Category: International

  • सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप

    सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम के दावों के बीच हालात एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने सीजफायर तोड़ते हुए ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इसके बाद तेहरान ने साफ चेतावनी दी है कि अब किसी भी हमले का जवाब बेहद कड़े और सीधे सैन्य एक्शन से दिया जाएगा।

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने जास्क क्षेत्र के पास उस तेल टैंकर पर हमला किया, जो होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ रहा था। ईरान ने इसे युद्धविराम का खुला उल्लंघन बताया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर ईरान परमाणु समझौते पर आगे नहीं बढ़ता तो अमेरिका और भी बड़े हमले करेगा।

    ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया था, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि जवाबी कार्रवाई में ईरान की कई सैन्य नावों और ठिकानों को तबाह कर दिया गया। ट्रम्प ने दो टूक कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

    बढ़ते संघर्ष का सबसे बड़ा असर दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइन होर्मुज स्ट्रेट पर दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO के मुताबिक, संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र में करीब 1500 जहाज फंस गए हैं। इन जहाजों पर लगभग 20 हजार नाविक मौजूद हैं। इससे वैश्विक तेल सप्लाई, गैस कारोबार और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ने लगा है। कई देशों में ईंधन और जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    इस बीच अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच बैक चैनल बातचीत की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश 30 दिन के अस्थायी समझौते और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि जमीन पर जारी सैन्य गतिविधियां किसी स्थायी शांति की संभावना को कमजोर करती नजर आ रही हैं।

    ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ईरान का मिसाइल भंडार खत्म हो चुका है। अराघची ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह सक्रिय है और देश अपनी सुरक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनती है, अमेरिका सैन्य कार्रवाई शुरू कर देता है।

    उधर संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइल और तीन ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। वहीं लेबनान में भी तनाव तेजी से बढ़ रहा है। इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया है और दक्षिणी लेबनान में लगातार हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।

    भारत सरकार ने भी पश्चिम एशिया के हालात पर करीबी नजर बनाए रखी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए विशेष कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाने की तैयारी की गई है।

  • तमिलनाडु में विजय का सियासी विस्फोट! पाकिस्तान तक गूंजी TVK की जीत, दिग्गजों की हिली कुर्सी

    तमिलनाडु में विजय का सियासी विस्फोट! पाकिस्तान तक गूंजी TVK की जीत, दिग्गजों की हिली कुर्सी


    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने Vijay Thalapathy ने ऐसा राजनीतिक धमाका किया है, जिसकी चर्चा अब भारत ही नहीं बल्कि पाकिस्तान तक में हो रही है। हाल ही में आए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव नतीजों में विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की राजनीति के पुराने समीकरण हिला दिए। सिर्फ दो साल पहले राजनीति में उतरी पार्टी ने 234 में से 108 सीटें जीतकर खुद को राज्य की सबसे ताकतवर राजनीतिक ताकतों में शामिल कर लिया। हालांकि पार्टी बहुमत के आंकड़े से कुछ सीटें पीछे रह गई, लेकिन पहली बार चुनाव लड़कर इतना बड़ा प्रदर्शन करना अपने आप में ऐतिहासिक माना जा रहा है।

    विजय की इस सफलता ने पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी सुर्खियां बटोरी हैं। पाकिस्तान के चर्चित पत्रकार Rauf Klasra ने एक टीवी चर्चा के दौरान विजय की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि फिल्मी दुनिया के सुपरस्टार विजय ने राजनीति में आकर उन नेताओं को चुनौती दे दी, जिनके परिवार दशकों से सत्ता में बने हुए थे। रऊफ कलासरा ने खास तौर पर यह कहा कि सिर्फ दो साल में इतना बड़ा जनसमर्थन हासिल करना बेहद बड़ी बात है।

    उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री M. K. Stalin और उनके राजनीतिक परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि विजय ने ऐसे नेताओं को कड़ी टक्कर दी जिनके पिता और दादा तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पाकिस्तानी पत्रकार ने यह भी कहा कि विजय का नाम लोगों को तेजी से जोड़ता है और उनकी लोकप्रियता किसी बड़े राष्ट्रीय नेता जैसी बनती जा रही है।

    चुनाव परिणामों में TVK ने कई बड़े राजनीतिक दलों को झटका दिया। सत्तारूढ़ DMK को 59 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि AIADMK को 47 सीटें मिलीं। वहीं विजय खुद अपनी दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता, युवा वोटरों का समर्थन और भ्रष्टाचार विरोधी छवि ने TVK को तेजी से मजबूत बनाया।

    फिल्मों में सुपरस्टार की पहचान रखने वाले विजय अब तमिलनाडु की राजनीति में भी बड़े चेहरे के तौर पर उभर चुके हैं। दक्षिण भारत की राजनीति में यह बदलाव आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है।

  • Turkey-Indonesia Defense Deal: तुर्की के ड्रोन पावर पर भरोसा, इंडोनेशिया खरीदेगा दुनिया का पहला UCAV; एशिया में बदल सकते हैं सैन्य समीकरण

    Turkey-Indonesia Defense Deal: तुर्की के ड्रोन पावर पर भरोसा, इंडोनेशिया खरीदेगा दुनिया का पहला UCAV; एशिया में बदल सकते हैं सैन्य समीकरण


    नई दिल्ली। इंडोनेशिया और तुर्की  के बीच बड़ा रक्षा समझौता हुआ है, जिसने एशिया की सुरक्षा राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। इस डील के तहत इंडोनेशिया तुर्की से अत्याधुनिक Kizilelma UCAV (मानवरहित लड़ाकू विमान) खरीदेगा। खास बात यह है कि इंडोनेशिया इस ड्रोन फाइटर जेट का पहला विदेशी ग्राहक बन गया है। रक्षा विशेषज्ञ इसे तुर्की की बढ़ती सैन्य ताकत और ASEAN क्षेत्र में उसके प्रभाव विस्तार की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्की की एयरोस्पेस कंपनी Baykar Technologies और इंडोनेशिया की रक्षा कंपनी Republicorp के बीच 12 Kizilelma UCAV की डील पर हस्ताक्षर हुए हैं। इस समझौते में भविष्य में 48 अतिरिक्त विमानों की खरीद का विकल्प भी शामिल है। तुर्की की योजना 2028 से इन विमानों की डिलीवरी शुरू करने की है।

    डील की सबसे अहम बात यह है कि इंडोनेशिया में इन UCAV के उत्पादन और रखरखाव से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इससे इंडोनेशिया की घरेलू रक्षा क्षमता मजबूत होगी, वहीं तुर्की को दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े रक्षा बाजार में गहरी पकड़ बनाने का मौका मिलेगा।

    इंडोनेशिया पहले ही Baykar के TB2 और Akinci ड्रोन खरीद चुका है। इसके अलावा उसने TB3 कैरियर बेस्ड ड्रोन सिस्टम की 60 यूनिट खरीदने की योजना भी बनाई है। माना जा रहा है कि इन्हें इंडोनेशिया अपने विमानवाहक पोत पर तैनात कर सकता है।

    इससे पहले भी इंडोनेशिया तुर्की के पांचवीं पीढ़ी के KAAN स्टेल्थ फाइटर जेट खरीदने का समझौता कर चुका है। इसके साथ ही फ्रिगेट, मध्यम टैंक, एयर डिफेंस मिसाइल और बैलिस्टिक सिस्टम जैसे कई रक्षा सौदे दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ रहे हैं।

    Kizilelma को तुर्की का पहला स्वदेशी जेट-संचालित मानवरहित लड़ाकू विमान माना जाता है। इस UCAV ने 2022 में पहली उड़ान भरी थी। इसे एयर-टू-एयर कॉम्बैट, एयर-टू-ग्राउंड अटैक, निगरानी, टोही, मिसाइल स्ट्राइक और दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने जैसे मिशनों के लिए तैयार किया गया है।

    कंपनी का दावा है कि यह AI आधारित सिस्टम से लैस है और इसे विमानवाहक पोत से भी ऑपरेट किया जा सकता है। इसकी अधिकतम गति करीब 800 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि यह 1,500 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि तुर्की और इंडोनेशिया की यह बढ़ती सैन्य साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। खासकर ऐसे समय में जब तुर्की का झुकाव पाकिस्तान के पक्ष में माना जाता है, भारत भी अपने पड़ोस में हो रहे इन रक्षा समझौतों पर करीबी नजर बनाए हुए है।

  • Dollar vs Yuan: चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत से अमेरिका चिंतित, युआन के बढ़ते असर पर ट्रंप प्रशासन को चेतावनी

    Dollar vs Yuan: चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत से अमेरिका चिंतित, युआन के बढ़ते असर पर ट्रंप प्रशासन को चेतावनी


    नई दिल्ली। वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अमेरिकी डॉलर की बादशाहत को अब चीन की करेंसी युआन से चुनौती मिलती दिखाई दे रही है। चीन लगातार अपने वित्तीय प्रभाव को बढ़ाने और डॉलर के विकल्प के तौर पर युआन को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, जिसे लेकर अमेरिका में चिंता बढ़ गई है। इसी बीच अमेरिकी सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह ने सीनेट में प्रस्ताव पेश कर ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दी है कि चीन समानांतर वैश्विक वित्तीय ढांचा खड़ा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    अमेरिकी सांसदों ने जताई चिंता
    रिपब्लिकन सीनेटर टेड बड और डेमोक्रेट सीनेटर जीन शाहीन द्वारा पेश प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिकी डॉलर का वैश्विक रिजर्व करेंसी बने रहना अमेरिका की आर्थिक ताकत और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

    सीनेटरों ने चेतावनी दी कि चीन युआन के जरिए ऐसा वित्तीय नेटवर्क तैयार कर रहा है, जो भविष्य में अमेरिका और उसके सहयोगियों के प्रभाव को कमजोर कर सकता है।

    डॉलर की हिस्सेदारी में गिरावट
    प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि 1999 में वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी करीब 71% थी, जो 2025 की तीसरी तिमाही तक घटकर 56.82% रह गई है। हालांकि युआन की हिस्सेदारी अभी भी सीमित है, लेकिन चीन लगातार उसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भुगतान प्रणाली में आगे बढ़ा रहा है।

    चीन कैसे बढ़ा रहा है युआन का असर?
    अमेरिकी सांसदों ने कहा कि चीन अपनी Belt and Road Initiative (BRI) के जरिए विकासशील देशों में भारी निवेश कर आर्थिक निर्भरता बढ़ा रहा है। 2013 से अब तक चीन इस परियोजना के तहत दुनिया भर में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश कर चुका है।

    इसके अलावा चीन का Cross-Border Interbank Payment System (CIPS) भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसे SWIFT सिस्टम के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक 1700 से ज्यादा बैंक अब इस नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।

    अमेरिका को किस बात का डर?
    अमेरिकी सांसदों का मानना है कि यदि भविष्य में ताइवान या हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कोई बड़ा संकट पैदा होता है, तो चीन का वैकल्पिक वित्तीय नेटवर्क पश्चिमी देशों की आर्थिक पकड़ को कमजोर कर सकता है।

    इसी वजह से अमेरिका अब अपने सहयोगी देशों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने और विकासशील देशों में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति पर जोर दे रहा है।

    वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा
    विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में डॉलर और युआन के बीच आर्थिक प्रभाव की यह प्रतिस्पर्धा वैश्विक व्यापार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है।

  • US-Cuba Relations: ट्रंप ने क्यूबा पर हमले की अटकलों को किया खारिज, लूला बोले- सैन्य कार्रवाई की कोई योजना नहीं

    US-Cuba Relations: ट्रंप ने क्यूबा पर हमले की अटकलों को किया खारिज, लूला बोले- सैन्य कार्रवाई की कोई योजना नहीं



    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा की व्हाइट हाउस में हुई बंद कमरे की अहम बैठक के बाद बड़ा बयान सामने आया है। ब्राजीलियाई राष्ट्रपति लूला ने दावा किया कि अमेरिका की क्यूबा पर हमला करने की कोई योजना नहीं है।

    करीब ढाई घंटे चली इस बैठक में क्यूबा, क्षेत्रीय सुरक्षा और लैटिन अमेरिका की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद वाशिंगटन स्थित ब्राजील दूतावास में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए लूला ने कहा कि ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि वह क्यूबा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं चाहते।

    लूला बोले- बातचीत से हल चाहता है क्यूबा
    ब्राजीलियाई राष्ट्रपति ने कहा कि क्यूबा लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और अब वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। लूला के मुताबिक, लगातार लगे प्रतिबंधों ने क्यूबा के विकास और उसकी आर्थिक स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।उन्होंने इस मुलाकात को सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संवाद जरूरी है।

    अमेरिका की नीति अब भी सख्त
    हालांकि ट्रंप के बयान के बावजूद अमेरिका ने क्यूबा पर दबाव बनाए रखा है। हाल ही में अमेरिका ने क्यूबा की कई कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं।

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि क्यूबा की सैन्य कंपनी GAISA और खनन क्षेत्र से जुड़ी कुछ संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। इन प्रतिबंधों का असर क्यूबा-कनाडा साझेदारी वाली कंपनी Moa Nickel पर भी पड़ा है।

    क्यूबा पर बढ़ता आर्थिक दबाव
    अमेरिका का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य क्यूबा सरकार पर दबाव बनाना है। वहीं आलोचकों का मानना है कि इन कदमों से क्यूबा की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर बोझ बढ़ेगा।ट्रंप और लूला की मुलाकात के बाद फिलहाल क्यूबा पर सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं कम होती दिख रही हैं, लेकिन अमेरिका-क्यूबा संबंधों में तनाव अब भी बरकरार है।

  • West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने

    West Asia Crisis: युद्धविराम के बावजूद भड़का तनाव, लेबनान में इस्राइल का बड़ा एक्शन; ईरान-अमेरिका आमने-सामने



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू होने के बावजूद हालात लगातार विस्फोटक बने हुए हैं। दक्षिणी लेबनान में इस्राइल ने सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा टकराव और गहरा गया है। पूरे क्षेत्र में एक बार फिर बड़े संघर्ष का खतरा मंडराने लगा है।

    लेबनान के गांव को खाली करने का आदेश
    इस्राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के अल-अब्बासियाह गांव के लोगों को तत्काल इलाका खाली करने का आदेश दिया है। इस्राइल के अरबी भाषा के प्रवक्ता अविचाई अद्राई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर लोगों से गांव छोड़कर कम से कम 1000 मीटर दूर खुले इलाकों में जाने को कहा।

    युद्धविराम के बावजूद दक्षिण लेबनान में इस्राइली हवाई हमले और सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हिजबुल्लाह और इस्राइली सेना के बीच रुक-रुक कर झड़पें भी जारी हैं, जिससे स्थानीय लोगों में डर और पलायन का माहौल बना हुआ है।

    दक्षिण लेबनान में हवाई हमला, 11 लोगों की मौत
    अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्राइल ने नबातियेह जिले के दुएर, हारौफ और हब्बौश कस्बों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में 11 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। वहीं 36 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका-ईरान आमने-सामने
    उधर, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के तीन बड़े युद्धपोत सुरक्षित हैं और जवाबी कार्रवाई में ईरानी हमलावरों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई करेगा।

    ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
    ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन और तेल टैंकरों पर हमला करने का आरोप लगाया है। ईरानी सेना के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज जलमार्ग और फुजैराह के पास जहाजों को निशाना बनाया, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य जहाजों पर जवाबी हमला किया। ईरान ने दावा किया कि उसकी जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी जहाजों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही तेहरान ने साफ कहा कि किसी भी हमले का “बिना हिचकिचाहट करारा जवाब” दिया जाएगा।

    खाड़ी क्षेत्र से 5 भारतीयों की सुरक्षित वापसी
    इस बीच लेबनान स्थित भारतीय दूतावास ने खाड़ी क्षेत्र में फंसे पांच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। दूतावास ने लेबनानी प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया है।पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच दुनिया की नजर अब अमेरिका, ईरान और इस्राइल की अगली चाल पर टिकी हुई है।

  • जर्मनी में बढ़ी भारतीय स्किल्ड वर्कर्स की डिमांड, UN में जर्मन अधिकारी बोले- भारत सबसे अहम साझेदार

    जर्मनी में बढ़ी भारतीय स्किल्ड वर्कर्स की डिमांड, UN में जर्मन अधिकारी बोले- भारत सबसे अहम साझेदार

    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जर्मनी ने भारतीय स्किल्ड वर्कर्स की जमकर सराहना की। जर्मनी के बहुपक्षीय मामलों के कमिश्नर फ्लोरियन लॉडी ने कहा कि स्किल्ड माइग्रेशन के लिए भारत जर्मनी के सबसे महत्वपूर्ण और पसंदीदा साझेदार देशों में शामिल है।

    जर्मनी के लिए ‘ट्रिपल विन’ साबित हो रहे भारतीय
    भारत के यूएन मिशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में फ्लोरियन लॉडी ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच माइग्रेशन सहयोग दोनों देशों और कामगारों के लिए “ट्रिपल विन” है। इससे भारतीय युवाओं को बेहतर अवसर मिल रहे हैं, जर्मनी को कुशल श्रमिक मिल रहे हैं और भारत के विशाल कार्यबल को वैश्विक पहचान मिल रही है।

    उन्होंने कहा कि जर्मनी में भारतीय माइग्रेंट्स बेहद क्वालिफाइड हैं, खासकर विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में। उनकी आय जर्मनी की औसत आय से भी अधिक है, जो उनकी योग्यता को दर्शाती है।

    2025 में 1.8 लाख भारतीयों ने जर्मन वर्कफोर्स में दिया योगदान
    लॉडी के मुताबिक, अकेले 2025 में करीब 1,80,000 भारतीय जर्मनी की वर्कफोर्स का हिस्सा बने हैं। पिछले 10 वर्षों में यह संख्या 656 फीसदी बढ़ी है, जो दोनों देशों के बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।

    उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी लोकतंत्र, स्वतंत्रता और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था जैसे साझा मूल्यों के कारण मजबूत साझेदार बन चुके हैं।

    वीजा और डिग्री प्रक्रिया हो रही आसान
    जर्मन अधिकारी ने बताया कि 2022 में हुए Migration and Mobility Partnership Agreement (MMPA) के बाद स्किल्ड वर्कर्स, छात्रों और रिसर्चर्स के लिए जर्मनी जाने की प्रक्रिया आसान हुई है।

    अब वीजा प्रक्रिया को डिजिटल और तेज बनाया जा रहा है, जबकि डिग्री रिकग्निशन और जर्मन भाषा प्रशिक्षण को भी अधिक सुलभ किया जा रहा है।

    जर्मनी में पढ़ रहे 60 हजार से ज्यादा भारतीय छात्र
    फ्लोरियन लॉडी ने बताया कि लगातार तीसरे साल 60,000 से ज्यादा भारतीय छात्र जर्मनी के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं। भारतीय छात्र अब वहां सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र समूह बन चुके हैं। इनमें से आधे से ज्यादा छात्र पढ़ाई पूरी होने के बाद जर्मनी में नौकरी भी हासिल कर लेते हैं।इसके अलावा करीब 10,000 भारतीय अप्रेंटिस जर्मनी के प्रतिष्ठित वोकेशनल ट्रेनिंग सिस्टम के तहत प्रशिक्षण ले रहे हैं।

  • ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी अदालत का बड़ा झटका, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बढ़ी

    ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी अदालत का बड़ा झटका, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बढ़ी


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ को गैर-कानूनी बताते हुए रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद दुनिया भर में अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर नई बहस छिड़ गई है और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (BTA) पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

    अदालत ने क्यों रद्द किए टैरिफ?
    अमेरिकी संघीय अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत मिली सीमित शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। अदालत के मुताबिक, राष्ट्रपति को इस तरह व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं था। ट्रंप ने फरवरी में 150 दिनों के लिए 10% टैरिफ लागू किए थे, जिन्हें उन्होंने अमेरिकी उद्योगों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया था। लेकिन अदालत ने इन्हें कानून के दायरे से बाहर माना।

    भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?
    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की व्यापार नीति में लगातार हो रहे कानूनी बदलाव भारत के लिए चिंता का विषय हैं। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन मौजूदा हालात में इस समझौते पर जल्दबाजी भारत के लिए जोखिम भरी हो सकती है।

    ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का मानना है कि जब तक अमेरिका अपनी व्यापार नीति को स्थिर और भरोसेमंद नहीं बनाता, तब तक भारत को किसी बड़े व्यापारिक समझौते में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

    अमेरिका क्या चाहता है?
    विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका चाहता है कि भारत अपने आयात शुल्क कम करे या खत्म करे, जबकि खुद अमेरिका अपने “मोस्ट फेवर्ड नेशन” (MFN) टैरिफ में बड़ी कटौती करने को तैयार नहीं दिख रहा। ऐसे में भारत को व्यापारिक संतुलन बनाए रखने में सावधानी बरतनी होगी।

    क्या पूरी दुनिया पर तुरंत असर पड़ेगा?
    फिलहाल अदालत का फैसला केवल उन पक्षों पर लागू हुआ है जिन्होंने यह मामला दायर किया था। हालांकि माना जा रहा है कि इस फैसले का असर आगे चलकर अमेरिका की पूरी व्यापार नीति पर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन अब फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी कर सकता है। साथ ही धारा 301 और धारा 232 जैसे अन्य सख्त कानूनों के जरिए व्यापारिक दबाव बढ़ाने की कोशिश भी की जा सकती है।

    WTO और वैश्विक व्यापार को राहत
    विश्व व्यापार संगठन (WTO) से जुड़े विशेषज्ञों ने अदालत के फैसले को वैश्विक व्यापार नियमों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। उनका कहना है कि इससे अमेरिका की व्यापार प्रणाली फिर पुराने MFN ढांचे की ओर लौट सकती है।

    भारत के लिए क्या है रणनीति?
    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत को सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए। अमेरिका की घरेलू व्यापार नीतियों में स्थिरता आने तक किसी दीर्घकालिक समझौते से बचना भारत के हित में हो सकता है। कई अन्य देश भी अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक समझौतों पर दोबारा विचार कर रहे हैं।

  • बीजिंग में भारत की नई कूटनीतिक शुरुआत, विक्रम दुरईस्वामी ने संभाली जिम्मेदारी; चीन को सौंपे साख पत्र

    बीजिंग में भारत की नई कूटनीतिक शुरुआत, विक्रम दुरईस्वामी ने संभाली जिम्मेदारी; चीन को सौंपे साख पत्र


    नई दिल्ली। भारत और चीन के रिश्तों के बीच नए दौर की शुरुआत के संकेत देते हुए वरिष्ठ राजनयिक विक्रम दुरईस्वामी ने चीन में भारत के नए राजदूत के रूप में औपचारिक जिम्मेदारी संभाल ली है। उन्होंने बीजिंग में चीन के सहायक विदेश मंत्री और प्रोटोकॉल विभाग के महानिदेशक होंग लेई को अपने साख पत्रों (क्रेडेंशियल्स) की प्रति सौंपी।

    इस दौरान दोनों देशों के अधिकारियों की मौजूदगी में राजनयिक परंपराओं के तहत औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। माना जा रहा है कि दुरईस्वामी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत और चीन कई संवेदनशील मुद्दों के बीच संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।

    भारतीय दूतावास में आयोजित हुआ विशेष समारोह
    गुरुवार को बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने भी हिस्सा लिया।

    भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, सटीक कार्रवाई और दृढ़ संकल्प को याद किया गया। साथ ही पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया गया।

    अनुभवी राजनयिक हैं विक्रम दुरईस्वामी
    विक्रम दुरईस्वामी 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं और उन्हें विदेश नीति व अंतरराष्ट्रीय संबंधों का लंबा अनुभव है। चीन में नियुक्ति से पहले वह ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।

    बीजिंग पहुंचने पर उनका चीनी अधिकारियों और भारतीय दूतावास के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने स्वागत किया। विशेषज्ञों का मानना है कि दुरईस्वामी की कूटनीतिक समझ आने वाले समय में भारत-चीन संबंधों को नई दिशा दे सकती है।
  • क्रूज शिप पर फैला हंतावायरस, 3 की मौत; जहाज में 2 भारतीय भी मौजूद, WHO अलर्ट पर

    क्रूज शिप पर फैला हंतावायरस, 3 की मौत; जहाज में 2 भारतीय भी मौजूद, WHO अलर्ट पर

    नई दिल्ली। अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे डच क्रूज शिप MV Hondius पर हंतावायरस संक्रमण के मामले सामने आने के बाद वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। अब तक जहाज पर 5 संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है, जबकि 3 लोगों की मौत हो चुकी है। जहाज में 2 भारतीय नागरिक भी मौजूद बताए जा रहे हैं।

    WHO बोला- गंभीर मामला, लेकिन कोरोना जैसा खतरा नहीं
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने घटना को गंभीर बताया है, हालांकि फिलहाल आम लोगों के लिए बड़े खतरे की आशंका कम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हंतावायरस कोरोना की तरह तेजी से इंसानों में नहीं फैलता।

    नीदरलैंड के लीडेन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की डॉक्टर करिन एलेन वेल्डकैंप ने कहा कि हंतावायरस का इंसान से इंसान में संक्रमण बेहद सीमित होता है और इसका फैलाव कोविड-19 जितना तेज नहीं है।

    मरीजों को आइसोलेशन में रखा गया
    जहाज पर संक्रमित पाए गए लोगों को अलग आइसोलेशन में रखा गया है। मेडिकल टीम लगातार निगरानी कर रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, मरीजों में लक्षण खत्म होने और रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही आइसोलेशन हटाया जाएगा।

    विशेषज्ञों ने बताया कि हंतावायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड लंबा हो सकता है। कुछ मामलों में लक्षण 6 हफ्ते तक बाद में भी सामने आ सकते हैं। इसी वजह से संक्रमितों और संपर्क में आए लोगों को लंबे समय तक क्वारंटाइन में रखा जा रहा है।

    एंडीज स्ट्रेन का शक
    WHO के अनुसार मौत के मामलों में एंडीज स्ट्रेन होने की आशंका है। यह हंतावायरस का ऐसा प्रकार है, जो कुछ स्थितियों में इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। यह स्ट्रेन मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका के अर्जेंटीना और चिली में पाया जाता है।

    जांच में पता चला है कि शुरुआती संक्रमित दंपती यात्रा से पहले अर्जेंटीना, चिली और उरुग्वे में बर्ड वॉचिंग ट्रिप पर गए थे, जहां वायरस फैलाने वाले चूहों की प्रजातियां पाई जाती हैं।

    कई देशों को अलर्ट
    170 यात्रियों और 71 क्रू सदस्यों वाले इस जहाज ने मार्च में अर्जेंटीना से यात्रा शुरू की थी और अब स्पेन के कैनरी आइलैंड की ओर बढ़ रहा है। WHO ने ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और सिंगापुर समेत 12 देशों को अलर्ट जारी किया है।क्रूज कंपनी और स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।