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  • यूरोप के इस देश में पति किराए पर ले रही महिलाएं….यहां पुरुषों की भारी कमी

    यूरोप के इस देश में पति किराए पर ले रही महिलाएं….यहां पुरुषों की भारी कमी


    रीगा।
    यूरोपीय देश लातविया (European country Latvia) इस समय एक गंभीर लैंगिक समस्या (Serious Gender Problem) का सामना कर रहा है। हालात यह हो गए हैं कि यहां पर महिलाओं (Women) के बीच में घंटों के हिसाब से पति किराए पर लेने की सेवा में तेजी आई है। इन अस्थायी पतियों की सहायता से यह महिलाएं घर के छोटे-मोटे काम जैसे मरम्मत या घरेलू जिम्मेदारियों को पूरा करती है। इसके अलावा वह अकेलेपन की जिंदगी में बात करने के लिए भी प्रभावी होते हैं।

    न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक लातवियाई समाज की यह हालत गंभीर लैंगिक असंतुलन की वजह से हुई है। इस देश में पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में 15.5 फीसदी तक कम है। यह अनुपात यूरोपीय संघ के लैंगिक अनुपात से तीन गुना कम है। वर्ल्ड एटलस की रिपोर्ट के मुताबिक लातविया में पुरुषों की औसत उम्र भी महिलाओं से कम है। यहां पर 65 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में दो गुनी है।

    रिपोर्ट में कहा गया कि देश में पुरुषों की कमी स्पष्ट रूप रे रोजमर्रा की जिंदगी में भी नजर आ जाती है। फेस्टिवल ऑर्गनाइज करवाने का काम करने वाली दानिया नाम की एक महिला ने बताया कि उसके सभी सहकर्मी महिलाएं ही हैं। ऐसा नहीं है कि उन्होंने भर्ती करने के लिए पुरुषों को नहीं तलाशा… उन्होंने ऐसा किया था, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया। दानिया की दोस्त जेन ने बताया कि देश में पुरुषों की संख्या का कम होना स्वाभाविक रूप से नजर आ जाता है। हालात यह है कि कई लातवियाई महिलाएं विकल्प कम होने की वजह से शादी के लिए विदेश जाने को मजबूर हैं।

    देश में पुरुषों की कमी की वजह से कई ऐसी महिलाएं हैं, जो बिना साथी के ही रह रही हैं। ऐसे में इस देश में हैंडिमेन किराए पर मिलने की सेवाओं का प्रचलन भी तेजी के साथ बढ़ रहा है। यह प्लेटफार्म ऐसे पुरुषों को उपलब्ध कराते हैं,जो प्लंबिंग, बढ़ईगिरी, मरम्मत जैसे कामों को बढ़िया तरीके से करते हैं। इसके अलावा बेहतर बातें भी करते हैं। एक और कंपनी है, जो घंटे भर के लिए पति किराए पर देने का काम करती है। इसमें फोन के माध्यम से या ऑनलाइन बुक करने पर एक आदमी तुरंत घर पहुंचकर घरेलू कामों में मदद करता है।


    क्या है पुरुषों की कमी का कारण

    विशेषज्ञों के मुताबिक लातविया में लैंगिक समस्या का मुख्य कारण पुरुषों की कम जीवन प्रत्याशा दर है। इसके पीछे धुम्रपान की उच्च दर और जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं।

  • एलन मस्क के AI चैटबॉट Grok में प्राइवेसी संकट: आम नागरिकों की पर्सनल डिटेल्स लीक

    एलन मस्क के AI चैटबॉट Grok में प्राइवेसी संकट: आम नागरिकों की पर्सनल डिटेल्स लीक


    नई दिल्ली । एलन मस्क की AI कंपनी AI का चैटबॉट ग्रोक हाल ही में गंभीर प्राइवेसी विवादों में फंस गया है जब यह एक गंभीर सुरक्षा खामी का शिकार हुआ। रिपोर्टों के अनुसार ग्रोक नामक AI चैटबॉट आम नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी, जैसे कि घर के पते फोन नंबर और पारिवारिक डिटेल्स बेहद आसानी से लीक कर रहा है। यह मुद्दा खासकर तब सामने आया जब यह AI बॉट बेहद सामान्य पूछताछ पर भी यह व्यक्तिगत जानकारी साझा कर रहा था जिससे यूज़र्स की प्राइवेसी पर बड़ा खतरा मंडराया।

    ग्रोक द्वारा लीक हुई निजी जानकारी

    भविष्यवाद की एक जांच में यह पाया गया कि जो पूर्व ट्विटर प्लेटफॉर्म पर इंटीग्रेटेड है बेहद खतरनाक तरीके से निजी जानकारी का खुलासा कर रहा था। उदाहरण के तौर पर अगर कोई यूज़र किसी नाम का पता पूछता है, तो न केवल वह व्यक्ति का मौजूदा पता बता देता बल्कि कई बार पुराने पते और ऑफिस के पते भी दे देता था। इसके अलावा, कुछ मामलों में यह बॉट नाम फोन नंबर और घर के पते का विकल्प तक सीधे यूज़र को प्रदान कर रहा था। यह संकेत देता है कि इंटरनेट पर मौजूद सार्वजनिक डेटा सोशल मीडिया लिंक और डेटा-ब्रोकर प्लेटफॉर्म्स से जानकारी इकट्ठा कर रहा था और उसे बिना किसी सुरक्षा के साझा कर रहा था।

    प्राइवेसी फिल्टर की विफलता

    AI का दावा था कि में प्राइवेसी को बनाए रखने के लिए फिल्टर्स मौजूद हैं जो हानिकारक या खतरनाक जानकारी के प्रवाह को रोकने में सक्षम हैं। हालांकि रिपोर्टों के अनुसार यह फिल्टर्स पूरी तरह से विफल रहे। के इस व्यवहार की तुलना में चैटजीपीटी गूगल जेमिनी और क्लाउड जैसे अन्य प्रमुख AI मॉडल्स निजी जानकारी देने से मना कर देते हैं क्योंकि वे प्राइवेसी नियमों का पालन करते हैं। इसके विपरीत बिना किसी रोक-टोक के व्यक्तिगत जानकारी लीक कर रहा था जिससे यह साफ जाहिर होता है कि इसकी प्राइवेसी सुरक्षा प्रणाली में गंभीर कमी है।

    सामाजिक प्रभाव और खतरों का आकलन

    ग्रोक द्वारा लीक की गई जानकारी न केवल व्यक्तिगत प्राइवेसी के लिए खतरा है, बल्कि इससे बड़े स्तर पर समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यदि कोई AI सिस्टम बिना उचित सुरक्षा उपायों के निजी जानकारी लीक करता है तो यह डॉक्सिंग और स्टॉकिंग जैसी आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही यह उन यूज़र्स को भी जोखिम में डालता है जिनकी जानकारी बिना उनकी अनुमति के सार्वजनिक रूप से सामने आ जाती है। ऐसे मामलों में यह जरूरी है कि AI मॉडल्स की सुरक्षा और प्राइवेसी प्रणालियों को और मजबूत किया जाए ताकि इन खामियों को रोका जा सके।

    ग्रोक के द्वारा डेटा का उपयोग

    यह संभावना है कि ग्रोक इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक डेटा का इस्तेमाल कर रहा है, जिसे सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स से इकट्ठा किया जाता है। यह डेटा ब्रोकर सेवाओं से भी लिया जा सकता है लेकिन ग्रोक इसे चुटकियों में जोड़कर और बिना किसी सुरक्षा उपाय के पेश कर देता है जिससे प्राइवेसी को खतरा होता है। यही नहीं इसका इस्तेमाल गलत हाथों में जाकर बड़े पैमाने पर दुरुपयोग भी हो सकता है।

    ग्रोक के प्राइवेसी कांड ने यह सवाल उठाया है कि AI चैटबॉट्स का निजी डेटा के उपयोग और सुरक्षा के मानकों पर कितना भरोसा किया जा सकता है। इसका खुलासा करने से यह स्पष्ट हुआ है कि AI कंपनियों को प्राइवेसी के लिए और भी कड़े उपायों को अपनाने की आवश्यकता है। साथ ही इन कंपनियों को अपने फिल्टर सिस्टम्स की प्रभावशीलता पर पुनः विचार करना चाहिए, ताकि इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके और यूज़र्स की निजी जानकारी सुरक्षित रह सके।

  • आलोचना के बीच प्रशंसा: “ट्रंप नोबेल पुरस्कार के हकदार” – पूर्व अधिकारी का बयान

    आलोचना के बीच प्रशंसा: “ट्रंप नोबेल पुरस्कार के हकदार” – पूर्व अधिकारी का बयान


    नई दिल्‍ली । भारत-रूस कूटनीति को लेकर अमेरिका के पूर्व पेंटागन अधिकारी(Pentagon officials) ने अपने ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(Donald Trump) पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन(Vladimir Putin) को नई दिल्ली में जो गर्मजोशी और सम्मान मिला, उसका श्रेय रूस नहीं बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जाता है। माइकल रुबिन (Michael Rubin)के अनुसार ट्रंप ने ही भारत और रूस को एक-दूसरे के और करीब धकेला, और इसके लिए वे नोबेल पुरस्कार के हकदार हैं।

    ट्रंप को दिया ‘नोबेल’ का सुझाव
    मीडिया से बातचीत में रुबिन ने कहा कि पुतिन की भारत यात्रा मॉस्को के नजरिए से बेहद सकारात्मक रही और भारत द्वारा दिया गया सम्मान दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिला। उन्होंने कहा- मैं यह तर्क दूंगा कि भारत और रूस को जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप ने एक-दूसरे के करीब लाया है, उसके लिए वे नोबेल पुरस्कार के हकदार हैं।

    रुबिन ने यह भी सवाल उठाया कि पुतिन की यात्रा के दौरान हुए समझौतों में से कितने वास्तविक सहयोग में तब्दील होंगे और कितने ऐसे हैं जो भारत की उस नाराजगी से उपजे हैं जो हाल के समय में ट्रंप के रवैये के कारण बनी है- चाहे वह पीएम मोदी के प्रति उनका व्यवहार हो या भारत के व्यापक हितों के प्रति उदासीनता।

    अमेरिका में दो धाराएं- ट्रंप का दावा’ बनाम ‘ट्रंप की अक्षमता
    रुबिन ने बताया कि अमेरिका में इस घटनाक्रम को लेकर दो बिल्कुल अलग नजरिए हैं। उन्होंने कहा, यदि आप डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक हैं, तो आप इसे ‘मैंने कहा था न’ वाले चश्मे से देखते हैं। लेकिन यदि आप उन 65 प्रतिशत अमेरिकियों में से हैं जो ट्रंप को पसंद नहीं करते, तो यह सब डोनाल्ड ट्रंप की भारी कूटनीतिक अक्षमता का नतीजा दिखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों को पीछे धकेल दिया और कई फैसले ऐसे लिए जिन पर पाकिस्तान, तुर्किये और कतर जैसी देशों की चापलूसी या कथित प्रलोभनों का असर दिखा।

    ट्रंप के दौर की तीखी आलोचना: ‘रणनीतिक नुकसान’
    रुबिन के अनुसार वॉशिंगटन के कई विशेषज्ञ इस बात से हैरान हैं कि ट्रंप ने कैसे अमेरिका–भारत की बढ़ती रणनीतिक एकजुटता को कमजोर कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे, बल्कि भारत–रूस निकटता को अपनी विदेश नीति की दूरदर्शिता साबित करने में इस्तेमाल करेंगे।

    ‘भारत को नसीहत देना बंद करे अमेरिका’
    पुतिन द्वारा भारत को निरंतर ऊर्जा आपूर्ति देने के वादे पर टिप्पणी करते हुए रुबिन ने कहा कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक अनिवार्यताओं को समझने में लगातार विफल रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीयों ने नरेंद्र मोदी को इसलिए चुना है कि वे भारतीय हितों का प्रतिनिधित्व करें। भारत दुनिया की सबसे आबादी वाला देश है, जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, और उसे ऊर्जा चाहिए। अमेरिका को भारत को लेक्चर देना बंद कर देना चाहिए।

    उन्होंने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि स्वयं अमेरिका भी तब रूस से ऊर्जा खरीदता है जब विकल्प सीमित हों। रुबिन ने सवाल उठाया कि यदि अमेरिका नहीं चाहता कि भारत रूसी ईंधन खरीदे, तो वह भारत को सस्ते दाम पर और पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराने के लिए क्या कर रहा है? उन्होंने तीखे अंदाज में कहा- यदि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, तो सबसे अच्छा यह होगा कि हम चुप रहें, क्योंकि भारत को अपनी सुरक्षा और जरूरतों को पहले रखना ही पड़ेगा।

  • नोबेल तो नहीं… मगर ट्रंप को मिला शांति पुरस्कार, इतने खुश हुए…खुद ही उठाकर पहन लिया

    नोबेल तो नहीं… मगर ट्रंप को मिला शांति पुरस्कार, इतने खुश हुए…खुद ही उठाकर पहन लिया


    वाशिंगटन।
    नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) की मांग कर रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को नोबेल तो नहीं लेकिन फीफा शांति पुरस्कार (FIFA Peace Prize) जरूर मिल गया है। फुटबॉल की वैश्विक संस्था (FIFA) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने नए फीफा शांति पुरस्कार (FIFA Peace Prize) से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार खेल से इतर वैश्विक शांति को ध्यान में रखकर बनाया गया है और ट्रंप इसके पहले विजेता हैं।


    फीफा ने क्यों दिया यह पुरस्कार

    डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रेम किसी से छिपा नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि फीफा द्वारा इस साल से शुरू किया जा रहा है शांति पुरस्कार ट्रंप को ही मिलेगा। वैसे बी फीफा के वर्तमान अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को ट्रंप का करीबी माना जाता है। वह कई बार खुले तौर पर इस बात को कह चुके हैं कि गाजा संघर्ष में युद्धविराम करवाने के लिए ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना ही चाहिए।

    फीफा के अगले विश्वकप के लिए आयोजित किए जा रहे एक कार्यक्रम में जियानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए ट्रंप को यह पुरस्कार देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “यह आपके लिए एक सुंदर मेडल है, जिसे आप जहां चाहें, वहां पहन सकते हैं।” इसके बाद ट्रंप ने तुरंत ही इसे अपने गले में डाल लिया। इसके साथ ही ट्रंप को एक सर्टिफिकेट भी दिया गया, जिसमें ट्रंप को ‘दुनिया में शांति और एकता बढ़ाने में योगदान’ देने वाला बताया गया।

    इसके अलावा जियानी ने ट्रंप को एक सोने की ट्राफी भी भेंट की। इस पर आगे ट्रंप का नाम लिखा हुआ था। उन्होंने कहा, “आप इस शांति पुरस्कार के योग्य हैं, अपनी कोशिशों और उपलब्धियों के लिए।

    फीफा शांति पुरस्कार मिलने के बाद ट्रंप उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा, “यह मेरे जीवन के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है।” इसके बाद उन्होंने अपने परिवार, खासतौर पर अपनी पत्नी मेलानिया का धन्यवाद दिया और मेजबान देशों कनाडा और मेक्सिको के नेताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह तीनों देशों के लिए बेहतर रहेगा।

  • यूक्रेनी बच्चों को तुरंत बिना शर्त वापस लौटाए रूस… UNGA में प्रस्ताव पारित, वोटिंग से दूर रहा भारत

    यूक्रेनी बच्चों को तुरंत बिना शर्त वापस लौटाए रूस… UNGA में प्रस्ताव पारित, वोटिंग से दूर रहा भारत


    न्यूयॉर्क।
    संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) (United Nations General Assembly (UNGA) ने रूस पर दबाव बढ़ाते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। इसमें रूस से यूक्रेनी बच्चों को तुरंत और बिना शर्त वापस लौटाने की मांग की गई है। यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मानवीय संकट पर केंद्रित है, जहां कथित तौर पर हजारों बच्चों को जबरन रूसी क्षेत्र में निर्वासित किया गया है। इस महत्वपूर्ण मसौदा प्रस्ताव पर बुधवार को मतदान हुआ, जिसमें भारत ने मतदान से परहेज किया।

    193 सदस्यीय महासभा में ‘यूक्रेनी बच्चों की वापसी’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को 91 देशों ने समर्थन दिया, 12 देशों ने इसका विरोध किया और 57 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत के साथ-साथ बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, मिस्र, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका ने भी वोटिंग से परहेज किया। बता दें कि यह प्रस्ताव रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से ठीक पहले पेश किया गया था। भारत ने फिलहाल वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।


    प्रस्ताव में क्या कहा गया?

    प्रस्ताव में युद्ध के बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर गहरी चिंता जताई गई, विशेषकर उन यूक्रेनी बच्चों की स्थिति पर जिन्हें 2014 के बाद अपने परिवारों से अलग कर रूस-नियंत्रित इलाकों में ले जाया गया या रूस भेजा गया।


    महासभा ने रूस से मांग की कि वह-

    – जबरन ले जाए गए सभी यूक्रेनी बच्चों को तुरंत, सुरक्षित और बिना शर्त वापस भेजे।
    – बच्चों के जबरन निर्वासन, परिवारों से अलगाव, नागरिकता बदलने, दत्तक ग्रहण या फॉस्टर केयर में रखने जैसी सभी कार्रवाइयों को तुरंत रोके।
    – इस तरह के मामलों में जिम्मेदार लोगों की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करे।

    प्रस्ताव ने रूस द्वारा 2022 के बाद किए गए उन कानूनी बदलावों पर भी आपत्ति जताई, जिनसे यूक्रेनी अनाथ बच्चों या अभिभावक-विहीन बच्चों को रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है।

    यूक्रेन का दावा: 20000 से अधिक बच्चों के मामले की जांच
    यूक्रेन की उप विदेश मंत्री मारियाना बेट्सा ने महासभा में मसौदा प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि अक्टूबर 2025 तक 6395 बच्चों की जबरन ट्रांसफर/डेपोर्टेशन की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20,000 से अधिक मामलों की जांच जारी है।


    रूस का जवाब: झूठे आरोपों से भरा प्रस्ताव

    रूस की उप स्थायी प्रतिनिधि मारिया जाबोलोत्स्काया ने मसौदा प्रस्ताव को झूठे आरोपों से भरा बताया। उन्होंने कहा कि कई बच्चे युद्ध क्षेत्रों से सुरक्षित निकाले गए हैं या अपने परिवारों से बिछड़ गए थे, जिसे उल्लंघन नहीं माना जा सकता। यूक्रेनी शरणार्थियों के लिए रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाना स्वेच्छिक और बिना किसी दबाव के है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के पक्ष में हर वोट झूठ, युद्ध और टकराव के समर्थन में है, जबकि विरोध में दिया गया हर वोट शांति के पक्ष में है।


    यूएन महासभा अध्यक्ष की टिप्पणी

    यूएन महासभा की अध्यक्ष अन्नालेना बैरबॉक ने कहा कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद से महासभा ने लगातार अपनी आठ अलग-अलग प्रस्तावों में रूस से तत्काल और बिना शर्त वापसी की मांग की है। उन्होंने कहा- यूक्रेनी बच्चों का मामला खाली संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। यह पूरी स्थिति रूस के आक्रमण का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से न सिर्फ यूक्रेन बल्कि अन्य क्षेत्रों और वैश्विक स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है।

  • पुतिन की भारत यात्रा: राष्ट्रपति भवन पहुंचे पीएम मोदी, पुतिन का होगा औपचारिक स्वागत

    पुतिन की भारत यात्रा: राष्ट्रपति भवन पहुंचे पीएम मोदी, पुतिन का होगा औपचारिक स्वागत



    नई दिल्ली ।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 4 दिसंबर 2025 को दो दिवसीय भारत यात्रा शुरू की। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रही है और चार साल बाद उनकी भारत यात्रा है। इस दौरान भारत और रूस के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग को बढ़ाने व्यापारिक रिश्तों को प्रगाढ़ करने और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

    भारत-रूस साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ

    पुतिन की यात्रा भारत और रूस के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर हो रही है। यह साझेदारी अक्टूबर 2000 में शुरू हुई थी और दिसंबर 2010 में इसे स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया गया। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है  खासकर रक्षा ऊर्जा और व्यापारिक संबंधों में।

    यात्रा का मुख्य उद्देश्य

    पुतिन की इस यात्रा में प्रमुख रूप से रक्षा सहयोग, व्यापारिक रिश्तों और बाहरी दबावों से दोनों देशों को बचाने पर ध्यान दिया जाएगा। भारत और रूस के बीच रक्षा क्षेत्र में पुराने संबंध रहे हैं, और दोनों देशों के बीच यह सहयोग और मजबूत हो सकता है। साथ ही  भारत में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी पर विचार हो सकता है।

    शिखर सम्मेलन और RT इंडिया चैनल का शुभारंभ

    5 दिसंबर को पुतिन का औपचारिक स्वागत होगा जिसके बाद 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेंगे जिनमें रक्षा ऊर्जा व्यापार और सामरिक साझेदारी से संबंधित मुद्दे शामिल होंगे।

    सम्मेलन के बाद पुतिन रूस के प्रसारक रूसी टेलीविजन के नए भारतीय चैनल का शुभारंभ करेंगे। यह चैनल भारत में रूसी मीडिया की पहुंच को बढ़ाने में मदद करेगा और भारत-रूस के संबंधों को और मजबूत बनाएगा।

    राजकीय भोज और भविष्य की दिशा

    यात्रा के अंतिम दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पुतिन के सम्मान में एक राजकीय भोज आयोजित करेंगी। यह भोज भारत-रूस संबंधों की गहरी साझेदारी और मित्रता का प्रतीक होगा।

    इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक और सामरिक साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा। भारत और रूस के रिश्ते खासकर रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण रहे हैं और यह यात्रा इन रिश्तों को एक नए दौर में प्रवेश दिला सकती है।

    भारत-रूस का सामरिक महत्व

    भारत और रूस के बीच सामरिक रिश्ते बहुत मजबूत रहे हैं विशेषकर रक्षा क्षेत्र में। रूस ने हमेशा भारत को उन्नत रक्षा प्रणाली प्रदान की है जिसमें विमान मिसाइलें और अन्य तकनीकी सहयोग शामिल है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा विज्ञान तकनीकी और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा है।

    यह यात्रा भारत और रूस के रिश्तों में एक नई दिशा का संकेत देती है, जिसमें दोनों देशों के साझा हितों के साथ-साथ वैश्विक राजनीति में सामरिक समन्वय भी बढ़ेगा। पुतिन की यात्रा विशेष रूप से रक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में भारत-रूस साझेदारी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

  • भारत पहुंचे पुतिन: राष्ट्रपति भवन में मिला 21 तोपों की सलामी का सम्मान

    भारत पहुंचे पुतिन: राष्ट्रपति भवन में मिला 21 तोपों की सलामी का सम्मान


    नई दिल्ली /रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार साल बाद भारत पहुंचे और उनके आगमन पर राजधानी दिल्ली में पारंपरिक सम्मान के साथ शानदार स्वागत किया गया। राष्ट्रपति भवन में उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई और भारतीय सेना की तीनों सेवाओं ने गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद थोड़ी ही देर में पुतिन और मोदी राजघाट पहुंचे, जहां दोनों नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की

    पुतिन के साथ आए प्रतिनिधिमंडल में सात वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं, जिनकी उपस्थिति इस दौरे की अहमियत को दर्शाती है। दोनों देशों के बीच आज दो महत्वपूर्ण बैठकें निर्धारित हैं जिनमें से एक क्लोज़्ड-डोर बैठक होगी। इनके दौरान रक्षा, ऊर्जा, आर्थिक सहयोग और कौशल आधारित भारतीय कामगारों की आवाजाही को आसान बनाने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। उम्मीद है कि मुलाकात के दौरान 25 से अधिक द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जो भविष्य में भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती देंगे।

    राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के बाद पुतिन का काफिला राजघाट के लिए रवाना हुआ। सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी गई थी और रास्तों को पहले ही खाली करा लिया गया था। राजघाट पर श्रद्धांजलि देने के बाद दोनों नेता हैदराबाद हाउस पहुँचे, जहाँ 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच दशकों पुराने विश्वास और सहयोग की परंपरा को आगे बढ़ाने का एक और अवसर है।

    पुतिन की यात्रा का एक दिलचस्प पहलू वह सफेद टोयोटा फॉर्च्यूनर सिग्मा-4 भी रही जिसमें पीएम मोदी और पुतिन एयरपोर्ट से प्रधानमंत्री आवास तक साथ बैठे। यह गाड़ी मुंबई के एक एडिशनल पुलिस कमिश्नर के नाम रजिस्टर्ड है और अप्रैल 2024 में पंजीकृत हुई थी। सुरक्षा के लिहाज से पीएम की रेंज रोवर और पुतिन की विशेष सुरक्षा वाली कारें भी काफिले में शामिल थीं।

    फ्लाइटडाटा-24 की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन का विमान Ilyushin Il-96-300 मॉस्को के ज़ुकोवस्की एयरपोर्ट से उड़ा और कजाकिस्तान, कैस्पियन सागर, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर राजस्थान के ऊपर भारतीय सीमा में दाखिल हुआ। यह उड़ान मार्ग अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा के लिहाज से सावधानीपूर्वक तय किया गया था।

    भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग हमेशा ही रिश्तों की मजबूत नींव रहा है। पुतिन ने हाल ही में कहा था कि भारत और रूस का रिश्ता सिर्फ हथियारों की खरीद-फरोख्त का नहीं बल्कि गहरे विश्वास और तकनीकी साझेदारी का है। यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक सहयोग की ओर संकेत करती है।

    पुतिन के आगमन की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री मोदी ने एयरपोर्ट पर स्वयं उनका स्वागत कर इस दौरे को विशेष महत्व दिया। दोनों नेताओं ने एक ही गाड़ी में सफर किया और रात में पीएम आवास पर निजी रात्रिभोज हुआ। इस मुलाकात की तस्वीरों और वीडियो को दुनिया भर के मीडिया ने प्रमुखता से दिखाया। अमेरिका यूरोपीय देशों, यूक्रेन और एशियाई मीडिया ने भी इस दौरे के भू-राजनीतिक महत्व पर विशेष रिपोर्ट प्रकाशित की हैं।

    भारत-रूस संबंध एक ऐसे दौर में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं जब वैश्विक राजनीति में बदलाव तेजी से हो रहे हैं। यह दौरा न केवल सामरिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, कौशल विकास और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते भी खोल सकता है।

  • भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं… इसे 77 साल पहले का भारत समझने की कोई न करे भूल: पुतिन

    भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं… इसे 77 साल पहले का भारत समझने की कोई न करे भूल: पुतिन


    नई दिल्ली।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने भारत-अमेरिका (India-America) के बीच रिश्तों में चल रहे तनाव के बीच दो टूक कहा कि दुनिया का कोई भी देश भारत को आज से 77 साल पहले का हिन्दुस्तान समझने की भूल नहीं करे। उन्होंने कहा कि 150 करोड़ आबादी वाले इस देश ने अतीत से सीख लेकर हर क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर कोई भी देश दबाव बनाकर अपनी बात नहीं मनवा सकता। राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि भारत किसी भी देश के आगे झुकने वाला नहीं है और वह अपनी शर्तों पर किसी भी देश के साथ व्यापारिक संबंध बनाता है।

    एक इंटरव्यू में पुतिन ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और दुनिया के सामने एक बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरा है। रूस से सस्ते दाम पर कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे और उस पर अमेरिका की ओर से उठाई जा रही आपत्तियों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं कभी अपने सहयोगियों का चरित्र-चित्रण नहीं करता। उनका भी नहीं, जिन्होंने मेरे साथ काम किया और खासतौर पर राष्ट्राध्यक्षों का तो बिलकुल नहीं।


    अमेरिका अब भी हमसे यूरेनियम खरीद रहा

    उन्होंने कहा कि मेरे विचार में ये आकलन उस देश के नागरिकों को करना चाहिए, जिन्होंने उन्हें वोट देकर सत्ता सौंपी है।लेकिन जहां तक भारत की ओर से रूस से ऊर्जा संसाधनों की खरीद की बात है तो मैं साफ कर दूं कि अमेरिका अब भी अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए हमसे परमाणु ऊर्जा की खरीद करता है। इनमें अमेरिका में चल रहे न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए यूरेनियम भी शामिल है। पुतिन ने कहा कि अगर अमेरिका खुद अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से यूरेनियम खरीद सकता है तो फिर भारत की खरीद को लेकर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर गहन अध्ययन की जरूरत है। पुतिन ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से चर्चा के लिए तैयार हैं।


    भारत यात्रा पर पहुंचे हैं पुतिन

    बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रणनीतिक और वाणिज्यिक समझौतों के लिए भारत यात्रा पर पहुंचे हैं, लेकिन उनकी इस यात्रा को लेकर भारत का दृष्टिकोण इन समझौतों से कहीं अलग और स्पष्ट है, जो मात्र औपचारिक कुटनीति से कहीं अधिक तेजी से खंडित होती वैश्विक व्यवस्था को बचाने से जुड़ा है। भारत के लिए रूस तीन मोर्चों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। यह वैश्विक स्तर पर टैरिफ की अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है, कच्चे तेल का एक विश्वसनीय स्रोत है, और सबसे महत्वपूर्ण यह कि भारत के पड़ोसी चीन को साधने में भूराजनैतिक कवच का काम करता है।

    भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा परिवर्तन
    पुतिन की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब ट्रंप प्रशासन रूस और यूक्रेन के साथ अपनी बातचीत कर रहा है और यूरोप एक भयावह युद्ध से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है। यदि ये वार्ताएं सफल होती हैं और यूक्रेन को थका देने वाला यह असमान युद्ध समाप्त हो जाता है, तो संभव है कि अमेरिका और रूस के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का एक नया दौर दुनिया के सामने आए। यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले भारत अपनी जरूरतों का केवल 2.5 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करता था लेकिन, प्रतिबंधों और यूरोपीय बाजारों द्वारा रूस के बहिष्कार के बाद भारत अपनी जरूरतों का लगभग 35 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करने लगा है। इस प्रकार भारत की ऊर्जा रणनीति में भी व्यापक परिवर्तन हुआ है।

  • भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा

    भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा


    नई दिल्ली /रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को चार साल बाद भारत पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेता गले मिले और एक ही कार में बैठकर PM निवास पहुंचे, जहां पुतिन के सम्मान में प्राइवेट डिनर आयोजित किया गया। यह दृश्य सिर्फ कूटनीति नहीं था बल्कि दुनिया को भारत-रूस की रणनीतिक गहराई का मजबूत संदेश भी था। इस दौरे को अमेरिका, यूरोप, यूक्रेन और ग्लोबल मीडिया ने बेहद करीब से कवर किया क्योंकि यह ऐसे वक्त हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति की धुरी बदल रही है-ट्रम्प के दोबारा सत्ता में आने रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के बीच।

    ब्रिटेन: रूस अलग-थलग नहीं, भारत उसका अहम साथी
    मिडिया के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा इस बात का संकेत है कि रूस वैश्विक मंच पर अकेला नहीं है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, विशाल मार्केट है और रूस के लिए ऊर्जा, रक्षा और कौशल-आधारित कामगारों का प्रमुख स्रोत भी। रूस को उम्मीद है कि भारत सस्ती तेल खरीद और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाएगा।रूस भारत को Su-57 फाइटर जेट और नए एयर डिफेंस सिस्टम की पेशकश कर सकता है।

    कीव इंडिपेंडेंट यूक्रेन: भारत की कूटनीति की कठिन परीक्षा

    यूक्रेनी मीडिया ने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक परीक्षा बताया। भारत को रूस और यूक्रेन दोनों से रिश्ते संभालने हैं। रूस चाहता है कि भारत उसके साथ खड़ा दिखे, जबकि अमेरिका-यूरोप उम्मीद करते हैं कि मोदी पुतिन पर दबाव डालें ताकि युद्ध कमजोर पड़े।
    यूक्रेन को यह चिंता भी है कि क्या मोदी उस वादे पर टिके रहेंगे जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की से युद्ध खत्म कराने में मदद का आश्वासन दिया था। साथ ही, भारत का तटस्थ रुख ध्यान खींचता है-UN में रूस के खिलाफ कई प्रस्तावों पर भारत ने वोटिंग से दूरी बनाई है।

    द डॉन पाकिस्तान: रक्षा से ज्यादा व्यापार पर फोकस
    पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने लिखा कि पुतिन का यह दौरा रक्षा सहयोग और खासकर आर्थिक रिश्तों को मजबूती देने पर केंद्रित है। अमेरिका भारत पर रूसी तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा है, वहीं ट्रम्प प्रशासन ने अगस्त में भारत के कई उत्पादों पर 50% टैरिफ भी लगा दिया था। रूस भारत को अधिक S-400 सिस्टम और Su-57 जेट के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दे सकता है।भारत को डर है कि रूस से किसी बड़ी डील का असर अमेरिका के साथ उसके आर्थिक रिश्तों पर पड़ सकता है।

    अल जजीरा कतर: मोदी-पुतिन का व्यक्तिगत रिश्ता जगजाहिर
    अल जजीरा ने जोर दिया कि मोदी द्वारा एयरपोर्ट पर जाकर गले लगाना व्यक्तिगत संबंधों की मजबूती का संकेत है। पुतिन ने भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को रूसी तेल खरीदने का पूरा हक है और यह साझेदारी यूक्रेन युद्ध से प्रभावित नहीं होगी। भारत के लिए यह ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है2022 से पहले रूस से सिर्फ 2.5% तेल आता था, अब यह बढ़कर करीब 36% हो गया है, जिससे भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया है।

    द गार्डियन (ब्रिटेन): रूस-भारत अमेरिकी दबाव से नहीं डरते

    द गार्डियन के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका-भारत संबंध ट्रम्प की टैरिफ नीति के कारण तनावपूर्ण हैं। इस पृष्ठभूमि में पुतिन का दिल्ली पहुंचना यह संकेत है कि भारत-रूस अपने रणनीतिक हितों को किसी तीसरे देश के दबाव पर आधारित नहीं करते। रूस के लिए यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय अलगाव की धारणा तोड़ने का मंच है जबकि भारत के लिए यह संतुलन साधने का कठिन लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास।

    भारत-रूस रिश्तों की नई परिभाषा

    पुतिन की यह यात्रा प्रतीकात्मक भी है और रणनीतिक भी।
    यह दिखाती है कि- भारत रूस को ऊर्जा और रक्षा सुरक्षा का अनिवार्य स्तंभ मानता है
    रूस भारत को एशिया में अपना सबसे विश्वसनीय साझेदार और अमेरिका को यह संदेश है कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता है। दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीरें सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थीं, बल्कि उस रिश्ते की झलक थीं जो वैश्विक ध्रुवीयता के बदलते दौर में भी मजबूती से खड़ा है
  • 44 अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री को लिखी चिट्ठी, पाकिस्तान में लोकतंत्र पर चिंता जताई

    44 अमेरिकी सांसदों ने विदेश मंत्री को लिखी चिट्ठी, पाकिस्तान में लोकतंत्र पर चिंता जताई

    नई दिल्ली। अमेरिकी संसद के 44 सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर पर तुरंत प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है। सांसदों का आरोप है कि पाकिस्तान में सेना सरकार चला रही है और आम नागरिकों के अधिकारों का बड़े पैमाने पर हनन हो रहा है। विदेश में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिकों को भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर धमकियां मिल रही हैं। पत्र का नेतृत्व डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल और ग्रेग कासर ने किया। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान में तानाशाही बढ़ रही है। पत्रकारों को धमकाया जा रहा है, अगवा किया जा रहा है या देश छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है।

    प्रमुख घटनाएँ

    वर्जीनिया के जर्नलिस्ट अहमद नूरानी के दोनों भाइयों को पाकिस्तान में एक महीने से अधिक समय तक अगवा रखा गया। मशहूर संगीतकार सलमान अहमद के जीजा का अपहरण हुआ, जिन्हें अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद छोड़ा गया। विपक्षी नेताओं को बिना आरोप जेल में डाला जा रहा है। आम नागरिकों को सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तार किया जा रहा है। महिलाओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों और बलूचिस्तान के लोगों पर सबसे ज्यादा अत्याचार हो रहे हैं।

    2024 के चुनाव और धांधली

    सांसदों ने 2024 के आम चुनावों में भारी धांधली का जिक्र किया। स्वतंत्र संस्था की ‘पट्टन रिपोर्ट’ और अमेरिकी विदेश विभाग ने गड़बड़ी की पुष्टि की थी। पत्र में कहा गया कि चुनावों के जरिए सिर्फ एक कठपुतली सरकार बनाई गई है, जिसे वास्तव में सेना चलाती है। सेना के दबाव में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि आम नागरिकों के केस भी सैन्य अदालतों में चल सकते हैं।

    संभावित अमेरिकी प्रतिबंध

    वीजा बैन: अमेरिका में यात्रा पर पूर्ण रोक। संपत्ति जब्ती: अमेरिका या अमेरिकी प्रभाव वाले देशों में बैंक खाते और लेन-देन रोक ग्लोबल मैग्निट्सकी एक्ट के तहत। अमेरिकी–पाकिस्तानी उच्चस्तरीय बैठकें  आसिम मुनीर 2025 में दो बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मिले। सितंबर में शहबाज और मुनीर ने ट्रम्प से लगभग 1 घंटा 20 मिनट की बैठक की।

    इमरान खान और राजनीतिक कैदी

    अमेरिकी सांसदों ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और अन्य राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की। इमरान के परिवार को 27 दिन तक उनसे मिलने की अनुमति नहीं मिली; 2 दिसंबर को मिलने की इजाजत मिली। 27वां संवैधानिक संशोधन और सेना का प्रभाव 12 नवंबर को पास हुए 27वें संशोधन से सेना की ताकत बढ़ी और कोर्ट के अधिकार कम हुए।  फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को CDF बनाए जाने की योजना थी लेकिन अभी तक पद खाली है।पीएम शहबाज शरीफ ने नोटिफिकेशन पर साइन नहीं किया; इस बीच वे बहरीन और लंदन यात्रा पर गए।