इससे कंटेंट का उत्पादन बढ़ेगा ।
    नेटफ्लिक्स की पेशकश

    नेटफ्लिक्स लगभग 83 अरब डॉलर में सिर्फ वॉर्नर ब्रदर्स के स्टूडियो और स्ट्रीमिंग बिजनेस (जैसे HBO, HBO Max) को खरीदना चाहता है। वॉर्नर ब्रदर्स के समाचार और खेल चैनलों (जैसे CNN, TNT) को एक अलग कंपनी में बदल दिया जाएगा ।

    बाजार और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
    इस खबर का बाजार पर सकारात्मक असर देखने को मिला। वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के शेयरों में 3.5% से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जबकि पैरामाउंट स्काइडेंस के शेयर 4% से भी ज्यादा चढ़े। दूसरी ओर, नेटफ्लिक्स के शेयरों में 1% से अधिक की गिरावट आई। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि पैरामाउंट अभी भी मुश्किल स्थिति में है।

    पीपी फोरसाइट के विश्लेषक पाओलो पेस्काटोर के अनुसार, यह कदम सही दिशा में उठाया गया है, लेकिन संभव है कि यह पर्याप्त न हो । एसएंडपी ग्लोबल के एक अन्य विश्लेषक सेठ शाफर का कहना है कि शायद ही कोई शेयरधारक सिर्फ लैरी एलिसन की गारंटी न मिलने की वजह से सौदे के खिलाफ वोट दे रहा होगा, यानी और भी मुद्दे हैं।
    आगे की राह: मंजूरी और राजनीति

    यह लड़ाई अब सिर्फ शेयरधारकों तक सीमित नहीं रही। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस मामले में दिलचस्पी दिखा चुके हैं। उन्होंने कहा है कि नेटफ्लिक्स का बाजार में हिस्सा बहुत बड़ा है और वॉर्नर ब्रदर्स के साथ मिलकर यह और बढ़ जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सौदे को विनियामक मंजूरी देने के फैसले में वह “शामिल” होंगे। दोनों में से किसी भी सौदे को अमेरिका और यूरोप में प्रतिस्पर्धा कानून की कड़ी जांच का सामना करना पड़ेगा।
    शेयरधारकों का वोट और सरकारी मंजूरी का इंतजार

    लैरी एलिसन की 40.4 अरब डॉलर की निजी जमानत ने वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने की जंग में पैरामाउंट की पेशकश को एक नया जीवन दिया है। यह कदम सीधे तौर पर वॉर्नर ब्रदर्स के बोर्ड की चिंता का जवाब है। क्या यह बदलाव वॉर्नर ब्रदर्स के बोर्ड और शेयरधारकों को नेटफ्लिक्स के बजाय पैरामाउंट के साथ जाने के लिए राजी कर पाएगा। अगला पड़ाव शेयरधारकों का वोट और सरकारी मंजूरी का इंतजार होगा।

  • रूसी सेना में 200 से अधिक भारतीय नागरिक 26 की युद्ध में मौत विदेश मंत्रालय ने संसद में किया खुलासा

    रूसी सेना में 200 से अधिक भारतीय नागरिक 26 की युद्ध में मौत विदेश मंत्रालय ने संसद में किया खुलासा


    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसमें भारत सरकार ने बताया कि 202 भारतीय नागरिकों को फरवरी 2022 में शुरू हुए इस युद्ध के दौरान रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किया गया था। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को राज्यसभा में सांसदों के सवालों के जवाब में यह आंकड़ा प्रस्तुत किया।विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस समय तक कुल 202 भारतीय नागरिकों ने रूसी सेना में शामिल होने के लिए आवेदन किया और उन्हें भर्ती किया गया। हालांकि भारतीय सरकार ने अपनी कूटनीतिक कार्रवाई के तहत 119 नागरिकों को समय से पहले छुट्टी दिलवाने में सफलता हासिल की है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में सांसदों साकेत गोखले और रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा पूछे गए प्रश्नों के लिखित उत्तर में दी।

    वहीं इस बयान में मंत्रालय ने यह भी बताया कि अब तक इस युद्ध में 26 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है। साथ ही सात भारतीय नागरिकों को रूस की सीमा क्षेत्र में लापता बताया गया है। इसके अलावा 50 भारतीय नागरिकों को रूस की सेना से रिहा कराने की कोशिशें जारी हैं। सरकार ने यह भी कहा कि 10 मृतकों के शवों को वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कहा कि भारतीय सरकार लगातार रूस के अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए हुए है। दोनों देशों के नेताओं और मंत्रियों के स्तर पर इस मामले को लेकर बातचीत जारी है।

    वहीं मंत्रालय ने यह भी बताया कि जिन 18 भारतीयों की मौत या लापता होने की खबरें आई हैं उनके डीएनए नमूने रूस के अधिकारियों के साथ साझा किए गए हैं ताकि शवों की पहचान की जा सके और परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाई जा सके।यह खुलासा उस समय हुआ है जब रूस ने 2022 में युद्ध की शुरुआत के बाद से 128 देशों में भर्ती अभियान तेज कर दिया था। रूस ने अपनी सेना को मजबूत करने के लिए दुनिया भर से सैनिकों की भर्ती शुरू की जिसमें भारतीय नागरिकों का भी शामिल होना बड़ा मुद्दा बना है। यूक्रेन-रूस युद्ध के परिणामस्वरूप अब तक अनुमानित 10 लाख से अधिक लोग मारे गए हैं या घायल हुए हैं।

    रूस के करीब 7 लाख 90 हजार सैनिकों के हताहत होने का अनुमान है जबकि लगभग 85 हजार सैनिक लापता बताए जा रहे हैं। इस युद्ध ने पूरी दुनिया में भारी संकट पैदा कर दिया है और रूस ने लगभग चार वर्षों में यूक्रेन के 12 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है।भारत सरकार ने अपनी कूटनीतिक पहल जारी रखते हुए इस संघर्ष में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रूस के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा है। इसके अलावा सरकार ने नागरिकों को इस युद्ध के बारे में सतर्क रहने और ऐसे संघर्षों में न फंसे रहने की सलाह दी है। भारत सरकार की कोशिशें यह सुनिश्चित करने की हैं कि इस युद्ध में कोई भारतीय नागरिक अनावश्यक रूप से जोखिम में न पड़े और उनके परिवारों को पूरी जानकारी और सहायता समय पर मिल सके। 
  • भारत-न्यूजीलैंड FTA: 20 मिलियन डॉलर निवेश का ऐलान, ट्रंप को लगा झटका

    भारत-न्यूजीलैंड FTA: 20 मिलियन डॉलर निवेश का ऐलान, ट्रंप को लगा झटका


    नई दिल्ली/भारत और न्यूजीलैंड ने नौ महीनों की तेज वार्ता के बाद ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते FTA की घोषणा की है जो दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा। भारत ने वैश्विक व्यापार और कूटनीति के मोर्चे पर एक और बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हाल ही में हुई टेलीफोन वार्ता में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते FTA की ऐतिहासिक और संयुक्त घोषणा की गई। यह समझौता न केवल दोनों देशों के द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा बल्कि वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा।
    9 महीने में पूरा हुआ ऐतिहासिक समझौता
    भारत और न्यूजीलैंड के बीच एफटीए पर बातचीत मार्च 2025 में शुरू हुई थी जब प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन भारत दौरे पर आए थे। मात्र नौ महीनों के भीतर इस समझौते का पूरा होना दोनों देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और रणनीतिक सोच को दर्शाता है। इस तेजी ने वैश्विक व्यापार जगत में भी ध्यान खींचा है।

    पांच साल में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

    दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि एफटीए के लागू होने के बाद अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना किया जाएगा। यह समझौता व्यापार निवेश नवाचार और सप्लाई चेन सहयोग को नई गति देगा। विशेषज्ञों के अनुसार इससे कृषि डेयरी फूड प्रोसेसिंग शिक्षा टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप क्षेत्रों में विशेष अवसर खुलेंगे।

    15 साल में भारत में 20 मिलियन डॉलर का निवेश

    न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में कुल 20 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा। इससे न सिर्फ नए रोजगार पैदा होंगे बल्कि तकनीकी और औद्योगिक सहयोग भी मजबूत होगा। यह निवेश भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती और अर्थव्यवस्था की स्थिरता को भी बढ़ावा देगा।

    भारत का सातवां बड़ा FTA वैश्विक नेटवर्क मजबूत
    न्यूजीलैंड के साथ यह भारत का सातवां प्रमुख FTA है। इससे पहले भारत ने ओमान UAE यूके ऑस्ट्रेलिया मॉरीशस और EFTA देशों के साथ समझौते किए हैं। यह श्रृंखला भारत को तेजी से एक भरोसेमंद वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित करती है।

    ट्रंप की व्यापार नीति को परोक्ष झटका

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब अमेरिका खासकर डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी और टैरिफ-केंद्रित नीति पर जोर दे रहा है भारत का लगातार नए FTA करना वैश्विक व्यापार के लिए वैकल्पिक और खुला मॉडल पेश करता है। भारत-न्यूजीलैंड एफटीए इसी दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

  • जेलेंस्की पड़े नरम,रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप के पीस प्लान पर पुतिन तैयार

    जेलेंस्की पड़े नरम,रूस-यूक्रेन युद्ध: ट्रंप के पीस प्लान पर पुतिन तैयार


    वाशिंगटन। रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से चल रहे युद्ध के बीच अच्छी और बड़ी खबर सामने आई है। रूस की ओर से कहा गया है कि युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शांति वार्ता फ्लोरिडा में ‘रचनात्मक’ तरीके से आगे बढ़ रही है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि संबंधित पक्षों की बातचीत तेजी से प्रगति कर रही है। यह वार्ता ट्रंप प्रशासन द्वारा महीनों से किए जा रहे शांति प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें इस सप्ताह की शुरुआत में बर्लिन में यूक्रेनी और यूरोपीय अधिकारियों के साथ बैठकें भी शामिल हैं।

    रूसी सरकारी समाचार एजेंसी ‘आरआईए नोवोस्ती’ के अनुसार, रूसी दूत किरिल दिमित्रीव ने शनिवार को पत्रकारों से कहा कि चर्चाएं रचनात्मक रूप से आगे बढ़ रही हैं। ये आज भी जारी हैं और कल भी जारी रहेंगी। खबर के मुताबिक, दिमित्रीव ने मियामी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से मुलाकात की।

    वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति ने रविवार को टेलीग्राम पर लिखा कि राजनयिक प्रयास काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और फ्लोरिडा में हमारी टीम अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ काम कर रही है।

    जेलेंस्की के इस बयान से लग रहा है कि अब वे नरम पड़ गए हैं। इससे पहले, शुक्रवार को यूक्रेन के प्रमुख वार्ताकार ने कहा था कि अमेरिका में उनका प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी और यूरोपीय पक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें पूरी कर चुका है।

    ट्रंप ने युद्ध को समाप्त करने के लिए व्यापक राजनयिक प्रयास शुरू किए हैं, लेकिन उनके प्रयासों को रूस और यूक्रेन की ओर से परस्पर विरोधी मांगों का सामना करना पड़ रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह यूक्रेन पर अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे, क्योंकि भारी नुकसान के बावजूद रूसी सेनाएं युद्ध के मैदान में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं। शुक्रवार को पुतिन ने विश्वास जताया था कि यदि यूक्रेन शांति वार्ता में रूस की शर्तों को नहीं मानता, तो क्रेमलिन अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर लेगा।

    दूसरी ओर फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने रविवार को राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत करने की पुतिन की इच्छा का स्वागत किया और कहा कि वह ‘आने वाले दिनों में’ आगे की प्रक्रिया तय करेगा। इससे पहले खबर आई थी कि पुतिन अगर परस्पर राजनीतिक इच्छा हो तो फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। मैक्रों के कार्यालय ने कहा है कि किसी भी बातचीत का उद्देश्य राष्ट्रपति जेलेंस्की और हमारे यूरोपीय भागीदारों के साथ पूरी पारदर्शिता के साथ यूक्रेन और यूरोप के लिए एक ठोस और स्थायी शांति में योगदान देना होगा।

  • आसिम मुनीर ने तालिबान को फिर दी चेतावनी, कहा-पाकिस्तान या TTP में से किसी एक को चुनो

    आसिम मुनीर ने तालिबान को फिर दी चेतावनी, कहा-पाकिस्तान या TTP में से किसी एक को चुनो

    इस्लामाबाद । पाकिस्तानी सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर से तालिबान को चेतावनी दी है। मुनीर ने तालिबान सरकार से टीटीपी या फिर पाकिस्तान में से एक को चुनने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि सीमा पार से पाकिस्तान में घुसपैठ करने वाले ज्यादातर आतंकियों में अफगान नागरिक शामिल हैं। हाल ही में इस्लामाबाद में नेशनल उलेमा कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, मुनीर ने पाकिस्तान और 1,400 साल पहले पैगंबर द्वारा अरब क्षेत्र (आज के सऊदी अरब) में स्थापित राज्य के बीच समानताएं भी बताईं।

    हालांकि 10 दिसंबर को दिए गए भाषण का आधिकारिक विवरण सीमित था, लेकिन उनके भाषण के चुनिंदा क्लिप रविवार को स्थानीय टेलीविजन पर प्रसारित किए गए। मुनीर ने अफगान तालिबान सरकार से पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) में से किसी एक को चुनने के लिए कहा, और कहा कि सीमा पार से होने वाले आतंकवाद का बड़ा हिस्सा अफगान नागरिकों का है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में आने वाले टीटीपी के गुटों में 70 प्रतिशत अफगान हैं। क्या अफगानिस्तान हमारे पाकिस्तानी बच्चों का खून नहीं बहा रहा है?” उन्होंने अपनी बात दोहराई कि अफगान तालिबान को पाकिस्तान और TTP में से किसी एक को चुनना चाहिए।

    मुनीर ने आगे कहा कि एक इस्लामी देश में सरकार के अलावा कोई भी जिहाद का आदेश नहीं दे सकता। उन्होंने कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “अधिकार प्राप्त लोगों के आदेश, अनुमति और इच्छा के बिना कोई भी जिहाद का फतवा जारी नहीं कर सकता।” उनकी स्पीच में इस्लामिक बातों का जिक्र था, और उन्होंने अपने भाषण के दौरान कुरान की कई आयतें भी पढ़ीं।

  • रूस की सेना में 200 से ज्यादा भारतीय, यूक्रेन युद्ध में ले रहे भाग…अब तक 26 की मौत

    रूस की सेना में 200 से ज्यादा भारतीय, यूक्रेन युद्ध में ले रहे भाग…अब तक 26 की मौत


    मास्को।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia-Ukraine war) में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भारत सरकार (Government of India) ने संसद में खुलासा किया है कि अब तक 200 से अधिक भारतीय नागरिक (Indian citizen) रूसी सेना (Russian Army) में भर्ती होकर इस युद्ध में लड़ रहे हैं। यह आंकड़ा विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में सांसदों के सवालों के जवाब में दिया। भारत के विदेश मंत्रालय ने यह आंकड़ा शुक्रवार को राज्यसभा में सांसदों साकेत गोखले और रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा पूछे गए प्रश्नों के लिखित उत्तर में दिया।

    ‘रूसी सेना में भारतीय नागरिकों की रिहाई’ शीर्षक वाले बयान में मंत्रालय ने कहा कि फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से 202 भारतीय नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती होने की जानकारी है। हालांकि, सरकार के कूटनीतिक प्रयासों से इनमें से 119 की समय से पहले छुट्टी कराई जा चुकी है। वहीं, मृतकों की संख्या के बारे में बयान में कहा गया है कि युद्ध में 26 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है और 7 को रूसी सीमा क्षेत्र में लापता बताया जा रहा है।

    मंत्रालय ने आगे बताया कि 50 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना से रिहा कराने के प्रयास जारी हैं, साथ ही 10 मृतकों के शव वापस लाने की कोशिश भी की जा रही है। इस दौरान विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण और शीघ्र रिहाई के लिए भारत सरकार रूसी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में है। इस मामले पर दोनों देशों के नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों के बीच विभिन्न स्तरों पर चर्चा हो रही है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि मृत या लापता बताए गए 18 भारतीयों के डीएनए नमूने रूसी अधिकारियों के साथ साझा किए गए हैं।

    बता दें कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के युद्ध को आगे बढ़ाने के लिए 128 देशों में भर्ती अभियान तेज कर दिया है। अनुमान के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक 10 लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं या घायल हुए हैं। वहीं, रूस के करीब 7 लाख 90 हजार सैनिकों के हताहत होने का अनुमान है, जबकि लगभग 85 हजार सैनिक लापता बताए जाते हैं। करीब चार वर्षों में रूस यूक्रेन के 12 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर चुका है।

  • सऊदी अरब में शराब प्रतिबंध के नियमों में बदलाव, वाइन शॉप्स पर लगी लम्बी कतारें

    सऊदी अरब में शराब प्रतिबंध के नियमों में बदलाव, वाइन शॉप्स पर लगी लम्बी कतारें


    दुबई।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने चुपचाप एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। दरअसल, दशकों से लागू सख्त शराब प्रतिबंध (Alcohol Ban) के बीच बड़ा बदलाव किया गया है। सऊदी सरकार (Saudi Government) ने अपने एकमात्र शराब बेचने वाले स्टोर तक अमीरों की पहुंच बढ़ा दी है। इस बदलाव के बाद गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिक, जिनके पास प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट है, अब इस स्टोर से शराब खरीद सकते हैं। इस फैसले की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन खबर फैल चुकी है और सऊदी राजधानी रियाद के डिप्लोमैटिक क्वार्टर में स्थित बिना किसी पहचान वाले स्टोर के बाहर कारों और लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।


    शराब की दुकान कहां है?

    रिपोर्टों के अनुसार, यह शराब की दुकान रियाद के डिप्लोमैटिक क्वार्टर में स्थित है। यह दुकान बाहर से पूरी तरह सामान्य दिखती है और इस पर कोई नाम या पहचान नहीं है। बताया जाता है कि यह स्टोर जनवरी 2024 में खोला गया था, जहां पहले केवल गैर-मुस्लिम राजनयिकों को ही शराब खरीदने की अनुमति थी। लेकिन अब प्रीमियम रेजिडेंसी वाले गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिक भी यहां से शराब खरीद सकते हैं।


    प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट क्या है?

    प्रीमियम रेजिडेंसी परमिट सऊदी अरब की एक खास नीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह निवेशकों, उद्यमियों और विशेष कौशल वाले लोगों को आकर्षित करना चाहता है। इस परमिट के लिए मुख्य शर्त उच्च आय और बड़ा निवेश है। इसके तहत विदेशी लोग बिना किसी सऊदी स्पॉन्सर के संपत्ति खरीद सकते हैं, बिजनेस शुरू कर सकते हैं और अपना परिवार भी साथ रख सकते हैं।


    शराब की कीमतें कितनी हैं?

    एसोसिएटेड प्रेस और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, स्टोर से बाहर निकलने वाले ग्राहकों ने बताया कि कीमतें काफी ज्यादा हैं। राजनयिकों को उनकी खरीदारी पर टैक्स में छूट मिलती है, लेकिन प्रीमियम रेजिडेंसी धारकों को नहीं। ग्राहकों ने स्टोर को अच्छी तरह से स्टॉक किया हुआ बताया, हालांकि कुछ ने कहा कि बीयर और वाइन का चयन अभी सीमित है।


    पहले लोग शराब कहां से पीते थे?

    सऊदी अरब में शराब पर सख्त प्रतिबंध होने के कारण यहां रहने वाले लोग अक्सर पड़ोसी देश बहरीन जाते थे, जहां मुसलमानों और गैर-मुसलमानों दोनों के लिए शराब कानूनी है। सप्ताह के अंत और छुट्टियों में सऊदी अरब और खाड़ी देशों से बड़ी संख्या में लोग बहरीन जाते हैं, जिससे यह एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है। इसके अलावा, कुछ लोग तस्करी वाली शराब का भी सहारा लेते हैं, जो बेहद महंगी होती है।


    सऊदी अरब ऐसा क्यों कर रहा है?

    यह बदलाव सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और किंग सलमान के नेतृत्व में पिछले कुछ सालों से हो रहे बड़े सामाजिक और आर्थिक सुधारों का हिस्सा है। यहां सिनेमा हॉल खोले गए हैं, महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति दी गई है और बड़े म्यूजिक फेस्टिवल आयोजित किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि ये फैसले पर्यटन बढ़ाने, विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने और तेल पर निर्भरता कम करने के लिए किए जा रहे हैं। यह बदलाव विजन 2030 के तहत देश को ज्यादा आधुनिक और वैश्विक बनाने की दिशा में एक कदम है।

  • Bangladesh: दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार

    Bangladesh: दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में 10 आरोपी गिरफ्तार


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) के मयमनसिंह के भालुका इलाके में ईशनिंदा (Blasphemy) के आरोप में 25 वर्षीय फैक्ट्री कर्मचारी दीपू चंद्र दास (Factory worker Deepu Chandra Das) की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में अधिकारियों ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रशासन ने यह कार्रवाई हत्या के दो दिन बाद की है। इस घटना में भीड़ ने दीपू की हत्या कर उसके शव को एक मुख्य मार्ग पर पेड़ से लटकाकर आग लगा दी थी और घटना का लाइव प्रसारण भी किया था।

    मयमनसिंह रैपिड एक्शन बटालियन (रैब) के कार्यालय ने शनिवार को बताया कि गिरफ्तार किए गए 10 लोगों में से सात को उसने और तीन अन्य को पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर पकड़ा है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लिमोन सरकार (19), तारेक हुसैन (19), माणिक मियां (20), इरशाद अली (39), निझुम उद्दीन (20), आलमगीर हुसैन (38), मिराज हुसैन (46), अजमल सगीर (26), शाहीन मियां (19) और नजमुल (21) के रूप में हुई है।

    रैब के अपर पुलिस अधीक्षक शम्सुज्जामन ने बताया कि गिरफ्तार व्यक्तियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस को सौंप दिया जाएगा। रैब का दावा है कि फैक्ट्री के एक फ्लोर मैनेजर आलमगीर हुसैन ने दीपू चंद्र दास को नौकरी से इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने के बाद उसे आक्रोशित भीड़ के हवाले कर दिया था। रैब निदेशक नैमुल हसन ने बताया कि इस मामले में फ्लोर मैनेजर और उसी फैक्ट्री के क्वालिटी मैनेजर मिराज हुसैन आकन को भी गिरफ्तार किया गया है। जांचकर्ता इस बात का जवाब खोजने का प्रयास कर रहे हैं कि पुलिस को बुलाने के बजाय युवक को भीड़ के हवाले क्यों किया गया। उन्होंने संदेह जताया कि इसके पीछे पुरानी रंजिश या भीड़ का दबाव उद्देश्य हो सकता है।

    इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तीखी प्रतिक्रिया हुई है। लेखिका तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि एक मुस्लिम सहकर्मी ने मामूली बात पर दीपू को सजा देने के लिए उस पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया था। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने इसे 21वीं सदी को शर्मसार करने वाली बर्बरता और मानवता की हार बताया। उन्होंने बंगलादेश नेतृत्व से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर ध्यान देने का आग्रह किया। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी घटना पर गहरी चिंता जताते हुए सरकार से बंगलादेशी अधिकारियों के समक्ष अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाने का आग्रह किया है।