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  • US में F-35 का रिटायर्ड पायलट गिरफ्तार, चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त प्रशिक्षण देने का आरोप

    US में F-35 का रिटायर्ड पायलट गिरफ्तार, चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त प्रशिक्षण देने का आरोप


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पर पूर्व अमेरिकी वायु सेना (American Air Force) के एलीट फाइटर पायलट और एफ-35 प्रशिक्षक (F-35 Trainer) गेराल्ड एडी ब्राउन जूनियर को चीनी सैन्य पायलटों को गुप्त रूप से लड़ाकू प्रशिक्षण देने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने बुधवार को जारी बयान में बताया कि उन्हें शस्त्र निर्यात नियंत्रण अधिनियम (AECA) के उल्लंघन के तहत आरोपित किया गया है। उन्हें 26 फरवरी 2026 को इंडियाना के दक्षिणी जिले में मजिस्ट्रेट जज के समक्ष पेश किया जाना है।

    राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन ए आइजेनबर्ग ने कहा कि अमेरिकी वायु सेना ने मेजर ब्राउन को एक विशिष्ट लड़ाकू पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया था और राष्ट्र की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब उन पर चीनी सैन्य पायलटों को प्रशिक्षण देने का आरोप है। न्याय विभाग के अनुसार, 24 वर्ष से अधिक समय तक अमेरिकी वायु सेना में सेवा देने वाले पूर्व एफ-35 प्रशिक्षक पायलट ब्राउन ने कथित तौर पर अगस्त 2023 से चीनी सैन्य पायलटों (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स – PLAAF) को लड़ाकू विमान प्रशिक्षण प्रदान करने की साजिश रची। यह प्रशिक्षण अंतर्राष्ट्रीय शस्त्र व्यापार विनियम (ITAR) के तहत रक्षा सेवा माना जाता है, जिसके लिए स्टेट डिपार्टमेंट से लाइसेंस जरूरी था, जो ब्राउन के पास नहीं था।

    ब्राउन के सैन्य करियर में संवेदनशील इकाइयों का नेतृत्व, युद्ध अभियानों का संचालन और एफ-4, एफ-15, एफ-16, ए-10 तथा एफ-35 जैसे विमानों पर लड़ाकू पायलट एवं सिम्युलेटर प्रशिक्षक के रूप में सेवा शामिल थी। 1996 में सक्रिय सेवा छोड़ने के बाद उन्होंने वाणिज्यिक पायलट और अमेरिकी रक्षा ठेकेदारों के लिए अनुबंध सिम्युलेटर प्रशिक्षक के तौर पर काम किया। दिसंबर 2023 में ब्राउन चीन गए, जहां उन्होंने PLAAF पायलटों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। शिकायत के मुताबिक, पहले दिन उन्होंने अमेरिकी वायु सेना के बारे में तीन घंटे तक सवालों के जवाब दिए, दूसरे दिन खुद के बारे में प्रस्तुति दी, और फरवरी 2026 की शुरुआत तक अमेरिका लौटने तक सिम्युलेटर एवं उड़ान प्रशिक्षण संचालित किया। उन्होंने अमेरिकी वायु सेना के अभियानों पर विस्तृत जानकारी भी साझा की।

    एफबीआई के काउंटरइंटेलिजेंस और जासूसी प्रभाग के सहायक निदेशक रोमन रोजहाव्स्की ने कहा कि ब्राउन ने कथित तौर पर अपने देश के साथ विश्वासघात किया, क्योंकि उन्होंने चीनी पायलटों को उन लोगों के खिलाफ लड़ने का प्रशिक्षण दिया जिनकी रक्षा करने की उन्होंने शपथ ली थी। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ है। यह गिरफ्तारी 2017 में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के पूर्व पायलट डैनियल एडमंड डुग्गन के खिलाफ इसी तरह के आरोपों के बाद हुई है। न्याय विभाग ने जोर दिया कि चीन अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए नाटो और सहयोगी देशों के वर्तमान एवं पूर्व सैन्य कर्मियों को निशाना बनाना जारी रखे हुए है।

  • अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दागी नई बैलिस्टिक मिसाइल

    अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दागी नई बैलिस्टिक मिसाइल


    वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने नई सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है।
    ‘खैबर’ नाम की इस चौथी पीढ़ी की मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 2000 किलोमीटर बताई जा रही है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार मिसाइल का प्रक्षेपण एक गोपनीय स्थान से किया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्रीय सुरक्षा हालात संवेदनशील बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच सैन्य तथा कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। अमेरिका की ओर से खाड़ी क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की खबरें भी सामने आती रही हैं।

    परमाणु वार्ता का तीसरा दौर शुरू

    इसी बीच दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता का तीसरा दौर जेनेवा में शुरू हुआ। यह बातचीत ओमान की मध्यस्थता में हो रही है। वार्ता का उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करना और कूटनीतिक समाधान तलाशना है।

    ईरान ने परमाणु हथियार बनाने से किया इनकार

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि उनका देश परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम नहीं कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई पहले ही परमाणु हथियारों के विकास पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।

    पेजेशकियन के अनुसार, “जब सर्वोच्च नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु हथियार नहीं बनाए जाएंगे, तो ईरान उसी नीति पर कायम है।”

    पुराना विवाद, नई कोशिश

    गौरतलब है कि 2000 के दशक की शुरुआत में खामेनेई ने एक धार्मिक आदेश (फतवा) जारी कर परमाणु हथियारों के निर्माण को प्रतिबंधित बताया था। इसके बावजूद अमेरिका लगातार ईरान पर परमाणु क्षमता हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाता रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार, एक ओर जहां मिसाइल परीक्षण शक्ति प्रदर्शन का संकेत है, वहीं दूसरी ओर जारी कूटनीतिक वार्ता इस बात का संकेत देती है कि दोनों देश टकराव से बचते हुए समाधान की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं।

  • भारतीय सिनेमा का गौरव: ‘बूंग’ फिल्म ने BAFTA 2026 में चिल्ड्रन्स एंड फैमिली कैटेगरी में धमाकेदार सफलता

    भारतीय सिनेमा का गौरव: ‘बूंग’ फिल्म ने BAFTA 2026 में चिल्ड्रन्स एंड फैमिली कैटेगरी में धमाकेदार सफलता


    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का पल आया है, जब लक्ष्मीप्रिया देवी की फिल्म बूंग ने BAFTA फिल्म अवार्ड्स 2026 में सर्वश्रेष्ठ चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म का पुरस्कार जीता। सूचना और प्रसारण मंत्रालय और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने फिल्म निर्माता लक्ष्मीप्रिया देवी और बूंग की पूरी टीम को इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई दी।

    बूंग की सफलता भारतीय सिनेमा की विविधता और सार्थक कहानी कहने की परंपरा को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का प्रतीक है। यह पुरस्कार न केवल फिल्म के निर्माता और कलाकारों के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग की गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर बढ़ती सराहना को भी दर्शाता है।

    आपको बता दें कि बूंग की यात्रा 2023 में शुरू हुई थी। फिल्म को वर्क इन प्रोग्रेस लैब और फिल्म बाजार रिकमेंड्स के तहत फिल्म बाजार में पेश किया गया था। यह पहल होनहार फिल्म निर्माताओं को आगे बढ़ाने और उन्हें वैश्विक उद्योग से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी। इसके बाद फिल्म को 2024 में 55वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित किया गया, जहां इसे सर्वश्रेष्ठ डेब्यू डायरेक्टर कैटेगरी में चुना गया। इस सफलता ने फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समालोचक प्रशंसा दिलाई और इसकी पहचान पक्की की।

    सूचना और प्रसारण मंत्रालय और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने फिल्म के निर्माण और प्रदर्शन में सहयोग करने वाले विभिन्न प्लेटफॉर्म्स की भी सराहना की। फिल्म बाजार, वर्क इन प्रोग्रेस लैब और भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जैसे प्लेटफॉर्म फिल्म निर्माताओं को वैश्विक दर्शकों से जोड़ते हैं और रचनात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देते हैं। इस प्रकार बूंग ने न केवल अपने कंटेंट के दम पर नाम कमाया बल्कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की अंतर्राष्ट्रीय पहुंच को भी मजबूती दी।

    फिल्म के निर्माता लक्ष्मीप्रिया देवी ने कहा कि यह पुरस्कार उनकी पूरी टीम की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बूंग की कहानी बच्चों और परिवारों को जोड़ने के साथ-साथ जीवन के सकारात्मक संदेश देती है। इस पुरस्कार से भारतीय सिनेमा की नई और विविध कथाओं को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बूंग जैसी फिल्मों की सफलता यह दर्शाती है कि भारतीय फिल्म उद्योग केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक दर्शकों के लिए उच्च गुणवत्ता, भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक मूल्य भी पेश कर सकता है। इस उपलब्धि से फिल्म निर्माताओं में नए प्रोजेक्ट्स और नवाचार के लिए प्रेरणा मिलेगी।

  • इजरायल में पीएम मोदी को रिसीव करने भगवा ड्रेस पहनकर गईं नेतन्याहू की पत्नी

    इजरायल में पीएम मोदी को रिसीव करने भगवा ड्रेस पहनकर गईं नेतन्याहू की पत्नी

    तेलअवीव। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय इजरायल दौरे पर हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ उन्हें रिसीव करने पहुंचे। इस दौरान एक बेहद दिलचस्प नजारा देखने को मिला। असल में नेतन्याहू की पत्नी भी भगवा ड्रेस पहनकर आई हुई थीं।
    वह पीएम मोदी से हाथ मिलाकर उनका स्वागत कर रही थीं। इसी दौरान नेतन्याहू ने अपनी पत्नी सारा के ड्रेस के कलर की तरफ पीएम मोदी का ध्यान दिलाया। साथ ही पीएम मोदी की सदरी के पॉकेट पर लगे कपड़े के रंग की तरफ भी इशारा किया। यह देखते ही पीएम मोदी भी खुश हो गए और हंसते हुए बोले-दोनों का रंग भगवा ही है।

    इजरायल की दूसरी यात्रा
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दो दिन की इजरायल यात्रा पर बुधवार को तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे पहुंचे। यहां पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

    हवाई अड्डे पर पीएम मोदी का पारंपरिक स्वागत किया गया। उनके पहुंचने पर नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहाकि इजरायल में आपका स्वागत है , मेरे प्रिय मित्र नरेन्द्र मोदी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल की यह दूसरी यात्रा है। इससे पहले वह 2017 में इजरायल गए थे।

    इजरायली संसद को भी करेंगे संबोधित
    प्रधानमंत्री का दो दिन की यात्रा के दौरान नेतन्याहू के साथ द्विपक्षीय वार्ता के अलावा इजरायली संसद नेसेट को भी संबोधित करने का कार्यक्रम है। वह भारतीय समुदाय के लोगों से भी बात करेंगे। उनका इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से भी शिष्टाचार भेंट करेंगे।
    इससे पहले पीएम मोदी ने सुबह रवाना होने से पहले कहा था कि उनकी इजरायल यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे। साथ ही साझा विजन से दोनों देशों का भविष्य खुशहाल होगा।

    उन्होंने कहाकि भारत और इजरायल के बीच मजबूत और कई तरह की रणनीतिक साझेदारी है, जिसमें हाल के सालों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी और तेजी देखी गई है।

    पीएम मोदी ने कहाकि मैं प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ अपनी बातचीत का इंतज़ार कर रहा हूं। इसका मकसद विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि, जल प्रबंधन, प्रौद्योगिकी, रक्षा और सुरक्षा, व्यापार तथा निवेश के साथ ही लोगों के बीच संबंधों सहित अलग-अलग क्षेत्रों में हमारे सहयोग को और मजबूत करना है। हम आपसी फायदे क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी अपने विचार साझा करेंगे।

  • पाकिस्तान में न्यायपालिका पर सवाल: फर्जी डिग्री के आधार पर फैसले सुनाते रहे जज, पद से हटाए गए

    पाकिस्तान में न्यायपालिका पर सवाल: फर्जी डिग्री के आधार पर फैसले सुनाते रहे जज, पद से हटाए गए

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने नियुक्तियों की पारदर्शिता और डिग्री सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तारिक महमूद जहांगीरी नामक जज को कथित तौर पर फर्जी कानून की डिग्री के आधार पर वर्षों तक पद पर बने रहने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है।

    यह कार्रवाई इस्लामाबाद हाई कोर्ट के 116 पन्नों के विस्तृत फैसले के बाद की गई, जिसमें अदालत ने मामले को “गंभीर संस्थागत धोखाधड़ी” बताया।

    डिग्री शुरू से ही अवैध पाई गई

    अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि जहांगीरी की लॉ डिग्री वैध नहीं थी, इसलिए उनकी न्यायिक नियुक्ति भी कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं मानी जा सकती। कोर्ट के अनुसार, किसी भी न्यायिक पद के लिए शैक्षणिक योग्यता की प्रामाणिकता अनिवार्य है, और इस मामले में वही मूल आधार ही संदिग्ध पाया गया।

    विश्वविद्यालय रिकॉर्ड से हुआ खुलासा

    मीडिया रिपोर्ट, विशेषकर डॉन में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, अदालत को कराची विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से आधिकारिक रिकॉर्ड प्राप्त हुए। इन दस्तावेजों ने प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों को पूरी तरह फर्जी साबित कर दिया।

    जांच में यह भी सामने आया कि:

    • 1988 में जहांगीरी ने कथित तौर पर फर्जी नामांकन संख्या के साथ परीक्षा दी।

    • परीक्षा के दौरान नकल करते पकड़े गए और उन पर तीन वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया।

    • बाद में उन्होंने दंड स्वीकार नहीं किया और किसी अन्य छात्र के एनरोलमेंट नंबर का इस्तेमाल कर दोबारा परीक्षा देने का प्रयास किया।

    कॉलेज में प्रवेश का कोई रिकॉर्ड नहीं

    सुनवाई के दौरान संबंधित लॉ कॉलेज प्रशासन ने अदालत को बताया कि जहांगीरी ने संस्थान में कभी औपचारिक प्रवेश ही नहीं लिया था। अदालत ने उन्हें मूल दस्तावेज पेश करने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया, लेकिन वे ऐसा करने में असफल रहे।

    सुनवाई टालने की कोशिशें भी खारिज

    जहांगीरी ने फुल बेंच से सुनवाई की मांग, चीफ जस्टिस को मामले से अलग करने की अपील और कार्यवाही स्थगित कराने जैसे कई प्रयास किए। अदालत ने इन कदमों को “मामले को लंबा खींचने की रणनीति” बताते हुए खारिज कर दिया।

    अदालत की सख्त टिप्पणी

    कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर चुका था, तब संबंधित जज की जिम्मेदारी थी कि वह अपनी डिग्री की वैधता सिद्ध करें। ऐसा न कर पाने पर उन्हें पद से हटाना आवश्यक हो गया।

    पाकिस्तान में छिड़ी नई बहस

    यह मामला अब पाकिस्तान में न्यायिक नियुक्तियों की पारदर्शिता, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन और संस्थागत जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस का कारण बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद नियुक्ति प्रक्रिया की जांच और कड़े सत्यापन तंत्र की मांग तेज हो सकती है।

  • ट्रंप टैरिफ अमान्य होने के बाद आयातकों ने की रिफंड की मांग… निचली अदालतों में 1500 से ज्यादा केस दायर

    ट्रंप टैरिफ अमान्य होने के बाद आयातकों ने की रिफंड की मांग… निचली अदालतों में 1500 से ज्यादा केस दायर


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (American Supreme Court) द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) के ग्लोबल टैरिफ (Global Tariff) को अमान्य घोषित करने के बाद, इन शुल्कों को चुनौती देने वाले व्यवसायों ने निचली अदालतों में कानूनी कार्यवाही फिर से शुरू करने का अनुरोध किया है ताकि वे सरकार से रिफंड पाने की प्रक्रिया शुरू कर सकें। मंगलवार को, उन चुनौतियों को देने वालों के वकीलों, जिन्होंने न्यायालय के समक्ष सफलतापूर्वक मुकदमा लड़ा था, यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट से अनुरोध किया कि वह पिछले साल के अपने उस फैसले को औपचारिक रूप दे, जिसमें ट्रंप के तथाकथित “पारस्परिक” टैरिफ को अवैध घोषित किया गया था।

    इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट के बहुमत ने 20 फरवरी को बरकरार रखा था। इसके बाद यह मामला यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में वापस जाएगा, जहाँ अगले कदम तय होंगे, जिसमें यह भी शामिल होगा कि क्या आयातकों को उनका पैसा वापस मिलना चाहिए।


    रिफंड प्रक्रिया शुरू करने की मांग

    छोटे व्यवसायों के समूह के वकीलों ने ट्रेड कोर्ट में तीन जजों के पैनल से एक नया निषेधाज्ञा जारी करने का अनुरोध दाखिल किया, जो प्रशासन को टैरिफ नीति लागू करने से रोके और रिफंड प्रक्रिया शुरू करे।

    ब्लूमबर्ग न्यूज के विश्लेषण के अनुसार, अब तक 1,500 से अधिक रिफंड मुकदमे दायर किए जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश मुकदमे उन आयातकों ने दायर किए थे, जब सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में मामले की सुनवाई की थी, और ट्रेड कोर्ट ने उन्हें तब तक रोक दिया था जब तक जज फैसला नहीं दे देते।


    त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता

    बुधवार को, उन अन्य कंपनियों के वकीलों ने जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करते हुए रिफंड मुकदमे दायर किए थे, ट्रेड कोर्ट से इस सप्ताह या जल्द से जल्द सुनवाई आयोजित करने का अनुरोध किया। उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए तर्क दिया कि “वादी को और नुकसान और मुकदमेबाजी की जटिलता से बचा जा सके, जो हर गुजरते दिन के साथ बढ़ती जाती है।” पिछले साल लिखित दस्तावेजों में, न्याय विभाग के वकीलों ने ट्रेड कोर्ट को बताया था कि अगर मुकदमा जीत जाते हैं तो उन्हें ब्याज सहित रिफंड मिलेगा।


    ट्रंप के बयान से पैदा हुई अनिश्चितता

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घोषणा के तुरंत बाद, ट्रंप ने ऐसी टिप्पणी की जिससे संकेत मिला कि सरकार रिफंड का भुगतान करने का विरोध कर सकती है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस पर मुकदमा चलाना होगा,” और यह भी अनुमान लगाया कि इस मुद्दे को सुलझने में वर्षों लग सकते हैं। लिबर्टी जस्टिस सेंटर के वरिष्ठ वकील जेफरी श्वाब ने कहा कि राष्ट्रपति के बयानों ने “चीजों को थोड़ा धुंधला कर दिया है,” इसलिए वे ट्रेड कोर्ट से जल्द से जल्द स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं।


    व्यापक प्रभाव की संभावना

    छोटे व्यवसायों के वकीलों ने मंगलवार को ट्रेड कोर्ट को बताया कि इस मामले में अपनाई गई कोई भी रिफंड प्रक्रिया दावा करने वाली बाकी कंपनियों के लिए “जल्दी राहत प्रदान करने का खाका” बन सकती है। ट्रेड वकीलों का मानना है कि प्रशासन के लिए रिफंड का विरोध करना कानूनी रूप से कठिन होगा, क्योंकि न्याय विभाग ने न केवल मूल वादियों को भुगतान किए जाने की बात कही थी, बल्कि यह भी कहा था कि सरकार अन्य मामलों में रिफंड से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति जताएगी।


    नए टैरिफ की चुनौतियां

    सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट के तहत अवैध रूप से टैरिफ लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घोषणा के तुरंत बाद, ट्रंप ने एक अलग प्राधिकरण – 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत वैश्विक टैरिफ का एक नया दौर लगाने वाली घोषणा पर हस्ताक्षर किए। कानूनी विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की है कि प्रशासन को उन शुल्कों को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • ट्रंप ने अपने सबसे लंबे संबोधन में बोले 5 बड़े झूठ… US के मीडिया ने ही किया फैक्ट चेक

    ट्रंप ने अपने सबसे लंबे संबोधन में बोले 5 बड़े झूठ… US के मीडिया ने ही किया फैक्ट चेक


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन (State of the Union Address) में सबसे लंबा भाषण देकर इतिहास रच दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 8 जंगें रुकवाने का दावा किया तो वहीं अर्थव्यवस्था, टैरिफ वॉर समेत कई मसलों पर बढ़-चढ़कर दावे किए। डोनाल्ड ट्रंप दावे करने में आगे रहे हैं, लेकिन अकसर गलत तथ्य दे देते हैं। ऐसा ही मंगलवार की रात को भी हुआ, जब उन्होंने जनता के सामने कई गलत तथ्य रख दिए। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बोले गए झूठ ज्यादातर देर तक टिक नहीं सके। अमेरिका के ही कई अखबारों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया है।


    अर्थव्यवस्था, नौकरी और निवेश पर क्या गलत दावा

    डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमारी इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी दुनिया में हॉटेस्ट है। उनका दावा था कि हमारे पास काफी नौकरियां हैं। पहले के मुकाबले अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों के पास जॉब्स हैं। यह इतिहास में सबसे अधिक है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका में नौकरी पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा कोरोना काल के किसी भी साल के मुकाबले कम रहा है। अमेरिकी लेबर ब्यूरो के अनुसार 2025 में अमेरिका में सिर्फ 1 लाख 81 हजार ही नई नौकरियां जुड़ीं।


    एरिना के कत्ल में प्रवासी शख्स के शामिल होने का दावा, क्या सच

    अमेरिकी लीडर ने यह दावा भी किया कि एरिना जारुस्का का कत्ल एक प्रवासी ने किया था। उनका कहना कि एक खूंखार अपराधी ने इस कांड को अंजाम दिया, जो खुली सीमाओं से आ गया था। वह यहां मुक्त होकर घूम रहा था। लेकिन उनका यह फैक्ट भी गलत निकला। एरिना के कत्ल में गिरफ्तार डिकार्लोस ब्राउन जूनियर कोई प्रवासी नहीं है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका में बाहर से आने वाले लोग ही ज्यादातर हिंसा के जिम्मेदार रहे हैं।


    बिजली की कीमत कम होने की बात निकली गलत

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में की कीमतें घट रही हैं। इतनी कमी आई है कि यकीन नहीं होता। लेकिन सच्चाई कुछ और है। अमेरिका में प्रति परिवार ऊर्जा का बिल बीते एक साल में 6.7 पर्सेंट तक बढ़ गया है। वह लगातार कहते रहे हैं कि देश में बिजली की कीमत कम हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से कई यूटिलिटी कंपनियों ने मांग की है कि रेट बढ़ाए जाएं। यह इजाफा हुआ भी है। कहा जा रहा है कि 2035 तक 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी।


    गैस वाला बयान भी ट्रंप का झूठा ही साबित हुआ

    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में गैस की कीमत अब 1.99 डॉलर प्रति गैलन तक हो गई है। लेकिन बीते कुछ दिन पहले पर्यावरण को लेकर लगी पाबंदियों के चलते इसमें इजाफा होने की चर्चा है। इससे स्पष्ट है कि आने वाला समय रेट बढ़ने का रहेगा। यही नहीं कुछ राज्यों में अब भी कीमत 4.60 डॉलर प्रति गैलन है। इस तरह ट्रंप का दावा यहां भी गलत निकला है।


    8 जंगें रुकने का दावा भी झूठा, गाजा में अब भी हो रहीं मौतें

    अब बात करते हैं, डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध वाले दावों की। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती 10 महीनों में 8 जंगें रुकवा दीं। अब इस मामले में भी सच्चाई यह है कि अमेरिका का दखल 6 जंगों में ही रहा है। अन्य दो युद्ध ऐसे रहे हैं, जिसमें उसका कोई रोल नहीं रहा। इसके अलावा कई लोगों ने तो इन 6 में भी उसे कोई क्रेडिट नहीं दिया है। ट्रंप ने गाजा में सीजफायर का दावा किया है, लेकिन वहां अब भी इजरायल के हमले जारी हैं और हर दिन ही कुछ मारे जा रहे हैं।
     

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन (State of the Union Address) में सबसे लंबा भाषण देकर इतिहास रच दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 8 जंगें रुकवाने का दावा किया तो वहीं अर्थव्यवस्था, टैरिफ वॉर समेत कई मसलों पर बढ़-चढ़कर दावे किए। डोनाल्ड ट्रंप दावे करने में आगे रहे हैं, लेकिन अकसर गलत तथ्य दे देते हैं। ऐसा ही मंगलवार की रात को भी हुआ, जब उन्होंने जनता के सामने कई गलत तथ्य रख दिए। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बोले गए झूठ ज्यादातर देर तक टिक नहीं सके। अमेरिका के ही कई अखबारों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया है।


    अर्थव्यवस्था, नौकरी और निवेश पर क्या गलत दावा

    डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमारी इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी दुनिया में हॉटेस्ट है। उनका दावा था कि हमारे पास काफी नौकरियां हैं। पहले के मुकाबले अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों के पास जॉब्स हैं। यह इतिहास में सबसे अधिक है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका में नौकरी पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा कोरोना काल के किसी भी साल के मुकाबले कम रहा है। अमेरिकी लेबर ब्यूरो के अनुसार 2025 में अमेरिका में सिर्फ 1 लाख 81 हजार ही नई नौकरियां जुड़ीं।


    एरिना के कत्ल में प्रवासी शख्स के शामिल होने का दावा, क्या सच

    अमेरिकी लीडर ने यह दावा भी किया कि एरिना जारुस्का का कत्ल एक प्रवासी ने किया था। उनका कहना कि एक खूंखार अपराधी ने इस कांड को अंजाम दिया, जो खुली सीमाओं से आ गया था। वह यहां मुक्त होकर घूम रहा था। लेकिन उनका यह फैक्ट भी गलत निकला। एरिना के कत्ल में गिरफ्तार डिकार्लोस ब्राउन जूनियर कोई प्रवासी नहीं है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका में बाहर से आने वाले लोग ही ज्यादातर हिंसा के जिम्मेदार रहे हैं।


    बिजली की कीमत कम होने की बात निकली गलत

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में की कीमतें घट रही हैं। इतनी कमी आई है कि यकीन नहीं होता। लेकिन सच्चाई कुछ और है। अमेरिका में प्रति परिवार ऊर्जा का बिल बीते एक साल में 6.7 पर्सेंट तक बढ़ गया है। वह लगातार कहते रहे हैं कि देश में बिजली की कीमत कम हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से कई यूटिलिटी कंपनियों ने मांग की है कि रेट बढ़ाए जाएं। यह इजाफा हुआ भी है। कहा जा रहा है कि 2035 तक 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी।


    गैस वाला बयान भी ट्रंप का झूठा ही साबित हुआ

    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में गैस की कीमत अब 1.99 डॉलर प्रति गैलन तक हो गई है। लेकिन बीते कुछ दिन पहले पर्यावरण को लेकर लगी पाबंदियों के चलते इसमें इजाफा होने की चर्चा है। इससे स्पष्ट है कि आने वाला समय रेट बढ़ने का रहेगा। यही नहीं कुछ राज्यों में अब भी कीमत 4.60 डॉलर प्रति गैलन है। इस तरह ट्रंप का दावा यहां भी गलत निकला है।


    8 जंगें रुकने का दावा भी झूठा, गाजा में अब भी हो रहीं मौतें

    अब बात करते हैं, डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध वाले दावों की। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती 10 महीनों में 8 जंगें रुकवा दीं। अब इस मामले में भी सच्चाई यह है कि अमेरिका का दखल 6 जंगों में ही रहा है। अन्य दो युद्ध ऐसे रहे हैं, जिसमें उसका कोई रोल नहीं रहा। इसके अलावा कई लोगों ने तो इन 6 में भी उसे कोई क्रेडिट नहीं दिया है। ट्रंप ने गाजा में सीजफायर का दावा किया है, लेकिन वहां अब भी इजरायल के हमले जारी हैं और हर दिन ही कुछ मारे जा रहे हैं।

  • पाकिस्तानी यूनिवर्सिटी का अजीब ‘फरमान’ वायरल: साथ दिखे लड़का-लड़की तो करा देंगे निकाह?

    पाकिस्तानी यूनिवर्सिटी का अजीब ‘फरमान’ वायरल: साथ दिखे लड़का-लड़की तो करा देंगे निकाह?


    लाहौर।
    हमदर्द यूनिवर्सिटी इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा और ट्रोलिंग का विषय बनी हुई है। वजह बना रमजान के दौरान जारी बताया जा रहा एक कथित नोटिस, जिसमें कैंपस में लड़के और लड़की के साथ खड़े होने पर आपत्ति जताने और यहां तक कि उनका “निकाह” कराए जाने जैसी बात लिखी होने का दावा किया जा रहा है।


    वायरल नोटिस में क्या कहा गया?

    सोशल मीडिया पर फैल रहे स्क्रीनशॉट के अनुसार, छात्रों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि पवित्र महीने के दौरान किसी भी “कपल” का कैंपस में साथ खड़ा होना सख्त मना है।

    कथित तौर पर इसमें चेतावनी दी गई कि यदि कोई लड़का-लड़की साथ पाया गया तो उनका “तुरंत निकाह” करवा दिया जाएगा।

    इसके साथ ही छात्रों को संस्थान की “पवित्रता बनाए रखने” और अनावश्यक नजदीकी से बचने की सलाह देने की बात भी कही गई है।



    वायरल सामग्री में मजाकिया अंदाज में यह दावा भी किया जा रहा है कि नियम तोड़ने वालों को वलीमा (रिसेप्शन) का खर्च खुद उठाना होगा।


    असली या फर्जी? प्रामाणिकता पर सवाल

    इस कथित नोटिस की सत्यता को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    कई लोग इसे फर्जी बता रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ। विश्वविद्यालय की ओर से भी अब तक कोई औपचारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।


    सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लिए मजे

    नोटिस वायरल होते ही इंटरनेट पर मीम्स और मजेदार प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई—

    • “रिश्ता कराने का तरीका थोड़ा कैज़ुअल है।”

    • “जिनके घर वाले नहीं मान रहे, उनके लिए सुनहरा मौका!”

    • “अब तो क्रश के पास जाकर खड़े होना पड़ेगा।”

    • “ऐसी यूनिवर्सिटी में एडमिशन कैसे लें?”

    छात्रों और कंटेंट क्रिएटर्स ने रील्स बनाकर इस कथित आदेश का हास्यपूर्ण अंदाज में मजाक उड़ाया, जिससे मामला तेजी से फैल गया।


    बहस का मुद्दा क्या बना?

    चाहे नोटिस असली हो या फर्जी, लेकिन इस घटना ने कैंपस अनुशासन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर अपुष्ट सूचनाओं के तेज प्रसार को लेकर नई बहस छेड़ दी है—कि बिना पुष्टि के वायरल सामग्री किस तरह सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर सकती है।

  • नेतन्याहू ने मोदी को बताया ‘भाई’, कट्टरपंथ के खिलाफ ‘आयरन एलायंस’ बनाने की घोषणा

    नेतन्याहू ने मोदी को बताया ‘भाई’, कट्टरपंथ के खिलाफ ‘आयरन एलायंस’ बनाने की घोषणा


    यरुशलम।
    इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Indian Prime Minister Narendra Modi) की यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि वह इससे पहले कभी इतने भावुक नहीं हुए। इजराइल की संसद नेसेट में अपने संबोधन के दौरान नेतन्याहू ने मोदी को “महान मित्र” और “विश्व मंच के बड़े नेता” की संज्ञा दी।

    उन्होंने कहा, “नरेन्द्र, मेरे प्रिय मित्र, आपके यहां आने से मैं काफी भावुक हूं… मैं यह कहने का साहस करता हूं कि आप केवल मित्र ही नहीं, बल्कि भाई जैसे हैं।” नेतन्याहू ने दोनों देशों के बीच तकनीकी और रणनीतिक सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना और सहयोग कई गुना बढ़ा है।

    ‘कट्टरपंथी इस्लाम’ के खिलाफ आयरन एलायंस

    नेतन्याहू ने अपने भाषण में कहा कि भारत और इजराइल “कट्टरपंथी इस्लाम” के खतरे के खिलाफ एक “आयरन एलायंस” (मजबूत गठबंधन) का निर्माण करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देश आज पहले से अधिक मजबूत हैं और साझा मूल्यों — प्रगति, मानव गरिमा और पारस्परिक सम्मान — में विश्वास रखते हैं।

    उन्होंने 07 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद भारत के समर्थन के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया। नेतन्याहू ने इजराइल की कार्रवाई को “रक्षात्मक युद्ध” बताते हुए कहा कि यह मानवता और सत्य के भविष्य के लिए संघर्ष है।

    आईएमईसी और नए समझौते

    नेतन्याहू ने कहा कि भारत और इजराइल मिलकर अमेरिका समर्थित इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकॉनमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) पहल को आगे बढ़ा रहे हैं। इस परियोजना का उद्देश्य समुद्र और रेल मार्ग के जरिए भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ना है।

    उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर तभी सफल हो सकता है जब इसके मार्ग में स्थिर और सुरक्षित देश हों, और इस धुरी पर भारत और इजराइल से अधिक सुरक्षित देश कोई नहीं है।

    नेतन्याहू ने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान पर्यटन, संस्कृति, कृषि, जल प्रबंधन और आव्रजन जैसे क्षेत्रों में कई समझौतों को लागू किया जाएगा। उन्होंने इसे अब्राहम समझौते की भावना के अनुरूप शांति और सहयोग की दिशा में अहम कदम बताया।

    इससे पहले, तेल अवीव एयरपोर्ट पर इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। नेतन्याहू के आमंत्रण पर 25-26 फरवरी तक हो रहा यह दौरा भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

    तेल अवीव पहुंचने पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ उनका स्वागत किया गया। भारतीय प्रवासी समुदाय में इस दौरे को लेकर खासा उत्साह देखा गया। प्रवासियों ने इसे दोनों देशों के रिश्तों के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। इसी मौके पर भारतीय मूल की नेत्रहीन गायिका दीना सेमटे ने पीएम मोदी के समक्ष प्रस्तुति दी। मणिपुर से ताल्लुक रखने वाली दीना ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुति देने पर गर्व है और संगीत लोगों को जोड़ने का माध्यम है।

    उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद यह मोदी का दूसरा इजराइल दौरा है। इससे पहले वे 2017 में इजराइल गए थे, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। वर्ष 2018 में नेतन्याहू ने भारत का दौरा कर संबंधों को और मजबूती दी थी।

    इस बार की यात्रा को केवल द्विपक्षीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत-इजराइल संबंधों की लंबी ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा माना जा रहा है। दोनों देश रक्षा, प्रौद्योगिकी, जल प्रबंधन, कृषि और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। पीएम मोदी ने नेतन्याहू के साथ मुलाकात में टेक्नोलॉजी, वॉटर मैनेजमेंट, एग्रीकल्चर, टैलेंट पार्टनरशिप और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।

    इस यात्रा को भारत–इजराइल संबंधों में नई मजबूती और रणनीतिक साझेदारी के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

  • अमेरिकी टैरिफ से सोलर शेयरों में बड़ी गिरावट, वारी और प्रीमियर एनर्जीज टॉप लूजर..

    अमेरिकी टैरिफ से सोलर शेयरों में बड़ी गिरावट, वारी और प्रीमियर एनर्जीज टॉप लूजर..

    नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बुधवार को भारतीय सोलर आयात पर 126 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारतीय सोलर शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। यह टैरिफ उन देशों पर लगाया गया है जो अनुचित रूप से सब्सिडी देते हैं और अमेरिका के घरेलू सोलर उद्योग को नुकसान पहुंचाते हैं।

    इस फैसले के बाद वारी एनर्जीज के शेयर में कारोबार के दौरान 15 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। खबर लिखे जाने तक हल्की रिकवरी के बाद यह 10.83 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,697 रुपए पर कारोबार कर रहा था।

    प्रीमियर एनर्जीज का शेयर भी दबाव में रहा और फिलहाल यह 6.19 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 728.95 रुपए पर था। कारोबार के दौरान इस शेयर में करीब 14 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। इसके अलावा विक्रम सोलर का शेयर 5.67 प्रतिशत कमजोर होकर 174 रुपए पर था, जबकि कारोबार के दौरान 7.76 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।

    ट्रंप प्रशासन ने भारत के अलावा इंडोनेशिया और लाओस के सोलर उत्पादों पर भी क्रमश: 143 प्रतिशत और 81 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। 2025 की पहली छमाही में अमेरिका के सोलर मॉड्यूल आयात में इन तीन देशों की हिस्सेदारी कुल 57 प्रतिशत रही है। 2024 में अमेरिका को भारतीय सोलर निर्यात की वैल्यू 792.6 मिलियन डॉलर थी, जो 2022 की तुलना में नौ गुना अधिक है।

    अमेरिकी प्रशासन ने यह कार्रवाई यूएस सोलर ग्रुप की याचिका के आधार पर की है। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ देशों की सब्सिडी अमेरिकी सोलर उद्योग को नुकसान पहुंचा रही है।

    निवेशकों के लिए यह टैरिफ भारतीय सोलर कंपनियों के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि आगामी कारोबारी सत्र में बिकवाली और दबाव जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।