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  • सऊदी में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला, यूएस एंबेसी ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी

    सऊदी में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला, यूएस एंबेसी ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी


    नई दिल्ली ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के चौथे दिन सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया गया। Ministry of Defense Saudi Arabia ने मंगलवार सुबह बताया कि दूतावास परिसर पर दो ड्रोन से हमला हुआ, जिससे आग लग गई और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। राहत की बात यह रही कि घटना के समय इमारत खाली थी, इसलिए किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

    ट्रंप की चेतावनी
    हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने तेहरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा,
    “तुम्हें जल्द ही पता चल जाएगा कि जवाबी कार्रवाई क्या होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली सैन्य ठिकानों पर हमलों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

    एंबेसी की ‘शेल्टर-इन-प्लेस’ एडवाइजरी
    हमले के तुरंत बाद अमेरिकी दूतावास ने एक्स (पूर्व ट्विटर) के जरिए रियाद, जेद्दा और धाहरान में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए ‘शेल्टर-इन-प्लेस’ एडवाइजरी जारी की।

    एडवाइजरी में कहा गया:

    गैर-जरूरी यात्रा से बचें, खासकर सैन्य ठिकानों के आसपास।

    नवीनतम सुरक्षा अलर्ट पर नजर रखें।

    व्यक्तिगत सुरक्षा योजना (Personal Safety Plan) तैयार रखें।

    किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित स्थान पर शरण लें।

    दूतावास ने कहा कि क्षेत्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं और अचानक संकट की स्थिति बन सकती है।

    वीडियो वायरल, एयरपोर्ट संचालन जारी
    सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दूतावास परिसर से धुएं का गुबार उठता दिख रहा है, जबकि फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर आग बुझाती नजर आ रही हैं। हालांकि रियाद का King Khalid International Airport फिलहाल चालू है, लेकिन खाड़ी देशों के कुछ हिस्सों में एयरस्पेस बंद होने और क्षेत्रीय हमलों के कारण सैकड़ों उड़ानें प्रभावित हुई हैं।

    क्षेत्र में बढ़ता तनाव
    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल की एयरस्ट्राइक के बाद जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है। ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत के बाद क्षेत्रीय हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं। सऊदी अधिकारियों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि ड्रोन को रोका गया था या वे राजधानी की एयर डिफेंस को भेदकर दूतावास तक पहुंचे।

    स्थिति पर नजर
    मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस टकराव के बीच कूटनीतिक मिशनों की सुरक्षा, हवाई यातायात और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिकी मिशन ने संकेत दिया है कि हालात के अनुसार आगे और सुरक्षा कदम उठाए जा सकते हैं।

  • अमेरिका-ईरान में जुबानी जंग तेज, अराघची ने मार्को रुबियो पर साधा निशाना

    अमेरिका-ईरान में जुबानी जंग तेज, अराघची ने मार्को रुबियो पर साधा निशाना


    नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच मंगलवार को जुबानी जंग तेज हो गई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ईरान से कभी कोई खतरा था ही नहीं” और अमेरिकी कार्रवाई महज एक बहाना थी। अराघची ने दोनों देशों के नागरिकों के खून-खराबे के लिए सीधे तौर पर इजरायल को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अमेरिका ने इजरायल की ओर से अपनी मर्जी से युद्ध लड़ा है।

    क्या कहा था रुबियो ने?
    सोमवार को मीडिया से बातचीत में मार्को रुबियो ने कहा था कि अमेरिका ने ईरान पर हमला तब किया जब उसे जानकारी मिली कि उसका सहयोगी इजरायल सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

    रुबियो के मुताबिक, वॉशिंगटन को आशंका थी कि इजरायल की कार्रवाई के बाद तेहरान क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सेना के खिलाफ जवाबी हमला कर सकता है। उन्होंने कहा,
    “हमें पता था कि इजरायल कार्रवाई करने वाला है। यदि हम पहले कदम नहीं उठाते, तो हमें ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता था। रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन का मानना था कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई आवश्यक थी, भले ही इसका घोषित उद्देश्य ईरानी शासन का अंत नहीं था।

    अराघची का तीखा जवाब
    रुबियो के बयान के बाद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा,
    “मिस्टर रुबियो ने वह माना जो हम सब जानते थे। अमेरिका ने इजरायल की तरफ से अपनी मर्जी से जंग लड़ी है। ईरान से कभी कोई खतरा था ही नहीं।”

    उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी और ईरानी दोनों नागरिकों का खून बहा है, जिसकी जिम्मेदारी इजरायल पर है। अराघची ने लिखा,
    “अमेरिकी लोग इससे बेहतर के हकदार हैं।”

    ईरान का यह बयान साफ संकेत देता है कि तेहरान अमेरिकी कार्रवाई को आत्मरक्षा नहीं, बल्कि पूर्व-नियोजित आक्रामक कदम मान रहा है।

    तेहरान हमले पर नया खुलासा
    इससे पहले अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने कहा था कि शनिवार को तेहरान में हुआ हमला इजरायल द्वारा किया गया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, खुफिया जानकारी से संकेत मिला था कि खामेनेई उस समय एक अहम बैठक में मौजूद थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है।

    बढ़ता कूटनीतिक टकराव
    रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका “खामेनेई प्रतिष्ठान के अंत” को देखना पसंद करेगा, लेकिन मौजूदा सैन्य अभियान का घोषित लक्ष्य शासन परिवर्तन नहीं है। दूसरी ओर, ईरान इस पूरी कार्रवाई को क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बता रहा है और अमेरिका-इजरायल पर संयुक्त साजिश का आरोप लगा रहा है।

    मानना है कि दोनों देशों के बीच बयानबाजी का यह दौर आगे और तीखा हो सकता है। पश्चिम एशिया पहले ही अस्थिर हालात से गुजर रहा है, ऐसे में कूटनीतिक संवाद के बजाय आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।

  • अमेरिका ने ईरान के दो महत्वपूर्ण नेवल बेस को किया तबाह, युद्ध का चौथा दिन, जानें 10 बड़ी बातें

    अमेरिका ने ईरान के दो महत्वपूर्ण नेवल बेस को किया तबाह, युद्ध का चौथा दिन, जानें 10 बड़ी बातें


    तेहरान। अमेरिका ने ईरानी नेवी के दो सबसे महत्वपूर्ण नेवल बेस बंदर अब्बास नेवल बेस और कोनार्क नेवल बेस-पर भीषण हमले किए हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इन दोनों नेवल बेस को लेकर कई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में बंदर अब्बास नेवल बेस पर तैनात IRINS मकरान सी बेस-टाइप जहाज पर आग लगी हुई दिख रही है। बंदर अब्बास ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करने के उद्देश्य से बनाया गया नौसेना बेस होने के साथ-साथ ईरानी नौसेना का मुख्य हेडक्वार्टर भी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान की नौसेना फोर्स को खत्म करना अमेरिकी अधिकारियों का मुख्य मकसद है। अमेरिका ने अब तक 10 ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाने की बात भी कही है।

    बंदर अब्बास नेवल बेस की तबाही
    प्लैनेट लैब्स की तरफ से जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों में रात को ली गई बंदर अब्बास नेवल बेस की स्थिति का पता चलता है। तस्वीरों में ईरानी नेवी का मुख्य हेडक्वार्टर और इसके कई सबसे काबिल जहाज और सबमरीन तैनात दिख रहे हैं। तस्वीरों में नेवल बेस के ज्यादातर हिस्सों में घना काला धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। फैसेलिटी के कई हिस्सों पर हमले का असर साफ देखा जा सकता है। तस्वीरों के आकलन से यह भी पता चलता है कि फ्लोटिंग डॉक को गंभीर नुकसान पहुंचा है, पेट्रोल बोट डैमेज हो चुके हैं और कई बिल्डिंग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं।

    तस्वीरों से स्पष्ट है कि IRINS मकरान जहाज पर हमला किया गया है। इसे नौसेना अड्डे के दक्षिणी छोर पर एक बर्थ पर डॉक किया गया था। यह जहाज मूल रूप से एक ऑयल टैंकर था जिसे ईरानी अधिकारियों ने “फॉरवर्ड बेस शिप” में बदल दिया था। इसके आगे का हिस्सा बड़ा खुला फ्लाइट डेक और कई अन्य खूबियों से लैस था। मकरान जहाज ने 2021 में कमीशन होने के बाद कई बार विदेश यात्राएं की हैं और यह उन कई समुद्री बेस जैसे जहाजों में से एक है जिन्हें ईरान ने हाल के सालों में सेवा में लगाया। 2 मार्च की तस्वीरों की तुलना पहले की तस्वीरों से करने पर लगता है कि एक या दो फ्रिगेट साइज के वॉरशिप पर भी हमला हुआ है। ये साफ तौर पर पोर्ट पर सबसे कीमती टारगेट में से एक थे। पोर्ट में जो एक किलो क्लास पनडुब्बी और छोटी पनडुब्बी हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। कुछ अन्य सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरानी नौसना के कई और मुख्य युद्धपोत शायद तबाह हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा है। बंदर अब्बास पोर्ट ईरान के होर्मोज़्गन प्रांत की राजधानी बंदर अब्बास में स्थित है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य इसके बिल्कुल पास है।

    कोनार्क पोर्ट पर भी अमेरिकी हमले
    बंदर अब्बास की तस्वीर में धुएं की वजह से यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि पोर्ट में कितने जहाजों को नुकसान हुआ। 2 मार्च की तस्वीर की तुलना 26 फरवरी की तस्वीर से करने पर साफ पता चलता है कि कई छोटी नावें और कुछ बड़े जहाज पोर्ट से बाहर कर दिए गए। संभव है कि कुछ जहाज डूब गए हों, लेकिन इसके कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। फिर भी ईरानी नौसेना के कई जहाज अभी भी बचे हैं और ड्राईडॉक में कई जंगी जहाज दिखाई दे रहे हैं।

    बंदर अब्बास के बाहर भी ईरानी नौसेना के एसेट्स पर हमला हुआ। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिरे के पास कोनार्क में पोर्ट पर हमले हुए। कई जंगी जहाज नष्ट हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा। शुरुआती अनुमान में यह अलवंद क्लास का फ्रिगेट बताया गया, लेकिन बाद में यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे मौज क्लास के वॉरशिप के रूप में पहचाना, जिसे कभी-कभी जमरान क्लास भी कहा जाता है। कोनार्क पोर्ट ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और चाबहार बंदरगाह के ठीक बगल, ओमान की खाड़ी के पास स्थित है।

    युद्ध के चौथे दिन की 10 बड़ी बातें
    1. 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई।
    2. अमेरिका ने हमले को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और इजरायल ने ‘ऑपरेशन रोअर ऑफ द लॉयन’ नाम दिया।
    3. ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का दावा किया, जिससे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ।
    4. पेंटागन ने 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 18 घायल होने की पुष्टि की, जबकि इजरायल में अब तक 12 लोगों की मौत हुई।
    5. खामेनेई की मौत के बाद ईरान में सरकार चलाने के लिए अंतरिम शासी परिषद का गठन किया गया।
    6. ईरान ने खाड़ी के कई देशों जैसे सऊदी अरब, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत पर हमले किए।
    7. अमेरिका के बी-2 बॉम्बर्स ने ईरान के अंडरग्राउंड परमाणु केंद्रों और मिसाइल भंडारण सुविधाओं पर हमला किया।
    8. ईरान के रेड क्रेसेंट के अनुसार मरने वालों की संख्या 600 से अधिक पहुंच गई, जिनमें सैनिक और आम नागरिक शामिल हैं।
    9. अमेरिका ने खाड़ी देशों में स्थित प्रमुख दूतावासों जैसे इराक, जॉर्डन और कुवैत से अपने अधिकारियों को तुरंत निकालने का आदेश दिया।
    10. डोनाल्ड ट्रंप और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि युद्ध 4-5 हफ्ते या उससे अधिक समय तक चल सकता है, और उन्होंने ईरान में सैनिकों को उतारने की संभावना से इनकार नहीं किया।

  • US के लिए लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है ईरान युद्ध… अमेरिकी रणनीतिकार नहीं लगा पाए अंदाजा

    US के लिए लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है ईरान युद्ध… अमेरिकी रणनीतिकार नहीं लगा पाए अंदाजा


    तेहरान।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में छिड़ा संघर्ष अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जिसकी कल्पना शायद अमेरिकी युद्ध नीतिकारों (American War Policymakers) ने नहीं की थी। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury) के जरिये खामनेई के खात्मे के बाद यह युद्ध अमेरिका के लिए किसी त्वरित जीत के बजाय एक लंबी और महंगी चुनौती साबित हो सकता है। ईरान की रणनीति अमेरिका को लंबे और थका देने वाले युद्ध की ओर धकेलने की दिख रही है। अमेरिकी अड्डों पर हुए मिसाइल हमलों और कुवैत में कई लड़ाकू विमान गिराए जाने की सूचनाओं ने वाशिंगटन की वॉर गेमिंग पर सवाल खड़े किए हैं। अमेरिका सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों और व्यापारिक केंद्रों की सुरक्षा ढाल बनने में नाकाम रहा है। यह अमेरिकी योजना के बिल्कुल विपरीत है।


    ईरान की रणनीति

    ईरान की रणनीति वॉर ऑफ एट्रिशन यानी लंबे और थकाऊ युद्ध की है। अमेरिका और इस्राइल की बेहतर एयरपावर से बचाव के लिए उसने अपने अहम हथियार भूमिगत बंकरों में सुरक्षित कर लिए हैं। उसका इरादा ड्रोन एवं मिसाइलों से अमेरिका के प्रतिष्ठित ठिकानों पर निशाना साधने का है। इससे दुश्मन के अजेय होने की छवि को नुकसान पहुंचेगा और घरेलू मोर्चे पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ेगा।

    जमीनी हमला: विशेषज्ञों की राय में ईरान की कोशिश दुश्मन को जमीनी आक्रमण के लिए उकसाने की दिख रही है। युद्ध जमीन पर आने पर ईरान की बड़ी सेना व दुर्गम भौगोलिक परिस्थितयां अमेरिका व इस्राइल के लिए इसे अफगानिस्तान या वियतनाम जैसा अंतहीन युद्ध भी बना सकते हैं।

    अराघची का बयान: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि शीर्ष कमांडरों को खोने के बाद उन्हें फौरन रिप्लेस कर लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि इस युद्ध में दूसरे पक्ष के लिए कोई विजय नहीं है। विकेंद्रीकृत कमान के कारण ईरान का मिसाइल नेटवर्क नेतृत्व की कमी के बावजूद सक्रिय है।

    इस्राइल पर प्रभाव: छोटा देश होने के नाते इस्राइल की अर्थव्यवस्था तेज और निर्णायक युद्ध के लिए बनी है, लंबे युद्ध के लिए नहीं। लाखों नागरिक (रिजर्विस्ट) दफ्तर छोड़कर मोर्चे पर तैनात हैं, जिससे हाई-टेक और उत्पादन क्षेत्र प्रभावित रहेगा। ईरान युद्ध को लंबा खींचने में कामयाब रहा तो इस्राइल की अर्थव्यवस्था पतली हो सकती है, इसलिए इस्राइल युद्ध को जल्द खत्म करने के लिए आक्रामक रुख अपनाता है।


    विशेषज्ञ की राय

    रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल जीडी बख्शी ने कहा कि ट्रंप ने बहुत बड़ी गलती की है। पहली ही स्ट्राइक में ईरान का शीर्ष नेतृत्व साफ कर दिया। अब इस युद्ध पर नियंत्रण नहीं रह गया है। इससे वैश्विक मंदी आ सकती है, जिससे अमेरिका भी अछूता नहीं रहेगा। ईरान ने इनका युद्धपोत हिट किया तो 250 सैनिक मारे जाएंगे। अब यह अपना एयरक्राफ्ट कैरियर लिंकन छुपाते फिर रहे हैं। ट्रंप बुरी तरह फंसने वाले हैं। उनके खिलाफ महाभियोग भी चलाया जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा।

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज गुजरे तो लगा देंगे आग… ईरान ने जल मार्ग बंद कर जारी की चेतावनी

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज गुजरे तो लगा देंगे आग… ईरान ने जल मार्ग बंद कर जारी की चेतावनी


    तेहरान।
    अमेरिका और ईरान युद्ध (America and Iran War) अपने चरम पर है। अब खबर है कि ईरान ने अहम जल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) या होर्मुज जल डमरू मध्य बंद कर दिया है। इतना ही नहीं, चेतावनी भी जारी की गई है कि अगर कोई जहाज यहां से गुजरा तो आग लगा दी जाएगी। खास बात है कि यह मार्ग भारत (India) के लिए भी काफी अहम है और इसके बंद होने का असर पड़ सकता है। इधर, अमेरिका दावा कर रहा है कि अब तक उसने बड़ा हमला किया नहीं है। वहीं, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा।

    रॉयटर्स ने ईरानी मीडिया की रिपोर्ट्स के हवाले से बताया, IRGC यानी ईरान रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि गुजरने वाले किसी भी जहाज को आग के हवाले कर दिया जाएगा। शनिवार को मार्ग बंद करने के ऐलान के बाद ईरान की तरफ से दी गई यह सबसे बड़ी धमकी है।


    चेतावनी

    कमांडर इन चीफ के सलाहकार इब्राहिम जबारी ने कहा, ‘स्ट्रेट (ऑफ होर्मुज) बंद कर दिया गया है। अगर कोई भी गुजरने की कोशिश करता है, तो रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के हीरो और नौसेना उन जहाजों को आग के हवाले कर देगी।’ खास बात है कि दुनिया की तेल खपत का करीब 20 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है।


    क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

    होर्मुज जलडमरू मध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। इस मार्ग से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत प्रवाह होता है। इसे बंद करने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम होंगे, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधित होगा और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी।

    होर्मुज के भारत और दुनिया के लिए मायने
    भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यह तेल ज्यादातर होर्मुज से होकर गुजरता है। मार्ग बाधित होने पर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर तुरंत असर पड़ेगा। तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे महंगाई और राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। साथ ही आयात बिल बढ़ने से चालू खाते का घाटा भी बढ़ता है।

    भारत के ईरान, सऊदी अरब और यूएई के साथ महत्वपूर्ण संबंध हैं। ऐसे में संतुलित कूटनीति और समुद्री सुरक्षा सहयोग भारत के लिए अहम है। यदि यहां तनाव बढ़ने और जहाजों पर पाबंदी लगती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तुरंत उछाल आ जाएगा। इसका असर महंगाई, परिवहन लागत और वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ेगा।

    दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा एलएनजी इसी रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।

  • ईरान ने दुबई में US मिलिट्री ठिकानों पर किया हमला, शाहेद-136 ड्रोन से साधा निशाना

    ईरान ने दुबई में US मिलिट्री ठिकानों पर किया हमला, शाहेद-136 ड्रोन से साधा निशाना


    दुबई।
    ईरान (Iran) ने यूएई (UAE) के दुबई (Dubai) में यूएस मिलिट्री ठिकाने (US Military Bases) पर बड़ा ड्रोन हमला किया है. ईरानी मीडिया के मुताबिक, ईरान ने शाहेद-136 ड्रोन (Shahed-136 Drone) से दुबई में उस बिल्डिंग पर हमला किया है, जहां अमेरिकी मिलिट्री के अधिकारी मौजूद थे.

    इससे पहले सऊदी में स्थित अमेरिकी दूतावास पर ईरान ने ड्रोन के जरिए निशाना साधा था, जहां पर हमले के बाद आग लगने की खबर आई थी. हालांकि, रिपोर्ट्स में पता चला है कि एंबेसी हमले के वक्त खाली थी.


    कतर की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन्स

    कतर के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसने हमले शुरू होने के बाद से देश पर दागे गए अधिकांश ईरानी प्रोजेक्टाइल को रोक दिया है, जिसमें तीनों क्रूज मिसाइलें, 101 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 98, 39 ड्रोन में से 24 और दोनों SU-24 लड़ाकू जेट शामिल हैं।

    सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी किया है. रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता, मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा, “रियाद और अल-खार्ज शहरों के पास 8 ड्रोन को रोका और नष्ट किया गया.”

    सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दिखाया गया है कि मंगलवार सुबह-सुबह ईरानी ड्रोन के हमले के बाद इज़राइल में US एंबेसी में आग लग गई.

  • Iran के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की पत्नी की भी मौत.. US-इजराइली हमलें हो गई थीं घायल

    Iran के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की पत्नी की भी मौत.. US-इजराइली हमलें हो गई थीं घायल


    तेहरान।
    ईरान (Iran) के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei) की पत्नी, मंसूरेह खोजस्तेह बाघेरजादेह की मौत हो गई है। खबर है कि US-इजराइली हमलों में लगी चोटों की वजह से उनकी मौत हो गई। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर (Government Broadcaster) प्रेस टीवी ने सोमवार को कहा कि हमले के बाद वह ‘शहीद हो गईं’ खामेनेई खुद शनिवार को अमेरिका और इजराइल के हमलों में मारे गए थे। ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि खोजस्तेह भी उन्हीं हमलों में घायल हो गई थीं और बाद में उनकी चोटों की वजह से मौत हो गई।

    ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि अयातुल्ला खामेनेई हमलों के शुरुआती दौर में ही मारे गए। US और इज़राइली अधिकारियों ने कहा कि ये हमले स्ट्रेटेजिक मिलिट्री और सिक्योरिटी टारगेट पर किए गए थे। इसकी पुष्टि US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के धर्मगुरु की मौत की घोषणा के कुछ घंटों बाद हुई, जो सरकार बदलने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा था।


    सुप्रीम लीडर के परिवार में हुई मौतों की पहले ही पुष्टि कर दी थी

    रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि खामेनेई के कई रिश्तेदार, जिनमें उनकी बेटी, दामाद और उनकी पोती शामिल हैं, उन्हीं हमलों में मारे गए। रॉयटर्स ने यंग जर्नलिस्ट्स क्लब के ज़रिए तेहरान सिटी काउंसिल के एक सदस्य का ज़िक्र किया, जिन्होंने हमलों के बाद सुप्रीम लीडर के परिवार में हुई मौतों की पहले ही पुष्टि कर दी थी।

    सुप्रीम लीडर के परिवार के सदस्यों की मौत से तेहरान की लीडरशिप पर अंदरूनी दबाव बढ़ने और पूरे इलाके में तनाव और बढ़ने की उम्मीद है। ईरानी अधिकारियों ने पहले ही चेतावनी दी है कि देश पर किसी भी हमले का बदला लिया जाएगा।


    सीनियर मौलवी अयातुल्ला अराफी अंतरिम सुप्रीम लीडर के तौर पर काम करेंगे

    सरकार से जुड़ी IRNA न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, अली खामेनेई की हत्या के बाद सीनियर मौलवी अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफी ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर के तौर पर काम करेंगे। अराफी को टेम्पररी लीडरशिप काउंसिल का ज्यूरिस्ट मेंबर बनाया गया है, जिसे ईरान के कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोसेस के तहत परमानेंट उत्तराधिकारी चुने जाने तक ट्रांज़िशन के दौरान सुप्रीम लीडर की शक्तियों का इस्तेमाल करने का काम सौंपा गया है।

    ईरान के संवैधानिक ढांचे के तहत, अंतरिम लीडरशिप काउंसिल में प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन, चीफ जस्टिस गुलाम-होसैन मोहसेनी-एजेई और गार्डियन काउंसिल के एक मौलवी शामिल हैं। यह तीन सदस्यों वाली बॉडी मिलकर सुप्रीम लीडर की शक्तियों का इस्तेमाल करेगी और खामेनेई की मौत के बाद बदलाव के समय में देश के मामलों की देखरेख करेगी, जब तक कि कोई परमानेंट उत्तराधिकारी नहीं चुना जाता।

  • मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ट्रंप ने दिया बड़ा संकेत-ईरान में सैन्य विकल्प खुले

    मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ट्रंप ने दिया बड़ा संकेत-ईरान में सैन्य विकल्प खुले


    नई दिल्ली। दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर ऐसा संकेत दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। विदेशों में लंबे युद्धों से दूरी बनाने के अपने पुराने रुख से अलग जाते हुए ट्रंप ने कहा है कि “यदि आवश्यकता पड़ी” तो वह ईरान में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं करते।

    “मैं यह नहीं कहता कि जमीन पर सैनिक नहीं होंगे”
    अमेरिकी अखबार New York Post को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “जैसा कि हर राष्ट्रपति कहता है, ‘जमीन पर कोई सैनिक नहीं होगा।’ मैं ऐसा नहीं कहता। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सैनिकों को ग्राउंड पर भेजा जा सकता है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिलहाल इसकी आवश्यकता नहीं होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ और हताहतों की खबर
    इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि सोमवार तक अमेरिकी सेना के चार सदस्य मारे गए हैं। शनिवार सुबह ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की घोषणा करते हुए ट्रंप ने संभावित नुकसान का संकेत दिया था। वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, “ईरानी शासन मारना चाहता है। साहसी अमेरिकी नायकों की जान जा सकती है, और हमारे सैनिक हताहत हो सकते हैं; युद्ध में अक्सर ऐसा होता है। ट्रंप ने दावा किया कि यह ऑपरेशन तय समय से आगे चल रहा है और “बहुत तेजी से खत्म होने वाला है।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने में चार सप्ताह लगने की उम्मीद थी, लेकिन 49 नेता “एक दिन में” मारे गए। उनके मुताबिक मारे गए लोगों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei भी शामिल थे। हालांकि, इस दावे पर स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    “जितना समय लगेगा, उतना चलेगा अभियान”

    सोमवार को ट्रंप ने संकेत दिया कि ऑपरेशन चार से पांच सप्ताह तक चल सकता है और यदि इससे अधिक समय भी लगे तो वह इसके लिए तैयार हैं। संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के स्थायी प्रतिनिधि Danny Danon ने भी कहा कि अभियान में “जितना समय लगेगा, लगेगा। इस बयानबाजी ने संकेत दिया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के खिलाफ लंबी रणनीति पर काम कर सकते हैं।

    अमेरिकी जनता बंटी हुई
    विदेशी युद्धों में अमेरिका की पिछली उलझनों-जैसे इराक और अफगानिस्तान को देखते हुए अमेरिकी जनता सतर्क नजर आ रही है। एक रॉयटर्स-इप्सोस पोल के अनुसार, केवल 27 प्रतिशत लोगों ने ईरान पर हमले का समर्थन किया, जबकि 43 प्रतिशत इससे असहमत थे और 13 प्रतिशत अनिश्चित रहे।

    हालांकि ट्रंप ने पोल के आंकड़ों को खारिज करते हुए कहा, “मुझे पोलिंग की परवाह नहीं है। मुझे सही काम करना है। उन्होंने यह भी कहा कि वह एक “साइलेंट मेजॉरिटी” पर भरोसा करते हैं, जो उनके अनुसार “असली पोल” में दिखाई देगी।

    वैश्विक असर की आशंका
    ट्रंप के इस बयान ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है। यदि वास्तव में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती होती है, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष को व्यापक युद्ध का रूप दे सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाता है।

  • ईरान पर बढ़ा अमेरिकी दबाव: व्हाइट हाउस ने अमेरिकियों पर हमलों की सूची जारी की

    ईरान पर बढ़ा अमेरिकी दबाव: व्हाइट हाउस ने अमेरिकियों पर हमलों की सूची जारी की


    नई दिल्ली विगत लगभग पांच दशकों से अमेरिका की अलग-अलग सरकारें ईरान पर यह आरोप लगाती रही हैं कि वह मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी नागरिकों व सैन्यकर्मियों पर हुए हमलों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल रहा है। इसी क्रम में व्हाइट हाउस ने एक विस्तृत बयान जारी कर ऐसे हमलों की सूची साझा की है।

    बयान में ईरान को “दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश” बताते हुए कहा गया कि उसने “किसी भी अन्य आतंकवादी शासन से अधिक अमेरिकियों को मारा है।” साथ ही यह भी कहा गया कि राष्ट्रपति Donald Trump “वह कर रहे हैं जो पिछले पांच दशकों के राष्ट्रपतियों ने करने से परहेज किया-खतरे को हमेशा के लिए खत्म करना।”

    1979 से शुरू हुआ टकराव
    नवंबर 1979: तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 66 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाए रखा गया।

    अप्रैल 1983: लेबनान की राजधानी Beirut में अमेरिकी दूतावास पर आत्मघाती कार बम हमला, 17 अमेरिकी मारे गए।

    अक्टूबर 1983: बेरूत में मरीन कंपाउंड पर ट्रक बम धमाका, 241 अमेरिकी सैनिकों की मौत।

    1990 का दशक: बड़े आतंकी हमले
    1996: Saudi Arabia में अमेरिकी एयर फोर्स हाउसिंग कॉम्प्लेक्स पर ट्रक बम हमला, 19 एयरमैन की मौत, सैकड़ों घायल।

    1998: Kenya और Tanzania में अमेरिकी दूतावासों पर बम धमाके, 224 लोगों की मौत, जिनमें एक दर्जन अमेरिकी शामिल।

    इन हमलों के लिए अमेरिका ने ईरान समर्थित संगठनों-Hezbollah, Hamas और Islamic Jihad-को जिम्मेदार ठहराया।

    इराक युद्ध और उसके बाद
    2003–2011: इराक युद्ध के दौरान ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा कम से कम 603 अमेरिकी सैनिकों की हत्या का दावा।

    जनवरी 2007: कर्बला में अमेरिकी सैनिकों की हत्या, जिसमें ईरान की कुद्स फोर्स का नाम जोड़ा गया।

    पूर्व एफबीआई एजेंट Robert Levinson 2007 में ईरान में लापता हुए, जिनकी कथित रूप से हिरासत में मौत हो गई।

    हालिया घटनाएं
    जनवरी 2024: जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमला, तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए।

    अक्टूबर 2023: इजरायल पर हमले के दौरान 46 अमेरिकियों की मौत और 12 के अपहरण का आरोप ईरान समर्थित हमास पर लगाया गया।

    नवंबर 2024: एक ईरानी नागरिक और आईआरजीसी से जुड़े व्यक्ति पर डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश का आरोप।

    व्हाइट हाउस ने कहा कि अक्टूबर 2003 से नवंबर 2024 के बीच ईरान और उसके प्रॉक्सी द्वारा मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बलों पर 180 से अधिक हमले किए गए।

    गौरतलब है कि अमेरिका ने 1984 से ईरान को “आतंकवाद प्रायोजक देश” की सूची में शामिल कर रखा है। ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है और अमेरिकी नीतियों को क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए जिम्मेदार ठहराता है।

  • पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर भीषण झड़पें, अफगान सेना ने 8 पाकिस्तानी चौकियों पर किया कब्जा

    पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर भीषण झड़पें, अफगान सेना ने 8 पाकिस्तानी चौकियों पर किया कब्जा


    काबुल। अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर फिर से संघर्ष भड़क गया है। अफगानिस्तान की तालिबान सेना ने सीमा पार करके पाकिस्तान में हमला किया और कई मिलिट्री पोस्टों पर कब्जा कर लिया। तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात कंधार और जाबुल प्रांतों में डूरंड लाइन पार कर अफगान सेना ने कार्रवाई की। मंत्रालय के डेप्युटी प्रवक्ता सेदिकुल्लाह नुसरत ने बताया कि अब तक अफगान सेना ने 8 पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्टों पर कब्जा कर लिया है।

    झड़पों में हुए नुकसान
    सूत्रों के अनुसार, कंधार में पांच, खोस्त में दो और जाबुल में एक पोस्ट पर कब्जा किया गया। कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक इलाके में अफगान सैनिकों ने तीन पाकिस्तानी मिलिट्री पोस्ट पर कब्जा किया। इस हमले में तीन पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि एक को जिंदा पकड़ लिया गया।

    अफगान सैन्य सूत्रों ने बताया कि तालिबान के शासन वाली सेना ने पाकिस्तान का एक और ड्रोन मार गिराया। यह जाबुल प्रांत के शामुलजई जिले में उस समय गिराया गया जब ड्रोन लक्ष्य पर हमला करने जा रहा था। सोमवार को कंधार में एक और ड्रोन मार गिराया गया, यानी सोमवार को अफगान सेना ने कुल चार पाकिस्तानी ड्रोन नष्ट किए।

    पाकिस्तानी मिलिट्री बेस पर एयर स्ट्राइक
    तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने पहले ही सोमवार को बताया था कि उसने पाकिस्तान के कई अहम मिलिट्री बेस पर हमले किए हैं। मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई काबुल और अन्य क्षेत्रों पर पाकिस्तानी सेना के हवाई हमलों के जवाब में की गई। अफगान एयर फोर्स ने रावलपिंडी, बलूचिस्तान के क्वेटा, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य जगहों पर मिलिट्री बेस को निशाना बनाया। इस हमले में पाकिस्तानी सैन्य अड्डों को काफी नुकसान हुआ।

    सोमवार सुबह अफगान रक्षा बलों ने पक्तिका प्रांत में अंगूर अडा बेस के सामने पाकिस्तान के एक आर्मर्ड टैंक को नष्ट कर दिया। झड़पें केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहीं। अफगान रक्षा बलों ने अंगूर अडा इलाके में पाकिस्तान की सेना के खिलाफ जवाबी हमले भी किए।

    जवाबी हमलों का असर
    अफगान रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इन ऑपरेशनों के चलते पाकिस्तानी सेना को कई जगहों पर पीछे हटना पड़ा। तालिबान की सेना के जवाबी हमले शुरू होने के बाद से 100 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, जबकि अफगान बलों ने 30 से ज्यादा चौकियों पर कब्जा कर लिया है। यह स्थिति सीमा पर तनाव को और बढ़ा रही है और दोनों देशों के बीच लड़ाई अब व्यापक पैमाने पर दिखाई दे रही है।