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  • वीजा प्रक्रिया होगी हाईटेक ट्रंप प्रशासन एआई और मोबाइल ऐप से बदलेगा अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम

    वीजा प्रक्रिया होगी हाईटेक ट्रंप प्रशासन एआई और मोबाइल ऐप से बदलेगा अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम


    नई दिल्ली । अमेरिका की ट्रंप सरकार वीजा प्रोसेसिंग और कानूनी इमिग्रेशन सेवाओं में बड़ा डिजिटल बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नई तकनीक और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए पूरी इमिग्रेशन प्रक्रिया को पहले से अधिक तेज सुरक्षित और पारदर्शी बनाना चाहती है। इस पहल का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया में होने वाली देरी कम करना कागजी कार्रवाई घटाना और सुरक्षा जांच को अधिक प्रभावी बनाना है। इससे भविष्य में लाखों वीजा आवेदकों को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब कमेटी के समक्ष बताया कि गृह सुरक्षा विभाग तेजी से इमिग्रेशन सिस्टम का आधुनिकीकरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग ऐसा ऑटोमेटेड प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से आवेदन प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाएगा और मानवीय त्रुटियों को काफी हद तक कम करेगा।

    मुलिन के अनुसार पहला एआई आधारित प्लेटफॉर्म अगले 30 दिनों के भीतर शुरू किया जाएगा। शुरुआती चरण में इसका इस्तेमाल डेफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स यानी डीएसीए कार्यक्रम के लंबित मामलों के निपटारे के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे वर्षों से लंबित आवेदनों का तेजी से समाधान संभव होगा और आगे आने वाले आवेदनों का भी शीघ्र निस्तारण किया जा सकेगा।

    सरकार आवेदन प्रक्रिया में होने वाली सामान्य गलतियों को भी समाप्त करना चाहती है। इसी उद्देश्य से ऐसा डिजिटल सिस्टम विकसित किया जा रहा है जिसमें अधूरा या गलत आवेदन जमा ही नहीं किया जा सकेगा। इससे बार बार दस्तावेज लौटने और सुधार के कारण होने वाली देरी कम होगी। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा तकनीक इस बदलाव को संभव बना सकती है और अब जरूरत केवल उसे व्यापक स्तर पर लागू करने की है।

    गृह सुरक्षा विभाग वाणिज्य विभाग के साथ मिलकर एक आधुनिक मोबाइल एप्लीकेशन भी विकसित कर रहा है। इस ऐप के माध्यम से आवेदक अपने दस्तावेज जमा कर सकेंगे आवेदन की स्थिति देख सकेंगे और आवश्यक प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से पूरी कर पाएंगे। मार्कवेन मुलिन ने बताया कि उन्होंने इस योजना की जानकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी दी है और राष्ट्रपति ने इस पहल का समर्थन किया है।

    सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक अपनाने से न केवल आवेदकों को सुविधा मिलेगी बल्कि उद्योग जगत और नियोक्ताओं को भी लाभ होगा। वीजा प्रक्रिया में होने वाली देरी का असर सीधे अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार पर पड़ता है। इसलिए सरकार तकनीक के जरिए दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है।

    मुलिन ने बताया कि एच टू ए कृषि वीजा की प्रोसेसिंग अवधि पहले ही घटाकर लगभग 15 दिन कर दी गई है। अब सरकार डेयरी फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी दूर करने के लिए भी नए विकल्पों पर विचार कर रही है क्योंकि वर्तमान वीजा नियम वहां की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं।

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछली सरकार के दौरान स्वीकृत कई इमिग्रेशन मामलों की दोबारा जांच की जा रही है ताकि सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाया जा सके। इसके लिए अतिरिक्त स्क्रीनिंग सिस्टम भी विकसित किए गए हैं जिससे केवल पात्र और नियमों के अनुरूप आवेदकों को ही मंजूरी मिले।

    भारत अमेरिका में पढ़ाई रोजगार और उच्च कौशल वाले पेशेवरों के लिए सबसे बड़े स्रोत देशों में शामिल है। ऐसे में यदि एआई आधारित वीजा प्रोसेसिंग सफल होती है तो हजारों भारतीय छात्रों पेशेवरों और कानूनी आवेदकों को तेज सेवा और बेहतर डिजिटल अनुभव का लाभ मिल सकता है। हालांकि अंतिम मंजूरी मौजूदा अमेरिकी इमिग्रेशन कानूनों और सुरक्षा मानकों के अनुसार ही दी जाएगी।

  • बढ़ते साइबर हमलों से निपटने की तैयारी में अमेरिका ट्रंप प्रशासन करेगा साइबर रक्षा एजेंसी का बड़ा पुनर्गठन

    बढ़ते साइबर हमलों से निपटने की तैयारी में अमेरिका ट्रंप प्रशासन करेगा साइबर रक्षा एजेंसी का बड़ा पुनर्गठन


    नई दिल्ली । दुनिया भर में तेजी से बढ़ते साइबर हमलों और डिजिटल जासूसी की घटनाओं के बीच अमेरिका अपनी साइबर सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी साइबर रक्षा एजेंसी साइबर सिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी यानी सीआईएसए का व्यापक पुनर्गठन किया जाएगा ताकि चीन रूस ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों से मिलने वाली साइबर चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

    अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब कमेटी के समक्ष कहा कि मौजूदा समय में साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा बन चुकी है। उनके अनुसार विदेशी साइबर हमले केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं हैं बल्कि निजी कंपनियों बैंकिंग नेटवर्क ऊर्जा क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में सीआईएसए की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

    मुलिन ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में एजेंसी अपनी मूल जिम्मेदारियों से भटक गई थी और अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सकी। उन्होंने कहा कि अब सरकार का लक्ष्य केवल एजेंसी को दोबारा सक्रिय करना नहीं बल्कि उसे दुनिया की सबसे सक्षम साइबर सुरक्षा संस्थाओं में शामिल करना है। इसके लिए नए नेतृत्व की नियुक्ति की जा रही है और अनुभवी विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा ताकि एजेंसी आधुनिक साइबर खतरों का तेजी से जवाब देने में सक्षम बन सके।

    उन्होंने बताया कि फिलहाल एजेंसी अपनी जरूरत के मुकाबले लगभग आधे कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। सरकार का अनुमान है कि करीब 600 नए विशेषज्ञों की भर्ती से इसकी कार्यक्षमता में बड़ा सुधार आएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी पुराने पदों को भरना जरूरी नहीं है बल्कि जरूरत के अनुसार विशेषज्ञता आधारित नियुक्तियां की जाएंगी।

    गृह सुरक्षा सचिव के अनुसार एजेंसी का पुनर्गठन एक लंबी प्रक्रिया होगी और नए निदेशक के कार्यभार संभालने के बाद इसे पूरी तरह प्रभावी बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है। इस दौरान संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के साथ तकनीकी क्षमताओं को भी नई दिशा दी जाएगी।

    मुलिन ने सरकार और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर साझेदारी पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि मेटा गूगल जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियां अकेले साइबर अपराधियों और विदेशी हैकर समूहों का मुकाबला नहीं कर सकतीं। इसके लिए सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों के बीच सूचनाओं के आदान प्रदान तथा संयुक्त रणनीति की आवश्यकता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि गृह सुरक्षा विभाग अपने आंतरिक नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है ताकि अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं को खत्म किया जा सके और साइबर ऑपरेशन अधिक तेज और प्रभावी बन सकें। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तेजी से विकसित हो रही डिजिटल तकनीकों को देखते हुए भविष्य में कांग्रेस से नए कानूनी दिशा निर्देश भी मांगे जा सकते हैं।

    अमेरिका लगातार अपने सहयोगी देशों के साथ साइबर सुरक्षा सहयोग को भी मजबूत कर रहा है। भारत सहित कई साझेदार देशों के साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा साइबर रेजिलिएंस और उभरती तकनीकों की सुरक्षा को लेकर संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में साइबर युद्ध और डिजिटल सुरक्षा किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का सबसे अहम आधार बनने वाले हैं और इसी दिशा में अमेरिका अपनी तैयारियों को नई गति दे रहा है।

  • 7.5 तीव्रता के भूकंप ने वेनेजुएला को झकझोरा, 235 लोगों की मौत, बचाव अभियान तेज, अंतरराष्ट्रीय सहायता जुटाने में सरकार सक्रिय

    7.5 तीव्रता के भूकंप ने वेनेजुएला को झकझोरा, 235 लोगों की मौत, बचाव अभियान तेज, अंतरराष्ट्रीय सहायता जुटाने में सरकार सक्रिय


    नई दिल्ली । वेनेजुएला में बुधवार शाम आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है। शुरुआती रिपोर्टों के मुकाबले हालात कहीं अधिक गंभीर साबित हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 235 हो गई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं और कई अब भी मलबे में फंसे हुए हैं। लगातार चल रहे राहत एवं बचाव अभियान के बीच सरकार ने पुनर्वास और पुनर्निर्माण की दिशा में भी बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं।

    समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज करने के लिए कई अहम निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने निजी कंपनियों को भारी मशीनें और मलबा हटाने वाले उपकरण तत्काल उपलब्ध कराने का आदेश दिया है ताकि बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही सरकार ने 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर का विशेष राहत कोष बनाने का फैसला किया है जिससे प्रभावित परिवारों और क्षेत्रों को आर्थिक सहायता मिल सके। कारोबारियों को राहत देने के लिए विशेष ऋण सुविधा भी शुरू की जा रही है ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को जल्द दोबारा पटरी पर लाया जा सके।

    नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने बताया कि यह देश में कई दशकों बाद आई सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। उनके अनुसार करीब 200 लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका है। बचाव दल दिन रात अभियान चला रहे हैं और समय के साथ जीवन बचाने की चुनौती लगातार कठिन होती जा रही है। उन्होंने कहा कि हर संभव संसाधन बचाव अभियान में लगाए गए हैं और प्राथमिकता अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की है।

    विदेश मंत्री इवान गिल ने जानकारी दी कि वेनेजुएला सरकार अंतरराष्ट्रीय सहायता के समन्वय के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं कर रही है। उन्होंने बताया कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों से कम से कम एक दर्जन देशों ने राहत सामग्री विशेषज्ञ टीमों और तकनीकी सहयोग की पेशकश की है। सरकार इन प्रस्तावों पर तेजी से काम कर रही है ताकि प्रभावित इलाकों तक जल्द सहायता पहुंचाई जा सके।

    बुधवार को आए दोनों भूकंपों की तीव्रता क्रमशः 7.2 और 7.5 मापी गई थी। दोनों झटके लगभग 10 किलोमीटर की कम गहराई पर आए जिससे उनका असर अत्यधिक विनाशकारी रहा। उत्तर मध्य राज्य ला गुएरा और राजधानी काराकस महानगरीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान दर्ज किया गया। दोनों भूकंपों के बीच एक मिनट से भी कम का अंतर था और उसके बाद आए लगातार आफ्टरशॉक्स ने पहले से क्षतिग्रस्त इमारतों के गिरने का खतरा और बढ़ा दिया है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वेनेजुएला को व्यापक समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है और सभी संबंधित एजेंसियों को तत्काल राहत कार्यों के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने भी वेनेजुएला के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए बचाव एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम भेजने की तैयारी का ऐलान किया है। वैश्विक सहयोग के बीच अब वेनेजुएला के सामने सबसे बड़ी चुनौती राहत कार्यों को तेज करते हुए प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और सामान्य जीवन बहाल करना है।

  • ट्रैफिक और पुलिस पर वीडियो बनाना पड़ा महंगा, मोरक्को में विदेशी कंटेंट क्रिएटर को अदालत ने सुनाई एक साल की सजा

    ट्रैफिक और पुलिस पर वीडियो बनाना पड़ा महंगा, मोरक्को में विदेशी कंटेंट क्रिएटर को अदालत ने सुनाई एक साल की सजा

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो को लेकर मोरक्को में एक विदेशी कंटेंट क्रिएटर को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। फ्रेंच-अल्जीरियाई इन्फ्लुएंसर यास नौबेले को स्थानीय अदालत ने एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। मामला उस वीडियो से जुड़ा है जिसमें उन्होंने मोरक्को की ट्रैफिक व्यवस्था, स्थानीय नागरिकों की ड्राइविंग शैली और पुलिस व्यवस्था पर सार्वजनिक टिप्पणियां की थीं। अदालत ने इन टिप्पणियों को सरकारी संस्थाओं की कथित मानहानि और सार्वजनिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला माना।

    जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय यास नौबेले निजी यात्रा पर मोरक्को के ऐतिहासिक शहर माराकेश पहुंची थीं। इसी दौरान उन्होंने टैक्सी में यात्रा करते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर दिया। वीडियो में उन्होंने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था, सड़क सुरक्षा, वाहन चालकों के व्यवहार और यातायात नियमों के पालन को लेकर कई आलोचनात्मक टिप्पणियां की थीं, जो बाद में व्यापक चर्चा का विषय बन गईं।

    वीडियो में उन्होंने स्थानीय ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि बिना उचित कारण लोगों को रोका जाता है। इसके अलावा उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप भी लगाए और मोरक्को की व्यवस्थाओं की तुलना दूसरे देशों से करते हुए उन्हें कमजोर बताया। सोशल मीडिया पर वीडियो के तेजी से वायरल होने के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया, जिसके बाद संबंधित एजेंसियों ने इसकी जांच शुरू कर दी।

    प्रशासन के अनुसार, जांच में वीडियो की सामग्री का परीक्षण किया गया और इसे सरकारी संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला माना गया। इसके बाद इन्फ्लुएंसर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। बताया गया कि यात्रा पूरी होने के बाद जब वह फ्रांस लौटने के लिए एयरपोर्ट पहुंचीं, तब सीमा अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने संबंधित वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया था, लेकिन तब तक जांच प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी थी।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने वीडियो, उपलब्ध साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा की। न्यायालय ने उन्हें मोरक्को के नागरिकों और पुलिस बल के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी करने का दोषी मानते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इसके साथ आर्थिक दंड भी लगाया। हालांकि फैसले के बाद उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर उच्च अदालत में अपील करने का कानूनी अधिकार भी प्रदान किया गया है।

    यह मामला एक बार फिर इस तथ्य को सामने लाता है कि अलग-अलग देशों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मानहानि और सरकारी संस्थाओं पर सार्वजनिक टिप्पणी से जुड़े कानून अलग-अलग हो सकते हैं। किसी भी विदेशी नागरिक या सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर के लिए यह आवश्यक है कि वह जिस देश की यात्रा कर रहा हो, वहां के स्थानीय कानूनों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी रखे तथा उनका पालन करे। इंटरनेट पर साझा की गई सामग्री कई बार सीमाओं से परे भी कानूनी परिणाम उत्पन्न कर सकती है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के बीच यह घटना सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है। अधिक लोकप्रियता या व्यापक पहुंच हासिल करने की प्रतिस्पर्धा में प्रकाशित सामग्री यदि स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करती है या किसी देश की संस्थाओं को लेकर कानूनी विवाद खड़ा करती है, तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इसलिए ऑनलाइन सामग्री साझा करते समय तथ्यात्मकता, जिम्मेदारी और स्थानीय नियमों का पालन करना पहले से कहीं अधिक आवश्यक माना जा रहा है।

  • भारत पर अमेजन का बड़ा दांव, 2030 तक 48 अरब डॉलर निवेश; 38 लाख रोजगार और AI विस्तार का रोडमैप तैयार

    भारत पर अमेजन का बड़ा दांव, 2030 तक 48 अरब डॉलर निवेश; 38 लाख रोजगार और AI विस्तार का रोडमैप तैयार


    नई दिल्ली । भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता पर भरोसा जताते हुए अमेजन ने देश में बड़े निवेश का ऐलान किया है। अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद घोषणा की कि कंपनी वर्ष 2030 तक भारत में 48 अरब डॉलर का निवेश करेगी। इस निवेश का बड़ा हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर केंद्रित होगा। यह फैसला भारत को वैश्विक डिजिटल और तकनीकी केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक के बाद एंडी जेसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भारत में अमेजन की यात्रा अभी शुरुआत भर है। उन्होंने कहा कि कंपनी पिछले एक दशक से देश के ग्राहकों, विक्रेताओं, स्टार्टअप्स, डेवलपर्स और उद्योगों के साथ मिलकर काम कर रही है और आने वाले वर्षों में इस साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा।

    जेसी ने बताया कि अगले पांच वर्षों में किए जाने वाले कुल 48 अरब डॉलर के निवेश में 21 अरब डॉलर से अधिक राशि केवल एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर खर्च की जाएगी। इसके साथ ही 2026 से 2030 के बीच भारत में अमेजन का कुल नियोजित एआई और क्लाउड निवेश 21 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा, जो इस क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े विदेशी निवेशों में से एक माना जा रहा है।

    अमेजन वेब सर्विसेज के तहत मुंबई और हैदराबाद स्थित डेटा सेंटर नेटवर्क का भी विस्तार किया जाएगा। इससे भारतीय स्टार्टअप्स, उद्योगों और सरकारी संस्थानों को आधुनिक एआई तकनीक, एडवांस्ड कंप्यूटिंग क्षमता, सुरक्षित क्लाउड सेवाएं और अत्याधुनिक डेवलपर टूल्स तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी। कंपनी का मानना है कि इससे भारत की डिजिटल प्रतिस्पर्धात्मकता और नवाचार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    अमेजन ने रोजगार सृजन को लेकर भी बड़ा लक्ष्य तय किया है। कंपनी के अनुसार वर्ष 2030 तक लगभग 38 लाख रोजगार अवसरों का समर्थन किया जाएगा। इसके अलावा 80 अरब डॉलर के ई-कॉमर्स निर्यात को सक्षम बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अमेजन का उद्देश्य देश के 1.5 करोड़ छोटे व्यवसायों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना और 40 लाख सरकारी स्कूलों के छात्रों तक एआई आधारित शिक्षा और तकनीकी अवसर पहुंचाना भी है।

    कंपनी ने अपने लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने की भी योजना बनाई है। इस वर्ष देशभर में 20 से अधिक नए फुलफिलमेंट सेंटर और 100 से ज्यादा नए लास्ट माइल डिलीवरी स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इससे खासकर टियर-3 और टियर-4 शहरों में ग्राहकों को तेज और भरोसेमंद डिलीवरी सुविधा मिलेगी। साथ ही डिलीवरी सहयोगियों के कल्याण के लिए सम्मान नामक विशेष कार्यक्रम भी शुरू किया जाएगा।

    अमेजन के अनुसार वर्ष 2010 से 2030 तक भारत में कंपनी का कुल निवेश 88 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। कंपनी का कहना है कि उसने अब तक 1.2 करोड़ छोटे कारोबारों को डिजिटल बनाने में मदद की है, 20 अरब डॉलर से अधिक के ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा दिया है और 28 लाख रोजगारों का समर्थन किया है। इसके अलावा 1 करोड़ से अधिक भारतीयों को क्लाउड स्किल्स की ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है।

    एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत में ई-कॉमर्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेजन भारत के विकसित और आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य में दीर्घकालिक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • एयर सुविधा 2.0, इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य निगरानी होगी और मजबूत

    एयर सुविधा 2.0, इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य निगरानी होगी और मजबूत


    नई दिल्ली। इबोला वायरस के बढ़ते वैश्विक खतरे के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नागर विमानन मंत्रालय ने दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के सहयोग से अत्याधुनिक और पूरी तरह कॉन्टैक्टलेस Air Suvidha 2.0 पोर्टल लॉन्च किया है। इस नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना और संक्रामक बीमारियों के संभावित प्रसार को समय रहते रोकना है।

    सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला तथा बुंडिबुग्यो वायरस बीमारी के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया है। इसके बाद कई देशों ने अपनी सीमा और स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्थाओं को मजबूत करना शुरू कर दिया है। भारत ने भी एहतियाती कदम उठाते हुए एयर सुविधा 2.0 को लागू किया है ताकि किसी भी संभावित संक्रमण की समय रहते पहचान की जा सके।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज के सहयोग से विकसित इस पोर्टल के तहत भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन हेल्थ सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा। इस फॉर्म में यात्रियों को पिछले 21 दिनों की यात्रा का पूरा विवरण देना होगा। इसके अलावा उन्हें यह भी बताना होगा कि वे किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं या नहीं तथा उनमें किसी प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी लक्षण मौजूद हैं या नहीं।

    नई व्यवस्था के अनुसार यह प्रक्रिया इमिग्रेशन क्लियरेंस से पहले पूरी करनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे एयरपोर्ट पर यात्रियों की स्क्रीनिंग अधिक सटीक और तेज होगी। साथ ही स्वास्थ्य एजेंसियों को संभावित जोखिम वाले यात्रियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

    Air Suvidha 2.0 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी रियल टाइम डेटा शेयरिंग क्षमता है। यह सिस्टम यात्रियों द्वारा दी गई जानकारी को तुरंत एयरपोर्ट हेल्थ ऑफिसर, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन, इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम और संबंधित राज्य निगरानी अधिकारियों के साथ साझा करेगा। इससे किसी भी संदिग्ध मामले की पहचान होने पर तुरंत निगरानी, चिकित्सा जांच और आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय शुरू किए जा सकेंगे।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल और कॉन्टैक्टलेस होगी। यात्रियों को एयरपोर्ट पर पहुंचकर कागजी फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी। वे अपनी उड़ान से 24 घंटे पहले तक ऑनलाइन सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भर सकते हैं। विशेष रूप से वेब चेक इन के दौरान यह प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है ताकि भारत पहुंचने पर इमिग्रेशन और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया तेज और सुगम हो सके।

    फॉर्म जमा करने के बाद यात्रियों को केवल डाउनलोड किया गया सेल्फ डिक्लेरेशन दस्तावेज स्वास्थ्य डेस्क या इमिग्रेशन अधिकारियों को दिखाना होगा। इससे एयरपोर्ट पर समय की बचत होगी और भीड़भाड़ भी कम होगी।

    अधिकारियों ने सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सही जानकारी के साथ समय पर फॉर्म भरें। उनका कहना है कि Air Suvidha 2.0 न केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा बल्कि भविष्य में किसी भी संभावित स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • वेनेजुएला में तबाही के बीच भारत का मानवीय संदेश, पीएम मोदी के समर्थन पर राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने कहा धन्यवाद

    वेनेजुएला में तबाही के बीच भारत का मानवीय संदेश, पीएम मोदी के समर्थन पर राष्ट्रपति रोड्रिगेज ने कहा धन्यवाद


    नई दिल्ली । वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद उत्पन्न मानवीय संकट के बीच भारत ने एक बार फिर वैश्विक मानवीय सहयोग की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वेनेजुएला की जनता के प्रति व्यक्त की गई संवेदनाओं और राहत कार्यों में हरसंभव सहयोग के आश्वासन का वहां की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने स्वागत किया है। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इस कठिन समय में भारत का समर्थन वेनेजुएला के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश का जवाब देते हुए डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा कि वे भारत की ओर से व्यक्त संवेदनाओं और सहायता की इच्छा का दिल से स्वागत करती हैं। उन्होंने कहा कि भूकंप से प्रभावित लोगों के लिए भारत का सहयोग और समर्थन दोनों देशों के बीच मजबूत मित्रता और मानवीय संबंधों का प्रतीक है। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति ने इस कठिन घड़ी में भारत के साथ खड़े होने के लिए विशेष धन्यवाद भी दिया।

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप पर गहरा दुख व्यक्त किया था। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक आपदा से हुई जनहानि और व्यापक तबाही की खबर बेहद पीड़ादायक है। प्रधानमंत्री ने भारत के लोगों की ओर से उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के लोगों के साथ खड़ा है और हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है।

    वेनेजुएला सरकार लगातार राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रही है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज के अनुसार अब तक कम से कम 32 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में इमारतों के ढहने और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर बचाव कार्यों को तेज करने में जुटी हैं।

    इस बीच यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने चेतावनी दी है कि आपदा का वास्तविक असर आने वाले दिनों में और स्पष्ट हो सकता है। एजेंसी ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में हालात का आकलन कर रही हैं। सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार स्रोतों से सामने आई तस्वीरों में काराकस सहित कई शहरों में इमारतों और घरों को भारी नुकसान पहुंचा दिखाई दे रहा है।

    जानकारी के अनुसार बुधवार शाम सबसे पहले 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। इसके महज एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली झटका महसूस किया गया। दोनों भूकंप समुद्र तटीय क्षेत्र मोरोन के पास और राजधानी काराकस से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम में आए। भूकंप की गहराई केवल 10 किलोमीटर होने के कारण इसका प्रभाव अधिक विनाशकारी साबित हुआ।

    वेनेजुएला के गृह, न्याय और शांति मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने बताया कि देश के कई हिस्सों में इमारतों और सार्वजनिक ढांचों को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और आफ्टरशॉक्स की आशंका को देखते हुए सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस आपदा पर नजर बनाए हुए है और कई देशों ने वेनेजुएला को सहायता देने की पेशकश की है।

  • वेनेजुएला में मौत और तबाही का मंजर, पीएम मोदी ने जताई संवेदना, ट्रंप ने जारी किया अलर्ट

    वेनेजुएला में मौत और तबाही का मंजर, पीएम मोदी ने जताई संवेदना, ट्रंप ने जारी किया अलर्ट

    काराकस। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए लगातार दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। देश के कई शहरों में इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और जानमाल के बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है। भूकंप के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस आपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में कहा कि वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप से हुई तबाही की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने भारत की जनता की ओर से वेनेजुएला की सरकार और वहां के नागरिकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है उनके दुख में पूरा भारत सहभागी है। प्रधानमंत्री ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

    वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भूकंप से हुई तबाही पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में आए दोनों भूकंप अत्यंत शक्तिशाली थे और शुरुआती रिपोर्टें अच्छे संकेत नहीं दे रही हैं। ट्रंप के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने और भारी जनहानि की आशंका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहायता के लिए पूरी तरह तैयार है और सभी संबंधित एजेंसियों को राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सतर्क रहने के निर्देश दे दिए गए हैं।

    संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार पहला भूकंप बुधवार देर शाम 7.1 तीव्रता का दर्ज किया गया। इसके ठीक एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली झटका महसूस किया गया। दोनों भूकंपों का केंद्र राजधानी काराकस से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम स्थित तटीय क्षेत्र मोरोन के आसपास था। भूकंप की गहराई केवल 10 किलोमीटर होने के कारण इसका प्रभाव और अधिक विनाशकारी माना जा रहा है।

    भूकंप के झटके इतने तेज थे कि राजधानी काराकस सहित कई शहरों में लोग दहशत में घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई इमारतों में दरारें आ गईं जबकि कुछ भवन पूरी तरह ढह गए। स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में सड़कों पर मलबा और क्षतिग्रस्त मकान दिखाई दे रहे हैं।

    वेनेजुएला के गृह, न्याय और शांति मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने पुष्टि की कि देश के विभिन्न हिस्सों में नुकसान की खबरें मिली हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे फिलहाल इमारतों के अंदर जाने से बचें क्योंकि आफ्टरशॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले झटकों का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं तथा प्रभावित इलाकों में आपातकालीन टीमें तैनात कर दी गई हैं।

    भूकंप का असर पड़ोसी देश कोलंबिया तक भी महसूस किया गया। वहां के कई शहरों में लोगों ने तेज झटकों की सूचना दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि नुकसान का वास्तविक आकलन आने वाले दिनों में ही हो पाएगा। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और राहत कार्यों में सहयोग के लिए तैयार हैं।

    वेनेजुएला इस समय अपने हालिया इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। पूरी दुनिया की नजर अब राहत और बचाव कार्यों पर टिकी हुई है, जबकि प्रभावित परिवारों के लिए वैश्विक स्तर पर संवेदनाएं और सहायता के संदेश लगातार सामने आ रहे हैं। दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए लगातार दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। देश के कई शहरों में इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और जानमाल के बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है। भूकंप के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस आपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में कहा कि वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप से हुई तबाही की खबर बेहद दुखद है। उन्होंने भारत की जनता की ओर से वेनेजुएला की सरकार और वहां के नागरिकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है उनके दुख में पूरा भारत सहभागी है। प्रधानमंत्री ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

    वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भूकंप से हुई तबाही पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में आए दोनों भूकंप अत्यंत शक्तिशाली थे और शुरुआती रिपोर्टें अच्छे संकेत नहीं दे रही हैं। ट्रंप के अनुसार बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने और भारी जनहानि की आशंका है। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहायता के लिए पूरी तरह तैयार है और सभी संबंधित एजेंसियों को राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सतर्क रहने के निर्देश दे दिए गए हैं।

    संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार पहला भूकंप बुधवार देर शाम 7.1 तीव्रता का दर्ज किया गया। इसके ठीक एक मिनट बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और अधिक शक्तिशाली झटका महसूस किया गया। दोनों भूकंपों का केंद्र राजधानी काराकस से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम स्थित तटीय क्षेत्र मोरोन के आसपास था। भूकंप की गहराई केवल 10 किलोमीटर होने के कारण इसका प्रभाव और अधिक विनाशकारी माना जा रहा है।

    भूकंप के झटके इतने तेज थे कि राजधानी काराकस सहित कई शहरों में लोग दहशत में घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई इमारतों में दरारें आ गईं जबकि कुछ भवन पूरी तरह ढह गए। स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में सड़कों पर मलबा और क्षतिग्रस्त मकान दिखाई दे रहे हैं।

    वेनेजुएला के गृह, न्याय और शांति मंत्री डियोसडाडो कैबेलो ने पुष्टि की कि देश के विभिन्न हिस्सों में नुकसान की खबरें मिली हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे फिलहाल इमारतों के अंदर जाने से बचें क्योंकि आफ्टरशॉक यानी भूकंप के बाद आने वाले झटकों का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं तथा प्रभावित इलाकों में आपातकालीन टीमें तैनात कर दी गई हैं।

    भूकंप का असर पड़ोसी देश कोलंबिया तक भी महसूस किया गया। वहां के कई शहरों में लोगों ने तेज झटकों की सूचना दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि नुकसान का वास्तविक आकलन आने वाले दिनों में ही हो पाएगा। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और राहत कार्यों में सहयोग के लिए तैयार हैं।

    वेनेजुएला इस समय अपने हालिया इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। पूरी दुनिया की नजर अब राहत और बचाव कार्यों पर टिकी हुई है, जबकि प्रभावित परिवारों के लिए वैश्विक स्तर पर संवेदनाएं और सहायता के संदेश लगातार सामने आ रहे हैं।

  • भविष्य की तकनीकों पर भारत-अमेरिका का बड़ा दांव, AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ेगी साझेदारी

    भविष्य की तकनीकों पर भारत-अमेरिका का बड़ा दांव, AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ेगी साझेदारी

    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने भविष्य की तकनीकों और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। वाशिंगटन में आयोजित उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे अहम क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने पर व्यापक चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया तकनीकी प्रतिस्पर्धा के नए दौर में प्रवेश कर रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरती तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

    भारतीय दूतावास द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने अमेरिकी विदेश विभाग के अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब एस. हेलबर्ग से मुलाकात कर द्विपक्षीय तकनीकी सहयोग को मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना था जहां दोनों देश मिलकर दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी विकसित कर सकते हैं।

    वार्ता के दौरान सेमीकंडक्टर निर्माण को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और विविधतापूर्ण बनाने के लिए सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता बढ़ाना आवश्यक है। हाल के वर्षों में चिप्स की वैश्विक कमी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीकी उद्योगों की स्थिरता के लिए मजबूत और विश्वसनीय उत्पादन नेटवर्क बेहद जरूरी हैं।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी दोनों देशों के बीच व्यापक चर्चा हुई। भारत और अमेरिका ने एआई तकनीक के विकास, उसके सुरक्षित उपयोग और विभिन्न क्षेत्रों में उसके प्रभावी अनुप्रयोग को बढ़ावा देने पर विचार साझा किए। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण, रक्षा और वित्तीय सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में बड़े बदलाव ला सकता है।

    बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर भी महत्वपूर्ण बातचीत हुई। ये खनिज उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी उत्पादन और रक्षा उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दोनों देशों ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की।

    भारत और अमेरिका के बीच यह संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। तकनीकी सहयोग को लेकर दोनों देशों की बढ़ती नजदीकियां वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    इस बीच केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है और इसमें कुशल पेशेवरों की भारी मांग पैदा हो रही है। उनके अनुसार वर्तमान में लगभग 800 अरब डॉलर मूल्य की यह इंडस्ट्री जल्द ही 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती है।

    वैष्णव ने यह भी बताया कि वर्ष 2032 तक दुनिया भर में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगभग 10 लाख नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। वहीं उद्योग को लगभग 10 लाख कुशल पेशेवरों की कमी का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में भारत के पास वैश्विक तकनीकी प्रतिभा केंद्र के रूप में उभरने और दुनिया को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने का सुनहरा अवसर है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता यह तकनीकी सहयोग न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में भी नई दिशा तय कर सकता है।

  • ट्रंप का दावा- अमेरिका के दबाव में ईरान, बातचीत सफल नहीं हुई तो फिर होगा एक्शन

    ट्रंप का दावा- अमेरिका के दबाव में ईरान, बातचीत सफल नहीं हुई तो फिर होगा एक्शन

    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान बातचीत के दौरान लगातार बड़ी रियायतें दे रहा है और अमेरिका की लगभग हर मांग को स्वीकार कर रहा है। ट्रंप ने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि परिस्थितियां बदलीं तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प अब भी पूरी तरह खुला है।

    व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ हुई बैठक के दौरान ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान के साथ वार्ता बेहद सकारात्मक माहौल में चल रही है। उन्होंने दावा किया कि तेहरान अब पहले की तुलना में कहीं अधिक लचीला रुख अपना रहा है और अमेरिका की शर्तों को स्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ट्रंप के अनुसार वर्तमान हालात अमेरिका के पक्ष में हैं और बातचीत के नतीजे भी उत्साहजनक दिखाई दे रहे हैं।

    रिपब्लिकन सांसदों के साथ बैठक से पहले ट्रंप ने कहा कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है और ईरान लगातार समझौते की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में स्थिति और स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल वार्ता का माहौल बेहद सकारात्मक है। बैठक के बाद भी उन्होंने दोहराया कि ईरान अमेरिकी अपेक्षाओं के अनुरूप व्यवहार कर रहा है और उसे यह समझ आ चुका है कि अंतरराष्ट्रीय दबावों को नजरअंदाज करना आसान नहीं है।

    हालांकि ट्रंप ने बातचीत के साथ-साथ सैन्य विकल्प को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने संकेत दिया कि यदि अमेरिका की सुरक्षा या उसके हितों को कोई खतरा पैदा हुआ तो वाशिंगटन निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उनका कहना था कि अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर संभव विकल्प का उपयोग करने में सक्षम है।

    इस दौरान ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा जिसके तहत ईरान अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी पर किसी प्रकार का शुल्क या नियंत्रण स्थापित कर सके। ट्रंप के अनुसार दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट पर किसी एक देश का दबदबा वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

    नाटो महासचिव मार्क रूटे ने भी ट्रंप की ईरान नीति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। रूटे के अनुसार यदि ईरान परमाणु क्षमता हासिल कर लेता है तो इसका खतरा केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों की सुरक्षा भी प्रभावित होगी।

    रूटे ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने अमेरिका की रणनीति को वैश्विक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्तमान प्रयास केवल क्षेत्रीय स्थिरता ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने के लिए भी जरूरी हैं।

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह कूटनीतिक दौर आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि बातचीत का यह सिलसिला किसी स्थायी समझौते तक पहुंचता है या फिर तनाव एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंचता है।